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Guest
मेने मान में सोचा – भाभी आप क्यों इतनी तेज हो, कुछ भी परदा नही रहने दोगि…,
जब कुछ देर मेने कोई जबाब नही दिया, तो उन्होने फिर पूछा – बोलो ना क्या हुआ था..?
मेने हिचकते हुए आज की घटना उन्हें सुना दी, कुछ देर तो वो मौन रहकर मन ही मन मुस्करती रही, फिर बोली –
जिसका मुझे अंदेसा था वही हुआ, खैर छोड़ो ये सब, ये बताओ अब आगे क्या सोचा है..?
मे – किस बारे में…?
वो – अरे कामिनी के बारे में, मेरे पीछे अगर उसने फिरसे पहल की तो…
मे – कोशिश करूँगा, उनसे दूर ही रहूं…, फिर भी बात ना बनी तो साफ-साफ मना कर दूँगा…
वो – भूल से भी ये ग़लती मत करना, एक बार उसे समझाने की कोशिश भर ज़रूर करना, अगर नही माने तो फिर हालत से समझौता कर लेना,
क्योंकि ये ऐसे मामले होते हैं, जिन्हें तूल पकड़ते देर नही लगती…, अपनी बात मनमाने के लिए औरत किसी भी हद तक जा सकती है..
बातों के दौरान रूचि मेरी गोद में ही सो गयी, तो उसे भाभी ने मेरी गोद से लेकर बेड के एक सिरे पर सुला दिया, और फिर वो मुझसे सॅटकर बैठ गयी..
उन्होने मेरी जांघों को सहलाते हुए कहा – मे इतने दिन तुमसे दूर रहूंगी, याद करोगे ना मुझे… या नयी भाभी की मस्ती में भूल जाओगे..?
भाभी सोने से पहले मात्र एक गाउन ही पहनती थी, सो मेने उनके गाउन की डोरी खींच कर आगे से उनके बदन को उजागर कर दिया…
उनके भरे-भरे आमों को प्यार से सहलाया, और होंठों का चुंबन लेकर कहा – ये तो मरते दम तक भी नही हो पाएगा भाभी मुझसे, की मे आपको भूल जाउ..!
मौत आने के बाद ही आप मेरे दिल से निकल पाओगि…!
मेरी बात सुनते ही भाभी ने मुझे अपने अंक से लिपटा लिया, और फिर आँखों में आँसू भरकर भर्राए गले से बोली –
भूल कर भी ऐसे शब्द मत निकालना अपने मुँह से, वरना मे तुमसे कभी बात नही करूँगी,,, समझे.
मे भी किसी बच्चे की तरह उनसे लिपट गया…, भाभी आगे बोली –
लेकिन समय के साथ ये प्यार बाँटना तो पड़ेगा ही तुम्हें, जब निशा व्याह कर इस घर में आ जाएगी…
मे – वो तो मे अभी भी उससे करता ही हूँ, आगे भी करता रहूँगा, लेकिन जो प्यार आपके लिए है, उसमें कभी कमी नही आएगी.. इतना कह कर मेने भाभी को अपने चौड़े सीने से सटकर उनके होंठों को चूम लिया…
भाभी ने मेरी आँखों में झाँकते हुए कहा – लल्ला जी आज मुझे तुम्हारा इतना प्यार चाहिए की आनेवाले 15-20 दिन तक मुझे तुम्हारी तलब महसूस ना हो..,
मेने मुस्कराते हुए भाभी की चुचियों को मसल कर कहा – जो हुकुम मेरे आका, इतना कहकर उन्हें निवस्त्र कर के, बेड पर लिटा दिया…और उनके नाज़ुक अंगों से खेलने लगा…..
भाभी ने भी, पूरी सिद्दत से अपने बदन को मेरे सुपुर्द कर दिया, बेड पड़ी वो मेरी हरकतों से बिन जल मछलि की तरह मचल रही थी.…
एक समय था, जब मे भाभी के इशारों पर नाचता था, लेकिन आज वो मेरे हाथों के इशारों पर इस तरह मचल रही थी, जैसे उनके बदन का रिमोट मेरे हाथों में हो…
कुछ ही पलों में कमरे का वातावरण वसनामय हो गया…मादकता से भरी आहों, करहों के बीच तूफान आए, चले गये, फिर आए फिर चले गये….
भाभी अब पूरी तरह तृप्त हो चुकी थी, फिर उन्होने मुझे बड़े प्यार से मेरे माथे को चूमकर कोई 3 बजे अपने कमरे में सोने के लिए भेज दिया..
सुबह जब सबने मिलकर नाश्ता किया, उस समय बाबूजी ने भैया से बात चलाई…
बाबूजी – और कृष्णा बेटा, कैसी चल रही है तुम्हारी ड्यूटी…?
भैया – वैसे तो ठीक है बाबूजी, ड्यूटी की कोई प्राब्लम नही है, लेकिन घर में खाने पीने का सब कुछ गड़बड़ रहता है,
सब कुछ नौकरों के सहारे नही हो पता है, तो मे सोच रहा था, कि कामिनी को भी अपने साथ ले जाता हूँ…
बाबूजी – हमें तो कोई दिक्कत नही है, बस एक छोटी सी समस्या है, बड़ी बहू के भाई की शादी है, कल वो अपने घर जाने वाली है, तो तब तक के लिए कामिनी बहू यहाँ बनी रहती तो कुछ सहारा रहता इन बच्चों को…
रामा बिटिया अभी इतनी परिपक्व नही है, जो अकेले घर संभाल ले…
जब कुछ देर मेने कोई जबाब नही दिया, तो उन्होने फिर पूछा – बोलो ना क्या हुआ था..?
मेने हिचकते हुए आज की घटना उन्हें सुना दी, कुछ देर तो वो मौन रहकर मन ही मन मुस्करती रही, फिर बोली –
जिसका मुझे अंदेसा था वही हुआ, खैर छोड़ो ये सब, ये बताओ अब आगे क्या सोचा है..?
मे – किस बारे में…?
वो – अरे कामिनी के बारे में, मेरे पीछे अगर उसने फिरसे पहल की तो…
मे – कोशिश करूँगा, उनसे दूर ही रहूं…, फिर भी बात ना बनी तो साफ-साफ मना कर दूँगा…
वो – भूल से भी ये ग़लती मत करना, एक बार उसे समझाने की कोशिश भर ज़रूर करना, अगर नही माने तो फिर हालत से समझौता कर लेना,
क्योंकि ये ऐसे मामले होते हैं, जिन्हें तूल पकड़ते देर नही लगती…, अपनी बात मनमाने के लिए औरत किसी भी हद तक जा सकती है..
बातों के दौरान रूचि मेरी गोद में ही सो गयी, तो उसे भाभी ने मेरी गोद से लेकर बेड के एक सिरे पर सुला दिया, और फिर वो मुझसे सॅटकर बैठ गयी..
उन्होने मेरी जांघों को सहलाते हुए कहा – मे इतने दिन तुमसे दूर रहूंगी, याद करोगे ना मुझे… या नयी भाभी की मस्ती में भूल जाओगे..?
भाभी सोने से पहले मात्र एक गाउन ही पहनती थी, सो मेने उनके गाउन की डोरी खींच कर आगे से उनके बदन को उजागर कर दिया…
उनके भरे-भरे आमों को प्यार से सहलाया, और होंठों का चुंबन लेकर कहा – ये तो मरते दम तक भी नही हो पाएगा भाभी मुझसे, की मे आपको भूल जाउ..!
मौत आने के बाद ही आप मेरे दिल से निकल पाओगि…!
मेरी बात सुनते ही भाभी ने मुझे अपने अंक से लिपटा लिया, और फिर आँखों में आँसू भरकर भर्राए गले से बोली –
भूल कर भी ऐसे शब्द मत निकालना अपने मुँह से, वरना मे तुमसे कभी बात नही करूँगी,,, समझे.
मे भी किसी बच्चे की तरह उनसे लिपट गया…, भाभी आगे बोली –
लेकिन समय के साथ ये प्यार बाँटना तो पड़ेगा ही तुम्हें, जब निशा व्याह कर इस घर में आ जाएगी…
मे – वो तो मे अभी भी उससे करता ही हूँ, आगे भी करता रहूँगा, लेकिन जो प्यार आपके लिए है, उसमें कभी कमी नही आएगी.. इतना कह कर मेने भाभी को अपने चौड़े सीने से सटकर उनके होंठों को चूम लिया…
भाभी ने मेरी आँखों में झाँकते हुए कहा – लल्ला जी आज मुझे तुम्हारा इतना प्यार चाहिए की आनेवाले 15-20 दिन तक मुझे तुम्हारी तलब महसूस ना हो..,
मेने मुस्कराते हुए भाभी की चुचियों को मसल कर कहा – जो हुकुम मेरे आका, इतना कहकर उन्हें निवस्त्र कर के, बेड पर लिटा दिया…और उनके नाज़ुक अंगों से खेलने लगा…..
भाभी ने भी, पूरी सिद्दत से अपने बदन को मेरे सुपुर्द कर दिया, बेड पड़ी वो मेरी हरकतों से बिन जल मछलि की तरह मचल रही थी.…
एक समय था, जब मे भाभी के इशारों पर नाचता था, लेकिन आज वो मेरे हाथों के इशारों पर इस तरह मचल रही थी, जैसे उनके बदन का रिमोट मेरे हाथों में हो…
कुछ ही पलों में कमरे का वातावरण वसनामय हो गया…मादकता से भरी आहों, करहों के बीच तूफान आए, चले गये, फिर आए फिर चले गये….
भाभी अब पूरी तरह तृप्त हो चुकी थी, फिर उन्होने मुझे बड़े प्यार से मेरे माथे को चूमकर कोई 3 बजे अपने कमरे में सोने के लिए भेज दिया..
सुबह जब सबने मिलकर नाश्ता किया, उस समय बाबूजी ने भैया से बात चलाई…
बाबूजी – और कृष्णा बेटा, कैसी चल रही है तुम्हारी ड्यूटी…?
भैया – वैसे तो ठीक है बाबूजी, ड्यूटी की कोई प्राब्लम नही है, लेकिन घर में खाने पीने का सब कुछ गड़बड़ रहता है,
सब कुछ नौकरों के सहारे नही हो पता है, तो मे सोच रहा था, कि कामिनी को भी अपने साथ ले जाता हूँ…
बाबूजी – हमें तो कोई दिक्कत नही है, बस एक छोटी सी समस्या है, बड़ी बहू के भाई की शादी है, कल वो अपने घर जाने वाली है, तो तब तक के लिए कामिनी बहू यहाँ बनी रहती तो कुछ सहारा रहता इन बच्चों को…
रामा बिटिया अभी इतनी परिपक्व नही है, जो अकेले घर संभाल ले…