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मैं और मेरा परिवार

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अवी-मुझे नही पता कल मैं ने क्या किया

सारा-कल तुमने मुझे किस कैसे किया

अवी-आप पूछ रही है कि किस कैसे किया था कि गुस्से मे डाँट रही हो

सारा-तुमने मुझे किस क्यू किया

अवी-आपको नही पता

सारा-तुमने कहा था कि मेरी नोज लाल है .नोज को ठीक रखना और किस करना इसमे क्या ताल्लुक है.

अवी-आपकी नाक लाल थी. सब आपको देख कर हँसते .इसलिए मैं ने किस किया

सारा-मैं समझी नही

अवी-किस करने से आपका पूरा चेहरा लाल हो गया. अगर आपको कोई देखता तो आपको पूरा चेहरा लाल दिखता मतलब लोग आपकी नाक देख कर हँसते नही. वो समझते कि आपका चेहरा ही लाल है.मेकप की वजह से

सारा-ठीक है

अवी-पर आप अच्छी नही हो

सारा-क्यू?

अवी-मैं ने आपकी मदद की और आप है कि थॅंक्स भी नही कह रही है.लगता है आपको किस अच्छा नही लगा.

सारा-थॅंक्स

अवी-आपको किस अच्छी लगी

सारा-मैं क्यू बताऊ

अवी-मतलब बुरी लगी

सारा-हाँ, मुझे तुम्हारी किस बुरी लगी

अवी-मुझे किस लेना आता ही नही.

सारा-वो तो है

अवी-आप मुझे किस करना सीखा सकती हो

सारा-मैं कैसे मैं नही

अवी-आप क्यू नही

सारा-मेरे पति के अलावा मैं किसी और से किस कैसे कर सकती हू.मैं नही कर सकती

अवी-ठीक है मैं किसी और से सीख लूँगा

सारा-किस से सीखोगे

अवी-मैं क्यू बताऊ

सारा-अपनी फ्रेंड को नही बताओगे

अवी-ज़ोया से सिख लूँगा

सारा-ज़ोया से

अवी-हाँ,अब मैं चलता हू और मैं गेट के पास चला गया.

सारा-रूको तो

अवी-सारा आज तुम ज़ोया से संदर दिख रही हो

और मैं चला गया.

 


अपडेट 277

मैं घर आ गया और खाना खा कर सो गया.

फिर शाम 4.10 बजे फ्रेश होकर छत पर चला गया. छत पर जाने से पहले मैने ज्योति बुआ को बता दिया कि मैं आज टी नही पीऊंगा. मैं कमरे मे आराम करूँगा.

मैं छत पर चला गया.

छत पर ज़ीया(र) मेरा इंतज़ार कर रही थी.

मैं ज़ीया(र) की तरफ देखा .वो ज़ीया(र) ही थी. रीया तो आराम कर रही होगी. मैं अपनी छत से ज़ीया(र) की छत मे चला गया.

मैं ने गर्दन पे मोल देखा .ये ज़ीया थी.

अवी-हाई रीया

ज़ीया(र)-हाई

अवी-सॉरी तुम्हे इंतज़ार करना पड़ा

ज़ीया(र)-कोई बात नही

अवी-ज़ीया क्या कर रही है

ज़ीया(र)-सो रही है

अवी-(मैं ये जवाब सुनकर खुश हो गया.) चलो कल वाली जगह चलते है

ज़ीया(र)-(अवी कहाँ लेकर जाना चाहता है. रीया इसके साथ कहाँ गयी थी. क्या कल की तरह ये मेरी ****चूसेगा, ये लेकर कहाँ जाने वाला है. देखती हू) चलो

हम स्टोर रूम के सामने आ गये

ज़ीया(र)-ये तो बंद है

अवी-तुम रीया ही हो ना

ज़ीया(र)-हाँ.मैं रीया ही हू(रीया की तरह समझदारी से काम लेना होगा. जो रीया और अवी ने कल किया है वो मुझे पता नही है, मुझे सिर्फ़ हाँ मे जवाब देना होगा. नही तो मैं पकड़ी जा सकती हू)

अवी-फिर ऐसे क्यू पूछ रही हो कि रूम लॉक है.देखो कैसे खोलता हू

और मैं ने ताला खोल दिया. और मैं उसे लेकर अंदर चला गया. और खिड़की से फिर गेट को ताला लगा लिया. और खिड़की बंद कर दी

ज़ीया(र) मेरी तरफ देखने लगी .मैं ज़ीया(र) को पकड़ कर अपने पास ले लिया.

ज़ीया(र) मेरे सामने आ गयी. ज़ीया(र) की सासे तेज चल रही थी. ज़ीया(र) रीया की तरह कपड़े पहन कर आई थी.

मैं ने ज़ीया(र) को दीवार से लगा लिया और ज़ीया(र) के होंठो पर किस करने लगा

किस करने से ज़ीया(र) का डर ख़तम हो गया. उसे लगा कि मैं उसे रीया समझ रहा हू.

ज़ीया(र) नॉर्मल हो गयी. कल जिस तरह मैं ने रीया के साथ किया था वैसा मुझे ज़ीया(र) के साथ नही करना था.

अगर बीच मे मैं रुक गया तो भी ज़ीया(र) मेरा साथ देंगी.

मैं ज़ीया(र) के होंठो को चूसने लगा. ज़ीया(र) भी मेरा साथ दे रही थी.

जल्दी ही हम एक दूसरे के जीभ को चूसने लगे.

मैं किस करते हुए ज़ीया(र) के बूब्स दबाने लगा. बूब्स दबाने से ज़ीया(र) और जोश से मेरे होंठ चूस ने लगी.

मैं भी कहाँ पीछे रहने वाला था. मैं भी ज़ीया(र) के होंठो का रस पीने लगा.

10 मिनट तक मैं ज़ीया(र) के होंठो को चूस्ता रहा.और ज़ीया(र) मेरे होंठो को चूस्ति रही.

फिर मैं ने ज़ीया(र) के होंठो को आज़ाद कर दिया.

ज़ीया(र) लंबी लंबी सासे लेगी.

फिर मैं ने ज़ीया(र) की टी-शर्ट निकाल नी चाही पर ज़ीया(र) ने रोक दिया.

अवी-क्या हुआ कल भी तो किया था.

ज़ीया(र)-(कल इस ने नीचे से तो देख लिया आज उपर से देखने देती हू. पर रीया ने आगे भी कुछ किया होगा तो, इसने तो कल मुझे रीया की पैंटी दी थी, क्या मैं आगे बढ़ुँ.

 
कल इस ने गोलगप्पे की दुकान पर जिस तरह मुझे मज़ा दिया था उसके वजह से रात भर मैं सो नही पाई.पूरी पैंटी गीली हो गयी थी.)ह्म्‍म्म

फिर मैं ने ज़ीया(र) की टी-शर्ट निकाल दी.

ज़ीया(र) के बूब्स मेरे सामने लटक रहे थे. रीया और ज़ीया(र) मे सब बाते एक जैसी है. ज़ीया(र) के बूब्स भी रीया की तरह थे.

मेरी आँख के सामने ज़ीया(र) के गोल गोल मोटे बूब्स आ गये .

ज़ीया(र) के बूब्स देख कर मेरे मुँह मे पानी आ गया.

इसके गुलाबी निपल का रस पी कर तो मज़ा आ जाएगा.

फिर मैं ने ज़ीया(र)के बूब्स पर हमला बोल दिया.

मैं ज़ीया(र) के बूब्स को चूसने लगा .उसके एक निपल को उंगली से रगड़ ने लगा .ज़ीया(र) मस्ती से मोन करने लगी,

ज़ीया(र) के गुलाबी निपल ,और वो भी अन छुए ,टाइट ,क्या कहूँ बस चूस्ते रहने का मन हो रहा था.

ज़ीया(र) को भी मज़ा आ रहा था.

बूब्स को काटना, रगड़ना, मसलना, चूसना, चाटना, ,ऐसा लग रहा था कि बस ज़ीया(र) के बूब्स चूस्ता रहूं.

पर समय की कमी और चूत की सील तोड़ने की जल्दी ,मेरा लंड फन उठा रहा था.

मुझे ज़ीया(र) के बूब्स जैसे पहाड़ो से ज़्यादा चूत की गहराई मे अपना झंडा(लंड) गाढ़ने की जल्दी थी.

थोड़ी देर बूब्स चूसने के बाद मैं ज़ीया(र) के बूब्स को चूस्ते हुए नीचे आने लगा और उसके पेट को जगह जगह चाटने लगा,

ज़ीया(र) पूरी मस्ती मे शीष्कारिया लेने लगी,

फिर मैं ने ज़ीया(र) का लोवर उतार दिया .इस बार ज़ीया(र) ने मुझे रोका नही.

ज़ीया(र) का लोवर मैं पहले भी निकाल चुका था.

लोवर को ज़ीया(र) के बदन से अलग कर दिया. ज़ीया(र) ने ब्लॅक पैंटी पहने रखी थी . ज़ीया(र) के गोरे बदन पे ब्लॅक पैंटी सेक्सी लग रही थी

अब मैं ने भी अपने कपड़े उतार दिए .मैं अब ज़ीया(र) के सामने सिर्फ़ अंडरवेर पहन कर खड़ा था.

जब मैं कपड़े निकाल रहा था तब ज़ीया(र) ने अपनी आँख बंद कर ली थी.

ज़ीया(र) पैंटी मे और मैं अंडरवेर मे था.

फिर मैं ज़ीया(र) को सोफे पे ले गया. कल मैं ने रीया के खून को सोफे पर से साफ किया था. अगर ज़ीया(र) सोफे के उपर वाला खून देख लेती तो गेम खराब हो जाता.

ज़ीया(र) को सोफे पे लिटा के उस के चेहरे पे किस करने लगा. ज़ीया(र) भी अब पूरी तरह से गरम हो गयी थी.

मैं अपने एक हाथ को ज़ीया(र) की जाँघो पे फेरने लगा .ज़ीया(र) सस्स सस्स करने लगी,

जाँघो पर हाथ फेरने के बाद मैं ने अपना हाथ ज़ीया(र) की पैंटी मे डाल दिया.

ज़ीया(र) की चूत रो रही थी. और कह रही थी कि मुझे लंड चाहिए उंगली नही.

लंड लेने से पहले उंगली लेनी पड़ती है. मैं ज़ीया(र) की चूत में उंगली डालने लगा. ज़ीया(र) की चूत पे उंगली चला ने लगा,

ज़ीया(र) ऊ हेया एयाया ससस्स की आवाज़े निकालने लगी, अब ज़ीया(र) पूरी गरम हो चुकी थी,

फिर मैं खड़ा हो गया.ज़ीया(र) भी खड़ी हो गयी. ज़ीया(र) पैंटी मे और मैं अंडरवेर मे था.

फिर मैं ने ज़ीया(र) को अपनी बाहों मे ले लिया और एक किस कर दिया. हम दोनो की जीभ फिर से एक दूसरे के साथ खेलने लगी .

ज़ीया(र) के साथ किस करना और रीया के साथ करना अलग था. ज़ीया(र) सुरू से मेरा साथ दे रही थी और रीया को थोड़ा समय लगा था.

जब हम अलग हुए तो ज़ीया(र) ज़ोर ज़ोर से साँस ले रही थी, ज़ीया(र) के साँस लेने से ज़ीया(र) के बूब्स भी उपेर नीचे हो रहे थे

मैं ने फिर से ज़ीया(र) को बाहों मे ले लिया, और मैं ने ज़ीया(र) को दीवार से चिपका दिया.और मैं ज़ीया(र) के बदन पर जगह जगह किस करने लगा .

ज़ीया(र) उम्म्म आह्ह्ह्ह की आवाज़े निकाल रही थी.

फिर मैं ज़ीया(र) को सोफे पे लिटा दिया और खुद उसकी बाजू मे लेट गया .और ज़ीया(र) के होंठो को चूसने लगा .

बार बार मेरी नियत ज़ीया(र) के होंठो पर जा रही थी. ज़ीया(र) को मेरा किस करना पसंद आ रहा था.

किस करना बहुत हो गया. अब बारी थी चूत की

ज़ीया(र) की चूत कल मैं गोलगप्पे की दुकान पर चूस चुका था. पर यहाँ लंड चूत मे डालने से पहले थोड़ा चूसना तो पड़ेगा.

फिर मैं ज़ीया(र) की पैंटी के उपर से ही उसकी चूत पे हाथ फेरने लगा.ज़ीया(र) की पैंटी गीली हो चुकी थी,

ज़ीया(र) की गीली पैंटी बता रही थी कि मुझे फास्ट करना होगा.

मैं पैंटी के उपर से ही ही चूत चाटने लगा.

पैंटी के उपर से चाटना ,मेरे मुँह को कल ज़ीया(र) की चूत का पानी लग चुका था.ऐसे मे पैंटी के उपर से ,बिल्कुल नही

मैं ने ज़ीया(र) की पैंटी उतार ने लगा .ज़ीया(र) भी अपनी गंद उठा के अपनी पैंटी उतार ने मे मेरा साथ देने लगी.

कल रात मे ज़ीया(र) की चूत को ठीक से देख नही पाया ,पर आज पैंटी नीचे होते ही ,क्या कहूँ, वो गुलाबी पन, वो चिकनाई, वो महक, वो चूत के होंठो का फड़फड़ाना, बस और नही, और मैं ने ज़ीया(र) की चूत पे किस कर दिया
 


अपडेट 277ए

कल रात मे ज़ीया(र) की चूत को ठीक से देख नही पाया ,पर आज पैंटी नीचे होते ही ,क्या कहूँ, वो गुलाबी पन, वो चिकनाई, वो महक, वो चूत के होंठो का फड़फड़ाना, बस और नही, और मैं ने ज़ीया(र) की चूत पे किस कर दिया

मैं ने देखा ज़ीया(र) अपने नीचे वाले होंठ को अपने दांतो से चबाने लगी थी.

जीया का होंठो को चबाना मेरे लिए इशारा था की पानी सर से उपर चला गया .ज़ीया(र) लंड लेने को तय्यार है

पर किसी ने कहा है कि पानी सर से उपर हो तो स्विम्मिंग करने मे मज़ा आता है.

ज़ीया(र) जितनी गरम होगी उतनी जल्दी लंड आराम से अंदर जाएँगा.

मैं अपने काम मे लग गया. ज़ीया(र) की चूत पर किस करने लगा.

किस करने के बाद हल्के से जीभ को बाहर निकाल कर ज़ीया(र)की चूत के होंठो के बीच मे टच किया

ज़ीया(र) की मुँह से शीष्कारी निकल गयी.ज़ीया(र) को मेरी जीभ का टच मदहोश कर रहा था

जीभ से टच करने के बाद मैं ज़ीया(र) की चूत को चाटने लगा.

ज़ीया(र) मस्ती मे मेरे सर को पकड़ कर अपनी चूत की तरफ दबाने लगी,

ज़ीया(र) मस्ती की नाव(बोट) पर सवार हो चुकी थी और उस की मंज़िल मेरा लंगर था. जो उसकी नाव को तोड़ना चाहता था.

जीभ से टच करना इतना मस्त था तो जब जीभ अंदर डालूँगा तो कैसा होगा.

चलो जीभ चूत मे डालकर देखता हू. और मैं अपनी जीभ ज़ीया(र) की चूत मे डाल कर चाटने लगा

वो ऊवू सस्स आअहह करने लगी,

ज़ीया(र) को अब बर्दास्त करना मुश्किल था. और करना भी क्यू चाहिए क्यू कि पानी छोड़ने के बाद उसको जो आनंद मिलेगा वो कही और नही मिल सकता था.

मेरे चूस ने से ज़ीया(र) की चूत ने पानी छोड़ दिया. जिस से मेरे होंठ पूरे गीले हो गये .

मैं ने ज़ीया(र) का कुवारि चूत का पानी पी लिया. ये आख़िरी बार था ज़ीया(र)की चूत का पानी मुझे पीने मिल रहा था. इसके बाद तो ज़ीया(र) कुवारि नही रहेंगी.

ज़ीया(र)का पानी मैं तो पी लिया ,चलो ज़ीया(र)को भी पिला देता हू

और मैं ने अपने गीले होंठो को ज़ीया(र) के गुलाबी होंठो से मिला दिया. और ज़ीया(र)की चूत का पानी जो मेरे होंठो को लगा हुआ था वो ज़ीया(र) को किस करने के उसे पिलाने लगा.

क्या मैं भी बार बार किस करने लग जाता हू. बहुत हो गया किस करना. अब झंडा चूत मे डालने का समय आ गया.

मैं उसके उपर से अलग होकर खड़ा हो गया.फिर मैं ने अपनी अंदर वेअर निकाल दी.

फिर मैं ने अपना लंड ज़ीया(र) के हाथो मे पकड़ा दिया. तो ज़ीया(र) ने शरम से आँखे बंद कर ली,

ज़ीया(र) -तुम्हारा मोटा और लंबा है.

अवी- क्या मोटा है,

ज़ीया(र) -ने मेरे लंड की तरफ इशारा करके बोली ये.

मैं ने ज़ीया(र) को कहा कि मुँह मे लेकर चूसो .

उसने मेरी तरफ देखा .वो समझ गयी कि कल रीया ने किया होगा.

फिर ज़ीया(र) ने हल्के से मेरे लंड को किस किया,

फिर ज़ीया(र) मेरे लंड को मुँह मे लेकर चूसने लगी.

मेरा लंड बिल्कुल लोहे की रोड जैसा खड़ा था,

मैं ने देखा कि ज़ीया(र) को मेरा लंड चूसना पसंद नही आ रहा था. ज़ीया(र) को अच्छा नही लग रहा था.

फिर कभी चूस्वा लेंगे ,और मैं ने लंड उसके मुँह से बाहर निकाल लिया.और ज़ीया(र) को फिर सोफे पर लिटा दिया.

फिर क्रीम को अपने लंड पर लगा लिया. और कुछ क्रीम ज़ीया(र) की चूत पर.

ज़ीया(र) समझ गयी कि मैं क्या करने वाला हू .पर ज़ीया(र) ने मुझे रोका नही. वो जानती थी कि मैं क्या कहूँगा.

फिर मैं ज़ीया(र) के उपर आ गया. ज़ीया(र) के होंठो को अपने होंठो से बंद किया.

और लंड को चूत पर रख दिया.

फिर मैं ने धीरे से पर थोड़ी ताक़त लगा कर अपना लंड उसकी चूत मे डाला

अभी मेरा लंड उसकी चूत में 1इंच ही गया था वो दर्द के मारे चीख पड़ी.

पर उसकी चीख मेरे मुँह मे दब गयी. मैं ने लंड वही रोक लिया ,

ज़ीया(र) की आँख से पानी निकल आया, मैं ने ज़ीया(र) की आँख साफ की और किस करता रहा

और थोड़ी देर

बाद मैं ने फिर एक झटका लगाया कि लंड को टोपा पूरा अंदर चला गया.

2इंच लंड उसकी चूत मैं ने घुस गया और वो ज़ोर से चिल्लाई ऊओ.. मार दिया निकालो नही.मैं.. सहन नही का सकती.

मैं ने कहा कि रूको , थोड़ी देर बाद मज़ा आएगा

और मैं उसके होंठो को चूसने लगा

ज़ीया(र) शांत होने का नाम नही ले रही थी.

अभी इसका ये हाल है तो लंड सील तोड़ के अंदर जाएगा तब क्या होगा. और इसका पता लंड चूत मे डाल कर पता लगाना होगा.

और फिर एक झटका मारा जिस से आधा लंड उसकी चूत मे घुस गया .ज़ीया(र) की सील टूट गयी.ज़ीया(र) का खून मेरे लंड को लग गया.

सील टूट ते ही ज़ीया(र) छटपटाने लगी .वो आआआ की दबी हुई चीख निकाल ने लगी.

 
मैं ने उसके होंठो छोड़ दिए वो ज़ोर से चिल्लाई कमरा बंद था तो चीख बाहर नही जा सकती थी.

वो चिल्लाई. ऊओमाा प्लीज़ ऊओ... हह्ो वूऊ मुझे बहुत दर्द हो रहा है प्लीज़ बाहर निकालो.

मैं ने कहा रीया बस हो गया.

फिर मैं ने अपने हाथ से लंड को छू कर देखा तो उसपर खून लगा हुआ था.

मैं ने कहा रीया तुम्हारी सील टूट गयी है घबराओ मत थोड़ी देर मैं मज़ा आएगा. तुम भी एंजाय करोगी.

मैं फिर ज़ीया के होंठो को चूसने लगा हाथो से बूब्स दबाने लगा. करीब 5 मिनट के बाद उसका दर्द कम हुआ

ज़ीया(र)का दर्द देखते हुए मैं ने आधे लंड को अंदर बाहर करने का फ़ैसला लिया.

मैं आड़े लंड को अंदर बाहर करने लगा.

लंड चूत मे फस चुका था. बड़ी मुश्किल से अंदर बाहर हो रहा था.

ज़ीया(र) को दर्द हो रहा था.

लंड को अंदर बाहर करने से ज़ीया(र) को और ज़्यादा दर्द होने लगा.

मैं ने ज़ीया(र) को कस के पकड़ रखा था. और पकड़ा कहाँ था उसके बूब्स को

आराम आराम से आधे लंड को अंदर बाहर कर रहा था.

ज़ीया(र) का दर्द पहले तो बढ़ गया पर बाद मे उसका दर्द कम होते हुए मज़े मे बदल रहा था.

मैं ऐसे ही आधे लंड को 5 मिनट तक अंदर बाहर किया.

लंड का मोटा होना, चूत का टाइट होना, और ज़ीया(र) की चूत ने पानी छोड़ दिया जिस से ज़ीया(र) का दर्द कम हुआ और ज़ीया(र) पर मस्ती छाने लगी

वो नीचे से आराम आराम से अपने चूतड़ उठा उठा कर चुदवा रही थी और अहहहह.

उूऊह.. की आवाज़े निकाल रही थी .

पानी निकलते ही गेम बदल गया. कहाँ ज़ीया(र) दर्द से तड़फ़ रही थी और कहाँ अब मज़े मे चूतड़ हिला रही थी.

ज़ीया(र) का मस्ती मे आना उसके लिए और दर्द बढ़ाने वाला था. मैं पूरा लंड ज़ीया(र)की चूत मे डालने की तय्यारी मे था

और मैं ने एक झटके मे पूरा लंड ज़ीया(र) की चूत मे डाल दिया.

फिर गेम बदल गया. मज़े की जगह दर्द होने लगा.ज़ीया(र) को फिर दर्द हुआ. और वो फिर चीख ने लगी.

मुझे फिर से ज़ीया(र) के होंठो को चूसना सुरू करना पड़ा. और धक्के मारता गया.

अब रुकना मेरे लिए बर्दास्त से बाहर था.

ज़ीया(र)तो फिर से मज़े मे चूतड़ हिलाएगी. पर मेरे लंड का क्या. वो कब से खड़ा है.

मैं पूरा लंड ज़ीया(र) की चूत मे डालने के बाद बिना रुके धक्के मारने लगा.

धक्के तो मार रहा था पर धीरे धीरे, जिस से मुझे मज़ा आ रहा था और ज़ीया(र) को कम दर्द हो रहा था.

थोड़ी देर धीरे धीरे धक्के मार रहा था.

चूत का कसाव, लंड का लंबा होना, ये क्या ज़ीया(र) की चूत से फिर पानी निकल गया.

चूत का पानी तो ज़ीया(र)के दर्द पर मलहम का काम कर रहा था.और मेरे लिए चिकनाई का काम रहा था.

पानी निकलने का मतलब मैं ज़ोर से ज़ीया(र)की चुदाई कर सकता हू.

और तो और ज़ीया(र) का दर्द कम हो गया.

फिर क्या था मैं मे धक्के मारने की गति बढ़ा दी.

ज़ीया(र)को इतनी जल्दी दर्द से आराम नही मिलने वाला था पर ज़ीया(र)ने दर्द पर जीत हासिल की और मेरे धक्को को मज़ा लेने लगी.

मैं ने ज़ीया(र)को किस करना बंद किया, बूब्स का दबाना बंद किया और धक्के मारने पर ज़्यादा ध्यान दिया.

ज़ीया(र) भी अब शीष्कारिया लेने लगी. पूरे रूम मे हमारी इस चुदाई की पूउक्छ पूउक्छ की आवाज़े आ रही थी,

इसकी चूत है या पानी की टॅंक ,तीसरी बार झड गयी

ज़ीया(र) की चूत ने काफ़ी पानी छोड़ दिया .

फिर मैं ने अपने लंड को टोपे तक बाहर निकाल कर फिर अंदर डालने लगा.

कुछ देर ऐसे ही पूरे लंड को बाहर निकाल कर धक्के मारने लगा.

फिर लंबे और फुल स्पीड से धक्के मारने लगा.

फिर आधे लंड को बाहर निकाल कर धक्के मारने लगा.

फिर लंड को चूत मे रख कर गंद हिला कर चुदाई करने लगा.

फिर पूरे लंड को चूत मे रख कर ज़ीया(र) को नीचे पुश करने लगा.

फिर ज़ीया(र) मेरे पुश को नीचे से अपनी गंद उठा कर उपर धकेलने लगी.

ज़ीया(र)और मैं चुदाई मे पूरी तरह से खो गये.

फिर मैं लगातार ज़ोर ज़ोर से धक्के मार के उसकी चुदाई कर रहा था.

ऐसी चुदाई से वो और भी मस्ती मे आ रही थी और ऊऊओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह यस और अंदर डालो की आवाज़े निकाल रही थी.

ये क्या अब बस 3 4 धक्के मारने से मेरा पानी निकाल सकता था.

मैं आख़िरी धक्के मारने लगा

वो ऊऊओ आआ हाईईईई एयेए ओह्ह्ह्ह कर रही थी,

मैं ने अपनी धक्को की गति बढ़ा दी, कुछ देर बाद मैं भी झड गया, और अपना सारा वीर्य ज़ीया(र)की चूत मे डाल दिया.और उसके उपेर गिर गया,

हम दोनो ज़ोर ज़ोर से साँसे ले रहे थे. कुछ देर बाद हम दोनो शांत हो गये .मैने लंड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया
 


अपडेट 278

अवी-रीया अब कैसा लग रहा है

ज़ीया(र)-थोड़ा दर्द हो रहा है

अवी-रूको मैं तुम्हे पेन किल्लर देता हूँ

ज़ीया(र) ने पेन किल्लर खा ली

अवी-10 15 मिनट मे तुम्हे अच्छा लगेगा.तुम्हे प्यार करने मे मज़ा आया

ज़ीया(र)-हाँ

अवी-फिर से करना चाहती हो

ज़ीया(र)-दर्द हो रहा है. फिर से नही

अवी-ठीक है तुम कल तक आराम करो .जब दर्द ख़तम हो जाएगा तब करेंगे.

ज़ीया(र)-कल तो मुझे पूरा आराम करना पड़ेगा

अवी-हाँ,हम परसो मिलेंगे

ज़ीया(र)-ठीक है.

ज़ीया(र) कपड़े पहनने लगी.मैं उसकी गंद पर हाथ घुमाने लगा.उसने कपड़े पहन लिए.

मैं ने गेट खोला और बाहर आ गया. फिर ज़ीया(र) लंगड़ाते हुए धीरे धीरे बाहर आ गयी और नीचे चली गयी.नीचे जाने से पहले मैं ने उसे प्रेग्नेन्सी रोकने की मेडिसिन दी.

और स्टोर रूम को ताला लगाकर नीचे कमरे मे आ गया.

कमरे मे आकर मैं फ्रेश हो गया और बिके लेकर घूमने चला गया. आज रीया और ज़ीया गोलगप्पे खाने के लिए नही आई.

मैं घर जाकर हॉस्पिटल की तरफ निकल पड़ा.

ये तो रोज का काम था. हॉस्पिटल जाना, फिर चाचा घर और मैं हॉस्पिटल ,फिर ज़ोया का आना, चेक करना, फिर चाची से दिन भर क्या हुआ उसकी बातें करना,फिर चाची को खाना खिला कर सुला देना.

चाची के सो जाने के बाद मैं ज़ोया के पास चला गया.

अवी-मैं अंदर आ सकता हू

ज़ोया-तुम नही सुधरने वाले

अवी-आदत जो लग गयी.

ज़ोया-कल से तुमने पूछा तो मैं तुम्हे अंदर आने ही नही दूँगी

अवी-कल का कल देखेंगे,पर आज अच्छा हुआ मैं पूछकर आया .

ज़ोया-क्यू .मैं तो सिर्फ़ बैठी हू.

अवी-पर आपके हाथ तो नीचे है

ज़ोया-मैं ऐसा वैसा कुछ नही कर रही थी.वो तो ऐसे ही हाथ नीचे करके बैठी थी

अवी-क्या पता नीचे क्या कर रही थी.

ज़ोया-मैं कुछ नही कर रही. अब मुझे परेशान मत करो और कल जो बात बाकी थी वो बता दो

अवी-कल तो मैं ने सब बता दिया था.

ज़ोया-और बताने वाले थे अपने बारे मे

अवी-अब आपकी बारी है

ज़ोया-मेरी बारी

अवी-हाँ .आपकी बारी. पहले आपने मुझे अपने बारे मे बताया फिर मैं ने अब आपकी बारी है

ज़ोया-चलो ठीक है. क्या जान ना चाहते हो

अवी-आप इतनी संदर है.आपके तो कही बाय्फ्रेंड होगे

ज़ोया-मेरा सिर्फ़ एक बाय्फ्रेंड था जिसके साथ मैं ने शादी की

अवी-झूठ क्यू बोल रही हो

ज़ोया-मैं कहाँ झूठ बोल रही हू

अवी-सारा ने तो बताया कि आपका एक और बाय्फ्रेंड था ( सारा ने मुझे ऐसा कुछ नही बताया, मैं तो ज़िंदगी ना मिले दुबारा मूवी मे जो ट्रिक इस्तेमाल की थी उसे आज़मा रहा था.)

ज़ोया-सारा ने ऐसा कहा

अवी-हाँ

ज़ोया-एक था पर .वो 12 थ क्लास मे बनाया था

अवी-देखा आप झूठ बोल रही थी.

ज़ोया-वो तो...

अवी-सारा ने मुझे कुछ नही बताया था

ज़ोया-क्या ,फिर तुमने ऐसा क्यू कहा कि सारा ने बताया

अवी-मैं देखना चाहता कि आप मुझे अपना फ्रेंड मानती है कि नही.

ज़ोया-तुम मेरे फ्रेंड हो

अवी-अगर होता तो आप बता देती.

ज़ोया-वो बात मैं ने अपने पति को नही बताई तो...

अवी-पति की बात अलग होती है.फ्रेंड अलग होता है

ज़ोया-वो पास्ट था. मैं तो उसे भूल चुकी हू

अवी-भूल गयी होती तो सारा का नाम लेते ही कैसे याद आया.

ज़ोया-वो तो...

अवी-मतलब आप मुझे फ्रेंड नही मानती.फिर मेरा यहा रुक कर क्या फ़ायदा. मैं चलता हू

मैं गेट के पास चला गया.

ज़ोया-रूको तो

मैं ज़ोया की कॅबिन से बाहर आ गया. ज़ोया मुझे आवाज़ देती रही.पर मैं नही रुका.और चाची के रूम मे आ गया.

फिर माला आ गयी. थोड़ी देर माला के साथ बाते करने के बाद मैं माला के साथ नर्स रूम मे चला गया.

रूम मे जाते ही माला की धुँआधार चुदाई की. माला तो पूरी पसीने मे नहा चुकी थी माला ज़ोर ज़ोर से हाँफने लगी.

अवी-मज़ा आया

माला-तुम तो आज जानवर बन गये

अवी-तुम्हारा नसीब अच्छा है कि जानवर ने तुम्हे खा नही लिया

माला-वो तो है...

फिर मैं चाची के रूम मे आकर सो गया.

 
अपडेट 279

रीड- अपडेट 276 सारा

7थ डे

सुबह उठकर फ्रेश हो गया. फिर चाची भी उठ गयी. एक एक कर के फ्रेश हो गयी.

फिर सारा ने आकर चाची को चेक किया और मेरी तरफ देख कर चली गयी.

फिर मैं ने चाची को खाने के लिए फ्रूट दिए.चाचा भी आ गये.

चाचा आज भी देर से आए. चाचा के साथ बाते करने के बाद, मैं चाची के रूम से बाहर आ गया.

कभी कभी दोपेहर मे स्वेता दीदी,पूनम दीदी ,सीतल और रोहन हॉस्पिटल मे आ जाते .पर तब मैं घर पे सो रहा होता.

फिर चाची के रूम से बाहर आकर सारा के कॅबिन मे चला गया.कॅबिन मे जाते ही मैं बैठ गया.

अवी-गुड मॉर्निंग

सारा-गुड मॉर्निंग

अवी-आज आपका बर्तडे है

सारा-नही तो

अवी-मुझे लगा कि आपका बर्तडे है

सारा-ऐसा क्यू लगा

अवी-आज आपने इतनी सुंदर साड़ी जो पहनी है

सारा-वो तो ऐसे ही पहन ली.

अवी-एक बार खड़ी हो जाओ

सारा-क्यूँ?

अवी-देखना है आप साड़ी मे कैसी दिखती है

सारा-ठीक है .और सारा खड़ी हो गयी.

अवी-घूम जाइए

सारा-ये लो .

और सारा घूम गयी. और मुझे साड़ी दिखाने लगी

अवी-सारा को देखते हुए वैसे आप इस साड़ी मे हॉट लग रही है.

सारा -मैं कोई हॉट नही लग रही हू

अवी-सच मे आप इस साड़ी मे हॉट लग रही है पर

सारा -पर क्या

अवी-आप एक और काम करती तो और हॉट लगती

सारा -कौनसा काम

अवी-है एक पर जाने दीजिए

सारा-क्यू जाने दूं बता दो

अवी-आप को फिर पसंद नही आएगा

सारा-क्यू पसंद नही आएगा

अवी-आपकी नाक का इलाज किया तो आप गुस्सा हो गयी.

सारा-अब गुस्सा नही करूँगी

अवी-फिर बता दूं

सारा-हाँ बता दूं

अवी-या आपको हॉट कर दूं

सारा-मतलब

अवी-बताने से अच्छा है करके दिखाता हूँ

सारा-ठीक है पर कुछ ऐसा वैसा मत करना

अवी-नही करूँगा

और मैं सारा के पास चला गया.

अवी-ये जो आपकी नाभि है

सारा-ह्म्म्मप

मैं ने सारा की नाभि मे उंगली डाल दी.सारा का बदन हिल गया और सारा के मुँह से आहह निकल गयी.

अवी-मैं उंगली से सारा की नाभि के साथ खेलता रहा. ये जो आपकी नाभि है

सारा-हाँ

अवी-उसे साड़ी से छुपाना बंद कीजिए .नाभि को लोगो को देखने दीजिए

सारा-ह्म्म्म़

अवी-और आपने जो साड़ी कमर तक पहनी है

सारा-ह्म्म्म

मैं ने साड़ी के अंदर हाथ डाल दिया .

साड़ी मे हाथ डालते ही सारा की चेस्ट फूल गयी. सारा ने लंबी सास ली.

और मैं ने साड़ी को थोड़ा नीचे किया.और हाथ बाहर निकाल लिया.

हाथ बाहर निकालते ही सारा ने राहत की सास ली

अवी-अब ठीक है.और मैं वापस आकर बैठ गया.

सारा ने मेरी तरफ देखा और वो भी बैठ गयी. सारा की साँसे तेज चल रही थी.

अवी-अब आप हॉट लग रही हो

सारा-थॅंक्स पर मुझे ऐसे साड़ी पहनना पसंद नही है

अवी-हॉस्पिटल मे पहन लो बाहर मत पहना करो

सारा-सोचूँगी इसके बारे मे

अवी- वैसे एक बात बतानी थी आपको

सारा-क्या

अवी- मैं ने किस करना सीख लिया

सारा-क्या,किसने

अवी-है एक डॉक्टर जिस ने मुझे सिखा दिया.

सारा-ज़ोया ने ,तुम मे

अवी-एक डॉक्टर ने सिखाया मुझे,

सारा-किस डॉक्टर ने

अवी-अब आपको क्या करना है. मैं ने तो सीख लिया.

सारा उदास हो गयी. थोड़ी देर कॅबिन मे शांति रही.

अवी-अच्छा अब मुझे जाना है.

सारा ने कुछ नही कहा. बस अपने ख़यालो मे डूबी रही

अवी-सारा, मैं चलता हू

सारा-होश मे आते हुए,हाँ, क्या कहा

अवी-मैं चलता हू

सारा-इतनी जल्दी

अवी-हाँ.आज कुछ काम है मुझे

सारा-ठीक है.पर कल ज़्यादा देर रुकना

अवी-ठीक है रुकुंगा.और मैं गेट के पास आ गया

अवी-सारा

सारा-हाँ

अवी-तुम आज हॉट लग रही हो पर तुम ज़ोया जितनी संदर नही लग रही हो

और मैं घर चला आया

 


अपडेट 280

घर आने पर मैं ने खाना खा लिया और कमरे मे जाकर सो गया.

आज रीया से मिलना है.कल रीया ने आराम करके खुद को ठीक किया होगा. ज़ीया तो कल की चुदाई की वजह से आराम कर रही होगी.

फिर दोपहर मे छत पर जाकर रीया का इंतज़ार करने लगा. शाम के 4.10 बज गये पर रीया नही आई .कही ज़ीया ने रीया को बता तो नही दिया.ज़ीया ऐसा नही करेगी.

मुझे भी इस खेल को जल्दी ख़तम करना पड़ेगा.नही तो मैं फस जाउन्गा.

मुझे ऐसा कुछ सोचना होगा कि "साँप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे"

लेकिन जो भी करना है वो दोनो की गंद मारने के बाद करूँगा . मैं सोच रहा था कि रीया आ गयी.

पर पहले मुझे देखना था कि वो रीया है कि ज़ीया.

मैं छत पर घूमते हुए उसके पास चला गया.उसने टी-शर्ट पहनी थी जिस से उसकी गर्दन दिख रही थी.

गर्दन पर मुझे मोले नही दिखा.मतलब ये रीया है.

अवी-हाई ज़ीया

रीया(ज़्)-हाई

रीया को अभी तक मेरा नाम नही पता था. और वो पूछ भी नही सकती थी .अगर पूछ लेती तो मुझे पता चल जाता

अवी-अब दर्द कैसा है

रीया(ज़्)-आज अच्छा लग रहा है

अवी-फिर चले प्यार करने

रीया(ज़्)-तुम बहुत गंदे हो डायरेक्ट पूछ लेते हो

अवी-अगर टाइम चला गया तो ,रीया उपर आ जाएगी और मुझे वापस जाना पड़ेगा.

रीया(ज़्)-वो नही आएगी

अवी-क्यू .कहाँ गयी रीया

रीया(ज़्)-वो सो रही है.

अवी-फिर तो हमारे पास काफ़ी समय है

रीया(ज़्)-हाँ

अवी-फिर भी यहाँ से चलो जल्दी अगर किसीने देख लिया तो हमारे लिए गड़बड़ हो जाएँगी

रीया(ज़्)-हाँ,मुझे भी यही लग रहा है

हम स्टोर रूम मे आ गये .मैं ने गेट बंद कर दिया.

गेट बंद करते ही रीया(ज़्) मेरे गले लग गयी.और मेरे होंठो पर किस करने लगी.मैं भी रीया(ज़्) के होंठो को चूसने लगा.

रीया(ज़्) ने सुरुआत की ये तो मेरे लिए अच्छी बात थी

मैं रीया(ज़्)के होंठो को चूसने लगा. उस दिन रीया(ज़्) के होंठो को ठीक से चूसा नही था पर आज रीया(ज़्)ने खुद शुरुआत करके अच्छा किया.

मैं आज रीया(ज़्) को आराम से किस कर सकता था. और मैं रीया(ज़्) को किस करने का पूरा मज़ा ले रहा था.

आज रीया(ज़्) ने किस करते हुए मुझे से पहले मेरी जीभ को चूसना सुरू किया.

मैं भी पीछे ना रहते हुए मज़े से रीया(ज़्) को किस कर रहा था.

थोड़ी देर किस करने के बाद मैं ने रीया(ज़्) की टी-शर्ट निकाल दी. रीया(ज़्) आज भी ब्रा नही पहनी थी.

मैं ने रीया(ज़्) का हाथ पकड़ कर मेरे लोवर मे डाल दिया. मैं ने आज अंडरवेर नही पहनी थी.

रीया(ज़्) के हाथ मे मेरा लंड था .रीया(ज़्) ने लंड को पकड़ लिया.

फिर मैं ने रीया(ज़्) के दोनो बूब्स पर अपने दोनो हाथ रख दिए.और दबाने लगा. और रीया(ज़्) शीष्कारिया लेते हुए मेरे लंड को मसल रही थी.

फिर मैं ने बूब्स दबाते हुए रीया(ज़्) के होंठो को चूसना सुरू किया.

हम दोनो ही मस्ती मे एक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे. और साथ मे मैं उसके बूब्स को दबाता रहा. और वो मेरे लंड को मसल रही थी.

फिर मैं रीया(ज़्) के बूब्स को चूसने लगा. रीया(ज़्) ने अपना हाथ मेरे लोवर से निकाल लिया.और मेरे सर पे घुमाने लगी.

मैं बूब्स चूसने के साथ दाँतों से काट भी रहा था. बूब्स को काटने से रीया(ज़्) के मुँह से शीष्कारिया निकल जाती.

रीया(ज़्) की बूब्स को चूसने और दबाने मे मज़ा आ रहा था.

फिर मैं रीया(ज़्) को सोफे पर ले गया. उसे सोफे पर लिटा दिया.

मैं रीया(ज़्) के उपर आकर उसके होंठो पर एक किस करके बूब्स को चूसने लगा.और दूसरे बूब्स को दबाने लगा . रीया(ज़्) शीष्किया लेने लगी.

मैं बूब्स को ज़ोर से दबा रहा था कि उसने मुझे रोक दिया

.मैं रुक गया तो उसने मुझे बोला प्ल्ज़्ज़ थोड़ा धीरे दबाओ मुझे दर्द हो रहा है .

फिर मैं बूब्स को धीरे धीरे दबाने लगा और चूसने लगा रीया(ज़्) शीष्किया लेने लगी .

उसके मुँह से अया आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उम्म्म की आवाज़ आ रही थी . 2 3 मिनट के बाद मैं ने देखा रीया(ज़्) के बूब्स दबाने और चूसने से लाल हो चुके थे और उसके निपल भी टाइट हो गये थे

मैं फिर भी उसके बूब्स को हाथ से दबाता रहा.रीया(ज़्) के बूब्स बहुत नरम थे.मुझे छोड़ने का मन नही हुआ.

रीया(ज़्) भी मेरे सर को अब बूब्स पे दबाने लगी और रीया(ज़्) के मुँह से आआह्ह्ह्ह्ह आअहह की आवाज़ आने लगी.

फिर मैं दूसरे बूब्स को दबाने लगा और रीया(ज़्) शीष्किया लेने लगी .3 4 मिनट मैं रीया(ज़्) के दूसरे बूब्स को दबाता रहा

फिर मैं ने रीया(ज़्) के बूब्स को छोड़ दिया.रीया(ज़्) के बूब्स लाल हो चुके थे.

 
फिर मैं नीचे आ गया. मैं ने रीया(ज़्) के लोवर को पकड़ लिया .रीया(ज़्) ने अपनी गंद उपर की.

मैं ने रीया(ज़्) का लोवर को उतार दिया .रीया(ज़्) ने अंदर वाइट कलर के पैंटी पहनी थी और वो पूरी गीली हो चुकी थी.

मैं ने रीया(ज़्) की पैंटी भी उतार दी .मैं रीया(ज़्) की पिंक कलर की चूत देखने लगा.

उस्दिन अच्छे से देखने को मिली नही थी

मैं रीया(ज़्) की चूत पे अपना हाथ फेरने लगा .फिर मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा.

वो शीष्किया लेने लगी और मेरे सर को अपनी चूत पे दबाने लगी और मैं उसकी चूत को चूसने लगा.

रीया(ज़्) की चूत जो मैं ने उस्दिन फाड़ दी थी उसको चूस चूस कर लाल कर रहा था.

ना मैं ने रीया(ज़्) के बूब्स पर तरस खाया और ना चूत पे रहम किया.

मैं ने पहले बूब्स को चूस चूस कर लाल कर दिया था और अब चूत को कर रहा था.

आज मेरी जीभ बिना किसी रोक टोक के चूत के अंदर जा रही थी.

उस दिन सील तोड़ने की वजह से आज जीभ को चूत के अंदर तक डाल कर चाट रहा था. चूस रहा था.

मैं रीया(ज़्) की चूत को 5 6 मिनट तक चूस्ता रहा फिर रीया(ज़्) झड गयी .

मैं ने उसकी चूत का पानी पी लिया .रीया(ज़्) की चूत का पानी थोड़ा नमकीन था .

पर उस दिन के मुकाबले आज रीया(ज़्)की चूत के पानी का टेस्ट अलग लग रहा था.

शायद सील टूटने की वजह से होगा या फिर प्रेग्नेन्सी की गोली खाने से हुआ होगा.

रीया(ज़्) की चूत का पानी पीने के बाद मैं सोफे पर से अलग हो गया.

और खड़ा हो कर अपना लोवर निकाल लिया.फिर मैं ने अपना लंड रीया(ज़्) के मुँह के सामने किया.

मुझे लगा कि वो मना करेगी.ज़ीया की तरह वो लंड नही चूसेंगी.

पर रीया(ज़्) ने तो लंड पर किस किया और जीभ से लंड के टोपे को चाटने लगी.

फिर रीया(ज़्) लंड को मुँह मे लेकर चूसने लगी. रीया(ज़्) ज़ीया से अच्छी तरह लंड चूस रही थी.

मैं भी तो यही चाहता था कि कोई मेरा लंड फ़ुर्सत से चूस कर मुझे मज़ा दे

रीया(ज़्) मेरे लंड को चूस कर मुझे मज़ा दे रही थी

रीया(ज़्) आधे लंड को मुँह मे लेकर चूस्ति रही. करीब1 2 मिनट के बाद मैं ने रीया(ज़्) के मुँह से मेरा लंड निकाल लिया.

फिर मैं रीया(ज़्) के उपर आ गया. और लंड को रीया(ज़्) की चूत पर रख कर एक जोरदार झटका लगाया जिस से मेरा आधा लंड रीया(ज़्) की चूत मे चला गया.

रीया(ज़्) की चीख निकल गयी. पर उसने अपने मुँह पर हाथ रख दिया.

फिर मैं ने दूसरा जोरदार झटका मारा कि मर्द पूरा 8 इंच का लंड रीया(ज़्) की चूत मे समा गया.

रीया(ज़्) दर्द से चिल्ला उठी ऊऊऊऊईईईई मर गयी मैं तो आआआआअहह्ा

रीया(ज़्) की बस एक बार चुदाई हुई थी फिर भी मैं ने 2 झटके मे लंड चूत डाल दिया.

रीया(ज़्) ने अपने मुँह पर हाथ रख कर मेरा साथ दिया.

पर हाथ रखने से कुछ नही होता ,मैं ने अपना मुँह रीया(ज़्) के मुँह पर दबा दिया ताकि चीखने की आवाज़ बाहर ना निकले.

रीया(ज़्) तड़प रही थी और मेरे लंड को बाहर निकालने की कोशिस कर रही थी

.

रीया(ज़्) का दर्द कम करने के लिए मुझे रीया(ज़्) का पानी निकालना होगा.

मैं ने आधा लंड बाहर निकाला और एक झटके मे फिर पूरा अंदर डाल दिया और फिर मैं ने धीरे धीरे हिलाना सुरू कर दिया

रीया(ज़्) को दर्द हो रहा था. पर उसको पता था कि दर्द होने के बाद मज़ा मिलेगा.

उस दिन भी रीया(ज़्)को पहल दर्द हुआ था और फिर मज़ा आया था.

इसी पॉज़िटिव बात को ध्यान मे रखते हुए रीया(ज़्) दर्द को बर्दास्त करके मज़ा लेने की कोशिस कर रही थी.

रीया(ज़्) की मेहनत रंग लाने लगी.थोड़ी देर मे रीया(ज़्) को मज़ा आने लगा और रीया(ज़्) भी अपनी गंद उछाल ने लगी.

मैं ने रीया(ज़्) के होंठो को आज़ाद कर दिया.

फिर धक्के मारने की गति धीरे धीरे बढ़ाने लगा.धक्के की गति बढ़ाने से हम दोनो को ही मज़ा आने लगा .

रीया(ज़्) कहने लगी और ज़ोर से चोदो मेरी जान फाड़ दो मेरी चूत को और तेज तेज चोदो.

मैं रीया(ज़्) की बात सुनकर शॉक्ड हो गया.पर मुझे रीया(ज़्) की बाते सुनकर मज़ा भी आया.

मैं ने मेरी गति बढ़ा दी. गति बढ़ाने से रीया(ज़्) 5 मिनट के बाद झड गयी.

रीया(ज़्) की चूत मे से पानी बहने लगा. लेकिन मे अभी झड्ने वाला नही था

मैं अब रीया(ज़्) के बूब्स भी दबा रहा था और अपने लंड को अंदर बाहर भी कर रहा था जिस से रीया(ज़्) को मज़ा आ रहा था .

फिर मैं ने रीया(ज़्) की बूब्स को चूसना सुरू कर दिया . और लंड अंदर बाहर करने लगा. रीया(ज़्) की आवाज़े निकलनी लगी ऊओुईईईईईए आआआइईईए.ज़ोर से चोदो बहुत मज़ा आ रहा है और ज़ोर से करो

मैं ने अपनी गति बढ़ा दी और रीया(ज़्) फिर झड गयी.

रूम मे चूफ चूफ की आवाज़ आ रही थी. चुदाई करते हुए मैं ने रीया(ज़्) से पूछा मज़ा आया.

रीया(ज़्) ने कहा हाँ

ये बात सुनकर मैं और ज़ोर से रीया(ज़्) को चोदने लगा. और वो ओइईईईईईईईईईईई आआअहह करते हुए फिर झड गयी .

रीया(ज़्) के तीन बार पानी छोड़ने के बाद अब मेरी बारी थी झडने की.

मैं ने रीया(ज़्) को घोड़ी बन ने के लिए कहा तो रीया(ज़्) घोड़ी बन गयी

मैं ने अपना लंड रीया(ज़्) की चूत मे डाला और जोरदार धक्के मारना सुरू कर दिया.

मैं अपने दोनो हाथ उस की गंद पर फेरने लगा

और आख़िरी झटके के साथ मैं ने अपना वीर्य रीया(ज़्) की चूत मे डाल दिया.
 


अपडेट 281

रीया(ज़्) की चूत मे वीर्य डालने के बाद मैं रीया(ज़्) के उपर गिरा रहा.

रीया(ज़्) और मैं लंबी लंबी सासे ले रही थी.

फिर थोड़ी देर बाद हम दोनो नॉर्मल हो गये.

मैं ने लंड को रीया(ज़्) की चूत से निकाला पर मैं रीया(ज़्) के उपर वैसे ही गिरा रहा

अवी-ज़ीया मज़ा आया

रीया(ज़्)-हाँ

अवी-आज दर्द हुआ

रीया(ज़्)-थोड़ा सा

अवी-अगली बार नही होगा.

रीया(ज़्)-वो तो देखना पड़ेगा

अवी-तुमने ये कहाँ से सीखा

रीया(ज़्)-क्या?

अवी-लंड चूसना

रीया(ज़्)-वो मैं ने मूवी मे देखा

अवी-ब्लू फिल्म में

रीया(ज़्)-हाँ वही.

अवी-तुम ने तो देख कर ही इतना अच्छा किया

रीया(ज़्)-शरमा गयी

अवी-सच मे तुमने अच्छा किया

रीया(ज़्)-वो तो ऐसे ही हो गया

अवी-मैं ने लोवर मे से मेडिसिन निकाल ली.ये लो इसे खा लेना

रीया(ज़्)-घर पे खा लूँगी

अवी-तुम्हे पता है ये क्या है

रीया(ज़्)-प्रेग्नेन्सी रोकने के लिए

अवी-तुम तो स्मार्ट हो

रीया(ज़्)-(और तुम ईडियट हो,मैं रीया हू कि ज़ीया ये नही जान सके,) वो तो मैं हू

फिर रीया कपड़े पहनने लगी

अवी-ज़ीया

रीया(ज़्)-हाँ

अवी-हम कल नही मिलेंगे

रीया(ज़्)-क्यू?मुझे तो दर्द नही हो रहा

अवी-मुझे बाहर जाना है

रीया(ज़्)- मैं कल क्या करूँगी

अवी-कल तुम कॉलेज चली जाना

रीया(ज़्)-कॉलेज जाने का मन नही है

अवी-तुम कॉलेज नही गयी तो रीया को शक हो जाएगा.

रीया(ज़्)-ये तो सही कहा,फिर कब मिलेंगे

अवी-परसों

रीया(ज़्)-ठीक है मैं परसो 4.00 बजे आ जाउन्गि

अवी-4.00 नही 3.00 बजे आना

रीया(ज़्)-3.00 बजे तो मैं कॉलेज से आती हू

अवी-उस्दिन कॉलेज मत जाना रीया को जाने देना.और तुम कल कॉलेज जाना.

रीया(ज़्)-ये ठीक है.कल कॉलेज जवँगी ,और परसो छुट्टी मारूँगी

अवी-अब चले

रीया(ज़्)-हां

अवी-पहले एक किस करते है

रीया(ज़्)-तुम्हे रोका किसने है

मैं ने रीया(ज़्) के होंठो पर किस किया.

अवी-ज़ीया तुम्हे एक बार बिना कपड़ो के देखना है

रीया(ज़्)-इस समय

अवी-एक काम करो ,मेरी तरफ पीठ करके झुक जाओ

रीया(ज़्)-ये तो कर सकती हू

रीया(ज़्) मेरी तरफ पीठ करके झुक गयी.

रीया(ज़्)के झुकने से गंद बाहर की तरफ आ गयी.

मैं ने रीया(ज़्) की गंद के उपर हाथ घुमाने लगा.

रीया(ज़्)-ये क्या कर रहे हो

अवी- कुछ नही, तुम्हारे नरम बदन को फील कर रहा हू

रीया(ज़्)-जल्दी करो, रीया आ जाएगी

अवी-हो गया.

रीया(ज़्)की गंद के साथ थोड़ी देर खेलने के बाद मैं ने अपना खेल बंद कर दिया.

इसकी गंद का जवाब नही. फिर से लंड खड़ा हो गया.समय ना होने की वजह से से मैं ने रीया(ज़्) की गंद का ख़याल निकाल दिया.

फिर पहले मैं बाहर चला गया और फिर रीया(ज़्) बाहर आ गयी.रीया(ज़्) बाहर आते ही घर के अंदर चली गयी. मैं ने स्टोर रूम को ताला लगा दिया और अपनी छत पर आकर घूमने लगा.

फिर मैं कमरे मे जाकर फ्रेश होकर स्वेता दीदी,पूनम दीदी और सीतल दीदी के साथ बाते करने लगा.

आज मैं बाहर घूमने नही गया. आज खाना खाने तक स्वेता दीदी,पूनम दीदी और सीतल दीदी के साथ बाते करता रहा

दीदी को ऐसा ना लगे कि मैं उनके साथ बाते नही करता और उनको टाइम नही दे रहा.

फिर ज्योति बुआ ने मुझे जल्दी खाना खिला कर हॉस्पिटल भेज दिया.

मेरे चाची के रूम मे पैर रखते ही चाचा घर चले गये.

मैं ने छोटी चाची को पूछा कि चाचा को क्या हुआ

छोटी चाची ने कहा कि पता नही. जल्दी घर जाने की बात कर रहे थे. और बार बार तुम कब आओगे यही पूछ रहे थे.

जाने दो ज़ोया के आने का समय हो गया.फिर ज़ोया ने आकर चाची को चेक किया. ज़ोया ने मेरी तरफ देखा पर मैं ने ज़ोया की तरफ नही देखा.

ज़ोया मायूस होकर चली गयी. मैं ने चाची को खाना खिला दिया. चाची खाना खा कर सो गयी.

मैं ने सोचा 2 3 दिन ज़ोया के पास नही जाउन्गा. ज़ोया को थोड़ा तडपात हू, पर सारा से रोज बाते करूँगा.

फिर मैं गेम खेलता रहा.

रात मे चाची को कोई प्राब्लम नही होती थी. जिस से मैं आराम कर सकता था.

वही चाचा को दिन भर छोटी चाची कुछ ना कुछ काम करने को कहती. छोटी चाची ने जानबूझ कर चाचा को दिन मे और मुझे रात का काम दिया था.

वैसे भी चाचा को रात मे जागने की आदत नही थी.उनको रात मे सोना ज़रूरी था.

दिन मे स्वेता दीदी तो कभी सीतल दीदी तो कभी पूनम दीदी एक एक करके आती थी. जिस से वो हॉस्पिटल का काम कर देती.

स्वेता दीदी के साथ रोहन और रोहन की भाभी भी आती थी.

पर ज्योति बुआ एक बार भी हॉस्पिटल नही आई.

और ना पूनम के पापा होसितल आए. पूनम दीदी के पापा मेरी तरह दिन भर सोते रहते थे.और मेरे साथ ही रात को निकल जाते. मैं हॉस्पिटल और वो अपने जॉब पर चले जाते .

 
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