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फ्लॅशबॅक 1021
सुमन 8
छोटू की शादी को शालिनी के आते ही जैसे उस घर मे नयी जान आ गयी थी
फिर से हँसने की आवाज़ो से घर खिल गया था
नेहा के नाम की आवज़े घर मे गूँज रही थी
स्वेता सीतल अवी के भागने , मस्ती करने से पिताजी थकना किसे कहते है वो भूल गये थे
पिताजी को तो जैसे उनका बचपन वापस मिल गया था अवी को देख कर
पिताजी को छोटू की शादी से ज़्यादा अवी स्वेता सीतल के साथ खेलना अच्छा लग रहा था
पिताजी कभी घोड़ा बन जाते तो कभी ट्रेन बन जाते
अवी को तो ऐसा लग ही नही रहा था कि वो अपने घर मे ना हो , अवी तो अपने दादाजी के पास ही रह रहा था
दादाजी के साथ खाना खाना उनके साथ खेलना उनके साथ सोना , दादाजी से कहानी सुनना ,
पिताजी 3 र्ड टाइम अपना बचपन जी रहे थे , पहली बार खुद का बचपन , फिर नेहा जयसिंघ का बचपन , और अब अवी स्वेता सीतल के साथ बचपन को फिर से जी रहे थे , अगेर कोमल चलने लगती तो कितना अच्छा होता ,
माँ ने भी सारे काम पूजा और शालिनी के भरोसे छोड़ कर बच्चो के साथ वक्त बिता रही थी
छोटू जयसिंघ के साथ तो ज़्यादा से ज़्यादा समय बिता रही थी माजी
शालिनी तो अपनी ननद के साथ खुश थी ,
कभी पूजा शालिनी को पकड़ कर अपने कमरे मे के जाती और बाते करती , तो कभी नेहा शालिनी के साथ वक्त बिताती तो कभी नीता , शालिनी को समय ही नही मिल रहा था जयसिंघ के लिए
जैसे हर कोई बिज़ी था
छोटू तो सुमन के सपनो मे बिज़ी था
जयसिंघ ज़्यादातर समय अपने कमरे मे रहता
पर पिताजी बच्चो के साथ खेलते जिस से छोटू की शादी के काम जयसिंघ को करने पड़ रहे थे
पिताजी और जयसिंघ मे बात नही हुई
जयसिंघ को गाँव आए हुए 1 हफ़्ता हो गया था पर ज़सयसिंघ की पिताजी से कोई बात नही हुई , पिताजी खुद को बच्चो मे बिज़ी रखते जिस से वो खुद को जयसिंघ से दूर रखते
जब तक जयसिंघ नेहा को माफ़ नही करेगा या नेहा जयसिंघ कोमाफ नही करेगी तब तक पिताजी कैसे बात करते जयसिंघ से
जयसिंघ की इस बात का पता चल गया पर ये भी लग रहा था कि पिताजी बच्चो मे बिज़ी है
पर क्या उनके पास एक मिनिट नही है अपने बेटे के लिए , जयसिंघ बस इस लिए चुप था कि उसने शालिनी को प्रॉमिस किया था कि वो कोई सीन क्रिएट नही करेगा
छोटू से वादा किया था कि वो शादी होने तक गाँव मे रुकेगा
जयसिंघ की घर मे सब से बात हुई बस नेहा और पिताजी से कोई बात नही हुई
शालिनी ने भी देख लिया की पिताजी क्या कर रहे है
शालिनी को ये अच्छा लगा , शायद इस से जयसिंघ को ये लगेगा कि वो क्या मिस कर रहा है , जयसिंघ को अहसास हो जाएगा
जयसिंघ भी खुद को शादी के कामों मे बिज़ी रखता
जयसिंघ ने कोमल को भी प्यार नही किया
नेहा को ये पसंद नही आ रहा था
एक तरफ शालिनी कोमल को अपना समझती थी तो जयसिंघ उसकी तरफ देखता भी नही
इसी बीच नेहा ने फिर से शालिनी को जयसिंघ की शिकायत की
नेहा - भाभी
शालिनी- क्या है नेहा
नेहा - भैया मेरे साथ ऐसा क्यूँ कर रहे है
शालिनी- अब क्या हुआ
नेहा - उनको लगता है कि मैं ने ग़लत किया है तो मुझे सज़ा दे पर नन्ही जान कोमल ने क्या गुनाह किया
शालिनी- बस इतनी सी बात से तू परेशान जी गयी
नेहा - मुझे कितना बुरा लग रहा होगा जब भैया कोमल की तरफ देखते भी नही
शालिनी- तुम्हारे भैया का दिल भी कोमल को प्यार करने का कर रहा है पर वो भी इस बात से दूर भाग रहे है
नेहा - क्या मतलब
शालिनी- तुझे दिखाना पड़ेगा
नेहा - क्या?
शालिनी- कोमल के दूध पीने का समय हुआ है ना
नेहा - हाँ
शालिनी- कोमल को दूध मत पिला , मेरे पास लेकर आ
नेहा - आप करना क्या चाहती है
शालिनी- तुझे दिखाना चाहती हूँ की तेरे भैया कोमल के बारे में क्या सोचते है
नेहा - मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा है
शालिनी- तू कोमल को मेरे पास लेकर आ
नेहा को कुछ समझ नही आ रहा था
नेहा कोमल को लेकर शालिनी के पास आ गयी
शालिनी ने कोमल को लेकर नेहा के पीछे आने को कहा
शालिनी अपने कमरे के पास गयी और नेहा को खिड़की से अंदर देखने को बोल कर कोमल को लेकर अंदर चली गयी
नेहा को कुछ समझ नही आ रहा था कि भाभी कर क्या रही है
शालिनी कोमल को प्यार करते हुए कमरे मे आ गयी जहाँ जयसिंघ बेड पे आराम कर ताहा था
जयसिंघ ने शालिनी के हाथो मे कोमल को देखा पर वो ऐसे ही लेटा रहा
शालिनी- आप आराम कर रहे है
जयसिंघ- हाँ , वो छोटू के दोस्त को बोल दिया है शहर जाके बॅंड और घोड़ी वाले से बात करे
शालिनी- बॅंड अच्छा बुलाना मैं तो छोटू की शादी मे नाचूंगी
जयसिंघ-तुम्हें जो करना है वो करना पर मुझे बीच मे मत लाना
शालिनी- नही लाउन्गि , लगता है कोमल को भूक लगी है
जयसिंघ-ह्म्म्म्म
शालिनी- देखो मेरे दूध को मूह लगा रही है
जयांघ ने देखा कि कोमल कैसे शालिनी के दूध के साथ खेल रही है
शालिनी- आअहह
जयसिंघ- क्या हुआ
शालिनी- पेट मे गॅस हो गयी है , लगता है मुझे जाना होगा
और शालिनी कोमल को बेड पे रख कर कमरे से बाहर भाग गयी
जतसिंघ- शालिनी शालिनी , इसको इसकी माँ के पास तो ले जाओ
पर शालिनी कहाँ कुछ सुनने वाली थी ,
शालिनी तो भाग कर नेहा को अपने साथ बाथरूम मे ले गयी
जयसिंघ - ये शालिनी भी ना
कोमल को भूक लगी थी , अगर वो ज़्यादा देर बेड पे रही तो रो देगी
जयसिंघ ने एक बार डोर की तरफ देखा और फिर कोमल के पास आकर उसको देखने लगा
जयसिंघ- कितनी प्यारी है ,
जयसिंह ने डोर की तरफ देखा और किसी को ना देख कर कोमल की पप्पी ली
जयसिंघ के मुँह लगाने से कोमल रोने लगी
जयसिंघ- ये तो रो रही है , ये शालिनी भी ना , मुझे कहाँ फसा कर भाग गयी
कोमल रोने लगी
जयसिंघ- अब मैं क्या करूँ , कैसी है नेहा , कोमल का रोना सुनकर भी नही आई
कोमल का रोना बंद नही हो रहा था
जयसिंघ- क्या करूँ , माँ को बुलाता हूँ
जयसिंघ भाग कर रशोई घर मे गया ,
पर वहाँ माँ नही थी , माँ तो नीता और पूजा के साथ मंदिर गयी थी
सुमन 8
छोटू की शादी को शालिनी के आते ही जैसे उस घर मे नयी जान आ गयी थी
फिर से हँसने की आवाज़ो से घर खिल गया था
नेहा के नाम की आवज़े घर मे गूँज रही थी
स्वेता सीतल अवी के भागने , मस्ती करने से पिताजी थकना किसे कहते है वो भूल गये थे
पिताजी को तो जैसे उनका बचपन वापस मिल गया था अवी को देख कर
पिताजी को छोटू की शादी से ज़्यादा अवी स्वेता सीतल के साथ खेलना अच्छा लग रहा था
पिताजी कभी घोड़ा बन जाते तो कभी ट्रेन बन जाते
अवी को तो ऐसा लग ही नही रहा था कि वो अपने घर मे ना हो , अवी तो अपने दादाजी के पास ही रह रहा था
दादाजी के साथ खाना खाना उनके साथ खेलना उनके साथ सोना , दादाजी से कहानी सुनना ,
पिताजी 3 र्ड टाइम अपना बचपन जी रहे थे , पहली बार खुद का बचपन , फिर नेहा जयसिंघ का बचपन , और अब अवी स्वेता सीतल के साथ बचपन को फिर से जी रहे थे , अगेर कोमल चलने लगती तो कितना अच्छा होता ,
माँ ने भी सारे काम पूजा और शालिनी के भरोसे छोड़ कर बच्चो के साथ वक्त बिता रही थी
छोटू जयसिंघ के साथ तो ज़्यादा से ज़्यादा समय बिता रही थी माजी
शालिनी तो अपनी ननद के साथ खुश थी ,
कभी पूजा शालिनी को पकड़ कर अपने कमरे मे के जाती और बाते करती , तो कभी नेहा शालिनी के साथ वक्त बिताती तो कभी नीता , शालिनी को समय ही नही मिल रहा था जयसिंघ के लिए
जैसे हर कोई बिज़ी था
छोटू तो सुमन के सपनो मे बिज़ी था
जयसिंघ ज़्यादातर समय अपने कमरे मे रहता
पर पिताजी बच्चो के साथ खेलते जिस से छोटू की शादी के काम जयसिंघ को करने पड़ रहे थे
पिताजी और जयसिंघ मे बात नही हुई
जयसिंघ को गाँव आए हुए 1 हफ़्ता हो गया था पर ज़सयसिंघ की पिताजी से कोई बात नही हुई , पिताजी खुद को बच्चो मे बिज़ी रखते जिस से वो खुद को जयसिंघ से दूर रखते
जब तक जयसिंघ नेहा को माफ़ नही करेगा या नेहा जयसिंघ कोमाफ नही करेगी तब तक पिताजी कैसे बात करते जयसिंघ से
जयसिंघ की इस बात का पता चल गया पर ये भी लग रहा था कि पिताजी बच्चो मे बिज़ी है
पर क्या उनके पास एक मिनिट नही है अपने बेटे के लिए , जयसिंघ बस इस लिए चुप था कि उसने शालिनी को प्रॉमिस किया था कि वो कोई सीन क्रिएट नही करेगा
छोटू से वादा किया था कि वो शादी होने तक गाँव मे रुकेगा
जयसिंघ की घर मे सब से बात हुई बस नेहा और पिताजी से कोई बात नही हुई
शालिनी ने भी देख लिया की पिताजी क्या कर रहे है
शालिनी को ये अच्छा लगा , शायद इस से जयसिंघ को ये लगेगा कि वो क्या मिस कर रहा है , जयसिंघ को अहसास हो जाएगा
जयसिंघ भी खुद को शादी के कामों मे बिज़ी रखता
जयसिंघ ने कोमल को भी प्यार नही किया
नेहा को ये पसंद नही आ रहा था
एक तरफ शालिनी कोमल को अपना समझती थी तो जयसिंघ उसकी तरफ देखता भी नही
इसी बीच नेहा ने फिर से शालिनी को जयसिंघ की शिकायत की
नेहा - भाभी
शालिनी- क्या है नेहा
नेहा - भैया मेरे साथ ऐसा क्यूँ कर रहे है
शालिनी- अब क्या हुआ
नेहा - उनको लगता है कि मैं ने ग़लत किया है तो मुझे सज़ा दे पर नन्ही जान कोमल ने क्या गुनाह किया
शालिनी- बस इतनी सी बात से तू परेशान जी गयी
नेहा - मुझे कितना बुरा लग रहा होगा जब भैया कोमल की तरफ देखते भी नही
शालिनी- तुम्हारे भैया का दिल भी कोमल को प्यार करने का कर रहा है पर वो भी इस बात से दूर भाग रहे है
नेहा - क्या मतलब
शालिनी- तुझे दिखाना पड़ेगा
नेहा - क्या?
शालिनी- कोमल के दूध पीने का समय हुआ है ना
नेहा - हाँ
शालिनी- कोमल को दूध मत पिला , मेरे पास लेकर आ
नेहा - आप करना क्या चाहती है
शालिनी- तुझे दिखाना चाहती हूँ की तेरे भैया कोमल के बारे में क्या सोचते है
नेहा - मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा है
शालिनी- तू कोमल को मेरे पास लेकर आ
नेहा को कुछ समझ नही आ रहा था
नेहा कोमल को लेकर शालिनी के पास आ गयी
शालिनी ने कोमल को लेकर नेहा के पीछे आने को कहा
शालिनी अपने कमरे के पास गयी और नेहा को खिड़की से अंदर देखने को बोल कर कोमल को लेकर अंदर चली गयी
नेहा को कुछ समझ नही आ रहा था कि भाभी कर क्या रही है
शालिनी कोमल को प्यार करते हुए कमरे मे आ गयी जहाँ जयसिंघ बेड पे आराम कर ताहा था
जयसिंघ ने शालिनी के हाथो मे कोमल को देखा पर वो ऐसे ही लेटा रहा
शालिनी- आप आराम कर रहे है
जयसिंघ- हाँ , वो छोटू के दोस्त को बोल दिया है शहर जाके बॅंड और घोड़ी वाले से बात करे
शालिनी- बॅंड अच्छा बुलाना मैं तो छोटू की शादी मे नाचूंगी
जयसिंघ-तुम्हें जो करना है वो करना पर मुझे बीच मे मत लाना
शालिनी- नही लाउन्गि , लगता है कोमल को भूक लगी है
जयसिंघ-ह्म्म्म्म
शालिनी- देखो मेरे दूध को मूह लगा रही है
जयांघ ने देखा कि कोमल कैसे शालिनी के दूध के साथ खेल रही है
शालिनी- आअहह
जयसिंघ- क्या हुआ
शालिनी- पेट मे गॅस हो गयी है , लगता है मुझे जाना होगा
और शालिनी कोमल को बेड पे रख कर कमरे से बाहर भाग गयी
जतसिंघ- शालिनी शालिनी , इसको इसकी माँ के पास तो ले जाओ
पर शालिनी कहाँ कुछ सुनने वाली थी ,
शालिनी तो भाग कर नेहा को अपने साथ बाथरूम मे ले गयी
जयसिंघ - ये शालिनी भी ना
कोमल को भूक लगी थी , अगर वो ज़्यादा देर बेड पे रही तो रो देगी
जयसिंघ ने एक बार डोर की तरफ देखा और फिर कोमल के पास आकर उसको देखने लगा
जयसिंघ- कितनी प्यारी है ,
जयसिंह ने डोर की तरफ देखा और किसी को ना देख कर कोमल की पप्पी ली
जयसिंघ के मुँह लगाने से कोमल रोने लगी
जयसिंघ- ये तो रो रही है , ये शालिनी भी ना , मुझे कहाँ फसा कर भाग गयी
कोमल रोने लगी
जयसिंघ- अब मैं क्या करूँ , कैसी है नेहा , कोमल का रोना सुनकर भी नही आई
कोमल का रोना बंद नही हो रहा था
जयसिंघ- क्या करूँ , माँ को बुलाता हूँ
जयसिंघ भाग कर रशोई घर मे गया ,
पर वहाँ माँ नही थी , माँ तो नीता और पूजा के साथ मंदिर गयी थी