• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस) complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
आज चुनाव का नतीजा आ रहा था, हम सभी काउंटिंग प्लेस पर मौजूद थे, जो कि कस्बे के ब्लॉक पर हो रही थी…

पहले ही चरण से भाभी सरपट दौड़ रही थी, आधी गिनती तक ही फ़ैसला एक तरफ़ा हो गया.. सरपंच को टोटल में से सिर्फ़ 15% वोट ही मिले थे, वाकी दो और कॉंडिडेट्स थे, उनको भी कुछ वोट तो मिलने ही थे…

भारी बहुमत से भाभी सरपंच बन गयी, सभी लोग अचंभे में थे… शाम को घर आकर जश्न मनाया गया… जिसमें हमने पूर्व सरपंच को भी बुलाया…

वो आया भी, और उसने हमें जीत की बधाई दी…कृष्णा भैया भी घर पर ही थे… सब कुछ निपटने के बाद हम सब परिवारिजन रात को जब इकट्ठे बैठे, तब बड़े भैया ने कहा….

आख़िर ये चमत्कार हुआ कैसे…?

कृष्णा भैया ने मुस्कराते हुए मेरी तरफ इशारा करके कहा – इसमें इस दस सिर वाले रावण की कुछ करिस्तानी लगती है…बता दे भाई… अब तो बता दे कि तूने किया क्या था…

मेने दुलारी को किए चुदाई के वादे को छोड़ कर सब कुछ बता दिया…जिसे सुन कर सबके मुँह खुले रह गये…!

भैया – लेकिन तुझे कैसे पता चला कि वो झूठा केस सरपंच ने ही लगवाया था…

मे – अब कुछ बातें ऐसी होती हैं, जिसे वकील ही सोच सकता है… आप खुश तो हैं ना…

मेरी बात सुन कर भैया ने मुझे गले से लगा लिया और बोले – मेरी खुशी की क्या बात करता है पगले… तुझे पता नही तूने कितना बड़ा काम किया है…

समाज में बाबूजी का नाम कितना बढ़ गया है… लोग हमारे परिवार को सबसे उपर रख कर देखने लगेंगे…!

फिर कुछ देर बाद सब उठकर चले गये, मे भी घर के अंदर गया, और भाभी को चिढ़ाते हुए बोला – क्यों सरपंच जी ख्याल अच्छा रहा या….!

भाभी ने अपनी भीगी आँखों से मुझे देखा और मेरा माथा चूमकर बोली – तुम सच में जादूगर हो लल्ला….!

मेने भी भाभी के गालों को चूमकर कहा – ये भी आपकी ही देन है… मेरी सफलता की कुंजी आपके पास ही है… अब बोलिए.. मेरा गिफ्ट कहाँ है..?

उन्होने निशा की तरफ देखा, और फिर बोली – क्या गिफ्ट चाहिए मेरे लाड़ले देवर को…?

मेने उनके पेट पर हाथ रख कर कहा – बस एक खूबसूरत सा भतीजा मिल जाए जल्दी से…जिसके साथ में बैठकर खेल सकूँ…!

उन्होने मेरी बात सुनकर अपने गले से लिपटा लिया, और कान में फुसफुसा कर बोली – भतीजा या बेटा…?

मेने उनके चेहरे को अपने हाथों में भर लिया, और कसकर एक लंबा सा चुंबन उनके होठों पर जड़ दिया….!

हम सबने मिलकर खाना खाया, खाना ख़तम ही हुआ था कि मेरा मोबाइल बजने लगा… कोई अननोन नंबर था…

मेने कॉल पिक किया, उधर से दुलारी की आवाज़ सुनाई दी… मेने कहा – हेलो.. हां भौजी कैसी हैं आप…?

वो – आप सूनाओ… ! वैसे मेने तो अपना काम कर दिया है.. अब आपकी बारी है, अपना वादा निभाने की..

मे – बिल्कुल… आपके सभी काम पूरे होंगे.. अब बस आप देखती जाओ… इतना कह कर मेने कॉल ख़तम की…

दो दिन बाद ही राम दुलारी के खिलाफ वाली पार्टी को भी कोर्ट बुला लिया, और दोनो का समझौता करा दिया.. उसने कोर्ट से मुकद्दमा वापस ले लिया…

उसने रामदुलारी के सामने कबूल किया कि ये सब सरपंच की ही चाल थी…

सब कुछ निपटने के बाद अब बारी थी रामदुलारी के उस वादे को पूरा करने की जिसकी वजह से उसने हमें अपने सारे वोट दिलवाए थे…

तो मेने उसे उस रात शहर में ही रोक लिया…..

मे उसे अपने फ्लॅट में ले आया, उसकी अच्छे से खातिर की…फिर मेने पुछा - और बोलो भौजी, खुश तो हो ना, आपकी प्राब्लम ख़तम हुई कि नही…

वो – अरे पंडित जी, असली खुशी तो अभी तक आपने कहाँ दी है…ये कह कर उसने मेरे पाजामे के उपर से मेरे लंड को पकड़ लिया, और मसल्ते हुए बोली – ये चाहिए मुझे…

जब से इसके दर्शन किए हैं, साली चूत तभी से पानी छोड़ रही है…

मेने उसकी मोटी गान्ड मसलकर कहा....

ये भी मिलेगा, थोड़ा गरम तो होने दो, फिर उसके चोली को उतार कर उसकी मोटी-2 चुचियों को मसल दिया…

आह्ह्ह्ह….लरिका, इनमें का धरा है, तनिक अपने हथियार को तो निकालो…मेने अपना पाजामा नीचे सरका दिया… और उसकी साड़ी और लहंगा निकाल कर उसे नगा कर दिया…

सच में वो बहुत मस्त औरत थी, बूढ़े सरपंच की क्या ग़लती, बेचारे का तो उसके नंगे दूध और गान्ड देखकर ही पानी चूत जाता होगा…

अपना कच्छा निकाल कर उसे लंड चूसने को कहा…जो उसने झट से अपने मुँह में ले लिया… मेरे 8” लंबे और अच्छे ख़ासे मोटे गोरे सोट को देख कर वो बौरा गयी…

और उस पर ऐसी टूट के पड़ी कि जैसे कोई भूखी बिल्ली दूध पर पड़ती है…चूस-चुस्कर उसने मेरे सुपाडे को सुर्ख कर दिया…

मे उसकी चूत में दो उंगलियाँ डालकर चोद रहा था, वो बहुत गरम हो गयी.. और बोली…

बस राजाजी…अब और ना सताओ.. डाल दो अब अपना सोटा मेरी ओखली में और करदो इसकी जमके कुटाई…

मेने अब देर ना करते हुए, उसे घोड़ी बनाकर उसकी फल्फलाती चूत में अपना लॉडा पेल दिया…

वो सिसकारी भरते हुए.. मेरा पूरा लॉडा एक बार में ही लील गयी.. और अपनी गान्ड मटका – 2 कर मस्ती से चुदने लगी…

रात भर मेने उसकी ओखली में अपना मूसल जमकर चलाया, फिर एक बार गान्ड भी मारी… तीनो छेदो में मेरा लंड लेकर वो एकदम मस्त हो गयी.. और बोली …

आज जाना मेने असली चुदाई क्या होती है…! देखो मेरी चूत भी आपके लंड को धन्यवाद दे रही है…

मेने देखा तो वास्तव में उसकी चूत के होठ फडक रहे थे, ये देखकर मुझे हसी आ गयी, और पहली बार मेने उसके मोटे-मोटे होठों को चूम लिया….! वो मेरे से अमर्बैल की तरह लिपट गयी…

आखिकार थक हार कर हम सो गये, सुबह मेने उसको गाओं की बस में बिठाकर रवाना किया और मे अपने काम पर लग गया……….!

 
शाम को मेने प्राची को कॉल किया, वो बिना देरी किए 10 मिनिट में ही मेरे पास आ गयी, और आते ही मेरे से लिपट कर खूब रोई अपनी बेहन को याद करके…

मेने जैसे तैसे उसे चुप कराया, फिर उसके होठों को चूमकर उसे प्यार किया…इसी चक्कर में वो गरम होने लगी, और मुझे एक बार उसे चोदना पड़ा…

उसे विदा करते हुए मेने उसे कहा… प्राची, एसपी साब ने हमारी इस मामले में बहुत हेल्प की है, तो मे चाहता हूँ, एक बार तुम जाकर उनका शुक्रया अदा ज़रूर कर देना…

वो हामी भरके अपने घर चली गयी….!

भाभी के सरपंच का पद संभालते ही, हमने तय किया…, परिवार से कोई एक आदमी रोज़ दिन में पूरे गाओं का एक चक्कर ज़रूर लगाएगा…और लोगों की समस्या जो ग्राम पंचायत लेवेल पर सॉल्व हो सकती है, उन्हें सुनेगा…

मे जब भी घर होता, तो सुबह – 2 एक्सर्साइज़ के बाद एक चक्कर गाओं का ज़रूर लगाता था…लोगों से उनकी समस्याएं जानने की कोशिश करता…

कुछ दिनो में ही, जहाँ लोग छोटी – 2 बातों को लेकर आपस में झगड़ते थे, और फिर सरपंच के पैरों में गिरकर उसका समाधान करवाते,

वहीं अब एक साथ दोनो पक्षों को आमने – सामने खड़ा करके हाथों हाथ समस्या का समाधान होने लगा…

मेने ब्लॉक से जिला पंचायत की स्कीम में अपनी पंचायत को मिलने वाली ग्रांट की डीटेल निकलावाकर होने वाले विकास कार्यों को शुरू करा दिया…

कुछ दिनो में ही लोगों को फ़र्क महसूस होने लगा, और गाओं में हमारी इज़्ज़त और बढ़ गयी…

ऐसे ही एक दिन सुबह-2 में गाओं के राउंड पर था, दलितों के टोले से गुजर रहा था जहाँ रास्तों को पक्का करने का काम चल रहा था,

मे काम का निरीक्षण कर रहा था, कि तभी रामदुलारी अपने घर के द्वार पर खड़ी दिखाई दे गयी…

मुझे देखते ही उसने मुस्करा कर मेरा स्वागत किया, और ज़बरदस्ती मेरी बाजू पकड़ कर अपने घर के अंदर ले गयी…

उसने मुझे एक चौकी पर बिठाया, और किसी विशेष अतिथि की तरह मेरी सेवा में जुट गयी…. मेरे लाख मना करने पर भी वो मेरे पैर दबाते हुए बातें करने लगी…

जानबूझकर अपना आँचल ढालकर वो अपने खरबूजों के दर्शन करा रही थी, जिन्हें देखकर मेरा शेर अंगड़ाई लेने लगा… ये देखकर वो मंद-मंद मुस्कराने लगी…

तभी वहाँ लंबा सा घूँघट निकाले एक दुबली पतली सी लड़की आई, जिसकी शायद शादी हुए कुछ ही दिन हुए होंगे…

उसे देखते ही रामदुलारी बोली – अरी ओ श्यामा… देख पंडितजी हमारे घर आए हैं…चल इनके पाँव लग्के आशीर्वाद ले ले…

वो डेढ़ हाथ का घूँघट काढ़े अपने घुटने मोड़ कर मेरे सामने बैठ गयी.. और मेरे पैर पड़ने लगी…

मेने फ़ौरन उसके दोनो बाजू थाम कर उसे रोकते हुए बोला – नही नही… मेरे पैर पड़ने की ज़रूरत नही है… मेरा आशीर्वाद वैसे ही तुम लोगों के साथ है…

फिर मेने दुलारी से पुछा…वैसे ये बहू है कॉन भौजी…??

वो – ये मेरी सबसे छोटी देवरानी है, अभी 6 महीने पहले ही व्याह कर आई है… और देवर तो सब अलग अलग रहते हैं, लेकिन ये हमारे साथ ही रहते हैं..

वैसे ये मेरे मामा की लड़की है… बहुत सुंदर और सुशील है, इसलिए इसे अपने देवेर के लिए व्याह लिया…

मे – अरे भौजी… सुंदर और सुशील अब इस डेढ़ हाथ के घूँघट में से तो पता नही चल सकती ना…

वो – अरे ! तो कॉन आपका हाथ पकड़े है… देखलो मुखड़ा इसका…श्यामा ! दिखा दे अपना मुँह पंडितजी को, ये अपने खासम खास हैं.. इनसे कैसा परदा…

उसकी बात सुनते ही उसने अपना घूँघट उलट दिया…. वाकई, इस जात के लिए वो बहुत सुंदर थी…पतले-2 होठों पर लाल लिपीसटिक, थोड़े फूले हुए गाल, बड़ी-2 बोलती सी चंचल आँखें…लंबे घने काले बाल…

ज़्यादा गोरी तो नही लेकिन मध्यम कलर…32 की कड़क गोल-गोल चुचिया… एक दम से पतली कमर, जो दोनो हाथों के बीच में समा जाए…

फिर उसके ठीक नीचे थोड़ी सी उठी हुई उसकी गोल-मटोल छोटी सी गान्ड जो शायद ही 30-31 की होगी...

मेने जब भर नज़र उसे देखा, तो उसकी आँखें शर्म से झुक गयी…उसे देखकर मेने दुलारी से कहा –

देवरानी तो सुंदर सी लेकेर आई हो भौजी… तुम्हारे देवेर के तो भाग ही खुल गये…

वो – आपको पसंद आई…? यही नही सारे कामों में भी एक दम परफेक्ट है…घर में मुझे ये कुछ करने ही नही देती…

मेने अपनी जेब से 1000/- का नोट निकाल कर उसके हाथ में पकड़ा दिया, और कहा – ये तुम्हारी मुँह दिखाई के… मेरी तरफ से कुछ खरीद लेना…

वो खुश हो गयी… और ज़बरदस्ती ही मेरे पैर छुकर वहाँ से चली गयी…

मेने दुलारी से कहा – वाकाई में अच्छी लड़की पसंद करके लाई हो… तुम्हारा देवेर तो काम धंधा छोड़ कर दिन-रात इसी से चिपका रहता होगा…!

वो – कहाँ पंडित जी ! ये बेचारी तो दुखी सी रहती है… मुझे तो लगता है, वो इसे खुश नही कर पाता है…

कई बार मेने इससे जानने की कोशिश भी की, लेकिन शर्म से ठीक ठीक नही बोलती…लेकिन मेने भी दुनिया देखी है…उसकी आँखों से ही पता लगा लिया…!

मे – ये तो बेचारी के साथ आपने अन्याय किया है…एक लड़की अपने पति से और कुछ मिले या ना मिले, कम से कम शरीर सुख तो चाहती ही है..

वो – सही कहा आपने ! मे एक औरत होकर ये समझ सकती हूँ… वैसे आप बुरा ना माने तो एक बात कहूँ आपसे ?

मे – हां बोलिए ना ! मेरी हर संभव लोगों की समस्या दूर करने की कोशिश रहती है…, मेरे बस में हुआ तो ज़रूर कोशिश करूँगा…

वो – अगर आप चाहें तो उसे वो सुख दे सकते हैं…अगर आप कहें तो…मे उसके मन को टटोल कर देखूं…

मे – कैसी बात कर रही हो भौजी… ये कैसे संभव है… मेरी अपनी भी पत्नी है, मे उसके साथ धोखा नही कर सकता…!

वो – लेकिन आपने मेरे साथ तो किया है ना… तो फिर इसको क्यों नही…?

मे – वो तो मेने आपसे वादा किया था इसलिए…, वरना मेरा ये कोई शौक नही है…

वो – फिर भी पुन्य कर्म समझ कर ही कभी-कभार उसके साथ कर दो…

वैसे उस कमसिन सी दिखने वाली लौंडिया को देख कर मेरा भी मन तो करने लगा था, सो उसके बार – 2 कहने पर मेने उससे कहा…

ठीक है भौजी, अब आप ज़्यादा ज़िद कर रही हो, तो एक-दो बार मे उसके साथ संबंध बना सकता हूँ.. पर ज़्यादा नही…

दुलारी खुश होते हुए बोली – शुक्रिया पंडित जी… मे उसका मन टटोल कर आपको बताती हूँ… ये कह कर उसने एक बार मेरे आधे खड़े लौडे को पकड़ कर सहला ही दिया…

मेने भी उसके मोटे-2 खरबूजों को ज़ोर्से मसल दिया, वो सिसक पड़ी, फिर खड़े होते हुए बोला – अच्छा भौजी अब चलता हूँ, मुझे ऑफीस भी जाना है..

वो भी खड़ी हो गयी, और मेरे सामने सॅटकर खड़े होते हुए मेरा लंड मसलकर बोली – ये काम ज़रूर कर देना, आपका बड़ा पुन्य होगा..

मेने मुस्कराते हुए उसकी चौड़ी गान्ड को ज़ोर्से मसल दिया और हां बोलकर वहाँ से चला आया…………………………………………………………!

उधर मेरे कहने पर एक शाम प्राची एसपी आवास पर पहुँची… उस समय भैया घर पर ही थे…

मेरा रेफरेन्स देकर वो अंदर गयी… उनको नमस्ते किया… ! भैया उसे पहले भी देख चुके थे… लेकिन तब से अबतक उसके शरीर में काफ़ी बदलाव आ चुके थे… उसके थोड़े-2 भरते जा रहे बदन पर नज़र डालते हुए बोले ---

तुम वो रेखा की छोटी बेहन हो ना…!

प्राची – जी सर ! और अंकुश जी के साथ हम दोनो ने मिलकर काम किया था.. अब उनके ही सुझाव पर मे आपको थॅंक्स कहने आई हूँ…

आपने हमारी इतनी बड़ी हेल्प की उसके लिए बहुत-2 धन्यवाद आपका…

एसपी – अरे इसमें धन्यवाद देने की ज़रूरत नही है…! एक तरह से तुम दोनो ने पोलीस की मदद ही की है, गुनहगारों को सज़ा देकर…

प्राची इस समय एक टाइट सा टॉप और एक लोंग स्कर्ट में थी… टॉप में कसे हुए उसके 33 साइज़ के मम्मे बाहर को भी अपने छटा बिखेर रहे थे…

जिनकी पुश्टता देख कर उनका लंड उनके लोवर में अंगड़ाई लेने लगा, और उसने आगे तंबू सा बना दिया…..!

उस पर नज़र पड़ते ही प्राची ने शर्मा कर अपनी नज़र नीची कर ली और मंद मंद मुस्कराने लगी… ये देख कर एसपी साब भी मूड में आने लगे…

और उन्होने बातों में इंटेरेस्ट लेते हुए आगे आगे बात बढ़ाते हुए पुचछा – अब तुम क्या कर रही हो… आइ मीन पढ़ रही हो या…छोड़ दिया…

प्राची ने एक बार नज़र उठाकर देखा…, दोनो की नज़र आपस में टकराई…जिनमें एक दूसरे के लिए निमंत्रण दिखाई दिया…

कुछ देर दोनो की नज़र एक दूसरे से मिली रही, फिर नारी सुलभ, प्राची की नज़र झुक गयी और बोली – जी कॉलेज में अड्मिशन ले लिया है, ये फर्स्ट एअर है मेरी.

एसपी – ग्रॅजुयेशन के बाद क्या इरादा है..?

वो अब उनके साथ थोड़ा-थोड़ा खुलती जेया रही थी, सो बोली – आप ही कुछ सुझाव दीजिए.. मुझे क्या करना चाहिए..?

एसपी साब उठकर उसके बगल में बैठ गये… और उसका हाथ अपने हाथ में लेकर उसके चेहरे पर नज़र गढ़ा कर बोले –

तुम एक बहादुर लड़की हो… मेरी राई तो ये है, कि पोलीस फोर्स जाय्न करो…आगे तुम्हारी अपनी मर्ज़ी है…

प्राची ने अपनी नज़र उपर की, और उनकी आँखों में आँखें डालकर बोली – मे भी यही चाहती हूँ.. क्या इसमें आप मेरी मदद करेंगे…?

एसपी – जब भी तुम्हें मेरी मदद की ज़रूरत पड़े, बेहिचक चली आना.., मे हमेशा तुम्हारे साथ हूँ..

ये कहकर उन्होने उसके कंधे पर हाथ रख कर अपनी ओर खींच लिया.. वो भी बेझिझक उनके कंधे से जा लगी……!

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 
दो दिन बाद मे फिरसे गाओं में चक्कर लगाने निकला था, घूमते -2 काफ़ी देर हो चुकी थी, आज में गाओं के दूसरे छोर यानी पूर्व सरपंच रामसिंघ की तरफ गया था…

मुझे देखते ही अपनी चौपाल पर बैठे रामसिंघ ने मुझे आवाज़ देकर अपने पास बुला लिया, मे भी उसकी चौपाल पर चला गया, उसने मुझे बा-इज़्ज़त एक कुर्सी पर बिठाया…

मेने बात चलाते हुए कहा – और सुनाए सरपंच जी कैसा काम काज चल रहा है…

वो – अरे बेटा ! अब काहे के सरपंच… वो तो अब आप हो, वैसे आपकी कृपा से गाओं भर में ही सब ठीक-ठाक है…

मे – अरे चाचा ! हम भी कहाँ हैं सरपंच, हम तो सिर्फ़ कार्यकर्ता हैं…!

वो – अरे एक ही बात है बेटा, सब काम तो तुम ही देख रहे हो…महिला तो नाम की ही होती हैं… वैसे एक तरह से अच्छा ही हुआ… जो सर्पन्चि बदल गयी…

हमें तो जैसा चल रहा था, चल रहा था, नया कुछ करने की समझ ही नही थी.. अब आपकी नयी सोच, तो नये काम हो रहे हैं.. सच कहूँ तो मुझे बड़ी खुशी है..!

मे – चलो आप खुश तो हम भी खुश, और ये गाओं भी खुशहाल हो हमारी यही कोशिश होनी चाहिए…, फिर मेने फुसफुसा कर उसके कान में कहा –

वैसे चाचा, मेने पिछले सालों के काम की लिस्ट निकलवाई थी, उसमें मुझे कुछ गड़बड़ सी लगी..,

वो खीँसे निपोरकर चापलूसी भरी हँसी हँसते हुए बोला – अब बेटा गढ़े मुर्दे क्यों उखाड़ते हो..? थोड़ा बहुत आटे में नमक तो सभी खाते हैं…

मे – मुझे कुछ ज़्यादा ही नमक दिखा इसलिए मेने सोचा एक बार आपसे पूछ लूँ.., क्या करना है…?

रामसिंघ – अब जो दब गया है उसे मत उखाडो, मे तुम्हारे हाथ जोड़ता हूँ.. तुम जैसा चाहोगे आगे वैसा ही होगा, मे हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा…!

मे – चलो ठीक है, मॅनेज करता हूँ कैसे भी, वैसे ये सवाल आगे उठ सकता है, जब अगले पिच्छले काम का हिसाब-किताब देखा किसी ने तो..,

फिर मत कहना कि बताया नही…, घर गाओं के नाते ये बताना मेने अपना फ़र्ज़ समझा, इसलिए बोल दिया..

वो – मे कुछ भी करके के मामले को सुलटा लूँगा, धन्यवाद जो तुमने बता दिया…,

कुछ देर और इधर-उधर की बातें होती रही, फिर मे वहाँ से चला आया…,

सरपंच को धमकाना ज़रूरी था, क्योंकि साला आगे कुछ भी रोड़ा अटकाने की कोशिश कर सकता था, लेकिन अब वो हमेशा मेरे इस अहसान के नीचे दबा रहेगा…

लौटते में रामदुलारी की तरफ होकर आ रहा था, तो वो मुझे दरवाजे पर ही खड़ी दिखाई दे गयी… और उस दिन की तरह अपने घर खींच ले गयी..

मुझे बिठा कर ज़बरदस्ती श्यामा को कह कर मेरे लिए चाय बनवाई…इस बीच वो बोली – पंडितजी.. मेने उससे बात की है, वो सचमुच बहुत दुखी है…!

मेरा देवर निगोडा उसको कुछ कर ही नही पाता, अब औरत जात शर्म तो करती ही है, थोड़ी बहुत ना-नुकर करती होगी, और जब तक चुदने के लिए तैयार होती है, कि निगोडा चूत के मुँह पर ही उल्टी कर देता है…हहहे….

फिर बेचारी रात भर सुबक्ती रहती है… अब आप ही बताओ…अभी 18-19 साल की लड़की है… ठीक से चुद भी नही पाई… करे तो क्या करे बेचारी…!

मुझे तो लगता है, उसकी सील भी टूटी है या नही…

मेने हँसते हुए पुछा – तो आपने पुछा नही उसको…?

वो – तुम हू ना लरिका ! अब इतनी बेशर्म तो नही है बेचारी कि ये सब खुल कर बताए…

मे – तो फिर आपने मेरे बारे में बोल दिया उसको..?

वो – नही सीधे – 2 तो नही, बस घुमा फिरकर आपकी बात चलाई…आपके बारे मैं… तो वो खुश होकर कहने लगी…

हां ! मुझे भी वो बड़े भले इंसान लगे…और कितने सुंदर और मासूम जैसे हैं… उनकी पत्नी कितनी खुश नसीब हैं, जिन्हें ऐसे पति मिले हैं..

अब आप ही बताओ, अगर आप उसको चोदोगे… तो मना कर पाएगी भला…!

मे – तो फिर कैसे होगा, कुछ सोचा है…?

वो – अब ये आप ही बताओ… कैसे क्या और कहाँ होगा, पहली बार तो शांति से सब कुछ हो जाए, उसके बाद तो कभी भी घर में भी हो सकता है…

मे – तो फिर उसे किसी बहाने से शहर ही लाना पड़ेगा एक रात के लिए…

वो – हां ये ठीक रहेगा… मे कुछ करती हूँ, और शाम तक आपको फोन कर दूँगी…

फिर श्यामा चाय ले आई, वो आज फिर घूँघट में थी, तो मेने उसे कहा – अरे श्यामा प्यारी, इतनी अच्छी शक्ल सूरत दी है भगवान ने, उसे छुपाये घूमती हो…

उसने दुलारी की तरफ देखा, उसका इशारा पाकर उसने घूँघट हटा लिया…

मेने चाय उसके हाथ से लेकर नीचे रखी, और उसका हाथ पकड़कर अपने बगल में बिठा लिया…,

 
अपना एक हाथ उसकी पीठ पर रखकर उसे सहलाते हुए पुछा…यहाँ अपनी जीजी के पास खुश तो हो..?

वो नज़र नीची करके मुस्कराते हुए अपनी मुन्डी से इशारा करने लगी… मे समझ गया, ये आसानी से चुद लेगी…,

थोडा नीचे हाथ लेजाकर मेने उसकी नंगी कमर सहलाई, तो वो सिहर गयी…

चाय पीकर मे अपने घर आ गया…………………………………..!

उधर प्राची और एसपी साब में दूरियाँ कम होती जा रही थी, दोनो फोन पर भी बातें करने लगे थे…

एक दिन उन्होने फोन करके प्राची को अपने घर बुलाया, कुछ देर उसकी पढ़ाई लिखाई के बारे में बातें हुई…

फिर भैया ने प्राची के हाथों को पकड़ कर उसकी झील सी गहरी आँखों में झाँकते हुए अपने दिल की बात कह दी….

प्राची क्या तुम्हें मुझ पर भरोसा है… ?

प्राची – आप ऐसा क्यों पुच्छ रहे हैं… आपके उपर भरोसा नही होता तो मे आपके एक बार बुलाने पर क्यों चली आती…

एसपी – पता नही प्राची ये बात मे तुमसे कैसे कहूँ… ? और ना जाने तुम मेरे बारे में क्या सोचने लगो..?

प्राची – जो भी कहना है सॉफ – 2 कहिए… मे आपकी किसी बात का बुरा नही मानूँगी… अब बोल भी दीजिए…

भैया कुछ देर चुप रहे… फिर बोले – देखो प्राची ! मे जानता हूँ, कि हम दोनो की उम्र में काफ़ी अंतर है… लेकिन क्या करूँ, दिल तो आख़िर दिल ही है ना…

प्राची – प्लीज़ एसपी साब ! आप पहेलियाँ मत बुझाइए… जो भी कहना है खुल कर बोल दीजिए… !

एसपी – प्राची मे तुमसे प्यार करने लगा हूँ…आइ लव यू…और तुमसे शादी करना चाहता हूँ.

प्राची कुछ देर चुप रही…फिर कुछ सोचने के बाद बोली – लेकिन आप तो पहले से ही शादी सुदा हैं.. फिर अब मेरे साथ कैसे….?

एसपी – तुम अपनी बात कहो…क्या तुम मुझसे शादी करना चाहोगी…?

प्राची – मे उम्र के इस बंधन को नही मानती, और वैसे भी आपकी उम्र इतनी ज़्यादा भी नही है…लेकिन आपकी पत्नी के होते हुए ये कैसे संभव है…?

एसपी – मे उससे डाइवोर्स ले रहा हूँ, ऑलरेडी केस फाइल कर चुका हूँ, उस औरत से तंग आ चुका हूँ मे..

प्राची – मुझे सब पता है… ! ठीक है, जब तलाक़ हो जाए तब बात करेंगे अभी से कुछ कहने का क्या फ़ायदा…

ये सुनते ही भैया ने प्राची को अपनी बाहों में भर लिया और उसके होठ चूमकर बोले – थॅंक यू डार्लिंग… आइ लव यू…

प्राची – आइ लव यू टू जानू….! आप जैसे बड़े पोलीस ऑफीसर की पत्नी बनाना मेरे लिए गर्व की बात होगी…!

एसपी ने उसे खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया, और उसके होठों से रस निचोड़ने लगे… प्राची भी किसी अमर्बैल की तरह उनसे लिपट गयी…

दोनो की साँसें भारी होने लगी… धीरे-2 दोनो के बदन से कपड़े कम होते चले गये, पता ही नही चला कि वो दोनो कब मादरजात हो गये…

कृष्णा ने उसे किसी बच्ची की तरह अपनी गोद में उठा लिया और बेडरूम में ले आया, फिर तो दोनो के बीच रासलीला का वो खेल शुरू हुआ जिसे खेलने के लिए इस धरातल पर जन्मा हर प्राणी खेलना चाहता है…..

एसपी कृष्णा तो लंबे समय से विधुर जैसी जिंदगी जी रहे थे, सो वो उस कमसिन बाला पर किसी भूखे भेड़िए की तरह टूट पड़े…,

जब उनका गरमा गरम लोहे की रोड जैसा कड़क लंड प्राची की दो बार चुदि रसीली चूत में गया… तो वो कराह उठी…

बेडशीट को कसकर अपनी मुत्ठियों में भींचे, अपने होठों को घायल करने लगी… लेकिन उसने जल्दी ही अपने आप को संभाल लिया और उसका साथ देने लगी…!

एसपी के बलिष्ठ शरीर के नीचे दबी, प्राची जो उम्र में उससे लगभग 10 वर्ष छोटी थी, उसके दमदार धक्कों को ज़्यादा देर नही झेल पाई… और उसकी मुनिया ने हार मान कर अपना पानी छोड़ दिया…

फिर भी एसपी के धक्के बदस्तूर जारी रहे, जिससे वो फिर से ले में आने लगी और वो अपनी तरफ से भरपूर सहयोग देने लगी…,

एसपी कृष्णा जैसा पूर्ण पुरुष पाकर वो अपने आपको सौभाग्यशाली समझ रही थी...!

आज उसके जीवन से सारे भय, दुख, शंकाए सब दूर हो चुके थे, वो अपने प्रियतम की बाहों में एक सकुन सा महसूस कर रही थी…!

एसपी कृष्णा भी अपनी प्रेमिका की बाहों का सहारा पाकर, कुछ पलों के लिए अपनी पत्नी की बेवफ़ाइयों को भूल चुके थे…

घंटों वो एक दूसरे में खोए रहे… अंततः जब वो तूफान थमा जो उन दोनो के लिए एक सुखद भविष्य का संदेश लेकर आया था !

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इधर दुलारी के घर से चाय पीकर जब मे अपने घर पहुँचा, पता चला कि भाभी अपना रूटिन चेक-अप करने भैया के साथ डॉक्टर के पास गयी हैं…

श्यामा को चोदने की कल्पना मात्र से ही मेरा लॉडा पाजामे में हूलारे मार रहा था…

जब घर मे मेने निशा को अकेला पाया तो मुझसे रहा नही गया,

और उसको गोद में उठाकर सीधा बेडरूम में ले गया… वो लाख काम की दुहाई देती रही… लेकिन मेने उसे नही छोड़ा…

वो मुझे घूरते हुए बोली – क्या बात है जानू, आज सुबह सुबह आपको ये क्या नशा चढ़ा है…, बाहर से आते ही मेरे उपर चढ़ाई कर दी…

मेने फटाफट उसके सारे कपड़े निकाले… और उसकी चूत को चाट कर गरम किया, जब

वो गीली हो गयी, तो उसकी टाँगें चौड़ी करके सॅट से अपना लंड उसकी गीली चूत में डाल दिया…

वो भी मेरा साथ देते हुए होठों को चूमकर बोली – आपने मेरी बात का जबाब नही दिया…

मेने अपने धक्कों की रफ़्तार बरकरार रखते हुए कहा – अरे यार ! रास्ते में एक गरमा गरम सीन दिखाई दे गया… तो बस मेरा भी मन हो गया…

वो हँसते हुए बोली – रास्ते में ही… ?

मे – हां थोड़ा साइड में था… दोनो भाई बेहन थे, भैंसॉं के वादे में चुदाई करने में लगे थे… मेरी नज़र पड़ी तो वो सहम कर घर के अंदर भाग गये…

सीईईई….आअहह… निशु मेरी जान, तुम दिनो दिन मस्त होती जा रही हो….हुउंम्म.. मेने उसकी गान्ड मसलकर लंड को और अंदर तक पेलते हुए कहा..

उनकी चुदाई देखकर मेरा लॉडा खड़ा हो गया… अब इसका इलाज़ तो तुम्हारे पास ही है ना… ले मेरी जान ….. और ले मेरे लौडे की मालिका…..

सो चला आया दौड़ कर तुम्हारे पास….

हुउन्न्ं…और देखो सोने पे सुहागा… कि तुम सीईइ….आहह…आज अकेली ही हो घर में…उऊहह…

आअहह….धीरीए…मेरे….रजाअ…जीि....हाईए…मारीइ….हुन्न्ञन्…फुक्ककककक…मईए….हार्ड….मेरे….जानुउऊुुुउउ….आआईयईईई….मीई…तो गाइिईईईईईईईईईई… ये कहते हुए निशा बुरी तरह से झड़ने लगी…

मेने भी तबड-तोड़ दो चार तगड़े धक्के लगाकर अपनी मलाई उसकी चूत में भर दी…

सुबह सुबह की दमदार चुदाई से हम दोनो ही थक गये….. तो थोड़ा रेस्ट करके फ्रेश हुए… उसके बाद मिलकर नाश्ता किया…..!

बाबूजी का नाश्ता देते हुए में शहर निकल गया…, और अपने पेंडिंग काम निपटाने लगा…!

शाम के 4 बजे थे कि उष्मान का कॉल मेरे सीक्रेट नंबर पर आया, मेने चोन्क्ते हुए कॉल पिक किया… हाई हेलो हुई, उसके बाद उसने कहा …

अरे जोसेफ मियाँ ! कहाँ गायब हो गये भाई… असलम की मौत के बाद से दिखे ही नही….

मे – बस चाचा जान ! मेरा दोस्त चला गया… तो मेरा भी मन उस शहर से उखड़ गया… अब आपको तो शायद असलम ने बताया ही होगा.. मे तो एक आज़ाद परिंदा हूँ.. एक जगह ठहरना मेरी फ़ितरत में नही है…

वो – हां भाई जानता हूँ, असलम ने सब बताया था तुम्हारे बारे में…!

लेकिन अब मुझे तुम्हारे जैसे आदमी की शख्त ज़रूरत है, जो मुझे मेरे कारोबार में मदद कर सके…!

मे – क्यों आपके और पार्ट्नर कहाँ गये…?

वो – अब तो हम 3 ही तो बचे हैं… उसमें से दो तो सामाजिक तौर पर प्रतिष्ठित हैं, उन्हें तो बस अपने हिस्से से मतलब रहता है…!

मे – और वो मोहतार्मा, जो आपके ग्रूप की सर्वे सर्वा थीं, उनका क्या हुआ…?

वो – अरे सब बताता हूँ, तुम ज़रा मेरे पास तो आओ, और यहाँ का फील्ड वर्क संभलो…

मे – चाचा..! अभी तो मे मुंबई में हूँ…! देखता हूँ, क्या कर सकता हूँ आपके लिए… सोच के फोन करता हूँ आपको…इतना कह कर मेने फोन काट दिया….

मे सोच में पड़ गया, कि ये साला अचानक से इसको मेरी क्या ज़रूरत पड़ गयी..? कहीं साला मेरे उपर शक़ तो नही हो गया इन लोगों को…?

अगर ऐसा हुआ… तो ये लोग ज़रूर किसी ना किसी उधेड़ बुन में होंगे मुझ तक पहुँचने के लिए….

लेकिन अब इस बात की तह तक कैसे पहुँचा जाए…बहुत देर तक सर खपाया…लेकिन कोई माकूल हल सुझाई नही दिया… थक हार कर मेने प्राची को कॉल लगाया…!

क्योंकि अगर उन्हें मेरे उपर शक़ हुआ, तो ये ज़रूर सोचेंगे, कि मेरी साथी कॉन थी, हो सकता है किसी तरह उस तक पहुँच जाए…और वो मुसीबत में फँस जाए….

 
कॉल कनेक्ट होते ही… मेने उसका हाल चल पता किया… बातों से पता चल रहा था कि वो बहुत खुश लग रही थी…

मे - क्या बात है डार्लिंग, बड़ी खुश लग रही हो… लगता है कोई खजाना हाथ लग गया…

वो – ऐसा ही कुछ समझ लो, आपके एसपी साब मुझसे शादी करना चाहते हैं…!

मे – क्या सच में..? ये तो बड़ी खुशी की बात है, मुझे मेरी नयी भाभी मिल जाएगी…वो भी तुम्हारे रूप में.

वो – क्या..? क्या बोला आपने..? क्या वो आपके भाई हैं..?

मे – हां ! वो भी सगे…! चलो अच्छा हुआ, अब बेचारे भैया को भी सुकून मिल जाएगा.. उस हराम्जादि कामिनी ने उनकी जिंदगी नरक बना रखी थी…

अरे हां ! प्राची, अब थोड़ा तुम केर्फुल रहना, हो सकता है वो लोग तुम तक पहुँचने की कोशिश करें…!

वो – आप बेफिकर रहिए… मे ख्याल रखूँगी…!

मे – अच्छा ये बताओ, अभी भी तुम लोग उसी घर में रह रहे हो…?

वो – हां और कहाँ जाएँगे, अब इतना पैसा तो है नही कि घर किराए पर भी ले सकें, एक ही छत के नीचे परायों की तरह रहते हैं…

मे – तुम्हारी मम्मी का गुस्सा तुम्हारे पापा के प्रति अभी तक कम नही हुआ..?

वो – वो तो शायद कभी होगा भी नही, हम अपनी बेहन को बहुत प्यार करते थे, कैसे भूल जाएँ कि मेरे बाप ने पैसों की खातिर उसकी बलि चढ़ा दी..!

मे – तो एक काम क्यों नही करते, अपनी मम्मी से बात करके मेरे फ्लॅट में शिफ्ट हो जाओ, ये भी एक तरह से खाली ही पड़ा रहता है, मे तो कभी कभार ही रहता हूँ…

मुझे भी कभी-कभार तुम्हारी माँ के हाथ का खाना खाने को मिल जाया करेगा..

वो – सुझाव तो अच्छा है, मे मम्मी से बात करती हूँ, शायद वो मान भी जाएँगी…!

प्राची से बात करने के बाद मुझे ये जानकार बड़ी खुशी हुई, कि उन दोनो की लाइफ सेट होने जा रही है…………….!

रात को खाना खाकर हम डाइनिंग टेबल पर ही बैठे आपस में बातें कर रहे थे, भैया गाओं के हालात पुच्छ रहे थे… कि तभी मेरा मोबाइल बजा…

मेने थोड़ा वहाँ से उठकर दरवाजे की तरफ आया, और कॉल पिक किया.. उधर से रामदुलारी की आवाज़ आई…

वो – पंडितजी मे कल ही उसे कुछ खरीदारी के बहाने शहर लेकर आरहि हूँ, लेकिन रात वहाँ नही गुज़ार पाएँगे…

मे – ठीक सुबह 10 बजे मुझे सड़क पर मिलो, मे तुम दोनो को अपने साथ ही ले लूँगा…बोलकर मेने कॉल कट करदी...

वादे के मुतविक, दूसरे दिन दुलारी और श्यामा, मुझे सड़क पर खड़ी मिली, मे उन दोनो को गाड़ी में बिठाकर शहर की ओर चल दिया…दोनो को अपने घर छोड़ा,

फिर 2 घंटे में आने का बोलकर अपने ऑफीस आया, और कुछ अर्जेंट काम निपटाए, और फिर अपने घर आ गया….!

मे साथ में कुछ खाने पीने का समान ले आया था, क्योंकि घर पर मे कुछ बनाता नही था, तो तीनों हॉल में बैठते खाते हुए टीवी देखने लगे…

नाश्ता निपटा कर वो दोनो नीचे कालीन पर ही बैठी थी, मेरे बहुत कहने पर भी वो मेरे साथ सोफे पर नही बैठी, शायद गाओं की परम्परा तोड़ना दुलारी ठीक नही समझती थी…

मे सोफे पर बैठा था, इतने में दुलारी नीचे बैठकर मेरे पैर दबाने लगी…

मेने उसे बहुत मना किया लेकिन वो नही मानी.. और उसने अपने देवरानी को भी इशारा कर दिया, तो वो मेरे दूसरे पैर को दबाने लगी…

उन्होने खींच कर मेरे पैर लंबे कर दिए… और बड़ी लगन के साथ मेरे पैरों को दबाने लगी…

मेने धीरे से दुलारी के कंधे पर हाथ रखा और उसे सहलाते हुए अपना हाथ उसके मांसल चुचियों पर ले गया, और उसे ज़ोर्से मसल दिया….

सीईईईईईईईईईई…….आआआआहह….. उसके मुँह से एक मादक सिसकी निकल पड़ी, जिसे सुनकर श्यामा ने अपनी नज़र उठाकर उसकी तरफ देखा, और मुस्कुरा कर फिरसे नीचे देखने लगी….

मेरा हाथ शयामा के कंधे पर चला गया, और उसे धीरे-2 सहलाने लगा…

वो थोडा असहज सी होने लगी, और उसने अपनी गर्दन टेडी करके अपना गाल मेरे हाथ पर रख दिया…

उसके मुलायम हल्के फूले हुए गाल का स्पर्श अपने हाथ पर पाकर मे उसे सहलाने लगा… तो उसकी आँखें स्वतः ही मूंद गयी…

एक हाथ से मे दुलारी की चुचियों को मसल रहा था, और दूसरे हाथ से श्यामा के गाल सहला रहा था… दोनो ही उत्तेजित होती जा रही थी….

दुलारी के हाथ अब मेरी जांघों पर थे, और बढ़ते-2 वो मेरे लंड तक भी पहुँच गये…

पाजामे के अंदर मेरा नाग फुफ्कारने लगा था, जिसे देखकर उसने उसे एक बार ज़ोर से मसल दिया… मेरे मुँह से अहह…. निकल गयी…

फिर मेने वो कर दिया…. जिसकी श्यामा ने अभी कल्पना भी नही की होगी…. !

मेने झुक कर अपने दोनो हाथ श्यामा की बगलों से लेजा कर उसके संतरों पर रख दिए और उसे खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया…

मुश्किल से 42-45 किलो वजन था उसमें सो किसी बच्ची की तरह मेने अपने मजबूत हाथों में उसे उठा लिया था…

वो शर्म से दोहरी हो रही थी, और थोड़ी आगे को झुक गयी… जिससे उसकी छोटी सी लेकिन गोल-मटोल गान्ड मेरे लंड पर अच्छे से सेट हो गयी… और वो उसके छेद पर सेट हो गया…

 
वो शर्म से दोहरी हो रही थी, और थोड़ी आगे को झुक गयी… जिससे उसकी छोटी सी लेकिन गोल-मटोल गान्ड मेरे लंड पर अच्छे से सेट हो गयी… और वो उसके छेद पर सेट हो गया…

मेरे लंड का स्पर्श अपनी गान्ड के छेद पर होते ही वो पीछे को हो गयी, अब उसकी पीठ मेरे सीने से सट चुकी थी, उसका 32 साइज़ का सीना आगे को हो गया…

मेने उसकी चोली के उपर से ही उसके संतरों को अपनी मुट्ठी में कस लिया….

आअहह……पंडितजीिीइ….छोड़िए ना….दुख़्ता है….जीजी…कहिए ना इनसे मान जाएँ…

दुलारी – अरी मज़े करले….मौका है…, ऐसा मर्द तुझे सपने में भी नही मिलेगा….! फिर वो उठते हुए बोली –

पांडिजी, मे थोड़ा बाथरूम जाकर आती हूँ, ये कहकर उसने मुझे इशारा किया.. और खुद उठकर हॉल से बाहर चली गयी…

मेने श्यामा की चुनरी को उसके बदन से अलग कर दिया, अब वो एक लहँगे और चोली में ही थी, जिसके नीचे उसने ब्रा भी नही पहन रखा था,

उसके बबजूद भी उसकी चुचिया, एक दम कड़क किसी टेनिस की बॉल जैसी गोल-गोल, जो शायद अभी तक उनकी अच्छे से मिजायी भी नही हुई थी….

गोल-गोल मुलायम चुचियाँ मेरी मुट्ठी में क़ैद जो मेरे हाथों के साइज़ से भी छोटी थी, मुट्ठी में भरकर उन्हें मींजने लगा…

श्यामा थोड़े दर्द के एहसास के बावजूद उसने अपने दोनो हाथ मेरे हाथों के उपर जमा रखे थे… लेकिन रोकने का कोई प्रायोजन उसकी तरफ से नही था…

वो आँखें मुन्दे हुए धीरे-2 कराह रही थी, मेने एक-एक करके उसकी चोली के सारे बटन खोल दिए… इस दौरान भी उसके हाथ मेरे हाथों के उपर ही रहे… जो कभी -2 कमजोर सा प्रयास रोकने का कर देते थे… लेकिन रोका नही..

चोली से आज़ाद होते ही उसकी नग्न हल्के गेहुआ रंग की चुचियाँ…किसी नाइलॉन की गेंदों जैसी एकदम गोल, जिनके बाहरी सिरे पर दो किस्मीस के दाने चिपके हुए थे..

जो अब हाथों की मिजायी के कारण खड़े हो चुके थे…मेने उसके दानों को अपनी उंगलियों में दबाकर हल्के से मसल दिया….

आययईीीईईईईईईईई………..मोरी….मैईईईईई….इसस्स्स्स्स्स्स्शह….हहाआहह…सुुआअहह…

वो सिसकी भरते हुए अपने खुसक नाज़ुक होठों को अपनी जीभ से तर करने लगी…

तभी मेने उसके पतले से पेट पर हाथ फिराते हुए उसके लहँगे के नाडे को भी खींच दिया…

और उसकी बगलों में गुदगुदी कर दी…. वो खिल खिलाकर हँसती हुई मेरी गोद से उठ खड़ी हुई….

सर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर………..से उसका लहंगा उसके पैरों में जा टपका…. शर्म से उसने अपनी टाँगें भींच ली, उसकी देशी कच्छि में से चूत की फाँकें हल्की सी उभरी हुई अपनी मौजूदगी का एहसास दिला रही थी…

मेने अपने कपड़े निकाल कर उसे पलटा लिया, और उसका चेहरा अपनी तरफ किया, उसकी आँखें बंद थी, मेने जैसे ही उसका हाथ थामा… वो सिहर गयी…

मेने कहा – श्यामा… अपनी आँखें तो खोलो… उसने ना में अपनी गर्दन हिला दी….

मेने फिर कहा – देखो अब शर्म छोड़ो…और देखो मेरी तरफ… तो उसने धीरे से अपनी आँखों को खोला…और जैसे ही उसकी नज़र मेरे 8” लंबे और गोरे लंड पर पड़ी….

श्यामा के बदन ने एक झुरजुरी सी ली… और वो आँखें फ़ाडे एकटक उसे देखती ही रह गयी…

मे – ऐसे क्या देख रही हो… लो इसे पकडो.. प्यार करो..इसे…, वो फिर भी उसे गूंगी की तरह देखती ही रही….

तो मेने उसके हाथ को झटक कर सोफे पर खींचा और जबदस्ती अपना लंड उसके हाथ में थमा दिया…. लंड पर हाथ लगते ही वो सिहर गयी…

मेने अपने हाथ से उसकी मुट्ठी अपने लंड पर कस्वा दी… और उसके हाथ से ही उसे आगे पीछे करने लगा…

कुछ देर में वो स्वतः ही मेरे लंड को सहलाने लगी… मेने उसे पुछा – कैसा लगा मेरा हथियार तुम्हें….?

मेरी बात सूकर उसने मेरी तरफ देखा, फिर नज़र नीची करके बोली – ये तो बहुत बड़ा है…और गोरा भी…

मे – तुम सिर्फ़ ये बोलो – तुम्हें अच्छा लगा कि नही…?

वो – बहुत अच्छा है, पर इतना लंबा और मोटा…ये कैसे…ले पाउन्गि मे इसे ???

मेने उसकी चूत को अपनी मुट्ठी में कस कर दबा दिया और बोला – रानी, बड़ा है, तभी तो मज़ा ज़्यादा देता है….इसे अपने मुँह में लो… और चूसो इसे चाटो…

वो मेरे मुँह की तरफ देखने लगी और सिसक कर बोली – ससिईइ….हइई…मुँह में कैसे लेलुँ… ये तो मूतने वाली चीज़ है…

मे – अरे रानी अभी मूत थोड़ी निकल रहा है इसमें से… ले इसे जल्दी, ये कह कर मेने ज़बरदस्ती उसका मुँह अपने लंड पर दबा दिया… ना चाहते हुए उसका मुँह खुल गया और वो गडप्प से उसके मुँह में चला गया…

कुछ देर में उसके मुँह को अपने लंड पर दबाए रहा… फिर धीरे से दबाब कम किया, तब तक उसे मेरे सुपाडे का स्वाद जम गया, और वो उसे अपनी जीभ से चाटने लगी….

मे तो सातवें आसमान पर पहुँच गया… वो उसे धीरे-2 चाट रही थी, मेने कहा…चूस इसे साली अच्छे से क्यों नखरे कर रही है…

मेरी डाँट सुनकर उसने चूसना शुरू कर दिया.. मेरा हाथ उसके सर को सहलाने लगा… अब वो मज़े लेकर मेरे लंड को अच्छे से चूस रही थी…

मे सोफे पर टाँगें फैलाए बैठ था, और श्यामा नीचे बैठ कर मेरा लंड बड़े चाव से मन लगाकर चूसे जा रही थी…

मे उसके छोटे-2 संतरों को मसल – 2 कर उनसे रस निकालने की नाकाम कोशिश कर रहा था…

लंड चूस्ते हुए उसका हाथ अपनी चूत पर चला गया, और वो उसे मसल्ने लगी…

 
मेरा नाग अब बुरी तरह से फुफ्कार रहा था, सो मेने उसके सर को परे धकेल कर लंड उसके मुँह से बाहर खींच लिया…

उसके चेहरे पर ऐसे भाव आ गये, जैसे किसी बच्चे से उसका मन पसंद खिलौना छीन लिया हो, और आश्चर्य से मेरे चेहरे को देखने लगी…!

मे उसके मन की बात समझते हुए बोला – अब रानी, ये अपने सही बिल में घुसने के लिए तैयार है, ये कह कर मेने उसे उठाकर सोफे पर लिटा दिया, और उसकी तर हो चुकी पैंटी उतारकर फेंक दी…

आहह….. क्या चिकनी चूत थी उसकी, बिल्कुल अधखिली बच्ची के जैसी… थोड़ी सी उभरी हुई, अपना आधे से भी कम मुँह खोले हुए… मानो वो मंद – 2 मुस्करा रही हो…

मे – वाह रानी…! बिल्कुल चिकनी चमेली बन कर आई हो… लगता है, आज ही सफाई की है क्या…

उसने हामी भरते हुए कहा – जीजी ने कहा था, कि आपको सफाई अच्छी लगती है इसलिए आने से पहले ही सॉफ की थी…

तुम्हारी जीजी को कितनी परवाह है.. है ना ! इतना कह कर मेने उसकी पतली – 2 टाँगों को अपने कंधों पर रख लिया… और एक बार उसकी चिकनी चमेली को अपने हाथ से सहला कर मेने उसे चूम लिया….

सस्सिईईईईईईईईईईईई……आहह…..मॉरीइ…माइईईई….उउउफफफफफफफ्फ़…. मेरे चूमते ही उसे मानो 440 व का करेंट लगा हो, फिर मेने जैसे ही अपनी जीभ निकाल कर उसकी मुनिया को चाटा….

गजब ही हो गया…. श्यामा की पतली सी कमर उपर को उठती चली गयी…वो बुरी तरह सिसकने लगी…

मेने उसके भज्नासा को जो थोड़ा सा बाहर को आकर मुँह चमकने लगा था, अपने अंगूठे और उंगली के बीच लेकर मसल दिया…

आआईयईईईईईईईईईईईई…………..नहियीईईईईईई….उूउउफफफफ्फ़…..राजाजीीइई….प्लीज़ अब डाल दो…. हाए…मारीईईईईईई….रीि…अब सहन नही हो रहााआअ….

मेने अपने मूसल पर थूक लगाया, और उसे एक दो बार अपने हाथ से सहला कर अपना सुपाडा उसकी मुनिया के छोटे से छेद पर टीका दिया…

उसके होठों को चूमकर बोला – तैयार हो ना….

उसने हूंम्म्मम… करके हामी भारी…….

फिर मेने उसकी कमर को अपने दोनो हाथों में जकड़ा, और उसे उपर को उठा लिया, साथ ही एक करारा धक्का अपनी कमर में भी लगा दिया…….

नीचे से उसकी कमर का उठना, उपर से मेरी कमर का झटका…. नतीजा….मेरा सख़्त डंडे जैसा लंड उसकी छोटी सी चूत को उधेड़ता हुआ, तीन चौथाई अंदर तक चला गया….

अरईईईईईईई……मैय्ाआआअ….मॉरीईईईईई…….मररर्र्ररर….गाइिईईईईईईईई….. बुरी तरह चीखती हुई श्यामा का सर सोफे से उपर को उठा और वो मेरे सीने से लिपट गयी…

अपने दर्द को पीने के लिए उसने मेरे कंधे पर ज़ोर से काट लिया….और सुबक्ते हुए बोली – पंडित जी छोड़ो मुझे… मर जाउन्गि… जीजी… कहाँ हो..?... बचाओ मुझे….

मेने उसे कसकर अपने बदन से चिपका लिया और उसकी पीठ सहलाते हुए कहा – बस मेरी सौनचिरैया बस… सब ठीक हो गया.. अब और कुछ नही होगा,…

उसे बातों से बहलाकर मेने उसके होठ चूस लिए और अपने हाथों से उसकी गान्ड सहलाते हुए एक उंगली उसकी गान्ड के छेद पर रख कर उसे सहलाने लगा…

इस सबसे उसे थोड़ी राहत मिली… और उसने चिल्लाना बंद कर दिया..

मेने फिर से उसे सोफे पर टीकाया, उसके नन्हे-मुन्ने अमरूदो को सहला कर उसकी कमर पकड़ कर एक और तगड़ा सा धक्का दे दिया…

अब मेरा पूरा लंड उसकी छोटी सी सकरी प्रेम गली में जाकर फँस गया…

वो फिरसे बुरी तरह रोने लगी और सोफे से उठकर मेरे कंधे से चिपक कर सुबकने लगी…

मेने उसकी गान्ड के नीचे हाथ लगाया, उसकी चूत में लंड डाले हुए ही उसे उठा लिया, और अपने बदन से चिपकाए हुए उसको अपने बेडरूम में ले आया…

लंड अपनी चूत में लिए हुए वो किसी छोटी बच्ची की तरह मेरी गोद में चिपकी हुई थी…

बेडरूम का नज़ारा देख कर मेरी आँखें चौड़ी हो गयी…बिस्तर पर दुलारी… मदरजात नंगी.. अपनी चूत में उंगली डाले पड़ी थी, और एक हाथ से अपनी चुचियों को मसल रही थी…

वो बंद आँखों से मज़े में डूबी हुई थी, मेने धीरे से श्यामा को उसके बगल में लिटाया… और धीरे – 2 अपना मूसल उसकी छोटी सी टाइट चूत से बाहर खींचा…

श्यामा के मुँह से कराह निकल पड़ी… दुलारी ने अपनी आँखें खोलकर देखा…और उसके सर को सहला कर बोली – बस एक बार इनके साथ चुदवा लेगी, तो फिर सब ठीक हो जाएगा…

मेरे लंड के साथ उसकी चूत की अन्द्रुनि दीवारें भी बाहर को खिंचने लगी, साथ ही मेरे लंड पर लाल रंग की रेखाएँ सी दिखाई दी…

इसका मतलब, आज सही मायने में उसकी सील टूटी थी…मेने आधा लंड बाहर निकाला और थोड़ा रुक कर फिर से अंदर कर दिया.. वो फिर से कराही लेकिन अब उसे पहले जितना दर्द नही हुआ…

दो चार बार धीरे – 2 अंदर बाहर होने से लंड ने अपना रास्ता बना लिया, अब वो थोड़ा आसानी से आ जा रहा था…

मेने दुलारी को अपनी चूत शयामा के मुँह पर रख कर बैठने को कहा, तो वो मेरी तरफ अपनी चौड़ी चकली गान्ड लेकर उसके मुँह पर अपनी चूत रख कर बैठ गयी…

मे धीरे – 2 अपने धक्कों को गति देने लगा…, दुलारी की चूत से दबे मुँह से अभी भी उसके मुँह से कराह निकल जाती थी..

मेरे सामने एक विशालकाय गान्ड जिसका छेद खुल बंद हो रहा था…

पूछो मत कितना मज़ा आरहा था, ये देख कर, एक नयी चूत जो सही से कुछ पल पहले फटी है, उसके उपर एक अधेड़ औरत अपनी चूत उसके मुँह पर रगड़ती हुई….

 
मेरे धक्कों से श्यामा आगे-पीछे हो रही थी.. जिससे उसका मुँह दुलारी की चूत पर रगड़ खा रहा था, उसने अपनी जीभ भी बाहर निकाल रखी थी, जो कभी – 2 उसकी चूत को चाट लेती…

धक्के लगाते हुए… मेने अपनी बीच वाली उंगली को मुँह में लेकर गीला किया और दुलारी की बड़ी सी गान्ड को सहलाते हुए एक ही झटके में पूरी उंगली उसकी गान्ड में पेल दी…!

आआईयईईईईईईई….क्या करते हो पंडितजी… कराह कर दुलारी ने अपना हाथ पीछे लाकर मेरी कलाई थम ली… और गान्ड को ज़ोर्से भींचकर अपनी चूत श्यामा के मुँह पर ज़ोर से पटकी…

अब मेरे धक्कों की रफ़्तार बहुत बढ़ चुकी थी, उसी लय में मे अपनी उगली भी दुलारी की गान्ड में चला रहा था…जिसकी वजह से उसकी चूत से पानी रिसने लगा, और वो श्यामा के मुँह को भिगोने लगा…

मेरे धक्कों की मार, श्यामा की चूत ज़्यादा देर नही झेल पाई… और वो अपनी कमर को पूरी ताक़त से उछाल कर झड़ने लगी…

उसकी टाँगें मेरी कमर में कस गयी…जिसकी वजह से मेरे धक्के बंद हो गये…

उसके झड़ने के बाद मेने अपना मूसल उसकी चूत से बाहर खींचा… एक पच की आवाज़ के साथ जैसे ही वो बाहर आया, उसकी चूत का रस जो लंड की वजह से बाहर नही आ पाया था.. फॅलफ्लाकर बाहर को निकलने लगा…

मेने उसके रस से अपने लंड को और चुपडा… और औंधी खड़ी दुलारी की कमर पकड़ कर पीछे किया, गीले लंड को उसकी गान्ड के छेद पर रख कर एक तगड़ा सा धक्का दे मारा….

दुलारी के मुँह से एक भयानक चीख निकल गयी…और मेरा आधे से भी ज़्यादा लंड उसकी गान्ड में समा गया…

अचानक से हुए गान्ड पर हमले से दुलारी बिलबिला गयी,… में उसकी पीठ को सहलाते चूमते हुए थोड़ा रुक गया… और अपने हाथ से उसकी चूत को सहलाने लगा…

जब उसका दर्द थोड़ा कम हुआ तो फिरसे एक ज़ोर का झटका मारकर पूरा लंड उसकी गान्ड में फिट कर दिया…

दुलारी ने अपने दर्द को पीने के लिए अपनी एक चुचि श्यामा के मुँह में ठूंस दी… और खुद उसकी चुचियों को मसल्ते हुए गान्ड हिलाने लगी…

मेने उसकी गान्ड में धक्के लगाने शुरू कर दिए… उसकी चौड़ी गान्ड पर जब मेरी जांघों के भारी पाट पड़ते तो एक ठप-ठप सी आवाज़ होने लगती…

15-20 मिनिट में मेने दुलारी की गान्ड को खूब अच्छी तरह से कूटा, लेकिन अब मेरा रुकना ज्यदा देर संभव नही था…

मेरे मुँह से हुउंम…हुउन्न्ह… जैसी आवाज़ें निकल रही थी, फिर जैसे ही मेरा पानी छूटने वाला था… तो मेने हुंकार भरते हुए कहा…

हुउन्न्ह… मेरा निकलने वाला है, दुलारी… कहाँ निकालु….वो दोनो फ़ौरन उठकर मेरे सामने बैठ गयी… और फिर दुलारी ने मेरा लंड पकड़ कर श्यामा के मुँह की तरफ कर दिया…

मेरी जोरदार पिचकारी सीधी उसके मुँह में गयी… दो तीन धार उसे पिलाने के बाद वाकी का उसने अपने मुँह में ले लिया… और बचा हुआ सारा रस खुद गटक गयी…

उसके बाद उसने मेरा लंड चूस चाट कर चमका दिया… जो अब कुछ सुस्त पड़ चुका था…

श्यामा के गालों को पकड़ कर दुलारी बोली – क्यों री कैसा लगा पंडितजी का प्रसाद..?

वो चटकारे लेकर बोली – बहुत टेस्टी था जीजी… धन्यवाद.. आपने इनसे मेरी चुदाई करवाकर मुझे बिन मोल खरीद लिया…

उसने उसे किसी बच्ची की तरह अपने अंक से लिपटा लिया….

मे पस्त होकर पलंग पर पसर गया, थकान के कारण मेरी आँखें बंद हो गयी..

 
URL]


URL]


URL]
 
Back
Top