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Guest
कामली--जनाब यहाँ के रिवाज के अनुसार कोठे के चारो तरफ घुमा लेने के बाद वो कपड़ा हमारे किसी काम का नही होता वैसे तो हम उसे जला देते है लेकिन अगर आप उसे अपने साथ लेजाना चाहे तो ले जा सकते है.....
अब में कामली की तरफ 2 लाख रुपये और बढ़ा देता हूँ और बड़ी अदा के साथ वो उन 2_2हज़ार के नोटो को अपने ब्लाउस की गहराईयो में दफ़न कर देती है....
कामली--अब उठिए जनाब.....वो दोनो आपकी राह देख रही होंगी....
और इसीके साथ में अपना जाम एक ही साँस में ख़तम करके नीरा और शमा के रूम की तरफ बढ़ जाता हूँ....रूम का दरवाजा खोलते ही में पलट कर जल्दी से उसे लॉक कर देता हूँ....
शमा और नीरा वहाँ मोजूद डबल बेड पर बैठी हुई एक दूसरे से बाते कर रही थी....
कमरे मे काफ़ी रोशनी थी बेड से थोड़ी ही दूरी पर लकड़ी का एक बाथ टब गर्म पानी से लबालब भरा हुआ था एक कमोड भी लगा हुआ था वही कौने में ही....यानी कि उस रूम का बाथरूम भी बिना चार दीवारी के था.....सिर्फ़ एक खिड़की पर परदा लगा हुआ था बाकी परदा रखने की कोई जगह उस कमरे में नही थी....
बेड पर बैठी हुई शमा और नीरा दोनो ही खूबसूरती मे बेमिसाल लग रही थी ऐसा लग रहा था दोनो ही के जिस्मों को भगवान ने बड़ी फ़ुर्सत में बनाया हो...दोनो की आँखे नाक बिल्कुल एक जैसे लग रहे थे....जैसे दोनो जुड़वा बहने हो....
में अब उन दोनो के पास बैठ गया उस रूम को अच्छे से देखने के बाद...
शमा--भैया अब कैसे होगा ये सब....भाभी को भी आपने यहाँ बुला लिया....कैसे सबूत दे पाएँगे हम नथ उतराई का....
नीरा--तुम चिंता मत करो शमा....सब कुछ हो जाएगा....तुम्हारी जगह आज में लूँगी इस नथ उतराई की रस्म मे....
शमा--लेकिन भाभी कैसे दे पाएँगी आप वो सबूत....आप तो कुँवारी नही है फिर कैसे होगा सब कुछ....
नीरा--किसने कहा में कुवारि नही हूँ....हम लोगो ने आज ही शादी करी है....सिर्फ़ तुझे यहाँ से निकालने के लिए....और आज पहली बार हम दोनो के जिस्म मिलेंगे....आत्मा तो कब की मिल चुकी है....
शमा--लेकिन यहाँ आप मेरे सामने सब कुछ कैसे कर पाएँगे....
में--शमा मेरी बहन मुझे माफ़ कर देना लेकिन ये सब तुम्हारे सामने ही होगा....
तभी दरवाजे पर दस्तक होती है और हम तीनो एक दूसरे की शकल देखने लग जाते है में शमा को अपनी गोद में खीच लेता हूँ शमा को अपनी गोद में बिठाने के बाद में नीरा से दरवाजा खोलने की कह देता हूँ.....
नीरा दरवाजा खोलती है और कामली बाई के साथ नज़्म एक बड़ी सी ट्रे में चाँदी के ग्लास कुछ खाने का सामान और एक बढ़िया स्कॉच की बोतल ले कर अंदर घुस जाती है....कामली बाई शमा को मेरी गोद में इस तरह बैठे देख कर हम दोनो की बालाए लेने लग जाती है...,
कामली--मुझे माफ़ करे जनाब शमा अभी बच्ची है और इसे ज़्यादा दर्द ना हो इसीलिए में ये शराब आप लोगो के लिए ले आई....अब आपको कोई तंग नही करेगा अब जब आप ये दरवाजा खोलेंगे....तभी ये दरवाजा खुलेगा,...
और ये कह कर वो दोनो बाहर चली जाती है....
अब में कामली की तरफ 2 लाख रुपये और बढ़ा देता हूँ और बड़ी अदा के साथ वो उन 2_2हज़ार के नोटो को अपने ब्लाउस की गहराईयो में दफ़न कर देती है....
कामली--अब उठिए जनाब.....वो दोनो आपकी राह देख रही होंगी....
और इसीके साथ में अपना जाम एक ही साँस में ख़तम करके नीरा और शमा के रूम की तरफ बढ़ जाता हूँ....रूम का दरवाजा खोलते ही में पलट कर जल्दी से उसे लॉक कर देता हूँ....
शमा और नीरा वहाँ मोजूद डबल बेड पर बैठी हुई एक दूसरे से बाते कर रही थी....
कमरे मे काफ़ी रोशनी थी बेड से थोड़ी ही दूरी पर लकड़ी का एक बाथ टब गर्म पानी से लबालब भरा हुआ था एक कमोड भी लगा हुआ था वही कौने में ही....यानी कि उस रूम का बाथरूम भी बिना चार दीवारी के था.....सिर्फ़ एक खिड़की पर परदा लगा हुआ था बाकी परदा रखने की कोई जगह उस कमरे में नही थी....
बेड पर बैठी हुई शमा और नीरा दोनो ही खूबसूरती मे बेमिसाल लग रही थी ऐसा लग रहा था दोनो ही के जिस्मों को भगवान ने बड़ी फ़ुर्सत में बनाया हो...दोनो की आँखे नाक बिल्कुल एक जैसे लग रहे थे....जैसे दोनो जुड़वा बहने हो....
में अब उन दोनो के पास बैठ गया उस रूम को अच्छे से देखने के बाद...
शमा--भैया अब कैसे होगा ये सब....भाभी को भी आपने यहाँ बुला लिया....कैसे सबूत दे पाएँगे हम नथ उतराई का....
नीरा--तुम चिंता मत करो शमा....सब कुछ हो जाएगा....तुम्हारी जगह आज में लूँगी इस नथ उतराई की रस्म मे....
शमा--लेकिन भाभी कैसे दे पाएँगी आप वो सबूत....आप तो कुँवारी नही है फिर कैसे होगा सब कुछ....
नीरा--किसने कहा में कुवारि नही हूँ....हम लोगो ने आज ही शादी करी है....सिर्फ़ तुझे यहाँ से निकालने के लिए....और आज पहली बार हम दोनो के जिस्म मिलेंगे....आत्मा तो कब की मिल चुकी है....
शमा--लेकिन यहाँ आप मेरे सामने सब कुछ कैसे कर पाएँगे....
में--शमा मेरी बहन मुझे माफ़ कर देना लेकिन ये सब तुम्हारे सामने ही होगा....
तभी दरवाजे पर दस्तक होती है और हम तीनो एक दूसरे की शकल देखने लग जाते है में शमा को अपनी गोद में खीच लेता हूँ शमा को अपनी गोद में बिठाने के बाद में नीरा से दरवाजा खोलने की कह देता हूँ.....
नीरा दरवाजा खोलती है और कामली बाई के साथ नज़्म एक बड़ी सी ट्रे में चाँदी के ग्लास कुछ खाने का सामान और एक बढ़िया स्कॉच की बोतल ले कर अंदर घुस जाती है....कामली बाई शमा को मेरी गोद में इस तरह बैठे देख कर हम दोनो की बालाए लेने लग जाती है...,
कामली--मुझे माफ़ करे जनाब शमा अभी बच्ची है और इसे ज़्यादा दर्द ना हो इसीलिए में ये शराब आप लोगो के लिए ले आई....अब आपको कोई तंग नही करेगा अब जब आप ये दरवाजा खोलेंगे....तभी ये दरवाजा खुलेगा,...
और ये कह कर वो दोनो बाहर चली जाती है....