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परिवार का प्यार ( रिश्तो पर कालिख) complete

जैसे ही उनको पता चला के मेरा रोना बंद हो गया है और में काफ़ी ज़ोर से उनके बोबे दबा रहा हूँ तो वो एक दम से मुझ से दूर हट जाती है और हाफने लगती है... में जैसे ही उनको बाहो में भरने के लिए आगे बढ़ता हूँ वो मेरे सीने पर अपनी हथेली रख कर मुझे वही रोक देती है और कहती है....

भाभी--जय बस अब रुक जाओ, मैने ये सब तुम्हें उस दौरे से बाहर निकालने के लिए किया था ....और कुछ नही.

हमारे बीच जो कुछ भी हुआ. वो बस तुम्हे उस दुख के पल से बाहर निकालने के लिए मैने किया था..

हमारे बीच अब भी वही पुराना मारियादा का रिश्ता है और कुछ. नही...में तुमहरे भैया से अपनी जान से भी ज़्यादा प्यार करती हूँ ....इसलिए अपने मन में कोई ग़लत फ़हमी मत रखना. अब चलो यहाँ से और भूल जाना के कभी ऐसा कुछ हमारे बीच में हुआ था......

में और भाभी कॅंप के पास पहुँच गये...मम्मी वाले कॅंप में अभी भी रूही और नीरा बैठी थी.

मुझे देखते ही रूही खड़ी हो गयी और कहने लगी.

रूही--कहाँ चला गया था तू बिना बताए . हम लोगो को तेरी चिंता हो गयी थी...वो तो अच्छा हुआ जो भाभी ने तुझे नदी की तरफ़ जाते हुए देख लिया.

में--कुछ नही दीदी आज थोड़ा सा मन खराब हो गया था...आप अब कहाँ जा रही हो.

रूही--में और भाभी दूसरे वाले कॅंप में ही और तुम तीनो इस वाले कॅंप में रहोगे.

इतना बोलकर वो कॅंप से बाहर चली गयी.

मम्मी--में थोड़ी देर बाहर ही हूँ जब तक तुम दोनो सोने की तैयारी करो...

इतना कह कर मम्मी भी बाहर चली गयी.

अंदर में और नीरा थे नीरा बड़ी मासूमियत से मुझे देखे जा रही थी.

नीरा--भैया मुझे से आप नाराज़ हो.

में--क्यो में क्या किसी से नाराज़ नही हो सकता.

नीरा--भैया मुझे माफ़ कर दो में अब कभी भी मम्मी का दिल नही दुखाउंगी.

में--देख नीरा मेरा अभी मूड बिल्कुल खराब है और में नही चाहता में तुझसे कुछ भी ग़लत कह दूं.

नीरा--भैया आप कुछ भी कर सकते हो आप चाहो तो मुझे थप्पड़ भी मार सकते हो.

लेकिन प्ल्ज़ मुझ से नाराज़ मत होना.

मैने नीरा की इस बात का कोई जवाब नही दिया और अपनी टी शर्ट खोल कर बेग में से मेरा नाइट सूट निकालने लग जाता हूँ.

तभी अचानक तडाक एक ज़ोर दार आवाज़ मुझे सुनाई देती है और एक और तडाक की आवाज़ आती है.

वो आवाज़ नीरा की थी वो खुद के गालो पर बेरहमी से चाँटा मार रही थी .

मैने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया और कहने लगा.

में---ये क्या कर रही है तू पागल तो नही होगयि है.

नीरा--हाँ में पागल हो गयी हूँ...आप सब के प्यार में पागल हो गयी हूँ...आप लोग मेरी ग़लती पर मुझे सज़ा भी नही देते....मुझे जो चाहे वो सज़ा दे दो बस मुझ से नाराज़ मत हुआ करो. मुझे माफ़ कर दो भैया मुझे माफ़ कर दो...और ये कह कर वो ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है...

में तुरंत उसे अपने सीने से लगा लेता हूँ तब जाकर वो रोना थोड़ा कम करती है.

 
में तुरंत उसे अपने सीने से लगा लेता हूँ तब जाकर वो रोना थोड़ा कम करती है.

नीरा--भैया अब में कभी आपको तंग नही करूँगी ....में आपसे बहुत प्यार करती हूँ आप मुझ से नाराज़ मत होना कभी भी.

में--नीरा में कभी तुझ से नाराज़ नही हो सकता लेकिन जिस तरह से आज तूने खुद को चोट पहुँचाई है.वो चोट सीधे मेरे दिल पर लगी है.

नीरा--सॉरी भैया आगे से में ऐसा कभी कुछ नही करूँगी. और मुझे कस कर गले से लगा लेती है .तभी मम्मी भी अंदर आजाती है.

मम्मी--में इसीलिए बाहर गयी थी ताकि तुम दोनो अपना मसला आपस में सुलझा लो फिर नीरा उठ कर मम्मी के गले से लग जाती है और हम तीनो वहाँ एक साथ सो जाते है.

उधर भाभी और रूही कॅंप में लेटे हुए थे तभी भाभी रूही से एक सवाल पूछ लेती है.

भाभी--रूही तुम लोगो ने कौनसा राज दबा रखा है अपने अंदर.

रूही ये बात सुनकर तुरंत चोंक जाती है और उठ के बैठ जाती है.

भाभी--क्या तुम लोग मुझे अपना नही समझते जो मुझे बता भी नही सकते.

रूही बस एक टक भाभी की तरफ़ देखे जा रही थी ...उसे उसके कानों पर भरोसा नही हो रहा था.

भाभी--रूही मैने मम्मी और तेरी बातें सुन ली थी....ऐसा कौनसा राज है जिस से इतना बड़ा तूफान आज़ाएगा.

रूही अब संभल चुकी थी.

रूही--भाभी आप अपने परिवार से कितना प्यार करती हो.

भाभी--में अपने परिवार के लिए कुछ भी कर सकती हूँ.

रूही --तो आपको उसी परिवार की कसम आप आज के बाद दुबारा ये सवाल नही पुछोगि...कुछ राज हमेशा राज ही रहने चाहिए जिस दिन वो बाहर आजाते है सब कुछ खाक हो जाता है. क्या आप अपने परिवार को बिखरता देख सकोगी..क्योकि अगर वो राज खुल गया तो ये परिवार पूरी तरह से बिखर जाएगा.

भाभी भी अब उठ कर बैठ चुकी थी ....उसके बाद उन्होने कोई सवाल नही किया और रूही को. रोता देख उसे गले से लगा लिया.

भाभी--मुझे पता नही था रूही के इस मुस्कुराते नन्हे से दिल पर एक राज का इतना भारी बोझ पड़ा है...तेरी कसम....में ये सवाल किसी से नही पुछुन्गि.तेरी कसम....रूही तेरी कसम...,,.

रूही और भाभी अपने आँसू पोछ कर सोने लगते है...इधर मम्मी की नींद उड़ी हुई थी.

वो लगातार पुरानी यादो में खोती चली जा रही थी ....

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20 साल पहले.... आगे की कहानी राज की ज़ुबानी

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उस समय संध्या(मम्मी) के दो बच्चे थे.

एक राज और एक रूही राज अभी राज ** साल का हो गया था और रूही ** साल की थी ...

संध्या के पति किशोर गुप्ता अपने बिज़्नेस को फैलने में दिन रात मेहनत कर रहे थे जबकि संध्या अपने द्वारा बनाए गये एक एनजीओ जो कि बेसहारा बच्चो को घर और अच्छी पढ़ाई और खाने का इंतज़ाम करवाता था.

उस दिन संध्या बहुत ज़्यादा थक गयी थी घर आते ही वो नहाना चाहती थी...

घर आकर संध्या ने अपने कपड़े उतारे और बाथरूम में घुस गयी , नहाने के बाद वो किचन में घुस गयी और खाना बनाने लग गयी ...तभी राज और रूही दोनो स्कूल से आगये...और आते ही मम्मी मम्मी करते हुए संध्या से लिपट गये.

राज--मम्मी आज क्या बना रही हो बहुत अच्छी खुश्बू आरहि है..

मम्मी--में तुम लोगो के लिए पालक के पकौड़े और आलू टमाटर की सब्जी बना रही हूँ...तुम लोगो को ये पसंद है ना..

रूही--हाँ मम्मी काफ़ी दिन हो गये पकोडे खाए हुए.

मम्मी--चलो अब जा कर चेंज कर लो और मुँह हाथ धो कर डाइनिंग टॅबेल पर आ जाओ..में तब तक खाना लगाती हूँ.

उसके बाद हम सभी डाइनिंग टॅबेल पर रेडी हो कर आ जाते है और मम्मी हम लोगो को खाना खिलाने लगती है...

राज--मम्मी आप खाना नही खा रही हो..

मम्मी--बेटा तुझे पता है ना में वो दवाई पीने के बाद ही खाना खाती हूँ.

फिर दोनो अच्छे से खाना खा कर मम्मी के बेडरूम में जाकर टीवी देखने लग जाते है...उधर मम्मी ने बाथरूम में जाकर एक सिल्क की नाइटी पहन ली थी जो कि एक शर्ट और एक पाजामे जैसी थी...

फिर मम्मी ने अपनी अलमारी में से एक बोतल निकाली जिसपर शिवास लिखा हुआ था.

वो आकर हमारे पास बैठ जाती है और एक गिलास में उस दवाई को डालकर पानी मिलाने लगती है...

फिर उसकी एक सीप लेने के बाद वो एक पकोड़ा अपने मुँह में डाल लेती है...और इस तरह करते करते वो 5 ग्लास दवाई के पी जाती है ..में कब से ये देखे जा रहा था... तभी मम्मी ने कहा ऐसे क्या देखे जा रहा है.

में(राज)--मम्मी आप तो हमे अगर दवाई देनी होती है तो एक चम्मच में भरकर एक छ्होटी सी बोतटेल में से देती हो ...ये आप कौनसी दवाई पीटी हो जो इतनी बड़ी बोतटेल लानी पदती है...और वो भी 5 ग्लास आप पी जाती हो.

मम्मी--ये बडो की दवाई है तू नही समझेगा चल अब थोड़ी देर मेरे पेर दबा दे काफ़ी दर्द कर रहे है.

फिर उसके बाद में मम्मी के पैर दबाने लगता हूँ और रूही मुझे देख कर उनके हाथ दबाने लगती है मम्मी अब पेट के बल लेट जाती है और में उनके पैर का पंजा अपनी गोद में रख कर दबाने लगता हूँ मम्मी का पंजा मेरे लिंग पर रगड़ खा रहा था जिस से मेरा लिंग अकड़ गया..

 
मम्मी को भी मेरे लिंग का कड़क होना महसूस हो गया और वो अपने पैर का अंगूठा मेरे लिंग पर रगड़ने लग जाती है.

मम्मी अंगूठा रगड़ रगड़ कर काफ़ी गरम हो जाती है और मुझे कहती है..

मम्मी-- थोड़ा उपर दबा यहाँ ज़्यादा दर्द हो रहा है ..

में मम्मी की जाँघो को दबाने लगता हूँ...लेकिन मम्मी मुझे और उपर दबाने के लिए कहती है...में अब उनके कूल्हे दबा रहा था...वो दबाते हुए मुझे काफ़ी मज़ा भी आ रहा था मेरे हाथ बार बार फिसल के उस दरार में जाने लगते है...

और मेरा लिंग अब पहले से भी ज़्यादा कड़क हो जाता है फिर मम्मी मुझे रुकने को कहती है और सीधी लेट जाती है अब मुझे वो अपने कंधे दबाने को कहती है.

में अब उनकी जाँघो पर बैठा था और उनके कंधे दबाए जा रहा था मम्मी के बूब्स की निपल मुझे नाइटी में से मुझे बिल्कुल कड़ी हुई नज़र आ रही थी रूही अभी भी मम्मी के हाथ दबाए जा रही थी.

में कंधे दबाने के लिए जैसे ज़ोर लगाता मम्मी की चूत और मेरा लिंग रगड़ जाता और हाथो पर उनके बूब्स.

फिर मम्मी ने मुझे खड़ा होने को कहा और ये बोला कि मेरे पेट पर क्या चुभ रहा है...

में--मम्मी मेरे पास तो चुभने जेसा कुछ भी नही है ..

मम्मी--तेरा निक्कर उतार ज़रूर कुछ ना कुछ तो है जो मुझे चुभ रहा है...

मेने अपना निक्कर तुरंत उतार दिया मेरा लिंग जो इस समय कड़क हो गया था जो कि लगभग 4 इंच से ज़्यादा का था....

मम्मी मेरे लिंग को हाथ में लेकर...

मम्मी--तेरा ये इतना बड़ा कैसे हो गया.

में --पता नही मम्मी मुझे भी समझ नही आया.

मम्मी--मेरे शरीर से रगड़ खाने की वजह से ये बड़ा हो गया है चल में इसे ठीक कर देती हूँ .

और फिर वो मुझे पूरा नंगा कर देती है और खुद अपनी शर्ट उतारकर रूही को बोबे से दूध पीने को बोलकर मेरा लिंग अपने मुँह में लेकर चूसने लग जाती है.

रूही मम्मी का बोबा चूस्ते चूस्ते बोलती है मम्मी इन में से दूध तो आ ही नही रहा..

मम्मी मेरा लिंग अपने मुँह से निकाल कर .

मम्मी--इनमें ऐसे दूध नही आएगा तू एक काम कर एक बोबा ज़ोर ज़ोर से चूस और दूसरा बोबा पूरी ताकत लगा कर दबा जितनी ज़्यादा ज़ोर से तू चुसेगी और दबाएगी उतनी ही जल्दी इन में से दूध निकलने लगेगा.उसके बाद रूही अपनी पूरी ताकत लगा कर उस काम में जुट जाती है..

और इधर मम्मी मेरे लिंग को फिर से मुँह में लेकर चूसने लग जाती है ...मुझे काफ़ी मज़ा आ रहा था तभी मेरा शरीर अकड़ने लगता है और में अपना पानी मम्मी के मुँह में ही छोड़ देता हूँ और मम्मी के चेहरे की तरफ़ देखने लगता हूँ...मम्मी का चेहरा इस समय पूरा लाल हो तखा था मेरा सारा पानी उनके मुँह मे छूट गया था लेकिन कुछ बूंदे उनके होंठो पर आ गयी थी उन्होने अच्छे से मेरे लिंग को अपनी जीभ से सॉफ किया और होंठो पर लगा मेरा पानी भी जीभ फेर कर सॉफ कर दिया..

में--मम्मी सॉरी पता नही ये सुसु आपके मुँह में कैसे निकल गया मुझे तो बड़ा मज़ा आरहा था.

मम्मी--कोई बात नही बेटा तू एक काम कर अब तू मेरे बोबो में से दूध निकाल ये रूही से ढंग से ताक़त नही लग रही.

फिर रूही को वो अपने बोबे से हटा देती है और अपने सारे कपड़े खोल कर मुझ अपनी टाँगो के बीच में ले लेती है और मेरा लिंग अपनी चूत में डालकर कहती है..अब तू यहाँ अपना लिंग ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर कर और दोनो हाथो से मेरे बोबे दबाता जा और बीच में रुकना मत...

उसके बाद में लगातार ज़ोर ज़ोर से अपना लिंग मम्मी की चूत में अंदर बाहर कर रहा था और अपने हाथो से उनके बोबे दबाए जा रहा था....और मम्मी ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी और ज़ोर लगा बेटा और ज़ोर लगा...

मम्मी तीन बार झड चुकी थी लेकिन मेरा पानी छूट ही नही रहा था लेकिन में लगातार धक्के लगाए जा रहा था तभी मेरे शरीर में सिहरन आने लगी और मेरे लिंग से खूब सारा पानी मम्मी की चूत की गहराइयो में जाता चला गया......

हम ये खेल काफ़ी दिनो तक खेलते रहे...और उसके बाद एक दिन ऐसा हुआ जो किसी तूफान से कम नही था....संध्या के पीरियड्स आने बंद हो गये थे...

एक दिन.....

राज--रूही मम्मी जब तक बाहर से आती है तब तक हम दोनो वो खेल खेलते है बड़ा मज़ा आएगा..

रूही--हाँ भैया कल मम्मी आप पर कैसे उच्छल रही थी..

राज--चल तू अपने कपड़े उतार और वहाँ सोफे पर बैठ जा ..

राज भी अपने सारे कपड़े उतार के अपनी बहन के नंगे जिस्म पर हाथ घुमाए जा रहा था....

तभी अचानक घर का दरवाजा खुल जाता है...मम्मी बस हम दोनो को लगातार घुरे ही जेया रही थी...

राज--मम्मी जल्दी आओ हम दोनो वो खेल शुरू करने ही वाले थे..

लेकिन संध्या को होश नही रहा वो वही फर्श पर बैठ कर रोने लगी...

संध्या को रोता हुआ देख कर राज और रूही अपने कपड़े पहन कर संध्या के पास आ जाते है.

राज --क्या हुआ मम्मी आप रो क्यो रही हो....

संध्या--रोते हुए ...राज मेरी एक बात मानेगा.

राज--हाँ मम्मी बोलो.

संध्या--हमने जो कुछ भी किया वो अब दुबारा इस घर में नही होगा..में तुझे कुछ सालो के लिए हॉस्टिल में डाल रही हूँ...क्योकि तू अब कुछ टाइम हम लोगो से दूर रहेगा.

जो ये खेल हम खेल रहे थे ये सब ग़लत है ये सब एक परिवार में नही होना चाहिए...आज के बाद तुम दोनो इस बारे में किसी से कोई भी बात नही करोगे.

राज--मम्मी हम अब दुबारा ऐसा कुछ नही करेंगे प्लीज़ मुझे हॉस्टिल मत भेजो..

और राज रोने लग जाता है.

संध्या राज को अपनी छाती से लगा लेती है और कहती है तुम्हे हॉस्टिल जाना ही होगा.इसी में तुम सब की भलाई है...उसके बाद वो अपने रूम में चली जाती है.

सिटी हॉस्पिटल.....

संध्या यहाँ अपना चेकप करवाने आई थी.

डॉक्टर.आएशा संध्या का चेकप करती है और संध्या को सोनोग्राफी करवाने को कहती है...सोनोग्राफी में पता चलता है संध्या गर्भ से है...

डॉक्टर--कंग्रॅजुलेशन्स मिसेज़.गुप्ता आप प्रेग्नेंट है.

संध्या--लेकिन में अभी बच्चा नही चाहती.

डॉक्टर--इम सॉरी मिसेज़ गुप्ता अब अबोर्शन नही किया जा सकता आपका गर्भाशय काफ़ी कमजोर है और अबोर्शन की वजह से आप दुबारा कभी माँ नही बन पाओगि.

संध्या--कोई तो रास्ता होगा जिस से ऐसा हो सके.

डॉक्टर--नही मिसेज़ गुप्ता कोई रास्ता नही है ....सिर्फ़ यही एक रास्ता है या तो आप इस बच्चे को जन्म दे या फिर दुबारा कभी माँ बनने के बारे में भूल जाए.

उसके बाद संध्या वहाँ से चली जाती है..घर पर किशोर भी आ चुका था संध्या उसे सारी बात बता देती है..किशोर पहले तो बहुत नाराज़ होता है लेकिन बाद में वो समझ जाता है कि अकेलेपन की वजह से संध्या से ये ग़लती हो गयी है...राज को बोर्डिंग में डाल दिया जाता है और कुछ सालो के लिए. और रूही को स्कूल से निकलवा दिया जाता है.

जय के बाद संध्या को एक बेटी होती है जिसका नाम वो नीरा रखते है और वो लड़की किशोर की संतान थी......

भाइयो में इस फ्लॅशबॅक को ज़्यादा खिचना नही चाहता इस लिए मैने इसको यही ख्तम करने का निश्चय किया है.

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आगे की कहानी मेरे यानी जय की ज़ुबानी

प्रेज़ेंट डे.

यही बाते सोचते सोचते मम्मी को नींद आजाती है.

अगले दिन सुबह हम लोग फ्रेश हो जाते है और नाश्ता करने लगते है....रिजोर्ट की गाड़ी सुबह नाश्ता लेकर आई थी.

भाभी--जय आज कहाँ जाने का मूड है.

में--भाभी आज हम इस तरफ़ जंगल में चलेंगे देखते है वहाँ क्या है....

वहाँ थोड़ी दूर एक कॅंप और लगा हुआ था शायद वो कल शाम को ही आए थे वो बस तीन लोग थे एक लड़की जो तकरीबन 10 साल की थी और एक लड़का जो 6 साल के लगभग था उनके साथ में उनकी मम्मी भी आई थी.

मुझे उन तीनो को देख कर काफ़ी आश्चर्य हुआ क्योकि उनके साथ कोई आदमी नही था...

जब हम उनलोगो के कॅंप के सामने से निकल रहे थे तो वहाँ एक 32 साल की खूबसूरत लड़की खड़ी थी ..उसने हम लोगो को देख कर आवाज़ लगाई...और दौड़ कर हमारे पास आने लगी उसके इस तरह से दौड़ने से उसकी चुचियाँ ज़ोर ज़ोर से उछल रही थी...

वो हमारे पास आकर अपना नाम रिया बताती है.

रिया--आप लोग क्या जंगल में घूमने जा रहे है...??

मम्मी--हाँ आज जंगल में घूमने का प्लान बनाया है...आप यहाँ कब आए.

रिया--हम लोग कल रात को ही यहाँ आए है ...मेरे साथ मेरे दो बच्चे भी है....अगर आप बुरा ना माने तो क्या हम भी आप लोगो के साथ जंगल में घूमने आ सकते है.??

मम्मी--हाँ क्यो नही वैसे भी आपके साथ बच्चे है और बच्चो की चहलपहल से तो माहॉल वैसे भी खुशनुमा हो जाता है..आप चलिए हमारे साथ .

फिर रिया आवाज़ लगाती है और अपने बच्चो को बुला लेती है.

रिया--ये है मेरे दो बदमाश एक का नाम शीना है और ये निक्कू.

फिर वो हमारे साथ जंगल के अंदर चलने लग जाती है ..जंगल काफ़ी खूबसूरत था वहाँ काफ़ी बड़े बड़े पेड़ थे हम लोगो को वहाँ एक दो जगह हिरण भी दिख गये जो हम लोगो को देखते ही भाग गये....काफ़ी आगे जाने के बाद हम लोग एक झरने के पास पहुँच गये वो झरना ज़्यादा बड़ा तो नही था लेकिन उसमें से काफ़ी पानी आ रहा था झरने के आस पास काफ़ी सुंदर फूल भी खिले हुए थे झरना जहाँ गिर रहा था उसके नीचे एक चट्टान थी जो काफ़ी बड़ी और समतल थी झरने का पानी उस चट्टान से गिरकर एक कुंड में जमा हो रहा था और उस खुंद से पानी एक छोटी नदी के रूप में दूसरी तरफ़ बढ़ रहा था ये वो ही नदी थी जिसमें कल हम कल नहा रहे थे..

मम्मी--वाह मज़ा आ गया क्या जगह है...

रूही--हाँ मम्मी कितनी खूबसूरती फैली हुई है यहाँ

रिया के दोनो बच्चे भाग कर झरने के नीचे नाचने लगते है...

रिया--ये लो शुरू हो गयी इनकी बदमाशियाँ लेकिन हम साथ में कपड़े तो लाए ही नही...यहाँ से वापस पहनकर क्या जाएँगे.

में एक काम करती हूँ आप इन दोनो को संभाल लो और में इनके कपड़े लेकर आती हूँ...

इतना कह कर रिया वहाँ से जाने लगती है तभी मम्मी उनको रोकते हुए कहती है इतनी दूर अकेले कैसे जाओगी...आप साथ में जय को ले जाओ.

में वापस जाना तो नही चाहता था लेकिन मम्मी की बात तो माननी ही पड़ेगी....इसलिए में रिया को मन में कोस्ता हुआ वापस कॅंप में जाने लग जाता हूँ...

हम लोगो को कॅंप से झरने तक आने में ही 1 घंटा लग गया था मतल्ब अब दो घंटे लगातार चलने से में काफ़ी दुखी हो रहा था....

रिया--जय सॉरी मेरी वजह से तुम को इतनी दूर वापस आना पड़ रहा है.

में--कोई बात नही...आप लोग अकेले आए हो आपके साथ आपके हज़्बेंड नही आए..

रिया--उनको अपने बिज़्नेस से फ़ुर्सत नही है....पिच्छले 6 महीने से वो इंग्लेंड गये हुए है.

में--ओह्ह ये तो काफ़ी बुरी बात है आप लोग उनके साथ क्यो नही गये.

रिया--एक तो बच्चो की पढ़ाई खराब हो जाती है और दूसरा...वो इंग्लेंड में भी एक जगह से दूसरी जगह जाते रहते है इसलिए उनके पीछे पीछे घूमने से बढ़िया हम अपने घर में ही रहें.

में--आप लोग कहाँ से है.

रिया--हमारा घर देल्ही में है आप लोग कहाँ से हो.

में--उदयपुर राजस्थान.

रिया--थ्ट्स नाइस काफ़ी पीस्फुल जगह है में एक बार वहाँ आई थी और वहाँ के महलो जंगलों और फ़ौर्ट्स को देखने के बाद जब सिटी में आए तो वो तो और भी खूबसूरत थी...कहीं पर भी गंदगी और पोल्यूशन नही था...काफ़ी मज़ा आया था हम सब को वहाँ .

ये बाते करते करते हम लोग कॅंप तक पहुँच गये और कपड़े लेकर वापस चलने लगे...हम झरने तक वापस पहुँचने ही वाले थे के सामने से सब लोग आते हुए दिखाई दे रहे थे..

मम्मी--इतनी देर से नहाते नहाते बोर हो गये थे और फिर बच्चो को भूख भी लगने लगी थी इसलिए हम सब ने वापस जाने का फ़ैसला किया.

रिया चलिए में भी चलती हूँ आप लोगो के साथ...

भाभी--अरे नही....नही...आप यहाँ थोड़ी देर झरने का मज़ा लेकर देखो बड़ा मज़ा आएगा हम लोग भी रुकते आप लोगो के साथ मगर बच्चो के साथ साथ हमारे भी पेट में चूहे कूदने लग गये थे...

उसके बाद रिया भाभी को बच्चो के कपड़े दे देती है फिर मम्मी और बाकी लोग कॅंप की तरफ़ चल देते है और हम लोग झरने की तरफ़ बढ़ जाते है.....

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दुबई

एक ऐसी जगह जहाँ नामुमकिन कुछ भी नही जो जाना जाता है बेशुमार दोलत के लिए...

राज--पापा मीटिंग काफ़ी बढ़िया रही हमारी एक ब्रांच और यहाँ खुल गयी है...और यहाँ बार बार आने से भी पीछा च्छुटा अब भारत से ही हम इस ब्रांच को चला पाएँगे.

पापा--बेटा मैने इसी तरह ही अपनी सारी ब्रांचो को सही हाथो में दे दिया है..अब हर महीने बॅलेन्स शीट उदयपूर ही आ जाएगी और पैसा बॅंक में. अब काफ़ी मेहनत कर ली....अब में घर बैठना चाहता हूँ...हर महीने इतना पैसा आज़ाएगा कि चाहो तो हर हफ्ते एक नयी कार ले सकते है हम..

राज--हाँ पापा आपने सही किया ....में भी अब सुकून से घर पर रह सकता हूँ...

पापा--देख हम यहाँ भटक रहे और वहाँ वो सब ऋषिकेश में मस्ती मार रहे होंगे.

चल होटेल चलते है. और उनको भी फोन करके यहाँ की खुश खबरी दे देते है और फिर भारत जा कर सीधा ऋषिकेश में ही चलते है...

होटेल में पहुँच कर पापा हमारे रिजोर्ट में फोन लगाते है.

उधर से आवाज़ आती है ...हेलो सर में लक्ष्मी निवास रिजोर्ट से सुहानी बात कर रही हूँ.... में आपके लिए क्या कर सकती हूँ.

पापा--हेलो में किशोर गुप्ता बात कर रहा हूँ मेरी फॅमिली आपके रिजोर्ट में रुकी हुई है, क्या में उन से बात कर सकता हूँ.,

सुहानी--सर क्या में आपके फॅमिली मेंबर्ज़ के नाम जान सकती हूँ.....

पापा--संध्या गुप्ता जय नीरा रूही और नेहा गुप्ता.

सुहानी--वेट आ मोमेंट सर....सर आपकी फॅमिली इस समय कॅंप में है और वहाँ हमने कोई फोन नही लगवा रखा क्योकि टूरिस्ट वहाँ पीस के लिए आते है और वहाँ मोबाइल नेटवर्क भी नही आता.

पापा--ठीक है आप उनको मेरा मेसेज दे दीजिए और कहिए कि वो वहाँ से ना जाए हम भी वही आ रहे है....

सुहानी--जी सर में आपका मेसेज जल्दी से जल्दी उन तक पहुँचा दूँगी और तकरीबन घंटे भर बाद उनसे आपकी बात भी करवा दूँगी...लक्ष्मी निवास रिजोर्ट में फोन करने का शुक्रिया.

इसके बाद फोन कट जाता है.

 
पापा-- राज चल बाहर घूमने चलते है कही...

राज--हाँ पापा वैसे भी हमको कहीं भी जाने का टाइम नही मिलता आज टाइम मिला है तो थोड़ी तफ़री मार ही लेते है....

होटेल से बाहर निकलते ही एक कार उनके सामने रुकती है और दो नक़ाबपोश उसमें से गन निकाल कर अँधा धुन्ध फाइरिंग करने लग जाते है...थोड़ी ही देर में वहाँ 8 लाषे पड़ी होती है जिनमें किशोर और राज भी होते है.......

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उधर जय और रिया झरने के पास पहुँच जाते है और झरने को देखने लगते है..तभी रिया कहती है..

रिया --जय में चेज कर के आती हूँ तब तक तुम भी चेंज कर लो.

उसके बाद वो वहाँ से अपना बेग लेकर झाड़ियो के पीछे चली जाती है..

उधर रास्ते में..

नेहा--मम्मी अगर आप इजाज़त दो तो में झरने की तरफ़ वापस जाना चाहती हूँ.

मम्मी--क्यो तेरा मन नही भरा क्या झरने में नहाने से...और तुझे तो भूक भी लग रही थी उसका क्या हुआ....

नेहा--वो क्या है ना मुझे भूक तो लग रही थी लेकिन बहता हुआ झरना मेरी आँखो के सामने घूम रहा है...में एक बार फिर से उसमें नहाना चाहती हूँ ...पता नही दुबारा कब ये मोका मिलेगा और फिर वहाँ रिया और जय भी है तो मुझे कोई डर भी नही है किसी का.

मम्मी--ठीक है अगर तेरा इतना ही मान कर रहा है तो जा ....लेकिन जल्दी आ जाना.

उधर झरने के पास.

रिया चेंज कर के आ गयी थी ....जब मैने उसे देखा तो मेरी सारी बत्तिया गुल हो गयी.

उसने एक रेड कलर की लेस वाली ब्रा और एक पैंटी पहन रखी थी ....उसकी ब्रा उसके बूब्स का बोझ नही संभाल पा रही थी और जब वो चलते हुए मेरे करीब आ रही थी तब उसके बूब्स की थिरकन मेरे होश उड़ा रही थी इतनी सुंदर इतनी सेक्सी लग ही नही रहा था कि ये दो बच्चो की माँ है.

वो मेरे पास आकर बोलती है...

रिया--क्या हुआ ऐसे क्या देख रहे हो कभी बिकिनी में किसी को देखा नही है क्या...चलो अब जल्दी तुम भी चेंज कर के आ जाओ.

मुझे चेज क्या करना था मैने फट से अपनी जीन्स और टी शर्ट खोल दी और उसके सामने अपनी वी शैयप अंडरवेर में आ गया..ये देख कर वो हँसने लगी..

में--क्या हुआ हंस क्यो रही हो क्या कभी अंडरवेर में किसी को देखा नही ...झरने में क्या में जीन्स पहन कर नहाऊ...

रिया--नही जय वो बात नही है दरअसल शायद मुझे देख कर तुम्हारी हालत खराब हो गयी है...जो कि तुम्हारी अंडरवेर तुम्हारी हालत को बयान कर रही है...

में तुरंत अपने लिंग की तरफ़ देखता हूँ वहाँ पूर टॅंट बना हुआ था..

में--झेप्ते हुए....दरअसल यहाँ का मोसम ही ऐसा है चलो अब नहाते है...

उसके बाद हम झरने के नीचे जाने लगे सब से पहले झरने के नीचे जा कर में खड़ा हो गया और पानी की ताक़त को महसूस करने लग गया...उसके बाद रिया भी झरने के नीचे आ गयी रिया बार बार नहाते हुए अपनी ब्रा संभाल रही थी उसके निप्पल एक दम कड़क होकर ब्रा में से दिखाई दे रहे थे फिर वो दूसरी तरफ घूम के अपनी ब्रा सही करने लगी...उसकी पैंटी भी पानी के प्रेशर से नीचे हो गयी थी उसकी गान्ड की लकीर मुझे दिखाई देने लगी...

 
उधर हम लोगो को इस तरह नहाता देख नेहा झाड़ियो के पिछे छुप गयी और हम दोनो को देखने लगी

रिया अपनी ब्रा को ठीक कर के अपनी गर्दन पीछे घुमाती है और मुझे इस तरह उसकी गान्ड को घूरते हुए देख कर वो अपनी गान्ड की तरफ़ देखती है और अपने एक हाथ से फट से अपनी पैंटी उपर कर लेती है...

रिया--क्या देख रहे थे अभी...

में--घबराते हुए....कुछ नही में क्या देखा रहा था ....मैने कुछ नही देखा...

रिया--हँसते हुए चलो अब नहाने पर ध्यान दो इधर उधर द्देखना बंद करो..

तभी अचानक वो हो जाता है जो ना रिया ने सोचा था और ना जय ने और ना ही शायद झाड़ियो के पिछे छुपि नेहा ने....

मेरी आँखे वो मंज़र देख कर फट सी गयी थी...रिया की ब्रा की लेस तेज पानी की वजह से टूट गयी थी और उसके मांसल बूब्स मेरी आँखों के सामने उछल कर आगये ....

रिया को पता ही नही चला कि वो उपर से पूरी नंगी है जब उसने मेरी तरफ़ देखा तो में बस उसकी चुचियों को ही देखे जा रहा था.

रिया--क्या हुआ तुम बार बार ऐसे क्यो देख रहे हो जो चाहते हो खुल कर बोलो...

में--अपनी उंगली का इशारा उसकी चुचियों की तरफ़ करता हूँ तो वो एक दम से नीचे देखती है...और घबराकर अपने दोनो हाथ अपनी चुचियों के सामने ले आती है.. और मेरी तरफ़ देखने लगती है

में--अब मुझे तुम ऐसे क्यों देख रही हो.,,,

रिया--आप मेरे बूब्स को कब से देख रहे थे.

में --जब आपकी ब्रा की डोरी टूटी थी तब से.

रिया--आपको पसंद आए?

में--बेहद...

अब रिया मेरे टेंट को देखने लग गयी थी.

रिया--आपका ये शैतान फिर से मुझे देख कर बेचैन हो गया है.

में--जब सामने इतनी खूबसूरत लड़की नज़ाकत के साथ खड़ी होगी तब तो ये शैतानी करेगा ही.

रिया--क्या में इतनी खूबसूरत हूँ...जो ये शैतान आपके काबू में नही रह पाता.

में--ये बात तो आप इस से खुद ही पूछ लो...

रिया--क्या ये मुझे जवाब देगा.

में--ये सिर्फ़ खूबसूरती को ही जवाब देता है.

रिया--कहीं ये मुझे रुसवा तो नही कर देगा अपना जवाब ना देकर.

में--इसको रुसवा करना नही आता....

रिया--तो फिर क्या आता है इस शैतान को....

में--ये जवाब तो आप इसी से पूछ लो कि क्या करना आता है....

रिया अपने घुटनो के बल वहाँ बैठ जाती है और मेरे लिंग के पास अपना मुँह लेकर जाती है वो मेरे लिंग को अंडर वेर के उपर से सूंघने लग जाती है लेकिन लिंग पर अपना चेहरा टच नही होने देती...

रिया ने अपने दोनो हाथ अभी भी अपने बूब्स पर रख रखे थे...

फिर वो अपना सिर उठती है और मुझ से कहती है,,,

रिया--ये शैतान नाराज़ हो रखा है...

में--तो इसे मनाओ.

रिया--लेकिन ये बोल रहा है तुम्हारी गंदी अंडरवेर में इसका दम घुट रहा है.,

में--तो फिर आज़ाद कर दो ना इसे....

फिर रिया मेरे अंडरवेर. की इलास्टिक्क मेरी कमर के यहाँ से पकड़ती है और एक झटके से उसे खेच के मेरे पैरों में पटक देती है..

मेरा साढ़े सात इंच लंबा लिंग उसकी आँखो के सामने लहराने लगता है...रिया ने अपने हाथ अपने बूब्स पर से हटा लिए थे...और वो बस मेरे झटके मारते लिंग को देखती ही जा रही थी...

में--क्या हुआ रिया इसने कुछ बोला नही क्या अभी तक...

रिया--मेरे लिंग को देख कर कहती है...ये अभी भी बहुत ज़्यादा गुस्सा है...ये कह रहा है तू मुझे हाथ तो लगा कर दिखा में तेरी जान निकाल दूँगा.

में--तो फिर हाथ मत लगाओ अपने होंठो से मनाओ.,

उसके बाद रिया थोड़ा सा और जय की टाँगो के पास चली जाती है और नीचे लटक रही गोलियो पर से अपना नाक रगड़ते हुए लिंग को अपने चेहरे पर रगड़ने लगती है.

 
रिया के ऐसा करते ही मेरे मूँह से सिसकारी निकल जाती है.. रिया ने मेरी गोलियों को अपने मुँह में भर लिया और उसको बड़े प्यार से चूसने लगती है ...उसके दोनो हाथ मेरी कमर पर थे और उसकी सांसो की गर्मी मेरे लिंग को और भड़काए जा रही थी......

उधर नेहा भाभी जय और रिया का खेल देखते देखते काफ़ी गरम हो गयी थी...

उसके हाथ अपने आप खुद के बूब्स पर पहुँच गये, वो एक हाथ से अपने बूब्स दबा रही थी और एक हाथ से खुद के पेट पर हाथ फेर रही थी..

नेहा ने एक एक करके सारे कपड़े खोल दिए और पूरी नंगी होकर उन दोनो का खेल देखते देखते अपनी एक निप्पल पर ज़ोर लगा दिया और एक सिसकी उसके मुँह से निकलते निकलते बची.

रिया ने अब जय का लिंग मुँह में ले लिया था और पर्फेक्षन के साथ वो उसको अंदर बाहर कर रही थी ...

जय को इतना मज़ा आरहा था क़ी वो रिया के मुँह में झड गया और ज़ोर ज़ोर से साँसे लेने लगा...रिया ने उठ कर झरने के पानी से खुद का मुँह सॉफ किया और जय से कहती है...

रिया--जय मैने तुम्हारे शैतान को मना लिया है अब मुझ से रहा नही जा रहा प्ल्ज़ मुझे ठंडा कर दो....

जय रिया को अपनी बाहो में भर कर वहाँ चट्टान पर बैठा देता है और सख्ती के साथ रिया के बूब्स मसल्ने लगता है..रिया दर्द और मज़े के बीच झूला झूल रही थी...उसकी सिसकियाँ झरने के शोर को भी दबा रही थी...रिया के बदन की गर्मी ने मेरे लिंग में फिर से तनाव ला दिया...

रिया--जय प्ल्ज़ फक मी .....फक मी हार्ड जय ....प्ल्ज़ फक मी....

तुम इतना तरसाओगे तो में मर ही जाउन्गि प्ल्ज़ अब समा जाओ मुझ में तुनहरा ये मोटा शैतान डाल दो मुझ में....

में चट्टान पर बैठ जाता हूँ और रिया को अपनी गोद में बैठने के लिए कहता हूँ..

रिया मेरे लिंग को पकड़ कर उसे उसकी चूत का रास्ता दिखाते हुए लिंग पर बैठने लगती है ...साढ़े साथ इंच लंबा लिंग उसकी चूत में बिल्कुल गायब हो जाता है...और फिर वो अपनी चूत लिंग पर रगड़ने लगती है ...ऐसा लग रहा था हम दोनो के बीच में कोई जंग छिड़ गयी है और किसी भी तरह से कोई हारना नही चाहता था...

लेकिन ये खेल ऐसा है यहाँ जीतने वाले को भी सुकून मिलता है और हारने वाले को भी दोनो अपने चरम पर आगये थे और एक साथ झड़ने लगे कुछ देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे की बाहो में पड़े रहे फिर उसके बाद एक दूसरे को किस करने लग गये तभी एक हाथ मेरे कंधे पर थाप करता है...

में जैसे ही पलट कर देखता हूँ वहाँ भाभी खड़ी खड़ी मुस्कुरा रही थी....भाभी को देखते ही हम दोनो हड़बड़ा जाते है....रिया तो जैसे शर्म से गड़ ही गयी थी ज़मीन के अंदर...

में जैसे ही खड़ा होता हूँ..भाभी मुझे धक्का दे कर नीचे पानी के कुंड में गिरा देती है ....और ज़ोर ज़ोर से हँसने लगती है....

भाभी---ये उस दिन का बदला है जब तुमने बॅक व्यू मिर्रर में से मुझे देखा था...

में--भाभी ऐसे कोई करता है क्या...थोड़ी तो शरम करो.

भाभी--तूने शरम की थी जो में करूँ अब पड़ा रह इस पानी में तेरे कपड़े भी में ले जा रही हूँ.....रिया तुझे भी नंगी ही चलना है क्या कॅंप में..

रिया--नही भाभी में चेंज कर के आती हूँ...

और उसके बाद अपने कपड़े लेकर झाड़ियो के पीछे जाकर बदलने लगी..

( भाभी ने जब देखा कि हम लोग झड चुके है तब तक उनका भी पानी निकल चुका था ...फिर वो जल्दी से कपड़े पहन कर हम लोगो को चोकाने वहाँ आई थी.)

रिया अब कपड़े पहन कर आचुकी थी....और में पानी के अंदर अभी तक नंगा ही पड़ा था.

फिर भाभी और रिया दोनो जाने लगी...

में--भाभी मेरे कपड़े दे जाओ अब कभी वेसी ग़लती दुबारा नही करूँगा...

भाभी--रिया कपड़े दे दूं इसे ??तू बोलेगी तो ही दूँगी.

रिया--शरमाते हुए भाभी आपकी मर्ज़ी है में कौन होती हूँ आपके बीच में बोलने वाली ये तो बिना कपड़ो के भी अच्छे लग रहे है...

भाभी--बड़ा अच्छा लगने लगा है तुझे ये.

फिर भाभी मेरे कपड़े वहाँ एक चट्टान पर रख देती है और कहती है..

भाभी--अब जल्दी से आजा...हम आगे ही चल रहे है ज़्यादा देर लगाई ना तो देख लेना.

उसके बाद भाभी और रिया वहाँ से आगे निकल जाते है और में उस कुंड में से बाहर निकल कर कपड़े पहन कर उन लोगो के साथ कॅंप की तरफ़ बढ़ जाता हूँ...

कॅंप मे मम्मी हम सभी लोगो का इंतजार कर रही थी...

मम्मी--कितनी देर लगा दी तुम लोगो ने समय की कोई चिंता है या नही...?

में--मम्मी समय का पता ही नही लगा मज़े करते करते...

भाभी--हाँ मम्मी आज इसने कुछ ज़्यादा ही मज़े कर लिए.

ये बात सुन कर रिया शर्म से अपना सिर झुका लेती है...और दोनो बच्चो को लेकर हम सब से फिर मिलने का बोलकर अपने कॅंप में चली जाती है.

मम्मी--तेरे पापा का फोन आया था दुबई से...वो कह रहे थे कि हम लोग यहाँ से जाए नही वो लोग भी यही आरहे है.

में--वाह क्या बात कही है अब तो और मज़ा आएगा...क्यो भाभी मज़ा आएगा ना भैया भी साथ होंगे आपके.

भाभी--तू फिर शुरू हो गया ....मार खानी है क्या.

मम्मी--तुम दोनो एक दूसरे की टाँग खिचना बंद करो और कुछ खा पी लो भूक लग गयी होगी.

तभी वहाँ रिजोर्ट की गाड़ी आजाती है और उसमें से एक आदमी आकर कहता है....

आदमी--माफ़ कीजिएगा सर इस समय आपको डिस्टर्ब किया ...आप को कुछ देर के लिए मेरे साथ रिजोर्ट चलना पड़ेगा कुछ ज़रूरी काम आन पड़ा है..

में--मम्मी से...मम्मी में जा कर आता हूँ आप जब तक भाभी को खाना खिला दो वरना ये मुझे खा जाएँगी.

मम्मी--ठीक है तू जाकर जल्दी आजा...पता नही इन होटल वालो को इस समय कौनसा काम आ गया .

में--कोई फ़ौरमलिटी बाकी रह गयी होगी शायद इसी वजह से बुलाया होगा...में अभी जा कर आता हूँ.

फिर में उस आदमी के साथ गाड़ी में बैठकर रिजोर्ट के लिए निकल गया......

रिजोर्ट पर पहुँच कर में सीधा रिसेप्षन पर पहुँच गया वहाँ एक लड़का बैठा हुआ था जिसकी शर्ट पर उसके नेम प्लाट पर उसका नाम अमित लिखा हुआ था... वहाँ पहुँचते ही मैं बोला..

में--कोई फ़ौरमलिटी अगर बाकी रह गयी थी तो कल सुबह भेज दिया होता इनको इस समय मुझे बुलाने का क्या मतलब है....

अमित--सर नाराज़ मत होइए आपसे कुछ ज़रूरी बात करनी थी इसीलिए आप को बुलाया गया है.

में--किस बारे में बात....कौनसी बात??

तभी वहाँ एक और रिसेप्षनिस्ट आजाती है जिसका नाम सुहानी होता है...

 
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