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लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस) complete

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अब इतनी सी बात के लिए तुम ऐसी रूठ गयी हो कि मुझसे दूर-दूर भाग रही हो… ये ठीक नही है कि अपने रसीले होठों की प्यास भी ना बुझाने दो… इतना बोलकर मेने उसके रसीले होठों को चूम लिया…

निशा मुस्करा उठी, और बदले में किस करते हुए बोली – आप बहुत चालू हो, मुझे थोड़ी देर के लिए भी नाराज़ नही रहने देते…

मे – नाराज़ होने में मज़ा आता है तुम्हें..?

वो – हां ! जब आप मनाते हो तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है…ये बोलकर वो मेरे सीने से चिपक गयी…जिससे मेरा अकड़ू पप्पू उसकी मुनिया के दरवाजे पे सॅट गया..

मेने कसकर उसकी गान्ड को मसल दिया… और बोला – तो ठीक है, फिरसे नाराज़ हो जाओ… मे फिरसे तुम्हें मनाने की कोशिश करूँगा…

वो मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर बोली – नही अब मे ये पाप नही करूँगी… ये बेचारा किसी से मिलने के लिए व्याकुल हो रहा है, इसके साथ नाइंसाफी नही कर सकती मे…

मेने उसकी मिनी नाइटी को गान्ड तक उपर करके, पैंटी के उपर से ही उसकी गान्ड की दरार में उंगली को उपर से नीचे घुमाने लगा…

जब मेरी उंगली.. अपना सफ़र तय करते हुए उसकी राम दुलारी के गेट तक पहुँची, तो उसने अपनी जाँघो को कस लिया… और मेरे लंड को कस्के मसल्ति हुई…. सिसकारी भरते हुए बोली…..

सस्स्सिईईईईईई……मत करो ना…. उंगली हटाओ वहाँ से… बदमाश कहीं के…

मे – तो फिर तुम मेरे पप्पू को मसल मसल कर उसका कीमा क्यों बना रही हो…? इसको बदमाशी नही बोलते…?

निशा मेरे सीने पर किस करते हुए बोली – वो तो मे देखना चाहती हूँ, कि ये और कितना कड़क हो सकता है…

इतना बोलकर उसने मेरा शॉर्ट नीचे खींच दिया और किसी नागिन सी लहरती हुई नीचे को सरकती चली गयी…, मेरे लंड को अपनी दोनो हथेलियों के बीच दबा कर उसे मथने लगी… मानो छाछ बिलो रही हो…

निशा की हरकतों ने मेरा बुरा हाल कर दिया था, मेरा लंड बुरी तरह से ऐंठने लगा…मुझे लगा जैसे ये फट जाएगा…

मेने लपक कर निशा की कमर को हाथों में भर लिया, और अपनी ओर खींचते हुए उसकी गान्ड को अपने मुँह के उपर रख लिया…

निशा ने अपना गाओन निकाल फेंका, और मेरा लंड चूसने लगी….

अब हम दोनो 69 की पोज़िशन में आ चुके थे, पहले से ही एक दूसरे की छेड़-छाड से माहौल बहुत गरम हो चुका था…

मेने अपनी जीभ से उसकी चूत को पूरी लंबाई तक चाटा… तो उनसे अपने गान्ड के पाटों को कस कर भींचते हुए, अपनी चूत मेरे मुँह पर दबा दी…

मेरी नाक, उसकी क्लिट को रगड़ने लगी… और जीभ की नोक जितना हो सकता था, उतनी अंदर जाकर उसकी सुरंग की सैर करने लगी….

इससे निशा की उत्तेजना और बढ़ गयी, और उसने मेरे पूरे 8” लंबे लंड को अपने गले तक मुँह में भर लिया…और मेरे अंडकोषों को सहलाते हुए ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी…

अब मेरा बहुत बुरा हाल हो चुका था… कोई रास्ता नही बचा कि में अपने प्रेशर को और देर तक रोक सकूँ… सो अपनी कमर को नीचे से उचका-2 कर उसके मुँह को चोदने लगा…

निशा भी अपनी गान्ड को उपर नीचे करके मेरे मुँह को चोदने लगी…मेरे दोनो हाथ उसकी गान्ड को मसल्ते जा रहे थे, बीच – 2 में मेरी उंगली, उसकी गान्ड के भूरे से छेद को भी कुरेद रही थी…

आख़िर कोई कब तक अपने आप को कंट्रोल करे…., मेने एक करारा सा धक्का अपनी कमर में लगाया….

मेरा पूरा लंड निशा के मुँह में गले तक घुसकर पिचकारी छोड़ने लगा…

उत्तेजना इतनी बढ़ गयी थी, कि मुझे पता ही नही चला, कि कब मेरी एक उंगली पूरी की पूरी निशा की गान्ड के छेद में घुस गयी… और उसकी चूत ने भी अपना फब्बरा मेरे मुँह में छोड़ दिया…

जाने कितनी ही देर तक एक दूसरे का माल पानी गटक कर हम यौंही पड़े रहे……

आज पहली बार हम ने एक दूसरे के अंगों को इस तरह से प्यार करके उनसे निकलने वाले अमृत का पान किया था….

मेने निशा को अपनी बाहों में कसते हुए कहा… मज़ा आया जानेमन…

वो शर्मा गयी… और मेरे सीने में अपना मुँह छिपा कर बोली… आपने तो मुझे मार ही डाला था… मेरी साँस भी रुकने लगी थी..

 
मेने उसके चेहरे को उपर किया और उसके होठों को चूम कर कहा – मेरा घी कैसा लगा, वैसे मुझे तुम्हारा अमृत बड़ा अच्छा लगा…

वो नज़रें नीची करके बोली – आपका भी बहुत टेस्टी था… मुझे नही पता था, कि इसमें इतना स्वाद होता है…

बातें करते हुए हमारे हाथ फिर एक बार शरारत पर उतर आए, और कुछ ही देर में वासना फिरसे अपना असर दिखाने लगी…

निशा को मेने अपने उपर खींच लिया और उसके होत चूस्ते हुए अपने लंड को उसकी सन्करि गली के मुँह पर लगा दिया….

वो उसके उपर बैठती चली गयी, पूरा लंड अंदर लेते ही वो मेरे उपर लेट गयी.. और अपनी चुचियों को मेरे बालों भरे सीने से रगड़ते हुए बोली…

अहह….जानू, कितना बड़ा है आपका ये हथियार…, मेरी नाभि तक फील हो रहा है….

तुम्हें इसे लेने में कोई तकलीफ़ होती है…उसकी गान्ड मसल्ते हुए पुछा मेने.….

शुरू में लेने में थोड़ा दर्द देता है, लेकिन फिर तो बहुत मज़ा आता है… सीईईईईई…आहह… उसने धीरे से अपनी गान्ड मटकाते हुए कहा…

धीरे – 2 उसकी कमर की रफ़्तार ज़ोर पकड़ने लगी.. और वो मज़े से आँखें बंद करके, अनप-शनाप बड़बड़ाती हुई… ज़ोर ज़ोर्से अपनी गान्ड मेरे लंड पर पटकने लगी….

मेने भी नीचे से अपनी कमर उछाल्ना शुरू कर दिया…. फिर कुछ ही देर में हम दोनो अपने परम सुख को पा कर एक दूसरे से चिपके चैन की नींद सो गये…!

दूसरे दिन प्राची और उसकी माँ मधुमिता जी हमारे घर आ गयी, सबने उन्हें बहुत आदर सम्मान दिया…

प्राची सभी को पसंद आई, भाभी और निशा ने उसे अपनी छोटी बेहन जैसा प्यार दिया….

भैया तो पहले से ही उसपर लट्तू थे, हमारे घर का प्रेम से भरा माहौल देख कर मधुमिता जी बहुत प्रभावित हुई…

बात पक्की होते ही उनकी आँखों से आँसू निकल पड़े, भाभी ने जब कारण पुछा तो उन्होने डब डबाइ आँखों से भाभी का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा…

मेरी बेटी कितनी भाग्यशाली है जो आपके जैसा प्यारा और भरा पूरा परिवार मिला रहा है उसे…

मेने कभी सपने में भी नही सोचा था, कि एक बेसहारा माँ की बेटी ऐसे खानदान की बहू बन सकेगी…

भाभी ने उनको गले लगाते हुए कहा – आप प्राची की बिल्कुल फिकर मत करना, वो हमारी बेहन की तरह ही यहाँ रहेगी…!

उन्होने अपने आँसू पोन्छ्ते हुए कहा – इसी खुशी में तो मेरी आँखें छलक पड़ी, भगवान ने मेरी सबसे बड़ी समस्या इतनी आसानी से हल कर दी…

मुझे अब कोई शंका नही है कि मेरी बेटी आप लोगों के साथ कैसे रहेगी…

फिर सारी बातें पक्की होते ही शादी की डेट निकलावा कर दिन ढलते ही उसी दिन भैया के साथ वो दोनो माँ-बेटी वापस लौट गयी…!

उन्हें विदा करके मे गाओं में चक्कर लगाने निकल गया…, घूमते हुए लोगों से मिलते मिलते जब रामदुलारी के घर की तरफ पहुँचा,

वो मुझे अपने घर के बाहर ही जानवरों को चारा डालती हुई मिल गयी, देखते ही अपना काम-धंधा छोड़कर मुझे अपने घर के अंदर खींचकर ले गयी…!

मेन गेट बंद करके चौक से होते हुए सामने पड़े छप्पर के नीचे एक चौकी बिछाकर मुझे बिठाया और अपनी देवरानी श्यामा को आवाज़ दी…

अरी श्यामा कहाँ है तू…?

अंदर एक कोठे से श्यामा की आवाज़ आई… मे यहाँ हूँ जीजी…

दुलारी – अरी देख तो कॉन आए हैं…, जल्दी बाहर आ…

एक मिनिट में ही श्यामा एक पुराने से लहंगा और चोली पहने बिना चुनरी डाले बाहर भागती हुई निकली…!

जैसे ही उसकी नज़र मेरे उपर पड़ी, वहीं दरवाजे में ही उसके ब्रेक लग गये, शरमाती हुई वो वहीं ठिठक गयी, फिर नज़र नीची करके वापस कोठे की तरफ जाने के लिए जैसे ही पलटी…

मेने उसे आवाज़ देकर रोक लिया.. अरे क्या हुआ श्यामा प्यारी, मुझसे कैसी शर्म, आओ..आओ..!

रामदुलारी मंद मंद मुस्कुराती हुई बोली – अरी आ जा, पंडित जी से कैसी शर्म, ये तो अपने ही हैं.., चल इन्हें चाय पानी पिला तब तक मे काम धंधा ख़तम करके आती हूँ,

ये कहकर उसने मेरी तरफ आँख मारी, और मुड़कर बाहर की तरफ चली गयी…!

श्यामा नज़रें झुकाए, धीरे-धीरे कदम बढ़ाती हुई मेरे पास आकर खड़ी हो गयी, मेने अपना एक हाथ आगे करके उसके गोल-गोल चुतड़ों पर फिराया, फिर उसका हाथ पकड़ कर अपनी गोद में बिठा लिया…!

वो शायद अंदर थोड़ा बहुत बनाव शृंगार कर रही होगी, सो उससे सस्ते से पाउडर और क्रीम की खुसबु आ रही थी…

लाल रंग की लिपीसटिक लगे पतले पतले होंठ काँप रहे थे, इन पुराने-धुराने कपड़ों में श्यामा का छरहरा बदन बड़ा ही कामुक लग रहा था…

मेरे गोद में बैठी श्यामा का बदन काँपने लगा था, उसके गाल को चूमकर मेने उससे पूछा – ऐसे काँप क्यों रही हो तुम, क्या डर लग रहा है मुझसे..?

उसने एक नज़र मेरी तरफ देखा, और फिरसे नज़र झुका कर थर-थराते स्वर में बोली – न.ना..नही..वो..बस..वो..एकदम से आपको देख कर पता नही शायद खुशी से ऐसा हुआ है..

फिर उठने का प्रायोजन करते हुए बोली – आप बैठिए, मे आपके लिए चाय बनाकर लाती हूँ…!

बीते दो-ढाई महीने में शयामा के गोल-गोल गेंद जैसे चूतड़ कुछ गुदगुदे और उसके अनार रसीले से लग रहे थे नीचे वो ब्रा भी नही पहने थी..

मेने उसके रसीले अनारों को अपने हाथ से सहलाया, फिर उसके पतले-पतले रसीले होठों पर अंगूठा फिराते हुए कहा –

मे यहाँ चाय पीने नही आया हूँ

श्यामा मेरी जान, पिलाना ही है तो इन रसीले होठों का रस पिला दो…

मेरी बात सुनकर वो बुरी तरह से लजा गयी.., मेरी गोद से उठकर खड़ी हो गयी और मेरा हाथ पकड़कर अपने कमरे की तरफ ले जाने लगी…!

उसके पीछे पीछे चलते हुए मेने उसकी गान्ड को अपने हाथ से भींचते हुए कहा – आहह…तुम्हारी गान्ड तो मक्खन जैसी हो गयी है..,

कमरे में घुसते ही उसने मेरे गाल पर किस कर दिया और बोली – ये सब आपकी वजह से ही है..इतना बोलकर उसने अंदर से कमरे की सांकल लगा दी,

मेने उसे पकड़कर अपने सीने से चिपका लिया और उसके रसीले होठों का रस पीने लगा…वो किसी बेल की तरह मेरे बदन से लिपट गयी…!

पाजामे में मेरा लंड फुफ्कार मार रहा था, उसकी गोल-गोल गान्ड को हाथों में कसकर मेने उसकी चूत को अपने लंड के सामने चिपका लिया…

लंड की ठोकर चूत पर पड़ते ही वो रिसने लगी…., श्यामा की कजरारी आँखें किसी शराबी की तरह लाल हो गयी…, उसने अपने दोनो हाथ मेरी पीठ पर कस लिए..

मेने एक हाथ से उसके लहँगे का नाडा खींच दिया, वो सरसरकार नीचे गिर पड़ा…, नीचे उसने पैटी भी नही पहनी थी…,

छोटे-छोटे घुंघराले बालों से घिरी उसकी छोटी सी चूत अपने हाथ से सहला कर मेने अपनी एक उंगली उसकी रसीली चूत में डाल दी…!

सिसकी भरते हुए श्यामा मुझसे और ज़ोर्से से चिपक गयी…, फिर उसने मेरे पाजामा को नीचे खींच कर अंडरवेर में हाथ डाल दिया, और मेरे लंड को मसल्ने लगी…!

ये सब कुछ अभी तक खड़े-खड़े ही हो रहा था…, मेरी उंगली उसकी चूत में गहराई तक जा रही थी, जिससे उसकी चूत बुरी तरह से गीली हो चुकी थी…

फिर वो अपने पंजों पर नीचे बैठ गयी, और मेरे अंडरवेर को नीचे करके उसने मेरे लंड को चूम लिया…,

मेरी आँखों में देखते हुए बोली – बहुत याद आती है इसकी पंडित जी, आँखें तरस गयी थी इसे देखने को…

 
मेने उसकी चोली के बटन खोलते हुए कहा – बस देखने को ही या कुछ और के लिए भी…,

उसने मेरे सुपाडे को खोलकर उसके चारों ओर अपनी जीभ घुमाई फिर उपर देख कर मुस्कराते हुए उसने उसे अपने मुँह में निगल लिया…

मेने श्यामा की चोली निकाल कर उसके अनारों को मसल्ने लगा, उसके कड़क हो चुके निप्प्लो को अंगूठे और उंगली के बीच दबाकर मसल दिया…

वो लंड मुँह से निकालकर सिसक पड़ी, और मेरे सामने खड़े होकर बोली – अब जल्दी से डाल दो पंडित जी, मेरी चूत में आग लगी है.., उसे जल्दी से बुझा दो मालिक…!

मेने खड़े-खड़े ही श्यामा की एक टाँग को उपर उठा लिया, उसने मेरे लंड को अपनी चूत के मुँह पर सेट कर लिया, मेने उसे अपनी ओर खींच कर अपना मूसल उसकी रसीली चूत में सरका दिया…

चूत हद से ज़्यादा गीली थी, सो हल्के से इशारे से ही आधा लंड सर-सरकार उसकी चूत में समा गया…,

दर्द से श्यामा की कराह निकल पड़ी, आअहह….उउउफफफ्फ़….धीरे मालिक…दर्द होता है…, सस्सिईइ…ऊओ…मैयाअ…मोरी…कितना मोटा है…

मेने उसके होठों को अपने मुँह में क़ैद कर लिया, और एक हाथ से उसकी गान्ड को पकड़ कर ज़ोर्से अपनी ओर खींचा….

एक ही झटके में पूरा लंड उसकी छोटी सी चूत में घुस गया…, मुँह ही मुँह में उसकी दर्द भरी कराह घुट कर रह गयी…,

दूसरे हाथ से उसकी चुचियों को सहलाते हुए मेने हल्के-हल्के धक्के लगाना शुरू कर दिया,

अब उसका दर्द भी चला गया था, सो वो भी अपनी तरफ से अपनी कमर चलाने लगी…,

धक्के लगाते लगाते मेरा दूसरा हाथ भी उसकी गान्ड के पीछे चला गया, और मेने उसे अपनी गोद में उठा लिया….

उसने अपने दोनो पैर मेरी कमर में लपेट लिए, और गले से लिपटकर पूरी शिद्दत से अपनी गान्ड को आगे पीछे करके मेरे लंड को अपनी चूत में अंदर बाहर करने लगी…

5-7 मिनिट में ही उसकी चूत ने अपना लावा उगल दिया, और वो बुरी तरह से मेरे लंड से चिपक गाइिईई…..

फिर मेने उसे गोद में लिए हुए ही उसके बिस्तर पर लिटा दिया, और उसकी टाँगों को अपनी जांघों पर चढ़ाकर मेने फिर से उसकी झड़ी हुई चूत में अपना लंड पेल दिया…

मज़े से उसकी आँखें बंद हो गयी, और मुँह से एक मीठी सी कराह फुट पड़ी…!

मेरा भी अब लंड पूरी मस्ती में पहुँच चुका था, कुछ ही पलों का मेहमान था, सो मेने उसकी टाँगों को और उपर करके दे दना दन धक्के लगाने शुरू कर दिए…

श्यामा मेरे धक्कों की मार नही झेल पा रही थी, लेकिन मुझे झेलना अब उसकी मजबूरी थी, उसकी चूत एक बार फिर झड चुकी थी…

मेरा भी लावा फूटने को आ चुका था, दो-चार तगड़े धक्के मारकर मेने एक जोरदार पिचकारी उसकी चूत में मार दी…

अभी मे पूरी तरह से झड भी नही पाया था, कि बाहर से दरवाजे पर हल्की सी दस्तक हुई…,

मेने फटाफट अपना आध झडा लंड बाहर निकाला और श्यामा के मुँह में डाल दिया…

बचा-खुचा माल वो गटक गयी, और मेरे लंड को चाट कर साफ कर दिया…,

कपड़े पहन कर मे जैसे ही द्रवाजा खोल कर बाहर आया, सामने दुलारी खड़ी थी..

मेने उसे सवालिया नज़र से देखा, वो बोली – अच्छा हुआ पंडित जी आपने समय पर सब काम निपटा लिया…, मेरे बच्चे और देवर आने ही वाले हैं…

मेने दुलारी के बड़े-बड़े मम्मों को मसल्ते हुए कहा – आपका नंबर फिर कभी अब मे निकलता हूँ, ये कहकर उसे मुस्कुराता हुआ छोड़ कर मे वहाँ से निकल लिया……!

रात को खाने के दौरान तय हुआ, कि भैया की शादी बड़े सादे तरीके से ही होगी, ज़्यादा शोर-शरावा करने की कोई ज़रूरत नही है…, खंखा ज़्यादा लोगों को दूसरी शादी का कारण बताने की ज़रूरत ना पड़े तो ही अच्छा…

वैसे तो बात पूरे इलाक़े में फैल ही चुकी थी, फिर भी जाने-जाने को एक्सप्लेन करते फ़िरो, इससे अच्छा ज़्यादा भीड़-भड़क्का ही ना हो…

लेकिन फिर भी घर परिवार के सभी रिस्ते नातेदारो को तो बुलाना ही था…

सो आनन फानन में सबको निमंत्रण भिजवा दिए, रामा दीदी चूँकि काफ़ी दिनो से नही आ पाई थी…,

बहनोई साब देल्ही में एक मल्टी नॅशनल कंपनी में सेल्स मॅनेजर की पोस्ट पर हैं, वहीं रहते थे…

मेने लोकेश जीजा जी को फोन लगाया, उन्हें भैया की शादी के बारे में बताया… और रिक्वेस्ट की, वो दीदी को लेकर एक दो दिन में ही आजाएँ…

उन्होने आने में अपनी असमर्थता जाहिर की, और कहा कि वो शादी के एक दिन पहले ही आ पाएँगे, ऑफीस का काम बहुत अर्जेंट है, इसके अलावा देल्ही के बाहर के कस्टमर विज़िट भी करने हैं…

तो मेने खुद ही जाकर दीदी को लाने का प्रोग्राम बनाया, और सोचा कि क्यों ना दो दिन पहले देल्ही जाया जाए, ताकि अपने गुरु प्रोफ़ेसर. राम नारायण जी और उनकी बेटी नेहा से भी मिल लूँगा…

मेने शाम को लोकेश जीजाजी को फोन करके अपने प्रोग्राम के बारे में बता दिया कि मे दीदी को लेने कल आ रहा हूँ…

दूसरे दिन मे देर रात की ट्रेन से देल्ही के लिए निकल लिया, सुबह 8 बजे न्यू देल्ही स्टेशन पर था, वहाँ से मेने रिक्सा लिया और चल पड़ा रामा दीदी के घर की तरफ…

 
आधे घंटे के बाद मे उसके फ्लॅट के सामने खड़ा था, मेने डोरबेल दबाई…. टिद्डिनग…..टॉंग…..!

कुछ देर के बाद, गेट खुला…. सामने रामा दीदी एक सफेद टाइट सी टीशर्ट और लोंग स्कर्ट में मेरे सामने खड़ी थी….

उसके 34+ उरोज उस टाइट टीशर्ट को सामने से फाड़ डालने की कोशिश में थे, अंदर पहनी हुई ब्रा की शेप भी टीशर्ट के बाहर से ही अपना साइज़ बताने की कोशिश में थी.

मुझे देखते ही दीदी एकदम खुश हो गयी… और दरवाजे पर खड़े-खड़े ही वो मेरे गले से लिपट गयी…, उसके पुष्ट उरोज मेरे सीने में बुरी तरह से दब गये….!

मेरे एक हाथ में मेरा बाग था, दूसरा हाथ उसकी पीठ पर ले जाकर सहलाने लगा…फिर जब वही हाथ उसकी पीठ से सरक कर उसके चुतड़ों पर पहुँचा…

और जैसे ही उन्हें सहला कर दबाया, उसने मेरे होठ चूम लिए… इतने में ही मेरा पप्पू अकड़ने लगा… लेकिन जगह और परिस्थिति का भान होते ही मेने उसके कान में फुसफुसा कर कहा…

दीदी ! अंदर तो आने दो…!

मेरी बात सुनते ही वो झट से अलग हो गयी… और नज़र नीची करके मुस्कुराते हुए बोली – आ जा भाई, अंदर आजा…

मे उसके पीछे – 2 अंदर हॉल में पहुँचा… चुचियों के साथ - साथ उसकी गान्ड भी पहले से चौड़ी हो गयी थी, और पेट भी थोड़ा मांसल हो गया था……

आगे चलते हुए उसकी गान्ड की थिरकन स्कर्ट के सॉफ्ट कपड़े में साफ-साफ दिखाई दे रही थी….

मन किया कि लपक कर उसे पीछे से अपनी बाहों में कस लूँ, और स्कर्ट उपर करके उसकी मटकती गान्ड में खड़े-2 ही लंड पेल कर चोद डालूं…

लेकिन ऐसा कर नही सकता था, सो अपने फ्री हाथ से लंड मसोस कर रह गया…!

हॉल में सोफे पर एक क्यूट सा गोरा-चिटा, प्यारा सा गोल-मटोल सा बच्चा बैठा टीवी पर कार्टून देखने में मस्त था….

जब हम हॉल में पहुँचे तो वो हमें देख कर बोला – ये कॉन हैं मम्मी…

दीदी – बेटा ये तेरे मामू हैं… नमस्ते करो…

उसने अपने दोनो हाथ जोड़कर मुझे नमस्ते किया, मेने बॅग नीचे रख कर उसे गोद में उठा लिया, और उसके गाल पर एक पप्पी लेकर बोला…

मेरा प्यारा भांजा…कितना समझदार है, क्या नाम है बेटा तुम्हारा…

वो – आर्यन..! मम्मी मुझे आरू बोलती हैं…

मे – वेरी स्मार्ट बॉय… बहुत प्यारी – 2 बातें करते हो…

फिर मे उसे अपनी गोद में लेकर सोफे पर बैठ गया, दीदी बोली – तुम दोनो खेलो तब तक मे तुम्हारे लिए कॉफी लाती हूँ… कहकर वो किचन की तरफ चल दी…

मे उसकी मटकती गान्ड को देखता रहा…और अपने लौडे को जीन्स में मसलता रहा… आरू को सोफे पर बिठा दिया, वो फिरसे अपने कार्टून देखने में व्यस्त हो गया..

कुछ देर बैठा था, कि लोकेश जीजा जी, एक तौलिया लपेटे बाथरूम से नहा कर निकले, मुझे देखते ही बोले – ओहो…साले साब आ गये… मेने अपनी जगह से उठकर उनके पैर छुये…

वो मेरे बाजू पकड़ते हुए बोले – अरे, ये सब अब कहाँ चलता है… आइए गले मिलते हैं…

मेने कहा – कहीं आपकी तौलिया खुल गयी तो…., मेरी बात सुनते ही वो ठहाका लगा कर हँस पड़े, और अपने रूम में कपड़े पहनने चले गये…

इतने में दीदी कॉफी ले आई, और हम दोनो ने कॉफी पी, कॉफी पीकर मे फ्रेश होने चला गया, और वो फिरसे किचन में घुस गयी, नाश्ते का इंतज़ाम करने…

नाश्ते के दौरान जीजू बोले – रामा ! मेरा बॅग रेडी कर देना, दो दिन के लिए मुंबई जाना है, कस्टमर मीटिंग के लिए…!

जीजू के ऑफीस जाने के बाद दीदी मेरी बगल में आकर सोफे पर बैठ गयी.. और घर की राज़ी-खुशी पुच्छने लगी…

मेने नहाने के बाद एक टीशर्ट और पाजामा पहन लिया था….बात-चीत करते – 2 उसका हाथ मेरी जाँघ पर आ गया, और धीरे – 2 वो उसे सहलाने लगी…

मेने अपनी नज़र उठाकर उसकी तरफ देखा… उसका ध्यान तो मेरे पाजामे में बन चुके उठान पर ही था, जिसे वो धीरे – 2 अपनी उंगलियों से टच करने की कोशिश में मशगूल थी…

मे नही चाहता था, कि अब उसके शादी-सुदा जीवन में कोई हलचल हो…

जैसे ही उसका हाथ मेरे लंड से टच हुआ, मेने कहा – दीदी ! ये क्या कर रही हो...?

उसने अपनी नज़रें मेरी तरफ की और मंद – 2 मुस्कराते हुए बोली – क्यों ! तुझे नही पता मे क्या कर रही हूँ…?

मे – मुझे पता है तभी तो बोला…, लेकिन अब क्यों कर रही हो… अब तुम शादी सुदा हो…क्या ये सब हमारे लिए सही है..?

वो – क्यों ! भाभी भी तो शादी-सुदा हैं, फिर उनके साथ क्यों..? और मेरे साथ क्यों नही..?

और फिर ये हमारे बीच कोई नयी बात तो है नही, निशा के साथ आया था तब भी तो मे शादी सुदा थी.., फिर अब ये सवाल क्यों..?

मे – तुम क्या जीवन भर भाभी के संबंध को लेकर मुझे ब्लॅकमेल करती रहोगी…?

वो मेरे बदन से लिपटती हुई बोली – नही भाई..! प्लीज़ ऐसा मत बोल, मे तो बस तेरी बात का जबाब दे रही थी,

सच बात तो ये है कि, जब-जब तेरे साथ बिताए हुए वो दिन आज भी जब याद करती हूँ, तो बस पुच्छ मत….

प्लीज़ भाई ! मुझे ग़लत मत समझ, तेरे साथ सेक्स करने में मुझे जो आनंद मिलता है, उसे याद करते ही मे बैचैन हो जाती हूँ, और एक बार फिरसे वोही मज़ा लेने का मन करता है…!

मे – क्यों ज़ीजे के साथ मज़ा नही आता…?

वो – ऐसी बात नही है, लेकिन तेरे साथ करने का मज़ा ही निराला है…बस एक बार प्लीज़………!

उसकी बड़ी – बड़ी चुचियों की चुभन से वैसे भी मेरा हाल बहाल होता जा रहा था, सो उसके चेहरे को अपने हाथों में लेकर मेने उसके होठ चूमते हुए कहा..

आर्यन यहीं बैठा है, इसे तो सुला देती…

वो बोली – चल बेडरूम में चलते हैं, वो तो कार्टून देखते-देखते यहीं सो जाएगा… और मेरा हाथ पकड़ कर अपने बेडरूम में खींचकर ले गयी…..!

रूम में घुसते ही, दीदी ने गेट लॉक किया और पलट कर मेरे उपेर भूखी बिल्ली की तरह टूट पड़ी…

धक्का देकर मुझे पलग पर गिरा दिया, और पाजामा के उपेर से ही उसने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में कस कर मसल दिया…

मेरे मुँह से ह…निकल गयी…आअहह…क्या करती हो, उखाड़ दोगि क्या इसे..?

वो खिल-खिलाती हुई बोली – काश इसे उखाड़ कर अपने पास रख पाती, क्या मस्त लंड है तेरा भाई… मेरी चूत तो इसे देखते ही गीली हो गयी…

मेने उसकी स्कर्ट को उठाकर पैंटी के उपर से उसकी चूत पर हाथ फिराया, सचमुच उसकी पैंटी गीली हो रही थी…फिर उसकी मुनिया को मुट्ठी में भरते हुए कहा –

ये तो सच में बहुत गीली हो रही है… ये कहकर मेने उसे अपने नीचे किया और उसकी पैंटी को खींच कर निकाल दिया,

उसकी स्कर्ट में मुँह डालकर मेने उसकी रस गागर को चाट लिया….

 
मेने उसकी स्कर्ट को उठाकर पैंटी के उपर से उसकी चूत पर हाथ फिराया, सचमुच उसकी पैंटी गीली हो रही थी…फिर उसकी मुनिया को मुट्ठी में भरते हुए कहा –

ये तो सच में बहुत गीली हो रही है… ये कहकर मेने उसे अपने नीचे किया और उसकी पैंटी को खींच कर निकाल दिया,

उसकी स्कर्ट में मुँह डालकर मेने उसकी रस गागर को चाट लिया….

रामा अपनी चुचियों को मसल्ते हुए सिसक उठी- सीईईईईईईईईईईई……….आअहह…. मेरे भाईईईईईईईईईई…….चुस्स…इसे….हाई…जोरेसीए…खा जा इसे…….बहुत फुदकती है, मेरी सौत……..आराम से सोने भी नही देती..

फिर उसने अपने टॉप को उतार कर एक तरफ को उच्छाल दिया… उसके बाद स्कर्ट भी उपर उठा लिया, और अपनी गान्ड उठाकर उसे भी सर के उपर से निकाल कर एक ओर को फेंक दिया….

मेने उसकी चूत चाटते हुए उसके चेहरे की तरफ देखा… वो आँखें बंद किए, ब्रा के उपर से ही अपनी चुचियों को मसले जा रही थी…

मेने भी अपना एक हाथ उपर किया, और उसकी एक चुचि को ज़ोर-ज़ोर से मसल्ने लगा…

रामा दीदी अपने होशो-हवास खो चुकी थी, अपनी खंबे जैसी मोटी एक जाँघ मेरे कंधे पर रख कर मेरे सर को अपनी चूत पर दबाए जा रही थी…

आँखें बंद किए, वो मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में कसकर कमर उच्छलती हुई झड़ने लगी….

मेने शॅपर-शॅपर उसका सारा कामरस चाट लिया… वो ऐसे हाँफ रही थी, मानो मीलों दौड़ लगाकर आई हो…

फिर उसने मेरे कंधे पकड़ कर अपने उपर खींचा, और मेरे होठों पर लगा अपनी चूत का रस चाटते हुए बोली –

तुझसे ज़्यादा मज़ा और कोई नही दे सकता भाई….तू सच मच बहुत बड़ा औरत्खोर है…

निशा बहुत भाग्यशाली है, जिसे तेरे जैसा पूर्ण पुरुष जीवनसाथी के रूप में मिला है…

कैसे एक औरत को खुश किया जाता है, तू भली भाँति जानता है…

मे – अब डायलॉग देना बंद करो और मेरे लौडे का कुछ करो, बेचारा फटने की पोज़िशन में पहुँच गया है…

हँसते हुए उसने मुझे पलटकर बिस्तेर पर लिटाया, और खुद मेरी जांघों के बीच आकर मेरे मूसल को मसलते हुए बोली ….

वाउ ! भाई, लगता है, दोनो बहनें मिलकर तेरे हथियार की अच्छे से सेवा करती हैं, ये तो पहले से भी तगड़ा हो गया है….

आहह….जब ये मेरी चूत को चीरते हुए अंदर जाएगा….सीईईईईईईईईई…. उफफफफफ्फ़….सोच कर ही मेरी चूत फिर गीली होने लगी….यार……

फिर उसने उसे पहले प्यार से चाटा, उसके बाद गद्दप्प से अपने मुँह में ले लिया, और लॉलीपोप की तरह चूसने लगी…

मेने उसकी ब्रा को उसके बदन से अलग कर दिया, उसकी चुचियाँ जो हिल-हिल कर मुझे ललचा रही थी, उन्हें हाथों में लेकर मसलने लगा…

रामा दीदी एक हाथ से अपनी चूत सहलाते हुए मेरा लंड पूरी लगन से चूसे जा रही थी…

मेरा लंड अब कभी भी अपना मुँह खोल सकता था, स्वतः ही मेरी कमर उपर उठने लगी, और मेने दीदी के सर को अपने लंड के उपर दबाकर सारा माल उसके गले में उडेल दिया…

उसे अपने बगल में लिटाकर उसके गदराए बदन पर हाथ फेरते हुए बोला… दीदी ! अब तो तुम पहले से भी ज़्यादा गदरा गयी हो..

वाउ दीदी ! क्या मस्त चुचियाँ हो गयी हैं, तुम्हारी…, लगता है बाप-बेटे दोनो ही खूब चूस्ते हैं…ये कह कर मेने उसकी एक चुचि को अपने मुँह में भर लिया, और चूसने लगा… दूसरे के निपल को अपने अंगूठे से पकड़ कर ज़ोर मसला….

दीदी बुरी तरह सिसक पड़ी… और मेरे लंड को ज़ोर से मसल्ते हुए बोली – बाप-बेटों के चूसने के बाद भी ये साली मचलती ही रहती हैं….

आअहह…चूस ले भाई…ज़ोर लगाकर पी इनको….हाईए रीए…खा जा….उउउफ़फ्फ़…

हम दोनो फिर एक बार गरम हो गये, दीदी से अब रहा नही जा रहा था, सो मेरे लंड को हाथ में लेकर अपनी गरम चूत के मुँह पर घिसते हुए बोली…

अब डाल दे भाई अपने इस डंडे को मेरी चूत में…चोद अपनी बेहन को मेरे भाई… मेरे राजा…भैयाअ....अब सबर नही होता मुझसे….

मेने भी अब देर करना ठीक नही समझा, और उसकी टाँगें मोड़ कर अपने लंड को उसकी चूत के मुँह पर रखा, और सरका दिया उसकी रस से भरी सुरंग के अंदर….

रामा ने अपने होठों को कस कर बंद कर लिया, और मज़े की चाहत में सारा दर्द पी गयी…,

कराहते हुए उसने अपनी गान्ड को उपर कर दिया, और एक ही साँस में पूरा लंड अपनी सुरंग में ले लिया…

25-30 मिनिट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद हम दोनो ही संतुष्ट होकर एक दूसरे की बाहों में लिपट कर पड़े हाँफने लगे….!

कुछ देर बाद मेने उसके गाल को चूमकर कहा – अब तो खुश हो…

वो मेरे से लिपट कर बोली – थॅंक यू भाई… सच में इतना मज़ा बड़े अरसे के बाद मिला है मुझे….

फिर हम दोनो बाथरूम में घुस गये, और फ्रेश होकर अपने-अपने कपड़े पहने, और हॉल में आ गये…

सच में आर्यन टीवी देखते – 2 सोफे पर ही सो गया था, टीवी अभी भी चल ही रहा था, और उसमें पॉकेमोन सीरियल चल रहा था….

मेने उसे सोते हुए ही माथे को चूमकर कहा – सच में दीदी बड़ा ही प्यारा भांजा है मेरा…

दीदी – बस अब तू भी जल्दी से मेरे लिए ऐसा ही प्यारा सा एक भतीजे का जुगाड़ कर..

मे – चिंता मत करो, बस कुछ दिन और, फिर भतीजा ही आपकी गोद में खेल रहा होगा…

दीदी – क्या सच में..? निशा प्रेग्नेंट है…?

मे – आपको भतीजे से मतलब है ना…, अब वो चाहे निशा पैदा करे या भाभी...

दीदी मेरी तरफ गहरी नज़रों से देखते हुए बोली – इसका मतलब भाभी…?

मे – हां ! और शायद 15-20 दिन और हैं डेलिवरी में…

दीदी – ये तो और ही खुशी की बात है, भैया भी एक बेटे के बाप हो जाएँगे…!

बातें करते – 2 समय का पता ही नही चला, जब मेरे मोबाइल की बेल बजी, देखा तो निशा का फोन था…

 
मेने कॉल पिक करके उससे बातें की, फिर उसने दीदी के बारे में पुछा, तो मेने फोन उसके हाथ में पकड़ा दिया…

बहुत देर तक वो ननद भाभी बातें करती रही, फिर फोन भाभी ने ले लिया, और वो आपस में बातें करती रही…!

जब उनकी बातें ख़तम हुई, तब मेने समय देखा, तो दोपहर के दो बज चुके थे…

मेने दीदी से कहा – दीदी ! 2 बज गये, खाना नही बनाना है क्या…?

ये सुनते ही वो हड़बड़ा कर किचन की तरफ भागी…, मेने टीवी पर न्यूज़ चॅनेल लगाया और न्यूज़ सुनने लगा…!

अभी उसे किचन में गये 15 मिनिट ही हुए होंगे की डोरबेल बजने लगी…

मेने जाकर गेट खोला…. सामने टॉप ओर जीन्स में एक खूबसूरत सी लड़की खड़ी थी, आँखों पर काला चस्मा….

मे एक तक उसकी तरफ देखता रहा… फिर बोला – कहिए… किससे मिलना है…?

मेरी बात सुनते ही वो भड़क गयी – हू आर यू…? ये मेरा घर है, और मेरे ही घर में मुझसे पुछ्ते हो कि किससे मिलना है… हटो रास्ते से…

मे चूतिया की तरह उसको देखते हुए साइड को हो गया, वो दनदनाती हुई.. हॉल में आई, और अपने हाथ में पकड़ी हुई किताबें टेबल पर रख कर धम्म से सोफे पर बैठ गयी…

बैठते ही उसने भन्नाइ हुई आवाज़ में कहा – भाभी…कहाँ हो तूमम्म…?

ओ तेरे की… भाभी..? इसका मतलब ये जीजू की कोई बेहन लगती होगी… मे अभी ये सोच ही रहा था.. कि तभी दीदी किचन से बाहर आई, और उसे देख कर बोली..

अरे मेघना ! तुम आ गयी…? चलो फ्रेश हो जाओ, मे अभी खाना बनाके लाती हूँ…

वो – भाभी मे तो फ्रेश हो जाउन्गि… लेकिन पहले ये बताओ, ये बदतमीज़ आदमी कॉन है, जो मुझे मेरे ही घर में पुछ्ता है, कि किससे मिलना है…

दीदी को हँसी आ गयी… अरे हां ! मे तो बताना ही भूल गयी, ये अंकुश है, मेरा छोटा भाई… और भाई ये मेघना, मेरी ननद, यहाँ यूपीएससी की तैयारी कर रही है…..

तुम दोनो बातें करो, मे अभी खाना बनाकर लाती हूँ…ये कह कर दीदी फिरसे किचन में घुस गयी….और मे मुँह फ़ाडे उस बेलगाम घोड़ी को ताकता ही रह गया…..

सॉरी ! मेघना जी, मेरी बात का बुरा लगा हो तो मुझे माफ़ करना, मेने आपको पहचाना नही था इसलिए पुच्छ लिया…

वो - इट्स ओके, वैसे मुझे भी बिना सोचे समझे इस तरह से आपको नही बोलना चाहिए था…!

मेने अपना हाथ आगे किया, तो उसने अपने हाथ जोड़ दिए… अपना हाथ पीछे खींचते हुए मेने कहा – नाइस टू मीट यू… !

वो – लेकिन मुझे आपसे मिलकर कोई खास खुशी नही हुई… वैसे शायद आप कोई वकील-वकील है.. राइट..

मेने अपने मन में सोचा, बड़ी ही घमंडी टाइप की लड़की है ये तो…, इसका घमंड तो अब निकालना ही पड़ेगा…लेकिन फिलहाल इसे इसके घमंड में ही रहने देते हैं…

मे – हां ! बस गुज़ारा हो रहा है, आप तो जानती ही हैं वकालत में कितना कॉंपिटेशन है, स्ट्रगल करना मुश्किल ही है…!

वो – वही तो, ना जाने कितने काले कोट वाले यौंही सड़कों की खाक छानते फिरते हैं केस की मारा मारी में.., वैसे आपने यही लाइन क्यों चुनी..?

मे – बस किस्मेत की बात है…चुन ली, अब जैसे तैसे जिंदगी तो काटनी ही है… वैसे आपकी यूपीएससी की तैयारी कैसी चल रही है…

वो गर्दन अकडा कर बोली – एकदम फर्स्ट क्लास, इस बार में आइएएस के लिए क्वालिफाइ कर ही जाउन्गी…

मेने उसे बेस्ट ऑफ लक कहा… फिर और कुछ इधर उधर की बातें की.. इतने में दीदी खाना लगा कर ले आई…और हम तीनों ने एक साथ खाना खाया…

दीदी मेरे बारे में कुछ अच्छा-अच्छा बोलने वाली थी, लेकिन इशारे से मेने उसे रोक दिया…

खाना खाकर मेने दीदी से कहा – दीदी ! मे ज़रा अपने गुरुजी से मिलकर आता हूँ..

दीदी – तेरे गुरु ? वही ना, प्रोफ़ेसर. राम नारायण जी…

दीदी के मुँह से प्रोफ़ेसर. राम नारायण का नाम सुनकर मेघना चोंक पड़ी…, फिर मेरी तरफ देखते हुए बोली

कोन्से प्रोफ़ेसर. राम नारायण..? कहीं आप सुप्रीम कोर्ट के जाने माने लॉयर…? लॉ कॉलेज के सुप्रीम प्रोफेसर की बात तो नही कर रहे..?

मे – हां ! मे उन्ही की बात कर रहा हूँ.. क्यों..? आप उनको जानती हैं..?

वो – देल्ही में उन्हें भला कॉन नही जानता..? वो तो हमारी कोचिंग में लॉ के स्पेशल कोच हैं…, लेकिन उनसे आप जैसे छोटे-मोटे वकीलों का मिलना तो दूर, अपायंटमेंट मिलना तक मुश्किल होगा…

दीदी को उसकी बात बुरी तरह से खटक गयी… और वो थोड़े तल्ख़ लहजे में बोली – हां वोही प्रोफ़ेसर. मेरे भाई को अपने सगे बेटे की तरह प्यार करते हैं… उनके अंडर ही इसने अपनी प्रॅक्टीस भी की है…

मेघना – क्यों फेंक रही हो भाभी… ये हो ही नही सकता…कहाँ वो, और कहाँ ये…दोनो में ज़मीन आसमान का फ़र्क है…

मेने दीदी को समझाते हुए कहा – क्यों ख़ामाखाँ बेकार की बहस में पड़ रही हो, मेघना जी एक काम करिए मेरे साथ चलिए आपकी शंका का निवारण भी हो जाएगा… बोलो.. चलती हो मेरे साथ…

वो फ़ौरन तैयार हो गयी, क्योंकि वो देखना चाहती थी, कि मे कितना सही हूँ…

(आरोगेंट लोगों के साथ ये बहुत बड़ी प्राब्लम होती है..जल्दी से वो अपने आगे किसी की बात मानने को तैयार नही होते).

 
वो फ़ौरन कपड़े चेंज करने अपने रूम में चली गयी… मेने दीदी से बोला – ये लड़की तो बड़ी आरोगेंट है, लगता है साली को टाँगों के नीचे लाना ही पड़ेगा…

दीदी – बहुत तीखी मिर्ची है साली, भाई तू दूर ही रह इससे…

मे –नही दीदी, अब तो अपनी भी खोपड़ी सटक गयी है… तुम बस इसे अपने साथ गाओं चलने के लिए किसी तरह राज़ी कर लो, वाकी सब मे देख लूँगा…

मेरी बात से वो हँसने लगी और बोली – तू भी ना.., कितनो को संभालेगा…, खैर कोई ना चल देखती हूँ..

मे – अरे यार दीदी ! मुझे इसको चोदने की इतनी पड़ी नही है, बस साली को अपनी पालतू कुतिया बनाना चाहता हूँ, जो एक इशारे पर पून्छ हिलाकर पीछे – 2 चल पड़े..

मेरी बात पर हम दोनो ही ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे, इतने में वो चेंज करके आ गयी, और हम दोनो चल दिए प्रोफेसर नारायण के घर…

बाहर आकर मेने एक रिक्सा पकड़ा और प्रोफ़ेसर के घर का अड्रेस बता कर बैठ लिए जी रिक्सा में.

वो मेरे से दूरी बनाए बैठी थी, मानो में कोई छुत की बीमारी का मरीज़ होऊ…

कुछ देर के सफ़र के बाद हम उनके बंगले पर थे…दरबान मुझे देखते ही सल्यूट मारते हुए बोला – अरे शाब… बड़े दिनो के बाद आए है.. कहीं बाहर चले गये थे..?

मे – हां बहादुर… मेने अपने ही शहर में अपनी प्रॅक्टीस शुरू कर दी है… गुरुजी घर पर हैं…

वो – हां शाब ! बड़ा शाब अभी – अभी आया है, नेहा बीबी भी हैं आज तो…

मे – अरे वाह ! ये तो सोने पे सुहागा हो गया… अच्छा दीदी अकेली आई हैं या उनके पति भी साथ में हैं…

नही शाब, बीबी जी अकेली ही आई हैं…

मेघना हमारी बातें सुनकर ही झटके पे झटके खाए जा रही थी, अब उसका मेरी तरफ देखने का नज़रिया बदलता जा रहा था…

मेने उसे कहा – आइए मेघना जी… लगता है आज तो किस्मत मुझपर मेहरबान है, जो दीदी भी यहीं मिल गयी…

वो मेरे साथ-साथ चलते हुए बोली – ये नेहा जी वही हैं ना, जो लोवर कोर्ट में जज हैं…

मे – हां वही हैं.. प्रोफ़ेसर साब की इकलौती बेटी…इसलिए तो मे उन्हें दीदी बोलता हूँ…

अभी वो कुछ और आगे बोलती.. कि हम बंगले के अंदर पहुँच गये..

एक छोटी सी गॅलरी क्रॉस करके जैसे ही मेने उनके विशालकाय हॉल में कदम रखा…, नेहा दीदी और आंटी सामने सोफे पर बैठी बातें कर रही थी…

नेहा की नज़र मेरे उपर पड़ी… कुछ देर वो मुझे आश्चर्य से देखती रही… फिर जैसे ही उसे कन्फर्म हुआ कि मे ही हूँ… लगभग चीखती हुई सोफे से उठी…

अंकुश तुउउउ…, भागते हुए वो मेरी तरफ आई और मेरे गले में झूल गयी….

मेघना की आँखें फटी की फटी रह गयी… एक लेडी जज को मेरे यौं गले से लिपट कर खुश होते देख वो शर्मिंदगी से गढ़ी जा रही थी….

वो घर पर मेरे साथ किए गये अपने व्यवहार पर बहुत शर्मिंदा हो रही थी…

मेने नेहा की पीठ सहलाते हुए कनखियों से उसकी तरफ देखा,

तो उसकी नज़रों को ज़मीन में गढ़ी हुई पाया… उसे यौं शर्मिनदगी में देख कर मे मन ही मन मुस्करा उठा…

नेहा के अलग होते ही, मेने आंटी के पैर छुये, तो उन्होने मुझे अपने गले से लगा लिया और अपने बेटे की तरह मेरे माथे को चूम का आशीर्वाद दिया…

वो दोनो मेरे से घर परिवार की राज़ी-खुशी की बातें करने लगी, मे उन्हें बताने लगा…

अभी मे उनसे प्रोफ़ेसर साब के बारे में पुच्छने ही वाला था, कि तभी, उन्होने हॉल में कदम रखा,

मेने आगे बढ़कर उनके चरण स्पर्श किए, तो उन्होने मुझे कंधे से पकड़ कर अपने सीने से लगा लिया और मेरे सर पर हाथ रख कर आशीर्वाद दिया…!

कुछ देर बाद हम सब सोफे पर बैठे चाय नाश्ता करते हुए बातें कर रहे थे…

नेहा ने मेघना की तरफ इशारा करते हुए पुछा – ये कॉन हैं अंकुश ?

ये मेरी सिस्टर की ननद हैं दीदी ! मेरे जीजा जी यहाँ एक मल्टी नॅशनल कंपनी. में सेल्स मॅनेजर हैं, ये उनके साथ रह कर यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं…मेने उन्हें जबाब दिया…

तभी मेघना बोल उठी, मे सर की स्पेशल कोचिंग क्लास भी अटेंड कर चुकी हूँ..

प्रोफ़ेसर – अच्छा ! दट’स ग्रेट… वैसे कैसी तैयारी चल रही है तुम्हारी..?

मेघना – वैसे तो ठीक ही चल रही है सर ! बट कुछ लॉ वग़ैरह समझने में थोड़ा मुश्किल आ रही है…अगर आप कुछ स्पेशल टिप्स दे दिया करें तो समझने में आसानी होगी..…!

प्रोफ़ेसर साब ने मेरी तरफ देखा, मेने इशारे से उनको ना बोलने को कहा, मेरा इशारा समझ कर वो बोले –

देखो बेटी ! मेरे पास समय की बहुत कमी है, ये तो बोर्ड ने बहुत रिक्वेस्ट की, इसलिए कुछ समय कोचिंग के लिए निकाल पाता हूँ…!

पहले तो नेहा और अंकुश भी थे साथ में हेल्प के लिए, लेकिन अब मे अकेला ही रह गया हूँ, दूसरे नये असिस्टेंट्स पर इतना भरोसा नही कर सकते…

मेघना – प्लीज़ सर ! ज़्यादा नही तो कभी – 2, एक दो घंटे के लिए, मे यहीं आ जाया करूँगी….!

प्रोफ़ेसर – सॉरी बेटी, मे घर में भी समय नही दे पाता हूँ, तो यहाँ भी पासिबल नही होगा..उनकी बात सुनकर उसने मायूसी से अपनी गर्दन झुका ली…

कुछ देर और हम बातें करते रहे, फिर मेने उन्हें शादी का निमंत्रण देकर उनसे विदा ली, और उठकर चलने लगे…

 
नेहा दीदी, मुझे गेट तक छोड़ने आई, कॉंपाउंड में आकर मुझे वो एक तरफ को खीच कर ले गयी, और मेरे कान में फुसफुसा कर बोली….

भाई ! तूने पापा को ना बोलने का इशारा क्यों किया इसके लिए…? कोई खास वजह है..

मे – कोई खास वजह तो नही है दी, लेकिन ये थोड़ा घमंडी किस्म की लड़की है, इसका घमंड कम हो जाएगा, तब देखेंगे…!

नेहा – इसका मतलब, तुम अपने नीचे लाना चाहते हो इसे भी, है ना !...

मे – क्या दी, आप तो वाकई में ग्रेट जज हो, सब कुछ भाँप लेती हो….!

वो हहहे…हँसने लगी और बोली – मे तुझे बहुत अच्छे से समझती हूँ मेरे भाई.., एनीवेस.. ऑल दा बेस्ट फॉर न्यू पुसी…

इतना बोलकर वो हँसते हुए अंदर को चली गयी, और हम दोनो अपने घर की ओर…..!

उनके बंगले से निकल कर मेने वापसी के लिए एक रिक्सा लिया, उसे पहले बिठाकर मे भी बाहर की तरफ बैठ गया…

मेरे बैठते ही ड्राइवर ने रिक्सा आगे बढ़ा दिया, मे सीट के आख़िरी सिरे पर ही बैठा था, जिस कारण से हम दोनो के बीच काफ़ी दूरी थी…

मे बाहर की तरफ देखता आ रहा था, धीरे – 2 वो मेरी तरफ को खिसकी, और थोड़ा पास आकर बोली – अंकुश जी ! आप तो बड़े छुपे रुस्तम निकले, इतने बड़े – 2 लोगों से आपके इतने घनिष्ट संबंध हैं…

मे – अरे कहाँ जी ! मे तो बहुत छोटा सा वकील हूँ, जो दो जून की रोटी कमाने के लिए मारा मारी करता रहता है…!

मेरी कटाक्ष भरी बातें सुन कर वो मुझे घूर्ने लगी… जब मेरा ध्यान बाहर की तरफ देखा तो उसने अपना एक हाथ मेरे हाथ पर रखा, और बोली….

अब मुझे और शर्मिंदा मत कीजिए प्लीज़….! मे अपने वार्ताव के लिए माफी मांगती हूँ… मुझे सच में नही पता था, कि आप इतने बड़े आदमी के शागिर्द होंगे…

मे – आपको माफी माँगने की ज़रूरत नही है मेघना जी…! मे सच में बहुत छोटा सा ही वकील हूँ…!

वो तो ईश्वर् की कृपा से वो मुझे मिल गये… वरना आप तो जानती ही हैं, कि कहाँ वो और कहाँ मे…!

वो – फिर भी मेने आपके साथ जो बदतमीज़ी से बात की, उसके लिए प्लीज़ मुझे माफ़ कर दीजिए…!

इतना कह कर उसने मेरी बाजू अपने दोनो हाथों में थाम ली, और मेरे नज़दीक खिसक कर मुझसे सट गयी…!

अब उसकी 34” की गोल-गोल चुचियाँ मेरे बाजू से सटी हुई थी, जो मुझे गुद गुदाने के लिए काफ़ी थी…

मेने उसकी तरफ देखा, तो पाया कि वो मेरे चेहरे की तरफ ही एक टक देखे जा रही थी… मेने उसकी आँखों में देखा जिनमें सिवाय पश्चाताप के और कुछ नज़र नही आया…

मेने प्यार से अपना हाथ उसके सर के पीछे से ले जाकर उसके कंधे पर रखा, और उसे धीरे से सहला कर कहा – आपको माफी माँगने की कोई ज़रूरत नही है, कभी – 2 अंजाने में ये सब हो ही जाता है…मे सच में आपसे नाराज़ नही हूँ…!

उसने अपनी खुशी जाहिर करते हुए, अपनी बाहें मेरी कमर में लपेट दी, और चिपक कर बोली – सच ! आप सच में मुझसे नाराज़ नही है…!

मे – सच मेघना जी ! मे आपसे नाराज़ नही हूँ, अब मुझे छोड़िए, ये रिक्शे वाला मिरर से देख रहा है, क्या सोच रहा होगा अपने मन में…

उसने झेंपकर मुझे छोड़ दिया, लेकिन मेरा हाथ अपने हाथों में पकड़े रही, और बोली – आप सच में बहुत नेक दिल इंसान हैं…मेने आपकी इतनी बेइज़्ज़ती की फिर्भी आपने मुझे माफ़ कर दिया…

असल में मे बचपन से ही कुछ घमंडी टाइप की रही हूँ, घर में कोई कुछ बोलता नही था, सबकी लाडली थी, तो अपनी मनमानियाँ सब पर थोप्ति रहती थी…

मेघना ने सच्चे दिल से कबूल किया था, कि वो घमंडी किस्म की लड़की रही है, लेकिन उसने मेरे सामने ये सब मानकर अपने दिल को सॉफ कर लिया था…

बातों – 2 में पता ही नही चला कि कब हमारा घर आ गया… मेने रिक्शे का भाड़ा चुकाया, और लिफ्ट से अपने फ्लॅट में पहुँच गये…

घर आते – 2 अंधेरा हो चुका था, लोकेश जी ऑफीस से आ चुके थे, दीदी उनके लिए खाना बनाने में जुटी थी, आज रात की फ्लाइट से ही उन्हें मुंबई निकलना था..

डिन्नर के समय दीदी ने बात छेड़ दी…

दीदी – मे क्या कहती हूँ जी… आप तो दो-तीन दिन में मुंबई से लौटेंगे, क्यों ना हम मेघना को भी अपने साथ ले जायें,

लोकेश – मुझे कोई प्राब्लम नही है, उसको ही पुछो, अगर उसकी स्टडी डिस्टर्ब ना हो तो ले जाओ, क्यों मेघना ! क्या कहती हो…?

वो – वैसे मन तो है मेरा भी, भाभी के साथ उनके गाओं जाने का, इसी बहाने मम्मी पापा से भी मिल लूँगी, लेकिन मेरी इतने दिन की स्टडी छूट जाएगी…!

दीदी – अपनी स्टडी बुक्स ले लो, एक हफ्ते की तो बात है… कॉन्सा हमें महीने दो महीने रहना है…

वो – बुक्स से स्टडी नही हो पाती भाभी.. कोचिंग अटेंड करना ज़्यादा ज़रूरी है, और वैसे भी अंकुश जी के गुरुजी ने एक्सट्रा टिप्स देने से भी मना कर दिया है..

मे – मेघना जी ! अगर वाकई आपका हमारे साथ चलने का मन है, तो मे उनसे रिक्वेस्ट करूँगा, कि वो आपको स्पेशल ट्यूशन दे दें और साथ में उनके कहने पर दूसरे प्रोफेस्सर्स भी आपकी हेल्प कर देंगे …

वो – क्या सच में इसके लिए वो मान जाएँगे…?

मेने मुस्कराते हुए कहा – ये सब आप मुझ पर छोड़ दीजिए… भले ही इसके लिए मुझे आंटी से सिफारिस क्यों ना करनी पड़े…!

वो खुश होते हुए बोली – ऐसा है तो मे ज़रूर चलूंगी आप लोगों के साथ, वैसे भैया ! आप भी तो आएँगे ना शादी में…

लोकेश – हां ! लेकिन शादी के एक दिन पहले.. और एक दिन बाद ही हम सब वापस आजाएँगे…

फिर तय हुआ कि वो भी हमारे साथ गाओं चलेगी, पता नही क्यों, ये सुनकर वो बहुत ही एक्शिटेड लग रही थी…

उसकी खुशी देख कर दीदी ने मेरी तरफ देखा, तो मेने आँख झपक कर उसे बता दिया, कि ये बेलगाम घोड़ी जल्दी ही तेरे भाई के लंड के नीचे आने वाली है…

कोई 8:15 को जीजू एरपोर्ट को नकल गये… 9:30 को उनकी फ्लाइट थी, और 1 घंटे पहले सेक्यूरिटी चेक वग़ैरह के लिए एरपोर्ट पहुँचना ज़रूरी था…

कुछ देर हम तीनों आपस में बैठे बातें करते रहे, मेने अपना सोने का इंतज़ाम हॉल में ही कर लिया था…

जब वो दोनो अपने – 2 कमरे में सोने चली गयी, तो मे भी तान चादर सोफे पर लंबा हो गया..

एसी हॉल में पड़ते ही मुझे नींद ने धार दबोचा, और मे गहरी नींद में डूब गया…!

पता नही रात का कॉन्सा पहर था, मेरी नींद खुली अपने लंड पर कुछ गीलापन सा महसूस करके, कुछ देर तो मे इसी सोच विचार में रहा, कि ये सब सपने मे तो नही हो रहा…

लेकिन जब मेरी नींद पूरी तरह खुल गयी, तब मुझे एहसास हुआ कि कोई मेरे लौडे को मुँह में लेकर चूस रहा है..

मेने झट से अपनी आँखें खोल दी… देखा तो रामा दीदी मेरे लंड को चूस रही थी, एक हाथ उसका अपनी चूत सहलाने में बिज़ी था…

मेने अपना हाथ उसके सर पर रखा और उसे अपने लौडे से हटाते हुए कहा – दीदी.. ! तुम तो कुछ ज़्यादा ही चुदासी हो रही हो…

 
सुबह ही तो किया था, फिरसे…? ये हो क्या गया है तुम्हें…?

वो – पता नही भाई…? मुझे नींद ही नही आई, रह-रहकर सुबह की याद आ जाती थी, और ना चाहते हुए, बार बार मेरी मुनिया गीली हो रही थी…

जब रहा नही गया, तो मे यहाँ खिचि चली आई… अब तू जाग ही गया है, तो एक राउंड कर ही दे ना यार प्लीज़.. वरना, मे रात भर यौंही अपनी चूत को रगड़ते रहूंगी…

उसकी दशा देख कर मुझे हँसी आ गयी, नींद तो अब पूरी तरह खराब हो ही चुकी थी, सो उसे वहीं सोफे पर पटक कर उसकी एकमात्र मेक्सी को निकाल फेंका…

वास्तव में ही उसकी चूत लगातार बहे जा रही थी…, पता नही वो कितनी देर से मेरे लौडे को चूस रही थी, सो वो भी फूल फॉर्म था ही…

मेने दीदी की टाँगें चौड़ी करके अपने मूसल को एक दो बार उसकी गीली चूत के होठों पर फिराया, वो उसके कामरस से गीला हो गया…

फिर उसकी चूत के मुंहने पर टिका कर एक करारा सा धक्का लगा दिया…!

उसके मुँह से एक कराह निकल पड़ी, पूरा लंड डालकर मेने उसकी चुदाई शुरू करदी.., आधे घंटे में मेने उसे अच्छे से रगड़ रगड़ कर चोदा…

दो बार झड़ने के बाद वो खुश हो गयी और अपनी मेक्सी उठाकर अपने कमरे में चली गयी, लेकिन मुझे अब नींद आने में थोड़ा समय लगने वाला था,

फिर भी सोने की कोशिश करते-करते आख़िर में मुझे भी नींद आ ही गयी………!

दूसरे दिन सुबह 9 बजे की ट्रेन पकड़ कर हम तीनों आर्यन के साथ गाओं को चल पड़े…, चूँकि ये लोकल पॅसेंजर ट्रेन थी, सो रुकते रुकते, हमें रास्ते में पूरा दिन लगने वाला था…

अब इस ट्रेन में रिज़र्वेशन की सुविधा तो थी नही…तो जिसको जहाँ जगह मिली बैठ गये…

वो तो अच्छा हुआ कि हम थोड़ा वक़्त पर न्यू देल्ही स्टेशन पर पहुँच गये थे.. सो आराम से आमने-सामने की सीट बैठने को मिल गयी थी…!

गाड़ी छूटने तक भी कोई ज़्यादा भीड़ भाड़ नही हुई… लेकिन जैसे – 2 नये स्टेशन आते जा रहे थे, बुगी में लोगों की संख्या बढ़ती जा रही थी.

मेरे सामने विंडो की तरफ मेघना बैठी थी, उसके बाजू में दीदी, आर्यन मेरी गोद में था, जो कभी दीदी के पास चला जाता…तो कभी मेरी गोद में.

अब जब लोग बढ़ेंगे तो स्वाभाविक सी बात है, गर्मी भी बढ़ेगी ही, मार्च के शुरुआती दिन, 10-11 बजते बजते ही भयंकर गर्मी बढ़ गयी… लोग पसीने – 2 होने लगे…

वो तो अच्छा था, कि हम विंडो के पास थे, सो जब गाड़ी चलती थी, तो हवा आने से गर्मी में राहत मिल जाती थी…

चार-चार लोगों की सीट पर ऑलरेडी 5-5 लोग बैठे हुए थे… फिर एक स्टेशन से कुछ लौन्डे लफाडे और आ गये, और वो जबदस्ती से और घुसने लगे, एक तो मेरी वाली सीट पर टिक ही गया….

एक और दीदी के बाजू में टिकने के लिए बोलने लगा, अजी बोलने क्या लगा, बाजू वाले के घुटने दूसरी ओर मोड़ कर टिक ही गया.. और धीरे – 2 हिलते हिलाते उसने अपने बैठने के लिए ख़ासी जगह बना ली…

उसकी हरकतों से दीदी बहुत अनकंफर्टबल फील करने लगी, वो लौंडा धीरे-2 अपनी कुहनी उसकी चुचियों पर दवाने की कोशिश करने लगा…

दीदी ने उसे टोका भी, तो वो साला उल्टा -पुल्टा जबाब देने लगा…

मेने बात बढ़ाना ठीक नही समझा, लॅडीस साथ में थी, ऐसे बांगदुओं से उलझने में अपना ही नुकसान होना था, वो तो साले फटेलंड गिरधारी…उनका क्या जाना था…

सो मेने उसे अपनी जगह आने को कहा और मे उसकी जगह बैठ गया…अब दीदी सामने वाली सीट पर आर्यन को गोद में लेके बैठ गयी…!

इस तरह से दोनो लेडी सेफ हो गयीं…लेकिन भीड़ और गर्मी का क्या किया जाए, …जो निरंतर बढ़ती जा रही थी…!

अब 4 की सीट पर 6-6 लोग, सोच कर देखो कैसे बैठे होंगे…?

मे एक तरफ की गान्ड ही टिकाए हुए था…और मेरा झुकाव मेघना की तरफ था…, मेरी जाँघ उसके कूल्हे से एक दम सटी हुई थी…

मेरी जाँघ के दबाब अपने कूल्हे पर पाकर मेघना का चेहरा गर्मी और उत्तेजना से लाल होने लगा…

वो देख ज़रूर खिड़की से बाहर रही थी, लेकिन उसके मन में क्या चल रहा था… थोड़ा अंदाज़ा लग चुका था मुझे…!

अगले स्टेशन पर और भीड़ बढ़ गयी डिब्बे में, लोग दोनो सीटो के बीच में भी खड़े होने लगे…मेरे सामने ही एक अधेड़ मोटी सी महिला आकर खड़ी हो गयी, जिससे मेरे और दीदी के बीच एक चर्बी की दीवार खड़ी हो गयी…!

मेघना ने पहलू बदला, और अपना मेरी तरफ का पैर सीट के उपर रख लिया, जिसकी वजह से उसकी गान्ड का आधा भाग मेरी जाँघ के उपर आ गया..,

अब मेरे लिए हाथ रखने की भी जगह नही थी, सो मेने उस तरफ का अपना हाथ मेघना के पीछे सीट पर टिका लिया…!

मेघना ने तिर्छि नज़र से ये देख लिया था, कि मेने अपना एक हाथ उसके पिच्छवाड़े रखा है…

उसने विंडो से बाहर को देखते हुए अपनी गान्ड को हिला-हिला कर धीरे-धीरे पीछे को शिफ्ट करने लगी,,,,

वैसे भी मेरा हाथ बमुश्किल 1-2 मिलीमेटेर ही अलग था उसकी गान्ड से, तो उसके हिलते ही उसकी गान्ड की दरार ठीक मेरी उंगलियों के उपर आ गयी…

साथ ही अब उसने अपना पैर जो सीट पर रखा था, उसे भी नीचे कर लिया….

नतीजा…..उसकी मांसल जाँघ मेरी जाँघ से दब गयी…और गान्ड की दरार में मेरी उंगलियों की उपरी सतह फँस गयी…

उंगली की गाँठ का दबाब ठीक उसकी गान्ड के छेद पर पड़ते ही उसके मुँह से एक दबी हुई सिसकी निकल गयी…और चेहरा लाल सुर्ख हो गया…

इधर उसकी गान्ड के छेद का दबाब मेरी उंगली की गाँठ पर महसूस होते ही मेरा भी हाल बहाल होने लगा था…,

उसकी गान्ड से निकलने वाली तरंगें मेरी उंगली से होती हुई, लंड तक पहुँच गयी, और वो मेरी टाइट जीन्स की क़ैद में फड़ फाड़ने लगा…!

मेघना ने अपनी जाँघ के उपर जाँघ चढ़ाकर अपनी मुनिया के होठों को कस लिया… जिसका एहसास उसकी गान्ड की सिकुड़न से मेरी उंगली ने साफ साफ महसूस किया…

वो देख ज़रूर बाहर रही थी, लेकिन उसके फेस के एक्सप्रेशन बता रहे थे कि वो कितनी गरम हो चुकी है…!

ये सच है, कि जाने अंजाने ही सही, जब कोई मर्द या औरत सेक्षुयली सेन्सेशन फील करने लगता है, तो वो उसे और ज़्यादा पाने की कोशिश में लग जाता है, फिर उसे अपने आस-पास का भी भय नही रहता…

ऐसा ही कुछ हम दोनो के साथ भी हो रहा था…मेने अपनी वो उंगली, जिसकी गाँठ उसकी गान्ड के छेद पर दबी हुई थी उसको मोड़ कर उपर उठा दिया...

 
ये सच है, कि जाने अंजाने ही सही, जब कोई मर्द या औरत सेक्षुयली सेन्सेशन फील करने लगता है, तो वो उसे और ज़्यादा पाने की कोशिश में लग जाता है, फिर उसे अपने आस-पास का भी भय नही रहता…

ऐसा ही कुछ हम दोनो के साथ भी हो रहा था…मेने अपनी वो उंगली, जिसकी गाँठ उसकी गान्ड के छेद पर दबी हुई थी उसको मोड़ कर उपर उठा दिया...

उधर मेघना ने ट्रेन के हिचकॉलों का सहारा लेकर अपनी गान्ड को आगे पीछे मूव करना शुरू कर दिया…

उसने अपनी जाँघ को दूसरी जाँघ पर और ज़्यादा चढ़ा लिया, जिससे उसकी गान्ड थोड़ी और उपर हो गयी, अब वो मेरी उठी हुई उंगली पर अपनी गान्ड के छेद को और अच्छे से घिस सकती थी..!

उसकी गर्मी निरंतर बढ़ती जा रही थी, एक कदम और आगे बढ़ते हुए उसने अपनी गान्ड को और पीछे धकेला….

ट्रेन के हिचकॉलों के साथ-साथ वो अपनी गान्ड को आगे पीछे करते रहने की वजह से अब मेरी उंगली उसकी मुनिया के होठों के अंतिम सिरे तक पहुँचने लगी…

मुनिया के द्वार पर मेरी उंगली की गाँठ की दस्तक पाकर, उसकी आँखें मूंद गयी, उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी जो मेरी उंगलियों से पता चल रहा था…

उसका साथ देते हुए, मेने भी अपने हाथ को आगे की तरफ सरकाने के साथ साथ उसे पलटा दिया… अब मेरी उंगली सीधी होकर उसकी चूत के होठों पर सैर कर रही थी..

मेघना का हाल-बहाल हो चुका था, अब उसके कान तक गरम होकर लाल पड़ चुके थे, गले की नसें खिचने लगी……. फिर एक समय ऐसा आया…

और मेघना सारी शर्मो-हया भूल कर उसका हाथ उसकी जँहों के बीच चला गया… और उसने मेरे हाथ को पकड़ कर अपनी चूत के उपर दबा दिया…

मेरी एक उंगली जो उसकी चूत के उपर थी… वो उसकी सलवार और पैंटी को साथ लिए कुछ अंदर तक उसकी चूत में घुस गयी….,

उसने अपने होठों को कस कर भींच लिया जिससे उसकी आहह….होठों से बाहर ना निकले, और अपनी जांघों को कसकर भींचते हुए वो झड़ने लगी…..!

बहुत देर तक वो यौंही अपनी जांघों को कसे रही…फिर जब उत्तेजना शांत हुई…तो धीरे – 2 ढीला छोड़ा…!

उसकी जांघों का कसाव हटते ही मेने अपना हाथ बाहर खींच लिया…

उसने अपनी नज़र आस-पास दौड़ाई, भीड़ में किसी का ध्यान किसी की तरफ नही था…वैसे भी वो पहाड़ जैसी औरत सामने खड़ी थी…तो उसकी आड़ में कॉन देखने वाला था…

फिर उसने मेरी तरफ देखा, तो में अपनी नज़र डिब्बे में बैठे लोगों की तरफ घूमाते हुए उसके रस से गीली उंगलियों को नाक पर रख कर सूंघने लगा..!

ये देखकर वो बुरी तरह शरमा गयी, अपनी नज़र नीची करके मन ही मन मुस्करा उठी…!

फिर मौका देखकर मेघना ने अपनी मुनिया को रगड़ कर उससे निकले रस के गीलेपन को अपने कपड़ों से पोंच्छ लिया….!

कुछ देर के बाद ही एक बड़ा सा स्टेशन आया, और डिब्बे की सारी भीड़ वहाँ उतर गयी, कुछ और नये मुसाफिर भी चढ़े, लेकिन अब उतनी भीड़ नही थी….

हमने कुछ खाने पीने का सोचा, दीदी कुछ समान घर से बना के लाई थी, वो निकालने लगी…

मेघना बोली – आप खाना निकालो भाभी, तब तक में टाय्लेट जाकर आती हूँ, ये कहकर वो टाय्लेट चली गयी…

में समझ रहा था, वो टाय्लेट क्यों जा रही है…!

सफ़र के अंत तक मेघना ने मेरी तरफ आँख उठाकर भी नही देखा,

मुझसे नज़रें मिलाने की उसकी हिम्मत ही नही हुई, और सच कहूँ तो मेरी भी नही.

अंधेरा होते – 2 हम अपने घर आ गये…मे स्टेशन तक अपनी कार ले गया था, जो लौटने में बहुत काम आई, और आराम से हम साजो-समान के साथ घर तक आ गये…

दीदी सभी से मिलकर बहुत खुश हुई, रूचि को खेलने के लिए आर्यन के रूप में एक और साथी मिल गया…

अभी तक तो वो चाची के अंश के साथ ही थोड़ा बहुत खेल लेती थी… मेघना भी घर में सभी से मिलकर बहुत खुश हुई….!

निशा ने तो उसे अपना दोस्त ही बना लिया…, और उसका समान अपने कमरे में शिफ्ट कर दिया…..! उन दोनो को देख कर लग ही नही रहा था, कि ये पहली बार मिली हैं…

भाभी का लास्ट मंत चल रहा था, वो ज़्यादातर रेस्ट ही करती रहती थी…, रामा दीदी ज़्यादातर भाभी के पास ही अपना समय बिताने लगी…

शादी एक सादा और सिंपल तरीके से होने वाली थी, तो ज़यादा नाते-रिश्तेदारों का जमावड़ा लगने वाला नही था… और कोई विशेष तैयारियाँ भी नही होनी थी…

तय हुआ था, कि हम सभी लोग शहर में ही एक गेस्ट हाउस और पार्टी प्लॉट रेंट पर ले लेंगे, वहीं प्राची और उसका परिवार भी आजाएँगे, सारी रस्म अदा करके, सिंपल तरीके से शादी हो जाएगी…

गाओं में आकर रिसेप्षन करके सारे गाओं को दावत खिला दी जाएगी…!

मे कई दिनो से अपने ऑफीस नही जा पाया था, सो दूसरे दिन सुबह-सुबह ही गाड़ी लेकर अपने ऑफीस को निकल लिया…!

कुछ केसस आए थे, जो मेरे असिस्टेंट ने हॅंडल कर लिए, कुछ बड़े केसस की डेट पोस्टपोन करके कुछ दिन बाद की करवा ली…..!

जल्दी – 2 सब काम निपटाकर मे शाम को ही घर वापस लौट आया…

कपड़े चेंज करके, मे भाभी के कमरे में आकर बैठ गया, कुछ देर

रूचि को पढ़ाता रहा,

फिर मेघना आर्यन को लेकर वहीं आ गयी, तो रूचि अपनी पढ़ाई बंद करके उसके साथ खेलने में लग गयी…!

दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर आदतन मेने एक्सर्साइज़ वग़ैरह की, और चाय पीकर खेतों की तरफ निकलने की सोची…

अभी मे चौपाल तक ही पहुँचा था, कि पीछे से मेघना की आवाज़ सुनाई दी…, आर्यन को गोद में लिए वो मेरे पास आकर बोली –

वो - कहीं जा रहे हैं अंकुश जी…?

मे – हां ! तोड़ा खेतों की तरफ चक्कर मार कर आता हूँ, कोई काम था..?

वो – हमें नही दिखाएँगे अपने खेत…?

मे – अरे ! व्हाई नोट…? चलिए, अच्छा है, ताजी हवा मिलेगी और वैसे भी हमारे खेतों में बहुत कुछ है देखने लायक…!

मेने आर्यन को अपनी गोद में ले लिया और चल पड़े हम दोनो खेतों की तरफ..

आपस में बातें करते हुए, आर्यन के साथ खेलते हुए, हम ट्यूबिवेल तक पहुँच गये…,

रास्ते में आर्यन के बहाने हम दोनो एक दूसरे के काफ़ी नज़दीक भी आए…

ट्यूबिवेल पर आकर, मेने आर्यन को बाबूजी के पास छोड़ा, और मेघना को लेकर अपने बगीचे की तरफ चल दिया…

हम पानी की नाली के साथ – 2 चले जा रहे थे, एक तरफ मे चल रहा था, और नाली के दूसरी तरफ मेरे बराबर में ही वो चल रही थी….

अचानक से उसका पैर स्लिप हो गया, और वो पानी की नाली में गिरने ही वाली थी, कि मेने उसकी कमर में हाथ डालकर उसे थाम लिया….

उसके पैर नाली में थे, मेरा एक हाथ उसकी कमर को थामे हुए था, उसकी गोल-2 मुलायम एक चुचि मेरे बदन से दब गयी…

दूसरे हाथ का सहारा देने के लिए मेरा हाथ आगे आया, तो वो थोड़ा सा आगे को घूमी, मे पकड़ना चाहता था उसका कंधा, लेकिन उसके घूमने की वजह से मेरा वो हाथ उसकी चुचि पर पड़ा…

 
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