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मैं और मेरा परिवार

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चाची के साथ कुछ वक्त बिताने के बाद मेले मे जाने का समय हो गया.

पूरी गॅंग मेले मे जाने को तैयार थी.

सब सज धज के तैयार थे,राज अपने कमेरे से जब देखो तब फोटो निकाल रहा था.

मेरे तैयार होते सब कार मे जाकर बैठ गये.

अवी-तो आज क्या करने का प्रोग्राम बनाया है.

स्वेता दीदी-मेले मे बादमे जाएँगे पहले मंदिर चलते है,

अवी-मंदिर, मंदिर किस लिए

कोमल-दर्शन करने

अवी-ठीक से बताओ

पूनम दीदी-आज वॉक करके मेले का मज़ा लेने का प्लान बनाया है

अवी-वॉक करके

कविता लीना राज- हमे कोई प्राब्लम नही है, हम वॉक कर लेंगे

अवी-पहले ये बताओ पूरा प्लान क्या है,

सीतल-पहले मंदिर, फिर वॉक करके हमारे आम के बगीचे मे जाएँगे, फिर वापस मेले मे होकर मंदिर आ जाएँगे

अवी-ये तो लंबा टूर है, तुम सब एक बार सोच लो

एक साथ-सोच लिया है.

अवी-चलो फिर

हम मंदिर मे आ गये, भगवान के दर्शन करने के बाद हम वॉक करते हुए आम के बगीचे मे जाने लगे.

अभी भी भगवान के दर्शन और दूसरी पूजा करने के लिए लोग लाइन मे लगे हुए थे.

सीतल दीदी-इतनी लंबी लाइन,अच्छा है हमे लाइन मे नही लगना पड़ता है.

पूनम दीदी-हाँ, लंबी लाइन देख कर मेरी हालत खराब हो रही है, अगर लाइन मे लगाना पड़ता तो मेरा क्या होता.

स्वेता दीदी-तुम दोनो को कुछ पता नही है, मंदिर या मेले मे जाना हो तो लाइन मे लग कर जाने मे एक अलग आनंद मिलता है.

रानी-सही कहा दीदी ने

कोमल-लाइन मे लगना पड़ता तो भी हमे ज़्यादा प्राब्लम नही होती

सीतल दीदी-वो क्यूँ?

कोमल-क्यू कि हमारे पास अवी है,

रानी-क्यू कि हमारे पास अवी है.

कोमल और रानी ने एक साथ बोल पड़ी.

स्वेता दीदी-ये तुम दोनो ने सही कहा, अवी जैसा भाई मिलने के लिए नसीब अच्छा होना पड़ता है.

कविता-आ गया आम का बगीचा.

खेतो मे इस समय कम लोग थे. और आम के बगीचे मे भी ज़्यादा लोग नही थे.

बगीचे मे एक तरफ लोगो ने टाय्लेट बना कर रखा था. जिस से मैं सब को दूसरी तरफ ले गया.

कविता- यहाँ कितनी ठंड है.

अवी-यहाँ आकर तुम सब को क्या मिला, अभी तो आम भी नही लगे है,

सीतल दीदी-हम तो बस पूनम दीदी, रानी और विद्या को आम का बगीचा दिखाने लाए है.

अवी-तुम देखो, मैं यही बैठ ता हूँ,

राजेश-मैं भी,

राज-मैं फोटो निकालता हूँ

सीतल दीदी-राज तुम ने तो बढ़िया आइडिया दिया. हम यहाँ पर फोटो निकालते है.

और इसी के साथ फोटो निकालने का प्रोग्राम शुरू हो गया.

सिंगल फोटो, ड्युयल फोटो, ग्रूप फोटो ,अलग अलग पोज़ मे ,इस पेड़ के नीचे ,किसी पेड़ पर चढ़ कर फोटो निकाल रहे थे.

राजेश और मैं पेड़ के नीचे बैठे कर देख रहे थे.

फिर स्वेता दीदी मुझे और राजेश को भी अपने साथ फोटो निकालने ले गयी.

हम भी ग्रूप मे शामिल हो गये,

पहले हम ने ग्रूप मे फोटो निकाले और फिर सब ने मेरे साथ ड्युयल फोटो निकाले

लास्ट मे कोमल और रानी रह गयी. जब कोमल की बारी आई तो मैं ने कोमल की कमर मे हाथ डाल कर फोटो निकाला जिस से रानी के साथ फोटो निकालते हुए मैं बिना झिझके फोटो निकाल सकता था.

जब मेरा हाथ रानी की कमर को टच हुआ तो रानी शॉक्ड हो कर मेरी तरफ देखने लगी. और फोटो क्लिक हो गया.

स्वेता दीदी-रानी ठीक से खड़ी रहो,

और राज ने फिर से फोटो निकाल ली, फोटो निकालते ही रानी और मैं जल्दी से दूर हो गये.ताकि ज़्यादा ड्रामा ना हो.

फोटो निकालने के बाद हम मेले की तरफ जाने लगे, सब आगे आगे चल रहे थे और मैं स्वेता दीदी के साथ पीछे चल रहा था

स्वेता दीदी-अवी

अवी-हाँ दीदी

स्वेता दीदी-तेरी और रानी की जोड़ी अच्छी लग रही थी

अवी-रानी, कुछ भी क्या दीदी

स्वेता दीदी-सच मे तुम दोनो एक दूसरे के लिए पर्फेक्ट दिख रहे थे.मेरी बात मान कर रानी को प्रपोज़ कर दे, तेरे लिए रानी पर्फेक्ट रहेंगी.

अवी-कहाँ से कहाँ तक सोच लिया आपने, मैं सिंगल ही ठीक हू

स्वेता दीदी-तुम समझ नही रहे हो ,जब गर्लफ्रेंड बनाने का मन हो तो पहले रानी के बारे मे सोचना

अवी-ठीक है, जब प्रपोज़ करूँगा तो आपको बता दूँगा, पर आपको भी मेरी बात मान नी होगी.

स्वेता दीदी-क्या करना होगा बोल

अवी-आपको अपने बर्तडे के दिन मेरे साथ वोड्का पीनी होगी

(रोहन के बर्तडे के दिन स्वेता दीदी के साथ वोड्का पीने के बाद चुदाई की थी)

स्वेता दीदी-वोड्का?

अवी-हाँ वोड्का

मेरी बात का मतलब समझते ही स्वेता दीदी मुझे मारने के लिए मेरे पीछे भागने लगी

और मैं खुद को बचाने के लिए भागने लगा.

स्वेता दीदी-तुझे मेरे हाथ से कोई नही बचा सकता.

स्वेता दीदी के साथ बाकी सब भी मेरे पीछे भागने लगे

भागते भागते हम मेले मे आ गये.

राज-दीदी आप भैया के पीछे भाग क्यूँ रही थी.

दीदी ने बात बदल दी

स्वेता दीदी-अवी के पीछे भागने से देखो हम कितनी जल्दी मेले मे पहुँच गये.

कोमल-पहुँच तो गये पर अब थोड़ा आराम करते है.

अवी-जूस पीते है,

और सब की मेजॉरिटी से हम गन्ने का जूस पीने लगे.

फिर आज मेले मे सिर्फ़ घूमना हुआ. इसमे भी मस्ती करते हुए भरपूर मज़ा किया.

विद्या भी मेरे फॅमिली का हिस्सा बनकर खुश हो गयी. उसे अपनी फॅमिली वापस मिल गयी.

मेले मे घूमने के बाद हम सब घर चले गये, फिर खाना खाने के बाद मैं घर3 चला गया.

 
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खाना खाने के बाद मे मैं घर3 की तरफ चला गया.

कुछ लोग अभी भी मेले मे थे तो कुछ लोग मेला देख कर वापस आ रहे थे.

रुकसाना और रज़िया भी मेला देख कर आ रही थी.

वो दोनो अपनी फॅमिली के साथ थी. पर पीछे पीछे चल रही थी.

मैं रुकसाना और रज़िया का इंतज़ार कर रहा था.

जब रुकसाना और रज़िया अपनी फॅमिली के साथ मेरे पास से गुजर रही थी तो मैं ने रुकसाना और रज़िया को इशारा करके आम के बगीचे मे आने को कहा.

वो दोनो मेरा इशारा समझ गयी.

वो दोनो अपनी फॅमिली के साथ अपने बेड़े की तरफ चली गयी.

थोड़ी देर बाद रुकसाना और रज़िया पानी का डब्बा लेकर आम के बगीचे मे जाने लगी.

तो रुकसाना और रज़िया ने टाय्लेट जाने का बहाना कर दिया.

मैं भी उन दोनो के पीछे आम के बगीचे मे चला गया.

वो दोनो एक पेड़ के पास मेरा इंतज़ार कर रही थी.

मेरे आते ही रुकसाना और रज़िया पेड़ के पास बैठ गयी. जैसे कि टाय्लेट कर रही हो

रज़िया-हमारी तरह बैठ जाओ ,यहाँ पर कोई भी आ जाता है

मैं भी रुकसाना और रज़िया के बीच मे बैठ गया.

रज़िया-क्या हुआ .अचानक हमे इस तरह क्यू बुलाया,

रुकसाना-हां, मैं तो आ रही थी थोड़ी देर बाद

रज़िया-बोलो ना क्यू बुलाया है.

अवी-आज तुम...

रुकसाना-ये मत कहना कि मत आना

रज़िया-उसे बोलने तो दे

अवी-आज तुम दोनो मेरे पास आना

रुकसाना-दोनो

रज़िया-क्यू क्या हुआ,

अवी-तुम अब सिर्फ़ 4 दिन रुकने वाली हो ना

रुकसाना-हाँ

अवी-आज रुकसाना की बारी हैना

रुकसाना-हाँ मेरी बारी है.

रज़िया-और परसो मेरी,फिर हम चले जाएँगे

अवी-वो क्या हैना कि एक गड़बड़ हो गयी

रुकसाना-क्या हुआ,

अवी-परसो शायद मैं बिज़ी रह सकता हूँ,

रुकसाना-मतलब रज़िया का नंबर नही आएगा.

रज़िया-तू चुप कर, हाँ अवी बोलो

अवी-परसो मे बी मैं बिज़ी रह सकता हूँ, इस लिए आज तुम दोनो को बुला रहा हूँ

रुकसाना-पर मुझे तो अकेले करना था.

रज़िया-जा कर ना

अवी-आज तुम दोनो के साथ करूँगा और फिर परसो अगर टाइम मिल गया तो फिर एक साथ करेंगे

रज़िया-ये ठीक रहेगा.पर

अवी-पर क्या

रज़िया-घर पे क्या बताएँगे

अवी-वही जो पहली बार बताया था.

रज़िया-ये तो मैं भूल गयी थी.

अवी-तो आज रात तुम दोनो मेरे साथ रहोगी.

रज़िया-मैं तय्यार हूँ

रुकसाना-मेरी एक शर्त है.

रज़िया-शर्त

अवी-बताओ ,

रुकसाना-हम ग्रूप मे नही करेंगे

रज़िया-ग्रूप मे, हम तो सिर्फ़ 3 है.

अवी-तुम दोनो ही तो हो

रुकसाना-मेरे कहने का मतलब है कि जब मैं करूँगी तो रज़िया सिर्फ़ देखेगी और रज़िया जब करेंगी तो मैं देखूँगी.

रज़िया-ये कैसी शर्त है, ऐसे तो मज़ा नही आएगा

रुकसाना-आएगा मज़ा, पहले तुम करना फिर मैं करूँगी.

रज़िया-तुम कंट्रोल कर पाओगी.

रुकसाना-तुम्हे पता नही है कि चुदाई देकने के बाद करने मे ज़्यादा मज़ा आता है.

रज़िया-ठीक है, तुम क्या कहते हो अवी.

अवी-मुझे कोई प्राब्लम नही है, पर उसके बाद एक ग्रूप चुदाई करेंगे.

रज़िया-ग्रूप नही, हम सिर्फ़ 3 है.

अवी-हाँ,वही, और रुकसाना तुम्हारे साथ करने मे मज़ा आएगा.

रुकसाना-वो क्यू?

अवी-तुम घर3 पर आओ तो सही.

रुकसाना-देखते है आज क्या करते हो,

रज़िया-मुझे भी देखना है.और मज़ा लेना है.

अवी-मज़ा लेने के लिए जल्दी आ जाना

रुकसाना-आते है,

रज़िया-जल्दी आएँगे

अवी-अब क्या ऐसे ही वापस जाउ

रुकसाना-क्या?

अवी-एक एक किस तो दो

और रुकसाना ने मेरी बात सुनते ही मुझ पर हमला बोल दिया.और मुझे किस करने लगी.

फिर रज़िया ने मुझे किस किया.

अवी-अब तुम दोनो झुक जाओ

रुकसाना-किस लिए

अवी-झुको तो सही.

रुकसाना और रज़िया मेरी तरफ गंद करके झुक गयी.

रुकसाना और रज़िया को लगा कि मैं कुछ करूँगा पर मैं ने कुछ नही किया.

उनकी गंद को देख कर आम के बगीचे से बाहर जाने लगा.

मुझे कुछ ना करते हुए देख कर रुकसाना और रज़िया खड़ी हो गयी.

पर तब तक मैं वहाँ से दूर जा चुका था.

वो दोनो सोचती रही कि मैं ने उनको झुकने को क्यूँ कहा.

फिर थोड़ी देर बाद वो दोनो भी चली गयी.



नोट--अगला अपडेट २ घंटे बाद
 


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रुकसाना और रज़िया से मिलने के बाद मैं घर3 चला गया.

घर3 आकर मैं ने पहले कॅमरा चेक किया.

कॅमरा का मेमोरी कार्ड खाली करने के बाद कॅमरा को अपनी जगह पर सेट किया.

फिर मैं ने नहाने का सोचा. लंड पर क्रीम लगाई हुई थी, लंड को साफ भी तो करना था.

मैं नहाने के लिए चला गया. क्रीम से अंडरवेर भी खराब हो चुकी थी.

लंड को अच्छे से साफ करने के बाद ठीक से चेक किया.

लंड अब नॉर्मल हो चुका था. और 2 कुवारि गंद मे जाने को बेताब था.

नहाने के बाद मैं सिर्फ़ टवल को लपेट कर लॅपटॉप पे टाइम पास करने लगा.

और सारा ज़ोया को कॉल करके पूछा तो दोनो ने इजाज़त दे दी. वैसे लंड गोरा होने से लाल हो गया था. और कुछ नही हुआ था. विद्या ने जो ध्यान रखा था उस से लंड सुबह ही ठीक हो गया था. फिर भी दिन भर लंड पर क्रीम लगा कर रखी ताकि लंड को ठंडक मिलती रहे .

मुझे दोनो से जल्दी पीछा छुड़ाना था. और उनकी गंद मारकर खेल ख़तम करने वाला था.

रज़िया रुकसाना के आने से पहले मैं लॅपटॉप पर अपना काम करने लगा.

लॅपटॉप को मैं ने मोबाइल से कनेक्ट करके इंटरनेट चालू किया.

और पॉर्न वीडियो डाउनलोड करने लगा.

जो मेरे काम के पॉर्न वीडियो थे उनको डाउनलोडिंग पे लगा दिया. रात भर ये वीडियो डाउनलोड हो जाएँगे.

ये तो होता रहेगा. पहले मोना को फोन करता हूँ,

अरे यार फोन कैसे करूँ, मोबाइल तो लॅपटॉप से कनेक्ट किया है.

मोना ने क्या किया है वो कल पूछ लूँगा.

फिर मैं ने रुकसाना और रज़िया की चुदाई का इंतज़ाम किया. तेल की 2 बॉटल रख ली.

और रुकसाना और रज़िया का इंतज़ार करने लगा.

रुकसाना और रज़िया अपने समय पर आ गयी.और बेड पर जाकर बैठ गयी.

रुकसाना-तुम तो तैयार हो

रज़िया-ये तैयार है पर लंड तो सो रहा है.

अवी-उसे तैयार तुम को करना है.

रुकसाना-वो तो करेंगे पर ये बताओ तुम ने हमे बगीचे मे झुकने को क्यूँ कहा.

अवी-तुम्हे अभी तक समझ मे नही आया

रुकसाना-नही,

अवी-और रज़िया तुम्हे

रज़िया-मुझे थोड़ा सा समझ मे आ गया.

अवी-बताओ तुम्हे क्या समझ मे आया.

रज़िया-आज तुम हमारी ...

अवी-सही सोचा

रुकसाना-मुझे भी तो बताओ

अवी-तुम्हे प्रॅक्टीस करवा रहा था.

रुकसाना-किस बात की प्रॅक्टीस

रज़िया ने तेल की बॉटल हाथ मे ली और रुकसाना को दिखाने लगी.

रज़िया-इस बात की प्रॅक्टीस

रुकसाना-मैं अभी तक नही समझी.

रज़िया-अरे मेरी अम्मी,ये आज हमारी गंद मारने वाला है.

अवी-रज़िया तुम्हारा जवाब नही.

रुकसाना-गंद, तभी सोचु इसने हमे झुकाया क्यूँ

रज़िया-तू ना...जाने दे

अवी-तैयार हो

रुकसाना-मेरी हाँ

रज़िया-मेरी भी हां, पर

अवी-पर क्या

रज़िया-एक बार आगे से करोगे ना

अवी-ये भी कोई पूछने की बात हुई. पहले आगे डालूँगा और फिर पीछे ,

रुकसाना-रज़िया हो जा शुरू ,मैं तो पहले देखूँगी

रज़िया-देखने के बाद मना मत करना,

अवी-हां, मना किया तो मुझ से बुरा कोई नही होगा.

रुकसाना-नही करूँगी,

और रुकसाना ने गेट को अंदर से लॉक लगा लिया और की मुझे दी.

रुकसाना-ये लो की,

रज़िया-मैं तो बस इस लिए कह रही थी कि पीछे से ज़्यादा दर्द होता है. और मेरा दर्द देख कर कही तू बदल ना जाए

मैं उन दोनो की बातें सुन रहा था.

रुकसाना-पता है मुझे पीछे से दर्द होता है,

रज़िया-तू बर्दास्त कर लेगी.

रुकसाना-इन सब मे जिस दिन इन्वोल्व हुई उसी दिन पीछे से करने को तैयार थी.

रज़िया-ये तो तूने बढ़िया सोचा था.

रुकसाना-चल लग जा अपने काम पर

रज़िया-तू भी आ ना ,साथ मे करने से मज़ा ज़्यादा आएगा और दर्द कम होगा.

रुकसाना-पहली बार दर्द ना हो तो ज़िंदगी भर मज़ा नही आता,

रज़िया-हाँ, इस दर्द की याद ,ज़िंदगी भर मज़ा देंगी.

रुकसाना-पहली बार दर्द का भी एक अलग मज़ा होता है,

रज़िया-दर्द के साथ मज़ा ,ये तो डबल मज़ा

अवी-क्या दर्द दर्द लगा रखा है,

रुकसाना-क्यू ,क्या हुआ

अवी-बातें बहुत हो गयी, रुकसाना जाओ चेर पे जाकर बैठो, और रज़िया तुम बेड पर बैठो

रुकसाना-जा रही हूँ

रज़िया-मैं तो बेड पर ही बैठी हूँ,

अवी-पता है मुझे, रुकसाना,

रुकसाना-हाँ

अवी-तुम बैठने की जगह ,रज़िया के लिए पानी गरम करके रखो,

रुकसाना-मुझे तो चुदाई देखनी है

अवी-पानी गरम करने को रख कर वापस आ जाओ

रुकसाना-तो ऐसा बोलो ना,

और रुकसाना बाथरूम मे चली गयी.

और मैं रज़िया के पास आ गया

 


543

रुकसाना बाथरूम मे चली गयी .

रज़िया-ऐसे क्या देख रहे हो

अवी-तुम्हारे बूब्स आज बड़े लग रहे है

रज़िया-ये सब तुम्हारी मेहनत है.

अवी-चलो आज फिर मेहनत करता हूँ

रज़िया-करो, पर एक बात पुछु

अवी-हाँ पूछो

रज़िया-तुम ने हम दोनो को साथ मे क्यू बुलाया

रज़िया का सवाल सुनते मैने उसे गले लगा लिया और रज़िया के कान मे जवाब बताया.

अवी-मुझे तुम्हारे साथ चुदाई करने मे ज़्यादा मज़ा आता है.

रज़िया-सच

अवी-हाँ, रुकसाना से ज़्यादा तुम्हारे साथ मज़ा करता हूँ. और रही बात आज तुम्हे बुलाने कि तो वो मैं ने सोचा की आज रुकसाना का नंबर है

रज़िया-हाँ, आज रुकसाना का नंबर है.

अवी-और परसो तुम्हारा था, और उसके बाद तुम चली जाती.

रज़िया-इसका और मुझे आज बुलाने का मतलब नही समझ मे आया

अवी-परसो तुम्हारे साथ करते समय ,रुकसाना तुम्हारे साथ ज़रूर आती और बोलती कि आख़िरी चुदाई है ,अब समझी

रज़िया-ये बात तुम ने सही सोचा. अच्छा किया जो आज मुझे बुला लिया. पर परसो का क्या

अवी-परसो भी करेंगे , इसी तरह.

और मैं ने और कस्के रज़िया को गले लगा लिया.

रज़िया भी मेरे गले लग कर खुश थी.

ऐसे गले लगते हुए मैं ने रज़िया को बेड पर लिटा दिया. और मेरा टवल निकल गया.

रज़िया ने मेरे सर को पकड़ कर उपर किया और मुझे किस करने लगी.

रज़िया के साथ किस करना रुकसाना के साथ चुदाई करने के बराबर था.

तारीफ करने से, रज़िया का जोश दुगना हो गया.

उसके किस करने मे वाइल्ड पन था.

मेरा लंड आज़ाद होते ही अपने विकराल रूप मे आ रहा था.

मैं भी रज़िया को किस करने मे कोई कसर नही छोड़ रहा था.

मेरा लंड खड़ा होते ही रज़िया के चूत मे कपड़ो के उपर से धक्के लगा रहा था.

रज़िया की चूत मे धक्के लगाते हुए किस करने मे ज़्यादा मज़ा आ रहा था.

मज़ा और बढ़ाने के लिए मैं ने किस ख़तम करके रज़िया को ब्रा और पैंटी मे कर दिया.

रुकसाना भी बाथरूम से बाहर आ गयी थी,और हमे मस्ती करते हुए देख कर अपनी चूत मसल्ने लगी.

मैं ने फिर से रज़िया को बेड पर लिटा दिया और ब्रा के साथ बूब्स को मसल्ने लगा.

रज़िया के मूह से शीष्कारिया निकालने लगी.

आआहह........... उूुुुुउउफफफफफफफ्फ़.......

मैं बूब्स को मसल्ते हुए नीचे आ गया.और रज़िया की पैंटी के उपर से चूत को मसल्ने लगा.

रज़िया की वाइट पैंटी गीली होने लगी. रज़िया को बर्दस्त नही हो रहा था.

मैं ने ज़्यादा देर ना करते हुए रज़िया की पैंटी को निकाल दिया.

रज़िया की चूत लंड लेने के लिए पानी पे पानी छोड़ रही थी.

चूत के दर्शन करने के बाद मैं फिर से बूब्स के साथ खेलने लगा.

रज़िया के बूब्स को ब्रा की जैल मे से आज़ाद कर दिया. बूब्स आज़ाद होते ही अपने सर(निपल) को उठा कर मुझे चूसने को कह रहे थे.

अगर खुद मुर्गी कट ना चाहती है तो भलाई इसीमे है की उसे काट देना चाहिए.

मैं ने ज़्यादा देर ना करते हुए रज़िया के बूब्स को चूसना शुरू किया.

रज़िया तो पहले से मदहोश हो चुकी थी और बूब्स को चूसने से और ज़्यादा मदहोश होने लगी.

उधार रुकसाना लाइव चुदाई देख कर मज़ा ले रही थी. अगर रुकसाना की जगह कोई और होती तो वो उठ कर हमारे साथ चुदाई करने आ जाती.

पर रुकसाना को पता है कि चुदाई देखने के बाद जब लंड चूत मे जाता है तब इतना सुकून मिलता है कि उसके लिए ये थोड़ी देर कंट्रोल ज़्यादा मायने नही रखता.

रज़िया के बूब्स चूसने से मेरा लंड खड़ा हो गया है. और लंड मे दर्द भी हो रहा था.

ये दर्द कल से विद्या जो लंड पर क्रीम लगाती थी उस से लंड खड़ा हो जाता था और बिना पानी निकाले सो जाता था.

और आज सेक्स के नशे की वजह से और 2 कुवारि गंद मारने के लिए ज़ोया और सारा ने मुझे जो गोली दी थी वो खा ली थी.

एक तो आज जोरदार चुदाई होगी और मैं अपनी गरमी ठंडी कर दूँगा.

मेरी हालत खराब होने लगी.मेरा पहला पानी जल्दी निकाल सकता है,जिस से गंद मारने मे मुझे ज़्यादा मज़ा नही आएगा.

इस लिए मैं ने पहले रज़िया की चूत मे पानी डालने का फ़ैसला किया.

बूब्स चूसने से रज़िया के मूह से शीष्कारिया निकल रही थी.

मैं रज़िया के बूब्स को चूसने के साथ चाट भी रहा था.

रज़िया अपनी कमर को बार बार मेरे शरीर से रगड़ रही थी जिस से मुझे पता चल गया कि रज़िया को जल्द से जल्द चूत मे लंड चाहिए

रज़िया की शीष्करहीा आआहह...........और बार बार मेरे शरीर से लिपट जाना ,रज़िया तो फुल मज़े मे थी.

मैं ने बूब्स को चूसना बंद किया और रज़िया की चूत के पास आ गया.

और रज़िया की गीली चूत को अपनी जीभ से चाट लिया.

रज़िया इतनी गरम हो चुकी थी कि उसकी चूत से ऐसी महक आ रही थी की मेरे दिमाग़ नशे मे झूमने लगा.

मैं ने ज़्यादा देर ना करते हुए रज़िया की चूत मे 2 उंगली डाल कर जीभ से दाने को चाट कर रज़िया की चूत का मज़ा लेने लगा.

रज़िया की चूत तपते लावे की तरह गरम थी और उस पर नशीला पानी ,मैं तो जन्नत मे था.

इधर मेरा हाल ऐसा था तो उधर रज़िया मज़े मे अपने सर को इधर उधर घुमा रही थी.

और शीष्कारियो की बारिश होने लगी.उूुुुुुुुउऊहह...... म्‍म्म्ममममममम.......... आआआआअहह....... आआआआअहूऊऊऊऊओह...

आआअहह....

और रज़िया ज़्यादा देर बर्दास्त नही कर पाई और मेरे मूह मे अपना शीतल जल डाल दिया .और मेरी प्यास बुझा दी.

रज़िया का पानी निकलते ही मैं रज़िया के उपर आ गया.

और रज़िया के होंटो को फिर से चूसना शुरू किया .और नीचे मेरा लंड रज़िया की चूत को किस करने लगा.

रज़िया के होंटो को किस करते हुए मैं ने अपने हाथो को नीचे ले जाकर लंड को चूत पर अड्जस्ट किया.

और रज़िया के होंटो को चूस्ते हुए एक ज़ोर दार झटका मारा.

रज़िया की चूत मे गिनती से 3 4 बार लंड गया था. और रज़िया की चूत कसी हुई थी जिस के वजह से आधा लंड चूत मे जाते उसे थोड़ा दर्द हुआ.

पर मैं अपना काम जानता था. मैं ने अपनी कमर को उपर उठाया जिस से लंड टोपे तक चूत से बाहर आ गया.

और फिर से एक जोरदार झटका मारा और पूरा लंड रज़िया की चूत मे डाल दिया.

रज़िया को दर्द हुआ पर उसने ज़्यादा चिल्लाने और चीखने की कोशिस नही की.

पर ये धक्का इतना जोरदार था कि लंड चूत मे जाकर रज़िया की बच्चेदानी से टकरा गया.

लंड चूत मे जाते फूलने लगा. कल से चुदाई ना करते हुए लंड खड़ा करने से मेरे आंडो मे ज़्यादा वीर्य जमा हो गया था.

और मेरा वीर्य निकलने को तैयार था पर गोली खाने से थोड़ा समय लगेगा फिर भी जल्दी निकल जाएगा ,

रज़िया की चूत मारने से मुझे और रज़िया को मज़ा आ रहा था पर रुकसाना को समझ नही आ रहा था कि मैं गंद कब मारूँगा.

धक्के मरने के लिए मैं रज़िया के उपर से अलग हो गया

मेरे धक्को से रज़िया शीष्कारिया ले रही थी.

आआआआआआआहह....... उूुुुुउउफफफफफफफ्फ़................. आआआआआआआअहह....... आआआआआआअम्म्म्ममममममममिईीईईईईईई आआआआआआआ.............. आआआआआअहह.............

रुकसाना को लग रहा था कि एक बार मैं चूत मारूँगा फिर गंद मारूँगा

रज़िया की चूत फिर से गीली होने लगी. रज़िया अपनी कमर को हिला रही थी और गंद को उपर करने लगी.

मैं आधा लंड बाहर निकल कर जोरदार धक्के मारने लगा. तो कभी लंड को टोपे तक बाहर निकाल कर पूरा अंदर तक डालने लगा.

मेरे हर धक्के के साथ रज़िया के मूह से आआआआआहह निकल ने लगी.

ऐसे चुदाई के साथ रज़िया की चूत से पानी निकल गया.

मेरा लंड भी कभी भी उल्टी कर सकता था पर एक बार और रज़िया की चूत से पानी निकालने के बाद.

इस बार मैं कभी रज़िया के बूब्स चूस्ते हुए तो कभी किस करते हुए धक्का मारने लगा

रुकसाना को तो कुछ समझ मे नही आ रहा था.वो बस हमे देख रही थी.

थोड़ी देर बाद मैं ने अपनी गति बढ़ा दी और आधा लंड निकाल कर रज़िया को चोदने लगा.

ऐसा करते ही रज़िया फिर से झड गयी. रज़िया के पानी निकलते ही मुझे लगने लगा कि मेरा भी वीर्य निकल जाएगा.

मैं ने रज़िया की चूत से लंड बाहर निकाल कर उसके मूह के पास ले जाकर हिलाने लगा.

मेरे ऐसा करते ही रज़िया ने मेरे लंड को अपने मूह मे ले लिया.

उधार रुकसाना भी हरकत मे आ गयी.वो हमारे पास आने लगी.

पर रुकसाना के मेरे पास आने से पहले मेरा वीर्य रज़िया ने पीना शुरू किया.

वीर्य कुछ ज़्यादा ही निकला था पर रज़िया को चुदाई मे रुकसाना से ज़्यादा मज़े देने से रज़िया ने सारा वीर्य पी लिया.

वीर्य की लास्ट बूँद पीने के बाद रज़िया ने लंड को अपने मूह से बाहर निकाला ,

वीर्य निकालने से मुझे सुकून मिला और मैं रज़िया के बाजू मे लेट गया.
 


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इस गरम जोश की चुदाई की वजह से मैं और रज़िया थक गये थे.

पर वीर्य निकलने के बाद भी मेरा लंड खड़ा था. ये गोली का कमाल था.

रज़िया खुश थी क्यू कि उसकी चूत की गर्मी ठंडी हो गयी थी.

मैं भी रज़िया की चुदाई करके खुश था.

मैं ने रज़िया को कहा था कि परसो तुम्हारी चुदाई करते समय रुकसाना ज़रूर आएगी .इसी लिए तुम दोनो को साथ मे बुलाया है.

पर सच ये था कि मुझे आज रज़िया और रुकसाना खेल ख़तम करना था.

मुझे कुवरसिंघ के बारे मे सोचने के लिए टाइम चाहिए था जिस से आज रज़िया और रुकसाना को साथ मे भुला कर आख़िरी चुदाई कर रहा था.

मैं और रज़िया बेड पर लेटे हुए थे और रुकसाना हमारे पास खड़ी होकर देख रही थी.

मैं ने रुकसाना की तरफ देखा वो मुझे सवालिया नज़रों से देख रही थी.

अवी-क्या हुआ ,ऐसे क्या देख रही हो

रुकसाना-ये

अवी-ये चुदाई थी

रुकसाना-मेरा मतलब है ,चुदाई हो गयी

अवी-रज़िया के मूह पर देखो पता चल जाएगा.

रुकसाना-वो दिख रहा है तभी तो पूछ रही हूँ

अवी-हाँ हो गयी

रुकसाना-पर तुमने तो आगे से किया

अवी-हाँ, चुदाई मे आगे से तो करते है

रुकसाना-पर तुम ने तो कहा था की गंद मारने वाले हो

अवी-रूको तो ,अभी गंद भी मारना है

रुकसाना-मतलब रज़िया के साथ एक और बार करोगे

अवी-यही तो डिसाइड हुआ था कि पहले रज़िया की गंद मारूँगा

रुकसाना-पर बात सिर्फ़ एक बार करने की हुई थी

अवी-बात गंद मारने की हुई थी.

रुकसाना-ये चीटिंग है

अवी-कुछ चीटिंग नही है,

रुकसाना-पर उसके साथ 2 बार करोगे और मेरे साथ 1 बार

रज़िया आराम से लेट कर हमारी बातें सुन रही थी.

अवी-रज़िया तुम क्या आराम कर रही हो,जल्दी जाकर फ्रेश हो जाओ ,एक और बार करना है

रज़िया मेरी बात सुनकर खुश हो गयी.

रज़िया-2 मिनिट मे आती हू

और रज़िया बाथरूम मे चली गयी.

अवी-अब बोलो क्या हुआ

रुकसाना-उसके साथ 2 बार और मेरे साथ सिर्फ़ 1 बार

अवी-किस ने कहा तुम्हारे साथ सिर्फ़ 1 बार करूँगा

रुकसाना-खुश होते हुए मेरे साथ भी 2 बार करोगे

अवी-हाँ, एक तो लगातार करूँगा या फिर एक अभी और एक सुबह करूँगा

रुकसाना-ऐसा पहले बताते तो

अवी-सब अचानक हुआ, मेरा पानी जल्दी निकलने वाला था इसी लिए गंद मारना कॅन्सल किया

रुकसाना-तो मेरे साथ भी पहले आगे करोगे

अवी-वो बाद मे देखेंगे ,पर तुम्हारे साथ करूँगा 2 बार

रज़िया-क्या बातें हो रही है,

रुकसाना-और क्या होगी,आगे क्या करना है वो सोच रहे थे

अवी-तुम्हारी एक बार चुदाई करूँगा

रज़िया-मैं तैयार हूँ पर रुकसाना

रुकसाना-मेरा क्या है, मैं तुम्हारे बाद करूँगी.

अवी-चलो अपनी अपनी जगह पर आ जाओ

रज़िया अपनी गंद मटकाते हुए बेड के पास आ गयी. और रुकसाना चेर पे जाकर बैठे गयी

 


545

रुकसाना चेर पे जाकर बैठ गयी. और रज़िया मेरे पास आ गयी.

रज़िया-अब क्या पीछे से करोगे

अवी-हाँ, और तब तक करूँगा जब तक मेरा पानी ना निकल जाए

रज़िया-फिर तो मैं मर जाउन्गी

अवी-बिना गंद मारे मरने नही दूँगा.

रज़िया-थोड़ा आराम से करना

अवी-ये क्या पूछने की बात है, आराम से ही करूँगा.

और मैं ने रज़िया को किस करना शुरू किया

रुकसाना फिर से अपनी चूत की गर्मी बढ़ा रही थी.

रज़िया को किस करने मे इस बार ज़्यादा मज़ा आ रहा था.

रज़िया की चुदाई करने से उसका बदन मे एक ताज़ा पन था. एक चमक थी, एक नया नशा था रज़िया मे

और ये नया नशा पीने मे मुझे मज़ा आ रहा था.

थोड़ी देर ऐसे ही किस करने के बाद अब बारी थी रज़िया की गंद की.

अवी-रज़िया घोड़ी बन जाओ और अपने चूतड़ को पकड़ कर फैला दो

रज़िया-ऐसे ही करोगे,

अवी-तेल लगा रहा हूँ, क्या समझी

रज़िया बेड पर घोड़ी बन गयी.

अवी-रूको, एक मिनिट

रज़िया ने मेरी तरफ देखा

रज़िया-क्या हुआ

अवी-बेड से उतरो नीचे

रज़िया बेड से नीचे उतर गयी. मैं ने बेड पर रखा हुआ एक गद्दा उठा कर ज़मीन पर डाल दिया

रज़िया-ये क्या कर रहे हो

अवी-तुम बस देखो

और मैं रुकसाना के पास चला गया.

रुकसाना को पकड़ कर खड़ा किया ,और रुकसाना को किस करने लगे

रज़िया शॉक्ड होकर मुझे देखती रही.

रज़िया-ये क्या कर रहे हो,

मैं ने कोई जवाब नही दिया . बस रुकसाना को किस करता गया

रज़िया-तुम ने कहा कि मेरी बारी है और ऐसे बीच मे छोड़ कर

मैं ने रज़िया को इग्नोर किया और रुकसाना को किस करता गया.

रुकसाना को तो बस यही चाहिए था. वो तो मेरा पूरा साथ दे रही थी.

जिस तरह रज़िया शॉक्ड थी उसी तरह रुकसाना भी शॉक्ड थी.

रुकसाना को किस करते हुए मैं ने रुकसाना की कमीज़ निकाल दी.और फिर से किस करने लगा.

रुकसाना के कपड़े निकालते ही रज़िया को कंट्रोल नही हुआ.

रज़िया ने हम दोनो को अलग किया.

रज़िया-ये क्या कर रहे हो

अवी-किस कर रहा हूँ

रज़िया-वो मुझे भी दिख रहा है, पर मुझे बीच मे छोड़ कर रुकसाना को किस क्यूँ रहे हो

अवी-तब से वो हमे देख रही है तो सोचा उसे भी थोड़ा सा मज़ा देता हूँ

रज़िया-तो किस करते हुए कपड़े क्यू निकाल रहे हो,

अवी-चुदाई करने के लिए

रज़िया-और मेरा क्या होगा.तुम ने तो कहा था कि मेरे साथ करोगे

अवी-तुम्हारे साथ ही करूँगा.

रज़िया-मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा.

अवी-तुम कुछ समझने की कोशिस मत करो, बस वहाँ जाकर घोड़ी बन जाओ

रज़िया-पहले मेरे सवाल का जवाब दो

अवी-पूछो

रज़िया-मुझे घोड़ी बनाने के बाद ये गद्दा नीचे क्यू डाल दिया और फिर रुकसाना को किस क्यू रहे हो

अवी-तुम भी ना, तुम दोनो की गंद मारने वाला हू, तो एक एक करके तेल लगा ने की जगह एक साथ तुम दोनो की गंद पे तेल लगा रहा हूँ.

रज़िया-तो ये बात है, मुझे लगा कि.

अवी-जो भी लगा हो,वहाँ जाकर घोड़ी बन जाओ

रज़िया गद्दे पे जाकर बैठे गयी.

रुकसाना-ये क्या है

अवी-अभी तो रज़िया को बताया ,सुना नही तुममे

रुकसाना-सुना ,तभी तो पूछ रही हूँ,

अवी-तुम भी पूछ लो

रुकसाना-तुम रज़िया के साथ करो फिर मेरे साथ करना

अवी-वही तो करने वाला हूँ

रुकसाना-मेरा मतलब है मुझे अकेले करना है

अवी-अकेले ही करूँगा पर थर्ड टाइम तुम्हारे साथ ज़्यादा समय लगेगा इसी लिए अभी तेल लगा रहा हूँ ताकि तुम्हे दर्द ना हो

रुकसाना-पर मुझे जैसा मज़ा चाहिए वो नही मिलेगा.

अवी-अगर अब तेल नही लगाया तो फिर मज़ा कम और दर्द ज़्यादा होगा ,सोच लो

रुकसाना-ठीक है,

अवी-तो निकालो कपड़े

रुकसाना-तुम ही निकल दो

मैं ने सलवार के नाडे को अपने दांतो मे पकड़ कर खोल दिया.

सलवार नीचे और मेरा मूह रुकसाना की गीली पैंटी पर,

रुकसाना की पैंटी गीली हो चुकी थी.

रुकसाना की चूत पर एक किस करने के बाद पैंटी भी निकाल दी.

पैंटी निकालते ही रुकसाना की चूत से 2 3 बूँद ज़मीन पर गिर गयी.

रुकसाना तो पूरी तैयार थी.

अवी-रुकसाना तुम कमाल की हो

रुकसाना-ये सब तुम्हारे लंड का कमाल है.

अवी-देखते है किस का कमाल है, तुम गद्दे पर लेट जाओ, और रज़िया तुम घोड़ी बन जाओ

रज़िया घोड़ी बन गयी और रज़िया के बाजू मे रुकसाना अपनी चूत खोल कर लेट गयी.

और मैं ने टेबल पर रखा तेल ले लिया..दोनो की गंद मारने के लिए तैयार हो गया

 
546

रज़िया ने घोड़ी बनकर अपने चूतड़ को फैला दिया था.और मुझे अपनी गंद का छेद दिखा रही थी.

रुकसाना गद्दे पे लेट कर अपने पैरो को फैला कर चूत दिखा रही थी.

मैं रुकसाना की तरफ चला गया.

अवी-रुकसाना तुम भी घोड़ी बन जाओ

रुकसाना-तुम जो करना चाहते हो वो बिंदास करो पर एक बार मेरा पानी निकाल दो,

अवी-वो भी निकाल दूँगा पहले घोड़ी बन जाओ

रुकसाना भी रज़िया की तरह घोड़ी बन गयी.

मैं रुकसाना और रज़िया के बीच मे आ गया और दोनो के चूतड़ पर थप्पड़ मारने लगा.

दोनो की गंद पर थप्पड़ मारने मे मज़ा आ रहा था.दोनो के चूतड़ मेरे थप्पड़ मारते ही हिल जाते.

रज़िया-आअहह क्या कर रहे हो,दर्द हो रहा है.

अवी-अभी से दर्द हो रहा है, तब क्या होगा जब मैं तुम्हारी गंद मारूँगा.

रुकसाना-मेरा पानी निकाल दो, फिर जो करना है करो

ये रुकसाना , पहले इसका पानी निकाल देता हू,

मैं ने रुकसाना को चूतड़ फैलाने को कहा, और रुकसाना के पीछे जाकर चूत को चाटने लगा.

रज़िया-मेरा क्या होगा.

एक की बात मानो तो दूसरी तैयार हो जाती है.

मैं रुकसाना की चूत चाटते हुए रज़िया की गंद को सहलाने लगा.

रुकसाना जो कब से अपना पानी रोकी हुई थी जो जल्दी निकलने वाला था.

रुकसाना की शीष्कारिया भी यही बता रही थी. और हुआ भी ऐसा ही.

रुकसाना की चूत मेरी जीभ के सामने रोने लगी.

रुकसाना ने भी मेरी तरह कुछ ज़्यादा ही पानी निकाला ,

रुकसाना का पानी पीने के बाद ,रुकसाना भी खुश हो गयी.

रुकसाना का पानी पीने के बाद फिर से रुकसाना और रज़िया के चूतड़ो पर थप्पड़ मारा.

रुकसाना और रज़िया की गंद पर तेल डालने लगा.

तेल की धार दोनो की गंद के छेद पर डालने लगा.

तेल को अपने हाथो पर ले कर, रुकसाना और रज़िया की चूतड़ पर लगाने लगा.

तेल लगाने से दोनो के चूतड़ चमकने लगे. दोनो की गंद पर अच्छे से तेल लगा लिया .

फिर दोनो की गंद पर एक एक थप्पड़ मारा ,और अपनी उंगली को तेल से गीला कर के दोनो की गंद के छेद पर रगड़ने लगा.

अवी-तैयार हो

रुकसाना रज़िया-हाँ

और मैं ने दोनो की गंद मे एक साथ अपनी उंगली पूरी अंदर डाल दी.

थोड़ा ज़ोर लगाना पड़ा पर उंगली आराम से अंदर चली गयी.

लेफ्ट हाथ की उंगली अंदर जाने मे ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ा.

दोनो के मूह से एक साथ आहह निकल गयी.दोनो ने एक साथ पीछे पलट कर देखा.

मैं दोनो के बीच मे था और मेरी उंगली दोनो की गंद मे थी.

उंगली गंद मे डालने के बाद मैं ने फिर से बाहर निकाल ली.

और दोनो तेल की बॉटल को नीचे के 1 इंच उपर छेद कर दिया और दोनो बॉटल को रुकसाना और रज़िया की गंद के उपर रख दिया.

रज़िया और रुकसाना ने पीछे मूड कर देखा ,

अवी-अगर बॉटल को गिराया तो समझ लेना कि मैं बिना तेल की गंद मारूँगा.

दोनो ने भैस की तरह अपने मंडी हाँ मे हिलाई.

बॉटल मे छेद छोटा सा किया था जिस से बॉटल से तेल धीरे धीरे गंद की दरार मे गिराते हुए गंद की छेद तक आ रहा था.

तेल को फिर से अपनी उंगली पर लगा कर उंगली को रुकसाना और रज़िया की गंद मे डाल दिया.

उंगली इस बार आराम से अंदर चली गयी.और साथ मे थोड़ा सा तेल भी गंद मे चला गया.

फिर मैं ने धीरे से उंगली को बाहर निकाला .उंगली थोड़ी बाहर निकालते ही तेल से गीली हो गयी.

और मैं उंगली को रुकसाना और रज़िया की गंद मे धीरे धीरे उंगली अंदर बाहर करने लगा.

उंगली गंद मे जगह और तेल गंद का चिकना बना रहा था.

तेल की बॉटल का बॉटम बड़ा था जिस से बॉटल गिरने का कोई चान्सस नही था.

और दोनो को वॉर्निंग दी थी जिसकी वजह से वो दोनो अपनी कमर को हिलने से रोक रही थी.

उन दोनो ने अपने हाथो से चूतड़ पकड़ रखे थे ,जिस से वो अपना सर गद्दे पर रख कर घोड़ी बनी थी.

तेल गंद से होते हुए चूत की गलियो से नाभि तक जा रहा था. पर ज़्यादा तेल उन दोनो की गंद मे जा रहा था.

ये बॉटल के साथ ऐसा करना ,ये उन दोनो के लिए नही था ये सब मेरे लंड को ज़्यादा प्राब्लम ना हो इस लिए ये सब कर रहा था.

एक उंगली के साथ बहुत हो गया. अब 2 उंगली की बारी थी.

मैं ने अपनी उंगली लास्ट टोक तक बाहर निकाली ,जिस से मेरी दूसरी उंगली पहली उंगली से चिपक गयी.

तेल ने दोनो उंगली को गीला किया.

उंगली को गीला करते ही मैं ने उन दोनो को हमले के लिए तैयार किया

अवी-मैं दो उंगली डाल रहा हू, अगर बॉटल गिरी तो पता है ना कि मैं क्या करने वाला हूँ

रज़िया-पता है, डाल दो, हम तैयार है.

दोनो को तैयार करते ही धीरे धीरे 2 उंगली गंद मे डालने लगा.

2 उंगली के लिए गंद टाइट थी. फिर भी तेल की वजह से ये काम आसान हो गया.

2 उंगली गंद मे जाते ही दोनो को दर्द हुआ, उनकी कमर हिलने लगी थी.

पर दोनो ने बॉटल गिरने नही दी.

दोनो की जितनी तारीफ करू उतनी कम थी.

मुझे भी इस खेल मे मज़ा आ रहा था. एक साथ 2 गंद मे उंगली करने मे वो भी कुवारि, क्या कहूँ, जन्नत भी ऐसी हो पर इतने गुनाह करने के बाद मैं जन्नत मे कैसे जा सकता हूँ

रुकसाना और रज़िया की गंद मे उंगलिया अंदर बाहर करने लगा.

2उंगली से गंद खुलने लगी और तेल अच्छे से गंद को चिकना कर रहा था.

रुकसाना और रज़िया को ज़्यादा दर्द नही हो रहा था.वो भी बेस्ट फ्रेंड एक साथ मज़ा ले रही थी.

उन दोनो ने अपने चूतड़ो को और फैला दिया जिस से उंगलिया आराम से अंदर बाहर होने लगी.

मुझे लग रहा था कि एक और उंगली गंद मे डाल देनी चाहिए.

मैं ने 3 उंगली डालने का ट्राइ किया पर उन दोनो को ज़्यादा दर्द होने लगा.

मैं ने 2 उंगली से उनकी गंद मारना चालू रखा. साथ मे पास मे पड़ी हुई पेन उठाकर उल्टे साइड से रज़िया की गंद मे डाल दी.

पेन उंगली से छोटी थी जिस से रज़िया ने आराम से अपनी गंद मे ले ली,

पेन को मूह मे पकड़ कर रज़िया की गंद मे आधी डाल दी थी, क्यू कि दूसरा हाथ रुकसाना की गंद पर था.

सिर्फ़ रज़िया की गंद मे पहले डाली थी क्यू कि उसकी पहले चुदाई करनी थी.

मैं उनकी गंद को तब तक उंगली से मारता रहा जब तक बॉटल के छेद से तेल निकलना बंद नही हुआ.

बॉटल मे अभी भी तेल था क्यू कि छेद मैं ने 1 इंच उपर किया था.

वो तेल लंड पर लगाने के लिए रखा था

दोनो की गंद को तेल से चिकना करने के बाद मैं ने उंगलिया निकाल ली, और बाथरूम मे चला गया.

मैं बाथरूम से बाहर आ गया. दोनो अपने पैरो को फैला कर गद्दे पर लेटी हुई थी.

मैं ने दोनो के चूतड़ पर थप्पड़ मारे,जिस से दोनो पलट गयी.

रुकसाना के पलटते ही मैं ने रुकसाना के पैरो को पकड़ कर अपने लंड को एक झटके मे उसकी चूत मे डाल दिया.

रुकसाना की एक चीख निकल गयी. आआअहह...मरररर...गाइिईई

रज़िया फिर से हमे देखती रह गयी. मैं रुकसाना की चूत मे धक्के मारता गया.

रुकसाना को कब से लंड चाहिए था. जो उसे मिल गया था.पर रज़िया शॉक्ड होकर हमे देख रही थी.

ये हो क्या रहा है ये समझने से पहले मैं ने रुकसाना की चुदाई करना शुरू कर दिया

रुकसाना ने जल्दी से खुद को ठीक किया और मेरे धक्को का मज़ा लेने लगी.

रज़िया कुछ बोलना चाह रही थी पर मैं ने उसे चुप रहने को कहा.

रुकसाना की गंद मे उंगली करने से वो गरम हो चुकी थी जिस से 2 मिनिट मे रुकसाना की चूत से पानी निकल गया.

पानी निकलते ही रुकसाना ठंडी पड़ गयी. और मैं रुकसाना के उपर से अलग हो गया.

अवी-रज़िया बन जाओ घोड़ी.

रज़िया को तो यही चाहिए था. रज़िया घोड़ी बन गयी और मैं ने अपने लंड पर तेल लगा लिया

रुकसाना अपना पानी निकाल कर खुश थी. उसके गंद का दर्द चूत के पानी से ख़तम हो गया.

रुकसाना खुश थी क्यू कि रज़िया से पहले उसकी एक बार चुदाई हुई और 2 बार बाकी थी .

रज़िया भी गंद मे लंड लेने को तैयार हो गयी. घोड़ी बन ने के बाद भी मैं लंड को अच्छे से तेल लगाने तक रुका रहा.

उसके चूतड़ो को फिर से फैला कर गंद मे उसके हिस्से का तेल डाल कर गंद को और चिकना किया.

 
547

अवी-रज़िया डाल दूं

रज़िया-कब से डाल ने की जगह टाइम पास कर रहे हो ,अब डाल दो

अवी-चीखना मत

रज़िया-दर्द हुआ तो चिलाउन्गी ज़रूर, अब डाल दो

मैं ने लंड को रज़िया के चूत पर रगड़ने लगा. फिर गंद की छेद पर सेट किया.

और एक जोरदार झटका मारा जिस से लंड 3 इंच तक अंदर चला.

लंड की मोटाई 2 उंगली और पेन से ज़्यादा थी.गंद कुवारि थी.

लंड थोड़ा अंदर जाते गंद ने फैलना शुरू किया.

गंद के फैलने से रज़िया को दर्द हुआ पर ज़्यादा दर्द नही हुआ.

उसके मूह से एक बार आअहह निकली ,फिर उसने अपने होंटो को दांतो से दबा दिया.

उसके ऐसा करने से मुझे दूसरा झटका मारने की पर्मिशन मिल गयी.

मैं ने रज़िया की कमर को पकड़ लिया और एक जोरदार झटका मारा ,लंड बस 2 इंच बाहर रह गया.

उंगली की लंबाई ख़तम होते ही लंड ने अपना नाम गंद पर लिख दिया.

लंड उंगली से कही ज़्यादा अंदर चला गया था.

रज़िया की टाइट गंद ने मेरा लंड लगभग निगल लिया था.

मेरे दूसरे झटके से रज़िया की आँखे बाहर और सास अंदर और चीख बाहर निकल गयी.

आआआआअहह........मरररर....गाइिईई.... अम्मिईीई..,अवीíईयी..दर्द हूऊओ...रहाा...हाईईइ....बाहर्र्ररर...निकालूऊ

रज़िया की चीख सुनकर रुकसाना होश मे आ गयी और हमारी तरफ देखने लगी.

रज़िया का चिल्लाना देख कर रुकसाना को डर लगने लगा.

अवी-रुकसाना अपनी गंद पर तेल अच्छे से लगा लो, तुम्हारे पास टाइम है.

रुकसाना ने अपनी गंद की तरफ देखा और तेल की बॉटल उठा ली. और गंद को खोलने के लिए कुछ ढूँढने लगी.

इधर रज़िया चिल्ला रही थी.

अवी-रज़िया बाहर निकाल रहा हूँ ,अपनी गंद ढीली कर दो

रज़िया ने गंद ढीली कर दी, मैं ने लंड को टोपा तक बाहर निकाला और लंड पर तेल डाल कर एक झटके मे पूरा लंड अंदर डाल दिया.

रज़िया दर्द से चिल्लाने लगी.

पर उसके चिल्लाने से कोई फ़ायदा नही होगा. उसका चिल्लाना बेवजा था.

मैं ने नीचे हाथ डालकर 2 उंगली को रज़िया की चूत मे डाल कर ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा.

लंड अभी भी गंद मे था.

रज़िया ,गंद मे उंगली करने से, रुकसाना की चुदाई करने से गरम हो चुकी थी. जिस से उसकी चूत ने जल्दी पानी छोड़ दिया.

चूत से पानी निकलते ही रज़िया का ध्यान गंद के दर्द से हट कर चूत पर चला गया.

पैर मे दर्द होने से हाथ पर चिमती काटने से बिना मेडिसिन लिए पैर का दर्द कम हो जाता है वैसे रज़िया का ध्यान भटकते ही दर्द कम हो गया.

रुकसाना अपने काम मे लगी हुई थी, उसे पता था कि रज़िया के बाद उसका नंबर है

रुकसाना अपनी गंद पे तेल डाल कर उंगली से जगह बनाने लगी.

रज़िया का पानी निकलते ही मुझे पर्मिशन मिल गयी.

अवी-रज़िया धक्के मारू

रज़िया ने हाँ मे गर्दन घुमा दी.

मैं ने लंड को टोपे तक बाहर निकाल कर ,लंड पर लगे हुए खून को तेल से धो कर लंड को गंद मे डाल दिया.

ऐसा करने से लंड गंद मे जगह बनाने लगा. रज़िया को थोड़ा दर्द होने लगा.

ऐसा करने से लंड जितना अंदर जाता ,उस से रज़िया को मेरे लंड की लंबाई और मोटाई पता चल रही थी.

थोड़ी देर ऐसा करने से रज़िया को दर्द और मज़ा दोनो मिलने लगा.

रज़िया को चूत का एक्सपीरियेन्स था कि पहले दर्द फिर मज़ा मिलता है, वही रूल गंद पर इस्तेमाल कर रही थी.

धीरे धीरे लंड पर जो गंद को कसाव था वो ढीला पड़ने लगा.

लंड आराम से गंद मे जाने लगा.

पर दर्द अभी था. और ये दर्द इतनी जल्दी जाएगा नही. थोड़ा दर्द और ज़्यादा मज़ा जल्दी स्टार्ट हो जाएगा.

अवी-रज़िया मज़ा दूं

रज़िया ने फिर हाँ मे गर्दन घुमा दी.

रज़िया की पर्मिशन मिलते मैं ने धक्को की गति बढ़ा दी.

गति बढ़ते ही रज़िया को दर्द होने लगा. पर मैं रुका नही. बल्कि कमर को पकड़ कर जोरदार धक्के मारने लगा.

रज़िया के मूह से दर्द ओरमज़े की मिली जुली आवाज़ निकल रही थी.

मेरे धक्को से रज़िया की गोरी गंद लाल हो चुकी थी.

मेरे हर धक्के से कमरे मे पुत्च की आवाज़ गूँग जाती. और तेल लगा होने से आवाज़ मज़ेदार हो जाती.

रज़िया की गंद मे मेरे लंड ने बोरवेल बना दी थी .सिर्फ़ पानी निकालना बाकी था.जो कभी नही निकलेंगा.

पर मेरा पानी इतनी जल्दी निकलने वाला नही था.

रज़िया को मज़ा तो मिल रहा था पर मेरे धक्को से कमर मे दर्द और घोड़ी बन ने से घुटनो मे दर्द हो रहा था.

मेरे धक्को से वो अपने बदन को इधर उधर हिला देती.

रज़िया को और मज़ा तभी मिलेगा जब पोज़िशन चेंज होगी.

मैं लगभग 20 मिनिट से रज़िया की गंद घोड़ी बना कर मार रहा था. और अब रज़िया को पोज़िशन चेंज करने की ज़रूरत थी.

पर मैं रुकने का नाम नही ले रहा था.

पहले रज़िया की आँखो से पानी निकाला और अब रज़िया की चूत से पानी निकाला.

रज़िया की चूत ने एक और बार पानी निकाला और मैं और 5 मिनिट तक गंद मारता रहा.

अवी-रज़िया और मज़ा चाहिए

रज़िया-हाँ

अवी-तो पोज़िशन चेंज करते है.

मेरी बात सुनकर रज़िया खुश हो गयी

मैं ने रज़िया को गद्दे पर बैठा दिया और रज़िया की गंद के नीचे पिल्लो रख दिया.

रज़िया को अपने पैर पकड़ने को कहा और लंड को रज़िया की गंद पर सेट किया.

रज़िया को एक किस करने के बाद लंड को रज़िया की गंद मे उतार दिया.

रज़िया अपनी आँखे बड़ी बड़ी करके लंड को गंद मे जाते हुए देख रही थी.

लंड गंद मे जाते ही रज़िया ने लंबी सास ली और मैं ने धक्के मारना शुरू किया.

रज़िया इस बार लंड को गंद मे जाते हुए देख रही थी. और मज़े मे शीष्कारिया ले रही थी.

आआआआअहह........ कककककचहााआअक्ककककककचहााआ............... ,अम्म्म्ममममममि.............. ओउउर्र्र्ररर जोर्र्र्र से मरर्ररूव

रज़िया की शीष्कारिया सुनकर मैं और ज़ोर से गंद मारने लगा.

हमारी चुदाई देख कर अब रुकसाना को कुछ राहत मिली. रज़िया को मज़ा लेते हुए देख कर रुकसाना को अच्छा लगा.

रज़िया की गंद मारने मे मुझे मज़ा आ रहा था

रज़िया को इस पोज़िशन मे गंद मरवाने मे मज़ा आ रहा था. पर कितना मज़ा लेगी.

15 मिनिट तक रज़िया को मज़ा मिलता रहा. और अब रज़िया को दर्द होना शुरू हुआ

रज़िया-अब बस करो दर्द हो रहा

मेरा पानी अभी तक निकला नही था.

मैं ने रज़िया को वैसे ही गद्दे पर धक्का दे कर लिटा दिया.

और मैं भी रज़िया की उपर गिरता गया और धक्के मारता गया.

रज़िया मेरे नीचे से निकलने की कॉसिश करने लगी. पर मैं ने उसको कोई चान्स नही दिया.

लगातार और फुल स्पीड से रज़िया की गंद मारता गया.

रज़िया को ज़्यादा दर्द होने लगा. रज़िया की आँखो से पानी निकल रहा था.

पर मैं ने रज़िया पे ध्यान नही दिया बस धक्के मारता गया.

रज़िया की आँखो से पानी निकल रहा था. उसी के साथ मेरे लंड से वीर्य निकल गया.

वीर्य निकलने से गंद मे जो जलन हो रही थी वो रुक गयी.

रज़िया को भी आराम मिला.

मैं तो ज़ोर ज़ोर से हाफ़ रहा था.

मेरा पूरा वेट रज़िया के उपर था जिस से उसको भी नॉर्मल होने मे परेशानी होने लगी.

मैं रज़िया के उपर से अलग हो कर साइड मे लेट गया. और हम दोनो नॉर्मल होने लगे.
 


548

रज़िया की गंद मार कर दिल खुश हो गया.

रज़िया अपने पैरो को फैला कर लेटी हुई थी.

रुकसाना अपनी गंद मे उंगली कर रही थी.

अवी-रज़िया एक और राउंड हो जाए

मेरी बात सुनकर रज़िया अपनी आँखे बड़ी कर के मेरी तरफ देखने लगी.

रज़िया-एक और राउंड, मुझे मारने का इरादा है क्या,

अवी-मार डालूँगा तो मेरे लंड का क्या होगा.

रज़िया-रुकसाना हैना

अवी-अरे हाँ, रुकसाना की गंद मारनी बाकी है,

अवी-रुकसाना तुम तैयार हो जाओ मैं फ्रेश होकर आता हूँ

रुकसाना ने हाँ मे गर्दन घुमा दी.मैं बाथरूम मे जाकर फ्रेश हो गया.

रुकसाना रज़िया की गंद देख रही थी.

अवी-रुकसाना क्या देख रही हो, तुम्हारी भी गंद ऐसी होगी.डर लग रहा हो तो थोड़ा आराम कर लो ,थोड़ी देर बाद कर लेंगे

रुकसाना-थोड़ी देर बाद भी दर्द होगा, और अब करोगे तो भी दर्द होगा. अभी कर लो, पर आराम से करना

अवी-आराम से ही करूँगा.तुम ने तो अपनी गंद को और चिकना कर दिया है.

रुकसाना-कर तो दिया है, फिर भी आराम से करना,

अवी-प्यार से करूँगा,पर पहले लंड को खड़ा करो

मैं रुकसाना के पास जाकर खड़ा हो गया.रुकसाना ने डर को ख़तम करके लंड को हाथ मे पकड़ लिया. और सहलाने लगी.

रुकसाना-ऐसे ही डाल दो ,बाद मे खड़ा होने पर फिर डाल देना

अवी-ऐसा नही होता रुकसाना डार्लिंग, चलो मूह मे लेकर चूसना शुरू करो

रुकसाना ने लंड को मूह मे ले लिया.और धीरे धीरे लंड को चूसने लगी.

रज़िया अपनी गंद को आराम दे रही थी. और रुकसाना अपनी गंद मे दर्द हो इस लिए लंड खड़ा कर रही थी.

मैं ने रुकसाना के रेशमी बालो को पकड़ लिया.जिस से रुकसाना आराम से लंड चूस रही थी.

रुकसाना इस लिए आराम से लंड चूस रही थी क्यू कि उसे पता था कि लंड खड़ा होते ही उसकी गंद फाड़ देगा.

पहले दर्द की बड़ी बड़ी बातें कर रही थी और अब गंद मे लंड से डर रही थी.

लेकिन आज रुकसाना की किस्मत मे लिखा था कि उसकी गंद मे मेरा लंड होगा.

रुकसाना ने टाइम लगाया पर गोली खाने से लंड खड़ा हो गया.

लंड खड़ा होते ही मैं ने लंड को रुकसाना की मूह से बाहर निकाला और पास मे पड़ी हुई तेल की नयी बॉटल उठा ली.और लंड पर तेल लगाने लगा.

मैं लंड पर तेल लगा रहा था कि रज़िया अपनी जगह पर खड़ी हो गयी.

और लंगड़ते हुए बाथरूम की तरफ जाने लगी.

अवी-रुकसाना देखो ,तुम भी थोड़ी देर बाद ऐसे ही लंगड़ाते हुए चलने वाली हो.

रुकसाना ने मूह टेढ़ा किया ,और रज़िया की चेहरे पे स्माइल आ गयी क्यूँ कि रुकसाना की हालत उसकी तरह होने वाली है.

रज़िया तो बाथरूम मे चली गयी.और रुकसाना मेरी तरफ देखने लगी.

अवी-ऐसे क्या देख रही हो,घोड़ी बनो

रुकसाना-आराम से करना

अवी-तुम्हे पता भी नही चलेगा कि कब लंड अंदर गया ,चलो जल्दी घोड़ी बन जाओ

रुकसाना घोड़ी बन गयी. लंड पर तेल लगाना भी हो गया.

मैं रुकसाना के पीछे आ गया और चूत पर किस किया और लंड को गंद के छेद पर सेट किया.

अवी-रुकसाना तुम्हे पता है गंद को कितना भी लंड लेने को तैयार करो ,पर जब लंड गंद मे ज़्यादा है तो दर्द होता ही है, ये यूनिवर्सल ट्रूथ है.

इतना कहते ही मैं ने रुकसाना की कमर को पकड़ कर एक ज़ोर दार झटका मारकर 3 इंच लंड गंद मे डाल दिया.

रुकसाना के मूह से दबी हुई चीख निकल गयी.

मैं ने झुक कर रुकसाना के मूह की तरफ देखा तो रुकसाना के मूह मे ब्रा थी.

मान गये रुकसाना को, गंद को 3 उंगली डाल कर चिकना किया और दर्द भी बर्दास्त करना चाहती है.

पहले दर्द पर रज़िया को भाषण दिया, फिर डरने का नाटक किया और अब दर्द को बर्दास्त कर रही है.

मैं ने फिर से एक झटका मारा, और लंड का टोपा वहाँ तक चला गया ,जहा तक उंगली नही जा सकती.

लंड 6 इंच तक रुकसाना की गंद मे चला गया.रुकसाना की आँखो से पानी निकल गया.

रुकसाना को चिकना था ,रोना था फिर भी रुकसाना ने अपने मूह से ब्रा नही निकाली.

रुकसाना अपने दर्द के घूँट पीने लगी. पर बिना आवाज़ किए

मुझे एक और झटका मारना था पर मैं ने ऐसा नही किया. मैं ने कमर पर रखा हुआ एक हाथ रुकसाना की चूत पर ले लगा.

और रुकसाना के दाने को ज़ोर ज़ोर से सहलाने लगा.

ऐसा करने से रुकसाना के बदन को अजीब सा एक्सपीरियेन्स मिल रहा था. दर्द पर चूत का मज़ा

रुकसाना ने अपने मूह मे रखी हुई ब्रा निकाल ली, और हाँफने लगी साथ मे दर्द और मज़े के मिलन से निकलने वाली आवाज़ मुझे सुनाई दे रही थी.

रुकसाना को मेरा इस तरह चूत को सहलाना अच्छा लग रहा था. क्यू कि उसे पता था कि रज़िया के साथ मैं ने ऐसा नही किया था.बस उंगली डाल कर पानी निकाला था.

रुकसाना के आवाज़ो मे कभी दर्द ज़्यादा लग रहा था तो कभी मज़े की शीष्कारिया ज़्यादा थी.

और आख़िर बाजी मज़े की शीष्कारियो ने मार ली, चूत से तूफान आ गया.

चूत से पानी निकलते ही रुकसाना का दर्द कम हुआ और मैं भी तैयार था रुकसाना की गंद मारने को

मैं ने धीरे से लंड बाहर निकलना शुरू किया.

लंड को तो गंद ने ऐसा पकड़ रखा था कि ,लंड को कभी बाहर निकालने नही देगा.

मैं ने लंड को टोपे तक बाहर निकाल कर फिर से तेल से नहलाया और धीरे धीरे गंद मे डाल दिया.

अभी तक पूरा लंड अंदर नही गया था ,पर जितना गया था उतना काफ़ी था.

लंड को बार बार तेल लगाकर गंद मे डालने से गंद ने लंड को अपना राजा कबुल कर लिया. लंड ने एक और गंद अपने नाम पर कर ली.

रुकसाना को मेरा इस तरह धीरे धीरे करना अच्छा लग रहा था.

गंद मे दर्द था पर रुकसाना को मेरा धीरे धीरे करना पसंद आया जिसके सामने ये दर्द कुछ भी नही था.

अवी-रुकसाना धक्के मारू

रुकसाना-धीरे धीरे ज़ोर से

रुकसाना ने जैसा कहा मैं वैसा करता गया.धीरे धीरे मैं गंद मारता गया.

2 कुवारि गंद पर मैं ने 3 बॉटल तेल इस्तेमाल किया. मुझे इनकी गंद से ज़्यादा अपने लंड का ख़याल रखना था.

जैसे जैसे रुकसाना को मेरे धक्को से मज़ा आने लगा. वैसे वैसे मैं ने अपनी गति बढ़ा दी.

मेरे गति बढ़ने से पहले रुकसाना को दर्द हुआ पर बाद मे रुकसाना मेरे धक्को का साथ देने लगी.

हम अपनी धुन मे चुदाई कर रहे थे. रुकसाना की गंद मारने मे मैं इतना खो गया कि मुझे पता भी नही चला कि कब पूरा लंड अंदर चला गया.

रुकसाना तो अपने मज़े मे थी, उसे रोकने वाला कोई नही था.

मैं कंटिन्यू रुकसाना की गंद मारता गया. चूतड़ को लाल बंदरिया की तरह बनाता गया.

20 मिनिट से रुकसाना की गंद मार कर मज़ा लिया.

अब समय हो गया था कुछ आराम करने का. मैं ने लंड को रुकसाना की गंद से पक की आवाज़ के साथ बाहर निकाला और गद्दे पे जाकर लेट गया.

रुकसाना मेरी तरफ देखने लगी.

अवी-मेरे उपर आ जाओ,

रुकसाना मेरे उपर बैठे कर गंद मे लंड ले लिया.

और धीरे धीरे उपर नीचे होने लगी.

मुझे अपना पानी निकालने के लिए थोड़ा आराम की ज़रूरत थी.

इस लिए अब रुकसाना अपनी गंद मरवा रही थी. उसने ज़्यादा ताक़त नही थी फिर भी वो धीरे धीरे गंद मे लंड ले रही थी.

रज़िया भी बाथरूम से बाहर आ गयी और हमे इस तरह देख कर रुकसाना के पास आकर देखा की लंड गंद मे है या चूत मे

लंड को गंद मे देख कर चुप चाप बेड पर जाके पेट के बल लेट गयी. मैं रज़िया के इस हरकत से हँसने लगा.

रुकसाना को कुछ समझ मे नही आया .वो बस लंड पर उछलती रही.

थोड़ी देर आराम करने के बाद मैं ने रुकसाना को रोक दिया और गद्दे पर लेटा दिया. उसकी गंद के नीचे पिल्लो रख दिया.

रुकसाना-अब चूत मार लो

अवी-गंद मे जब तक मेरा वीर्य नही जाएगा तब तक गंद की चुदाई पूरी नही होगी.

और मैं ने फिर से रुकसाना की गंद मे लंड पेल दिया.

और धक्के मारने लगा. बीच बीच मे मैं तेल डाल कर अपने पिस्टन को अंदर बाहर होने मे मदद कर रहा था.

एक लिमिट तक रुकसाना को मज़ा आता गया. पर धीरे धीरे रुकसाना का मज़ा कम होने लगा. पर तेल की सप्लाइ से उसको ज़्यादा दर्द नही हो रहा था.

रज़िया की तरह रुकसाना की गंद मारते हुए मैं आख़िरी मोड़ पर जानवर बन गया.

वो रज़िया थी ये रुकसाना है, रुकसाना ने दर्द को बर्दास्त करके मेरा वीर्य अपनी गंद मे ले लिया.

गंद मे वीर्य लेते ही रुकसाना मुझ से लिपट गयी और फिर मुझे साथ लेकर गद्दे पर गिर गयी

 


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रुकसाना की गंद मे वीर्य डालने के बाद मैं थोड़ी देर ऐसे ही रुकसाना से लिपट कर लेटा रहा.

रुकसाना का बदन पूरा ढीला पड़ गया था.

मेरा भी कोटा पूरा हो गया था. 2 कुवारि गंद का उद्घाटन कर दिया था.

आज रुकसाना और रज़िया की आख़िरी चुदाई थी. परसों मुझे इनके साथ करने से ज़्यादा इम्पोर्टेंट काम था

रुकसाना मुझ से ज़्यादा थक गयी थी, उसकी हालत मरे हुए मुर्दे जैसी हो गयी थी.

मेरा लंड अभी भी रुकसाना की गंद मे था.

मैं रुकसाना से जल्दी नॉर्मल हो गया.

रज़िया ने तो खर्राटे मारना शुरू कर दिया था.रज़िया ने कपड़े नही पहने थे पर ब्लंकेट लेकर घोड़े बेच कर सो रही थी.

मैं रुकसाना के उपर से अलग हो गया. मेरा मुरझाया हुआ लंड रुकसाना की फटी हुई गंद से बाहर आ गया.

लंड गंद से बाहर निकलते ही, गंद से वीर्य और तेल बाहर निकलने लगा.

गद्दे का तो बुरा हाल हो गया था. जगह जगह पर खून, चूत का पानी, मेरा वीर्य, और तेल के दाग थे

गद्दे को फेक कर नया गद्दा लाना होगा या फिर इस गद्दे पे एक कवर लाना होगा. अभी के लिए कवर लगा दूँगा.

मैं नॉर्मल होने के बाद बाथरूम मे जाकर नहाने लगा.

रज़िया ने मेरे और रुकसाना के लिए पानी गरम करके रखा था.

ठंडी के दिन मे 2 कुवारि गंद मारने के बाद नहाने मे मज़ा आ रहा था.

हमारी तरफ ज़्यादा ठंड नही पड़ती थी फिर भी ये ठंड का मज़ा अलग था.

मैं नहाने के बाद रुकसाना के पास आ गया.

रुकसाना अभी भी अपने पैर फैका कर लेटी हुई थी.

मैं रुकसाना को सहारा दे कर बाथरूम मे ले गया.

रुकसाना बाथरूम मे जाकर अपनी गंद को साफ करने लगी.

मैं ने ज़मीन पर पड़े हुए गद्दे को पलट दिया जिस से दाग वाला हिस्सा नीचे दब गया.

रुकसाना के लिए एक ब्लंकेट रख दिया ,

और रज़िया के ब्लंकेट मे जाकर रज़िया के बदन की गर्मी लेते हुए सो गया

रुकसाना कब आकर अपनी जगह पर सो गयी पता भी नही चला.

कल मैं ने कुछ ज़्यादा ही आराम किया था.जिस के वजह से मेरी नींद जल्दी खुल गयी.

मैं ने मोबाइल मे टाइम देखा तो अभी 4.20एएम बज रहे थे, मैं ने फिर से सोने की कोशिस की पर नींद नही आ रही थी.

मैं बाथरूम मे जाकर हल्का हो गया और कमरे की लाइट ऑन की,

रज़िया बेड पर अपनी गंद मुझे दिखाते हुए सो रही थी और रुकसाना नीचे ज़मीन पर रज़िया की तरह सो रही थी.

रज़िया का पूरा नंगा बदन ब्लंकेट से आज़ाद था ,और रुकसाना की कमर के उपर ब्लंकेट था.

दोनो की गंद देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया

नींद नही आ रही थी .और ये सुबह की ठंडी, क्यू ना रज़िया और रुकसाना की चुदाई कर लूँ,

ऐसा करने से टाइम निकल जाएगा, मुझे गर्मी मिलेंगी, दोनो की फिर से आख़िरी बार चुदाई हो जाएगी.

मैं ने तेल की 3र्ड बॉटल जो अभी आदि भरी हुई थी उसे उठकर लाइट ऑफ करके रज़िया के पास लेट गया.

रज़िया पेट के बल लेट रही थी. उसने सोते हुए अपने पैर फैला कर रहे थे.

मैं धीरे से उसके उपर लेट गया. और लंड को चूत पर रख दिया.

और धीरे धीरे लंड रज़िया की चूत मे डालने लगा. लंड आराम से रज़िया की चूत मे चला गया.

रज़िया के बदन मे थोड़ी हलचल हो गयी. उसने अपना चेहरा एक तरफ कर दिया .

मैं ने रज़िया को किस करके उठा दिया.

रज़िया-क्या कर रहे हो, सोने दो ना

अवी-चुदाई कर रहा हूँ, करने दो

रज़िया-सोने दो ना

अवी-ये शायद आख़िरी चुदाई हो सकती है. परसो का फिक्स नही है.

रज़िया-आँखे खोल कर, आख़िरी ,बिना आवाज़ के करो .रुकसाना जाग जाएगी.

रज़िया के हाँ करते मैं धीरे धीरे रज़िया की चूत मारने लगा.

लंड चूत मे रख कर अपनी कमर हिला कर रज़िया की चूत मारने लगा.

रज़िया ठंडी मे मेरे गरम लंड का मज़ा ले रही थी.

रज़िया की चूत मारने मे वो भी सुबह सुबह मज़ा आ रहा था.

धीरे धीरे चूत मारने का मज़ा लेने मे अलग आनंद था.

ज़ोर से धक्के मारने से बेड की आवाज़ से रुकसाना जाग जाएगी.

रज़िया मेरे लंड को ज़्यादा देर बर्दास्त नही कर पाई और रज़िया ने पानी छोड़ दिया.

रज़िया के पानी छोड़ते मैं ने लंड चूत से बाहर निकाल लिया

रज़िया-क्या हुआ,

अवी-अब गंद

रज़िया-वहाँ दर्द हो रहा है

अवी-आख़िरी बार है, बस 5 मिनिट करूँगा.

रज़िया-प्यार से करना

और स्टेप बाइ स्टेप लंड रज़िया की फटी हुई गंद मे डाल दिया.

रज़िया को दर्द हुआ पर ये तो होगा ही.

रज़िया की गंद मारने मे मैं कमर हिलने के साथ थोड़ी उपर भी कर रहा था

रज़िया की दमदार गंद मारने मे मज़ा आ रहा था.

रज़िया जो बिना मेहनत किए मुझे मिल गयी.

पहली मुलाकात मे कुवारि चूत और आख़िरी मुलाकात मे कुवारि गंद मुझे दी.

रज़िया की चुदाई को बहुत एंजाय किया मैं ने,

अगर मुझे ये कुवरसिंघ की टेन्षन नही होती तो परसो भी इन दोनो की गंद मार देता.

जैसा प्रॉमिस किया मैं ने ठीक उसी तरह 5 मिनिट तक रज़िया की गंद मारी.

5 से 6 मिनिट हो गये .और मैं ने लंड को रज़िया की गंद से बाहर निकाला.

रज़िया-अब क्या हुआ

अवी-अब रुकसाना की बारी है

रज़िया-पहले मेरे साथ पूरा कर लो फिर रुकसाना के पास जाना

अवी-अरे समझा करो ये आख़िरी चुदाई है, तुम्हारे फ्रेंडशिप के नाम

रज़िया-लेकिन

अवी-मैं तुम्हारी ज़्यादा बार चुदाई कर चुका हूँ, और रुकसाना को प्रॉमिस किया था कि सुबह उसकी चुदाई करूँगा.

रज़िया-थोड़ा सा

अवी-तुम्हारा जो एक बार पानी निकाला वो रुकसाना का हिस्सा था,तुम मुझे पसंद हो इस लिए तुम्हे थोड़ा प्यार दिया.

रज़िया-थॅंक्स, जाओ रुकसाना के पास, पर मुझे कभी भूलना मत, अगर किस्मत ने फिर मिलाया तो ...

अवी-जहाँ मिलाया ना उसी जगह पर तुम्हारी चुदाई करूँगा.

और रज़िया ने मुझे किस किया

रज़िया-ये मेला मुझे हमेशा याद रहेगा

अवी-और मैं

रज़िया-तुम्हारे वजह से तो ये मेला याद रहेगा.

अवी-मुझे भी ये मेला हमेशा याद रहेगा,

रज़िया-अब जाओ रुकसाना के पास

अवी-वो तो जाउन्गा पर तुम्हे पता हैना कि कहाँ रखनी है

रज़िया-हाँ,तुम उसकी टेन्षन मत लो, आज हम तुम्हारे साथ बाहर चले जाएँगे

अवी-तुम थोड़ी देर सोने का नाटक करो मैं चला रुकसाना के पास

रज़िया सोने का नाटक करने की जगह सच मे सो गयी. और मैं रुकसाना के पास चला गया.

 
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