S
StoryPublisher
Guest
वो आअहह…..सस्स्सिईईईईई…करती हुई पूरा लंड एक बार में ही निगल गयी… मे उसकी गान्ड पर थप्पड़ बरसाते हुए दनादन धक्के लगाने लगा… !
वो भी अपनी गान्ड को मेरे लंड पर पटक-पटक कर चुदाई का मज़ा ले रही थी..
उसके चुतड़ों पर मेरी जाँघ की थप-थप की आवाज़ रात के शांत वातावरण में गूँज रही थी…
मुझे अभी मज़ा आना शुरू ही हुआ था, कि किसी ने पीछे से मुझे अपनी बाहों में लपेट लिया….
धक्के मारते हुए मेने मुड़कर देखा तो रागिनी की टेंट मेट रीना… एकदम नंगी मुझे अपनी बाहों में भरे हुए मेरे बदन से लिपटी हुई थी…!
धक्कों के साथ साथ उसका बदन भी मेरे शरीर के साथ रगडे खा रहा था…
मस्त माल कूर्वी फिगर रीना अपने मोटे-मोटे आम मेरी पीठ से सटाये हुए थी…, उसके कड़क निपल्स मेरी पीठ से रगड़ कर मेरे मज़े को और दुगना कर रहे थे..
बाजू से पकड़ कर मेने रीना को अपने बगल में खड़ा किया, और रागिनी की चूत में धक्के लगाते हुए उसके होंठ चूसने लगा…
फिर मेने उसकी चूत में अपनी दो उंगलियाँ डालते हुए पूछा…
रीना तुम यहाँ कब आई…?
वो सिसकते हुए बोली – सस्सिईईईई….आआहह….जब तुम दोनो किस करना शुरू किए थे, मे तभी से तुम दोनो का खेल देख रही हूँ….
उसकी आवाज़ सुनकर रागिनी ने मुड़कर पीछे देखा…और अपनी गान्ड को ज़ोर ज़ोर से पटकते हुए बोली- आअहह….साल्ल्लीइीइ….कुतियाअ…तू भी आ गयी…. अपनी चूत की खुजली मिटाने…
आआहह…हाईए रे.. बहुत मस्त चुदाई करता है…रीि ये अंकुश….तो.. आहह…आईईई…मे तो फिर गाइिईई….उउउऊओह… करती हुई रागिनी भालभाला कर झड़ने लगी…
इधर मेरा भी नल कभी भी खुल सकता था… सो पूरा दम लगाकर दो-तीन धक्के मारे.. और उसकी चूत में पूरा जड़ तक लंड पेलकर धार मार दी…
साथ ही उत्तेजना में मेरी दोनो उंगलियाँ जड़ तक रीना की चूत में घुस गयी…जिससे वो भी अपने पंजों के बल उचक कर पानी छोड़ने लगी….!
मेने अपना टॅंक खाली कर के पाइप को उसकी टंकी से बाहर खींचा…. फुकच्छ… की आवाज़ के साथ मेरा लंड रागिनी की चूत से बाहर आया, जिसपर रागिनी की चूत का रस लगा हुआ था…
पता नही क्यों… लेकिन वो अभी भी अपनी फुल फॉर्म में ही लग रहा था… उसका आकर देख कर रीना की घिग्घी बँध गयी… वो उसे फटी-फटी आँखों से देख रही थी…
रीना अपने मुँह पर हाथ रखकर बोली - हाए राअंम्म… रागिनी.. तू इतना बड़ा लंड झेल गयी… बाप रे ये मेरी तो चूत के परखच्चे उड़ा देगा…!
रागिनी – बकवास मत कर, मुझे पता है, तू कितनी सील पॅक है, साली खुद के चाचा का सोटा खा जाती है, और अब यहाँ नाटक कर रही है…
रीना – हहहे… वो उनका इतना बड़ा नही है यार… सच में ये तो किसी घोड़े के जैसा लग रहा है…, ये कहकर उसने उसे अपने हाथ में पकड़ा, और उसकी स्ट्रेंत चेक करने लगी..
रागिनी – चल अब बहुत नाटक हुआ, इसे चाट कर सॉफ कर, अगर चाहिए तो जल्दी से चुस्कर तैयार कर…
रीना – पर यार ये तो ऑलरेडी तैयार ही है…
मेने उसे झिड़कते हुए कहा – फिर भी थोड़ी सेवा तो करनी पड़ेगी इसकी, अगर अपनी चूत को मेवा खिलानी है तो..
मेरे झिड़कते ही, उसने उसे अपने मुँह में ले लिया, और चाट-चाट कर चमका दिया…
5 मिनिट बाद ही मेरा खूँटा फिरसे ज्यों का त्यों सख़्त हो गया, जिसे मेने रीना की टाँगें चौड़ा कर उसकी चूत में ठोक दिया…
पहले धक्के पर वो बिल बिलाकर कर गान्ड हिलाने लगी, लेकिन कुछ ही देर में फूल मस्ती में आकर चुदाई का मज़ा लेने लगी…
रीना भी खेली खाई थी, सो अपनी गान्ड उचका-उचका कर लंड का मज़ा अपनी चूत को दिलाने लगी….
दोनो की अच्छे से बजाने के बाद मेने अपने कपड़े समेटे, और उनको गुड नाइट बोलकर अपने टेंट में आकर सो गया…
वो दोनो भी मेरे आने के कुछ देर बाद अपनी जगह पर जाकर सो गयी…!
दूसरे दिन हम सब खजुराहो का मंदिर देखने गये, मंदिर की कलाकृतियाँ इतनी सुंदर और कामुक थी, की जहाँ खड़े होकर देखने लगें लंड अपने आप पेंट के भीतर ठुमके मारने लगता…
वो तो अच्छा था, कि लड़के और लड़कियों को अलग अलग ग्रूप में रख कर घूम रहे थे… कामसूत्र के सारे आयाम उन दीवारों पर दर्शाये गये थे…!
ये सब देखकर बाहर जब सब इकट्ठा हुए तो लड़के और लड़कियों के चेहरों से साफ लग रहा था, कि वो कितनी उत्तेजना में हैं…
मेडम बारी-बारी से सबके पॅंट के उठानों को देख रही थी, और शायद मन ही मन चुदने की कल्पना भी कर रही हो…
लेकिन कुछ होने वाला नही था, सो उसने नज़र बचाकर अपनी टाँगों के बीच हाथ डालकर अपनी गीली चूत को पेटिकोट से सूखा लिया…
इस तरह से रोज एक-दो नये मोनुमेंट को हम लोग देखने जाते और शाम को अपने अपने टेंट में आ जाते…
कुछ लड़के लड़कियाँ की सेट्टिंग भी हो गयी थी, और वो शाम के वक़्त जंगलों की सैर के बहाने अपनी रास लीला का लुफ्त भी उठा लेते थे…
इसी तरह 3-4 दिन निकल गये, रागिनी और रीना ने इस बीच फिरसे मेरे नज़दीक आने की बहुत कोशिश की, लेकिन मेने उन्हें मौका नही दिया…!
ऐसे ही एक दिन एक मंदिर में हम घूम रहे थे, मंदिर प्रांगड़ में एक पीपल का बड़ा सा पेड़ था, जिसके तने (स्टेम) के चारों ओर मिट्टी का गोलाई लिए हुए चबूतरा सा बना हुआ था..
मे भीड़ से अलग होकर उसपर बैठ गया, मौका ताड़ कर रीना मेरे पास आई, और एक चान्स और देने के लिए गिडगिडाने लगी..
मेने उससे कहा – देखो रीना तुम तो जानती ही हो, मे इस तरह का आदमी नही हूँ, वो तो पता नही मुझे क्या हुआ था उस दिन, और मे बैचैनि में उठ कर अकेले बाहर चला गया, और तुम लोगों ने मौके का फ़ायदा उठा लिया..…
वो – मे मानती हूँ, हमने मौके का फ़ायदा उठाया, और ऐसा तुम्हारे साथ उस दिन क्यों हुआ ये भी जानती हूँ…!
मेने चोंक कर उसकी तरफ देखते हुए पूछा – क्या कहना चाहती हो तुम..? वो तो बस ऐसे ही कुछ बाहर का खाया पीया था तो गॅस बनने लगी होगी, इसलिए बैचैनि हो रही थी… !
रीना – एक काम करो, उस दिन की घटना फिर से एक बार याद करो, क्या वो सब जस्ट गॅस से होने वाली स्वाभाविक सी प्रतिक्रिया थी..?
उसकी बात सुनकर मे सोच में पड़ गया, फिर मुझे कुछ लगा कि वो सब स्वाभविक तो नही था, ऐसा कभी मेरे साथ नही हुआ था की मेने अपना मानसिक कंट्रोल ही खो दिया हो…
और मेरे मुँह से निकलने वाले वो अपशब्द…. ये सब दिमाग़ में घूमते ही मे सोच में पड़ गया…
मुझे यूँ सोच में डूबे हुए देखकर वो फिर बोली – क्या सोच रहे हो…?
मेने अपनी सोच को विराम देते हुए कहा – तुम सही कह रही हो, मेरे साथ उस दिन कुछ तो गड़बड़ थी… क्या तुम्हें पता है…?
रीना मुस्करा कर बोली – मुझे सब पता है, कि तुम्हारे साथ क्या हुआ और किसने किया…?
मेने उसके कंधे पकड़ कर कहा – बताओ मुझे क्या हुआ था उस दिन?, और किसने किया था मेरे साथ…?
एक अर्थपूर्ण मुस्कान रीना के चेहरे पर आ गयी, और उसी अंदाज में वो बोली – मेरी एक शर्त है, अगर मानो तो मे तुम्हें सब कुछ बता सकती हूँ…!
मेने उसकी मनसा समझते हुए अपना एक हाथ उसके पीछे ले गया, और उसकी गान्ड सहला कर कहा – क्या शर्त है तुम्हारी…?
उसने मेरे पेंट के ऊपर से मेरे लौडे को सहला का कहा – एक बार और ये चाहिए मुझे… बोलो दोगे..?
मेने भी हाथ आगे कर के उसकी चूत को सहला दिया, और कपड़े के ऊपर से ही अपनी एक उंगली घुसाकर कहा – ठीक है, मे तुम्हें एक बार और चोदुन्गा, अब बोलो…
वो एक बारगी सिसक पड़ी, और मेरे हाथ को अपनी चूत पर दबाते हुए बताने लगी..
रीना मुझे उस दिन के बारे में बताते हुए बोली – तुम्हें याद होगा…,
उस रात, जब तुम लोग खाना खा रहे थे, तो मेने और रागिनी ने आकर तुम्हें जाय्न किया, और साथ बैठ कर खाने लगे…
मेने हामी भरी…. फिर
रीना – फिर हम सबने एक दूसरे का खाना भी शेयर किया था, …
उसी समय मौका देख कर रागिनी ने एक ऐसा ड्रग तुम्हारे खाने में मिला दिया
जिसके असर से आदमी या औरत सेक्स करने के लिए बैचैन होने लगते है…
वो भी अपनी गान्ड को मेरे लंड पर पटक-पटक कर चुदाई का मज़ा ले रही थी..
उसके चुतड़ों पर मेरी जाँघ की थप-थप की आवाज़ रात के शांत वातावरण में गूँज रही थी…
मुझे अभी मज़ा आना शुरू ही हुआ था, कि किसी ने पीछे से मुझे अपनी बाहों में लपेट लिया….
धक्के मारते हुए मेने मुड़कर देखा तो रागिनी की टेंट मेट रीना… एकदम नंगी मुझे अपनी बाहों में भरे हुए मेरे बदन से लिपटी हुई थी…!
धक्कों के साथ साथ उसका बदन भी मेरे शरीर के साथ रगडे खा रहा था…
मस्त माल कूर्वी फिगर रीना अपने मोटे-मोटे आम मेरी पीठ से सटाये हुए थी…, उसके कड़क निपल्स मेरी पीठ से रगड़ कर मेरे मज़े को और दुगना कर रहे थे..
बाजू से पकड़ कर मेने रीना को अपने बगल में खड़ा किया, और रागिनी की चूत में धक्के लगाते हुए उसके होंठ चूसने लगा…
फिर मेने उसकी चूत में अपनी दो उंगलियाँ डालते हुए पूछा…
रीना तुम यहाँ कब आई…?
वो सिसकते हुए बोली – सस्सिईईईई….आआहह….जब तुम दोनो किस करना शुरू किए थे, मे तभी से तुम दोनो का खेल देख रही हूँ….
उसकी आवाज़ सुनकर रागिनी ने मुड़कर पीछे देखा…और अपनी गान्ड को ज़ोर ज़ोर से पटकते हुए बोली- आअहह….साल्ल्लीइीइ….कुतियाअ…तू भी आ गयी…. अपनी चूत की खुजली मिटाने…
आआहह…हाईए रे.. बहुत मस्त चुदाई करता है…रीि ये अंकुश….तो.. आहह…आईईई…मे तो फिर गाइिईई….उउउऊओह… करती हुई रागिनी भालभाला कर झड़ने लगी…
इधर मेरा भी नल कभी भी खुल सकता था… सो पूरा दम लगाकर दो-तीन धक्के मारे.. और उसकी चूत में पूरा जड़ तक लंड पेलकर धार मार दी…
साथ ही उत्तेजना में मेरी दोनो उंगलियाँ जड़ तक रीना की चूत में घुस गयी…जिससे वो भी अपने पंजों के बल उचक कर पानी छोड़ने लगी….!
मेने अपना टॅंक खाली कर के पाइप को उसकी टंकी से बाहर खींचा…. फुकच्छ… की आवाज़ के साथ मेरा लंड रागिनी की चूत से बाहर आया, जिसपर रागिनी की चूत का रस लगा हुआ था…
पता नही क्यों… लेकिन वो अभी भी अपनी फुल फॉर्म में ही लग रहा था… उसका आकर देख कर रीना की घिग्घी बँध गयी… वो उसे फटी-फटी आँखों से देख रही थी…
रीना अपने मुँह पर हाथ रखकर बोली - हाए राअंम्म… रागिनी.. तू इतना बड़ा लंड झेल गयी… बाप रे ये मेरी तो चूत के परखच्चे उड़ा देगा…!
रागिनी – बकवास मत कर, मुझे पता है, तू कितनी सील पॅक है, साली खुद के चाचा का सोटा खा जाती है, और अब यहाँ नाटक कर रही है…
रीना – हहहे… वो उनका इतना बड़ा नही है यार… सच में ये तो किसी घोड़े के जैसा लग रहा है…, ये कहकर उसने उसे अपने हाथ में पकड़ा, और उसकी स्ट्रेंत चेक करने लगी..
रागिनी – चल अब बहुत नाटक हुआ, इसे चाट कर सॉफ कर, अगर चाहिए तो जल्दी से चुस्कर तैयार कर…
रीना – पर यार ये तो ऑलरेडी तैयार ही है…
मेने उसे झिड़कते हुए कहा – फिर भी थोड़ी सेवा तो करनी पड़ेगी इसकी, अगर अपनी चूत को मेवा खिलानी है तो..
मेरे झिड़कते ही, उसने उसे अपने मुँह में ले लिया, और चाट-चाट कर चमका दिया…
5 मिनिट बाद ही मेरा खूँटा फिरसे ज्यों का त्यों सख़्त हो गया, जिसे मेने रीना की टाँगें चौड़ा कर उसकी चूत में ठोक दिया…
पहले धक्के पर वो बिल बिलाकर कर गान्ड हिलाने लगी, लेकिन कुछ ही देर में फूल मस्ती में आकर चुदाई का मज़ा लेने लगी…
रीना भी खेली खाई थी, सो अपनी गान्ड उचका-उचका कर लंड का मज़ा अपनी चूत को दिलाने लगी….
दोनो की अच्छे से बजाने के बाद मेने अपने कपड़े समेटे, और उनको गुड नाइट बोलकर अपने टेंट में आकर सो गया…
वो दोनो भी मेरे आने के कुछ देर बाद अपनी जगह पर जाकर सो गयी…!
दूसरे दिन हम सब खजुराहो का मंदिर देखने गये, मंदिर की कलाकृतियाँ इतनी सुंदर और कामुक थी, की जहाँ खड़े होकर देखने लगें लंड अपने आप पेंट के भीतर ठुमके मारने लगता…
वो तो अच्छा था, कि लड़के और लड़कियों को अलग अलग ग्रूप में रख कर घूम रहे थे… कामसूत्र के सारे आयाम उन दीवारों पर दर्शाये गये थे…!
ये सब देखकर बाहर जब सब इकट्ठा हुए तो लड़के और लड़कियों के चेहरों से साफ लग रहा था, कि वो कितनी उत्तेजना में हैं…
मेडम बारी-बारी से सबके पॅंट के उठानों को देख रही थी, और शायद मन ही मन चुदने की कल्पना भी कर रही हो…
लेकिन कुछ होने वाला नही था, सो उसने नज़र बचाकर अपनी टाँगों के बीच हाथ डालकर अपनी गीली चूत को पेटिकोट से सूखा लिया…
इस तरह से रोज एक-दो नये मोनुमेंट को हम लोग देखने जाते और शाम को अपने अपने टेंट में आ जाते…
कुछ लड़के लड़कियाँ की सेट्टिंग भी हो गयी थी, और वो शाम के वक़्त जंगलों की सैर के बहाने अपनी रास लीला का लुफ्त भी उठा लेते थे…
इसी तरह 3-4 दिन निकल गये, रागिनी और रीना ने इस बीच फिरसे मेरे नज़दीक आने की बहुत कोशिश की, लेकिन मेने उन्हें मौका नही दिया…!
ऐसे ही एक दिन एक मंदिर में हम घूम रहे थे, मंदिर प्रांगड़ में एक पीपल का बड़ा सा पेड़ था, जिसके तने (स्टेम) के चारों ओर मिट्टी का गोलाई लिए हुए चबूतरा सा बना हुआ था..
मे भीड़ से अलग होकर उसपर बैठ गया, मौका ताड़ कर रीना मेरे पास आई, और एक चान्स और देने के लिए गिडगिडाने लगी..
मेने उससे कहा – देखो रीना तुम तो जानती ही हो, मे इस तरह का आदमी नही हूँ, वो तो पता नही मुझे क्या हुआ था उस दिन, और मे बैचैनि में उठ कर अकेले बाहर चला गया, और तुम लोगों ने मौके का फ़ायदा उठा लिया..…
वो – मे मानती हूँ, हमने मौके का फ़ायदा उठाया, और ऐसा तुम्हारे साथ उस दिन क्यों हुआ ये भी जानती हूँ…!
मेने चोंक कर उसकी तरफ देखते हुए पूछा – क्या कहना चाहती हो तुम..? वो तो बस ऐसे ही कुछ बाहर का खाया पीया था तो गॅस बनने लगी होगी, इसलिए बैचैनि हो रही थी… !
रीना – एक काम करो, उस दिन की घटना फिर से एक बार याद करो, क्या वो सब जस्ट गॅस से होने वाली स्वाभाविक सी प्रतिक्रिया थी..?
उसकी बात सुनकर मे सोच में पड़ गया, फिर मुझे कुछ लगा कि वो सब स्वाभविक तो नही था, ऐसा कभी मेरे साथ नही हुआ था की मेने अपना मानसिक कंट्रोल ही खो दिया हो…
और मेरे मुँह से निकलने वाले वो अपशब्द…. ये सब दिमाग़ में घूमते ही मे सोच में पड़ गया…
मुझे यूँ सोच में डूबे हुए देखकर वो फिर बोली – क्या सोच रहे हो…?
मेने अपनी सोच को विराम देते हुए कहा – तुम सही कह रही हो, मेरे साथ उस दिन कुछ तो गड़बड़ थी… क्या तुम्हें पता है…?
रीना मुस्करा कर बोली – मुझे सब पता है, कि तुम्हारे साथ क्या हुआ और किसने किया…?
मेने उसके कंधे पकड़ कर कहा – बताओ मुझे क्या हुआ था उस दिन?, और किसने किया था मेरे साथ…?
एक अर्थपूर्ण मुस्कान रीना के चेहरे पर आ गयी, और उसी अंदाज में वो बोली – मेरी एक शर्त है, अगर मानो तो मे तुम्हें सब कुछ बता सकती हूँ…!
मेने उसकी मनसा समझते हुए अपना एक हाथ उसके पीछे ले गया, और उसकी गान्ड सहला कर कहा – क्या शर्त है तुम्हारी…?
उसने मेरे पेंट के ऊपर से मेरे लौडे को सहला का कहा – एक बार और ये चाहिए मुझे… बोलो दोगे..?
मेने भी हाथ आगे कर के उसकी चूत को सहला दिया, और कपड़े के ऊपर से ही अपनी एक उंगली घुसाकर कहा – ठीक है, मे तुम्हें एक बार और चोदुन्गा, अब बोलो…
वो एक बारगी सिसक पड़ी, और मेरे हाथ को अपनी चूत पर दबाते हुए बताने लगी..
रीना मुझे उस दिन के बारे में बताते हुए बोली – तुम्हें याद होगा…,
उस रात, जब तुम लोग खाना खा रहे थे, तो मेने और रागिनी ने आकर तुम्हें जाय्न किया, और साथ बैठ कर खाने लगे…
मेने हामी भरी…. फिर
रीना – फिर हम सबने एक दूसरे का खाना भी शेयर किया था, …
उसी समय मौका देख कर रागिनी ने एक ऐसा ड्रग तुम्हारे खाने में मिला दिया
जिसके असर से आदमी या औरत सेक्स करने के लिए बैचैन होने लगते है…