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लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस) complete

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दोनो बहनें एक दूसरे के सामने खुल चुकी थी, जो एक तरह से मेरे लिए अच्छा ही रहा… अब मे किसी को भी किसी के सामने पकड़ कर चोद सकता था….!

धीरे – 2 मेरी वकालत जमती जा रही थी, एक-दो छोटे बड़े केस मिलने लगे थे.. तो अब मुझे घर से पैसे लेने की ज़रूरत नही पड़ती थी…!

जस्टीस धिन्गरा की वजह से छोटे-मोटे केस तो कॉन्फिडेंट्ली हाल हो ही जाते थे,

धीरे -2 कोर्ट परिसर में मेरा भी नाम अन्य वकीलों के साथ लिया जाने लगा…

फिर एक दिन भाग्यवश, एक बड़ा क्लाइंट मिल गया,

भगवान दास गुप्ता, शहर में रियल एस्टेट का अच्छा ख़ासा नाम, लेकिन थोड़ा सीधा-सादा डरपोक किस्म का इंशान…

गुप्ता जी की शहर के बीचो-बीच एक बहुत बड़ी ज़मीन पर कुच्छ गुंडा तत्वों ने कब्जा जमा रखा था, और फर्दर कन्स्ट्रक्षन ना हो इसके लिए स्टे डाल के रखा था…!

गुप्ता जी बेचारे सीधे सादे बिज्निस, काफ़ी दिनो से इस ज़मीन को लेकर परेशान थे, उनको किसी ने मेरा नाम सुझाया इस मसले को हल करने के लिए….

जब वो आकर मुझसे मिले, अपना केस बताया…मुझे लगा कि ये वाकई में परेशान हैं….

मेने उनका केस ले लिया, और जल्दी से जल्दी उनकी ज़मीन से स्टे हटवाया,

कोर्ट का ऑर्डर लेकर जब साइट पर पहुँचे, उस समय 8-10 मुस्टंडे वहाँ चरस और गांजे की महफ़िल जमाए हुए थे…

वहाँ पहुँचने से पहले ही मेने एसपी ऑफीस को फोन कर दिया था, लेकिन पोलीस को पहुँचने में अभी वक़्त था…

मेरे साथ गुप्ता जी का मॅनेजर और दो उसके असिस्टेंट थे, मेने उन गुण्डों को कोर्ट का ऑर्डर दिखाया और कहा –

भाई लोगो, अपना ये मजमा यहाँ से हटाओ और ये जगह खाली करो, कोर्ट ने यहाँ कन्स्ट्रक्षन की पर्मिशन दे दी है…

उनमें से उनका सरगना आगे आया, बड़ी-बड़ी ऐंठी हुई मूँछे भारी भरकम शरीर, नशे से सुर्ख लाल-लाल आँखें,

अपनी कमर पे हाथ रखकर बोला – जाओ वकील साब, अपना काम करो, हम ऐसे किसी कोर्ट के आदेश से नही डरते…, बहुत बार देखे हैं ऐसे कागज…

मे – देखो, मे प्यार से तुम्हें समझा रहा हूँ, चुप-चाप ये जगह खाली करके निकल जाओ…तुम लोगों की सेहत के लिए अच्छा रहेगा…वरना…!

वो अपने बाजू उपर करते हुए अकड़ कर बोला – वरना क्या कर लेगा तू.. कल का लौंडा मुझे तडी देता है, तेरे जैसे 36 काले कोट वाले हमारी जेब में पड़े है….

वो अपनी बात पूरी करता कि तदददाअक्कक…मेरा भरपूर तमाचा उसके गाल पर पड़ा…, पाँचों उंगलियाँ उसके गाल पर छाप दी…

वो अपना गाल सहलाते हुए भिन्नाता हुआ, मेरी तरफ झपटा, मेने लपक कर बाए हाथ उसका गला जाकड़ लिया, और सीधे हाथ का एक भरपूर मुक्का उसकी नाक पर मारा…!

उसकी नाक से खून बहने लगा, दर्द से वो तिलमिला उठा, और चीख कर अपने नशेड़ी चम्चो से बोला –

देख क्या रहे हो मदर्चोदो, मारो सालों को, वो लोग जैसे नींद से जागे हों, नशे की वजह से वो गिरते पड़ते अपनी जगह से उठे, कि तभी…

इससे पहले कि वो उसकी मदद के लिए आते, मैदान में पोलीस साइरन की आवाज़ गूंजने लगी…

वो जहाँ के तहाँ खड़े रह गये..

कृष्णा भैया अपने दल-बल के साथ समय पर पहुँच गये, और उन सबको ड्रग्स के साथ अरेस्ट करके जैल में डाल दिया…

इस तरह से उनकी मदद से पोलीस के द्वारा उन गुण्डों को वहाँ से हटाया… और उनकी ज़मीन उनको दिलवा दी…!

दरअसल वो गुंडे उनके राइवल्री बिल्डर योगराज के बिठाए हुए थे, गुप्ता जी को परेशान करने के लिए..., ये बात मुझे पोलीस से ही पता चली…

इससे पहले पोलीस बड़े-बड़े प्रेशर की वजह से उन पर हाथ ही नही डालती थी, क्योंकि योगराज की दोस्ती यहाँ के कमिशनर और एमएलए के साथ थी…

अब वो गुंडे अवैद्य कब्ज़े और ड्रग बेचने के जुर्म में दो-चार साल तक बाहर आने वाले नही थे…

जब ये बात मेने गुप्ता जी को बताई, तो उन्हें बड़ा दुख हुआ, लेकिन भले आदमी ने योगराज के खिलाफ एक शब्द नही कहा,

बस प्रभु उन्हें सद्बुद्धि दे, ये कहकर बात को टाल दिया…

लेकिन इस सब से खुश होकर उन्होने उस ज़मीन से एक बंगले के लायक ज़मीन मेरे नाम करदी,

मेने उन्हें बहुत माना किया… लेकिन वो नही माने, और अपनी फर्म का मुझे लीगल आड्वाइज़र ही बना दिया…..

यही नही, अपनी ही एक बिल्डिंग में 3बीएचके फ्लॅट भी मुझे रहने के लिए दे दिया, जिससे मे एमर्जेन्सी पड़ने पर शहर में रुक सकूँ…

गुप्ता जी जैसा बड़ा क्लाइंट मिलने से मेरी खुद की फाइनान्षियल प्राब्लम काफ़ी हद तक पटरी पर आने लगी…!

कभी कभार कोर्ट के काम से कृष्णा भैया से भी मुलाकात हो जाती थी,

वो अपने एसपी आवास पर आने के लिए मुझे बोलते थे, लेकिन मे उन्हें मना कर देता, क्योंकि जब तक कामिनी भाभी उनके साथ रह रही है, तबतक मे उनके यहाँ नही जाना चाहता था…!

उधर कामिनी को जब पता चला कि उसका मोहरा निशा के मामले में बुरी तरह से पिट गया है, और उपर से कृष्णा भैया ने मेरे साथ राज़ीनामा कर लिया है, तो वो और बुरी तरह से भिन्ना उठी…

जिसका असर उन दोनो के संबंधों पर और ज़्यादा पड़ने लगा,

अब वो आए दिन उनके साथ बुरे से बुरा वार्ताव करने लगी, भैया की मजबूरी थी, कि वो उसके खिलाफ कोई कड़ा फ़ैसला नही ले सकते थे…

बस लहू का सा घूँट पीकर वर्दास्त कर रहे थे…!

एक दिन उन्होने मेरे ऑफीस में आकर अपनी दुख भरी दास्तान सुनाई, उनकी आँखों में मजबूरी के आँसू थे..

मेने उन्हें हिम्मत बाँधते हुए कहा – हौसला रखिए भैया, हर बुराई की अपनी समय सीमा होती है, उसके बाद उतना ही सुखद सबेरा भी आता है…

आप देखना एक दिन खुद ही नियती ऐसा कोई खेल खेलेगी कि आप उसके चंगुल से आज़ाद हो जाओगे…!

और वाकाई में नियती धीरे-2 इस दिशा में आने वाले समय की पटकथा लिख रही थी…

दिनो-दिन कामिनी की गति-विधियाँ रहस्यमयी होती जा रही थी…, अब उन्होने उसपर ध्यान देना ही बंद कर दिया था…!

कृष्णा भैया अपनी पोलीस की ड्यूटी में व्यस्त रहने लगे और कामिनी अपनी दुनिया में…

पति-पत्नी का रिस्ता तो जैसे नाम मात्र का ही रह गया था…

खैर.. इन्हें अपने हाल पर छोड़ देते हैं…, और अपने रास्ते लगते हैं…

क्योंकि जो जैसा करता है, फल भी उसे उसी हिसाब से मिलता है…, इन्हें भी मिलेगा……,

हां थोड़ा समय ज़रूर लग सकता है…

हेरा फेरी फिल्म के इस गाने की लाइन्स की तरह……

दरबार में उपरवाले के अंधेर नही पर देरी है…!

तक़दीर का सारा खेल है ये, और वक़्त की हेरा फेरी है…..!!

राजेश की रिहाई और फिर कृष्णा भैया के फिरसे घर के साथ संबंध सुधरने के बाद, घर का माहौल थोड़ा रिलॅक्स हो गया था, फिलहाल मुसीबतों का दौर गुजर गया था…

हमारी शादी बहुत ही नॉर्मल तरीक़े से आनन-फानन में हुई थी,

निशा और मे एक तरह से सही मैने में ये भी नही जान पाए कि नयी शादी का एंजाय्मेंट क्या होता है…

भाभी ने हम दोनो को कहीं अच्छी जगह जाकर हनिमून मनाने की सलाह दी..

मेने उन्हें टालना चाहा, तो उन्होने ये बात भैया और बाबूजी के सामने रख दी, जिसे उन्होने भी सही ठहराते हुए मुझे कहीं घूमने जाने के लिए मजबूर कर दिया…

मेने सोचा ! क्यों ना देल्ही जाया जाए, एक पन्थ दो काज, रामा दीदी के साथ-साथ अपने गुरु और नेहा से भी निशा को मिला लाउन्गा…

मेने अपना प्लान घर में सबको बताया, और टिकेट बुक कराकर एक दिन हम दोनो देल्ही निकल लिए…

एक अच्छे से होटेल में कमरा लिया, कमरे में पहूचकर फ्रेश हुए और उसके बाद रामा दीदी को फोन लगाया…

पहले तो वो मेरी आवाज़ सुनकर बहुत खुश हुई, और जब मेने बताया कि मे और निशा यहीं देल्ही में ही हैं…तो वो तुरंत बोली..

ये तो बहुत ही अच्छी बात है, तुम लोग जल्दी आ जाओ, तब तक मे तुम्हारे खाने-पीने का इंतेज़ाम करके रखती हूँ..

लेकिन जब मेने उसे ये बताया कि हम होटेल में ठहरे हुए हैं, तो वो बहुत नाराज़ हुई, मेने उसे समझाने की कोशिश करते हुए कहा,

हमारी वजह से तुम्हारी प्राइवसी खराब होगी, 2 बीएचके फ्लॅट में जगह ही कितनी होती है… इसलिए हमने सोचा कि हम बाद में तुम्हारे घर आते हैं…

 
मेरी बात सुनकर रामा दीदी भिन्ना उठी, और फोन पर ही चीखते हुए बोली –

तुझसे किसने कहा भेन्चोद कि तुम लोगों की वजह से हमारी प्राइवसी ख़तम होगी…

अरे जब आलोक यहाँ है ही नही तो क्या घंटा की प्राइवसी…?

उसके गुस्से से भरी आवाज़ सुनकर मेरी गान्ड फट गयी.., फिर भी मेने डरते हुए पूछा- क्ककयाआ..? जीजू घर पर नही हैं..?

वो थोड़ा शांत लहजे में बोली – नही ! वो तो एक हफ्ते के टूर पर मुंबई गये हैं… अब ज़्यादा बकवास मत कर, अपना समान उठा, और जल्दी से यहाँ आजाओ तुम दोनो…

बताओ, ये भी कोई बात हुई भला…अपना घर होते हुए होटेल में रुके हैं हरम्खोर…,

नयी भाभी क्या सोच रही होगी अपने मन में ? ननद का घर होते हुए होटेल में रुकना पड़ रहा है…

मे – लेकिन दीदी अब तो हमने कमरा ले लिया..ऐसा करते हैं, आज यहीं रुक जाते हैं, कल पक्का तुम्हारे यहाँ आ जाएँगे…

ये सुनते ही उसका पारा फिरसे चढ़ गया…और उसी गुस्से में बोली – मे तेरे से बात नही करना चाहती, तू निशा को फोन दे…

मेने निशा को फोन पकड़ा दिया.., कुच्छ औपचारिक बातों के बाद उसने हुकम दन-दना दिया कि अभी के अभी यहाँ चले आओ, वरना मे वहाँ आकर तुम दोनो के कान खींच कर लाउन्गि…

निशा भी तैयार होगयि, सो हम होटेल का एक रात का भाड़ा छोड़ कर जो अड्वान्स दे चुके थे, अपना झोला-डंडा उठाकर चल दिए जी उसके घर…..

डोर बेल बजते ही 1 मिनिट में ही दरवाजा खुल गया, हमें देखते ही, रामा दीदी ने निशा को अपने गले से लगा लिया…!

रामा – वाउ ! कितनी सुंदर लग रही है मेरी भाभी, तेरे तो भाग ही खुल गये बेवकूफ़..

वो इस समय स्लेक्स की एक कॅप्री और ढीला-ढाला सा टॉप जो उसकी नाभि तक ही आ रहा था, पहने थी,

जिसमें से उसके बिना ब्रा के मस्त उच्छलते बूब्स ऐसे लग रहे थे मानो दो कबूतर चोंच बाहर को किए फड़फदा रहे हों…

एकदम सीधे आगे से टॉप को ऐसे उठा रखा था उन्होने, मानो वो दो खूँटियों पर बस टाँग रखा हो..देखते ही मेरे लौडे ने एक मस्त अंगड़ाई ली…

बहुत देर तक वो दोनो गेट पर ही खड़ी गले मिलने और बतियाने लगी…

मेने चुटकी लेते हुए कहा – वाह दीदी, फोन पर तो थूक भी नही निगलने दे रही थी, और अब घर में घुसने ही नही दे रही…

वो एकदम से झेंप गयी, और प्यार से मेरे गाल पर एक चपत लगा कर बोली – तुझसे तो मे कभी बात नही करूँगी,

शादी में बुलाया तक नही, और अब साबजादे होटेल में रुक गये..

फिर वो अंदर आने के लिए जैसे ही पलटी, मेरे लौडे की तो शामत ही आगयि…

स्लेक्स की केप्री में उसके चूतड़, एकदम अलग-अलग किन्ही दो फुटबॉल जैसे, उसकी चाल के साथ उपर-नीचे होते हुए..

देखते ही मेरा लंड ठुमकाने लगा, मेने पीछे आते हुए उसे अपने जीन्स में जैसे तैसे करके सेट किया…

अंदर आकर वो दोनो फिरसे गप्पें लगाने लगी, मे अपना आर्यन (दीदी का बेटा) के साथ खेलने लगा…

जितनी देर वो बातें करती रही, दीदी ने मेरी तरफ एक-दो बार बस तिर्छि नज़र डालकर देखा, जैसे दिखा रही हो कि वो मुझसे ना जाने कितनी नाराज़ हो…और निशा के साथ बातों में लगी रही…

हमें यहाँ आते-आते काफ़ी अंधेरा हो चुका था, कुच्छ देर बाद वो दोनो, खाने का इंतेज़ाम करने किचन में चली गयी…!

आर्यन और मैं टीवी देखते-2 सोफे पर ही सो गया, तो मे भी किचन की तरफ बढ़ गया…

 
निशा चाय बना रही थी, और दीदी साथ में खड़ी कोई सब्जी काट रही थी, थोड़े से आगे को झुकने की वजह से उसके गोल-गोल पीछे को उभरे हुए नितंब देख कर मेरा लंड सॉरी मन मचल उठा…

मेने पीछे से जाकर दीदी को अपनी बाहों में भरते हुए, उसके गले पर किस करके कहा-

नाराज़ हो गयी, मेरी बहना, सॉरी ! हमें पता नही था कि जीजू यहाँ नही है, इसलिए हमने सोचा कि कल तुम्हारे यहाँ आएँगे…

मेरे लंड को अपनी गान्ड की दरार के ठीक उपर फील करके वो एकदम से गन्गना गयी, उसके रोंगटे खड़े हो गये, और बड़ी ही सेक्सी आवाज़ में मेरे गाल को सहला कर धीरे से बोली –

मे भला तुझसे कभी नाराज़ हो सकती हूँ मेरे भाई..?

मेने धीरे से उसके आमों को सहला दिया, और अपने लंड का दबाब उसकी उभरी हुई गान्ड पर डालकर बोला – तो फिर फोन पर शेरनी की तरह क्यों दहाड़ रही थी…?

वो कसमसा कर फुसफुसाते हुए बोली – आअहह…क्या कर रहा है नालयक, छोड़ मुझे, पास में निशा खड़ी है, क्या सोचेगी हमारे बारे में ..?

उसके मूह से आअहह… सुनकर निशा ने तिर्छि नज़र से देखा, और मूह ही मूह में मुस्कराने लगी…!

मेने उसके गले को चाटते हुए कहा – उसे हमारे बारे में सब पता है दीदी, तुम निशा की चिंता मत करो..

मेरी बात सुनकर वो ताज्जुब से मेरी तरफ देखने लगी, मेने एक हाथ से उसकी मुनिया को सहला कर कहा-

ऐसे क्या देख रही हो मेरी हॉट दीदी…, उसे भाभी ने सब कुच्छ शादी से पहले ही बता दिया था…!

फिर मेने अपना हाथ लंबा करके निशा की कमर में डाला, और उसे भी अपनी ओर खींचकर हम दोनो के साथ चिपका लिया और बोला – निशा ! देखो तो दीदी क्या हॉट लग रही है, है ना !

रामा – चल हट, झूठा कहीं का, निशा के सामने तो मे कुच्छ भी नही, सच में निशा वाकई बहुत सुंदर है, तेरे तो भाग खुल गये..!

निशा ने दीदी की बिना ब्रा की चुचियों को सहलाया और उसके गाल पर किस करके कहा – नही दीदी, ये झूठ नही कह रहे, आप वाकई में सेक्स बॉम्ब हो…

बेचारे जीजा जी, बाहर घूमने जाते होंगे आपको लेकर तो किस तरह से लोगों की नज़र से बचाकर लाते होंगे…!

रामा ने भी निशा की चुचियों को ज़ोर्से मसल डाला, उसके मूह से जोरदार सिसकी निकल गयी, फिर उसने निशा की सलवार के उपर से उसकी चूत को मसल्ते हुए कहा-

तुम दोनो तो बड़े ही बेशर्म हो गये हो… इरादा क्या है, हां…!

मेने दोनो को अपने दोनो बाजुओं में लपेटकर अपने बदन से चिपका लिया, और एक-एक हाथ से दोनो की चुचियों को सहलाते हुए कहा-

देखो दीदी ! हम घर से निकले हैं हनिमून मनाने, अब तुमने हमें अकेले तो रहने नही दिया… तो अब जो भी करना होगा, सब मिलकर ही करेंगे…!

रामा – चल हट बदमाश, तुम दोनो अपना हनिमून मनाते रहो, मे खम्खा कबाब में हड्डी क्यों बनू …!

मेने उसके ढीले-ढाले टॉप में नीचे से अपने दोनो हाथ डाल दिए, और उसके बिना ब्रा के दशहरी आमों को मसल्ते हुए कहा –

कबाब में हड्डी तो तुम बन गयी हो दीदी, अब इस हड्डी का रस चूसे बिना अलग कैसे कर सकते हैं, ये कहकर मेने उसका टॉप निकाल फेंका..

उसकी गोरी-गोरी सुडौल 34 साइज़ की मक्खन जैसी चुचियाँ नंगी हो गयी, जिसे उसने अपने दोनो हाथों से ढांपने की नाकाम कोशिश करके कहा –

अरे बेशर्म क्या कर रहा है, अपनी बीवी के सामने ही अपनी बेहन को नंगा कर रहा है, भेन्चोद…

निशा ने उसकी कॅप्री को नीचे सरका दिया, और उसकी चूत को सहलाकर बोली - भेन्चोद बनाने वाली भी तो आप ही हो ना ननद रानी जी…!

रामा – तो बेशर्मो ! मुझे अकेली को ही नंगा क्यों कर रखा है, तुम दोनो फिर कपड़ों में क्यों खड़े हो अभी तक,

ये कहकर उसने निशा की सलवार का नाडा खींच दिया, वो सरसरकार उसके पैरों में जा गिरी…

फिर क्या था, देखते ही देखते एक-एक करके हम तीनों के कपड़े कुच्छ ही देर में किचन के फर्श पर एक-दूसरे में गुड-मूड हुए पड़े थे…!!!

दो हुश्न पारियाँ जवानी से भरपूर, बिना कपड़ों के अजंता की मूरत जैसी मेरे खड़े लंड को मंत्रमुग्ध होकर निहार रही थी,

 
और वो मदर्चोद किसी अकड़ू सड़क छाप गुंडे की तरह 120 डिग्री का आंगल बनाए तन्कर खड़ा उन दोनो रसीली चुतो को चॅलेंज दे रहा था…

मेने रामा दीदी को अपने पास खींच लिया, और उसके होठों को चूमते हुए, उसके पके कलमी आमों को मसलकर उनसे रस निकालने की कोशिश करने लगा…

वो सिसक कर बोली – आअहह….भाई, यहीं किचन में ही शुरू कर दिया तूने…हाईए….बेडरूम में तो चलो…

मेने उसकी रसीली चूत में उंगली पेलकर कहा – एक राउंड यहीं कर लेते हैं बहना, फिर खाने के बाद बेडरूम में देखेंगे…

तब तक निशा ने मेरे लंड पर कब्जा कर लिए था, और वो उसे अपनी मुट्ठी में लेकर मसल्ने लगी, सुपाडे को चूमकर उसने उसे अपने मूह में ले लिया…

जैसे ही निशा ने मेरे लंड को अपने मूह में लेकर एक बार ज़ोर्से सक किया, उन्माद के मारे मेरी सिसकी निकल पड़ी,

और मेने अपनी दो उंगलियाँ पूरी की पूरी दीदी की रसीली चूत में पेल दी… वो मज़े में आकर अपने पंजों पर खड़ी हो गयी, और मेरे होठों को चूसने लगी…

दीदी की चूत में उंगलियों के चलने की स्पीड का कंट्रोल शायद निशा के पास था, जिस स्पीड से वो मेरे लंड को मूह में ले रही थी, मेरी उंगलियाँ रामा दीदी की चूत को चोद रही थी…

और वो भी मेरे होठों को उसी अंदाज में चूसे जा रही थी…, दीदी की चूत का कामरस बह-बहकर मेरी अंजलि में जमा होने लगा, जिसे मेने सडप करके चाट लिया…

मेरे ऐसा करने से वो बुरी तरह शरमा गयी, और मेरे कंधे में अपना सर देकर सीने पर हल्के से मुक्का मारते हुए बोली – बाज़ीगर…

मेने निशा का सर अलग करते हुए कहा - बस कर मेरी कबुतरि, अभी इसका रस पीने के लिए नही मिलेगा.. वरना दो-दो चुते प्यासी रह जाएँगी…

मेरी बात मानकर निशा ने लंड मूह से बाहर निकाला… इतनी देर की चुसाई के बाद उसका सुपाडा लाल सुर्ख, फूल कर लालू की लालटेन के शीशे की तरह हो गया…

मेने दीदी की एक जाँघ के नीचे हाथ लगाकर उसे अपनी कमर पर रख लिया, उसकी रस गागर का मूह खुलकर मेरे लौडे के सामने आगया…

मेने निशा को कहा – डार्लिंग..! थोड़ा मेरे पिस्टन को दीदी के सिलिंडर के मूह पर सेट तो करो…

निशा ने नीचे बैठे ही बैठे, पहले एक बार अपनी ननद रानी की चूत के रस को अपनी जीभ से चाटा, जिससे रामा के मूह से एक मीठी सी सिसकी फुट पड़ी….,

सस्स्सिईईईईई…. आआहह…मेरी प्यारी भाभी…अब जल्दी से मेरे भाई के लंड को अपनी ननद की चूत पर सेट करो प्लेआसीए….!

उसने भी एक अच्छी भाभी का फर्ज़ निभाते हुए अपनी अमानत को हाथ में लेकर अपनी ननद के स्वर्ग द्वार पर टिका दिया…और फिर अपनी ननद की गान्ड के खुले छेद में अपनी उंगली डाल दी….

आआईयईई…..क्या करती है….सालीइीइ…कहकर रामा की कमर अपने आप मेरी तरफ सरक्ति चली गयी…और मेरा लंड सरसराता हुआ, उसकी गीली चूत में आधे तक सरक गया…

रामा के मूह से मादक कराह फुट पड़ी…

आआहह….अंकुश….चिर गयी मेरी चूत…बहुत मोटा हो गया है ये तेरा हथियार….हाए निशा…कैसे ले गयी तू ईसीए…

 
निशा ने भी मज़ाक का कोई मौका हाथ से जाने नही दिया.. और अपनी पूरी उंगली उसकी गान्ड में पेल दी…और कहा…

क्यों ! पहली बार आपने भी तो लिया था, तब पता नही चला इस घोड़े जैसे लंड का…

उंगली गान्ड में जाते ही, रामा की गान्ड के द्वार ने उसे बुरी तरह जकड लिया, और उसकी कमर और आगे को सरक गयी, जिससे मेरा पूरा लंड उसकी चूत में फिट हो गया…,

वो उसे जड़ तक लेकर हाँफने लगी… मेने अपना एक हाथ उसकी मस्त फूली हुई गान्ड के नीचे लगाकर उसे अपनी ओर खींचा,

और दूसरे हाथ से उसकी मस्त रसीली चुचि को मसल कर धक्के देना शुरू कर दिया…, कुच्छेक ही धक्कों में रामा की चूत ने मेरे लंड के साइज़ को सेट कर लिया..

अब उसे भी बहुत मज़ा आने लगा था, सो सिसकते हुए अपनी गान्ड उठा-उठाकर मेरे लंड पर पटकने लगी…!

जब ज़्यादा मज़ा आने लगा, तो मेने उसकी दूसरी टाँग को भी उठाकर अपनी कमर पर रख लिया, वो मेरे गले में झूल गयी, मेने दे दनादन चुदाई शुरू कर दी…

सस्सिईइ…उउउफफफ्फ़…एयेए..हईए…भीइ…. बहुत मज़ा आरहाआ…है…झरने की याद ताज़ा हो गाइिईई……रीए…

हाईए…निशाअ…तेरा पति…कितना मस्त चुदाई करता है ,…तेरे तो भाग खुल गाईए…र्रइ….काश..ऐसा लंड रोज़ ले पाती मईए….

निशा मेरे नीचे बैठी, मेरे टटटे चाट रही थी, दीदी की बात सुनकर उसने अपनी जीभ की नोक उसकी गान्ड के भूरे छेद में डाल दी…

आययईीीई… साली छिनाल कितनी एक्सपर्ट हो गयी है रीए…..चाट और चाट मेरी गाअंड….हाईए…जीभ घुस्साआ….दीए…..

आआईयईई….और… तेजज़्ज़्ज…सस्सिईइ…उउउऊऊहह…गाइिईई…रीई…, और फिर रामा अपने प्यारे भाई के सीने से चिपक कर भल-भलकर झड़ने लगी…

मेने भी अपने दो-चार तगड़े धक्के लगाए, और अपनी प्यारी बेहन की चूत को अपनी मलाई से भर दिया….

बहुत देर तक वो मेरे सीने से चिपकी रही…, फिर जब नीचे उतरी, तो पक्क की आवाज़ के साथ मेरा आधा खड़ा लंड उसकी चूत से बाहर आकर किसी पानी के पाइप की तरह झूलने लगा…

साथ ही ढेर सारा रॉ मेटीरियल उसकी चूत से बाहर निकल कर टप्प्प से फर्श पर टपक गया…

मेने दीदी के होठों को चूमते हुए पुछा – मज़ा आया दीदी…

वो मुझसे किसी बेल की तरह लिपट गयी, और मेरे सीने पर किस करके बोली – थॅंक्स मेरे प्यारे भाई..,

तेरे साथ तो मुझे हमेशा ही बहुत मज़ा आता है…काश ! निशा की जगह मे तेरी बीवी होती…!

मेने कहा – तो ठीक है, मज़ा ले लिया ना, अब अपने इस भाई की पेट पूजा का इंतेज़ाम करो फटाफट…

मेरी बात सुनकर निशा का मूह लटक गया…, जिसे मेने अच्छे से नोटीस किया..

मेने मुस्कराते हुए उसे अपनी ओर खींचा, और उसे अपने सीने से सटकर कहा – मे मज़ाक कर रहा था मेरी जान,

मुझे पता है, तुम्हारी क्या हालत हो रही होगी हम दोनो की चुदाई देखकर…

ये कहकर मेने उसे अपनी गोद में उठा लिया और डाइनिंग टेबल के सिरे पर बिठाकर उसे उसपर लिटा दिया, उसकी टाँगों को अपने कंधे पर रखा,

और अपना मूह उसकी रस टपका रही मुनिया के मूह पर लगा दिया…, दीदी ने नीचे बैठ कर मेरे पप्पू को अपने मूह में ले लिया, और अपने दोनो के मसाले को चाट लिया…

मेने निशा की चूत के दाने को अपने दाँतों में दवाकर कुरेद दिया…उसने अपनी कमर को उचका कर अपनी चूत को मेरे मूह पर दबाया…

उसकी मुनिया लगातार रस बहाए जा रही थी, उधर दीदी ने मेरे पप्पू को चुस्कर फिरसे खड़ा कर दिया, अब वो उसे ज़ोर-ज़ोर्से चूस रही थी…

मेने अपने होठों को निशा की चूत के होठों पर टिकाकर एक बार उसकी मुनिया को ज़ोर्से सक किया…सस्स्सिईईईईईईईई……आअहह….रजाअजीीइईईईई…..

उन्माद के मारे उसकी कमर उपर को उचक गयी, और उसने अपने पैरों को मेरे गले में लपेट दिया, मेरे मूह को अपनी चूत पर बुरी तरह से दवाकर अपना पानी छोड़ दिया…

अब तक दीदी की चुसाई से मेरा मूसल भी उसकी मुनिया की कुटाई करने के लिए पूरी तरह तैयार हो गया था….

सो, मेने उसकी टाँगों को चौड़ाया, और अपने मूसल को उसकी सुरंग के मूह पर रखकर एक तगड़ा सा धक्का लगा दिया…

एक ही झटके में मेरा 3/4 लंड उसकी चूत में चला गया… उसके मूह से एक मादक भरी चीख निकल गयी….

आआईयईईईईईईई…..रजीईए….धीरीईई……आअहह….सस्स्सिईईईईई…उउउफफफ्फ़..

दीदी उसके बगल में लेट गयी, और उसकी चुचियों को मसल्ते हुए, किस करने लगी…

मेने अपना पूरा लंड पेलकर धक्के लगाना शुरू कर दिया…, साथ में दो उंगलिया, दीदी की चूत में पेल दी…

हम तीनों की सिसकियाँ पूरे घर को चुदाईमय बनाए हुए थी…,

एक बार झड़ने की वजह से मेरी चुदाई थोड़ा लंबी हो गयी… निशा दो बार झड चुकी थी, सो उसने रुकने के लिए कहा…

मेने दीदी को नीचे खड़ा कर लिया, और टेबल के उपर झुका कर पीछे से उसकी चूत मारने लगा…!

जब मुझे लगा कि अब मेरा नल खुलने ही वाला है, तभी मेने उसे बाहर खींच लिया…और अपनी पूरी मलाई, उन दोनो के मूह, और चुचियों पर उडेल दी…

वो दोनो, एक दूसरे के शरीर से मलाई लेकर चाटने लगी, और मे बाथरूम में घुस गया…..

फ्रेश होकर वो दोनो खाना बनाने में जुट गयी, और मे हॉल में आकर टीवी देखने लगा…!

 
खाने के बाद हम तीनों एक ही बेडरूम में आगये, दीदी ने मुझे एक बड़ा सा ग्लास बादाम और केसर डालके दूध दिया और हस्कर बोली –

ले पीले, आज बहुत मेहनत करनी है सारी रात… दो दो घोड़ियों की सवारी करनी पड़ेगी…,

दूध पीकर हम तीनों फिर से चुदाई में जुट गये, लेकिन एक-एक राउंड करके ही हम जल्दी ही नींद में डूब गये…!!

इस तरह पूरे हफ्ते हम तीनों ने आलोक जीजू के आने तक थ्रीसम चुदाई का भरपूर मज़ा लिया,

रामा ऐसे कॉपरेटिव भैया-भाभी पाकर फूली नही समा रही थी…क्योंकि उसकी अब तक की अधूरी प्यास अच्छे से बुझ रही थी…!

निशा भी चुदाई के ज़्यादा मौके उसी को दे रही थी, रामा के ये पुच्छने पर की वो ऐसा क्यों कर रही है तो उसने कहा…

ये घोड़ा तो मेरे नाम रिजिस्टर्ड ही है, जिसे मे जब चाहूं दौड़ा सकती हूँ, लेकिन मेरी प्यारी ननद को फिर कब-कब ऐसा मौका मिलेगा…

उसकी बात सुनकर वो गद-गद हो उठी, और उसने उसे अपने गले से लगा लिया…

इसी बीच हम ने निशा को दिल्ली दर्शन भी कराए, सिनिमा देखने भी गये…

और फिर एक दिन मे उन दोनो को लेकर अपने गुरु और आंटी से मिलने भी गया,

उन्होने उन दोनो को अपनी बहू और बेटी जैसा ही प्यार दिया, सारे दिन अपने पास रखा, वहीं से नेहा को फोन करके भी बुला लिया…

नेहा, निशा और दीदी से मिलकर बहुत खुश हुई, फिर लौटते वक़्त वो उन दोनो को गिफ्ट देना नही भूले…!

आलोक जीजू के लौटने के बाद एक दिन रुक कर, मे और निशा अपने घर लौट लिए…...,

शाम तक हम घर लौटे, जहाँ एक खुशी हमारा बेसब्री से इंतेज़ार कर रही थी, घर भर में खुशी का माहौल था,

सबसे पहले हमें छोटी चाची मिली, और उन्होने हमें बताया की मोहिनी बहू माँ बनने वाली है…

हम दोनो ही लपक कर उनके कमरे में गये, देखा तो भैया उनके पास बैठे हुए थे..और बड़े खुश दिखाई दे रहे थे…

देखते ही उन्होने मुझे गले से लगा लिया, और खुशी से कांपति आवाज़ में बोले- छोटू मेरे भाई ! तू फिर एक बार चाचा बनाने वाला है…!

मेने खुशी से उच्छलते हुए कहा – सच भैया… ! ये तो बड़ी खुशी की बात है.., उसके बाद मे भाभी के पास गया.. जहाँ दोनो बहनें एक दूसरे के गले लगी हुई थी...

मेने कहा - भाभी इस बार मुझे नन्हा-मुन्ना प्यारा सा भतीजा चाहिए… क्यों रूच बेटा ! तुम्हें अपने लिए छोटा सा भाई चाहिए ना !

उसने हां में अपनी गर्दन हिलाई और बोली – मम्मी मुझे छोटा भाई दोगि ना…!

भाभी ने मुस्करा कर कहा – बेटा ! ये तो भगवान जी ही जाने, भाई होगा या छोटी सी गुड़िया…

इस तरह हसी खुशी सबने मिलकर भाभी भैया की खुशी को बाँटा…

अकेले में भाभी ने मेरे कान में कहा – ये तुम्हारा उस दिन की मेहनत का फल है मेरे लाडले देवर्जी….

ये सुनकर मे उनके मूह की तरफ ताकता ही रह गया….!

वो मुस्करा कर बोली – ऐसे क्या देख रहे हो… मे सच कह रही हूँ… !

भला माँ से अधिक किसे पता होगा कि उसके बच्चे का बाप कॉन है…, क्या ये सुनकर तुम्हें खुशी नही हुई…?

मे – नही भाभी ! ऐसी बात नही है… पर मुझे विश्वास नही हो रहा…!

वो – अपनी भाभी की बात पर भी नही…?

मे – अब आप कह रहीं हैं तो ज़रूर सही ही होगा… वैसे आप खुश तो हैं…?

भाभी ने मेरे गाल को कचकचाकर काट लिया, और फिर उसे चूमते हुए बोली –

बहुत से भी ज़्यादा मेरे होने वाले बच्चे के पापा जी….तुम्हारा अंश अपनी कोख में पाकर कॉन खुश नही होगी भला….

मेने भाभी के डिंपल में अपनी जीभ की नोक डालकर कहा – क्यों ! ऐसी क्या खास बात है मेरे अंश में…?

वो मेरे लौडे को सहला कर बोली – दो रिज़ल्ट सामने हैं इसके, फिर भी पुच्छ रहे हो…?

उनकी इस बात पर मे हँस पड़ा और वो मन ही मन खुश होती हुई रसोई की तरफ चली गयी…!

उस दिन के बाद मेरे अंदर एक अजीब तरह की उत्तेजना सी रहने लगी…,

मेरा अंश भाभी की कोख में पल रहा है…, ये सोचकर मे अजीब से रोमांच से भर गया…

इसी खुशी के साथ मे मन लगाकर अपने काम में लग गया, और रेग्युलर कोर्ट/ ऑफीस जाने लगा…. !

 
भगवान दास गुप्ता जी का लीगल आड्वाइज़र होने के नाते, अब मेरा उनके ऑफीस और घर आना जाना अक्सर लगा रहता था…

कई एकड़ में बनी शानदार कोठी में उनका 4 प्राणियों का छोटा सा परिवार और कई सारे नौकर चाकर जिनके लिए रहने को सर्वेंट क्वॉर्टर्स भी कोठी के पीछे बने हुए थे…

48 वर्षीया गुप्ता जी धरम करम को मानने वाले, उनका सुबह का टाइम अधिकतर पूजा-पाठ में ही जाता था, ख़ासतौर से मैया लक्ष्मी के घोर उपासक थे गुप्ता जी…

माँ की कृपा भी खूब थी उनके उपर, धन दौलत की कोई कमी नही थी, बस कमी थी तो समय की जिसके लिए उनका परिवार हमेशा तरसता रहता था…!

उनकी 45 वर्षीया पत्नी सेठानी शांति देवी, एक भारी-भरकम औरत, शरीर से तो इतनी नही लेकिन स्वाभाव से…

बस नाम की ही शांति देवी थी, वाकी तो घर के नौकरों और यहाँ तक बच्चों के लिए तो वो चंडिका देवी थी…

गुप्ता जी भी उनके सामने ज़्यादा बोलने की गुस्ताख़ी नही करते थे…

एकदम कड़क तीखी आवाज़, घर के किसी भी कोने में वो जब किसी को डाँटती थी, तो उनकी आवाज़ लगभग कोठी के हर कोने में पहुँचती थी, जिससे सबके कान खड़े हो जाते…

24 वर्षीय बेटा संकेत अपना ग्रॅजुयेशन कंप्लीट करके बिज़्नेस मॅनेज्मेंट का कोर्स कर रहा था, जिससे आगे चलकर अपने पिता के कारोबार को सुचारू रूप से संभाल सके…

बेटी खुशी, 19 साल की, इसी वर्ष कॉलेज में पहुँची है, बी.कॉम करने, शुरू से ही थोड़ी दोहरे बदन की है,

ज़्यादा नही मध्यम हाइट के साथ शायद 34-32-36 का फिगर होगा, कभी मापने का मौका नही लगा अभी तक…

ज़्यादा गोरी तो नही पर सॉफ रंग है अपनी माँ के जैसा…, गोल मटोल चेहरा, किसी गुड़िया की तरह..

देखने में ही बहुत मासूम और भोली-भाली सी लगती है,

बेचारी सिर्फ़ नाम की ही खुशी है, वाकी उसके लिए खुशी दूर-दूर तक नही थी…बस थोडा बहुत हंस खेल लेती है, जब उसका भाई या पापा साथ में हों तो..

ना ज़्यादा सज-संवार सकती है, और ना ज़्यादा मॉडर्न कपड़े पहन सकती है…माँ की इन्स्ट्रक्षन, ये मत करो, वो मत करो… ये क्यों किया.. वग़ैरह…वग़ैरह, यू नो…

हां बेटे को वो बहुत चाहती है, उसकी हर बात मानी भी जाती है, करने की छूट भी है…

गुप्ता जी बेचारे को इन सब चीज़ों से कोई सरोकार नही, कि उनके घर में क्या चलता रहता है, क्या नही.. वो बस अपनी धन कमाने की दुनिया में ही मस्त रहते हैं…!

एक दिन मे सुवह-सुवह एक ज़रूरी काम से उनके यहाँ गया था, गुप्तजी रोज़ की तरह पूजा पाठ में लगे थे, मे हॉल में बता उनका इंतेज़ार कर रहा था…

नीचे सेठानी के रूम से तेज-तेज आवाज़ें आ रही थी, वो अपनी बेटी को डाँट रही थी, वैसे ये उनकी नॉर्मल आवाज़ थी हां !

शांति – तू आए दिन कॉलेज मिस करती रहती है, बात क्या है..? ऐसे तो कैसे कर पाएगी अपना कोर्स पूरा..?

खुशी – मे अपने सर से ट्यूशन में कर लूँगी, लेकिन मुझे नही जाना कॉलेज…

शांति – लेकिन बात क्या है, तू कॉलेज के नाम से इतना डरती क्यों है..?

खुशी – कॉलेज के लफंगे लड़के बहुत परेशान करते हैं,

शांति – अरे तुझे उन लफंगों से क्या लेना-देना, सीधी जा और सीधी आ, और फिर कोई परेशानी है तो संकेत को भी बोल सकती, वो भी तो वहाँ होता ही है…

खुशी – मेने बताया था भैया को, लेकिन उन्होने भी कुच्छ नही किया…, कुच्छ गुंडे टाइप के लड़के हैं, जो किसी की नही मानते…

शांति – अब परेशान तो करेंगे ही, इत्ति सी उमर में, देख अभी से कैसा पहाड़ जैसा सीना हो गया है तेरा…, कुच्छ ग़लत हरकतें तो नही करने लगी है…

खुशी – क्या मम्मी ! अनाप-शनाप बोलती रहती हो, खुद ने ही तो जबरदस्त खिला-खिलाकर मोटा कर दिया है मुझे.. अब इसमें मेरी क्या ग़लती है…

शांति – चल ठीक है, तेरे पापा से बात करती हूँ, वो प्रिन्सिपल से बात कर लेंगे..

इसके बाद खुशी हॉल में से होती हुई उपर अपने रूम में चली गयी…,

उपर जाने के लिए हॉल से एक बड़ा सा गोलाई लिए स्टेर्स थे…, मेरी नज़र उसके थिरकते हुए भारी भरकम कुल्हों पर जम गयी..

सच में इस उमर में खुशी कुच्छ ज़्यादा ही भरकम हो गयी थी…, लेकिन उसकी बात भी सही थी, अब लाड़ प्यार ने खिला-पिलाके ऐसा कर दिया तो इसमें वो बेचारी भी क्या करे…

 
गुप्ता जी के घर में मुझे सभी नौकर यहाँ तक कि उनके दोनो बच्चे भी वकील भैया बोलते थे…!

उसके पीछे-2 सेठानी भी बाहर आई, मेने नमस्ते किया, और गुप्ता जी के बारे में पुछा तो वो बोली –

अरे भाई, उनका क्या ठिकाना कब तक निपटाते हैं, तुम ऐसा करो ऑफीस में ही मिल लेना मे उन्हें बोल दूँगी, कि तुम आए थे…!

इतना कहकर वो रसोई घर की तरफ बढ़ गयी, और मे उठकर वहाँ से चलने को हुआ, कि तभी खुशी मुझे नीचे आती हुई नज़र आई..,

उसके चेहरे से लग रहा था कि वो कुच्छ परेशान है, वैसे उसकी परेशानी की वजह मुझे कुच्छ – 2 पता लग ही गयी थी, फिर भी मेने उसे आवाज़ दी…अरे खुशी ! कैसी हो ?

वो थोड़ा दुखी मन से बोली – ठीक ही हूँ वकील भैया, आप सूनाओ, पापा से मिलने आए थे..?

मे – हां ! पर वो तो पूजा से ही फारिग नही हुए…, वैसे ना जाने क्यों मुझे ऐसा लग रहा है कि तुम कुच्छ परेशान हो…

खुशी – जाने दीजिए भैया, अब घर में ही मेरी किसी को परवाह नही है, तो आपको बताने से क्या फ़ायदा…

मे – मुझे भी तुम अपने घर का हिस्सा ही समझो, नौकर हूँ तो क्या हुआ..., हो सकता है मे तुम्हारी कोई मदद कर सकूँ…!

खुशी – कॉलेज में कुच्छ आवारा टाइप के लड़के हैं, अक्सर लड़कियों को छेड़ते रहते हैं, अभी तक तो बातों से छेड़ते थे, लेकिन अब तो वो…

वो बोलते-बोलते चुप रह गयी, मे उसके चेहरे की तरफ देखने लगा तो उसने अपनी नज़रें नीची कर ली और अपना होठ काटने लगी…

मेने उसे आगे बोलने के लिए कुरेदा – लेकिन अब क्या हुआ खुशी बोलो…देखो मान सको तो मुझे भी अपना भाई समझो, और अपनी परेशानी खुल कर कहो…

खुशी – कैसे कहूँ वकील भैया, कहते हुए भी शर्म आती है, अब तो वो हरम्जादे हमारे कहीं भी हाथ लगा देते है, कभी पीछे, तो कभी…

मे – बस मे समझ गया खुशी, लेकिन तुम लोगों ने प्रिन्सिपल से शिकायत नही की..

वो – की थी, लेकिन थोड़ा बहुत डाँट फटकार कर उन्होने छोड़ दिया…

मे – संकेत को बताया…?

वो – भैया तो बहुत बड़ा वाला फट्टू है, वो उन लोगों के डर की वजह से कुच्छ कहता ही नही…

मे – कहाँ रहते हैं वो लफंगे…?

वो – वहीं बाय्स हॉस्टिल में, वो 4 लड़के हैं जो 2-2 के हिसाब से दो रूम में रहते हैं, फिर उसने उनके नाम और रूम नंबर भी बताए…

मे – तुम बिंदास कॉलेज जाओ, कल से वो लौन्डे तुम्हें कुच्छ नही कहेंगे, लेकिन हां ! इस बात का जिकर तुम किसी से नही करोगी, अपने घर में भी किसी से नही…ओके.

उसने हां में अपनी गार्डेन हिला दी, फिर मे वहाँ से कोर्ट की तरफ निकल आया…

कुच्छ इम्पोर्टेंट केस निपटाकर मैं गुप्ता जी के ऑफीस चला गया, उनके साथ ज़रूरी डिसकस करके मे अपने फ्लॅट में आगया जो उन्होने मुझे रहने के लिए दिया था…

इन लफंगों का कुच्छ तो करना पड़ेगा, ये सोचकर मेने कुच्छ ज़रूरी समान लिया और कॉलेज बंद होने के बाद एक चक्कर हॉस्टिल का लगाया,

बिना किसी की नज़र में आए कैसे उन लोगों तक पहुँचा जा सकता है, ये सब देखभाल कर मे वापस लौट आया…

वो दोनो कमरे ग्राउंड फ्लोर पर ही थे, हॉस्टिल की पिच्छली बाउंड्री वॉल थोड़ी उँची थी, कोई 10-12 फीट, लेकिन कोशिश करके अंदर जाया जा सकता था…

रात करीब 11 बजे मे पीछे की बाउंड्री वॉल फांदकर हॉस्टिल कॉंपाउंड में दाखिल हो गया,

इस समय मेरे शरीर पर उपर से नीचे तक काला स्याह लबादा था, चेहरा भी स्याह कपड़े से ढँक रखा था…

मेने पीछे की दीवार से उनके कमरे की आहट ली, एक कमरे में शांति थी, लेकिन दूसरे कमरे से विंडो की झिर्री से लाइट भी आ रही थी, और कुच्छ आवाज़ें भी…

अब हॉस्टिल की विंडो, सील टाइट तो होने से रही, कुच्छ दिनो के बाद अंदर की चितखनी लगना भी मुश्किल होती है,

ये सोचकर मेने विंडो के उपर अपने हाथ का थोड़ा सा दबाब डाला, तो उसका एक पाट हल्का सा खुल गया…

अंदर का जायज़ा लिया, तो मेरे चेहरे पर मुस्कान आगयि…

विंडो का पाट खुलते ही, अंदर से चरस की स्मेल के साथ धुआँ बाहर आया, अंदर वो चारों ही मौजूद थे, जो चरस की सिगरेट में कस पे कस लगाए जा रहे थे…

और सबसे खास बात कि चारों के बदन पर एक भी कपड़ा नही था, दो लड़के घुटनों पर थे और दो उन दोनो की गान्ड में अपने-2 लंड डालकर उनकी गान्ड की धुनाई करने में लगे हुए थे,

चरस की सिगरेट अलग-2 चारों के मूह में लगी हुई थी, बीच-बीच में उनके मूह से आहें मज़े की कराहें भी निकल जाती…

सीन देख कर तो मज़ा ही आगया, अब इन मादर्चोदो को लाइन में लाने के लिए मुझे ज्यदा कुच्छ नही करना था, बस जेब से मोबाइल निकाला, और शुरू करदी जी रेकॉर्डिंग…

एक बार जब वो दोनो उन दो की गान्ड में झड गये, तो सीन चेंज हो गया, अब वो उन दोनो की गान्ड मार रहे थे…

मस्त गान्ड मराई का वीडियो बन गया यो तो, फिर जब उनका खेल ख़तम हो गया, तो चारों नंगे ही अपनी-अपनी टाँगें लंबी करके फर्श पर पसर गये…

उनके झड़े हुए ढीले लंड किसी मरे चूहे जैसे कमरे के फर्श पर पड़े थे..

 
अब मुझे भी एंट्री मार देनी थी, सो घूमकर चुपके से गॅलरी में आया, और जाकर हल्के से डोर नोक कर दिया…!

डोर खटखटाने की आवाज़ सुनकर वो चारों उछल पड़े, फिर कुच्छ देर बाद उनमें से एक ने पुछा – कॉन..?

मेने थोड़ा आवाज़ चेंज करके कहा – वॉर्डन, गेट खोलो…

सुनते ही उनके होश गुम हो गये, झट-पट अपने कच्छे पहने और फिर दो मिनिट के बाद एक ने डोर खोल दिया…

जैसे ही गेट खुला, मेरा जबरदस्त घूँसा उस गेट खोलने वाले की नाक पर पड़ा..

कुच्छ तो नशे की हालत, गान्ड मराई की थकान, उपर से एक जोरदार घूँसा नाक पर पड़ते ही उसकी नाक से खून की तेज धार फुट पड़ी, और वो चीख मारते हुए कमरे के बीच में जाकर गिरा…

वो तीनों भी अपने सामने एक नकाबपोश को देखकर भोन्चक्के से रह गये, उपर से उनका दोस्त लहू-लुहन पड़ा दर्द से तड़प रहा था…

इससे पहले की वो अचानक पैदा हुई इस नयी सिचुयेशन को समझते तब तक मेने अंदर से गेट बंद कर दिया, और उन तीनों की तरफ सधे हुए कदमों से बढ़ा…

नशे में उन तीनों की टाँगें काँपने लगी, फिर उन्हें कुच्छ होश आया कि हम तो 4-4 हैं, ये अकेला क्या हमारा उखाड़ लेगा, ये सोचते ही उनमें से एक बोला…

कॉन हो तुम..? और यहाँ हमारे कमरे में आकर हमारे साथ ही मार-पीट क्यों कर रहे हो..?

मे – काला चोर..! सुना है, तुम लोगों के कुच्छ ज़्यादा ही पर निकल आए हैं, इसलिए सोचा थोड़ा कुतर दिए जाएँ तो अच्छा रहेगा… क्यों ठीक है ना ठीक…!

अब तक वो चौथा भी अपनी नाक का खून पोन्छ्ते हुए उठ गया था…

ठीक तो अब हम तुझे करेंगे हरम्जादे, ये कहकर वो चारों मेरे उपर एक साथ झपटे…!

मेने फुर्ती से अपनी जगह छोड़ दी, झोंक-झोंक में वो चारों एकदुसरे में ही उलझ गये…, इसका फ़ायदा उठाकर मेने बिजली की सी तेज़ी से उन चारों की धुनाई सुरू करदी…

उनमें से एक भी इस हालत में नही था, जो मेरा हाथ पड़ने के बाद तुरंत सामना कर पाए..

फिर मेने अपने लिबास से पीठ पर बँधे हुए 3/4" डाया के एक लोहे के पाइप के टुकड़े को निकाला, और उनके हाथ पैर तोड़ना शुरू कर दिया…

15 मिनिट में ही वो चारों कमरे में पड़े कराह रहे थे, किसी की टाँग फ्रॅक्चर थी, तो किसी का हाथ…

हाथ जोड़े वो मेरे पैरों में पड़े दया की भीख माँग रहे थे…

मेने उनमें से एक को गिरहबान से उठाया, और सर्द लहजे में कहा – आइन्दा तुम लोगों में से कॉलेज में किसी भी लड़की के साथ बदतमीज़ी की, तो समझ लेना, वो हाल करूँगा..कि किसी को मूह दिखाने के लायक नही रहोगे…फिर मेने मोबाइल की क्लिप ऑन करके उनके सामने करदी और कहा…

ये देखो, तुम लोगों के कुकर्म पूरे कॉलेज में सब लोग देख रहे होंगे…और तुम पर थूक रहे होंगे…

वीडियो देखकर उनकी रही-सही हवा भी सरक गयी… वो मिन्नतें करने लगे, प्लीज़ ये वीडियो किसी को मत दिखाना.. वरना हम किसी को मूह दिखाने लायक नही रहेंगे…

आप जो कहेंगे हम वैसा ही करेंगे, आज से कॉलेज की हर लड़की हमारी बेहन होगी…,

मेने उनको धमकाते हुए कहा… और बेहन के साथ क्या करते हैं, तो अब अगर कोई और भी किसी लड़की को छेड़े तो तुम लोग उसकी मदद करोगे…

वो तुरंत बोले- हांजी-हांजी हम ऐसा ही करेंगे… प्लीज़ हमें छोड़ दो…

मे – ठीक है, अभी मेने तुम लोगों को माफ़ किया, लेकिन ध्यान रहे अगर तुम लोगों ने आइन्दा कुच्छ भी ग़लत किया… तो समझ सकते हो मे क्या कर सकता हूँ…

इतना डोज उन लड़कों को देकर मे चुप-चाप जैसे आया था, वैसे ही हॉस्टिल से निकल आया…!

 
दो दिन तक कोई बात नही हुई, खुशी रोज़ कॉलेज जाने लगी, वो चारों भी कॉलेज में कहीं नज़र नही आए…

लेकिन चौथे दिन खुशी का फोन आया, वो इस समय चहक रही थी..

खुशी – हेलो ! वकील भैया.., उसकी आवाज़ में खुशी साफ-साफ झलक रही थी,

...... आपने उन चारों लड़कों के साथ ऐसा क्या किया, आज वो सभी लड़कियों के सामने हाथ जोड़कर बहनजी – बहनजी करते फिर रहे थे..!

यही नही, उनके शरीरों पर जगह जगह प्लास्टर और पट्टियाँ भी बँधी थी…

जब सबने कारण पुछा तो बोलने लगे – कि हम लोगों का आक्सिडेंट हो गया था…

हहहे… लेकिन भैया मे सब समझ गयी.. कि ये आक्सिडेंट कैसे हुआ…

मे – अब तो तुम खुश हो ना खुशी.., लेकिन ये बात किसी और को मत बताना…

खुशी – नही बताउन्गि भैया, थॅंक्स सभी लड़कियों की तरफ से और हां ! आइ लव यू.., आप बहुत अच्छे हैं.. शाम को घर आना फिर बात करती हूँ..आओगे ना..!

मे – नही खुशी आज में अपने गाओं जा रहा हूँ, फिर कभी आता हूँ, और हां, अगर कोई और भी किसी भी लड़की को परेशान करे, तो उन चारों लड़कों को बोलना..

वो अब तुम लोगों की मदद करेंगे…

वो चोन्कते हुए बोली – क्या…? ऐसा क्या काला जादू कर दिया आपने उन हरम्जादो पर…?

मेने हँसते हुए कहा – कोई जादू-वादू नही किया है, बस थोड़ा हेवी डोज़ दे दिया है, जिससे वो अब अपनी औकात में आगये हैं…!

खुशी – लेकिन मुझे आपसे मिलना था, मेरी हेल्प करने के लिए स्पेशल थॅंक्स करना था आपको,,

मेने हँसते हुए कहा – स्पेशल थॅंक्स क्या होता है..? फोन पर ही बोल दे ना…

खुशी – नही, वो तो जब आप मिलोगे तभी कहूँगी..

मे - चल ठीक है कह देना, अब फोन रखता हूँ, टेक केर.. बाइ.

खुशी – बाइ भैया…थॅंक्स अगेन, लव यू…!

इस घटना के बाद खुशी के कॉलेज में रोमीयो गॅंग का जैसे नाम ही ख़तम हो गया…

उन चारों के अलावा अगर कोई और लड़का भी किसी लड़की के साथ इस तरह की हिमाकत करता तो वो लड़के अपने तौर पर उसे सबक सीखा देते.., और अगर उनके बस से बाहर की बात होती,

तो वो अपना एग्ज़ॅंपल देकर उनके अंदर डर पैदा करते…, बताते कि कोई नकाब पॉश है जो ये सब नही होने देगा, और वो डरकर उनकी बात मान लेते…

इस कॉलेज की सभी लड़कियाँ एक तरह से सेफ हो गयी थी..

उन चारों लड़कों के अंदर आए बदलाव से स्टूडेंट्स के साथ साथ कॉलेज प्रशासन भी आश्चर्यचकित था…!

दो दिन बाद मे गुप्ता जी से मिलने जब उनके घर गया, रोज़ की तरह गुप्ता जी पूजा में थे, अनायास ही कॉलेज को निकलती खुशी मुझे हॉल में ही मिल गयी…

मुझे देखते ही वो खुशी से उच्छल पड़ी, आव ना देखा ताव, दौड़कर वो मेरे गले में झूल गयी…और अनगिनत चुंबन मेरे गालों पर जड़ दिए…

मे अरे खुशी रुक तो सही, क्या करती है बोलता ही रह गया, लेकिन वो अपने मन की करके ही रुकी…

फिर उसने मेरे हाथों को अपने हाथों में लेकर चूम लिया और बोली – थॅंक यू भैया मेरी मदद करने के लिए…

ये नज़ारा अपने कमरे से बाहर निकलते हुए उसकी माँ चंडिका देवी…ओह्ह्ह सॉरी शांति देवी ने देख लिया…!

कयामत ही टूट पड़ी उस बेचारी के उपर, वो वहीं से बुरी तरह चीखते हुए दहाडी – खुशिीिइ……! ये क्या हिमाकत है ? नौकर और मालिक का लिहाज भी नही है तुझे…

उपरोक्त डाइलॉग बोलती हुई वो हमारी ओर लपकी और तडाक…तडाक्क्क्क… दो तीन तमाचे उस बेचारी के गाल पर जड़ दिए…

मेने उस बेचारी को बचाने की कोशिश की, लेकिन वो मेरी ओर पलटकर दाहडी… दूर रहो, खबरदार जो आगे बढ़े तो...

नमकहराम कहीं का, जिस थाली में ख़ाता है उसी में छेद करने की कोशिश कर रहा है…, निकल जा यहाँ से अभी के अभी…!

खुशी तो बेचारी बुरी तरह से रोने लगी, मेने कहा – देखिए आप मेरी बात तो सुनिए…

मेरी बात अभी पूरी भी नही हुई कि तडाक… एक जोरदार तमाचा मेरे भी गाल पर पड़ा…तब जाकर मुझे अंदाज़ा हुआ कि खुशी इतना क्यों रो रही है…

क्या भारी हाथ था हिटलरनी का…. दिन में तारे नज़र आने लगे मुझे… तो खुशी का क्या हाल हुआ होगा…?

इतने में हंगामा सुनकर घर के सारे नौकर, संकेत जो कॉलेज के लिए रेडी हो रहा था, यहाँ तक कि गुप्ता जी भी अपनी पूजा छोड़ कर दौड़े चले आए,

गुप्ता जी – क्या बात है शांति, क्यों इतना हंगामा कर रही हो सुवह-सुवह..., और ये खुशी इतना क्यों रो रही है…?

शांति उसी दहाड़ के साथ – पुछो अपनी इस लाडली से, एक नौकर के गले लग्के मूह काला कर रही थी, ये हरामी ना जाने इसे कब्से अपने जाल में फँसा रहा है…

गुप्ता जी चोन्कते हुए बोले – तुम अंकुश की बात कर रही हो…? क्या किया है इन्होने..?

शांति – ये इसके गले लगकर इसके मूह को चूम रही थी,

गुप्ता जी – क्यों वकील साब ! क्या शांति सच बोल रही रही है…?

मेने उनके चेहरे पर अपनी नज़र गढ़ाते हुए कहा – हां ! जो इन्होने देखा वो सच है, लेकिन इनके कहने का मतलव ग़लत है…

शांति – अच्छा ! मे अंधी हूँ, नासमझ हूँ, इतनी भी समझ नही है मुझे कि एक लड़की क्यों किसी पराए मर्द के गले ल्गकर उसे चूमती है…!

मेने एकदम शांत लहजे में कहा – लेकिन मे क्या कर रहा था…?

शांति – इससे क्या फरक पड़ता है, कि तुम कुच्छ कर रहे थे या नही… छुरि खरबूजे पर गिरे या खरबूजा छुरि पर, काटना तो खरबूजे को ही है ना…

 
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