कल इस ने गोलगप्पे की दुकान पर जिस तरह मुझे मज़ा दिया था उसके वजह से रात भर मैं सो नही पाई.पूरी पैंटी गीली हो गयी थी.)ह्म्म्म
फिर मैं ने ज़ीया(र) की टी-शर्ट निकाल दी.
ज़ीया(र) के बूब्स मेरे सामने लटक रहे थे. रीया और ज़ीया(र) मे सब बाते एक जैसी है. ज़ीया(र) के बूब्स भी रीया की तरह थे.
मेरी आँख के सामने ज़ीया(र) के गोल गोल मोटे बूब्स आ गये .
ज़ीया(र) के बूब्स देख कर मेरे मुँह मे पानी आ गया.
इसके गुलाबी निपल का रस पी कर तो मज़ा आ जाएगा.
फिर मैं ने ज़ीया(र)के बूब्स पर हमला बोल दिया.
मैं ज़ीया(र) के बूब्स को चूसने लगा .उसके एक निपल को उंगली से रगड़ ने लगा .ज़ीया(र) मस्ती से मोन करने लगी,
ज़ीया(र) के गुलाबी निपल ,और वो भी अन छुए ,टाइट ,क्या कहूँ बस चूस्ते रहने का मन हो रहा था.
ज़ीया(र) को भी मज़ा आ रहा था.
बूब्स को काटना, रगड़ना, मसलना, चूसना, चाटना, ,ऐसा लग रहा था कि बस ज़ीया(र) के बूब्स चूस्ता रहूं.
पर समय की कमी और चूत की सील तोड़ने की जल्दी ,मेरा लंड फन उठा रहा था.
मुझे ज़ीया(र) के बूब्स जैसे पहाड़ो से ज़्यादा चूत की गहराई मे अपना झंडा(लंड) गाढ़ने की जल्दी थी.
थोड़ी देर बूब्स चूसने के बाद मैं ज़ीया(र) के बूब्स को चूस्ते हुए नीचे आने लगा और उसके पेट को जगह जगह चाटने लगा,
ज़ीया(र) पूरी मस्ती मे शीष्कारिया लेने लगी,
फिर मैं ने ज़ीया(र) का लोवर उतार दिया .इस बार ज़ीया(र) ने मुझे रोका नही.
ज़ीया(र) का लोवर मैं पहले भी निकाल चुका था.
लोवर को ज़ीया(र) के बदन से अलग कर दिया. ज़ीया(र) ने ब्लॅक पैंटी पहने रखी थी . ज़ीया(र) के गोरे बदन पे ब्लॅक पैंटी सेक्सी लग रही थी
अब मैं ने भी अपने कपड़े उतार दिए .मैं अब ज़ीया(र) के सामने सिर्फ़ अंडरवेर पहन कर खड़ा था.
जब मैं कपड़े निकाल रहा था तब ज़ीया(र) ने अपनी आँख बंद कर ली थी.
ज़ीया(र) पैंटी मे और मैं अंडरवेर मे था.
फिर मैं ज़ीया(र) को सोफे पे ले गया. कल मैं ने रीया के खून को सोफे पर से साफ किया था. अगर ज़ीया(र) सोफे के उपर वाला खून देख लेती तो गेम खराब हो जाता.
ज़ीया(र) को सोफे पे लिटा के उस के चेहरे पे किस करने लगा. ज़ीया(र) भी अब पूरी तरह से गरम हो गयी थी.
मैं अपने एक हाथ को ज़ीया(र) की जाँघो पे फेरने लगा .ज़ीया(र) सस्स सस्स करने लगी,
जाँघो पर हाथ फेरने के बाद मैं ने अपना हाथ ज़ीया(र) की पैंटी मे डाल दिया.
ज़ीया(र) की चूत रो रही थी. और कह रही थी कि मुझे लंड चाहिए उंगली नही.
लंड लेने से पहले उंगली लेनी पड़ती है. मैं ज़ीया(र) की चूत में उंगली डालने लगा. ज़ीया(र) की चूत पे उंगली चला ने लगा,
ज़ीया(र) ऊ हेया एयाया ससस्स की आवाज़े निकालने लगी, अब ज़ीया(र) पूरी गरम हो चुकी थी,
फिर मैं खड़ा हो गया.ज़ीया(र) भी खड़ी हो गयी. ज़ीया(र) पैंटी मे और मैं अंडरवेर मे था.
फिर मैं ने ज़ीया(र) को अपनी बाहों मे ले लिया और एक किस कर दिया. हम दोनो की जीभ फिर से एक दूसरे के साथ खेलने लगी .
ज़ीया(र) के साथ किस करना और रीया के साथ करना अलग था. ज़ीया(र) सुरू से मेरा साथ दे रही थी और रीया को थोड़ा समय लगा था.
जब हम अलग हुए तो ज़ीया(र) ज़ोर ज़ोर से साँस ले रही थी, ज़ीया(र) के साँस लेने से ज़ीया(र) के बूब्स भी उपेर नीचे हो रहे थे
मैं ने फिर से ज़ीया(र) को बाहों मे ले लिया, और मैं ने ज़ीया(र) को दीवार से चिपका दिया.और मैं ज़ीया(र) के बदन पर जगह जगह किस करने लगा .
ज़ीया(र) उम्म्म आह्ह्ह्ह की आवाज़े निकाल रही थी.
फिर मैं ज़ीया(र) को सोफे पे लिटा दिया और खुद उसकी बाजू मे लेट गया .और ज़ीया(र) के होंठो को चूसने लगा .
बार बार मेरी नियत ज़ीया(र) के होंठो पर जा रही थी. ज़ीया(र) को मेरा किस करना पसंद आ रहा था.
किस करना बहुत हो गया. अब बारी थी चूत की
ज़ीया(र) की चूत कल मैं गोलगप्पे की दुकान पर चूस चुका था. पर यहाँ लंड चूत मे डालने से पहले थोड़ा चूसना तो पड़ेगा.
फिर मैं ज़ीया(र) की पैंटी के उपर से ही उसकी चूत पे हाथ फेरने लगा.ज़ीया(र) की पैंटी गीली हो चुकी थी,
ज़ीया(र) की गीली पैंटी बता रही थी कि मुझे फास्ट करना होगा.
मैं पैंटी के उपर से ही ही चूत चाटने लगा.
पैंटी के उपर से चाटना ,मेरे मुँह को कल ज़ीया(र) की चूत का पानी लग चुका था.ऐसे मे पैंटी के उपर से ,बिल्कुल नही
मैं ने ज़ीया(र) की पैंटी उतार ने लगा .ज़ीया(र) भी अपनी गंद उठा के अपनी पैंटी उतार ने मे मेरा साथ देने लगी.
कल रात मे ज़ीया(र) की चूत को ठीक से देख नही पाया ,पर आज पैंटी नीचे होते ही ,क्या कहूँ, वो गुलाबी पन, वो चिकनाई, वो महक, वो चूत के होंठो का फड़फड़ाना, बस और नही, और मैं ने ज़ीया(र) की चूत पे किस कर दिया