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अजय शहनाज़ की इस अदा पर मर मिटा। शहनाज़ अपना मुंह नीचे किए हुए थी और अजय बिल्कुल तसल्ली से उसकी चूचियां देख रहा था। कितना खूबसूरत लग रहा था शहनाज़ की चूचियों का उभार। शहनाज़ ने मुंह उपर किया तो अजय की नजरो का एहसास हुआ और स्माइल करते हुए बोली'"
" सुधर जाओ तुम, उधर इधर क्या देख रहे हो। आराम से खाना खाओ।
अजय ने प्लेट में ध्यान दिया और खाने लगा। शहनाज़ की खूबसूरती एक बार फ़िर से अजय से दिमाग और दिल पर हावी होती जा रही थी। दोनो ने खाना खाया और उसके बाद अजय ने दोनो को आगे की पूजा विधि के बारे में बताया:"
" अब यहां तीन दिन की पूजा विधि होगी और हो सकता है कि अभी पहले से ज्यादा मुश्किल आए लेकिन हमें सभी बाधाओं को पार करना ही होगा। ध्यान से मेरी सुनना क्योंकि कोई भी विधि ठीक से नहीं हुई तो सारी मेहनत खराब हो जाएगी।
अजय रुका और दोनो उसकी तरफ देखने लगी। अजय ने फिर से बोलना शुरू किया:"
" आज के बाद आप दोनो पूजा के लिए सिर्फ शुद्ध कपड़े धारण करोगी। मेरे द्वारा दिए गए कपड़ों के अलावा आपके जिस्म पर कोई और कपड़ा नहीं होगा। आज से आप दोनो के लिए हर समय मंगल यंत्र पहनना जरूरी हो जाएगा क्योंकि जाते जाते मंगल ग्रह अपना पूरा असर दिखा सकता है और मंगल यंत्र के चलते उसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। दूसरी बात मंगल यंत्र आप खुद अपने हाथ से नहीं पहन सकते। शहनाज़ के मंगल यंत्र पहनने के बाद सौंदर्या तुम्हारे शरीर को हाथ भी नहीं लगा पाएगी। इसलिए जरूरी होगा कि पहले शहनाज़ सौंदर्या को मंगल यंत्र पहना दे। मंगल यंत्र को गोलाई में लपेट कर कमर से लेकर नाभि तक बांधना होगा। आप समझ गई ना शहनाज़ ?
शहनाज़ ने हाँ में सिर हिलाया और अजय उसे मंगल यंत्र दिया और कमरे से बाहर निकल गया।सौंदर्या ने साडी ली और अंदर बाथरूम में घुस गई और उसने अपने कांपते हाथो से अपनी ब्रा पेंटी उतार दी और साडी को अपने जिस्म पर लपेट लिया। सौंदर्या शर्मा गई क्योंकि उसका आधे से ज्यादा जिस्म नंगा चमक रहा था। शहनाज़ ने डिब्बे से मंगल यंत्र बाहर निकाल लिया था। ये एक सोने की बनी हुई चेन के जैसा था जिसने पीछे कमर से लेकर नाभि पर बांधने के लिए काला धागा लगा हुआ था और नीचे दो सोने की पाइप जैसी लाइन निकली हुई थी। बांधने पर नाभि के ठीक नीचे जांघो के बीच घुंघरू उपर से नीचे तक एक सोने की तार पर छोटे अंगूर के आकार के घुंघरू लगे हुए थे। शहनाज़ ये सब देखकर हैरान थी क्योंकि वो नहीं जानती थी बांधने पर क्या होगा।
सौंदर्या सिर्फ साडी में देखते ही शहनाज़ मुस्कुरा उठी और बोली'"
" काफी हॉट लग रही हो ऐसे सौंदर्या। आओ मैं तुम्हे मंगल यंत्र बांध देती हूं।
सौंदर्या कांपती हुई धीरे धीरे आगे बढ़ी और शहनाज़ ने उसकी साडी के अंदर हाथ डालकर उसके पेट को छुआ तो सौंदर्या मचल सी गई। शहनाज़ खुद काफी गर्म हो गई थी और हिम्मत करके शहनाज़ ने मंगल यंत्र को उसकी कमर पर टिकाया और घुमाते हुए उसकी नाभि पर ले आई। सौंदर्या शहनाज़ के हाथो की छुवण से मचल रही थी। शहनाज़ ने मंगल यंत्र को उसकी दोनो जांघो के बीच से निकाला और उपर पेट पर बांध दिया तो सौंदर्या और शहनाज़ दोनो के मुंह से आह निकल पड़ी। दो सोने के धागों में बीच उसकी चूत फंस सी गई थी। यंत्र पर लगे घुंघरू उसकी चूत के होंठो को छू रहे थे।
सौंदर्या ने एक बार शहनाज़ की तरफ देखा तो शहनाज़ बोली:"
" ज्यादा टाईट तो नहीं बंधा हैं ना सौंदर्या ये मंगल यंत्र।
सौंदर्या ने इंकार में गर्दन हिला दी तो शहनाज़ बोली:"
" जल्दी से अपने सभी काम निपटा लो। फिर पूजा के लिए बाहर गंगा किनारे जाना होगा।
इतना कहकर वो बाहर निकल गई और दूसरे कमरे में आ गई जहां अजय उसका ही इंतजार कर रहा था। शहनाज़ उसे देखते ही कांप उठी क्योंकि आगे जो होने वाला था उस सोचकर ही उसके रोंगटे खड़े हो गए।
अजय:" मंगल यंत्र ठीक से बांध दिया ना आपने ? कोई दिक्कत तो नहीं आई ?
शहनाज़:" हाँ कोई दिक्कत नहीं हुई, लेकिन अब एक समस्या हो गई। मुझे तो साडी ही बांधनी नहीं आती तो अब क्या होगा ?
अजय:" तुम चिंता मत करो, मैं बांध दूंगा और तुम सीख भी लेना ताकि आगे दिक्कत ना आए।
अजय की बात सुनकर शहनाज़ बेचैन हो गई क्योंकि उसे पहले अपने ब्रा और पैंटी निकालने थे। मतलब अजय उसके बिल्कुल नंगे जिस्म को छूते हुए साडी बांधने वाला है। ये सोचकर ही शहनाज़ के जिस्म में सनसनी सी दौड़ गई। उसने साडी उठाई और अंदर की तरफ जाने लगी। शहनाज़ ने कांपते हुए हाथो से अपनी ब्रा को उतार दिया तो उसकी मस्त मस्त गोल चूचियां बाहर को छलक पड़ी। शहनाज़ ने दोनो पर प्यार से अपना हाथ फिराया मानो उन्हें समझा रही हो कि ज्यादा उछलना अच्छी बात नहीं होती।
शहनाज़ ने फिर अपने हाथो को नीचे सरका दिया और अपनी पेंटी भी उतार दी। पेंटी चूत वाले हिस्से पर से हल्की सी भीग गई थी। शहनाज़ ने अपनी चूत को अपनी जांघो के बीच में कस लिया और सिसक उठी। उसने पास पड़ी हुई साडी को उठाया और लपेटने लगी लेकिन काफी कोशिश के बाद भी पहन नहीं पाई। अब क्या होगा, उफ्फ अजय मेरी साडी बांधने वाला है, ये सोचकर वो बेचैन हो गई। थक हार कर उसने अजय को आवाज लगाई
"' अजय मुझसे साडी नहीं बंध पा रही, क्या करू ?
अजय उसकी बात सुनकर मन ही मन खुश हो गया क्योंकि वो तो कबसे से उसके बदन को छूने के लिए मरा जा रहा था। अजय प्यार से बोला:"
" लपेटकर बाहर आ जाओ जैसे ही लपेट सकती हो।
शहनाज़ ने साडी के दोनो पल्लू लिए और दुपट्टे की तरह अपने अपनी छाती और गांड़ पर लपेट लिया और कांपते हुए बाहर की तरफ चल पड़ी। शहनाज़ की आंखे लाल सुर्ख हो गई और और जिस्म पूरी तरह से तप रहा था मानो बुखार हो गया हो।
शहनाज़ ने कांपते हाथो से गेट खोला और उत्तेंजना से लगभग लड़खड़ाती हुई बाहर आ गई जिससे उसके एक कंधे पर से साडी सरक गई और शहनाज़ की आधे से ज्यादा चूचियां नजर आ रही थी। शहनाज़ के होंठ कांप रहे थे और शर्म के मारे उसकी निगाह झुक गई।
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अजय शहनाज़ की गोल गोल चूचियां, उसकी गहरी नाभि, उसके कांपते रसीले होंठों को देखकर मदहोश हो गया और उसकी तरफ बढ़ गया। अजय शहनाज़ के पास जाकर खड़ा हो गया और उसका एक चक्कर लगाया। शहनाज़ की चिकनी नंगी कमर देखते ही अजय तड़प उठा। शहनाज़ को आज अजय पूरी तरह से मदहोश करना चाहता था कि ताकि वो खुद ही उसकी तरफ खींची चली आए। उसने शहनाज़ के पीछे खड़े होकर ही अपनी टी शर्ट और बनियान उतार दिया और उपर से पूरी तरह से नंगा हो गया। अजय जान बूझकर शहनाज़ के सामने आ गया और बोला:"
:" बहुत सुंदर लग रही हो शहनाज़, पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा सुंदर। अगर इतनी शर्माओगी तो आगे पूजा किस तरह करोगी। एक बार मेरी तरफ देखो पहले तुम।
शहनाज़ ने हिम्मत करके अपना चेहरा उठाया और उसकी नजर अजय की मजबूत चौड़ी छाती पर पड़ी तो शहनाज़ मचल उठी।
" पहले साड़ी पहना दू या मंगल यंत्र? बाद में मंगल यंत्र पहनाया तो साडी खराब हो सकती हैं।
मंगल यंत्र का नाम सुनते ही शहनाज़ की चूत में चिंगारी सी दौड़ गई। हाय मेरी खुदा, उफ्फ क्या होगा अब।
शहनाज़ ने कुछ जवाब नहीं दिया और अजय ने बिना देरी किए मंगल यंत्र को उठा लिया और उसे बाहर निकालने लगा। शहनाज़ को ऐसा लग रहा था कि अजय मंगल यंत्र नहीं बल्कि अपना लंड निकाल रहा हो। जैसे ही उसने डिब्बे से यंत्र बाहर निकाला तो शहनाज़ ने पूरी जोर से अपनी जांघों को कस लिया।
अजय थोड़ा आगे बढ़ा और शहनाज़ के पीछे जाकर खड़ा हो गया और धीरे से उसके कान में बोला:"
" मंगल यंत्र बंधवाने के लिए तैयार हो ना शहनाज़ ?
शहनाज़ ने हाँ में अपनी गर्दन हिला दी और अजय ने अपने हाथ आगे करते हुए उसकी कमर को थाम लिया तो शहनाज़ सिसक उठी। अजय ने प्यार से उसकी कमर पर हाथ फिराया और बोला:"
" ओह माय गॉड, तुम्हारी कमर कितनी चिकनी और मुलायम हैं, ना ज्यादा मोटी ना पतली, एक दम मस्त।
शहनाज़ अपनी तारीफ सुनकर पूरी तरह से बहक गई और उसकी चूत पूरी गीले हो गई। अजय ने मंगल यंत्र को उसकी कमर पर टिका दिया तो शहनाज़ का रोम रोम मस्ती में भर गया। अजय की उंगलियां उसकी कमर पर घूमती हुई उसकी नाभि पर आ गई तो शहनाज़ ने उत्तेजना से अपने होंठो को दांतो तले भींच लिया। अजय ने मंगल यंत्र के सोने के धागोर्को पकड़ा और शहनाज़ की दोनो नंगी जांघो को जैसे ही छुआ तो शहनाज़ के मुंह से आह निकल पड़ी और उसकी चूत से बहकर रस ने उसकी जांघो को भिगो दिया। अजय समझ गया कि शहनाज़ पूरी तरह से बहक गई है तो उसने शहनाज़ की जांघो को उंगलियों से हल्का सा छुआ और बोला:"
" शहनाज़ अपनी दोनो नंगी टांगो को थोड़ा सा और खोल लो।
अजय ने जान बूझकर नंगी शब्द का इस्तेमाल किया और शहनाज़ ने अपनी टांगो को खोल दिया और अजय ने उसकी दोनो जांघो के बीच से मंगल यंत्र के धागे निकाले और उपर उसकी कमर पर अच्छे से जोर से खींच कर बांध दिया।
धागो के बंधते ही शहनाज़ की चूत उनके बीच में पूरी तरह से कसकर फंस गई और अंगूर के जैसे घुंघरू उसकी चूत के मुंह से जा टकराए तो शहनाज़ से बर्दाश्त नहीं हुआ और उसके बदन ने तेज झटका खाया और शहनाज़ जोर से सिसक उठी। झटके के कारण साडी उसके जिस्म से हटकर नीचे गिरने लगी तो शहनाज़ ने तेजी से अपनी साडी को पकड़ लिया लेकिन जब तक साडी उसके घुटनो में पहुंच गई थी।
शहनाज़ की मोटी मोटी गोल गोल गांड़ पूरी तरह से नंगी होकर उसकी आंखो के सामने आ गई। अजय के लंड ने जोरदार झटका खाया और पूरी तरह से अकड़ कर खड़ा हो गया। शहनाज़ ने जल्दी से साडी को उपर किया और फिर से उल्टी सीधी तरह लपेटने लगी तो अजय ने बीच में उसके हाथ को पकड़ लिया और बोला:"
" लाओ मैं पहना देता हूं, कहीं फिर से ना खुल जाए और तुम्हारी गांड़ फिर से नंगी हो जाए शहनाज़।
अजय के मुंह से गांड़ सुनकर शहनाज़ पागल सी हो गईं। अजय ने साडी के पल्लू को लिया और उसकी कमर में लपेट दिया और उसे गोल गोल घुमाने लगा। शहनाज़ के दोनो कंधे और चूचियां पूरी तरह से नंगी थी। शहनाज़ के खुले हुए बाल उसकी छाती को आ गए और उसकी चूचियों को पूरी तरह से ढक लिया था।
शहनाज़ की गांड़ पर साडी लिपट गई थी और वो दोनो आंखे बंद किए हुए खड़ी थी। अजय थोड़ा सा निराश हुआ लेकिन वो जानता था कि उसे क्या करना है जिससे शहनाज़ के दोनो खूबसूरत गोल गोल कबूतर उसकी आंखो में सामने होंगे।
अजय उसके बिल्कुल करीब आ गया और उसका खड़ा हुआ लंड उसकी गांड़ से आ लगा तो शहनाज़ ने उसकी साड़ी का दूसरा पल्लू पकड़ लिया और जोर से उपर की तरफ उठाने लगा जिससे एक बार फिर से साडी उसकी गांड़ पर से हटने लगी तो शहनाज़ बावली सी हो गई। अजय ने साडी को उसकी जांघो पर से पकड़ा और मंगल यंत्र के घुंघरू जोर से हिला दिए और जैसे ही घुंघरू शहनाज़ की चूत के टकराए तो शहनाज़ सब कुछ भूलकर पलटी और अजय के होंठ चूसने लगी। अजय ने शहनाज़ के होंठो को अपने होंठो में भर लिया जोर जोर से चूसने लगा।
:" अजय कितनी देर बाद निकलना हैं पूजा के लिए ?
जैसे ही सौंदर्या की आवाज उनके कानो में पड़ी तो दोनो ना चाहते हुए भी अलग हो गए और अजय ने जल्दी से शहनाज़ को साडी पहना दी और फिर दोनो बाहर आ गए।
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" सुधर जाओ तुम, उधर इधर क्या देख रहे हो। आराम से खाना खाओ।
अजय ने प्लेट में ध्यान दिया और खाने लगा। शहनाज़ की खूबसूरती एक बार फ़िर से अजय से दिमाग और दिल पर हावी होती जा रही थी। दोनो ने खाना खाया और उसके बाद अजय ने दोनो को आगे की पूजा विधि के बारे में बताया:"
" अब यहां तीन दिन की पूजा विधि होगी और हो सकता है कि अभी पहले से ज्यादा मुश्किल आए लेकिन हमें सभी बाधाओं को पार करना ही होगा। ध्यान से मेरी सुनना क्योंकि कोई भी विधि ठीक से नहीं हुई तो सारी मेहनत खराब हो जाएगी।
अजय रुका और दोनो उसकी तरफ देखने लगी। अजय ने फिर से बोलना शुरू किया:"
" आज के बाद आप दोनो पूजा के लिए सिर्फ शुद्ध कपड़े धारण करोगी। मेरे द्वारा दिए गए कपड़ों के अलावा आपके जिस्म पर कोई और कपड़ा नहीं होगा। आज से आप दोनो के लिए हर समय मंगल यंत्र पहनना जरूरी हो जाएगा क्योंकि जाते जाते मंगल ग्रह अपना पूरा असर दिखा सकता है और मंगल यंत्र के चलते उसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। दूसरी बात मंगल यंत्र आप खुद अपने हाथ से नहीं पहन सकते। शहनाज़ के मंगल यंत्र पहनने के बाद सौंदर्या तुम्हारे शरीर को हाथ भी नहीं लगा पाएगी। इसलिए जरूरी होगा कि पहले शहनाज़ सौंदर्या को मंगल यंत्र पहना दे। मंगल यंत्र को गोलाई में लपेट कर कमर से लेकर नाभि तक बांधना होगा। आप समझ गई ना शहनाज़ ?
शहनाज़ ने हाँ में सिर हिलाया और अजय उसे मंगल यंत्र दिया और कमरे से बाहर निकल गया।सौंदर्या ने साडी ली और अंदर बाथरूम में घुस गई और उसने अपने कांपते हाथो से अपनी ब्रा पेंटी उतार दी और साडी को अपने जिस्म पर लपेट लिया। सौंदर्या शर्मा गई क्योंकि उसका आधे से ज्यादा जिस्म नंगा चमक रहा था। शहनाज़ ने डिब्बे से मंगल यंत्र बाहर निकाल लिया था। ये एक सोने की बनी हुई चेन के जैसा था जिसने पीछे कमर से लेकर नाभि पर बांधने के लिए काला धागा लगा हुआ था और नीचे दो सोने की पाइप जैसी लाइन निकली हुई थी। बांधने पर नाभि के ठीक नीचे जांघो के बीच घुंघरू उपर से नीचे तक एक सोने की तार पर छोटे अंगूर के आकार के घुंघरू लगे हुए थे। शहनाज़ ये सब देखकर हैरान थी क्योंकि वो नहीं जानती थी बांधने पर क्या होगा।
सौंदर्या सिर्फ साडी में देखते ही शहनाज़ मुस्कुरा उठी और बोली'"
" काफी हॉट लग रही हो ऐसे सौंदर्या। आओ मैं तुम्हे मंगल यंत्र बांध देती हूं।
सौंदर्या कांपती हुई धीरे धीरे आगे बढ़ी और शहनाज़ ने उसकी साडी के अंदर हाथ डालकर उसके पेट को छुआ तो सौंदर्या मचल सी गई। शहनाज़ खुद काफी गर्म हो गई थी और हिम्मत करके शहनाज़ ने मंगल यंत्र को उसकी कमर पर टिकाया और घुमाते हुए उसकी नाभि पर ले आई। सौंदर्या शहनाज़ के हाथो की छुवण से मचल रही थी। शहनाज़ ने मंगल यंत्र को उसकी दोनो जांघो के बीच से निकाला और उपर पेट पर बांध दिया तो सौंदर्या और शहनाज़ दोनो के मुंह से आह निकल पड़ी। दो सोने के धागों में बीच उसकी चूत फंस सी गई थी। यंत्र पर लगे घुंघरू उसकी चूत के होंठो को छू रहे थे।
सौंदर्या ने एक बार शहनाज़ की तरफ देखा तो शहनाज़ बोली:"
" ज्यादा टाईट तो नहीं बंधा हैं ना सौंदर्या ये मंगल यंत्र।
सौंदर्या ने इंकार में गर्दन हिला दी तो शहनाज़ बोली:"
" जल्दी से अपने सभी काम निपटा लो। फिर पूजा के लिए बाहर गंगा किनारे जाना होगा।
इतना कहकर वो बाहर निकल गई और दूसरे कमरे में आ गई जहां अजय उसका ही इंतजार कर रहा था। शहनाज़ उसे देखते ही कांप उठी क्योंकि आगे जो होने वाला था उस सोचकर ही उसके रोंगटे खड़े हो गए।
अजय:" मंगल यंत्र ठीक से बांध दिया ना आपने ? कोई दिक्कत तो नहीं आई ?
शहनाज़:" हाँ कोई दिक्कत नहीं हुई, लेकिन अब एक समस्या हो गई। मुझे तो साडी ही बांधनी नहीं आती तो अब क्या होगा ?
अजय:" तुम चिंता मत करो, मैं बांध दूंगा और तुम सीख भी लेना ताकि आगे दिक्कत ना आए।
अजय की बात सुनकर शहनाज़ बेचैन हो गई क्योंकि उसे पहले अपने ब्रा और पैंटी निकालने थे। मतलब अजय उसके बिल्कुल नंगे जिस्म को छूते हुए साडी बांधने वाला है। ये सोचकर ही शहनाज़ के जिस्म में सनसनी सी दौड़ गई। उसने साडी उठाई और अंदर की तरफ जाने लगी। शहनाज़ ने कांपते हुए हाथो से अपनी ब्रा को उतार दिया तो उसकी मस्त मस्त गोल चूचियां बाहर को छलक पड़ी। शहनाज़ ने दोनो पर प्यार से अपना हाथ फिराया मानो उन्हें समझा रही हो कि ज्यादा उछलना अच्छी बात नहीं होती।
शहनाज़ ने फिर अपने हाथो को नीचे सरका दिया और अपनी पेंटी भी उतार दी। पेंटी चूत वाले हिस्से पर से हल्की सी भीग गई थी। शहनाज़ ने अपनी चूत को अपनी जांघो के बीच में कस लिया और सिसक उठी। उसने पास पड़ी हुई साडी को उठाया और लपेटने लगी लेकिन काफी कोशिश के बाद भी पहन नहीं पाई। अब क्या होगा, उफ्फ अजय मेरी साडी बांधने वाला है, ये सोचकर वो बेचैन हो गई। थक हार कर उसने अजय को आवाज लगाई
"' अजय मुझसे साडी नहीं बंध पा रही, क्या करू ?
अजय उसकी बात सुनकर मन ही मन खुश हो गया क्योंकि वो तो कबसे से उसके बदन को छूने के लिए मरा जा रहा था। अजय प्यार से बोला:"
" लपेटकर बाहर आ जाओ जैसे ही लपेट सकती हो।
शहनाज़ ने साडी के दोनो पल्लू लिए और दुपट्टे की तरह अपने अपनी छाती और गांड़ पर लपेट लिया और कांपते हुए बाहर की तरफ चल पड़ी। शहनाज़ की आंखे लाल सुर्ख हो गई और और जिस्म पूरी तरह से तप रहा था मानो बुखार हो गया हो।
शहनाज़ ने कांपते हाथो से गेट खोला और उत्तेंजना से लगभग लड़खड़ाती हुई बाहर आ गई जिससे उसके एक कंधे पर से साडी सरक गई और शहनाज़ की आधे से ज्यादा चूचियां नजर आ रही थी। शहनाज़ के होंठ कांप रहे थे और शर्म के मारे उसकी निगाह झुक गई।
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अजय शहनाज़ की गोल गोल चूचियां, उसकी गहरी नाभि, उसके कांपते रसीले होंठों को देखकर मदहोश हो गया और उसकी तरफ बढ़ गया। अजय शहनाज़ के पास जाकर खड़ा हो गया और उसका एक चक्कर लगाया। शहनाज़ की चिकनी नंगी कमर देखते ही अजय तड़प उठा। शहनाज़ को आज अजय पूरी तरह से मदहोश करना चाहता था कि ताकि वो खुद ही उसकी तरफ खींची चली आए। उसने शहनाज़ के पीछे खड़े होकर ही अपनी टी शर्ट और बनियान उतार दिया और उपर से पूरी तरह से नंगा हो गया। अजय जान बूझकर शहनाज़ के सामने आ गया और बोला:"
:" बहुत सुंदर लग रही हो शहनाज़, पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा सुंदर। अगर इतनी शर्माओगी तो आगे पूजा किस तरह करोगी। एक बार मेरी तरफ देखो पहले तुम।
शहनाज़ ने हिम्मत करके अपना चेहरा उठाया और उसकी नजर अजय की मजबूत चौड़ी छाती पर पड़ी तो शहनाज़ मचल उठी।
" पहले साड़ी पहना दू या मंगल यंत्र? बाद में मंगल यंत्र पहनाया तो साडी खराब हो सकती हैं।
मंगल यंत्र का नाम सुनते ही शहनाज़ की चूत में चिंगारी सी दौड़ गई। हाय मेरी खुदा, उफ्फ क्या होगा अब।
शहनाज़ ने कुछ जवाब नहीं दिया और अजय ने बिना देरी किए मंगल यंत्र को उठा लिया और उसे बाहर निकालने लगा। शहनाज़ को ऐसा लग रहा था कि अजय मंगल यंत्र नहीं बल्कि अपना लंड निकाल रहा हो। जैसे ही उसने डिब्बे से यंत्र बाहर निकाला तो शहनाज़ ने पूरी जोर से अपनी जांघों को कस लिया।
अजय थोड़ा आगे बढ़ा और शहनाज़ के पीछे जाकर खड़ा हो गया और धीरे से उसके कान में बोला:"
" मंगल यंत्र बंधवाने के लिए तैयार हो ना शहनाज़ ?
शहनाज़ ने हाँ में अपनी गर्दन हिला दी और अजय ने अपने हाथ आगे करते हुए उसकी कमर को थाम लिया तो शहनाज़ सिसक उठी। अजय ने प्यार से उसकी कमर पर हाथ फिराया और बोला:"
" ओह माय गॉड, तुम्हारी कमर कितनी चिकनी और मुलायम हैं, ना ज्यादा मोटी ना पतली, एक दम मस्त।
शहनाज़ अपनी तारीफ सुनकर पूरी तरह से बहक गई और उसकी चूत पूरी गीले हो गई। अजय ने मंगल यंत्र को उसकी कमर पर टिका दिया तो शहनाज़ का रोम रोम मस्ती में भर गया। अजय की उंगलियां उसकी कमर पर घूमती हुई उसकी नाभि पर आ गई तो शहनाज़ ने उत्तेजना से अपने होंठो को दांतो तले भींच लिया। अजय ने मंगल यंत्र के सोने के धागोर्को पकड़ा और शहनाज़ की दोनो नंगी जांघो को जैसे ही छुआ तो शहनाज़ के मुंह से आह निकल पड़ी और उसकी चूत से बहकर रस ने उसकी जांघो को भिगो दिया। अजय समझ गया कि शहनाज़ पूरी तरह से बहक गई है तो उसने शहनाज़ की जांघो को उंगलियों से हल्का सा छुआ और बोला:"
" शहनाज़ अपनी दोनो नंगी टांगो को थोड़ा सा और खोल लो।
अजय ने जान बूझकर नंगी शब्द का इस्तेमाल किया और शहनाज़ ने अपनी टांगो को खोल दिया और अजय ने उसकी दोनो जांघो के बीच से मंगल यंत्र के धागे निकाले और उपर उसकी कमर पर अच्छे से जोर से खींच कर बांध दिया।
धागो के बंधते ही शहनाज़ की चूत उनके बीच में पूरी तरह से कसकर फंस गई और अंगूर के जैसे घुंघरू उसकी चूत के मुंह से जा टकराए तो शहनाज़ से बर्दाश्त नहीं हुआ और उसके बदन ने तेज झटका खाया और शहनाज़ जोर से सिसक उठी। झटके के कारण साडी उसके जिस्म से हटकर नीचे गिरने लगी तो शहनाज़ ने तेजी से अपनी साडी को पकड़ लिया लेकिन जब तक साडी उसके घुटनो में पहुंच गई थी।
शहनाज़ की मोटी मोटी गोल गोल गांड़ पूरी तरह से नंगी होकर उसकी आंखो के सामने आ गई। अजय के लंड ने जोरदार झटका खाया और पूरी तरह से अकड़ कर खड़ा हो गया। शहनाज़ ने जल्दी से साडी को उपर किया और फिर से उल्टी सीधी तरह लपेटने लगी तो अजय ने बीच में उसके हाथ को पकड़ लिया और बोला:"
" लाओ मैं पहना देता हूं, कहीं फिर से ना खुल जाए और तुम्हारी गांड़ फिर से नंगी हो जाए शहनाज़।
अजय के मुंह से गांड़ सुनकर शहनाज़ पागल सी हो गईं। अजय ने साडी के पल्लू को लिया और उसकी कमर में लपेट दिया और उसे गोल गोल घुमाने लगा। शहनाज़ के दोनो कंधे और चूचियां पूरी तरह से नंगी थी। शहनाज़ के खुले हुए बाल उसकी छाती को आ गए और उसकी चूचियों को पूरी तरह से ढक लिया था।
शहनाज़ की गांड़ पर साडी लिपट गई थी और वो दोनो आंखे बंद किए हुए खड़ी थी। अजय थोड़ा सा निराश हुआ लेकिन वो जानता था कि उसे क्या करना है जिससे शहनाज़ के दोनो खूबसूरत गोल गोल कबूतर उसकी आंखो में सामने होंगे।
अजय उसके बिल्कुल करीब आ गया और उसका खड़ा हुआ लंड उसकी गांड़ से आ लगा तो शहनाज़ ने उसकी साड़ी का दूसरा पल्लू पकड़ लिया और जोर से उपर की तरफ उठाने लगा जिससे एक बार फिर से साडी उसकी गांड़ पर से हटने लगी तो शहनाज़ बावली सी हो गई। अजय ने साडी को उसकी जांघो पर से पकड़ा और मंगल यंत्र के घुंघरू जोर से हिला दिए और जैसे ही घुंघरू शहनाज़ की चूत के टकराए तो शहनाज़ सब कुछ भूलकर पलटी और अजय के होंठ चूसने लगी। अजय ने शहनाज़ के होंठो को अपने होंठो में भर लिया जोर जोर से चूसने लगा।
:" अजय कितनी देर बाद निकलना हैं पूजा के लिए ?
जैसे ही सौंदर्या की आवाज उनके कानो में पड़ी तो दोनो ना चाहते हुए भी अलग हो गए और अजय ने जल्दी से शहनाज़ को साडी पहना दी और फिर दोनो बाहर आ गए।
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