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Guest
रात के लगभग 3 बजे हम उस मोडपर थे जो दूसरे राज्य के लिए जाता था.., वहाँ उसने गाड़ी रोकी और एक होटेल पर बैठकर चाइ मँगवाई…!
चाइ लेने जाकिर खुद गया.., हमने चाइ पी और फ़ौरन बिना एक पल गँवाए गाड़ी में आकर बैठ गये.., अभी गाड़ी वहाँ से कुच्छ ही दूर निकली थी कि मेरी आँखें भारी होने लगी…!
पीछे की सीट पर बैठी शकीला तो कब की सो चुकी थी.., एक दो मिनिट में ही में भी आगे की सीट पर सो गया..,
जाकिर जानता था कि उस ख़तरनाक जगह जो कि शेर सिंग के फार्म हाउस से एक सुरंग के रास्ते से होकर जाना होता था वहाँ से गुज़रते ही मे किसी भी सूरत में उसके ऐसी अंजान जगह जाने का विरोध ज़रूर करता इसलिए उसने हम दोनो को ही चाइ के साथ नींद की गोलियाँ
घोलकर पिला दी थी…!
जब मेरी आँख खुली तो एक बिस्तर पर मे अकेला पड़ा हुआ था.., शकीला का कहीं आता-पता भी नही था…, सुबह के 10 बजे थे जब मे नींद से जगा…!
मेरी आँख खुलते ही मेने अपने पास पलंग पर ही वहीदा की दोनो बहनों को बैठे देख कर मे चोंक गया.., मेने उनसे पुछा – तुम लोग यहाँ,,?
ये कॉन सी जगह है और शकीला कहाँ है..?
मेरे सवाल सुनकर रुखसार जो वहीदा से छोटी थी वो मेरे गाल सहलाते हुए बोली – हाए रे हॅंडसम.., हम लोग कब्से तुम्हारी रह देख रहे हैं
और तुम हो कि जागते ही उस मुई शकीला के बारे में पुच्छने लगे…!
फिकर ना करो मेरे राजा.. वो तो तुम्हें मिल ही जाएगी.., ज़रा हमें भी तो अपने इस मूसल का फिरसे कमाल दिखाओ.., ये कहकर उसने मेरे
सोए पड़े लंड को पॅंट के उपर से ही मसल दिया…!
मेने उसे ज़ोर्से धक्का देकर अपने से दूर कर दिया.. लेकिन तभी उसकी छोटी बेहन शकीरा मेरे गले पड़ते हुए बोली – आईए.. हाई.. संजू भाई जान ऐसे तो ना तरसाओ.., हम भी कोई बेगाने तो नही…!
एक बार मज़ा लेके तो देखो मेरी जान.., पहले से भी ज़्यादा मज़ा ना आए तो कहना.., खैर अभी आप थोड़ा फ्रेश व्रेश हो लो.., खाना वाना
ख़ालो उसके बाद हम लोग मिलते हैं तुमसे…,
बाइ.. ये कहते हुए वो दोनो रंडियाँ अपनी मोटी-मोटी गान्ड मटकाते हुए वहाँ से बाहर चली गयी…!
इतना ही नही साली रंडियाँ जाते जाते कमरे का दरवाजा भी बाहर से बंद कर गयी जिससे मे बाहर आकर इधर उधर का जायज़ा ले पाता…!
कमरा काफ़ी बड़ा हॉल नुमा.. जिसके बीचो-बीच एक डबल बेड पड़ा था.., एक साइड में सिंगल सोफा.., ड्रेसिंग टेबल और एक कोने में
अटॅच्ड बाथरूम..!
कुल मिलाकर एक सिंगल फॅमिली के रहने की सारी सुख सुविधाएँ उपलब्ध थी उस हॉल जैसे कमरे में.., मेने चारों तरफ घूम फिरकर कमरे
का मुआयना किया..,
फिर पीछे की दीवार में स्थित इतने बड़े कमरे की एक मात्र विंडो को खोलकर देखा…!
लेकिन वहाँ भी मुझे कुच्छ नही मिला.., कोई 2-2.5’ की एक संकरी सी गॅलरी के बाद सेमेंट की एक सपाट दीवार दिखाई दी.., जिसका उपर
का छोर मेरी आँखें नही देख पा रही थी…!
थक कर मे बात रूम में घुस गया.., ये देखकर मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि उस एक छोटे कमरे जैसे बाथ रूम के अंदर मेरे और शकीला के साइज़ के तमाम कपड़ों के साथ साथ हर वो चीज़ मौजूद थी जो एक आदमी और औरत के लिए होनी चाहिए…!
मे उस बाथरूम में फ्रेश हुआ.., अच्छे से नहा धोकर नये कपड़े पहने और बाहर कमरे में आया तो एक और आश्चर्य को वहाँ पाया…!
वहीदा अपनी दोनो बहनों के साथ वहाँ बैठी थी.., मुझे देखते ही अपने चेहरे पर मुस्कान बिखेरते हुए बोली – क्यों संजू भाई.., यहाँ कोई तकलीफ़ तो नही हुई तुम्हें.., सब कुच्छ है ना तुम्हारे लिए…?
संजू – मेने चोन्कते हुए कहा – वहीदा बेहन तुम और यहाँ.., भाई ये सब क्या है..? तुम तो वहाँ उस गाओं में थी…?
वहीदा मुस्कराते हुए बोली – क्यों मे अपनी रिस्तेदारि में नही आ सकती..? आख़िर मेरे भाई का निकाह है.., भला नेग लेने तो आना ही था…!
संजू – लेकिन ये है कॉन सी जगह और मुझे यहाँ एक तरह से क़ैद क्यों कर रखा है.., ये रुखसार और शकीरा पहले मुझे इस कमरे में बंद करके क्यों चली गयी थी…?
वहीदा – अरे..रे.. इतने सारे सवाल एक साथ.., थोड़ा हौसला रखो संजू मेरी जान.., सब बताती हूँ..!
अब मेरी बात ध्यान से सुनो, बीच में भड़कना मत… हम एक बहुत ही बड़े और पवरफुल अंडरवर्ल्ड ऑर्गनाइज़ेशन का हिस्सा हैं.., जिसकी एक शाखा की कमॅंड युसुफ भाई जान के हाथ में है…!
तुम्हें भी उनके कंधे से कंध मिलकर जिस तरह पहले साथ देते रहे थे वैसे ही आइन्दा भी देना है, कुच्छ ही देर में युसुफ भाई जान भी तुम्हारे पास आने वाले हैं…!
आनन्न..आनन्न… पहले मेरी बात पूरी होने दो.., मुझे थोड़ा उखड़े हुए मूड में आते ही वो मुझे बीच में रोकते हुए बोली – हमने तुम्हारी तमन्ना पूरी कर दी..,
आज शाम को ही तुम्हारी शादी शकीला से करा दी जाएगी… फिर तुम दोनो कुच्छ दिन मिलकर खूब जी भर कर मज़े करना…, तब तक तुम्हें किसी भी काम के लिए कोई नही कहेगा…!
वो आगे मुझे धमकाते हुए बोली – और हां याद रहे.., तुम्हारी जान शकीला एक तरह से यहाँ नज़र बंद रहेगी.., सो भूल कर भी उसके साथ
मिलकर यहाँ से रफू-चक्कर होने के बारे में सोचना भी मत वरना अंजाम तुम अच्छी तरह से जानते हो…!
संजू – तुम मुझे धमका रही हो.., ये जानते हुए कि मेरी मर्ज़ी के खिलाफ मुझे दुनिया की कोई भी ताक़त क़ैद करके नही रख सकती..!
वहीदा – मेने कब कहा कि तुम यहाँ क़ैद में हो.., बस शकीला को यहाँ से नही ले जा सकोगे.., और एक बात – ये ऑर्गनाइज़ेशन पहले वाले
जैसा छोटा मोटा नही है.., इसकी जड़ें देश दुनिया के कोने कोने में है..!
इसके सरमायेदारों के हाथ इतने लंबे हैं कि छुपने के लिए ये दुनिया भी छोटी पड़ जाएगी.., देश/ प्रदेश की सरकारें भी इनके खिलाफ कुच्छ करने से पहले हज़ार बार सोचती हैं…!
इतना सब कुच्छ मुझे समझा कर या कहो धमका कर वो तीनों वहाँ से चली गयी.. और पीछे छोड़ गयी मेरे अंदर एक तूफान जिसके चलते मे
एक बार तो अपने सोचने समझने की शक्ति ही खो बैठा और मारे गुस्से के मेने अपना घूँसा एक सोफे की चेयर पर दे मारा…!
चाइ लेने जाकिर खुद गया.., हमने चाइ पी और फ़ौरन बिना एक पल गँवाए गाड़ी में आकर बैठ गये.., अभी गाड़ी वहाँ से कुच्छ ही दूर निकली थी कि मेरी आँखें भारी होने लगी…!
पीछे की सीट पर बैठी शकीला तो कब की सो चुकी थी.., एक दो मिनिट में ही में भी आगे की सीट पर सो गया..,
जाकिर जानता था कि उस ख़तरनाक जगह जो कि शेर सिंग के फार्म हाउस से एक सुरंग के रास्ते से होकर जाना होता था वहाँ से गुज़रते ही मे किसी भी सूरत में उसके ऐसी अंजान जगह जाने का विरोध ज़रूर करता इसलिए उसने हम दोनो को ही चाइ के साथ नींद की गोलियाँ
घोलकर पिला दी थी…!
जब मेरी आँख खुली तो एक बिस्तर पर मे अकेला पड़ा हुआ था.., शकीला का कहीं आता-पता भी नही था…, सुबह के 10 बजे थे जब मे नींद से जगा…!
मेरी आँख खुलते ही मेने अपने पास पलंग पर ही वहीदा की दोनो बहनों को बैठे देख कर मे चोंक गया.., मेने उनसे पुछा – तुम लोग यहाँ,,?
ये कॉन सी जगह है और शकीला कहाँ है..?
मेरे सवाल सुनकर रुखसार जो वहीदा से छोटी थी वो मेरे गाल सहलाते हुए बोली – हाए रे हॅंडसम.., हम लोग कब्से तुम्हारी रह देख रहे हैं
और तुम हो कि जागते ही उस मुई शकीला के बारे में पुच्छने लगे…!
फिकर ना करो मेरे राजा.. वो तो तुम्हें मिल ही जाएगी.., ज़रा हमें भी तो अपने इस मूसल का फिरसे कमाल दिखाओ.., ये कहकर उसने मेरे
सोए पड़े लंड को पॅंट के उपर से ही मसल दिया…!
मेने उसे ज़ोर्से धक्का देकर अपने से दूर कर दिया.. लेकिन तभी उसकी छोटी बेहन शकीरा मेरे गले पड़ते हुए बोली – आईए.. हाई.. संजू भाई जान ऐसे तो ना तरसाओ.., हम भी कोई बेगाने तो नही…!
एक बार मज़ा लेके तो देखो मेरी जान.., पहले से भी ज़्यादा मज़ा ना आए तो कहना.., खैर अभी आप थोड़ा फ्रेश व्रेश हो लो.., खाना वाना
ख़ालो उसके बाद हम लोग मिलते हैं तुमसे…,
बाइ.. ये कहते हुए वो दोनो रंडियाँ अपनी मोटी-मोटी गान्ड मटकाते हुए वहाँ से बाहर चली गयी…!
इतना ही नही साली रंडियाँ जाते जाते कमरे का दरवाजा भी बाहर से बंद कर गयी जिससे मे बाहर आकर इधर उधर का जायज़ा ले पाता…!
कमरा काफ़ी बड़ा हॉल नुमा.. जिसके बीचो-बीच एक डबल बेड पड़ा था.., एक साइड में सिंगल सोफा.., ड्रेसिंग टेबल और एक कोने में
अटॅच्ड बाथरूम..!
कुल मिलाकर एक सिंगल फॅमिली के रहने की सारी सुख सुविधाएँ उपलब्ध थी उस हॉल जैसे कमरे में.., मेने चारों तरफ घूम फिरकर कमरे
का मुआयना किया..,
फिर पीछे की दीवार में स्थित इतने बड़े कमरे की एक मात्र विंडो को खोलकर देखा…!
लेकिन वहाँ भी मुझे कुच्छ नही मिला.., कोई 2-2.5’ की एक संकरी सी गॅलरी के बाद सेमेंट की एक सपाट दीवार दिखाई दी.., जिसका उपर
का छोर मेरी आँखें नही देख पा रही थी…!
थक कर मे बात रूम में घुस गया.., ये देखकर मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि उस एक छोटे कमरे जैसे बाथ रूम के अंदर मेरे और शकीला के साइज़ के तमाम कपड़ों के साथ साथ हर वो चीज़ मौजूद थी जो एक आदमी और औरत के लिए होनी चाहिए…!
मे उस बाथरूम में फ्रेश हुआ.., अच्छे से नहा धोकर नये कपड़े पहने और बाहर कमरे में आया तो एक और आश्चर्य को वहाँ पाया…!
वहीदा अपनी दोनो बहनों के साथ वहाँ बैठी थी.., मुझे देखते ही अपने चेहरे पर मुस्कान बिखेरते हुए बोली – क्यों संजू भाई.., यहाँ कोई तकलीफ़ तो नही हुई तुम्हें.., सब कुच्छ है ना तुम्हारे लिए…?
संजू – मेने चोन्कते हुए कहा – वहीदा बेहन तुम और यहाँ.., भाई ये सब क्या है..? तुम तो वहाँ उस गाओं में थी…?
वहीदा मुस्कराते हुए बोली – क्यों मे अपनी रिस्तेदारि में नही आ सकती..? आख़िर मेरे भाई का निकाह है.., भला नेग लेने तो आना ही था…!
संजू – लेकिन ये है कॉन सी जगह और मुझे यहाँ एक तरह से क़ैद क्यों कर रखा है.., ये रुखसार और शकीरा पहले मुझे इस कमरे में बंद करके क्यों चली गयी थी…?
वहीदा – अरे..रे.. इतने सारे सवाल एक साथ.., थोड़ा हौसला रखो संजू मेरी जान.., सब बताती हूँ..!
अब मेरी बात ध्यान से सुनो, बीच में भड़कना मत… हम एक बहुत ही बड़े और पवरफुल अंडरवर्ल्ड ऑर्गनाइज़ेशन का हिस्सा हैं.., जिसकी एक शाखा की कमॅंड युसुफ भाई जान के हाथ में है…!
तुम्हें भी उनके कंधे से कंध मिलकर जिस तरह पहले साथ देते रहे थे वैसे ही आइन्दा भी देना है, कुच्छ ही देर में युसुफ भाई जान भी तुम्हारे पास आने वाले हैं…!
आनन्न..आनन्न… पहले मेरी बात पूरी होने दो.., मुझे थोड़ा उखड़े हुए मूड में आते ही वो मुझे बीच में रोकते हुए बोली – हमने तुम्हारी तमन्ना पूरी कर दी..,
आज शाम को ही तुम्हारी शादी शकीला से करा दी जाएगी… फिर तुम दोनो कुच्छ दिन मिलकर खूब जी भर कर मज़े करना…, तब तक तुम्हें किसी भी काम के लिए कोई नही कहेगा…!
वो आगे मुझे धमकाते हुए बोली – और हां याद रहे.., तुम्हारी जान शकीला एक तरह से यहाँ नज़र बंद रहेगी.., सो भूल कर भी उसके साथ
मिलकर यहाँ से रफू-चक्कर होने के बारे में सोचना भी मत वरना अंजाम तुम अच्छी तरह से जानते हो…!
संजू – तुम मुझे धमका रही हो.., ये जानते हुए कि मेरी मर्ज़ी के खिलाफ मुझे दुनिया की कोई भी ताक़त क़ैद करके नही रख सकती..!
वहीदा – मेने कब कहा कि तुम यहाँ क़ैद में हो.., बस शकीला को यहाँ से नही ले जा सकोगे.., और एक बात – ये ऑर्गनाइज़ेशन पहले वाले
जैसा छोटा मोटा नही है.., इसकी जड़ें देश दुनिया के कोने कोने में है..!
इसके सरमायेदारों के हाथ इतने लंबे हैं कि छुपने के लिए ये दुनिया भी छोटी पड़ जाएगी.., देश/ प्रदेश की सरकारें भी इनके खिलाफ कुच्छ करने से पहले हज़ार बार सोचती हैं…!
इतना सब कुच्छ मुझे समझा कर या कहो धमका कर वो तीनों वहाँ से चली गयी.. और पीछे छोड़ गयी मेरे अंदर एक तूफान जिसके चलते मे
एक बार तो अपने सोचने समझने की शक्ति ही खो बैठा और मारे गुस्से के मेने अपना घूँसा एक सोफे की चेयर पर दे मारा…!