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Guest
रूचि जब स्कूल से निकली तो उसकी बस तैयार खड़ी थी, उसके चेहरे पर अभी भी गुस्सा साफ साफ झलक रहा था.., बस में भी उसने अपनी किसी भी फ्रेंड्स से ज़्यादा बात नही की…!
घर आकर सीधी वो अपने कमरे के तरफ बढ़ गयी…, उस समय उसकी चाची निशा और मा मोहिनी किचेन में लंच के बाद का बाइंड-अप कर रही थी…!
मोहिनी की नज़र हॉल से गुजरती हुई रूचि पर पड़ी, वो अपनी बेटी की चाल ढाल देख कर ही समझ गयी कि आज कुच्छ तो गड़बड़ हुई…, उसने रूचि को आवाज़ दी,
माँ की आवाज़ सुनकर वो ठिठक गयी.., लपक कर वो उसके पास गयी और उसके चेहरे को ध्यान से देखते हुए पुछा – क्या हुआ रूचि, आज स्कूल में कुच्छ हुआ क्या…?
रूचि ने अपने मनोभावों पर काबू करने की भरषक कोशिश की, लेकिन उसका क्या किया जाए कि माँ की अनुभवी आँखें ताड़ चुकी थी कि आज उसकी बेटी कुच्छ अपसेट तो है….!
सामान्य होने की कोशिश करते हुए रूचि बोली – कुच्छ नही मामा.., कुच्छ भी तो नही हुआ.., आपको कैसे लगा कि कुच्छ हुआ है…?
मोहिनी – मे तेरी माँ हूँ बेटा…, अपनी बेटी को बचपन से देखती आ रही हूँ, तेरी चाल की तेज़ी बता रही है कि आज स्कूल में कुच्छ तो हुआ है…?
इन माँ-बेटी का संबाद सुनकर वहाँ निशा भी आ पहुँची.., उसने भी रूचि के चेहरे को ध्यान से देखा लेकिन उसको उसके चेहरे पर कोई ऐसा लक्षण दिखाई नही दिया जिससे ये अनुमान लगा सके कि दीदी जो कह रही हैं वो सही है….,
निशा – क्या बात है दीदी..? ये आप क्या कह रही हैं ? मुझे तो नही लग रहा कि रूचि आज कुच्छ अपसेट है…!
रूचि – वही तो मौसी.., पता नही मामा क्यों मुझसे शारलक-होम्स की तरह सवाल कर रही है…? अगर कुच्छ हुआ होता भी तो मे खुद ही आप लोगों को बताती ना....,
मोहिनी – तू कह रही है तो मान लेती हूँ, लेकिन ना जाने क्यों आज तेरी चाल में तेज़ी देख कर मुझे लगा कि कुच्छ गड़बड़ तो नही हुई.., और फिर तूने आकर ना कोई ही हेलो की.., सीधी दनदनाती हुई अपने कमरे की तरफ चली जा रही थी…!
रूचि ने आगे बढ़कर अपनी माँ के गाल पर एक किस किया और बोली – वो मम्मी आज होम वर्क कुच्छ ज़्यादा ही मिला है.., तो सोचा टाइम वेस्ट ना करके सीधे काम पर लग जाती हूँ, बस और कुच्छ नही…!
निशा – खाना तो खा लेती…
रूचि – आप खाना मेरे रूम में ही ले आना मौसी, पढ़ते हुए खा लूँगी.., इतना कहते हुए वो पलटकर अपने रूम में चली गयी…………..!
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घर आकर सीधी वो अपने कमरे के तरफ बढ़ गयी…, उस समय उसकी चाची निशा और मा मोहिनी किचेन में लंच के बाद का बाइंड-अप कर रही थी…!
मोहिनी की नज़र हॉल से गुजरती हुई रूचि पर पड़ी, वो अपनी बेटी की चाल ढाल देख कर ही समझ गयी कि आज कुच्छ तो गड़बड़ हुई…, उसने रूचि को आवाज़ दी,
माँ की आवाज़ सुनकर वो ठिठक गयी.., लपक कर वो उसके पास गयी और उसके चेहरे को ध्यान से देखते हुए पुछा – क्या हुआ रूचि, आज स्कूल में कुच्छ हुआ क्या…?
रूचि ने अपने मनोभावों पर काबू करने की भरषक कोशिश की, लेकिन उसका क्या किया जाए कि माँ की अनुभवी आँखें ताड़ चुकी थी कि आज उसकी बेटी कुच्छ अपसेट तो है….!
सामान्य होने की कोशिश करते हुए रूचि बोली – कुच्छ नही मामा.., कुच्छ भी तो नही हुआ.., आपको कैसे लगा कि कुच्छ हुआ है…?
मोहिनी – मे तेरी माँ हूँ बेटा…, अपनी बेटी को बचपन से देखती आ रही हूँ, तेरी चाल की तेज़ी बता रही है कि आज स्कूल में कुच्छ तो हुआ है…?
इन माँ-बेटी का संबाद सुनकर वहाँ निशा भी आ पहुँची.., उसने भी रूचि के चेहरे को ध्यान से देखा लेकिन उसको उसके चेहरे पर कोई ऐसा लक्षण दिखाई नही दिया जिससे ये अनुमान लगा सके कि दीदी जो कह रही हैं वो सही है….,
निशा – क्या बात है दीदी..? ये आप क्या कह रही हैं ? मुझे तो नही लग रहा कि रूचि आज कुच्छ अपसेट है…!
रूचि – वही तो मौसी.., पता नही मामा क्यों मुझसे शारलक-होम्स की तरह सवाल कर रही है…? अगर कुच्छ हुआ होता भी तो मे खुद ही आप लोगों को बताती ना....,
मोहिनी – तू कह रही है तो मान लेती हूँ, लेकिन ना जाने क्यों आज तेरी चाल में तेज़ी देख कर मुझे लगा कि कुच्छ गड़बड़ तो नही हुई.., और फिर तूने आकर ना कोई ही हेलो की.., सीधी दनदनाती हुई अपने कमरे की तरफ चली जा रही थी…!
रूचि ने आगे बढ़कर अपनी माँ के गाल पर एक किस किया और बोली – वो मम्मी आज होम वर्क कुच्छ ज़्यादा ही मिला है.., तो सोचा टाइम वेस्ट ना करके सीधे काम पर लग जाती हूँ, बस और कुच्छ नही…!
निशा – खाना तो खा लेती…
रूचि – आप खाना मेरे रूम में ही ले आना मौसी, पढ़ते हुए खा लूँगी.., इतना कहते हुए वो पलटकर अपने रूम में चली गयी…………..!
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