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Guest
में वहाँ से अपनी कार लेकर तुरंत निकल गया ....पेंथर को देखते ही मेरा नशा काफूर हो गया था...में अब सीधा घर आ चुका था वहाँ सब लोग मेरा ही वेट कर रहे थे....मम्मी और भाभी बस वहाँ नही थी वो लोग शायद अपने रूम में थे ....नीरा आते ही मुझ से लिपट गयी....
नीरा--भैया आप कहाँ चले गये थे....हम लोग कब से आपका वेट कर रहे थे.
भैया आपने........
शायद नीरा को मुझ में से शराब की स्मेल आ गयी थी...
नीरा--भैया आप अपने रूम में चलिए में आपके लिए कुछ खाने के लिए वही ले आती हूँ....
में--मैने धीरे से कहा--नीरा मुझे भूक नही है...
नीरा--पहले आप रूम में चलिए उसके बाद बात करते है...
वहाँ बैठे सभी लोग बस हम दोनो को ही देखे जा रहे थे और समझने की कोशिश कर रहे थे कि क्या हो रहा है...
में अपने रूम में चला गया और अपने कपड़े खोल कर एक बारमोडा डाल कर बिस्तर पर लेट गया.
थोड़ी देर बाद नीरा आ गयी वो अपने साथ खाना लेकर आई थी...
मुझे उठाते हुए...
नीरा--भैया पहले कुछ खा लो फिर सो जाना..
में--नीरा मुझे भूक नही है...तू मुझे यहाँ सोने दे..
नीरा--भैया प्ल्ज़ कुछ खा लो आपको मेरी कसम है...देखो आपका इंतजार करते करते मैने भी कुछ नही खाया....
नीरा की ये बात सुनकर में तुरंत बेड पर बैठ गया...
में--तूने अभी तक क्यो कुछ नही खाया... मेरा इंतजार क्यो कर रही थी तू...
नीरा--मुझे बड़ी घबराहट हो रही थी भैया आप जब काफ़ी देर तक नही आए...
में--चल अब खाना लगा हम दोनो साथ में खाएँगे...
नीरा--भैया आप कभी भी मुझे ऐसे छोड़कर मत जाया करो...
में --नही जाउन्गा अब कभी भी तुझ से दूर....चल अब खाना लगा ....
फिर हम दोनो खाना खाने लगते है ....में नीरा को अपने हाथो से खाना खिला रहा थे..... और नीरा मुझे अपने हाथो से....
थोड़ी देर में हम लोग खाना खा चुके थे...और नीरा खाली प्लॅट्स उठा कर ले गयी...
उधर किचन में रूही नीरा से बोलती है...
रूही--नीरा तू कोमल के साथ तेरे रूम में सो जाना ....दीक्षा और चाची मेरे रूम में सो रहे है...और चाचा जी बाहर वाले हॉल में...
नीरा--दीदी आप कहाँ सोने वाली हो...
रूही--में जय के रूम में सो जाउन्गि...चल अब जल्दी जल्दी सारा काम निपटा लेते है...
नीरा को रूही की ये बात बड़ी अटपटी लगती है...क्योकि उसने जो रिजोर्ट में देखा था उस से उसका विश्वास पूरी तरह से रूही से टूट गया था....
नीरा--दीदी आप भी हम लोगो के साथ ही सो जाना ....भैया को क्यो परेशान करती हो .....
रूही--नीरा मुझ से बहस मत कर....जो मैने कह दिया उसको मान...
और उसके बाद रूही वहाँ से बाहर चली जाती है...
नीरा को अब ये डर सता रहा था कि कहीं रूही .भैया के नशे में होने का फ़ायदा ना उठा ले...लेकिन नीरा इस हालत में कुछ कर भी नही सकती थी. वो अपना मन मसोस कर किचन सॉफ करने लग जाती है.......
कोमल और नीरा कमरे में आ चुके थे कुछ देर उन्होने इधर उधर की बाते करी और फिर कोमल को नींद आ गयी...शायद सारे दिन की थकान वो बच्ची ज़्यादा देर बर्दाश्त नही कर सकी...
लेकिन नीरा की आँखो में नींद नही थी...
उसे बस एक ही डर सता रहा था कहीं रूही भैया के साथ कुछ ग़लत ना कर दे...
और फिर वो इन सवालो के झन्झावटो से खुद को ज़्यादा देर रोक नही पाई और भैया के रूम...की तरफ बढ़ गयी....
इस घर में अभी एक शक्श और जाग रहा था जो अपनी पुरानी यादों में खोया हुआ था...वो शक्श थी रजनी....
रजनी पुरानी बातो के बारे में सोचे जा रही थी जब वो शादी करके अपने घर आई थी तब वो किशोर के बारे में जानती तक नही थी...एक दिन जब वो किसी काम से उदयपुर आए हुए थे तब जाकर किशोर से मुलाकात हुई थी...रजनी को उस समय 4 साल होगये थे शादी करे हुए...लेकिन अभी तक उसकी गोद हरी नही हुई थी....
नीरा--भैया आप कहाँ चले गये थे....हम लोग कब से आपका वेट कर रहे थे.
भैया आपने........
शायद नीरा को मुझ में से शराब की स्मेल आ गयी थी...
नीरा--भैया आप अपने रूम में चलिए में आपके लिए कुछ खाने के लिए वही ले आती हूँ....
में--मैने धीरे से कहा--नीरा मुझे भूक नही है...
नीरा--पहले आप रूम में चलिए उसके बाद बात करते है...
वहाँ बैठे सभी लोग बस हम दोनो को ही देखे जा रहे थे और समझने की कोशिश कर रहे थे कि क्या हो रहा है...
में अपने रूम में चला गया और अपने कपड़े खोल कर एक बारमोडा डाल कर बिस्तर पर लेट गया.
थोड़ी देर बाद नीरा आ गयी वो अपने साथ खाना लेकर आई थी...
मुझे उठाते हुए...
नीरा--भैया पहले कुछ खा लो फिर सो जाना..
में--नीरा मुझे भूक नही है...तू मुझे यहाँ सोने दे..
नीरा--भैया प्ल्ज़ कुछ खा लो आपको मेरी कसम है...देखो आपका इंतजार करते करते मैने भी कुछ नही खाया....
नीरा की ये बात सुनकर में तुरंत बेड पर बैठ गया...
में--तूने अभी तक क्यो कुछ नही खाया... मेरा इंतजार क्यो कर रही थी तू...
नीरा--मुझे बड़ी घबराहट हो रही थी भैया आप जब काफ़ी देर तक नही आए...
में--चल अब खाना लगा हम दोनो साथ में खाएँगे...
नीरा--भैया आप कभी भी मुझे ऐसे छोड़कर मत जाया करो...
में --नही जाउन्गा अब कभी भी तुझ से दूर....चल अब खाना लगा ....
फिर हम दोनो खाना खाने लगते है ....में नीरा को अपने हाथो से खाना खिला रहा थे..... और नीरा मुझे अपने हाथो से....
थोड़ी देर में हम लोग खाना खा चुके थे...और नीरा खाली प्लॅट्स उठा कर ले गयी...
उधर किचन में रूही नीरा से बोलती है...
रूही--नीरा तू कोमल के साथ तेरे रूम में सो जाना ....दीक्षा और चाची मेरे रूम में सो रहे है...और चाचा जी बाहर वाले हॉल में...
नीरा--दीदी आप कहाँ सोने वाली हो...
रूही--में जय के रूम में सो जाउन्गि...चल अब जल्दी जल्दी सारा काम निपटा लेते है...
नीरा को रूही की ये बात बड़ी अटपटी लगती है...क्योकि उसने जो रिजोर्ट में देखा था उस से उसका विश्वास पूरी तरह से रूही से टूट गया था....
नीरा--दीदी आप भी हम लोगो के साथ ही सो जाना ....भैया को क्यो परेशान करती हो .....
रूही--नीरा मुझ से बहस मत कर....जो मैने कह दिया उसको मान...
और उसके बाद रूही वहाँ से बाहर चली जाती है...
नीरा को अब ये डर सता रहा था कि कहीं रूही .भैया के नशे में होने का फ़ायदा ना उठा ले...लेकिन नीरा इस हालत में कुछ कर भी नही सकती थी. वो अपना मन मसोस कर किचन सॉफ करने लग जाती है.......
कोमल और नीरा कमरे में आ चुके थे कुछ देर उन्होने इधर उधर की बाते करी और फिर कोमल को नींद आ गयी...शायद सारे दिन की थकान वो बच्ची ज़्यादा देर बर्दाश्त नही कर सकी...
लेकिन नीरा की आँखो में नींद नही थी...
उसे बस एक ही डर सता रहा था कहीं रूही भैया के साथ कुछ ग़लत ना कर दे...
और फिर वो इन सवालो के झन्झावटो से खुद को ज़्यादा देर रोक नही पाई और भैया के रूम...की तरफ बढ़ गयी....
इस घर में अभी एक शक्श और जाग रहा था जो अपनी पुरानी यादों में खोया हुआ था...वो शक्श थी रजनी....
रजनी पुरानी बातो के बारे में सोचे जा रही थी जब वो शादी करके अपने घर आई थी तब वो किशोर के बारे में जानती तक नही थी...एक दिन जब वो किसी काम से उदयपुर आए हुए थे तब जाकर किशोर से मुलाकात हुई थी...रजनी को उस समय 4 साल होगये थे शादी करे हुए...लेकिन अभी तक उसकी गोद हरी नही हुई थी....