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लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस) complete

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अपनी बेहन रेखा के बलात्कार से लेकर उन चारों को मौत देने तक, यहाँ तक कि उनके ऑर्गनाइज़ेशन को नेस्तोनाबूत करने तक की सारी घटना पर उसने गौर किया…!

उसे कोई क्लू नही पकड़ में आया, तो उसने फिरसे गौर किया…! फिर जैसे ही उसके दिमाग़ में गुंजन का नाम आया जिसे वो भूली हुई थी,

जब उसने उसपर गौर किया कि कैसे उसे उसे मेने किया था..

उसने एकदम से चुटकी बजाकर कहा – मिल गया….. हाआँ ! बिल्कुल ! वोही हो सकती है…!

उसकी ये बातें भाभी के कानों में पड़ी, और बोली – क्या बड़बड़ा रही हो

प्राची..? क्या मिल गया..?

प्राची मुस्कुराती हुई उनके पास आई और बोली – दीदी ! अपने लाड़ले देवर के लिए क्या कर सकती हैं आप ?

भाभी – ये भी कोई पुच्छने की बात है, वो मेरे सब कुछ हैं, उनके लिए मे अपनी जान भी दे दूं तो वो भी कम होगी…!

प्राची – और किसी की जान भी लेनी पड़े तो…?

भाभी – तुम क्या समझती तो अपनो के लिए जान लेना सिर्फ़ तुम्ही जानती हो, अरे उस लाड़ले के लिए इंसान तो क्या, शैतान से भी भिड़ जाउन्गि मे…!

भाभी का ऐसा दुर्गा रूप देख कर प्राची बोली – तो फिर चलिए मेरे साथ, अब लगता है, मेरा फिरसे हथियार उठाने का वक़्त आ गया है…!

निशा – दीदी, मे भी चलूंगी आप लोगों के साथ…!

भाभी ने बड़े प्यार से उसके सिर पर हाथ फिराया और बोली – तू सिर्फ़ मेरे देवर की निशानी की हिफ़ाज़त कर और अपनी बेहन पर भरोसा रख, अपनी जान देकर भी मे अपनी बेहन के सुहाग को ले आउन्गि…

और फिर मेरे साथ तो ये शेरनी भी है, तो फिर मुझे किसका डर… ये कहकर वो अपने नवजात शिशु जो अभी कुछ महीनों का ही था और घर की ज़िम्मेदारी उसे सौंप कर दोनो घर से चल पड़ी…

भैया और बाबूजी पूछ्ते रह गये कि कहाँ जा रही हो, तो भाभी ने सिर्फ़ इतना ही कहा – घर का ख्याल रखना, हम जल्दी ही लौटेंगे…!

प्राची ने बड़े भैया की गाड़ी ली और आँधी तूफान की तरह शहर की ओर दौड़ा दी…!

अपने बंगले पर आकर प्राची ने अपना हुलिया चेंज किया, कुछ ही देर में वो अब एक नव युवक ड्राइवर के भेष में नज़र आ रही थी, ऐसे ही उसने भाभी को भी एक ग्रामीण युवक में बदल दिया…!

उसकी कलाकारी देख कर भाभी दंग रह गयी, इन सब कामों से फारिग होने के बाद उन्होने प्राची से पूछा – आख़िर तुम करना क्या चाहती हो, और हम जा कहाँ रहे हैं…!

अब प्राची को लगा कि ये सही समय है दीदी को सब कुछ बताने और उन्हें समझने का, तभी वो अपना रोल अच्छे से कर पाएँगी… सो बोली..

दीदी ! मेने सभी संभावनाओं पर कई बार गौर किया, मुझे ऐसी कोई वजह नज़र नही आई, जहाँ से भैया पर अटॅक हो सकता है, सिवाय एक के…!

भाभी बस उसे देखती रही, क्योंकि उनके पास और कहने को कुछ था ही नही…

प्राची ने आगे कहा – योगराज की बेटी श्वेता के अलावा और कोई नही बचा है, जिसे हम भूल बैठे थे कि उसे कुछ नही पता होगा…

लेकिन मेरा सेन्स कह रहा है, कि उसे कहीं ना कहीं से भनक लग ही गयी होगी, और उसी ने ये हरकत की हो सकती है…!

भाभी – तुम शायद भानु को भूल रही हो, वो शुरू से ही हमारे परिवार के पीछे पड़ा है, ख़ासकर कोर्ट में मुँह की खाने के बाद…!

प्राची – नही दीदी.., मे भानु को नही भूली हूँ, मेने उस संभावना पर भी गौर किया था, लेकिन उसके ना होने के कयि कारण हैं…!

एक तो उसका मोटिव इतना सीरीयस नही है, दूसरा अगर वो इसके पीछे होता तो उन्हें किडनेप नही करता, या तो बुरी तरह ज़ख्मी कर देता या फिर…., इतना कहकर प्राची ने अपनी बात अधूरी छोड़ दी…!

भाभी – जब तुम इतनी श्योर हो तो हम देवर जी को क्यों नही बता देते, वो अपने पोलीस फोर्स को लेकर उन्हें बचा सकते हैं ना…!

प्राची – लेकिन हमें कन्फर्म तो नही है ना कि ये उसी का किया धरा है, और मान भी लें कि उसी ने किया है, तो भी बिना किसी सबूत के पोलीस उसपर हाथ नही डाल सकती…!

भाभी – तो फिर अब हम क्या करने वाले हैं..?

प्राची – मेरा हुलिया देख रही हैं आप, उसी के मुतविक, अब हम उसके ड्राइवर को किडनॅप करेंगे, और उसकी जगह मे उसकी ड्राइवर बन जाउन्गि…!

अगर ये काम उसी ने किया है, तो दिन में कम से कम एक बार वो ज़रूर वहाँ जाती होगी जहाँ उसने उन्हें क़ैद किया होगा..!

भाभी – लेकिन इस काम में मेरा क्या रोल रहेगा…?

आप उसकी गाड़ी के आस-पास ही रहना, और जैसे ही मे इशारा करूँ, आप उसकी डिकी में छुप जाना, ये तो आप कर सकती हैं ना,.

भाभी – तुम पहले एक बार डिकी खोलना बंद करना बता दो मुझे, कहीं कुछ गड़बड़ ना हो…!

प्राची ने उन्हें डिकी खोलना सिखा दिया, और ये हिदायत कर दी, कि डिकी में बैठने के बाद उसे बिल्कुल बंद मत करना, वरना वो लॉक हो जाएगी, और आप अंदर से उसे नही खोल पाओगि, इसलिए हल्की सी गॅप बनाकर रखना…!

भाभी ने सब अच्छे से समझ कर अपनी गर्दन हिलाकर हामी भरी, भाभी को उसने एक पुरानी सी जीन्स और अपनी एक टीशर्ट पहनने को दी थी, जिसके उपर से एक ग्रामीण युवक जैसा ढीला-ढाला कुर्ता, और एक स्वाफी (तौलिया) ..

अभी दीदी, आप सिर्फ़ टॉप में ही रहो, और इस बॅग में कुर्ता और स्वाफी रख लो, जब हुलिया चेंज करने की ज़रूरत पड़े, तभी इसके उपर कुर्ता पहन कर अपने बालों को समेट कर स्वाफी लपेट लेना…

और ये लो मूँछे इन्हें भी लगा लेना…! उन्होने वो सब समान एक पोलिबॅग में रख लिया…, साथ ही प्राची ने एक खंजर भी उनके बॅग में डाल दिया, जो कभी भी सेल्फ़ डिफेन्स में काम आ सकता था…

लेकिन उन्होने टॉप और जीन्स पहली बार पहने थे, सो उन्हें बड़ी शाराम सी महसूस हो रही थी, प्राची उनके मन की बात समझ गयी,

उसने उनका संकोच दूर करने के लिहाज से जीन्स के उपर से उनके कूल्हे को दबाकर बोली – ओह्ह्ह दीदी, जस्ट फॉर फन…, इतना भी क्या शरमाना, इन कपड़ों में आप सचमुच हॉट लग रही हो…

उसकी बात से वो और ज़्यादा शरमा गयी,

इतना सब कुछ मोहिनी को सिखा पढ़ा कर वो दोनो वहाँ से निकल ली.. अपने मिशन पर.

समय के मुतविक, श्वेता को इस समय अपने ऑफीस में होना चाहिए था, सो गाड़ी उसने अपने बंगले पर ही छोड़ी, और एक ऑटो लेकर वो दोनो उसके ऑफीस की तरफ चल दी..

श्वेता एक बहुत बड़े एंपाइयर की मालकिन थी, उसकी अपनी खुद की बहुत बड़ी बिल्डिंग थी, ढेरों स्टाफ,

बिल्डिंग के आगे बड़ा सा लॉन, मेन गेट के बाजू में ही ऑफीस की कॅंटीन, जिसमें सभी ड्राइवर वग़ैरह बैठ कर सारे दिन अपने साहब लोगों का इंतेज़ार करते थे…

श्वेता के ड्राइवर का पता लगाना प्राची के बाएँ हाथ का खेल था,

बिल्डिंग के बाहर रिक्सा रुकवा कर उसने एक बार अपना हुलिया चेक किया, और भाभी को एक पेड़ के नीचे इंतेज़ार करने का बोलकर वो मेन गेट की तरफ बढ़ गयी…!

गेट पर ही उसने श्वेता के ड्राइवर की कुंडली पता कर ली, वो इस समय कॅंटीन में था, सो वो सीधी जाकर कॅंटीन में पहुँची…

वहाँ और भी लोग थे, सो उनसे पता करके वो रामसिंघ (ड्राइवर) जो कॅंटीन की एक खाली ब्रेंच पर लेटा हुआ था…

प्राची उसके एक दम पास जाकर ठेत हरियानवी में बोली – रे ताऊ, रामसिंघ थारा ही नाम से के…?

रामसिंघ अपने पास एक नौजवान ड्राइवर को देख कर बैठते हुए बोला – हां भाई मेरा ही नाम रामसीघ से.., के काम से म्हारे ते…?

प्राची – अरे ताऊ, म्हारे को कोई कोई काम ना से थारे से, एक भाबी बाहर रोड उपर खड़ी थारे ने पुच्छ रही थी…

रामसिंघ – भाभी..? कैसी है..?

प्राची – मन्ने तो घनी चोखी लागी, ये ही कोई 30-35 साल की..

रामसिंघ – पर तू कॉन सै भाई…?

प्राची – मे तो बाजू आली कंपनी में ड्राइवर सूं.., वो वहाँ खड़ी थी, तो मन्ने पूछ लिया, इब ज्यदा रिक्वेस्ट करण लागी, तो मे थारे धोरे बोलन आगया…!

रामसिंघ – चल देखूं तो सही कॉन भाभी सै…!

गेट से बाहर आकर प्राची ने दूर से ही उसे बता दिया कि देख वो पेड़ के नीचे खड़ी से, तू मिल ले ताऊ, मे चलता हूँ..!

इतना कहकर वो उसके जबाब का इंतेज़ार किए बिना ही बाजू वाली फॅक्टरी के गेट की तरफ बढ़ गयी, उत्सुकता बस रामसिंघ मोहिनी की तरफ चल दिया…!

 
टॉप और जीन्स में खड़ी औरत उसका इंतेज़ार कर रही है, ये देख कर 45 साल के रामसिंघ की बान्छे खिल उठी…!

वो उसके पास जाकर बोला – अरी कॉन सै तू, और यहाँ मेरा इंतेज़ार क्यों करे सै…?

मोहिनी ने बड़े मादक अंदाज में अपने नीचे का आधा होठ, दाँतों में दबाकर जैसे ही अपनी तिर्छि नज़र उसपर डाली, रामसिंघ के तो होश ही उड़ गये…

मोहिनी के रूप जाल में फंसकर वो सारे सवाल जबाब करना भूल गया, और उसकी सुंदरता में खो गया…!

वो अपनी नज़रों से सेक्सी अंदाज में अपने पीछे आने का इशारा देकर एक तरफ को चल दी..,

रामसिंघ किसी रिमोट कंट्रोल से चलने वाले खिलौने की तरह उसके पीछे पीछे चल पड़ा…

बाजू वाली फॅक्टरी के पीछे की साइड एक बहुत बड़ा खाली प्लॉट था, जिसका कोई उसे ना होने के कारण उसमें बिलायती कीकर और तमाम तरह की झाड़ियाँ खड़ी थी…

मोहिनी एक घनी सी झाड़ी के पीछे जाकर खड़ी हो गयी, दस कदम तय करके रामसिंघ भी उसके पास पहुँच गया…!

जाते ही पीछे से उसने उसकी कमर में हाथ डालकर जैसे ही उसके बदन को अपनी बाहों में लिया, भड़ाक से एक मोटे से डंडे का वार उसकी खोपड़ी पर पड़ा..,

वो वहीं त्यौराकर ढेर हो गया.., दोनो उसकी टाँग खींच कर और घनी झाड़ियों में ले गयी, फिर अच्छे से उसके हाथ पैर बाँध कर मुँह में कपड़ा ठूंस दिया…!

उसे वहीं पड़ा छोड़ कर प्राची ने कहा – दीदी, अब आप फ़ौरन अपने देहाती वाले लिवास में आ जाओ, और हां मेन गेट के आस-पास ही रहना…

मे बस एक मिनिट के लिए गाड़ी रोकूंगी, उतने में ही आपको थोड़ी सी डिकी खोलकर बिना किसी की नज़र में आए बैठ जाना है…

इतना कहकर प्राची अंदर चली गयी…!

लगभग 5 बजे उसे श्वेता बाहर आती हुई दिखाई दी, उसके साथ दो औरतें और थी.., उसे देखते ही प्राची फ़ौरन उसकी गाड़ी के पास पहुँची,

इससे पहले कि वो गाड़ी तक पहुँचती, वो उसके लिए पीछे का गेट खोलकर खड़ी हो गयी..

श्वेता ने उसे गौर से देखा और बोली – तुम कॉन हो..? और रामसिंघ कहाँ है..?

प्राची अपनी आवाज़ को भारी बनाकर बोली - वो में साब मे उनका भतीजा हूँ, आकस्मात चाची की तबीयत खराब हो गयी, इसलिए वो मुझे यहाँ छोड़ कर चले गये…

श्वेता – कमाल है, कैसा गधा आदमी है..? कम से कम बोलकर तो जाता…?

प्राची – वो गये तो थे अंदर बोलने, पर शायद आप नही होंगी ऑफीस में ..

श्वेता – अच्छा ठीक है, तुम अच्छे से गाड़ी चला लेते हो ना..?

प्राची – जी में साब, चाचा से भी अच्छी तरह चला लेता हूँ …!

श्वेता – तुमने हमारे फार्म हाउस का रास्ता देखा है..?

प्राची – नही में साब, आप रास्ता बताती जाना, मे पहुँचा दूँगा…!

श्वेता पीछे की सीट पर बैठते हुए बोली – ठीक है, आओ हेमा चलते हैं, सरोज तुम आगे बैठो…!

मेन गेट से निकल कर कोई 50 मीटर पर रोड साइड में एक लेटर बॉक्स था, उसके पास गाड़ी रोक कर प्राची ने कहा – सॉरी में साब, एक मिनिट में आया, एक लेटर बॉक्स में डालकर…!

श्वेता उसे डाँटते हुए बोली – तबसे पड़े-पड़े क्या कर रहे थे, डाल नही सकते.. अब जाओ जल्दी डाल कर आओ,

प्राची लेटर बॉक्स की तरफ बढ़ गयी, और यौंही एक कागज का टुकड़ा उसने बॉक्स में सरका दिया, कनखियों से उसने देख लिया कि मोहिनी डिकी खोलकर बैठ चुकी है…

आधे घंटे के बाद उनकी गाड़ी शहर के बाहर एक फार्म हाउस में जाकर रुकी…

वो तीनो उसे पार्किंग में गाड़ी खड़ी करके इंतेज़ार करने का बोलकर अंदर चली गयी…!

प्राची ने उनके जाते ही फ़ौरन गाड़ी एक साइड में बनी पार्किंग की तरफ बढ़ा दी, क्योंकि सामने ही गेट के पास 4 हथियार बंद मुस्टंडे खड़े थे,

उसे डर था, कि कहीं गाड़ी के रुकते ही मोहिनी दीदी डिकी खोलकर बाहर ना जाएँ और कुछ करने पहले ही हमारा भंडा फुट जाए….!

पार्किंग में गाड़ी लगाकर, उसने डिकी को उपर किया, ग्रामीण युवक के भेष में मोहिनी बाहर आई…!

दिन छुप रहा था, पस्चिम में सूरज की लाली आसमान में छा चुकी थी…

उन्हें नही पता था कि ये यहाँ क्या करने आई हैं, और कितनी देर रुकने वाली हैं, सो प्राची ने भाभी को बिल्डिंग के पीछे की तरफ जाकर छुप्ने को कहा और खुद सामने मेन गेट की तरफ बढ़ गयी…!

फार्म हाउस ज़्यादा बड़ा नही था… लगभग 3-4 एकर के गार्डन जैसे ग्राउंड के एक साइड में ये छोटी एक मंज़िला इमारत थी,

सामने के मेन गेट से घुसते ही, एक बड़ा सा हॉल जैसा था, उसके ठीक सामने कोई 15 फीट लंबी गॅलरी सी थी, जिसके दोनो तरफ एक एक दरवाजा था, गॅलरी के अंतिम छोर पर एक बड़ा सा गेट जो शायद एक और हॉल नुमा कमरे का होगा.

कुल मिलाकर गॅलरी के एक तरफ एक कमरा, उसके सामने किचन और पीछे एक हॉल, यानी दो हॉल एक कमरा और रसोई…!

प्राची बेधड़क अंदर हाल में चली गयी, उन मुस्टांडों ने उसे टोका, तो वो बोली – मे मेडम का ड्राइवर हूँ..!

हॉल में पहुँचते ही उसे एक और बंदा सोफे पर बैठा दिखाई दिया, जो शायद भानु था,

प्राची ने उससे पुछा – आए भाई साब ! मेडम कित गयी…?

भानु कुछ देर उसके चेहरे को देखता रहा, एक मासूम से युवक जिसकी हल्की हल्की मुन्छे जो कतयि ड्राइवर नही होना चाहिए, उसने सोचा शायद कोई मजबूरी रही होगी बेचारे की…

भानु – वो अपनी फ्रेंड्स के साथ सामने वाले हॉल में मीटिंग में हैं, उन्हें यहाँ दो-तीन घंटे लगेंगे, तब तक तुम बाहर उनका इंतेज़ार करो...

इतने से ज़्यादा अब प्राची यहाँ कुछ कर भी नही सकती थी, उसे लगा कि अगर

अंकुश भैया को यहाँ क़ैद किया भी होगा, तो श्वेता इस समय वहीं होगी…

ये सोचकर वो बाहर आ गयी, साइड से होते हुए पीछे की तरफ बढ़ गयी, जहाँ उसे मोहिनी भाभी खड़ी मिल गयी, एक पेड़ की ओट में…!

प्राची ने उन्हें अंदर की सारी वास्तु स्थिति से अवगत कराया, कुछ देर वो दोनो वहीं खड़ी बातें करती रही,

वातावरण में थोड़ा अंधेरा सा घिरने लगा था, पीछे की साइड में लाइट की भी कोई उचित व्यवस्था नही थी, प्राची के मुतविक पीछे वाले हॉल में ही श्वेता और उसकी फ्रेंड्स हैं, जिसकी दीवार उनके सामने थी…

मोहिनी – आओ चलो यहाँ कोई विंडो वग़ैरह ज़रूर होनी चाहिए, उससे अंदर देखने की कोशिश करते हैं…!

पीछे की तीन तरफ की दीवारें उसी हॉल नुमा कमरे की थी, पीछे की पूरी दीवार एकदम सपाट थी, उसमें कोई भी विंडो नही थी, बस एक रोशनदान जैसा था, जो काफ़ी उँचाई पर था…!

प्राची उस रोशनदान को ध्यान से देखने लगी, तभी उसके कानों में अंदर की आवाज़ें पड़ी…!

देखो दीदी, इसी कमरे में हैं वो, सुनो कुछ आवाज़ें आ रही हैं.. प्राची ने फुसफुसा कर भाभी से कहा…

वो भी उन आवाज़ों को सुनने की कोशिश करने लगी, लकिन कुछ साफ-साफ सुनाई नही दे रहा था…,

अब अंदर क्या हो रहा है उसे जान’ने या देखने के लिए उनकी बैचैनि बढ़ने लगी, प्राची हॉल की एक साइड वाली दीवार की तरफ बढ़ गयी, वहाँ उसे एक विंडो दिखी, लेकिन वो स्लाइडिंग थी एक दम डार्क ग्लास की, जिसमें से आर-पार नही देखा जा सकता था…

उसने उसे स्लाइड करने की कोशिश की लेकिन वो शायद अंदर से लॉक थी, वो पुनः उनके पास आई और बताया कि एक विंडो उधर है तो सही, लेकिन अंदर से लॉक है..

भाभी – चलो दूसरी तरफ ट्राइ करते हैं, शायद उधर भी कुछ हो..?

वो दोनो दूसरी साइड वाली दीवार की तरफ मूड गयी, एक विंडो उधर भी थी, ये दो तरफ खुलने वाली लकड़ी के कपाट वाली विंडो थी, जिसके कपाट बाहर को ही खुलते थे…!

भाभी ने अपनी उंगलियों के नाख़ून उसके नीचे से फँसाकर उसे हिलने की कोशिश की, तो वो कपाट हिल गया, उनकी आँखों की चमक बढ़ गयी, और वो फुसफुसा कर बोली –

ये खुला है प्राची…, उन्होने आहिस्ता से उसे थोड़ा सा खोलकर उसमें झिरी सी बना ली, जितने से अंदर झाँका जा सके…!

जैसे ही उन्होने अंदर झाँक कर देखा, उनकी साँसें थम गयी, वो सकते की सी हालत में पीछे को हटती चली गयी,

उनकी आँखों के आगे अंधेरा सा छाने लगा, उनका दिमाग़ सुन्न पड़ गया, और वो लहराते हुए गिरने ही वाली थी, कि पीछे से प्राची ने उन्हें थाम लिया…!

 
प्राची – क्या हुआ दीदी, ऐसा क्या है उस कमरे में…?

भाभी ने कोई जबाब नही दिया, सकते की वजह से उनकी जीभ तालू से चिपक गयी थी.. बस अपनी एक उंगली उस तरफ उठाकर इशारा कर दिया…!

थोड़ी देर में वो सम्भल गयी, तो प्राची ने उन्हें खड़े रहने को कहकर खुद उसके अंदर झाँक कर देखने लगी…!

अंदर का सीन देख कर एक बार तो प्राची के भी होश गुम हो गये, लेकिन उसने जल्दी ही अपने पर काबू पा लिया…!

हॉल नुमा कमरे के बीचो-बीच एक बड़े से बेड पर इस समय अंकुश बिना कपड़ों के पीठ के बल लेटा हुआ, जिसके चारों हाथ पैर बेड के चारों कोनो पर रस्सी से बँधे हुए थे…!

उन तीनों के अलावा दो और औरतें जो शायद इनके आने से पहले ही यहाँ मौजूद होंगी..वो सभी एकदम नितन्ग नंगी, भूखी कुतियाओं की तरह अंकुश को शिकार की भाँति भनभॉड रही थी,

श्वेता उसके लंड पर सवार थी, हेमा उसके मुँह पर अपनी चूत रख कर बैठी अपनी कमर आगे पीछे कर रही थी…

सरोज उसकी छाती को, उसके चुचकों को सहलाते हुए अपनी चूत में उंगलियाँ डाले थी, उन दो में से एक अंकुश की टाँगों के बीच घुसकर उसके पेलरो को चूसे जा रही थी,

बीच बीच में हाथ से भी सहलाती, साथ ही अपने दूसरे हाथ से अपनी गीली चूत को सहलारही थी, और पाँचवी बीच में बैठी कभी श्वेता की चुचियों से खेलती तो कभी हेमा की..…!

5-5 नंगी औरतों के बीच अकेला मर्द वो भी निसहाय अवस्था में पड़ा जिसकी हालत देख कर ऐसा लग रहा था, मानो वो कयि हफ्तों से बीमार हो..,

लेकिन उसका लंड एक दम तना हुआ कड़क सीधा खड़ा, श्वेता की चूत में सटा-सॅट अंदर बाहर हो रहा था…!

अंदर का इतना भिभत्स और घिनौना सीन देख कर प्राची की आँखों में आँसू आ गये, अपने सबसे प्यारे दोस्त जैसे देवर को पहली बार उसने इतना विवश देखा था…

उसने अपने मुँह पर हाथ रखकर अपनी सिसकी को बाहर आने से रोका, तभी उसे अपने पीछे भाभी के होने का एहसास हुआ, वो भी उसके नज़दीक आकर अंदर देख रही हैं…!

हीकच….! लाख रोकने के बाद भी मोहिनी भाभी के मुँह से हिचकी निकल गयी,

प्राची ने पलट कर उनके कंधे पर हाथ रख कर हौसला बनाए रखने का इशारा किया…!

वो वहाँ से दौड़कर उसी पेड़ की तरफ़ भाग गयी, उनसे ये भीभत्स नज़ारा ज़्यादा देर तक देखा नही गया…!

अपने लाड़ले देवर की ये हालत देख कर उनका दिल खून के आँसू रो रहा था…!

वो पेड़ के तने से पीठ टिका कर वहीं घुटने मोड़ कर बैठ गयी, और अपना सिर टाँगों के बीच देकर रोने लगी…!

कुछ देर बाद जब उनके कंधे पर किसी के हाथ का अहसास हुआ, उन्होने अपना सिर उपर उठाया, चेहरा आँसू से भीग चुका था…!

वो झट से प्राची के गले लग कर फुट-फुट कर रोने लगी…!

हौसला रखिए दीदी, प्राची ने उनकी पीठ सहलाते हुए कहा – जब हम यहाँ तक आ ही गये हैं, तो अब उन्हें इस मुशिबत से निकाल भी ले जाएँगे…!

कम से कम वो मिले तो सही, अब जो भी उनके साथ हुआ या हो रहा है, उसे हम वापस तो नही ला सकते, लेकिन आगे क्या करना है उसपर विचार करने का वक़्त है, ना कि कमजोर पड़कर आँसू बहाने का…!

भाभी अपनी रुलाई पर काबू रखते हुए बोली – शायद तुम ठीक कह रही हो मेरी बेहन, लेकिन तेरे जैसा हौसला कहाँ से लाउ मे..?

तुझे पता है, जब मे इस घर में व्याहकर आई थी, तब ये मेरा देवर निक्कर पहन कर मेरी उंगली पकड़ कर चलता था, मेरे आने के कुछ ही हफ्तों बाद माँ जी मुझे इसका हाथ सौंप कर चल बसी…

मेने इसे अपने बेटे की तरह बड़ा किया है, आज उसकी ये हालत देख कर मेरा दिल खून के आँसू रो रहा है मेरी बेहन, कैसे हौसला रखूं…?

प्राची – फिर भी आपको हौसला रखना ही होगा दीदी, अपने उसी लाड़ले के लिए, हमें लड़ना होगा…, उन्हें इस हालत में पहुँचाने वालों को उनके किए की सज़ा देनी होगी…!

आप अभी से इस तरह टूट जाएँगी, तो उन्हें कॉन निकालेगा उस दलदल से…?

आप चुप हो जाइए प्लीज़, वरना सारा खेल ख़तम हो जाएगा, किसी को भनक भी लग गयी, तो हम दोनो भी इनके हाथ लग जाएँगे, फिर कोई सूरत नही कि हम कुछ कर पायें…!

प्राची की बात का भाभी के उपर तुरंत असर हुआ, और वो शांत हो गयी, लेकिन आँखें अभी भी लगातार बरस रही थी, बीच-बीच में उनकी हिचकियाँ भी निकल जाती…!

भाभी को शांत करके प्राची ने कृष्णा भैया को फोन लगाया, यूज़र बिज़ी का मेसेज लगातार आ रहा था…!

उसने सोचा, शायद वो मीटिंग में होंगे, या कहीं फील्ड आक्षन में बिज़ी होंगे,

अभी डिस्टर्ब करना भी सही नही है, सो उसने कॉल बॅक का मेसेज टाइप करके सेंड कर दिया…!

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अगले दिन शहर में राज्य के गृह मंत्री का दौरा होना था, उसकी सेक्यूरिटी को लेकर शहर की पोलीस के सारे बड़े अधिकारी इस समय पोलीस मुख्यालय में मीटिंग कर रहे थे…!

सबके मोबाइल ऑफ थे, जब प्राची ने एसएसपी कृष्णा कांत को फोन किया था, तो वो उस समय वहीं थे, इसलिए उसने मेसेज छोड़ दिया..

इट्स अर्जेंट प्लीज़ कॉल व्हेन फ्री, मॅटर ईज़ सीरीयस रिलेटेड टू अंकुश भैया “

इतना मेसेज लिख कर उसने भाभी से कहा – दीदी, वो तो शायद बिज़ी हैं, -उनका मोबाइल ऑफ लग रहा है, मेसेज कर दिया है.. अब हमें यहाँ से चलना होगा…!

भाभी ने उसकी तरफ गेहन आश्चर्य से देखा और बोली – लल्ला को इस हालत में छोड़ कर...?

प्राची – और हम यहाँ कर भी क्या सकते हैं दीदी.., वैसे भी मुझे श्वेता को उसके घर छोड़ना पड़ेगा, उसके बाद वापस उनको अपने साथ ही लेकर आ पाएँगे…!

भाभी – नही मे अपने बेटे को छोड़ कर कहीं नही जाउन्गि, तुझे जाना है तो जा, तब तक मे यहीं रहूंगी…!

प्राची ने बहुत समझाने की कोशिश के, आप यहाँ अकेली क्या करेंगी, कहीं मुशिबत में पड़ सकती हैं… लेकिन मोहिनी भाभी ने उसकी एक नही सुनी,

आख़िरकार प्राची को उन्हें वहीं अकेला छोड़ कर जाना पड़ा,

 
क्योंकि श्वेता और उसकी दोनो साथियों के लौटने का समय होने वाला था, उसे उसकी गाड़ी के पास होना ज़रूरी था…

कुछ देर में ही प्राची श्वेता को लेकर जा चुकी थी, पीछे की तरफ कोई लाइट की व्यवस्था भी नही थी, सो अब रात के अंधेरे में मोहिनी को अकेले में डर सा लगने लगा,

इधर उसका मन अपने देवर की तरफ लगा हुआ था, रह-रहकर उसके मन से हुक उठ रही थी, जिसे वो कड़ा जी करके दबाने की कोशिश कर रही थी…,

उनका दिल अपने बेटे जैसे देवर की वो हालत देखकर भर उठता, जब नही रहा गया तो वो फिर से उसी खिड़की के पास चली आई…

इस समय अंकुश बिना कपड़ों के ही बेहोशी की हालत में पड़ा था, पूरे बिस्तेर पर वीर्य और उन रंडियों के कामरस के जगह जगह धब्बे ही धब्बे नज़र आ रहे थे,

जहाँ-तहाँ कमरे के फर्श पर वीर्य से भरे हुए कॉनडम्स भी पड़े हुए थे, ये सब देखकर मोहिनी को घिन सी आने लगी…!

उसकी इस दयनीय अवस्था को देखकर उनकी आँखें फिर से भर आई, और हमेशा सबका भला चाहने वाली भाभी के मुँह से श्वेता और उसके साथियों के लिए गालियाँ निकलने लगी,

वो उन्हें कोसते हुए बोली – भगवान करे इन हराम्जादि रंडियों के कीड़े पड़ें…!

जिस विंडो से वो अंदर देख रही थी, उसमें लोहे की ग्रिल लगी हुई थी, जिस’से अंदर जाने की कोई संभावना बन नही सकती थी, लेकिन उनका मन अपने लाड़ले के पास जाने के लिए बैचैन होने लगा…!

वो दूसरी साइड वाली विंडो की तरफ चल पड़ी, उसके पास जाकर उसके फ्रेम में अपनी उंगलियों के पोरों से वो उसे सरकाने का निरर्थक प्रयास करने लगी…!

आदमी जब कुछ करने की ठान लेता है, तो उसका दिमाग़ हर वो संभावना तलाश करने में जुट जाता है, जिस’से उसका काम बन सके…,

खिड़की के स्लाइड को खोलने की धुन में उनकी निगाहें इधर-उधर भटकने लगी, शायद कोई ऐसी चीज़ मिल जाए जिससे इसे ज़ोर देकर खिसकाया जा सके…

लेकिन एक तो अंधेरा, सामने की लाइट वहाँ तक इतनी नही आ रही थी कि कोई चीज़ आसानी से नज़र आजाए…!

वो वहीं ज़मीन पर बैठकर हाथों से ज़मीन को टटोल-टटोल कर ऐसी किसी चीज़ की तलाश करने लगी…!

कहते हैं ना, कि हिम्मते मर्दे, मददे खुदा…! इसी कोशिश में उनके दिमाग़ में ये बात आई, कि उसके बॅग में खजर है, जो चलते समय प्राची ने सेल्फ़ डिफेन्स के लिए दिया था!

उन्होने उसे फ़ौरन निकालकर उसकी नोक को विंडो के फ्रेम के अंदर घुसाने की कोशिश की, लेकिन उसके बीच में इतनी जगह नही थी कि वो आसानी से घुस सके,

फिर उन्होने सोचा कि अगर इसके मूठ पर किसी पत्थर से ठोका जाए तो शायद काम बन सकता है, लेकिन फ़ौरन ही उन्होने ये विचार त्याग दिया, क्योंकि ठोकने से आवाज़ पैदा होगी, जो सामने बैठे लोगों तक पहुँच सकती है…!

अब करें तो क्या..? कुछ नही सूझा तो वो उसकी मूठ पर अपनी हथेली से हल्के हल्के चोट करने लगी.., खंजर की नोक उन्हें थोड़ी सी दरार के अंदर जाती दिखी…

ये देखकर उनका उत्साह बढ़ गया, और वो उसपर अपनी हथेली से ज़ोर-ज़ोर से वार करने लगी, नाज़ुक बदन मोहिनी की हथेली में दर्द होने लगा, लेकिन उन्होने इसकी परवाह किए बिना वो अपने प्रयास में जुटी रही…!

यहाँ तक कि उनकी हथेली से खून निकलने लगा, लेकिन धुन की पक्की भाभी ने उसकी नोक को दरार के बीच में फँसा कर ही दम लिया…!

अब वो उसको झटके दे-देकर उसके लॉक को तोड़ने की कोशिश में जुट गयी, अथक प्रयास के बाद एक कट्ट की आवाज़ के साथ उसका लॉक टूट गया,

ये देखकर उनकी खुशी का ठिकाना नही रहा, बिना समय गँवाए, उन्होने उसे स्लाइड किया, लगभग आधी विंडो खुल चुकी थी जिससे एक सामान्य कद काठी का इंसान उसके अंदर आसानी से जा सकता था…

भाभी का शरीर भी ज़्यादा भारी भरकम नही थी, सो वो थोड़े से प्रयास से अंदर कूद गयी…!

अपने बेटे जैसे लाड़ले देवर को पाल पोसकर एक अच्छे ख़ासे 6 फूटा मर्द बनाने में उन्होने जो मेहनत की थी, उसे यूँ हफ्तों के बीमार जैसी हालत में पाकर उनकी आँखें बरस उठी, शरीर की सारी हड्डियाँ दिखाई दे रही थी,

जो सीना, जांघें और बाजू अपनी भाभी के उपर छाने पर उसे किसी छोटी बच्ची की तरह ढक लिया करते थे, आज वही शरीर हड्डियों का ढाँचा नज़र आ रहा था…!

अपनी करुणा पर काबू करते हुए उन्होने उसे बंधन मुक्त किया, उसके सूखे, पपड़ी पड़े होंठों को अपनी जीभ से गीला किया,

उसकी नशे से बोझिल आँखें हल्के से खुली, और एक कराह के साथ ही फिरसे बंद हो गयी…!

भाभी ने उसे जैसे तैसे करके कपड़े पहनाकर उसके बदन को ढाका, और उसे सहारा देकर बेड पर बिठाया, उसका बदन किसी नशे में चूर शराबी की तरह इधर से उधर झूलने लगा…!

उन्होने उसके गाल थपथपाकर उसे जगाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उसकी आँखें नही खुली !

मोहिनी बैचैन हो उठी, वो सूबकते हुए बोली – उठ जा मेरे लाल, अपनी भाभी को यूँ निराश मत करो लल्ला…!

जब कोई चारा नही दिखा तो वो सोचने लगी, लगता है अब प्राची का ही इंतेज़ार करना पड़ेगा…!

कुछ देर वो उसे लिटाकर कमरे में इधर से उधर टहलने लगी.., मन नही माना, तो फिरसे कोशिश शुरू करदी, वो जल्द से जल्द उसे इस नरक से दूर ले जाना चाहती थी..!

उन्हें डर था कहीं प्राची के इंतेजार करने के बीच अगर यहाँ कोई आ धमका तो…

एक निर्णय लेकर उन्होने उसे अपनी पीठ पर लादा, और खिड़की तक किसी तरह घसीटते हुए लाई, फिर उसके पीछे जाकर उसकी जांघों के नीचे से हाथ फँसाकर पहले उसके पैर बाहर को लटकाए, और उसकी बगलों में हाथ देकर उसे बाहर की तरह उतारने लगी…

अंकुश के पैर ज़मीन से टच होते ही वो खुद विंडो पर चढ़ने लगी, इसी चक्कर में वो उनके हाथ से छूट गया, और वो बाहर ज़मीन पर धप्प की आवाज़ के साथ गिर पड़ा…!

मोहिनी भाभी ने झटपट बाहर आकर उसे अपने सहारे से खड़ा किया और आहिस्ता-आहिस्ता कोशिश करते हुए अंधेरे की तरफ बढ़ गयी…

अंकुश के गिरने की आवाज़ थोड़ी ज़्यादा थी जो रात के सन्नाटे की वजह से कुछ दूर तक चली गयी..,

उसी समय उन गुण्डों में से कोई एक शायद उस तरफ टाय्लेट वगैर के लिए निकला होगा, सो उस आवाज़ को सुन कर चोंक पड़ा…!

उसने उस आवाज़ की दिशा में अपने कदम बढ़ा दिए, जैसे ही वो उस तरफ पहुँचा, दूर से अंधेरे में उसे दो इंसानी साए नज़र आए,

मोहिनी भाभी अंकुश का एक बाजू अपने गले में डालकर उसे सहारा दिए हुए धीरे-धीरे लॉन की तरफ बढ़ रही थी…!

वो गुंडा, जैसे ही उनके कुछ करीब पहुँचा उसने आवाज़ दी – कॉन है वहाँ..?

उसकी आवाज़ सुनकर मोहिनी डर के मारे काँप उठी, वो उसे लिए हुए वहीं ठिठक गयी…!

फिर उसने अपना साहस बटोरकर खंजर पर अपनी पकड़ शख्त कर ली, सोचा अब जो होगा सो देखा जाएगा…!

पास आते ही वो बंदा समझ गया, कि कोई क़ैदी को बचाकर ले जाने की कोशिश कर रहा है, सो उसने अपनी गन निकाल कर उनपर तानते हुए चेतावनी भरे स्वर में कहा –

भागने की कोशिश भी मत करना, वरना भेजा उड़ा दूँगा…! आगे कदम बढ़ाता हुआ वो अब उनसे चन्द कदमों के फ़ासले पर ही था,

मोहिनी ने अंकुश का बॅलेन्स बनाकर उसे उसके पैरों पर खड़ा किया, और खुद उसके बगल से बिजली की तेज़ी से उस गुंडे की तरफ लपकी, पलक झपकते ही अपने हाथ में पकड़ा हुआ खंजर उन्होने उसकी छाती में पेवस्त कर दिया…!

झटके से उस गुंडे का बदन पीछे हटा, जिस’से उसका गन वाला हाथ उपर को उठ गया, और साथ ही उसकी उंगली भी ट्रिग्गर पर दब गयी,

ढाय… की आवाज़ रात के सन्नाटे को चीरती हुई दूर-दूर तक गूँज उठी,

 
वो गुंडा एक मरमान्तक चीख के साथ एक पल के लिए फडफडाया और फिर शांत पड़ गया…

मोहिनी ने अपना खजर उसके सीने से बाहर खींचा और एक धक्का देकर उसे पीछे को धकेल दिया…..!

उधर प्राची श्वेता & कंपनी. को छोड़ने पहले हेमा के घर पहुँची, उसे ड्रॉप करके श्वेता को उसके घर छोड़ा, इसी में उसे काफ़ी वक़्त लग गया…,

उसके बंगले से निकलते ही उसने अपने पति को फोन लगाया, किस्मेत से लाइन मिल गयी.., उसको अपनी पोज़िशन बता कर वो रोड पर आकर खड़ी हो गयी…

10 मिनिट में ही कृष्णा ने उसे वहाँ से पिक किया और उसके बताए लोकेशन पर गाड़ी आँधी तूफान की तरह फार्म हाउस की तरफ दौड़ा दी…

अभी वो फार्म हाउस से कुछ ही दूरी पर थे, तभी उन्हें गोली की आवाज़ सुनाई दी, जिसने उन दोनो की धड़कनें बढ़ा दी,

किसी अनिष्ट की आशंका में प्राची के हाथ प्रार्थना करने के अंदाज में जुड़ गये, कृष्णा ने जबड़े कसते हुए गाड़ी की स्पीड और बढ़ा दी…!

उधर खून से सना खंजर हाथ में लिए मोहिनी किसी चन्डी सी नज़र आ रही थी,

ढीले-ढाले कुर्ता और पुरानी सी जीन्स, सिर के बालों को स्वाफी में लपेटे नकली मूँछो में भले ही उसका हुलिया बदल गया हो,

लेकिन उसके अंदर का ममता मयि दिल इतना कठोर भी हो सकता है कि किसी की जान भी ले सके, इसका उसे खुद भी विश्वास नही हो पा रहा था…!

लेकिन अपने बेटे जैसे लाड़ले देवर की जान बचाने के लिए उसने ये कदम भी उठा लिया था.., और वो आनेवाले किसी भी तरह के संकट से दो-दो हाथ करने का फ़ैसला कर चुकी थी.!

वो उसे संभाले हुए फिरसे आगे बढ़ने लगी, लेकिन गोली के धमाके की आवाज़ सुनकर भानु और उसके तीन साथी बुरी तरह चोंक गये…!

वो बेतहासा आवाज़ की दिशा में भागे…!

मोहिनी किसी शेरनी की तरह अंकुश को संभाले गार्डन के अंधेरे हिस्से में बढ़ी चली जा रही थी, कि तभी एक तरफ से भानु की आवाज़ सुनकर वो ठिठक गयी…!

सामने हाथ में गन लिए भानु उन दोनो को निशाने पर लेकर गरजा…कॉन हो तुम, वहीं रुक जाओ वरना गोली मार दूँगा…!

फिर जैसे ही उसकी नज़र पास में पड़े अपने एक साथी की लाश पर पड़ी, ये देख कर उसका भेजा घूम गया, उसके सोचने समझने की शक्ति जबाब दे गयी और आव ना देखा ताव, उसने ट्रिग्गर दवा दिया…!

मोहिनी फ़ौरन पलट गयी और उसने अंकुश के आगे आकर अपने बदन से छुपा कर खुद उसकी ढाल बन गयी…!

भानु की गन से निकली गोली सीधी मोहिनी की पीठ में समा गयी, उसे अपनी पीठ में गरम लावा सा धस्ता महसूस हुआ…!

उनके मुँह से एक मरमान्तक चीख उबल पड़ी….लल्लाआअ…..आहह… दर्द से उसकी पीठ अंदर चली गयी, सिर आसमान की तरफ उठ गया…और वो अंकुश की बाहों में झूल गयी…!

एक ग्रामीण से दिखने वाले युवक के मुँह से औरत की आवाज़ सुनकर भानु और उसके साथी बुरी तरह से चोंक पड़े,

उधर अंकुश के कानों में जब अपनी भाभी की चीख पड़ी, और लल्लाआ… शब्द सुनाई दिया तो उसकी चेतना वापस लौटने लगी, उसने अपनी शक्ति समेटकर मोहिनी भाभी के शरीर को अपनी बाहों में संभाल लिया…!

भानु और उसके साथी अभी मामले को समझने की कोशिश कर ही रहे थे, इससे पहले कि वो उनपर और हमला कर पाते, तभी आँधी तूफान की तरह एसएसपी की गाड़ी एक झटके के साथ वहाँ आकर रुकी…!

गाड़ी ठीक से खड़ी भी नही हो पाई थी क़ि उस’से पहले ही प्राची झपट कर बाहर आई और आनन-फानन में उसने अपनी गन का मुँह उन गुण्डों पर खोल दिया, पलक झपकते ही भानु के दो गुंडे शहीद हो गये…!

इतने में भानु को मौका मिल गया और अंधेरे का फ़ायदा उठाकर वो और उसका एक साथी पीछे की दीवार फांदकर भाग निकलने में कामयाब हो गये……!

कृष्णा उनका पीछा करने वाले थे कि प्राची ने रोक दिया, दोनो ने मिलकर फ़ौरन भाभी और अंकुश को गाड़ी में डाला, और उसे हॉस्पिटल की तरफ दौड़ा दिया….!

समय रहते मेडिकल हेल्प मिलने से मोहिनी भाभी की गोली निकाल दी गयी, अब वो ख़तरे से बाहर थी…!

वाकी के परिवार के लोग भी खबर सुनकर हॉस्पिटल में आ चुके थे, फिलहाल प्राची के अलावा, वाकी किसी को ये नही बताया कि अंकुश को चार दिन तक स्क्शुअल्ली टारचर किया गया था…!

फार्म हाउस से हॉस्पिटल के रास्ते में ही अंकुश ने प्राची को इशारा कर दिया था, कि वो किसी के सामने श्वेता का नाम ना ले…!

पोलीस की जगह जगह तलाशी के बाद भी भानु का कहीं पता नही चला, भाभी के होश में आते ही, प्राची ने उनको भी इशारों इशारों में समझा दिया…!

पोलीस समेत वाकी सबको यही बताया गया, कि उसे भानु ने रंजिश के चलते उसे किडनॅप किया था, और चार दिन से उसे ड्रग्स दे-देकर टॉर्क्चर कर रहा था…!

इससे पहले कि वो उसे तडपा-तडपा कर मारता, भाभी और प्राची ने उसे ढूँढ निकाला, और समय रहते मोहिनी भाभी ने अपनी जान पर खेलकर उसे बचा लिया…!

डॉक्टर. वीना के हॉस्पिटल में दोनो को एक स्पेशल रूम में रखा गया था, अंकुश को पूरे 48 घंटों तक नींद में ही रखा था, जिससे उसके अंदर के ड्रग्स का असर पूरी तरह ख़तम हो जाए…!

साथ ही साथ उसके बदन में जो कमज़ोरी थी, वो ग्लूकोस की बॉटल और खून के ज़रिए पूरी की जा रही थी…!

निशा और प्राची पूरे समय उन दोनो के पास ही रही, भाभी को होश तो आ चुका था, लेकिन उनका जख्म ताज़ा और गहरा होने की वजह से उन्हें भी बेहोश ही रखा था…!

आज तीन दिन के बाद, दोनो को एक साथ ही होश में लाया गया था, अब मे पूरी तरह अपने आप को तरो ताज़ा महसूस कर रहा था, मेरे होश में आते ही निशा ने मुझे सहारा देकर बिठाया…!

उसकी आँखों में पानी देख कर मेरी भी आँखें नम हो गयी…!

फिर मेने प्यार से उसके गाल पर हाथ फिराया, उसके चेहरे को अपनी तरफ झुकाकर उसका माथा चूम कर बोला – अब मे ठीक हूँ, इन दो शेरनियों ने मेरी मौत को भी मात दे दी…

प्राची भी मेरे पास आ गयी, तो मेने उसके माथे को भी चूमकर उसे थॅंक्स कहा तो वो बोली – थॅंक्स किसलिए भैया, ये तो मेरी तरफ से गुरु दक्षिणा थी,

ये सब तो आप ही की देन है, वरना मे किस लायक थी, ये कहते कहते उसकी आवाज़ भर्रा गयी, मेने उसका हाथ अपने हाथ में लेकर सहलाया, और प्यार से डाँटते हुए कहा-

बस इसके आगे अब और नही…, वरना गुरुजी नाराज़ हो जाएँगे, मेरी इस बात से उन दोनो के चेहरे पर मुस्कान आ गयी, जिसे मे देखना चाहता था…

फिर मेने निशा को गेट बंद करने का इशारा किया, और खुद अपने बेड से उतर कर भाभी के पास जाकर बैठ गया, जो अभी भी आँखें बंद किए सो रही थी…

मेने भाभी का हाथ अपने हाथ में ले लिया और उनके माथे पर चुंबन लेकर उनके सिर के बालों को सहलाया…!

मेरे हाथ का स्पर्श पाकर उन्होने अपनी आँखें खोल दी, मेरे चेहरे पर नज़र पड़ते ही उनके सूखे होठों पर मुस्कान आ गयी, और कमजोर आवाज़ में पुछा –

अब कैसे हो लल्ला…? मेने एक बार फिर उनके माथे पर चूमकर कहा – आपके होते हुए आपके लाड़ले को भला कुछ हो सकता है,

ये सुनकर उनकी आँखें नम हो गयी, पलकों की कोरों से पानी की दो बूँद बिस्तर पर टपक पड़ी…!

फिर उन्होने धीरे से कहा – अपनी भाभी के सूखे होठों को तर नही करोगे लल्ला…?

मेने उनके कान के पास अपना मुँह ले जाकर कहा – यहाँ प्राची भी है भाभी..!

भाभी – मुझे पता है, वो मेरी सबसे छोटी बेहन है, जो हम सबकी गुरु है, उससे शरमाने की ज़रूरत नही है…!

मे – फिर भी उसे तो ये सब पता नही होगा ना कि हमारा संबंध कैसा है..?

भाभी – अच्छा रूको, फिर उन्होने प्राची को पुकारा, वो झट से उनके पास आकर दूसरे तरफ बैठ गयी…

मेने लल्ला जी को अपने सूखे होठ तर करने को कहा, तो ये कहते हैं कि प्राची से पुछो, तुम्हें कोई एतराज तो नही…?

प्राची भाभी की बात सुनकर एकदम गड़बड़ा गयी, फिर कुछ सोच कर बोली – तो मे पिला देती आपको पानी, उन्हें क्यों परेशान करती हैं…!

भाभी मुस्कुरा कर बोली – अरे बाबली, पानी से भी कहीं होठ तर होते हैं..? अपने लल्ला के पास एक स्पेशल रसायन है, जिससे बहुत अच्छे से तर कर देते हैं ये, कभी तुम भी कराकर देखना…!

चलो लल्ला, अब झिझक छोड़ो, ये हमारे देवर भाभी के बीच की बात है, इसमें बेचारी छुटकी को क्यों घसीटते हो…

हमारी बातों से जहाँ प्राची अंजानों की तरह देख रही थी, वहीं निशा मंद-मंद मुस्कुराए जा रही थी…!

फिर मेने जैसे ही झुक कर भाभी के लवो को चूमा, प्राची फटी-फटी आँखों से हमें देखने लगी, जब उसने पलट कर निशा की तरफ देखा तो उसे मुस्कुराते हुए पाकर वो और ज़्यादा हैरान रह गयी…!

एक बार थोड़ा चूमकर मे सीधे बैठ गया, तो भाभी अपने होठों पर जीभ फिरा कर बोली – लल्ला जी कुछ मज़ा नही आया, थोड़ा अच्छे से करो ना…!

मेने मुस्कराते हुए भाभी को फिर से किस किया, और इस बार जो किस हुआ, वो लगभग इश्क फिल्म का जूही और आमिर के किस से मिलता जुलता सा था, हम दोनो की साँसें फूल गयी,

जब एक दूसरे से अलग हुए तो लंबी-लंबी साँसें भर रहे थे, प्राची के तो होश ही उड़े हुए थे, वो इस सोच में थी कि आख़िर ये देवर भाभी का किस तरह का रिश्ता है…!

 
अपनी साँसें कंट्रोल करते हुए भाभी बोली – हां अब कुछ हरारत दूर हुई, अब मुझे किसी दवा की ज़रूरत नही है, ले चलो मुझे घर…!

फिर वो प्राची को संबोधित करके बोली – क्यों छुटकी पता लगा होठ तर कैसे होते हैं, तुझे भी करवाने हों तो बोल, अभी भी लल्ला के पास बहुत तरावट वाकी है…!

क्यों लल्ला सही कह रही हूँ ना मे, ये कहकर मोहिनी भाभी ने मेरी तरफ आँख मारकर मुस्कुराने लगी…!

प्राची मुस्कराते हुए बोली – हाईए दीदी.. ऐसी तरावट लेने के लिए कॉन मना करना चाहेगी भला, पर भैया मुझे थोड़ी ना वो तरावट देंगे, ये तो बस अपनी प्यारी भाभी के ही लाड़ले हैं, क्यों निशा दीदी, सही कह रही हूँ ना…!

निशा – ये तुमसे किसने कह दिया, मेरे पतिदेव इतने स्वार्थी नही हैं, चाहो तो तुम भी ले सकती हो……….!

प्राची भी मेरे किस के लिए कब्से प्यासी थी, भैया के साथ शादी करने के बाद से ही हमने एक दूसरे को अलग ही रिश्तो की डोर में समेट लिया था…!

वो नज़रें झुकाए बोली – क्या ऐसा हो सकता है भैया…?

मेने भाभी के उपर से ही लंबा होकर प्राची के चेहरे को अपने दोनो हाथों में ले लिया, और उसकी आँखों में झाँकते हुए बोला – तुमसे तो मेरे और भी बहुत से रिश्ते हैं..

भाभी तो तुम मेरी हो ही चुकी हो, उससे पहले मेरी शिष्या हो, और अब तो तुमने मेरी जान बचाकर मुझे बिन मोल खरीद लिया है प्राची, जो चाहोगी मिलेगा, किस कोन्सि बड़ी बात है…

इतना बोलकर मेने उसके लवो को चूम लिया, उसने भी मेरे गले में अपनी बाहें डाल दी, जब अलग हुए तो उसकी आँखों में आँसू थे, भर्राये स्वर में वो बोली-

मेने कभी सपने में भी नही सोचा था, कि मेरी किस्मत इतनी अच्छी भी हो सकती है, एक ग़रीब माँ-बाप की बेटी को इतना उँचा और इतना प्रेम करने वाला परिवार भी मिल सकता है…

मे सच में बहुत सौभग्यशाली हूँ दीदी…, फिर कुछ नटखट अंदाज में बोली… कभी कभी मुझे निशा दीदी को चिढ़ाने का मन करता है..

भाभी – वो क्यों ?

प्राची – मुझे लगता है, आप मुझे उनसे ज़्यादा प्यार करती हैं…! उसकी बातें सुनकर हम सब की आँखें नम हो गयी..!

निशा मेरे बाजू में आकर खड़ी हो गयी थी, तो मेने उसे अपनी गोद में बिठाकर बोला – अले.. अले.. मेरा बच्चा तो रह ही गया…

फिर उसे मेने अपनी बाहों में कस कर उसके चेहरे पर चुंबनों की झड़ी लगा दी….., !

अभी हम चारों ये बातें कर ही रहे थे, कि डॉक्टर. वीना चेक-अप के लिए आ गयी…!

हम सबको एक साथ भाभी के पलंग पर बैठे देख कर खुश होती हुई बोली –

अरे वाह ! मे तो यहाँ मरीज़ों को देखने आई थी, लेकिन यहाँ तो मुझे कोई मरीज़ दिखाई ही नही दे रहा…! सब एक दूसरे से चुपके पड़े हैं,

अरे भाई अंकुश जी, अगर थोड़ी बहुत गुंजाइश बची हो तो हमें भी इस प्यार भरी मंडली में शामिल कर लो…!

वीना की बात पर भाभी ने अपनी बाहें फैला दी, वो लपक कर उनके सीने में समा गयी, और उनकी पीठ के घाव को सहलाते हुए बोली – सच में आपका ये देवर हीरा है,

इसके दिल में सबके लिए जगह है, बहुत बड़े दिलवाला है ये, भाभी ने उसके कान में फुसफुसा कर कहा – आप भी इसके दिल में हो क्या…?

वो थोड़ा शर्मीली सी मुस्कान के साथ बोली – अर्जी तो दी थी, अब देखते हैं कब तक आक्सेप्ट होती है…!

ऐसी ही कुछ चुहल बाज़ी के साथ-साथ उसने हम दोनो का चेक अप किया, सब कुछ एक दम नॉर्मल था, फिर भाभी ने घर जाने के लिए पुछा तो उसने केर रखने का बोल कर पर्मिशन दे दी…

वीना – थोड़ा कुछ दिन इस जख्म की केर रखना, वैसे सब ठीक है, हो सका तो दो दिन बाद मे खुद आपको आपके घर आकर चेक कर लूँगी, इसी बहाने आपके वृंदावन के भी दर्शन हो जाएँगे…

भाभी समेत हम सभी ने एक साथ चोंक कर पुछा – हमारा वृंदावन…?

वीना खुलकर हँस पड़ी – अरे मोहिनी जी, आपका घर किसी वृंदावन से कम है क्या, जहाँ सबके दिल में सबके लिए प्रेम बस्ता हो.. वो घर, घर नही मंदिर बन जाता है…!

फिर मेने डॉक्टर. वीना से कहा – डॉक्टर. अगर थोड़ा समय हो तो मे आपसे कुछ डिसकस करना चाहता हूँ…!

वीना – हां .. हां क्यों नही चलो अभी, तुम मेरे कॅबिन में पहुँचो, मे 5 मिनिट में और मरीजों को चेक करके आती हूँ…!

उसके जाने के बाद भाभी ने मेरी तरफ सवालिया नज़रों से देखा, मेने आँख झपकाकर सब ठीक है का इशारा करके मे वीना के कॅबिन की तरफ बढ़ गया…!

कुछ औपचारिक बातों के बाद मेने डॉक्टर. वीना से सवाल किया – आपने मेरा फुल चेक अप किया था..?

वो – हां ! क्यों..?

मे – कोई इनफॅक्षन वग़ैरह तो नही है ना…?

वो मेरे कहने का मतलाव समझ गयी और बोली – तुम्हारा एग्ज़ॅमिन करते ही मे समझ गयी कि तुम्हें ड्रग के ओवरडोज दे-दे कर तुम्हारे साथ जबदस्ती और अन लिमिटेड सेक्स किया गया है…!

लेकिन ये एक अच्छी बात हुई, कि उन औरतों में कोई भी इंफकटेड नही थी, शायद सो कॉल्ड सभी घरों की ही होंगी जो लिमिटेड और प्रोटेक्टेड सेक्स करने वाली हैं, अब मुझे तो पता नही है कि वो कॉन-कॉन थी, और ना ही मे जानना चाहूँगी…

हां ये दीगर बात है, कि तुम अगर अपनी मर्ज़ी से बताओ तो…. ये कहकर वो मुस्करा दी…!

मे – मे तुम्हें सब कुछ बता दूँगा, थोड़ा समय दो…!

वो – जैसी तुम्हारी मर्ज़ी, तो हां ! मे कह रही थी, कि वो सभी लिमिटेड सेक्स करने वाली ही औरतें होनी चाहिए या हो सकता है, उन्होने कॉंडम वग़ैरह यूज़ किया हो जिसकी संभावना कम ही है..!

मे – वो क्यों,..?

वीना – मे अपने एक्सपीरियेन्स से कह सकती हूँ, कि जो औरतें अपने तन की प्यास बुझाने के पर्पस से किसी इनोसेंट मॅन के साथ सेक्स करेगी,

वो कम से कम कॉंडम यूज़ नही करना चाहेगी.., उस’से उसे मज़ा कम आता है. और यहाँ तो सेक्शुल्ली टॉर्क्चर किया गया है तुम्हें तो भला वो अपना मज़ा खराब क्यों करना चाहेंगी…!

मे – कुछ औरतों ने कॉंडम यूज़ किया था, वो उनकी उस लीडर के कहने पर…

वीना – तो ऐसी कितनी औरतों ने सेक्स किया था तुम्हारे साथ..?

मे – पहले दिन तो 6-7 औरतों ने किया था, जिनमें से 4-5 ने कॉंडम यूज़ किया था…

वीना – तो वो 4-5 शायद धंधे वाली होंगी, या कोई और रही होंगी उसके लिए…

थोड़ा सा तुम्हारे पॅनिस के मसल्स में डॅमेज था, शायद ड्रग्स की वजह से वो ज़्यादा शख्त होने के कारण और फिर बहुत लंबे समय तक रफ सेक्स होता रहा उसकी वजह से…!

तो मेरी राय में अभी तुम कुछ दिन अपनी पत्नी के साथ भी सेक्स मत करना, 15 दिन में सब कुछ नॉर्मल हो जाएगा, और तुम पहले की तरह ही मस्त चुदाई कर सकोगे..

फिर उसने एक ट्यूब का नाम लिखकर दिया, इस’से कुछ दिन मसाज करवाते रहना सब कुछ पहले जैसा ही और शायद बेहतर ही करोगे…

क्योंकि कुछ तो इस इन्सिडेंट के कारण और कुछ इस ट्यूब की मसाज से तुम्हारा हथियार थोड़ा प्लस ही हो जाएगा…

ये कहकर वीना हंस पड़ी.. फिर आगे बोली - वाकी बस ड्रग्स की ही मात्रा कुछ ज़्यादा थी बॉडी में, सो लंबी नींद के कारण वो भी अब नॉर्मल है..!

डॉन’ट वरी ! एवेरी थिंग इस ऑलराइट नाउ, एंजाय युवर लाइफ, और हो सके तो किसी बुरे सपने की तरह इसे भूल जाना…!

मे – इस सबका खर्चा भी बता दो, उस हिसाब से मे पेमेंट का इंतज़ाम करूँ..!

वीना मुस्कुराकर बोली – खर्चा थोड़ा लंबा है, जिसे चुकाने के लिए तुम्हें मेरे पास आना पड़ेगा, और जैसा किस तुमने अपनी प्यारी भाभी को किया था, वैसा ही करना पड़ेगा…!

मे – ओह्ह्ह..डॉक्टर ! यू आर सो स्वीटी…! ये कहकर मे लपक कर उसके पास गया, मेने उसे सीट से भी नही उठने दिया, और उसके होठों पर टूट पड़ा…!

वीना के साथ एक लंबी स्मूच के बाद मे उसे थॅंक्स बोलकर खुशी-खुशी बाहर आया, अब मेरी सारी टेन्षन दूर हो चुकी थी, मेने जो सोचा था वैसा कुछ नही हुआ…

भले ही अपने स्वार्थ बस सही श्वेता ने उन औरतों को प्रीकॉशन लेने को कहकर एक तरह से मेरा भला ही किया था…!

 
मुझे खुश देख कर भाभी ने पुछा – बड़े खुश दिख रहे हो, क्या बात है, डॉक्टर वीना ने कुछ दे दिया क्या….?

मेने हँसते हुए कहा – ज़्यादा कुछ नही, जो आपने दिया था, वही उसने भी दिया है.., वैसे मेरी खुशी की वजह कुछ और है…!

तीनों एक साथ बोली – हमें बताने लायक नही है वो वजह…?

मे – नही ऐसी कोई छुपाने वाली बात नही है, बस मे ये जानने गया था, कि मेरे साथ कुछ अबनॉर्मल तो नही हुआ है.. जो कि सब कुछ पहले जैसा ही है…!

घर आकर प्राची और निशा, भाभी की देखभाल में लग गयी, भाभी का बेटा सुवंश ज़्यादातर निशा के पास ही रहता था, स्कूल के बाद उसे रूचि भी संभाल लेती थी…!

कुछ दिनों में ही भाभी का जख्म सही हो गया, वो अब घर के काम संभालने लगी थी, प्राची को हमने वापस शहर भेज दिया…!

एक दिन हम तीनों ही बेड पर बैठे बातें कर रहे थे, भाभी ने मेरे बालों में अपनी उंगलिया घूमाते हुए कहा –

लल्ला जी ! भानु और उस छिनाल श्वेता को यूँ ही छोड़ दोगे…?

मे – आप क्या चाहती हैं ? वैसे भानु तो जिस दिन पोलीस के हाथ लग गया, तो किडनॅप चार्जस में जायगा कम से कम 10 साल के लिए अंदर,

और रही श्वेता तो वो वैसे ही अपने अंदर के डर में रोज़ नयी मौत मरती रहेगी कि मे कुछ उसके साथ ना कर दूं…!

भाभी मेरी तरफ गहरी नज़रों से देखती रही, मेने उन्हें अपनी ओर ऐसे अंदाज में देखते पाकर कहा – ऐसे क्या देख रही हो भाभी ?

भाभी – कुछ नही, बस सोच रही थी कि कहीं तुमने उन्हें माफ़ तो नही कर दिया? पता है ना, वो लोग तुम्हें जान से मारने वाले थे…! 5-10 साल की जैल से भानु सुधर नही जाएगा…

वो ऐसा जहरीला नाग है, कि मौका पड़ते ही फिरसे चोट करेगा, कब तक यूँ ही छोड़ते रहोगे उसे…!

और वो हराम्जादि छिनाल, इतने बड़े क्राइम में इन्वॉल्व थी, उसे तो क़ानून भी कभी कोई सज़ा नही दे पाएगा..,

एक अजनबी लड़की को इंसाफ़ दिलाने वाला आदमी, अपने उपर हुए अत्याचारों को ऐसे ही भुला देगा, ये मेने कभी सोचा भी नही था…!

ये बातें कहते कहते भाभी उत्तेजित दिखाई देने लगी, मुझे ये अहसास होने लगा कि अगर मेने कुछ नही किया तो कहीं ये और प्राची अपनी तरह से कुछ करने ना निकल पड़ें..

अतः मेने उनका हाथ अपने हाथों में लेकर उनके गुस्से को शांत करने के लिए कहा –

अगर आप चाहती हैं कि उन्हें उनके गुनाहों की सज़ा मे दूं, तो यकीन कीजिए वो दोनो अब ज़्यादा दिन खुले में साँस नही ले पाएँगे….!

मेरी बात सुनकर भाभी थोड़ी सहम सी गयी, कुछ देर घूर्ने के बाद बोली – तो क्या तुम अपने हाथों से उनका खून करोगे..?

मे – मुझे अपने हाथ उनके गंदे खून से रंगने की ज़रूरत नही पड़ेगी, बस अब आप देखती जाओ, मे कैसा चक्रव्यूह बनाता हूँ उन दोनो के लिए…!

मे अब फिरसे कोर्ट जाने लगा था, और अपने सारे काम सामान्य तरीक़े से करने लगा था...,

यहाँ तक कि अपनी निशा डार्लिंग के साथ बेड वाला गेम भी शुरू करने वाला था, जो कुछ दिनो के लिए पोस्टपोन कर रखा था डॉक्टर. वीना की हिदायत के बाद…!

उस दिन सोने से पहले निशा मेरे लंड की मालिश कर रही थी, वीना के प्रिस्क्राइब किए हुए ट्यूब से…

लंड पूरी तरह अपने आकार में आ चुका था, अब वो उसकी मुट्ठी में भी नही समा रहा था…

मालिश करते करते निशा मदहोश होती जा रही थी, इससे पहले कि वो अपनी नाइटी निकाल कर मेरे लंड पर बैठती, कि तभी भाभी आ धमकी…

मेने झट से अपना शॉर्ट उपर करने की कोशिश, की तभी भाभी बोल पड़ी… छुपा लो छुपा लो अपने खजाने को…, अब तो इस पर निशा का ही हक़ रह गया है…!

निशा उनकी बात से थोड़ी दुखी स्वर में बोली – ऐसा क्यों बोल रही हैं दीदी, उन्हें शर्म लगी होगी इसलिए वो इसे ढकने लगे, मुझे खम्खा आपने स्वार्थी बना दिया…!

भाभी ने फ़ौरन उसे अपने गले से लगा लिया और बोली - ऐसी मेरी कोई मनसा नही थी लाडो, मे तो बस मज़ाक कर रही थी, तू तो सीरीयस हो गयी…

मेने भाभी की गुदगुदी गान्ड दबाते हुए कहा – अब इस पप्पू को अपनी गुल्लक में रखना आपके बस का रोग नही है भाभी…!

वो आँखें चौड़ी करके बोली – अच्छा देखें तो सही, क्या सुरखाव के पर निकल आए हैं इसको, ये कहकर उन्होने मेरा शॉर्ट नीचे खिसका दिया और उसे अपनी मुट्ठी में लेकर देखने लगी…

सच में लल्ला, ये तो पहले से बड़ा और मोटा सा लग रहा है, निशा तूने तो लेकर देखा होगा..

निशा – अभी कहाँ दीदी, आज ट्राइ करने वाली थी कि आप आ धमकी,

भाभी – अच्छा तो, 900 चूहे ख़ाके बिल्ली हाज़ करने चली है, मुझसे क्या शर्म, आज दोनो बहनें मिलके फिरसे इसका तेल निकालते हैं, ये कहकर वो दोनो मेरे आजू-बाजू बैठकर उसे बारी बारी से मुठियाने लगी…

मेने दोनो को नंगा करके दोनो की गान्ड अपनी तरफ औंधी करवा ली, एक की चूत चाटने लगा तो दूसरी की चूत में उंगली से चोदने लगा…!

हाल ही में क्रीम की मालिश की वजह से वो उसे मुँह में नही ले पारही थी, इसलिए एक के उपर दूसरी का हाथ रख के मुत्ठियाने लगी…

निशा पहले से ही गरम हो रही थी, सो वो मेरे उपर सवार हो गयी, और मे भाभी की चूत की सर्विस करने लगा…

निशा ने बहुत कोशिश की लेकिन वो पूरा लंड नही ले पाई.., अंत तक लेते लेते, उसका भाड़ सा मुँह खुल गया.., लंड अभी जड़ तक नही पहुँच पाया था कि वो एक बार ऐसे ही झड गयी…

निशा को ज़्यादा उच्छल-कूद ना करनी पड़े, इसलिए मेने उसे अपने बगल में करवट से लिटा लिया, और उसकी गान्ड मसल्ते हुए पीछे से अपना लंड उसकी रस से सराबोर चूत में सरका दिया…

आअहह….राज़ीए….बहुत बड़ा है, थोड़ा बाहर ही रखना…प्लीज़…

मे निशा को 3/4 लंड से चोदने लगा.., हल्के हल्के धक्के लगाकर मेने एक बार उसकी चूत को अपने पानी से तर कर दिया,

भाभी ने नॅपकिन से मेरे लंड को सॉफ किया, और उसे अपने मुँह में लेकर चूसने लगी, 5 मिनिट में ही वो फिरसे डंडे की तरह शख्त हो गया…

मेने भाभी को घोड़ी बना दिया, और उनकी गान्ड पर चाँटा मारते हुए उनके पाटों को सुर्ख लाल कर दिया…,

गान्ड में मुँह डालकर कुछ देर उनकी चूत और गान्ड को चाटा…, वो चुदने के लिए उतावली होने लगी….

आअहह…लल्लाअ…अब जल्दी से डालो रजाअ…

मेने पीछे से अपना सोट जैसा 9” लंबा और 3” मोटा लंड उनकी चूत के छेद पर रखा, और एक तगड़ा सा धक्का लगा दिया…

तीन-चौथाई लंड सर्र्र्र्र्र्र्ररर……से अंदर चला गया…

भाभी गर्म होती गाय की तरह रांभाने लगी…. हाए लल्ला… बहुत मोटा हो गया है…थोड़ा आराम से मेरे रजाअ…,नही तो मेरी चूत का भोसड़ा बन जाएगा…!

मेने वाकी बचे हुए लंड को भी पेलते हुए कहा – क्यों फट गयी, तब तो बड़ी ताने दे रही थी निशा को…अब झेलो इसे..…!

भाभी – अरे भोसड़ी के थोड़ा धीरे डाल मदर्चोद… मेरे मुँह से होकर निकालेगा क्या…, हाए राम कितना लंबा हो गया है.. ये.

ले मेरी प्यारी भाभी अभी तो इस’से तुम्हारी गान्ड खोलूँगा ना तब देखना क्या होता है…, मेने धक्के लगाते हुए कहा…!

आज पहली बार भाभी के मुँह से ऐसे शब्द निकल रहे थे, या तो ये कहा जाए कि लंड उनकी चूत में पहले से ज़्यादा अंदर तक उसकी दीवारों को चीरता हुआ जा रहा था…

तो उत्तेजना के मारे वो अनाप-शनाप बकने लगी थी, गान्ड फाड़ने की बात सुनकर वो गिडगिडाते हुए बोली –

हाईए…रामम…ऐसा मत करना मेरे राजा… गान्ड फट जाएगी इस’से तो…चल भी नही पाउन्गि….आअहह….चूत में ही लेना भारी पड़ रहा है….हे रामम…. मारी रीई…, हां मेरे सोना… ऐसे ही धीरे-धीरे री…

भाभी की मादकता से भरपूर कराहट भरी बातें सुनकर मुझे और जोश बढ़ता जा रहा था…और मेने उनकी गान्ड मसल्ते हुए अपने धक्के और तेज कर दिए…

भाभी की चूत लगातार रस बहाए जा रही थी, लंड की चोट सीधी उनकी बच्चेदानी में पड़ रही थी…इस वजह से वो लगातार रस छोड़ रही थी…

फुकछ…फुकछ…पक..पक… जैसी आवाज़ें लंड के अंदर बाहर होने से आ रही थी…,

भाभी झड़ने के बाद कुछ देर ढीली पड़ जाती, मे उनकी पोज़िशन चेंज करके फिरसे चोदने लगता…

लास्ट में मेने भाभी को अपनी तरफ गान्ड करके अपने उपर बिठा लिया, और गान्ड की दरार में उंगली करते हुए नीचे से ढका-धक धक्के लगाता रहा…, भाभी की रेल बन चुकी थी…

लेकिन मेरा मज़ा खराब ना हो इसलिए वो बेचारी मेरे ताबड-तोड़ धक्कों को सहन करती रही, कुछ ना कुछ बड़बड़ाती जा रही थी…

आधे घंटे की लगातार चुदाई के बाद मेरा लंड जबाब देने लगा, और उसने भाभी की ओखली को अपने गाढ़े-गाढ़े पानी से लबालब भर दिया…

भाभी पस्त होकर मेरे उपर पसर गयी…, अपनी लंबी-लंबी साँसों को इकट्ठा करने की कोशिश करते हुए बोली –

हे भगवान आज तो ग़ज़ब ही कर दिया लल्ला तुमने, मेरी तो जान ही अटक गयी थी…

मेने उनकी चुचियों को मसल्ते हुए कहा – इसका मतलब मज़ा नही आया आपको…?

भाभी – मज़ा ? मज़े के मारे ही तो मे होश ठिकाने नही रख पा रही थी…सच में बहुत दमदार हो गया है तुम्हारा लंड, और स्टॅमिना भी कुछ और बढ़ गया है..

मे – तो अच्छा ही है ना, मुझे अलग-अलग मेहनत नही करनी पड़ेगी, दोनो को एक साथ ही निपटा दिया करूँगा……!

भाभी – मुझे तो लगता है, तुम हम दोनो को भी नानी याद दिला दोगे…ये कहकर भाभी हंस पड़ी, और मेरे लंड को चूम लिया….!

निशा – आज की दीदी की चुदाई देख कर मुझे तो डर लग रहा है, डेलीवेरी तक मे तो अब इनके पास फटकने वाली नही हूँ, कहीं मेरे बच्चे को ठोकर लग गयी जोश-जोश में तो…!

मेने हँसते हुए उसे अपनी गोद में खींच लिया और उसके रसीले होठों को चूमकर कहा – इतना भी निर्दयी मत समझो मुझे.., की अपने बच्चे को ही चोट पहुँचा दूं,

वो तो भाभी को ज़्यादा से ज़्यादा खुशी देने के लिए मेने उन्हें जमकर चोदा है.., भाभी आप खुश तो हो ना…!

उन्होने मेरे गाल को कच-कचाकर काट लिया, मेरे मुँह से आअहह.. निकल गयी, फिर उसे चूमकर बोली – बहुत खुश.., भगवान करे ये खुशी यूँ ही बनी रहे…

इस तरह हमारी लाइफ फिरसे सामान्य गति पकड़ने लगी…………….!

 
एक दिन काम से मे गुप्ता जी के यहाँ गया हुआ था, हमेशा की तरह हॉल में बैठा उनका इंतजार कर रहा था, तभी सेठानी मेरे पास आकर बैठ गयी,

खुशी कॉलेज जा चुकी थी, मेरे पास आकर वो मेरे किडनॅप के विषय में पूछने लगी…!

इससे पहले कि मे उनको कोई जबाब देता, कि गुप्ता जी अपने रूम से निकलते दिखाई दिए, वो हमारी तरफ आते हुए बोले – क्या बातें हो रही हैं भाई…?

सेठानी – कुछ नही जी, बस मे पुच्छ रही थी, कि इनका अपहरण किसने किया था..? कैसे हुआ..? वो सब..

गुप्ता जी – क्या बात है भागवान, तुम्हें भी अब हमारे वकील साब की अच्छाइयाँ नज़र आने लगी, सुनकर अच्छा लगा कि तुम्हें इनकी फिकर हुई…!

सेठानी – क्या आप भी बार-बार वही टोन्ट मारते रहते हैं, एक बार ग़लती क्या हो गयी, आप तो उस बात को पकड़के बैठ गये हैं…!

मे और गुप्ता जी उनकी बात पर हँसने लगे, फिर वो बोले – अब तुम इनकी कहानी बाद में सुनना, हमें ऑफीस में बहुत सारे काम हैं, चलो वकील साब निकलते हैं…

मे उनके साथ चलने लगा, तो पीछे से सेठानी बोली – अंकुश बेटा, शाम को समय निकल कर आना, खुशी बहुत परेशान थी तुम्हें लेकर और मुझे भी बहुत सारी बातें करनी हैं तुमसे…

मे हां बोलकर गुप्ता जी के पीछे लपक लिया…..!

दो घंटे में गुप्ता जी का काम निपटाकर मे अपने ऑफीस पहुचा, बहुत सारे केसस पेंडिंग पड़े थे, जिनकी डेट्स आगे की लेनी थी, कुछ की हियरिंग थी…

सारे दिन की भागदौड़ में दिन कब निकल गया पता ही नही चला, घर जाना था लेकिन अब घरवालों की खास हिदायत थी कि लेट होने पर वहीं रुक जाना…

मेने सोचा आज रात भैया के बंगले पर बिताई जाए, उनसे भी बात किए बिना कई दिन हो गये थे, प्राची तो हर रोज़ मेरी वाट जोहति रहती थी…!

शाम 8 बजे मे उनके बंगले पर पहुँचा, पता चला वो दोनो मियाँ बीवी प्राची की मम्मी से मिलने मेरे ही फ्लॅट पर गये हैं, मेने फ़ौरन वहाँ से गाड़ी दौड़ाई और अपने घर पहुँचा वहाँ वो दोनो मुझे मिल गये…

मुझे देखते ही भैया बोले – क्यों भाई वकील साब अभी जुम्मा जुम्मा चार दिन हुए हैं एक मुशिवत से निकले हुए और फिर से खुले सांड़ की तरह इतनी रात तक सड़कों पर हानडते रहते हो…

मेने कहा – भैया, इतने दिनो का पेंडिंग काम थे लोड ज़्यादा है, कुछ दिन तो ऐसे ही जाने वाले हैं.. आप सूनाओ, मे तो आपके बंगले पर गया था,

वहाँ से पता चला कि आप यहाँ आए हो, तो इधर भागा, इसी चक्कर में और लेट हो गया…!

चल कोई ना, सही समय पर आया है, खाना शुरू करने ही वाले थे हम लोग,

आंटी और प्राची ने हम सबके लिए खाना लगाया, बातें करते हुए हम सभी खाना खाने लगे…!

मधु आंटी अब अच्छे रहन सहन और खाने पीने की वजह से उनके अंगों में निखार आता जा रहा था…,

मस्त टाइट 34द की उनकी चुचियाँ कसे हुए खुले गले के ब्लाउस से बाहर झाँक रही थी, खाना खाते हुए भैया की नज़र वहीं टिकी हुई थी…,

मेने मन ही मन मुस्कराते हुए भैया से पुछा – श्वेता के फार्म हाउस की क्या स्थिति है…?

भैया – वो तो हमने अपनी कस्टडी में लिया हुआ है, पोलीस की सील लगी है, क्यों..?

मुझे अन अफीशियली कुछ दिन के लिए उसकी औतॉरिटी चाहिए…मेने कहा !

भाभीया चोन्क्ते हुए बोले – क्यों..? अब क्या करने वाला है वहाँ..?

मे – वो सब बाद में बताउन्गा, पहले आप मेरी बात का जबाब दीजिए…!

भैया – देख ले, मे दे तो दूँगा, लेकिन कुछ ऐसा वैसा मत करना जिससे तू भी फँसे और मुझे भी जबाब देना भारी पड़ जाए…!

मे – वो सब आप मुझ पर छोड़ दो, ऐसा कुछ भी नही होने दूँगा…!

बातें करते हुए बीच-बीच में उनकी नज़र भटक कर अपनी सास के यौवन पर ज़रूर अटक जाती, जिससे उनके पॅंट में उभार बढ़ने लगा था…!

शायद आंटी भी उनकी नज़र ताड़ गयी थी, सो उन्होने अपने आँचल को सही करने के बहाने उसे और ढालका दिया, उनकी गोरी गोरी गोलाईयों में भैया का मन भटकने लगा…!

खाने के कुछ देर बाद आंटी ने फ़्रीज़ से निकाल कर आइस क्रीम सर्व की जो प्राची अपने साथ लाई थी…!

उन्होने बड़ी मादक अदा से भैया को आइस क्रीम सर्व की कुछ ऐसे पोज़ से जिससे उनके यौवन के दीदार वो अच्छे से जी भरके कर सकें,

इस बीच मेने प्राची को अपनी बातों में उलझाए रखा,

कुछ देर बाद प्राची और भैया अपने बंगले पर लौट गये और मे और आंटी अपने-अपने कमरे में सोने चले गये…!

मे अभी लेटा ही था, कि तभी आंटी अपने कपड़े चेंज करके मेरे पास आ गयी,

वो इस समय एक शॉर्ट नाइटी पहने थी, जो मात्र घुटनो तक ही थी, नीचे शायद पैंटी और ब्रा भी नही थी, चलने से उनकी 34द सुडौल चुचियाँ थिरक रही थी…!

वो धीरे-धीरे गान्ड मटकाते हुए मेरे पास तक आई और बिस्तर पर मेरी बगल में आकर लेट गयी, …!

उन्होने अपनी एक जाँघ मेरे लंड के उपर रखली, अपने आमों को मेरे साथ सटाते हुए मेरे सीने पर हाथ फेरते हुए बोली –

उन गुण्डों ने तुम्हें किडनॅप क्यों किया था…?

मेने मधु आंटी की नाइटी को और उपर सरका कर उनकी गान्ड को नंगा कर दिया, और अपनी उंगली उनकी मस्त गुद-गुदि गान्ड की दरार में उपर से नीचे तक घूमाते हुए कहा –

मेने उनको परेशान करके रखा था, इसलिए उन्होने मौका देख कर मुझे परेशान किया…,

वो तो अच्छा हुआ कि प्राची और भाभी ने समय पर पहुँच कर बचा लिया, वरना ना जाने और कितने दिन टॉर्चर करते…!

आंटी ने मेरे लंड को शॉर्ट के उपर से सहलाते हुए कहा – तुमने प्राची को इस काबिल बना दिया है, कि वो इस तरह के ख़तरे उठा लेती है, वरना एक साधारण सी लड़की कभी ऐसा नही कर पाती…!

मे – हां वो तो है, वैसे आंटी, भैया के बारे में आपका क्या ख़याल है…!

वो मेरी बात से एकदम चोंक पड़ी, फिर संभालते हुए बोली – किस बारे में…?

मेने उनकी चुचियों को मसल्ते हुए कहा – उनकी नज़र आपके इन आमों पर थी..,

वो मेरी बात सुनकर शरमा गयी, फिर अंजान बनते हुए बोली – कब, मुझे तो पता नही, वैसे वो मेरे दामाद हैं भला उनके मन में ऐसे भाव नही आ सकते..,

मेने अपनी एक उंगली उनकी गान्ड में डाल दी, आंटी ने अपने छेद को सिकोडकर उसे कस लिया, और उनके मुँह से एक सिसकी निकल गयी…!

 
मेने उंगली को और अंदर करते हुए कहा – वैसे आपकी अदाओं से तो ऐसा नही लगा कि वो आपके दामाद हैं, और फिर उनके छोटे भाई का लंड ले सकती हो तो उनका लेने में कैसा परहेज…!

आहह…. बेटा, ज़्यादा अंदर मत करो…सुखी है..., मेने अपनी उंगली गान्ड से निकाल कर चूत में पेल दी..., दो उंगलियों को अंदर बाहर करते हुए पुछा –

वैसे भैया अगर कोशिश करें तो क्या आप उन्हें रोकेंगी…?

सस्स्सिईईई….आअहह…. ऐसा कभी मौका आया तो शायद ना रोक पाउ…उउउइई..

मेने आंटी को सीधा लिटा दिया, और उनके उपर आकर नाइटी निकाल दी, और उनकी चुचियों को उमेठते हुए कहा – आप दोनो को पास लाने की मे कोशिश करूँ ?

आअहह…उखाडोगे क्या इनको…, थोड़ा धीरे से मस्लो…, प्राची को पता चल गया तो…!

मेने अपना शॉर्ट निकाल दिया, अपने सॉट जैसे 9” के लंड को उनकी रसीली चूत के मुँह पर रख कर उसकी फांकों के उपर घिस्सा लगाते हुए कहा –

प्राची को बोलकर चुदना चाहती हो क्या…? मज़े लो आंटी, भैया का लंड भी अंदर ही जाएगा.. ये कहकर मेने एक तगड़ा सा धक्का अपनी कमर में लगा दिया…

मेरा आधा लंड उनकी कसी हुई चूत में समा गया, आंटी के मुँह से आआहह…निकल गयी.., वो सिसकते हुए बोली – आराम से रजाअ…बेटा….ये तो पहले से भी ज़्यादा मोटा लग रहा है…

मेने थोड़ा और पुश करते हुए कहा – हां, उन लोगों ने ड्रग देकर इसे और तगड़ा कर दिया है…, आअहह आंटी, बहुत कसी हुई चूत है आपकी…

भैया आपको चोद कर खुश हो जाएँगे…, मेरी बात से आंटी की उत्तेजना और बढ़ गयी…, और उन्होने अपनी कमर को उपर उठा दिया…

मेरा रहा-सहा लंड भी आंटी की रसीली चूत में सरक गया…, आंटी की आँखें खुली रह गयी.

कुछ देर बाद मेने अपने धक्के लगाने शुरू कर दिए, आंटी भी कमर उठा-उठाकर मेरे लंड का मज़ा लेने लगी…….!

मधुमिता आंटी को चोदते चोदते मेरा दिमाग़ श्वेता के फार्म हाउस में मेरे साथ हुए सेक्स एनकाउंटर की तरफ चला गया…!

मेरा लंड अपना काम कर रहा था लेकिन दिमाग़ कुछ और ही सोचों में खोया हुआ था, मुझे भाभी को दिया हुआ वचन भी पूरा करना है…,

सोचते-सोचते में आंटी की चूत में धक्के भी लगाता जा रहा था, मुझे किसी तरह भानु को फिरसे पकड़ना था…!

श्वेता को छेड़ना अभी ठीक नही है, वरना वो चौन्कन्नि हो सकती थी, और वैसे भी उसके खिलाफ मेरे पास कोई ठोस सबूत नही थे..,

ना जाने कितनी देर से मे आंटी को चोदे जा रहा था, इस बीच आंटी दो बार झड भी चुकी थी, लेकिन मे अपनी सोचों में गुम एक लयबद्ध तरीक़े से धक्के लगाए जा रहा था…

मेरा ध्यान उनकी कराह सुनकर टूटा, मेरे सीने पर हाथ रखकर मुझे रोकने की कोशिश करते हुए वो बुरी तरह से कराहने लगी थी, आअहह.. बेटा…अब बस करो वरना मेरी चूत सूज जाएगी…!

मेने उनके चेहरे की तरफ देखा जहाँ पीड़ा के निशान थे, बिना झड़े ही मेने फ़ौरन अपने धक्के बंद किए और उनके उपर से उतर गया…

सॉरी आंटी जी माफ़ करना, आप ठीक तो हैं…?

आंटी – आहह…आज क्या हो गया है तुम्हें मेरी हालत खराब करदी तुमने…!

फिर उन्होने बिना कुछ कहे बाथरूम जाकर अपनी चूत को ठंडे-ठंडे पानी से सॉफ किया और बाहर आकर अपने कपड़े पहन कर सोने चली गयी…!

उनके जाते ही मे फिरसे अपनी सोचों में गुम हो गया…!

दूसरे दिन से मेने भानु को खोजने की अपनी मुहिम तेज कर दी, क्योंकि वोही मेरे लिए एक कमजोर कड़ी था जिसके ज़रिए मे अपना मक़सद पूरा कर सकता था, पर ना जाने वो हरामी कोन्से बिल में छुपा बैठा था…!

उसके मिलने के सारे ठिकानों पर मेने अपनी सोर्सस से सब जगह पता करवा लिया, लेकिन उसका कोई पता नही चल पा रहा था,

श्वेता को छेड़ने की मेने कोई कोशिश भी नही की.

भानु का मोबाइल भी लगातार स्विच ऑफ आ रहा था, कई अलग-अलग नंबरों से चेक किया लॅंड लाइन से भी ट्राइ किया लेकिन कोई फ़ायदा नही हुआ…!

इसी सीरीस में मेने रागिनी की ससुराल का पता निकाला, शायद वो अपनी बेहन के यहाँ छुपा बैठा हो.., सो मेने अपना हुलिया चेंज करके जोसेफ वाला गेटअप बनाकर अपनी गाड़ी लेकर उसको तलाश करने निकल पड़ा…

रागिनी की ससुराल कृष्णा भैया की पहली पोस्टिंग वाले शहर में थी, जोसेफ के गेटअप में मेने अपनी गाड़ी उसी शहर की तरफ दौड़ा दी…

गर्मियों के दिन थे, समय दिन के कोई 11 ही बजे थे, कि रोड साइड में मुझे एक गाड़ी खड़ी दिखी जिसका बॉनेट खुला हुआ था…

मेरी गाड़ी देखते ही उसके ड्राइवर ने मुझे हाथ देकर रोकने का इशारा किया, मेने अपनी गाड़ी की स्पीड कम की, पास आकर मुझे खड़ी गाड़ी की पिच्छली सीट पर एक लेडी साड़ी पहने हुए दिखी…

मेने थोड़ा आगे जाकर गाड़ी खड़ी कर दी, उस गाड़ी का ड्राइवर भागता हुआ मेरे पास आया, और रिक्वेस्ट करके बोला – साब हमारी गाड़ी खराब हो गयी है, अगर आप अगले शहर तक जा रहे हों तो मेम साब को लिफ्ट दे सकते हैं..?

मेने कहा – अगर तुम्हारी मेम साब को कोई प्राब्लम नही हो तो मुझे उन्हें लिफ्ट देने में कोई प्राब्लम नही है, मे भी उसी शहर तक जा रहा हूँ…!

वो फ़ौरन वहाँ से भागा, कुछ देर में ही वो लेडी मेरी गाड़ी के बगल में खड़ी थी, मेने एक सरसरी नज़र उस पर डाली, वो कोई 30-32 साल की परफेक्ट फिगर की 34-32-36, हाइट भी अच्छी ख़ासी थी…

गोरा रंग गोल सा चेहरा, बोलती सी बिल्लौरी आँखें, मे देखते ही समझ गया कि ये सेक्स पसंद करने वाली महिला है…!

उसका कारण था, उसकी आँखों का रंग और उसके उपर वाले होठ पर एकदम सेंटर में तिल का निशान, जो किसी के भी सेक्स के प्रति आकर्षण का एक यूनिवर्सल साइन होता है…!

होठों की बनावट कह रही थी, कि वो एक परफेक्ट चुंबन स्वामिनी होनी चाहिए..!

गर्मी के कारण उसे पसीना आ रहा था, जो उसके चेहरे से चुहूता हुआ, उसकी पर्वत श्रंखलाओं की घाटी में लुप्त हो रहा था…!

बार बार वो अपने हॅंकी से उसे पोन्छ्ने की कोशिशी करती…, मेने साइड ग्लास नीचे गिराया, उसने थोड़ा झुक कर मुझे कहा – एक्सक्यूस मे मिसटर, क्या आप मुझे अगले शहर तक लिफ्ट दे सकते हैं, आपकी बहुत मेहरवानी होगी…!

झुकने से ही उसके पर्वत शिखरों का अनुमान हो गया, कि उनका विस्तार क्षेत्र कैसा है..!

ओह शुवर, वाइ नोट… ये कहकर मेने हाथ बढ़कर आगे का गेट खोल दिया…!

उसने बैठने के लिए अपना एक पैर आगे किया, साड़ी में कसी हुई उसकी परफेक्ट शेप्ड गान्ड बड़े कामुक अंदाज में थिर्की, जिसे देखकर मेरे लौडे ने करवट बदली…!

अंदर बैठकर उसने रहट की साँस ली, मेने अपने एसी का नंबर बढ़ा दिया, उसकी ठंडी हवा का अहसास होते ही वो बोली – थॅंक्स लॉट्ट,

बाहर बहुत गर्मी है, हमारी गाड़ी खराब हो गयी है, अब पता नही कब तक ठीक होगी…!

मे – कोई बात नही, मे भी उसी शहर की तरफ ही जा रहा हूँ, मेरे लिए भी अच्छा होगा, किसी हसीन साथी के साथ सफ़र करने में…

 
मेरी बात सुनकर उसने तिर्छि नज़र से मेरी तरफ देखा, और एक कामुक सी मुस्कान देकर बोली – ओह्ह्ह.. तो जनाब सुंदर औरत देखते ही फ्लर्ट करने लगे…, एनीवेस थॅंक्स फॉर कॉंप्लिमेंट…!

माइ प्लेषर बोलकर मेने गाड़ी आगे बढ़ा दी, मेरी नज़र आगे होते ही वो मेरी तरफ देखने लगी…!

मेने आगे नज़र रखे हुए ही उससे पुछा – आप उसी शहर में रहती हैं..

वो – हां ! मेरा नाम शालिनी है, वहाँ मेरी ससुराल है, फिर उसने अपने परिवार के बारे में बताया, वो एक जॉइंट फॅमिली में रहते हैं,

अच्छा ख़ासा गारमेंट का बिज्निस है, दो भाई हैं, जो एक उसके पति से छोटा है यानी देवर जिसकी शादी किसी ज़मींदार की लड़की के साथ हो चुकी है…!

ज़मींदार शब्द सुनते ही मेरे दिमाग़ ने काम करना शुरू कर दिया.., कहीं ये

रागिनी की जेठानी तो नही..,

लेकिन अपनी एग्ज़ाइट्मेंट पर काबू रखते हुए मेने उस टॉपिक को और आगे नही बढ़ाया वरना शक़ पैदा हो सकता था…

बातों के दौरान मेने उसकी तरफ नज़र डाली, वो लगातार मुझे ही देखे जा रही थी, मेने चुटकी लेते हुए कहा –

क्या देख रही हो मेडम, ऐसा कुछ खास नही है इस थोबडे में जो आप जैसी हसीना के देखने लायक हो…!

वो झेंप कर सामने देखने लगी, फिर कुछ सोच कर बोली – आप भी कुछ बताओ अपने बारे में…!

मे – मेरा कोई खास इंट्रो नही है, मुझे लोग जोसेफ के नाम से जानते हैं…

मस्त मौला मस्त कलंदर आदमी हूँ, जिधर मुँह उठ जाता है, निकल पड़ता हूँ,

खाने कमाने की टेन्षन नही है…बाप दादे ने बहुत कमा के रख छोड़ा है, बस अपनी तो ऐश ही ऐश हैं…!

वो – वैसे आप बड़े दिलचस्प इंसान लगते हैं, और हॅंडसम भी, कोई भी लड़की आपके नज़दीक आना चाहेगी…!

मे – हाहाहा… हॅंडसम और मे..? क्यों चने के झाड़ पर चढ़ा रही हो शालिनी जी.., वैसे आप मेरे नज़दीक आना चाहेंगी क्या…?

मेरी बात से वो मन ही मन मुस्करा उठी, एक कामुक सी नज़र से देखते हुए बोली – अगर आप आने देंगे तो…!

मे – आप जैसी हूर से दूर कों भागना चाहेगा, ये कहकर मेने अपना हाथ उसकी मक्खमली जाँघ पर रखकर उसे धीरे से सहला दिया….!

वो मेरी तरफ झुकने लगी, शायद वो मेरे गाल पर किस करना चाहती थी, लेकिन तभी मेने अपना मुँह उसकी तरफ घुमाया, और हम दोनो के होत आपस में चिपक गये…

शर्म और उत्तेजना से उसके गाल लाल हो गये…!

धीरे-2 उसका भी हाथ मेरी जाँघ से होता हुआ उनके बीच आ गया, और वो जीन्स के उपर से ही मेरे लंड का आकर चेक करने लगी, जो शायद खेली खाई होने की वजह से समझ गयी, कि मेरा मूसल उसकी ओखली की कुटाई अच्छे से कर सकता है…!

शालिनी – वैसे आप हमारे शहर में कहाँ जा रहे हैं…?

मे – वहाँ जाकर कोई अच्छा सा होटेल लेकर एक-दो दिन मटरगस्ति करूँगा…!

उसने कहा – हमारे शहर में 3 स्टार होटेल ही हैं, वैसे शालीमार होटेल बहुत अच्छा है, अगर आप चाहो तो वहाँ रुक सकते हो…!

मेने उसकी तरफ स्माइल देकर कहा – अगर आपको पसंद है, तो वहीं रुक जाएँगे, हमें क्या, मुझे तो कहीं भी अच्छी जगह रुकना है, आप मिलने आओगी ना…!

शालिनी – आप बुलाएँगे तो ज़रूर आउन्गि…, ये कहकर उसने मेरे लंड को अपनी हथेली से मसल दिया.. और खिल-खिलाकर हँस पड़ी…!

मेने अपनी गाड़ी शालीमार होटेल के सामने जाका रोकी, वो मेरी ओर देख कर मंद मंद मुस्करा रही थी, मुझे पता था ये मेरे साथ अभी के अभी चुदना चाहती है फिर भी मेने उसे छेड़ते हुए कहा…

अगर आप चाहें तो मे आपको आपके घर तक ड्रॉप कर्दू…!

वो कामुक अंदाज से देखते हुए बोली – अभी तो आप दावत दे रहे थे आने की, और अब टरकाना चाहते हैं, चलिए आपका रूम तो देख लूँ…!

मेने मुस्करा कर गाड़ी होटेल के पोर्च की तरफ बढ़ा दी…!

एक अच्छा सा रूम लेकर हम कमरे में गये, काउंटर पर मेने उसका परिचय अपने परिचित के रूप में ही दिया, जो बस मिल-मिलाकर कर कुछ देर में चली जाएगी…!

रूम सर्विस के जाते ही वो मुझसे लिपट गयी, मेने उसकी कसी हुई गान्ड को मसल्ते हुए कहा – ऑश…शालिनी जी, आप तो इतनी जल्दी शुरू हो गयी, थोड़ा फ्रेश व्रेश तो होने दीजिए,

उसकी चूत रास्ते में ही रस छोड़ने लगी थी शायद, सो मेरे होठों को चूमते हुए बोली – मुझे घर भी जाना है, वरना ड्राइवर मुझसे पहले आ गया तो पता नही क्या-क्या बातें बना दे…!

मेने हँसते हुए कहा – चलो ठीक है फिर, जैसी आपकी मर्ज़ी, ये कहकर मेने उसकी साड़ी का पल्लू खींच दिया………..!

साड़ी का पल्लू पकड़ते ही शालिनी खिलखिलाती हुई घूमने लगी, चन्द सेकेंड्स में ही उसकी साड़ी उसके बदन से अपना नाता तोड़कर मेरे हाथों में थी.., जिसे मेने इकट्ठा करके पास पड़े सोफे पर उच्छाल दिया…!

शालिनी की गोरी गोरी चुचियाँ उसके कसे हुए चौड़े गले के ब्लाउस से बाहर को उबली पड़ रही थी, मेने उसकी कमर में हाथ डाल कर अपने बदन से सटा लिया और अपना मुँह उसकी घाटी के बीच में डाल दिया,

उसके पसीने की महक मेरे नथुनो में सामने लगी, जिसका सीधा असर मेरे लंड महाराजा पर पड़ा, और वो मेरी जीन्स के पीछे नहा धोकर पड़ गया…!

इस समय शालिनी मात्र ब्लाउस और पेटिकोट में थी, उसके गोल-मटोल कद्दू जैसे नितंब फिटिंग वाले पेटिकोट को फाडे दे रहे थे…

उन्हें कसकर मसल्ते हुए मेने उसे अपनी ओर खींचा, मेरा लंड जीन्स फाड़कर उसकी चूत में सामने की कोशिश करने लगा…!

फिर मेने अपना एक हाथ उसके सिर के पीछे ले जाकर उसके होठ चूस्ते हुए दूसरे हाथ से उसके ब्लाउस के बटन खोलने लगा, ब्लाउस इतना कसा हुआ था कि वो खुल ही नही रहे थे…

जिसमें शालिनी ने खुद से ही अपने आप उसे उतार दिया, तब तक मेने उसका पेटिकोट का नाडा भी खोल दिया, वो सर सराता हुआ उसके कदमों में जा गिरा…!

आअहह… छोटी सी ब्रा और मात्र दो अंगुल की पट्टीदार पैंटी में शालिनी का भरा हुआ कामुक बदन क्या लग रहा था, गोरी रंगत लिए उसका मक्खन जैसा मादक कूर्वी बदन देख कर में अपना कंट्रोल खोने लगा,

खड़े खड़े ही मेने शालिनी के कंधों पर दबाब डालकर उसे नीचे दबाया, खेली खाई शालिनी मेरा इशारा समझ कर अपने पंजों पर बैठ गयी, और मेरी जीन्स के बटन खोल कर उसने उसे अंडरवेर समेत नीचे खिसका दिया…

बाहर आते ही मेरा 9” लंबा और उसकी कलाई जितना मोटा लंड किसी कोबरा नाग की तरह फुनफुनाकर उसके मुँह पर जा लगा…!

शालिनी अपनी आँखें चौड़ी करके उसे देखने लगी…, अपने मुँह पर हाथ रखकर बोली - हे राअंम्म्म….ये क्या है…?

 
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