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Guest
आपके यहाँ से जाते ही उसने आपके और अपने बारे में सब कुछ बता दिया था…
वो रोज़ आपके बारे में ही बातें करती रहती है… उसकी बातें सुन सुन कर आपसे मिलने की मेरी जिग्यसा बढ़ती गयी…
और देखिए आज आप मेरे पास बैठे हैं… सच में निशा ने मुझे आपके बारे में कम ही बताया था… आप तो उससे कही बढ़कर ही निकले…
मेने मुस्कराते हुए कहा – किस बात में… ?
वो – मुझे ये उम्मीद नही थी कि आप इतने हॅंडसम होंगे… सच कहूँ तो मुझे निशा से जलन हो रही है… कि काश उसकी जगह में होती…?
मे – अरे साली जी ! क्यों आप मुझे चने के झाड़ पर चढ़ा रही हो… मे इतना भी हॅंडसम नही हूँ…!
वो – आप मेरी जगह होते तब पता चलता आपको की आप क्या हैं.. सच में निशा कितनी भाग्यशाली है.. की आप जैसा हॅंडसम उसका लवर है… और इसमें कोई गुंजाइश भी नही है.. की एक दिन आप दोनो एक भी हो जाओगे…!
मेने उसे ब्लश करते हुए कहा – वैसे आप भी कम नही हो… जब भी घर से निकलती होगी.. लड़कों की लाइन लग जाती होगी…!
वो कुछ बुझे-बुझे से स्वर में बोली – अपनी ऐसी किस्मत कहाँ… मे कितनी मोटी हूँ.. !
जब भी हम दोनो सहेलियाँ बाहर निकलती हैं… तो लड़के उसको ही देखते रहते हैं.. और में कुढती रहती हूँ…
मे – ये तो अपनी – 2 नज़र का ख़याल है… वैसे आपके जैसे कूर्वी फिगर वाली लड़कियाँ ही ज़्यादा हॉट लगती हैं..
वो – आप मज़ाक कर रहे हैं… मे और हॉट…?
मे – हां ! कम से कम मेरी नज़र में तो आप हॉट ही हो… दूसरों का मे कह नही सकता… मेने उसका मन रखने के लिहाज़ से कहा…
वो मेरी तरफ और खिसक आई, और मेरे शरीर से अपना बदन सटाती हुई बोली – क्या में सच में हॉट लगती हूँ आपको..?
मे अब सोच में पड़ गया… मेरा उसको ब्लश करना मुझे अब भारी पड़ता नज़र आने लगा…
अब अगर मे इसका दिल दुखाता हूँ… तो बेचारी का दिल टूट जाएगा.. सो अपनी बात पर कायम रहते हुए बोला…
देखो… हर आदमी की अपनी-अपनी चाय्स होती है… कोई तो इकहरे बदन की लड़की पसंद करता है… तो वहीं बहुत से लोग कूर्वी फिगर के दीवाने होते हैं…!
आपको कैसा फिगर अच्छा लगता है…वो मुझसे और चिपकते हुए बोली… उसके बदन की गर्मी मुझे पिघलाने लगी थी…
और मे उसके मादक कूर्वी फिगर की तारीफ़ कर बैठा…
सच कहूँ तो मुझे तुम्हारे जैसी फिगर वाली लड़कियाँ ज़्यादा अच्छी लगती है…
मेरा इतना ही कहना था कि उसने मेरे गले में अपनी मांसल बाहें डाल दी…, और अपने कलमी आमों को मेरे सीने से सटाते हुए बोली –
ओह ! जीजू आप सच में बहुत अच्छे हैं.. आइ लव यू… ये कह कर उसने मेरे गाल पर किस कर दिया…
मेने उसके कंधे पकड़ कर अपने से अलग करते हुए कहा – लेकिन मे तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड से बहुत प्यार करता हूँ..
वो मेरी आँखों में झाँकते हुए बोली – तो मेने कब कहा है कि आप उससे प्यार मत करो… बस उसमें से थोड़ा सा… बस इत्तु सा (अपनी उंगली के पोर पर अंगूठे से निशान बना कर बोली) मुझे भी दे दीजिए…
मे – ये तुम क्या कह रही हो मालती..? मे अपने प्यार से बेवफ़ाई नही कर सकता …
वो – ओह…जीजू.. आप भी क्या दकियानूसी बातें करने लगे.. मे अपनी सहेली के प्यार को बाँटने की बात थोड़ी ना कर रही हूँ… मे तो बस थोड़ा सा आपका प्यार माँग रही हूँ..
ये वादा है मेरा, कि इस बात का किसी को भी, कभी भी पता नही चलेगा…ये कहते हुए वो मेरे बदन से लिपट गई…
मे – प्लीज़ मालती… समझने की कोशिश करो… मे ये तुम्हारे साथ नही कर सकता….
वो – प्लीज़ अंकुसजी…! मे आपसे विनती कर रही हूँ.. प्लीज़ बस एक बार… फिर जीवन में कभी आपसे नही कहूँगी…
मे उसकी गुहार सुनकर पिघलने लगा और स्वतः ही मेरा हाथ उसकी पीठ पर सरक गया…
वो दीवानवार मेरे चेहरे को चूमने लगी… उसकी मादक चुचियाँ.. मुझे उत्तेजित कर रही थी… ना जाने कब हम दोनो के कपड़े एक दूसरे के बदन से जुदा हो गये…
वो जल्दी से जल्दी मुझ में समा जाना चाहती थी…उसकी हरकतों से ही मुझे लगाने लगा कि वो ये सब पहले भी कर चुकी है…
मुझे क्या फरक पड़ने वाला था… एक और नाम लिस्ट में जुड़ जाना चाहता है तो वो भी सही.. सो जोड़ लिया…,
वो मेरा लंड लेने के लिए उतावली हुई जा रही थी, देखते देखते उसने हम दोनो के बदन से कपड़े नोच डाले..
मेने उसके बड़े बड़े आमों को चूस्ते हुए…अपना लॉडा जैसे ही उसकी रसभरी मुनिया के मुँह पर रखा…
कामांध मालती ने झटके से अपनी गान्ड ऊपर को उचका दी, गीली चूत में मेरा आधा तक मूसल सरक गया……
उसके मुँह से मादक कराह फुट पड़ी…. आआहह…. जीजू… धीरे…हाए… बहुत मोटा है आपका…
मेने उसके कलमी आमों को मसल्ते हुए कहा – मेने तो कुछ भी नही किया साली साहिबा… तुम्हें ही उतावली हो रही थी इसे लेने की…
मेरी बात सुन कर शर्म से उसने अपना सर मेरे सीने में छुपा लिया, फिर अपना हाथ नीचे ले जाकर उसने मेरे लंड को टटोला…
वो समझ रही थी, कि पूरा लंड अंदर चला गया होगा.. सो बाहर बची हुई लंबाई नाप कर बोली –
हाए राम… ये तो अभी भी इतना सारा वाकी है..? मेरे अंदर तक तो पूरा भरा-भरा सा लग रहा है… अब ये कैसे जाएगा पूरा…?
मेने उसके माल पुआ जैसे गाल पर अपने दाँत गढ़ाते हुए कहा – ये अब मेरा काम है रानी, तुम बस देखती जाओ..
आआययययीीई…जीजू प्लीज़ दाँत मत गढ़ाओ, निशान बन जाएँगे…
मेने अपने दाँतों के निशान पर जीभ से उसके गालों को चाटते हुए एक करारा सा धक्का और जड़ दिया…
मालती ने दर्द के मारे मेरे कंधे पर अपने दाँत गढ़ा दिए… और मेरे नीचे दबी हुई मचलने लगी…
दर्द से मेरी कराह निकल गयी… मेने उसके चुचे मसलते हुए कहा – साली कटखनी बिल्ली…
कुछ देर ठहरकर मेने उसे चोदना शुरू किया… वो जैसे ही दोबारा मज़े में आई… बस फिर तो पुछो ही मत…
वो घमासान लड़ाई हुई पलंग के मैदान पर.. कि मैदान भी चूं-छाँ करने लगा…
सारी रात मेने उसकी चूत की वो धुनाई की, कि अब वो कुछ दिनो तक इसे याद रखने वाली थी…उलट-पलट कर खूब जम कर चोदा मेने मालती को उस रात…
जब उसकी टंकी रीति हो गयी.. तो अपने कपड़े समेट कर लड़खड़ाती हुई सोने चली गयी और मे अपने बिस्तर में तान रज़ाई गहरी नीद में डूबता चला गया…!
सुबह उसके जगाने से ही मेरी नींद खुली… वो मुस्कराती हुई चाय का प्याला हाथ में लिए मेरे पलग के पास खड़ी थी…
गुड मॉर्निंग स्वीटहार्ट… उसने मुझे मॉर्निंग विश किया तो मेने भी हॅस्कर उसे विश किया और चाय का कप उसके हाथ से लेते हुए बोला…!
अबसे हमारा वही रिश्ता रहे तो ज़्यादा उचित रहेगा…
वो – ओह्ह..जीजू… मेने तो अकेले में आपको बोला… ठीक है, प्रॉमिस .. अब कभी नही कहूँगी… सॉरी जीजू….
मेने चाइ पी और उसके घर में ही फ्रेश होकर भाभी के घर चला आया…
आज बारात लेकर लड़की वालों के यहाँ जाना था… तो सभी उसी तैयारियों में लगे पड़े थे… निशा से एक फौरी तौर पर ही-हेलो हो पाई…
धूम धाम से शादी संपन्न हो गयी…
निशा की भाभी एक पढ़ी लिखी मध्यम घराने की सुंदर और शुशील लड़की थी…
शादी के दूसरे दिन हम सभी उनसे विदा होकर अपने घर लौट आए… भाभी को और कुछ दिन वहाँ रहना पड़ा था..
कुछ दिनो बाद मेरे फर्स्ट एअर के एग्ज़ॅम थे… सो घर लौट कर मेने अपनी पढ़ाई पर ध्यान लगा दिया…
कुछ दिनो बाद भाभी भी आ गयी, उनका भाई उन्हें छोड़ गया था…
मेने मन लगा कर अपने एग्ज़ॅम दिए और एक साल की पढ़ाई ख़तम हुई… मेरे साथ ही रामा दीदी ने भी अपने फाइनल के पेपर दिए.. अब वो ग्रॅजुयेट कंप्लीट करने वाली थी…
तो बाबूजी ने उनके लिए लड़का तलाश करना शुरू कर दिया.. उधर आशा दीदी की भी शादी तय कर दी थी...
रिज़ल्ट के बाद दोनो बहनों की बारी-बारी से शादियाँ हो गयीं… और वो दोनो अपनी नयी दुनिया बसाने अपने-2 घर चली गयी..
रामा दीदी की शादी हमारे कॉलेज के प्रिन्सिपल के लड़के लोकेश के साथ कर दी थी.. वो देल्ही में इंजिनियर है…
खुद प्रिन्सिपल साब ही दीदी का हाथ माँगने आए थे हमारे यहाँ…
वो रोज़ आपके बारे में ही बातें करती रहती है… उसकी बातें सुन सुन कर आपसे मिलने की मेरी जिग्यसा बढ़ती गयी…
और देखिए आज आप मेरे पास बैठे हैं… सच में निशा ने मुझे आपके बारे में कम ही बताया था… आप तो उससे कही बढ़कर ही निकले…
मेने मुस्कराते हुए कहा – किस बात में… ?
वो – मुझे ये उम्मीद नही थी कि आप इतने हॅंडसम होंगे… सच कहूँ तो मुझे निशा से जलन हो रही है… कि काश उसकी जगह में होती…?
मे – अरे साली जी ! क्यों आप मुझे चने के झाड़ पर चढ़ा रही हो… मे इतना भी हॅंडसम नही हूँ…!
वो – आप मेरी जगह होते तब पता चलता आपको की आप क्या हैं.. सच में निशा कितनी भाग्यशाली है.. की आप जैसा हॅंडसम उसका लवर है… और इसमें कोई गुंजाइश भी नही है.. की एक दिन आप दोनो एक भी हो जाओगे…!
मेने उसे ब्लश करते हुए कहा – वैसे आप भी कम नही हो… जब भी घर से निकलती होगी.. लड़कों की लाइन लग जाती होगी…!
वो कुछ बुझे-बुझे से स्वर में बोली – अपनी ऐसी किस्मत कहाँ… मे कितनी मोटी हूँ.. !
जब भी हम दोनो सहेलियाँ बाहर निकलती हैं… तो लड़के उसको ही देखते रहते हैं.. और में कुढती रहती हूँ…
मे – ये तो अपनी – 2 नज़र का ख़याल है… वैसे आपके जैसे कूर्वी फिगर वाली लड़कियाँ ही ज़्यादा हॉट लगती हैं..
वो – आप मज़ाक कर रहे हैं… मे और हॉट…?
मे – हां ! कम से कम मेरी नज़र में तो आप हॉट ही हो… दूसरों का मे कह नही सकता… मेने उसका मन रखने के लिहाज़ से कहा…
वो मेरी तरफ और खिसक आई, और मेरे शरीर से अपना बदन सटाती हुई बोली – क्या में सच में हॉट लगती हूँ आपको..?
मे अब सोच में पड़ गया… मेरा उसको ब्लश करना मुझे अब भारी पड़ता नज़र आने लगा…
अब अगर मे इसका दिल दुखाता हूँ… तो बेचारी का दिल टूट जाएगा.. सो अपनी बात पर कायम रहते हुए बोला…
देखो… हर आदमी की अपनी-अपनी चाय्स होती है… कोई तो इकहरे बदन की लड़की पसंद करता है… तो वहीं बहुत से लोग कूर्वी फिगर के दीवाने होते हैं…!
आपको कैसा फिगर अच्छा लगता है…वो मुझसे और चिपकते हुए बोली… उसके बदन की गर्मी मुझे पिघलाने लगी थी…
और मे उसके मादक कूर्वी फिगर की तारीफ़ कर बैठा…
सच कहूँ तो मुझे तुम्हारे जैसी फिगर वाली लड़कियाँ ज़्यादा अच्छी लगती है…
मेरा इतना ही कहना था कि उसने मेरे गले में अपनी मांसल बाहें डाल दी…, और अपने कलमी आमों को मेरे सीने से सटाते हुए बोली –
ओह ! जीजू आप सच में बहुत अच्छे हैं.. आइ लव यू… ये कह कर उसने मेरे गाल पर किस कर दिया…
मेने उसके कंधे पकड़ कर अपने से अलग करते हुए कहा – लेकिन मे तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड से बहुत प्यार करता हूँ..
वो मेरी आँखों में झाँकते हुए बोली – तो मेने कब कहा है कि आप उससे प्यार मत करो… बस उसमें से थोड़ा सा… बस इत्तु सा (अपनी उंगली के पोर पर अंगूठे से निशान बना कर बोली) मुझे भी दे दीजिए…
मे – ये तुम क्या कह रही हो मालती..? मे अपने प्यार से बेवफ़ाई नही कर सकता …
वो – ओह…जीजू.. आप भी क्या दकियानूसी बातें करने लगे.. मे अपनी सहेली के प्यार को बाँटने की बात थोड़ी ना कर रही हूँ… मे तो बस थोड़ा सा आपका प्यार माँग रही हूँ..
ये वादा है मेरा, कि इस बात का किसी को भी, कभी भी पता नही चलेगा…ये कहते हुए वो मेरे बदन से लिपट गई…
मे – प्लीज़ मालती… समझने की कोशिश करो… मे ये तुम्हारे साथ नही कर सकता….
वो – प्लीज़ अंकुसजी…! मे आपसे विनती कर रही हूँ.. प्लीज़ बस एक बार… फिर जीवन में कभी आपसे नही कहूँगी…
मे उसकी गुहार सुनकर पिघलने लगा और स्वतः ही मेरा हाथ उसकी पीठ पर सरक गया…
वो दीवानवार मेरे चेहरे को चूमने लगी… उसकी मादक चुचियाँ.. मुझे उत्तेजित कर रही थी… ना जाने कब हम दोनो के कपड़े एक दूसरे के बदन से जुदा हो गये…
वो जल्दी से जल्दी मुझ में समा जाना चाहती थी…उसकी हरकतों से ही मुझे लगाने लगा कि वो ये सब पहले भी कर चुकी है…
मुझे क्या फरक पड़ने वाला था… एक और नाम लिस्ट में जुड़ जाना चाहता है तो वो भी सही.. सो जोड़ लिया…,
वो मेरा लंड लेने के लिए उतावली हुई जा रही थी, देखते देखते उसने हम दोनो के बदन से कपड़े नोच डाले..
मेने उसके बड़े बड़े आमों को चूस्ते हुए…अपना लॉडा जैसे ही उसकी रसभरी मुनिया के मुँह पर रखा…
कामांध मालती ने झटके से अपनी गान्ड ऊपर को उचका दी, गीली चूत में मेरा आधा तक मूसल सरक गया……
उसके मुँह से मादक कराह फुट पड़ी…. आआहह…. जीजू… धीरे…हाए… बहुत मोटा है आपका…
मेने उसके कलमी आमों को मसल्ते हुए कहा – मेने तो कुछ भी नही किया साली साहिबा… तुम्हें ही उतावली हो रही थी इसे लेने की…
मेरी बात सुन कर शर्म से उसने अपना सर मेरे सीने में छुपा लिया, फिर अपना हाथ नीचे ले जाकर उसने मेरे लंड को टटोला…
वो समझ रही थी, कि पूरा लंड अंदर चला गया होगा.. सो बाहर बची हुई लंबाई नाप कर बोली –
हाए राम… ये तो अभी भी इतना सारा वाकी है..? मेरे अंदर तक तो पूरा भरा-भरा सा लग रहा है… अब ये कैसे जाएगा पूरा…?
मेने उसके माल पुआ जैसे गाल पर अपने दाँत गढ़ाते हुए कहा – ये अब मेरा काम है रानी, तुम बस देखती जाओ..
आआययययीीई…जीजू प्लीज़ दाँत मत गढ़ाओ, निशान बन जाएँगे…
मेने अपने दाँतों के निशान पर जीभ से उसके गालों को चाटते हुए एक करारा सा धक्का और जड़ दिया…
मालती ने दर्द के मारे मेरे कंधे पर अपने दाँत गढ़ा दिए… और मेरे नीचे दबी हुई मचलने लगी…
दर्द से मेरी कराह निकल गयी… मेने उसके चुचे मसलते हुए कहा – साली कटखनी बिल्ली…
कुछ देर ठहरकर मेने उसे चोदना शुरू किया… वो जैसे ही दोबारा मज़े में आई… बस फिर तो पुछो ही मत…
वो घमासान लड़ाई हुई पलंग के मैदान पर.. कि मैदान भी चूं-छाँ करने लगा…
सारी रात मेने उसकी चूत की वो धुनाई की, कि अब वो कुछ दिनो तक इसे याद रखने वाली थी…उलट-पलट कर खूब जम कर चोदा मेने मालती को उस रात…
जब उसकी टंकी रीति हो गयी.. तो अपने कपड़े समेट कर लड़खड़ाती हुई सोने चली गयी और मे अपने बिस्तर में तान रज़ाई गहरी नीद में डूबता चला गया…!
सुबह उसके जगाने से ही मेरी नींद खुली… वो मुस्कराती हुई चाय का प्याला हाथ में लिए मेरे पलग के पास खड़ी थी…
गुड मॉर्निंग स्वीटहार्ट… उसने मुझे मॉर्निंग विश किया तो मेने भी हॅस्कर उसे विश किया और चाय का कप उसके हाथ से लेते हुए बोला…!
अबसे हमारा वही रिश्ता रहे तो ज़्यादा उचित रहेगा…
वो – ओह्ह..जीजू… मेने तो अकेले में आपको बोला… ठीक है, प्रॉमिस .. अब कभी नही कहूँगी… सॉरी जीजू….
मेने चाइ पी और उसके घर में ही फ्रेश होकर भाभी के घर चला आया…
आज बारात लेकर लड़की वालों के यहाँ जाना था… तो सभी उसी तैयारियों में लगे पड़े थे… निशा से एक फौरी तौर पर ही-हेलो हो पाई…
धूम धाम से शादी संपन्न हो गयी…
निशा की भाभी एक पढ़ी लिखी मध्यम घराने की सुंदर और शुशील लड़की थी…
शादी के दूसरे दिन हम सभी उनसे विदा होकर अपने घर लौट आए… भाभी को और कुछ दिन वहाँ रहना पड़ा था..
कुछ दिनो बाद मेरे फर्स्ट एअर के एग्ज़ॅम थे… सो घर लौट कर मेने अपनी पढ़ाई पर ध्यान लगा दिया…
कुछ दिनो बाद भाभी भी आ गयी, उनका भाई उन्हें छोड़ गया था…
मेने मन लगा कर अपने एग्ज़ॅम दिए और एक साल की पढ़ाई ख़तम हुई… मेरे साथ ही रामा दीदी ने भी अपने फाइनल के पेपर दिए.. अब वो ग्रॅजुयेट कंप्लीट करने वाली थी…
तो बाबूजी ने उनके लिए लड़का तलाश करना शुरू कर दिया.. उधर आशा दीदी की भी शादी तय कर दी थी...
रिज़ल्ट के बाद दोनो बहनों की बारी-बारी से शादियाँ हो गयीं… और वो दोनो अपनी नयी दुनिया बसाने अपने-2 घर चली गयी..
रामा दीदी की शादी हमारे कॉलेज के प्रिन्सिपल के लड़के लोकेश के साथ कर दी थी.. वो देल्ही में इंजिनियर है…
खुद प्रिन्सिपल साब ही दीदी का हाथ माँगने आए थे हमारे यहाँ…