• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

मैं और मेरा परिवार

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
फ्लॅशबॅक 1021

सुमन 8

छोटू की शादी को शालिनी के आते ही जैसे उस घर मे नयी जान आ गयी थी

फिर से हँसने की आवाज़ो से घर खिल गया था

नेहा के नाम की आवज़े घर मे गूँज रही थी

स्वेता सीतल अवी के भागने , मस्ती करने से पिताजी थकना किसे कहते है वो भूल गये थे

पिताजी को तो जैसे उनका बचपन वापस मिल गया था अवी को देख कर

पिताजी को छोटू की शादी से ज़्यादा अवी स्वेता सीतल के साथ खेलना अच्छा लग रहा था

पिताजी कभी घोड़ा बन जाते तो कभी ट्रेन बन जाते

अवी को तो ऐसा लग ही नही रहा था कि वो अपने घर मे ना हो , अवी तो अपने दादाजी के पास ही रह रहा था

दादाजी के साथ खाना खाना उनके साथ खेलना उनके साथ सोना , दादाजी से कहानी सुनना ,

पिताजी 3 र्ड टाइम अपना बचपन जी रहे थे , पहली बार खुद का बचपन , फिर नेहा जयसिंघ का बचपन , और अब अवी स्वेता सीतल के साथ बचपन को फिर से जी रहे थे , अगेर कोमल चलने लगती तो कितना अच्छा होता ,

माँ ने भी सारे काम पूजा और शालिनी के भरोसे छोड़ कर बच्चो के साथ वक्त बिता रही थी

छोटू जयसिंघ के साथ तो ज़्यादा से ज़्यादा समय बिता रही थी माजी

शालिनी तो अपनी ननद के साथ खुश थी ,

कभी पूजा शालिनी को पकड़ कर अपने कमरे मे के जाती और बाते करती , तो कभी नेहा शालिनी के साथ वक्त बिताती तो कभी नीता , शालिनी को समय ही नही मिल रहा था जयसिंघ के लिए

जैसे हर कोई बिज़ी था

छोटू तो सुमन के सपनो मे बिज़ी था

जयसिंघ ज़्यादातर समय अपने कमरे मे रहता

पर पिताजी बच्चो के साथ खेलते जिस से छोटू की शादी के काम जयसिंघ को करने पड़ रहे थे

पिताजी और जयसिंघ मे बात नही हुई

जयसिंघ को गाँव आए हुए 1 हफ़्ता हो गया था पर ज़सयसिंघ की पिताजी से कोई बात नही हुई , पिताजी खुद को बच्चो मे बिज़ी रखते जिस से वो खुद को जयसिंघ से दूर रखते

जब तक जयसिंघ नेहा को माफ़ नही करेगा या नेहा जयसिंघ कोमाफ नही करेगी तब तक पिताजी कैसे बात करते जयसिंघ से

जयसिंघ की इस बात का पता चल गया पर ये भी लग रहा था कि पिताजी बच्चो मे बिज़ी है

पर क्या उनके पास एक मिनिट नही है अपने बेटे के लिए , जयसिंघ बस इस लिए चुप था कि उसने शालिनी को प्रॉमिस किया था कि वो कोई सीन क्रिएट नही करेगा

छोटू से वादा किया था कि वो शादी होने तक गाँव मे रुकेगा

जयसिंघ की घर मे सब से बात हुई बस नेहा और पिताजी से कोई बात नही हुई

शालिनी ने भी देख लिया की पिताजी क्या कर रहे है

शालिनी को ये अच्छा लगा , शायद इस से जयसिंघ को ये लगेगा कि वो क्या मिस कर रहा है , जयसिंघ को अहसास हो जाएगा

जयसिंघ भी खुद को शादी के कामों मे बिज़ी रखता

जयसिंघ ने कोमल को भी प्यार नही किया

नेहा को ये पसंद नही आ रहा था

एक तरफ शालिनी कोमल को अपना समझती थी तो जयसिंघ उसकी तरफ देखता भी नही

इसी बीच नेहा ने फिर से शालिनी को जयसिंघ की शिकायत की

नेहा - भाभी

शालिनी- क्या है नेहा

नेहा - भैया मेरे साथ ऐसा क्यूँ कर रहे है

शालिनी- अब क्या हुआ

नेहा - उनको लगता है कि मैं ने ग़लत किया है तो मुझे सज़ा दे पर नन्ही जान कोमल ने क्या गुनाह किया

शालिनी- बस इतनी सी बात से तू परेशान जी गयी

नेहा - मुझे कितना बुरा लग रहा होगा जब भैया कोमल की तरफ देखते भी नही

शालिनी- तुम्हारे भैया का दिल भी कोमल को प्यार करने का कर रहा है पर वो भी इस बात से दूर भाग रहे है

नेहा - क्या मतलब

शालिनी- तुझे दिखाना पड़ेगा

नेहा - क्या?

शालिनी- कोमल के दूध पीने का समय हुआ है ना

नेहा - हाँ

शालिनी- कोमल को दूध मत पिला , मेरे पास लेकर आ

नेहा - आप करना क्या चाहती है

शालिनी- तुझे दिखाना चाहती हूँ की तेरे भैया कोमल के बारे में क्या सोचते है

नेहा - मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा है

शालिनी- तू कोमल को मेरे पास लेकर आ

नेहा को कुछ समझ नही आ रहा था

नेहा कोमल को लेकर शालिनी के पास आ गयी

शालिनी ने कोमल को लेकर नेहा के पीछे आने को कहा

शालिनी अपने कमरे के पास गयी और नेहा को खिड़की से अंदर देखने को बोल कर कोमल को लेकर अंदर चली गयी

नेहा को कुछ समझ नही आ रहा था कि भाभी कर क्या रही है

शालिनी कोमल को प्यार करते हुए कमरे मे आ गयी जहाँ जयसिंघ बेड पे आराम कर ताहा था

जयसिंघ ने शालिनी के हाथो मे कोमल को देखा पर वो ऐसे ही लेटा रहा

शालिनी- आप आराम कर रहे है

जयसिंघ- हाँ , वो छोटू के दोस्त को बोल दिया है शहर जाके बॅंड और घोड़ी वाले से बात करे

शालिनी- बॅंड अच्छा बुलाना मैं तो छोटू की शादी मे नाचूंगी

जयसिंघ-तुम्हें जो करना है वो करना पर मुझे बीच मे मत लाना

शालिनी- नही लाउन्गि , लगता है कोमल को भूक लगी है

जयसिंघ-ह्म्‍म्म्म

शालिनी- देखो मेरे दूध को मूह लगा रही है

जयांघ ने देखा कि कोमल कैसे शालिनी के दूध के साथ खेल रही है

शालिनी- आअहह

जयसिंघ- क्या हुआ

शालिनी- पेट मे गॅस हो गयी है , लगता है मुझे जाना होगा

और शालिनी कोमल को बेड पे रख कर कमरे से बाहर भाग गयी

जतसिंघ- शालिनी शालिनी , इसको इसकी माँ के पास तो ले जाओ

पर शालिनी कहाँ कुछ सुनने वाली थी ,

शालिनी तो भाग कर नेहा को अपने साथ बाथरूम मे ले गयी

जयसिंघ - ये शालिनी भी ना

कोमल को भूक लगी थी , अगर वो ज़्यादा देर बेड पे रही तो रो देगी

जयसिंघ ने एक बार डोर की तरफ देखा और फिर कोमल के पास आकर उसको देखने लगा

जयसिंघ- कितनी प्यारी है ,

जयसिंह ने डोर की तरफ देखा और किसी को ना देख कर कोमल की पप्पी ली

जयसिंघ के मुँह लगाने से कोमल रोने लगी

जयसिंघ- ये तो रो रही है , ये शालिनी भी ना , मुझे कहाँ फसा कर भाग गयी

कोमल रोने लगी

जयसिंघ- अब मैं क्या करूँ , कैसी है नेहा , कोमल का रोना सुनकर भी नही आई

कोमल का रोना बंद नही हो रहा था

जयसिंघ- क्या करूँ , माँ को बुलाता हूँ

जयसिंघ भाग कर रशोई घर मे गया ,

पर वहाँ माँ नही थी , माँ तो नीता और पूजा के साथ मंदिर गयी थी
 
पिताजी अवी स्वेता और सीतल को लेकर हवेली गये थे टाइगर के साथ खेलने के लिए

जयसिंघ ने छोटू को पूछा कि नेहा कहाँ है

जयसिंघ- छोटू सब कहाँ है

छोटू-माँ मंदिर गयी है , पिताजी हवेली गये है

जयसिंघ- नेहा कहाँ है उसकी बेटी रो रही है

छोटू- मुझे क्या पता नेहा कहाँ है

जयसिंघ- चल मेरे साथ और कोमल को चुप करा

च्चितू- देखो भैया , मुझे बच्चे संभालने नही आते , मैं वहाँ आया तो भी चुप नही कर पाउन्गा , और आपको तो एक्सपीटियेन्स भी है ,

जयसिंघ- ठीक है , पर कोई आए तो मुझे बताना

जयसिंघ वापस अपने कमरे मे आया

कोमल रो रही थी

जयसिंघ- कहाँ फसा गयी शालिनी मुझे

जयसिंघ- मेरी माँ चुप हो जा

शालिनी नेहा को लेकर खिड़की के पास आकर अंदर देखने लगी

जयसिंघ- क्या करूँ , कोमल को ऐसा रोते हुए देख कर मुझे अच्छा नही लग रहा है ,

जयसिंघ- माँ भी नही है , आज ही सबको बाहर जाना था

जयसिंघ- शालिनी ने कहा था कि कोई बच्चा रोता है तो उसको गोद मे उठा कर खेलना चाहिए

जयसिंघ ने कोमल को उठा लिया

कोमल जयसिंघ की गोद ने आते ही सूसू कर दी

जयसिंघ- बस यही बाकी था

शालिनी धीरे धीरे हंस रही थी , नेहा को कोमल का रोना देख कर कंट्रोल नही हो रहा था

जयसिंघ- अब क्या करूँ , पहले तो इसके कपड़े चेंज करता हूँ

जयसिंघ कोमल को लेकर बाहर आ गया

शालिनी और नेहा छुप गयी

जयसिंघ- नेहा के कमरे मे कपड़े होंगे ,

जयसिंघ कोमल को चुप करते हुए , नेहा के कमरे मे चला गया

शाकिनी नेहा उस कमरे की खिड़की के पास आ गयी

जयसिंघ कोमल के कपड़े चेंज करने लगा

गीले कपड़े से कोमल ज़्यादा रो रही थी , कपड़े चेंज करते ही कोमल का रोना कम हुआ

जयसिंघ- कोमल का रोना तो बंद हो गया है

जयसिंघ- अब क्या करूँ , इसको तो भूक लगी है

शालिनी- नेहा तू अपना दूध कटोरी मे निकाल

नेहा- क्या

शालिनी- अपना दूध कटोरी मे निकाल कर निपल वाली बॉटल मे भर

नेहा ने वही किया

जयसिंघ- नेहा के बिना कोमल चुप नही होंगी , थोड़ी बड़ी होती तो खाना खिला देता , कोमल को तो उसकी माँ का दूध चाहिए

जयसिंघ- याद आया , शालिनी ने कहा था कि दूध ना मिले तो सहद की कुछ बूंदे पिला देना ,

जयसिंघ कोमल को लेकर रशोई घर मे आ गया

और कोमल के मूह मे 2 3 बूँद शहद डाल दिया

सहद की वजह से कोमल का रोना बंद हुआ पर ये कितनी देर तक चलता

.जयसिंघ को जल्दी कुछ करना होगा

जयसिंघ कोमल को सुलाने की कॉसिश करना लगा

पर कोमल तो जयसिंघ की मुच्छे पकड़ कर खीच रही थी

जयसिंघ- कोमल मेरी जान लेगी आज तो ,

जयसिंघ - कितनी प्यारी है कोमल , कैसे खेल रही है , अब तो लग रहा है कि कोमल को नीचे रखूं ही ना

जयसिंघ की बाते सुनकर नेहा को अच्छा लगा

शालिनी जयसिंघ को इस तरह परेशान देख कर हंस रही थी

जयसिंघ - एक काम करता हूँ , उसको झूले मे डालता हूँ , तब तक कोई ना कोई आ जाएगा

जयसिंघ कोमल को लेक्ऱ नेहा के कमरे मे आ गया

कमरे मे आते ही जयसिंघ की नज़र टेबल पे रखी हुई दूध की बोतल पे गयी

जयसिंघ- मैं भी ना , गधा हूँ , बोतल तो यही पर थी

जयसिंघ ने कोमल को दूध की बोतल दी ,

कोमल ने तो पहले दूध नही पिया पर जयसिंघ ने कोमल को प्यार से दूध पिलाना सुरू कर दिया

जैसे जयसिंघ कोमल की माँ हो और उसको दूध पिला रही हो

जयसिंघ का कोमल के लिए प्यार देख कर नेहा खुश थी

कोमल अपने मामा की गोद मे आकर खेल रही थी

जयसिंघ को कोमल को खेलना अच्छा लग रहा था

तभी माँ आ गयी

शालिनी ने उनको चुप रहने को कहा और कमरे के अंदर का नज़ारा दिखाया

माँ जयसिंघ को कोमल को प्यार करते हुए देख कर खुश हो गयी

माँ समझ गयी कि ये शालिनी का काम होगा

जयसिंघ तो सब कुछ भूल गया

उसे बस इतना याद था कि कोमल की प्यार करना है

जयसिंघ काफ़ी देर तक कोमल के साथ खेलता रहा

जयसिंघ को नन्नी नेहा की याद आ गयी

बचपन मे माँ जब नीता को दूध पिलाती थी तो जयसिंघ ही नेहा को संभालता था उसको खेलवाता था

ये याद आते ही जयसिंघ की आँखौं मे आसू आ गये

नेहा ये सब देख कर भावुक हो गयी

जयसिंघ के साथ कोमल इतने अच्छे से खेल रही थी कि लग ही नही रहा था कि जयसिंघ ने पहली बार कोमल को प्यार किया हो

कोमल तो खेलते खेलते जयसिंघ की गोद मे सो गयी

जयसिंघ- कोमल को देख कर ऐसा लग रहा है कि ये नन्नी नेहा हो

जयसिंघ-वही प्यारी हसी , वही तेज , वैसे मस्ती करना , कोमल जब बड़ी होंगी तो नेहा से भी खूबसूरत बनेगी

नीता ने नेहा को सिमटी काट ली अच्छा हुआ नेहा ने चीख रोक ली

जयसिंघ- कोमल को झूले मे सुलाता हूँ ,

जयसिंघ ने कोमल को उसके झूले मे डाल दिया

और बेड पे लेट कर झूले को हिलाने लगा

जयसिंघ ये भूल ही गया कि कोई आएगा और उसको नेहा के कमरे मे देखेगा तो क्या कहेगा

जयसिंघ को तो बस कोमल ही कोमल दिख रही थी

कोमल थी ही इतनी प्यारी की जयसिंघ अपने गुस्से को ख़तम कर उसको प्यार कर रहा था

फोटो मे जैसी दिखती थी कोमल उसे भी प्यारी थी कोमल

कोमल तो अपने मामा की गोद मे सो गयी थी

झूले को हिलाते हुए जयसिंघ भी नन्नी नेहा के सपने देखते हुए वही सो गया

बाहर ये सब देख कर माँ नेहा शालिनी खुश थी

नेहा ने शालिनी की गले लगा लिया

माजी को अपने बेटे को प्यार करने का दिल कर रहा था

पर शालिनी ने रोक दिया , कोमल और जयसिंघ को सोने दिया और सब अपने कामों मे लग गये

नेहा को उसका जवाब शालिनी ने अपने अंदाज़ मे दिया
 
फ्लश बॅक 1022

सुमन 9

जयसिंघ को कोमल को प्यार करते हुए देख कर सब को अच्छा लगा

जयसिंघ का दिल पत्थर का नही है

नेहा को उसका जवाब मिल गया

शालिनी ने अपने ही अंदाज़ मे जवाब दिया

जयसिंघ ने जिस तरह कोमल को प्यार किया वो सब कुछ बया कर रहा था

जयसिंघ खुद को रोक ही नही पाया कोमल को रोता हुआ देख कर

कोई भी इतना कठोर दिल का नही होता जो बच्चे को रोता हुआ छोड़ दे

पर जयसिंघ को कोमल को प्यार करते हुए नन्नी नेहा की याद आई ये इम्पोर्टेंट था

नेहा को जयसिंघ आज भी प्यार करता है ये सबको पता चला

पर नेहा की शादी मे बात ही ऐसी हुई की थोड़ी नाराज़गी तो चलेगी

शालिनी ने सही सोचा

जितनी बार नेहा जयसिंघ सामने आएगी उतनी जल्दी ये गुस्सा ख़तम होगा

जैसे सोचा था वैसा नही हुआ

किसी ने जयसिंघ को कुमार या नेहा के शादी के बारे में बात नही की

सब ने डिसाइड किया था कि कोई उस बात का इस घर मे जिकर नही करेगा ,, और जयसिंघ के सामने तो बिल्कुल ही नही ,,

पिताजी ने सबको बता दिया कि इस बात को याद रखना

पिताजी नही चाहते कि ग़लती से वो बात निकले और जयसिंघ के दिल को चोट लगे

2 साल से जयसिंघ नेहा से मिला नही वरना ये गुस्सा कब का ख़तम हो जाता

पर अब शालिनी को वो रास्ता दिख गया जिस से नेहा जयसिंघ मे फिर से प्यार होगा

दोनो को आपने सामने लाकर से सब कुछ अपने आप हो जाएगा

कोमल के लिए जयसिंघ के प्यार ने शालिनी का जोश बढ़ा दिया

अब तो शालिनी नेहा और जयसिंघ को फिर से मिला देगी

नेहा को भी ये पता चला कि उसका भाई उसके बारे में क्या सोचता है

नेहा को अपने भाई के बारे में ग़लत सोचने से खुद पे गुस्सा आ गया

माजी को अपने बेटे को और ज़्यादा प्यार करने का दिल कर रहा था

अगर पिताजी यहाँ होते तो अपनी मुछो पे हाथ घुमा देते जयसिंघ को कोमल को प्यार करते हुए देख कर

इस तरह हँसते खेलते शादी का दिन पास आ रहा था

छोटू तो सपनो मे खोया था

पर उसकी शादी की वजह से सब खुश थे , छोटू को पता नही उसने क्या किया है

छोटू को सुमन के सपने देखते हुए देख कर नेहा नीता तंग करने लगी

नेहा- छोटू , क्या बात है दिन मे सपने देख रहा है

नीता- किसके सपने देख रहा है

छोटू- किसी के भी नही

नेहा- सुमन के सपने देख रहा है

छोटू- मैं ने सुमन का नाम नही लिया

नीता- तो सुमन के सपने देख रहा है

छोटू- माँ देखो नेहा मुझे तंग कर रही है

पूजा-मेरे छोटे भाई , अब माँ के पल्लू मे छुपना बंद कर , सुमन के पल्लू मे छुपना होगा तुम्हें

छोटू- माँ देखो पूजा भी तंग कर रही है

माजी- छोटू तुम्हारी दीदी सही कह रही है , अब मुझे नही सुमन को आवाज़ देना सीख ले

छोटू- माँ तुम भी

माजी- तेरे भाई को देख , पहले मेरा नाम लेता था , माँ खाना दो माँ कपड़े दो , और अब शालिनी को बोलता है

नेहा- माँ , छोटू कैसे बोलेगा , सुमन देखो नेहा मुझे तंग कर कर रही है

छोटू- नेहा मैं मारूँगा तुझे

माजी- छोटू अब तू बड़ा हो गया है ये बच्चों जैसी आदत बंद कर दे

छोटू- ऐसे अचानक कैसे बंद होंगी

शालिनी- क्या हो रहा है

छोटू- भाभी देखो ना नेहा मुझे तंग कर रही है

शालिनी- क्या कहा नेहा ने

छोटू ने शालिनी को सब कुछ बता दिया

शालिनी- छोटू नेहा सही कह रही है , अब तुम्हें सुमन के साथ रहना होगा , अब उसको आवाज़ देना और माँ को आराम करने देना , देखो माँ

कितना थक जाती है काम करके

छोटू- भाभी आप कह रही हो तो कॉसिश करूँगा ,

नेहा- वाह रे भाभी के प्यारे देवर , माँ ने कहा तो बोल रहा था अचानक कैसे होगा और भाभी कहते हाँ बोल दिया

छोटू- माँ माँ है , भाभी भाभी भी है और माँ भी है

पूजा- छोटू तो बड़ा हो गया है

शालिनी- छोटू कुछ सोचा कि नही शादी के बाद क्या करेगा

छोटू- खेतो मे काम करूँगा

शालिनी- मेरा मतलब है सुमन के लिए क्या सोचा है

छोटू- आपको कैसे बताऊ , मुझे तो शरम आ रही है

नीता- छोटू तो सच मे बड़ा हो गया है जो शरमाना सीख गया है

शालिनी-बता तो क्या सोचा है

छोटू- प्यार करूँगा

शालिनी- कही घुमाने ले जाएगा कि नही

छोटू- ये तो सोचा ही नही

शालिनी- सुमन को घुमाने शहर3 लाना और शहर2

छोटू- जी भाभी

माजी- ये सब बाद मे बात करना , पहले हल्दी लगाना कब है वो सोचो

छोटू- माँ हल्दी लगाए बिना नही चलेगा

माजी- तेरे भैया को तो तूने बहुत लगाई थी भूल गया

नेहा- छोटू तुझे तो मैं पीला पीला कर दूँगी

नीता- छोटू को आज छोड़ेंगे नही , बहुत कंप्लेंट की है हमारी आज तो सारा बदला लेंगे

छोटू- भाभी

शालिनी भाभी-छोटू एक दिन तो मिलता है , इसमे मज़ा आता है ,

और ऐसे हसी मज़ाक के साथ छोटू के शादी की तय्यारी होने लगी

छोटू दुल्हन लाने को तय्यार था

जयसिंघ ने छोटू को घोड़ी पे बैठा दिया

लेकिन इस बीच जयसिंघ की पगड़ी थोड़ी टेडी हो गयी

ये पिताजी ने देख लिया

और वो जयसिंघ के पास आए

पिताजी को अपने सामने देख कर जयसिंघ सोच मे पड़ गया की पिताजी क्या कहेंगे

लेकिन पिताजी ने कुछ नही कहा

और जयसिंघ की पगड़ी ठीक की

छोटू घोड़ी पे चढ़ कर सुमन को लाने के लिए तय्यार था

कैसे बंद बजना सुरू हुआ वैसे नेहा पूजा और शालिनी ने अपने पल्लू को कमरे से बाँध दिया

और छोटू की बारात मे नाचने लगी

4 बेटियो को नाचता हुआ देख कर पिताजी ने पैसो की बारिश कर दी

4 बेटियाँ एक और बेटी को लाने जा रही थी

छोटू की खुशी का तो कोई ठिकाना नही था

पिताजी तो शादी के दिन भी अवी को अपने कंधे पे बिठा कर नाच रहे थे

पूरी फॅमिली छोटू की खुशियो मे साथ दे रही थी

सारे मेहमान आए थे

जिसके मेहमान वो उसकी खातिरदारी कर रहे थे

कैसे शालिनी के माता पिता का ध्यान शालिनी ने रखा ,पूजा ने अपनी फॅमिली का

सुमन के घर वाले तो ऐसी बारात देख कर देखते रह गये

सुमन का वही हाल था जो छोटू का था

नये घर जाने का छोटा डर

छोटू की बीवी बनने की खुशी

नये माता पिता मिलेंगे

नयी फॅमिली का हिस्सा बनेगी

नयी ज़िम्मेदारी आएगी

कैसे होंगे ससुराल वाले इस बात का डर

कैसे निभाएगी ये नया रिश्ता इस उलझन मे थी

पर छोटू जैसे सुमन को भी छोटू से प्यार हो गया था

जैसा छोटू का हाल था वैसा ही सुमन का था

शालिनी अपनी देवरानी को नही अपनी बहन को लाने आई थी

अजीब फॅमिली थी

सुमन ने सोचा नही था उस से अच्छी फॅमिली मिलने जा रही थी

शालिनी जिस तरह शादी करवा रही थी उस से दुल्हन वालो को लगा कि शालिनी इस घर की बहू नही बेटी हो

जयसिंघ को भी जो मान सम्मान मिल रहा था उस से की गर्दन उची जो गयी

दूल्हे की तरफ से शादी मे आए हो तो जो मान मिलता है उसका एक्सपीरियेन्स हमेशा याद रहता है

छोटू ने जैसे ही सुमन को मंगलसूत्र पहना दिया वैसे ही शालिनी ने सबको मुबारकबाद दी

सुमन छोटू की हो गयी

छोटू को उसके सपनो की रानी मिल गयी

छोटू की शादी मे सुरेश नही आ सका

रमेश और जतिन एक दिन पहले आ गये थे , पर सुरेश नही आया

रमेश ने झूठ कहा कि वो शादी वाले दिन आएगा

पर शादी वाले दिन भी सुरेश नही आया

सुरेश की माँ की तबीयत खराब थी जिस से उसको हॉस्पिटल सिफ्ट किया था , इस वजह से से सुरेश आ नही सका

रमेश ने शाम को नेहा को बताया कि उसकी सास हॉस्पिटल मे अड्मिट है जिस से सुरेश शादी मे नही आ सका

और कल रमेश ने सुरेश के कहने पे झूठ कहा क्यूँ कि सुरेश नही चाहता था की नेहा अपने भाई की शादी मिस करे , वो मज़ा मस्ती मिस करे

ये बात सुनते नेहा को सुरेश को प्यार करने का दिल कर रहा था ,पिताजी भी सुरेश की इस बात से खुश थे

शादी . से हो गयी

नेहा ने छोटू की शादी मे मज़ा मस्ती की

अब नेहा को बहू का फ़र्ज़ भी निभाना था

नेहा सुबह होते ही शहर2 चली गयी कोमल को लेकर ,

नेहा को छोटू की शादी मे बहुत कुछ करना था पर कुछ बाते वो कर नही पाई

सुहागरात मे छोटू को परेशान करना था पर सुरेश की याद मे नेहा वो भी नही कर पाई

दूसरे दिन छोटू को सुहागरात के बारे में पूछ कर तंग करना था पर नेहा को शहर2 जाना पड़ा

नेहा गयी तो क्या हुआ , शालिनी थी

वैसे शालिनी ने सोचा था कि शादी के बाद नेहा और जयसिंघ के साथ कुछ एक्सपेरिमेंट करेगी

पर नेहा के जाते ही शालिनी ने वो प्लान कॅन्सल किया और सुमन के वेलकम की तय्यारी मे लग गयी

पिताजी को नेहा का जाना अच्छा नही लगा पर ये देख कर अच्छा लगा कि नेहा दोनो घर के फ़र्ज़ निभा रही है

और नेहा को सुरेश जैसा जीवन साथी मिला है
 
फ्लॅशबॅक 1023

सुमन 10

छोटू की शादी सुमन से हो गयी

छोटू को तो जैसे उसकी आत्मा मिल गयी हो इतना खुश था

सुमन नये लोगो के बीच मे थोड़ी सहमी हुई थी

पर छोटू का जो प्यार मिला सुहागरात मे वो काफ़ी था सुमन का डर ख़तम करने को

छोटू तो रात की थकान निकाल रहा था देर तक सोते हुए

पर सुमन उठ गयी ,

शालिनी बस सुमन के डोर खोलने का इंतज़ार कर रही थी

.शालिनी-लगता है रात मे देर से सोई थी

सुमन ने शालिनी की तरफ देखा और अपना घूँघट ओढ़ लिया और शरम से सर नीचे कर लिया

सुमन के घर के हालत कुछ और थे

सुमन के घर का एन्वीरोमेंट अलग था

सुमन को इस तरह हँसती खेलती फॅमिली की आदत नही थी

इस लिए सुमन ने पल्लू ओढ़ लिया

शालिनी- सुमन , पता है मैं कौन हूँ

सुमन ने बस हाँ मे गर्दन घुमा दी

शालिनी- तुम गूंगी हो

सुमन- नही तो

शालिनी- तो बात करना सिख लो , यहाँ चुप कोई नही रहता

सुमन- जी

शालिनी- तुम्हारा पहला दिन है इस लिए समझ सकती हूँ कि तुम्हें कैसा लग रहा होगा

सुमन बस सुन रही थी

शालिनी- मैं जब यहाँ आई थी तो तुम्हारी तरह उलझन मे थी , पर पता है मेरा डर कैसे कम हुआ ,

सुमन- कैसे

शालिनी-.अपना पल्लू सर से निकाल कर

सुमन-क्या ?

शालिनी-.क्यूँ कि पल्लू रखना यहाँ मना है

सुमन-पर सास ससुर के सामने तो रखना होगा ना

शालिनी-.कहाँ है सास ससुर

सुमन-वो वहाँ बैठे है

शालिनी-.किसने कहा वो सास ससुर है , वो माँ है और वो पिताजी है

सुमन बस सुनती रह गयी

शालिनी-चौंक गयी ना , यहाँ ऐसा ही है , इसकी आदत डाल दो , तुम बहू नही बेटी हो इस घर की

सुमन को तो अपनी आँखो पे विश्वास नही हो रहा था

सुमन का सही सुन रही थी

सुमन की बहन ने तो कहा था कि ससुराल मे बहुत तंग करते है पर यहाँ तो सब अलग था

सभी शालिनी और सुमन की बाते सुन रहे थे

अगर नेहा होती तो और अच्छा होता पर नेहा को सुबह जाना पड़ा

छोटू तो सो रहा था

सुमन बिचारी शालिनी की अजीब अजीब बाते सुन रही थी

सुमन को लग रहा था कि ऐसा थोड़े होता है , ये सपना है

सास ससुर माँ और पिताजी कैसे हो सकते है

माजी अपनी दोनो बहू को देख रही थी

शालिनी को पहला हक दिया वेलकम करने का

शालिनी घर की बड़ी बहू जो थी

शालिनी-.क्या हुआ क्या सोच रही हो

सुमन-आप मेरे साथ मज़ाक कर रही है

शालिनी-.मैं तो हँसी भी नही और कोई नही हंसा फिर तुम्हें मज़ाक क्यूँ लगा

सुमन-आप जो कह रही है वो रियल मे नही होता

शालिनी-.मुझे देखा पल्लू लेते हुए

सुमन-आप बड़ी है ,

शालिनी-.तुम्हें मैं धीरे धीरे सिखा दूँगी

सुमन-जी

शालिनी-.वैसे तुम्हें मेरे बारे में क्या पता है

सुमन-आप शालिनी भाभी है , घर की बड़ी बहू , मेरी जेठानी

शालिनी-.ग़लत मैं तुम्हारी जेठानी नही हूँ

सुमन-फिर
 
शालिनी-.मैं तुम्हारी बड़ी बहन हूँ , और तुम मेरी छोटी बहन हो

सुमन को तो बड़ी बहन से नफ़रत थी

शालिनी ने ये क्या बोल दिया

सुमन तो मानती थी कि उसकी कोई बहन नही है

शालिनी-.अपनी बड़ी बहन के गले नही लगोगी

सुमन-मेरी कोई बहन नही है , आप भी मेरी बहन नही हो

और सुमन रोते हुए सामने जो कमरा था वहाँ चली गयी

शालिनी देखती रह गयी

बाकी सब भी खड़े हो गये

ये क्या हो गया , सब कुछ तो अच्छा चल रहा था , फिर नयी बहू को क्या हुआ

माजी- शालिनी क्या हुआ , सुमन रोने क्यूँ लगी है

शालिनी- कुछ नही उसको अपनी बहन की याद आ गयी , मैं देखती हूँ ( कुछ तो बात है जो मुझे जाननी होंगी )

शालिनी सुमन के पास गयी

सुमन बेड पे लेट कर रो रही थी

बाकी सब बाहर बैठ कर बाते कर रहे थे

शालिनी सुमन के पास जाकर सुमन के सर पे प्यार से हाथ घुमाने लगी

शालिनी-.सुमन

सुमन-आप मुझे अकेला छोड़ दीजिए

शालिनी-.मैं अपनी छोटी बहन को अकेला कैसे छोड़ सकती हूँ

सुमन-मैं किसी की बहन नही हूँ , आप मेरी बड़ी बहन नही है

शालिनी-.इतना क्या गुस्सा करना है , अपनी बहन को दूर जाने को.कोई नही बोलता

सुमन-मेरी कोई बहन नही है

शालिनी-.मेरी तो छोटी बहन है सुमन नाम है उसका

सुमन-मुझसे कुछ ग़लत हो जाए उस से पहले आप यहाँ से जाइए

शालिनी-.छोटी बहन को ऐसी हालत मे छोड़ कर बड़ी बहन नही जाती

सुमन-आप भी मेरा साथ छोड़ देगी , आप भी मुझे जीने नही देगी

शालिनी-.बताओ मुझे किसने ऐसा किया था तुम्हारे साथ , हम मिलके उसे सबक सिखाएँगे

सुमन-आप जाइए यहाँ से

शालिनी-.कैसे जाउ ,अगर तुम मेरी जगह होती तो क्या अपनी छोटी बहन को ऐसे हालत मे अकेला छोड़ती

सुमन उठ कर बैठ गयी , और शालिनी के गले लग कर रोने लगी

शालिनी-.मेरे सामने जितना रोना है रो लेना , पर बाहर मत रोना ,, माँ और पिताजी को अच्छा नही लगेगा कि उनकी बेटी रो रही है

सुमन-आप मेरे साथ कोई दूसरा रिस्ता जोड़ लीजिए पर मेरी बड़ी बहन मत बनिये

शालिनी-.अब तो मैं तुम्हारी बड़ी बहन ही बनूँगी

सुमन-आप समझ क्यूँ नही रही हो

शालिनी-.तो समझा दो

सुमन-आपको क्या बताऊ ,मेरे साथ क्या क्या हुआ है , मुझे अपनी बड़ी से बहन से नफ़रत हो गयी है

शालिनी-.अपनी इस बहन को बता दो , दुख बाटने से कम होता है , और रिश्ते जुड़ने से खुशिया मिलती है

सुमन-आप सुन नही पाएगी

शालिनी-.तुम मेरी छोटी बहन हो , तुम्हारा दर्द कम करना मेरा फ़र्ज़ है

सुमन-तो सुनिए

और सुमन ने अपनी सारी कहानी बता दी

सुमन की कहानी सुनकर शालिनी की आँखो मे आँसू आ गये

सुमन-आप रो रही है

शालिनी-.मैं इस लिए रो रही हूँ कि मेरी छोटी बहन ने अब तक इतने दर्द झेले, मैं ने तुम्हें पहले क्यूँ अपनी बहन नही बनाया

सुमन-क्या

शालिनी-.देखो तुम्हारे साथ जो हुआ उस से तुम्हारा नज़रिया ऐसा बन गया है कि तुम्हें बहन के रिश्ते से नफ़रत हो गयी है

सुमन-हाँ

शालिनी-.तो मैं तुम्हें तीन बहनों की कहानी बताती हूँ , फिर बताना कि हर बड़ी बहन ऐसी होती है क्या , जैसा तुम सोचती हो

सुमन-जी

और शालिनी ने पूजा नेहा नीता की कहानी बता दी

कैसे नेहा ने अपनी छोटी बहन के लिए अपनी शादी तोड़ दी

कैसे पूजा ने अपने सारे फ़र्ज़ पूरे किए

कैसे तीनो बहन एक दूसरे पे जान छिडकती है

शालिनी की कहानी सुनकर सुमन शालिनी के गले लग गयी

शालिनी-.देखो सुमन ,, तुम ने अब तक जिस बहनो के साथ रही हो उनको भूल जाओ , आज से हमे अपनी बहन बना लो , फिर देखो तुम्हें कितना प्यार मिलता है

सुमन-मुझसे नही होगा

शालिनी-.पूजा नेहा नीता को एक बार अपनी बहन तो बना कर देखो ,

सुमन-मुझसे नही होगा

शालिनी-.सच बताना कि मेरी कहानी सुनकर तुम्हें ऐसा नही लगा कि काश पूजा नेहा नीता तुम्हारी बहन होती

सुमन-हाँ लगा था

शालिनी-.बस उसे पूरा कर लो , कुछ दूर के रिश्ते इतना प्यार देते है कि अपनो की दी हुई नफ़रत उसके सामने हार जाती है

सुमन-जी

शालिनी-.तुम्हारी बहन ने जो किया वो ग़लत था , पर उसका ये मतलब नही कि तुम उस रिस्ते को ग़लत समझो , वही रिश्ता नेहा नीता का

देखो , कॅरक्टर ग़लत होते है रिश्ता नही , अब तुम पर है कि तुम नया रिस्ता जोड़ना छाती हो या उसी गम मे डूबी रहना चाहती हो

सुमन-आप मेरे साथ रहोगी

शालिनी-.तुम्हारी बड़ी बहन हूँ , तुम्हारा साथ कभी नही छोड़ूँगी

सुमन-पर मैं आपको दीदी नही कहूँगी , शालिनी भाभी कहूँगी

शालिनी-.ये हुई ना बात , हम दोनो की खूब जमेगी ,

सुमन-जी

शालिनी-.मेरे साथ जी जी नही चलेगा , फ्री होकर बात करो

सुमन-मेरा पहला दिन है

शालिनी-.ऐसे एक्सक्यूस दे कर पीछे हटना मत , ऐसा कहो कि आज से नयी शुरुआत करूँगी

सुमन-आज से नयी शुरुआत करूँगी

शालिनी-.नये रिस्ते जोड़ूंगी

शालिनी-.उन रिश्तो को अपने प्यार से बाँध कर रखूँगी

सुमन-उन रिश्तो को बाँध कर रखूँगी

शालिनी-.रिश्तों को निभाउन्गी , इस घर का एक हिस्सा बन कर रहूंगी

सुमन-ये मेरा घर है

शालिनी-.ये हमारी फॅमिली है

सुमन-ये मेरी फॅमिली है

शालिनी-.ये हुई ना बात अब खुद को ठीक करो , नीता पूजा तुम्हारा इंतज़ार कर रही है

सुमन-और नेहा दीदी

शालिनी-.दीदी सिर्फ़ पूजा है , बाकी सब तुम्हारी सहेलिया है

सुमन-जी , नेहा नही है

शालिनी-.उसकी सास की तबीयत खराब है जिस से उसको सुबह जाना पड़ा

सुमन-मैं ने सुना है आप शहर3 मे रहती हो मतलब आप भी वापस जाएगी

शालिनी-.मैं 1 महीना रुक कर जाउन्गी , तुम्हारे साथ नया रिस्ता जोड़ा है उसे कैसे निभाते है वो सीखना भी तो है , मुझसे सीखना चाहोगी

सुमन-आपके बारे में कल उन्होने बहुत कुछ बताया , आपसे सीखना तो किस्मत वालो का काम है

शालिनी-.कल क्या सिर्फ़ बाते करते रहे या कुछ किया भी मेरे देवर ने

सुमन-आप भी ना , बातों के साथ प्यार किया

शालिनी- मैं मज़ाक कर रही थी , मेरा देवर कुछ कम नही है , उसको ना तुम्हारे प्यार की ज़रूरत पड़ेगी, उसके साथ हमेशा रहना उसको ओयर करते रहना , देखो तुमसे प्यार करके कितना बदल गया

सुमन-जी मैं उनके साथ रहूंगी चाहे कुछ भी हो जाए

शालिनी-.चले माँ और पिताजी से मिलने

सुमन-हाँ उनका आशीर्वाद लेना है

शालिनी ने सुमन को अपनी बहन बना लिया

जो नफ़रत सुमन के दिल मे थी उसको एक झटके मे निकाल दिया

नये रिश्ते प्यार से बने थे जिस मे नफ़रत के लिए जगह नही थी
 
फ्लश बॅक 1024

सुमन 11

शालिनी के प्यार ने सुमन के दिल मे भी एक नयी उमन्ग भर दी

सुमन को अंधेरे से बाहर निकाल कर ये दिखाया कि दुनिया वैसी नही है जैसा वो समझती है

सुमन ने तो मान लिया था कि बहनें बहुत बुरी होती है

पर शालिनी से मिलते ही सुमन की सोच बदल गयी

नेहा पूजा की कहानी से पता चला कि बड़ी बहन कैसी होती है

सुमन ने अब तो जो देखा वो सिक्के का एक पहलू था और आज शालिनी ने सुमन को सिक्के का दूसरा पहलू दिखा दिया

शालिनी पे सुमन ने विश्वास किया

शालिनी से नया रिस्ता जोड़ लिया प्यार वाला रिस्ता

शालिनी को अपनी बड़ी बहन बना लिया

पर सुमन फिर से चोट खाने को तय्यार नही थी जिस से सुमन ने बोल दिया कि वो शालिनी को शालिनी भाभी कहेगी

शालिनी को सुमन का सच जान कर दुख हुआ

शालिनी बड़ी बहू थी उसके घर को टूटने से बचाने के लिए सब कुछ पता होना ज़रूरी था

सुमन की नफ़रत ख़तम करनी होंगी

सुमन की नफ़रत ख़तम होते ही छोटू के लिए प्यार ही प्यार मिलेगा

सुमन बहुत भोली है , पर खुले दिल वाली है , , वो एक बार रिस्ता जोड़ लेती है यो कभी ख़तम नही करती

सुमन को शालिनी का साथ मिलते ही ये दूनयिया अच्छी लगने लगी

शालनी ने अपनी छोटी बहन सुमन को घर के सभी मेंबर से मिला दिया

नेहा होती तो और अच्छा होता पर नीता ने नेहा की कमी महसूस होने नही दी

सुमन का वेलकम उसी तरह किया जैसे नेहा करती

शालिनी ने सुमन को टी और नाश्ता बनाने को कहा

पहला नाश्ता सोएसियाल होता है

सुमन की मदद करते हुए शालिनी ने सुमन को सबकी तारीफ करने पे मज़बूर किया

छोटू सबको सुमन को प्यार करते हुए देख कर रिलॅक्स हो गया

छोटू के आते ही सुमन के सामने सब छोटू से इज़्ज़त से बात कर रहे थे

पर जैसे ही सुमन अंदर जाती सब छोटू पे टूट पड़ते

छोटू को सबका तंग करना अच्छा लगा

शादी के दूसरे दिन सभी गाँव वालो को दावत दी

फिर उसके अगले दिन जयसिंघ जाने की तय्यारी करने लगा

शालिनी ने जयसिंघ को बता दिया कि वो कुछ दिन और रुकेगी ताकि सुमन को उस घर मे अड्जस्ट होने मदद कर सके

जयसिंघ शालिनी की हर बात मानता था

जयसिंघ को पता था कि शालिनी जो करेगी वो उसकी फॅमिली के लिए अच्छा होगा

जयसिंघ अकेला शहर3 चला गया

अवी तो बस दादाजी की गोद मे लदा रहता

स्वेता सीतल भी अपने छोटे भाई के साथ खेलती रहती

वहाँ शहर3 मे अवी को सिर्फ़ अपनी माँ के साथ खेलना पड़ता

यहाँ तो दादाजी है दादी है , बुआ है , बहनें है , चाचा चाची है , अवी तो यही रहने की ज़िद्द कर रहा था

सब धीरे धीरे अपने अपने घर चले गये

बस शालिनी और अवी गाँव मे रुके थे

अवी अपने दादाजी के लिए रुका था और शालिनी सुमन के लिए

शालिनी सुमन को किसको क्या पसंद है किसको कब क्या चाहिए ये सब बता रही थी

सुमन अच्छे बच्चे की तरह शालिनी की बाते सुनती

शालिनी सुमन को बताती कि पिताजी को कब क्या चाहिए खाने मे कितनी मिर्च चाहिए , छोटू को क्या पसंद है , माजी कैसे खुश होंगी ,

नयी बहू के लिए ये चेलेन्जिन्ग काम होता है

पर शालिनी ने सुमन के लिए ये काम आसान किया

सुमन को शालिनी का साथ मिलते ही वो तो अपने मायके को भूल ही गयी

सुमन को तो ससुराल अपने मायके से अच्छा लगने लगा

शालिनी जल्दी जल्दी काम समझा कर सुमन को गाँव और खेत दिखा देती

ठाकुरजी ने नये जोड़े को दावत पर हवेली बुलाया

सुमन इतना मान समान देख कर खुश थी

सुमन ने जितना सोचा था उस से ज़्यादा मिल रहा था

.सुमन को छोटू का प्यार मिल रहा था

छोटू तो खेत से सीधा घर आ जाता पहले दोस्तो के पास जाता था पर अब दोस्तो के पास जाना कम नही बंद ही कर दिया था

घर मे औरत की ज़रूरत कितनी होती है ये सबको पता चल गया

पिताजी को अपनी दोनो बहुओं पे नाज़ था

माजी को देवी जैसी बहू मिल गयी

सुमन को रात मे छोटू के साथ प्यार करना और दिन भर शालिनी के साथ बात करना अच्छा लगता

शालिनी सिर्फ़ घर और फॅमिली की बाते नही बताती थी , कुछ ज्ञान की बाते भी बता देती

जैसे कि दूसरे के बारे में सोचना चाहिए

कब खुद की खुशी से ज़्यादा दूसरो की खुशी की परवा करनी चाहिए

कब बलिदान देना चाहिए

कैसे घर को एक करके रखना चाहिए

कैसे अपने साथ दूसरो को भी अपने विचारो से खुश रखना चाहिए

सुमन इस 1 महीने मे बहुत कुछ सीख गयी थी

सुमन तो शालिनी को अपनी माँ मानने लगी

.जैसे माँ अपने बच्चे को दुनिया की बाते बताती है वैसे शालिनी सुमन की बता रही थी

शालिनी की बात ही कुछ अलग थी

अपने पति को अलग जाने दिया और यहाँ क्यूँ रुकी अपने देवरानी के लिए

अब तो सुमन को जल्दी रहती काम ख़त्म करने की.क्यूँ कि उसको शालिनी से बाते जो करना था

माजी को तो अब आराम था , बहू जो आई थी

पिताजी को भी आराम मिल रहा था क्यूँ कि छोटू खेतो मे जा रहा था उसको अपनी ज़िम्मेदारी का पता चल गया था

एक बहू के आते ही कैसे सब कुछ बदल गया

शालिनी और सुमन इसी घर मे रहे यही पिताजी की इच्छा थी

दोनो बहू को बहनों की तरह रहता हुआ देख कर माजी खुश थी

ये सब शालिनी का जादू था

वरना आजकल की बहू तो , पूछो ही मत , घर आते ही सास ससुर को बाहर निकाल देती है
 
सुमन ने शालिनी से बहुत कुछ सीख लिया

सुमन-भाभी आज खेत मे चले

शालिनी- छोटू से मिलना है

सुमन-आप भी ना , मैं तो खेत देखने जाने की बात कर रही थी

शालिनी- दोपेहर मे जाएँगे , छोटू तुम्हें देख कर ज़्यादा जोश से काम ख़तम कर देगा

सुमन-भाभी आप मुझे बहुत तंग करती है

शालिनी- फिर भी तू मुझसे तंग होने आती है

सुमन-चलो ना खेत मे चलते है ,

शालिनी- दोपेहर का खाना आज खेत मे खाएँगे ,„

शालिनी पिताजी और माजी को भी खेत मे ले गयी

सब आज खेत मे समय बिताने वाले थे

अवी तो खेत मे आते ही पेड़ पे चढ़ने को बोल रहा था दादाजी को

पिताजी अवी को लेकर आम के बगीचे मे चले गये

माजी आराम से बैठ कर सब देख रही थी

जैसे छोटू की नज़र सुमन पे गयी वो अपना काम छोड़ कर उसके पास आ गया

छोटू- सुमन तुम यहाँ ,

शालिनी- देवर्जी हम भी है यहाँ , तुम्हें तो बस सुमन ही दिख रही है

छोटू- भाभी मैं तो वो

शालिनी- रहने दे , हमे पता है तू बस सुमन को देखने आया है

सुमन शर्मा गयी

माजी- जा अपना काम कर , रात भर तो सुमन के पल्लू मे छुपा रहता है अब क्या दिन मे भी

और सब हँसने लगे

छोटू इस पे क्या बोलता वो चुप चाप अपना काम करने लगा पर उसका ध्यान सुमन पर ही था

शालिनी- सुमन चलो पूरे खेत का चक्कर लगाते है

सुमन- हाँ चलो

फिर शालिनी सुमन को आम के बगीचे की सैर कराने लगी और उसकी कहानी बताने लगी

कैसे नेहा ने ये आम का बगीचा लगाया था

कैसे सब ने अपने प्यार से आम का बगीचा बनाया था

सुमन ये सब सुनकर और बाते जाने को उतावली हो गयी थी

शालिनी ने सुमन को वही बाते बताई जो उसको आगे जाकर बहुत काम आएगी

क्यूँ की शालिनी को शहर3 जाना होगा ऐसे मे सुमन को इस घर को अकेले संभालना होगा उसके लिए कुछ बाते सुमन को पता होनी चाहिए

शालिनी- सुमन पता है , कभी कभी खुद की खुशी से ज़्यादा अपनी फॅमिली की ख़ुसी के बारे में सोचना पड़ता है

सुमन-आपने ये पहले भी बताया था

शालिनी- कभी कभी अपनो से भी लड़ना पड़ता है

सुमन-ये आप क्या बोल रही है

शालिनी- तुझे मैं नेहा की शादी की कहानी बताती हूँ तुझे पता चलेगा कि मैं ने कैसे अपने शादी को दाव पर लगा कर नेहा को उसकी ख़ुसीया दी

और शालिनी ने नेहा की कहानी सुमन को बता दी

कहानी सुनते ही सुमन समझ गयी कि शालिनी क्या बताना चाहती है

सुमन ने तो कहानी सुनते ही शालिनी को गले लगा लिया

शालिनी- क्या हुआ

सुमन- आप

शालिनी-क्या हुआ

सुमन-आप मे इतनी हिम्मत कहाँ से आई थी

शालिनी- सबके प्यार की वजह से इतनी हिम्मत जुटा पाई थी

सुमन-जयसिंघ भाई साब ने क्या कहा था उसके बाद

शालिनी- इतना ही कि उनको अच्छा लगा कि मैं नेहा को अपनी बहन मानती हूँ

सुमन-सच ने आपकी जगा कोई और होती तो ये कर ही नही पाती

शालिनी- पर तुम्हें करना होगा

सुमन-क्या मतलब

शालिनी- कल मैं शहर3 जाने वाली हूँ

सुमन-क्या

शालिनी- मेरा घर वही है जहाँ अवी के पापा रहेंगे , अब तुम्हें इस घर को अकेले संभालना होगा

सुमन-मैं कैसे कर पाउन्गी अकेले

शालिनी- इसी लिए तो मैं तुम्हें रोज ऐसी बाते बताती थी जो तुम्हें आगे जाकर काम आएँगी

सुमन-पर आप यहाँ भी रह सकती है ना

शालिनी- मैं तो यही रहना चाहती हूँ पर अवी के पापा यहाँ नही रहना चाहते

सुमन-आप उनको यहाँ लेकर क्यूँ नही आती

शालिनी- वही तो कर रही हूँ ,, पहले एक रास्ता था पर नेहा की शादी की वजह वो रास्ता बंद हो गया , पर मैं जल्दी उनको यहाँ लेकर आउन्गि और हम सब साथ मे रहेंगे

सुमन-उस दिन का इंतज़ार रहेगा

शालिनी- तब तक तुम्हें इस घर को इस फॅमिली को संभालना होगा

सुमन-मैं पूरी कॉसिश करूँगी , आप को निराश नही करूँगी ,,

शालिनी- सुमन छोटू का ख़याल रखना , वो भले बड़ा हो गया होगा पर उसकी सोच बच्चों जैसी है , उसको प्यार से हॅंडल करना

सुमन-जी

शालिनी- और बाकी बाते तो तुम्हें बता दी है , उसको याद करना और मुझे हर महीने खत लिखना ,

सुमन-वो तो बिना भूले लिखूँगी .

शालिनी गाँव मे जब तक रुकती ,उसको एक दिन तो जाना ही था

जयसिंघ वहाँ अकेला था

जयसिंघ शालिनी को प्यार की वजह से कुछ कहता नही था

पर शालिनी को पता था क़ी जयसिंघ उसको कितना याद कर रहा होगा

पिताजी तो अवी को जाने देने को तय्यार ही नही थे

अवी भी अपने दादाजी से दूर जाने को तय्यार नही था

पर अलग तो होना ही था

पिताजी ने शालिनी को रोकने की बहुत कॉसिश की पर जयसिंघ के लिए शालिनी को जाना ही पड़ा

शालिनी ने पिताजी को वादा किया कि वो जल्दी जयसिंघ को लेकर गाँव आएगी

माजी को अब शालिनी पे और ज़्यादा विस्वाश हो गया की वो जयसिंघ गाँव लेकर आएगी

सुमन को कुछ बाते बता कर शालिनी अपने शहर3 चली गयी

फिर से घर सूना हो गया

अवी की वजह से पिताजी का दिल लगा रहा था पर अब पिताजी को यही लग रहा था कि छोटू को जल्दी से बच्चा हो जाए

ताकि घर मे फिर से बच्चो की किलकीरी सुनाई दे

माजी को भी दादी बनके का सब से ज़्यादा इंतज़ार था

पर आज के लिए तो घर मे बहू के आने से घर मे थोड़ी चहल पहल थी
 
Back
Top