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Guest
तुम्हें अपने साथ ले जाने के लिए मुझे किसी की पर्मिशन या और कोई समस्या नही है.., लेकिन जिस काम के लिए मे घर से निकला हूँ.., वो मुझे पता नही कब हो पाएगा… और कहाँ..? या हो पाएगा भी या नही…?
और जबतक मेरा वो काम ख़तम नही होता तबतक मे अपने घर वापस नही जा सकता…!
ये कहते वक़्त मेरे चेहरे पर असीम पीड़ा के भाव थे.., जिन्हें कुच्छ कुच्छ साझते हुए ललित बोला – छोटा मूह बड़ी बात.. साब जी, आप मुझे किसी बात को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं.., अगर आपको कोई एतराज ना हो तो मे आपसे उसकी वजह पूछ सकता हूँ..?
ना जाने क्यों इश्स आधे घंटे में मुझे वो लड़का ललित अपना सा लगने लगा था.., या यौं कहो की इस विकट परिस्थिति में उससे बात करके मेरे अंदर का गुबार कुच्छ कम हुआ था…!
मेने उसका बाजू पकड़कर उसी चारपाई पर अपने बगल में बिठाया और कहा – मेरी भतीजी किडनप हो गयी है.., किसी की शिनाख्त ने मुझे अपने शहर से इतनी दूर इस वीरान रात में यहाँ पहुँचा दिया है…!
मुझे नही पता वो लोग उसे किधर और कहाँ ले गये होंगे.., यहाँ तक तो पता नही मे ऐसे ही चला आया लेकिन अब मुझे कहाँ और किस तरफ जाना है ये भी नही पता…???
ललित – उस गाड़ी के बारे में आप कुच्छ बता सकते हैं…?
मे – वो काले रंग की महिंद्रा स्कॉर्पियो थी जिसमें वो लोग उसे किडनप करके ले गये हैं.., और...और... उसकी….
साइड में चमकीली पत्तियाँ थी…है ना.. मेरे वाक्य पूरा करने से पहले ही ललित ने वो शिनाख्त पूरी कर दी…!
मेने बड़े उतावले पन से कहा..हां..हां…तुम्हें कैसे पता.. क्या तुमने वो गाड़ी देखी है..?
ललित – हां साब देखी थी.., ये कोई 7:30 का समय था.., दिन छिपा ही था.., ज़्यादा अंधेरा नही हुआ था.., यहीं इस तरफ मुड़ने के बाद वो गाड़ी खड़ी हुई.. उसमें से एक स्याह कपड़ों में एक आदमी उतरा..,
पल-भर के लिए पीछे का दरवाजा खुला.., मेरी नज़र उधर ही थी.., उसी वक़्त मुझे उसमें एक लड़की दिखाई दी.., जिसके मूह पर एक कपड़े की पट्टी बँधी हुई थी…, और शायद वो बेहोश थी..
क्योंकि उसके शरीर में कोई हलचल नही हो रही थी.., बस ऐसे ही दूसरे आदमी के सहारे टिकी हुई थी…!
उस आदमी ने बाजू वाली देसी शराब की दुकान से कुच्छ शराब की बोतलें ली.., गाड़ी में बैठा और फिर वो गाड़ी इसी रोड पर तेज़ी से चली गयी…!
मे अवाक ललित के चेहरे की तरफ देखते हुए सारी बात सुन रहा था.., उसके चुप होते ही मेने कहा – ये..ईए…रोड तो दूसरे स्टेट को जाता है ना…!
ललित – हां साब और बीच में चंबल का बहुत ही ख़तरनाक जंगल भी है.., हो ना हो वो लोग उसी जंगल में आपकी भतीजी को ले गये होंगे…!
मेने प्यार से उसके सिर पर अपना हाथ फेरा.., और चारपाई से उठते हुए बोला – थॅंक यू ललित.., तुमने मेरी बहुत बड़ी मुश्किल आसान कर दी.., वरना मुझे पता ही नही चल पाता कि मेरी आगे की तलाश किस दिशा में होगी…?
तुम चिंता मत करो.., मे यहीं होकर लौटूँगा तुम तैयार रहना मे तुम्हें अपने साथ ज़रूर ले जाउन्गा.., अपना ख्याल रखना मे चलता हूँ…!
और जबतक मेरा वो काम ख़तम नही होता तबतक मे अपने घर वापस नही जा सकता…!
ये कहते वक़्त मेरे चेहरे पर असीम पीड़ा के भाव थे.., जिन्हें कुच्छ कुच्छ साझते हुए ललित बोला – छोटा मूह बड़ी बात.. साब जी, आप मुझे किसी बात को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं.., अगर आपको कोई एतराज ना हो तो मे आपसे उसकी वजह पूछ सकता हूँ..?
ना जाने क्यों इश्स आधे घंटे में मुझे वो लड़का ललित अपना सा लगने लगा था.., या यौं कहो की इस विकट परिस्थिति में उससे बात करके मेरे अंदर का गुबार कुच्छ कम हुआ था…!
मेने उसका बाजू पकड़कर उसी चारपाई पर अपने बगल में बिठाया और कहा – मेरी भतीजी किडनप हो गयी है.., किसी की शिनाख्त ने मुझे अपने शहर से इतनी दूर इस वीरान रात में यहाँ पहुँचा दिया है…!
मुझे नही पता वो लोग उसे किधर और कहाँ ले गये होंगे.., यहाँ तक तो पता नही मे ऐसे ही चला आया लेकिन अब मुझे कहाँ और किस तरफ जाना है ये भी नही पता…???
ललित – उस गाड़ी के बारे में आप कुच्छ बता सकते हैं…?
मे – वो काले रंग की महिंद्रा स्कॉर्पियो थी जिसमें वो लोग उसे किडनप करके ले गये हैं.., और...और... उसकी….
साइड में चमकीली पत्तियाँ थी…है ना.. मेरे वाक्य पूरा करने से पहले ही ललित ने वो शिनाख्त पूरी कर दी…!
मेने बड़े उतावले पन से कहा..हां..हां…तुम्हें कैसे पता.. क्या तुमने वो गाड़ी देखी है..?
ललित – हां साब देखी थी.., ये कोई 7:30 का समय था.., दिन छिपा ही था.., ज़्यादा अंधेरा नही हुआ था.., यहीं इस तरफ मुड़ने के बाद वो गाड़ी खड़ी हुई.. उसमें से एक स्याह कपड़ों में एक आदमी उतरा..,
पल-भर के लिए पीछे का दरवाजा खुला.., मेरी नज़र उधर ही थी.., उसी वक़्त मुझे उसमें एक लड़की दिखाई दी.., जिसके मूह पर एक कपड़े की पट्टी बँधी हुई थी…, और शायद वो बेहोश थी..
क्योंकि उसके शरीर में कोई हलचल नही हो रही थी.., बस ऐसे ही दूसरे आदमी के सहारे टिकी हुई थी…!
उस आदमी ने बाजू वाली देसी शराब की दुकान से कुच्छ शराब की बोतलें ली.., गाड़ी में बैठा और फिर वो गाड़ी इसी रोड पर तेज़ी से चली गयी…!
मे अवाक ललित के चेहरे की तरफ देखते हुए सारी बात सुन रहा था.., उसके चुप होते ही मेने कहा – ये..ईए…रोड तो दूसरे स्टेट को जाता है ना…!
ललित – हां साब और बीच में चंबल का बहुत ही ख़तरनाक जंगल भी है.., हो ना हो वो लोग उसी जंगल में आपकी भतीजी को ले गये होंगे…!
मेने प्यार से उसके सिर पर अपना हाथ फेरा.., और चारपाई से उठते हुए बोला – थॅंक यू ललित.., तुमने मेरी बहुत बड़ी मुश्किल आसान कर दी.., वरना मुझे पता ही नही चल पाता कि मेरी आगे की तलाश किस दिशा में होगी…?
तुम चिंता मत करो.., मे यहीं होकर लौटूँगा तुम तैयार रहना मे तुम्हें अपने साथ ज़रूर ले जाउन्गा.., अपना ख्याल रखना मे चलता हूँ…!