S
StoryPublisher
Guest
आज चुनाव का नतीजा आ रहा था, हम सभी काउंटिंग प्लेस पर मौजूद थे, जो कि कस्बे के ब्लॉक पर हो रही थी…
पहले ही चरण से भाभी सरपट दौड़ रही थी, आधी गिनती तक ही फ़ैसला एक तरफ़ा हो गया.. सरपंच को टोटल में से सिर्फ़ 15% वोट ही मिले थे, वाकी दो और कॉंडिडेट्स थे, उनको भी कुछ वोट तो मिलने ही थे…
भारी बहुमत से भाभी सरपंच बन गयी, सभी लोग अचंभे में थे… शाम को घर आकर जश्न मनाया गया… जिसमें हमने पूर्व सरपंच को भी बुलाया…
वो आया भी, और उसने हमें जीत की बधाई दी…कृष्णा भैया भी घर पर ही थे… सब कुछ निपटने के बाद हम सब परिवारिजन रात को जब इकट्ठे बैठे, तब बड़े भैया ने कहा….
आख़िर ये चमत्कार हुआ कैसे…?
कृष्णा भैया ने मुस्कराते हुए मेरी तरफ इशारा करके कहा – इसमें इस दस सिर वाले रावण की कुछ करिस्तानी लगती है…बता दे भाई… अब तो बता दे कि तूने किया क्या था…
मेने दुलारी को किए चुदाई के वादे को छोड़ कर सब कुछ बता दिया…जिसे सुन कर सबके मुँह खुले रह गये…!
भैया – लेकिन तुझे कैसे पता चला कि वो झूठा केस सरपंच ने ही लगवाया था…
मे – अब कुछ बातें ऐसी होती हैं, जिसे वकील ही सोच सकता है… आप खुश तो हैं ना…
मेरी बात सुन कर भैया ने मुझे गले से लगा लिया और बोले – मेरी खुशी की क्या बात करता है पगले… तुझे पता नही तूने कितना बड़ा काम किया है…
समाज में बाबूजी का नाम कितना बढ़ गया है… लोग हमारे परिवार को सबसे उपर रख कर देखने लगेंगे…!
फिर कुछ देर बाद सब उठकर चले गये, मे भी घर के अंदर गया, और भाभी को चिढ़ाते हुए बोला – क्यों सरपंच जी ख्याल अच्छा रहा या….!
भाभी ने अपनी भीगी आँखों से मुझे देखा और मेरा माथा चूमकर बोली – तुम सच में जादूगर हो लल्ला….!
मेने भी भाभी के गालों को चूमकर कहा – ये भी आपकी ही देन है… मेरी सफलता की कुंजी आपके पास ही है… अब बोलिए.. मेरा गिफ्ट कहाँ है..?
उन्होने निशा की तरफ देखा, और फिर बोली – क्या गिफ्ट चाहिए मेरे लाड़ले देवर को…?
मेने उनके पेट पर हाथ रख कर कहा – बस एक खूबसूरत सा भतीजा मिल जाए जल्दी से…जिसके साथ में बैठकर खेल सकूँ…!
उन्होने मेरी बात सुनकर अपने गले से लिपटा लिया, और कान में फुसफुसा कर बोली – भतीजा या बेटा…?
मेने उनके चेहरे को अपने हाथों में भर लिया, और कसकर एक लंबा सा चुंबन उनके होठों पर जड़ दिया….!
हम सबने मिलकर खाना खाया, खाना ख़तम ही हुआ था कि मेरा मोबाइल बजने लगा… कोई अननोन नंबर था…
मेने कॉल पिक किया, उधर से दुलारी की आवाज़ सुनाई दी… मेने कहा – हेलो.. हां भौजी कैसी हैं आप…?
वो – आप सूनाओ… ! वैसे मेने तो अपना काम कर दिया है.. अब आपकी बारी है, अपना वादा निभाने की..
मे – बिल्कुल… आपके सभी काम पूरे होंगे.. अब बस आप देखती जाओ… इतना कह कर मेने कॉल ख़तम की…
दो दिन बाद ही राम दुलारी के खिलाफ वाली पार्टी को भी कोर्ट बुला लिया, और दोनो का समझौता करा दिया.. उसने कोर्ट से मुकद्दमा वापस ले लिया…
उसने रामदुलारी के सामने कबूल किया कि ये सब सरपंच की ही चाल थी…
सब कुछ निपटने के बाद अब बारी थी रामदुलारी के उस वादे को पूरा करने की जिसकी वजह से उसने हमें अपने सारे वोट दिलवाए थे…
तो मेने उसे उस रात शहर में ही रोक लिया…..
मे उसे अपने फ्लॅट में ले आया, उसकी अच्छे से खातिर की…फिर मेने पुछा - और बोलो भौजी, खुश तो हो ना, आपकी प्राब्लम ख़तम हुई कि नही…
वो – अरे पंडित जी, असली खुशी तो अभी तक आपने कहाँ दी है…ये कह कर उसने मेरे पाजामे के उपर से मेरे लंड को पकड़ लिया, और मसल्ते हुए बोली – ये चाहिए मुझे…
जब से इसके दर्शन किए हैं, साली चूत तभी से पानी छोड़ रही है…
मेने उसकी मोटी गान्ड मसलकर कहा....
ये भी मिलेगा, थोड़ा गरम तो होने दो, फिर उसके चोली को उतार कर उसकी मोटी-2 चुचियों को मसल दिया…
आह्ह्ह्ह….लरिका, इनमें का धरा है, तनिक अपने हथियार को तो निकालो…मेने अपना पाजामा नीचे सरका दिया… और उसकी साड़ी और लहंगा निकाल कर उसे नगा कर दिया…
सच में वो बहुत मस्त औरत थी, बूढ़े सरपंच की क्या ग़लती, बेचारे का तो उसके नंगे दूध और गान्ड देखकर ही पानी चूत जाता होगा…
अपना कच्छा निकाल कर उसे लंड चूसने को कहा…जो उसने झट से अपने मुँह में ले लिया… मेरे 8” लंबे और अच्छे ख़ासे मोटे गोरे सोट को देख कर वो बौरा गयी…
और उस पर ऐसी टूट के पड़ी कि जैसे कोई भूखी बिल्ली दूध पर पड़ती है…चूस-चुस्कर उसने मेरे सुपाडे को सुर्ख कर दिया…
मे उसकी चूत में दो उंगलियाँ डालकर चोद रहा था, वो बहुत गरम हो गयी.. और बोली…
बस राजाजी…अब और ना सताओ.. डाल दो अब अपना सोटा मेरी ओखली में और करदो इसकी जमके कुटाई…
मेने अब देर ना करते हुए, उसे घोड़ी बनाकर उसकी फल्फलाती चूत में अपना लॉडा पेल दिया…
वो सिसकारी भरते हुए.. मेरा पूरा लॉडा एक बार में ही लील गयी.. और अपनी गान्ड मटका – 2 कर मस्ती से चुदने लगी…
रात भर मेने उसकी ओखली में अपना मूसल जमकर चलाया, फिर एक बार गान्ड भी मारी… तीनो छेदो में मेरा लंड लेकर वो एकदम मस्त हो गयी.. और बोली …
आज जाना मेने असली चुदाई क्या होती है…! देखो मेरी चूत भी आपके लंड को धन्यवाद दे रही है…
मेने देखा तो वास्तव में उसकी चूत के होठ फडक रहे थे, ये देखकर मुझे हसी आ गयी, और पहली बार मेने उसके मोटे-मोटे होठों को चूम लिया….! वो मेरे से अमर्बैल की तरह लिपट गयी…
आखिकार थक हार कर हम सो गये, सुबह मेने उसको गाओं की बस में बिठाकर रवाना किया और मे अपने काम पर लग गया……….!
पहले ही चरण से भाभी सरपट दौड़ रही थी, आधी गिनती तक ही फ़ैसला एक तरफ़ा हो गया.. सरपंच को टोटल में से सिर्फ़ 15% वोट ही मिले थे, वाकी दो और कॉंडिडेट्स थे, उनको भी कुछ वोट तो मिलने ही थे…
भारी बहुमत से भाभी सरपंच बन गयी, सभी लोग अचंभे में थे… शाम को घर आकर जश्न मनाया गया… जिसमें हमने पूर्व सरपंच को भी बुलाया…
वो आया भी, और उसने हमें जीत की बधाई दी…कृष्णा भैया भी घर पर ही थे… सब कुछ निपटने के बाद हम सब परिवारिजन रात को जब इकट्ठे बैठे, तब बड़े भैया ने कहा….
आख़िर ये चमत्कार हुआ कैसे…?
कृष्णा भैया ने मुस्कराते हुए मेरी तरफ इशारा करके कहा – इसमें इस दस सिर वाले रावण की कुछ करिस्तानी लगती है…बता दे भाई… अब तो बता दे कि तूने किया क्या था…
मेने दुलारी को किए चुदाई के वादे को छोड़ कर सब कुछ बता दिया…जिसे सुन कर सबके मुँह खुले रह गये…!
भैया – लेकिन तुझे कैसे पता चला कि वो झूठा केस सरपंच ने ही लगवाया था…
मे – अब कुछ बातें ऐसी होती हैं, जिसे वकील ही सोच सकता है… आप खुश तो हैं ना…
मेरी बात सुन कर भैया ने मुझे गले से लगा लिया और बोले – मेरी खुशी की क्या बात करता है पगले… तुझे पता नही तूने कितना बड़ा काम किया है…
समाज में बाबूजी का नाम कितना बढ़ गया है… लोग हमारे परिवार को सबसे उपर रख कर देखने लगेंगे…!
फिर कुछ देर बाद सब उठकर चले गये, मे भी घर के अंदर गया, और भाभी को चिढ़ाते हुए बोला – क्यों सरपंच जी ख्याल अच्छा रहा या….!
भाभी ने अपनी भीगी आँखों से मुझे देखा और मेरा माथा चूमकर बोली – तुम सच में जादूगर हो लल्ला….!
मेने भी भाभी के गालों को चूमकर कहा – ये भी आपकी ही देन है… मेरी सफलता की कुंजी आपके पास ही है… अब बोलिए.. मेरा गिफ्ट कहाँ है..?
उन्होने निशा की तरफ देखा, और फिर बोली – क्या गिफ्ट चाहिए मेरे लाड़ले देवर को…?
मेने उनके पेट पर हाथ रख कर कहा – बस एक खूबसूरत सा भतीजा मिल जाए जल्दी से…जिसके साथ में बैठकर खेल सकूँ…!
उन्होने मेरी बात सुनकर अपने गले से लिपटा लिया, और कान में फुसफुसा कर बोली – भतीजा या बेटा…?
मेने उनके चेहरे को अपने हाथों में भर लिया, और कसकर एक लंबा सा चुंबन उनके होठों पर जड़ दिया….!
हम सबने मिलकर खाना खाया, खाना ख़तम ही हुआ था कि मेरा मोबाइल बजने लगा… कोई अननोन नंबर था…
मेने कॉल पिक किया, उधर से दुलारी की आवाज़ सुनाई दी… मेने कहा – हेलो.. हां भौजी कैसी हैं आप…?
वो – आप सूनाओ… ! वैसे मेने तो अपना काम कर दिया है.. अब आपकी बारी है, अपना वादा निभाने की..
मे – बिल्कुल… आपके सभी काम पूरे होंगे.. अब बस आप देखती जाओ… इतना कह कर मेने कॉल ख़तम की…
दो दिन बाद ही राम दुलारी के खिलाफ वाली पार्टी को भी कोर्ट बुला लिया, और दोनो का समझौता करा दिया.. उसने कोर्ट से मुकद्दमा वापस ले लिया…
उसने रामदुलारी के सामने कबूल किया कि ये सब सरपंच की ही चाल थी…
सब कुछ निपटने के बाद अब बारी थी रामदुलारी के उस वादे को पूरा करने की जिसकी वजह से उसने हमें अपने सारे वोट दिलवाए थे…
तो मेने उसे उस रात शहर में ही रोक लिया…..
मे उसे अपने फ्लॅट में ले आया, उसकी अच्छे से खातिर की…फिर मेने पुछा - और बोलो भौजी, खुश तो हो ना, आपकी प्राब्लम ख़तम हुई कि नही…
वो – अरे पंडित जी, असली खुशी तो अभी तक आपने कहाँ दी है…ये कह कर उसने मेरे पाजामे के उपर से मेरे लंड को पकड़ लिया, और मसल्ते हुए बोली – ये चाहिए मुझे…
जब से इसके दर्शन किए हैं, साली चूत तभी से पानी छोड़ रही है…
मेने उसकी मोटी गान्ड मसलकर कहा....
ये भी मिलेगा, थोड़ा गरम तो होने दो, फिर उसके चोली को उतार कर उसकी मोटी-2 चुचियों को मसल दिया…
आह्ह्ह्ह….लरिका, इनमें का धरा है, तनिक अपने हथियार को तो निकालो…मेने अपना पाजामा नीचे सरका दिया… और उसकी साड़ी और लहंगा निकाल कर उसे नगा कर दिया…
सच में वो बहुत मस्त औरत थी, बूढ़े सरपंच की क्या ग़लती, बेचारे का तो उसके नंगे दूध और गान्ड देखकर ही पानी चूत जाता होगा…
अपना कच्छा निकाल कर उसे लंड चूसने को कहा…जो उसने झट से अपने मुँह में ले लिया… मेरे 8” लंबे और अच्छे ख़ासे मोटे गोरे सोट को देख कर वो बौरा गयी…
और उस पर ऐसी टूट के पड़ी कि जैसे कोई भूखी बिल्ली दूध पर पड़ती है…चूस-चुस्कर उसने मेरे सुपाडे को सुर्ख कर दिया…
मे उसकी चूत में दो उंगलियाँ डालकर चोद रहा था, वो बहुत गरम हो गयी.. और बोली…
बस राजाजी…अब और ना सताओ.. डाल दो अब अपना सोटा मेरी ओखली में और करदो इसकी जमके कुटाई…
मेने अब देर ना करते हुए, उसे घोड़ी बनाकर उसकी फल्फलाती चूत में अपना लॉडा पेल दिया…
वो सिसकारी भरते हुए.. मेरा पूरा लॉडा एक बार में ही लील गयी.. और अपनी गान्ड मटका – 2 कर मस्ती से चुदने लगी…
रात भर मेने उसकी ओखली में अपना मूसल जमकर चलाया, फिर एक बार गान्ड भी मारी… तीनो छेदो में मेरा लंड लेकर वो एकदम मस्त हो गयी.. और बोली …
आज जाना मेने असली चुदाई क्या होती है…! देखो मेरी चूत भी आपके लंड को धन्यवाद दे रही है…
मेने देखा तो वास्तव में उसकी चूत के होठ फडक रहे थे, ये देखकर मुझे हसी आ गयी, और पहली बार मेने उसके मोटे-मोटे होठों को चूम लिया….! वो मेरे से अमर्बैल की तरह लिपट गयी…
आखिकार थक हार कर हम सो गये, सुबह मेने उसको गाओं की बस में बिठाकर रवाना किया और मे अपने काम पर लग गया……….!