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जतिन-ये कैसे हुआ,
नीता-दीदी ने बताया था ना, मेरे सामने
जतिन-मैं समझ सकता हूँ ,तुम्हें कैसा लग रहा होगा.मैं ने भी अपनी माँ को बचपन मे खो दिया था.
नीता-नेहा इस बात से बहुत दुखी है. वो तो वहाँ रहना नही चाहती
जतिन-फिर कहाँ रहेगी.
नीता-पिताजी उसके लिए यहाँ घर बना रहे है
जतिन-मैं समझ सकता हूँ. मुझे भी बचपन मे माँ के जाने के बाद अपने घर मे रहने से डर लगता था.
नीता-मैं कह रही थी कि
जतिन-तुम नेहा के बिना नही रह सकती पता है मुझे
नीता-आप कहो तो
जतिन-मैं ने देखा है तुम नेहा से कितना प्यार करती हो.नेहा यहा रहेगी तो तुम शहर2 मे नही रह सकती.
नीता-शहर2 मे वो घर हम ने प्यार से बसाया है
जतिन-घर बसने के लिए हम दोनो का खुश रहना ज़रूरी होता है. तुम नेहा के बिना खुश नही रह सकती. और तुम्हें उदास मैं नही देख सकता
नीता-वो आपके पिताजी का घर है.
जतिन-हम घर बेच नही रहे है. मेरे माता पिता तो चले गये. मेरा सब कुछ तुम हो. तुम खुश रहा करो
नीता-आप बहुत अच्छे है.
जतिन-तुम बहुत प्यारी हो
जतिन नीता को खुश देखना चाहता है. और नीता तभी खुश रह सकती है जब वो नेहा के साथ रहेगी.
जतिन को कोई अतराज़ नही था. उनका प्यार का घर उसी दिन बन गया था जिस दिन उनकी शादी हो गयी थी.
सुरेश रमेश से बात करने के लिए चला गया
सुरेश-रमेश
रमेश-हाँ
सुरेश-नेहा बहुत दुखी है .वो उस घर मे जाना नही चाहती.
रमेश-तू भी तो वहाँ नही रहना चाहता था, इसी लिए तो हम दुबई गये थे
सुरेश-ये क्या हो रहा है.मेरे साथ
रमेश-सब ठीक हो जाएगा .
सुरेश-नेहा तो वहाँ नही रह सकती. नेहा यहा गाँव मे रहना चाहती है. मैं भी वहाँ नही रहना चाहता.उस घर मे रहूँगा तो मुझे अपने माता पिता की याद आएगी और नेहा को उसकी माँ की
रमेश-गाँव मे रहेगा.
सुरेश-हाँ, नेहा अपने गाँव मे रहेगी तो अच्छा महसूस करेगी. मैं भी शहर के कंपनी मे तो कभी दुबई जाउन्गा.
रमेश-मुझे छोड़ कर जाएगा .
सुरेश-तू भी यहाँ आ जा, पूजा भाभी चोर की वजह से डर गयी है.
रमेश-ये घरदमाद जैसा नही हो जाएगा .
सुरेश-इसी गाँव मे नया घर बना लेंगे. और बच्चे शहर मे पढ़ लेंगे. तू भी आ जाता तो
रमेश-पूजा ने मुझे पूछा है इस बारे में
जतिन-सुरेश मैं तेरे साथ गाँव मे रहूँगा.
सुरेश-क्या कहा
जतिन-मैं तुझे अपना भाई मानता हूँ .तू जहाँ रहेगा मैं वही रहूँगा. नीता भी नेहा के बिना नही रह सकती. मैं पिताजी से बात करने जा रहा हूँ.
सुरेश-रमेश तू क्या कहता है.
रमेश-मुझे सोचने दो
सुरेश और जतिन ने पिताजी को अपनी रज़ामंदी बता दी.
पिताजी दोनो को लेकर घर की जगह दिखाने चले गये.
पिताजी ने घर थोड़ा दूर रखा ताकि उनको घरदमाद जैसा ना लगे.पर गाँव मे रहने से सब पिताजी के आँखो के सामने रहेंगे
रमेश दूसरे दिन अपनी बहन से मिलने चला गया.
ज्योति ने रमेश के सामने अपने ग़रीबी के बारे में बताना सुरू किया.
जब पूजा ने ज्योति से शहर2 वाले घर मे उसके रहने की बात की तो ज्योति बहुत खुश हो गयी थी
ज्योति को तो यही चाहिए था
पूजा ने ज्योति के सामने एक शरत रखी कि वो रमेश को मनाए
ज्योति को पता था कि रनेश उसका रोना नही देख पाएगा
रमेश की कमज़ोरी ज्योति थी ,
ज्योति रमेश के सामने अपने मगर मच्छ के आसू बहाने लगी
रमेश ने ज्योति को कुछ पैसे निकाल कर दे दिए.
ज्योति का रोना रमेश को बर्दास्त नही हुआ .और उसने गाँव जाने का फ़ैसला किया.
पूजा को पता था कि रमेश ज्योति को रोता हुआ नही देख सकते है.
रमेश ने भी हाँ कर दी.
दामाद के हाँ करते पिताजी ने जल्द से जल्द घर बनाने मे लग गये.
कुछ दिन बाद रमेश सुरेश और जतिन वापस दुबई चले गये.
पिताजी ने अपनी बेटियो के लिए शहर जैसा घर बना दिया.
जतिन-ये कैसे हुआ,
नीता-दीदी ने बताया था ना, मेरे सामने
जतिन-मैं समझ सकता हूँ ,तुम्हें कैसा लग रहा होगा.मैं ने भी अपनी माँ को बचपन मे खो दिया था.
नीता-नेहा इस बात से बहुत दुखी है. वो तो वहाँ रहना नही चाहती
जतिन-फिर कहाँ रहेगी.
नीता-पिताजी उसके लिए यहाँ घर बना रहे है
जतिन-मैं समझ सकता हूँ. मुझे भी बचपन मे माँ के जाने के बाद अपने घर मे रहने से डर लगता था.
नीता-मैं कह रही थी कि
जतिन-तुम नेहा के बिना नही रह सकती पता है मुझे
नीता-आप कहो तो
जतिन-मैं ने देखा है तुम नेहा से कितना प्यार करती हो.नेहा यहा रहेगी तो तुम शहर2 मे नही रह सकती.
नीता-शहर2 मे वो घर हम ने प्यार से बसाया है
जतिन-घर बसने के लिए हम दोनो का खुश रहना ज़रूरी होता है. तुम नेहा के बिना खुश नही रह सकती. और तुम्हें उदास मैं नही देख सकता
नीता-वो आपके पिताजी का घर है.
जतिन-हम घर बेच नही रहे है. मेरे माता पिता तो चले गये. मेरा सब कुछ तुम हो. तुम खुश रहा करो
नीता-आप बहुत अच्छे है.
जतिन-तुम बहुत प्यारी हो
जतिन नीता को खुश देखना चाहता है. और नीता तभी खुश रह सकती है जब वो नेहा के साथ रहेगी.
जतिन को कोई अतराज़ नही था. उनका प्यार का घर उसी दिन बन गया था जिस दिन उनकी शादी हो गयी थी.
सुरेश रमेश से बात करने के लिए चला गया
सुरेश-रमेश
रमेश-हाँ
सुरेश-नेहा बहुत दुखी है .वो उस घर मे जाना नही चाहती.
रमेश-तू भी तो वहाँ नही रहना चाहता था, इसी लिए तो हम दुबई गये थे
सुरेश-ये क्या हो रहा है.मेरे साथ
रमेश-सब ठीक हो जाएगा .
सुरेश-नेहा तो वहाँ नही रह सकती. नेहा यहा गाँव मे रहना चाहती है. मैं भी वहाँ नही रहना चाहता.उस घर मे रहूँगा तो मुझे अपने माता पिता की याद आएगी और नेहा को उसकी माँ की
रमेश-गाँव मे रहेगा.
सुरेश-हाँ, नेहा अपने गाँव मे रहेगी तो अच्छा महसूस करेगी. मैं भी शहर के कंपनी मे तो कभी दुबई जाउन्गा.
रमेश-मुझे छोड़ कर जाएगा .
सुरेश-तू भी यहाँ आ जा, पूजा भाभी चोर की वजह से डर गयी है.
रमेश-ये घरदमाद जैसा नही हो जाएगा .
सुरेश-इसी गाँव मे नया घर बना लेंगे. और बच्चे शहर मे पढ़ लेंगे. तू भी आ जाता तो
रमेश-पूजा ने मुझे पूछा है इस बारे में
जतिन-सुरेश मैं तेरे साथ गाँव मे रहूँगा.
सुरेश-क्या कहा
जतिन-मैं तुझे अपना भाई मानता हूँ .तू जहाँ रहेगा मैं वही रहूँगा. नीता भी नेहा के बिना नही रह सकती. मैं पिताजी से बात करने जा रहा हूँ.
सुरेश-रमेश तू क्या कहता है.
रमेश-मुझे सोचने दो
सुरेश और जतिन ने पिताजी को अपनी रज़ामंदी बता दी.
पिताजी दोनो को लेकर घर की जगह दिखाने चले गये.
पिताजी ने घर थोड़ा दूर रखा ताकि उनको घरदमाद जैसा ना लगे.पर गाँव मे रहने से सब पिताजी के आँखो के सामने रहेंगे
रमेश दूसरे दिन अपनी बहन से मिलने चला गया.
ज्योति ने रमेश के सामने अपने ग़रीबी के बारे में बताना सुरू किया.
जब पूजा ने ज्योति से शहर2 वाले घर मे उसके रहने की बात की तो ज्योति बहुत खुश हो गयी थी
ज्योति को तो यही चाहिए था
पूजा ने ज्योति के सामने एक शरत रखी कि वो रमेश को मनाए
ज्योति को पता था कि रनेश उसका रोना नही देख पाएगा
रमेश की कमज़ोरी ज्योति थी ,
ज्योति रमेश के सामने अपने मगर मच्छ के आसू बहाने लगी
रमेश ने ज्योति को कुछ पैसे निकाल कर दे दिए.
ज्योति का रोना रमेश को बर्दास्त नही हुआ .और उसने गाँव जाने का फ़ैसला किया.
पूजा को पता था कि रमेश ज्योति को रोता हुआ नही देख सकते है.
रमेश ने भी हाँ कर दी.
दामाद के हाँ करते पिताजी ने जल्द से जल्द घर बनाने मे लग गये.
कुछ दिन बाद रमेश सुरेश और जतिन वापस दुबई चले गये.
पिताजी ने अपनी बेटियो के लिए शहर जैसा घर बना दिया.