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मांगलिक बहन

वो ये भी भूल गई थी कि वो अपने भाई को उठाने के लिए हैं और बाहर उसकी मम्मी इंतजार कर रही है उनका। अपनी भाई की चौड़ी और कठोर छाती के साथ साथ सिक्स पैक एब्स देखकर वो मंत्र मुग्ध सी हो गई थी।

तभी उनके कानो में कमला की तेज आवाज पड़ी कि सौंदर्या कहां रह गई तुम और सौंदर्या एकदम से डर के मारे उछल पड़ी और उसका एक हाथ अजय की छाती पर चला गया। छाती पर हाथ पड़ते ही सौंदर्या की आंखे मस्ती से बंद हो गई और उसने अपने भाई की छाती को हल्का सा सहला दिया और उसे ज़िन्दगी में पहली बार इतनी सुखद अनुभूति हुई।

तभी दूसरी बार उसके कानों में अपनी मा की आवाज पड़ी जो काफी नजदीक से आ रही थी। शायद उसकी मम्मी उधर ही आ रही थी इसलिए सौंदर्या डर के मारे खड़ी हो गई और एक चादर जल्दी से अपने भाई के उपर डाल दी और जोर जोर से उसे आवाज लगाने लगी:

:" भाई उठ जाओ। उठो ना देखो कितनी देर हो गई है।

तभी कमला अंदर आ गई और बोली:" लगता है ये अजय बहुत गहरी नींद में हैं। रुक मैं इसका इलाज करती हूं।

इतना कहकर कमला आगे बढ़ी और तेजी से उसके कान में चिल्लाई तो अजय हड़बड़ा कर उठ गया और उसने इधर उधर देखा तो अपनी मा और बहन को देखकर सुकून महसूस किया और बोला:"

" ओह मम्मी, कितनी अच्छी नींद आ रही थी मुझे। आपने उठा दिया ।

कमला: अच्छी नींद के बच्चे 9 बज गए हैं और ये गांव हैं। जल्दी से तैयार हो जा नहाकर, हम दोनों भी भूखे हैं तेरे चक्कर में।

अजय जल्दी से उठा और बाथरूम में घुस गया जबकि सौंदर्या अपनी मम्मी के साथ बाहर आ गई और खाने की टेबल लगाने लगी।

नाश्ता लग गया था और सभी साथ में बैठ कर कर रहे थे। अजय अपनी मा के हाथ के खाने को बहुत पसंद करता था इसलिए बड़े चाव से खा रहा था। सौंदर्या ये सब बहुत ध्यान से देख रही थी और बोली:"

" क्या बात है भाई, शहर से भुखे ही आए हो क्या ? जब भी मौका मिलता है तो खाने पर टूट पड़ते हो। थोड़ा आराम से खाओ।

अजय:" अरे दीदी शहर में कहां मा के हाथ का खाना मिलता है , अब इतने सालो के बाद मौका मिला है तो मन करता हैं बस खाए जाऊ खाए जाऊ।

कमला:" कोई बात नहीं मेरे लाल, तुम जी भर कर खाओ। तेरा जो भी मन किए बता दिया करो मैं बना दूंगी।

अजय:" वाह, मा हो तो ऐसी , मम्मी दीदी तो मेरे खाने पर नजर रखती हैं।

सौंदर्या:" अरे नहीं मेरे भाई। मैं तो चाहती हूं कि तुम खूब खा खाकर शक्तिमान बन जाओ।

ये बोलकर सौंदर्या हंसने लगी तो अजय बोला:"

" आप उसकी चिंता मत करो, वो तो मैं बन ही जाऊंगा। लेकिन आप कॉलेज नहीं गई अभी तक ?

सौंदर्या एक पल के लिए तो कॉलेज जाने के बारे में सोचकर डर गई लेकिन फिर संयम से काम लेते हुए बोली:"

" अरे भाई, आज सीमा वापिस आ रही है ससुराल से, उसके पापा आए थे तो वहां जाना हैं मुझे। तुम भी चलो ना मेरे साथ।

अजय:" अरे दीदी आप ही जाओ। मुझे तो अभी भी नींद लगी हैं बहुत। मैं तो अभी आराम करूंगा अच्छे से।

सौंदर्या:" हाँ ठीक हैं कुंभकरण महाराज। आप पूरे दिन आराम करो। लेकिन पहले खा तो लो आराम से पेट भर कर। अच्छा मम्मी मैं जा रही हूं।
 
इतना कहकर सौंदर्या खड़ी हुई और बाहर की तरफ निकल गई जबकि अजय और कमला अपनी बाते करते रहे।

अजय:" मम्मी मैं तो कल से बहुत परेशान हू। सौंदर्या दीदी के आंसू देखकर तो मन किया था कि उस कमीने अशोक की सारी हड्डियां तोड़ डालू।

कमला:" मार पीट से क्या फायदा बेटा। सौंदर्या तो बेचारी बहुत दुखी हैं। इससे छोटी लड़कियां भी शादी के बाद बच्चो की मा बन गई है तो दुख तो उसे होगा ही।

अजय:" मम्मी अगर मांगलिक लड़का नहीं मिला तो क्या सारी ज़िन्दगी दीदी की शादी नहीं हो पाएगी क्या ?

कमला:" बेटे बिना मांगलिक लड़के तो सारी नहीं हो सकती। इसका बस एक ही उपाय हैं कि सौंदर्या की कुंडली से दोष दूर किए जाए। इसलिए मैंने महाँ ज्योतिष आचार्य तुलसी प्रसाद जी से मिलने का समय मांगा है। शायद वो हमारी कोई मदद कर सके बेटा।

अजय:" मम्मी ये तो बहुत अच्छी बात है, फिर तो अपनी दीदी की भी शादी हो जायेगी।

कमला:" हाँ बेटा। लड़की की सही उम्र में शादी हो जाए तो ठीक रहता है।

अजय:" मम्मी वैसे लड़की की शादी के लिए कितनी उम्र ठीक होती हैं ?

कमला:" बेटा गांव में तो पहले 18 तक शादी हो जाती थी लेकिन अभी थोड़ा लेट होने लगा है इसलिए 22 या 23 तक हो जानी चाहिए।

अजय:" अच्छा मम्मी एक बात बताओ, आपकी शादी कितनी उम्र में हुई थी ?

कमला:" अरे बेटा उस टाइम की तो बात ही कुछ और थी। मात्र 16 साल की उम्र में मेरी शादी हो गई थी तेरे पापा से।

अजय:" अच्छा मम्मी। सच में पहले बहुत छोटी उम्र में शादी होती थी। मैंने खाना खा लिया।

अजय खाना खा चुका था इसलिए कमला बर्तन उठाते हुए बोली:" और क्या। पहले तो ऐसा ही होता था। अच्छा मुझे अभी थोड़ा काम है। बाद में बात करती हूं बेटा। तुम चाहो तो फिर से कुंभकर्ण बन सकते हो।

इतना कहकर कमला हंस पड़ी और अजय भी अपनी मम्मी के साथ जोर जोर से हंसने लगा।

दूसरी तरफ सौंदर्या सीमा के घर आ गई थी और देखा कि राधा और सपना पहले से ही मौजूद थीं। सपना उसे देखती ही बोली:

" कैसी हो रूप की रानी? आज बड़ा चमक रही हो?

सौंदर्या अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गई और बोली:" ठीक हूं मैडम जी। मै वैसे रूप कि रानी नहीं हू। समझी तुम।

राधा:" सच में आज तुम कमाल लग रही हो सौंदर्या। रूप की रानी तो कुछ भी नहीं तुम्हारे आगे।

तभी सीमा की मम्मी अंदर आ गई और उन्हें काम बताने लगी। सारी लड़कियां अपने काम में लग गई और थोड़ी देर बाद ही सारा खाना बन गया था। तभी घर के बाहर गाड़ी रुकने की आवाज आई और सीमा की मम्मी बोली:"

" लगता है सीमा आ गई।

इतना सुनते ही सारी लड़कियां खुशी से बाहर की तरफ दौड़ पड़ी। सच में सीमा ही थी। अपनी सहेलियों को देखते ही उसके चहेरे पर स्माइल आ गई और वो गाड़ी से उतर कर अंदर आ गई।

सीमा का पति और दूसरे सभी लोग सीमा के पापा ने घर में बाहर की तरफ बने हुए एक कमरे में टिका दिए और उनकी आव भगत में लग गए।

वहीं सीमा अंदर अपने कमरे में बैठ गई और सभी लड़कियों से गले मिल रही थी। सपना ने गले मिलते हुए ही उसकी गांड़ पर साडी के उपर से ही हाथ फिर दिया तो सीमा के मुंह से एक आह निकल पड़ी।

सीमा:" उफ्फ कमीनी क्या करती हैं, दुखता है बहुत।

सपना:" हाय सिर्फ हाथ लगाने से ही दुख रहा है। इसका मतलब रात को तेरे पति ने बहुत अच्छे से तुझे मसला हैं।

ये सुनते ही सीमा का चेहरा शर्म से लाल हो गया और सौंदर्या के चेहरे पर भी पता नहीं क्यों शर्म की हल्की सी लालिमा दौड़ गई। राधा ये देखते ही मुस्कुरा उठी और बोली:"

" तुझे क्या हुआ सौंदर्या, तुम क्यों शर्मा रही हो ?

इससे पहले कि सौंदर्या कुछ बोलती सीमा की मम्मी की आवाज आई जो सौंदर्या को बुला रही थी। सौंदर्या एकदम से बाहर निकल गई तो सभी हंस पड़ी।

सीमा की मम्मी ने सौंदर्या को कुछ काम दिया और खुद मोहल्ले में सब को बताने के लिए चली गई कि सीमा आई हैं।

वहीं दूसरी तरफ सौंदर्या जानती थी कि अंदर सपना और राधा जरूर सीमा से मस्ती करेगी इसलिए मौका मिलते ही वो बराबर वाले कमरे में घुस गई। उपर बने हुए रोशनदान से साफ आवाज बाहर आ रही थी। सौंदर्या जानती थी कि उसे बाहर भी जाना पड़ सकता है लेकिन वो पूरी बात जरूर सुनना चाहती थी इसलिए उसने अपने फोन को निकाल कर रिकॉर्डिंग शुरू कर दिया ताकि अगर बीच में जाना पड़ा तो बाद में सुन सके।

सपना:" तो बोल ना सीमा रानी कैसी रही तेरी सुहागरात ?

राधा:" हाय काफी मजा आएगा होगा तुझे तो 7 इंच के साथ। बोल ना अब शर्मा क्यों रही है?

सौंदर्या फिर से उनकी बाते सुनकर मचल उठी। सच में वो जाने के लिए उत्सुक थी कि सीमा के साथ क्या हुआ।

सीमा:" क्या बताऊं अब। पूरी रात मेरी हालत खराब कर दी। सच कहूं तो ऐसा लग रहा था मानो पहली बार सेक्स कर रही हूं मैं। सच में बहुत दर्द हुआ। लेकिन जब दर्द खत्म हुआ तो मैं मस्ती में सिसक रही थी, उछल रही थी, मैं अपने आपे से बाहर थी। बाहर निकलता तो ऐसे लग रहा था जैसे जिस्म से जान निकल रही हो।

सीमा की बाते सुनकर सौंदर्या अपने एक पैर को दूसरे पर रगड़ने लगीं और आंखे बंद करके सोचने लगी कि सीमा की उस वक़्त क्या हालत रही होगी।

सपना:" साफ साफ बता कैसे कैसे क्या हुआ ? हमे भी तो कुछ पता चले।

सीमा:" अच्छा बताती हू बाबा। तुम ऐसे नहीं मानोगी। मैं कमरे में उनका इंतजार कर रही थी। दिल की धड़कन मेरी भी बढ़ रही थी क्योंकि मैं पहले ही उनका लंड देख चुकी थी। सच में परेशान थी कि 7 इंच का लंड जैसे अंदर घुस पाएगा। फिर धीरे से कमरे का दरवाजा खुला और मैं डर और शर्म के मारे कांप उठी।

सौंदर्या की सांसे तेज होने लगी थी और जिस्म में अजीब सी हलचल मची हुई थी। सौंदर्या ने अपने दोनो हाथो की उंगलियों को एक दूसरे में फंसा लिया और मरोड़ने लगी। उसके कान आवाज पर लगे हुए थे।

राधा:" बोल ना फिर आगे क्या हुआ ? क्यों चुप हो गई

इससे पहले की सीमा कुछ बोलती उसकी मम्मी अंदर आई और बोली:"

" अरे सौंदर्या हैं क्या यहां ?

सीमा एक पल के लिए तो डर ही गई लेकिन फिर बोली:"

" नहीं मम्मी वो तो बाहर चली गई थी। बाहर ही देखो।

सौंदर्या बिना आवाज किए कमरे से बाहर निकली और किचेन में घुस गई। सीमा की मम्मी आई और देखते ही बोली:"

" अरे बेटी मैं तुम्हे अंदर देख रही थी। चलो कोई बात नहीं । तुम सलाद काट लो।

इतना कहकर उसने चाकू सौंदर्या की तरफ बढ़ा दिया। सौंदेया का मूड खराब हो चुका था लेकिन वो जानती थी कि उसकी पास रिकॉर्डिंग होगी।
 
थोड़ी देर में पहले सभी पुरुष और उसके बाद सभी लड़कीयों ने खाना खाया। खाना खाकर जाते हुए जब सीमा लंगड़ा कर चल रही थी तो सपना बोली:"

" हाय तेरी तो चाल ही बिगाड़ दी है सात इंच ने। कितनी अच्छी किस्मत हैं तेरी।

राधा:" सच में जरूर तूने पुण्य किए होंगे जो ऐसा लंड किस्मत में मिला हैं तुझे।

सीमा:" चुप हो जाओ तुम। बहुत मस्ती करती हो मेरे साथ।

सपना:" मस्ती क्या सीमा, सच कहूं तो मेरे पास एक डिल्डो है 7 इंच का, लेकिन चाल तो मेरी उससे आज तक नहीं बिगड़ी।

सीमा:" पागल लड़की डिल्डो तो सिर्फ प्यास भड़काते हैं, मर्द जब उपर चढकर धक्के मारता हैं उसकी बात ही अलग होती हैं।

राधा:" अरे आज रात के लिए तुम मुझे दे दो ना अपना डिल्डो। मैं तो बहुत तड़प रही हूं।

सपना बाते करते हुए अंदर जा रही थी कि उसकी जेब से कुछ गिरा और सौंदर्या ने देखा कि ये चाबियो का एक गुच्छा था इसलिए इसके दिमाग में एक प्लान आया और तेजी से आगे बढ़ कर उसे उठा लिया।

सौंदर्या हैरान हो गई कि सीमा ऐसी चीज अपने पास रखती हैं। जैसे ही सभी लड़कियां अंदर गई तो सौंदर्या को अपने फोन का ध्यान आया और तेजी से कमरे में घुस गई और देखा कि अभी तक रिकॉर्डिंग चालू थी।

सौंदर्या खुश हुई और फोन को बंद करके अपने पॉकेट में रखा और बाहर निकल गई।

सौंदर्या सीमा की मम्मी से बोली:"

"चाची मुझे घर कुछ काम हैं । मैं अभी आती हूं।

सीमा की मम्मी:" ठीक है बेटी लेकिन जल्दी आना।

सौंदर्या:" ठीक हैं, बस आई और गई मैं।

सौंदर्या बिजली की गति से बाहर निकल गई और सामने ही सड़क के दूसरी तरफ बने हुए सीमा के घर के पास आ गई। वो जानती थी कि इस समय सभी लोग खेत पर होंगे। उसने एक बार चोर नजरो से इधर उधर देखा और धड़कते दिल के साथ अंदर घुस गई। उसकी सांसे बहुत तेजी से चल रही थी। उसके पूरा जिस्म पसीने से भीग चुका था लेकिन वो तेजी से उपर की तरफ दौड़ी और जल्दी ही सीमा के कमरे के सामने आ गई।

उसने ताले को चाबी से खोला लेकिन ये चाबी नहीं लगी तो उसकी हालत खराब हो गई। वो अच्छे से जानती थी कि अगर पकड़ी गई तो किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रहेगी।

उसने एक के बाद एक जल्दी करके सारी चाबी से कोशिश करनी शुरू कर दी और जल्दी ही उसकी मेहनत रंग लाई और ताला खुलते ही वो कमरे के अंदर घुस गई।

उसने कांपते हाथो से सीमा की अलमारी को खोला और जल्दी जल्दी सामान देखने लगी। लेकिन उसे कुछ हाथ नहीं लगा। आखिरकार उसने एक बार फिर से ढूंढ़ा और उसके हाथ में एक पैकेट जैसा कुछ आया और सौंदर्या ने तेजी के साथ उसे खोला और उसकी आंखे खुशी से चमक उठी।

" डिल्डो"

डिल्डो उसने सुना जरूर था लेकिन आज पहली बार देख रही थी। उसने हाथ में लिया तो उसकी लम्बाई उसकी पूरी हथेली से बाहर निकल गई।

सौंदर्या की हालत खराब हो गई। उसने तेजी से पैकेट को लिया और कमरा बंद करते हुए बाहर निकल गई। उसने घर को पहले की तरह बंद किया और सड़क पर आ गई।

तभी उसकी नजर अपने हाथ में पकड़े हुए डिल्डो के पैकेट पर पड़ी जिस पर लंड छपा हुआ था तो सौंदर्या की सिट्टी पित्ती घूम हो गई। लेकिन मेहनत और रिस्क लेकर उसने डिल्डो निकाल तो लिया लेकिन अभी उसे कहां रखे।

उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था तभी सामने से गांव का एक लड़का आता नजर आया तो सौंदर्या का दिल ऐसे धड़कने लगा मानो उसकी छाती को फाड़ कर बाहर आ जायेगा।

सौंदर्या ने पैकेट को अपने पीछे कर लिया और अपने घर की तरफ चल पड़ी। जैसे जैसे वो आदमी पास आता जा रहा था सौंदर्या की हालत खराब होती जा रही थी। उसे लग रहा था मानो उसकी उसकी सारी इज्जत आज मिट्टी में मिल जाएगी।

वो आदमी सौंदर्या को घूरता हुआ उसके पास से निकाल गया तो सौंदर्या ने तेजी से वो पैकेट आगे कर लिया क्योंकि वो जानती थी कि पीछे से वो आदमी जरूर उसकी गांड़ को घूर रहा होगा।

थोड़ा आगे जाकर सौंदर्या ने पीछे की तरफ देखा तो पाया कि आदमी खड़ा हुआ उसकी गांड़ को ही घूर रहा था। सौंदर्या तेजी से आगे मुड़ी और देखते ही देखते अपने घर के सामने आ गई।

सौंदर्या को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे, उसने अजीब मुसीबत गले में डाल ली थी। तभी सड़क पर फिर से उसे वहीं आदमी नजर आया जो शायद फिर से उसे घूरने आया था। सौंदर्या ने फैसला किया और डिल्डो के पैकेट को अपनी लहंगे में घुसा लिया और घर के अंदर घुस गई।

उसने चैन की सांस ली और अगले ही उसे लगा कि मानो उसने भूत देख लिया हो। उसकी मम्मी खड़ी हुई थी। सौंदर्या को काटो तो खून नहीं

कमला:" क्या हुआ बेटी ? तुझे तो बहुत पसीना आया हैं ?

सौंदर्या:" मम्मी वो मैं वो दौड़ कर आई हूं । तेजी से इसलिए...

कमला:" क्या हुआ बेटी बोल ना ? डर क्यों रही हैं ?

सौंदर्या को मन कर रहा था कि ये धरती फट जाए और वो उसमे समा जाए। उससे कोई जवाब नहीं बन रहा था।

कमला: कहीं तेरे पीछे फिर से कुत्ता तो नहीं भाग पड़ा था ?

सौंदर्या की सांस में सांस आई और बोली:"

" हा हाँ। मम्मी फिर से कुत्ता मेरे पीछे भाग पड़ा था। बड़ी मुश्किल से बची हू आज।

कमला:" रूक मैं तेरे लिए पानी लाती हूं। बैठ जा आराम से।
 
सौंदर्या जानती थी कि बैठने से उसके लहंगे में उभार बन सकता है इसलिए कमला के किचेन में घुसते ही वो तेजी से चलती हुई उपर अपने कमरे में घुस गई। उसने जल्दी से पैकेट को बाहर निकाला और अपनी अलमारी में छुपा लिया। वो अलमारी बंद कर रही थी कि अपनी मम्मी की आवाज सुनकर वो गिरते गिरते बची।

" बेटी क्या हुआ? अलमारी में क्या कर रही है तू?

सौंदर्या डर गई कि कहीं उसकी मम्मी ने उसे देख तो नहीं लिया। लेकिन फिर बहाना बनाते हुए बोली:"

" मम्मी सीमा के लिए कोई गिफ्ट देख रही थी। मिला ही नहीं।

कमला:" परेशान मत हो। पैसे दे देना। अपनी पसंद से खरीद लेगी वो। अच्छा लो तुम पहले पानी पियो।

सौंदर्या ने चैन की सांस ली और और अपने कमरे ने बैठ कर पानी पीने लगी।

सौंदर्या:" मम्मी वो आप मुझे पैसे दे दो। मैं अभी बाथरूम से आती हूं।

कमला नीचे की तरफ आई और सौंदर्या बाथरूम के गेट से वापिस फिर अपने कमरे में घुस गई। उसने पैकेट को ठीक से छुपाया और नीचे आ गई।

कमला ने उसे पैसे दिए और बोली:"

" बेटी मैं भी आऊ क्या तेरे साथ ? क्या पता फिर से कुत्ता मिला जाए।

सौंदर्या:" नहीं मम्मी। आप रहने दो। गर्मी हैं बहुत बाहर। वो तो घर के अंदर चला गया था।

इतना कहकर सौंदर्या तेजी से वापिस

चल पड़ी। उसे चिंता हो रही थी कि अगर सीमा की मम्मी ने सबको बता दिया कि मैं घर गई हूं तो दिक्कत हो जाएगी। वो अपने जिस्म की सारी ताकत समटेकर तेजी से चल रही थी और कुछ ही मिनट में वो सीमा के घर के अंदर घुस गई।

सौंदर्या अंदर डरते हुए घुस गई कि कहीं कोई दिक्कत ना हो जाए लेकिन सभी कुछ था।

सीमा की मम्मी अभी भी बाहर ही काम कर रही थी और अंदर से बाते करने की आवाज आ रही थी। सौंदर्या ने धीरे से मौका देखकर चाभी को निकाला और एक साइड में फेंक दिया और अंदर चली गई।

थोड़ी देर तक उनकी मस्ती भरी बाते चलती रही। उसके बाद धीरे धीरे शाम होने लगी और आखिरकार सीमा के वापिस जाने का समय हो गया। सीमा करीब छह बजे गाड़ी में बैठकर वापिस चली गई।

उसके बाद एक एक करके सभी लड़कियां अपने घर की तरफ लौट गई। सपना और राधा दोनो सपना के घर गई लेकिन वहां अलमारी में डिल्डो ना पाकर दोनो परेशान हो गई। खास तौर से सपना की हालत खराब थी कहीं किसी के घर में हाथ लग गया तो बहुत दिक्कत हो जाएगी।

दूसरी तरफ सौंदर्या अपने घर पहुंच गई। गर्मी ज्यादा होने के कारण उसने अपनी ब्रा निकाल दी और फिर नीचे आकर अपनी मा के साथ काम में लग गई।

सौंदर्या:" मम्मी बाहर कहीं बाहर गया है क्या ? दिख नहीं रहा है।

कमला:" अरे बेटी वो घूमने के लिए गया हुआ हैं। खेत देखने अपने, उसके बाद शाम को वापिस आ जाएगा।

सौंदर्या:" ये तो अच्छा किया भाई ने। मैं भी उसके साथ जाती लेकिन सीमा के यहां चली गई।

कमला:" कोई बात नही, तुम कल चली जाना। अब एक काम करो जल्दी से खाना बनाने में मेरी मदद करो।

सौंदर्या अपनी मा के साथ काम में लग गई और थोड़ी देर बाद ही खाना बन गया। बाहर अब हल्का हल्का अंधेरा होने लगा था।

अजय खेत देखकर वापिस आ रहा था कि उसे बाथरूम लगी और वो सड़क के किनारे एक खेत में मूतने लगा। तभी उसे खेत के अंदर से कुछ आवाज आती हुई महसूस हुई और अजय सतर्क हो गया।

धीरे धीरे दबे पांव वो आगे बढ़ा और धीरे धीरे आ रही आवाज अब सिसकियों में बदल गई थी। अजय ने देखा कि एक लड़की पूरी तरह से घोड़ी बनी हुई थी और पीछे से कोई उसे चोद रहा था जिससे उसकी मस्ती भरी सिसकारियां निकल रही थी।

अजय ने सेक्सी वीडियो तो बहुत देखी थी लेकिन आज पहली बार सच में सेक्स होते देख रहा था। अजय के लंड में तनाव आने लगा। पीछे से आदमी की गांड़ साफ हिलती हुई दिख रही थी और लड़की की सिसकियां तेज होती जा रही थी। किसी की भी शक्ल वो नहीं देख पा रहा था लेकिन शरीर साफ दिख रहे थे। उसका हाथ अपने आप अपने लंड पर पहुंच गया और पेंट के उपर से ही हिलाने लगा।

तभी आदमी ने तेजी से एक धक्का मारा और लड़की के उपर गिर गया जिससे दोनो आगे को गिर पड़े। इसके साथ दोनो झड़ते चले गए और अजय जानता था कि अब उसका रुकना ठीक नहीं हैं इसलिए बाहर निकल गया और अपने घर की तरफ चल पड़ा।

अजय घर पहुंच गया लेकिन उसके मन में अभी भी वहीं चुदाई वाला दृश्य घूम रहा था और उसके अंदर जबरदस्त हलचल मची हुई थी।

अजय को देखते ही सौंदर्या खुश हो गई और बोली:"

" भाई आ गए खेत से घूमकर तुम ? कैसा लगा ?

अजय:" हाँ दीदी आ गया। काफी अच्छा लगा, गांव की ताजी साफ हवा। मजा आ गया सच में।

कमला:" अच्छा अभी काफी अंधेरा हो गया है। मुझे तो सीमा के घर जाना हैं थोड़ा काम हैं। सौंदर्या तब तक तुम अपने भाई को खाना खिला देना।

सौंदर्या:" ठीक है मम्मी। चलो भाई तुम जल्दी से फ्रेश होकर आ जाओ। मैं खाना लगा देती हूं।

अजय बाथरूम में घुस गया और थोड़ी देर बाद वापिस आ गया। तब तक खाना लग गया था सौंदर्या वहीं अजय के सामने खड़ी हुई थी। उसने एक गुलाबी रंग का सुंदर सूट पहना हुआ था और उसमें काफी आकर्षक लग रही थी। अजय की नज़रे अपनी बहन पर ही टिकी हुई थी क्योंकि नीचे ब्रा ना होने के कारण उसकी चुचियों का उभार काफी दिख रहा था और सौंदर्या को इसका एहसास नहीं था।

सौंदर्या थोड़ा आगे हुई और स्माइल करती हुई बोली

" भाई देखो मैंने आपकी पसंद का खाना बनाया है। मटर पनीर और रायता भी घर की दही का।
 
सौंदर्या के थोड़ा आगे होने से उसके उभार पहले से ज्यादा अच्छे से दिख रहे थे और अजय उन्हें देखने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा था।

अजय:" हाँ दीदी खुशबू तो बहुत अच्छी आ रही है। सच में मजा आ जाएगा आज तो।

सौंदर्या ने अपने भाई को खाना परोसना शुरु कर दिया और अजय खाना खाने लगा।

सौंदर्या:" कैसा बना हैं खाना ? पसंद आया मेरे भाई को ?

अजय:" दीदी बहुत सच में मजा आ गया। आपने बहुत अच्छा खाना बनाया है। दीदी थोड़ा पनीर और दो ना मुझे।

सौंदर्या पनीर देने के लिए थोड़ा सा आगे झुकी और जैसे क़यामत हो गई। सौंदर्या ये भूल गई थी कि उसने ब्रा नहीं पहनी हैं और उसके नीचे झुकते ही उसकी चूचियां आधे से ज्यादा बाहर छलक उठी।

अपनी बहन की चुचियों के उभार को ऐसे उछलते देखकर अजय मस्त हो गया और उसकी नजरे सीधी वहीं टिक गई।

सौंदर्या को उसकी नज़रों का एहसास हुआ तो उसे अपनी गलती महसूस हुई लेकिन वो आंखे नीची करके पनीर डालती रही और अजय ने जी भर कर अपनी बहन के उभार को निहारा।

जैसे ही सौंदर्या वापिस पीछे हुई तो अजय ने एक आखिरी नजर उसकी चूचियों के उभार पर गड़ाई और खाना खाने में लग गया। सौंदर्या को अब थोड़ी शर्म आ रही थी कि उसे अपने भाई के घर में होते ब्रा नहीं निकालनी चाहिए थी।

अजय खाना खाते हुए बोला:"

" दीदी सच में आपने बहुत ज्यादा स्वादिष्ट खाना बनाया है। जी करता है आपकी उंगलियां चूम लूं। सच में मजा आ गया।

सौंदर्या:" बस बस ज्यादा नौटंकी मत कर। दीदी जब तक ही याद होती हैं तब तक शादी ना हो जाए।

अजय:" तुम्हारी कसम दीदी। सच में खाना अच्छा बना है। और पत्नी के आने से क्या आप मेरी दीदी नहीं रह जाओगे? वैसे वो बाद में आएगी पहले मैं आपकी शादी कर दूंगा।

सौंदर्या:" भाई शादी को छोड़। मुझे तुझसे कुछ जरूरी बात करनी थी।

अजय:" हाँ बोल मेरी प्यारी बहन। क्या हुआ?

सौंदर्या:" भाई वो लड़की जिसे तुमने गुण्डो से शहर में बचाया था उसे किसी ने मार दिया है।

अजय को एक झटका सा लगा और चौंकते हुए बोला:"

" इसका मतलब गुण्डो ने उसे मार दिया और शायद वो अब मुझसे ढूंढे। उनकी इज्ज़त खराब हुई होगी पिटने के कारण।

सौंदर्या:" तुम्हे भी और भाई तुमसे ज्यादा खतरा तो मुझे हैं क्योंकि मेरे मुंह पर तो मास्क भी नहीं था।

अपनी दीदी की बाते सुनकर अजय को आने वाले खतरे का एहसास हुआ और वो समझ गया कि उसकी दीदी सच में खतरे में पड़ चुकी हैं।

अजय:" दीदी आप फिक्र मत करो। आपके भाई के होते हुए कोई आपको छू भी नहीं सकता है। आज से आपकी सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी हैं।

सौंदर्या:" लेकिन भाई तुम कहां कहां मेरे साथ रहोगे ? कोई दूसरा उपाय देखना होगा।

अजय:" जब तक कोई दूसरा उपाय नहीं मिलता मैं हर टाइम आपके साथ रहूंगा। मैं जल्दी ही उन तक पहुंच कर उन्हें पुलिस के हवाले कर दूंगा।

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हैलो दोस्तो, मैंने एक जापानी कहानी पढ़ी थी, उसे ही मैं हिन्दी में ट्रांस्लेट करके आपको सुना रहा हूँ।

शायद ऐसा खुशनसीब कोई हो भी जिसकी ज़िंदगी में ऐसा हुआ हो।

खैर मर्द अपने औज़ार अपने हाथ में पकड़ें और लड़कियाँ अपनी अपनी पेंटी में हाथ डालें और कहानी का मज़ा लें।

मेरा नाम शालू है, मैं 25 साल की एक शादीशुदा औरत हूँ, मेरी शादी को 2 साल हो गए हैं और इन दो सालों में मैंने बहुत कुछ देख लिया।

मेरी लव मैरेज हुई थी, शादी से पहले मैंने और सुरेश ने सेक्स को छोड़ के और सब किया था, मतलब उसने अपना लिंग मेरे अंदर प्रवेश नहीं करवाया था, बाकी चूमा चाटी, चूसा चूसी सब किया था।

तो सुहागरात पर मैंने भी कोई शर्म लिहाज नहीं की, मैंने खुद अपने कपड़े उतारे, खुद सुरेश का लिंग अपने मुँह में लेकर चूसा और अपने हाथ से पकड़ के अपनी चूत पे रखा।

सुरेश ने अंदर डाला, बहुत मामूली सा दर्द हुआ, और उसके बाद तो मज़ा ही मज़ा।

हमने पूरी रात सेक्स किया, करीब करीब हम दोनों ने एक दूसरे के बदन का हर एक भाग अपनी जीभ से चाट लिया दाँतों से काट लिया।

जितना इन्होंने मुझे पेला उतना ही मैंने इनको पेला, हमने एक ही रात में लगातार 4-5 बार सेक्स किया, मैंने भी पूरा खुल कर सुरेश का साथ दिया, कभी मैं ऊपर तो कभी ये ऊपर।

खैर हमारी सुहागरात बहुत ही बढ़िया रही।

दो दिन बाद हनीमून पे मनाली चले गए, दस दिन वहाँ रुके, वहाँ भी यही सब चलता रहा।

हनीमून खत्म, हम घर वापिस आ गए।

असली मुसीबत घर आ कर शुरू हुई, इनके घर में सिर्फ मर्द ही मर्द थे। एक बाबूजी, चाचाजी, एक ये और इनके दो चचेरे भाई, जो इनसे साल दो साल ही छोटे थे।

बाबूजी और चाचाजी ने मुझे पूरा अपनी बेटी की तरह प्यार दिया, मगर इनके दोनों चचेरे भाइयों की नियत मुझे साफ नहीं लगी।

दोनों के देखने का अंदाज़ बहुत गंदा था, हर वक़्त मेरे कपड़ों के अंदर झांकते रहते थे।

मैंने इनसे शिकायत की मगर इन्होंने बात को अनदेखा कर दिया।

मुझे अक्सर रात को नहा कर सोना अच्छा लगता है, एक रात जब मैं नहा कर बाहर निकली तो मेरे पाँव में कुछ चिपचिपा सा पदार्थ लगा।

जब मैंने ध्यान से देखा तो यह पुरुष वीर्य था।

मतलब यह के जब मैं नहा रही थी तो किसी ने मुझे नहाते हुए देखा और हस्तमैथुन किया।

मैंने यह बात भी अपने पति को बताई मगर वो हंस कर टाल गए।

फिर दिन में मैंने बाथरूम के दरवाजे का निरीक्षण किया तो देखा के दरवाजे में बारीक बारीक से 2-3 सुराख थे जिनमें से अंदर देखा जा सकता था।

ऐसे ही एक दिन मैं दोपहर को अपने कमरे में सो रही थी तो मुझे लगा कि जैसे कोई मुझे छू रहा है, मैं एकदम से उठी तो देखा कि सबसे छोटे देवर महेश ने मेरी साड़ी और पेटीकोट पूरा ऊपर उठा दिया था जिस से मेरी चूत बिल्कुल नंगी हो गई थी, और उसने एक हाथ में मेरा स्तन पकड़ रखा था और दूसरे हाथ से हस्तमैथुन कर रहा था।

मैं उठी तो वो थोड़ा, सकपकाया, मगर डरा नहीं।

मैंने उसे डांटा तो वो मेरे पाओं में पड़ गया और मुझसे सेक्स की भीख मांगने लगा।

उसने बहुत मिन्नत की और मैं भी न जाने क्यों उसकी मिन्नत मान गई- देख, मैं तुझे सिर्फ एक बार करने दूँगी, और यह बात तू किसी को बताएगा नहीं!

वो झट से मान गया।

मैंने अपनी टाँगे खोली, तो वो अपने सारे कपड़े उतार कर मेरी टाँगों के बीच में आ गया, मैं लेटी रही, उसने खुद ही अपना लण्ड मेरी चूत पे रखा और अंदर पेल दिया।

थोड़ी सी चुदाई के बाद मुझे भी मज़ा आने लगा, मैंने उसे बाहों में भर लिया, उसने मेरा ब्लाउज़ और ब्रा खोल दिये और मेरे स्तनों पे टूट पड़ा। मैंने भी पूरे मज़े ले लेकर उसको संभोग का सुख दिया।

अभी हम कर ही रहे थे कि दरवाजे से राकेश भी बिल्कुल नंग धड़ंग, लण्ड अकड़ाये अंदर आ गया।

मैं एकदम से हैरान रह गई और उठ कर बैठने लगी तो महेश बोला- भाभी बुरा मन मानना, हम दोनों भाई जो भी करते हैं, एक साथ ही करते हैं।

अब मैं बिल्कुल नंगी, अपने एक देवर का लण्ड चूत में लिए लेटी, दूसरे को क्या मना करती, वो भी पास आया और अपना लण्ड चुपचाप मेरे हाथ में पकड़ा कर मेरे स्तनों से खेलने लगा।

जब मेरी तरफ से कोई विरोध न हुआ तो वो उठ कर मेरी छतियों पे बैठ गया और अपना लण्ड उसने मेरे मुँह में घुसा दिया, जिसे मैंने चूसना शुरू कर दिया।

अब मेरे चारों होंठों में लण्ड घुसे थे, एक लण्ड ऊपर के होंठों में और एक लण्ड नीचे के होंठों में।

मैं दोहरी चुदाई का मज़ा ले रही थी।

महेश बोला- बस भाभी, मेरा होने वाला है, कहाँ छुड़वाऊँ?

मैंने कहा- अंदर ही चलने दे…

फिर क्या था, एक मिनट बाद मेरी चूत उसके वीर्य से भरी पड़ी थी।

मगर बात यहीं खत्म नहीं होती, महेश के झड़ने के बाद, राकेश ने अपना लण्ड मेरी चूत में घुसा दिया, 15 मिनट वो मुझे चोदता रहा॰ और यह ऐसा सिलसिला शुरू हुआ के रोज़ मैं 2-2, 3-3 बार चुदने लगी।

शुरू में मुझे बड़ा अजीब लगा, मगर जल्द ही मुझे इसकी आदत पड़ गई और सच कहूँ मुझे मज़ा आने लगा।

अब घर में तीन भाई थे और बारी बारी तीनों मेरी जम के चुदाई कर रहे थे।

मगर अभी और बड़ी समस्या आनी बाकी थी और वो समस्या आई मेरी माँ के रूप में।

मेरी शादी के करीब दो महीने बाद माँ मुझसे मिलने आई।

माँ मुझसे केवल 24 साल बड़ी थी, वो अगर मैं 22 की थी, तो माँ 46 की थी।

माँ खूबसूरत थी, जवान थी।

शाम को चाचाजी आए और अपनी आदत के मुताबिक पी के टुन्न हो कर आए।

आते समय मेरे लिए जलेबी और समोसा लाये।

मैंने अभी परोस ही रही थी कि माँ भी वहीं आ गई, उन्हें देखते ही चाचाजी उठ कर खड़े हो गए और नमस्ते नमस्ते कहते हुये माँ की तरफ बढ़े, मुझे लगा कहीं माँ को गले ही न लगा लें, मगर उन्होंने सिर्फ हाथ जोड़ कर अभिवादन किया और बाद में माँ से हाथ भी मिला लिया।

माँ ने भी बड़ी गर्मजोशी से उनसे हाथ मिलाया।

खैर उसके बाद तो अक्सर चाचाजी माँ के आस पास किसी न किसी बहाने से मँडराते रहते।
 
माँ ने मुझे बताया कि शादी वाले दिन भी चाचाजी ने शराब के नशे में माँ के चूतड़ पे चिकोटी काट ली थी।

मतलब साफ था कि चाचाजी माँ पे लट्टू हुये पड़े थे, वो रोज़ कुछ न कुछ लाते और अपने हाथों से डाल डाल कर माँ को देते।

माँ भी उनके सत्कार का उचित जवाब देती, मगर मुझे न जाने क्यों लगने लगा कि इन दोनों में कोई और ही खिचड़ी पक रही है।

जितने दिन माँ मेरे पास रही, उतने दिन वो रात को मेरे पास ही सोती थी, इस वजह से न तो सुरेश से मैं मिल प रही थी और राकेश और महेश से कहाँ मिलना होना था।

मेरी अपनी चूत में आग लगी पड़ी थी, मगर मुझे लग रहा था, माँ की हालत भी मेरी जैसे हुई पड़ी है।

खैर मैंने जैसे तैसे बहाना करके माँ को विदा किया कि लड़की के घर इतने दिन रहना ठीक नहीं।

माँ गई तो रात को सुरेश ने मुझे तीन बार ठोका मगर मेरा दिल अभी नहीं भर पाया था, सुबह सुरेश के जाने के बाद महेश आ गया और उसने मुझे ठोका, उसके बाद राकेश आया उसने मुझे दो बार ठोका, तब जा कर मेरी तसल्ली हुई।

माँ को गए एक हफ्ता ही हुआ था कि वो फिर से वापिस आ गई।

मुझे बड़ी हैरानी हुई तो माँ बोली- अकेले घर में दिल नहीं लगता।

खैर रात को हम दोनों एक साथ ही सो गई।

करीब ढाई तीन बजे मेरी आँख खुली, मैं उठ कर पेशाब करने चली गई, जब वापिस आई तो देखा, माँ बिस्तर पर नहीं है।

मुझे बड़ी हैरानी हुई, मैं उठ कर बाकी घर में देखने गई, तीनों भाई अपने कमरे में सो रहे थे, बाबूजी अपने कमरे में सो रहे थे, चाचाजी का कमरा बंद था मगर लाईट जल रही थी।

मैंने बाहर से जाकर खिड़की में से देखा, मेरे तो होश ही उड़ गए, माँ चाचाजी के साथ बिस्तर में लेटी थी, दोनों ने चादर ले रखी थी, सिर्फ उनके चेहरे और कंधे नज़र आ रहे थे, माँ नीचे लेटी थी, उसके गोरे गोरे भरे हुए कंधे और थोड़े थोड़े स्तन भी दिख रहे थे, चाचाजी ऊपर लेटे थे, उनकी आधी नंगी पीठ दिख रही थी।

दोनों आपस में हंस हंस कर कुछ बातें कर रहे थे और बीच बीच में एक दूसरे को चूम भी रहे थे।

फिर चाचाजी माँ के ऊपर बिल्कुल सीधे हो गए, माँ ने अपना एक हाथ चादर के अंदर डाला, उनकी हरकत से मैं समझ गई थी कि माँ ने चाचाजी का लण्ड अपनी चूत पे सेट किया था।

चाचाजी ने हल्के से धक्के से अपना लण्ड अंदर ठेल दिया।

मेरा तो गुस्सा सातवें आसमान पे चढ़ गया, मैंने सोचा अभी जाकर इनको जगाती हूँ, और माँ की और चाचाजी की करतूत बताती हूँ।

मगर फिर मैंने सोचा इसमें तो मेरी माँ की ही बदनामी है और मेरी भी।

मैं चुप करके बैठ गई।

काफी देर मैं बैठी रोती रही, सोचती रही।

फिर दिल में खयाल आया, माँ भी तो एक इंसान है, क्या उसका दिल नहीं चाहता होगा, अगर उसे किसी से प्यार हो गया तो इसमें बुराई भी क्या है।

मैं उठी और मैंने फिर कमरे में देखा, अब चाचाजी ने पूरी चादर उतार दी थी।

मैं उन दोनों को बिल्कुल नंगी हालत में सेक्स करते हुए देख रही थी।

माँ ने अपनी गोरी गोरी टाँगें ऊपर हवा में उठा रखी थी और चाचाजी धीरे धीरे आगे पीछे होकर चुदाई कर रहे थे।

बेशक चाचाजी 50 की उम्र पार कर चुके थे मगर वो बड़े जोश से और मज़े ले ले कर माँ से सेक्स कर रहे थे।

मैं देखती रही, मैं भी तो इंसान हूँ, देखते देखते मेरी चूत ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया।

मैंने अपनी लोअर में हाथ डाला और अपनी चूत का दाना मसलने लगी।

उधर माँ चुद रही थी और इधर बाहर मैं अपनी ही माँ की चुदाई देख कर अपनी चूत सहला रही थी।

मैंने देखा माँ नीचे से माँ ने चाचाजी को अपने सीने से लगा लिया, मतलब माँ झड़ने वाली थी, फिर माँ ने अपना सर ऊपर उठाया और अपनी जीभ निकाल कर चाचाजी के मुँह में दे दी और नीचे से ज़ोर ज़ोर से कमर उचकाने लगी।

मैं आज पहली बार माँ को इतना वाइल्ड होते देखा था, जैसे वो चाचाजी को खा जाना चाहती हो, माँ ने अपनी कमर ऊपर हवा में ही उठा रखी थी, फिर माँ धड़ाम से नीचे गिर पड़ी।

उसके चेहरे पे बड़ी संतुष्टि झलक रही थी। चाचाजी मुस्कुरा रहे थे।

फिर चाचाजी ने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी क्योंकि मैच वो जीत चुके थे, अब तो बस मैच खत्म ही करना था।

थोड़ी देर तेज़ तेज़ चुदाई के बाद चाचाजी ने अपना लण्ड बाहर निकाला और वीर्य की पिचकारियाँ छोड़ दी।

उनका वीर्य माँ के मुँह तक धार मार गया, मैं चुपके उठ कर आ गई और अपने कमरे में सो गई।

थोड़ी देर बाद माँ भी आ गई।
 
सुबह पहले मैंने सोचा के माँ से बात करूँ मगर, क्या बात करूँ, और कैसे करूँ, यही समझ नहीं आ रहा था।

फिर मैंने एक स्कीम सोची, मैंने रात को जो दूध माँ और चाचाजी को दिया, उसमे नींद की गोलियाँ मिला दी।

मगर मोहब्बत करने वालों को नींद कहाँ आती है, करीब डेढ़ बजे जब मैं उठी तो देखा के माँ अपने बिस्तर पे नहीं थी।

मैं फिर बाहर जा कर खिड़की से देखा, आज चाचाजी नीचे लेटे थे और माँ उनके ऊपर।

दोनों प्रेमी आपस में बातें करते एक दूसरे को चूम चाट रहे थे।

मैं उन्हें छोड़ कर अपने कमरे में आ गई और सो गई।

सुबह जब मैं उठी तो माँ अपने बिस्तर पे नहीं थी।

मैंने चाय बनाई और दो कप लेकर चाचाजी के कमरे में चली गई।

दरवाजा खटखटाया तो नींद में ही चाचाजी उठे और बेख्याली में ही दरवाजा खोल गए वो केवल एक चड्डी पहने थे।

जब मैं कमरे में दाखिल हुई तो देखा, माँ की नाईटी, ब्रा और चाचाजी के कपड़े वगैरह सब इधर उधर बिखरे पड़े हैं।

मैंने माँ को जगाया, माँ उठी और मुझे देख कर चौंक गई।

अब माँ मेरे सामने कपड़े भी नहीं पहन सकती थी क्योंकि कपड़े तो कमरे में बिखरे पड़े थे।

माँ चादर में अपने आप को ढकने की कोशिश कर रही थी मगर उनके नंगे बदन की शेप तो फिर भी चादर में से भी दिख रही थी।

‘वो रात मुझे बड़ी बेचैनी सी हो रही थी तो मैं बाहर घूमने आई थी मगर पता नहीं क्यों मुझे चक्कर सा आ गया और मैं गिर पड़ी, तुम्हारे चाचाजी ने देख लिया और मुझे संभाल के यहाँ ले आए और…’ माँ अपनी सफाई दे रही थी मगर मैं संयत रही, मैं जानती थी कि ये सब झूठे बहाने हैं, आज ऐसे लग रहा था जैसे मैं माँ हूँ और वो मेरी बेटी, जो मुझे अपनी गलती का स्पष्टीकरण दे रही हो।

मैंने माँ से पूछा- कब से चल रहा है ये सब?

फिर माँ ने खुद ही बता दिया कि शादी के एक हफ्ते बाद ही चाचाजी हमारे घर आए थे और उन्होंने बहुत शराब पी रखी थी, शराब के नशे में ही उन्होंने खुल्लम खुल्ला अपने प्यार का इज़हार कर दिया, मैंने कुछ नहीं कहा, मेरी चुप्पी को इन्होंने इकरार समझ लिया और मुझे बाहों में भर लिया, मैंने आज तक किसी मर्द को अपने पास फटकने नहीं दिया, मगर पता नहीं क्यों मैं इन्हें इंकार नहीं कर पाई, ये आगे बढ़ते गए और मैं न चाहते हुये भी इनकी बदतमीजी बर्दाश्त करती रही। और आगे बढ़ते बढ़ते इन्होंने मेरी साड़ी खींच दी, मुझे बेड पे पटका और मेरे ऊपर चढ़ गए, मैं नीचे लेटी इन्हे वो सब करने देती रही जो शायद मैंने कभी किसी के बारे में सोचा भी नहीं था।

इन्होंने मेरे सारे कपड़े तार-तार कर दिये, और बिना मेरी कोई भी बात सुने मेरे सामने ही अपने सारे कपड़े भी उतार दिये। तेरे पिता के जाने के बाद उस दिन मैंने पहली बार फिर से किसी मर्द का तना हुआ लिंग देखा था। मैं तो बस देखते ही रह गई, और इन्होंने मेरी टाँगे उठाई और अपना लिंग मेरे अंदर डाल दिया। मैं तैयार नहीं थी सो थोड़ा सा दर्द हुआ, मगर उसके बाद तो इन्होंने मुझे ज़िंदगी का भरपूर सुख दिया, जिसका मैं सालों से इंतज़ार कर रही थी।

और तब से हम दोनों के संबंध हैं। ये तो अक्सर हमारे घर आते जाते रहते हैं, 3-4 बार तो ये रात भी गुज़ार के गए हैं। ये तो मुझसे शादी भी करना चाहते हैं, मगर मैंने मना कर दिया।

खैर अब जब मेरी और माँ की बात आपस में पूरी तरह से खुल गई तो मैंने भी माँ को बता दिया के मैं सुरेश के साथ साथ उसके दोनों भाइयों से भी सेक्स करती हूँ।

माँ बोली- मैं जानती हूँ इन्होंने बताया था, एक दिन तुम दोनों के साथ लगी थी दोपहर को जब ये किसी काम से तुम्हारे कमरे में आए थे, जब राकेश तुम्हें चोद रहा था और महेश ने तेरे मुँह में दे रखा था।

हम दोनों हंस पड़ी।

फिर माँ ने कहा- मैं तेरे चाचाजी से शादी करना चाहती हूँ।

मैं तो सुन के हैरान ही रह गई, बोली- माँ अगर तुम चाचाजी से शादी कर लोगी, तो मेरा और सुरेश का क्या रिश्ता बनेगा, सोचा है आपने? आप मेरी माँ के साथ मेरी चाची सास भी बन जाएंगी, यह नहीं हो सकता।

मगर माँ तो कुछ सुनने को तैयार ही नहीं थी, बोली- मुझे नहीं पता अब मैं इनके बिना नहीं रह सकती, जैसे मर्ज़ी कर, अगर तुम न मानी तो हम दोनों भाग के शादी कर लेंगे।

मैं मन ही मन सोच रही थी कि ‘हे भगवान मैं यह कहाँ आ फंसी, मैं अपनी तो इज्ज़त बचा न सकी इन लोगों ने तो मेरी माँ को भी नहीं बख्शा।’

..........................
 
अजय ने खाना खाया और उसके बाद सौंदर्या बर्तन उठाकर धोने के लिए चली गई। अजय को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो कैसे उन गुण्डो के बारे में पता लगाए। वो अपने विचारो में डूबा हुआ था और कोई रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा था। वहीं सौंदर्या बर्तन धोने के बाद अपने कमरे में चली गई।

आज बेहद गरम दिन था और दिन में धूप बहुत तेज निकली थी जिसके कारण अभी तक गर्मी महसूस हो रही थी।

सौंदर्या को पसीना आ रहा था इसलिए उसने अपने कमरे में जाकर एसी ऑन किया। रात के समय उसे हल्की और सफेद रंग की सूती नाइटी पहनने की आदत थी इसलिए उसने अपनी ब्रा पेंटी पहनते हुए उपर सफेद रंग की नाइटी पहन ली।

सौंदर्या ने अपनी अलमारी खोली और डिल्डो को देखने लगी। उसने डिल्डो के पैकेट को ठीक से छुपा दिया और उसके होंठो पर मुस्कान तैर गई। वो आज पूरी तरह से मस्ती करने के मूड में थी और उसने अपना फोन निकाल कर रिकॉर्डिंग सुनने का फैसला किया और जैसे ही उसने फोन शुरू किया तो लाइट चली गई।

उसका मूड खराब हो गया क्योंकि उसे अभी भी पसीना आया हुआ था। उसने अपना हेड फोन लिया और उपर छत की तरफ चल पड़ी।

छत पर जाकर उसे हवा लगी और कुछ ठंडक का एहसास हुआ तो उसे सुकून मिला। थोड़ी देर में उसका सभी पसीना सूख गया और उसके दिल में फिर से उमंगे जवान होने लगी और उसे फिर से रिकॉर्डिंग सुनने का मन हुआ लेकिन वो जानती थी कि अभी सही समय नहीं हैं इसलिए वो छत पर घूमती रही।

बाहर अभी अभी अंधेरा थोड़ा बढ़ रहा था। नीचे अजय भी गर्मी के कारण परेशान था इसलिए वो भी उपर छत की तरफ आने लगा। अपने कमरे के सामने आते ही उसे ठंडी हवा का एहसास हुआ।उसने अपनी दीदी को ना देखा तो उन्हें आवाज लगाईं

" दीदी कहां हो आप ?

छत पर से सौंदर्या की आवाज आई :"

" भाई नीचे गर्मी थी तो मैं छत पर आ गई। तुम भी उपर आओ ना देखो कितनी अच्छी हवा चल रही है यहां छत पर !!

अजय उपर की तरफ चल पड़ा और देखा कि उपर छत पर सच में दूर दूर से खुली हवा लग रही थी और देखते ही देखते हवा में ठंडक थोड़ी बढ़ गई।

अजय:" दीदी सच में यहां तो बहुत अच्छी हवा चल रही है। ऐसी हवा में शहर में कहां नसीब होती हैं ? आप उधर कहां हो ?

सौंदर्या बिल्कुल अजय के सामने आ गई और बोली:

:" हाँ भाई ये बात तो हैं। गांव के तो अपने अलग ही मजे हैं। बिल्कुल शुद्ध खाना और ताजी सब्जियां हवा।

अजय ने जैसे ही अपनी दीदी को नाइटी में देखा तो उसे अपनी दीदी बहुत प्यारी लगी। सच में सफेद रंग की इस नाइटी में सौंदर्या बहुत खूबसूरत लग रही थी। धीरे धीरे अंधेरा बढ़ रहा रहा लेकिन बिल्कुल पास से अभी भी सब कुछ साफ दिख रहा था। नाइटी सौंदर्या के जिस्म पर पूरी तरह से कसी हुई थी।

अजय अपने दीदी के जिस्म के एक एक कटाव को ध्यान से देख रहा था तो सौंदर्या को शर्म महसूस हुई और बोली:"

" भाई क्या हुआ, ऐसे क्यों देख रहे हो मुझे ?

अजय: देख रहा हूं मेरी दीदी कितनी खूबसूरत है। वैसे दीदी आप इस नाइटी में बिल्कुल कमाल लग रही हो।

सौंदर्या:" भाई क्या फायदा इस खूबसूरती का जब इसकी किसी को कद्र ही नहीं हो।

इतना कहते हुए सौंदर्या हल्की सी उदास हो गई तो अजय उसके बिल्कुल पास पहुंच गया और बोला:'

" दीदी आप इस तरह उदास मत हुआ कीजिए। आपका भाई हैं ना आपकी कद्र करने के लिए।

सौंदर्या ने अपनी भाई की बात सुनकर एक बार उसे देखा और थोड़ी तेजी से बोली:"

" ऐसे कुछ भी बोल देते हो तुम अज्जु भाई। पागल लड़के बहन की खूबसूरती की कद्र भाई नहीं उसके पति करते है।

सौंदर्या की बात सुनकर अजय को अपनी कहीं हुई बात का मतलब समझ में आया तो उसे एहसास हुआ कि उसने क्या बोल दिया हैं और वो बोला:"

" दीदी मेरा मतलब वो नहीं था, मैं ये कहना चाह रहा था कि आपका भाई आपका बहुत ख्याल करेगा और जल्दी ही आपकी कुंडली से दोष भी दूर हो जाएंगे।

सौंदर्या दोष दूर वाली बात सुनकर खुश हुई और उसने अपने भाई का हाथ पकड़ लिया और बोली:"

" क्या सच मैं भाई ? लेकिन ये सब कैसे हो सकता है ? सभी पंडित तो मना करके चले जाते है कि इसका कुछ नहीं हो सकता।

अजय:" मम्मी बता रही थी कि उन्होंने आचार्य तुलसी दास से मिलने के लिए समय मांगा है। और जहां तक मैंने सुना हैं उनके पास हर समस्या का समाधान होता हैं।

अजय की बाते सुनकर सौंदर्या को एक सुकून मिला और बोली:"

" सच में भाई अगर ऐसा हो जाए तो मा भी कितनी खुश होगी। बेचारी मेरी वजह से कितनी परेशान होती है।

अजय:" दीदी मा से ज्यादा खुश तो आप हो जाएगी क्योंकि आपको आपकी खूबसूरती की कद्र करने वाला भी मिला जाएगा फिर कोई।

सौंदर्या के होंठो पर एक पल के लिए मुस्कान तैर गई और अगले ही पल शरमाते हुए बोली:"

" बस बस। ज्यादा मजे मत लो मेरे तुम अज्जु भाई। ज्यादा मत सोचो तुम।

अजय: " दीदी आप जब स्माइल करती है तो कितनी प्यारी लगती है। सच में दीदी।

सौंदर्या:" क्या बात है भाई, आज अपनी बहन की बड़ी तारीफ कर रहे हो तुम।

अजय:" तो इसमें बुराई क्या है, मेरी दीदी सच में हैं भी तो तारीफ ये काबिल।

तभी बहुत जोर से आसमान में बिजली कड़की और सौंदर्या डर के मारे उछल कर अजय के गले लग गई तो अजय ने उसे अपनी बांहों में भर लिया और बोला:"

" क्या हुआ मेरी दीदी बस इस बिजली से डर गई ? कहां तो आप गुण्डो से लड़ पड़ती हो और अभी बिजली से डर गई।

सौंदर्या कांपती हुई बोली:" भाई मुझे बिजली से बहुत डर लगता हैं सच में।

देखते ही देखते रिमझिम बारिश शुरू हो गई और अजय बोला:"

" दीदी बारिश शुरू हो गई है। छोड़ो मुझे नहीं तो हम दोनों भीग जायेगे।
 
सौंदर्या ने अजय को छोड़ दिया और जैसे ही उससे अलग हुई तो फिर से तेजी से एक बिजली कड़क उठी और सौंदर्या फिर से अपने भाई से कसकर लिपट गई और बोली:"

" भाई देखो कितनी जोर से कड़क रही हैं। डर लगता है मुझे बहुत मेरे भाई।

बारिश तेज दोनो के कारण दोनो पूरी तरह से भीग गए और अजय बोला:"

" दीदी देखो ना इस बिजली के चक्कर में हम पूरी तरह से भीग गए हैं।

सौंदर्या:" भाई जब भीग ही तो नहा लेते हैं अब बारिश में। वैसे भी सीजन की पहली बारिश में मुझे नहाना बहुत पसंद है।

अजय:" अच्छा दीदी। अगर बीच में बिजली कड़क उठी तो फिर क्या होगा?

सौंदर्या ने उसे हल्का सा घूरा और बोली:" तो फिर से अपने भाई से चिपक जाऊंगी। तुम बचा लोगो मुझे।

इतना कहकर सौंदर्या छत के बीच में आ गई और आंखे बंद कर के खड़ी हो गई और नहाने लगी। नाइटी पूरी तरह से गीली होकर उसके जिस्म से चिपक गई थी और उसके जिस्म की बनावट पूरी तरह से साफ साफ नजर आ रही थी।अजय ने पहली बार अपनी बहन को इस मादक रूप में देखा और उसकी आंखे खुली की खुली रह गई। उसके चिकने कंधे, सफेद रंग की ब्रा में कैद उसकी भरी भरी, गोल गोल ठोस चूचियां, बहुत ही सुन्दर सा पेट और चिकनी जांघों को देखकर अपनी पलके तक झपकाना भूल गया। तभी सौंदर्या के गालों पर पानी की एक बूंद आ गिरी और सौंदर्या ने अपने होंठो को खोलते हुए अपनी जीभ को बाहर निकाला और उस बूंद को चाट लिया। अजय अपनी बहन की इस हरकत पर पूरी तरह से फिदा हो गया और उसे प्तागी नहीं चला कि कब वो बारिश में नहा रही सौंदर्या के पास बिल्कुल पास पहुंच गया।

बारिश में भीग चुकी नाइटी सौंदर्या के जिस्म पर ना होने के बराबर हो गई थी। बारिश की बूंदे सौंदर्या के जिस्म को और जला रही थी जिससे सौंदर्या पूरी तरह से मदहोश हो गई और उसने अपने दोनो हाथ उपर उठा दिए और अपने सिर के पीछे बांध दिए। अजय पर उसकी ये हरकत एक ज़ुल्म के समान हुई क्योंकि इससे उसकी चूचियां पूरी तरह से तन कर बिल्कुल अजय के सामने आ गई।

अपनी बहन के इस कामुक अंदाज को देखते ही अजय की धड़कन पूरी तरह से बढ़ गई और उसके जिस्म में हलचल सी मच गई। वो धीरे धीरे क़दमों से चलता हुआ बिल्कुल सौंदर्या के करीब हो गया और उसकी चूचियों को गौर से देखने लगा।

तभी सौंदर्या ने अपनी आंखे खोल दी और अजय की हालत खराब हो गई लेकिन सौंदर्या को उसकी इस हरकत का एहसास नहीं हुआ और बोली:"

" ओह भाई तुम भी नहा लो अच्छे से। गांव की बारिश में देखो कितना मजा आ रहा है।

अजय ने अपनी आंखे सौंदर्या की आंखो में डाल दी और बोला:"

" सच में दीदी। बहुत अच्छा लग रहा है। बचपन में भी हम दोनों ऐसे ही साथ नहाते थे छत पर।

सौंदर्या:" हाँ भाई। मुझे सब कुछ याद हैं।

सौंदर्या अपने दोनो हाथ पीछे ले गई और अपने बालो को खोलने लगी ताकि खुल कर बारिश का मजा ले सके। लेकिन जल्दी के चक्कर में उसकी क्लिप बालो में फंस गई और उसके उसे दर्द का एहसास हुआ तो उसके मुंह से एक आह निकल पड़ी।

सौंदर्या:" उफ्फ भाई। मेरी क्लिप बालो में फंस गई है। निकाल दो ना, आह कितना दर्द कर रही है।

अजय अपनी बहन के पीछे पहुंच गया और उसके बालो में फसी हुई क्लिप को निकालने लगा। अजय अपनी हाथ से क्लिप निकाल रहा था और उसकी नजरे अपनी बहन के दूध से गोरे चिट्टे कंधो पर टिकी हुई थी जिसे देखकर अजय के लंड में भी तनाव आ रहा था।

सौंदर्या:" आह क्या हुआ भाई? निकल नहीं रही हैं क्या ?

अजय ने हल्की सी ताकत लगाई तो उसके बाल खींच गए और उसे दर्द का एहसास हुआ तो सौंदर्या बोली:"

" आह भाई। थोड़ा आराम से करो ना, दर्द होता है।

अजय:" दीदी देखो ना कितनी बुरी तरह से फंस गई है। थोड़ी दिक्कत हो होगी ही।

सौंदर्या:" अच्छा रुक में थोड़ी मदद करती हूं ।

सौंदर्या थोड़ी पीछे को हुई और उसने अपनी गर्दन को पीछे की तरफ झुका दिया ताकि उसे निकालने में आसानी हो। गर्दन पीछे की तरफ झुकते ही सौंदर्या की चूचियां अपने आप उपर उठती चली गई।

पीछे होने से सौंदर्या अजय से जा लगी और उसकी कमर अजय की छाती से मिल गई। अजय को अनोखे सुख की अनुभूति हुई और उसने क्लिप पर अपनी नजरे टिका दी और खोलने लगा।

सौंदर्या:" आह भाई। लगता है खुल जाएगा।

क्लिप अजय के हाथ में थी और कभी भी खोल सकता था। अजय ने एक आखिरी बार अपनी बहन के कंधे को देखने का सोचा और कंधे पर नजर पड़ते ही उसे सौंदर्या की मस्त मस्त गोल चूचियां आधे से ज्यादा उपर की तरफ उठी नजर आईं तो उन्हें देखने के लिए वो थोड़ा सा और आगे की तरफ झुक गया और उसकी जांघें सौंदर्या के पिछवाड़े से मिल गई। अजय ने सौंदर्या के कुछ बाल पकड़े और उन्हें क्लिप में फिर से फंसा दिया।
 
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