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मैं और मेरा परिवार

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हम सब हॉल मे बैठ कर बातें करने लगे.

ठाकुर-तो अगले हफ्ते से मेला शुरू हो रहा है. हमे मेले की तय्यारी शुरू करनी होगी

चाचा-हाँ जल्दी करनी होगी

ठाकुर-पिछली बार योगेंद्रसिंघ(दादाजी) थे तो मेले का काम हम ने कर लिया था . पर इस बार योगेंद्रा सिंग नही है. और मेरी भी तबीयत ठीक नही रहती तो इस बार मेरी जगह काम रणजीतसिंघ करेगा

और आपकी तरफ से

चाचा-हमारी तरफ से तो मुझे करना चाहिए पर हम ने फ़ैसला किया कि हमारी तरफ से अवी करेगा.

मेरा नाम सुनते ही मैं छोटी चाची की तरफ देखने लगा.

छोटी चाची ने मेरी तरफ देख कर स्माइल की

ठाकुर-ये लड़का कर लेगा

चाचा-हाँ, दोनो जवान है. इस बार करने देते है .अगर ठीक नही हुआ तो अगली बार मैं कर लूँगा.

ठाकुर-पर पिछली बार की तरह इस बार बहुत कम समय है तय्यारी करने के लिए. पिछली बार 1 महीने पहले तय्यारी करना शुरू की थी .इस बार 1 हफ्ते मे करना है.

हमारी बहू माँ बन गयी और तुम भी बाप बन गये जिस के चलते देर हो गयी.क्या ये लड़का कर पाएगा

चाचा-हाँ,इसे सब कुछ आता है. शहर के बारे मे पता है, बाइक चलाता है. और तो और अपनी चाचियो का ख्याल भी रखता है.ये कर लेगा. इसके सिवा हमारे पास और कोई नही है. मुझे तो अपने बेटो का ख़याल रखना होगा

ठाकुर-तुम क्या कहते हो रंजीत .आख़िर तुम्हें इसके साथ काम करना है

रणजीतसिंघ-इसके साथ,(मेरी तरफ देख कर) कर लूँगा

ठाकुर-फिर तो हमे क्या परेशानी हो सकती है पर याद रखना मेला अगले हफ्ते शुरू हो रहा है. और तुम्हें काम अच्छा और जल्दी करना होगा .

मैं बीच मे बोल पड़ा

अवी-क्या मैं बोल सकता हू

ठाकुर-अब से तो तुम्हें ही बोलना होगा. कहो क्या कहना चाहते हो

अवी-हम गाओं के लोगो को काम करने के लिए मना लें तो

ठाकुर-वो तो करेंगे ही

अवी-मैं वो...ठीक है

ब चाची-बोलो .डरो मत सब अपने ही है

अवी-हमे क्या क्या करना होगा

ठाकुर-बस मेला और मंदिर की पूजा अच्छे से हो जाए इसका ध्यान रखना होता है. और छोटी मोटी बातें देखनी पड़ती है.

अवी-ये तो ...

रणजीतसिंघ-ये तो कोई काम नही हुआ ,

ठाकुर-तुम कहना क्या चाहते हो ,हम तो ऐसे ही काम करते आए है.,मतलब तुम कह रहे हो हमें काम करना नही आता

कुवरसिंघ हँसने लगा

कुवरसिंघ-मैं कह रहा हू मेले का काम मुझे दीजिए .इन से नही होगा. और ये बच्चा क्या काम करेगा. ये तो दूध पीता बच्चा है.

कुवरसिंघ की बातें सुनकर कर सब को गुस्सा आया. खास कर के चाचियो को पर ठाकुर के होते हुए कोई कुछ नही बोल सकता था

ठाकुर-कुवर अपनी ज़बान को लगाम दो.

कुवरसिंघ ठाकुर की बात सुनकर गुस्से से चला गया.

ठाकुर-तुम क्या कह रहे थे रंजीत

रणजीतसिंघ-मैं अवी से अकेले मे बात करना चाहता हू.फिर मैं अपनी बात कहूँगा

ठाकुर-ठीक है करो ,तब तक हम मंदिर मे पूजा कौन करेगा वो सोचते है

मैं रंजीत सिंग के साथ दूसरे कमरे मे चला गया. इधर ठाकुर मंदिर पे बातें कर रहे थे

ठाकुर-ये तो देख रेख कौन करेगा इसकी बात हुई है. अब मंदिर मे आपकी तरफ से पूजा कौन करेगा

चाचा-हमारी तरफ से तो अवी पूजा करेगा

ठाकुर-तुम ने तो हमारी तरह सोचा है.हम भी पूजा रणजीतसिंघ के हाथो से करवाने वाले है.

चाचा-हाँ वो दोनो देख रेख भी करेंगे और पूजा भी.

ठाकुर-हाँ नया खून है, सब संभाल लेंगे

चाचा-पर 1 हफ्ते मे संभालना मुश्किल होगा

ठाकुर-हवन के बाद पांडिजी भी यही कह रहे थे.

कि मेले को 1 हफ़्ता बाकी है और अभी तक कुछ शुरू नही हुआ. लोग तो मेले के 2 दिन पहले से आने शुरू हो जाएँगे. मतलब इनके पास 5 दिन है.

चाचा-इनको दिन रात एक करना होगा

ठाकुर-जवान खून है ,इसी लिए ये काम हम ने इनको दिया है

चाचा-(इतना कम समय है इसी लिए मैं ने अवी को ये काम दिया है. मुझे पता है 5 दिन मे ये काम करना मुश्किल है. काम नही हुआ तो गलियाँ अवी खाएगा और मैं मज़े करूँगा) ये सही कहा

ठाकुर-ये दोनो अभी तक आए क्यू नही

चाचा-1 हफ्ते मे करने के नाम से डर तो नही गये.

ठाकुर-क्या पता क्या कर रहे है.चलो तब तक चाय पीते है

सब चाय पीते हुए हमारा इंतज़ार करने लगे.

 


465

इधर कमरे मे रणजीतसिंघ और मैं

रणजीतसिंघ-तुम्हें तो मोका मिल गया.

अवी-हाँ, अब आप पर है सब कुछ

रणजीतसिंघ-वो सब बाद मे देखते है पहले मेले के बारे मे सोचते है

अवी-हाँ, 1 हफ्ते मे करना है.

रणजीतसिंघ-1 हफ़्ता नही 5 दिन ,मेला शुरू होने के 2 दिन पहले से तो लोग आना शुरू होंगे

अवी-5 दिन

रणजीतसिंघ-तुम घबराओ मत. हम मिलकर संभाल लेंगे.वैसे तुम्हें पता है मेले मे क्या करते है.

अवी-नही, ये मेरा पहला मेला है

रणजीतसिंघ-पहला मेला. चलो मैं बताता हू ,बस लोगो को ऐसे इधर उधर से देखना होता है कि उनको क्या चाहिए बस

अवी-बस इतना ही

रणजीतसिंघ-हाँ, पर हम इस बार कुछ अलग करेंगे

अवी-क्या?

रणजीतसिंघ-हम लोगो को मंदिर मे जाने और बाहर निकालने के लिए बम्बू की लाइन लगाएँगे जिस से सब लोग लाइन मे लग कर भगवान के दर्शन करेंगे

अवी-ये तो अच्छा आइडिया है

रणजीतसिंघ-तुम्हारा पास कोई आइडिया है

अवी-हाँ एक 2 आइडिया है

रणजीतसिंघ-क्या?

अवी-हम लोगो के लिए 2 3 खेतो मे जैसे हमारे 5 हेक्टर खेत मे कुछ नही है वहाँ उनके रहने के लिए मंडप (पेंडल) बना देते है

रणजीतसिंघ-ये तो अच्छा रहेगा. और साथ मे नहाने के लिए कुँए के पास कपड़ो की मदद से बाथरूम बना देंगे

अवी-हाँ,पर इसके लिए पैसे

रणजीतसिंघ-वो मंदिर मे लोग पैसे चढ़ाते है उसका इस्तेमाल करेंगे

अवी-और एक आइडिया है.

रणजीतसिंघ-क्या?

अवी-हम गाओं के लड़को को पोलीस की तरह लोगो पर ध्यान रखने को कहेंगे. जैसे चोरी, या झगड़ा या किसी के बच्चे गुम हो जाते है उनको इनसे मदद मिलेगी.

रणजीतसिंघ-उसके लिए एमएलए पोलीस भेजते है.

अवी-पर ये तो हमारे गाओं का मेला है.हमे इसके बारे मे सोचना होगा.

रणजीतसिंघ-वो भी ठीक है. और कुछ सोचा है

अवी-ये गवरमेंट कुछ नही करेंगी

रणजीतसिंघ-करती है ना, पोलीस भेजती है, बुसे ज़्यादा आती है, और 2 3 छोटे मोटे काम करती है.

अवी-बुसे, क्यू ना हम हमारे गाओं के ट्रेक्टर को शहर भेज दें जिस मे बैठ कर लोग हमारे गाओं फ्री मे आ जाएँगे

रणजीतसिंघ-फिर तो तुम कहोगे पीने के पानी का स्टॉल लगाते है,ये भी अच्छा आइडिया है. क्यू

अवी-हाँ, और साथ मे जो डेली मंदिर मे पैसे जमा होंगे उन से हम चावल बनाएँगे और लोगो मे बाँट देंगे

रणजीतसिंघ-बस और कुछ मत कहना. ये सब हमे 5 दिन मे करना है.

अवी-हाँ,ये तो बहुत हो गया

रणजीतसिंघ-हमे आज से काम शुरू करना होगा. हमे आज ही सरपंच से बात करनी होगी. वहाँ से हमे मदद मिल जाएगी.

अवी-हाँ,हम आज रात मे गाओं के लोगो को बुलाते है.

रणजीतसिंघ-चलो अब .सब हमारा इंतज़ार कर रहे होंगे

फिर हम वापस हॉल मे आ गये.

ठाकुर-क्या बात हुई

रणजीतसिंघ-वो हमे क्या करना है इसके बारे मे बात कर रहे थे.और हम इस बार कुछ नया करने वाले है

ठाकुर-नया ,यहाँ जो बताया है उसके लिए समय कम है और तुम कुछ नया करना चाहते हो.क्या करने क्या वाले हो

रणजीतसिंघ-2 3 दिन ज़्यादा काम करने वाले है, जैसे लोगो को रहने के लिए जगह बनाना,बाथरूम बनाना,लोगो को पानी और खाना देना,लोगो को गाओं लाने ले लिए फ्री मे ट्रॅक्टर देना.

ठाकुर-तुम ने सोचा तो अच्छा है .पर क्या 5 दिन मे कर लोगे.

रणजीतसिंघ-उसके लिए गाओं वालो की मदद लेंगे. और हमारी फॅक्टरी के वर्कर को यहाँ काम पर लगा देना.जिस से 2 हाथ की जगह 10 हाथ हो जाएँगे. और काम देखते देखते हो जाएगा.और हम आज ही सरपंच से बात करने वाले है.

ठाकुर-ठीक है करो ,अगर कुछ गड़बड़ हो गयी तो मुझसे बुरा कोई नही होगा.

रणजीतसिंघ-भगवान ने चाहा तो सब ठीक होगा

ठाकुर-और सुनो, मंदिर मे पूजा तुम दोनो करने वाले हो

रणजीतसिंघ-ये तो अच्छी बात है

ठाकुर-मैं एक बार और पूछ रहा हू काम कर लोगे ना

मैं ने चाचियो की तरफ देखा और हाँ मे गर्दन हिला दी.

ठाकुर-कल से कर दो काम शुरू

रणजीतसिंघ-कल से नही अभी से काम शुरू कर रहे है

ठाकुर-काफ़ी जोश मे बात कर रहे हो.ये जोश बनाए रखना ,नही तो इधर तुम्हारा जोश ख़तम हो जाए और उधर हमारी नाक काट जाए.

रणजीतसिंघ-ऐसा कुछ नही होगा. चलो अवी चलते है

मैं ने तीनो चाचियो के पैर छु कर आशीर्वाद लिया. फिर चाचा और बुआ के पैरे छु लिए

बड़ी चाची ने मुझे एक बार गले लगाया और फिर मैं रणजीतसिंघ के साथ सरपंच के पास चला गया.

इधर चाची ,बुआ, बचा पार्टी,चाचा भी घर चले गये.

 
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मैं रणजीतसिंघ के साथ सरपंच के घर चला गया. अभी दोपेहर के 4.00 बज रहे थे

रणजीतसिंघ-सरपंचजी

संपांच-ठाकुर साब आप आइए बैठिए

रणजीतसिंघ-हम बैठने नही हम मेले के बारे मे बात करने आए है

सरपंच-तो आप करने वाले हो इस साल मेले का काम

रणजीतसिंघ-हाँ

सरपंच-पर 1 हफ्ते मे हो जाएगा. मैं तो कब से ठाकुर जी को कह रहा था पर वो तो बिज़ी थे ,

रणजीतसिंघ-अब हम आ गये ना.हमे आपसे मदद चाहिए

सरपंच-मैं आपकी मदद कैसे करूँ

रणजीतसिंघ-आप 1 घंटे मे गाओं की सभा बुलाएँ ,हमे गाओं वालो से कुछ कहना है

सरपंच-मैं अभी सभा बुलवाता हू

सरपंच ने एक लड़के को सभा का लिए लोगो को बुलाने के लिए कहा.

सरपंच-और कहिए क्या मदद कर सकता हू

रणजीतसिंघ-हमारे गाओं मे ट्रॅक्टर कितने है

सरपंच-कुछ सोचते हुए,4 आपके ,मेरे,अवी के, 6 ट्रॅक्टर है

अवी-ये तो कम है हमे 10 तो भी चाहिए.

रणजीतसिंघ-दूसरे गाओं से बुलाना होगा.सरपंचजी आप बुला लो और 4 ट्रॅक्टर

सरपंच-अभी बुलाता हू. पास के गाओं से

रणजीतसिंघ-चलिए गाओं वाले आए होंगे

हम सरपंच के साथ जहाँ सभा होती है वहाँ आ गये. गाओं वाले मेले का नाम सुनके जल्दी आ गये.

रणजीतसिंघ-मेरे गाओं वालो, आपको पता है मेला अगले हफ्ते से शुरू होगा. और अभी तक मेले का काम शुरू नही हुआ.

इस बार मेले का काम मैं और अवी देखने वाले है. हमे आप सबकी मदद चाहिए.

हमें इस बार काम ज़्यादा और समय कम मिला है. तो मैं चाहूँगा कि आप हमारी मदद करे.

अब आगे अवी आपको बताएगा कि हमे क्या करना है.

अवी-हमे कुछ लोगो की ज़रूरत है.मैं आपको क्या करना है वो बताउन्गा उस हिशाब से आप ग्रूप बनाइए.

1.हमे एक पंडाल(मंडप) बनाना है जो मेरे खेतो मे बनेगा.)

2. लोगो को मंदिर मे दर्शन ठीक से मिले इसके लिए बम्बू की मदद से लोगो की लाइन बनानी है

3 लोगो को मेले मे पानी और मंदिर मे खाना देना है

4. मेले मे चोरी, झगड़ा ना हो इसके लिए कुछ लोगो को पोलीस की तरह काम करना होगा

5.हमे लोगो को शहर से गाओं लाने और ले जाने के लिए ट्रॅक्टर चाहिए

6. मेले के लिए जगह बनानी है.और भी बहुत से काम है जो समय आने पर बताया जाएगा.

लोगो ने मेरे कहने के हिसाब से ग्रूप बना दिए.

सभा 1 घंटे तक चली फिर दूसरे गाओं से ट्रॅक्टर भी आ गये. हमारे गाओं के 6 ट्रॅक्टर और दूसरे गाओं के 4 ट्रॅक्टर लेकर हम पहले मंदिर चले गये.

मंदिर के पास आकर हमने जगह देख ली. कि कहाँ मेला होगा ,कहाँ लोगों के लिए लाइन बनाई जाएँगी. कहाँ पीने के लिए पानी लगाया जाएगा. कहाँ लोगो को खाने के लिए राइस दिया जाएगा.

रंजितसिंग ने अपने आर्किटेक्चर और बिज़्नेसमॅन का दिमाग़ लगा कर देखते देखते एक पर्फेक्ट स्ट्रक्ट्रर बना दिया.

रणजीतसिंघ ने सिर्फ़ एक चक्कर मार कर पूरा प्लान बना दिया ,

जगह देखने के बाद ट्रॅक्टर को ज़मीन ठीक करने के लिए कहा.

4 ट्रॅक्टर मेले के लिए जगह बनाने मे लग गये. 2 ट्रॅक्टर मंदिर को ठीक करने मे लग गये. और 3ट्रॅक्टर हमारे खेत को अच्छा करने मे लग गये.और 2 ट्रॅक्टर झाड़ियों को निकालने मे लग गये.

ये ट्रॅक्टर का काम तो सुबह तक हो जाएगा.

ट्रॅक्टर के बाद हमे ज़मीन प्लेन करनी होगी.जिस के लिए रोड रोलर लगने वाला था. और उसके लिए शहर जाना होगा.

लोगो को सुबह ज़मीन पर जो कचरा होगा उसे उठाने को कह कर घर जाने को कहा.

और मैं रणजीतसिंघ के साथ शहर चला गया.

हमे पहले रॉड्रॉल्लेर चाहिए थे जो मुंसीपलटी मे मिल सकते है.

हम सीधे एमएलए के घर गये और उसको 5 रॉड्रोल्लार के लिए कहा. ठाकुर का नाम सुनते ही उसने 2 रोड रोलर मुंसीपलटी और 3 प्राइवेट कॉंट्रॅक्टर के पास से दिलवा दिए.

उस रोड रोलर को सुबह 6.00 बजे आने को कहा और मैं रणजीतसिंघ के साथ गाओं आ गया.

हमे गाओं आने के लिए 9.00 बज गये

हम सीधे मंदिर चले गये. वहाँ का काम देखने लगे.

पंडित जी भी काम कैसा चल रहा था वो देख रहे थे.

पंडितजी ने एक काम अच्छा किया था कि दीवाली से पहले मंदिर को पैंट मार दिया था. जिस से एक काम बच गया था

पंडिताइन सो चुकी थी नही तो हम उसकी बजा देते.

फिर हम घर चले गये. रात मे देर होने की वजह से रणजीतसिंघ मुझे हवेली ले गया.

और कहा कि मुझे अब ज़्यादा तर समय हवेली मे रहना होगा

हवेली मे जाकर रणजीतसिंघ देर रात तक प्लान बनाता गया कि कब क्या करना है. और फोन करके प्लान को पूरा कर रहा था.

ठाकुर की टोटल 5 फॅक्टरी है ,अगर वहाँ के सारे वर्कर आ गये तो कल ही मेले जैसा महॉल तय्यार हो जाएगा.

रणजीतसिंघ अपना काम करता गया और मैं उसको मदद करता गया.

रात मे देर तक काम करने के बाद मैं एक कमरे मे जाकर सो गया.

सुबह ठकुराइन ने मुझे जगाया. सुबह सुबह इतना हसीन चेहरा देखा तो दिल खुश हो गया.

ठकुराइन मुझे . कर चली गयी.

लेकिन ठकुराइन का मुझे उठाना कुछ समझ मे नही आया

ठकुराइन किसी नौकर को भेज सकती थी पर वो खुद वो आ गयी

जाने दो मुझे क्या है मुझे मेले के काम पर ध्यान देना होगा

सुबह उठ कर मैं अपने घर चला गया.

बड़ी चाची ने आते ही मुझे रात मे ना आने की वजह पूछी तो छोटी चाची ने बड़ी चाची को समझा दिया कि उसे बहुत काम होगा वो तो अब घर नही आएगा. आप उसको पूछ कर परेशान मत कीजिए

फिर मैं फ्रेश होकर रणजीतसिंघ के साथ मंदिर चला गया.

ट्रॅक्टर ने अपना काम कर दिया था. लोगो ने ज़मीन को साफ किया था. फॅक्टर से वर्कर आ गये थे जो काम मे लग गये.और रोडरोलर अपना काम कर रहा था.

मंदिर का काम देखने के बाद हम ने लोगो को बुलाया. और शहर जाकर पंडाल(मंडप)के लिए समान लाने को कहा.

हमे पता था कि 5 हेक्टर के लिए मंडप(पंडाल) शहर मे नही मिलेंगा.

इस लिए ज़िले मे जितने मंडल(तहसील) है वहाँ लोगो को भेज कर ठाकुर का नाम बता कर समान लाने को कहा.

लोगो शाम तक बंबू और पंडाल के लिए कपड़ा लेकर आ गये.

रोड रोलर अपना काम करके चले गये.

मेले के लिए जगह बनाने के बाद मेले मे झूले लगाने वाले आ गये. छोटे दुकान वालो को खबर मिलते ही खास जगह स्टॉल लगाने के लिए भाग दौड़ शुरू हो गयी.

मंदिर से गाओं तक के रास्ते पे दोनो तरफ दुकान के स्टॉल लगाने के लिए लोगो ने जगह जल्दी आकर बुक कर ली.

मेले मे काम देर से शुरू होने से हर कोई भाग दौड़ कर रहा था

रणजीतसिंघ ने अपनी फॅक्टरी के वर्कर को मेले मे झूले वालो को मदद करने को कहा ताकि उनका काम जल्दी हो जाए.

झूले वालों को मदद मिलने से वो खुश हो गये वरना उनको टेन्षन आना शुरू हो गया था कि इतने कम समय मे सब सेट कैसे करे

हम ने खेत मे लाइट का इंतज़ाम कर लिया.

रात मे लोगो ने बम्बू के लिए खड्डे बना दिए.

आज फिर मैं हवेली मे सो गया.

मेरे दिमाग़ मे सिर्फ़ काम की बातें चल रही थी. चुदाई को तो मैं भूल गया था

नेक्स्ट डे मंडप लगा दिया गया. मंदिर के पास पानी का स्टॉल और मंदिर के प्रसाद का स्टॉल लग गया.

गाओं के पास और गाओं और मंदिर के बीच मे एक पानी का स्टॉल लगाया.

नेक्स्ट डे दुकान वालों ने दुकान लगाना शुरू किया.

हम छोटा मोटा काम करने लगे.

फिर नेक्स्ट डे पानी के लिए मुँसीपालती को कहा .और साथ मे पानी ठंडा रखने के लिए मिट्टी के बर्तन लिए

हर काम अपने हिसाब से हो रहा था. एमएलए को बोल कर गाओं से मंदिर तक नयी लाइट लगाने को कहा.

मंदिर के पास एक पोलीस चोकी लगा दी. जहाँ पर गाओं के लड़को को रख दिया. गाओं मे भी एक पोलीस चोकी बना दी.

फिर ट्रॅक्टर भी तय्यार हो गये लोगो को लाने के लिए.

हम ने 5 दिन मे अपना काम कर लिया.

हमारा काम देख कर सब खुश हो गये.

गाओं मे जितने कुँए थे और खेतो मे वहाँ पर कपड़े की मदद से बाथरूम बना दिया.

आज से 2 दिन बाकी थे .मतलब 2 राते अभी बाकी थी मेला शुरू होने मे

लोगो का आना धीरे धीरे शुरू हो रहा था. हम ने खेत के पास लड़को को लगा दिया जो लोगो को रहने के लिए जगह देने लगे.

लोगो ने मंदिर तक जाने के रास्ते पर अपनी अपनी दुकान लगा दी थी.

मेले मे भी दुकान और उँचे उँचे झूले लगने का काम चल रहा था.

गाओं के लोगो को मंदिर मे प्रसाद बनाने का काम मे लगा दिया.

अब सिर्फ़ छोटा मोटा काम बाकी था.रणजीतसिंघ ने अपनी फॅक्टरी के वर्कर को मेले के काम मे ला कर अच्छा किया. जिस की वजह से काम इतनी जल्दी हो गया. हर काम मे 2 हाथ की जगह 10 हाथ लगने से काम जल्दी जल्दी होने लगा.

हम एमएलए से मिलने के लिए शहर चले गये. अभी दिन बाकी था मेला शुरू होने मे.

आज एमएलए बिज़ी था जिस से आराम करने के लिए मैं रणजीतसिंघ को अपने शहर वाले घर2 ले गया.

रणजीतसिंघ तो फार्महाउस जाना चाहते थे पर मैं ने घर2 चलने को कहा.

मैं रणजीतसिंघ के साथ अपने घर2 आ गया.

 


467

मैं ने रणजीतसिंघ को अपने घर2 एक खास काम के लिए साथ लाया था.

हम 5 दिन से साथ काम कर रहे थे जिस से रणजीतसिंघ को चुदाई करने के लिए मौका नही मिला.

आज मैं रणजीतसिंघ को एक कुवारि गंद दे कर खुश करना चाहता था जिस से रणजीतसिंघ की दोस्ती पक्की हो जाए.

रणजीतसिंघ-तुम मुझे यहाँ क्यू लेकर आए हो.

अवी-आपको यहाँ पर एक गिफ्ट देने के लिए लाया हू.

रणजीतसिंघ-गिफ्ट,मुझे गिफ्ट मे सिर्फ़ एक ही चीज़ पसंद है

अवी-मैं भी वही गिफ्ट देने वाला हू

रणजीतसिंघ-शायद तुम समझे नही

अवी-मुझे पता है आपको क्या चाहिए, आप बस थोड़ी देर यहाँ आराम कीजिए मैं आपका गिफ्ट लेकर आता हू

रणजीतसिंघ-ठीक है. देखता हू कि तुम्हारा गिफ्ट कैसा है.

फिर मैं रणजीतसिंघ के लिए एक गंद का इंतज़ाम करने के लिए चला गया.

मुझे पता था कि रणजीतसिंघ के लिए कुवारि गंद कहाँ से मिलेगी.

मैं ने सेल्स गर्ल को रणजीतसिंघ को देने का फ़ैसला किया.

मैं अपने हाथ से एक कुवारि गंद जाने दे रहा था .पर इस की भी वजह थी.

उस सेल्स गर्ल की गंद मारने का मेरे पास 2 बार मौका आया था. पहली बार मिसेज़ वरम के घर चुदाई करने के बाद नेक्स्ट डे वो मुझे मिलने वाली थी.पर बड़ी चाची की वजह से वो हो नही सका.

दूसरी बार पंकज की मामी और मिसेज़ दूबे की चुदाई करने के बाद मिली थी पर उस समय मैं चुदाई करने के हालत मे नही था.

पर नेक्स्ट डे उस से मिलने वाला था पर मेरी तबीयत खराब हो गयी.

मतलब उपर वाला भी यही चाहता है कि उसकी गंद मेरे लंड से ना खुले.

मे बी उसकी गंद मेरे लिए अनलकी साबित हो सकती है. या फिर रणजीतसिंघ को दे कर एक गंद के बदले कही सारी चूत मारने को मिल जाए.

ठाकुर की दुश्मनी जितनी दर्दनाक होती है. दोस्ती उस से भी बढ़कर होती है. ठाकुर दोस्ती के लिए जान ले भी सकते है और दे भी सकते.

मुझे रणजीतसिंघ की दोस्ती बहुत काम आ सकती है.

मैं ने उस सेल्स गर्ल को रणजीतसिंघ को देने का फ़ैसला किया.

सेल्स गर्ल ने जो मुझे अड्रेस दिया था मैं बाइक लेकर वही पहुच गया.

सेल्स गर्ल ने मेरे दिए हुए पैसो से अच्छा घर बनाया था.

मैं दोपेहर के समय आया था. अगर सेल्स गर्ल घर पर नही हुई तो रणजीतसिंघ को क्या कहूँगा.

पर उपर वाला यही चाह रहा था कि सेल्स गर्ल की गंद रणजीतसिंघ खोले

सेल्स गर्ल मुझे घर पे मिल गयी.

सेल्स गर्ल-तुम यहाँ

अवी-हाँ तुम्हें लेने के लिए आया हू

सेल्स गर्ल-उस दिन क्यू नही आए.मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी

अवी-उस दिन मैं बीमार हो गया था. आज ठीक हुआ तो तुम्हारे पास आ गया

सेल्स गर्ल-चलो आओ अंदर,मेरे घर पे कोई नही है

अवी-(इसे बहाना बना कर अपने घर ले जाना होगा. अगर मैं इसके घर के अंदर गया तो रणजीतसिंघ उधर लंड हिलाता हुआ रह जाएगा.) यहाँ नही

सेल्स गर्ल-क्यू?

अवी-तुम्हारे पड़ोसी को पता चला तो तुम्हारे लिए मुसीबत हो जाएगी.

सेल्स गर्ल-ये तो तुम ने सही कहा

अवी-चलो मेरे घर2

सेल्स गर्ल-रूको मैं तय्यार हो कर आती हू

सेल्स गर्ल तय्यार हो कर आ गयी.फिर मैं उसको लेकर अपने घर2 की तरफ चला गया.

अवी-सुनो

सेल्स गर्ल-हाँ

अवी-तुम मेरे साथ चुदाई क्यू करना चाहती हो

सेल्स गर्ल-क्या पता

अवी-तुम्हारे नीचे खुजली होती है

सेल्स गर्ल-हाँ, उस्दिन के बाद तो ज़्यादा होने लगी है

अवी-तो तुम अपनी खुजली मिटाना चाहती हो

सेल्स गर्ल-हाँ

अवी-पर आज मैं तुम्हारी खुजली नही मिटाने वाला हू

सेल्स गर्ल-फिर मुझे घर क्यूँ ले जा रहे हो

अवी-मेरा एक फ्रेंड है वो तुम्हारी खुजली मिटाएगा

सेल्स गर्ल-क्या फ्रेंड, मैं किसी और के साथ नही करने वाली

अवी-वो बहुत अच्छे है, तुम्हें उसके साथ करने मे मज़ा आएगा.

सेल्स गर्ल-तुम्हारे जैसा मज़ा आएगा

अवी-मुझसे भी ज़्यादा.

सेल्स गर्ल-सच

अवी-हाँ

सेल्स गर्ल-पर तुम्हारे फ्रेंड ने मुझे बदनाम कर दिया तो

अवी-नही करेगा. तुम मेरे जितना उस पर भरोसा कर सकती हो

सेल्स गर्ल-ठीक है. तुम्हारे कहने पर कर रही हू. पर और फ्रेंड मत लाना

अवी-मेरा सिर्फ़ एक फ्रेंड है

सेल्स गर्ल-तुम ने कहा था कि उसके साथ ज़्यादा मज़ा आएगा

अवी-हाँ,क्यू कि उसका मुझसे बड़ा है(मुझे क्या पता. मैं ने देखा कहाँ है)

सेल्स गर्ल-फिर तो मज़ा आएगा

अवी-मज़ा आएगा अगर वो जैसा कहे तुम वैसा करोगी तब

सेल्स गर्ल-तुम उसकी टेन्षन मत लो.,रूको कहीं तुम मुझे बेच तो नही रहे हो

अवी-तुम कुछ भी सोच रही हो. अगर ऐसा करना होता तो 2 महीने पहले कर देता.

सेल्स गर्ल-वो भी सही है

अवी-और हाँ उसको ना सुन ना पसंद नही है.

सेल्स गर्ल-है कौन वो

अवी-एक बहुत बड़े अमीर घर से है.

सेल्स गर्ल-क्या तुम पिछली बार की तरह इस बार भी मुझे पैसे दिलवाओगे

अवी-(आई ना औकात पे) अगर वो खुश हो गया तो शायद मिल जाए

सेल्स गर्ल-ठीक है फिर चलो जल्दी

फिर मैं सेल्स गर्ल को लेकर घर2 आ गया.

 


468

मैं सेल्स गर्ल के साथ घर2 आ गया.

रणजीतसिंघ सेल्स गर्ल को देख कर खुश हो गया.

रणजीतसिंघ-तुम्हारा...

मैं ने रणजीतसिंघ की बात पूरी नही होने दी.

अवी-आप बेडरूम मे जाकर अपना काम शुरू कीजिए.मैं यहीं रुकता हू

रणजीतसिंघ समझ गया कि मैं ने उनको क्यूँ रोका था.

रणजीतसिंघ-तुम नही आ रहे

अवी-आज आप अकेले कीजिए फिर हम मिल कर करेंगे.

रणजीतसिंघ-ठीक है.

मैं ने सेल्स गर्ल को रणजीतसिंघ के साथ बेड रूम मे भेज दिया.

रणजीतसिंघ सेल्स गर्ल को लेकर बेडरूम मे चले गये .रणजीतसिंघ ने बेडरूम का गेट खुला रखा.

मैं हॉल मे बैठ कर रणजीतसिंघ की चुदाई ख़तम होने का इंतज़ार कर रहा था.

रणजीतसिंघ और सेल्स गर्ल को बेडरूम मे गये हुए 20 मिनिट हो गये पर अभी तक सेल्स गर्ल के चीखने की आवाज़ नही आई.

अंदर क्या हो रहा था ये मुझे पता नही था. पर जान ने का मन हो रहा था.

अंदर क्या हो रहा है ये देखने के लिए बेडरूम मे चला गया.

मैं बेडरूम के गेट के पास आकर अंदर देखने लगा.

अंदर सेल्स गर्ल घोड़ी बनी हुई थी और रणजीतसिंघ के हाथ मे तेल की बॉटल थी.

रणजीतसिंघ ने बॉटल मे से थोड़ा सा तेल अपने हाथ पर लिया और उसे पहले अपने लंड पर लगाया .

रणजीतसिंघ का लंड तो मेरे जितना लंबा दिख रहा है.. एक ब्लॅक स्नेक की तरह फनफना रहा था.

मेरा लंड लेने पर लड़कियो को कितना दर्द होता है. अगर उसकी गंद मे रणजीतसिंघ का लंड जाएगा तो क्या होगा.

रणजीतसिंघ अपने काले लंबे लंड पर तेल लगा रहे थे.उसका लंड काला होने से मेरे लंड से बड़ा दिख रहा था.

अपने लंड को चिकना करने के बाद रणजीतसिंघ ने थोड़ा सा तेल अपने हाथ पर ले कर उसे सेल्स गर्ल की गंद पर लगाने लगा.

सेल्स गर्ल ने पूछा कि ये क्या कर रहे हो.

रणजीतसिंघ ने कहा कि थोड़ी देर रूको पता चल जाएगा.

रणजीतसिंघ ने तेल से सेल्स गर्ल की गांद को चिकना कर दिया.

सेल्स गर्ल बार बार पूछ रही थी कि गंद पर तेल क्यू लगा रहे हो .पर रणजीतसिंघ ने कहा कि थोड़ा इंतज़ार करो सब पता चल जाएगा.

सेल्स गर्ल की गंद और रणजीतसिंघ का लंड तेल से एक दम चमक रहे थे.

तेल लगाने के बाद रणजीतसिंघ ने बॉटल को टेबल पे रख दिया.

फिर सेल्स गर्ल की कमर को अपने दोनो हाथो से पकड़ लिया.

सेल्स गर्ल को शायद इस बात का अंदाज़ा नही था कि रणजीतसिंघ उसकी गंद मारने जा रहे है.

होगा भी कैसे उसकी बस एक बार चुदाई हुई थी.

ये सब देख कर मैं समझ गया कि रणजीतसिंघ को गंद मारने का कितना शॉक है.

इतनी अच्छी चूत छोड़ कर गंद मार रहा है.माना कि गंद कुवारि है पर पहले एक बार चूत तो मार लेते.

पर जाने दो मुझे क्या करना है बस इस गंद के बदले अगर 4 5 चूत मिल गयी तो मज़ा आ जाएगा.और सेल्स गर्ल भी चुदाई से खुश हो जाएगी जिसके लिए और मरी जा रही है.

रणजीतसिंघ ने उसकी कमर पकड़ने के बाद सेल्स गर्ल की गंद पर अपना लंड रख दिया.

सेल्स गर्ल को ये बात अब समझ आई जब रणजीतसिंघ ने अपने लंड का टोपा उसकी गंद के छेद पर रखा और उसे अंदर की ओर धकेलने लगे.

गंद मे रणजीतसिंघ का लंड जाने के बारे मे सोच कर सेल्स गर्ल घबरा गयी,

उसने अपनी गंद को इधर उधर घुमाना शुरू किया. पर इसका कोई फ़ायदा नही हो रहा था. क्यू कि रणजीतसिंघ इस खेल का पुराना खिलाड़ी था.

गंद को इधर उधर घुमाने से काम ना बनता हुआ देख कर सेल्स गर्ल रणजीतसिंघ को कह ने लगी, नही मे पीछे नही लूँगी. बहुत दर्द होगा मैं ने आज तक ऐसा कभी नही किया.

तुम्हारा लंड भी काफ़ी लंबा है. तुम समझ नही रहे बहुत दर्द होगा मेरी गंद फट जाएगी. नही नही गंद मे मत डालो.

रणजीतसिंघ अपने तरीके से समझाने लगा कि कुछ नही होगा, कोई दर्द नही होगा, दर्द ना हो इसी लिए तो मैं ने तुम्हारे पीछे इतना तेल लगाया है. ताकि तुम्हें दर्द ना हो. कुच्छ नही होगा.

फिर भी सेल्स गर्ल गंद मे लंड लेने को तय्यार नही थी. फिर रणजीतसिंघ ने दूसरा तरीका अपनाया.

सोच लो आराम से मान जाओगी तो तुम्हारा ही फ़ायदा है वरना मुझे ज़बरदस्ती करनी पड़ेगी.

सेल्स गर्ल-ऐसा मत करना ,पर मैं ने सुना है कि गंद मे लेने से दर्द होता है

रणजीतसिंघ- ऐसा कुछ नही होगा .मैं ऐसा नही होने दूँगा. तुम्हें जिसने भी ये कहा है वो झूठ बोल रहा था. मैं ने कितनो की गंद मारी पर कभी किसी को ज़्यादा दर्द नही हुआ.

इसके बाद रणजीतसिंघ ने सेल्स गर्ल को बेड का सहारा दे कर घोड़ी बना दिया और खुद ज़मीन पर खड़े हो गये.

रणजीतसिंघ-डरो मत मैं बहुत आराम आराम से अंदर डालूँगा.

तुम्हें पता भी नही चलेगा कि कब लंड अंदर चला गया.

मुझे पता था कि ये सब रणजीतसिंघ उसकी गंद मारने के लिए कह रहा है.

इतना कह कर रणजीतसिंघ ने अपने लंड का टोपा उसकी गंद के छेद पर रख दिया और लंड अंदर की ओर पुश करने लगे.

शायद तेल ज़्यादा लग गया था और उस सेल्स गर्ल की गंद का छेद भी काफ़ी टाइट था.

रणजीतसिंघ का लंड फिसल गया.

रणजीतसिंघ ने अपने दोनो हाथो को कमर से हटा कर दोनो हाथो से उसके दोनो चुतड़ों को साइड मे किया ताकि गंद का छेद थोड़ा खुल सके और लंड को अंदर जाने मे आसानी हो सके.

फिर रणजीतसिंघ दुबारा अपने टोपे को छेद मे डालने की कोशिश करने लगे. इस बार उनका टोपा अंदर चला गया. इस बात का अंदाज़ा मुझे तब पता चला जब सेल्स गर्ल दर्द के मारे कराहने लगी थी.

सेल्स गर्ल कहने लगी इसे बाहर निकाल लो बहुत दर्द हो रहा है.

रणजिटीसिंघ- अरे बस कुछ नही होगा ,बस थोड़ी देर और फिर बहुत मज़ा आएगा.

ये कह कर रणजीतसिंघ ने अपना लंड थोड़ा सा और अंदर की ओर पुश किया तो उसकी फिर चीख निकल गयी..

रणजीतसिंघ ने फिर उसको डराया अरे चीख ना मत नही तो अवी आ जाएगा. फिर तुम्हें बहुत दिक्कत हो जाएगी. अभी तो सिर्फ़ एक लंड है तुम्हारे गंद मे अवी के आने के बाद तुम्हारी गंद मे 2 लंड हो जाएँगे.

2 लंड का नाम सुनते ही उसने अपनी आवाज़ को दबा लिया पर उस के चेहरे पर दर्द के भाव सॉफ दिख रहे थे.

फिर रणजीतसिंघ ने कहा कि रूको मे ये दर्द अभी ख़तम किए देता हूँ.

ये सुनकर वो खुश हो गयी. पर मुझे पता था कि अब क्या होने वाला था.

रणजीतसिंघ ने एक ज़ोर का झटका दिया और एक ही बार मे अपना पूरा लंड उसकी गंद मे घुसा दिया.

सेल्स गर्ल की चीख निकल गयी. लेकिन उसकी आवाज़ उसके हलक मे ही रह गयी.

क्यू कि रणजीतसिंघ ने उसके मुँह पर एक दम से कपड़ा लगा दिया था. वो कुछ देर उसी पोज़िशन मे रुक गये.

लगभग एक मिनिट के बाद रणजीतसिंघ ने उसके मुँह से कपड़ा हटाया और पूछने लगे कि कुछ दर्द कम हुआ.

वो तो कुछ बोलने की हालत मे नही थी.

वो दर्द से बहाल हो गयी थी.

रंजीत सिंग उसे दर्द मे तड़फता हुआ देख कर भी नही रुके और उसकी गंद मे अपने लंड को धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.

पहले तो वो हल्के हल्के कराह रही थी पर बाद मे शायद उसे भी मज़ा आने लगा और वो खुद अपनी गंद को आगे पीछे करने लगी.

ये देख कर रणजीतसिंघ ने अपने चुदाई की गति और तेज कर दी .उनके दोनो हाथ उस की कमर पर थे. वो पूरी रफ़्तार से उस की चुदाई करने मे लगे हुए थे.

गति बढ़ने से उसको फिर दर्द होना शुरू हुआ.

थोड़ी देर दर्द के बाद वो भी मज़ा लेने लगी.

इनकी लंबी चुदाई के बाद वो दोनो अपने अपने चरम सीमा पर थे.

बाहर खड़ा मैं भी सोच रहा था कि खास रणजीतसिंघ की जगह मैं होता तो,

जाने दो किसी और की मार लूँगा.

रणजीतसिंघ सेल्स गर्ल की गंद मारते गये.

रणजीतसिंघ का काला लंबा लंड काफ़ी स्पीड से उसके गंद मे अंदर बाहर हो रहा था.

जब भी रणजीतसिंघ उसकी गंद मे धक्का मारते तो एक दम से धप की आवाज़ होती .

रणजीतसिंघ अभी भी फुल स्पीड मे उस की बजाने मे लगे हुए थे. फिर एक दम से रणजीतसिंघ ने एक ज़ोर से धक्का दिया और उस की गंद के अंदर ही रुक गये और अपना सारा पानी उसकी गंद के अंदर ही डाल दिया.

उसके बाद दोनो निढाल हो कर बिस्तर पर ऐसे गिर गये जैसे उनके शरीर मे जान ही ना हो

 
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रणजीतसिंघ ने उसकी जोरदार चुदाई की .वो पूरी तरह से थक गयी थी.

फिर रणजीतसिंघ ने उसकी गंद से लंड बाहर निकाला . लंड पर थोड़ा खून लगा हुआ था.

रणजीतसिंघ ने अपने लंड को साफ किया .और कपड़े पहन कर मेरे पास आ गये.

रणजीतसिंघ-मज़ा आ गया

अवी-आपको मज़ा आया इस से ज़्यादा मुझे क्या चाहिए

रणजीतसिंघ-तुम भी अंदर क्यू नही आए. साथ मे मज़ा करते

अवी-वो आपका गिफ्ट था. उस पर पहला हक आपका था

रणजीतसिंघ-मतलब तुम ने उसके साथ अभी तक कुछ नही किया.

अवी-मैने तो उसको हाथ भी नही लगाया.

रणजीतसिंघ-तुम ने मेरे लिए उसकी चुदाई नही की

अवी-हाँ.सोचा पहले दोस्त को करने दिया जाए फिर किसी दिन अगर कोई मिली तो मैं कर लूँगा. मुझे तो अब लग रहा है कि आपने जैसे उसकी चुदाई की उसके बाद वो अब मुझे हाथ भी नही लगाने देंगी. देखते है कोई दूसरी मिलती है या नही.

रणजीतसिंघ-मान गये ,तुम ने मुझे दोस्त बना कर इतना अच्छा गिफ्ट दिया. तुम ने मेरे लिए उसकी चुदाई नही की. तुम बस अब देखते जाओ कि मैं क्या करता हू.अपने दोस्त के लिए

अवी-(मैं यही तो चाह रहा था) कुछ करने की ज़रूरत नही है बस आपने मुझे दोस्त माना यही मेरे लिए सब कुछ है

रणजीतसिंघ-ऐसे कैसे ज़रूरत नही है. तुम बस अब मज़ा करना. तुम्हें मैं मेले मे देखो कैसे मज़े करवाता हू

अवी-फिर तो देखना होगा.चलिए अब हमे चलना चाहिए.

रणजीतसिंघ-और इसका क्या करना है

अवी-वो मैं देख लूँगा.

मैं ने उस सेल्स गर्ल को आराम करने को कहा और रणजीतसिंघ के साथ एमएलए से मिलने चला गया.

आज का पूरा काम ख़तम करने के बाद घर2 जाकर उस सेल्स गर्ल को कुछ पैसे दिए और उसे उसके घर छोड़ कर मैं रणजीतसिंघ के साथ गाओं आ गया.

वो खुश थी अपनी चुदाई से. उसे बस चुदाई चाहिए थी. मैं ने उसे कहा कि जल्द से जल्द शादी कर लो ताकि तुम्हारी चुदाई रोज हो.

सेल्स गर्ल ने मना किया पर मेरे समझाने के बाद वो मान गयी.

सेल्स गर्ल को उसके घर छोड़ कर हम वापस गाओं आ गये.

हमारी मंदिर और मेले की पूरी तय्यारी हो चुकी थी बस मेला शुरू होने का इंतज़ार कर रहा था.

रणजीतसिंघ आज बहुत खुश था क्यू कि मैं ने उसे कुवारि गंद दी थी.ऐसा नही था कि रणजीतसिंघ पहली बार कुवारि गंद मार रहा था. उसने तो कितनो की गंद मारी थी.

रणजीतसिंघ इस लिए खुश था कि उसके दोस्त ने उसके किए एक कुवारि गंद कुरबान कर दी.

रणजीतसिंघ ने मुझे आज दावत पर बुलाया. वैसे तो 5 दिन से मैं रात का खाना ठाकुर की हवेली मे खा रहा था.पर आज रणजीतसिंघ ने खास दावत दी थी.

मैं थोड़ी देर के लिए अपने घर चला गया. बड़ी चाची को बताया कि मैं आज हवेली मे रुकने वाला हू.

बड़ी चाची ने मुझे इजाज़त तो दे दी पर बड़ी चाची कुछ परेशान थी. मैं ने इस बात पर ध्यान नही दिया.

मैं शाम को ठाकुर की हवेली मे पहुँच गया.

आज रणजीतसिंघ ने कहा था कि वो मुझे मेले मे मज़ा करवाएगा. जिस से मैं ने 1 महीने तक लगेंगे उतने कॉंडम खरीद लिए .

मैं ने तो सोचा था कि कॉंडम हमेशा अपने साथ रखूँगा.पर हवेली मे कॉंडम ले जाना ख़तरे से खाली नही था.

मैं हवेली पहोच गया.

हमारी दावत शुरू हो गयी.खाना खाते हुए 2 लोग मुझे देख रहे थे.

एक थी ठकुराइन और दूसरी थी पायल.

पायल,ठाकुर की बेटी, मैं 5 दिन से हवेली मे आ रहा था पर मैं ने एक भी बार पायल से बात नही की. मुझे डर था कि कही ठाकुर ने देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी.

कभी कभी तो मुझे ऐसा लगा कि पायल मुझसे बात करना चाहती है .पर मैं ने उसपे ध्यान नही दिया.

ठकुराइन की बात मुझे समझ मे नही आई कि घर मे इतने नौकर है फिर भी सुबह ठकुराइन मुझे उठाने क्यू आती है.

मैं ने ठकुराइन कोई काम करते हुए नही देखा .फिर भी मुझे उठाने के लिए वो खुद क्यू मेरे कमरे मे आ जाती.

कहीं बड़ी चाची ने तो नही कहा कि मेरा ख़याल रखे.

बड़ी चाची ऐसा नही कह सकती. उनको तो डर है कि मैं हवेली जाकर बिगड़ ना जाउ

फिर क्या बात हो सकती है. जाने दो मुझे क्या मैं चुप चाप खाना खाने लगा.

ठाकुर की फॅमिली के साथ मेरा खाना खाना कुवरसिंघ को अच्छा नही लग रहा था.

जब मैं खाना खा रहा होता तब कुवरसिंघ अपने कमरे मे होता.

खाना खाने के बाद रणजीतसिंघ मुझे अपने साथ अपने खास कमरे मे ले गये.

अवी-ये किसका कमरा है

रणजीतसिंघ-ये मेरा खास कमरा है.

अवी-क्या खास है इस कमरे मे

रणजीतसिंघ-मेरी प्यारी चीज़े, मेरे शिकार किए हुए जानवरों के सर है, याने कि यहाँ मेरी यादे है.

अवी-फिर तो ये कमरा बहुत खास है

रणजीतसिंघ-हाँ, और इस कमरे को मैं ने अपने छोटे भाई को भी नही दिखाया पर मैं तुम्हें दिखा रहा हू

अवी-आपने मुझे अपना खास कमरा दिखाया उसके लिए शुक्रिया

फिर रणजीतसिंघ मुझे पकाता गया. वो अपने किस्से बता कर मेरा दिमाग़ खराब कर रहा था.

मैं रणजीतसिंघ की बकवास बातें सुनता रहा.

मुझ मे इतनी हिम्मत नही थी कि मैं रणजीतसिंघ को जाने के लिए बोलू

रणजीतसिंघ मुझे पकाता गया. फिर रणजीतसिंघ ने मुझे सोने के लिए कहा.

चलो अच्छा हुआ कि रणजीतसिंघ ने खुद मुझे जाने के लिए कहा.

मैं जल्दी से अपने कमरे मे आकर बेड पर लेट गया.

और सोचने लगा कि मेले मे क्या होगा.

क्या मुझे मेले मे मज़ा आएगा.

मेले मे मेरे सामने वो सब होगी जिसकी मैं ने चुदाई की है.

मेरे सामने रिया ,रति,मंगला काकी, होगी. रिया के साथ तो मैं ने बोलना बंद कर दिया है वो तो मुझ पर गुस्सा होगी.

मेले मे मोना भी आ सकती है साथ मे कमला काकी भी होगी. कमला काकी उसकी तो मैं आम के बगीचे मे लूँगा.

किरण भी होगी.पर वो अपने पति के साथ होगी. मेले के लिए उसका पति ज़रूर आएगा.

स्वेता दीदी और सीतल भी होगी पर उन्होने तो मना किया है. कविता और लीना भी होगी.पर वो अभी बच्ची है उनके साथ बार बार करना ठीक नही होगा.

पूजा बुआ और नीता बुआ तो बिज़ी रहेगी. चाची ...

रानी भी आने वाली है पर कोमल उसको अकेला नही छोड़ेगी.

शहर से भी मुझसे चुदाई की हुई औरते आ सकती है.पर उन से अब करके क्या करूँगा.

मैं ने तो सोच लिया है मेले मे जो नयी लड़किया और औरते आएगी दूसरे गाओं से दूसरे शहर से उनका शिकार करूँगा.

साथ मे अगर जिस की चुदाई मैं कर चुका हू वो भी मज़ा लेना चाहती है तो वो भी लूँगा.पर सिर्फ़ थोड़ा सा.

मेले मे तो पूरी तरह से तय्यार रहना होगा. कभी भी कोई भी मिल सकता है.

एक काम करता हूँ सारा और ज़ोया(डॉक्टर ,जिनके हॉस्पिटल मे चाची को बच्चा हुआ था) इन से सेक्स बढ़ाने वाली मेडिसिन माँग लेता हूँ. कल स्वेता दीदी आ रही है उसके साथ भेजने को बोलता हू

कल का दिन जाने के बाद मुझे सोने भी नही मिलेगा. चलो मैं सो जाता हू.

 


470

मैं 1 घंटे से सोने की कोशिस कर रहा था पर मुझे नींद नही आ रही थी.

फिर मैं सोचने लगा कि मेले मे मुझे क्या करना है. क्यू कि मेले मे जो काम करना था वो कर दिया था.और जो काम चलेगा उस पर लड़को को रख दिया था. मतलब मैं मस्ती करने के लिए खाली रहूँगा.

वैसे जो लड़किया और औरत मेले मे दूसरे गाओं और शहर से आएगी उनके साथ मस्ती करूँगा.

सोचते हुए मेरी आँखे लग गयी. मतलब अभी नींद कच्ची थी. हवेली मे सारे लोग शायद सो गये थे.

अभी मेरी आँखे लगी थी कि मुझे मेरे कमरे का गेट खुलने की आवाज़ आई.

मैं गेट तो अंदर से बंद किया था. शायद जो गेट खोल रहा था उसे पता है कि गेट कैसे खोला जाता है. या फिर उसके पास गेट की चाबी होगी.

पर जो कोई है वो इस समय सबके सो जाने के बाद यहाँ क्यू आ रहा है.

इतनी रात को सब के सो जाने के बाद मेरे कमरे मे आना ,फिर तो सिर्फ़ 1 ही काम हो सकता है.

पर है कौन .मैं सोने का नाटक करता हू ,देखता हूँ जो भी इस समय मेरे कमरे मे आ रहा है वो क्या करने आ रहा है.

मेरे कमरे का गेट खुल गया.वो शख्स अंदर आ गया और गेट बंद कर दिया.

ये तो कोई औरत दिख रही है. मतलब चुदाई करने आई है. पर ये है कौन,चलो देखता हूँ वो क्या करती है.

वो औरत धीरे से मेरे पास आ गयी. और मेरे कमरे की लाइट ऑन कर दी .और मुझे जगाया.

मैं ने नींद से उठने का नाटक किया. मैं ने आँखे खोल कर देखा. ये तो ठकुराइन है. क्या सुबह हो गयी.

मैं ने घड़ी की तरफ देखा, अभी तो रात के 11.00 बज रहे है. फिर ठकुराइन इतनी जल्दी क्यू मुझे उठाने आई.

मैं कुछ बोलता उस से पहले ठकुराइन मेरे लंड पर बैठ गयी. अभी मेरा लंड खड़ा नही हुआ था .

मैं कुछ बोलने वाला था कि ठकुराइन ने मुझे ऐसा कहा कि मैं शॉक्ड हो गया.

ठकुराइन-जल्दी से अपने लंड को खड़ा करो,

अवी-क्या कहा आपने

ठकुराइन-बहरे हो क्या,

एक तो ये ठकुराइन है. इसकी चुदाई करना मतलब...

अगर इसने जैसा कहा वैसा नही किया तो ये कुछ भी कर सकती है और अगर ये बात ठाकुर को पता चली तो मैं गया काम से

ठाकुर से ज़्यादा ठकुराइन से डर लग रहा था.

अवी-जी नही

ठकुराइन-फिर जल्दी अपने लंड को खड़ा कर

अवी-पर वो .,मैं कैसे आपके साथ..

ठकुराइन-ज़्यादा भोला मत बन पंडिताइन ने मुझे सब बताया है कि तूने उसके साथ क्या किया है.

अवी-मैं ने कुछ भी नही किया.

ठकुराइन-जितना किया उतना काफ़ी है. चल कर लंड को खड़ा, मेरी चूत मे खुजली हो रही है.

अवी-लेकिन आपके साथ...ठाकुर

ठकुराइन-उस ठाकुर की ऐसी की तैसी. वो बूढ़ा मेरी आग शांत नही करता,चल करना लंड खड़ा

अवी-(तो ठकुराइन प्यासी है. ठाकुर से 20 साल छोटी है,ठाकुर ठकुराइन की आग शांत नही कर पाता होगा.ठकुराइन को लंड की ज़रूरत है. मतलब ठकुराइन मेरे हाथो मे होगी) करता हूँ पर पहले ये बताइए कि आप मेरे साथ चुदाई क्यू करना चाहती है.

ठकुराइन-कहा ना खुजली मिटानी है

अवी-खुजली तो किसी और के साथ भी मिटाई जा सकती है

ठकुराइन-मैं ठकुराइन हू मैं क्या किसी के साथ भी करूँगी क्या. तुम सुमन के भतीजे हो इस लिए तुम्हारे साथ कर रही हू

अवी-मुझसे अच्छे तो आपके बेटे है उनके साथ कीजिए

ठकुराइन-उनके साथ करूँगी तो वो मुझे रंडी बना कर रखेंगे और मेरी बेटी को इस हवेली से कुछ नही मिलेगा.

अवी-ठीक है. पर आप को ऐसा क्यू लगता है कि मैं आपकी खुजली शांत कर पाउन्गा

ठकुराइन-5 दिन से हर सुबह तुम्हारा लंड देख रही हू,

अवी-(तभी सोचु ठकुराइन मुझे उठाने क्यू आती है) वो भी ठीक है. पर मैं ने भी आपको रंडी बना कर रखा तो

ठकुराइन-नही रख सकते

अवी-क्यू नही रख सकता

ठकुराइन-बात बदलते हुए. तुम्हें कहा ना लंड खड़ा करो

अवी-लंड तो खड़ा है.

अपनी गंद पर लंड महसुसकरके

ठकुराइन-हाँ लंड तो खड़ा है.अब क्या खड़े रखोगे की अंदर भी डालोगे

अवी-डालता हूँ पर कपड़े तो निकालो

ठकुराइन-मुझे हुकुम देने की गुस्ताख़ी मत करना. जितना कहा है उतना करो.भूलो मत मैं ठकुराइन हूँ

अवी-ग़लती हो गयी.

ठकुराइन-पहली ग़लती है इस लिए माफ़ कर रही हूँ

अवी-(चुदाई करने आई है और इतने नखरे कर रही है. आज तो तुम्हारे हिसाब से चुदाई करूँगा पर बाद मे तुम्हारी गंद लाल कर दूँगा.) दुबारा ऐसा नही होगा

ठकुराइन-ठीक है ,चल लाइट बंद कर और अपने कपड़े निकाल. मैं अपने निकालती हू

अवी-क्या लाइट बंद करना ज़रूरी है.

ठकुराइन-हाँ, किसी ने लाइट जलती देखी तो गड़बड़ हो जाएगी

अवी-क्या कपड़े निकालने तक शुरू नही रख सकते

ठकुराइन-क्यू रखना है

अवी-आपका शानदार बदन देखना है

ठकुराइन-मुझे देखना है.चलो ठीक है पर चुदाई से पहले लाइट बंद कर देना

अवी-जी

ठकुराइन-निकालो अपने कपड़े

अवी-आप मेरे उपर से उठेंगी तभी निकालूँगा ना

ठकुराइन-ज़्यादा होशियार मत बनो.

ठकुराइन मेरे उपर से अलग हो कर खड़ी हो गयी.

मैं ने जल्दी से अपने कपड़े निकाल दिए. मुझे आराम से बैठ कर ठकुराइन का बदन देखना था

मेरे नंगे होते ही ठकुराइन मेरे लंड को देखने लगी

ठकुराइन-इतनी जल्दी है चुदाई करने के लिए

अवी-हाँ, आप की चुदाई करने को मिलेंगी इस लिए मैं ने जल्दी कपड़े निकाल दिए.

ठकुराइन-तो ये बात है. तुम मे एक बात अच्छी है

अवी-मेरा लंड,मोटा और लंबा है

ठकुराइन-वो तो ठाकुर का भी है

अवी-फिर क्या खास बात है

ठकुराइन-तुम्हारा लंड गोरा और चिकना है. ठाकुर का लंड काला है.

अवी-तो आपको गोरा लंड पसंद है

ठकुराइन-हाँ

अवी-फिर आप देर क्यू कर रही है.

ठकुराइन-वो तो मैं तुम्हारा लंड देख रही थी.

अवी-बस देखना है या अंदर लेना है

ठकुराइन-अंदर लेना है

और ठकुराइन अपने कपड़े निकालने लगी.

क्या बूब्स थे ठकुराइन के, ठाकुर ने बहुत मालिश की है ठकुराइन के बूब्स की ,इसी लिए इतने बड़े हो गये.

पके हुए आम की तरह थे ठकुराइन के बूब्स

ठकुराइन के बूब्स को देख कर ऐसा लग रहा था कि इन को बस चूस्ता जाउ

ठकुराइन उपर से नंगी हो गयी पर अपना पेटिकोट नही निकाला. हाँ अपनी पैंटी निकाल दी थी.

मुझे लगा ठकुराइन अब पेटिकोट निकालेंगी पर ठकुराइन ने पहले लाइट बंद कर दी और फिर पेटिकोट निकाल दिया.

ठकुराइन की चूत देखने को नही मिली.

मैं ठकुराइन को कुछ बोल भी नही सकता था

 


471

ठकुराइन ने लाइट बंद करके अपना पेटिकोट निकाल दिया.

ठकुराइन की चूत और गंद देखने को नही मिली.

ठकुराइन की चूत और गांद देखने लायक होगी.

गाओं मे लोग छुप छुप के ठकुराइन को देख कर अपना लंड मसल्ते है.

ठकुराइन और ठकुराइन की बेटी पायल साथ मे देखो तो बिजलिया गिरा देती थी.

पूरी ठाकुर फॅमिली का कोई जवाब नही था. ठकुराइन की मेचुरिटी, पायल की वर्जिनिटी, कामिनी के असेट, रेशमा का भरता हुआ बदन,सब एक से बढ़कर एक थे.

अभी तो ठकुराइन का रस पीने का चान्स मिला है.किस्मत मे लिखा होगा तो पायल भी मिल जाएगी.

ठकुराइन के बूब्स तो देखने को मिले थे ,नेक्स्ट टाइम पूरा नंगा देख लूँगा.

पेटिकोट निकालने के बाद हवेली के एक अंधेरे कमरे मे हवेली की ठकुराइन अपने से आधे उमर के लड़के के साथ नंगी खड़ी थी.

ये सोच कर मेरा लंड झटके मारने लगा.

गाओं की ठकुराइन की चूत मे मेरा लंड ,गाओं की ठकुराइन की ,आज चुदाई का मज़ा आ जाएगा.

किसी की हिम्मत नही है ठकुराइन की तरफ आँखे उठा कर देके ,हाँ छुप छुप कर आहे भरते हैं लोग ,वो ठकुराइन मेरे नीचे होगी.

लेकिन ठकुराइन की चूत देखने को नही मिली.मिल जाती तो मज़ा और बढ़ जाता पर कोई बात नही मारने को तो मिल रही है.

ठकुराइन नंगी हो जाने के बाद बेड पर लेट गयी .ठकुराइन मेरी बाजू मे लेट गयी .

मैं और ठकुराइन दोनो नंगे बेड पे इस तरह लेटेंगे कभी सोचा नही था. और जो सोचा नही जाता उसका मज़ा अलग होता है.

ठकुराइन के लेटते ही मैं अपनी जगह से उठ गया .और सोचने लगा कि ठकुराइन के साथ कहाँ से शुरू करू .

ठकुराइन के साथ कैसा करना होगा ,क्या नही करना होगा,यही सोच रहा था कि ठकुराइन ने मुझे नींद से जगाया.

ठकुराइन-ऐसे बैठ रहोगे या मेरे उपर भी आओगे

अवी-जी आया

ठकुराइन-कभी किसी के साथ किया है

अवी-(अगर चुदाई के समय कुछ गड़बड़ हो गयी तो ठकुराइन मेरी जान ले लेगी. ठकुराइन को बोल देता हू कि पहली बार कर रहा हू .अगर गड़बड़ हो गयी तो बोल दूँगा मेरा पहली बार था) नही पर देखा है

ठकुराइन-मतलब तुम...ठीक है,मैं जैसा कहूँ वैसा करना( कुंआरा लंड ,मज़ा आ जाएगा.)

अवी-जी, जैसा आप कहेंगी वैसा करूँगा

ठकुराइन-पहले मेरी चूत चाटो और फिर बूब्स दबाना,

अवी-और किस

ठकुराइन-जितना कहा है उतना करो ,मुझसे सवाल मत पूछना कभी,और हाँ चुदाई करते समय भूलना मत कि मैं इस गाओं की ठकुराइन हू. मुझे अगर पसंद नही आया तो , तुम समझदार हो तुम समझ जाओगे कि मैं क्या कर सकती हू...

अवी-जी , समझ गया

ठकुराइन-अभी तक खड़े हो ,जो कहा है वो शुरू करो

जैसा मैं ने सोचा है वैसा ही हुआ,अगर मैं ने अपने हिसाब से किया तो ठकुराइन कुछ भी कर सकती है

ठकुराइन भले मेरे सामने नंगी लेटी है पर वो जब चाहे मुझे पूरे गाओं के सामने नंगा कर सकती है.

आज ठकुराइन को मेरे साथ खेलने देता हू ,फिर मैं ठकुराइन के साथ खेलूँगा.

जैसा ठकुराइन ने कहा था.मैं ने वैसा करने का फ़ैसला किया.मैं ठकुराइन के पैरो के बीच आ गया.

ठकुराइन ने मेरे लिए पहले से जगह बना कर रखी थी.

ठकुराइन की बड़ी बड़ी जांघों के बीच मे आकर मुझे ठकुराइन की चूत की गर्मी का पता चल रहा था.

मैं ने हाथ लगा कर ठकुराइन की चूत को देखा. ठकुराइन की चूत फूली हुई थी.लेकिन कमाल की थी. टाइट भी लग रही थी.और खुली हुई लग रही थी. चिकनी और गीली, रस से भरपूर ,आज तो ठकुराइन की चूत मेरे लंड को दीवाना बना देगी.

ठकुराइन की चूत पर बाल नही थे. पर चूत का मुँह छोटा था पर अंदर से शायद बड़ा होगा.नही हुआ तो ,क्या हुआ, मैं बना लूँगा.

ठकुराइन ने कहा था कि ठाकुर का लंड मेरे जितना है पर काला है. मतलब इस की चूत मे मेरा लंड आराम से जाएगा.

पर ठकुराइन की चूत टाइट लग रही थी मतलब ठाकुर ने 4 5 साल से ठकुराइन की चूत मे लंड नही डाला है.जिसकी वजह से चूत टाइट हो गयी.

पर क्या पता ठकुराइन ने कोई और लंड ढूँढ लिया हो और आज मेरा लंड ले रही है. नही ठकुराइन किसी से भी चुदाई नही करेंगी.

मैं ने ठकुराइन की चूत को हाथ से मसल दिया.और मसलता रहा ताकि वो गरम हो जाए.

हुआ भी ऐसा चूत को मसल्ने से ठकुराइन के मुँह से शीष्कारी निकल गयी.

ठकुराइन तो पूरी गरम हो गयी. हाथ से मसल्ने से शीष्कारी ले रही है.अगर चाटूँगा तो ठकुराइन का क्या होगा.

ठकुराइन को ज़्यादा इंतज़ार करवाना अच्छा नही होगा.

मैं ने अपना काम शुरू कर दिया.

मैं ने पहले उनकी नाभि पे किस किया. ऐसा करते ठकुराइन के बदन मे करेंट दौड़ गया.

नाभि पर किस करने के लिए ठकुराइन ने नही कहा था. मैं जल्दी से नीचे जाकर उनकी चूत के उपर के किस करने लगा.

ठकुराइन की चूत पे किस करने से मेरा भी बुरा हाल हो गया.ठकुराइन तो पूरी गरम हो कर आई थी. उनकी चूत की गर्माहट से मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरे होंठ ना जल जाए.

और जल भी गये तो ,ऐसे जलने मे अपना ही एक अलग मज़ा होता है.

मैं ने ठकुराइन की चूत को ठंडा करने के लिए धीरे से उनकी चूत फुक मारी.

ऐसा करने से ठकुराइन की आग ठंडी होने की बजाय और बढ़ गयी. ठकुराइन इतनी एग्ज़ाइट हो गयी कि एक आआअहह के साथ अपनी गरमी निकालने की कोशिस कर रही थी.

मैं ने फुक मारने के बाद उनकी चूत को चाटने लगा.ठकुराइन तो शिसकारियाँ लेती गयी.

आअहह आआहह……म्म्म्मlमम……मैं मर गयी....आआअहह ...मैं ठकुराइन की चूत ज़ोर ज़ोर से चूस ने लगा .

ठकुराइन की चूत ने मेरी जीभ का वेलकम अपने होंठ खोल कर किया था.जिस से हम दोनो को मज़ा आने लगा.

मैं ठकुराइन की चूत की गर्मी अपनी जीभ से महसूस कर रहा था, और ठकुराइन आआहह…..आअहह…… की आवाज़ के साथ कह रही थी कि रूको मत करते जाउ, चूस्ते जाओ ... मुझे प्यासी मत छोड़ ना..पूरी रात चूस्ते रहो, ....आआहह...

तुमने ये सब कहाँ से सीखा आआआहह…आआअहह….म्म्म्म्म….………… ऊओह……ओह्ह्ह.. ….आआहह………… आअहह…हह…बहुत माअज़ाअ एयेए राहा हाई…चूस्ते ही रहूऊओ…….

ठकुराइन को मज़ा आ रहा था मतलब मैं सेफ था.

मैं तो सब से बड़ी मुसीबत मे फस गया था.

ठकुराइन की चुदाई मैं अपने तरीके से नही कर सकता था. और कर भी ली तो ठकुराइन मेरे साथ क्या क्या कर सकती ये मैं सोच नही सकता.

अगर मैं ने सोच भी लिया कि ठकुराइन की जोरदार चुदाई करके अच्छा सबक सिखा दूं. पर ऐसा करने से ठकुराइन तो मेरी पूरी फॅमिली को बर्बाद कर देंगी.

जब तक मैं यहाँ हू तब तक ठकुराइन मेरे साथ चुदाई करेगी. मतलब और 25 दिन

ऐसे तो मैं मेले का मज़ा नही ले पाउन्गा .मुझे इसके बारे मे सोचना होगा.

पर पहले ठकुराइन की चुदाई करनी होगी.

मैं ठकुराइन की चूत को चूसने लगा.

मेरे जीभ के सामने अच्छे अच्छे अपना पानी छोड़ देते है फिर ठकुराइन क्या चीज़ थी.

ठकुराइन भी मेरे मुँह मे झड गयी

ठकुराइन अपना पानी निकाल कर ठंडी पड़ गयी पर गर्मी अभी बाकी थी.

चूत तो चूस ली अब क्या करना था. चूत चूसने के बाद बूब्स चूसना ठीक नही होता.

पर बाद मे क्या करना है ये ठकुराइन ने नही बताया था.और मैं खुद कुछ नही करने वाला था.

मैं ने ठकुराइन की चूत का पानी पी लिया और अपना सर चूत के उपर से निकाल कर ठकुराइन की तरफ देखने लगा.

मुझे कुछ ना करते हुए देख कर ठकुराइन ने मुझे आगे बढ़ने को कहा

ठकुराइन- अब सहा नही जा रहा ,डाल दो ना, बुझा दो मेरी प्यास और रुकना मत...और एक बार मे पूरा अंदर डाल देना. 5 साल से चूत मे दर्द नही हुआ. आज दर्द महसूस करना चाहती हू

अवी- जैसा आपने कहा है वैसा ही करूँगा.

ठकुराइन 5 साल से प्यासी है और उनकी प्यास शायद मैं ने बढ़ाई है.

ठकुराइन रोज मुझे उठाने आ रही थी. और सुबह मेरा लंड खड़ा हो जाता है और उसको देख कर अपनी खुजली पे कंट्रोल नही कर पाई.

लेकिन ठकुराइन पहली औरत थी जो लंड को पहली बार पूरा अंदर डालने को कह रही थी.

मैं ने जितनों के साथ चुदाई की वो मेरा लंड देख कर डर के मारे मुझे कहती थी कि आराम से करना.

पर ठकुराइन तो...लगता है ठाकुर के लंड की याद आ रही है. ठाकुर ठकुराइन को दर्द दे कर चुदाई करते थे.

मुझे क्या था. मैं तो इसके लिए तय्यार था.

ठकुराइन ने क्या कहा एक बार मे पूरा लंड अंदर डालना और रुकना मत

मैं लंड ठकुराइन की चूत पे रख कर रगड़ने लगा.

लंड अंदर ना डालने से ठकुराइन थोड़ा गुस्सा हो गयी

ठकुराइन-क्या कर रहे हो, तड़पाना बंद करो और डाल दो अंदर…

ठकुराइन तो डेंजर है.

मैं ने अपना लंड ठकुराइन की चूत पर रख के थोड़ा धक्का मारा, पर वो अंदर नही गया, क्यू कि मेरा लंड बोहोत मोटा है,या फिर ठकुराइन की चूत 5 साल मे टाइट हो गयी है.

पर मैं ये क्या कर रहा था ठकुराइन ने कहा था कि लंड एक बार मे पूरा अंदर डालो

मैं ने पूरी ताक़त लगाकर एक जोरदार झटका मारा और पूरा लंड ठकुराइन की चूत के अंदर चला गया,

ठकुराइन ज़ोर से चीख पड़ी…….आआआहह….आआअहह….मर गयी मैं तो….फाड़ दीई...मुझे अपनी बाहों मे लेलो और चोदते रहो…रूको मत….आआहह...मार डाला...

जैसा ठकुराइन कह रही थी मैं ने वैसा ही किया.

लंड अंदर लेके ठकुराइन ने रुकने को नही कहा बल्कि धकके मारने को कहा.

इस से पता चल रहा था कि ठकुराइन को लंड की कितनी ज़रूरत है.

मैं ने ठकुराइन के बूब्स को हाथो मे पकड़ लिया.

पहली बार ठकुराइन के बूब्स को हाथ लगाया था.

ठकुराइन के बूब्स क्या बताऊ कितने नरम थे कि मैं बता नही सकता…

मैं तो उनको हाथो मे पकड़ दबाना चाह रहा था पर बूब्स इतने नरम थे कि मैं उनको चूस ने लगा.…उनके निपल को जीभ से चाटने लगा.

कोई भी ठकुराइन के बूब्स को टच करेगा तो चूसे बिना नही रहेगा.

उनके बूब्स को मसल्ने और चूसने मे मज़ा आ रहा था. मेरा हाथ उनकी जांघों पे पे घूम रहा था और दूसरा हाथ उनके बूब पर था

अगर ठकुराइन मेरे हिसाब से चुदाई करती तो उनको इतना मज़ा देता कि वैसा मज़ा उनको कभी मिला ना हो

ये मैं क्या कर रहा हू ,ठकुराइन ने तो लंड डालने के बाद रुकने से मना किया था.

मैं ने बूब्स को छोड़ दिया और चूत पर फोकस करने लगा.

अब मेरा लंड और ठकुराइन की चूत आपस मे घिस रहे थे,

ठकुराइन की चूत से लंड बाहर निकाल कर फिर एक झटके मे लंड अंदर डाल दिया.

आअहह....आईसीए ....ही करते रहो....और्र्रर मरूव...

ठकुराइन चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थी और गाओं की ठकुराइन को चोद रहा हू ये सोच कर ही मैं जन्नत जैसा मज़ा ले रहा था

लग रहा था कि जैसे लंड किसी गरम ट्यूब मे रख दिया हो…

आआहह. . तुम कमाल हो. . . .

अया . . . .अब मैं तुमसे हर दिन चुदवाउन्गी. . .

ठकुराइन के मुँह से ऐसी बाते सुन के मैने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी.

अब लंबे धक्के मारने के बाद मैं ने गति पे फोकस किया.

ठकुराइन का बदन मेरे धक्को से टूट रहा था.

मैं भी कोई कमी नही रख रहा था. ठकुराइन की चूत को पूरा ठंडा करना चाहता था.

मैं ठकुराइन के पैरो को अड्जस्ट करके धक्के मारता गया.

ठकुराइन के मुँह से और गंदी बाते निकलने लगी अयाया. . . फाड़ दो मेरी चूत को

मैं चूत मे जोरदार धक्के मारने लगा.ठकुराइन ऐसी ही चुदाई करना चाहती थी.और हम जैसा चाहे वैसा मिले तो क्या कहना.

ठकुराइन मेरे धक्के के साथ ज़ोर ज़ोर से शीष्कारिया ले रही थी.

आआहह. . . तुम कमाल हो. . . .अया . . . .अब मैं तुमसे हर दिन चुदवाउन्गी. . .

एक ही बात ठकुराइन बार बार बोल रही थी. लेकिन कुछ भी हो शीष्कारिया सुनकर मैं और ज़ोर से धक्के मारने लगा.

ना मैं ठकुराइन को कुछ बोल सकता था कि पोज़िशन बदलने के लिए

जिस से कभी मैं अड्जस्ट हो जाता और धक्के मारता तो कभी ठकुराइन के पैरो को अड्जस्ट कर देता.

मैं पागलो की तरह धक्के मारता गया. और ठकुराइन पानी पे पानी छोड़ रही थी.

ठकुराइन ने 2 बार पानी निकाला लेकिन मैं इतनी जल्दी ठकुराइन की चूत को छोड़ूँगा नही.

ठकुराइन तो ऐसी ही चुदाई के बारे मे सोच रही थी.

ठकुराइन जितनी ज़्यादा ज़ोर से शीष्कारिया लेती मैं उतने ही ज़ोर से धक्के मारता

हमारी चुदाई लंबी चल रही थी.30 मिनिट मे ठकुराइन 3 बार झाड़ चुकी थी और मैं झड़ने वाला था .

ठकुराइन ने मुझे ये नही बताया था कि मैं अपना वीर्य कहाँ डालु.

मैं इस हालत मे था कि रुक भी नही सकता था.मैं ने अपना वीर्य चूत मे डालने का फ़ैसला किया. बाद मे जो होगा वो देखा जाएगा

मैं ने फिर से अपनी गति बढ़ाई…और एक जोरदार करेंट मेरे शरीर मे दौड़ गया और मैं ने ठकुराइन की चूत मे अपना वीर्य डाल दिया.

हम दोनो बुरी तरह से थक कर चूर हो चुके थे, मेरा तो सारा खाना हजम हो गया,

रणजीतसिंघ ने मुझे खाने पे बुलाया था .मुझे खाने के साथ एक चूत भी मिल गयी

उस चूत का रस पी कर पेट भर गया.

 


472

ठकुराइन की चुदाई करने के बाद मैं थक गया था.

अपना पानी ठकुराइन की चूत मे डालने के बाद मैं ठकुराइन के उपर गिर गया. और हाँफने लगा.

ठकुराइन भी मेरी तरह थक गयी थी .वो भी हाफ़ रही थी.

हम दोनो ऐसे ही हान्फते हुए एक दूसरे की बाहों मे लेटे हुए थे.

ठकुराइन तो जल्दी नॉर्मल हो गयी पर मैं थक गया था.

ठकुराइन ने मुझे अपने उपर से अलग होने को कहा,

मैं ने ठकुराइन की चूत से अपना लंड निकाल लिया. और बेड पर लेट गया.

ठकुराइन उठ कर बाथरूम मे चली गयी. और मैं बेड पर लेटा रहा

जान बच गयी तो लाखो पाए.

ठकुराइन को जैसी चुदाई चाहिए थी मैं ने वैसी ही चुदाई की

क्या ठकुराइन को मेरी चुदाई पसंद आ गयी.

क्या पता ,कुछ कहा तो नही ठकुराइन ने

बाथरूम से आने के बाद देखता हू.

पर एक बात है ठकुराइन की चुदाई करने मे मज़ा आया पर ऐसी चुदाई जिस मे मैं एक रोबोट बन कर चुदाई करू ये मुझे पसंद नही था.

ठकुराइन की चुदाई करके मज़ा तो आया पर ठकुराइन की चुदाई करना कभी भी भारी पड़ सकता है बता नही सकते

मैं ठकुराइन के बारे मे सोचते हुए सो गया.

मुझे सोए हुए कितना समय हुआ था मुझे पता नही पर लंड पर गीली चीज़ को महसूस कर के मेरी नींद खुल गयी.

मैं ने आँखे खोल कर देखा ,क्या देखा कमरे मे तो अंधेरा था.

पर इतना तो देख लिया कि मेरा लंड ठकुराइन चूस रही थी.

ये क्या मुसीबत है

इतनी जोरदार चुदाई करने के बाद भी ठकुराइन दुबारा चुदाई करना चाहती है

मैं ठकुराइन को रोक भी नही सकता था.

जो चल रहा है उसे चलने देने के सिवा मेरे पास कोई रास्ता नही था.

कुछ भी पहली चुदाई मे मेरा लंड मुँह का मज़ा नही ले पाया.

अब जाके लंड को चुदाई पूरी होते हुए दिख रही थी.

लेकिन ठकुराइन मेरा लंड मुझे खुश करने के लिए नही बल्कि अपनी चूत को फिर ठंडा करने के लिए चूस रही थी.

ठकुराइन लंड को इस तरह चूस रही थी कि वो इस लिए कब से इंतज़ार कर रही थी और अब मिल गया तो पूरा खा जाउन्गी.

ठकुराइन ने तो सोच लिया था कि मेरे लंड को निचोड़ देगी.

ठकुराइन मज़े लेते हुए मेरे लंड को चूस रही थी.

मेरा लंड भी कमीना था. ठकुराइन के मुँह मे जाते ही खड़ा हो गया.

ठकुराइन पूरा लंड मुँह मे लेकर मज़े लेते हुए चूस रही थी.

ठाकुर का लंड काला था ,बेटे का लंड बाप जैसा होगा ना, जिस से शायद ठकुराइन को ठाकुर का लंड चूसना अच्छा नही लगता होगा.

आज मेरा गोरा लंड देख कर तो ठकुराइन के मुँह मे पानी आ गया होगा.

ठकुराइन लंड को चूसने के साथ लंड को चाट भी रही थी.

ठकुराइन की चूत मारने के बाद मैने तो लंड साफ नही किया .चलो अच्छा हुआ ठकुराइन ने मेरे लंड को चूस कर साफ किया.

ठकुराइन के लंड चूसने के बाद ठकुराइन फिर से बेड पर लेट गयी.

ठकुराइन -अभी जैसा किया था वैसे ही दुबारा चुदाई करो

अवी-जी

मैं ठकुराइन को क्या बोल सकता था.

मैं चुप चाप ठकुराइन के पैरो के बीच मे आ गया.

मेरा लंड जो ठकुराइन ने चूस चूस कर खड़ा किया था उसे ठकुराइन की चूत पर रख दिया.

और फिर से एक झटके मे अंदर डाल ने लगा .

ऐसा फिर से करने मे मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.पर पूरी चुदाई करने का मन नही था.

ठकुराइन के सामने ठाकुर की

नही चलती ,फिर मैं क्या चीज़ हू

मैं ने एक बार मे पूरा लंड अंदर डाल दिया. ठकुराइन के बदन मे आग लगी हुई थी

ठकुराइन मुझे पूरा साथ देने लगी ,बार बार अहहहा ....हहा ...हाहाहा ....हाहाहा कर करके बोलती बहुत अच्छा लग रहा है

मेरा लंड फिर से ठकुराइन की चूत मे गया था. और चूत को रुलाने लगा.

ठकुराइन ने अपने दोनो पैर मेरे पीठ पर डाले और मुझे पकड़ कर रखा,मैं ऐसे मे धीरे धीरे धक्के मारने लगा.

ठकुराइन को ये बात पता चलते उसने अपने पैर ढीले कर दिए.

मैं फिर से ज़ोर ज़ोर से लंड को अंदर बाहर करने लगा .

ठकुराइन कहने लगी और ज़ोर से और ज़ोर से फाड़ दो मेरी चूत हहहः ....,अहहहः

ठकुराइन नीचे से उछल उछल के लंड को अंदर लेने लगी

मैं ठकुराइन के बूब्स दबके गंद दबा के चोदता रहा

मैं ठकुराइन को चोद रहा था और ठकुराइन हा हः आआहहहः उूुुुुुुुुउउ रररररर्र सूउसुसुसुसुसुसूस वूओवववव कर रही थी.

मैं धक्का धक धक्के मारने लगा

ठकुराइन ने क्या खाया था आज पता नही पर पहली चुदाई के बाद भी लंड को मज़े के साथ चूत मे ले रही थी.

मुझे ठकुराइन ने गुस्सा दिला दिया था.

मैं थकने के बाद भी ठकुराइन की चुदाई कर रहा था.

पर अच्छा हुआ जो मेरा पानी अब निकलने वाला था.

पर ये क्या मुझसे पहले ठकुराइन ने पानी छोड़ दिया.

ठकुराइन के पानी छोड़ने से मुझे और ज़्यादा गुस्सा आ गया.

ठकुराइन के पानी छोड़ने से चूत गीली हो गयी. मतलब और ज़्यादा धक्के मारने होगे.

अच्छा मेरा पानी निकलने वाला था पर बीच मे ठकुराइन ने पानी छोड़ दिया.

मैं गुस्सा हो गया. गुस्से मे मुझे याद नही रहा कि ये ठकुराइन है .

मैं ने लंड चूत से बाहर निकाल लिया

और लंड को ठकुराइन के मुँह के पास ले गया. ठकुराइन ने कुछ बोलने के लिए मुँह खोला था कि मैं ने लंड ठकुराइन के मुँह मे डाल कर धक्के मारने लगा.

मैं ठकुराइन के मुँह को चोदने लगा.

कुछ देर धक्के मारने के बाद मैं ने अपना वीर्य ठकुराइन के मुँह मे डाल दिया

मैं ने ठकुराइन के सर को पकड़ रखा था जिस से ठकुराइन को मेरा सारा पानी पीना पड़ा

ठकुराइन को पानी पिलाने के बाद मैं ने लंड बाहर निकाल लिया.और बेड पर लेट गया.

 


473

ठकुराइन को पानी तो पिला दिया पर अब मेरा क्या होगा.

मैं ने ठकुराइन की तरफ देखा .अंधेरे मे कुछ दिखा नही पर खांसने की आवाज़ आ रही थी.

ठकुराइन बेड से उतर कर बाथरूम मे भाग गयी.

ये मैं ने क्या किया. ठकुराइन के साथ ऐसा नही करना चाहिए था.

अगर ठकुराइन गुस्सा हो गयी तो मैं गया काम से

मुझे कुछ सोचना चाहिए, कैसे ठकुराइन के सवालो का जवाब दूं जिस से ठकुराइन का गुस्सा ख़तम हो जाए.

ठकुराइन बाथरूम से बाहर आ गयी.

ठकुराइन ने आते ही मेरे गाल पर थप्पड़ मार दिया

मैं समझ गया कि ठकुराइन को बहुत गुस्सा आया है

ठकुराइन-तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ,मेरे साथ ऐसा करने की

अवी-ग़लती से हो गया

ठकुराइन-ग़लती से नही, तुम ने जान बुझ कर किया

अवी-आपने मेरा लंड चूसा था जिस से मुझे लगा कि आपको मेरा वीर्य पीने मे परेशानी नही होगी.

ठकुराइन-मैं ने वो सब किया ताकि दुबारा चुदाई कर सकूँ, तुम ने मेरे मुँह मे पानी डाल कर मुझे गुस्सा दिलाया है

अवी-वो मेरा पहली बार था

ठकुराइन-पहली बार था तो तुम्हें ये सब कैसे पता

अवी-वो मूवी मे देखा था

ठकुराइन-मुझे क्या पागल समझ रहे हो. ये सब तुम ने जान बुझ कर किया

अवी-वो ग़लती से हुआ

ठकुराइन-ग़लती, ठाकुर भी मुझसे पूछे बिना कुछ नही करते है, और तुम ने सीधे मेरे मुँह मे अपना पानी डाल दिया.

अवी-मैं ने अपनी मुन्डी नीचे की

ठकुराइन-अब बोलो ...तुम्हें मुझे पूछना चाहिए था.ये सब करने से पहले

अवी-वो सब इतनी जलदी हो गया कि पूछने का समय नही मिला

ठकुराइन- (ठाकुर का काला लंड चूसने का मन नही होता था. पर इसका लंड चूसने और पानी पीने मे मज़ा आया. पर इसको बता दिया कि मुझे मज़ा आया तो ये मेरे सर पे बैठ जाएगा. इसको डरा कर मुट्ठी मे रखना होगा.) ठीक है पर तुम्हें ग़लती के सज़ा तो मिलेगी.

अवी-मुझे हर सज़ा मंज़ूर है

ठकुराइन-तुम्हें 1 महीने तक हवेली मे नौकर की तरह काम करना होगा

अवी-नौकर, 1 महीना, पर 1 महीना तो मुझे मेले मे रहना है

ठकुराइन-मेले के बाद जो समय मिलेगा .उस वक्त हवेली मे काम करना होगा

अवी-(मुझे क्या चूतिया समझ रही है. सीधे सीधे बोल ना कि 1 महीना मुझसे चुदाई कराना चाहती है)मुझे मंज़ूर है

ठकुराइन-(सज़ा के बहाने 1 महीना इसके साथ चुदाई कर सकती हू) और हाँ...

ठकुराइन कपड़े पहनने लगी.पेटिकोट पहने के बाद लाइट ऑन की.

फिर एक बार ठकुराइन की चूत देखने को नही मिली.

ठकुराइन-और हाँ ये बात किसी को बताना मत कि आज रात क्या हुआ था

अवी-क्यू?.

ठकुराइन-(ये ऐसे नही मानेगा.इसको डराना होगा) अगर आज के बारे मे किसी को बताया तो मैं सुमन को तुम्हारे बारे मे ऐसा ऐसा बताउन्गी कि तुम्हारी चाची तुम्हारा चेहरा देखना भी पसंद नही करेगी

अवी-जी किसी को नही बताउन्गा

ठकुराइन-कपड़े पहन लो,और सो जाओ ,कल फिर आउन्गि

फिर ठकुराइन कपड़े पहन कर चली गयी

मैं कपड़े पहन कर बेड पर लेट गया

ठकुराइन से बच कर रहना होगा.

पर कुछ भी हो ठकुराइन के साथ मज़ा आया.

जिस तरह ठकुराइन मेरा लंड चूस रही थी उस से लग रहा है कि ठकुराइन को मेरा पानी पीना पसंद आया.

बस मुझे काबू मे रखने के लिए थप्पड़ मारा और डराया

ठकुराइन ने मुझे सज़ा भी इसी लिए दी कि मैं 1 महीना उनको पानी पिलाता रहूं

एक बात है ठकुराइन को मेरा लंड और मेरे साथ चुदाई करने मे मज़ा आया

ठकुराइन बड़ी चाची को मेरे बारे मे कुछ नही बताएँगी,या बता भी सकती है.

पर ठकुराइन को मुझे थप्पड़ नही मारना चाहिए था.

थप्पड़ का बदला तो ठकुराइन से लेना होगा

ठकुराइन को 1 महीना मेरे साथ चुदाई करनी है ना ,इस 1 महीने मे मैं ठकुराइन को हाथ भी नही लगाउन्गा

उनको तड़प ने दूँगा

और जब हाथ लगाउन्गा तब सब से पहली उनकी गंद मारूँगा.

पर मुझे कुछ सोचना होगा जिस से मैं ठकुराइन से और हवेली से दूर रह सकूँ

कल इस के बारे मे सोचूँगा.

फिर मैं ठकुराइन की चुदाई को याद करते हुए सो गया.

 
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