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लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस) complete

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खुशी ने मेरे हाथ पकड़कर जबर्जस्ती बेड के पास पड़े सिंगल सोफे पर बिठा दिया, और खुद अपने कपबोर्ड की तरफ बढ़ गयी…!

उसके पलते ही जैसे कयामत टूट पड़ी मेरे लौडे पर…, पीछे से उसकी तरबूज जैसी पीछे को निकली हुई गान्ड से तौलिया एकदम उठी हुई थी, जिसमें से उसका जांघों और कुल्हों के बीच का संधि स्थल साफ-साफ दिखाई दे रहा था…

ऐसा नही था कि तौलिया छोटा था, वो तो बेचारा फुल साइज़ ही था, लेकिन इसका क्या किया जाए कि ढकने वाली का शरीर ही ऐसा था कि सामने से चुचियों को ढकना और पीछे से उसकी गान्ड को ढकना उसे भारी पड़ रहा था…

उपर से खुशी की हाइट भी ठीक-ठाक ही थी, शायद साडे 5 फीट…!

वो अपनी गान्ड मटकाते हुए कपबोर्ड के सामने खड़ी हो गयी, और अपने कपड़े निकालने के लिए उसने उसे खोला…

कुच्छ देर वो सामने से कुच्छ ढूँढती रही, शायद अपने ब्रा-पैंटी, फिर जब वो उपर नही दिखे तो उससे नीचे वाले ड्रॉ में देखने के लिए जैसे ही झुकी…

इसकी माँ की आँख, उसका तौलिया बग़ावत कर बैठा, उसने उसकी गान्ड को ढकने से साफ मना कर दिया….

अरे यार नही … ऐसा नही …जो आप सोच रहे हो, वो खुला नही लेकिन भरकम गान्ड के पीछे होते ही वो उपर चढ़ गया, और ख़ुसी की गान्ड आधे तक नंगी हो गयी…!

मोटी-मोटी जांघों के बीच से उसकी मुनिया की फांकों का निचला भाग ऐसे झाँकने लगा, मानो दो बड़े बल्लों के बीच से कोई मूह निकालकर किस करने के लिए होठ आगे कर रहा हो…!

खुशी को अपनी स्थिति का पूरा अंदाज़ा था कि उसके इस पोज़ से क्या स्थिति बन रही होगी, और मे उस पोज़ को देखने का पूरा मज़ा ले रहा हूँगा, सो उसने ऐसे ही झुके हुए ही एक बार पलटकर मेरी तरफ देखा…!

मेने सकपका कर अपनी नज़र दूसरी तरफ फेर ली, और तिर्छि नज़र से देखा, खुशी मेरी हालत को देखकर मंद-मंद मुस्करा रही थी…!

फिर वो सीधी खड़ी हो गयी, और मुझे आवाज़ दी – भैया, ज़रा इधर आना…!

मेने वहीं बैठे-बैठे कहा – क्यों, क्या काम है? जल्दी से कपड़े पहन कर तैयार हो जा, मुझे जाना भी है…

वो – अरे एक मिनिट आओ तो सही…

मे असल में उठना नही चाहता था, ताकि मेरी जीन्स में बना उभार खुशी देख पाए, लेकिन अब झक मारकर उठना ही पड़ा, और उसके पास जाकर खड़ा हो गया…

मेने उसके पीछे खड़े होकर कहा – हां बोलो क्या है..?

वो ऐसे ही कपबोर्ड के कपाट खोले उनके बीच खड़ी रही और बोली – मेने ये दोनो ड्रॉ चेक कर लिए, लेकिन मेरी ब्रा कहीं दिख नही रही…

अब उपर वाले ड्रॉ तक मे देख नही पा रही, तो प्लीज़ आप ज़रा उसमें से ढूंड कर मेरी ब्रा दे दो ना…!

मेने कहा – ठीक है, अब हटो वहाँ से ताकि में देख सकूँ…!

वो – आप मेरे पीछे खड़े होकर भी देख सकते हो ना, जल्दी करो मुझे कॉलेज के लिए लेट हो रहा है…!

मुझे अब पक्का यकीन हो गया, कि ये लड़की जान बूझकर सब कर रही है, अब मे जैसे ही इसके पीछे खड़ा होऊँगा, ये अपनी मोटी गान्ड मेरे लंड पर रगडे बिना नही माँगी…

लेकिन अब मे इसको खुलकर मना भी तो नही कर सकता, सो उसके पीछे खड़ा होकर उपर वाले ड्रॉ को चेक करने लगा,

पहले तो मेने कोशिश के, कि उससे ना सट पाऊ, लेकिन ड्रॉ कुच्छ ज़्यादा उँचा था, सो मुझे थोड़ा और आगे बढ़ना पड़ा, और वही हुआ जो मे सोच रहा था…

मेरा आगे का उभरा हुआ हिस्सा खुशी की मोटी गान्ड और कमर के बीच की उठान पर जा टिका…

अपनी गान्ड के उठान पर मेरे लंड के उभार को महसूस करते ही खुशी अपनी गान्ड को और पीछे करते हुए अपने पंजों पर खड़ी हो गयी, कुच्छ इस तरह से मानो वो भी उचक कर ड्रॉ में झाँकने की कोशिश कर रही हो..

उसके पंजों पर उचकने से गान्ड की दरार मेरे लंड से रगड़ गयी…! उसके मूह से दबी-दबी सी सिसकी निकल गयी…!

मेने ड्रॉ चेक किया, लेकिन उसमें उसकी ब्रा थी ही नही तो मिलती कहाँ से, कुच्छ देर उसके अंदर के कपड़ों को उलट-पलट कर देखने के बाद मेने कहा –

खुशी इसमें तो वो दिख नही रही, ये कहकर में पीछे को हटने लगा कि तभी उसने मेरे दोनो हाथ पकड़ कर अपनी चुचियों पर रख दिए और बोली –

कोई बात नही मे दूसरी निकाल लूँगी…!

उसकी मस्त मुलायम चुचियों का स्पर्श पाकर मेरे लंड को एक झटका सा लगा…

लेकिन मेने उन्हें दबाया नही और अपने हाथ छुड़ाकर पीछे को हट गया…

 
खुशी मेरी तरफ पलट गयी, और अपनी गद्दार चुचियों को मेरे सीने से सटाते हुए बोली – भैया मे आपको अच्छी नही लगती..?

मेने उसकी आँखों में देखकर कहा – तुम तो बहुत सुंदर हो लेकिन अभी ये सवाल क्यों किया तुमने…?

उसने मुझे अपनी बाहों में जकड लिया, उसके मोटे-मोटे गदर अनछुए उभार मेरे सीने में दब गये, जिसके मखमली एहसास से मेरी हालत खराब होने लगी..

वो मेरे बदन से चिपकते हुए बोली – तो मुझे अपनी बाहों में लेकर प्यार करो ना प्लीज़..., मुझे आपका प्यार चाहिए…!

मेने उसके कंधे पकड़कर अपने से अलग करने की कोशिश करते हुए कहा – ये क्या बच्पना है खुशी, जानती भी हो कि तुम क्या कह रही हो…

वो किसी जोंक की तरह मुझसे चिपकते हुए बोली – मुझे पता है मे क्या कह रही हूँ.., और सोच समझ कर ही कह रही हूँ, मुझे अपनी मजबूत बाहों में ले लो भैया… प्लीज़.

मे – मुझे छोड़ो खुशी, ये वक़्त इस सब के लिए सही नही है, कोई आ गया तो मेरे लिए मुशिबत खड़ी हो जाएगी..

अपनी मम्मी को तो जानती ही हो, कि वो कैसी हैं…!

वो – यहाँ मेरे पास आपको किसने भेजा था…?

मे – तुम्हारी मम्मी ने, बोला था कि तुम्हें मुझसे कुच्छ काम है…

वो – तो फिर वो यहाँ क्यों आएँगी…?

मे उसकी बात सुनकर लाजबाब हो गया, उसकी बात भी सही थी, कि जब वो ही मुझे यहाँ आने के लिए बोली थी, तो अब क्यों आएँगी…!

लेकिन फिर भी में फिलहाल इन सब पचडो में पड़ने के मूड में नही था, गुप्ता जी की पूजा कभी भी ख़तम हो सकती थी,

इसलिए फोर्स्फुली मेने उसको अपने से अलग किया, और उसके कंधे पकड़ कर बोला – तुम जो चाहती हो वो तुम्हें मिलेगा, लेकिन अभी नही…

अभी मुझे तुम्हारे पापा से कुच्छ काम है, और वैसे भी जो तुम्हें चाहिए उसके लिए सही जगह और समय की ज़रूरत होगी, जो फिलहाल नही है…

वो मचल कर बोली – तो फिर कब और कहाँ..?

मे – चिंता मत करो, मे तुम्हें इस तरह से प्यार करना चाहता हूँ, जिसे तुम हमेशा याद रखो, और हां वो समय जल्दी ही आएगा…ओके.

ये कहकर मेने आगे से उसके तौलिए की गाँठ खोल दी, वो एकदम नंगी मेरी आँखों के सामने थी, उसके लाजबाब वक्षों को कुच्छ देर देखता ही रह गया…

उसकी उम्र के हिसाब से वो आकार में ज़रूर बड़े थे, लेकिन उसके भरे हुए बदन के हिसाब से एकदम परफेक्ट अनछुए, अनटच, एक दम कसे हुए गोल-मटोल सुडौल,

एकदम सीधे ताने हुए…जिनके शिखर पर दो किशमिश के दाने जैसे कच्चे निपल जो अभी तक ज़्यादा बाहर भी नही आ पाए थे…

मेने खुशी के होठों को चूम लिया, और हल्के से उसके सुडौल मुलायम, मक्खन जैसे, स्पंज के गोलों जैसे उभारों को सहला कर उसके कमरे से निकल आया…!

इस पल भर के एहसास ने खुशी को किसी दूसरी ही दुनिया में भेज दिया, वो अपनी आँखें बंद किए हुए कुच्छ देर यौंही खड़ी रही, और फिर मन ही मन मुस्कुराती हुई अपने कपड़े पहनने लगी……!

..........................................

बिल्डर योगराज की शादी सुदा बेटी श्वेता, जिसका भाई रेखा वाले गांग रेप में शामिल था.., कामिनी की बेस्ट फ्रेंड है….

वो दोनो एक दिन माल में मुझसे टकरा गयी…श्वेता भी कामिनी की ही तरह मस्त भरे सुडौल बदन वाली औरत है…

वो दोनो इस समय जीन्स और टॉप में थी, दोनो के एकदम तने हुए कलमी आम, और मटकते हुए तरबूज जैसे कुल्हों को देखकर मेरा लंड अंगड़ाई ले उठा….!

मुझे देखते ही कामिनी चहकते हुए बोली…अरे ! देवेर जी आप और यहाँ..? व्हाट आ प्लेज़ेंट सर्प्राइज़…?

मेने अपने फेस पर स्माइल लाते हुए कहा – क्यों मे यहाँ नही हो सकता..?

वो – नही ऐसी बात नही है… मे तो बस आपको यहाँ आकस्मात देख कर बोल उठी…

फिर वो अपनी सहेली से बोली – श्वेता ही इस अंकुश शर्मा, मेरे देवर, यहीं पर लॉयर हैं.

और देवर जी ये मेरी बेस्ट फ्रेंड श्वेता, इसके हज़्बेंड बिज़्नेस मॅन हैं, इसके पापा के पार्ट्नर…

मे – इनके पापा मतलव…? मेने जानबूझ कर ये सवाल किया…

वो – बिल्डर हैं, उनका नाम योगराज है, शहर के जाने माने बिल्डर, बहुत बड़ा कारोबार है उनका…

मेने श्वेता से हाई बोला और अपना हाथ आगे कर दिया…

उसने भी हाई बोलकर मेरा हाथ अपने मुलायम रूई जैसे हाथ में ले लिया… और उसे देर तक पकड़े रही…

 
मेने उसकी आँखों में झाँक कर देखा, तो उनमें मेरे लिए एक प्रणय निमंत्रण दिखाई दिया…

मे समझ गया, कि ये भी कामिनी की तरह लंड की भूखी कुतिया ही है…

मेने उसकी तरफ अपनी एक आँख दबा कर बोला – नाइस टू मीट यू श्वेता जी…

वो सेक्सी स्माइले देते हुए बोली - ओह… सेम टू यू, और ये जी लगाने की ज़रूरत है क्या आपको…? मे भी लगभग आप ही की एज की होंगी… सो वी जस्ट फ्रेंड्स…

मे – ओह सॉरी ! श्वेता, ऑफ कोर्स नाउ वी मे फ्रेंड्स… क्यों भाभी ?

वो भी हँसते हुए बोली – इट्स युवर प्लेषर…, आइ हॅव नो इश्यू…

फिर उसने अपना सेल नंबर मुझे दिया, हम तीनों ने मिलकर एक रेस्तरा में बैठ कर कॉफी शेयर की, और कुच्छ देर बातें करके वो दोनो चली गयीं ……..........................!

अगले दिन भाभी के मायके में कोई फंक्षन था, तो वो दोनो बहनें भैया को साथ लेकर अपने मायके चली गयीं, दूसरे दिन लौटने का उनका प्रोग्राम था,

मुझे थोड़ा काम था, और वैसे भी घर पर भी कोई तो रहना चाहिए था, बाबूजी तो नौकरी के साथ-2 ज़िम्मेदारियों से भी रिटाइर हो गये थे…

घर के सारे-हिसाब किताब की मालकिन तो भाभी ही थी, तो वो ज़्यादातर खेतों पर ही रहते थे…, और आजकल अपनी सेट्टिंग मनझली चाची की सेवा से खुश थे.

मे आँगन में चारपाई डालकर बैठा, अपने ऑफीस की फाइल में लगा पड़ा था, अपने क्लाइंट गुप्ता जी के काम में,

लगभग 12:30 के समय छोटी चाची मेरे लिए खाना लेकर आई.. उन्होने किचेन से प्लेट लेकर मुझे खाना परोस कर दिया…

मेने पुछा की बाबूजी का खाना, तो उन्होने बताया कि उनके लिए तुम्हारे चाचा के हाथों भिजवा दिया है…

मे फाइल एक तरफ करके वहीं चारपाई पर बैठ कर ही खाना खाने लगा… दरअसल सर्दियों की धूप बड़ी अच्छी लगती है, तो वहाँ से मेरा उठने का मन ही नही हुआ…!

चाची वहीं मेरे बगल में बैठ गयी, और बातें करने लगी…

वो – लल्ला आजकल मुझे तो तुम भूल ही गये हो, कभी कभार घर की तरफ आजाया करो…, तुम्हारा बेटा बहुत याद करता रहता है,

मे – वो आपका बेटा है चाची…, घर के रिश्ते कभी बदल नही सकते…

वो – लेकिन सच्चाई तो यही है ना ! और फिर यहाँ हमारे अलावा और कॉन है…?

मे – दीवारों के भी कान होते हैं, ये कहावत तो सुनी होगी आपने…!

वो – मुझे पता है लल्ला… मे तो बस कह रही थी, कि कभी समय निकाल कर अपनी चाची का भी ख्याल कर लिया करो…

बातों – 2 में मेरा खाना हो गया… हाथ धोकर मेने पानी पिया, और बोला – असल में अब थोड़ी ज़िम्मेदारी बढ़ गयी हैं,

अब मेरी कोई नौकरी तो है नही कि काम करो या ना करो घर बैठे महीने के महीने पगार आजाए… मे तो जितना समय काम को दूँगा, उतना ही कमा पाउन्गा..

वो – मे जानती हूँ, इसलिए मेने पहले तुम्हें कभी कहा नही, आज अकेले देख कर बोल दिया आगे तुम्हारी इक्च्छा है, मेरा क्या है काट लूँगी किसी तरह दिन…

ये कहते हुए वो कुच्छ मायूस सी हो गयी… मेने हँसते हुए उन्हें अपनी ओर खीच लिया और उनके गाल को चूम कर बोला –

सच में चाची समय नही मिल पाता, वरना इतनी हॉट और सुंदर चाची को कैसे भुला सकता हूँ… एक काम करना आज रात को आ जाना…मज़े करेंगे..

वो – तुम्हारे चाचा तो घर ही होंगे, और फिर बिट्टू को अकेला छोड़ कर कैसे आ सकती हूँ...

मे समझ गया कि चाची का अभी का मन है चुदने का, सो लपक कर गया और मेन गेट की अंदर से कुण्डी लगा दी…

आकर मेने चाची को अपनी गोद में खींच लिया और उनके होठ चूसने लगा…

चाची शायद मुझे अकेला देखते ही मन बना चुकी थी, सो हाथ लगते ही गरम हो गयी…

मेने उनकी चुचियाँ मसलते हुए, चारपाई पर लिटा दिया, उन्होने नीचे हाथ डाल कर मेरा लंड पकड़ लिया…

मुट्ठी में आते ही वो फूलने लगा, चाची मस्ती में भरकर बोली – अह्ह्ह्ह…लल्ला क्या मस्त लंड है तुम्हारा… इसकी याद आते ही मेरी चूत पनियाने लगती है…

देखते – 2 हम दोनो ही नंगे हो गये, और समय बरवाद ना करते हुए मेने अपना लंड चाची की गरम चूत में पेल दिया…

वो सिसक पड़ी… और मज़े में उनकी कमर उपर उठ गयी… जिससे मेरा पूरा लंड उनकी रसीली चूत में समा गया….

सर्दियों की मखमली धूप में खुले आसमान के नीचे हम दोनो चुदाई का आनंद लेते रहे…

एक बार चुदाई के बाद मेने चाची को गान्ड मारने के लिए भी राज़ी कर लिया,

चाची की गान्ड मेरे लिए हमेशा ही फॅवुरेट रही थी, सो उनको वहीं चारपाई के नीचे खड़ी करके घोड़ी बना लिया…

चाची की मस्त चौड़ी चकली गान्ड के छोटे से सुराख पर थूक लगाया, और धीरे-2 करके पूरा लंड अंदर करके चोदने लगा…

 
चाची भी कुच्छ देर में ही गान्ड मारने का मज़ा लूटने लगी, और अपनी गान्ड को मेरे लंड पर मारने लगी…

दो घंटे के बाद वो पूरी तरह संतुष्ट होकर बर्तन उठाकर चली गयी और मे फिर से अपनी फाइल में खो गया…

शाम को खेतों की ओर निकल गया, बाबूजी के पास थोड़ी देर बैठा, अंधेरा होने पर वापस लौट लिया…

गाओं में घुसते ही रास्ते में वर्षा भौजी मिल गयी, वो अपने बेटे की उंगली पकड़े कहीं जा रही थी, मुझे देखते ही वो खड़ी गयी…

वो शिकायत करते हुए बोली – देवर जी आप तो अब दिखाई भी नही पड़ते.. कभी कभार कुच्छ नही तो अपने बेटे को ही देखने आ जाया करो..

मेने अपनी व्यस्तता का हवाला देकर समझाया…! लेकिन उसकी मायूस शक्ल देखकर मुझे उस पर तरस आगया….!

मेने उसे पुछा – तो बताइए कहाँ और कैसे मिल सकती हो, आज मेरे पास समय है थोड़ा बहुत तो कुच्छ कर सकते हैं…

मेरी बात सुनकर वो खुश हो गयी, और बोली – आप जहाँ कहोगे मे वहीं आ जाउन्गि…

तो फिर ठीक है, आज रात मेरे घर आ जाइए…,

ये सुनकर वो इतनी खुश हो गयी, की उसने बीच रास्ते पर ही मेरे होठों को चूम लिया, वो तो अच्छा हुआ, आस-पास कोई था नही…

और फिर रात 11 बजे आने का वादा करके खुशी में झूमती हुई, अपने बेटे को लेकर अपने घर की तरफ चली गयी…और मे अपने घर की तरफ.…!

शाम का खाना मे चाची के यहाँ खाने चला गया, कुच्छ देर बैठकर, मेने बाबूजी का खाना बैठक में लेगया, तो वहाँ पहले से ही वो खा रहे थे..

मनझली चाची नीचे बैठे, उन्हें प्यार से खाना खिला रही थी…उनके खाने को वापस ले जाकर मेने छोटी चाची को थमाया, फिर उन्हें थोड़ा सा खड़े खड़े ही उपर से प्यार करके अपने घर आ गया…

इसी में 9:30 हो गये, मेने थोड़ा बहुत अपने ऑफीस का काम निपटाया, और फिर टीवी देखने बैठ गया… वारसा रानी के इंतेज़ार में.

अभी 11 बजने में कुच्छ समय शेष ही था कि, दरवाजे पर हल्की सी दस्तक हुई, मेने उठकर गेट खोला, तो सामने कांपति हुई सी वर्षा भौजी खड़ी थी…

मेने पुछा – क्या हुआ भौजी, काँप क्यों रही हो इस तरह…

वो झट से अंदर आई और जल्दी से दरवाजे को बंद करते हुए अपने सीने पर हाथ रख कर बोली –

देवर जी ! आपके बाबूजी जाग रहे हैं, मे जैसे ही बैठक के बराबर से गुज़री, तो मुझे अंदर से कुच्छ आवाज़ें सुनाई दी…

मेने कहा – किस तरह की आवाज़ें थी,

वो बोली – मुझे लगा जैसे उनके पास कोई औरत हो, और वो दोनो हंस-हंस कर बातें कर रहे थे…

मे समझ गया, कि आज मनझली चाची की चूत शाम से ही खुजा रही थी, और वो अभी भी वहीं जमी हुई हैं…

फिर मेने प्रत्यक्ष मे कहा – औरत..? ये कैसे हो सकता है, ज़रूर आपको कोई वहम हुआ होगा… खैर छोड़ो ये सब, हम अपना काम करते हैं क्यों..? ये कहकर मेने उसकी कमर में हाथ डालकर अपने से चिपका लिया…

मेरे शरीर से चिपकते ही वो सब बातें भूल गयी, और मेरे शरीर से लिपट गयी..

उसकी गान्ड सहलाते हुए मे उसे अपने बेडरूम तक लाया, कमरे में आते ही वो किसी अमरबेल की तरह मुझसे लिपट गयी, और मेरे होठों को चूम लिया…!

मेने उसकी चुचियों को मसल्ते हुए पुचछा – और सूनाओ भौजी, रवि भैया, कभी-कभार मौज लेने आते हैं या नही…

उसने मेरे गले में अपनी मांसल गोरी-गोरी बाहों का हार डालते हुए अपनी चूत को मेरे शॉर्ट में उमड़-घूमड़ रहे लंड पर दबाते हुए कहा…

काहे की मौज, आकर मेरी प्यास और भड़का जाते हैं, पता नही इतनी उमर हो गयी, अभी तक उन्हें इतना भी नही आता कि एक औरत को कैसे खुश किया जाता है, बस अपना पानी निकालने से मतलब…

मेने उसकी उठी हुई गान्ड मसल्ते हुए कहा – तो तुम उसे सिख़ाओ ना…

वो मचलते हुए बोली – हाए देवर जी, मे इतनी बेशर्म नही हो सकती, अगर कुच्छ बताने बैठी, और उन्होने पुच्छ लिया कि ये सब कहाँ से सीखा तो…?

मेने खड़े-खड़े ही उसके कपड़े निकाल दिए, अब वो मात्र ब्रा और पेंटी में ही थी…

उसका शरीर, पहले से ज़्यादा भर गया था, जिसकी वजह से वो इस समय किसी सेक्स बॉम्ब जैसी लग रही थी,

मात्र दो छोटे-2 कपड़ों में उसकी उफनती जवानी देख कर मेरे लौडे का बुरा हाल हो रहा था…

मेने उसकी चुचियों को ज़ोर्से मसलकर कहा – कह देना जो भूत तुम्हारे उपर सवार हुआ था, उसी ने सिखाया है…,

मेरी बात सुनकर वो खिल-खिलाकर हंस पड़ी, और बोली – वैसे आइडिया बुरा नही है…फिर मेरे एकमात्र शॉर्ट को नीचे करके, लंड को मुट्ठी में कसते हुए बोली –

लेकिन ऐसा हथियार कहाँ से मिलेगा, वो तो उनके पास नही है…

 
मेने उसकी ब्रा के स्टेप्स खोल दिए, वो किसी स्प्रिंग की तरह छिटक कर नीचे टपक गयी, उसकी गोल-मटोल परफेक्ट 34 की गोलाइयों को सहलाने, चूसने लगा,

वो मेरे लंड को मुत्ठियाने लगी… फिर अपनी एकमात्र बची हुई पेंटी भी निकाल कर फेंक दी, और मेरे लंड को अपनी मुनिया के होठों के उपर रगड़ते हुए बोली….

आअहह….देवेर्जी, इसे अब डालो ना, सस्सिईइ….देखो तो बेचारी कैसी विरह में आँसू बहा रही है…

मेने खड़े-खड़े ही उसकी एक टाँग उठा ली, और दूसरी जाँघ को हाथ का सहारा देकर अपना लंड उसकी रसीली चूत में डालने लगा…

मेरे लंड की सरसराहट अपनी चूत की दीवारों पर फील करते ही उसने मेरे गले में बाहें डाल दी और मेरे होठों को चूमकर सिसकने लगी…

सस्स्सिईईई….आआहह….उूउउम्म्म्म….मज़ा आगेया….उउउइई…माआ….हाईए…थोड़ा धीरे सीए…रजाआ….आअहह…

लंड जड़ तक उसकी चूत में समा चुका था, वो उसे अपनी सुरंग के अंतिम छोर पर फील करके मस्ती में भर गयी, और अपने एक पैर के सहारे से अपनी कमर को चलाने लगी…

मज़े की पराकाष्ठा क्या होती है, वर्षा से कोई पूछे आज, वो दीवानावर अपनी कमर को चलते हुए मेरे लंड को पूरी लंबाई तक अपनी सुरंग में अंदर बाहर करने लगी…

लेकिन ये ज़्यादा देर नही चल पाया, और उसकी गति रुकने लगी, तो मेने पलंग पर ले जाकर उसकी टाँगों को अपने कंधे पर रखा और एक ही झटके में अपना मूसल फिर से उसकी ओखली में उतार दिया…

उसके मूह से आअहह…निकल गयी…और उसने अपना मूह मेरे कंधे में गढ़ा दिया…

20 मिनिट की दमदार चुदाई के बाद हम दोनो का ही ज्वार शांत हुआ, और एक दूसरे के बाजू में लेटकर अपनी साँसों को कंट्रोल करने लगे…

कुच्छ देर बाद ही हमारे हाथ फिरसे सरारत करने लगे, और एक दूसरे के अंगों को सहलाने लगे…

मेने अपनी एक उंगली वारसा की गान्ड के छोटे से छेद में डाली…

वो एकदम से उछल पड़ी, आआवउक्च्छ…. ये मत करो प्लीज़, कहकर उसने अपने हाथ से मेरी कलाई पकड़ कर उंगली बाहर निकल दी…

मे उसके कत्थयि रंग के छेद पर उंगली के पोर से सहलाते हुए बोला – कभी यहाँ ट्राइ किया है भौजी…?

वो ना में गर्दन हिलाकर बोली – भला ये भी कोई करने की जगह है..?

मेने उसकी चुचि को मसल्ते हुए कहा – अरे रानी, एक बार लेकर तो देखो, बार-बार लेने का मन ना करे तो कहना…!

वो मेरे लंड को सहलाते हुए बोली – क्या सच में वहाँ भी इतना ही मज़ा आता है, जितना आगे से आता है…

मेने अपनी उंगली उसकी चूत में डालकर गीली की, और फिर उसी को उसकी गान्ड में डालकर बोला – उससे भी ज़्यादा, एक बार ट्राइ तो करो…

ना जाने क्या सोचकर वो तैयार हो गयी, और बोली – ठीक है, पर एक बार और आगे से करना पड़ेगा..

बातों और हरकतों ने हम दोनो को एक बार फिरसे गरम कर दिया था, सो मेने उसे घोड़ी बनाकर पीछे से उसकी चूत में लंड डालकर अच्छे से उसको झडा दिया,

फिर एक वैसलीन की ट्यूब उसकी गान्ड के छेद में डालकर उसको चिकानाया, उसकी चुचियों को सहलाते हुए धीरे से अपना लंड उसकी गान्ड के छेद पर रख कर पुश किया…

कराह कर उसने अपनी गान्ड के छेद को सिकोड लिया, और मेरा अंदर गया हुआ सुपाडा भी बाहर को सरक लिया…

आअहह…देवर्जी, रहने दीजिए, नही जाएगा प्लीज़ मान जाइए, मेरी गान्ड फट जाएगी….

मेने उपस्की पीठ को सहलाते हुए चूम लिया, फिर उसकी चूत को सहला कर बोला – ओह्ह्ह भौजी, ऐसे तो दर्द होगा ही,

आप उसे अंदर जाने ही नही दे रही, थोड़ा ढीला तो छोड़िए अपनी गान्ड को तभी तो जाएगा…

बिना अंदर गये मज़ा कैसे आएगा, प्लीज़ इस बार थोड़ा ढीला रखना , ओके.

उसने हां में गर्दन हिला दी, मेने एक बार फिरसे अपना सुपाड़ा उसकी गान्ड के छेद पर रखा, और एक करारा सा धक्का मार दिया….

वो दर्द से बिल-बिला उठी, और अपनी गान्ड को इधेर-उधर करने लगी, लेकिन मेरा आधा खूँटा उसके छेद में फँस चुका था,

उपर से मेरे मजबूत हाथों का दबाब उसकी पीठ पर था, सो उसके हिलने के कोई चान्स नही थे…

कुच्छ देर उसकी चुचियों को सहला कर, उसकी चूत में उंगली डालकर उसके दर्द को मज़े में कॉनवर्ट किया, जब उसे थोड़ा राहत हुई,

तो मेने अपना पूरा लंड उसकी गान्ड के संकरे से छेद में पहुचकर रुक गया…

वो नीचे से गिगाड़ते हुए उसे निकालने की गुहार करती रही, लेकिन मेने उसकी एक नही सुनी, और धीरे-2 अपने मूसल को बाहर किया,

लंड को और थोड़ा चिकना किया, और फिर पेल दिया…

दो-तीन बार ऐसा करने से उसकी गान्ड का छेद खुल गया, और उसकी दीवारों के सेन्सेशन से उसकी चूत से काम रस टपकने लगा…

अब उसको भी मज़ा आने लगा था, सो मादक सिसकियाँ लेते हुए वो अपनी पहली गान्ड मराई का मज़ा लेने लगी…!

मेने उसका एक हाथ पकड़ कर पीछे को कर दिया, वो अपना सिर तकिये में गढ़ाए, मेरे धक्कों का मज़ा लूटने लगी…!

मेरे तबाद-तोड़ धक्कों ने उसकी रेल बनादी, लेकिन चोरी की चुदाई के लिए वो ये भी झेल गयी…

टाइट गान्ड के छेद की रगड़ से मेरा लंड और ज़्यादा फूल गया था, लेकिन ज्यदा घर्षण के कारण, 15 मिनिट में ही उसने हथियार डाल दिए,

और उसकी गान्ड के छेद में च्चिड़काव कर दिया…

गान्ड में गरम-गरम वीर्य की धार से उसकी चूत फिर से झड़ने लगी…

कुच्छ देर वो ऐसे ही औंधे मूह पड़ी रही, मेने उसकी गान्ड के उठान को पकड़ कर भींचते हुए कहा –

क्यों भौजी, गान्ड मारने में मज़ा आया की नही…तो वो मुस्करा उठी, फिर जैसे ही उसने सीधे होने की कोशिश की, उसके मूह से कराह निकल गयी…

वो मेरे होठों पर एक चुंबन लेकर बोली – मज़ा तो बहुत आया, पर दर्द भी है..

कुच्छ देर बाद वो कुच्छ संयत हुई, बाथरूम जाकर फ्रेश होकर अपने कपड़े पहनकर बोली…

अब बहुत रात हो गयी है देवर जी ! मुझे मेरे घर तक छोड़ दो, उसकी बात भी सही थी, इतनी रात को उसे अकेला नही जाने दे सकता था,

सो मेने भी कपड़े डाले, और उसे उसके घर के दरवाजे तक छोड़ कर वापस अपने घर आकर, तान चादर सो गया…

अभी रात के 9 ही बजे थे, सदर रोड पर लोगों की चहल पहल बढ़ती जा रही थी…

इतनी भीड़ भाड़ के बबजूद भी एक काले रंग की कार जिसके शीशे भी काले थे अंदर कॉन है, क्या कर रहा है बाहर से किसी को कुच्छ दिखाई नही दे रहा था…

काले रंग की कार निरंतर हॉर्न बजाती हुई लोगों को रास्ता देने पर मजबूर कर रही थी, जो हटने पर ज़रा ही हिचकिचाया या देर करता, वो उसकी चपेट मे आजाता…

उसके कोई 300 मीटर की दूरी पर एक पोलीस जीप उसके जस्ट पीछे स्प सिटी की गाड़ी, लगातार सायरन बजाती हुई चली आ रही थी….

देखने से ही पता चल रहा था कि पोलीस उस काली कार का पीछा कर रही है…

 
दोनो के बीच की दूरी निरंतर घटती ही जा रही थी, कारण था, काली कार को भीड़ का सामना ज़्यादा करना पड़ रहा था, वहीं पोलीस की गाड़ियों को भीड़ पहले से ही हटी हुई मिल रही थी…

एका-एक वो काली कार रोड के डिवाइडर के बीच में बने कट से उसी रफ़्तार में टर्न लेती है…

लेकिन स्पीड ज़्यादा होने की वजह से वो यू टर्न लेने के कारण सामने वाले फूटपाथ पर चढ़ गयी,

ना जाने कितने लोग उसकी चपेट में आए, चारों तरफ चीखो पुकार मच गयी..

फूटपाथ पर लोगों को रौन्दति हुई, वो काली कार जैसे ही फिर से रोड पर आई, कि पलट गयी… और कुच्छ दूर तक घिसती चली गयी…

कार के उपर वाले डोर से जैसे तैसे करके 3 लोग बाहर निकले…उनके हाथों में रेवोल्वेर लगे हुए थे..और मूह कपड़े से ढके थे…

जब तक पोलीस की गाड़ियाँ अगले चौराहे से टर्न लेकर उस कार तक पहुँचती, तब तक वो तीनों कार से निकल कर एक गली में घुस गये…

आनन फानन में पोलीस की गाड़ियाँ कार के पास आकर रुकी, और उनमें से पोलीस वाले निकल कर उस गली की तरफ भागे, जिधर वो तीन नकाब पॉश गये थे…

पोलीस ने हवाई फाइयर करके लोगों को एक तरफ हटने को कहा… जिससे वो उन लोगों पर निशाना साध सकें, जो लोगों की उपस्थिति के कारण संभव नही हो पा रहा था…

वो तीनों भीड़ का सहारा लिए भागे जा रहे थे, अभी वो अगले मोड़ से थोड़ा दूर ही थे कि पोलीस की तरफ से एक गोली आई और उनमें से सबसे पीछे वाले की पीठ में घुस गयी….

वो चीख मारते हुए कुच्छ देर तो उनके साथ-2 भागा… लेकिन कुच्छ दूर चल कर ही लहरा कर गिर पड़ा…

उन दोनो ने ठिठक कर अपने साथी को देखा, तब तक उनमें से एक ने दूसरे का बाजू पकड़कर उसे खीचते हुए भागने लगा…

जब तक पोलीस उन पर अगला निशाना लगाती, वो मोड़ मूड चुके थे…

ये बाज़ार के पीछे वाला रोड था, जहाँ लोगों की भीड़ भाड़ कम ही हुआ करती थी…

वो दोनो बेतहाशा भागे जा रहे थे, पोलीस शिकारी कुत्तों की तरह उनका पीछा कर रही थी…

जैसे ही पोलीस वाले उस मोड़ पर पहुँचे, उनके बीच की दूरी बढ़ गयी थी… लेकिन ऐसा भी नही था, की वो उनकी हद से बाहर निकल चुके थे…

अगर सामने से पोलीस दल आ धमका तो वो घिर सकते थे, लेकिन उन्होने भागते रहने में ही अपनी भलाई समझी…

पीच्चे से उनपर लगातार फाइयर भी किए जारहे थे…

आकस्मात दूसरी गली से कुच्छ पोलीस वाले निकल पड़े, तब तक वो उस गली को क्रॉस कर चुके थे, लेकिन अब वो दूसरी गली से आने वाले पोलीस वाले उनके बेहद करीब थे…

दूसरी गली से आने वाले पोलीस की टुकड़ी में से सबसे आगे वाले पोलीस वेल ने गोली चला दी, जो उनमें से एक नकाबपोश की पिंडली चीरती हुई निकल गयी…

अभी वो लड़खड़ा कर गिरने ही वाला था कि तभी चर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर….के साथ ब्रेक लगने की आवाज़ वातावरण में गूँज उठी…,

एक सिल्वर कलर की मारुति वॅन आकर रुकी, और रुकते ही उसका पिच्छला गेट बड़ी तेज़ी से खुला, एक हाथ बाहर निकला और उस घायल नकाब पोश को गाड़ी के अंदर खीच लिया,

इतने में वो दूसरा भी वापस मुड़ा और गाड़ी में समा गया…

देखते – 2 वो मारुति वॅन अपनी फुल स्पीड में वहाँ से भागी, और कुच्छ ही पलों में पोलीस की आँखों से ओझल हो गयी…

ये सब इतनी जल्दी में हुआ की पोलीस वाले सिवाय उस वॅन को जाते हुए ही देखते रह गये… एक दो फाइयर भी किए उसके टाइरन को निशाना बना कर….

लेकिन वॅन का ड्राइवर ये जनता था, इसलिए वो उसे लहराते हुए चला रहा था.

मज़े की बात ये थी, कि उस पर कोई नंबर प्लेट भी नही थी…

उधर एसपी कृष्ण कांत के साथ कुच्छ पोलीस वाले उस उल्टी पड़ी कार के पास ही थे, जिसमे दो इंसानी जिस्म अभी भी फँसे पड़े थे…

चूँकि कार ड्राइवर साइड को पलटी थी, सो ड्राइवर वहीं सीट और स्टेआरिंग के बीच ही फँसा पड़ा था, रोड से घिसतने के कारण उसका गेट उखाड़ चुका था…

वो दोनो बुरी तरह से घायल हो चुके थे… ड्राइवर को जैसे तैसे करके गाड़ी सीधी करके ही निकाला जा सका…

अभी वो इसी काम में जुटे थे, कि हताश टीम भी वापस आगयि…उनके साथ एक मृत नकाबपोश भी था…

 
आनन फानन में आंब्युलेन्स बुलाई गयी… ड्राइवर की हालत ज़्यादा गंभीर थी, सो उसने आंब्युलेन्स में चढ़ते ही दम तोड़ दिया…

दूसरे घायल को सिटी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ उसे एमर्जेन्सी ट्रीटमेंट देकर बचा लिया गया…

कार के बारे में पता किया गया, तो पता चला कि वो दूसरे पास के शहर के किसी बिज़्नेसमॅन की थी, जो दो दिन पहले चोरी हो गयी थी, और उसकी संबंधित थाने में रिपोर्ट भी लिखाई जा चुकी थी…

ड्राइवर और दूसरे मरे हुए नकाबपोश की बॉडी क्लेम करने कोई नही आया था, घायल को होश में आने का इंतेज़ार के अलावा अब पोलीस के पास और कोई चारा नही था…

काली कार से भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद हुए थे…जाहिर था, पोलीस को ये खबर मिली थी कि फलाँ रंग की कार से शहर के अंदर ड्रग डीलिंग होने जा रही है…

और खबर मिलते ही पोलीस उनके पीछे लग गयी, उन्हें कुच्छ हद तक इसमें सफलता भी मिली…

लेकिन कोई ऐसा सबूत अभी तक हाथ नही लग सका था, जिससे उस माफ़िया तक पहुँचा जा सकता हो, जो इस सबके पीछे था…

उधर आँधी तूफान की तरह सड़क का सीना चीरती हुई वो सिल्वर कलर की वॅन शहर छोड़ चुकी थी, और घने जंगलों की तरफ दौड़ रही थी…

शहर से कोई 15 किमी दूर जाकर वो सड़क को छोड़कर जंगलों में घुस गयी, कुच्छ अंदर जाते ही वो एक खंडहर हो चुके चरागाह के सामने जाकर खड़ी हो गयी…

वॅन के अंदर की लाइट ऑन की गयी तब पता चला कि अंदर कॉन-कॉन थे…

उन नकाबपोश को बचाने वाले ड्राइवर के अलावा, एक गोरा चिटा 6’ 2” लंबा, हॅटा कट्टा एक 25-26 वर्षीया नौजवान था, जिसकी हल्की सी फ्रेंच कट दाढ़ी थी,

नीली आँखों वाला ये हॅंडसम नौजवान किसी भी एंगल से किसी ग़लत काम करने वाले गिरोह या संघटन से जुदा नही लग रहा था…

वो तो किसी फिल्मी हीरो जैसा, जिसे देखते ही कोई भी लड़की या औरत अपनी चूत खोलकर चुदने के लिए बेकरार हो उठे…

अरे ये क्या…? ड्राइवर की जगह कोई पेशेवर ड्राइवर नही ये तो कोई बेहद हसीन कमसिन सी लड़की थी, जो शायद 18-19 साल की ही होगी…

लेकिन जिस तरह से वो गाड़ी ड्राइव करके लाई थी, लगता ही नही था, कि उसे कोई लड़की चला रही है…

किसी तरह मोबाइल की टॉर्च की रोशनी की मदद से उन्होने आग का इंतेज़ाम किया, और एक चाकू की मदद से उस नकाब पॉश की गोली निकालने में सफलता हासिल की…

अब समस्या थी कि उसके घाव का खून कैसे बंद हो… तो वो नौजवान बोला – रूबी डार्लिंग, ज़रा अपना थोबड़ा दूसरी तरफ रखना…

और फिर उसने वो किया जिसकी किसी ने कल्पना भी नही की थी….

नौजवान ने अपने पॅंट की जिप खोली और लंड बाहर निकल कर पेशाब की मोटी सी धार उसके घाव पर मारने लगा…

वो दोनो उसको देख कर भोंचक्के रह गये… जब पेशाब उसके घाव पर पड़ा, तो उसे बेहद जलन सी हुई,

लेकिन चमत्कारिक रूप से इससे पहले कि उसका पेशाब करना बंद होता, उससे पहले ही घाव से खून निकलना ऐसे बंद हो गया जैसे कि वो किसी गोली का घाव ना होकर, मामूली सी खरोंच हो…

उसके बाद मोबाइल की टॉर्च से वो ज़मीन पर कुच्छ ढूढ़ने लगा, और एक छोटे-2 फूलों वाली घास तोड़ कर उसे अपने हाथों से उसका रस निचोड़ कर उसके घाव पर टपकाया…

उसके घाव में उसे तीव्र जलन का एहसास हुआ, और उसकी चीख निकल गयी..

हौसला रखो दोस्त, ये तुम्हारे घाव को एकदम सही कर देगी, ये कहकर उसने अपनी हथेलियों से ही उस घास की चटनी जैसी बनाकर उसके घाव पर रख दी, और एक रुमाल उसके घाव पर बाँध दिया…

इतना सब करने के बाद जब वो फारिग हुआ, और अपने दोनो हाथों को आपस में रगड़ कर सॉफ कर रहा था तब उस घायल के साथी ने अपना मूह खोला और उस नौजवान से बोला…

थॅंक यू दोस्त ! हम लोगों को तुमने बचा कर बहुत बड़ा एहसान किया है… वैसे अपना परिचय नही दोगे…?

वो बोला – मेरा नाम जोसेफ है, और ये मेरी दोस्त रूबी… हम दोनो कल ही इस शहर में आए हैं, आज इधर घूमने चले आए थे…

समय पास करने के लिए वहीं पास वाली पुलिया पर बैठे बातें कर रहे थे कि तुम लोगों को भागते देखा, और उसके बाद तुम्हारे पीछे पोलीस को…

अब पोलीस से तो हमारा पहले से ही 36 का आँकड़ा रहा है, हमने सोचा कि ये तो कोई हमारी लाइन के लोग लगते हैं, और मुशिबत में हैं…

सो पास ही खड़ी ये वॅन हमें दिखी, इसका ड्राइवर वहीं पास में खड़े होकर मूत रहा था… लक अच्छा था तुम लोगों का कि चाबी गाड़ी में ही लगी थी…

बस फिर क्या था, दौड़ा दी… और देखो हमारे इस प्रयास से तुम जिंदा हमारे सामने हो वरना अब तक तो गॉड को प्यारे हो चुके होते दोस्त !

उस बंदे ने जो कोई और नही उस्मान का बेटा असलम था, उसका दूसरा साथी, जो घायल था, वो उसका दोस्त था…बोला.

सच कहा दोस्त तुमने, आज अगर तुम लोग समय पर हमें नही बचाते तो हम दोनो ही अल्लाह मियाँ को प्यारे हो गये होते…वैसे तुम लोग करते क्या हो…?

वो – अभिषेख बच्चन और रानी मुखर्जी की बंटी और बबली फिल्म देखी है… हम वही हैं…

असलम – क्या मतलव…?

वो – बस इधर का माल उधर करके जिंदगी के मज़े ले रहे हैं…

कभी ये शहर तो कभी वो शहर…अब तो हमें याद भी नही कि असल में हम पैदा कहाँ हुए थे…

किसी दिन पोलीस के हत्थे चढ़ गये… तो खुदा जाने क्या होगा… तब तक जी लेते हैं जैसे जीना चाहते हैं अपनी जिंदगी…

असलम ने अपना हाथ आगे करते हुए कहा – तो मिलाओ हाथ… लगता है, अल्लाह की कोई नेमत होगी.. जो तुम लोग हमें मिल गये…

फिर उसने अपने बारे में सब कुच्छ बताया…उसके बाद उसने अपने बाप को फोन किया, और सारी बातें डीटेल में बताई…

उस्मान – तुम लोग वहीं रहो, अब उस वॅन से शहर की तरफ मत आना, मे दूसरी गाड़ी भेजता हूँ…

 
करीब एक घंटे बाद ही वहाँ एक स्कॉर्पियो खड़ी थी, जब असलम ने उन दोनो से चलने को कहा तो उन्होने उनके साथ आने से मना कर दिया,

फिर असलम ने उसे अपने ऑफीस का अड्रेस लिख कर दे दिया.. कल आकर मिलने का वादा लेकर वो दोनो वहाँ से निकल गये..

उन दोनो के जाने के 15 मिनिट बाद ही वो वॅन शहर की ओर जा रही थी, अब उस पर बाक़ायदा नंबर प्लेट थी…

कुच्छ देर बाद वो दोनो बंटी-बबली एक 3 स्टार होटेल के रूम में थे, और एक ही पलंग पर एक दूसरे की तरफ पीठ करके सो रहे थे…!

सुबह जब लड़के की आँख खुली तो उसने देखा कि पास सोई उसकी साथी लड़की की एक टाँग उसके उपर पड़ी थी, और एक हाथ उसके पेट पर था…

यह देख कर उसके चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान आगयि, और उसने धीरे से उसका हाथ और पैर अपने उपर से हटाए, और फ्रेश होने बाथ रूम में घुस गया…

बाहर आकर उसने दो चाय ऑर्डर की, जब चाय आगयि… तब उसने अपना एक हाथ उसके कंधे पर रख कर उसे सीधा किया और उसके माथे पर एक चुंबन लेकर उसे जगाया…

अरे उठो ! सुवह हो गयी, चाय पी लो…वो नींद में ही कुन्मुनाई, और उसका हाथ पकड़ कर अपने सीने में भींच लिया…

उसने फिर से आवाज़ दी और अपना हाथ खींचने लगा… वो उसके हाथ को और कस्ति हुई नींद में बड़बड़ाई…उउन्न्ं…सोने दो ना…भाई…

वो – उठो देखो कितना दिन निकल आया है, 9 बज गये… हमें असल्म के यहाँ भी जाना है…

कुच्छ देर की कोशिश के बाद वो उठ कर बैठ गयी, और उसने कहा – गुड मॉर्निंग भैया, और आगे उचक कर उसने उस युवक के गाल पर किस कर लिया…

चाय पीते हुए वो बोली – आप अकेले चले जाना, मे उस हराम्जादे की शक्ल भी नही देखना चाहती… अब तो मे सीधे उस कुत्ते के मूह पर थूकने ही जाउन्गि..

यह कहते -2 उसका सुंदर सा चेहरा लाल भभुका हो गया था, जिसे देख कर उस युवक ने फिर उसे और कुच्छ नही कहा…

उसके बाद वो दोनो तैयार हुए, और होटेल से बाहर आगये, अब वो युवक, वो रात वाला जोसेफ नही था… उसका हुलिया एक दम बदला हुआ था…

बाहर आकर वो दोनो अलग – अलग दिशाओं में निकल पड़े…

............................

मे अपने ऑफीस में बैठा आज का न्यूज़ पेपर देख रहा था जिसमें रात वाली घटना पूरे विस्तार के साथ छपी थी,

यहाँ तक कि कैसे दो गुण्डों को एक बिना नंबर की मारुति वॅन बचा कर ले गयी, उस वॅन को तलाश करने की कोशिश जारी है…

खबर पढ़ कर मेरे चेहरे पर स्माइल आगयि, और न्यूज़ पेपर सोफे पर फेंक कर अपने काम में लग गया..…!

शाम तक मे कोर्ट के कामों में उलझा रहा, इस बीच घर से निशा का फोन भी आया, भाभी से भी बात हुई…

उन्होने कई दिनो से घर ना आने का कारण पुछा तो मेने काम की व्यसतता बता कर उन्हें समझा दिया…

घर पर बातें करके मेने अभी फोन रखा ही था, कि वो फिरसे बजने लगा, देखा तो गुप्ता जी का लॅंड लाइन नंबर था,

कॉल रिसीव करते ही कानों में खुशी की आवाज़ सुनाई दी, मेने उसकी आवाज़ सुनते ही कहा – हां खुशी, बोलो कैसे फोन किया…!

खुशी – भैया, आप अभी क्या कर रहे हो..?

मे – क्यों कोई काम था ? मे अपने ऑफीस में ही हूँ, बस काम ख़तम करके निकलने की तैयारी में ही था, कि तुम्हारा फोन आगया…

वो – आप ऑफीस से सीधे यहीं आ जाओ, मे यहाँ अकेली हूँ मम्मी भैया के साथ किसी फंक्षन में गयी हैं, पापा का आने-जाने का कोई ठिकाना नही है…

मे – अरे तो तुम भी अपनी किसी फ्रेंड के पास चली जाओ,

वो – अब ज़्यादा बहाने मत बनाओ, और जल्दी आओ, वरना मे वहाँ आ जाउन्गि…

मेने हँसते हुए कहा – ठीक है आता हूँ, मेरे खाने का इंतेज़ाम करके रखना..

शाम को 7 बजे मेने अपना बॅग उठाया, ऑफीस बंद करवाया, और गुप्ता जी के बंगले की तरफ चल दिया…

गुप्ता जी के बंगले पर पहुँचते ही, खुशी मुझे हॉल में ही मिल गयी, मुझे देखते ही उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने कमरे में खींच कर ले गयी…!

जाते ही उसने गेट लॉक किया और मुझसे लिपट गयी, मेने उसके कंधे पकड़कर अलग किया और कहा – अरे मेरी बेबी डॉल सबर तो कर…!

वो मुझसे अलग होते हुए बोली – आपने जो वादा किया था, उस हिसाब से अब हमारे पास समय भी है और मौका भी, अब आपका कोई एक्सक्यूस नही चलेगा…

मेने उसके बेड पर बैठकर उसे अपनी गोद में बिठा लिया और हँसते हुए कहा – हां.. हां ठीक है मे कॉन्सा मना कर रहा हूँ, पर मुझे एक बात का जबाब देगी…

वो बोली – क्या..?

मे – तुम एक कमसिन नव यौवना, जवानी की दहलीज़ पर अभी-अभी कदम रखी हो, चाहोगी तो हज़ारों लड़के मिल सकते हैं, फिर तुम मेरे जैसे शादी शुदा इंशान के साथ ही ये सब क्यों करना चाहती हो…?

वो – क्योंकि मुझे आपसे ज़्यादा कोई हॅंडसम, और केरिंग मर्द नही मिला अभी तक…, अब मे आपको एक और बात बताना चाहती हूँ…!

मेने उसकी मोटी-मोटी मखमल जैसी चिकनी जांघे जो उसके छोटे से शॉर्ट के बाहर नंगी थी उन्हें सहलाते हुए पुछा – क्या..?

खुशी के मुलायम, थोड़े भारी गुदगूदे नितंबों के नीचे दबे मेरे लौडे ने अपना सर उठा लिया था, पॅंट के अंदर से ही उसने उसकी गान्ड के नीचे हलचल मचा रखी थी…

उसे फील करते ही, खुशी मदहोश होने लगी, और उसने मेरा एक हाथ अपनी जाँघ से उठाकर अपनी गदर कलमी आम जैसी चुचि पर रखकर दबाते हुए कहा –

उस दिन मेने मम्मी से सारे दिन कोई बात नही की, जब भी वो मेरे सामने पड़ती, मे मूह फेर्कर निकल जाती, वो मुझसे बात करना चाहती थी…

रात को जब मे अपने कमरे में पढ़ रही थी, तब वो मेरे कमरे में आई, मेने उन्हें अनदेखा कर दिया और अपनी पढ़ाई में लगी रही…

वो मेरे ठीक सामने आकर अपने घुटने टेक कर बेड पर बैठ गयी, और अपने दोनो हाथ से कानों को पकड़ कर बोली – खुशी बेटा एक बार मेरी तरफ देख तो सही.

उनकी आवाज़ में एक ममतामयी करुणा थी, जिसे मेने पहली बार सुना था, सो तुरंत मेने उनकी तरफ देखा…

मम्मी की आँखों में आँसू थे, उन्हीं आँसुओं भरी आँखों से वो अपने कान पकड़े हुए बोली – खुशी, मेरी गुड़िया मुझे माफ़ कर्दे…

तेरी माँ बहुत बुरी है… अपने बच्चों से किस तरह बर्ताव करती है…, पर तूने कभी ये सोचा कि मे ऐसी क्यों हूँ..?

मुझे आज अपनी मम्मी में माँ की ममता नज़र आई, जो अपनी बेटी के नाराज़ होने पर तड़प उठी थी…

मेने फ़ौरन उनके हाथ पकड़ कर उनके कानों से हटाए और उनके कलेजे से लग कर फफक पड़ी, हम दोनो माँ-बेटी बहुत देर तक रोते रहे फिर मेने उन्हें शांत करते हुए कहा-

मे आपसे नाराज़ नही हूँ मम्मी, हां थोड़ी दुखी ज़रूर थी, कि मेरी माँ ने बिना कुच्छ सोचे समझे अपनी बेटी को इतना गिरा हुआ समझ लिया,

मम्मी सुबक्ते हुए बोली – नही मेरी बच्ची, मेने तुझे गिरा हुआ नही समझा, बल्कि वो सब मेरे कम्बख़्त स्वाभाव बस मेरे मूह से निकल गया…

तू तो जानती है, घर की ज़िम्मेदारियाँ संभालते-2 कब मेरा स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया, मुझे खुद पता नही चला, कोई समझाने वाला था नही, तेरे पापा ने घर की तरफ कभी ध्यान नही दिया…

तुम दोनो बच्चे पढ़ाई में लग गये, मे अपने दुख-सुख किसके साथ बाँटति..?

इन नौकरों के बीच रहकर अपनी मन मर्ज़ी चलती रही, और वही मेरी आदत बनती चली गयी…!

लेकिन आज जब तुम सब लोग मुझे अकेला छोड़ कर चले गये, तब मेने अंकुश से माफी माँगी, और उसकी बातों ने मुझे रियलाइज़ कराया…

मे उसके कंधे से लगकर खूब रोई, मेरा सारा गुस्सा, कुंठा, और घमंड मेरे आँसुओं के द्वारा बह गया, तब मुझे रियलाइज़ हुआ कि मे क्या से क्या बनती जा रही हूँ…!

 
तभी मेने मन बना लिया था, कि मे अपनी गुड़िया से माफी माँगूंगी, शायद वो मुझे माफ़ कर्दे, लेकिन सारे दिन तूने मेरी तरफ देखा तक नही तो मे दर्द से तड़प उठी,

मुझसे रहा नही गया, और मे तेरे पास चली आई, अब तो मुझे माफ़ कर्दे मेरी गुड़िया…!

मम्मी की बातें सुनकर मेरी रुलाई फुट पड़ी, और मे एक बार फिर मम्मी के सीने से लग कर रो पड़ी…!

फिर मम्मी ने मुझे अलग करके प्यार से मेरे गाल को सहलाते हुए कहा – लेकिन बेटा ये ग़लत फ़हमी पैदा ही नही होती, अगर हम माँ-बेटी अपनी बातें एक दूसरे से कह सुन पाते…

अब मे चाहती हूँ, कि जो भी तेरे मन में हो वो मुझे खुलकर बता दिया कर, जिससे मे तुझे ग़लत और सही का फ़र्क बता सकूँ…!

वैसे तूने अंकुश को अपना भाई मानकर अच्छा किया है, वो लड़का सही मैने में एक भाई की तरह तेरी रक्षा कर सकता है..,

ये जमाना बहुत जालिम है बेटा, कदम-कदम पर झूठ और फरेब से ये दुनिया भरी पड़ी है,

वैसे मुझे अपनी बेटी पर पूरा भरोसा है, लेकिन फिर भी, तू किसी ऐसे वैसे लड़के के चक्कर में मत पड़ना, जो झूठे प्यार के वादे करके लड़कियों को बहला फुसलाकर उन्हें इस्तेमाल करते हैं, ब्लॅकमेल करके उन्हें चूस्ते रहते हैं,

बेटा मे तुझे इसलिए ये सब बता रही हूँ, कि इस उमर में इंसान के कदम बहक ही जाते हैं, जिसे हम प्यार समझते हैं, वो छनिक मात्र शरीर की ज़रूरत होती है,

मे ये नही कहती कि ये ज़रूरत पूरी ना हो, इस उमर में सभी करते हैं लेकिन किसी ऐसे हाथों में ना पड़ना कि वो इसका ग़लत फ़ायदा उठाए,

अंकुश एक ऐसा लड़का है, जो हज़ारों में तो क्या लाखों में एक है, भरोसेमंद है, ऐसा आदमी ढूँढने से भी नही मिलता है…जो हमें नसीब से मिला है…

तेरी ऐसी कोई ज़रूरत हो तो तू खुलकर उसे बता देना.., तू समझ रही है ना बेटी मे क्या कहना चाहती हूँ,

मे मूह फाडे मम्मी की बातें सुन रही थी, मे मम्मी की बातों का मतलव समझ रही थी, सच कहूँ तो जो इस उमर के हिसाब से इंसान की चाहत होती है, वो उन्होने बयान करदी थी..

शायद वो उनके अपने अनुभव रहे होंगे, या क्या पता उन्होने ये सब भोगा हो, लेकिन जो भी हो, ये एक ऐसी सच्चाई थी जिससे दो-चार होते-होते मे भी बची थी,

मे भी एक लड़के से अट्रॅक्ट हुई थी, लेकिन समय रहते उसकी सच्चाई मेरे सामने आ गयी और मेने उससे अपने संबंध ख़तम कर लिए…

मम्मी की बातों का मेरे उपर बहुत गहरा असर हुआ, और मन के किसी कोने में आपकी केरिंग छवि, एक मर्द की छवि में बदलने लगी, जो एक लड़की को उसके लड़की होने के एहसास से अवगत करा सकता है…

मे अवाक खुशी की बातें सुन रहा था, जब वो रुकी तो मेने पुछा – तुम्हारे उस लड़के से संबंध कहाँ तक पहुँचे थे..?

खुशी – बस मिलने मिलाने तक, लेकिन वो मुझे पाने के लिए हर संभव प्रयास में था, मे भी चाहती थी, कि हम शरीरक तौर पर एक हो जायें, बस एक उचित मौके की तलाश में थे…

लेकिन तभी मेरी एक सहेली ने उसकी सच्चाई बता दी, कि इसके कई और लड़कियों से भी संबंध हैं, और ये उन्हें ब्लॅकमेल कर रहा है…!

उसके बाद मेने उससे मिलना छोड़ दिया, चिढ़कर उसने उन गुण्डों का सहारा लिया जिनको आपने सबक सिखाया था…!

मे – क्या वो लड़का तुम्हारे कॉलेज में ही पढ़ता है…?

खुशी – नही, 12थ तक मेरे साथ था, लेकिन अब वो किसी दूसरे कॉलेज से इंजीनियरिंग कर रहा है, लेकिन उन लड़कों ने ही ये बात मुझे बताई, और ये भी कहा – कि अब वो तुम्हारे सामने कभी नही पड़ेगा…

मेने खुशी के अनारों को सहला कर कहा – तो तुम अभी तक वर्जिन ही हो..?

खुशी अपने चेहरे पर एक कामुक सी हँसी लाकर बोली – तो आपको क्या लगा कि मे ऐसे ही किसी को भी अपना ये खजाना यौंही ही लूटा……

इससे पहले की वो अपना वाक्य पूरा करती, मेने अपने होठ, उसके होठों पर चिपका दिए…..!

मेने खुशी को स्मूच करते हुए एक हाथ उसकी चुचि पर ले जाकर उसे मसल दिया.., और दूसरे हाथ से उसकी मुनिया को शॉर्ट के उपर से सहलाया…!

खुशी की आँखों में गुलाबी डोरे तैरने लगे…, उसने घूमकर मेरी तरफ मूह कर लिया और अपने आमों को मेरे सीने से रगड़ने लगी…!

खुशी मेरी गोद में मेरे दोनो तरफ को टाँगें फैलाकर बैठी थी, मेने उसके चेहरे को दोनो हथेलियों में लेकर पुछा – तो अपनी वर्जिनिटी खोने के लिए रेडी हो…!

वो – हां ! क्योंकि मुझे आपसे ज़्यादा केरिंग पार्ट्नर और नही मिल सकता..,

मेने उसके मोटे-मोटे कुल्हों को मसल्ते हुए कहा – सोच लो, तकलीफ़ होगी तुम्हें…

वो अपने होठों पर कामुक सी मुस्कान लाकर बोली – झेल लूँगी, लेकिन उसके बाद जो खुशी मिलेगी, वो ज़्यादा मायने रखती है मेरे लिए…!

मे – जैसी तुम्हारी मर्ज़ी, इतना कहकर मेने उसके टॉप को निकाल दिया…! बिना ब्रा के उसका मदमाता यौवन छल-छलाकर बाहर आगया…!

उसके 34 के बूब, एकदम सीधे तने हुए, लेशमात्र भी लटकन नही, जिनके शिखर पर एक-एक किस्मिश के दाने जैसे निपल… आअहह… क्या मस्त थे वो…

देखकर मेरा जी मचल उठा, और मेने उसके निपल को अपनी जीभ से चाट लिया…

आआहह….सस्स्सिईईई….ऊओह…और चाटो इन्हें….बहुत अच्छा लगता है मुझे…खुशी ने मादकता भरी आवाज़ में कहा….

आअहह…खुशी, तुम्हारी ये चुचियाँ वाकई ग़ज़ब की हैं, ये कहकर मेने एक को अपने मूह में भर लिया, और दूसरी को हाथ में लेकर ज़ोर्से मसल दिया…

आअहह…भैयाअ….धीरे..से म्मस्सालू…कहकर खुशी अपनी गान्ड को मेरे लंड के उभार पर रगड़ने लगी…!

खुशी ने मेरी शर्ट के बटन खोलकर उसे मेरे बदन से अलग कर दिया, और मेरे सीने के बालों को सहला कर मेरे निपल को जीभ से चाट लिया…

मेरे मूह से आहह… निकल गयी…, खुशी मेरे कशरति बदन पर हाथ फेर्कर बोली – क्या बॉडी बनाई है आपने, साले गुण्डों की क्या बिसात जो टक्कर ले पाते…

मेने उसके अनारों को मसल्ते हुए कहा – तू अब अपनी खैर मना…

वो मेरी जीन्स खोलकर उसे नीचे सरकाते हुए बोली – मुझे कोन्सि आपसे फाइट करनी है जो अपनी खैर मनाऊ…!

अच्छा देखते हैं, ये कहकर मेने उसे बेड पर धकेल दिया, और उसका शॉर्ट निकालते हुए बोला – अब जो फाइट होने वाली है वो उन गुण्डों से ज़्यादा ख़तरनाक होगी…!

खुशी की छोटी सी पैंटी, उसकी मोटी-मोटी, मक्खन जैसी चिकनी जांघों के बीच ठीक से चमक भी नही रही थी, मेने उसकी जांघों को सहलाते हुए उन्हें एक दूसरे से जुदा किया…

उसकी पैंटी थोड़ी सी गीली लग रही थी, मेने उसकी पैंटी के गीले भाग को जीभ लगा कर चाट लिया…!

 
खुशी किसी जलबीन मछली की तरह तड़प उठी, और उसने मेरे सर के बालों को अपनी मुट्ठी में जाकड़ लिया…!

मेने उसकी तरफ देखकर कहा – खुशी तेरा रस तो बड़ा टेस्टी है..., मेरी बात से वो बुरी तरह शर्मा गयी, और अपना सर दूसरी ओर घूमाकर मुस्करा उठी…!

फिर मेने उसकी इकलौती छोटी सी पैंटी को भी निकाल बाहर किया, वाउ ! क्या मुनिया थी उसकी, सफाचट, बिना बालों के एकदम चिकनी, लगता है जैसे कुच्छ समय पहले ही चिकनी की होगी…

मसल गुदगुदी सी, थोड़े से उसके होठ फूले हुए, लेकिन दोनो आपस में जुड़े हुए, दो इंच लंबी बीच की दरार…!

सच कहूँ दोस्तो ! इतनी सुंदर पुसी मेने आजतक नही देखी थी, देखकर मेरे मूह और लंड दोनो से लार टपकने लगी…!

मेने खुशी की दोनो टाँगों को चौड़ा करके एकदुसरे से जुदा किया, तबजाकर बमुश्किल उसकी फाँकें एक दूसरे से जुदा हुई, और उसकी पुसी के निचले भाग पर एक छोटा से छेद दिखाई दिया…

मेने अपनी जीभ की नोक बनाकर उस छेद को कुरेदा…., सस्स्स्सिईईई….आआहह… मुम्मय्यी…, खुशी सिसक पड़ी…,

उन्माद में आकर उसने अपनी मोटी-मोटी जांघों को भींचना चाहा, लेकिन बीच में मेरा सर था, सो उसने अपने दोनो केले के तने मेरे कंधों पर रखकर गान्ड उपर को उचका दी…,

मेने अपने दोनो हाथ उपर ले जाकर उसके दोनो उरोजो को हाथों में कस लिया और थोड़ा सख़्त हाथों से उन्हें मीँजने लगा…!

चुचियों की मींजाइ के साथ-साथ उसकी चूत की चटाई से खुशी की हालत ख़स्ता होने लगी, वो अपनी गान्ड को ज़ोर-ज़ोर से थिरका कर अपने सर के बालों को खींचने लगी…!

उसकी कोरी करारी मुनिया बेहद गीली हो चुकी थी, फिर जैसे ही मेने उसकी क्लिट जो अब थोड़ी बाहर उभर आई थी को अपने दाँतों के बीच दबा लिया,

और एक हाथ को नीचे लाकर अपनी उंगली के पोर को उसके छेद में थोड़ा अंदर तक डालकर रगड़ने लगा…!

खुशी उत्तेजना में आकर अपने सर को इधर से उधर पटाकने लगी, अब उसे अपने आप पर काबू रख पाना बहुत मुश्किल हो रहा था,

अंत में उसने मेरे सर को अपनी मोटी-मोटी जाँघो के बीच कस लिया और अपनी गान्ड को हवा में उठाकर झड़ने लगी,

एक मिनिट तक वो बदस्तूर रस छोड़ती रही, और मे उसके मीठे रस को चपर-चपर चाटने लगा, मानो कोई कुत्ता दूध पी रहा हो…

मेरा कुत्ता दूध पीते हुए ऐसी ही कुच्छ आवाज़ करता है, इसलिए लिख दिया…हहहे.

जब उसका स्खलन समाप्त हो गया, तो वो अपनी गान्ड को बिस्तेर पर लॅंड करके हाँफने लगी…!

मेने अपने होठों पर जीभ फेरते हुए उसकी तरफ देख कर कहा, ऊओउउंम्म पेट भर गया, कितना माल भर रखा है ख़ुसी…?

वो बुरी तरह से शरमा गयी, उसने बड़ी बेदर्दी से मेरे घुंघराले बालों को पकड़ कर अपने उपर खींच लिया, और मेरे चिप-चिपे होठों पर टूट पड़ी…!

मे पलट कर नीचे आगया, और उसे अपने उपर लिटाकर बोला – क्यों मेरी गुड़िया रानी, मज़ा आया…?

वो मेरे सीने में मूह छिपाकर बोली – ऊओह भैया, यू आर सो केरिंग गाइ…, मम्मी ने सच ही कहा था, आप भाग्यबस हमारे जीवन में आए हो..

ये मेने अभी तक कहानियों में या एक दो बाय्फ्रेंड में ही देखा पढ़ा था, आज सच में अनुभव करके पता चला की ब्लोवजोब होता क्या है…!

मेने उसके मोटे-मोटे चुतड़ों पर थपकी देकर कहा – ऊहह.. तो इसके बारे में पहले से ही पता है, हां…

फिर तो ये भी पता होगा, कि अब ब्लो जॉब देने की तुम्हारी बारी है…!

वो मेरे होठ चूमकर बोली – एक्सपीरियेन्स तो नही है, पर आप गाइड करते जाना, इतना कहकर उसने मेरे होठों से चूमना शुरू करते हुए नीचे की तरफ बढ़ने लगी…

अब सिसकने की मेरी बारी थी, खुशी हर वो पेन्तरा अपना रही थी, जो उसने पढ़ा और देखा था…

चूमते चाटते हुए वो मेरी कमर तक पहुँच गयी, मेरा लंड एक छोटी सी फ्रेंची के अंदर उच्छल कूद कर रहा था, हल्का सा गीलेपन का धब्बा उसपर लग चुका था…!

खुशी ने एक बार फ्रेंची के उपर से ही मेरे लौडे को नीचे से उपर की तरफ अपने हाथ से सहलाया…., फिर बड़ी कामुक अदा से अपनी उंगलियों को एलास्टिक में फँसाकर धीरे-धीरे वो उसे नीचे की तरफ सरकाने लगी…!

जैसे ही उसकी एलास्टिक मेरे लंड की सीमा से नीचे हुई, वो किसी स्प्रिंग लगे गुड्डे की तरह उच्छल कर बाहर आगया…!

कुच्छ देर तक अपने मूह पर हाथ रखे खुशी उसके रूप जाल मे फँसी उसे एकटक निहारती रही, फिर उसे अपनी मुट्ठी में कसते हुए बोली –

क्या सबके कॉक ऐसे ही होते हैं भैया…?

मेने शरारत से उसके अनारों को मसल्ते हुए कहा – क्यों तुम्हें पसंद नही आया…?

उसने उसे अपने गाल पर सटा कर उसकी गर्मी को फील करते हुए बोली – पसंद तो बहुत आया, लेकिन क्या सबके कॉक इतने ही बड़े और मोटे होते हैं…, इससे तो मेरी पुसी बुरी तरह फट जाएगी…मुझे तो इसे देखकर डर सा लगने लगा है…

मेने उसके छोटे-छोटे निप्प्लो को अपनी उंगलियों के बीच लेकर सहलाते हुए कहा – पहले तो तुम अपनी भाषा सुधारो खुशी, हिन्दी में इसे लंड कहते हैं, और तुम्हारी इसको….

पता है… आपको बताने की ज़रूरत नही है, खुशी ने मेरी बात को बीच में काटकर हँसते हुए कहा, वो सब बाद में बोलना सीख लूँगी, पहले आप मेरी बात का जबाब दो,

मेने कहा – सबके एक जैसे तो नही होते, कुच्छ बड़े-छोटे भी होते हैं…

वो – तो क्या इससे भी बड़े होते हैं…?

मे झिड़कते हुए बोला – अरे यार तुम सवाल बहुत करती हो, हो सकते हैं लेकिन मेने किसी का नही देखा… चलो अब बातें बंद करके इसे मूह लो,

 
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