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लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस) complete

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जब मेने भैया को बोला – कि अब आप मुझसे मदद ले रहे हो तो उसका क्या जबाब दोगे अपनी पत्नी और ससुर को,

तो उन्होने कहा, कि मे उससे तंग आ चुका हूँ, वो पता नही क्या-2 करती है, मेरी बात मानती नही… इसलिए अब मे उससे अलग होना चाहता हूँ…

मे किसी भी तरह से उस बुरखे वाली औरत से मिलना चाहता था, और अपने शक़ को दूर करना चाहता था, कि तभी मुझे वो रास्ता मिला जो उस औरत तक आसानी से ले जा

सकता था…

फिर मेने रेखा के गॅंग रेप, उसकी मौत, और उसके बाद का रिवेंज जो अब तक ले चुके थे, इस दौरान हुई मीटिंग, जिसमें उस बुरखे वाली औरत का सच सामने आया था.. वो सब मेने बताया…

जैसे -2 मेरी बात आगे बढ़ती जा रही थी, भाभी की आँखें चौड़ी होती जा रही थी, उन्हें मेरे खुलासे से झटके पे झटके लगते जा रहे थे…वो अपने पलक झपकाना ही भूल गयी, और मूह बाए मेरी बातों में खो गयी..

मेने आगे कहा – अब मे उस औरत को पहचान चुका हूँ भाभी…

भाभी मानो ये सुनने के लिए तैयार ही बैठी थी.. झट से बोली – कॉन है वो डायन…! बताओ लल्ला मुझे, मे उसका खून पी जाउन्गि…

मे – क्या करेंगी उसका गंदा खून पीकर, उसको तो उसके अंजाम तक मे पहुन्चाउन्गा…

वो अकेली मेरी, निशा या आपकी गुनहगार नही है… कृष्णा भैया की उससे कहीं ज़्यादा है…

भाभी चोन्क्ते हुए बोली – क्या..? बड़े देवर जी की भी… लेकिन है कॉन वो चुड़ैल…?

मे – कामिनी…..!

भाभी ये सुन कर एक दम उच्छल ही पड़ी…क्या..?????????????????

मे – हां भाभी ! उसने और उसके बाप ने हमारे साथ बहुत बड़ा धोखा किया है, वो कमीनी, शादी से पहले से ही ड्रग अडिक्ट थी, हवस की अंधी कुतिया है वो…

भाभी बहुत देर तक मूह बाए सन्नाटे की स्थिति में मुझे देखती रही, फिर आगे बोली – लेकिन उसने निशा के साथ ऐसा क्यों किया…?

मे – मेरी वजह से…! उसको पता था, कि मे निशा से बेइंतहाँ प्रेम करता हूँ… गाड़ी सीखने के बहाने उसने मुझे सिड्यूस करके इतना उत्तेजित कर दिया था, कि मे उसे चोदने को तैयार हो गया…

आपके मायके जाने के बाद उसने दो दिन मेरे साथ जम कर सेक्स किया… काम के बहाने वो भैया के साथ इसलिए ही नही गयी थी…

लेकिन जब रामा दीदी ने बताया कि वो यहाँ कोई काम में हेल्प नही करती, उल्टा और मेरे लिए काम बढ़ा देती है, महारानी की तरह हुकुम चलाती है, तो मेने उसे एक रात, इतनी बुरी तरह से रौंदा कि उसकी गान्ड फाड़के रख दी…

जब वो दर्द का उलाहना देने लगी तो लगे हाथ मेने उससे वादा कर दिया, कि अब मे उसे कभी हाथ नही लगाउन्गा…

दो दिन बाद ही उसने भैया को फोन करके बुला लिया और उनके साथ चली गयी…

बस इसी बात की खुन्नस निकालने के लिए उसने मुझे सबक सिखाने के लिए निशा को टारगेट किया…

उसके कहे अनुसार मेरे से ज़्यादा मज़ा उसे किसी से नही मिला था… सो वो भिन्ना गयी.. और ये सब किया…

मेरी बातें भाभी को झटके पे झटके दे रही थी… कुछ देर तक वो सन्नाटे जैसी स्थिति मे रही … फिर कुछ देर बाद नॉर्मल होते ही बोली…

ये बातें बड़े देवर जी को पता हैं…?

मे – नही.. इसलिए मेने आपसे वादा लिया है, किसी को ना बताने का… अब मे ऐसा कुछ करूँगा, कि वो उनकी जिंदगी से हमेशा हमेशा के लिए निकल जाए…

और किसी को इस बात की भनक भी ना लगे…जिससे भैया अपनी जिंदगी नये सिरे से शुरू कर सकें…!

भाभी सर्प्राइज़ होते हुए बोली – लल्ला ! इतनी छोटी उमर में तुम इतना कैसे सोच और कर लेते हो…? मुझे तो अभी भी विश्वास नही होता कि तुमने ये सब कर दिया है…?

मेरी नज़र में तो अभी भी वो मेरा छोटा सा मासूम सा देवर मेरे पास बैठा है, जो हर समय अपनी भाभी की बात ही सुनता और मानता था…

मे – तो क्या अब नही मानता आपकी बात..?

भाभी ने मुझे अपने कलेजे से लिपटा लिया, और मे भी किसी छोटे बच्चे की तरह उनके अंकपाश में अपना मूह देकर लिपट गया…

 
मेरे हाथ अनायास ही उनकी चुचियों पर चले गये, जो अब प्रेगॅनेन्सी की वजह से और ज़्यादा गदरा गयी थी… सो मेने धीरे से उनको सहला दिया….

सीईईईईईईईईई………..लल्ला…अभी नही… अब देखो खाने का समय हो गया है, रूचि स्कूल से आने वाली होगी… बाद में मुझे तुम वो वीडियो दिखाना, दोनो मिलकर देखेंगे..

मे उनको किस करके कमरे से बाहर चला आया, और किचेन की तरफ बढ़ गया, जहाँ निशा खाना बनाने में जुटी हुई थी….

मेने पीछे से उसे अपनी बाहों में जकड लिया और अपना लंड उसकी बाहर को निकली हुई गान्ड से सटा दिया, उसके पसीने की गंध मेरे नथुनो में घुलने लगी.

उसने अपनी गर्दन मोड़ कर मुझे देखा और बोली – राजा जी, मुझे खाना बनाने दो, रूचि और बाबूजी नाम के दो बॉम्ब कभी भी फट सकते हैं, जो हम दोनो की हवा खराब करने के लिए बहुत हैं…रात भर में जी नही भरा क्या… ?

मे – जानेमन तुमसे इतनी जल्दी जी कैसे भर सकता है, दिनो दिन हॉट होती जा रही हो…फिर उसकी गान्ड मसल्ते हुए कहा – ये देखो कितनी मस्त हो गयी है ये…

वो आँखें नचाते हुए बोली – ये सब आपकी ही देन है.. पीछे से धपा-धप इतने तगड़े धक्के पड़ते हैं, तो बेचारी बाहर को तो निकलेगी ही ना… इस बात पर हम दोनो ही हँसने लगे…

तभी रूचि के साथ भाभी भी किचन में आगयि….बाबूजी के आते ही हम सब लंच करने लगे……….

लंच के कुछ देर बाद मन्झली और छोटी चाची आगयि, भाभी की तबीयत जानने, कुछ देर वो आपस में गप्प सड़ाके लगाती रही…

मेने मन्झलि चाची से उनके हाल चाल पुछे… उन्होने कहा – तुम्हारी कृपा से सब ठीक ही चल रहा है लल्ला …

छोटी चाची का बेटा अंश भी अब बड़ा हो रहा था, वो भी रूचि के स्कूल में ही पढ़ने जाता था… मेने उसका टेस्ट लिया, तो पता लगा कि पढ़ने में दिमाग़ है उसका..

मेने चाची की तरफ इशारा किया.. अंगूठा उपर करके की अच्छा है.. तो उन्होने भी इशारे से कहा – कि है तो तुम्हारा ही खून ना…

फिर उस दिन भाभी को वीडियो दिखाने का मौका नही लगा, भैया आ गये.. और इसी में वो दिन निकल गया…

दूसरे दिन रूचि और भैया के जाने के बाद मे भाभी के पास जाकर बैठ गया…और उन्हें वो वीडियो ओपन करके चला दिया…जिसमें मालती को होटेल ले जाकर बीयर पीला कर चोदा था…

जैसे – जैसे वीडियो फॉर्वर्ड होता जा रहा था, भाभी की आँखें भी नसीली होती जा रही थी, हम दोनो ही पलंग के सिरहाने से टेक लगा कर अढ़लेटी अवस्था में एक दूसरे के बगल में पड़े वो देख रहे थे…

मेरा लंड खड़ा होकर भाभी की गान्ड से सटा पड़ा था… मेरा एक हाथ उनके रस से लबालब आमों पर पहुँच गया, और हरकत करते हुए हौले-2 सहलाने लगा…

मोबाइल मेने भाभी के हाथ में दे रखा था.. और मे खुलकर उनके अंगों से खेलने लगा…

मालती की चुदाई देखते देखते भाभी की मनोदशा बदल चुकी थी, और उनका खुद का हाथ अपनी चूत पर जा पहुँचा…

मेने उनका हाथ पकड़ते हुए कहा – मेरे होते हुए आपको ये सब करने की ज़रूरत नही है…ये कहकर मेने उनकी चूत को अपनी मुट्ठी में कस लिया…

ससिईईईईईईईई………..आआअहह………लल्लाआाआ….ज़ोर्से नही…..

पेट का साइज़ बढ़ने के कारण भाभी ने ब्रा पहनना बंद कर दिया था, मेने उनके ब्लाउस के बटन खोल कर रसीले कलमी आमों को बाहर निकल कर मसलने लगा…

गान्ड पर लंड का दबाब लगातार बढ़ता देख भाभी बोली – लल्ला थोड़ा अपने घोड़े को काबू में करो, वरना कपड़ों समेत मेरी गान्ड में घुस जाएगा…

मे – तो कपड़े निकल दो ना…

वो – मुझे वीडियो देखने दो, तुम्हें जो करना है वो करो….

भाभी की पर्मिशन मिलते ही मेने 2 मिनिट में भाभी को नंगा कर दिया, और अपने लौडे को उनकी गान्ड की दरार में रगड़ते हुए चुचियों को दबाने लगा….

आहह….भाभी ! आपकी गान्ड और चुचियाँ कितनी गदरा गयी हैं…मन करता है.. खा जाउ…

मेरी बात का जबाब देते हुए भाभी सिसक कर बोली….ससिईइ….ये सब प्रेगॅनेन्सी का असर है… अब जल्दी से कुछ करो मेरे रजाअ…. आअहह…

मेरा एक हाथ उनके फूले हुए पेट को सहलाता हुआ, जब उनकी चूत पर गया… तो वो एक दम भीग चुकी थी….

भाभी बहुत गरम हो चुकी थी… उनकी चूत से रस बूँद-2 करके टपकने लगा था…

एक तो वीडियो में चुदाई देखने से उपर से मेरी हरकतों ने उन्हें बेहद गरम कर दिया था…

अपने आप ही भाभी ने अपनी एक टाँग हवा में उठा दी, जिससे उनकी चूत का रास्ता मेरे लंड के लिए साफ हो गया…

वो भी उनकी गान्ड की दरार से रगड़ते हुए… गीली चूत के बिल में सरक गया…

जैसे ही मेरा सुपाडा उनकी चूत में फिट हुआ… भाभी की सिसकी और तेज हो गयी…

मोबाइल उनके हाथ से नीचे गिर गया… और अपना एक हाथ पीछे करके मेरे सर को अपनी ओर खींचते हुए बोली……

आअहह……..पूरा डलूऊओ…….लल्लाआाआअ….हाए..ससिईईईईईईईई…और अंदारर्र…..चोदूओ…अब…ज़ॉर्सीई…..

मेने पीछे से तेज तेज धक्के लगाना शुरू कर दिया… चूत लगातार तर और तर होती जा रही थी….

कुछ ही झटकों में भाभी ने अपना कामरस छोड़ दिया…और वो शांत पड़ गयी…

मेने अपना लंड बाहर खींच लिया और हाथ से भाभी की गीली चूत से रस लेकर उनकी गान्ड के छेद पर चुपड कर अपनी एक उंगली उनके सूरमाई सुराख में घुसेड दी…

मेरी तरफ मूह घूमकर भाभी बोली – क्या इरादे हैं…मेरे चोदु राजा…?

मे – भाभी कुछ माँगूँ तो मिलेगा..?

वो – अरे ! ये भी कोई पुच्छने की बात है, जो कुछ मेरे पास है, उस पर तुम्हारा पूरा हक़ है… बोलो क्या चाहिए…?

उनकी गान्ड दबाते हुए मेने कहा – आपकी गान्ड बहुत अच्छी लग रही है मुझे, मारने का मन कर रहा है…इतनी गुद गुदि हो गयी है ये कि बस कुछ पुछो मत…

वो – क्यों आगे से काम नही चलेगा..? थोड़ा डर लगता है, कि कहीं फट ना जाए तुम्हरे सोट जैसे लंड से…

मे – अरे कुछ नही होता भाभी… चाची को तो गान्ड मरवाने में ही ज़्यादा मज़ा आता है…

वो – क्या ! तुमने चाची की गान्ड मारली…?

मे – कब की, जब वो आपकी तरह प्रेग्नेंट थी तभी से अब तक कई बार, और तो और उनकी भाभी की भी…

वो – तुम तो बड़े छुपे रुस्तम निकले… ठीक है, कुछ तेल या क्रीम लगा लेना..

मे – अरे आप बेफिक्र रहिए…आपको पता भी नही चलेगा….अब देखना कितना मज़ा आता है आपको…

मेने एक कोल्ड क्रीम लेकिर अच्छे से भाभी की गान्ड के संकरे सुराख में उंगली डाल-डाल कर भर दी, और थोड़ी सी अपने लंड के सुपाडे पर लगा कर भाभी की बगल में लेट गया…

 
उनकी एक टाँग को थोड़ा आगे को मोड़ कर घुटने को पेट से सटा दिया…अब गान्ड का सुराख एक दम क्लियर दिखने लगा था…

लंड को होल के मूह पर रख कर हल्के से दबाया… भाभी ने अपनी गान्ड को भींच लिया…जिससे वो जितना अंदर गया था, बाहर हो गया…

लल्ला.. दुख़्ता है.. रहने दो…नही जाएगा… वो बोली..

मेने रूठते हुए कहा – ठीक है, जब आपकी मर्ज़ी ही नही है तो रहने दो, मुझे नही करना कुछ… रखो अपनी धरामशाला अपने पास….

वो – अरे ! तुम तो नाराज़ हो गये… ! मुझे दर्द हुआ इसलिए कहा मेने तो…वो अंदर नही जा रहा…

मे – आप अपनी गान्ड भींच क्यों रही हो.. उसको ऐसे खोल दो जैसे हगने बैठते हैं…

वो – ठीक है, फिरसे करो… और उन्होने अपनी गान्ड को थोड़ा ज़ोर लगा कर खोला..

मेने सॅट से लंड को अंदर कर दिया.. अब वो आसानी से चौथाई तक घुस गया…

भाभी के मूह से कराह निकल गयी….धीरे से लल्ला….जी…दर्द होता है…

मेने उनकी चुचियों को सहला कर एक बार और पुश किया…वो फिर से करही.. लेकिन अब आधा लंड गान्ड के अंदर जा चुका था…

उनकी चूत को अपने हाथ से सहलाते हुए मेने एक दो बार उसे अंदर बाहर किया…

चूत सहलाने से उनको थोड़ा राहत हुई… जिसका फ़ायदा उठा कर मेने एक अच्छा सा धक्का मार कर पूरा लंड अंदर डाल दिया….

आआईयईईईईईई…..मर गाइिईईईईईईई…माआआअ….लल्ला…बहुत जालिम हो…आहह…

मे थोड़ी देर रुक गया, और उनकी गर्दन को चूमते हुए चूत को बराबर सहला कर बोला – बस अब पूरा चला गया… अब कोई दर्द नही होगा…

उफफफ्फ़…कभी अपनी गान्ड में ऐसा सोटा लेकर देखना..तब पता चलेगा तुम्हें… चलो अब धीरे-2 चोदो….

उनकी बात सुन कर मुझे हँसी आ गयी…और फिर मेने धक्का लगा शुरू किया…कुछ देर उनको दर्द हुआ लेकिन फिर उनको भी मज़ा आने लगा.. और अपनी गान्ड को पीछे धकेल-धकेल कर चुदाई का मज़ा लेने लगी…

इस पोज़िशन में लंड पूरा जड़ तक उनकी गान्ड में समा जाता, और किसी साँप की तरह बाहर निकलता…

15-20 मिनिट की गान्ड मराई के बाद मेरा वीर्य निकल गया और मेने उसे भाभी की गान्ड में उडेल दिया,

गान्ड खुल बंद हो रही थी जिससे काफ़ी देर तक सफेद मलाई उनकी गान्ड से टपकती रही.….!

अभी मेने भाभी की गान्ड से अपना लंड निकाला ही था, कि तभी भड़ाक से कमरे का गाते खुला…सामने निशा खड़ी थी…

अंदर का नज़ारा देख कर उसके चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी… अंदर आते ही वो अपना हाथ नचाते हुए बोली – दीदी ये क्या हो रहा है…?

भाभी ने बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कहा – आँख की अंधी नैन सुख.., दिखाई नही दे रहा…?

निशा – दिखाई तो दे रहा है… लेकिन इतनी चीख पुकार, पता है आपकी चीखें रसोई तक पहुँच रही थी…, इतना तो मे अपनी सुहागरात को भी नही चीखी थी..

भाभी मेरे आधे खड़े लंड को हाथ में पकड़ हिलाते हुए बोली – एक बार ये खूँटा अपनी गान्ड में ठुकवा कर देख, आटे-दाल का भाव पता चल जाएगा …, बात करती है सुहागरात को नही चीखी थी…!

निशा हैरत के साथ बोली – क्या..? आपने गान्ड भी मरवा ली, वाउ दीदी.. यू आर ग्रेट.., फिर हँसते हुए बोली - देखाओ तो फटने के बाद कैसी लग रही है ?

और वो भाभी की गान्ड के उपर झुक कर देखने लगी… मे थोड़ा पीछे हट गया…

निशा – ओह्ह्ह्ह…दीदी ये तो सच में किसी गोल छल्ले की तरह खुल गयी है… वैसे इसे मरवाने में भी मज़ा आता है क्या..?

भाभी – मज़ा तो बहुत आता है, पर दर्द भी उतना ही होता है… एक काम कर थोड़ा बोरो प्लस लगा दे… अभी भी साली दर्द कर रही है…

वो भाभी की गान्ड से मेरा वीर्य साफ करके उसमें बोरो प्लस लगाने लगी,

मेने निशा की गान्ड में उंगली करके कहा – एक काम करो, तुम भी ट्राइ करके देख ही लो, भाभी से क्यों पूछती हो… !

वो बिदक कर दूर हटते हुए बोली – ना बाबा ना ! मुझे ऐसा कोई शौक नही है अभी, अपनी प्यारी भाभी की ही मारो…

मे – देखा भाभी ! ये है बीवी.. जिसके लिए अपने पति की इच्छा का कोई महत्व नही है…! बस इतना ही प्यार करती हो…?

निशा मूह बनाते हुए बोली – ऐसा क्यों कह रहे हैं… अगर आप की नज़र में प्यार का मतलब गान्ड मरवाना ही है तो जो जी में आए कर्लो…, मना नही करूँगी…

मेने उसके गाल पर किस करके कहा – मे तो मज़ाक कर रहा था यार ! तुम तो सीरीयस हो गयी..!

वो – वैसे ये इच्छा भी आपकी कभी ना कभी पूरी करूँगी… अभी तो आगे की ही अच्छी तरह से खुली नही है….

मेने मज़ा लेते हुए उसकी साड़ी पकड़ कर उपर करदी, और कहा – देखें कितनी खुली है….

वो झटके से पीछे को हटी, तो भाभी ने उसकी गान्ड में उंगली पेल दी…

उईईईई….माआअ…… दीदी आप भी…? आज तो ये देवेर भाभी मिलकर मेरा सत्यानाश करके ही छोड़ेंगे…

ये कह कर निशा वहाँ से भागना चाहती थी, कि मेने पीछे से उसकी कमर को लपेट लिया और उठाकर भाभी के सामने लाकर बोला ---

भाभी जल्दी से इसके कपड़े तो निकालो… अपने आपको झाँसी की रानी समझती है भेन की लॉडी…

निशा को अब पता चल चुका था, कि मेरा लॉडा अब उसकी रामप्यारी को बिना घिसे नही मानेगा…

सो वो खिल-खिलाकर हँसते हुए, झूठा विरोध जताते हुए मेरी बाहों से छूटने का नाटक करती रही…

मे उसे गोद में ही उठाए खड़ा था, थोड़ी देर में ही भाभी ने उसकी साड़ी और पेटिकोट खोल दिए, जो अब उसके पैरों से निकल कर फर्श पर पड़े धूल चाट रहे थे..

 
फिर उन्होने उसका ब्लाउस भी निकाल कर उसके पट अलग-2 कर दिए…

आगे से भाभी और पीछे से मेने उसको चूमना चाटना शुरू किया, 5 मिनिट में ही उसका शरीर भट्टी की तरह गरम हो गया… और वो आँखें बंद करके सीसीयाने लगी…

अब वो बस खड़ी-2 मज़े ले रही थी…मेने उसकी ब्रा खोल कर अलग कर दी, भाभी ने उसके निपल मरोड़ कर उसके होठ चूसने लगी..

उसकी गर्दन को चूमकर मेने उसकी पेंटी भी निकाल दी.. निशा का एक पैर पलग पर रख कर मेने पीछे से खड़े –खड़े उसकी रस से सराबोर हो चुकी मुनिया में अपना खूँटा पेल दिया…

आआईयईईईईईईईईई……….ध्ीएरीई…सीईईई…मेरे रजाअ…जीिीइ….कितना ज़ोर से डालते हो….

भाभी उसकी चुचियों को चाटने लगी…

इस तरह से दो तरफ़ा के मज़े से निशा 5 मिनिट में ही अपना रस छोड़ने लगी…

लेकिन मेने उसे छोड़ा नही और उसके दोनो हाथ पलंग पर रखवा कर उसे घोड़ी बना दिया…

भाभी ने बगल में बैठ कर मेरा लॉडा अपने हाथ में लेकर अपनी प्यारी बेहन की चूत पर रख कर मेरी गान्ड पर थप्पड़ लगाते हुए कहा …

चल मेरे घोड़े… चढ़ जा इस घोड़ी पर…

फिर क्या था…मेरे सुलेमानी धक्के फिरसे निशा की चूत पर पड़ने लगे…!

वो भाभी की चुचियों को चूस्ते हुए मस्ती से चुदने का मज़ा लेते हुए अपनी गान्ड को मेरे लंड पर पटकने लगी…!

निशा की जम कर चुदाई करके हम तीनों कुछ देर वहीं बिस्तर पर पड़े रहे…

उसके बाद तीनों बारी-बारी से फ्रेश हुए, और फिर वो दोनो लंच की तैयारी में लग गयी….

शाम को खाने की टेबल पर, हम सभी परिवारी बैठे थे.., तभी भैया ने चर्चा छेड़ दी…

भैया – बाबूजी, सुना है सरपंच के चुनाव होने वाले हैं…!

बाबूजी – सुना तो है, पर हमें क्या लेना देना… वोही पुराना वाला सरपंच ही बनेगा.. और किसी में कहाँ है इतना दम..

भैया – हां बाबूजी आप सही कह रहे है, और कोई है भी तो नही अपने गाओं में जो उसके मुकाबले खड़ा हो सके..

तभी भाभी बोली – बाबूजी ! आप ट्राइ क्यों नही करते..?

भैया – कैसी बच्चों जैसी बातें करती हो, पता है कितनी भागदौड़ और पैसा खर्चा करना पड़ता है…!

मे – वैसे गाओं और मोहल्ले की क्या राई है..? बाबूजी के पास तो सब तरह के लोग बैठने आते हैं… कभी चर्चा तो होती होगी, कि लोग क्या चाहते हैं..?

बाबूजी – लोग तो उस सरपंच से ज़्यादा खुश नही हैं…चर्चा है कि इस बार तो कोई और ही होना चाहिए…पिच्छले 15 सालों में उसने गाओं के लिए कुछ नही किया सिवाय अपना घर भरने के…

मे – फिर तो अच्छा मौका है बाबूजी… मेरी राई में एक बार चुपके से लोगों की राई पुख़्ता करके अपना विचार रख ही देना चाहिए…

बाबूजी – तुम क्या कहते हो राम बेटे…?

भैया – देख लो आप…! पहले कम से कम अपने परिवार में ही चर्चा करके देखो, चाचा लोग क्या कहते हैं.., उनका सहयोग भी तो होना चाहिए…

बाबूजी – वैसे तो वो लोग कहीं बाहर नही जाने वाले, फिर भी एक बार पुछ लेते हैं…

मे – शुभ काम में देरी क्यों.., खाना ख़तम करके बैठक में बुला लेते हैं तीनो को,… कह कर मेने बारी-2 से तीनों चाचाओं को फोन करके आधे घंटे में बैठक में आने को बोल दिया…

आधे घंटे के बाद सभी चाचा और उनके बेटे, हम सब एक साथ बैठक में जमा हुए…

जब चर्चा की तो वो सब अति-उत्साहित होकर कहने लगे…, ये तो बहुत ही अच्छा रहेगा.., अपने परिवार का मान और बढ़ेगा… हम सबकी राई है, भैया आप ज़रूर एलेक्षन लडो…

फिर डिसाइड हुआ कि एक बार चुपके से ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की राई और ले ली जाए, और ये काम हम सभी को मिलकर करना है.., ज़्यादा से ज़्यादा लोगों से मिलने का…

 
दूसरे दिन मे थोड़ा कोर्ट के काम की वजह से शहर चला गया, प्राची से मिलकर उसे सन्नी और विक्की पर नज़र रखने को बोला.. और जो भी हो वो अपडेट मुझे दे…

पूरे दिन की व्यस्तता के बाद शाम को फिर घर लौट आया, खाने के बाद फिर हम सब एक साथ बैठे… और गाओं की जानकारी हासिल की, ज़्यादातर लोग उस सरपंच से नाखुश लगे…

तो फिर फ़ैसला लिया गया कि हमें सरपंच के चुनाव के लिए आगे आना होगा…

दूसरे दिन अपने काम के साथ-2 ग्राम पंचायत के ऑफीस जाकर मेने सारी जानकारी हासिल की, पता लगा कि हमारी पंचायत के लिए इस बार सीट महिला के लिए रिज़र्व है…

घर आकर मेने ये जानकारी दी, तो सब सोच में पड़ गये…

मेने कहा, इसमें इतना सोचने की क्या बात है, नाम ही तो महिला का है, काम तो आदमियों को ही करना होगा ना… !

भैया – तो फिर किसके नाम से एलेक्षन लड़ा जाए… चाचाओं ने एक-एक करके हाथ खड़े कर दिए.. खर्चों के डर से, तो मेने भाभी का नाम सुझाया…!

भैया – लेकिन वो ऐसी हालत में कैसे खड़ी हो पाएगी..?

मे – अरे भैया.. आप चिंता ना करो, भाभी को तकलीफ़ करने की ज़रूरत नही पड़ेगी, हम सब लोग मिलकर प्रचार का काम संभाल लेंगे…!

उसके बाद सबने भाभी के नाम पर मुहर लगा दी…..!

ये मे क्या सुन रही हूँ लल्ला जी…? दूसरी सुवह भाभी ने उठते ही ये सवाल किसी तोप के गोले की तरह मेरे सामने दाग दिया..

मे – क्या हुआ..भाभी ? सुवह ही सुवह.. कोई प्राब्लम हो गयी..?

वो – रूचि के पापा कह रहे थे, कि मुझे सरपंच के लिए तुम्हारे कहने पर खड़ा कर रहे हैं…!

मे – तो इसमें प्राब्लम क्या है..? आपके खड़े होने का मतलब, खड़े ही रहना थोड़ी ना होता है भाभी…?

वो – फिर भी इस हालत में.. कैसे होगा ये सब..? और अगर कहीं हार गयी तो..?

मे – तो क्या होगा…? आप बेकार की चिंता छोड़ो, सब ठीक होगा… अब मेरी भाभी सरपंच बन कर रहेगी… !

भाभी – ये कैसे कह सकते हो तुम… ?

मे – अपने देवर पर भरोसा रखो… आप बस देखती जाओ और अपनी सेहत का ख़याल रखो बस,

ये जो आपके पेट में बच्चा पल रहा है ना, वो पूरे घर के लिए अपने साथ ढेरों खुशियाँ लाने वाला है…, अपने आने से पहले वो अपनी माँ का मान सम्मान लेकर आएगा..

मेरी बातें सुनकर भाभी की आँखों में आँसू आगये… मेने उनके आँसू पोन्छ्ते हुए कहा – क्या भाभी, ये भी कोई आँसू बहाने का समय है…?

वो – और कितनी खुशी दोगे मुझे लल्ला..जी…? मे कैसे इतनी सारी खुशियाँ झेल पाउन्गि..?

मे – आपने भी तो मुझे मेरे जीवन की सारी खुशियाँ दे डाली, अब मेरा भी तो कुछ फ़र्ज़ बनता है, अपनी भाभी को खुश करने का…

भाभी मेरे गले से लिपट कर खुशी के आँसू बहाती रही, मे उनकी पीठ सहला कर चुप करता रहा… फिर मेने एक प्यारी सी शरारत करते हुए भाभी की गान्ड मसल दी..

वो फ़ौरन अपना रोना छोड़ कर मेरे से अलग हो गयी, और गहरी नज़रों से घूरते हुए बोली – तुम्हें हर समय शरारत ही सुझति है…!

मेने हँसते हुए कहा – आपको चुप करने का इससे अच्छा तरीक़ा मुझे नही आता…

फिर वो भी मेरे सीने पर धौल जमाती हुई हँसने लगी…पास खड़ी निशा भी मुस्काराए बगैर नही रह पाई…

फिर मे फटाफट तैयार हुआ…आज मुझे शहर जाकर ढेर सारे काम करने थे..

भाभी का नॉमिनेशन फाइल करने में अभी वक़्त था… एलेक्षन दो महीने बाद था, और उससे करीब 1 महीने पहले ही नॉमिनेशन होना था…

एलेक्षन से पहले मुझे अपने कुछ इंपॉर्टेंट काम निपटाने थे…

तैयार होकर मे शहर निकल गया… ऑफीस पहुँच कर पेंडिंग काम के अपडेट्स लिए, उसके बाद प्राची को कॉल किया…..!

शाम को में भैया के बंगले की तरफ निकल गया, उनसे भाभी को सरपंच के एलेक्षन लड़ने के बारे में राई ली,

उनकी भी यही राई थी कि हमारे घर से ही कोई अब आगे गाओं के विकास की बागडोर संभाले तो अच्छा रहेगा…पुराने सरपंच ने बहुत घर भर लिया, अब और नही.

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रंग बिरंगी रोशनी में जगमगाता हुआ रेड रोज़ क्लब शहर की शान कहें या युवा पीडी में बुराइयाँ पनपाने का अड्डा…

बड़े बड़े घरों के लोग, औरतें , नौजवान, नवयुवतियाँ… सब अपने अपने ऐसे शौक जो वो अपने सार्वजनिक जीवन में पूरे नही कर पाते, उन्हें पूरा करने इस क्लब में आते हैं…

रात शुरू होते ही यहाँ की रौनक देखने लायक होती है, आम इंसान की तो यहाँ आने की औकात ही नही है…

इसकी मेंबर शिप लेना ही सबसे बड़ी बात है, फिर इसके अंदर के खर्चों का तो कहना ही क्या..?

क्लब के ग्राउंड फ्लोर में एक विशालकाय हॉल, जहाँ हर तरह के ड्रग्स का खुल कर इस्तेमाल होता था, इस समय भी लोग कश पे कश लगाए जा रहे थे,

युवक-युवतियाँ नशे के आलम में झूम रहे थे, हॉल में चारों तरफ चरस, गांजे का धुआँ फैला हुआ था, सामान्य आदमी तो यहाँ आते ही बेहोश हो जाए…

हॉल से होते हुए ही सीडीयाँ गोलाई लेते हुए फर्स्ट फ्लोर को जाती हैं, जहाँ जुए और शराब की महफिलें सजी हुई थी,

अर्धनगन लड़कियाँ, ग्राहकों को शराब सर्व करने के साथ-2 उनका मनोरंजन भी कर रही थी…

जैसे -2 रात गेहन होती जा रही थी, रंगीनियँ और नशे में झूमते लोगों की तादात हॉल में बढ़ती ही जा रही थी…

एक टेबल पर बैठे, सन्नी और उसका दोस्त विक्की ड्रग के नशे में चूर होकर झूम रहे थे.. कि तभी वहाँ एक कमसिन सी लड़की पहुँचती है…

एक्सक्यूस मी ! जैसे कहीं कोयल कूकी हो… दोनो की नज़र एक साथ उस लड़की पर पड़ती है… पिंक कलर की ढीली ढाली टीशर्ट जो उसकी नाभि तक ही थी और एक शोल्डर से नीचे,

नाभि से दो इंच नीचे से शुरू होती एक बेहद टाइनी सी स्कर्ट, जो शायद उसके झुकने पर उसकी पेंटी भी नुमाया हो जाए…

कंधों तक के खुले, थोड़े सुनहरी से उसके बाल, कजरारी बड़ी-2 आँखें जिनमें शरारत भरी हुई… हल्का गुलाबी रगत लिए उसका गोल-मटोल चेहरा, पतले -2 गुलाब की पंखुड़ियों से उसके होठ, सुतबा नाक…!

दोनो की नज़र जो एक बार उसको देखने उठी, तो फिर नीचे ही नही हुई, वो अपलक उसे देखते ही रह गये….

उस लड़की ने अपनी आँखों में जमाने भर की शरारत लिए एक बार फिरसे कहा – एक्सक्यूस मी..मिस्टर..

वो दोनो जैसे नींद से जागे हों… हड़बड़ा कर एक साथ बोले – यस प्लीज़…

लड़की – मे आइ कंपनी वित यू..!

सन्नी – व्हाई नोट… माइ प्लेषर..!..

वो उन दोनो के साथ बैठ गयी, उसके बैठते ही वो दोनो उसकी तरफ खिसक आए, और उसके मादक अंगों का जायज़ा लेते हुए उसके बदन की खुसबु से मदमस्त होने लगे…

वो लड़की भी जैसे कुछ नशे में ही थी, अपनी बोझिल आँखों को ज़बरदस्ती से खोलते हुए बोली…वुड यू प्लीज़ शेयर युवर सिग्रेट…

विक्की जो सट्टी लगा ही रहा था, उसने चरस से भरी सिग्रेट तुरंत उसकी तरफ बढ़ा दी, जो उसने अपनी पतली – 2 उंगलियों के बीच क़ैद कर ली…

 
तभी हॉल की तेज लाइट एक साथ मद्धिम हो गयी, अब वहाँ रंग बिरंगी नाचती सी रोशनी हॉल में फैलने लगी, साथ ही ऑर्केस्ट्रा पर एक मधुर ध्वनि बजने लगी…

युवक और युवतियाँ अपनी – 2 जगह से खड़े होकर उस ध्वनि पर थिरकने लगे…

तभी सन्नी ने अपना हाथ उस लड़की की तरफ बढ़ाते हुए कहा – मे आइ हॅव डॅन्स वित यू…

उस लड़की ने बड़ी अदा से अपनी बोझिल सी आँखें उसकी तरफ उठाईं, और बोली – शुवर…

वो दोनो डॅन्स फ्लोर पर जाकर डॅन्स करने लगे, कुछ देर के बाद विक्की भी उनके साथ डॅन्स करने लगा…

अब वो दोनो उस लड़की को अपने बीच में लेकर उसके आगे और पीछे उसके बदन से सट कर डॅन्स कर रहे थे,

सन्नी का एक हाथ उसके बगल में और दूसरा हाथ उसके हाथ में था, विक्की ने पीछे से अपने दोनो हाथ उसकी कमर पर रख रखे थे..!

धीरे-2 उन तीनों के बीच की दूरी कम से कम होती जा रही थी, अब वो दोनो उसके बदन से चिपक चुके थे…

उत्तेजना के कारण दोनो के लंड खड़े हो चुके थे, जो उस लड़की के आगे और पीछे के दोनो दरवाज़ों पर दस्तक दे रहे थे…

कुछ देर में ही उन दोनो के सब्र का बाँध टूटने वाला था, कि तभी सन्नी उसके कान में फुसफुसा कर बोला –

बेबी ! यहाँ बहुत घुटन सी हो रही है… कहीं खुले में चलें…

उस लड़की ने एक कातिल सी मुस्कान अपने चेहरे पर लाकर कहा- ऐज यू विश डियर…

उसने विक्की को भी इशारा कर दिया…, वो तीनों हॉल से बाहर आकर पार्किंग में खड़ी सन्नी की कार में आकर बैठ गये…!

विक्की कार ड्राइव कर रहा था, और सन्नी उस कन्या के साथ, मस्ती में व्यस्त हो गया…, वो उसकी अधनंगी जांघों को सहला कर उत्तेजित हो रहा था…,

रेंगते हुए जब उसका हाथ उसकी पैंटी पर पहुँच जाता तो वो लड़की एक कामुक स्माइल करते हुए उसके हाथ पर थप्पड़ लगा देती…

कार कुछ ही देर में शहर से निकल कर एक सिंगल रोड पर दौड़ने लगी…

शहर से निकल कर कुछ दूरी पर ही एक पार्क नुमा गार्डन में जो कि किसी पब्लिक प्रॉपर्टी के लिए नही था, ये उनके ही ग्रूप के किसी पार्ट्नर का था…

पार्क में आकर वो तीनो पेड़ों की आड़ में चले गये, जहाँ लाइट भी कम थी, वैसे तो प्राइवेट प्रॉपर्टी होने की वजह से किसी का आना तो संभव नही था,

लेकिन कोई प्रॉपर सेक्यूरिटी ना होने की वजह से कोई और भी ऐसा ही चूत का पुजारी इधर आ सकता था…

सन्नी और विक्की वहाँ लॉन की घास पर बैठ गये, फिर उसने उस लड़की का हाथ पकड़ कर अपने पास बैठने का इशारा किया…

लड़की ने अपना हाथ झटक दिया… तो वो दोनो उसका चेहरा देखने लगे… फिर विक्की बोला – क्या हुआ बेबी ? आओ बैठो, डॉन’ट वरी ! यहाँ हमारे अलावा और कोई भी नही आएगा…

लड़की ने फिर भी ना में गर्दन हिला दी… ये देख कर सन्नी का पारा एकदम से चढ़ गया… और वो भी खड़ा होकर उसका हाथ पकड़ते हुए बोला…

क्या साली रंडी की औलाद बड़ा नखरे कर रही है यहाँ आकर… वहाँ क्लब में तो कैसी चिपक रही थी…

चल चुप-चाप बैठ और मेरा लॉडा चूस… कहते ही उसने अपना पेंट और अंडरवेर एक साथ नीचे कर दिए और अपना लॉडा बाहर निकाल लिया..

उस लड़की ने ज़ोर्से उसका हाथ झटक दिया, और चटाअक्ककककककक….एक झन्नाटेदार छाँटा उसके गाल पर रसीद कर दिया…

सन्नी का गाल ही नही उसके कान में भी सर्र्र्ररर…सर्र्र्ररर… साईं..सायँ.. जैसी आवाज़ होने लगी…

गुस्से और नशे से उसकी आँखें जलने लगी, इधर अभी भी नीचे बैठा विक्की ये देख कर सकते में आगया, और सोचने लगा… कि इस साली कुतिया को क्या हो गया यहाँ आते ही…

और वो भी झपट कर खड़ा हो गया, और उस लड़की का हाथ पकड़ने के लिए झपटा…

वो दो कदम पीछे हट गयी और एक करारा सा थप्पड़ उसके गाल पर भी रसीद करते हुए किसी शेरनी की तरह गुर्राई…

रंडी होगी, तुम्हारी माँ, और बहनें… अब अगर एक कदम भी आगे बढ़ाया तो जान से हाथ धो बैठोगे… इसी के साथ ना जाने कब और कैसे उसके हाथ में रेवोल्वेर लहराता दिखाई देने लगा…!

लड़की के हाथ में रेवोल्वेर देख कर उन दोनो की गान्ड फटके हाथ में आ गयी, ऐसी हवा टाइट हुई दोनो के, … कि सन्नी तो थर-थर काँपने लगा.. नशा ना जाने कब का गायब हो चुका था….!

दोनो की गान्ड फटती देख वो लड़की ठहाका सा लगाती हुई बोली – क्यों लड़की छोड़नी है… अब क्यों नही चोदते मदर्चोदो…

तुम्हें तो बहुत शौक है ना गॅंग रेप करने का, अब करो…मेरा रेप…

उसको थोड़ा लापरवाह सा देख, विक्ककी ने डेरिंग करते हुए उसपर झपट्टा मारा…

लड़की के हाथ में दबा रेवोल्वेर उसके हाथ से छिटक कर कहीं अंधेरे में गुम हो गया… ये देख कर सन्नी का डर भी निकल गया, और वो भी उसके उपर झपट पड़ा…

लेकिन लड़की कोई इतनी लापरवाह भी नही थी, उसका रेवोल्वेर ज़रूर गिर गया था, लेकिन उसने किसी मज़े हुए फाइटर की तरह हवा में ही सन्नी को एक फ्लाइयिंग किक मारी जो उसकी पसलियों में लगी….

दर्द से कराहता हुआ वो 10 फुट दूर जाकर गिरा… लेकिन तब तक विक्की अपना काम कर चुका था, उसने लड़की को पीछे से उसकी गर्दन में लपेटा मार दिया…

अब बाज़ी विक्की के हाथ लग चुकी थी…वो निरंतर अपनी बाजू का कसाब उसकी गर्दन पर कसता जा रहा था…

लड़की अपनी पूरी ताक़त जुटा कर उससे छूटने की कोशिश करने लगी, लेकिन विकी की पकड़ उसकी गर्दन पर और कस गयी…

तब तक सन्नी भी अपने होश संभाल चुका था, और वो अब उसके आगे आकर खड़ा हो गया और अपने दाँत पीसते हुए लड़की के मुँह पर एक जोरदार घूँसा जड़ दिया…

घूँसे की चोट से उसके होठ से खून रिसने लगा… सन्नी उसके गालों को अपने हाथ में कसते हुए गुर्राया – साली, हराम्जादि… झाँसी की रानी समझती है अपने आप को…

अब देख हम तेरा क्या हाल करते है.. आज रात भर में तेरा चोद-चोद कर चूत का भोसड़ा ना बना दिया तो कहना…!

ये कह कर उसने उसकी मिनी स्कर्ट खोलकर एक तरफ उछाल दी…और उसके आगे से उसकी कमर को जकड कर विक्की से बोला – विक्की ! इसका टॉप निकाल, साली का वो हाल करेंगे कि किसी को अपनी फटी चूत दिखा भी ना सके…

विक्की ने फटाफट उसका टॉप भी निकाल कर उसी दिशा में फेंक दिया…और वो दोनो उसके नाज़ुक अंगों के साथ खेलने लगे…

वो उन दोनो की पकड़ से छूटने के लिए कसमसाती रही… लेकिन अपने को आज़ाद करने में असमर्थ रही…

इतना सब कुछ होने के बाद भी उस लड़की के मुँह से एक चीख तक नही निकली जैसे आम तौर लड़कियाँ अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए मदद माँगने के लिए चीखती हैं….!

सन्नी के हाथ अब उसकी ब्रा में क़ैद टेनिस की बॉल के साइज़ की गोल-गोल चुचियों पर पहुँच चुके थे, जिन्हें वो बड़ी बेदर्दी से मसल्ने लगा…

सन्नी ने अपना हाथ उसकी पैंटी में सरका दिया, और उसकी छोटी सी चूत को अपनी मुट्ठी में ज़ोर्से भींच दिया…

लड़की की दर्द भरी कराह निकल गयी.., अभी वो उसके साथ कुछ और ज़्याददती करते… कि जिधर उन्होने उस लड़की के कपड़े फेंके थे… उधर से एक आवाज़ आई…!

दोस्तो ! मे कुछ मदद करूँ…आप लोगों की…?

एक साथ वो दोनो ऐसे उछल पड़े, मानो गरम तवे पर पैर पड़ गया हो…और उनकी नज़र आवाज़ की दिशा में घूम गयी…

कुछ दूरी पर खड़े शख्स पर नज़र पड़ते ही वो चोंक पड़े और दोनो के मुँह से एक साथ निकल पड़ा – जोसेफ तुम…और यहाँ, इस वक़्त…

वो वहीं खड़ा खड़ा मुस्कराता हुआ बोला – हां ! मे ! यहाँ ! क्यों मुझे देख कर इतनी हैरत क्यों हुई..?

या ये सोच कर घबरा रहे हो कि अब ये तीन में शेयर करनी पड़ेगी…

वैसे तुम तो एक लड़की को चार-चार के साथ भी शेयर कर चुके हो तो फिर मेरे आने से तो कोई प्राब्लम नही होनी चाहिए तुम लोगों को…इतना कहते – 2 वो उनके बेहद करीब पहुँच गया…

वो उसकी बात सुनकर एक बार फिर चोंक गये, फिर सन्नी बोला – क्या मतलब…हमने कब चार के साथ किसी लड़की को शेयर किया है..?

वो – भूल गये..! मेरा नाम जोसेफ है, और ये मेरी दोस्त रूबी… हम एक तरह से बंटी और बबली हैं… जिस शहर में जाते हैं, वहाँ की सारी अच्छी-बुरी खबरों का पता लगा ही लेते हैं..

इतना सुनते ही वो दोनो फिर उच्छल पड़े… फिर सन्नी बोला – क्या, ये तुम्हारी दोस्त रूबी है..?

वो – हां ! जब मे कह रहा हूँ तो फिर क्या गुंजाइश बचती है…

विक्की – लेकिन इसने क्लब में आगे से हमारे साथ फ्लर्ट किया और हम इसे यहाँ ले आए इसी की मर्ज़ी से, अब यहाँ आकर इसने अपने तेवर बदल लिए… ऐसा क्यों किया इसने..?

वो – क्योंकि हम तुम्हें यहाँ क्लब से निकाल कर एकांत में लाना चाहते थे !

सन्नी – क्यों ? तुम ऐसा क्यों चाहते थे…?

वो – तुम्हें तुम्हारे दो दोस्तों के पास पहुँचाने के लिए…! वो बेचारे तुम दोनो के बिना वहाँ जहन्नुम में बहुत दुखी हैं …

वो दोनो उसकी बात सुन कर सकते में आ गये… कभी वो उस शख्स का मुँह देखते तो कभी उस लड़की का.. जिसके चेहरे पर अब एक अजीब सी मुस्कराहट थी…

फिर कुछ हिम्मत करके सन्नी बोला – इसका मतलब तुमने ही उन दोनो को मारा था ?

वो – बेशक ! और अब तुम दोनो की बारी है… तो बताओ पहले कॉन जाना चाहेगा उन दोनो के पास…?

विक्की – लेकिन तुम हमें मारना क्यों चाहते हो..?

तब तक विक्की की पकड़ उसके गले पर ढीली पड़ चुकी थी, सो उसने अपनी एल्बो का भरपूर बार उसके पेट पर किया…

नतीजा ! विक्की के हाथ से उसका गला छूट गया और दर्द के मारे वो पीछे की तरफ दोहरा हो गया…

 
अपने आपको आज़ाद कराकर वो बोली – क्योंकि तुम चारों मेरी बेहन की मौत के ज़िम्मेदार हो… उसके गुनहगार हो तुम लोग…

वो दोनो एक बार फिर चोंक पड़े…. और बोले – तुम्हारी बेहन..?

लड़की – हाँ हराम्जादो..! मेरी बेहन रेखा ! जिसका तुम लोगों ने मिलकर बलात्कार किया था…उसे जानवरों की तरह नोचा…, खसोटा…

सन्नी – ओह ! तो तुम रेखा की बेहन हो… फिर उस शख्स से बोला – लेकिन तुम इसकी मदद क्यों कर रहे.. हो…?

तुम्हारा रेखा के मामले से क्या लेना देना…? तुम तो असलम के दोस्त थे, उसको पोलीस से बचाया था तुमने…!

सन्नी के मुँह से ये बातें सुन कर उस शख्स के चेहरे पर एक अर्थपूर्ण मुस्कान आ गयी…,

उसने अपनी नीली-नीली आँखों से कॉंटॅक्ट लेन्स निकाले और फिर जैसे ही अपनी फ्रेंच्कट दाढ़ी चेहरे से अलग की…,

अब उनके सामने जो शख्स खड़ा था उसे देख कर तो वो दोनो इतनी बुरी तरह से उछले मानो उनके पैरों पर हज़ारों बिच्छुओं ने एक साथ डॅंक मार दिए हों, दोनो के मुँह से लगभग एक ही साथ निकला…..तूमम्म्ममम……….!

हां हराम्जादो मे..! भृष्ट तन्त्र की वजह से रेखा को कोर्ट से तो इंसाफ़ दिला नही पाया, लेकिन कोर्ट के बाहर से ही सही… और ये रेखा की छोटी बेहन प्राची है…

ये मेरी ही चाल थी, जिसमें गुंजन को फँसाकर पोलीस का मुखबिर बनाया…और फिर असलम को उसकी असलियत बताकर उन दोनो को एक दूसरे के खिलाफ कर दिया…

असलम ने उसे बहाने से अकेले में बुलाकर गुंजन को गोली मार्दि, और मेने असलम को… अब तुम दोनो की बारी है…उसके बाद रेखा का इंसाफ़ पूरा होगा, और उसकी आत्मा को शांति मिल जाएगी..

तभी विक्की आगे बढ़ते हुए बोला- ये तेरा मंसूबा कभी पूरा नही होगा हराम्जादे….

अपने हाथ में दबी रेवोल्वेर की नाल उनके खुले हुए थोबडे में डालते हुए मेने कहा – हिलना भी मत मदर्चोद, वरना समय से पहले परमात्मा को प्यारे हो जाओगे प्यारे विक्की डोनर…

मेने प्राची को उसके कपड़े थमा दिए और उसको अपनी गन उठाने को कहा, जो पास में ही पड़ी थी…

उसने पलक झपकते ही अपनी गन उठा ली, और अपने कपड़े पहन लिए…,

मेने प्राची से कहा – तुम इन दोनो को कवर करो, मे एक मिनट में आया..

वो उन दोनो को कवर करते हुए बोली – आप इनकी फिकर मत करो, मे इन्हें संभाल लूँगी…

मे लपक कर झाड़ियों की तरफ गया जहाँ रूबिया को बाँध कर डाला हुआ था, उसे पकड़ कर उनके सामने ले आया, उसके मुँह से टेप हटते ही वो रोने गिड गिडाने लगी…!

प्राची ने उसे देखते ही एक जोरदार तमाचा उसके थोबडे पर जड़ दिया, फिर उसके मुँह पर थूक कर भभक्ते हुए स्वर में बोली – साली कुतिया, रंडी तू भी मेरी बेहन की उतनी ही बड़ी गुनहगार है, जीतने कि ये दोनो सुअर…

मेने उन दोनो को कहा – तुम चिंता मत करो, मरने के बाद भी तुम दोनो अपनी माशुका के साथ खूब ऐश करना…ये भी तुम्हारे साथ ही रहेगी…

फिर दोनो के सिरों पर गन रखते हुए एक-2 ब्राउन शुगर की थैली उन तीनों को पकड़ा दी और कहा…

अगर जिंदा रहना चाहते हो, तो इसे खाओ…जो पहले ख़तम कर देगा, वो यहाँ से बचके जा सकता है…

वो तीनों गिडगिडाने लगे … लेकिन मे उन हराम्जदो पर कतई रहम करने के मूड में नही था, अपनी गन भी प्राची को थमायी, और उन दोनो पर निशाना लगाए रखने को कहा…

फिर उन दोनो के भी पीछे को हाथ बाँध दिए उनके ही उतरे हुए कपड़ों से, और जबर्जस्त उनके मुँह में ब्राउन शुगर ठूँसने लगा…

वो लाख कोशिश करते रहे… लेकिन मेने एक-एक थैली तीनों के पेट में पहुँचा ही दी… वो पड़े-2 गिडगिडाते रहे, पानी माँगते रहे, रहम की भीख माँगते रहे…

लेकिन अब ना तो उन्हें रहम मिलने वाला था, और ना ही मिला…. वो ड्रग की अधिक मात्रा पेट में पहुँच जाने की वजह से एडीया रगड़-2 कर दम तोड़ने लगे…

हमें कोई जल्दी नही थी, वहीं पास में पड़ी एक ब्रेंच पर बैठकर उनका दर्दनाक अंत होते देखते रहे…

जब तक उनकी साँसें बंद नही हो गयी, हम वहीं जमे रहे…, जब उन तीनों की जीवन लीला समाप्त हो गयी, तीनों के हाथ खोले और फिर आराम से एक दूसरे का हाथ थामे वहाँ से लौट लिए….
 
दूसरे दिन पूरे शहर में तहलका मचा हुआ था… दोनो ही शहर की बड़ी-बड़ी हस्तियों की औलादे थी…

पोस्टमॉर्टम में ड्रग की ज़्यादा मात्रा लेने से साँस अटक जाने से अटॅक आने के कारण मौत का कारण बताया गया…

क्लब में उनकी मौजूदगी के सबूत मिले… अब चूँकि क्लब भी उन जैसे ही किसी बड़ी हस्ती का था, तो उसको क्या आँच आनी थी…और वैसे भी ये हादसा क्लब के बाहर हुआ था….,

पोलीस ने मामले को ड्रग से हुई मौत का मामला बताकर केस क्लोज़ कर दिया… लेकिन कमिशनर के गले से बात नही उतर पा रही थी…!

उसका पॉलिसिया दिमाग़ कह रहा था, कि ये घटना इतनी साधारण नही है, जितना दिखाया गया है…

कुछ दिन तो वो अपने बेटे की मौत के गम में डूबा रहा लेकिन जल्दी ही वो इसकी तह तक पहुँचने के लिए हाथ पैर मारने लगा….!

लेकिन अब पोलीस डिपार्टमेंट में उसकी इज़्ज़त दो कौड़ी की भी नही थी, सो क़ानूनी तौर पर उसके हाथ कुछ लगने वाला नही था…!

अपने गॅंग के लोगों को उसने इसकी छान्बीन के लिए लगाया, लेकिन काफ़ी मसक्कत के बाद भी कोई क्लू उसके हाथ नही लगा…!

………………………………………….

इधर भाभी का सरपंच के चुनाव के लिए नॉमिनेशन फाइल कर दिया गया…एसपी भैया भी कभी-कभार आकर गाओं के लोगों से मिल लिया करते थे, जिसका अपना अलग ही प्रभाव पड़ा…

पुराना सरपंच बुरी तरह भिन्नाया हुआ था, उसने कभी सपने में भी नही सोचा था, कि उसके मुक़ाबले में भी कोई मैदान में उतर सकता है…

उसने लोगों को भरमाने की पूरी कोशिश शुरू करदी… ग़रीबों में पैसे बाँटना, दारू पिलाना, दावतें देना डेली बेसिस पर शुरू कर दिया…

दलित और ग़रीब लोग इससे प्रभावित होना शुरू हो गये, जिनकी गाओं में तादात भी बहुत थी, कुछ तो पहले से ही सरपंच के इशारों पर नाचते थे….

हम दिन भर लोगों से मिलने मिलने में व्यस्त रहते, और शाम को सब लोग इकट्ठा होकर हालातों का जायज़ा लेते थे,

कुछ गाओं मोहल्ले के खास लोग भी हमारे साथ कंधे से कंधा मिलकर प्रचार में जुटे हुए थे…

एक दो बार भाभी को भी हमने गाओं में रिक्शे में बिठाकर घुमा दिया, उनकी प्रेग्नेन्सी की हालत में भी लोगों से मिलने से ख़ासकर महिलाओं पर ख़ासा प्रभाव पड़ा…

आज भी हम सब एक साथ बैठे, चर्चा में लगे हुए थे, कि तभी हमारे साथ के एक रज्जु चाचा, जो मनझले चाचा के बहुत करीबी हैं, बोले –

शंकेर भैया… दलितों के वोट सारे के सारे अपने हाथ से जाते हुए दिखाई दे रहे हैं…अगर वो चले गये तो हमारा जीतना नामुमकिन सा ही हो जाएगा…

मन्झले चाचा – ये क्या बोल रहा है रज्जु ! उन सबने तो हमसे वादा किया है, कि वोट हमें ही देंगे… फिर ये कैसे हो सकता है…?

रज्जु – अरे भाई राकेश, तुम्हें पता नही है, ये क़ौम ऐसी होती है, कि इन्हें खिलाते-पिलाते रहो उसी की बजाते हैं…

तुमसे वादा ज़रूर किया है, लेकिन अंदर की खबर है कि इन्हें सरपंच ने खरीद लिया है…और ये सब मिलकर वोट उसी को देने वाले हैं…

मे – वैसे रज्जु चाचा, इनका कोई एक मुखिया तो होगा जिसकी ये बात मानते होंगे…

रज्जु – है ना ! रामदुलारी… बांके की बीवी, वही है सबकी मुखिया… और वो सरपंच की खासम खास है, उसी ने सबको एकजुट कर रखा है…वो जहाँ कहेगी सब के सब वहीं वोट देंगे…

मे – बांके तो वही है ना जो बड़े भैया के साथ स्कूल में पढ़ता था…

भैया – हां ! पर उसकी साले की अपनी बीवी के आगे एक नही चलती…बहुत चालू पुर्जा है वो औरत…दलितों के मोहल्ले में सबसे ज़्यादा पढ़ी लिखी और होशियार औरत है…

मे – चलो आप लोग सभी अपने वोटों पर नज़र बनाए रखिए, थोड़ी बहुत दावत वैगरह का इंतेज़ाम भी करते रहिए..,

ये भी ज़रूरी है अपने वोटों को बनाए रखने के लिए.., मे उस रामदुलारी का कुछ करता हूँ.

भैया – क्या करेगा तू ?, देखना कुछ ऐसा वैसा ना हो, कि चुनाव के समय कोई गड़बड़ हो जाए…??

मे – कोई क़ानूनी दाव-पेंच लगाता हूँ, आप चिंता मत करिए…कुछ ना कुछ तो रास्ता निकल ही आएगा…

दूसरे दिन सब लोग अपने-2 काम में जुट गये, हमारे गाओं की पंचायत में और दो छोटे-2 गाओं भी लगे थे,

उनमें से भी एक-एक कॅंडिडेट खड़ा था, लेकिन उनका ज़्यादा प्रभाव उनके अपने गाँव में भी नही था…!

मेने सोनू-मोनू को उसके पीछे लगा दिया अपने तरीक़े से रामदुलारी की कुंडली निकालने के लिए…

रामदुलारी 35 वर्षीया, भरे बदन और हल्के सांवला रंग, मध्यम कद काठी की, अच्छे नैन नक्श वाली महिला थी.. जो अब तक तीन बच्चे अपने भोसड़े से निकाल चुकी थी…

बूढ़े सरपंच से उसके नाजायज़ ताल्लुक़ात भी थे, सुनने में आया कि उनमें से एक दो बच्चा तो सरपंच का भी हो सकता है…

दलितों का टोला गाओं के एक तरफ जहाँ से शहर को जाने वाली सड़क गाओं से बाहर निकलती है वहीं सड़क के दोनो तरफ बसा था…

सुबह- 2 मे कार लेकर शहर की तरफ निकला, सूचना के मुताबिक रामदुलारी रोड के किनारे खड़ी बस का इंतेज़ार कर रही थी…

मेने उसके पास जाकर गाड़ी रोकी, और शीशा नीचे करके उसे पुकारा – अरे दुलारी भौजी ! कैसे खड़ी हो.. सुबह – 2 सड़क पर..?

वो मेरी गाड़ी के पास आई, और झुक कर मेरे से बात करने लगी… उसके बड़े – 2 चुचे उसकी चोली से बाहर झाँकने लगे…वाह क्या मोटे – 2 खरबूजे थे उसके.. देख कर ही लंड अंगड़ाई लेने लगा…

 
दुलारी – पंडित जी ! शहर की ओर जा रहे हो क्या ?

मे – हां ! जा तो रहा हूँ.. आपको कोई काम था शहर में…?

वो – हां ! मे भी शहर जा रही थी… कुछ कोर्ट कचहरी का काम था…, मुझे अपने साथ ले चलोगे…?

मे – हां ! हां ! क्यों नही… वैसे भी तो अकेला की हूँ आ जाओ गाड़ी मे…

वो – अरे इसका दरवाजा तो खोलो… कैसे खोलते हैं, मुझे तो आता नही…

मेने अंदर से हाथ लंबा करके साइड वाला डोर खोला, वो अंदर आकर मेरे बराबर वाली सीट पर बैठ गयी…और गेट को धीरे से बंद कर दिया…

मेने कहा – भौजी, अभी सही से दरवाजा बंद नही हुआ है…ज़रा फिर से करो..

वो – अरे आप ही करो ! मेरे ते ना होगा…

मेने उसके सामने से अपना हाथ लंबा किया, जानबूझकर अपने बाजू को उसके मोटे –मोटे खरबूजों के उपर से रगड़ दिया…,

गेट को खोलते हुए अपनी एल्बो को उसकी चुचियों पर थोड़ा और दबा दिया, फिर दोबारा से गेट बंद करके अपने पूरे हाथ को फिरसे उसके पपीतों पर रगड़ता हुआ वापस लाया…

वो मेरी इस हरकत पर मंद -मंद मुस्कुराती हुई मेरी ओर देखने लगी…

गेट बंद करके मेने एक प्यारी सी स्माइल उसकी तरफ देते हुए कहा – चलें भौजी.…!

अब चूँकि एलेक्षन का समय था, तो बातें भी उसी से संबंधित होनी थी… पहले तो मेने उसके शहर में क्या काम है उसके बारे में पुछा, जो मुझे पहले से ही पता था…

फिर बात को मेने चुनाव की तरफ मोड दिया…और बोला…

तो भौजी… इस बार किसे सरपंच बनवा रही हो…?

वो – अरे देवेर जी…हम किसे बनबाएँगे… छोटे लोग हैं, हमारी औकात ही कितनी है… और वैसे भी आज के जमाने में कोई किसी से बँधा हुआ तो है नही…जिसकी जहाँ मर्ज़ी होगी वहाँ वोट डालेगा…

मे – क्या बात करती हो भौजी… आपका पूरा टोला तो आपकी बात टालता ही नही, जहाँ आप कहोगी वहीं वोट देगा.. ऐसा मेने सुना है…!

वो – किसी ने ग़लत बताया है आपको… भला आज के जमाने में कॉन किसकी बात मानता है…

मे तो चाहती हूँ, कि इस बार सर्पन्चि आपकी तरफ आजाए… ये कहते हुए वो विंडो से बाहर देखने लगी….!

मे – अगर आप ऐसा चाहती हैं.. तो ज़रूर आजाएगी… और एक बार सर्पन्चि हमारे घर में आ गयी, तब देखना गाओं का कैसा विकास होता है…ख़ासकर आप लोगों का, जो अब तक नही हो पाया है…

मेरी बात सुनकर वो मेरी तरफ देखने लगी… मेने उसकी आँखों में देखते हुए कहा…

वैसे भौजी ! बुरा ना मानो तो एक बात बोलूं…? वो बोली – ऐसी क्या बात है जो मे बुरा मानूँगी…? कहिए तो सही..!

मे – आप अभी भी लगती नही कि 3-3 बच्चों की माँ होगी…! अभी भी आप एकदम कड़क माल दिखती हो…ये कह कर मेने एक तिर्छि नज़र उस पर डाली..उसका रिक्षन जानने के लिए…

मेरी बात सुन कर उसके गालों पर लाली आ गयी, फिर थोड़ा मुस्कराते हुए बोली –

क्यों मज़ाक करते हो लरिका जी, अब भला मुझमें वो बात कहाँ, जो आप जैसा सजीला नौजवान मेरी तरफ नज़र डाले…!

मे – अरे क्या बात करती हो भौजी ! तुम नज़र डालने की बात करती हो…मे तो कहता हूँ, आप एक इशारा करो, मेरे जैसे सेकड़ों लाइन में खड़े होंगे…!

वो हँसते हुए बोले – बस बस…अब इतना भी मत चढ़ाओ मुझे, वैसे तुम उस लाइन में खड़े होते क्या..?

मे – अब आप खड़ा करना चाहो तो हो भी सकते हैं… मेरी तरफ से खुला इशारा पाकर वो मेरी तरफ गहरी नज़र से देखने लगी… फिर कुछ सोच कर बोली…

आपको देख कर लगता तो नही, कि आप भी ऐसे होगे…?

मे – कैसे नही होगे..?

वो – दिल फेंक टाइप.. वो भी मेरे जैसी अधेड़ औरत को देख कर लाइन मारने वालों में से तो लगते नही…!

मे – आप तो बुरा मान गयी भौजी.. मेने तो जो सच है वही कहा है.. अब आपको ये मेरा लाइन मारना लग रहा है तो आपकी मर्ज़ी…

वो – नही नही ! मेरा मतलब वो नही था, मे तो आपको बहुत सीधा-साधा लरिका समझ रही थी… इसलिए कहा…

मे – तो सीधे-साधे लड़कों की क्या इच्छाए नही होती…?

मेरी बात का इन्स्टेंट असर हुआ, उसने अपना हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया और उसे सहलाते हुए बोली –

अरे पंडित जी ! आप जैसा नौजवान किसी भी औरत को मिल जाए, उससे ज़्यादा उसका सौभाग्य और क्या हो सकता है…, हम ठहरे नीच जात जो ऐसा सपने में भी नही सोच सकते..!

मे – जात पाँत से चाहत का क्या लेना देना… वो तो किसी से भी हो सकती है…!

मेरी बात सुनकर वो बस हूंम्म्म.. ही बोली…

बातों – 2 में समय का पता ही नही चला, कि कब हम कोर्ट पहुँच गये… वो गाड़ी से उतर कर अपने वकील की तरफ जाने लगी.. तो मेने उससे कहा…कहाँ जा रही हो भौजी…?

मेरी बात सुनकर वो पलटी और बोली – अपने वकील के पास, एक ज़मीन का विवाद चल रहा है, उसी के लिए उन्होने नोटीस भेजा था..

मे – क्या नाम है आपके वकील का..? तो उसने उसका नाम बताया…!

मेने कहा – आप चलो मेरे साथ ऑफीस में बैठते हैं, वो वहीं आ जाएगा..

वो – क्या ? वो आपके… आपके पास ही आजाएँगे..?

मे – हां ! आओ.. और मे उसे लेकर अपने ऑफीस चला गया… मेने उसकी गुदगुदी गान्ड सहला कर सोफे पर बैठने के लिए कहा…

वो हिचकिचाती हुई, मुस्कुरा कर सोफे पर बैठ गयी…

 
मेने उसके लॉयर को फोन लगाया, उसने 10 मिनिट में आने का बोला… तब तक मेने उसे एक ठंडा मॅंगाकर पिलाया… कुछ इधर-उधर की बातें की.. तब तक उसका वकील भी आगया…

मेने उसको कहा कि ये मेरी पहचान वाली हैं, इन्हें क्यों परेशान करवा रहे हो वकील साब..,

उसने कहा, अरे शर्मा जी, मुझे क्या पता था कि ये आपकी पहचान वाली हैं, अब जब आपने बता दिया तो मे कोर्ट से जल्दी ही इनके केस का फ़ैसला कराने की कोशिश करूँगा.. आप चिंता मत करो…!

यहाँ तक कि उसने आज की फीस भी दुलारी से लेने के लिए मना कर दिया, जिसे देख कर वो बहुत इंप्रेस होगयि…

कुछ इधर-उधर की बातें करने के बाद उसका वकील चला गया… तब दुलारी बोली-

धन्यवाद पंडित जी आपकी वजह से मेरा काम आसान हो गया.. 5 साल से इस केस के चक्कर में फँसे पड़े हैं…!

मेने कहा – एक अंदर की बात बताऊ भौजी… किसी से कहना मत.. ये केस भी जान बूझकर सरपंच ने ही लगवाया है आप लोगों पर, जिससे वो आपकी मदद करने के बहाने आप लोगों को दबा कर रख सके और वोट हासिल करता रहे…

वो एक दम से चोंक पड़ी.. और बोली – क्या बात कर रहे हैं आप ? वो ऐसा कर ही नही सकते…

मे उसकी बगल में बैठ गया और उसकी मांसल जाँघ पर हाथ रख कर बोला –

आपको भरोसा नही हो रहा मेरी बात पर, चलो कोई बात नही ! किसी दिन सामने वाली पार्टी से ही कहलावा दिया तब तो मनोगी…

खैर जो भी हो.. अब आपका ये केस जल्दी ही सुलट जाएगा…कह कर मेने उसकी जाँघ सहला दी.. वो गरम होने लगी…और उसने भी अपना हाथ मेरे लंड के उपर रख दिया…

उसे अपने हाथ से मसल्ते हुए बोली – पंडित जी थोड़ा अपने नाग देवता के दर्शन तो कराओ…

मेने अपनी ज़िप खोल दी और कहा – खाली दर्शन ही करने हैं तो पट खोल दिए हैं, कर लो..

उसने फ़ौरन हाथ डाल कर मेरे आधे खड़े लंड को बाहर निकाल लिया… वो मेरे गोरे आधे खड़े लंड को ही देख कर मंत्रमुग्ध हो गयी.. और अपने मुँह पर हाथ रख कर बोली …

हाए राम…कितना सुंदर और मस्त लाल सुर्ख लंड है तुम्हारा…ये कहकर वो उसे सहलाने लगी, वो जल्दी ही अपनी मस्ती में आकर फुफ्कारने लगा…

दुलारी पूरे खड़े लंड को देखते ही उसके सामने सोफे से नीचे बैठ गयी, और उसे पूचकार कर मेरी तरफ देख कर बोली – इसे एक बार मुझे दोगे …?

मेने कहा – फिलहाल इसका समय नही है, बस थोड़ा सा चुस्कर देखलो, ये वादा रहा.. जिस्दिन सरपंच के चुनाव का नतीजा आएगा, उस दिन ये आपको मिल जाएगा..

फिर पूरे दिन जो करना चाहो, इसके साथ कर लेना…, वो मुस्कुराती हुई मेरा लंड चूसने लगी…

कुछ देर चूस कर उसकी चूत पानी छोड़ने लगी.., वो मिन्नतें करते हुए बोली – बस थोड़ी देर इसे मे अपनी चूत में डालकर देख लूँ…, बस 5 मिनिट..

मे – नही भौजी ! मेरा थोड़ी देर में कुछ नही होता… मुझे कम से कम आधा घंटा लगता है.. तो वो अपने मुँह पर हाथ कर बोली – क्या ? आधा घंटा, हाए री मैया मोरी….इतनी देर भी कोई भला चोद सकता है…

मे – हां मे तो इतनी ही देर लगाता हूँ, अब और लोग कितनी देर में करते हैं, मुझे पता नही…

वो अपनी गीली चूत को लहँगे से पोन्छ्ते हुए बोली – चलो ठीक है फिर, आज तो मे सबर कर लेती हूँ, लेकिन उस दिन नही छोड़ूँगी इसे.. और अब आप बेफिकर हो जाओ, मेरे टोला का एक – एक वोट आपकी भाभी को मिलेगा…

मेरे टोला का ही नही, अपने तीनों गाओं के हमारी जात के वोट तुम्हारे लिए ही जाएँगे…

अब मे इस हरामी मदर्चोद सरपंच को दिखाउन्गी, कि कैसे ग़रीबों को बहला फुसलाकर अपना उल्लू सीधा करता है…

मे – लेकिन भौजी याद रखना, अभी ये बातें उसको पता नही चलनी चाहिए, एक बार उसके हाथ से सत्ता जाने दो…,

उसके बाद में तुम्हारे सामने केस करने वाले को आमने-सामने बिठा कर यहीं इस केस को रफ़ा दफ़ा करवा दूँगा…तब तक आप चुप-चाप रहना…

फिर मेने उसको चाय नाश्ता करवाया, और उसे लेकर वापस गाओं की तरफ चल दिया……

वोट डिब्बों में बंद हो चुके थे…, कयास लगाए जेया रहे थे, कि फिर से सर्पन्चि पुरानी जगह ही गयी…, हमारे लोगों को भी भरोसा नही था, और सभी नीरस से हुए पड़े थे…

भाभी ने मुझसे कहा – लल्ला हो गयी तुम्हारे मन की, बनवा दिया भाभी को सरपंच…! खमखा समय और पैसा बरवाद करवा दिया ना…!

मे – आप सिर्फ़ अपने और अपने होने वाले बच्चे की सेहत पर ध्यान दो… क्योंकि मे कुछ बोलूँगा, तो भी आपको विश्वास नही आएगा…!

वो – तुम्हें अब भी लगता है, कि हम जीत जाएँगे..? जबकि सब कुछ तो सामने आ चुका है, सब लोग आस छोड़ चुके हैं…!

मेने हँसते हुए कहा – आपको आज ही प्रमाण पत्र चाहिए क्या…? लिख कर दूं आपको कि आप सरपंच बन रहीं हैं…!

वो – तुम्हारे इतने विश्वास का कारण क्या है… सारे दलितों और ग़रीबों के वोट तो उसने खरीद लिए हैं…

मे – ऐसा नही होता है भाभी, खिलाना-पिलाना अलग बात होती है, कोई किसी को भला कैसे खरीद सकता है… हां दिखता ज़रूर है कि लोग उसके साथ उठ-बैठ रहे थे, खा-पी रहे थे, तो हो सकता है वोट उसी को दिए हों…

लेकिन लोग भी अब समझदार और होशियार हैं, वो भी अपने भविष्य के बारे में सोचने समझने लगे हैं…! आप देखना वो हमसे कोसों दूर होगा…!

भाभी को फिर भी विषवास नही हुआ, और फीकी सी हँसी हँसते हुए बोली – तुम कह रहे हो तो मान लेती हूँ…फिर वो ग़ालिब का मशहूर शेर सुनाने लगी…!

दिल को बहलाने के लिए ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है,

कि हम ने कभी आपको चाहा नहीं,

अब सन्नाटे की गूँज हम से पूछती है,

‘बता तेरा हम-सफ़र कहाँ है?’

हाहहाहा…..वाह भाभी वाह ! आप तो शेरो-शायरी भी कर लेती हैं… यू रियली आर मल्टी-तेलेंटेड वुमन…. हॅट्स-ऑफ…

मेरी बात पर वो भी हँसने लगी… तो मेने उनके डिंपल्स को चूम लिया……!

 
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