S
StoryPublisher
Guest
अब इतनी सी बात के लिए तुम ऐसी रूठ गयी हो कि मुझसे दूर-दूर भाग रही हो… ये ठीक नही है कि अपने रसीले होठों की प्यास भी ना बुझाने दो… इतना बोलकर मेने उसके रसीले होठों को चूम लिया…
निशा मुस्करा उठी, और बदले में किस करते हुए बोली – आप बहुत चालू हो, मुझे थोड़ी देर के लिए भी नाराज़ नही रहने देते…
मे – नाराज़ होने में मज़ा आता है तुम्हें..?
वो – हां ! जब आप मनाते हो तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है…ये बोलकर वो मेरे सीने से चिपक गयी…जिससे मेरा अकड़ू पप्पू उसकी मुनिया के दरवाजे पे सॅट गया..
मेने कसकर उसकी गान्ड को मसल दिया… और बोला – तो ठीक है, फिरसे नाराज़ हो जाओ… मे फिरसे तुम्हें मनाने की कोशिश करूँगा…
वो मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर बोली – नही अब मे ये पाप नही करूँगी… ये बेचारा किसी से मिलने के लिए व्याकुल हो रहा है, इसके साथ नाइंसाफी नही कर सकती मे…
मेने उसकी मिनी नाइटी को गान्ड तक उपर करके, पैंटी के उपर से ही उसकी गान्ड की दरार में उंगली को उपर से नीचे घुमाने लगा…
जब मेरी उंगली.. अपना सफ़र तय करते हुए उसकी राम दुलारी के गेट तक पहुँची, तो उसने अपनी जाँघो को कस लिया… और मेरे लंड को कस्के मसल्ति हुई…. सिसकारी भरते हुए बोली…..
सस्स्सिईईईईईई……मत करो ना…. उंगली हटाओ वहाँ से… बदमाश कहीं के…
मे – तो फिर तुम मेरे पप्पू को मसल मसल कर उसका कीमा क्यों बना रही हो…? इसको बदमाशी नही बोलते…?
निशा मेरे सीने पर किस करते हुए बोली – वो तो मे देखना चाहती हूँ, कि ये और कितना कड़क हो सकता है…
इतना बोलकर उसने मेरा शॉर्ट नीचे खींच दिया और किसी नागिन सी लहरती हुई नीचे को सरकती चली गयी…, मेरे लंड को अपनी दोनो हथेलियों के बीच दबा कर उसे मथने लगी… मानो छाछ बिलो रही हो…
निशा की हरकतों ने मेरा बुरा हाल कर दिया था, मेरा लंड बुरी तरह से ऐंठने लगा…मुझे लगा जैसे ये फट जाएगा…
मेने लपक कर निशा की कमर को हाथों में भर लिया, और अपनी ओर खींचते हुए उसकी गान्ड को अपने मुँह के उपर रख लिया…
निशा ने अपना गाओन निकाल फेंका, और मेरा लंड चूसने लगी….
अब हम दोनो 69 की पोज़िशन में आ चुके थे, पहले से ही एक दूसरे की छेड़-छाड से माहौल बहुत गरम हो चुका था…
मेने अपनी जीभ से उसकी चूत को पूरी लंबाई तक चाटा… तो उनसे अपने गान्ड के पाटों को कस कर भींचते हुए, अपनी चूत मेरे मुँह पर दबा दी…
मेरी नाक, उसकी क्लिट को रगड़ने लगी… और जीभ की नोक जितना हो सकता था, उतनी अंदर जाकर उसकी सुरंग की सैर करने लगी….
इससे निशा की उत्तेजना और बढ़ गयी, और उसने मेरे पूरे 8” लंबे लंड को अपने गले तक मुँह में भर लिया…और मेरे अंडकोषों को सहलाते हुए ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी…
अब मेरा बहुत बुरा हाल हो चुका था… कोई रास्ता नही बचा कि में अपने प्रेशर को और देर तक रोक सकूँ… सो अपनी कमर को नीचे से उचका-2 कर उसके मुँह को चोदने लगा…
निशा भी अपनी गान्ड को उपर नीचे करके मेरे मुँह को चोदने लगी…मेरे दोनो हाथ उसकी गान्ड को मसल्ते जा रहे थे, बीच – 2 में मेरी उंगली, उसकी गान्ड के भूरे से छेद को भी कुरेद रही थी…
आख़िर कोई कब तक अपने आप को कंट्रोल करे…., मेने एक करारा सा धक्का अपनी कमर में लगाया….
मेरा पूरा लंड निशा के मुँह में गले तक घुसकर पिचकारी छोड़ने लगा…
उत्तेजना इतनी बढ़ गयी थी, कि मुझे पता ही नही चला, कि कब मेरी एक उंगली पूरी की पूरी निशा की गान्ड के छेद में घुस गयी… और उसकी चूत ने भी अपना फब्बरा मेरे मुँह में छोड़ दिया…
जाने कितनी ही देर तक एक दूसरे का माल पानी गटक कर हम यौंही पड़े रहे……
आज पहली बार हम ने एक दूसरे के अंगों को इस तरह से प्यार करके उनसे निकलने वाले अमृत का पान किया था….
मेने निशा को अपनी बाहों में कसते हुए कहा… मज़ा आया जानेमन…
वो शर्मा गयी… और मेरे सीने में अपना मुँह छिपा कर बोली… आपने तो मुझे मार ही डाला था… मेरी साँस भी रुकने लगी थी..
निशा मुस्करा उठी, और बदले में किस करते हुए बोली – आप बहुत चालू हो, मुझे थोड़ी देर के लिए भी नाराज़ नही रहने देते…
मे – नाराज़ होने में मज़ा आता है तुम्हें..?
वो – हां ! जब आप मनाते हो तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है…ये बोलकर वो मेरे सीने से चिपक गयी…जिससे मेरा अकड़ू पप्पू उसकी मुनिया के दरवाजे पे सॅट गया..
मेने कसकर उसकी गान्ड को मसल दिया… और बोला – तो ठीक है, फिरसे नाराज़ हो जाओ… मे फिरसे तुम्हें मनाने की कोशिश करूँगा…
वो मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर बोली – नही अब मे ये पाप नही करूँगी… ये बेचारा किसी से मिलने के लिए व्याकुल हो रहा है, इसके साथ नाइंसाफी नही कर सकती मे…
मेने उसकी मिनी नाइटी को गान्ड तक उपर करके, पैंटी के उपर से ही उसकी गान्ड की दरार में उंगली को उपर से नीचे घुमाने लगा…
जब मेरी उंगली.. अपना सफ़र तय करते हुए उसकी राम दुलारी के गेट तक पहुँची, तो उसने अपनी जाँघो को कस लिया… और मेरे लंड को कस्के मसल्ति हुई…. सिसकारी भरते हुए बोली…..
सस्स्सिईईईईईई……मत करो ना…. उंगली हटाओ वहाँ से… बदमाश कहीं के…
मे – तो फिर तुम मेरे पप्पू को मसल मसल कर उसका कीमा क्यों बना रही हो…? इसको बदमाशी नही बोलते…?
निशा मेरे सीने पर किस करते हुए बोली – वो तो मे देखना चाहती हूँ, कि ये और कितना कड़क हो सकता है…
इतना बोलकर उसने मेरा शॉर्ट नीचे खींच दिया और किसी नागिन सी लहरती हुई नीचे को सरकती चली गयी…, मेरे लंड को अपनी दोनो हथेलियों के बीच दबा कर उसे मथने लगी… मानो छाछ बिलो रही हो…
निशा की हरकतों ने मेरा बुरा हाल कर दिया था, मेरा लंड बुरी तरह से ऐंठने लगा…मुझे लगा जैसे ये फट जाएगा…
मेने लपक कर निशा की कमर को हाथों में भर लिया, और अपनी ओर खींचते हुए उसकी गान्ड को अपने मुँह के उपर रख लिया…
निशा ने अपना गाओन निकाल फेंका, और मेरा लंड चूसने लगी….
अब हम दोनो 69 की पोज़िशन में आ चुके थे, पहले से ही एक दूसरे की छेड़-छाड से माहौल बहुत गरम हो चुका था…
मेने अपनी जीभ से उसकी चूत को पूरी लंबाई तक चाटा… तो उनसे अपने गान्ड के पाटों को कस कर भींचते हुए, अपनी चूत मेरे मुँह पर दबा दी…
मेरी नाक, उसकी क्लिट को रगड़ने लगी… और जीभ की नोक जितना हो सकता था, उतनी अंदर जाकर उसकी सुरंग की सैर करने लगी….
इससे निशा की उत्तेजना और बढ़ गयी, और उसने मेरे पूरे 8” लंबे लंड को अपने गले तक मुँह में भर लिया…और मेरे अंडकोषों को सहलाते हुए ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी…
अब मेरा बहुत बुरा हाल हो चुका था… कोई रास्ता नही बचा कि में अपने प्रेशर को और देर तक रोक सकूँ… सो अपनी कमर को नीचे से उचका-2 कर उसके मुँह को चोदने लगा…
निशा भी अपनी गान्ड को उपर नीचे करके मेरे मुँह को चोदने लगी…मेरे दोनो हाथ उसकी गान्ड को मसल्ते जा रहे थे, बीच – 2 में मेरी उंगली, उसकी गान्ड के भूरे से छेद को भी कुरेद रही थी…
आख़िर कोई कब तक अपने आप को कंट्रोल करे…., मेने एक करारा सा धक्का अपनी कमर में लगाया….
मेरा पूरा लंड निशा के मुँह में गले तक घुसकर पिचकारी छोड़ने लगा…
उत्तेजना इतनी बढ़ गयी थी, कि मुझे पता ही नही चला, कि कब मेरी एक उंगली पूरी की पूरी निशा की गान्ड के छेद में घुस गयी… और उसकी चूत ने भी अपना फब्बरा मेरे मुँह में छोड़ दिया…
जाने कितनी ही देर तक एक दूसरे का माल पानी गटक कर हम यौंही पड़े रहे……
आज पहली बार हम ने एक दूसरे के अंगों को इस तरह से प्यार करके उनसे निकलने वाले अमृत का पान किया था….
मेने निशा को अपनी बाहों में कसते हुए कहा… मज़ा आया जानेमन…
वो शर्मा गयी… और मेरे सीने में अपना मुँह छिपा कर बोली… आपने तो मुझे मार ही डाला था… मेरी साँस भी रुकने लगी थी..