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मांगलिक बहन

गाड़ी काफी देर से चल रही थी और पीछे बैठी हुई दोनो बाते कर रही थी। रात का करीब एक बज गया था और सौंदर्या को नींद आ गई तो वो वहीं खिड़की से सिर लगाकर सो गई। शहनाज़ ने उसके दोनो पैर सीधे किए और खुद थोड़ी सी आगे होकर सीट के अगले हिस्से पर बैठ गई।

अजय ने पीछे देखा कि सौंदर्या सो गई हैं तो उसने इस बार खिड़की से नहीं बल्कि अपनी पूरी गर्दन पीछे घुमाते हुए शहनाज़ की तरफ देखा और उसे स्माइल देते हुए बोला:"

" क्या हुआ नींद नहीं आ रही है क्या आपको शहनाज़ ?

शहनाज़ ने भी इसे स्माइल दी और बोली:" मुझे नींद नहीं आ रही हैं बिल्कुल भी लेकिन सौंदर्या पूरी तरह से गहरी नींद में सो गई है अजय।

अजय उसकी बात सुनकर खुश हो गई। क्योंकि जिस तरह से शहनाज़ से पूरी गहरी नींद शब्द का इस्तेमाल किया था उससे एहसास हो रहा था कि वो खुद उसे ये बताना चाह रही थी कि अब वो दोनो गाड़ी में अकेले हैं।

अजय: हाँ ये तो बहुत गहरी नींद सोती है बचपन से ही। अब आराम से सुबह तक ऐसे ही सोती रहेगी।

अजय ने भी उसे अपनी तरफ से इशारा दिया कि अब सौंदर्या उठने वाली नहीं है। शहनाज़ सब समझ भी गई लेकिन उसमें कुछ पहला करने की हिम्मत नहीं थी। अभी तक जो कुछ हुआ पूजा के बहाने हुआ था इसलिए उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे आगे बढ़ा जाए।

अजय मर्द था तो पहल उसे ही करनी थी इसलिए बोला:"

" आप पीछे आराम से तो बैठी हुई हैं ना ? कुछ दिक्कत तो नहीं हो रही आपको ?

शहनाज़ को लगा कि यही सही मौका हैं इसलिए बोली:"

" नहीं कुछ ज्यादा नहीं !!

शहनाज़ ने जान बूझकर नपा तुला सा जवाब दिया। अजय तड़प सा उठा क्योंकि उसे लगा था कि शहनाज़ आगे बैठने के लिए कहेगी लेकिन शहनाज़ ने बात को अधूरा ही छोड़ दिया था। कुछ ज्यादा नहीं तकलीफ बोलकर शहनाज़ ने अजय के दिमाग में हलचल मचा दी कि वो आगे बैठना तो चाहती है लेकिन अजय की मर्जी से तो अजय ने फिर से कोशिश करना ही बेहतर समझा और उसने गाड़ी की स्पीड को कम किया और पीछे देखते हुए शहनाज़ की आंखो में देख कर बोला:"

" आपको थोड़ी सी भी दिक्कत होगी तो मुझे दुख होगा। वैसे पीछे इतनी सी जगह में आपको सोने में दिक्कत होगी।

शहनाज़ फिर से उसका ऑफर सुनकर ललचा गई और उसे स्माइल देते हुए बोली:"

" दिक्कत नहीं होगी क्योंकि मुझे नींद नहीं आ रही है अजय।

इतना कहकर शहनाज़ ने अपनी मेक अप किट को खोला और उसमे से एक गहरे लाल रंग की लिपस्टिक निकाल ली।

अजय उसकी बात सुनकर समझ गया कि अरमान तो उसके भी मचल रहे हैं नहीं तो ये रात को लिपस्टिक क्यों निकाल रही है कहीं मुझे उकसा तो नहीं रही हैं। अजय से अब बर्दाश्त नहीं हुआ और अपने चेहरे को शहनाज के चेहरे के पास लाते हुए बोला:"

" वैसे आगे गाड़ी में बड़ी और आरामदायक सीट हैं !!

शहनाज़ तो उसकी गोद में बैठने के लिए तैयार थी बस उसकी तरफ से पहल का इंतजार कर रही थी। अजय की तरफ से ऑफर मिलते ही शहनाज़ ने लिपिस्टिक को अपने होंठो पर घुमाया और हिम्मत दिखाते हुए बोली:"

" तो क्या मैं आगे बैठ जाऊं अजय !

शहनाज़ ने कांपते हुए कहा और अजय की आंखो में देखते हुए स्माइल दी तो अजय ने गाड़ी को बिल्कुल स्लो कर दिया और ।बोला:*

" आओ जाओ ना शहनाज़। मेरे पास ही बैठ जाओ। तुम्हे तो आगे ही होना चाहिए। रुको मैं पीछे की लाइट भी बंद कर देता हूं।

इतना कहकर उसने गाड़ी की आगे और पीछे की दोनो लाइट बंद कर दी और शहनाज़ धीरे से बिना आवाज किए हुए उठी और उसने सीट के बीच में से खाली जगह में अपना पांव आगे रखा और धीरे से आगे को निकल गई। शहनाज़ ने इसी बीच जान बूझकर उंगली से अपनी ब्रा की स्ट्रिप में फंसे हुए साडी के पल्लू को सरका दिया जिससे उसके आगे सीट पर बैठते ही उसकी साड़ी सरक कर नीचे आ गई और उपर से शहनाज़ सिर्फ ब्रा में अजय के सामने आ गई। अजय शहनाज़ को फिर से ब्रा में देख कर खुश हो गया।

बाहर चांदनी रोशनी फैली हुई थी जिसमें शहनाज़ का जिस्म गजब ढा रहा था। अजय बार बार उसकी तरफ देखकर रहा था और बीच बीच में उसकी चूचियों का उभार भी देख रहा था। उसकी चूचियों की गहराइयों के बीच में लटकी हुई सोने की चैन उसकी खूबसूरती और बढ़ा रही थी। अपनी चुचियों के उभार को देख रहे अजय को शहनाज़ ने एक कामुक स्माइल दी।
 
अजय पूरी तरह से उसके लिए पागल हो रहा था और शहनाज़ ये देखकर पूरी तरह से खुश थी क्योंकि वो यही तो चाह रही थी। उसने अपनी लिपस्टिक ली और होंठो पर लगाने लगी तो अजय बोला:"

" इतनी रात में लिपिस्टिक लगा रही हो क्या बात हैं ? किस पर बिजलियां गिरेगी आज ??

शहनाज़ ने अपने होंठो को पूरी तरह से लाल कर दिया और अजय को देखते हुए अपने होंठो पर जीभ फेरते हुए बोली:"

" रात में लिपिस्टिक लगा सकते क्या अजय ? वैसे हैं कोई जिसके लिए मैं ये सब कर रही हूं।

इतना कहकर शहनाज़ ने उसे सेक्सी सी स्माइल दी। अजय ने गाड़ी को आगे मोड़ से घुमाया जिससे दोनो को हल्का सा झटका लगा और शहनाज़ मौके का फायदा उठाते हुए उसकी तरफ खिसक गई और एक अपने एक हाथ को उसकी जांघ पर रख दिया। अजय का दिल शहनाज़ को अपने इतने पास पकड़ धड़क उठा। शहनाज़ की गर्म गर्म सांसे उसे अब अपने उपर महसूस हो रही थी।

अजय बेचैन हो रहा था इसलिए बोला:" लगा सकते हैं शहनाज़ और तुम जैसी खूबसूरत औरत को बिल्कुल लगा सकती हैं।

अजय गियर बदलने के लिए अपना हाथ नीचे लाया और उसने गाड़ी को धीमी करते हुए गियर बदला और अपना हाथ उसके हाथ पर टिका दिया। शहनाज़ मचल उठी और उसने अजय की आंखो में देख कर स्माइल दी तो अजय ने उसके हाथ पर अपने हाथ का दबाव दिया और शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी। शहनाज़ की सांसे अब पूरी तेजी से चल रही थी और उसकी चूचियां फिर से उछल कूद कर रही थी।

शहनाज़ ने अपने हाथ की उंगलियों को खोला तो अजय ने अपनी उंगलियां उसकी उंगलियों में फंसा दी और सहलाने लगा। शहनाज़ ने फिर से अपने होंठो पर जीभ फिराई तो अजय ने शहनाज़ की उंगलियों को जोर से दबा दिया तो शहनाज़ ने उसकी जांघ को सहला दिया। अजय ने अब उसके हाथ को अपने हाथ में लिए हुए ही अपनी जांघ को सहलाना चालू कर दिया और शहनाज़ के होंठ कांप रहे थे और धीरे धीरे दोनो एक दूसरे की तरफ खिसक रहे थे और उनके बीच की दूरी कम होती जा रही थी।

शहनाज़ अजय की मजबूत चौड़ी जांघो पर अपनी हथेली रगड़ रही थी और धीरे धीरे अजय उसका हाथ अपने लंड की तरफ बढ़ा रहा था।

दोनो एक दूसरे की आंखो में देख रहे थे और शहनाज़ बार बार उसे देखते हुए अपने होंठो को अपनी जीभ से गीला कर रही थी। अजय बार बार उसके लिप्स को प्यासी नजरो से देख रहा था।

अजय ने शहनाज़ की आंखो में देखते हुए उसके हाथ को अपने लंड के उभार पर टिका दिया। शहनाज़ पूरी तरह से बहक गई और उससे बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने अजय पर झुकते हुए अजय के होंठो को चूम लिया।

अजय इस चुम्बन से मस्त हो गया और उसने शहनाज़ को अपनी खींचा और शहनाज़ खुद ही उसकी गोद में बैठ गई और अपनी दोनो टांगे उसकी कमर में लपेट दी। अजय ने अपने होंठ उसके होंठों की तरफ बढ़ा दिए और शहनाज़ मदहोश होकर उसके होंठ चूसने लगी।

अजय ने भी शहनाज़ का साथ देते हुए अपने एक हाथ को उसकी गर्दन के पीछे लगाया और उसके होंठ चूसने लगा। अजय पूरी तरह से मदहोश हो गया और शहनाज़ ने अपने मुंह को खोल दिया और अजय के होंठ उसके मुंह में घुसते चले गए। दोनो एक दूसरे की जीभ को बारी बारी से चूस रहे थे। अजय शहनाज़ से मुंह से निकलते हुए मादक और रसीले रस को पूरी तरह से मस्त होकर चूस रहा था।

तभी पीछे इन्हे सौंदर्या के हिलने की आवाज आई तो शहनाज़ किस रोककर उसकी गोद से उतरी और अपनी सीट पर बैठ गई। सौंदर्या पीछे अपनी आंखे मलती हुई उठ गई और शहनाज़ को आगे बैठे देखा तो थोड़ी सी हैरान हो गई और बोली:"

" अरे शहनाज़ आप आगे बैठ गई जाकर।

शहनाज का मुंह अभी तक लाल था और होंठो की लिपस्टिक थोड़ी सी फैल गई थी लेकिन गाड़ी में अंधेरा होने के कारण सौंदर्या को नहीं दिखी। शहनाज़ सौंदर्या के जाग जाने से बुरी तरह से डर गई थी इसलिए कांपते हुए बोली

" वो तुम सो गई थी और मुझे नींद नहीं आ रही थी। इसलिए सोचा अजय से ही बात कर लेती हूं।

शहनाज़ ने बड़ी मुश्किल से अपनी बात खत्म करी। अजय उसकी बात को बढ़ावा देने के लिए बोला:"

" दीदी आप सो गई थी और आप ठीक से सो सके पूरी सीट पर बस इसलिए ही ये आगे आ गई थी।

सौंदर्या अजय की बात सुनकर खुश हुई और उसने आज झुकते हुए खुशी में शहनाज़ का गाल चूम लिया। शहनाज़ ने चैन की सांस ली कि वो पकड़ी जाने से बाल बाल बची। भाई होंठ चूमता हैं और बहन मेरे गाल। पता नहीं ये सौंदर्या की कुंडली से दोष निकालने के लिए होने वाली पूजा मुझसे क्या क्या करवाएगी।

.......................
 
सभी के पूजा के लिए जाने के बाद शादाब और कमला दोनो घर के अंदर आ गए और कमला की अजीब सी स्थिति थी। जहां एक ओर वो खुश थी कि आज से उसकी बेटी के कष्ट निवारण के लिए उपाय आरंभ हो गए हैं वहीं दूसरी ओर क्या ये पूजा और उसकी सभी विधियां ठीक से संपन्न हो पाएगी ये सभी सोच कर वो अंदर ही अंदर परेशान थी। शादाब से उसकी ये हालत छुपी नहीं थी इसलिए शादाब बोला:"

" आंटी क्या हुआ आप कुछ दुखी नजर सा रही हो ?

कमला:" बस बेटा ये ही सोचकर परेशान हूं कि क्या पूजा की सभी विधियां ठीक से पूरी हो जाएगी।

शादाब आत्म विश्वास से भरे हुए शब्दो में बोला:"

" बिल्कुल होगी। आप उसकी कोई चिंता मत कीजिए। मुझे अजय पर पूरा भरोसा है। और फिर मेरी अम्मी शहनाज भी तो गई है सौंदर्या दीदी की मदद करने के लिए। वो किसी भी बाधा को पर कर देगी।

कमला थोड़ी भावुक हो गईं और बोली:" भगवान करे तेरी बात सच हो जाए बेटा। मुझे अजय और शहनाज़ बहन पर पूरा भरोसा है। तुम लोग तो मेरे लिए देवता बनकर आए हो बेटा।

इतना कहकर कमला ने शादाब के सामने हाथ जोड़ दिए तो शादाब ने उसके हाथो को अपने हाथो से थाम लिया और बोला:"

" ना आंटी ना, बेटा भी कह रही हो और हाथ भी जोड़ रही हो। ये तो बिल्कुल भी अच्छी बात नहीं है। अजय मेरे सगे भाई जैसा हैं और आपकी हर परेशानी मेरी अपनी हैं एक दम।

कमला:" बेटा सच में आज कल तेरे जैसे दोस्त मिलने मुश्किल हैं। भगवान से प्रार्थना है कि तुम्हे लंबी आयु प्रदान करे।

शादाब:" जी आपका शुक्रिया आंटी जी। वैसे एक बात तो बताओ मुझे काम क्या क्या करना होगा ? घर के काम, खेत के काम वो सब आप बता दीजिए।

कमला:" बस बेटा घर के सारे काम तो मैं खुद ही कर लूंगी। तुम बस खेत से घास ला देना और बाहर बाजार से किसी सामान की जरुरत हुई तो वो लेते आना।

शादाब:" अच्छा ठीक है, मैं सब कुछ बड़े आराम से कर लूंगा। आप बेफिक्र रहिए। अब आप आराम कर लीजिए।

कमला:" अच्छा ठीक है बेटा, तुम भी थोड़ी देर आराम कर लो। फिर सुबह होने में भी ज्यादा समय नहीं बचा हुआ हैं।

इतना कहकर कमला बाहर ही बरामदे में पड़े हुए बेड पर लेट गई और शादाब अंदर बने हुए कमरे में लेट गया। कमला की आंखो से नींद कोसो दूर थी और उसे अभी भी सौंदर्या के बारे में सोचकर चिंता हो रही थी। पता नही पूजा में कोई अपशकुन मा हो जाए। कहीं मेरी बेटी फिर से मांगलिक ही ना रह जाए। बड़ी मुश्किल से एक मौका मिला उपाय करने का तो ये हाथ से नहीं जाना चाहिए। ये सब सोचते सोचते कब उसकी आंख लग रही उसे पता ही नहीं चला।

सौंदर्या और शहनाज़ के साथ साथ अजय भी पूजा के बाद घर वापिस लौट आए और सभी के चेहरे पर उदासी छाई हुई थी। ये सब देखकर कमला का दिल डर के मारे बैठ गया और घबराते हुए बोली'"

" क्या हुआ ? तुम सब इतनी जल्दी कैसे आ गए?

अजय ने अपना चेहरा नीचे किया और उदासी से बोला'"

" मम्मी वो पूजा ठीक से संपन्न नहीं हो पाई क्योंकि शहनाज़ आंटी ने बीच में ही पूजा की कुछ विधि करने से मना कर दिया।

अजय की बात सुनते ही कमला जोर से चींखं पड़ी और उसकी आंख खुल गई। ये भगवान मैं तो ये सपना देख रही थी। कमला डर के मारे कांप रही थी और उसके माथे पर पसीना आया हुआ था।

कमला की आवाज सुनकर शादाब नींद से जाग गया और उसकी तरफ दौड़ा तो देखा कि कमला लंबी लंबी सांस ले रही थी और पसीने पसीने हो गई थी। कमला बेहोश हो गई शादाब ने जल्दी से अपने बैग में किट निकाली और उसका ब्लड प्रेशर चेक किया जो 260 के आस पास था।

शादाब थोड़ी देर के लिए डर गया लेकिन अगले ही पल उसने एक इंजेक्शन उसे लगाया और कुछ ब्लड प्रेशर की दवा दी। शादाब इसके पास ही बैठ गया और उसका ध्यान रखने लगा।

करीब एक घंटे के बाद कमला का ब्लड प्रेशर कम और उसने अपनी आंखे खोल दी। शादाब ने चैन की सांस ली और बोला:"

" आपको क्या हुआ था आंटी ? आप घबरा क्यों गई थी ?

कमला थोड़ी देर छत को देखती रही और शादाब ने फिर से सवाल किया तो बोली:"

" बेटा वो मैंने एक सपना देखा कि पूजा विधि ठीक से नहीं हुई और मेरी बेटी फिर से मांगलिक ही रह गई। बस इसलिए डर गई थी।

शादाब:' ओह आंटी आप भी ना, सपने तो सपने होते हैं। वो सच थोड़े ही होते हैं।

कमला थोड़ी घबराई हुई आवाज में बोली:" नहीं बेटा, मेरे सपने सच ही होते हैं, और सुबह का देखा हुआ सपना तो कभी झूठ नहीं होता।

शादाब:" ऐसा क्या देख लिया आपने ? क्यों पूजा सफल नहीं हुई ये बताओ ?

शादाब का सवाल सुनते ही कमला बोली:" बेटा हुआ ये कि शहनाज ने पूजा की विधि...

इतना कहकर कमला चुप हो गई क्योंकि उसे समझ नहीं आ रहा था कि किस तरह से शादाब को कहे कि उसकी अम्मी ने पूजा विधि ठीक से नहीं करी। शादाब थोड़ा परेशान होते हुए बोला:"

" हाँ आंटी बोलो आप, मेरी अम्मी शहनाज ने पूजा विधि क्या ? आगे भी बोलो कुछ अब

कमला ने अपना मुंह नीचे किया और धीरे से बोली:" बेटा मैंने देखा कि शहनाज़ ने पूजा की विधि ठीक से नहीं करी जिससे पूजा सफल नहीं हुई ।

शादाब के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आए। शहनाज़ की वजह से नहीं बल्कि कमला के अंदर का डर देखकर। उसे अपनी अम्मी पर पूरा भरोसा था लेकिन जिस तरह को मनोदशा से कमला गुजर रही है ये उसके लिए घातक हो सकता था। इसलिए शादाब थोड़ा सोचते हुए बोला'"

"आप बेफिक्र रहे। मेरी अम्मी पूजा में कोई बाधा नहीं आने देगी। मुझे उन पर पूरा भरोसा है।

कमला:" भगवान करे ऐसा ही हो। क्या मैं एक बार शहनाज़ से बात कर लू ? मेरा दिल नहीं मान रहा है बेटा।

शादाब ने अपना मोबाइल निकाला और शहनाज का नंबर मिलाया तो शहनाज़ जो कि अजय के बराबर में आगे बैठी हुई थी अपने बेटे का फोन देखकर खुश हुई और घर से निकलने के बाद उसे पहली बार याद आया की उसका बेटा नहीं उसका शौहर भी हैं तो उसे अपने द्वारा की गई अब तक की हरकतों पर दुख महसूस हुआ और उसने फोन उठा लिया:"

" शादाब कैसे हो बेटा ? आ गई क्या अपनी अम्मी की याद तुम्हे ?

शादाब शहनाज की आवाज सुनकर झूम उठा और बोला:"

" अम्मी आपको भुला ही नहीं हूं तो याद कैसे नहीं नहीं आएगी। लेकिन आपने भी तो फोन नहीं किया अभी तक।

शहनाज़:" वो मैं पूजा की विधि करने में ध्यान पूर्वक लगी हुई थी बस इसलिए नहीं कर पाई।

ये कहते हुए शहनाज़ का चेहरा शर्म से लाल हो गया। शादाब ने चैन की सांस ली और बोला:"

" बिल्कुल सही किया आपने अम्मी, आप चाहे तो जब तक पूजा खत्म नहीं हो जाती मुझसे बात भी ना करे लेकिन पूजा में कोई बाधा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए।

तभी कमला ने शादाब को इशारा किया तो शादाब ने फोन उसकी तरफ बढ़ा दिया और बोला:"

" लो अम्मी पहले आप कमला आंटी से बात कर लीजिए।

कमला ने फोन लिया और बोली:"

" शहनाज कैसी हो तुम ? सब ठीक हैं ना वहां, अजय और सौंदर्या।

शहनाज़:" हाँ जी सब बिल्कुल ठीक हैं, आप फिक्र मत कीजिए। हम जल्दी ही सब काम खत्म करके वापिस आएंगे।

कमला थोड़ी भावुक आवाज में बोली:" मेरी बेटी की ज़िन्दगी अब तुम्हारे हाथ में हैं शहनाज। उसे बर्बाद होने से बचा लेना।
 
शहनाज़ आत्म विश्वास से भरे हुए शब्दो से बोली:"

" आप बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए। सौंदर्या अब सिर्फ आपकी बेटी ही नहीं बल्कि मेरी छोटी बहन भी बन गई हैं। मैं उसके लिए कठिन से कठिन पूजा विधि भी करने से पीछे नहीं हटने वाली। बस आप शादाब का ध्यान रखना।

कमला:" तुमने दिल जीत लिया शहनाज़। शादाब की चिंता मत करो यहां मैं हूं ना उसका ध्यान रखने के लिए।

शहनाज: मुझे आप पर पूरा यकीन है। आप सौंदर्या की तरफ से बेफिक्र रहिए। हम जल्दी ही दोष मुक्त सौंदर्या के साथ घर वापिस आएंगे।

कमला:" भगवान करे तुम्हारे मुंह में घी शक्कर। तुम आओ तो एक बार कामयाब होकर ऐसा स्वागत करूंगी कि तुम मुझे हमेशा याद करोगे।

शादाब सारी बात ध्यान से सुन रहा था और कमला की हालत में सुधार होते देख रहा था। एक डॉक्टर होने के नाते वो बहुत खुश था और उसने कमला को मानसिक रूप से सपोर्ट करने के लिए कमला से फोन लिया और उसका स्पीकर खोल कर बोला:"

" अम्मी मैं यहां बिल्कुल ठीक हूं। कमला आंटी बहुत अच्छी हैं। आप अपना पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ पूजा पर लगाए। पूजा किसी भी हालत में विधिपूर्वक पूरी होनी चाहिए।

शहनाज़:" हाँ शादाब बेटा, तुम उसकी चिंता मत करो, मेरा नाम शहनाज़ है और पूजा विधि इतने अच्छे से करूंगी कि तुम्हे अपनी अम्मी पर नाज होगा। अब मैं सौंदर्या को दोष मुक्त करके ही घर वापिस आऊंगी बेटा।

शहनाज़ की बात सुनकर कमला खुश हो गई। शादाब ने उसके चहेरे पर स्माइल देखी तो उसे लगा कि उसकी योजना काम कर रही है।

शादाब:" मुझे बहुत ख़ुशी है कि मैं आपका बेटा हूं। मुझे अपनी अम्मी पर पूरा यकीन है कि आप पूजा खत्म करके ही वापिस आएंगी। चाहे कितनी भी कठिन विधि हो और आपको कुछ भी करना पड़े लेकिन सौंदर्या दीदी बिल्कुल पूरी तरह से दोषमुक्त

होनी चाहिए।

शहनाज़ ने अपने बेटे की बात सुनी और इसके होठो पर स्माइल आ गई और बोली:"

" तुम बेफिक्र रहो और खुश रहो। मैं सौंदर्या के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दूंगी।

शादाब:" थैंक्स अम्मी, आप आइए फिर आपका बेटा आपक ऐसा स्वागत करेगा कि आप भी याद रखेगी।

शहनाज कुछ बोल रही थी कि लेकिन उसे आवाज नहीं आ रही थी। उसने देखा कि उसके फोन के नेटवर्क नहीं थे तो उसने फोन काट दिया और अजय की तरफ देखा जो उसकी ही बात सुन रहा रहा था।

पीछे बैठी सौंदर्या शहनाज़ की बाते सुनकर भावुक हो गई और उसकी आंखे भर आई थी कि शहनाज़ उसके लिए कितना कुछ कर रही हैं और आगे भी किसी भी हद से गुजर जाने के लिए तैयार है।

वहीं दूसरी तरफ कमला अब पूरी तरह से सुकून महसूस कर रही थी और बोली:"

" बेटा शहनाज़ बहन की बाते सुनकर तो मुझे लग रहा है कि सपने सिर्फ सपने ही होते हैं और सपने देखकर डरना नहीं चाहिए।

" सपना देखकर डरने की कोई जरुरत भी नहीं हैं आंटी क्योंकि सपना कोई चुड़ैल नहीं बल्कि आपकी बेटी की....

सपना बोलते हुए घर के (सौंदर्या की सहेली) अंदर दाखिल हुई। शादाब को देखते ही उसके बाकी के शब्द उसके मुंह में ही रह गए और उसे देखते हुए बोली:"

" ये कौन हैं आंटी जी ?

कमला:" अरे बेटी ये शादाब हैं अजय का दोस्त। इसकी अम्मी अजय और शहनाज़ के साथ पूजा के लिए हरिद्वार गई है इसलिए ये मेरे साथ ही घर में रहेगा कुछ दिन।

सपना ने एक नजर शादाब को उपर से नीचे तक देखा और फिर बोली:" अजय भाई का दोस्त हैं फिर तो ठीक है आंटी जी। आज कल जमाना खराब हैं चोर उचक्के घूमते रहते हैं सुंदर सी सूरत किए। मैं इधर से आ रही थी तो सोचा सौंदर्या से मिलती जाऊ। लेकिन वो तो हैं ही नहीं यहां।

कमला:" अरे तुम सिर्फ सौंदर्या की सहेली ही नहीं बल्कि मेरी बेटी भी हो। सौंदर्या नहीं तो क्या हुआ मैं तो हूं घर पर। और तूने अच्छा किया जो आ गई, अब घर के काम में मेरी मदद करना। मैं तेरे बाप को बोल दूंगी कि तुझे मेरे पास ही छोड़ दिया काम के लिए दिन में तब तक अजय और सौंदर्या नहीं आ जाते।

सपना:" ठीक है आंटी मैं भला किस दिन काम आऊंगी आपके। मुझे बता दीजिए घर के काम क्या क्या हैं ? मैं खुद कर लूंगी।

कमला:" बस भैंस के कुछ काम हैं और हमारे साथ खेत पर चलना घास लेने के लिए। आज के लिए इतना बहुत हैं।

सपना:" हमारे साथ मतलब ये साहब भी खेत पर जाएंगे क्या ?

कमला:" हाँ बेटी शादाब भी मदद के लिए साथ में जाएगा हम दोनों के साथ।

सपना:" बस जी बस ये शहरी लोग बड़े नाजुक होते हैं। कहीं तबियत ही खराब ना हो जाए जंगल की हवा में इनकी।

शादाब कुछ बोल नहीं रहा रहा बस वो आराम से सपना को देख रहा था जो बिना रुके बकबक किए जा रही थी।

कमला:" बेटा तुम भी ना कुछ भी बोल देती हो। थोड़ा सोच समझ कर बोला करो। किसी के नाजुक होने से गांव या शहर का क्या मतलब समझी तुम।

सपना:" मुझे ज्यादा नहीं समझना, जो सही लगा बोल दिया। मै एक बार घर जाके आती हूं और अपने बापू को बोल भी आती हूं कि मैं आपके पास रहूंगी।

इतना कहकर सपना शादाब को देखती हूं घर के बाहर चली गई। उसके जाते ही शादाब के कुछ बोलने से पहले कमला खुद ही बोल पड़ी:"

" बेटा ये सौंदर्या की सहेली हैं, थोड़ी बकबक ज्यादा करती हैं, इसकी किसी बात का बुरा मत मानना। दिल की बहुत अच्छी हैं ये लड़की।

शादाब:" जी आंटी, मैं किसी बात का बुरा नहीं मान रहा, हर इंसान की अपनी सोच होती है।

कमला: अच्छा तुम नहा धोकर फ्रेश हो जाओ। फिर खेत में चलते हैं घास लेने के लिए।

शादाब:"ठीक है। मैं आता हूं।

इतना कहकर शादाब बाथरूम के अंदर चला गया और सपना फिर से घर के अंदर आ गई। कमला दूध गर्म कर रही थी और सपना ने उसकी साथ मिलकर जल्दी से परांठे बना दिए।

थोड़ी देर बाद सभी लोग नाश्ता कर रहे थे। शादाब ने दूध का ग्लास खाली किया और कमला ने इसे फिर फिर से भर दिया तो सपना हंस पड़ी और बोली:"

" क्या आंटी एक गल्लास पी लिया वहीं बहुत हैं। इससे ज्यादा कहां पीते है शहर वाले ?

शादाब के होंठो पर उसकी बात सुनकर स्माइल आ गई और बिना कुछ बोले दूध का ग्लास फिर से उठाया और एक ही सांस में पूरा ग्लास खाकी कर दिया।

सपना:" वैसे मुझे लगता है कि तुम्हे दूध पसंद हैं। अच्छी बात है दूध पीना सेहत के लिए अच्छा होता है बहुत।

शादाब:" मुझे दूध बहुत पसंद है सपना मैडम।

सपना शादाब की खूबसूरती से काफी प्रभावित थी और उसके दूध पीने से उसे अच्छा लगा था इसलिए बोली:"

" सपना ही ठीक है मैडम मत बोलो तुम। और हाँ एक बात और मेरी किसी बात का बुरा मत मान लेना। जुबान थोड़ा ज्यादा ही चलती हैं मेरी।

उसकी बात सुनकर शादाब मुस्कुरा दिया और कमला हंसने लगी। नाश्ता करने के बाद सभी लोग खेत पर जाने के लिए तैयार हो गए तभी कमला की एक सहेली बिमला आ गई तो वो उससे बाते करने लगी। बाहर मौसम भी थोड़ा खराब हो गया था और काले काले बदल आसमान में उमड़ रहे थे।

कमला:" अरे सपना बिमला इतने सालो के बाद आई हैं मैं उससे बात कर लेती हूं। तुम शादाब के साथ खेत में चली जाओ और घास लेती आओ।
 
सपना;" हाँ हाँ, जी भर कर बात करो। जाती हूं मैं।

इतना कहकर सपना बाहर आ गई और शादाब भी उसके पीछे पीछे चल पड़ा। सपना शादाब को देखते हुए बोली:" अच्छा तुम खेत पर कैसे जाओगे ? ट्रैक्टर चलाना आता है क्या तुम्हे?

शादाब:" नहीं वो तो नहीं आता मुझे।

सपना:" लो जी कर को बात, फिर क्या पैदल जाओगे खेत पर। एक काम करती हूं मैं अपना भैंसा बुग्गी के आती हूं।

इतना कहकर वो अपने पैर पटकती हुई चली गई और थोड़ी देर बाद ही भैंसा बुग्गी लेकर आ गई और बोली:"

" अब खड़े खड़े मेरा मुंह क्या देख रहे हो, आओ बैठो, जाना नहीं है क्या तुम्हे !!

शादाब:" हाँ हाँ बैठता हूं रोको तो पहले इसे।

शादाब चलती हुई बुग्गी में बैठ गया लेकिन हल्का सा लड़खड़ा गया और सपना बोली:"

" अरे आप तो गिर ही गए होते। थोड़ा संभाल कर बैठो आप।

इतना कहकर उसने बुग्गी को चला गया और शादाब उसके पास ही बैठ गया। सपना बीच बीच में उसे ही देख रही थी और सोच रही थी कि ये सच में बेहद सीधा और खूबसूरत है। सपना काफी रंगीन मिजाज लड़की थी और गांव के काफी सारे लडको के साथ मस्ती कर चुकी थी। उसे शादाब अच्छा लगा और उसने उस पर डोरे डालने का सोच लिया।

सपना:" क्या करते हो आप शादाब जी ?

शादाब:" मैं डॉक्टर हूं और अमरीका से अपनी पढ़ाई पूरी कर रहा हूं। इंडिया वापिस आया तो अजय से मिलने आ गया था बस।

सपना अमेरिका का नाम सुनते ही खुश हो गई और बोली:"

" अच्छा मैंने सुना हैं कि वहां काफी गोरी गोरी मेम होती है।

शादाब:" जी बिल्कुल आपने ठीक सुना हैं। ऐसा हो होता है।

सपना:" अच्छा जी। फिर तो आपने काफी सारी मस्ती की होगी वहां। मौसम थोड़ा खराब ही लग रहा है मुझे आज, देखो कितने काले काले बाद उमड़ रहे हैं उपर।

सपना आसमान की तरफ देखते हुए कहा और जैसे ही शादाब ने आसमान में देखा तो अपना ने जान बूझकर शादाब की नजर बचा कर अपनी नीचे रंग की ब्रा का स्ट्रैप सूट से बाहर निकाल कर अपने कंधे पर कर दिया।

शादाब ने जैसे ही उसकी तरफ देखा तो उसे उसके कंधे पर ब्रा का स्ट्रिप नज़र आया और शादाब को थोड़ी सी हैरानी हुई कि ये कैसे बाहर निकल आया। खैर शादाब ने उसे देखा तो ये सपना के लिए बड़ी बात थी।

सपना:" अच्छा तो मैं पूछ रही थी कि गोरी गोरी मेम तो तुम्हारे उपर फिदा हो गई होगी।

शादाब:" नहीं ऐसा तो कुछ नहीं हुआ। मैं तो वहां अपनी अम्मी के साथ ना।

सपना:" ओहो अब क्या कॉलेज में भी तुम्हारी अम्मी साथ जाती थी। इतने सुन्दर हो तुम, तुम्हारे लिए तो लाइन लग जाएगी लड़कियो की।

इतना कहते हुए सपना ने अपनी एक कोहनी का दबाव अपनी छाती पर दिया तो उसकी चूचियां थोड़ी सी नजर आने लगी और शादाब फैसला नहीं कर पाया कि क्या करे। उन्हें देखे या नहीं। लेकिन मर्द कोई भी हों उसकी जान औरत की गोलाईयों में बसती है और शादाब भी कोई देवता तो था नहीं इसलिए ना चाहते हुए भी उसकी नजर एक पल के लिए सपना की गोलाईयों पर चली गई और बोला:"

शादाब:" मैं इतना भी सुंदर नहीं हूं। वैसे मुझे कोई शोक नहीं कि मेरे पीछे लाइन लगे।

सपना:" अजी तुम्हे क्या पता। मुझसे पूछो तो पता चले।

शादाब:" अच्छा क्या सच में मैं इतना सुन्दर हूं? तुम भी बताओ।

सपना:" और नहीं तो क्या, तुम तो एक बहुत ही खूबसूरत नौजवान हो।

तभी आसमान से बारिश पड़ने लगी और देखते ही देखते दोनो पूरी तरह से भीगते चले गए।सपना का सफेद रंग का सूट उसके बदन से भीग कर पूरी तरह से चिपक गया और उसकी ब्रा तक साफ दिख रही जिसमे कैद उसकी मध्यम आकार की चूचियां अपना वजूद दर्शा रही थी। शादाब उसे बार बार तिरछी नजरो से देख रहा था और सपना बार बार उसकी तरफ ही देख रही थी। भीग जाने के कारण पीछे से उसकी कमर बिल्कुल साफ नजर आ रही थी। शादाब ना चाहते हुए भी ये सब देखकर उत्तेजित हो गया और उसके लंड अपनी औकात दिखाते हुए खड़ा हो गया।
 
खेत आ गया था और शादाब बुग्गी से उतर गया और सपना ने बुग्गी को खेत के बाहर ही खड़ा कर दिया और खेत में घुस गई और घास काटने लगीं। शादाब का खड़ा हुआ पेंट में बहुत बड़ा उभार बना रहा था और ये देखते ही सपना की आंखे चमक उठी और योजना बनाने लगी। शादाब खेत में आ गया और उसकी मदद करने लगा तो सपना सोच समझ कर बोली:"

" मैं कर लुंगी। आप एक काम कीजिए भैंसे को थोड़ा घास डाल दीजिए। पेट भरकर खा लेगा बेचारा।

शादाब ने थोड़ा सा घास उठाया और भैंसे की तरफ लेकर चल दिया। सपना की आंखे चमक उठी क्योंकि शादाब एक कच्ची सड़क पर था जिस पर पानी भर गया था। सपना ने धीरे से अपना हाथ पीछे ले जाकर अपनी ब्रा का हुक खोल दिया और उसकी चूचियां उसके सूट के अंदर आजाद हो गई।

शादाब ध्यान से आगे बढ़ता रहा और उसने भैंसे को घास दिया और फिर वापिस सपना की तरफ बढ़ गया। रास्ते में हुई कीचड़ से इस बार वो बच नहीं पाया और फिसल कर उसमें गिर गया। शादाब के गिरते ही सपना खुश होती हुई उसकी तरफ दौड़ी जिससे उसकी चूचियां सूट में उछलती हुई नजर आईं और सादाब ये देखकर हैरान हो गया कि इसकी ब्रा कहां चली गई।

सपना ने उसका हाथ पकड़ा और उठाते हुए बोली;"

" उफ्फ तुम भी गिर ही गए, सारे कपड़ो पर कीचड़ लग गया।

उसे उठाने का बहाना करते हुए वो खुद भी उसके उपर गिर पड़ी। दोनो के कीचड से भीगे हुए बदन टकरा गए तो सपना के मुंह से आह निकल पड़ी। शादाब ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे साथ साथ उसे भी खड़ा कर दिया।

सपना:" तुम्हारे चक्कर में मैं भी गिर गई। अब नदी में नहाना होगा तभी ये कीचड़ साफ होगी। आओ मेरे साथ।

इतना कहकर उसने अपना छुडाया और नदी की तरफ बढ़ गई।नदी के पास जाकर शादाब ने अपनी गंदी पेंट को उतार दिया तो सपना समझ गई कि उसकी चाल कामयाब हो गई हैं। दोनो एक साथ उतर गए और साफ पानी में दोनो के शरीर का कीचड़ बिल्कुल साफ हो गया।

सपना:" अरे शादाब देखो मेरी कमर साफ कर दो ठीक से हाथ नहीं जा रहा है।

इतना कहकर वो उसके पास आ गई और शादाब ने अपने दोनो हाथ उसकी कमर पर टिका दिए और साफ करने लगा। कीचड़ तो कहीं नाम के लिए भी नहीं लगी हुई थी और शादाब बस उसकी कमर सहला रहा था। सपना उसकी तरह धीरे धीरे खिसक रही थी और जल्दी ही उसकी गांड़ शादाब के अंडर वियर के उभार से जा टकराई तो सपना की आंखे मस्ती से बंद हो गई। सपना नीचे पेंटी नहीं पहनती थी इसलिए शादाब के लंड का उभार उसकी गांड़ पर अच्छे से रगड़ दे रहा था और सपना खुद ही अपनी गांड़ आगे पीछे कर रही थी।

शादाब उसकी हरकत से जोश में भर गया और उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर अपने अंडर वियर को नीचे सरका दिया और जैसे ही सपना की गांड़ पर नंगा लंड का सुपाड़ा छुआ तो उसके मुंह से आह निकल पड़ी। सपना ने अपना हाथ नीचे किया और अपनी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसकी सलवार उसकी टांगो में ही सरक गई। जैसे ही शादाब के लंड का नंगा सुपाड़ा उसकी नंगी गांड़ से छुआ तो शादाब ने उसके कंधों को थाम लिया और जोर से मसल दिया। सपना पूरी तरह से बहक गई और उसने अपनी गांड़ को हल्का सा झुकाया जिससे उसकी चूत उपर की तरफ उभर गई। लंड का सुपाड़ा सीधे उसकी चूत पर आ लगा और उसकी चूत लंड के मोटे तगड़े सुपाड़े से पूरी तरह से ढक गई। सपना सुपाड़े की मोटाई महसूस करके सिसक उठी और अपने दोनो हाथ अपनी चुचियों पर रख दिए। शादाब ने अपने एक हाथ से सपना की टांग को उपर की तरफ उठा दिया और दूसरे हाथ को उसकी गर्दन में कसते हुए लंड का जोरदार धक्का उसकी चूत में जड़ दिया और जैसे ही सुपाड़ा अन्दर घुसा तो सपना के मुंह से आह निकल पड़ी। शादाब ने बिना रुके तेज तेज धक्के लगाए और पूरा लंड उसकी चूत को फैलाते हुए जड़ तक घुस गया। सपना दर्द से कराह रही थी क्योंकि उसकी चूत लंड से फट सी गई थी।

शादाब ने लंड को बाहर की तरफ निकाला और पूरी तेजी से फिर से अंदर घुसा दिया। सपना फिर से तड़प उठी लेकिन इस बार दर्द पहले से कम था। शादाब बिना रुके चूत में धक्के लगाने लगा और सपना के मुंह से अब मस्ती भरी सिसकारियां निकल रहीं थीं। शादाब ने उसकी गर्दन छोड़कर उसकी चूची को पकड़ लिया तो सपना उसकी तरफ पलट गई लंड उसकी चूत से बाहर निकल गया। सपने ने तेजी से अपना सूट निकाला और अपनी एक टांग खुद ही उपर उठा दी और शादाब को लंड घुसाने का इशारा किया तो शादाब ने उसकी दोनो चुचियों को थाम लिया और लंड को एक ही धक्के में घुसा दिया और बिना रुके चोदना चालू कर दिया। शादाब पूरी ताकत से कस कस कर धक्के लगा रहा था और सपना अब मस्ती से सिसक रही थी। शादाब ने उसकी चूचियों को पूरी ताकत से मसला और लंड के धक्कों में पूरी तेजी आ गई तो सपना को अपनी चूत में तूफान सा मचलता हुआ महसूस हुआ और उसकी चूत ने अपना रस छोड़ दिया तो सपना पागल सी होकर शादाब के होंठो को चूसने लगी। शादाब ने भी पूरी ताकत से कुछ धक्के मारे और एक आखिरी धक्का मारते हुए अपना लंड उसकी चूत में जड़ तक घुसा दिया और वीर्य की पिचकारी छोड़ दी। दोनो एक दूसरे से कस कर लिपट गए।
 
थोड़ी देर के बाद शादाब ने सपना को अपनी बांहों में लिया और खेत में ले आया। सपना चुदाई के बाद काफी अच्छा महसूस कर रही थी इसलिए बोली:"

" लेट हो जाएंगे। मैं पहले घास काट लेती हूं

इतना कहकर वो नंगी ही घास काटने लगीं। शादाब उसकी हिलती हुई गांड़ देख कर पागल सा हो रहा था। अपनी अम्मी अपनी जान शहनाज को वो पूरी तरह से भूल गया था।

सपना ने घास काट दिया और शादाब ने उसे बुग्गी में रख दिया। सपना ने पहली बार शादाब का लंड देखा और उसकी चूत फिर से भीग गई। सपना ने उसकी आंखो में देखते हुए अपने आपको बुग्गी पर झुका दिया और कुतिया सी बन गई। शादाब से बर्दास्त नहीं हुआ और वो उतरा और उसके पीछे आते हुए फिर से लंड को एक तगड़े धक्के के साथ उसकी चूत में घुसा दिया। सपना ने बुग्गी को कसकर पकड़ लिया और शादाब ने उसकी चूत को चोदना शुरू कर दिया। सपना के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकल रही थी और उसकी चूचियां उछल उछल पड़ रही थी। शादाब जोर जोर से उसे चोद रहा था और शादाब के सुपाड़े की रगड़ सपना से बर्दाश्त नहीं हुई और फिर से उसकी चूत ने अपना रस छोड़ दिया। शादाब ने उसकी चूत में कुछ धक्के कसकर मारे और अपना वीर्य छोड़ दिया।

उसके बाद दोनो ने कपडे पहने और घर की तरफ चल पड़े। सपना और शादाब ने घास को बुग्गी से उतारा और अंदर रख दिया। सपना अपने घर चली और शादाब नहाकर कर आया और उसने कमला के साथ खाना खाया और थके होने के कारण सो गया।

रात को करीब आठ बजे उसकी आंख खुली तो देखा कि सपना भी आई हुई हैं और कमला से बच बच कर उसे रात के लिए इशारे कर रही थी। सभी ने फिर से खाना खाया और कमला बोली:"

" अच्छी बेटी ठीक है रात बहुत ज्यादा हो गई है इसलिए तुम अपने घर चली जाओ अब।

सपना का मन जाने का था ही नहीं क्योंकि वो तो शादाब उसे पूरी रात अपनी चुदाई करवाना चाहती थी इसलिए बोली:"

" आंटी घर जाकर ही क्या करूंगी, सुबह तो फिर आना ही होगा इसलिए यहीं सो जाती हूं।

इससे पहले कि कमला कुछ बोलती सपना के पापा अंदर दाखिल हुए और बोला:"

" कोई बात नहीं बेटी। सुबह कल फिर से आ जाना। मुझे रात में खेत पर जाना और घर में तेरी मा अकेली होगी।

सपना अब चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती थी इसलिए ना चाहते हुए अपने पापा के साथ चली गई। वहीं उसके जाने से शादाब भी उदास हुआ लेकिन कर ही क्या सकता था।

कमला ने उसका बिस्तर अंदर कमरे में लगा दिया और खुद बाहर ही सोने के लिए लेट गई लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी इसलिए पड़ी हुई अपनी बेटी के बारे में सोच रही थी। रात के करीब 11 बज गए थे और उसे अपने घर की दीवार पर एक साया नजर आया और वो साया दीवार कूद कर घर के अंदर जैसे ही दाखिल हुआ तो उस पर नजर पड़ते ही कमला हैरान हो गई कि ये सपना इतनी रात को चोरी छिपे क्यों घर के अंदर घुस रही हैं।

........................

कमला ने जब सपना को अपने घर की दीवार कूदकर अंदर आते देखा तो वो पूरी तरह से हैरान हो गई कि ये ऐसा क्यों कर रही है। सपना इधर उधर देखती हुई अंदर आई और वो कमला के पास आ गई। कमला ने उसे अपनी तरफ आते हुए देखकर अपनी आंखे बंद कर ली। सपना उसके पास पहुंच गई और देखा कि कमला गहरी नींद में सोई हुई है तो उसने चैन की सांस ली और उसके बाद अंदर कमरे की तरफ बढ़ गई।

कमला ने फिर से उसकी तरफ देखा। सपना धीरे धीरे दबे पांव अंदर कमरे में चली गई और उसने शादाब को सोते हुए देखा और उसके होंठो पर स्माइल आ गई। उसने गेट को बंद किया और उसने धीरे से एक एक करके अपने सारे कपड़े खुद ही उतार दिए और पूरी तरह से नंगी हो गई। बाहर कमला धीरे धीरे उठी और गेट के पास आ गई और देखा कि दरवाजा सिर्फ झुका हुआ है पूरी तरह से बंद नहीं क्योंकि सेक्स के उन्माद में डूबी हुई सपना ये भूल कर गई। उसने धीरे से अन्दर झांका तो उसे सपना पूरी नंगी नजर आई तो वो समझ गई कि सपना इस तरह अंदर क्यों घुस आई हैं।

सपना शादाब के पास लेट गई और उसकी छाती पर अपनी उंगलियां फिराने लगी तो उसकी आंखे खुल गई और सपना को अपने पास पूरी तरह से नंगी पाकर वो खुश हो गया और उसकी हवा में झूलती हुई चूचियों को देखने लगा।

सपना:" ऐसे क्या देख रहे हो तुम ?

शादाब ने अपना एक हाथ आगे बढाया और उसकी चूची को थाम लिया और मसलते हुए बोला:"

" तेरी चूचियां देख रहा हूं सपना।

सपना चूची मसले जाने से दर्द से कराह उठी और बोली:"

" शैतान थोड़ा प्यार से मसल, जान ही ले लेगा क्या मेरी तू ?

शादाब ने उसकी दोनो चूचियों को पकड़ लिया और हल्का हल्का सहलाने लगा और उसकी चूत को प्यासी नजरो से देख कर बोला:"

" जान का क्या करूंगा। मैं तो वो लूंगा जो तुम देने आई हो।

सपना ने अपने एक हाथ से अपनी ढक लिया और बोली:"

" मैं तो तेरे हाल चल पूछने आई थी बस। मैं तुझे कुछ नहीं देने वाली।

शादाब ने उसे पकड़ कर बेड पर लिटा दिया और उसके होंठ चूसने लगा तो सपना भी उसका साथ देने लगी। बाहर खड़ी हुई कमला ज़िन्दगी में पहली बार किसी को ऐसे रास लीला करते हुए देख रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। एक काम करती हूं कि दोनो को समझा देती हूं कि ये गलत काम ना करे लेकिन फिर अगले ही पल उसे शादाब के अपने उपर किए एहसान नजर आए तो उसने अपना विचार त्याग दिया और शादाब को मस्ती कर लेने का फैसला किया।

किस करने के बाद शादाब उठा और अपने कपड़े उतार दिए। पूरी तरह से नंगा होकर वो सपना के उपर लेट गया। कमला को पीछे से उसकी गांड़ नजर आ रही थी और शादाब उसके बेटे की तरह मोटा तगड़ा तो नहीं लेकिन अच्छे जिस्म का मालिक था।

शादाब सपना की चूचियों को मसल रहा था और सपना ने नीचे हाथ ले जाकर उसके लंड को पकड़ लिया और सहलाने लगी। शादाब ने उसकी चूचियों को मुंह में भर लिया और चूसने लगा तो सपना के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी। कमला ये सब देख कर मुस्करा रही थी और उसे याद आ रहा था कि उसका पति भी ऐसे ही उसकी चूचियों को चूसता था।

शादाब नीचे आते हुए सपना की टांगो के बीच में झुक गया और कमला की आंखे फटी की फटी रह गई और सोचने लगी कि ये भगवान ये यहां कर रहा है। तभी शादाब ने अपने होंठ उसकी चूत पर टिका दिए और चूसने लगा।

सपना के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकल रही थीं और वो पागलों की तरह अपनी चूत उठा उठा कर उसके मुंह में धकेल रही थी। सपना का पुर बदन मस्ती से उछल उछल पड़ रहा था और सिसकते हुए बोली:"

" आह शादाब तेरी जीभ उफ्फ मेरी चूत में हाय राम, मेरी जान मेरी चूत चूस रहा है तू।

शादाब ने अपनी जीभ जैसे ही उसकी चूत के अंदर घुसाई तो सपना के सब्र का बांध टूट गया और उसने शादाब के सिर को अपनी चूत पर दबा दिया और जोर जोर से सिसकने लगी। सपना के चेहरे पर असीम शांति छाई हुई थी और उसके चेहरे के बदल रहे भाव ये साफ दर्शा रहे थे कि कितना अद्भुत आनंद वो महसूस कर रही है। कमला ये सब देख कर हैरान थी क्योंकि उसे नहीं पता था कि चूत को चूसा भी जाता है। उफ्फ कितनी खुश दिख रही हैं सपना, कितना मजा आ रहा होगा उसे, ये सब देखकर कमला की चूत में चिकनाहट आ गई। कमला ने अपनी एक उंगली से अपनी चूत को छुआ तो उसके जिस्म में मीठा मीठा दर्द हुआ। आज 12 साल के बाद उसकी चूत गीली हुई थी और कमला को खुशी हो रही थी कि आज इतने सालो के बाद उसे अपने औरत होने का एहसास फिर से हो रहा था। शादाब ने सपना की चूत को अच्छे से चूसा और जैसे ही आपका स्खलन के करीब हुई तो उसने अपने होठ वापिस पीछे कर लिए तो सपना तड़प उठी और उसने शादाब को एक झटका दिया और उसकी छाती को चूमने लगी और एक हाथ से उसके लन्ड को थाम लिया और सहलाने लगी। शादाब का मोटा तगड़ा लंड अब पूरी तरह से तनकर खड़ा हुआ था और कमला की आंखो के आगे सामने था।

कमला को यकीन नहीं हो रहा था

ऐसे भी लंड होते हैं। कितना लंबा मोटा और तगड़ा था, बिल्कुल गोरा गोरा लंड, आगे से पूरी तरह से चमकता हुआ। कमला ने तो अपनी पूरी जिंदगी में सिर्फ एक ही लंड लिया था अपने पति का वो भी इसकी तुलना में आधा था।

सपना धीरे धीरे नीचे की तरफ आई और उसने देखते ही देखते शादाब के लंड पर अपने होंठ रख दिए और अपना मुंह खोलते हुए उसे अपने मुंह में आधे से ज्यादा भर लिया और चूसने लगी।कमला को यकीन नहीं हो रहा था

ऐसे भी लंड होते हैं। कितना लंबा मोटा और तगड़ा था, बिल्कुल गोरा गोरा लंड, आगे से पूरी तरह से चमकता हुआ। कमला ने तो अपनी पूरी जिंदगी में सिर्फ एक ही लंड लिया था अपने पति का वो भी इसकी तुलना में आधा था।

सपना धीरे धीरे नीचे की तरफ आई और उसने देखते ही देखते शादाब के लंड पर अपने होंठ रख दिए और अपना मुंह खोलते हुए उसे अपने मुंह में आधे से ज्यादा भर लिया और चूसने लगी।

कमला सपना को लंड चूसते देखकर मचल उठी। ये भगवान ये क्या कर रही है, उफ्फ लंड भी चूसा जाता है क्या , कमला की उंगलियां अपने आप उसकी चूत को सहलाने लगी।

उसकी नजरे सपना पर ही टिकी हुई थी और कमला पूरी तरह से मदहोश अब बस उन्हें ही देख रही थी। तभी सपना ने लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला और उसकी टांगो के बीच में आते हुए अपनी चूत को उसके लंड के चिकने सुपाड़े पर टिका दिया और हल्का दबाव दिया तो लंड उसकी चूत में घुसा तो उसे दर्द का एहसास हुआ और उपर की तरफ उठ गई। कमला सोच रही थी कि दुबली पतली सी सपना इस भारी भरकम लंड को कैसे अपनी चूत में घुसा पाएगी। शादाब ने अपने दोनो हाथो को उसकी कमर पर टिका दिया और सपना की आंखे में देखते हुए नीचे से लंड का जोरदार धक्का उसका चूत में लगा दिया और लंड एक ही धक्के में जड़ तक उसकी चूत में घुसता चला गया।

सपना दर्द से कराह उठी लेकिन शादाब ने उसे कसकर पकड़े रखा और नीचे से अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा तो सपना की दर्द भरी कराह अब मस्ती भरी सिसकारियां बन गई। सपना की चूत ने लंड के हिसाब से अपने आपको एडजस्ट किया और सपना खुद ही उसके लंड पर उछलने लगी और मस्ती से सिसकते हुए बोली:"

" आह शादाब तेरा लंड uffff कतिना बड़ा हैं, एसआईआई मम्मी आह।

शादाब ने हाथ बढ़ा कर उसकी दोनो चूचियों को पकड़ लिया और जोर जोर से रगड़ने लगा तो सपना जोर जोर से उसके लंड पर उछलने लगी। सपना की मस्ती भरी सिसकारियां अब कमरे के बाहर तक आ रही थी। कमला का पूरा जिस्म कांप रहा था और उसकी चूत सहला रही उसकी उंगलियां पूरी तरह से भीग गई थी। तभी शादाब के लंड पर कूद रही सपना पूरी गति से उपर नीचे होने लगी।

तभी सपना का पूरा जिस्म कांप उठा और उसके जिस्म ने एक जोरदार झटका खाया और अपने शरीर को ढीला छोड़ते हुए वो लंड पर गिरती चली गई और लंड उसकी चूत की दीवारों को पूरी कठोरता से रगड़ता हुआ अंदर जड़ तक घुसता चला गया और सपना की चूत ने अपना रस बहा दिया। सपना एक जोरदार सिसकी लेती हुई शादाब की छाती पर गिर पड़ी। कमला का भी धैर्य जवाब दे गया और उसने उंगली को अपनी चूत में घुसा लिया और उसकी चूत से ही सालो बाद अपना रस छोड़ दिया।

जैसे ही सपना की चूत झड़ना बंद हुई तो शादाब ने उसे बेड पर ही पलट दिया और उसके ऊपर चढ़ गया। शादाब ने सपना की चूत में लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया तो चिकनी चूत से फ़ाच फ़ाच की आवाजे निकलने लगी। सपना की चूत अब फिर से गीली होने लगी और उसने अपनी गांड़ फिर से उपर उठानी शुरू कर दी और शादाब ने अपने दोनो हाथ उसके कंधो पर रख दिए और कसकर धक्के लगाने लगा। हर धक्के पर सपना का मुंह खुलता और उसकी सिसकी कमला के कानों में पड़ती। कमला का पति अपने छोटे से लंड से उसे दो मिनट चोदकर ढेर हो जाता था वहीं पूरी जोर जोर से सपना को चोद रहा था करीब 15 मिनट से, ये सब देख कर कमला हैरान हो गई।

शादाब के तेज तेज तगड़े धक्के सपना ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसकी चूत ने फिर से अपना रस छोड़ दिया और सपना ने कसकर अपनी बांहे उसकी कमर पर लपेट ली। शादाब बिना रुके उसकी चूत में पूरी गहराई तक धक्के मारता रहा तो सपना के मुंह से दर्द भरी आह निकल पड़ी और शादाब को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगी लेकिन शादाब ने अपने हाथ आगे करते हुए उसकी बगल से निकाल कर उसके कंधो को थाम लिया और पागल सांड की तरह उसकी चूत में अपना लंड ठोकने लगा

सपना की चूत में लंड की मार उससे बर्दाश्त नहीं हो रही थी क्योंकि उसकी चूत की दीवारें लाल पड़ गई थी और अब रगड़े जाने से सपना को बेहद तकलीफ हो रही थी और सपना दर्द से कराह उठी और तड़पी:"

" आह शादाब छोड़ दें, हाय मम्मी मर जाऊंगी। तेरे आगे हाथ जोड़ती हूं।

लेकिन शादाब ने उसकी एक नहीं सुनी और पूरी ताकत से उसे चोदता रहा। लंड गोली की रफ्तार से अंदर बाहर हो रहा था और बाहर खड़ी हुई कमला फिर से अपनी चूत से खेल रही थी। उसे यकीन नहीं आ रहा था कि ये मासूम सा दिखने वाला शादाब एक आवारा सांड की तरह सपना की दमदार चुदाई कर रहा है।

सपना से बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने अपने नाखून उसकी कमर में गडा दिए और शादाब दर्द से बिलबिला उठा और सपना मौके का फायदा उठा कर बाहर की तरफ नंगी ही भागी। शादाब उसकी तरफ तेजी से दौड़ा और सीढ़ियों पर उसे पकड़ लिया और वहीं एक हाथ उसकी गर्दन में लपेट कर लोहे की रेलिंग पर झुका दिया और अपना लंड एक ही धक्के में उसकी चूत में घुसा दिया तो सपना फिर से कराह रही और छूटने की कोशिश करने लगी लेकिन शादाब पूरी ताकत से उसे चोदता रहा। कमला कमरे के बाहर खड़ी हुई थी और वो गेट के पीछे छिप गई और दोनो की चुदाई देखने लगी। शादाब का पूरा जिस्म कांपने लगा और उसके मुंह से शेर की तरह हुंकार सी निकल रही थी और उसने अपने पूरे लंड को बाहर निकाल कर एक जोरदार धक्का सपना की चूत में जड़ दिया और उसके लंड से वीर्य की पिचकारी उसकी चूत में पड़ने लगी। शादाब ने पूरी ताकत से सपना को कस लिया और सपना ने वीर्य की पिचकारी महसूस करके राहत की सांस ली। जैसे ही शादाब का स्खलन रुका तो उसने सपना के कंधो को चूम लिया और उसे बांहों में उठाकर फिर से बेड पर ले जाकर लिटा दिया तो सपना ने गुस्से से उसकी तरफ देखा और अपने कपड़े उठा कर पहनने लगीं।

शादाब:" इतनी जल्दी कपडे मत पहनो, अभी तो पूरी रात बाकी पड़ी हुई है।

सपना:" तुम इंसान नहीं जानवर हो जानवर। तुमसे चुदना मेरे बस की बात नहीं। किसी मोटी ताजी शादी शुदा को देख लो वहीं झेल पायेगी तुम्हे।

इतना कहकर सपना ने अपने कपड़े पहने और एक झटके के साथ बाहर की तरफ निकल गई और दीवार कूद कर अपने घर की तरफ चल पड़ी। शादाब उसे जाते हुए देखता रहा और फिर अपने कमरे में जाकर लेट गया।

कमला भी धीमे धीमे चलती हुई अपने बिस्तर पर आई और सोने का प्रयास करने लगी लेकिन शादाब के लंड और सपना की चूत फाड़ चुदाई अभी तक उसकी आंखो के सामने घूम रही थी।

शादाब सपना की जोरदार चुदाई के बाद आराम से सो गया वहीं कमला की आंखो से नींद पूरी तरह से गायब थी। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि ऐसी भी चुदाई होती है जिनमे लड़की चुदाई से पीछे हट जाए। आमतौर पर को उसने अपनी सहेलियों से सुना और खुद भी अनुभव किया तो यही था कि लड़कियां या औरत बिस्तर पर प्यासी ही तड़पती रह जाती हैं और मर्द उन्हें बीच में ही अधूरा छोड़कर आराम से सो जाते है। कमला ने एक बार फिर से अपनी चूत को उंगलियों से छुआ तो उसकी उंगलियां फिर से भीग और कमला मन ही मन बुदबुदा उठी

" कमीनी कहीं के, इस उम्र में मुझे परेशान कर रही है। मान जा नहीं तो शादाब....

कमला ये सोचते ही घबरा गई और उसकी सांसे तेजी से चलने लगी। वो अपनी खाट से उठी और फ्रिज से एक बॉटल ठंडे पानी की निकाल कर गटागट पीती चली गई और फिर अपने बिस्तर पर लेट गई और थोड़ी देर बाद ही उसे नींद ने अपने आगोश में ले लिया।

वहीं दूसरी तरफ शहनाज़ और सौंदर्या के साथ साथ सौंदर्या गाड़ी में जा रही थी।

.....................
 
अजय काफी थका हुआ था लेकिन वो जानता था कि उसे कुछ भी करके आज शाम तक हर हाल में खजुराहो पहुंचना था इसलिए लगातार गाड़ी चला रहा था जबकि शहनाज़ अब पीछे बैठ गई थी और सौंदर्या के साथ बाते कर रही थी और बीच बीच में अजय से भी बात हो रही थी क्योंकि शहनाज़ जानती थी कि सभी लोग पूरी रात सोए नहीं थे इसलिए कहीं नींद ना आए जाए।

सौंदर्या:" भाई और कितनी देर लग जाएगी ? थक गई मैं तो बैठे बैठे गाड़ी में ही ?

अजय:" बस दीदी थोड़ी देर और लगेगी करीब आधा घंटा बस उसके बाद हम पहुंच जाएंगे।

सौंदर्या:" अच्छा फिर तो ठीक है भाई, भूख भी लगी हैं बहुत तेज मुझे।

शहनाज़: अरे भूख तो मुझे भी लगी हैं बहुत जोर से, पेट में चूचे कूद रहे है ।

इतना कहकर शहनाज़ ने शीशे में अजय की तरफ देखा तो अजय मुस्कुरा दिया और थोड़ी देर बाद बाद ही करीब 2बजे वो खजुराहो आ गए थे। अजय ने शहर के बाहर ही एक होटल में तीन कमरे बुक किए और तीनो नहा धोकर खाना खाने के बाद सो गए।

हालाकि शहनाज़ चाहती थी कि सौंदर्या के सोने के बाद वो थोड़ा समय अजय के साथ बिताए लेकिन नींद के आगे उसकी एक नहीं चली और सो गई।

रात में करीब 10 बजे सभी लोग उठ गए और नहा धोकर खजुराहो में जाने के लिए तैयार हो गए।अजय अंदर आया तो देखा कि सौंदर्या फिर से शहनाज़ की साडी बांधने में उसकी मदद कर रही थी और ये सब देखकर वो मुस्कुरा दिया। अजय नीचे आ गया और गाड़ी को बाहर निकाला। शहनाज़ गाड़ी में आगे ही बैठ गई जबकि सौंदर्या पीछे बैठ गई। शहनाज़ के बदन से उठती हुई मादक परफ्यूम की खुशबू अजय को साफ महसूस हो रही थी और दिमाग को अजीब सी शांति मिल रही थी। वो बार बार मौका मिलते ही शहनाज़ को चोरी चोरी देख रहा था जबकि पीछे बैठी सौंदर्या खिड़की से बाहर प्राकृतिक सौंदर्य को देखने में व्यस्त थी और उसका भाई अपने पास बैठी खूबसूरत शहनाज़ को देख रहा था। शहनाज़ भी बीच बीच में अजय को देख रही थी और जैसे ही दोनो की आंखे टकरा जाती तो शर्म के कारण कभी अजय तो कभी शहनाज़ की आंखे झुक रही थी। शहनाज़ अपने नारी स्वभाव के कारण और अजय उससे उम्र में छोटा होने के कारण शर्मा रहा था शायद।

थोड़ी देर बाद ही वो खजुराहो पहुंच गए और टिकट लेने के बाद जैसे ही अंदर घुसे गेट के पास ही बनी हुई एक बिल्कुल नंगी पत्थर की औरत की मूर्ति पर नजर पड़ी तो सौंदर्या और शहनाज़ दोनो की आंखे खुली की खुली रह गई।

एक नंगी औरत कुर्सी पर बैठी हुई, दोनो गोल गोल चूचियां बिल्कुल खुली हुई पूरी नंगी और उसने एक टांग को घुटने से मोड़कर अपने पैर के तलवे को अपनी जांघो के बीच किया हुआ था जिससे उसकी जांघो के बीच कुछ नजर नहीं आ रहा था।

ये सब देखकर सौंदर्या ने हैरानी से शहनाज़ की तरफ देखा तो शहनाज़ की हालत भी वैसी ही थी। वो खुद ये सब पहली बार देख रही थी। अजय जानता था कि इस वक़्त दोनो के मन में काफी सारे सवाल चल रहे होंगे लेकिन यहां लोगो के बीच बात करना ठीक नहीं होगा इसलिए आगे की तरफ बढ़ गया।

दीवारों पर एक से बढ़कर एक सुंदर मूर्तियां बनी हुई थी। अलग अलग मुद्रा में सेक्स को दर्शाती हुई, सौंदर्या तो इनसे पूरी तरह से अनजान ही थी वहीं अनुभवी शहनाज़ यकीन नहीं कर पा रही थी कि सेक्स की इतनी सारी कलाएं होती है। अमेरिका जैसे आधुनिक और सेक्स फ्री देश में रहने के बाद भी उसने तो इनमें से आधी भी नहीं अपनाई थी।

शहनाज़ ने एक मूर्ती में देखा कि एक ताकतवर मर्द ने एक हल्की मोटी औरत को अपनी गोद में उठा रखा था और औरत ने अपनी दोनो बांहे उसकी गर्दन में लपेट रखी थी और उससे पूरी तरह से चिपकी हुई थी। मर्द सीधा अपनी टांगो खोल जमीन पर खड़ा हुआ था और उसके दोनो हाथ औरत की गांड़ पर टिके हुए थे। दोनो की जांघें पूरी तरह से आपस में चिपकी हुई थी मानो लंड बिलकुल अपनी पूरी गहराई तक अंदर घुसा हुआ हो। औरत के चेहरे पर फैले हुए असीम सुख को महसूस करके शहनाज को पता नहीं क्यों उससे जलन महसूस हुई।

एक नंगी औरत कुर्सी पर बैठी हुई, दोनो गोल गोल चूचियां बिल्कुल खुली हुई पूरी नंगी और उसने एक टांग को घुटने से मोड़कर अपने पैर के तलवे को अपनी जांघो के बीच किया हुआ था जिससे उसकी जांघो के बीच कुछ नजर नहीं आ रहा था।

ये सब देखकर सौंदर्या ने हैरानी से शहनाज़ की तरफ देखा तो शहनाज़ की हालत भी वैसी ही थी। वो खुद ये सब पहली बार देख रही थी। अजय जानता था कि इस वक़्त दोनो के मन में काफी सारे सवाल चल रहे होंगे लेकिन यहां लोगो के बीच बात करना ठीक नहीं होगा इसलिए आगे की तरफ बढ़ गया।

दीवारों पर एक से बढ़कर एक सुंदर मूर्तियां बनी हुई थी। अलग अलग मुद्रा में सेक्स को दर्शाती हुई, सौंदर्या तो इनसे पूरी तरह से अनजान ही थी वहीं अनुभवी शहनाज़ यकीन नहीं कर पा रही थी कि सेक्स की इतनी सारी कलाएं होती है। अमेरिका जैसे आधुनिक और सेक्स फ्री देश में रहने के बाद भी उसने तो इनमें से आधी भी नहीं अपनाई थी।

शहनाज़ ने एक मूर्ती में देखा कि एक ताकतवर मर्द ने एक हल्की मोटी औरत को अपनी गोद में उठा रखा था और औरत ने अपनी दोनो बांहे उसकी गर्दन में लपेट रखी थी और उससे पूरी तरह से चिपकी हुई थी। मर्द सीधा अपनी टांगो खोल जमीन पर खड़ा हुआ था और उसके दोनो हाथ औरत की गांड़ पर टिके हुए थे। दोनो की जांघें पूरी तरह से आपस में चिपकी हुई थी मानो लंड बिलकुल अपनी पूरी गहराई तक अंदर घुसा हुआ हो। औरत के चेहरे पर फैले हुए असीम सुख को महसूस करके शहनाज को पता नहीं क्यों उससे जलन महसूस हुई।

शहनाज़ की आंखे लाल हो गई थी और वो सोच रही थी कि वो लड़का कितना ताकतवर रहा होगा जिसने औरत को अपनी गोद में उठा रखा था। सौंदर्या पागलों की तरह आंखे फाड़ फाड़कर सेक्स में डूबी हुई मूर्तियां देख रही थी और काम कला की अनोखी दुनिया से रूबरू हो रही थी। सौंदर्या अंदर ही अंदर तड़प रही थी कि उसने ज़िन्दगी का सबसे बड़ा आनंद अभी तक महसूस नहीं किया।

अजय:" आप लोग देखो, मैं एक बार यहां पंडित जी से मिलकर आता हूं।

इतना कहकर वो एक दिशा में मुड गया और चला गया। अजय जानता था कि उसके होते हुए दोनो शर्माएगी और ठीक से मूर्ति नहीं देख पाएगी। अब शहनाज़ और सौंदर्या बची थी और दोनो ने एक दूसरे की तरफ देखा और दोनो एक साथ स्माइल करने लगी और सौंदर्या शर्म गई तो शहनाज़ बोली:"

" शरमाओ मत सौंदर्या। ध्यान से देख ले ये सब बड़े काम की चीज है। आगे चलकर तेरे काम आयेगी शादी के बाद।

सौंदर्या पहले तो शर्मा गई लेकिन फिर बोली:" अच्छा जी, लेकिन ये मूर्तियां देखने से मेरी कुंडली का दोष कैसे दूर होगा ?

शहनाज़:" अब मुझे क्या पता, ये तो अजय से ही पता कर लेना तुम कि भाई ये चुदाई की मूर्ति देखकर मेरा दोष कैसे दूर होगा !!

सौंदर्या कांप सी उठी:" उससे कैसे पूछ सकती हूं मैं वो तो मेरा सगा भाई है।

शहनाज़:" लेकिन तुम्हारे पास और कोई रास्ता भी तो नहीं है, और फिर भूल गई क्या पंडित जी ने कहा कि अजय ही तुम्हे मुक्ति दिला सकता है !!

सौंदर्या:" हाँ ये बात तो हैं, लेकिन फिर भी कैसे बोलूगी, इतना आसान नहीं होगा, आप पूछ लेना उससे प्लीज़।

शहनाज़:" अच्छा ठीक हैं देखती हूं क्या करना है। ।।

इतना कहकर शहनाज़ अगले कमरे में घुस गई और वहां मूर्तियां देखकर उसके बदन में सिरहन सी दौड़ गई। एक औरत झुकी हुई खड़ी थी और पीछे से उसकी गांड़ में एक लंड घुसा हुआ था। शहनाज़ की आंखे फैलती चली गई मानो उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि गांड़ भी मारने की चीज होती हैं। शहनाज़ अभी अभी पूरी तरह से संयत भी नहीं हुई थी कि उसने देखा कि एक मूर्ति में उसने देखा कि एक औरत एक मर्द के ऊपर लेटी हुई थी और उसका लन्ड उसकी चूत में घुसा हुआ था जबकि एक और दूसरा मर्द उस औरत के उपर चढ़ा हुआ और उसकी गान्ड में अपना लंड घुसा रखा था।

ये देखकर शहनाज़ की चूत से आह निकल पड़ी और उसकी गांड़ में चिंगारी सी दौड़ गई। उफ्फ कितने गंदे लोग होते थे पहले जो ऐसी मूर्तियां बनाते थे। वहीं दूसरी तरफ सौंदर्या अब कमरे में अकेली थी तो बिना किसी शर्म के मूर्तियां देख रही थी कि किस प्रकार लोग चुदाई के खुमार में डूबे हुए थे। किसी मूर्ति में झुक कर चुदती हुई औरत, तो कहीं लंड की सवारी करती हुई औरत, सौंदर्या ने आगे देखा कि एक मर्द औरत की टांगो के बीच में अपनी जीभ घुसा कर चाट रहा था। सौंदर्या के मुंह आह निकल पड़ी और सौंदर्या की आंखे बंद हो गई। उसे वो पल याद आ गया जब उस दिन रात में उसके भाई ने मदहोशी में उसकी पेंटी के ऊपर चूम लिया था। सौंदर्या का रोम रोम मस्ती से भर उठा और वो फिर से मूर्तियां देखने लगी। अजय कमरे में आ गया और सौंदर्या तो पूरी तरह से मूर्तियों में डूबी हुई थी और उसे पता ही नहीं चला। अजय आगे बढ़ा और उसने धीरे से एक हाथ सौंदर्या के कंधे पर रखा तो सौंदर्या कांप उठी और अजय को देखते ही वो शर्म से पानी पानी हो गई।

अजय:" क्या हुआ दीदी आप ठीक तो हो ना, मेरे छूने से ही डर गई आप।

सौंदर्या का मुंह शर्म से लाल हो गया था और कुछ नहीं बोली। अजय की आवाज सुनकर शहनाज़ भी बाहर आ गई। शहनाज़ की भी आंखे चौड़ी हो गई थी और आंखो में लालिमा दौड़ रही थी।

अजय;" अच्छा चलो अब हम पीछे की तरफ चलते हैं और वहीं पर आगे की पूजा विधि बताई जाएगी।

मदहोश सी शहनाज़ और सौंदर्या दोनो उसके पीछे पीछे चल पड़ी। जल्दी ही सभी अंतिम कक्ष में आ गए और यहां एक से बढ़कर एक मूर्ति बनी हुई थी। बिल्कुल पूरी तरह से साफ, संगमरमर की तरह चमकती हुई जिनमें महिला और पुरुष के कामांग पूरी तरह से साफ दिख रहे थे। अजय वहीं कमरे में एक चादर डाल कर बैठ गया और दोनो को बैठने का इशारा किया। बदहवाश सी दोनो उसके सामने बैठ गई, सौंदर्या की तो नजरे जमीन में गड़ी जा रही थी जबकि शहनाज़ उसके मुकाबले थोड़ा सहज महसूस कर रही थी और बीच बीच में वो अजय की तरफ देख रही थी और बोली:"

" अजय ये कैसा अजीब मंदिर है, यहां तो देखो ना कैसी कैसी मूर्तियां लगी हुई है।

अजय ने शहनाज़ की तरफ देखा और बोला:" ये काम कला के ऊपर बना हुआ मंदिर है और उससे जुड़ी हुई सभी मुद्राएं यहां फोटो में दिखाई गई है।

शहनाज़ ने अजय की आंखो में देखते हुए कहा:" लेकिन जो काम बंद कमरे के अंदर करना होता है उसकी यहां खुले आम फोटो लगा कर लोगो को दिखाना क्या गलत नहीं है ?

अजय ने देखा कि सौंदर्या अभी भी नजरे नीची किए हुए हैं तो उसने शहनाज़ को इशारा किया तो शहनाज़ ने अपना एक हाथ सौंदर्या के हाथ के उपर रख दिया और हल्का सा दबाते हुए बोली:"

" सौंदर्या तुम सब कुछ ध्यान से सुनना क्योंकि ये सब तुम्हारे लिए आने वाली में सबसे ज्यादा सही साबित होगा।

सौंदर्या ने अपनी गर्दन हाँ में हिला दी और अजय ने बोलना शुरू किया:" जिस तरह से आदमी खाना खाता है, सोता है, नहाता हैं और अपने रोज के दूसरे काम करता है ठीक उसी तरह से इंसान के लिए सेक्स भी जरूरी है और पहले लोग बिल्कुल इसे आम दिनचर्या के रूप में लेते थे। दूसरी बात सेक्स के बिना दुनिया का अस्तित्व ही संभव नहीं हैं इसलिए इन तस्वीरों में ये सब दिखाया गया है कि आप सेक्स को मजे लेकर कर भी कर सकते हो और ये भी दूसरी बातो की तरह ही बिल्कुल आम बात है।

शहनाज़ और सौंदर्या उसकी बात सुनकर दोनो चुप रही और फिर शहनाज़ धीरे से बोली:"

" अच्छा एक बात तो बताओ सौंदर्या ये पूछना चाहती हैं कि...

इससे पहले की वो कुछ बोलती सौंदर्या ने उसका हाथ पकड़ कर दबा दिया और शहनाज़ चुप गई। अजय समझ गया कि उसकी बहन शर्मा रही हैं इसलिए वो थोड़ा सा आगे को सरका और बिल्कुल शहनाज़ और सौंदर्या के करीब आ गया और बोला:"

"डरने या शरमाने की कोई जरूरत नहीं हैं मेरी दीदी, ये पूजा और इसकी विधियां तो हमे हर हाल में करनी ही होगी। आप बोलिए आप क्या जानना चाहती है ?

सौंदर्या के चेहरे पर पसीना छलक उठा और शहनाज़ ने अपना रुमाल लिया और उसकी तरफ खिसक गई जिससे उसके एक पैर का पंजा अजय के पैर से टकरा गया और शहनाज़ का जिस्म कांप उठा। शहनाज़ ने सौंदर्या का पसीना साफ किया और बोली:"

" अजय सौंदर्या ये जानना चाहती है कि इन मूर्तियों से उसके कुंडली का दोष किस तरह दूर होगा !!

शहनाज़ ने अपनी बात खत्म करी और सौंदर्या की सांसे तेज गति से चलने लगी। वो कुछ पाने की स्थिति में नहीं थी। अजय अपनी बहन की मनोदशा समझ गया था इसलिए थोड़ा सा और आगे को झुका जिससे उसके पैर का दबाव शहनाज़ के पैर पर पड़ा और दोनो के पैरो की उंगलिया आपस में टकरा गई। शहनाज़ ने एक बार अजय की आंखो में देखा और अपनी नजरे नीचे झुका ली मानो उसे मूक सहमति दे दी हो। अजय अपने घुटनों को मोड़ते हुए थोड़ा सा और आगे को सरक बिल्कुल अब सौंदर्या के सामने बैठा था। उसके मुडे हुए पैर के मजबूत पंजे अब पूरी ताकत से शहनाज़ के पैर से टकरा रहे थे और शहनाज़ उसके पंजे की ताकत महसूस करके बहक सी गई और उसने अपने पैर की उंगलियों को जोर से अजय के पैर की उंगलियां से भिड़ा दिया मानो अजय को दर्शा रही हो कि मेरी उंगलियां भी कमजोर नहीं है।

अजय शहनाज़ की तरफ से सहयोग पाकर अब बेफिक्र होकर अपने पैर की उंगलियों को शहनाज़ के पैर से लड़ाने लगा और बोला:"

" एक सुंदर कन्या हेमावती पर चन्द्र देवता मोहित हो गए और उसके साथ सेक्स किया वो बिल्कुल सौंदर्या की तरह जवान और खूबसूरत थी। हेमवती नाराज हो गई लेकिन उसे वरदान मिला और उसकी कोख से पुत्र प्राप्त हुआ जिसने इस मंदिर का निर्माण कराया। चन्द्र देवता को काफी शांत समझा जाता हैं और उनके ही प्रभाव के कारण सौंदर्या का स्वभाव मांगलिक होने के बाद भी बिल्कुल शांत हैं।दोष निकल जाने के बाद सौंदर्या का शांत स्वभाव इसकी सेक्स ज़िन्दगी में बाधा उत्पन्न ना करे बस इसलिए ही इसे यहां लाया गया है ताकि उसके उपर से चन्द्र देवता का प्रभाव हट जाए।

इतना कहकर अजय ने सौंदर्या की तरफ देखा जिसकी गर्दन अभी भी झुकी हुई थी और अजय ने मौके का फायदा उठाते हुए अपने पैर के कठोर अंगूठे से शहनाज़ की कोमल, मुलायम उंगलियों को जोर से मसल दिया तो शहनाज़ के मुंह से आह निकलते निकलते बची। उसने घूर कर अजय की तरफ देखा और अपने पैर के नाखून को उसके पंजो में घुसा दिया।

अजय ने शहनाज़ की तरफ देखा और उसे स्माइल दी और फिर उसने अपना हाथ से सौंदर्या के गाल को सहलाया और बोला:"

" मेरी प्यारी बहन, ध्यान से देख लेना सब कुछ, कहीं बाद में तेरी ज़िन्दगी में कोई दिक्कत ना हो।

सौंदर्या उसके हाथो की छुवन से मस्त हो गई लेकिन कुछ बोली नहीं तो अजय फिर से बोला:"

" ध्यान से देखोगी ना तुम सब कुछ? मैं और शहनाज़ तेरे लिए इतनी मेहनत कर रहे हैं तो तुम्हे भी इसका ध्यान रखना चाहिए।

अजय ने कहा तो इस बार सौंदर्या ने हाँ में अपनी गर्दन हिला दी। अजय खुश हो गया और शहनाज़ के पैर को रगड़ते हुए खड़ा हो गया और बोला:"

" बाहर पीछे मैदान में एक बहुत ही बड़ी सेक्स करते हुए मूर्ति बनी हुई जो रती की समझती जाती है। अब हम उसके चक्कर काटेंगे। पहले मैं और शहनाज़ और उसके बाद मैं और तुम । टोटल सात चक्कर होंगे। पहले चार चक्कर में तुम्हारी आंखे खुली रहेगी और तुम बिना इधर उधर देखे सीधे मूर्ति पर ध्यान दोगी जबकि बाद में तीन चक्कर में तुम्हारी आंखे बंद रहेगी और आंखे बंद करके मूर्ति का ही ध्यान करोगी।

सभी लोग बाहर आ गए और मैदान में एक बहुत बड़ी मूर्ति बनी हुई थी जिसमें एक तगड़े जवान मर्द ने एक हल्की मोटी चर्बी वाली औरत को गोद में उठाकर अपने लंड पर चढ़ा रखा था। ये एक क्रिकेट के मैदान जितना बड़ा मैदान था और बीच बीच एक मूर्ति लगभग आधे से ज्यादा मैदान को घेरे हुए थी। जैसे ही शहनाज़ ने बाहर आकर मूर्ति देखी तो सब समझ आ गया कि अजय ने शायद जान बूझकर ऐसी विधि बताई हैं क्योंकि एक चक्कर में कम से कम तीन मिनट तो लगने ही थे वो भी पूरी रफ्तार से चलने के बाद। शहनाज़ अंदर ही अंदर मुस्कुरा उठी क्योंकि वो भी तो यही सब चाह रही थी।

अजय ने एक मूर्ति के ठीक सामने सौंदर्या को खड़ा कर दिया और बोला:"

" आप यहीं खड़ी रहोगी और किसी भी दशा में हमारे सात चक्कर पूरे होने तक आपका ध्यान नहीं भटकना चाहिए नहीं तो आपकी आगे की ज़िन्दगी बेहद कष्टकारी हो सकती है।

सौंदर्या:" ठीक है भाई। आप बेफिक्र होकर परिक्रमा कीजिए। मैं पूरा ध्यान रखूंगी।

अजय ने शहनाज़ की तरफ देखा जिसकी आंखे लाल हो गई थी और आगे होने वाली घटनाओं को सोचकर उसके पूरे जिस्म में हलचल सी मची हुई थी कि जाने अजय उसके साथ क्या करेगा। कुछ करेगा भी या नही।

शहनाज़ ने अजय की तरफ देखा और अजय ने उसे चलने का इशारा किया और दोनो के चक्कर शुरू हो गए। दोनो साथ ही चल रहे थे और देखते ही देखते वो मूर्ति के पीछे की तरफ आ गए और सौंदर्या अब उन्हें दिख नहीं रही थी। शहनाज़ का दिल तेजी से धड़क रहा था कि अजय अब क्या करेगा लेकिन अजय खामोशी से चलता रहा और शहनाज़ भी उसके साथ चलती रही और थोड़ी ही देर बाद ही वो एक चक्कर पूरा करके सौंदर्या के पास से निकल गए।
 
दूसरे चक्कर में भी दोनो ऐसे ही चलते रहे और दोनो की हिम्मत नहीं हो रही थी कि कौन पहल करे। जैसे ही तीसरा चक्कर शुरू हुआ तो शहनाज़ अजय से थोड़ा आगे निकल गई और अपनी गांड़ को पीछे की तरफ उभार कर पूरी तरह से मटका मटका कर चलने लगी। अजय उसकी गांड़ को मटकते हुए देखकर उसकी गांड़ को ललचाई हुई नजरो से देखते हुए उसके पीछे चलने लगा। जैसे ही वो सौंदर्या की नजरो से ओझल होकर मूर्ति के पीछे आए तो शहनाज़ ने एक कामुक स्माइल अजय को दी और अजय ने भी आगे बढ़कर शहनाज़ के साथ में चलने लगा। शहनाज़ अपनी गांड़ को पूरी अदा के साथ मटका रही थी और अजय अपने होश खोता जा रहा था। शहनाज़ जान बूझकर चलते हुए अजय से टकरा रही थी और अजय तो जैसे ऐसे ही मौके की तलाश में था। वो चलते हुए शहनाज़ के ठीक पीछे आ गया और उसके कंधे पर अपना हाथ रख दिया तो शहनाज़ के क़दमों की गति बिल्कुल धीमी हो गई और उसने फिर से अजय को पीछे गरदन घुमा कर देखा और स्माइल दी तो अजय ने अपने हाथ की पकड़ उसके कंधे पर बढ़ा दी तो शहनाज़ का जिस्म मस्ती से भर उठा। लेकिन अब मूर्ति के सामने दोनो चलते हुए आ गए थे और सामने खड़ी हुई सौंदर्या नजर आ रही थी जिसका पुरा ध्यान मूर्ति पर था। जैसे ही दोनो सौंदर्या के पास से चौथे चक्कर के लिए गुज़रे तो शहनाज़ बोली:" उफ्फ कितना लंबा चक्कर हैं, थक गई मैं तो, अब धीरे धीरे लगाने पड़ेंगे।

शहनाज़ की बात सौंदर्या के कानों में पड़ी और अजय के लिए तो जैसे ये खुला आमंत्रण था और शहनाज़ अब पूरी अदा के साथ अपने कूल्हों को मटका रही थी। इस बार जैसे ही चलते हुए दोनो मूर्ति के पीछे आए शहनाज़ ने जान बूझकर अपनी स्पीड को बिल्कुल धीमी कर दिया तो अजय ने शहनाज़ के कंधो को फिर से थाम लिया। शहनाज़ के मुंह से आह निकल पड़ी जिसे अजय ने साफ सुना।

अजय उसके कंधे सहलाते हुए धीरे से उसके कान में बोला:"

" ज्यादा थक गई हो क्या शहनाज़ तुम ?

शहनाज़ अजय के हाथ अपने कंधे पर महसूस करते ही रुक गई और बोली:"

" हाँ अजय बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन थक तो गई है मैं।

अजय ने अपनी उंगलियों को उसके कंधो में गडा दिया और बोला:" तुम कहो तो तुम्हे अपनी गोद में उठा लू

शहनाज़ तो कबसे खुद ही उसकी गोद में आने के लिए मचल रही थी लेकिन इतनी आसानी से नहीं क्योंकि वो अजय को पूरी तरह से अपना दीवाना बनाना चाह रही थी। शहनाज़ पलट कर अजय की आंखो में देखते हुए स्माइल दी और बोली:"

" शहनाज़ को गोद में उठा लेना इतना आसान नहीं है अजय, इतनी आसानी से हाथ आने वाली चीज नहीं हूं मैं।

इतना कहकर उसने अजय को ठेंगा दिखाया और एक झटके के साथ आगे निकल गई। अजय उसके पीछे तेजी से बढ़ा लेकिन जब तक उसके पास पहुंचा तो शहनाज़ मूर्ति को पार करते हुए सौंदर्या के सामने आ गई तो और उसने अजय को जीभ निकाल कर चिढ़ा दिया। अजय सौंदर्या के पास पहुंच गया और बोला:"

" दीदी हमारे चार चक्कर पूरे हो गए हैं। अब अगले तीन चक्कर पूरे होने तक आप अपनी आंखे बंद करके इस मूर्ति और चन्द्र देवता का ध्यान करोगी। शहनाज़ थक गई है इसलिए अब चक्कर में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता हैं इसलिए आप फिक्र मत करना और किसी भी दशा में आपकी आंखे नही खुलनी चाहिए।

इतना कहकर अजय ने सौंदर्या को आंखे बंद करने का इशारा किया और सौंदर्या ने अपनी आंखे बंद कर ली। अजय ने शहनाज़ की तरफ देखा और इशारे से पूछा कि अब कैसे बचोगी तो शहनाज़ ने उसे स्माइल करते हुए फिर से ठेंगा दिखाया और चलने लगी। इस बार तो उसकी चाल बिल्कुल जानलेवा ही थी और वो किसी रबर की गुड़िया की तरह मटक रही थी। अजय बहुत ज्यादा तेजी से चलते हुए उसके पास पहुंच गया और जैसे ही अजय उसके पास आया तो शहनाज़ ने बहाना बनाते हुए भागने की कोशिश करी लेकिन अजय ने उसे पीछे से झपट कर अपनी बांहों में भर लिया। शहनाज़ का जिस्म अजीब से रोमांच से भर गया और उसने थोड़ा जोर लगाते हुए छूटने की कोशिश करी तो अजय ने उसे पूरी ताकत से कस लिया और बोला:"

" अब बताओ भागकर कहां जाओगी शहनाज़? बहुत ज्यादा नखरे कर रही थी तुम ।

अजय की बांहों की ताकत महसूस करके शहनाज का रोम रोम मस्ती से भर गया और उसने खुद को उसकी बांहों में पूरी तरह से ढीला छोड़ दिया तो अजय के होंठो पर स्माइल आ गई और और उसके कान के पास धीमे से सेक्सी आवाज में बोला:"

" इतनी जल्दी हार मान गई क्या तुम? थोड़ी देर पहले तो बड़ी उछल रही थी।

अजय ने अपने हाथो से शहनाज़ के पेट को पकड़ रखा था तो शहनाज़ ने अपने हाथ उसके हाथो के उपर रख दिए और सहलाते हुए बोली:"

" तुम ठहरे जंगली शेर। तुमसे कहां जीत पाऊंगी मैं। हार गई मैं बस अब खुश।

शहनाज़ की बात सुनकर अजय ने अपनी पकड़ को ढीला कर दिया और यहीं उससे गलती हो गई। शहनाज़ बिजली की गति से उसकी पकड़ से निकली और दौड़ पड़ी। अजय तेजी से उसके पीछे भागा और उसने शहनाज़ को पकड़ा तो उसकी साड़ी का पल्लू उसके हाथ में आ गया और शहनाज़ की साडी तेज झटके के साथ खुलती चली गई। शहनाज़ को काटो तो खून नहीं और एक झटके के साथ वो आगे को गिर पड़ी। शहनाज़ अब सिर्फ ब्लाउस और पेंटी में उसके सामने रह गई थी और दोनो हाथो से अपना चेहरा ढक लिया। शहनाज़ अब चाहकर भी नहीं भाग सकती थी। अजय उसके पास आ गया और उसे पकड़ कर उठाया और बोला:"

" देख लिया अपनी ज्यादा होशियारी का अंजाम, वैसे तुम बिना साडी के और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही हो।

शहनाज़ ने उसकी तरफ देख कर मुंह फुलाया मानो अपनी नाराजगी जाहिर कर रही हो। अजय उसके पास आ गया और उसके हाथ पकड़ कर अलग किए और ब्लाउस में बंद उसकी चूचियां देखते हुए बोला:"

" मुझे लगता हैं कि मैं चद्र देवता की कृपा सौंदर्या से ज्यादा तुम पर हो रही है शहनाज़। देखो कैसे तुम्हारा अंग अंग खिल कर चमक रहा है।

शहनाज़ ने अजय की नजरे अपनी छाती पर महसूस करी और उसे आंखे दिखाते हुए बोली:"

" बेशर्म कहीं के तुम, लाओ मेरी साडी दो, मुझे चक्कर लगाने हैं अभी बचे हुए।

शहनाज़ जैसे ही आगे को हुई तो उसके पैर में दर्द का एहसास हुआ और अजय ने बिना देरी किए हुए उसे अपनी बाहों में भर लिया और बोला:"

" बस करो शहनाज़ पैर में मोच आ जाएगी।

शहनाज़ ने भी अपने आपको उसकी बाहों में ढीला छोड़ दिया और बोली:"

" अजय मेरी साड़ी तो उठा कर पहन लू मैं ? किसी ने मुझे इस हालत में तुम्हारी बांहों में देख लिया तो ?

अजय ने शहनाज़ के आंखो पर आए हुए उसके बालो को हटाया और बोला:" कोई नहीं देखेगा, बाहर से कोई आएगा नहीं और सौंदर्या की आंखे खुल नहीं पाएगी। साडी एक बार बाद में ही उठा लेना नहीं फिर से खुल गई तो चोट लग सकती हैं।

शहनाज़ ने सुकून की सांस ली लेकिन उसके सवाल ने अजय के दिमाग में एक बात साफ कर दी थी कि शहनाज़ को उसकी गोद में कोई दिक्कत नहीं है बस किसी को पता नहीं चलना चाहिए। अजय उसकी आंखो में देखते हुए धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा और शहनाज़ भी प्यार से उसे ही देख रही थी। जैसे ही उन्हें सौंदर्या नजर आईं तो शहनाज़ हल्की सी शर्मा गई और अजय उसे अपनी बांहों में लिए हुए जैसे ही सौंदर्या के पास से गुज़रा तो शहनाज़ उससे कसकर लिपट गई। शहनाज़ ने जान बूझकर अपनी कोहनी को अपनी चूचियों के नीचे दबाकर उपर की तरफ उभार दिया और उसकी आधे से ज्यादा चूचियां बाहर छलक उठी और अजय पागल सा हो गया और उसके लंड में तनाव आने लगा। देखते ही देखते उसका लंड अपनी पूरी औकात पर आ गया और पत्थर की तरह सख्त होता चला गया। शहनाज़ ने अजय की आंखो में देखते हुए अपने होंठो पर जीभ फिराई और उसे स्माइल दी तो अजय थोड़ा सा झुका और उसके होंठ शहनाज़ के होंठो के सामने आ गए। दोनो एक दूसरे को प्यासी नजरो से देख रहे थे और धीरे धीरे उनके होंठो के बीच की दूरी खत्म हो गई। आह एक बार फिर से शहनाज़ के रसीले होंठ अजय के प्यासे होंठो से मिल गए और शहनाज़ पूरी ताकत से उससे लिपटती चली गई। अजय उसे अपनी गोद में लिए हुए खड़ा था और दोनो आंखे बंद किए हुए एक दूसरे के होंठ चूम रहे थे। अजय शहनाज़ के जादुई मुख रस को चूस कर बहकता जा रहा था और उसने अपनी जीभ बाहर निकाली तो शहनाज़ ने अपना मुंह खोल दिया और अजय की जीभ उसके मुंह में घुसती चली गई। शहनाज़ का बचा कुचा धैर्य भी जवाब दे गया और वो मस्त होकर अजय की जीभ से अपनी जीभ लड़ाने लगी। एक लंबे किस के बाद दोनो के होठ अलग हुए और फिर से जुड़ गए। दोनो पूरी होश से एक दूसरे के होंठ चूस रहे थे और अजय धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा। जैसे ही किस करते हुए वो चक्कर काटकर सौंदर्या के पास पहुंच गए तो शहनाज़ ने अजय को नीचे उतारने का इशारा किया तो अजय ने उसे नीचे उतार दिया और शहनाज़ ने अजय को बांहे फैलाने का इशारा किया और उसकी गोद में चढ़ गई और अपनी दोनो बांहे उसके गले में डाल दी। अब शहनाज़ अजय की गोद में बिल्कुल ठीक वैसे ही थी जैसे सामने लगी हुई मूर्ति सेक्स करते हुए दिखाई गई थी। अजय ने दोनो हाथ उसकी गांड़ के नीचे लगाए और आगे बढ़ गया। अजय ने जैसे ही उसकी गांड़ को दबाया तो शहनाज़ ने फिर से अपने होठ उसके होंठो पर चिपका दिए और किस शुरू हो गई। अजय अब मजे से उसकी गांड़ अपने हाथ में भर कर मसल रहा था और शहनाज़ पल पल और ज्यादा बहकती जा रही थी।अजय का लन्ड नीचे से झटके पर झटके मार रहा था और शहनाज़ पागल सी हो गई थी। दोनो ऐसे ही किस करते हुए सात चक्कर पूरे करने वाले थे शहनाज़ ने अजय को रोक दिया और अजय ने उसे अपनी गोद से उतार दिया और उसे साडी पहना दी।

दोनो अंतिम चक्कर खत्म करके सौंदर्या के सामने पहुंच गए और अजय बोला:"

" बस दीदी हमारे चक्कर पूरे हो गए, आप अब अपनी आंखे खोल दीजिए।

सौंदर्या ने जैसे ही आंखे खोली तो उसकी आंखे के आगे अजय का लंड उसके पायजामा में खड़ा हुआ नजर आया और सौंदर्या शर्मा गई। मूर्ति को देखने और उसे ही सोचने के कारण उसके बदन में सिरहन सी दौड़ रही थी और वो उसकी चूचियां अकड़ती जा रही थी और चूत में रह रह कार बुलबुले से उठ रहे थे।

अजय:" दीदी अब आप चक्कर के लिए तैयार हो जाए। शहनाज़ आप चाहे तो अंदर जा सकती हैं या यहीं आराम कर सकती है। अब आपकी जरूरत नहीं होगी।

शहनाज़:" ठीक है फिर मैं पीछे घूम कर शादाब से बात कर लेती हूं। तब तक आप लोग चक्कर काट कीजिए।

इतना कहकर शाहनाज पीछे की तरफ घूमने निकल गई और शादाब का नंबर मिलाने लगीं लेकिन नंबर नहीं मिल पाया तो वो पीछे बैठ गई और सोचने लगी कि जो हो रहा है क्या वो सही हैं ?

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शहनाज़ एक बड़े से पत्थर पर बैठ गई और सोच में डूब गई। देखते ही देखते उसकी आंख लग गई।

अजय शहनाज़ के ऊपर चढ़ा हुआ था और उसकी चूत में जोरदार धक्के लगा था। हर धक्के पर शहनाज़ का पूरा जिस्म हिल रहा था और शहनाज़ अपनी आंखे मजे से बंद किए हुए नीचे से अपनी गांड़ उठा उठा कर लंड अपनी चूत में ले रही थी। तभी अजय ने एक तगड़ा धक्का लगाया तो दर्द के मारे उसके मुंह से आह निकल पड़ी जिससे शहनाज़ की आंखे खुल गई और और उसे सामने अपना बेटा शादाब खड़ा हुआ नजर आया जिसकी आंखो से आंसू टपक रहे थे और उसने गुस्से से नाराज को देखा और बिना कुछ बोले अपने पैर पटकते हुए चला गया।

शहनाज़ की डर के मारे आंख खुल गई और उसने देखा कि वो सपना देख रही थी तो उसने सुकून की सांस ली। शहनाज़ का पूरा जिस्म पसीने से भीग गया था और उसकी सांसे तेज तेज चल रही थी। शहनाज़ को अजय के साथ कुछ किस याद आ गया और उसकी आंखो से आंसू बह पड़े। नहीं नहीं मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए। मैं किसी भी कीमत पर अपने बेटे को धोखा नहीं दे सकती। मुझे अपने उपर काबू रखना ही होगा। ये ही सब शहनाज़ एक बड़े से पत्थर पर बैठ गई और सोच में डूब गई। देखते ही देखते उसकी आंख लग गई।

अजय शहनाज़ के ऊपर चढ़ा हुआ था और उसकी चूत में जोरदार धक्के लगा था। हर धक्के पर शहनाज़ का पूरा जिस्म हिल रहा था और शहनाज़ अपनी आंखे मजे से बंद किए हुए नीचे से अपनी गांड़ उठा उठा कर लंड अपनी चूत में ले रही थी। तभी अजय ने एक तगड़ा धक्का लगाया तो दर्द के मारे उसके मुंह से आह निकल पड़ी जिससे शहनाज़ की आंखे खुल गई और और उसे सामने अपना बेटा शादाब खड़ा हुआ नजर आया जिसकी आंखो से आंसू टपक रहे थे और उसने गुस्से से नाराज को देखा और बिना कुछ बोले अपने पैर पटकते हुए चला गया।

शहनाज़ की डर के मारे आंख खुल गई और उसने देखा कि वो सपना देख रही थी तो उसने सुकून की सांस ली। शहनाज़ का पूरा जिस्म पसीने से भीग गया था और उसकी सांसे तेज तेज चल रही थी। शहनाज़ को अजय के साथ कुछ किस याद आ गया और उसकी आंखो से आंसू बह पड़े। नहीं नहीं मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए। मैं किसी भी कीमत पर अपने बेटे को धोखा नहीं दे सकती। मुझे अपने उपर काबू रखना ही होगा। ये ही सब सोचते हुए शहनाज़ वहीं बैठी रही और अपने बेटे को याद करती रही।

वहीं दूसरी तरफ अजय और सौंदर्या दोनों ने मूर्ति के चक्कर लगाने शुरू कर दिए। सौंदर्या पहले ही अंदर सेक्स करती हुई मूर्तियां देखकर काफी गर्म हो गई थी और काफी देर से लगातार पूरी तरह से साफ दिखने वाली मूर्ति को चुदाई की मुद्रा में देखकर सौंदर्या का बदन और गर्म होता जा रहा था। दोनो भाई बहन एक साथ चल रहे थे और दोनो में से ही कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं था। शहनाज़ के साथ हुए रोमांस की वजह से अजय का लन्ड पूरी तरह से खड़ा हो गया था जिससे उसका पायजामा आगे से उठा हुआ था और सौंदर्या बीच बीच में उसे ही देख रही थी। देखते ही देखते उनका चक्कर पूरा हो गया और शहनाज़ उन्हें दूर दूर तक नहीं दिखाई दी और वो दोनो फिर से दूसरे चक्कर के लिए आगे बढ़ गए। हर चक्कर पर सौंदर्या को अपने बदन में पहले के मुकाबले और ज्यादा गर्मी महसूस हो रही थी क्योंकि उसे अब पूजा का फल मिल रहा था और उसका जिस्म पूरी तरह से तपता जा रहा था। सौंदर्या पर काम देव की कृपा हो रही थी और उसका सौंदर्य हर पल पहले से ज्यादा आकर्षक लग रहा था। उसकी चाल अपने आप ही बदल गई और उसकी गांड़ तराजू के पल्डे की तरह ऊपर नीचे होने लगी। उफ्फ अजय ये देखकर बेचैन सा हो गया और उसका लन्ड अब लग रहा था कि पायजामा फाड़ कर बाहर आ जाएगा। सौंदर्या और अजय अब छठे चक्कर की और बढ़ गए थे और ठीक मूर्ति के पीछे थे और तभी उसके आगे चलती हुई सौंदर्या लड़खड़ा गई और अजय ने तेजी से उसे अपनी बांहों में थाम लिया तो सौंदर्या उससे लिपट गई और बोली:"

" ओह भाई, अच्छा हुआ तुमने पकड़ ही लिया नहीं तो मैं तो गिर ही जाती।

अजय के हाथ उसके चिकने सपाट पेट पर बंधे हुए थे और उसका लन्ड उसकी टांगो के बीच घुस गया था जिससे सौंदर्या बेचैन हो गई थी। अजय ने अपने सिर को अपनी बहन के कंधे पर टिका दिया और बोला:"

" ओह मेरी प्यारी दीदी, मेरे होते हुए तुम्हे कुछ नहीं हो सकता।

सौंदर्या अपने भाई की बात सुनकर कसमसा उठी और बोली:" मुझे तुम पर पूरा यकीन है भाई। तुम ही मेरी ज़िन्दगी से सारे कष्ट निकाल दोगो। चलो अब जल्दी से आखिरी चक्कर भी पूरा कर लेते है।

अजय:" हाँ हाँ क्यों नहीं मेरी प्यारी बहन। आप थक गई होंगी इसलिए ये चक्कर आप मेरी गोद में लगा लिजिए।

इतना कहकर उसने सौंदर्या को अपनी बांहों में उठा लिया और आगे चल पड़ा। सौंदर्या ने भी अपनी बांहे उसके गले में डाल दी और अपने सिर को उसके सीने पर टिका दिया। आखिरी चक्कर भी पूरा हो गया और सौंदर्या ने खुशी में अपने भाई के गाल को चूमना चाहा और अजय उसे उतारने के लिए नीचे की तरफ झुका तो सौंदर्या के होंठ उसके होंठो से जा टकराए और सौंदर्या ने उसके होंठो को चूम लिया। अजय ने उसकी तरफ देखा और सौंदर्या शर्मा गई। अजय ने उसे प्यार से देखा और शहनाज़ को उधर इधर देखने लगा लेकिन शहनाज़ कहीं नजर नहीं आई। दोनो भाई बहन के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई कि इतनी रात गए शहनाज़ कहां चली गई।

काफी बार पूरे मैदान में देखा लेकिन शहनाज़ कहीं नजर नहीं आई। रात के 12 बजने वाले थे और अजय किसी अनहोनी की आशंका से कांप उठा। उसका थोड़ी देर पहले पत्थर की तरह सख्त लंड सिकुड़ कर छोटा सा हो गया था।

अजय:" दीदी आप एक काम करो, बाहर जाकर गाड़ी में देखो और इधर ही कहीं देखता हूं। अगर शहनाज वहां नहीं मिली तो आप आराम से गाड़ी में ही बैठ जाना और बाहर मत निकलना। फोन पर मुझे बताना सब कुछ ।

इतना कहकर उसने सौंदर्या का हाथ पकड़ा और मंदिर में अंदर की तरफ घुस गया और सौंदर्या तेजी से गाड़ी की तरफ बढ़ गई। अजय मैदान में हर तरफ देख रहा था, पागलों की तरह धुंध रहा था लेकिन शहनाज़ उसे कहीं नजर नहीं आ रही थी। तभी उसका फोन बज उठा और देखा कि सौंदर्या थी तो उसने उठाया और बोला:"

" क्या हुआ दीदी? शहनाज़ दीदी मिल गई क्या ?

सौंदर्या घबराई हुई सी बोली:" नहीं भाई, तुम जल्दी से कुछ करो और उन्हें धुंध लो। नहीं तो हम किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रहेंगे।

अजय ने फोन काट दिया और तभी उसकी नज़र मैदान के कोने में खड़े हुए एक पेड़ पर पड़ी जिस पर एक रस्सी लटकी हुई थी। अजय जल्दी से पेड़ पर चढ़ा और रस्सी के सहारे बाहर उतर गया। अजय हैरान हो गया क्योंकि बाहर काफी घना जंगल था।

अजय समझ गया कि शहनाज़ फिर से किसी मुसीबत में फंस गई है और उसे हर हाल में बचाना ही होगा। अजय जंगल में तेजी से आगे बढ़ रहा था और चारो और खड़े हुए बड़े बड़े पेड़ जिनके हवा के चलने से हिलते हुए पत्ते खौफ पैदा कर रहे थे लेकिन अजय खुद खौफ का दूसरा नाम था।

जल्दी ही उसे कुछ पुरानी सी बस्तियां नजर आने लगी और अजय अब सावधानी पूर्वक आगे बढ़ रहा था। दूर दूर तक आदमी तो क्या जानवर का भी नामो निशान नहीं, सिर्फ मिट्टी और लकड़ी के बने हुए घर। बस्ती में पूरी तरह से सन्नाटा।

अजय थोड़ा और आगे बढ़ा तो उसे सामने की तरफ कुछ रोशनी दिखाई दी और वो तेजी से उसी दिशा में बढ़ने लगा। दूर से ही उसे एक बहुत बड़ी सी मूर्ति नजर आने लगी जो मशाल की रोशनी में लाल नजर आ रही थी। अजय थोड़ा और पास गया और एक पेड़ पर चढ़ गया। अजय को अब सब कुछ साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था। एक बड़ा सा चबूतरा था जिसके चारों और काफी सारी भीड़ जमा हुई थी। औरतें, मर्द बूढ़े बच्चे सभी। बीच में एक कुर्सी लगी हुई थी और उस पर शायद उनका सरदार बैठा हुआ था। लंबा चौड़ा, बिल्कुल राक्षस जैसा और पूरे शरीर पर भालू की तरह लंबे लंबे बाल।

कुर्सी के ठीक सामने शहनाज पड़ी हुई थी जिसके दोनो हाथ बंधे हुए थे। शहनाज़ को अच्छे से सजाया गया था और उसके गले में एक फूलो की माला पड़ी हुई थी। शहनाज़ की आंखे लगभग पथरा सी गई थी और उसके चहरे पर खौफ के बादल साफ नजर आ रहे थे।

12 बजने में अभी कुछ ही मिनट बाकी थे और सरदार अपनी सीट से खड़ा हुआ तो सभी लोग उसे सलाम करने लगे और उसकी जय जय कार करने लगे।

सरदार:" बस साथियों बस, आज हम सबका इंतजार खत्म हो जाएगा और आज इस मांगलिक लड़की की बलि देती ही मेरी तपस्या पूरी हो जाएगी और मैं दुनिया का सबसे ताकतवर इंसान बन जाऊंगा और फिर सारी दुनिया पर मेरा राज होगा।

इतना कहकर जमुरा ने चबूतरे में अपना पैर जोर से मारा तो चबूतरा एक तरफ से टूट गया और उसकी ताकत देखकर भीड़ उसकी जय जय कार करने लगी।

भीड़:" सरदार जमुरा की जय हो। सरदार जमुरा जिंदाबाद।

जमुरत:" 12 बजने में सिर्फ कुछ ही मिनट बाकी हैं और अभी तक मेरे गुरुजी क्यों नहीं आए हैं ?

एक मंत्री जंगली:" महाराज आते हो होंगे। वो तो खुद आपको बड़े बनते देखना चाहते हैं। लेकिन सरदार आप अपने गुस्से को काबू में रखना। कहीं बना हुआ खेल खराब ना हो जाए।

सरदार बेचैनी से इधर उधर टहल रहा था और अजय समझ गया था कि ये गलती से शहनाज़ को मांगलिक समझ कर उसकी बली देना चाहते है। उसे अब सब कुछ समझ में आ गया था आखिर कार क्यों आचार्य तुलसी दास जी ने सौंदर्या की राशि वाली औरत को पहले विधि करने के लिए कहा था। मतलब शहनाज़ तो मांगलिक है नहीं इसलिए उसकी बलि नहीं दी जानी चाहिए। लेकिन ये तो मूर्ख जंगली हैं इनसे शहनाज़ को कैसे बचाया जाए। अजय ने एक योजना बनाई और पेड़ से नीचे उतर कर उन पर हमला करने के लिए तैयार हो गया।

तभी भीड़ चिल्ला उठी:" गुरु जी आ गए, गुरु जी आ गए।

अजय ने देखा कि एक बूढ़ा जंगली आदमी उनके बीच आ गया था और सभी ने उसे झुक कर सलाम किया और जमुरा ने आगे बढ़कर उनके पैर छुए और बोला:"

" गुरुजी आखिर कार आज वो दिन आ ही गया जिसका हमे बेताबी से इंतजार था। अब बस इसकी बली देकर मैं बेपनाह ताकत का मालिक बन जाऊंगा और पूरी दुनिया पर मेरा राज होगा बस मेरा राज।

गुरु जी आगे बढ़े और उन्होंने शहनाज़ का हाथ पकड़ लिया और अपनी आंखे बंद करके कुछ मंत्र पढ़ने लगे और उनके चहरे पर निराशा और अविश्वास के भाव उभर आए जिन्हे देख कर जमुरा परेशान हो गया aur बोला :"

" क्या हुआ? आप इतने परेशान क्यों हो गए ?

गुरु जी:" तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी जमुरा, ये लड़की तो मांगलिक हैं ही नहीं, उसकी बली नहीं दी जा सकती।

जमुरा को मानो यकीन नहीं हुआ और वो चिल्ला उठा:"

" नहीं ऐसा कुछ नहीं हो सकता, आप फिर से देखिए गुरु जी? मेरी तपस्या ऐसी मिट्टी में नहीं मिल सकती।

गुरुजी:" तुमसे भूल हुई जमुरा, अब तुम्हे कोई ताकत नहीं मिल सकती।

जमुरा:" बुड्ढे ये सब तुम्हारी चाल है। तुझे ज़िंदा नहीं छोडूंगा

जमुरा गुस्से से पागल हो गया और उसने एक जोरदार घुसा गुरुजी को मार दिया तो जमीन पर गिर पड़े और मर गए। भीड़ अपने गुरु का ऐसा अपमान देखकर भड़क उठी और चारो तरफ से जमुरा को घेर लिया। अजय तेजी से अंदर घुसा और शहनाज़ को उठाया और बाहर को तरफ दौड़ पड़ा। जंगली एक रको मार रहे थे और चारो तरफ चींखं पुकार मची हुई थी और शहनाज़ अजय के गले से चिपकी हुई थी। कुछ जंगली अजय के पीछे भाग पड़े और अजय मौका देखकर एक पेड़ के पीछे छुप गया और एक एक करके उसने चारो जंगलियों को मौत के घाट उतार दिया और फिर से जंगल से बाहर की तरफ दौड़ पड़ा।

चबूतरे पर खूंखार लड़ाई चल रही थी और जमुरा सब पर भारी पड़ रहा था। देखते ही देखते चारो और लाशे ही लाशे बिछ गई और जमुरा अब अजय के पीछे भागा। दूर दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था और लम्बा चौड़ा राक्षस सा जमुरा तूफान की गति से दौड़ रहा था। अजय मंदिर के पास आ गया और दीवार पर चढ़ ही रहा था कि भूत की तरह से जमुरा प्रकट हो गया और देखते ही देखते उसने अपनी लम्बी तलवार निकाल ली और वार करने के लिए हवा में उठाई तभी पीछे से कुछ तीर आए और जमुरा की पीठ में घुसते चले गए। जमुरा दर्द से तड़प उठा और तलवार उसके हाथ से छूट गई। नीचे खड़े दो जंगलियों के हाथ में फिर से धनुष बाण नजर आए जिनका निशाना अजय और शहनाज़ की तरफ था। इससे पहले कि वो तीर छोड़ पाते जमीन पर दर्द से तड़प रहे जमुरा ने दो चाकू निकाल कर उनकी छाती में फेंक मारे और दोनो जंगली दर्द से तड़पते हुए ढेर हो गए और इसी बीच शहनाज़ अजय की पीठ पर बैठ गई थी और अजय दीवार पर चढ़ गया और जैसे ही जमुरा ने उनकी तरफ चाकू फेंके तो अजय फुर्ती से मंदिर के अंदर कूद गया। जमुरा ने तड़प तड़प कर दम तोड़ दिया। उसकी दर्द भरी चींखें शांत होती चली गई।

शहनाज़ और अजय मंदिर के अंदर दीवार के पास कूद गए थे और अजय जानता था कि अब वो दोनो पूरी तरह से सुरक्षित है। भागने के कारण दोनो की सांसे बुरी तरह से उखड़ी हुई थी। शहनाज़ बुरी तरह से डरी हुई थी और अजय से चिपकी हुई थी। शहनाज़ डर के मारे अभी तक कांप रही थी और अजय उसकी पीठ थपथपाते हुए उसे तसल्ली देते हुए बोला:"

" बस शहनाज़, अब डरने की कोई बात नहीं, मंदिर के अंदर हम पूरी तरह से सुरक्षित हैं। जब तक मैं हूं तुम्हे कुछ नहीं हो सकता।

अजय की बात सुनकर शहनाज़ ने राहत की सांस ली और अपने आपको संभालते हुए बोली:"

" मुझे लगा था कि आज मेरी बली जरूर चढ़ जाएगी। लेकिन तुमने मुझे एक बार फिर से बचा लिया अजय।

अजय ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और बोला:"

" ऐसे कैसे बली चढ़ जाती तुम्हारी, जब तक मैं जिंदा हूं कोई तुम्हारा बाल भी बांका नहीं कर सकता।

शहनाज़ अजय की बात सुनकर उससे कसकर लिपट गई और बोली:"

" लगता है तुमसे मेरा जरूर कोई ना कोई गहरा रिश्ता हैं, मैं जब भी मुसीबत में होती हूं तुम हमेशा पहुंच जाते हो बचाने के लिए।

अजय ने उसकी पीठ फिर से थपथपा दी और बोला:"

" आपको मैं अपने भाई शादाब से लेकर आया हूं और आप भी बिना जाति धर्म की परवाह किए बिना हमारी इतनी मदद कर रही है। आपको बचाना मेरा शर्म हैं शहनाज़। जरूर कुछ तो जरूर हैं हमारे बीच।

दोनो ऐसे ही एक दूसरे से लिपटे रहे और फिर अजय को सौंदर्या की याद आई तो वो बाहर की तरफ चल पड़े। अजय ने शहनाज़ के गले में पड़ी हुई फूलो की माला निकाल दी और शहनाज़ अब बिल्कुल पहले कि तरह खुबसुरत लग रही थी।

जल्दी ही दोनो सौंदर्या के सामने गए तो शहनाज़ को देखते ही उसने सुकून की सांस ली।

सौंदर्या:" ओह शहनाज़ दीदी, अच्छा हुआ आप मिल गई, मैं सच में बहुत परेशान थी। वैसे आप कहां चली गई थी ?

शहनाज़ ने सौंदर्या को सारी बात बताई तो सौंदर्या की आंखो से आंसू निकल पड़े और शहनाज़ को अपनी बांहों में कस लिया। शहनाज़ ने उसके आंसू साफ किए और बोली:"

" रोती क्यों है पगली ? देख तेरे सामने बिल्कुल ठीक तो खड़ी हुई हू मैं सौंदर्या।

सौंदर्या हिचकी लेते हुए बोली:" आप मेरे ऊपर आने वाली हर मुसीबत को झेल रही है। अगर आपकी जगह मैं पहले चक्कर लगाती तो मेरी बली जरूर चढ़ जाती क्योंकि मैं तो मांगलिक भी हूं तो बच नहीं सकती।

अजय और शहनाज़ ने उसकी बात पे गौर किया। सौंदर्या बिल्कुल ठीक बोल रही थी और अगर वो होती तो शायद उसका बचना मुश्किल होता।

अजय:" लेकिन एक बात समझ नहीं आई कि वो जंगली मंदिर के अंदर कैसे घुस गए और तुम उनके हाथ लग गई।

शहनाज़:" मैं पत्थर पर बैठी हुई कुछ सोच रही थी कि मेरे कानों में बच्चे के रोने की आवाज पड़ी। मैं उस दिशा में बढ़ गई लेकिन कोई नजर नहीं आया और बच्चा जोर जोर से बचाने के लिए बोल रहा था। आवाज दीवार की तरफ से आ रही थी और मैं देखने के लिए जैसे ही दीवार पर चढ़ी तो एक फंदा मेरे गले में गिरा और मैं उनके हाथ लग गई।

अजय:" ओह, अब मुझे समझ में सब आ गया। चलो अब चलते हैं और हरिद्वार आने का समय आ गया है।

इतना कहकर अजय ने गाड़ी निकाल ली और दोनो उसमे बैठ गई और गाड़ी सड़क पर दौड़ पड़ी। सौंदर्या सीट पर थोड़ी देर बाद ही सो गई और शहनाज़ ने भी अपनी आंखे बंद कर ली। बस अजय ही जाग रहा था और बीच बीच में वो मुड़कर मुड़कर शहनाज़ को देख रहा था।

पूरी रात गाड़ी चलती रही और अगले दिन सुबह 10 वो हरिद्वार पहुंच गए। अजय ने होटल लिया और उसके बाद सभी लोगो ने खाना खाया और सो गए। अजय एक पंडित जी से मिलने चला गया और पंडित जी ने अजय को गंगा के किनारे एक बहुत ही बड़ा क्षेत्र किराए पर दिलवा दिया।

अजय आया तो शहनाज़ और सौंदर्या दोनो उठ गई थी और अजय बोला:" जल्दी से तैयार हो जाओ, आज रात से पूजा की बाकी विधियां आरंभ हो जाएगी। इसके लिए मैंने गंगा नदी के किनारे एक सुंदर सा घर और उसके आस पास का काफी क्षेत्र बुक कर किया हैं ताकि बिना किसी दिक्कत के हम लोग आगे की पूजा विधि कर सके।

सौंदर्या और शहनाज़ दोनो तैयार होने लगी और जल्दी ही एक बार फिर से गाड़ी गंगा नदी की तरफ चल पड़ी। थोड़ी ही बाद की वोह उतर गए और सामने ही एक बड़ा खूबसूरत घर बना हुआ था। सौंदर्या और शहनाज़ दोनो उसे देखते ही खुश हो गई। चारो और हरे हरे पेड़ पौधे, चारो तरफ से आती हुई खुली हवा, सामने ही थोड़ी दूरी पर कल कल करती हुई गंगा नदी के जल की आवाज। सामने बने हुए गंगा नदी के खूबसूरत घाट। कुल मिलाकर अदभुत।

शहनाज़:" जगह तो बहुत अच्छी हैं सौंदर्या, मुझे पसंद आई।

सौंदर्या:" हाँ जी, बिल्कुल सब कुछ कितना अच्छा लग रहा है। मैं तो शादी के बाद हनीमून मनाने यहीं आऊंगी।

शहनाज़ उसकी बात पर हंस पड़ी और उसे अपने बेटे की याद आ गई। उसने मन ही मन फैसला किया कि वो भी थोड़े दिन अपने बेटे के साथ यहीं घूमने आएगी। शहनाज़ काफी अच्छा महसूस कर रही थी क्योंकि ठंडी हवा अपना जादू बिखेर रही थी। जल्दी ही नहा कर आ गई और उसने एक काले रंग की आधी बाजू की ढीली सी गोल टी शर्ट पहनी हुई थी जिसमें वो बेहद खूबसूरत लग रही थी। शहनाज़ ने अपना मेक अप किट निकाला और अपने होंठो पर लाल सुर्ख लिपिस्टिक लगा ली। कुल मिलाकर वो बेहद आकर्षक या कह कीजिए कि कामुक लग रही थी। शहनाज़ अपनी घड़ी पहन ही रही थी कि तभी बाहर से अजय की आवाज आई:"

" खाना लग गया है, शहनाज़ और सौंदर्या दोनो आ जाओ। नहीं तो पूजा के लिए देर हो जाएगी।

शहनाज़ ने जल्दी से अपनी घड़ी पहन ली बाहर की तरफ आ गई। अजय उसे देखते ही रह गया। सचमुच बेहद शहनाज़ बेहद खूबसूरत लग रही थी। अजय उसे लगातार देख रहा था।

शहनाज़:" ऐसे क्या देख रहे हो ? क्या सब ठीक हो तुम ?

अजय:" देख रहा हूं कि आप कितनी सुंदर हो। सच में मेरी बात मानो तो आपको फिर से शादी कर लेनी चाहिए।

शहनाज़ उसे देखते ही मुस्करा उठी और बोली:"

" बाते बनाना तो कोई तुमसे सीखे, कुछ भी बोल देते हो।

अजय:" नहीं शहनाज़ सच कह रहा हूं, ऐसा लग रहा है मानो कल रात कामदेव की कृपया सौंदर्या से ज्यादा तुम पर हो गई है।

इससे पहले की बात आगे बढ़ती सौंदर्या आ गई और टेबल पर बैठ गई और शहनाज़ को देखते ही बोली:"

" सच में आप बेहद खूबसूरत लग रही है, आप हमेशा ऐसे ही हंसती रहे।

शहनाज़ कुर्सी पर बैठ गई और उसे सौंदर्या को स्माइल दी। सभी लोग खाना खाने लगे। सौंदर्या ने थोड़ा ही खाना खाया और बोली;"

" भाई मुझे कॉलेज का कुछ काम होगा। आप लोग खाओ। मैंने खा लिया।

शहनाज़:" अरे सौंदर्या ऐसे नहीं जाते, पहले खाना तो खा लो अच्छे से तुम ।

सौंदर्या:" पेटभर खा लिया मैंने, अभी जरूरी काम हैं कॉलेज का आप लोग खाओ।

इतना कहकर वो चली गई और दोनो खाना खाने लगे। शहनाज़ चावल खा रही थी और अजय मौका देख कर उसकी खूबसूरती का जलवा देख रहा था। शहनाज़ पानी लेने के लिए आगे को झुकी और उसकी चूचियों का उभार सामने बैठे अजय को नजर आया तो उसकी आंखे चमक उठी। शहनाज़ पानी लेकर फिर से पीछे हो गई और पीने लगी। आगे होने की वजह से उसकी टी शर्ट खीच गई थी और उसकी चुचियों का उभार साफ़ नजर आ रहा था और अजय उसे ही बीच बीच में देख रहा था। शहनाज़ ने उसे देखा और बोली:"

" कहां इधर उधर झांक रहे हो तुम? खाना खाओ आराम से।

इतना कहकर उसने मुंह नीचा किया और मंद मंद मुस्काने हुए खाना खाने लगी।
 
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