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विकास दी ग्रेट complete

"कपड़े पहन शैतान की अम्मा !" विकास नवयौवना की तरफ़ देखकर गुर्राया----बरना पंखे पर लटका दूगा ।"

नवयौवना कांप गई ।

एकदम वह कपडों की तरफ़ लपकी । तभी चाऊ भी अपने कपडों की तरफ बढा परंतु उसी क्षण विकास की रिवॉल्वर का दबाव बढ़ गया और वह खूनी स्वर में बोला-“तुम कहां चले बेटा चाऊ डार्लिंग मेरे ख्याल से तुम इसी पोज़ में ज्यादा अच्छे लगते हो ।"

चाऊ ठिठका...मानो रो देगा ।

सामने यमदूत.. .हालत बेरंग ।

"बेटा चाऊ!" विकास ने पुकारा।

" जी...." वह मिमिया उठा !

"एक बात बताओं ।"

"पूछिए ।" बडी कठिनाई से उसने थूक सटकते हुए कहा ।

"भारत से जो पांच अंडे लाए गए हैं कहां हैं ?"

"ज . .ज . . जी मैं नहीं जानता।”

"प्रोफेसर बनर्जी कहां हैं?"

"व…वो भी नहीं जानता ।" चाऊ बहुत ही भयभीत हो गया था ।

"तुम क्या जानते हो ?"

"ज…जी… ।" वह बौखला गया।

उधर नवयौबना कपडे. पहनकर तैयार हो गई थी ।

विकास ने उसकी तरफ देखा और बोला…“शेतान की खाला!"

"जी........!"

" यह तो चाकू !" विकास ने एक खुला हुआ चाकू उसकी तरफ बढा दिया ।

बह कुछ हिचकिचाइं परंतु विकास के तेवर देखकर उसकी सात पुश्ते कांप उठी । उसने चाकू ले लिया ।

विकास ने अगला आदेश दिया…“अपने डार्लिग चाऊ का लिंग काट दो?

"क्या ..?" लडकी कांपकर दो कदम पीछे हट गई ।

“नहीं . . ऽ. . . ऽ . . ।" चाऊ बुरी तरह से कांप उठा । माने रो देस । बेचारा चाऊ कितना विवश था । उसकी आंखों में आसू तैर गए । वह करे भी क्या? लडकी की आंखें हैरत से फैली हुई थी ।

शायद वह साक्षात् मौत को देखकर भी इतना भयभीत न होता जितना इस समय विकास से था । लडका उसे सजा ही इतनी भयानक दे रहा था । वह गिड़गिड़ा उठा…"नहीं. . .नही. . .मुझ पर रहम करो. ..रहम... !"

"बक्रो मत अय्याश खटमल !” एकाएक विकास भयानक भेडिया बनकर गुर्रा उठा ।

उसका मासूम चेहरा दहककर भयानक हो गया था । आखे जल रही थी ।

वह फुफकार उठा…"तुम जैसे अय्याशों ने ही नारी मानवता को पतन के मुह पर ला खड़ा किया है । मैं तुम जैसे किसी अय्याश कुत्ते को इस लायक नहीं छोडूंगा कि आगे कभी . . . ।"

"नहीं--नहीं--. ।" चाऊ बीच में ही गिड़गिड़ा उठा । आँसू बहने लगे। वह विकास के पैरों में गिर गया और रोता हुआ बोला…“मुझे माफ कर दो ।"

“बक्रो मत, चीनी सूअर!" विकास गरज उठा । वह भला उन पूतो में से कहाँ था जो आसू देखकर पिघल जाएं? उसे अपराधियों से बेहद घृणा थी ।

अय्याशों को वह अय्याशी के काबिल नहीं छोड़ता था । चाऊ जितना गिड़गिड़ा रहा था, विकास उतना ही भयानक होता जा रहा था । उसने मेडिए की भांति दहकती आंखों से लड़की की तरफ़ देखा और किसी जहरीले सर्प की भांति फूफकारा-----" अय्याश लड़की, जो कहा, सुना नहीं?"

लडकी की सात पुश्ते कांप उठी ।

सामने खडा था शैतान …!

मौत से अधिक भयानक!

मरती क्या न करती?

चाकू लेकर आगे बढी ।
 
रोता-गिड़गिड़ाता हुआ चाऊ विंग विकास के पैरों में लेट गया परं तभी उसके जबड़े पर विकास की एक जोरदार ठोकर पडी------------"तुम जैसे कुत्तों को मे इस धस्ती पर नहीं रहने दूंगा । खड़ा हो जा वरना उस कुत्ते मौत मारूगा कि सारा चीन दहल उठेगा ।"

"मुझे क्षमा... ।"

धांय! !!!

अभी उसका वाक्य भी पूरा नहीं हुआ था कि विकास ने एक गोली उसके हाथों के जोड पर दे मारी ।

वह भयानक ढंग से चीखा । साथ ही उसका हाथ बेकार होकर झूल गया । विकास के जिस्म का सारा खून जैसे बस उसके गोरे चेहरे पर उतर आया !

भयानक आग की तपिश जैसे उसकी आंखों में थी । वह लडकी को घूरकर गुर्राया------------"तुम अपना काम करो, गंदी कुतिया!"

उसके बाद विश्व का निर्मम, घृणास्पद, भयानक और खौफनाक दृश्य!

चाऊ तरह चीख रहा था । लड़की चाकू लेकर उसकी तरफ बढी ।

वह तड़पकर चिखा , गिड़गिड़ाया और रोया पर लड़की भी विवश थी । सामने यमदूत जो खडा था । उसका चाकू वाला हाथ विद्युत गति से चला ।

उफ् ! घृणा, भय और दहशत से लड़की ने स्वयं नेत्र बंद कर लिए ।

चाऊ की चीख से कमरा दहल उठा ।

इतना खौफ़नाक दृश्य कि वहशी खूनी भेड्रिए भी मुंह फेर ले ।

स्वयं क्रूरता कांप उठे । चाऊ के जिस्म का वह अंग फर्श पर गिरा जिससे वह अपराध करता था । खून से सना चाकू लड़की के हाथ से निकलकर फर्श पर गिर गया । चाऊ बुरी तरह तड़प रहा था । जबकि विकास गुर्रा उठा…"चीन में बसने वाले तुझ जैसे अय्याश तुझसे सबक लेंगे गंदी नाली के कीड़े ।"

चीखता-चीखता वह एकदम शांत हो गया । या तो बेहोश हो गया था अथवा मृत्यु को प्राप्त हो गया था ।

लड़की उसके जिस्म को देखकर थर-थर कांप रही थी । एक-एक शब्द विकास गुर्राया----------"तू भी तो अय्याश कुतिया है, जो पुरुषों को ठगती है ।"

“म...मैं...मैँ... ।" वह हक्ला ही रहीं थी कि…र्धाय! !!

एक गोली उसके सीने में लगी और वह चीखकर वहीं गिर पडी ।

अक्सर विकास अकेला काम करने का आदी था । इसीलिए वह जोबांचू को धोखा देकर बडी स्फाई के साथ उसके अड्डे से निकल आया ।

वही से एक जीप ली और इस समय वह पीकिंग में था । वह अंडों और प्रोफेसर के विषय में पता लगाना चाहता था ।

चीनी जाति से उसे बेहद नफरत थी । चीनियों ने उसे यातनाएं दी थी इसीलिए वह और भी अधिक प्रतिशोध की आग में जल रहा था ।

उस पर अय्याशो से तो वह बेहद घृणा करता था ।

उस समय से वह और भी अधिक घृणा करता था जब से माफिया के चीफ डान मास्रोनी ने उसकी मां रैना के ऊपर बुरी दृष्टि डाली थी ।

अय्याशो को भयानक सजा देने में उसके दिल को शांति-भी मिलती थी । इस समय वह भयानक भेडिया नहीं बल्कि मासूम बालक नजर आ रहा था ।

उसके सुदर चेहरे पर साधारण से भाव थे ।

चाऊ विंग और उस लड़की का वह पूरी तरह क्रिया-कर्म करके लौट रहा था ।

इस समय उसके दिमाग में एक योजना थी । पीकिंग की सड़के रात के समय खाली पडी थी ।

केवल मिलिट्री गश्त जारी थी , एक-आध गश्ती जीप विकास से टकराई भी थी जिन्हें विकास ने पूरा क्रिया-कर्म करके ठिकाने लगा दिया ।

इस समय वह अपने एक विशेष लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा था ।

रात के साढे तीन बजे का समय ।

उस कमरे में हरा नन्हा-सा नाइट बल्ब जल रहा था । यह कमरा "चोंचू बनाम घोंचू बनाम झोंचू" नामक अखबार के प्रधान संपादक मिस्टर पिंक लामा तबाले का था ।
 
मिस्टर पिंक लामा यूं तो अकेले ही थे परंतु उनके अकेले के पास इतना जिस्म था कि साधारण चीनी उसमें से कम-से-कम पांच वन सकते थे । पिंक लामा तों उनका नाम था ओंर तबालू यार लोगों ने उनकी दस-पाँच तबलों जैसी तोंद देखकर उनके नाम के साथ चिपका दिया था । वैसे इस समय इस छोटे से कमरे मे उन्हें खर्राटे ऐसे गूंज रहे थे मानो कोई भैंस रंभा रही हो ।

जब सांस उसके ज़बडो से बाहर निकलती तो लगता जैसे भयानक तूफान आ गया हो ।

दुनिया से बेखबर वे सो रहे थे ।

अचानक उनकी तोंद को एक रिवॉल्वर की नाल ने आ छेड़ा । जब छेड़खानी जरूरत से ज्यादा बढ़ गई तो चोंककर तबालू साहब ने अपनी बिल्लौरी आंखें खोल दी, उसकी सांस की गति कुछ तेज हो गई ।

तोंद के फूलने और पिचकने की गति में आश्चर्यजनक तेजी आ गई ।

आती भी क्यों नहीं? यमदूत जो खडा था । उसके हाथ में रिवॉल्वर था । रिवॉल्वर देखकर ही तो उसकी तोंद की गति में अंतर आया था । वरना वे सामने खड़े मासूम लड़के से भला कहाँ घबराने वाले थे ।

आखिर वह अपनी सात पुश्तों की शक्ति समेटकर मिमिया ही उठा-----"त . .तु.....तुम कौन हो. .?" ऐसा लगा जैसे कहीं दूर तबले बज रहे हौं ।

"विकास ।" लड़के ने बड़ा संक्षिप्त-सा उत्तर दिया ।

"वि...बि...का...सा" तबालू साहब की जैसे एकदम अम्मा मर गई । पांच चीनियों का संयुक्त जिस्म सूखे पत्ते की भाति कांपने लगा । कंठ में सूखा पड़ गया । उसे लगने लगा कि अब उसकी लाश पंखे पर दिखाई देगी । अब तबालू साहब की रिबाल्बर से नहीं उस नन्हें शैतान से डर लग रहा था । उसके मुह से दो मिनट बाद मिमयाता सा स्बर निकला-----------------“आप यहां?"

"हां बेटा, तबालू !" विकास बोला---"सुना है कि में चोचू के संपादक हो?"

"जी ......" ऐसा लगा कि जैसे अचानक कोई मुर्दा बोल उठा हो…"मैं चीन की दीवार की कसम खाकर कहता हू कि अगर आपको एतराज है तो कल मैं अखबार नहीं निकालूगा ।"

" अगर अखबार नहीं निकला तबालू बेटे तो ये तोंद फाड दूगा ।"

"ज. . .जी. .. ।" तवालू मिमिया उठा---------"तो. . .तो. ..आप क्या चाहते हो?"

" कल के अखवार की सबसे मुख्य खबर ये होगी ।" कहते हुए विकास ने अपना लिखा हुआ कागज उसकी तरफ बढ़ा दिया ।

तबालू साहव की तो जेसे बाछें खिल गई । क्या पता था कि वे सस्ते छूट जाएंगे । यह कागज पर ठीक ऐसे झपटे जेसे बाज कबूतर पर !

तबालू साहव की तो जेसे बाछें खिल गई । क्या पता था कि वे सस्ते छूट जाएंगे । बह कागज पर ठीक ऐसे झपटे जेसे बाज कबूतर पर !

एकदम जैसे मुरदे मे प्राण आ गए । यह बोला-------"जरूर. . .जरूर जैसे आपकी आज्ञा ।”

"रातोंरात यह खबर इस टेलीफोन के जरिए चीन के सभी प्रसिद्ध अखबारों को दे दो, यह खबर तुम्हारे ही अखबार में नहीं प्रत्येक अखबार मे होनी चाहिए वरना तुम्हारी लाश. . . ।"

“नहीं . . .नहीं . . . ।" तवालू मिमिया उठा-"जैसा आप कहते है वेसा ही होगा ।"

उसके बाद जब विकास वहाँ से चला गया था, तबालू साहब बिस्तर पर लंबे होकर लंबी-लंबी सांसे लेने लगे । मानो उम्हें अपने जीवित होने में संदेह हो ।

विकास के नाम पर भय से थर-थर कांपते पीकिंग के समूचे मस्तिष्क पर एक बेहद गहरी चोट और पडी ।

समूचे पीकिंग में मानो प्रलय आ गई ।

सारा चीन भय से थर-थर कांप रहा था । इस नई चोट से अधिकारी तिलमिला उठे परंतु करते क्या? प्रत्येक चीनी अधिकारी अंदर-ही-अंदर शैतान बिकास से कांपने लगा था ।

आज प्रात: होते ही सारे पीकिंग में हाहाकार मच गया । चीनी जनता पुरी तरह भडक गई । चीनी सरकार को गालियां पड़ने लगी । अधिकारियों की कुर्सियां डगमगा उठी ।

फूचिग जैसे जासूस की खोपडी भी हवा हो गई ।

आज के अखबार में छपी हुई खबर----------उफ्---चीन सरकार के अभिमान को कितनी बडी चुनौती? समूचे चीन का कितना बड़ा अपमान?

आज के अखबार में छपी हुई खबर----------उफ्---चीन सरकार के अभिमान को कितनी बडी चुनौती? समूचे चीन का कितना बड़ा अपमान?

चीन का ही नहीं बल्कि शायद कभी किसी देश का न हुआ हो । उसी के देश में छुपा हुआ विदेशी उसी की सरकारी मशीनरी को चेलेंज करे? कदाचित् ऐसा कोई अन्य उदाहरण नहीं था ।

रह…रहकर फूचिंग आज के अखबार में प्रकाशित खबर को पढ़ता और क्रोध से जैसे वह पागल हुआ जाता । उसी के देश में एक छटांक-भर का लडका उसे इतनी बडी मात दे, इससे बड़ा उसका अपमान नहीं हो सकता ।
 
और इधर. .. ।

उस शेतान लड़के के शुभचिंतक !

विजय, अलफांसे और उनके साथ थी-------------संध्या ।

उनकी आंखो के सामने आज़ का अखबार पडा हुआ था । तीनों उस लड़के की करतूत पढ़ रहे थे ।

विजय और अलफांसे शातिर अंदर-ही-अंदर कांप उठे । उन्हें लगा कि यह लड़का अधिक दिन तक जिंदा नहीं रह सकेगा । इतने भयानक खेल, एक इंसान कदापि नहीं खेल सकता ।

विकास का संदेश मिलने के बाद ये तीनों अपने उस खंडहर बाले अड्डे में आग लगाकर भागे थे, अंधेरी गलियों में से गुजरकर वे पीकिंग को पार करना चाहते थे ।

अलफांसे के कंधों पर उस समय चीन का एजेंट डाबलक्रास था जो विकास बनकर आ मिला था । वे जोबांचू के अहे पर जाना चाहते थे कि उन्हें महसूस हुआ कि पीकिंग के चप्पे-चप्पे पर सेनिक फैले हुए हैं ।

साधारण ढंग से उनकी आंखों धुल झोंककर

निकलना एकदम असंभव था । जिस समय वे एक सड़क पर से गुजर रहे है तो बे लोग एक गश्ती चीनी सैनिक टुकडी से टकरा गए थे ।

खैर, किसी तरह इन्होने उनसे जान छुड़ाई और भागकर एक घर में घुस गए । इस समय बे इसी मकान है थे ।

पीकिंग की सड़कों पर उन्हें खोजा जा रहा था । इस मकान से निकलने का मतलब था सीधी मौत !

इस मकान में एक साधारण-सा चीनी परिवार रहता था। जिसमे एक पति-पत्नी और उनके दो बच्चे एक लड़का और एक लडकी थी । इन्होंने इन सबको रिवॉल्बरों की नोंक पर एक कमरे में पहले अलग-अलग कसकर बांध दिया और फिर कमरा बंद कर दिया था । उनमें से कोई भी चूं-पटाक करने की स्थिति में नहीं था क्योंकि सबके मुह में कपडा ठूंस दिया गया था ।

इस मकान पर अब इन तीनों का ही राज्य था ।

तीनों ने अपने ही मुंह पर चीनी मेकअप कर लिया था । वे लगातार दो दिन है यहां रह रहे थे । पहले दिन हुई पीर्किग शहर पर लाशों की वर्षा के बिषय में भी उन्हें जानकारी थी ।

वह यह भी जानते वे कि यह सब वह शेतान लडका कर रहा है। विजय और अलफांसे के जिस्म में झुरझुरी भी दौड गई ।

दोनों की आंखें टकराई, मानो आखों-ही-आंखों में पूछ रहे हों कि विकास क्या है? कहीं यह लडका... ।

संध्या की आंखें तो भयमिश्रित आश्चर्य के साथ फैल गई । उसने विकास को देखा नहीं था । केवल उसके विषय में सुन रही थी । उससे कुछ भी नहीं छुपा था। पीकिंग शहर पर हुई लाशों की वर्षा, समूचे चीन पर छाया हुआ आतंक ।

अखबारों में छपे विकास के खूनी कारनामे । पंखों पर लटकती लाश । 'वी' की शक्ल में पडी लाशें! इत्यादि सभी संध्या की आँखों के सामने घूम जाता ।

उसके ह्रदय में विकास की तस्वीर खिंच गई । वह विकास के लिए भांति-भाति की कल्पनाएं करने लगी । वह बहुत आतुर थी, देखना चाहती थी कि चौदह वर्ष का यह कैसा लडका है जो इतना साहसी, इतना बुद्धिमान और बहादुर है?

पहले से ही संध्या के दिल में बिकास को देखने की, उससे मिलने की तीव्र अभिलाषा थी और फिर आज के पत्रों में छपे विकास के समाचार, चीन सरकार को दिया गया उसका चेलेंज । उफ् नहीं. . .संध्या के हृदय से एक आवाज उठी-----------“विकास कोई लड़का नहीं हो सकता । निश्चिराँ रूप से वह किन्हीं देवी शक्ति का मालिक है ।"

संध्या की आंखें आज के अखबार में छपे एक चित्र पर जमी हुई थी । उसने देखा------एक चीनी की लाश थी । विल्कूल नग्न, उल्टी, पंगे से लटकी हुई, एकं आंख फूटी हुई, माथे पर लिखा हुआ विकास । और. . .और...सबसे अधिक भयानक उस चीनी के जिस्म का एक अंग काट लिया गया था ।

संध्या दहल उठी । उसकी आंखो के आगे एक चित्र खिंचा------किसो वहशी राक्षस का चित्र । निश्चित रूप से विकास कोई राक्षस होगा । संध्या के सुंदर सुंदर मुखड़े पर पसीना उभर आया, सारा जिस्म कांप उठा । फिर संभलकर उसने पढ़ा----- लाश के नीचे "चाऊ विंग' लिखा हुआ था । एक तरफ़ मोटे-मोटे अक्षरों में विकास का संदेश था…..... "चाऊ विंग' नामक यह चीनी सूअर अपने आपको अय्याश कहता था । मेरे पास अय्याशी की सही सजा एक है । मैं समझता हू अब यह कभी अय्याशी नहीं कर सकेगा ।।।

--------चीनियों का दूश्मन

-----------'विकास दी ग्रेट'
 
संध्या अवाक् रह गई । उसे लगा कि विकास एक आदर्श लड़का है । उसके पास एक कट्टर, क्रूर और पिघलने वाला दिल है परंतु वह उसे बुरे लोगों पर ही प्रयोग करता है । उसकी आंखो के सामने फिर विकास की एक अच्छी तस्वीर खिंची । चाऊ विंग के समीप में एक लड़की की लाश के दो दुक्रड़े थे जो "वी" की शक्ल में रखे थे और नीचे लिखा था-'यह वही लड़की है जिसके साथ चाऊ विंग आज रात था ।' सब कूछ समझकर संध्या के होश फाख्ता हो गए । सारा अखबार चित्रों से भरा पड़ा था । प्रत्येक चित्र में एक चीनी लाश थी । उन सबके साथ नाम एक ही जुड़ा था…विकास ।।।।।।।

संध्या के दिल में विकास के लिए न जाने कैसे-कैसे भाव उठने लगे । उधर विजय और अलफांसे भी परेशान थे । इन सब चित्रो और कारनामों से अलग 'विकास' की एक चेतावनी भी अखबार में थी जिसमें बेहद दुस्साहस छुपा था । जिसमें चीन का अपमान था । एक साथ तीनों की दृष्ट वहीं जम गई । उस चेलेंज का शीर्षक था ।

शैतान का चेलेंज... ।

उसके बाद विकास का एक पत्र इस प्रकार प्रकाशित था-----

"ह्ररामजादो चीनी कुत्तो. . .

तुम्हारा बाप विकास दी ग्रेट यह पत्र लिख रहा हैं । मैं इस खुले पत्र में तुम्हें चैलेंज करात हू कि आज रात अपने देश के चुराए गए महान प्रोफैसर बनर्जी को तुम लोगों की नारकीय कैद से मुक्त करा लुगा । तुम्हें याद होगा, प्रोफेसर बनर्जी को तुम मेरे प्यारे देश हिन्दुस्तान से लाए हो ।। उन पांच अंडों को भी मैं प्राप्त करके रहूगा । चीनी कुत्तो. . तुम शायद विश्व के सबसे की खूँखार इंसान बनते हो । इस बात का सबूत, तुम्हारे उस सूअर जासूस फूचिंग ने मुझे यातनाएं दी । मैरे देश मे चीनियों ने जो अपराध किए । बदले में क्या कर रहा हू यह सारा चीन जानता हैं । अब में इस खुले पत्र के माध्यम से समुचे चीन....को चैलेंज करता हूं कि आज में प्रोफैसर बनर्जी को अपने साथ ले जाऊंगा । चीन सरकार मुझे रोकने के लिए अपनी हर शक्ति प्रयोग कर ले !

अगर मुझे न रोक सकी तो, लानत है चीन पर ।

चीनियों का दुश्मन

'विकास दी ग्रेट'

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वह यहीं पत्र था जिसने एक बार फिर समूचे पीकिंग में खलबली मचा दी थी।

फूचिंग के जिस्म को लेकर, उसकी नसों में तनाव लाने के साथ-साथ रोंग़टे खड़े कर दिए थे ।

विजय, अलफांसे और संध्या ने पढा तो तीनों के कंठ सूख गए । आंखो में अजीब-सा खौफ़ उभर आया ।

विजय अलफांसे की तरफ देखकर बोला---------" देख लिया लूमढ़ बेटे, तुम्ही इसे चीन लाए थे ।"

"तुम्हें क्या दिक्कत है ?" अलफांसे संभला और मुस्कराकर बोला-----" चेला मेरा है ।"

“चेला तो तुम्हारा है बेटा ।" विजय अजीब-से गंभीर और खतरनाक स्बर मे गुर्राया-------------“लेकिन अगर उसे कुछ हो गया तो तुम्हें मैं जिंदा नहीं छोडूंगा । मैं रैना भाभी से वादा करके आया हूं कि विकस को मैं सही-सलामत भारत ले आऊंगा।"

"रैना तुम्हारी भाभी है मेरी बहन, मैं समझता हू तुमसे ज्यादा मुझें उनका ख्याल रखना चाहिए था ।"

“मैं कहता हुं, तुम्हे उसे यहाँ लाने की आवश्यकता क्या थी ?"

"क्या तुम अब भी नहीं समझे कि विकास हम दोनों का चेला होकर भी गुरु बन गया है?” अलफांसे मुस्कराया ।

“लूमड़ प्यारे!” विजय ठंडी सांस लेकर बोला…“आज की रात जैसे भी हो, मुझे वहां जाना होगा जहाँ प्रोफेसर कैद हैं । तुम नहीं जानते हो कि उस लडके में अभी केवल साहस है । अपना अच्छा-बुरा सोचने की बुद्धि उसमें नहीं है ।"

"सच बात तो ये है कि मैं बिकास को चीन इसलिए ले आया था कि यहाँ मैं उसे और बहादुर बना सकूंगा ।" अचानक अलफांसे गंभीर स्वर में कह रहा था-----“लेकिन यहाँ आते ही वह मुझसे बिछूड गया और अब देख रहा हू कि मैं विकास को जो बनाना चाहता था वह उससे भी कहीं अधिक निकल चुका है ! विजय सच समझना, मैं इतना भयानक अपराधी होते हुए भी वह सव सोच भी नहीं पाता सो यह लड़का कर जाता है ।"

“क्यो प्यारे, अब क्या नानी मर गई ?"

"जिसकी नानी का कुछ पता ही नहीं, वह क्या जाने?" अलफांसे बिचित्र-से स्वर में बोला…"विजय तुम हमेशा एक गलतफहमी के शिकार रहे हो , तुम हमेशा यही सोचते हो कि विकास से केवल ही प्यार करते हो मै नही ।

कदाचित् तुम यह समझते हो कि अलफांसे एक अपराधी है इसलिए उसे विकास से प्यार नहीं है, लेकिन यह धारणा दिल से निकाल दो, मेरे दोस्त !" अत्तफांसे आज अचानक भावुक हो उठा था…......“अलफांसे के सीने में भी दिल है । मेरे पास भी वह कलेजा है जिसे किसी से प्यार हो जाता है । यह मैंने केवल विकास के पैदा होने के बाद जाना था कि मेरे पास दिल नहीं है । लोग पागल हैं जो एक-दूसरे से प्यार करते है । सच मानना विजय बिकास से पहले मैंने कभी ऐसा महसूस तक नहीं किया था कि मेरे सीने में भी दिल है, मैं भी किसी से प्यार कर सकता हू । मेरे दोस्त, इस दिल पर केवल विकास ने कावू पा लिया था । उस नन्ही-सी मासूम जान ने इस दिल को सिखाया है------बच्चे का वात्सल्य क्या होता है? मै दावे के साथ कह सकता हू विजय कि तुम विकास को इतना प्यार नहीं कर सकते जितना मेरे दिल में है । अभी तुम्हें उसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है दोस्त, अभी अलफांसे जिंदा है !” कहता-कहता अलफांसे बेहद भावुक हो गया था ।

उसका चेहरा आवेश बश तमतमा उठा । विजय आश्चर्य के साथ उस अजीब से अलफांसे को देखता रह गया था । संध्या भी इस आदमी का नया रूप देख रही थी ।

अलफांसे जैसे उन दोनों की मनोस्थिति से बेखबर अपने भावों को व्यक्त कर रहा था…......“जहां विकास के खून की एक बूंद भी गिरेगी, वहां अलफांसे खून की नदियां बहा देगा । जो कुत्ता विकास को हाथ लगाएगा उसके जिस्म के हजारो-लाखों टुकडे अलफांसे हवा में छितरा देगा । जो जाति उसकी दुश्मन होगी, अलफांसे उस जाति का नामोनिशान इस धरती से खत्म कर देगा । अलफांसे के जिस्म का एक-एक कतरा विकास का है । खून की एक-एक बूंद उस लड़के की है । विकास की.. . ।"

"बस . .बस. . बेटा लूमड़ प्यारे! , अभी अलफांसे और कुछ कहने ही जा रहा था कि बीच में ही विजय बोला-----"लगता है तुमने शोहराब मोदी की कोई भावुक फिल्म देखी है । वास्तव में यार डायलॉग बोलने में तुमने शोहराब मोदी, देवानन्द, राजकुमार, शत्रुध्न सिम्हा, घर्मेंन्द्र, माला सिम्हा, वेजयन्ती माला, वहीदा रहमान इत्यादि सभी को मात कर दिया है । यार, तुम किसी दिन बम्बई की तरफ मत निकल जाना । कहिं-एस. जौहर तुम्हें राजेश खन्ना समझकर वहीं धर पकड़ेगा ।"

विजय की बकवास पर अलफांसे के मस्तिष्क को एक झटका-सा लया । वह संभला, उसे ध्यान आया कि आज वास्तव में वह भावनाओं में बह गया है । उसने सिर को झटका देकर समस्त विचारों से मुक्ति पाने की चेष्टा की परंतु फिर भी पूरी तरह सफल न हो सका इसीलिए थोडी गंभीरता के साथ ही बोला-----"आज रात मुझें भी विकास की सहायता के लिए जाना होगा ।”

"लेकिन लूमड़ प्यारे, जाओगे कहा?" विजय बोला ।

संध्या इन लोगों के बीच फंसकर ऐसे महसूस कर रही थी जैसे वह इंसानों के बीच न होकर फरिश्तों के बीच है !

"अरे . . . !" अलफांसे चौंका…“यह तो पता नहीं ।"

"वही तो मैं भी कह रहा हू प्यारे लूमड़ भाई कि इसमें यह नहीं लिखा है कि अपना दिलजला, बनर्जी को कहाँ से गायब करेगा?"

" यह तो समस्या है ।" अलफांसे सोचता हुआ बोला ।

"बिल्कुल समस्या है प्यारे!''

कुछ देर तक अलफांसे सोचता रहा और फिर बोला-------""एक उपाय है सकता है ।"

"वह क्या?"

"उपाय बाद में बताऊंगा ।" अलफांसे बोला…“पहले जेब से कागज निकालकर यह बताओ कि खंडहर से प्राप्त होने वाले पत्र में गुप्तलिखि में क्या लिखा था? वह तुमने कैसे पढा और वह किसने 'भेजा ?"

"वह अपने दिलजले ने भेजा था ।"

'"क्या. . ?" अलफांसे उछल पडा-----------------“वि.. .का. ..स. ..!"
 
“बि...का...स...!" संध्या के मुख से भी आश्चर्य के साथ निकलता चला गया ।

"जी हां. . .बिकास. . . !" विजय जेब से कागज निकालता हुआ बडे अदब के साथ बोला-----"आप दोनों सज्जन इस मेज पर झुक जाएं ताकि हम अपके मस्तिष्क में अपने और उस साले दिलजले के शानदार दिमाग की बात ठूस सके !' कहते हुए विजय ने बह कागज निकालकर मेज पर फैला दिया जिस पर उसने पत्र में लिखे अंकों के अक्षर बनाकर संदेश निकाला था । अलफांसे और संध्या उत्सुक होकर कागज पर झुक गए ।

उस कागज पर A से Z तक के पूरे छब्बीस अक्षर लिखे हुए थे । प्रत्येक के ऊपरं 1 से 26 तक गिनतियां लिखी हुई थी । जैसे के A उपर 1 B के उपर 2,C दो ऊपर 3.. .इसी प्रकार X के उपर 24, Y के उपर 25, और Z के ऊपर 26 !

अभी अलफांसे और संख्या यही देख पाए थे कि विजय ने किसी रिकॉर्ड की भाति बोलना प्रारंभ किया------"सुनो. . .बात यह है कि जब हमे यह पत्र प्राप्त हुआ तो हमारी खोपडी भी तुम्हारी खोपड्रियों की भाति हवा में चकराने लगी थी परं हमारी खोपडी आखिर हमारी खोपडी ही है, थोडी देर चकराई और फिर बात को पकड़ लिया यानी आप लोगों से पैन और कागज मांगकर इस कागज पर ये सब, जो आप कागज पर देख रहे हैं लिखने लगा. .. ।"

विजय अभी कुछ कहना ही चाहता था कि संध्या बोली-----“लेक्लि आपने यह सब लिखते समय छुपाया क्यों?”

" इसीलिए देवीजी कि पता नहीं इस संदेश मे किस के विरुद्ध क्या रहस्य हो ?" विजय वोला------"जैसा कि इसमें हमारे पास खडे नकली विकास का रहस्य था । अगर------मैं दिखा देता तो वक्त से पहले ही वह सब कुछ समझ जाता ।"

"खैर… ।" अलफांसे बोला…“आगे बको !"

"अब बकने को हमारे पास रह ही क्या गया है, लूमड प्यारे! विजय बोला--"जो अंक उस पत्र में लिखे हुए थे, हम इन अंग्रेजी के 26 अक्षरों में से उसी नम्बर के अक्षर को लिखने लगे जैसे सबसे पहले लिखा था-अंक 22, अब जरा इस तालिका मे देखिए कि A से Z तक के 26 अक्षरों ने 22वां अक्षर V होता है । इसी प्रकार दूसरा अंक 9 था, हमने A से Z तक 9बां अक्षर ले लिया । उसके बाद 11वां यानी की फिर पहला यानी K, और उसके बाद 18वां यानी S के बाद कॉमा [ , ] लगा हुआ था जो इस बात का परिचायक था कि यहां तक एक शब्द है, यानी अक के निकले इन अंग्रेजी के अक्षरों का मिला दे तो शब्द बना- VIKAS [बिकास] । इसी प्रकार आगे लिखे अन्य अंकों के स्थान पर A से Z तक की भाषा है उसी नंबर का अक्षर लिखा तो निम्न वाक्य बने

VIKAS IS DUPLICATE LEFT THAT SIDE IMMEDIATELY .

VIKAS THE GREAT

" उसके पश्चात् विजय बोला---"तो , सज्जनों, मैं बताने जा रहा था उपरोक्त लिखे अंग्रेजी वाक्यों का हिन्दी अनुवाद इस प्रकार है…

विकास नकली है । उस स्थान को तुरंत छोड़ दो ।

--------महान बिकास"

सब कुछ समझने के पश्चात् अलफांसे आंखें फाड़े उस कागज की तरफ देखता रहा। मन-ही-मन अलफांसे विकास की बुद्धि की सराहना कर रहा था । विकास की गुप्तलिपि ने तो स्वयं उसे ही चकरा दिया था और संध्या तो मन-ही-मन विकास की प्रशंसा कर उठी । उसे लगा विकास जितना छोटा है उतना ही हर क्षेत्र में माहिर है । अब संध्या की समझ में यह भी आ आया कि विजय ने अचानक ही नकली विकास को कैसे पहचान लिया? वह खंडहर वाला अड्डा उसने तुरंत क्यों छोडा? इस केस में घटित प्रत्येक घटना संध्या को विकास की तरफ़ ले जा रही थी । उधर विजय कह रहा था…“अब बोलो लूमड़ प्यारे, है न साला असली दिलजला ।"

" ये लड़का तो वास्तव में गुरु बन गया ।" अलफासे कागज से दृष्टि हटाकर बोला।

" अब जरा वह उपाय बताओं, क्या बताने जा रहे थे?"

"मेरे ख्याल हमे फौरन ही जोबांचू के पास चलना चाहिए ।"

"बाह! क्या बोगस ख्याल है !" विजय ने व्यंग्य कसा ।

"क्यों ?"

"अबे तूमड़ प्यारे ! " विजय बोला…"सारे पीकिंग में ये साले गश्ती चीनी मंडरा रहे है ! इसीलिए तो हम इस बिल में घुसे बैठे है । पहले तो वहां पहुचना कालू घोबी को मारने के बराबर है । अगर हमने कालू धोबी क्रो मार भी दिया तो जोबांचू क्या धनिया देगा?"

"संभव है कि बता सके कि बनर्जी को चीनयों ने कहाँ रखा है?"

"यह केवल संभावना ।" विजय बोला…“और केवल संभावना है आधार पर इतना बड़ा खतरा मोल लेना कोई खास बुद्धिमानी का काम नहीं है । मान लो हम किसी तरह वहां पहुंच भी गए और तुम्हारे जोबाचू' ने किसी भैस की भाँति

नकारात्मक स्थिति में अपनी हंडिया हिलाकर हरी झंडी सफा कर दी तो अपनी तो घंटी बज जाएगी और फिर वहां झकझकी अलापने के अतिरिक्त कोई काम नही रहेगा ।"

“ज़रा-सी बात होती है और तुम पूरा भाषण दे डालते हो ।" अलफांसे बुरा-सा मुंह बनाता हुआ बोला…“तुम्हारे दिमाग में अगर इससे अच्छी कोई योजना हो तो बताओ ।"

"जहां तक भाषण की बात है लूमड़ मियां तो उसमें गलती मेरी नहीं है ।” विजय बोला-" हमारा देश ही भाषण प्रधान है, खैर. .इस बात को एक हाज़मे की गोली खाकर हज़म कर जाओ वरना भाषण के चक्कर में इतना भाषण दूगा कि तुम्हारे पेट में दर्द हो जाएगा ।" विजय कहे जा रहा था-"रही योजना की बात, तो प्यारे फिलहाल हमारी बुद्धि इस मामले में नहीं चल रही है ।"

संध्या मुस्करा उठी जबकि अलफांसे बुरा-सा मुह बना रहा था !

अचानक विजय की आंखें इस प्रकार चमकने लगी मानो कोई बहुत ही ठोस योजना वना ली हो । एक बार के लिए तो वह मन-ही-मन उस योजना पर बिचार करता रहा और फिर अचानक ही उछल पड़ा---------"'वो मारा साले मुल्ला के भेष में पंडित को ।"

"अब क्या हुआ ?"अलफांसे बोला ।

" होना क्या है लुमड बेटा !" विजय बोला'-…"ऐसी धांसू स्कीम तैयार की है

तुम कहोगे विजय जैसी बुद्धि चाणक्य के पास भी नहीं थी ।"

" कैसी योजना ! "

"अबे हम ऐसी योजना बनाते हैं ।" विजय अकड़कर दुगना हुआ जा रहा था--“इस बार ऐसी योजना तैयार की है कि उस साले फूचिंग की भी नाक मे नकेल पड जाएगी ।"

"योजना तो बताओं ।"

"आप दोनों सज्जन जरा अपने कान हमारे मुखारबिंद के समीप लाइए ।" विजय अलफांसे और संख्या से बोला…“सुना है कि दीबारो के भी कान होते हैं ।" उसके बाद पांच मिनट तक धीमे-धीमे भिनभिनातै हुए पूरी योजना बता दी : जिसे सुनते ही अलफांसे की आंखें चमकने लगी । उसे एक बार फिर मानना पड़ा कि विजय जितनी बकवास करता है उससे कहीं अधिक सोचता भी है । वह प्रशंसनीय नजरों से विजय को देखता रह गया ।

संध्या तो यह सोच रही थी कि बह कहीं भूल से भूर्तों के बीच तो नही आगई।

जबकि विजय अब भी गर्दन अकड़ाए महामूर्ख की भांति पलकें झपका रहा था । ।

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बेचारा फूचिंग !!!!

उसकी हालत खराब हो गई थी ।

उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे? जैसे गहरे जाल और उलझन में वह इस बार फंसा था ऐसा कभी नहीं फंसा नहीं था ।

जितनी गहरी मात बह इस बार खाया था वह उसके पिछले रिकॉर्ड पर कलंक ही था ।

अजीब थी उसकी स्थिति ।

वह करे भी तो क्या?

उसके रहते हुए चीन में भयानक उत्पात फैला हुआ था और अभी तक बह किसी का भी तो कुछ नहीं बिगाड़ सका था ।

उसका दिल चाह रहा था कि वह अपने बाल नोंच ले ।

खोपडी धुन डाले ।

उसे अपने चारों तरफ से अपनी ओंर बढते चार भूत नजर आ रहे थे-----विजय, अलफांसे, टुम्बकटू महाशैत्तान विकास!

अपने सहयोगी र्मोगपा की स्थिति देखकर उसका शरीर क्रोध से कांपने लगा था । नसों में तनाव आ गया था । पीकिंग पर लाशों की वर्षा ने उसके तन-बदन में आग लगा दी थी ।

बह लैस होकर अपने डबलक्रास द्वारा बताए गए पते पर भी गया था परंतु वहां उसे वह खंडहर आग की लपटों में लिपटा मिला ।

उसके बाद डबलक्रास ने कोई सूचना नहीं दी । इससे भी वह बहुत परेशान था ।

एक के बाद एक घटित इन घटनाओं से फूचिंग बौखला उठा था

और..............

अब........अबब चीन के समस्त अखबारों में प्रकाशित विकास के इस चैलेंज ने तो मानो फूचिंग के जिस्म का समूचा खून निचोड़ लिया था । इस समय बह सोच ही रहा था कि उसे क्या करना चाहिए तभी फोन की घंटी बजी ।

फोन किसी अज्ञात इंसान का था । भाषा से ऐसा लगता था कि फोन करने वाला कोई पुराना घिसा-पिटा बदमाश है और बह विजय का कोई बहुत फुराना कट्टर दुश्मन है जो विजय को मारना चाहता था किन्तु अपनी शक्ति कम के कारण वह उससे नहीं टकरा सकता और अपने दुश्मन को खत्म करने के लिए खबर फूचिंग को दी । फोन पर उस व्यक्ति ने बताया कि इस वक्त विजय होटल डीतारा में तेरह नंबर की मेज पर एक सनकी-से नजर आने वाले बूडे के मेकअप में बैठा है । उसके चेहरे पर लंबी और सफेद दाढी-मूंछे हैं, आंखों पर एक चश्मा, मुह में पान. . .औंर इतना बताने के बाद अज्ञात व्यक्ति ने एक झटके के साथ संबंध विच्छेद कर दिया फूचिंग अवाक् खडा रह गया ।

उसके दिमाग में एक बात और उलझ गई------------यह अज्ञात व्यक्ति कौन था?

कुछ देर तक वह सोचता रहा कि कहीं यह विजय और उसके साथियों की कोई चाल तो नहीं है । उसने तुरंत फोन उठाया और कुछ नंबर रिग करके दो जीप से सैनिको क्रो एलर्ट होने का आदेश दिया ।

उसके दस मिनट बाद ।

तब जबकि दो सेनिक जीप होटल डीलारा के बाहर रुकी । फूचिंग पूरी तरह लैस होकर आया था । सबसे पहले उसी ने डीलारा के हाल में प्रवेश किया !

हॉल में अधिक भीड़ नहीं थी । किसी-किसी सीट पर लोग बैठे थे । सबकी नजर उस तरफ उठ गई ।

फूचिंग की नजर सीधी सीट नंबर तेरह की तरफ गई।

यह देखकर उसकी आंखें चमक उठी कि वास्तव में उस मेज पर ठीक उसी हुलिए का आदमी बैठा था जैसा फूचिंग को अज्ञात आदमी द्वारा बताया गया था। पलक झपकते ही उसके हाथ में रिवॉल्वर आ गया ।

धड़धड़ाते हुए सेनिक हाल में प्रविष्ट हो गए ।
 
तेरह नंबर की मेज पर बैठा हुआ बूढा अपनी लंबी नाक पर रखे हुए छोटे से चश्मे में से ऐसे झांक रहा था मानो वह सनकी हो । उसके बाएं हाथ में आइसक्रीम, उसने अजीब ढंग से मिच-मिचाकर उसने फूचिंग को देखा और आइसक्रीम का स्वाद लेने के बाद तुरंत ही एक घूंट कॉफी पी ।

इसी बीच उसका पाते ही सैनिकों ने तेरह नंवर की मेज को चारों तरफ़ से घेर लिया ।

लेकिन बूढे के हाव-भाव से ऐसा लगता था जैसे उसे इन सव बातों से कोई मतलब ही न हो ।

"मिस्टर विजय..!" वह प्रसन्न होकर गुर्राया-------"आपको पहचान लिया गयां है !"

बूढे ने चौंककर उसकी तरफ देखा और बोला…“क्या तुम मुझसे बात कर रहे हो, नालायक इंसान?"

"अब तुम्हारी कोई एक्टिग नहीं चलेगी ।" कहता हुआ वह उसके पास आ गया और बूढे की आंखो में झांकता हुआ बोला…"मिस्टर विजया इस मेकअप के पीछे छुपे हुये चेहरे को मेरी आंखें भली-भाति पहचान गई हैं ।"

" अगर रिश्वत वगैरह लेना चाहते हो तो सीधी बात करो, लड़के !" बूढा बड़े आराम से आइसक्रीम का स्वाद लेता हुआ बोला-------"ये बाल धूप में सफेद नहीं किएं हैं । जानता हूं शरीफ आदमी की फंसाकर तुम अपनी जेब गर्म करना चाहते हो, हम भी खेले खाए हैं, बोलो क्या चाहिए?"

"मेरे पास बकवास के लिए अधिक समय नहीं है । मिस्टर विजय!" कहते-कहते फूचिग का चेहरा क्रोध से लाल हो गया ।

उसने एक भी क्षण व्यर्थ करने के स्थान पर एक झटके के साथ ही दाढी पकडकर खींच ली ।

अगले ही पल दाढी फूचिंग के हाथ में थी । वास्तव में दाढी के नीचे छुपा चेहरा विजय का ही था ।

सभी लोग अवाक् रह गए ।

उसी क्षण एक आश्चर्यजनक बात हुई । दाढी हाथ में आते ही फूचिंग की आंखों में अजीब-से भाव आए।

चेहरे पर विचित्र उतार-चढाब आया और अजीब-सी किलकारी मारकर फूचिंग चीख पड़ा ।

चीखते ही दाढी उसने उछाल दी और बुरी तरह अपने जिस्म को खुजाने लगा । उसके सेनिक अवाक् से उसे देखते ही रह गए ।

उसी क्षण विजय उछला और हवा में लहराता हुआ उसका जिस्म एक मेज के पीछे जा गिरा । उसका रिवॉल्वर उसके हाथ में आ चुका था ।

उसी पल सेनिक चौंके, फूचिंग अभी तक पागलों की भांति अपना जिस्म खुजा रहा था ।

तभी उसके कानों में विजय की आवाज पडी--------“बेटे फूचिंग हमारा नाम विजय कुमार झकझकिया है । ये क्या तिगनी का नाच नाच रहे हो ?" कहने के साथ उसके रिवॉल्वर ने एक गोली उगली ।

एक सैनिक चीखकर गिरा ।

शेष सभी ने पोजीशन ले ली ।

विजय के शब्द कान में पड़ते ही फूचिंग का खून खौल उठा । उसके जिस्म में इस समय तेज खुजलाहट लग रही थी परंतु अचानक उसने स्वयं को संभाला और रिवॉत्वार संभालकर एक मेज के पीछे जम्प लगा दी । इधर विजय को इस हालत में फूचिंग से यह उम्मीद नहीं थी कि वह कुछ कर जाएगा किन्तु उस समय वह आश्चर्यचकित रह गया जब उसके सोचते-ही-सोचते फूचिंग के रिवॉल्वर से निकला शोला उसके रिवॉत्वर से टकराया । परिणामस्वरूप उसका रिवॉल्वर दूर जा गिरा , तभी फूचिंग की चेतावनी गूंजी------“अगर अब तुमने कोई हरकत की विजय तो अगली गोली तुम्हारा भेजा फाढ़ देगी ।”

“अबे...नहीँ...नहीँ...प्यारे चीनी भाई!" विजय एकदम बोखलाकर खड़ा हो गया । उसके दोनों हाथ सिर से ऊपर पहुच चुके थे । पलक झपकते ही समस्त चीनी सैनिकों ने उसे घेर लिया । विजय अपनी दाढी में ऐसा पदार्थ लगाकर लाया था जिसके स्पर्श मात्र से समूचे जिस्म में खुजलाहट लगने लगती थी । ऐसा हुआ भी था परंतु वह फूचिंग की लाजवाब सहनशक्ति ही थी कि वह उस सबको सहन करके इतना सब कुछ कर गया था । अब विजय कुछ भी करने की स्थिति में नहीं था ।

इधर फूचिंग के जिस्म में तीव्र खुजलाहट लग रही थी परंतु वह सबको सहन कर गया था । यह अलग बात है कि इस प्रयास के पश्चात् भी उसके चेहरे पर ऐसे भाव थे मानो वह बड्री भयानक यातना से गुजर रहा हो । इस यातना को सहन करता हुआ वह रिवॉल्वर संभालकर बाहर आया और विजय की तरफ बढ़ता हुआ बोला------"ऊब तुझे मैं वो मौत दूगा कुत्ते कि तेरे फरिश्ते भी कांप उठेगे।"

"वो तो अभी भी कांप रहे हैं, फूचिंग भाई! "

"बको मत ।" फूचिंग गुर्राया तथा सैनिकों को विजय को गिरफ्तार कर लेने का आदेश दिया ।

इस समय विजय न तो किसी प्रकार की हरकत करने की स्थिति मे ही था और न ही कर पाया । यह दूसरी बात है कि वह ऊट-पटांग बातों से उन्हें बोर करने की चेष्टा करता रहा।

कुछ समय पश्चात् उसे जीप में ले जाया जा रहा था ।

जिस समय विकास बापस जोबांचू के अड्डे पर पहुचा उस समय सुबह के दस बज गए थे ।

बीच में कुछ सैनिकों ने उसे देख लिया था और उसके मार्गं में बाधा बनने की चेष्टा की थी किन्तु शैतान लड़के ने उनका पूरा क्रिया-कर्म करके वृक्षों की शोभा बना दिया था ।

जोबाचु के अड्डे पर पहुंचना कोई बच्चों का खेल नहीं था । अड्डे के चारों तरफ की पहाडियो. में उसके आदमी फैले रहते थे ।

उनको धोखा देकर गुफा तक पहुचना उसी प्रकार कठिन था जैसे रात को सूर्य का उदय होना । विकास को जोबांवू के पास पहुंचा दिया गया था । उसे देखते ही पहले तो जोबांचू के चेहरे पर अजीब-से भाव आए । फिर एकदम उसकी तरफ लपका-“तुम विना कहे... ।"

“वह मेरी अदत्त है ।" मुस्कराता हुआ लड़का बोला-----" अधिकांश कार्य अकेला करने का आदी हूं ।"

"लेकिन तुम्हे कहकर जाना चाहिए था ।" जोबांचू बोला…“यहां मैं सारी रात परेशान रहा ।"

"अगर मैं तुमसे कहता तो तुम साथ चले विना बाज नहीं आते और अगर तुम साथ होते तो उस प्रकार खुलकर काम नहीं कर सकता था ।" विकास बोला!

“तो क्या वास्तव में तुमने पता लगा लिया है कि इन्होंने प्रोफेसर बनर्जी को कहा छुपा रखा है?"

"अमी नहीं लगा पाया हु, लेकिन शीघ्र ही लगा लूंगा ।"

"क्या मतलब?" जोबांचू चौंक पड़ा--'"आज की रात तो तुम्हे--।"

"तुम्हें यह सब कैसे पता?"

"समाचार-पत्र पहले जोबांचू के पास आता है और उसके बाद समूचे चीन मैँ प्रकाशित होता है ।'" जोबांचू थोड़ा गर्व के साथ बोला-…""मैंने आप का समाचार-पत्र पढ लिया है, वह केवल तुम्हारे की कारनामों से भरा पड़ा है और तुम्हारा वह खुला पत्र भी पढ चुका हू !"

“ओह... ।” विकास समझता हुआ बोला---------"उससे क्या समझे?"

"केवल ये कि तुम आवश्यकता से अधिक बहादूर बनने लगे हो ।”

" ऐसा क्यों. .!" कहता हुआ लड़का शरारत साथ मुस्करा उठा ।

"इसलिए कि तुम अपने चेलैज में सफल नहीं हो सकोगे ।” जोबांचू करामाती बिकास को घूरता हुआ बोला…“तुम्हारे इस चेलेंज से सारी चीन सरकार हिल गई होगी । यह उसकी प्रतिष्ठा का सवाल है ! उनकी जितनी शक्ति है वे पूरी बहीं लगा देगे जहाँ प्रोफेसर बनर्जी होंगे ।"

“यहीँ तो मैं चाहता हूं ।" अजीब-सी रहस्यम के साथ विकास बोला ।

उसके इस उत्तर पर एक बार को तो जोबांचू रता रह गया ।

उसने ध्यान से उस लडके को देखा । विकास बेहद सुंदर था । दूध जैसा सफेद रंग, भरा-भरा चेहरा, गालों पर लालिमा, होंठ गुलाबी, चौडा मस्तिष्क, अर्ध-घुंघराले वाले वाल, कसरती गठा हुआ जिस्म, मुखड़े पर मासूमियत, ऐसा भोला लगता था मानो वह कुछ जानता न हो । वडी-वडी आंखों में इस समय शरारतपूर्ण चमक थी ।
 
एक पल लिए तो जोबांचू यही सोचता रह गया कि इतना मासूम लड़का इतना अधिक खतरनाक क्यों और कैसे?

एक पल लिए तो जोबांचू यही सोचता रह गया कि इतना मासूम लड़का इतना अधिक खतरनाक क्यों और कैसे?

इतना साहस उसमें कहां से है? इतना दिमाग भगवान ने उसे कहाँ से दिया । एक पल के लिए वह विकास को देखता रह गया, फिर बोला-"संभवत तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है ।"

* कैसे पहचाना?" लड़का मुस्कराया।

"तुम्हारी उल्टी-सीधी बातों से ।" जोबांचू सपाट स्वर में बोला…“मैं कह रहा हूं चीन सरकार अपनी पूरी शक्ति वहां लगा देगी और तुम कह रहे हो कि तुम यही चाहते हो ।"

“तुम मेरा मतलब नहीं समझे, जोबांचू अंकल!" विकास अब भी शरारत के साथ मुस्कराता हुआ कह रहा था…“अब जरा ध्यान से सुनो जो मैं तुमसे कहने जा रहा हू।” कहता हुआ विकास जोबांचू की तरफ ऐसे झुका मानो कोई वहुत ही रहस्य की बात बताने जा रहा हो----------"पहली बात तो मैं तुम्हें बता दू कि अभी तक मालूम नहीं है कि बनर्जी को कहां रखा गया है?"

“तो ये चेलेंज किस बूते पर दिया है?” जोबांचू झुंझला गया-“आखिर तुम उसे गायब कहां से करोगे?”

“वही बताने जा रहा हू ।" विकास मुस्कराता हुआ बोला------" तुमने कहा था कि चीन सरकार इस चेलेंज को पढकर अपनी पूरी शक्ति वहीं लगा देगी और जरा अब बात की गहराई पर ध्यान दो कि पूरी शक्ति लगाने के लिए चीन सराकर सैनिकों की संख्या वहां बडाएगी । अत: बनर्जी कहां है, यह चीनी सेनिक भी जान जाएंगे और खबर फैलेगी तो हमें भी पता लग जाएगा कि बनर्जी को कहां रखा गया है?” कहकर विकास चुप हो गया ।

विकस के नन्हें दिमाग की यह साजिश सुनकर जोबांचू को ऐसा लगा जेसे उसकी खोपडी उलटने जा रही है । एक बार फिर अवाक्-सा वह उसे देखता रह गया ।

एक पल में विकास के लिए न जाने कितने विचार आए और गए । मन-ही-मन वह सोच रहा था कि काश, उसका दिमाग भी इतना सुलझा हुआ और चतुर होता किंतु स्वयं पर संयम पाकर वह बोला…“लेकिन यह पता कौन लगाएगा?"

"सैनिकों में फैले आदमी।"

बात एकदम सही थी ।

जोबांचू को चुप रह जाना पडा ।

वह तो मन-ही-मन विकास की प्रशंसा करते हुए नहीं थक रहा था किंतु न जाने क्यों वह यह प्रकट नहीं करना चाहता था कि वह उससे प्रभावित हुआ है, इसलिए वह बोला-----" यह तो माना कि इस तरह तुम्हें पता लग जाएगा कि बनर्जी कहां है, लेकिन यह नहीं सोचा कि इतने वड़े प्रबंधों के पश्चात् तुम उसे निकालोगे कैसे?”

"यह मेरा काम है ।" विकास बड़े रहस्यमय ढंग से मुस्कराया---"तुम अपना काम करों ।”

जोबांचू एक बार फिर उसे घूरता रह गया ।

न जाने क्यों प्रत्येक घटना उसके मस्तिष्क में विकास को वहुत ऊंचा उठाती जा रही थी । हधौड़े की भांति एक-एक शब्द उसके मस्तिष्क से टकरा रहा था ।

विकास . . . .बिकास . . . . .विकास . . . !

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अपनी सफ़लता पर फूचिंग बेहद प्रसन्न था ।

उसने विजय क्रो एक सुरक्षित स्थान पर कैद कर दिया था ।

अभी उसे विकास द्वारा दिए गए चेलेंज को भी विफल करना था ।

फूचिंग का जिस्म और मस्तिष्क बडी गति से काम कर रहा था । इस समय वह फोन पर कह रहा था…“यस. . . यस. . .तुम "बोगा डैफशिन' पर अपनी टुकडी लेकर पहुचो ।"

"बोंगा डैफशिन' नामक एक स्थान था जहाँ बनर्जी को रखा गया था ।

फूचिंग ने स्वयं यह कार्य अपने हाथ में लिया था ।

अब इस बात को गुप्त रखने से बोई लाभ नहीं था ।

अत: यह बात प्रकट कर दी गई कि बनर्जी कहा है? उन्हें विशेष स्थान पर रखा गया था और पीकिंग में उपस्थित अधिकांश सेनिक टुकडियां वहां तैनात कर दी गई ।

इस समय फूचिंग भिन्न-भिन्न व्यक्तियों को फोन कर रहा था और अलग-अलग निर्देश दे रहा था, लेकिन थे वे सब बोंगा डैफशिन की सुरक्षा हेतु ही है उसका दृढ़ संकल्प था कि आज की रात या तो वह इस खतरनाक लड़कें को भूनकर रख देगा अथवा गिरफ्तार कर लेगा ।

फूचिंग बुरी तरह कहकहा लगा उठा ।

यह कहकहा उसने अपनी वास्तविक आबाज मे लगाया था ।

अतः चांगली यह भापते ही चौका कि सामने खड़ा व्यक्ति साधारण व्यक्ति नही फूचिंग है !

अभी चांगली के सुख से कुछ निकल भी नहीं था कि फूचिंग बोल------"क्यों चांगली, खा गए न धोखा !"

“मेकअप ही कमाल का है, सर !" वह रिवॉल्वर क्रो होलस्टर में रखता हुआ प्रशंसनीय स्वर में बोला ।

"अब देखता हू ये हिन्दुस्तानी कुत्ते कैसे बचते हैं?"

"लेकिन इस मेकअप का मतलब?"

"एक वहुत ही सीक्रेट न्यूज है ।" फूचिंग बोला…"जिसे सुनते ही तुम उछल पड्रोगे ।

वैसे अभी तुम भी उसे गुप्त ही रखना, यह समाचार अभी तक केवल कुछ ही महत्वपूर्ण व्यक्ति जानते हैं ।"

“क्या?"

“मैंने विजय को गिरफ्तार कर लिया है ।”

"क्या?" चांगली इस प्रकार चौंका मानो चीन की दीवार हवा में तैरती देख रहा हो ।

" यस चांगली! " फूचिंग अपनी प्रसन्नता को दबाता हुआ बोला…"विजय को गिरफ्तार कर लिया गया है ।"

"तो फिर अब इस मेकअप का क्या लाभ?"

“अभी उस शेतान लड़के विकास को भी देखना है, उसके अतिरिक्त भी पीकिंग में विजय की सहायता करने वाले उसके साथी हैं, आज उन सबको गिरफ्तार करना है !"

"क्या अपको पता है कि वे कहां हैं! "

“बिल्कुल पता है ।"

* कैसे पता लगा?"

"अगर मैं इस तरह जानकारियां हासिल न करू तो मुझें चीन का सर्वश्रेष्ठ जासूस ही कौन कहे ?"

कहते-कहते फूचिंग का सीना गर्व से फुल गया ।

“लेकिन इस मेकअप का लाभ?"

"अभी इस मेकअप में वह मेकअप और किया जाएगा जिसमे विजय को गिरफ्तार किया गया है ।" फूचिंग बोला----" वही सनकी बूढा बनकर उन लोगों से मिलूंगा । उन्हीं के सामने अपना बूडे वाला मेकअप उतार दूंगा और फिर वे विजय को देखेंगे !'

चांगली अवाक-सा सब कुछ सुन रहा था ।

"मे उनसे जाकर कहूंगा कि मैंने छुपने के लिए यहाँ से भी सुरक्षित स्थान तलाश कर लिया है । सीधी बात है कि मैं उसे अपने साथ ले जाऊंगा । मैं सीधा उन्हें वहां लाऊंगा और यहां तुम सैनिकों सहित होगे ही ।"

"बैरी गुड, सर. . . !" चांगली प्रसन्नतापूर्ण लहजे में बोला------"वास्तव मे योजना बडी घुमावदार है ।"

"अब मै चाहता हू.. . !" कहते हुए फूचिंग ने बूढे का मेकअप करना प्रारंभ किया ।

चांगली मन-ही-मन फूचिंग के दिमाग की प्रशंसा करते हुए नहीं थक रहा था ।

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बौखलाए से विजय ने उस स्थान के दरवाजे पर दस्तक दी । वास्तव मे वह फूचिग ही था । फूचिंग के चेहरे पर विजय का मेकअप था और उस मेकअप पर बूढे का मेकअप था । उसने उसी मकान का द्वार खटखटाया था जिसका पता उसके अज्ञात मददगार ने बताया था ।

इस समय यह ऐसी ऐक्टिग कर रहा था मानो उन लोगों पर किसी प्रकार की कठिनाई आ गई हो ।

अभी वह दस्तक देना ही चाहता था कि की द्वार के पीछे से आवाज़ आई…“तुम्हारे पीछे तो कोई नहीं है?"

“मैँने चेक कर लिया है ।" फूचिंग विजय की आवाज़ में बोला…"कोई नहीं लेकिन जल्दी खोलो ।"

अगले ही पल दरवाजा खुल गया ।

सामने अलफांसे रव्रड़ा था ।

अलफांसे को देखते ही मन-ही-मन फूचिंग बुरी तरह चौंका परंतु बाहर से उसने कुछ प्रकट न होने दिया ।

चौंकने का कारण यह था कि वह जानता था अलफांसे अतर्राष्ट्रीय अपराधी है लेकिन उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि विजय अलफांसे को क्या कहकर पुकारता है ।

उसके मन की उलझन केवल मन ही में रही, बाहर से एकदम सफल अभिनय कर रहा था ।

अंदर प्रविष्ट होते ही फूचिंग ने दाढी इत्यादि नोंच ली । चश्मा उतारता हुआ बौखलाए स्वर में बोला------" यह स्थान फौरन छोड़ दो लूमड़ प्यारे?"

"क्यों?" दरवाजा बंद करता हुआ अलफांसे चौंकने वाले स्वर में बोला ।

"यह बाद में पूछना, लूमड़ मियां! " फूचिंग पूर्णतया विजय का अभिनय करता हुआ बोला------" इस समय यहां बेहद खतरा है । तुरंत यह स्थान छोड़ दो, विकास इत्यादि कहां हैं?”

"आओं ।” अलफांसे लूमड़ मियां आगे चलता हुआ बोला------“आपका दिलजता इस कमरे में है ।"

दोनों कमरे मे प्रविष्ट हो गए।

संध्या उन्हें देखकर खडी हो गई थी ।

विकास कहीं नहीं था ।

फूचिंग ने तेजी से बोला-“विकास कहां है?"

“सो रहा है ।" अलफांसे ने समीप के बिस्तर की ओर संकेत करके कहा । वहां चादर ओढे कोई सो रहा था । विजय वना फूचिंग तेजी से उस तरफ़ बढता हुआ बोला------" अबे ओ दिलजले उठो, वरना वे आलूबुखारा बना देंगे ।" कहने के साथ ही उसने एक झटके के साथ चादर खींच ली ।

चादर खींचते ही उसे लगा जैसे किसी ने एक बम उसकी छाती पर दे मारा हो ।

वास्तव में विकस ही पलंग पर लेटा था । न जाने क्यों उसको इस तरह से सामने देखकर वह स्वयं को संभाल न सका । उसकी आंखों में खौफनाक चमक उभर आई ।

विकास ने उसके अनगिनत देशवासियों को बड़ी निर्मम ढंग से मौत के घाट उतारा था । उसके सहयोगी र्मोंगपा को. . .उफ्. . .पीकिंग पर लाशों की वर्षा करने वाला भी यही मासूम शैतान था ।

उसके सामने भयानक और निर्मम सीन घूम गए । एक पल में उसके दिमाग में आया कि विजय तो उसकी कैद में है ही । यह उसका साथी विकास ही है, इससे अच्छा मौका कहां मिलेगा? क्यों न इसको यहीं गोली मार दे?

सारा झंझट खत्म हो जाएगा, अलफांसे को तो वह किसी तरह भुगत ही लेगा । वह विकास के खून का इतना प्यासा था कि वह स्वयं पर संयम न रख पाया । एक ही पल में उसके दिमाग में समस्त विचार घूम गए थे ।

अगले ही पल फूचिंग ने तेजी के साथ रिवॉल्वर निकाला और...धांय. .. ।

गोली सीधी सोते हुए विकास के सीने को फाड़ती चली गई । विकास के कंठ से कोई चीख नहीं निकली ।

र्कितु वह तो क्रोधावस्था में जैसे पागल हो गया था ।

बिना एक क्षण का भी विलंब किए दो गोलियां उसने और विकास के सीने ने उतार दी ।

हा-हा-हा-हा-हा--. ।

एकाएक कमरा भयानक और सर्द कहकहे से गूंज उठा ।
 
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