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Guest
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हम सब हॉल मे बैठ कर बातें करने लगे.
ठाकुर-तो अगले हफ्ते से मेला शुरू हो रहा है. हमे मेले की तय्यारी शुरू करनी होगी
चाचा-हाँ जल्दी करनी होगी
ठाकुर-पिछली बार योगेंद्रसिंघ(दादाजी) थे तो मेले का काम हम ने कर लिया था . पर इस बार योगेंद्रा सिंग नही है. और मेरी भी तबीयत ठीक नही रहती तो इस बार मेरी जगह काम रणजीतसिंघ करेगा
और आपकी तरफ से
चाचा-हमारी तरफ से तो मुझे करना चाहिए पर हम ने फ़ैसला किया कि हमारी तरफ से अवी करेगा.
मेरा नाम सुनते ही मैं छोटी चाची की तरफ देखने लगा.
छोटी चाची ने मेरी तरफ देख कर स्माइल की
ठाकुर-ये लड़का कर लेगा
चाचा-हाँ, दोनो जवान है. इस बार करने देते है .अगर ठीक नही हुआ तो अगली बार मैं कर लूँगा.
ठाकुर-पर पिछली बार की तरह इस बार बहुत कम समय है तय्यारी करने के लिए. पिछली बार 1 महीने पहले तय्यारी करना शुरू की थी .इस बार 1 हफ्ते मे करना है.
हमारी बहू माँ बन गयी और तुम भी बाप बन गये जिस के चलते देर हो गयी.क्या ये लड़का कर पाएगा
चाचा-हाँ,इसे सब कुछ आता है. शहर के बारे मे पता है, बाइक चलाता है. और तो और अपनी चाचियो का ख्याल भी रखता है.ये कर लेगा. इसके सिवा हमारे पास और कोई नही है. मुझे तो अपने बेटो का ख़याल रखना होगा
ठाकुर-तुम क्या कहते हो रंजीत .आख़िर तुम्हें इसके साथ काम करना है
रणजीतसिंघ-इसके साथ,(मेरी तरफ देख कर) कर लूँगा
ठाकुर-फिर तो हमे क्या परेशानी हो सकती है पर याद रखना मेला अगले हफ्ते शुरू हो रहा है. और तुम्हें काम अच्छा और जल्दी करना होगा .
मैं बीच मे बोल पड़ा
अवी-क्या मैं बोल सकता हू
ठाकुर-अब से तो तुम्हें ही बोलना होगा. कहो क्या कहना चाहते हो
अवी-हम गाओं के लोगो को काम करने के लिए मना लें तो
ठाकुर-वो तो करेंगे ही
अवी-मैं वो...ठीक है
ब चाची-बोलो .डरो मत सब अपने ही है
अवी-हमे क्या क्या करना होगा
ठाकुर-बस मेला और मंदिर की पूजा अच्छे से हो जाए इसका ध्यान रखना होता है. और छोटी मोटी बातें देखनी पड़ती है.
अवी-ये तो ...
रणजीतसिंघ-ये तो कोई काम नही हुआ ,
ठाकुर-तुम कहना क्या चाहते हो ,हम तो ऐसे ही काम करते आए है.,मतलब तुम कह रहे हो हमें काम करना नही आता
कुवरसिंघ हँसने लगा
कुवरसिंघ-मैं कह रहा हू मेले का काम मुझे दीजिए .इन से नही होगा. और ये बच्चा क्या काम करेगा. ये तो दूध पीता बच्चा है.
कुवरसिंघ की बातें सुनकर कर सब को गुस्सा आया. खास कर के चाचियो को पर ठाकुर के होते हुए कोई कुछ नही बोल सकता था
ठाकुर-कुवर अपनी ज़बान को लगाम दो.
कुवरसिंघ ठाकुर की बात सुनकर गुस्से से चला गया.
ठाकुर-तुम क्या कह रहे थे रंजीत
रणजीतसिंघ-मैं अवी से अकेले मे बात करना चाहता हू.फिर मैं अपनी बात कहूँगा
ठाकुर-ठीक है करो ,तब तक हम मंदिर मे पूजा कौन करेगा वो सोचते है
मैं रंजीत सिंग के साथ दूसरे कमरे मे चला गया. इधर ठाकुर मंदिर पे बातें कर रहे थे
ठाकुर-ये तो देख रेख कौन करेगा इसकी बात हुई है. अब मंदिर मे आपकी तरफ से पूजा कौन करेगा
चाचा-हमारी तरफ से तो अवी पूजा करेगा
ठाकुर-तुम ने तो हमारी तरह सोचा है.हम भी पूजा रणजीतसिंघ के हाथो से करवाने वाले है.
चाचा-हाँ वो दोनो देख रेख भी करेंगे और पूजा भी.
ठाकुर-हाँ नया खून है, सब संभाल लेंगे
चाचा-पर 1 हफ्ते मे संभालना मुश्किल होगा
ठाकुर-हवन के बाद पांडिजी भी यही कह रहे थे.
कि मेले को 1 हफ़्ता बाकी है और अभी तक कुछ शुरू नही हुआ. लोग तो मेले के 2 दिन पहले से आने शुरू हो जाएँगे. मतलब इनके पास 5 दिन है.
चाचा-इनको दिन रात एक करना होगा
ठाकुर-जवान खून है ,इसी लिए ये काम हम ने इनको दिया है
चाचा-(इतना कम समय है इसी लिए मैं ने अवी को ये काम दिया है. मुझे पता है 5 दिन मे ये काम करना मुश्किल है. काम नही हुआ तो गलियाँ अवी खाएगा और मैं मज़े करूँगा) ये सही कहा
ठाकुर-ये दोनो अभी तक आए क्यू नही
चाचा-1 हफ्ते मे करने के नाम से डर तो नही गये.
ठाकुर-क्या पता क्या कर रहे है.चलो तब तक चाय पीते है
सब चाय पीते हुए हमारा इंतज़ार करने लगे.
हम सब हॉल मे बैठ कर बातें करने लगे.
ठाकुर-तो अगले हफ्ते से मेला शुरू हो रहा है. हमे मेले की तय्यारी शुरू करनी होगी
चाचा-हाँ जल्दी करनी होगी
ठाकुर-पिछली बार योगेंद्रसिंघ(दादाजी) थे तो मेले का काम हम ने कर लिया था . पर इस बार योगेंद्रा सिंग नही है. और मेरी भी तबीयत ठीक नही रहती तो इस बार मेरी जगह काम रणजीतसिंघ करेगा
और आपकी तरफ से
चाचा-हमारी तरफ से तो मुझे करना चाहिए पर हम ने फ़ैसला किया कि हमारी तरफ से अवी करेगा.
मेरा नाम सुनते ही मैं छोटी चाची की तरफ देखने लगा.
छोटी चाची ने मेरी तरफ देख कर स्माइल की
ठाकुर-ये लड़का कर लेगा
चाचा-हाँ, दोनो जवान है. इस बार करने देते है .अगर ठीक नही हुआ तो अगली बार मैं कर लूँगा.
ठाकुर-पर पिछली बार की तरह इस बार बहुत कम समय है तय्यारी करने के लिए. पिछली बार 1 महीने पहले तय्यारी करना शुरू की थी .इस बार 1 हफ्ते मे करना है.
हमारी बहू माँ बन गयी और तुम भी बाप बन गये जिस के चलते देर हो गयी.क्या ये लड़का कर पाएगा
चाचा-हाँ,इसे सब कुछ आता है. शहर के बारे मे पता है, बाइक चलाता है. और तो और अपनी चाचियो का ख्याल भी रखता है.ये कर लेगा. इसके सिवा हमारे पास और कोई नही है. मुझे तो अपने बेटो का ख़याल रखना होगा
ठाकुर-तुम क्या कहते हो रंजीत .आख़िर तुम्हें इसके साथ काम करना है
रणजीतसिंघ-इसके साथ,(मेरी तरफ देख कर) कर लूँगा
ठाकुर-फिर तो हमे क्या परेशानी हो सकती है पर याद रखना मेला अगले हफ्ते शुरू हो रहा है. और तुम्हें काम अच्छा और जल्दी करना होगा .
मैं बीच मे बोल पड़ा
अवी-क्या मैं बोल सकता हू
ठाकुर-अब से तो तुम्हें ही बोलना होगा. कहो क्या कहना चाहते हो
अवी-हम गाओं के लोगो को काम करने के लिए मना लें तो
ठाकुर-वो तो करेंगे ही
अवी-मैं वो...ठीक है
ब चाची-बोलो .डरो मत सब अपने ही है
अवी-हमे क्या क्या करना होगा
ठाकुर-बस मेला और मंदिर की पूजा अच्छे से हो जाए इसका ध्यान रखना होता है. और छोटी मोटी बातें देखनी पड़ती है.
अवी-ये तो ...
रणजीतसिंघ-ये तो कोई काम नही हुआ ,
ठाकुर-तुम कहना क्या चाहते हो ,हम तो ऐसे ही काम करते आए है.,मतलब तुम कह रहे हो हमें काम करना नही आता
कुवरसिंघ हँसने लगा
कुवरसिंघ-मैं कह रहा हू मेले का काम मुझे दीजिए .इन से नही होगा. और ये बच्चा क्या काम करेगा. ये तो दूध पीता बच्चा है.
कुवरसिंघ की बातें सुनकर कर सब को गुस्सा आया. खास कर के चाचियो को पर ठाकुर के होते हुए कोई कुछ नही बोल सकता था
ठाकुर-कुवर अपनी ज़बान को लगाम दो.
कुवरसिंघ ठाकुर की बात सुनकर गुस्से से चला गया.
ठाकुर-तुम क्या कह रहे थे रंजीत
रणजीतसिंघ-मैं अवी से अकेले मे बात करना चाहता हू.फिर मैं अपनी बात कहूँगा
ठाकुर-ठीक है करो ,तब तक हम मंदिर मे पूजा कौन करेगा वो सोचते है
मैं रंजीत सिंग के साथ दूसरे कमरे मे चला गया. इधर ठाकुर मंदिर पे बातें कर रहे थे
ठाकुर-ये तो देख रेख कौन करेगा इसकी बात हुई है. अब मंदिर मे आपकी तरफ से पूजा कौन करेगा
चाचा-हमारी तरफ से तो अवी पूजा करेगा
ठाकुर-तुम ने तो हमारी तरह सोचा है.हम भी पूजा रणजीतसिंघ के हाथो से करवाने वाले है.
चाचा-हाँ वो दोनो देख रेख भी करेंगे और पूजा भी.
ठाकुर-हाँ नया खून है, सब संभाल लेंगे
चाचा-पर 1 हफ्ते मे संभालना मुश्किल होगा
ठाकुर-हवन के बाद पांडिजी भी यही कह रहे थे.
कि मेले को 1 हफ़्ता बाकी है और अभी तक कुछ शुरू नही हुआ. लोग तो मेले के 2 दिन पहले से आने शुरू हो जाएँगे. मतलब इनके पास 5 दिन है.
चाचा-इनको दिन रात एक करना होगा
ठाकुर-जवान खून है ,इसी लिए ये काम हम ने इनको दिया है
चाचा-(इतना कम समय है इसी लिए मैं ने अवी को ये काम दिया है. मुझे पता है 5 दिन मे ये काम करना मुश्किल है. काम नही हुआ तो गलियाँ अवी खाएगा और मैं मज़े करूँगा) ये सही कहा
ठाकुर-ये दोनो अभी तक आए क्यू नही
चाचा-1 हफ्ते मे करने के नाम से डर तो नही गये.
ठाकुर-क्या पता क्या कर रहे है.चलो तब तक चाय पीते है
सब चाय पीते हुए हमारा इंतज़ार करने लगे.