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Guest
खुशी ने मेरे हाथ पकड़कर जबर्जस्ती बेड के पास पड़े सिंगल सोफे पर बिठा दिया, और खुद अपने कपबोर्ड की तरफ बढ़ गयी…!
उसके पलते ही जैसे कयामत टूट पड़ी मेरे लौडे पर…, पीछे से उसकी तरबूज जैसी पीछे को निकली हुई गान्ड से तौलिया एकदम उठी हुई थी, जिसमें से उसका जांघों और कुल्हों के बीच का संधि स्थल साफ-साफ दिखाई दे रहा था…
ऐसा नही था कि तौलिया छोटा था, वो तो बेचारा फुल साइज़ ही था, लेकिन इसका क्या किया जाए कि ढकने वाली का शरीर ही ऐसा था कि सामने से चुचियों को ढकना और पीछे से उसकी गान्ड को ढकना उसे भारी पड़ रहा था…
उपर से खुशी की हाइट भी ठीक-ठाक ही थी, शायद साडे 5 फीट…!
वो अपनी गान्ड मटकाते हुए कपबोर्ड के सामने खड़ी हो गयी, और अपने कपड़े निकालने के लिए उसने उसे खोला…
कुच्छ देर वो सामने से कुच्छ ढूँढती रही, शायद अपने ब्रा-पैंटी, फिर जब वो उपर नही दिखे तो उससे नीचे वाले ड्रॉ में देखने के लिए जैसे ही झुकी…
इसकी माँ की आँख, उसका तौलिया बग़ावत कर बैठा, उसने उसकी गान्ड को ढकने से साफ मना कर दिया….
अरे यार नही … ऐसा नही …जो आप सोच रहे हो, वो खुला नही लेकिन भरकम गान्ड के पीछे होते ही वो उपर चढ़ गया, और ख़ुसी की गान्ड आधे तक नंगी हो गयी…!
मोटी-मोटी जांघों के बीच से उसकी मुनिया की फांकों का निचला भाग ऐसे झाँकने लगा, मानो दो बड़े बल्लों के बीच से कोई मूह निकालकर किस करने के लिए होठ आगे कर रहा हो…!
खुशी को अपनी स्थिति का पूरा अंदाज़ा था कि उसके इस पोज़ से क्या स्थिति बन रही होगी, और मे उस पोज़ को देखने का पूरा मज़ा ले रहा हूँगा, सो उसने ऐसे ही झुके हुए ही एक बार पलटकर मेरी तरफ देखा…!
मेने सकपका कर अपनी नज़र दूसरी तरफ फेर ली, और तिर्छि नज़र से देखा, खुशी मेरी हालत को देखकर मंद-मंद मुस्करा रही थी…!
फिर वो सीधी खड़ी हो गयी, और मुझे आवाज़ दी – भैया, ज़रा इधर आना…!
मेने वहीं बैठे-बैठे कहा – क्यों, क्या काम है? जल्दी से कपड़े पहन कर तैयार हो जा, मुझे जाना भी है…
वो – अरे एक मिनिट आओ तो सही…
मे असल में उठना नही चाहता था, ताकि मेरी जीन्स में बना उभार खुशी देख पाए, लेकिन अब झक मारकर उठना ही पड़ा, और उसके पास जाकर खड़ा हो गया…
मेने उसके पीछे खड़े होकर कहा – हां बोलो क्या है..?
वो ऐसे ही कपबोर्ड के कपाट खोले उनके बीच खड़ी रही और बोली – मेने ये दोनो ड्रॉ चेक कर लिए, लेकिन मेरी ब्रा कहीं दिख नही रही…
अब उपर वाले ड्रॉ तक मे देख नही पा रही, तो प्लीज़ आप ज़रा उसमें से ढूंड कर मेरी ब्रा दे दो ना…!
मेने कहा – ठीक है, अब हटो वहाँ से ताकि में देख सकूँ…!
वो – आप मेरे पीछे खड़े होकर भी देख सकते हो ना, जल्दी करो मुझे कॉलेज के लिए लेट हो रहा है…!
मुझे अब पक्का यकीन हो गया, कि ये लड़की जान बूझकर सब कर रही है, अब मे जैसे ही इसके पीछे खड़ा होऊँगा, ये अपनी मोटी गान्ड मेरे लंड पर रगडे बिना नही माँगी…
लेकिन अब मे इसको खुलकर मना भी तो नही कर सकता, सो उसके पीछे खड़ा होकर उपर वाले ड्रॉ को चेक करने लगा,
पहले तो मेने कोशिश के, कि उससे ना सट पाऊ, लेकिन ड्रॉ कुच्छ ज़्यादा उँचा था, सो मुझे थोड़ा और आगे बढ़ना पड़ा, और वही हुआ जो मे सोच रहा था…
मेरा आगे का उभरा हुआ हिस्सा खुशी की मोटी गान्ड और कमर के बीच की उठान पर जा टिका…
अपनी गान्ड के उठान पर मेरे लंड के उभार को महसूस करते ही खुशी अपनी गान्ड को और पीछे करते हुए अपने पंजों पर खड़ी हो गयी, कुच्छ इस तरह से मानो वो भी उचक कर ड्रॉ में झाँकने की कोशिश कर रही हो..
उसके पंजों पर उचकने से गान्ड की दरार मेरे लंड से रगड़ गयी…! उसके मूह से दबी-दबी सी सिसकी निकल गयी…!
मेने ड्रॉ चेक किया, लेकिन उसमें उसकी ब्रा थी ही नही तो मिलती कहाँ से, कुच्छ देर उसके अंदर के कपड़ों को उलट-पलट कर देखने के बाद मेने कहा –
खुशी इसमें तो वो दिख नही रही, ये कहकर में पीछे को हटने लगा कि तभी उसने मेरे दोनो हाथ पकड़ कर अपनी चुचियों पर रख दिए और बोली –
कोई बात नही मे दूसरी निकाल लूँगी…!
उसकी मस्त मुलायम चुचियों का स्पर्श पाकर मेरे लंड को एक झटका सा लगा…
लेकिन मेने उन्हें दबाया नही और अपने हाथ छुड़ाकर पीछे को हट गया…
उसके पलते ही जैसे कयामत टूट पड़ी मेरे लौडे पर…, पीछे से उसकी तरबूज जैसी पीछे को निकली हुई गान्ड से तौलिया एकदम उठी हुई थी, जिसमें से उसका जांघों और कुल्हों के बीच का संधि स्थल साफ-साफ दिखाई दे रहा था…
ऐसा नही था कि तौलिया छोटा था, वो तो बेचारा फुल साइज़ ही था, लेकिन इसका क्या किया जाए कि ढकने वाली का शरीर ही ऐसा था कि सामने से चुचियों को ढकना और पीछे से उसकी गान्ड को ढकना उसे भारी पड़ रहा था…
उपर से खुशी की हाइट भी ठीक-ठाक ही थी, शायद साडे 5 फीट…!
वो अपनी गान्ड मटकाते हुए कपबोर्ड के सामने खड़ी हो गयी, और अपने कपड़े निकालने के लिए उसने उसे खोला…
कुच्छ देर वो सामने से कुच्छ ढूँढती रही, शायद अपने ब्रा-पैंटी, फिर जब वो उपर नही दिखे तो उससे नीचे वाले ड्रॉ में देखने के लिए जैसे ही झुकी…
इसकी माँ की आँख, उसका तौलिया बग़ावत कर बैठा, उसने उसकी गान्ड को ढकने से साफ मना कर दिया….
अरे यार नही … ऐसा नही …जो आप सोच रहे हो, वो खुला नही लेकिन भरकम गान्ड के पीछे होते ही वो उपर चढ़ गया, और ख़ुसी की गान्ड आधे तक नंगी हो गयी…!
मोटी-मोटी जांघों के बीच से उसकी मुनिया की फांकों का निचला भाग ऐसे झाँकने लगा, मानो दो बड़े बल्लों के बीच से कोई मूह निकालकर किस करने के लिए होठ आगे कर रहा हो…!
खुशी को अपनी स्थिति का पूरा अंदाज़ा था कि उसके इस पोज़ से क्या स्थिति बन रही होगी, और मे उस पोज़ को देखने का पूरा मज़ा ले रहा हूँगा, सो उसने ऐसे ही झुके हुए ही एक बार पलटकर मेरी तरफ देखा…!
मेने सकपका कर अपनी नज़र दूसरी तरफ फेर ली, और तिर्छि नज़र से देखा, खुशी मेरी हालत को देखकर मंद-मंद मुस्करा रही थी…!
फिर वो सीधी खड़ी हो गयी, और मुझे आवाज़ दी – भैया, ज़रा इधर आना…!
मेने वहीं बैठे-बैठे कहा – क्यों, क्या काम है? जल्दी से कपड़े पहन कर तैयार हो जा, मुझे जाना भी है…
वो – अरे एक मिनिट आओ तो सही…
मे असल में उठना नही चाहता था, ताकि मेरी जीन्स में बना उभार खुशी देख पाए, लेकिन अब झक मारकर उठना ही पड़ा, और उसके पास जाकर खड़ा हो गया…
मेने उसके पीछे खड़े होकर कहा – हां बोलो क्या है..?
वो ऐसे ही कपबोर्ड के कपाट खोले उनके बीच खड़ी रही और बोली – मेने ये दोनो ड्रॉ चेक कर लिए, लेकिन मेरी ब्रा कहीं दिख नही रही…
अब उपर वाले ड्रॉ तक मे देख नही पा रही, तो प्लीज़ आप ज़रा उसमें से ढूंड कर मेरी ब्रा दे दो ना…!
मेने कहा – ठीक है, अब हटो वहाँ से ताकि में देख सकूँ…!
वो – आप मेरे पीछे खड़े होकर भी देख सकते हो ना, जल्दी करो मुझे कॉलेज के लिए लेट हो रहा है…!
मुझे अब पक्का यकीन हो गया, कि ये लड़की जान बूझकर सब कर रही है, अब मे जैसे ही इसके पीछे खड़ा होऊँगा, ये अपनी मोटी गान्ड मेरे लंड पर रगडे बिना नही माँगी…
लेकिन अब मे इसको खुलकर मना भी तो नही कर सकता, सो उसके पीछे खड़ा होकर उपर वाले ड्रॉ को चेक करने लगा,
पहले तो मेने कोशिश के, कि उससे ना सट पाऊ, लेकिन ड्रॉ कुच्छ ज़्यादा उँचा था, सो मुझे थोड़ा और आगे बढ़ना पड़ा, और वही हुआ जो मे सोच रहा था…
मेरा आगे का उभरा हुआ हिस्सा खुशी की मोटी गान्ड और कमर के बीच की उठान पर जा टिका…
अपनी गान्ड के उठान पर मेरे लंड के उभार को महसूस करते ही खुशी अपनी गान्ड को और पीछे करते हुए अपने पंजों पर खड़ी हो गयी, कुच्छ इस तरह से मानो वो भी उचक कर ड्रॉ में झाँकने की कोशिश कर रही हो..
उसके पंजों पर उचकने से गान्ड की दरार मेरे लंड से रगड़ गयी…! उसके मूह से दबी-दबी सी सिसकी निकल गयी…!
मेने ड्रॉ चेक किया, लेकिन उसमें उसकी ब्रा थी ही नही तो मिलती कहाँ से, कुच्छ देर उसके अंदर के कपड़ों को उलट-पलट कर देखने के बाद मेने कहा –
खुशी इसमें तो वो दिख नही रही, ये कहकर में पीछे को हटने लगा कि तभी उसने मेरे दोनो हाथ पकड़ कर अपनी चुचियों पर रख दिए और बोली –
कोई बात नही मे दूसरी निकाल लूँगी…!
उसकी मस्त मुलायम चुचियों का स्पर्श पाकर मेरे लंड को एक झटका सा लगा…
लेकिन मेने उन्हें दबाया नही और अपने हाथ छुड़ाकर पीछे को हट गया…