• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

विकास दी ग्रेट complete

S

StoryPublisher

Guest
विकास दी ग्रेट



मात्र चौदह बर्ष की उम्र के विकास

से ही अपराध जगत का जर्रा जर्रा थर्राने लगा था

और जब उसने चीनी खुफिया विभाग मे घुसकर

मौत का भयानक खेल खेला तो .......

खेलकर वापिस आया तो सभी ने एक ही नाम दिया------
विकास दी ग्रेट
 
विकास . . विकास . . . .विकास!

यहीं एक नाम था जो भयानक जहरीले सर्प की भांति फूचिंग के मस्तिष्क मे रेंग रहा था, जो रह-रहकर उसके दिमाग से किसी हथोड़े की भांति टकरा रहा था । फूचिंग की आंखों से गहरी चिंता के भाव झलक रहे थे । रह-रहकर उसकी आंखों के सामने पंद्रह वर्ष के उस लड़के द्वारा फैलाई गई तबाही उभर गई । शैतान का भयानक रूप ।

प्रतिशोध की आग में जलता हुआ विकास ।

फूचिंग की आंखों के सामने फिंगोरा की लाश घूम गई ।

फिगोरा. . . टारर्च देने वाला भयानक हब्शी जल्लाद ॥. . .उसका अंत. .? उफ् . अच्छे-अच्छों की रूह फ़ना हो जाए ? हब्शी भेडिये भी दहल उठे, क्रूरता और कट्टरता स्वयं भयभीत होकर मुंह फेर ले ।

अभी तक भली प्रकार फूचिंग को यह दृश्य याद था, जब उसने उस कमरे में प्रवेश किया था, जिसमें विकास को कैद किया गया था ।

उस समय फूचिंग चकरा गया था, जब उसने कमरे मे होती हुई खून की वर्षा देखी ।

लहू की बारिश!

वास्तव में उस कमरे में खून बरस रहा था ।

यह देखकर वह दंग रह गया था कि फिंगोरा छत से लगे पंखे पर उल्टा लटका हुआ था ।

अजीब स्थिति में ।

जन्मजात नग्न, कटी हुई जीभ, माथे पर ब्लेड द्वारा गोश्त काटकर लिखा गया "बिकास" !

पंखा तेजी से चल रहा था । साथ ही साथ घूम रहा या फिगोरा का जिस्म । मस्तक पर वने "विकास" रूपी घाव से कमरे में चारों तरफ खून की वर्षा हो रही थी ।

फूचिंग की आंखों के सामने सब कुछ घूम गया ।

फिगोरा के बाद अनेक सैनिकों की लाशें !

सब एक ही हालत में पंखों पर उल्टे लटके हुए घूम रहे वे ।

बिकास की आलपिन का करिश्मा...!

यह भी फूचिंग को अच्छी तरह याद था ।

आलपिन से बिकास ने कितने ही चीनियों की आंखें फोड़ दी थी ।

याद करते-करते फूचिंग की भुजाएं फड़कने लर्गी । दहककर भयानक जासूस की आँखें अंगारों में बदलने लगी । मौत के साए उसकी आंखों में नजर आने लगे ।

उसके कई साथियों को विकास ने बडी निर्ममता व क्रूरता के साथ मौत के घाट उतार दिया था।

उसे प्रतिशोध लेना था…बिकास से भयानक बदला ॥॥॥॥॥

उसे सब कुछ याद था ।

विकास ने चीन का एक महत्वपूर्ण अड्डा समाप्त कर दिया था । उसके देखते-ही-देखते वहां भयानक तबाही फैल गई थी ।

जोरदार विस्फोट हुए थे । भयानक शोले लपलपाए थे ।

खौफ्नाक आग धधकी थी ।

पेट्रोल पर दौडती आग जब तक अड्डे मे रखी विस्फोटक सामग्री तक पहुची तब तक कानों के पर्दो को हिला देने वाले भयानक विस्फोट के साथ वह अड्डा उड़ गया ।

सब कुछ समाप्त हो गया ।

अड्डे में जितने भी जीवित अथवा मृत प्राणी थे, सब धधकती हुई ज्वाला में स्वाह हो गए ।

कीमती यंत्र नष्ट हो गए थे ।

सारा अड्डा खंडहर ने बदल गया था और वह खंडहर भी आग की लपटों में लिपटा हुआ था ।

सैनिकों ने विकास का पीछा भी किया था ।

भागता हुआ बिकास एक पिक्चर हाउस के समीप उसे मात दे गया था । उस पिक्चर हाउस के बाथरूमो में भी उसे देखा गया परंतु शेतान वहां भी नहीं मिला ।

हाल में ढूंढा, वहां भी नहीं!

उस सारी रात चीनी सैनिक समूचे पीकिंग की खाक छानते रहे किन्तु चीनी सरकार को इतना अधिक नुकसान पहुचाने बाला विकास गायब था ।

फूचिंग की दिमागी पेरेशनी और बढ़ गई थी ।

अब विकास के साथ उसके जहन में कुछ अन्य नाम भी उभर आए थे…बिज़य...अलफांसे...और महाबली टुम्बकटू...!

अब विकास के साथ उसके जहन में कुछ अन्य नाम भी उभर आए थे…बिज़य...अलफांसे...और महाबली टुम्बकटू...!

इन्हें सब बातों को मस्तिष्क में लिए वह तेजी के साथ एलर्ट हो रहा था ।

पच्चीस विशेष चीनी सैनिकों को तैयार होने का उसने आदेश दिया था । स्वयं भी तेजी से तैयार हो रहा था । उसके मजबूत जिस्म पर इस समय भयानक लड़ाकों जैसा लिबास था ।

जेब में भरी हुई गोलियां ।

होलस्टरों में रखे हुए रिवॉल्वर ।

सिर पर कैप । घुटनों तक जूते।

इस समय सुबह के चार बजे थे ।

यह बात सुबह अड्डा समाप्त होने से कुछ ही पल पूर्व उसके द्वारा बनाए गए डुप्लीकेट विकास ने विजय इत्यादि का पता बताया था ।

इस समय फूचिंग उसी अड्डे पर हमला करने जा रहा था । यह अभी तक सीक्रेट था । अभी यह ही हुआ था कि एक नाटे और गोल-मटोल, चीनी ने कमरे में प्रवेश किया और एक जोरदार सैल्यूट मारने के पश्चात् सावधान की स्थिति में अकड़कर खडा हो गया ।

"सब तेयार है?” फूचिंग ने प्रश्न किया ।

" यस कामरेड !' गोल-मटोल चीनी सैनिक बोला ।

“चलो ।" बढते हुए फूचिंग ने अपने लंबे कदम बढा दिए ।

कुछ समय पश्चात् तीन सैनिक-जीपें उस पते की ओर बढ रही थी ।

परंतु विजय पहले से ही पूर्ण सतर्क था । अलफांसे गजब की फुर्ती के साथ विजय पर झपटा था लेकिन विजय ने बड्री चतुराई और फुर्ती के साथ एक झटका खाया और कुर्सी सहित एक तरफ़ जा गिरा । उधर अलफांसे हवा मे तैरता हुआ रिक्त फर्श पर गिरा ।
 
लगभग एक ही साथ दोनों खडे हो गए ।

डुप्लीकेट विकास यानी चीन का एजेंट डबल क्रास, और वह जासूस लडकी यह नहीं समझ पा रही थी कि विजय और अलफांसे, ये दोनों इंसान आपस मे दोस्त हैं अथवा दूश्मन?

उसे भली प्रकार याद था कि ये दोनों सबसे पहले यहां मिलते ही आपस भयानक दुश्मनों की भाति टकराए थे ।

उसके बाद दोनों ने साथ-साथ काम किया और विकास को जांर्सेंटा से निकाल लाए और अब...!

विजय के हाथ में वही कागज दबा हुआ था जिस पर उसने गुप्तलिपि के आधार पर कुछ लिखकर पढा था ।

गुप्तलिपि मे क्या संदेश छुपा हुआ था यह अभी तक उसने किसी को नहीं बताया था ।

स्वयं विकास और यह जासूस लडकी भी यह जानने के लिए विशेष उत्सुक थे कि संदेश क्या है?

किसने भेजा है?

और अलफांसे ने तो उत्सुक होकर विजय के हाथ में दवे कागज को छीनने के लिए उस पर जाम्प लगा दी थी ।

यह दूसरी बात थी कि वह सफ़ल न हो सका था ।

उसके सामने खड़ा अलफांसे बोला--'"विजय, दिखाओ उसमें क्या लिखा है?"

"ऐसी भी क्या जल्दी है प्यारे लूमड़ मियां?" विजय अपने ही अंदाज में बोला…“तुम जरा आराम से बैठ जाओ, हम जरा अपने इस दिलजले से इश्क लड़ाने के मूड में है ।"

"क्या मतलब? " अलफांसे चकराया ।

"में ठीक कह रहा हूं लूमड़ प्यारे, अब जरा तुम तमाशा देखो ।" कहने के साथ ही विद्युत गति से विजय का हाथ चला और शक्तिशाली घूंसा समीप ही खड़े विकास के जबड़े से टकराया ।

अलफांसे और लडकी की खोपडी उलट गई ।

उनकी समझ में नहीं आया कि विजय को हो क्या गया है? इधर डुप्लीकेट विकास यानी डबलक्रास के जबड़े पर जब जासूस सम्राट का घूंसा पडा तो न चाहते हुए भी उसे फर्श का स्वाद चखना ही पडा,, र्कितु इस बीच वह यह भी समझ गया कि विजय पर यह रहस्य प्रकट हो चुका है कि वह विकास नहीं है अन्यथा विजय कदापि विकास को इस तरह अचानक क्यों मारने लगा ।

यह बात दिमाग में आते ही वह अपने जौहर दिखाने के लिए बाध्य हो गया ।

वह न केवल फुर्ती से उछलकर फर्श पर खड़ा हो गया बल्कि विद्युत गति से उसका जिस्म वायु मे लहराया और ------चमत्कृत करने वाले ढंग से विजय के सीने पर उसके दोनों पैरो की दुलत्ती पडी ।

वह लड़खड़ा गया ।

तभी अलफांसे ने हवा में उछलकर बिकास की दोनों टांगे पकडकर मेज पर दे मारा । विकास के मुँह से भयानक चीख निकल गई ।

जासूस लडकी अवाक्-सी उन तीनों को देखती रह गई । उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है?

चीन में वह भारत के लिए जासूसी करती थी परंतु यह लोग क्या हैं, यह वह नहीं समझ पाई थी । उसे पता लगा था कि विकास को विजय और अलफांसे बेहद प्यार करते हैं किंतु इस समय वह जो दृश्य देख रही थी वह गजब का हैरतअंगेज था ।

"वेरी गुड लूमड़ प्यारे, साले की हड्डी-पसली तोड़ दो ।" कहते हुए विजय ने अपने हाथ में दबा हुआ कागज का टुकडा अपनी जेब के हवाले किया ।

इस बीच विकास के पीछे छुपे डबलक्रास ने अपना अन्य कोई और जौहर दिखाना चाहा तो अलफांसे ने उसे उठाकर फर्श पर दे मारा ।

फर्श से उठते ही उसके जबड़े पर विजय के बूट की जोरदार ठोकर पडी । उसके मुह से खून बहने लगा और यह दूसरी तरफ उलट गया ।

उसके बाद बेचारा डबलक्रास ।

विजय अत्तफांसे के बीच में फंसकर क्या कर सकता था ।

शीघ्र ही वह बेहोश हो गया ।

"लो प्यारे कमा दिया अपने ही चेले को ।" विजय चहका।

"अब मे धोखा नहीं खा सकता विजय बेटे ।" अलफांसे मुस्कराकर बोला…“यह विकास नकली है ।"

"कैसे पहचाना?"

"वो मेरा चेला है विजय ।" अलफांसे बोला…“मैं जानता हूं कि वह कब, किस अवसर पर, कौन-सा दाव किस ढंग से मार सकता? जिस समय इसने अपने पैरों का प्रहार तुम पर किया, मैं उसी पल भांप गया था कि यह विकास नहीं है और फिर तुम्हारा इस पर हाथ उठाना भी इस बात का ठोस प्रमाण था ।" कहते हुए अलफांसे डबत्तक्रास के चेहरे से विकास के फेसमास्क की झिल्ली नोंच ली ।

फेसमास्क के पीछे एक खूंखार चीनी चेहरा छिपा हुआ था ।

लडकी अवाक्-सी इन खतरनाक लोगों के खेल देख रही थी ।

"बेटा लुमड़ प्यारे? विजय ब्रोला--“यह साला फूचिंग तो हमारा भी गुरु निकला, साले ने हमारे साथ इतनी गहरी चाल चल दी कि हमे चकरघिन्नी बना दिया ।"

"मैं पहले ही सोच रहा था विजय कि हम "जार्सेंटा" जैसे भयानक स्थान से इतनी

सरलता के साथ कैसे निकल आए, हमे रोकने की चीनियों की वह कोशिश केवल दिखावा मात्र थी , जबकि वे हमे निकल भागने का पूर्ण अवसर दे रहे थे ।"

“खैर प्यारे, इस बिषय पर बाते बाद में होंगी, पहले हम अपनी मम्मी से कुछ इश्क की बाते कर ले ।” कहने के साथ ही विजय उस जासूस लड़की की तरफ घूमकर बोला------------“मम्मी जी, सबसे पहले आप अपना नाम बताइए ।”

""संध्या!" उसने बड़ा संक्षिप्त-सा उत्तर दिया ।

“बडा धांसू नाम है ।" विजय तेजी के साथ बोला…"तो ये बताओ कि... ।"

"विजय, बह कागज कहां है?" अलफांसे बीच ही में बोला ।

“बीच में बोलने वाले लोग महामूर्ख होते हैं, लूमड़ प्यारे! " विजय बोला'------"वे बाते बाद की हैं, पहले जरा संध्या देवी से काम की बाते करने दो ।" कहने के बाद यह फिर संध्या की तरफ घूम गया तथा बोला------"हाँ तो देवीजी, मैं यह पूछ रहा था कि इस ठिकाने के अतिरिक्त चीन में तुम्हारा कोई और घोंसला है!"

"क्या मतलब?” संध्या उसके बात करने के ढंग को देखकर चकरा गई ।

"मतलब को तो मारो एक मिठाई की गोली ।" विजय बोला…"सवाल यह है कि इस खंडहर के अतिरिक्त पीकिंग में तुम्हारा अन्य कोई स्थान है अथवा नहीं, जहां चीनियों की पहुच न हो ।"

“यहां कोई चीनी नहीं पहुच सकता।” संध्या दृढ़ शब्दों में बोली ।

"हो सकता है संध्या देवी कि आप सही फरमा रही हों किंतु आपको यह पता होना चाहिए कि यहां इस मनहूस लूमड़ के कदम पड़ गए हैं, साथ ही यहां हम यानी विजय दी ग्रेट पहुच गए हैं । यह ठीक है कि जब तक तुम यहां रहती थी कोई यहां तक नहीं पहुचा था किंतु तुम्हें शायद यह नहीं पता कि हमारे जिस्सों में कोई-न-कोई गंध ऐसी अवश्य है जिसकी 'बू' चीनी बडी सरलता से सूंघ लेते है ।"

“क्या तुम्हारा अभिप्राय ये तो नहीं कि चीनियों को इस अड्डे के बारे में जानकारी गई हैं?” इस बार यह प्रश्न अलफांसे ने किया था ।

“तुम्हरि बच्चे राजी रहे लूमड़ प्यारे ।" विजय बोला…“बिल्कुल हमारा अभिप्राय यही था ।"

"ऐसा क्यों? "

"ऐसा लगता है कि अब तुम्हें बद्दुआ देनी होगी ।" विजय बोला…“अच्छा यही है कि तुम दो मिनट के लिए अपनी बोलती पर ढक्कन लगा लगा दो !' कहने के बाद उसने अलफांसे को कुछ भी बोलने का अवसर नहीं दिया बल्कि फिरकनी की भाति संध्या की तरफ घूमकर बोला-------"हां , तो देवीजी अब आप समझ गई होंगी कि यह अड्डा चीनियों की निगाह में आ चुका है और वे लोग अपनी बारात लेकर हमारी शादी करने यहाँ पधार सकते हैं । इसलिए अच्छा है कि हम यहां से प्रस्थान करें ।"

विजय प्रत्येक हरकत्त इस अजीब ढंग और तेजी के साथ कर रहा था कि संध्या कुछ समझ नहीं पाई थी । वह केवल इतना ही कह पाई----" मै समझे नहीं ।"

"समझने की आवश्यक्ता भी नहीं है देवीजी ।" विजय बोला'…"केबल ये बताओ कि इसके अतिरिक्त कोई स्थान है अथवा नहीं?."

"मेरा तो कोई स्थान नहीं है ।"

"मर गए मोहल्ले बाले ।" विजय ने माथा पीटा ।

“मेरे पास है ।"' अलफांसे बोला ।

"जेब से निकल कर बाहर रख दो ।" विजय तपाक से बोला ।

“तुम बकवास कम किया करो तो काफी काम के आदमी बन सकते हो ।" अलफांसे बोला…"तुम्हारे कथनानुसार इस समय यहाँ खतरा है और छुपने के लिए कोई स्थान चाहिए,, मै कह रहा हू कि ऐसा स्थान मेरे पास है, मेरा विचार है हम वहां काफी सुरक्षित भी रहेंगे ।"

" कौन-सा स्थान? "

"जोबांचू के अड्डे पर ।"

"कौन जोबांचू ?"

“फिलहाल इस चक्कर में मत पडो ।" अलफांसे ने कहा-----" इससमय केवल इतना समझ लो कि वह स्थान काफी सुरक्षित है, एक तो बहाँ चीनी सेनिक पहुच ही नहीं सकते और यदि पहुच भी गए तो हम लोग जमकर उनका मुकाबला कर सकते हैं ।"

“तो फिर बातें क्यो मिला रहे हो लूमड़ प्यारे, तुरंत उस साले नकली दिलजले को तो उठाकर इस घोंसले से भाग निकलो, आगे की योजना बाद में सोचेंगे ।"
 
"लेकिन यहाँ कुछ समान है जो चीनियों को हमारे विषय में जानकारी दे देगे ।" संध्या ने बताया !

"उन्हे समेटने का भी समय अब शेष नहीं ।" विजय तेजी के साथ बोला ।

"इस तैम्प में मिट्टी का तेल तो होगा?"

"जी हां ।"

"इसके अतिरिक्त?"

"पूरा एक कनस्तर और है ।"

"वैरी गुड !" विजय बोला- "तो फौरन सारे तहखाने में छिड़क दो ।"

इस वार्तालाप के ठीक पांच मिनट बाद... ।

अचानक वह खंडहर आग की लपटों में धिर गया ।

विजय, अलफांसे और संध्या उस स्थान को छोड़ चुके थे । डबलक्रास का बेहोश जिस्म अलफांसे के कंधे पर पडा था ।

तब जबकि खंडहर में आग की लपटे उठ रहीं थीं, वे तीनों पीकिंग की एक अंधेरी और सुनसान गती में से गुजर रहे थे ।

जिस तेजी के साथ बब्बर शेर का मृत जिस्म करेटयुवत शीशे से टकराया, उसी तेजी से छिटक कर वापस टुम्बकटू के पास आ गिरा ।

शीशे को किसी प्रकार की कोई हानि नहीं पहुंची थी । सभी बेहद आश्चर्य के साथ उस अजीब नमूने दुम्बकटू को देख रहे थे ।

शीशे के पार चीन के बड़े-बड़े अधिकारी उपस्थित थे । सभी के दिमाग में चांद का ये नमूना हव्वा बनकर सवार हो गया था ।

इस मीटिंग के अध्यक्ष मिस्टर योग की आंखें उस समय हैरत से फैलकर दुगनी हो गई जब खंबे जैसे व्यक्ति दुम्बकटू ने खतरनाक और खूनी बब्बर शेर को अपनी गन्ने जैसी पतली कलाइयों मे कसकर मृत्युलोक पहुंचा दिया ।

फूचिंग स्वयं चकराकर रह गया । उसका असिस्टेंट मोंगपा आश्चर्य के गहन सागर में गोता लगा रहा था ।

टुम्बकटू के सामने फूचिंग की बुद्धि भी चकराकर रह गई । सभी लोग आतंक से टुम्वकटू को देख रहे थे ।

अचानक उसने शेर को उठाया और उस समय सारे व्यक्तियों के हलक सूख गए जब उसने अपनी बीसों उगलियों के पांच-पांच इंच लंबे नाखून शेर के पेट में धंसा दिए ।

शेर का गर्म रक्त बाहर उबल पडा ।

उफ् ! चीन के व्यक्तियों ने भी घृणा से मुह फेर लिए । एक झटके के साथ टुम्बकटू ने अपने दोनों हाथों को विपरीत दिशा में खींचा । शेर की मोटी खाल किसी प्याज के छिलके की भांति उतरती चली गई ।

टुम्वकटु, के सारे हाथ खून से सन गए । शेर केवल मांस के लोथड़े के रूप में रह गया ।

टुम्बकटू ने खाल एक तरफ़ उछाल दी । फूचिंग जैसे व्यक्तियों को भी उल्टी होने वाली थी ।

अगले पल टुम्बकटूका जो भयानक रूप सामने आया, उसे देखकर समूचे चीनी अधिकारी दहल उठे ।

सबकी रीढ की हड्डी में मौत की लहर दौड़ गई । उन्होंने देखा कि टुम्बकटू का पतता-दुबला चेहरा एकाएक फूलने लगा ।

ठीक इस प्रकार जैसे नाग अपना फन फैला रहा हो । छोटी-छोटी आंखों में जैसे दो नन्हें-नन्हे लाल बल जल उठे हो । गले के एक-एक नस उभर आई ।

पतले होंठ भयानक तरीके से फेल गए । होठ फैलते ही उसके भयानक नोकीले दांत ठीक किसी राक्षस की भांति चमके ।

लंवे-लंबे कान अजीब ढंग से फड़फ़ड़ाने लगे । जिस्म फूलता चला गया ।

यह था टुम्बकटू नया और खौफ़नाक रूप ।

मानो खूनी दरिंदा!

वहशी नरपिशाच !

गर्म खून की प्यास रखने वाला जंगली भेडिया !! किसी कब्रिस्तान में भटकती हुई खूनी रूह ऐसा लगता था जैसे खून ही प्यास रखने वाला वहशी भेडिया खड़ा हो ।

शेर का मांस और खून देखकर उसकी आंखें खौफ़नाक ढंग से चमक उठी । दांत कच्चे मांस को खाने के लिए मचल उठे । जीभ गर्म खून पीने के लिए लपलपाई ।

टुम्बकटू एक नए अंदाज में सामने था ।

अब यह हंसमुख टुम्बकटू नजर नहीं आ रहा था । अब तो दरिंदा सामने था, रक्त पीने की लालसा रखने वाला टुम्बकटू!

रक्तपिपासु!

खौफ़नाका भयानका डरावना!

फूचिंग भी सब कुछ भूलकर टुम्बकटू के इस खूनी रूप में खो गया ।

अचानक टुम्बकटू के कंठ से एक बेहद डरावनी किलकारी निकली । मानो कोई भयानक प्रेतात्मा अपनी प्रिय बस्तु देखकर प्रसन्नता से चीख उठी हो । ठीक उसी प्रकार टुम्बकटू झपटा और अगले ही पल उसके भयानक नोक्रीले दांत मांस के लोथड़े रूपी शेर के जिस्म में धंस गए ।

लोगों ने घृणा से मुँह फेर लिए ।

शेर का कच्चा गोश्त टुम्बकटू चिंगल चिंगलकर खा रहा था । फर्श पर ढेर सारा खून बह रहा था । टुम्बकटू के कंठ से फिर भयानक प्रेतात्माओं जैसी किलकारी निकली और वह गर्म खून पर झपट पडा ।

टुम्बकटू के कंठ से फिर भयानक प्रेतात्माओं जैसी किलकारी निकली और वह गर्म खून पर झपट पडा ।

नहीं, दुम्बकटू इंसान नहीं हो सकता । या तो वह भयानक वहशी भेडिया है अथवा कोई खौफनाक प्रेतात्मा!

किसी भयानक भेडिए की भाति बह जीभ से बड़े चाव के साथ गर्म खून पी रहा था । किसी प्रेत की भांति रह-रहकर उसके कंठ से किलकारियां निकल रही थी ।

देखते-ही-देखते वह सारा गर्म खून पी गया ।

एक पल भी व्यर्थ किए विना वह फिर शेर के मांस पर झपट पड़ा । वह किसी वहशी दरिंदे की भांति गोश्त निगलने लगा ।

उसका सारा चेहरा गाढे खून से लाल । लहू से सने हाथ । दहकती हुई आंखें । चेहरे पर वहशीपन । रात में देख ले तो खूनी भेड्रिए भी दहल उठे ।

प्रेत भी भय से चीख पड़े ।

भयानकता स्वयं उसका यह भयानक रूप देखकर कांप उठे ।

एकाएक फूचिग को जैसे कुछ होश आया ।

उसे लगा टुम्बकटू इंसान कम और खून का प्यासा खूनी दरिंदा अधिक है । उसने तेजी के साथ एक अन्य बटन दबा दिया । अचानक शीशे के दूसरी तरफ अर्थात् टुम्बकटू की ओर वाले भाग में जहरीली गैस भरने लगी ।

तब तक टुम्बकटू शेर का आधा मांस खा चुका था । अचानक टुम्बकटू ने चेहरा उठाकर समस्त चीनियों की तरफ़ देखा ।

समूचे चीनी कांप उठे ।

उसके भयानक नोकीले दांत चमक उठे । आंखें में जलते बल्ब जैसे रह-रहकर जलने-बुझने लगे । खून से सना हुआ मुह कंपकंपी पैदा कर रहा था ।

"खून. . ऽ .ऽ .ऽ. ऽ . . ।" टुम्बकटू के मुह से भयानक गड़गड़ाती हुई गुर्राहट निकली------------“खून . . .खून . . .खून, लाओ . . .लहू. . .रक्त. . हा. .हा. . .हा. . .खून ।" एकदम जैसे टुम्बकटू पागल हो गया था । वहशी गुर्रा उठा था । रक्तपिपासु टुम्बकटू खून मांग रहा था । ऐसा लग रहा था जैसे अगर उसे खून नहीं मिला तो यह तढ़प-तढ़पकर जान दे देगा । खून के विना वह मर जाएगा । किसी कुत्ते की भांति उसकी जीभ बाहर निकल गई । बह और भी भयानक लगने लगा । खून की प्यासी जैसे कोई प्रेतात्मा खून के लिए गुर्रा रहीं हो ।

वह पुन: चिंघाड़ उठा-----"खून लाओ, खून. . .खून. . .हा. . .हा. . .हा. . . ।” टुम्बकटू पागल होकर भयानक कहकहे लगा रहा था…“खून दो . . .तुमने मेरी प्यास जगा दी है. . .ह्य. .हा. . .हा. . .मैं तुम्हारे जिस्म का एक कतरा भी नहीं छोडूंगा. . .खून लाओ. .गोश्त. . .खून. . .हा. . .हा. . .हा. . . ।" दुम्बकटू किसी खौफनाक दरिंदे की भांति चिंघाड़ रहा था ।

सब लोगों के दिल बैठते चले गए ।

सबको अपने सिर पर मंडराती मौत नजर आ रही थी । वे ऐसा महसूस कर रहे थे कि टुम्बकटू को छोड़कर बडी भारी गलती की है ।

भयानक तरीके से डकार-डकारकर टुम्बकटू खून मांग रहा था ।
 
इधर गैस की मात्रा बढती जा रही थी ।

इससे पूर्व कि गेस टुम्बकटू पर अपना कुछ करिश्मा दिखाए, उसके जूते से निकलकर एक चमकीला सुनहरा सिक्का हवा में लहराया ।

अगले ही पल सिक्का शीशे से टकराया ।

आश्चर्यजनक परिणाम----सिक्का अपने अध्यतन के बराबर छिद्र बनाता हुआ शीशे के पार निकल गया ।

इस क्षण-प्रतिक्षण गेस में वृद्धि होती जा रही थी । टुम्बकटू के चेहरे पर छाया वहशीपन कम नहीं हो रहा था । अचानक उसके जूते से एक अन्य सिक्का वायु में सनसनाया और फिर शीशे में जा लगा । यह सिक्का पहले वाले सिक्के द्वारा बनाए गए छिद्र को इतना बडा कर गया जितना स्वयं उसका आयतन था । उसके बाद, तेजी के साथ टुम्बकटू के जूते से निरंतर सात सिक्के निकले और शीशे में एक अच्छा-खासा मोखला बना गए ।

यह सब पलक झपकते ही हो गया ।

इससे आगे का दृश्य कोई भी न देख सका ।

किसी की आंखें न देख सकी कि कब टुम्बकटू का गन्ने जैसा जिस्म वायु में लहराकर उस मोखले के माध्यम से बाहर आ गया ।

एक बार पलक झपकने के बाद सबने केवल यही देखा कि टुम्बकटू एक चीनी अधिकारी के बहुत ही समीप खड़ा इस प्रकार लहरा रहा था मानो किसी विशाल खेत में खड़ा इकलौता गन्ना ।

अभी कोई कुछ समझ नहीं पाया ।

अधिकारी के कंठ से एक भयानक चीख निकली ।

समूचा वातावरण दहल उठा ।

उपस्थित सारे जिस्म सूखे पत्रों की भाति कांपने लगे ।

खूनी नरपिशाच टुम्बकटू के भयानक नोकीले दांत उस चीनी के सिर वाले भाग में धंस गए थे । अधिकारी के कंठ से हदय-विदारक चीख निकल गई थी । रक्तपिपासु टुम्बकटू गर्म खून पी रहा था ।।।

चीनी अधिकारी बुरी तरह चीख-चीखकर मचल रहा था, और साथ-ही-साथ समूचा खून उसके जिस्म से सुतता जा रहा था । चीनी सफेद पड़ता चला गया । चीखता-चीखता वह शक्तिहीन अचेत हो गया । देखते-ही-देखते वह उसका सारा खून पी गया ।

रक्तहीन मानव पिचककर अजीब-भी शक्ल में आ गया । उस पल. . जब गर्म खून के प्यासे टुम्बकटू ने अपने तकुओँ जैसे नोकीले दांत उसके सिर से बाहर निकाले तो भयानकता की भी रूह फना हो गई । टुम्बकटू रूपी खूनी भेडिए की दहकती आंखें बुझने लगीं ।

टुम्बकटू ने रक्तहीन मानव के सिर पर दांतों द्वारा बने घाव में अपने दोनों हाथों की सलाई-सी उंगलियां डाली, लंबे नाखून घाव में समा चुके थे । इससे पूर्व कि कोई कुछ समझे टुम्वकटू ने एक बेहद जोरदार झटका दिया और अगले ही पल. . .!

ख र्र र्र र्र. . के अजीब-सी ध्वनि के साथ उस अधिकारी का जिस्म दो हिस्सों में फटता चला गया । रक्तहीन गोश्त के लोथड़े इधर-उधर बिखर गए।

हड्डियां टूट टूटकर बिखर गिर गई । खून एक बूंद भी नहीं टपका । कुछ अजीब चिपचिपा-सा पदार्थ वहां बिखरकर रह गया । उसके जिस्म का आधा हिस्सा टुम्बकटू के दाएं हाथ में झूल रहा था और बाएं हाथ में दूसरा ।

किसी को जैसे कुछ होश ही नहीं रहा।

सब आतंक से भयभीत होकर टुम्बकटू को देख रहे थे ।

दुम्बकटू की आंखों की वहशी खूनी चमक समाप्त होती जा रही थी । वह तृप्त नजर आ रहा था, मानो उसकी गर्म खून की प्यास बुझ गई हो, इतना खून उसके लिए पर्याप्त हो ।

वहशीपन के भाव उसके चेहरे से खत्म होते जा रहै थे । नाग के फन के भाति फैला हुआ उसके सिर का भाग बैठता जा रहा था । नसों का तनाव समाप्त हो गया था ।

कुछ ही देर में वह वहीं हंसमुख, फुर्तीला, साधारण टुम्बकटू नजर आने लगा ।

उसका वहशीपन न जाने कहाँ गायब हो गया था ।

अगर उसके मुहे-हाथों और जिस्म पर खून न लगा हुआ हो तो कोई यह नहीं कह सकता था कि यह वहीं रक्तपिपासु टुम्बकटू है जो कुछ ही पल पूर्व किसी खूनी भेड्रिये अथवा अतृप्त प्रेतात्मा की भांति खून पी रहा था और मांस खा रहा था ।

"लो . . . ऽऽऽ. . . ।" कहते हुए उसने उस इंसानी जिस्म के दोनों दुकड़े अन्य चीनी अधिकरियों की तरफ़ उछाल दिए । इस समय वह बड़े अराम से खड़ा लहरा रहा था और कहा रहा था---------"सज्जनो, आज मुझे पता लगा है कि इंसानों के अंदर बहने वाला यह लाल खून कितना गर्म और स्वादिष्ट है । आज से मैं इसी खून से अपनी प्यास वुझाऊंगा ।”

इस मीटिंग के अध्यक्ष मि. पोंग इस समय टुम्बकटू के पीछे खड़े थे । उन्होंने अवसर जानकर तेजी के साथ अपनी जेब से रिवॉल्वर निकालकर टुम्वकटू पर फायर कर दिया ।

परन्तु.....उफ्......यह छलावा अपराधी ।

कोई नहीं देख सका कि टुम्बकटू कब अपने स्थान से गायब हो गया ।

एक पल में दो चीखें उभरी ।

एक उसकी जिसे गोली लगी थी और दूसरी स्वयं पोंग की ।

सबने केवल यही देखा कि टुम्बकटू के हाथ का एक जोरदार चपत पोंग के गाल से टकराया । परिणामस्वरूप पोंग अचेत होकर टुम्बकटू की सलाई जैसी बांहों में झूल गया । अगले ही पल पोंग का बेहोश जिस्म टुम्बकटू के कंधे पर पडा था । टुम्बकटू कह रहा था-------"अच्छा सज्जनो, अब मैं चलता हूं ।” आवाज ठीक इस प्रकार निकल रही थी मानो फुल स्पीड पर खुला हुआ रेडियों अचानक खराब हो गया हो------"मैने आप लोगों को कल सुबह तक का समय दे रखा है और अगर तुमने उस समय तक वे अंडे उस पेड़ पर न रखे तो मैं पोंगची की बीबी से तो इश्क लडाऊंगा ही, साथ ही पोंग की लाश किसी वृक्ष की शोभा बढाती पाई जाएगी ।”

अभी फूचिंग कुछ कहना ही चाहता था कि टुम्बकटू पोंग को सम्हाले उस हाल के द्वार से लहराता हुआ बाहर निकल गया ।

उसके बाद उसे समूचे 'हार्बिन' में तलाश किया गया किंतु वह टुम्बकटू था!

कोई इंसान होता तो शायद चमकता अथवा हाथ ही जाता परंतु पता नहीं टुम्बकटू तो था ही क्या?

बिकास सतर्क हो गया ।

वह समझ गया कि वह रहस्यमय चीनी अधिकारी सांकेतिक भाषा में उसे कुछ भी कर गुजरने के लिए कह रहा है ।

वह मोंगपा की तरफ़ देखकर गुर्राया-----“तुम्हें मैं सूअर की मौत मारूंगा फूचिंग के कुत्ते!”

पहले अपनी चिन्ता करो, हिंदुस्तानी पिल्ले !" वह कुटिलता के साथ बोला।

"तुम्हारे देश में आया हुआ हूं कुत्ते!" विकास क्रोधित स्वर में गुर्राया-----"अच्छी तरह समझ लो कि पीकिंग में वो तबाही फैला दूगा कि सारा संसार कांप उठेगा ।"

“आयु इतनी छोटी और जुबान इतनी लंबी ।" कुटिलता के साथ कहता हुआ वह उसके पास आ गया । विकास उससे आयु के हिसाब से उसके लड़के के बराबर था परंतु लंबाई में उससे दो-तीन इंच लंबा ही था । सेहत भी उसके मुकाबले अच्छी थी । बिकास उसकी आंखों में आंखें डाले गुर्राया--- -"उस समय तुम्हें मेरी आयु का पता लगेगा जब मेरा ब्लेड तुम्हारी आंखों के सामने होगा ।"

"तुम बोलते बहुत हो कुत्ते...!" कहने के साथ ही मोंगपा का एक थप्पड़ विकास के गाल पर पड़ा परंतु तभी एकदम जैसे बिजली चमकी । विद्युत गति से एक थप्पड़ मोगपा के गाल से टकराया । इस नाजुक समय में किसी को विकास से यह उम्मीद नहीं थी पर, यह लडका तो हमेशा ही ऐसा काम करता था जिसकी कमी किसी को आशा नहीं होती ।

पलक झपकते ही लड़के का जिस्म कमान से निकले तीर की तरह हवा में लहराता चला गया ।

इधर मोंगया एक ही थप्पड में चकरा गया था ।

रेट. . .रेट. . .रेट. . . ।

रायफ़तों की भयानक गर्जना से हाँल दहल उठा । अनगिनत गोलियां उस लड़के के 'चारों तरफ छितरा गई परंतु उसने तो हमेशा सनसनाती गोलियों के बीच ही खेलना सीखा था ।

वह भला गोलियों से क्या डरता । विधुत गति से सनसनाता हुआ वह वहीं खडे हुए एक खाली ड्रम में जा पहुचा जिस पर उसकी नजर ही पड़ चुकी थी ।

वह वहुत बुर्तीला था ।

उसके ड्राम में पहुचते ही खडा हुआ ड्रम गिर गया ।गोलियाँ ड्रम ब्रॉडी से टकराकर विना किसी प्रकार का करिश्मा दिखाए बेकार हो गई । पलक झपकते ही ड्रम तेजी के साथ लुढका और मोंगपा अभी संभल भी नहीं पाया था कि तेजी से लुढ़कता हुआ ड्रम उसके पेरों से जा टकराया । कुछ समझता तो कुछ करता भी । यह सब विकास ने इस फुर्ती के साथ किया था कि कोई समझ तक नहीं पाया । वह घड़ाम से फर्श पर गिरा, गिरते ही ड्रम के अंदर से लड़के ने हाथ निकालकर, मोंगपा का कालर पकड़कर अंदर खीच लिया ।

इस समय किसी ने फायर नहीं किया क्योंकि इस समय उनका चीफ मोंगपा भी बही था !

इधर बिकास ने एक झटके के साथ र्मोंगपा के होलेस्टर से रिवॉल्वर खींच लिया और उसकी कनपटी से सटाकर धीमे किंतु सर्प की तरह फुंफ़कारा----" कहो हरामजादे, पहुचा दूं खुदागंज?"

र्मोंगपा चुप ! . .सिट्टी-पिट्टी गुम !

“ये फायरिंग रोक दो चीनी सूअरों !" बिकास जोर से चिलाया-----"वरना तुम्हारे इस चीफ को मौत के घाट उतार दूगा ।" वह अभी तक ड्रम के अंदर ही था । वह निकलने का प्रयास कर रहा था कि विकास रिवॉल्वर का दवाब उसकी कनपटी पर बढ़ाकर बोला----"हिल मत कुत्ते, वरना भेजा उड़ा दूगा ।"

मोंगपा एकदम ढीला...मानो शव !

फायरिंग रुक चुकी थी ।

“अब अपने-अपने हथियार गिरा दो ।" विकास ने खतरनाक स्वर में आदेश दिया परंतु उसने अपने आदेश को कार्यान्वित रूप में न देखा तो रिवॉल्वर का दबाव और अधिक बढाकर मोंगपा के कान में फुंफकारा---"आदेश दे सूअर, वरना खोपडी तोड दूगा ।”

बेचारा मोंगपा !

आदेश देना ही पड़ा ।

सबके हथियार फर्श पर आ गए । दोनों हाथ सिर से ऊपर, थोबड़े दीवार की तरफ और तब विकास मोंगपा को लेकर ड्रम से बाहर आया । विकास उसे लेकर हाल में लगे एक खम्बे के पीछे ही चला था कि अचानक. . . । धांय . . . !

एक गोली चली ।

विकास के हाथ में दबा रिवॉल्वर छिटककर दूर जा गिरा ।

लड़के के दिमाग में धमाका-सा हुआ, एक ही पल में वह समझ गया कि कोई चीनी सेनिक चालाकी दिखा गया है । उसने फौरन ही सब कुछ छोडकर खम्बे की बैक में जम्प लगा दी । अचानक फिर गोलियों से हॉल गुंज उठा ।

तभी विकास ने देखा कि बही रहस्यमय चीनी अधिकारी एक विशेष ढंग से हवा में लहराया और एक रायफल को उसके खम्बे की ओर उछालकर चिल्लाया-“विकास, ये लो !"

विकास ने रायफल लपक ली ।

वह रहस्यमय चीनी अधिकारी भी उसके सामने वाले एक खम्बे की बैक में हो गया था । अब बह भी अपनी रायफल से चीनी सैनिकों को ठंडा कर रहा था ।

विकास के हाथ में दबी रायफल ने भी गरजना प्रारंभ कर दिया । मोंगपा भी जम्प मारकर एक ड्राम की बैक में हो गया था । अब दोनों तरफ़ से गोलियां चल रही थी ।

अभी विकास अधिक चीनियों का सफाया नहीं कर पाया था कि अचानक उसके नीचे से फर्श हट गया और वह लाख संभलने का प्रयास करने के बाद भी न सम्भल सका ।।।।।

और धड़ाम से नीचे जा गिरा, एक ही पल में उसने देखा कि यह टॉर्चर रूम था । वहां लाल प्रकाश फैला हुआ था । तरह-तरह की मशीनें थी ।

यह कमरा उस हाँल के एकदम नीचे था अभी तक गोलियां चलने की आबाज आ रही थी ।
 
अचानक हॉल के एक अन्य स्थान का फर्श हटा और मोंगपा का जिस्म नीचे आया। दोनों के हाथों में रायफलें थीं । दोनों एक-दूसरे के सामने प्रतिद्वंद्वी के रूप मे खडे थे । मोंगपा गुर्राया-“यहां केवल हम और तुम निबटेंगे ।"

धांय !

कहने के साथ ही मोंगपा ने एक फायर किया परंतु तभी. . .धांय---लगमग उसी समय विकास ने भी गोली चला दी । उसका निशाना मोंगपा के रिवॉल्वर से निकली हुंई गोली थी ।

जैकी द्वारा सिखाई गई कलानुसार दोनो गोलियां हवा में टकराकर बेकार होगई ।

मोंगपा अबाक् !

उसकी आंखें हैरत से फैल गई । गोली से गोली के टकराव का यह करिश्मा कदाचित् वह अपने जीवन में पहली बार ही देख रहा था ।

मोंगपा ने तभी एक फायर और किया कदाचित् उस समय वह हैरत में पड़ गया जब बिकास ने फिर वही करिश्मा दिखाया । अवाक्-सा मोंगपा चौदह वर्ष के उस लड़के को देखता रह गया । तभी विकास उसकी तरफ देखकर थोडा-सा मुस्कराया और बाई आंख दबाकर बोला-“कहो सूअर के बच्चे, क्या हाल है?"

कहने के साथ ही इस बार उसने स्वयं फायर किया । गोली सीधी मोंगपा के हाथ में दबी रायफल से टकराईं । रायफल छिटककर दूर जा निरी । विकास अब भी उसके सामने, रायफल लिए खडा था । वह मोंगपा की तरफ़ देखकर गुर्राया----"बोल कमीने! पहुचा दूं खुदागंज?"

मोंगपा कांप गया । सामने खडा था-साक्षात् यमराज । उसने विकास के बिषय में सुना तो था परंतु लड़का इतना खतरनाक, दिलेर और दुस्साहसी होगा, यह तो उसकी कल्पना में भी नहीं था । मोंगपा के जिस्म में झुरझुरी-सी दौड गई परंतु तभी बिकास ने मुस्कराकर रायफल एक तरफ़ फेक दी और मोंगपा की तरफ देखकर बोला------"तुझे बताऊंगा सूअर के बच्चे कि किसकी कितनी आयु है?"

उसके रायफल फेंकते ही मोंगपा ने बेहद फुर्ती के साथ उस पर जम्प लगा बी, किंतु विकास अपने स्थान से हट गया, अत: मोंगपा फर्श का स्वाद चखने लगा ।।

जबकि विकास उसके पीछे खड़ा कह रहा था------"मैं तुझे मौका दे रहा हूं चीनी गीदड, अगर शक्ति है तो उठ ।"

उछलकर मोंगपा खडा हो गया किंतु अभी वह संभल भी न पाया था कि विकासं किसी जिन्न की भांति हवा में लहराया और एक जोरदार फ्तग्रइंग किक मोंगपा कीं छाती पर पड्री ।

मोंगपा लड़खड़ाया परंतु इधर विकास ने कुशल नट की भांति हबा ही कलाबाजी खाई और एक घूसा मोंगपा के जबड़े पर रसीद कर दिया ।

र्मोगपा और भी बुरी तरह लड़खड़ाया किंतु तभी उसके चेहरे पर लड़के के सिर की जबरदस्त टक्कर पडी, परिणामस्वरूप चीखता हुआ वह दूसरी तरफ पलट गया ।

इधर विकास सीधा फर्श पर जाकर गिरा ।

अचानक र्मोंगपा भी भयानक फुर्ती के साथ हवा में उछला ।

उसका इरादा बिकास को फ्ताइंग किक मारने का था परंतु जैसे ही वह लहराकर विकास के समीप आया विकास ने उसकी दोनों टांगे पकड़ ली और फिर तेजी के साथ सिर से ऊपर दो चक्कर देकर धड़ाम से फर्श पर दे मारा ।

मोगपा के कंठ से चीख निकल गई ।

परंतु मोंगपा भी कम नहीं था ।

काफी चोट लगने के बाद भी वह बेहद पुती के साथ उछल कर केवल खड़ा ही न हो गया बल्कि इस बार विकास पर जम्प लगाने के स्थान पर उसने एक फौलादी खूंटी की तरफ जम्प लगा दी थी ।

इससे पूर्व कि विकास कुछ कर पाता उसने मोंगपा के दाएं हाथ में एक अजीब-सा भयानक हथियार देखा ।

यह लगभग एक गज लंबी, मजबूत, मोटी और फौलादी जंजीर के एक सिरे पर लटकता हुआ एक फौलादी गोला था । अचानक अपने हाथ में दबे जंजीर के सिरे पर उभरे एक फौलादी बटन को मोगपा ने पुश कर दिया ।

परिणामस्वरूप नीचे लटके मोटे फौलादी गोले के चारों तरफ लगभग दस लंबे चमचमाते हुए चाकू बाहर निकल आए और साथ ही गोला दहकने लगा ।

धीरे-धीरे समूचा गोला दहककर लाल लोहे में बदलता जा रहा था । चाकू की नोंक भी दहकने लगी थी । कदाचित् इस गोले में हीटर सिस्टम था । उस गोले को अजीब अंदाज में संभाले मोगपा कुटिलता के साथ मुस्कराया ।

कमरे के लाल प्रकाश में यह दृश्य वेहद खूनी लग रहा था । विकास उसके हाथ में इस अजीब हथियार को देखकर निर्मीकत्ता के साथ मुस्कराया और सतर्क हो गया ।

र्मोंगपा खूनी ढंग से उसे लहराता हुआ आगे बढा बोला------"अब मैं तुम्हें नहीं छोडूंगा, कुत्ते?"

“अपनी चिंता कर गीदड़ की औलाद! " विकास गुर्राया-----" ऐसा न हो कि तू मौत मांगे और तुझे वह भी न मिले ।"

तभी भयानक ढंग से मोंगपा ने गोले का वार उस पर किया किंतु विकास ने न केवल वार बचा लिया बल्कि हवा में लहराकर उसने एक दुलत्ती मोंगपा की छाती पर मारी ।

मोंगपा लड़खड़ाया किन्तु तभी उसने फौलादी गोला बडी जोर से घूमाकर विकास की कमर पर मारा ।

इस बार विकास स्वयं को नहीं बचा सका और गोला उसकी पीठ में लगा ।

इस बार विकास के कंठ से चीख निकल गई । वास्तव में फौलादी गोले की मार बड़ी सख्त थी ।

गर्म दहकते हुए चाकू उसकी पीठ में धंसे तो पीठ का सारा गोश्त जैसे उबल पड़ा ।

विकास अभी संभल भी नहीँ पाया था कि मोगपा ने तेजी के साथ एक बार फिर खींचकर गोला मारा । इस बार विकास फिर चीख पड़ा । मोंगपा ने फिर तेजी के साथ खीचकर मारना चाहा परंतु इस बार उसका वार खाली गया क्योंकि विकास बडी पुती के साथ अपने स्थान से हट गया था । बार खाली गया ।

झोंक में मोगपा लड़खड़ा गया । इधर बिकास की उंगलियों में आलपिन आकर एक पल के लिए थिरका और अगले ही पल हवा में सनसना गया ।

उफू...दिल को दहला देने वाली चीख से कमरा दहल उठा ।

आलपिन किसी तीर की भांति मोंगपा की बाई आंख में गड़ा हुआ था । मोंगपा की आंख फूट गई थी । खून बह रहा था । फौलादी गोले वाला हथियार उसके हाथ से छूटकर गिर चुका था ।

वह पुरी तरह चीख रहा था ।

इधर विकास शैतान में बदल गया था ।

लड़के पर खून सवार हो बया ।

जब विकास पर खून सवार होता था तो बह जंगली भेडिया नजर आने लगता था ।

विकास की आंखें दहकने लगी थी । उसने फुर्ती के साथ-लपककर फौलादी गोला उठा लिया । मोंगपा के दोनों हाथ अपनी आंखों पर थे और वह बुरी तरह चीख रहा था ।

विकास अभी संभल भी नहीँ पाया था कि मोगपा ने तेजी के साथ एक बार फिर खींचकर गोला मारा । इस बार विकास फिर चीख पड़ा । मोंगपा ने फिर तेजी के साथ खीचकर मारना चाहा परंतु इस बार उसका वार खाली गया क्योंकि विकास बडी पुती के साथ अपने स्थान से हट गया था । बार खाली गया ।

झोंक में मोगपा लड़खड़ा गया । इधर बिकास की उंगलियों में आलपिन आकर एक पल के लिए थिरका और अगले ही पल हवा में सनसना गया ।

उफू...दिल को दहला देने वाली चीख से कमरा दहल उठा ।

आलपिन किसी तीर की भांति मोंगपा की बाई आंख में गड़ा हुआ था । मोंगपा की आंख फूट गई थी । खून बह रहा था । फौलादी गोले वाला हथियार उसके हाथ से छूटकर गिर चुका था ।

वह पुरी तरह चीख रहा था ।

इधर विकास शैतान में बदल गया था ।

लड़के पर खून सवार हो बया ।

जब विकास पर खून सवार होता था तो बह जंगली भेडिया नजर आने लगता था ।

विकास की आंखें दहकने लगी थी । उसने फुर्ती के साथ-लपककर फौलादी गोला उठा लिया । मोंगपा के दोनों हाथ अपनी आंखों पर थे और वह बुरी तरह चीख रहा था ।

तभी विकास ने फौलादी गोल तेजी के साथ घुमाकर मौगपा के सिर पर दे मारा ।

मोंगपा कंठ फाड़कर चिल्लाया ।

गर्म दहकते हुए लंबे चाकू उसके सिर में धंस गए । विकास ने फिर खीचा और इस बार फौलादी गोले का वार मोंगपा के पेट पर किया और वह तरह चीखा ।

पेट का मांस बाहर झांकने लगा । विकास ने अगला वार उसके चेहरे पर किया । हाथों को बेंधते हुए उसके चाकू चेहरे तक पहुच गए ।

उसके बाद. . . ।

विकास जैसे पागल हो गया था ।

मोंगपा चीखता रहा। विकास किसी पागल की भांति उसे बड़े निर्मम फौलादी गोले से मारता रहा । र्मोंगपा लहू-लुहान हो गया ।

सारा कमरा खून से चिपचिपा हो गया । मोंगपा के जिस्म के प्रत्येक कतेरे से खून बह रहा था । चेहरा क्षतविक्षत हो गया था । वह बुरी तरह से फर्श पर पड़ा चीख रहा था । एक आंख फूट गई। बिकास अभी तक उस पर पिला हुआ था ।

निरंतर दस मिनट मारने के पश्चात्. . . ।

विकास ने अंतिम बार फौलाद का वह गोला र्मोंगपा के जिस्म पर खींच मारा ।

मोंगपा फिर तिलमिला उठा । बिकास की सांस भी तेजी के साथ चल रही थी ।

अभी तक लडका बुरी तरह से खूनी नजर जा रहा था ।

अचानक उसके हाथ में ब्लेड आने लगा । ब्लेड को मोंगपा की एक आंख के सामने घुमाता हुआ विकास गुर्राया-“मैं तुझे मारूगा नहीं कुत्ते, तुझे जिंदा छोड़कर उस सूअर फूचिंग को चेतावनी दूंग कि यह मेरी तरफ से पहला वार है ।" कहने के साथ विकास का ब्लेड चला और एक मिनट पश्चात् मोंगपा के माथे पर उसने गोश्त काटकर 'विकास' लिख दिया । इस कार्य में उसने यह विशेष ध्यान रखा था कि उसके मस्तिष्क की कोई ऐसी नस न कट जाए जिससे वह मर जाए । चीखता-चीखता मोंगपा बेहोश होगया ।

विकास की आंखों में मानो कुछ ठंडक पडी ।

उसने ध्यान दिया तो पाया कि ऊपर हाल में भी फायरिंग अब लगभग समाप्त हो गई थी । उसने ऊपर देखा तो पाया कि वहीं उसका मददगार चीनी अधिकारी ऊपर खडा आश्चर्य के साथ उसे देख रहा था । कदाचित् वह विकास से वहुत प्रभावित हुआ था !

“अब यहा से जल्दी भागो लड़के वरना कोई खतरा... ।"

ऊपर खड़ा वह रहस्यमय चीनी अभी कुछ कहना ही चाहता था कि अचानक टॉर्चर रूम में रखा एक विशाल वायरलेस स्पार्क करने लगा ।

विकास उसकी बात बीच में ही छोड़कर सैट पर झपटा और उसे ऑन कर दिया ।

ऑन करते ही उसमे से स्वर उभरा-"हेलो . . . . . हेलो. . हैलो मोंगपा, मैं फूचिंग बोल रहा हू !"

एकाएक विकास के चेहरे पर फिर भयानक भाव उभर आए । वास्तव में वह आवाज मात्र से पहचान गया था कि दूसरी तरफ़ से फूचिंग बोल रहा है । वह अभी तक हैलो. . हेलो कर रहा था । विकस का खून खोल उठा, वह माउथपीस के करीब मुंह ले जाकर गुर्राया----------"यहाँ मोंगपा नहीं है हरामजादे, यह मैं बोल रहा है ।"

"क्या मतलब?” दूसरी तरफ से फूचिंग के चौंकने का स्वर…“कौंन हो तुम?”

“अपने काल को भी नहीं पहचानता, कुत्ते---------" विकास खौफ़नाक स्वर में बोला…"मैं विकास बोल रहा हू।”
 
"वि. . .का. . .स. . .!" दूसरी तरफ से बोलने वाले फूचिंग के मुख से विकास के नाम का एकाएक अक्षर टूट-टूटकर निकला । न जाने क्यों दूसरी तरफ़ से बोलने वाला फूचिंग वायरलेस पर इस प्रकार विकास को पाकर कांप गया था । उसे लग रहा था कि यह लड़का साक्षात् कालदूत है । वह स्वयं को संभालते बोला…"तुम. . .तुम वहां कैसे पहुंच गए?"

"अब मैं आजाद हो गया हु, गीदड़!" विकास गुर्राया-----"मुझे तो ऐसा लगता है कि मेरा नाम सुनते ही तुम्हारा पेशाब निकल गया है ।"

“इस बार मैं तुम्हें जिंदा नहीं छोडूंगा ।"

"अब अपनी चिंता करो, कमीने !" विकास गुर्राया-----"तुम्हारे इस अड्डे के जितने आदमी थे, सब लाशों के ढेर में बदल चुके है तुम्हारे सहयोगी मोंगपा को जिंदा छोड़ रहा हू ।"

"क्या मतलब ? ”

"कुछ देर बाद मतलब तुम्हें स्वयं ही पता लग जाएगा ।" बिकास खूनी स्वर मे गुर्राया---------"मैं तुम्हें चैलेंज करता हैं फूचिंग कि शीघ्र ही समूचे पीकिंग पर लाशों की वर्षा होगी, अगर तुम रोक सको रोक लेना !"

"सुनो लड़के !" दूसरी ओर से फूर्चिग गुर्राया---------“मेरा नाम फूचिंग !"

"तुम्हारे नाम में जान नहीं है डरपोक गीदड़ ।" विकास चीखा-----"ज़ब तुम इस अड्डे पर आआगे तो तुम्हें मालूम होगा कि विकास किस हस्ती का नाम है? चीनी कुत्ते, अब जो विनाश मैं तुम्हारे पीकिंग में फैलाने जा रहा हूं उससे तुम्हारी अत्या तक दहल उठेगी ।"

"मुझें लगता है तुम्हारे दिन करीब आ गए है ।"

"अब अपनी और अपने देश की सोचो, प्यारे मुर्गी चोर! " विकास ने कहा-------"मैं सेट आँफ कर रहा हूँ । अगली मुलाकात सनसनाती गोलियों के बीच होगी ।" कहने के साथ ही उसने वायरलेस सैट आँफ़ कर दिया। जैसे ही वह तेजी के साथ घूमा, अपने पीछे उसने रहस्यमय चीनी अधिकारी को पाया । एक पल के लिए विकास उसकी आंखों में देखता रहा और फिर बोला-" तुम कौन हो?"

“इस समय तो केवल इतना जान लो कि मैं तुम्हारा मददगार हू।” वह चीनी अधिकारी मुस्कराकर बोला…"पूरा परिचय अवसर आने पर दिया जाएगा। फिलहाल, यहाँ से निकलो क्योंकि तुमने फूचिंग को चैलेंज दिया है शीघ्र ही यहां की मुसीबत आने वाली है ।"

"यहाँ कोई विमान है?"

" हां क्यों ?"

“जो मैं पूछ रहा हूं उसका जवाब दो ।” बिकास गुर्रा उठा ।

"इस अड्डे की गुप्त और अंडरग्राउंड छत पर एक विशेष और विशाल विमान है जो मोगपा ने वक्त पर अपने भाग निकलने के लिए लगाया हुआ था ।"

"लेकिन बेचारा भाग नहीं सका ।" विकास मुस्कराया !

"लेकिन तुम विमान का करोगे क्या?"

"जो मैं कह रहा हू तुम वह करो ।" विकास सख्ती के साथ बोला----“अधिक बकवास सुनने का मैं आदी नहीं ।"

रहस्यमय मददगार चीनी चुप हो गया । वह तो पहले ही विकास से बहुत अधिक प्रभावित था परंतु जब वह विकास के साथ था तब से तो वह लडका उसके मस्त्तिष्क पर छा गया था । वह विकास की बात पर हल्ले से मुस्कराया और बोला ----"कहिए सरकार, क्या आदेश है?"

"जितने मृत व्यक्तियों को तुम पहुचा सको विमान में पहुचा दो ।" विकास बीला----"तब तक मैं एक दूसरे काम निबटता हूं ।" कहते हुए विकास ने जेब से रेशम की डोरी का टुकड़ा निकाल लिया । उसके बाद उसने मोंगपा के खून से लथपथ बेहोश जिस्म को नंगा करके उल्टा पंखे से लटका दिया और पंखा चला दिया । यह देखकर मददगार चीनी एक बार फिर उस खतरनाक लड़के को देखता रह गया ।

सारे टॉर्चर रूम में खून की बर्षा होने लगी थी । बिकास तेजी के साथ चीनी की तरफ घूमा और गुर्राया तुम अभी तक यहीं हो?"

“तुम्हारी निर्ममता देख रहा हू ।”

“इस बात को छोडो, मैं जो कह रहा हूँ वह करो ।" विकास बोला ।

उसके बाद वे दोनों टॉर्चर रूम के ऊपर हॉल में आ गए । सारा हॉल लाशों से पटा पड़ा था ।

बिकास के हाथ में इस समय एक तलवार थी लाशों को देखते ही एक बार फिर विकास की आंखें दहक उठी ।

बिजली की गति से उसके हाथ में दबी तलवार चली और एक ताश के पलक झपकते ही दो टुकडे हो गए । तलवार खून से सन गई । उस समय वह मददगार चीनी दहल उठा जब विकास ने एक आदमी की लाश के दो दुक्टो को 'वी' की शक्ल में रख दिया । इतनी निर्ममता देखकर उसमें कुछ बोलने का साहस नहीं हुआ ।

उसके बाद-विकास ने पांच सेनिक लाशों को 'बी' की शाल दे दी ।

शेष लाशों को वे दोनों विमान में लाद रहे थे ।

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

अगला दिन . . ।

न केवल पीकिंग शहर के लिए बल्कि समूचे चीन देश के लिए कहर का दिन ।

चीन देश का इतना बडा अपमान? इतनी शर्मनाक घटना ।

वह भयानक तबाही पीकिंग शहर से ही मचनी प्रारंभ हुई । चीन का बच्चा-बच्चा कांप उठा ।

लोग दहल गए ।

चीनी अधिकारी भयभीत हो गए ।

सेना को बुखार चढ़ गया ।

फूचिंग का चेहरा सफेद । काटो तो खून नहीं ।

प्रत्येक की जुबान पर केवल एक ही नाम था------विकास ।

भय और आतंक का प्रतीक!

चीन के लिए हव्वा ।

आज़ की सुबह... ।

सुबह मानो कहर था ।

सब लोगों ने, समूचे पीकिंग ने, पीकिंग में उपस्थित बच्चे बच्चे ने सूर्य की किरणों के साथ पीकिंग के ऊपर मंडराता हुआ एक विमान देखा था । उस समय साधारण जनता नहीं चौंकी थी ।

विमान तो वे लोग लगभग प्रतिदिन देखते थे किंतु उस विमान को आकाश में मंडराते हुए देखकर फूचिंग तथा चीन के कुछ विशेषाधिकारों बुरी तरह चौके थे ।

सबको पता था कि यह विमान वही है जो कि आज रात बिकास ने अड्डे से गायब कर दिया था ।

उस समय फूचिंग और उसके साथी उठे ।

विकास भयानक भूत बनकर उनके मस्तिष्क पर सवार हो गया था । फूचिंग ने तुरंत कार्यवाही की, एयर फोर्स हरकत में आई परंतु.............

परंतु तब तक तो वह विमान पूरे पीकिग पर भयानक आतंक फैला चुका था।

साधारण जनता ने अभी तक उस तरफ विशेष ध्यान नहीं दिया था किंतु अचानक उस विमान ने अपने गर्भ से एक मृत इंसानी जिस्म उगला । हवा मे लहराता हुआ वह जिस्म 'धड़ाम' से पीकिंग के एक बाजार में आ गिरा । गिरते ही वह मृत जिस्म खील खील होकर बिखर गया ।

खोपडी धड से अलग साबूत पडी थी । हजारों की भीड़ ने देखा कि लाश के जिस्म का प्रत्येक भाग अलग ।

हाथ अलग, पांव अलग, गोश्त के लोथड़े और हड्डियों का मेला । लाश एकदम नग्न थी । सबने देखा... ।

लाश के मस्तक पर. . . ।

विकास . . . ।

उफ्...खूंखार शेतान का नाम ।

अभी लोग इस लाश की चर्चा कर भी नहीं पाए थे, विमान के गर्भ से निकली एक अन्य चीनी सेनिक की ऐसी ही लाश किसी मकान के चौक में आकर गिरी।

कोई अन्य किसी मेदान में । कोई अन्य किसी की छत परा कोई अन्य पीकिंग ही सड़क पर ।

और फिर ।

प्रारंभ हुई, पीकिंग शहर पर लाशों की वर्षा ।

दनादन उस विमान से चीनियों ही लाशें गिराई जा रही थी । लोग अचानक अवाक्, बदहवास ।

भयभीत होकर लोग धरों में दुबक गए ।

पीकिंग बंद! कहीं कोई दुकान नहीं खुल रही थी । सड़को पर सन्नाटा ! समूचे पीकिंग पर होती लाशों की वर्षा!

चीनियों के पर हवाइयां उड रही थी ।

प्रत्येक व्यक्ति के दिमाग पर एक ही नाम छा गया था'----विकासा सर्वत्र एक हैं चर्चा थी-विकास. .. ।

विश्व-मर के पिछले इतिहास में सबसे अधिक भयानक और अजीब घटना । समूचे पीर्किग पर विकास छा गया था परंतु इस समय लड़का भयानक खतरे में धिरा हुआ था ।

विमान रहस्यमय चीनी मददगार चला रहा था । पीकिंग पर वह कई लाशों की वर्षा कर चुका था । अब वे भागना ही चाहते थे कि अचानक उन्होंने अपने चारों तरफ वायु में मंडराते मिराज देखे, देखते ही चीनी मददगार चीखा--------"विकास हम घिर गये हैं !"

" जहाज को तेजी के साथ बाई तरफ को निकालो ।" लड़का पूरी 'सिचुएशन' देखकर चीखा ।

इस समय विकास के चेहरे पर खतरनाक भाव थे ।

रहस्यमय चीनी ने तुरंत उसका अनुसरण किया ।

विकास तुरंत फुर्ती के साथ यू. कक्ष की तरफ झपटा था ।

उसका ललाट लाल था ।

पीकिंग पर लाशों की वर्षा करना केवल उसकी सनक थी ।

वह अपने उद्देश्य में सफ़ल हो गया । मिराजों की संख्या तीन थी और इन्होंने विमान की गति आश्चर्यजनक रूप से तीव्र कर दी ।

मिराजों की संख्या तीन थी और इन्होंने विमान की गति आश्चर्यजनक रूप से तीव्र कर दी ।

विकास का विमान तेजी के साथ दुम दबाए भागा जा रहा था और तीनों मिराज उसके पीछे थे ।

पंद्रह मिनट पश्चात्. . . । चारों विमान पीकिंग शहर को छोडकर घुमावदार पहाडियों के ऊपर मंडरा रहे थे । विकास पूरी तरह चौकन्ना हुआ बैठा था ।

तीनों मिराज उनके काफी समीप आ गए थे । लड़के का चेहरा कठोर हो गया, जबड़े की हड्डियों में उभार जाया और उसने एक मिराज पर फायर कर दिया ।

लड़के का निशाना... । उसका निशाना जो गोली से गोली टकरा देता है ।

चूकता कैसे? आकाश में एक चिंगारी भड़की...जैसे बिजली कौधी हो ।

अगले ही पल कानफाड़ विस्फोट के साथ विमान के चिथड़े उड़ गए । अभी विकास भत्ती-भाति उस विमान का विनाश देख भी नहीं पाया था तभी...उनके विमान को एक तीव्र झटका लगा ।

विमान लहरा उठा ।

यह परिणाम दाई तरफ लहराते विमान से निकली गोली का था, सनसनाती हुई गोली उनके विमान के इंजन से टकराई थी । टंकी को फाड़ती हुई पेट्रोल से जा मिली ।

आग और पेट्रोल ।
 
भयंकर आग लपलपा उठी । खतरनाक रूप से आग फैली । समूचे विमान पर आग जैसे अपना कब्जा करने लगी । विमान से निकली गोली ने विमान का पिछला भाग तोड दिया ।

एक तेज झटका लगा । विमान लहराया.. किसी पर-कटे पक्षी की भाति लड़खड़ाता हुआ विमान एक विशाल पहाडी के पीछे जा गिरा ।

पहाडी के पीछे ही दस मिनट पश्चात्. . . ।

पहाडी के पीछे से लपलपाती भयंकर आग देखी गई । गगन को स्पर्श करने का प्रयास करती आग की लपटें, धधकते शोले!

चीनी अधिकारी समझे कि भयंकर नन्हा शैतान के जबड़े में समा गया है किन्तु...आज के अखबारों में नए समाचार. . . ।

पूरे पीकिंग में हाहाकार मच गया । जो लोग पढ़ना नहीं चाहते थे उन्होंने भी आज का अखवार खरीदा ।

संपूर्ण अखबार विकास के नाम से पुता पड़ा था ।

हर कालम पर विकास!

प्रत्येक जुबान पर विकास !!

लाशों की वर्षा से ग्रस्त पीकिंग पहले ही बुरी तरह कांप रहा था, ऊपर तुर्रा आज के अखबारों ने तो जैसे तहलका मचा दिया ।

एक-एक घटना विवरण सहित मिली थी ।

अखबारों में छपे फोटों.. उल्टी लटकी नंगी लाशों के फोटो ।

माथो पर लिखा हुआ 'बिकास' फोटो में भी स्पष्ट चमक रहा था । चीन के अड्डे की भयानक तबाही का विवरणा लिखा था कि जब जासूस फूचिंग एक पेट्रोल गाडी लेकर अड्डे से लोटे तो. . तो. .अपने निवास-स्थान पर उन्होंने देखा कि उस गाडी के पिछले भाग से एक नग्न लाश बंधी हुई थी----पूरे क्रिया-कर्म के साथ ।

माथे पर लिखा हुआ शैतान का नाम ।

लाश देखते ही फूचिंग का दिमाग खराब हो गया । जिधर दुष्टि जाती उधर लाश नजर आती, साथ ही नजर आता शैतान द्वारा किया गया क्रिया-कर्म । बिमान क्रैश की दुर्घटना के बाद अखबारों के विशेष अंक निकाले गए ।

उनमें यह भी लिखा था कि जहां विकास का विमान गिरा, बाद में वहां का निरीक्षण किया गया किन्तु केवल विमान के टुकड़े मिले । जले हुए क्षतविक्षत दुकड़े । कोई लाश वहां नही मिली।

तो क्या शेतान बच गया?

पीकिंग का बच्चा-बच्चा कांप उठा ।

इतनी भयानक दुर्घटना के बाद भी जो लड़का बच जाए वह लड़का नहीं हो सकता! निसन्देह वह कोई भयानक भूत था ।

हर हृदय विकास के नाम से कांपने लगा । प्रत्येक दिल में विकास का भय बैठ गया ।

बच्चे-बच्चे के मन को 'बिकास' ने जकड़ लिया । हर चीनी को ऐसा लगने लगा कि जैसे अब आया विकास । उनकी नजरों में विकास खौफ़नाक जल्लाद था ।

और तब… । जबकि फूचिंग के सामने उसके सहयोगी की लाश लाई गई! मोंगपा...!

उफ्-वेचारा अजीब वीभत्स में था ।

बदसूरती की चरम सीमा तक; बदसूस्ती ।

फूटी हुई आंख ।

माथे पर लिखा हुआ'-विकास । यही नाम फूचिंग के जहन में उतरता चला गया । मानो कोई जहर का घूट हो । दिल-ही-दिल में फूचिंग भी विकास से भयभीत हो गया किन्तु प्रत्यक्ष में वह अपनी इस कमजोरी को नहीं दर्शा सकता था । अपने सहयोगी का हाल देखते ही फूचिंग की नसों में तनाव आ गया । आंखे दहक उठी । चेहरा कठोर हो गया । अंदर-ही-अंदर उसने विकास को भयानक ढंग से मौत के बाट उतारने का प्रण किया ।

मोंगपा को अस्पताल भेज दिया गया ।

उसके बाद. . ।

चीन सरकार ने उस शेतान की कीमत पचास हजार रखी । यह घोषणा कर दी गई कि विकास को जिंदा या मुर्दा हालत में चीन सरकार के सामने पेश करने वाले इंसान को पचास हजार का इनाम दिया जाएगा ।

विकास पर रखे हुए इनाम ने चीनियों के हदय में उसका भय और भी अधिक बैठा विया । सारे पीकिंग में हाहाकार था ।

प्रत्येक की जुबान पर केवल एक ही नाम था । विकास . . बिकास . . बिकास . . . ।

सड़ाक . . .!

भयंकर कांटेदार हंटर, प्रोफेसर बनर्जी के नग्न जिस्म से सर्प की भांति लिपट गया ।

प्रोफेसर बनर्जी के कंठ से चीख निकल गई । हंटर उनके जिस्म के मांस को नोचता चला गया था ।

समूचा जिस्म इंटर की मार से भरा पड़ा था । इस समय बनर्जी एक पथरीली गुफा में छुपे चीनी सेनिक अड्डे के एक हाँल में थे ।

उनके जिस्म पर केवल एक अंडरवियर था । दाढी बढी हुई, बाल लंबे । वे वेहद कमजोर हो गए थे ।

जिस्म पर जगह-जगह हंटरों की मार के चिन्ह थे । हलक सूखा हुआ । होंठ शुष्क ।

पीड़ा से बिलबिलाते हुए भारत के महान वैज्ञानिक ।

उन्हें मोटी-मोटी जंजीरों में कैद कर लिया गया था । दोनों हाथ दो तरफ फैलाकर जकड़ लिए गए थे । पथरीली गुफा के हाल में धुंधला-सा पीला प्रकाश फैला हुआ था । चारों तरफ़ चीनी सेनिक खडे थे और प्रोफेसर बनर्जी के ठीक सामने एक भयानक, काला और शक्तिशाली हब्शी खड़ा था । उसकी आंखें भट्टी में अंगारों की भांति दहक रही थी । दाएं हाथ ने वही कांटेदार हंटर लहरा रहा था । उसकी चीनी छाती, मांसल भुजाएं, विशाल जिस्म उसकी शक्ति का जीता-जागता प्रमाण थी । मोटे, लटके हुए भयानक और भद्दे होंठ । नाक का अग्रिम भाग मानो किसी सीधी गली का मोड़ । कान बड़े-बड़े । घुटा हुआ सफाचट्ट सिर ।

"अब भी पढ़ दे वैज्ञानिक कुत्ते ।" वह किसी शेर की भाति दहाड़ उठा---------“वरना तेरे जिस्म की बोटी-बोटी नोचकर मैं खुद चबा जाऊंगा ।" कहते हुए उसने अपने बाएं हाथ में फंसा हुआ कागज का एक टुकडा उनकी आंखो के सामने नचा दिया । इस कागज पर वही गुप्तलिपि अंकित थी जो उन पांच महत्वपूर्ण अंडों पर लिखी गई थी । प्रोफेसर बनर्जी ने एक नजर उस कागज की तरफ देखा और फिर उनके सूखे होंठो पर क्षीण-सी कुछ विजयात्मक और गर्वीली मुस्कान दौड गई और वे दुढ़ स्वर में साहस करके बोले------"इस लिपि को तीन इंसानों के अतिरिक्त कोई नहीं पढ़ सकता, चीनी कुत्ते!" उनके शक्तिहीन जिस्म में जैसे अचानक अजीब-सा तनाव आ गया----------“ये बात कान खोलकर सुन तो कि तुम्हारी कोई भी यातना हमारे मुंह से कुछ भी नहीं उगलवा सकती ।"

"मेरा नाम ग्रीन हर्बिश है, कुत्ते!" हब्शी भयंकर ढंग से गुर्रा उठा…“मेरे सामने पत्थर भी बोलने लगते है ! चीन में विशेष रूप से मुझें केवल तुम जैसे जिद्दी कुत्तों की जुबान खुलवाने के लिए रखा गया है । आज तक मेरे सामने कोई ठहर नहीं सका !"

"मेरा नाम ग्रीन हर्बिश है, कुत्ते!" हब्शी भयंकर ढंग से गुर्रा उठा…“मेरे सामने पत्थर भी बोलने लगते है ! चीन में विशेष रूप से मुझें केवल तुम जैसे जिद्दी कुत्तों की जुबान खुलवाने के लिए रखा गया है । आज तक मेरे सामने कोई ठहर नहीं सका !" कहते हुए ग्रीन हर्विश नामक हब्शी का दायां हाथ वेग से चला और एक बार फिर हंटर बनर्जी की खाल उधेढ़ता चला गया । बनर्जी के कंठ से फिर चीख निकल गई ।

" किसी हिन्दुस्तानी से तुम अभी तक नहीं टकराए होंगे ।” चीखते हुए बनर्जी बोले ।

“तुम्हें पता लग जाएगा हिन्दुस्तानी कुत्ते कि ग्रीन हर्विश किस आफ़त का नाम है?

कहने के बाद उसने फिर एक जोरदार हंटर मारा । उसके बाद वह तेजी के साथ उनके जिस्म पर हंटर बरसाने लगा । प्रोफेसर के जिस्म की खाल उधेड़ने लगी।

प्रोफेसर बनर्जी को भारत से अपहरण करके पीर्किग लाया गया । उन्हें लाकर खूब खातिर की गई । बड़े-बड़े सब्जबाग दिखाए गए और उनके ऐवज़ में केवल एक सेवा मांगी गई, वह यह है कि वे खास गुपालिपि का रहस्य बता दे किंतु बनर्जी चक्कर में नहीं आए । उसके बाद उसे भूखा रखा गया और अब निरंतर यातनाएं दी जा रही थी र्कितु उनका भी दृढ निश्चय था कि चाहे जान चली जाए पर ईमान नहीं बेचेंगे । अपनी जिद के कारण उन्हें भयानक यातनाएं सहनी पड़ रही थी ।

“बोल वे कुत्ते, वरना यूं बे मौत मर जाएगा ।” ग्रीन हर्बिश गर्जा ।

"किसी कीमत पर नहीं ।"

उसके पश्चात... ।

ग्रीन यश नामक उस हब्शी को एकदम भयानक क्रोध आया । वह खूनी भेडिए में बदल गया । हंटर छोड़कर वह खौफनाक ढंग से वायु में उछला और उसके दोनों जूतों की भरपूर मार बनर्जी के कमजोर सीने पर पडी । बनर्जी के कंठ से बेहद भयानक चीख निकली । उनके सीने में अनगिनत गहरे छेद हो गए थे । उनमें से तेजी से खून निकलने लगा । यह परिणाम ग्रीन के जूतों के तलों में लगी लंबी नोकीली कीलों का था । कीलों की लंबाई निसंदेह दो इंच रही होगी और एक-एक इंच गहो धाव तो बनर्जी के सीने में ही बन गए थे । वे चीख रहे थे !

इसी तरह की भिन्न-भिन्न यातनाओं से उन्हें गुजरना पड़ा ।

अन्त में उनका संमूर्ण जिस्म उधड़ गया ।

चीखने की शक्ति भी उनमें मैं नहीं रही थी ।

किसी अंग को स्वेच्छा से हिलाना तो जैसे असंभव हो गया । जंजीरों से खोलकर उन्हें फर्श पर डाल दिया गया !

लगभग बीस पहाडी चूहे उनके उपर छोड दिए गए जो उनका मास कुतरकर खाने लगे ।

बनर्जी की हालत बडी अजीब हो गई ।
 
"अब बोल दे, !" ग्रीन हर्विश गुर्राया ।

उसे लगा जेसे अब बनर्जी टूटते जा रहे हैं । भला कोई किस सीमा तक सहे !

आग की लपटों में लिपटा हुआ विमान घायल पक्षी की भांति जिस पहाडी के पीछे विलुप्त हुआ था वह पहाडी वहुत ऊंची थी ।

इसलिए विकास और रहस्यमय चीनी मददगार को संभलकर कुछ करने का अवसर मिल गया और दोनों चीनी मिराज भी कुछ न देख सके ।

इधर विकास के हाथ एक पैराशूट लग गया, जिसे पल-भर में कमर से बांधकर उसने विमान से बाहर जम्प लगा दी और उधर चीनी मददगार ने सीट के आटोमेटिक पैराशूट के जरिए विमान छोड़ दिया ।

दोनों के जिस्म कुछ दूर तक तेजी से गिरते चले गए र्कितु कुछ ही देर बाद संभल गए और पैराशूट खुल जाने पर वे वायु में तैरने लगे ।

यह सब कुछ उस पहाडी की ओट में हो रहा था । कदाचित् इसीलिए कोई देख न सका कि पीकिंग पर लाशों की वर्षा करने वाला नन्हा शैतान क्रैश विमान की दुर्घटना में कैसे बचा?

इधर जलता हुआ विमान पहाडी धरती से जा टकराया और एक कर्णभेदी विस्फोट के साथ पहाडी के ऊपर तक धिसटता चला गया । धधकते शोले इस प्रकार उछले मानो कोई भयंकर ज्वालामुखी फ़टा हो, इस समय वे धरती से अधिक ऊंचाई पर नहीं थे । इसीलिए वे शीघ्र ही पहाडियों में उत्तर गए । उतरते ही पहाडियों की छांव में छुप गए ।

तभी तो ऊपर मंडराते विमान उन्हें नहीं देख सके ।

उसके पश्चात्. . . ।

उन्होंने तेजी से पहाडियों में ही पैराशूट लपेटे और फिर तेजी के साथ पहाडियों में एक ही तरफ़ को बढ़ गए । इस समय चीनी उसे कहीं ले जा रहा था ।

विकास को तो इन पहाडियों में लेशमात्र भी यह पता नहीं था कि ये रास्ते कहाँ जाते हैं, वह कहाँ जा रहा है । वह तो तेजी के साथ उसी के साथ बढ़ रहा था ।

" अब तुम कहां जा रहे हो?"

"मेरा अड्डा यहाँ से पांच मील दुर दक्षिणी पहाडियों में है ।" चीनी बोला ।

"अड्डा . . !" एक पल के लिए चकराया विकास-“तुमने यह तो बताया ही नहीं कि कौन हो और मेरी सहायता क्यों कर रहे हो?"

"मेरा नाम जोबांचू है ।"

“जोबांबू . . " आश्चर्य के साथ विकास ने दोहराया-----"कौन जोंबाचू. . ? इस नाम के किसी भी आदमी को मैं नहीं जानता ।"

"तुम मुझे नहीं जानते पर मैं तुम्हें अच्छी तरह जानता हू वल्कि तुमसे वहुत प्रभावित भी हूं । मैंने बहुत पहले से तुम्हारा नाम सुन रखा है और सोचा करता था कि विकास नाम का वह लड़का कैसे होगा जो इतनी कम आयु होने पर इतना भयानक है । दिल-ही-दिल में मैं तुम्हें प्यार करने लगा और कल जब अवसर मिला तो मैं तुम्हारी सहायता करके अपने गुरु की सेवा करने लगा !"

“क्या मतलब.....?" विकास बुरी तरह चोंका----""गुरु...!"

"जी हां , मैं अलफांसे का शिष्य हू ।"

“क्राइमर अंकल.. ।" विकास बोला ।

“तुम उनके सबसे प्रिय शिष्य हो, वे तुम्हें छुड़ाने का प्रयास कर रहे है । भारतीय जासूस विजय के साथ वे तुम्हारे धोखे में नकली विकास को ले गए और जब मुझे पता चला कि असली विकास भाग रहा है तो मैं भी उन्हीं सैनिकों में मिल गया था जो तुम्हारे पीछे भाग रहे थे और तुम्हारी सहायता करके मैं समझता है मैंने अपने गुरु जलफांसे की थोड्री-बहुत सेवा तो की ही है ।"

"तो तुम भी क्राइमर अंक्स के शिष्य हो ।"

“निःसंदेह ।"

"तुम चीनी सेनिक के भेष में क्या कर रहे थे !"

" वास्तविकता ये है कि मैं चीन का एक स्मलगर हू । सैनिकों ने मेरा बहुत अधिक कीमती माल और एक अड्डा पकड़ लिया है । यू सेना में मैं अपने कुछ आदमी रखता हू परंतु लिम्बाना को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ सकता क्योंकि यह मेरा दायां हाथ है । उसी की खोज के लिए मुझे चीनी अधिकारी का मेकअप करना पड़ा और लिम्बाना के स्थान पर तुम टकरा गए ।"

उसके बाद वे कुछ देर तक इसी प्रकार की बाते करते रहे । विकास के पूछने पर उसने बताया--- अड्डे पर पहुंचते-पहुंचते रात हो जाएगी, क्योंकि रास्ता दुर्गम था ।

शीघ्र ही वे उस स्थान से काफी दूर हो गए जहाँ उनका विमान क्रैश हुआ था ।

सारे दिन वे भूखे-प्यासे पहाडियों में भटकते रहे । परंतु जोबांचू जैसे इन पहाडियों के एक-एक मार्ग का पता था । वह बिनां लेशमात्र भी विचलित हुए रात के दस बजे तक अड्डे पर पहुँच ही गया ।

विकास को साथ लेकर उसने गुफा मे प्रवेश किथा ।कुछ इंसानों ने उन्हे रोकने का असफल प्रयासं भी किया परंतु जब जोबांचू अपने विशेष कोड बोलता तो एक जोरदार सेल्यूट कें साथ रास्ता दे दिया जाता ।

विकास जान गया कि जोबाँचू काफी बडा स्मगलर है ।

इस समय वे एक गुफा में वढ़ रहे थे । गुफा की दोनों दीवारों पर स्थान-स्थान पर मशालें रखी जल रही थी जिनके प्रकाश मे गुफा कुछ अजीम और रहस्यमय लग रही थी ।

जोबांचू विकास को अपने विशेष कमरे में ले गया । वहाँ मेज पर रखा एक लेम्प जल रहा था ।

वे दोनों एकाएक कुर्सी पर बैठ गए । विकास के मना करते-करते भी जोबांचू ने उसकी खूब खातिर की ।

तब विकास बोला------"क्या तुम बता सकते हो कि अब क्राइमर अंकल कहां होगे?"

“अब तो उनका कुछ पता नहीं ।" जोबांचू बोला ।

“क्या तुम पता लगा सकते हो कि हिन्दुस्तान से चुराए गए पांच अंडे और एक प्रोफेसर जिनका नाम बनर्जी है, कहां रखे गए होंगे?"

“यह पता लगाना तो बेहद कठिन है ।" जोबांचू बोला------"ये तो गंभीर सैनिक सीक्रेट है, केवल कुछ ही विशेष चीनी अधिकारी इस विषय में जानते होंगे !"

उसके बाद विकास जोबांचू से इसी प्रकार की जानकारियां लेता रहा । अंत में जोबांचू ने विकास को आराम करने के लिए कहा और कुछ देर बाद दोनों फर्श पर पड़े सो रहे थे ।

लगभग एक बजे अचानक ही जोबांचू की आंख खुली तो खुली ही रह गई ।

उसकी आंखें आश्चर्य के साथ फैलती जा रही थी ।

विकास अपने स्थान से गायब था ।

विकास भूत बनकर जोबांचू के दिमाग से लिपट गया । उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि यह शैतान लडका कहाँ गया और क्या करेगा?

न जाने क्यो विकास के विषय में सोचता हुआ जोबांचू कांप उठा ।

उसने बड़े--वड़े भयानक जासूस और अपराधी देखे थे किंतु इस सुन्दर जैसा कोई नहीं था । वह यह सोच रहा था कि अब उसे क्या करना चाहिए । वह कैसे जाने कि नन्हा, सुंदर परंतु खतरनाक शेतान कहां गया?
 
उसका नाम चाऊ विंग था ।

गुट्टा-सा, गोल-मटोल मजबूत चीनी ।

चीनी सेना में उसे कर्नल जैसा सम्मानित पद प्राप्त था । अय्याश किस्म का चाऊ विंग हमेशा किसी नारी जिस्म की तमन्ना में डूबा रहता था ।

उस रात को वह रात नहीं मानता था जिसमें उसने जी भरके पी न हो और किसी नए नारी जिस्म का आनंद न भोगा हो । लगभग उसकी प्रत्येक रात रंगीन होती थी ।

आज की रात… ।

रात के ढाई बजे थे परंतु न तो उसे इस बात का ज्ञान था और न ही उसके समीप बिस्तर पर पडी उस नवयौवना को इस बात की चिंता थी । उन दोनों के जिस्म तो जवानी की आग में जल रहे थे । धीरे--धीरे दोनों एक-दूसरे के वस्त्र उतारने लगे !!!!

एक स्थिति ऐसी आई कि दोनों निर्वस्त्र हो गए । दोनों के नग्न जिस्म एक-दुसरे की बांहों में समा गए । सांस तेजी के साथ चलने लगी । दोनों की आंखें मुंदी हुई थी। चाऊ बिग नवयौवना के जिस्म के ऊपर आना चाहता था कि कोई सख्त चीज़ उसकी पसलियों से आ सटी ।

घृणित वासना में डूबा चाऊ बिंग ।

पहली बार तो वह पहचाना ही नहीं कि सख्त वस्तु क्या है? उस तरफ से पूर्णतया लापरवाह, अपने नीचे दबी-दबी, आनंदित हुई नवयौवना के अधरों का चुंबन लेने के लिए उसने अपने भद्दे होंठ उस तरफ बढा दिए परंतु अभी रास्ते में ही थे कि पसलियों में सख्त वस्तु का दवाब बढ़ गया र्कितु चाऊ विंग तो इस समय दो बोतल की पिनक में था । उसे लगा कि कोई मच्छर है जो उसकी पसलियों पर अता बैठा है । उसे हटाने का उसने प्रयास किया और साथ है भिनभिनाया---"अवे हट मच्छर ।"

परंतु मच्छर भला कहां हटता था ?

इधर नवयोवना ने अपनी गोरी-गोरी बाहों में चाऊ बिंग को जोर से भीच लिया और बोली--------"आओं न, चाऊ डालिंग ! " उधर पसलियों पर पड़ने वाली वस्तु का दबाव इतना बढ गया कि चाऊ बिग जान गया कि मच्छर नहीं किसी रिवॉल्वर की सख्त नाल है ।

यह आभास पाते हैं चाऊ के नशे में तैरते दिमाग को एक तेज झटका लगा और उसने उछलकर खडे हो जाना चाहा तो नीचे से नवयौवना ने अपने बंधन को और अधिक सख्त करते हुए शिकायत-भरे लहजे में कहा----------"क्या करते हो चाऊ डार्लिग, आओं न !"

बेचारा चाऊ डार्लिग!

अजीब परिस्थति में फंस गया ।

एक तरफ़ बांहों का दायरा था तो दूसरी तरफ मौत का साया ।

नवयौवना उसी प्रकार आंखें बंद किए हुए थी । एक पल के लिए उसकी बांहों में जकडा चाऊ विंग कसमसाया किंतु जब उसने नहीं छोड़ा तो तीव्र झटके के साथ उसने स्वयं को झुड़ाया और नवयौवना के उस नग्न जिस्म पर, जो कुछ पल पूर्व उसे अच्छा लग रहा था, एक जोरदार लात मारकर गुर्राया-" हट ससुरी ।"

चौंककर नवयौवना ने आंखें खोल दीं । आंख खुलते ही उसके सिर से वासनां का गंदा मूत हिरन की भांति चौकड्रियां लगाता हुआ भाग गया । उसने देखा कि चाऊ विंग कांपने में सूखे पत्ते को भी मात कर रहा था । दोनों की दृष्टि एक लड़के पर जमी हुई थी । वह लडका जितना सुंदर था उसके हाथ में उतनी ही खतरनाक चीज थी-------रिवॉत्वर लड़के का रिवॉल्वर चाऊ विंग की छाती से इश्क लडा रहा था । चाऊ विंग के कंठ में सूखा पड़ गया । समूचा चेहरा पसीने से तर था और नशा

सिर पर पैर रखकर हबा के साथ भाग चुका था ।

" तुम कौन हो?" साहस करके चाऊ मिमिया ही उठा ।

" विकास . . . ।"

" वि... का.... .स. ..!" एक साथ दोनों के मुंह से निकला, दोनों की अंतरात्माएं कांप उठी ।

जिस्म में एक भयानक झुरझुरी दौड गई । ऐसा लगता था जैसे कमरे में कोई विस्फोट हुआ हो । दोनों अवाक्-से विकास की और देखते हुए कांप रहे थे । दोनों के नग्न जिस्म कांप उठे। उन्हें विश्वास नहीं आया कि इतना सुन्दर और भोला-सा नजर आने वाला यह लडका विकास है, जिसके नाम से ही खूनी भेड्रिए भी थर्रा उठते हैं ।

"क्यों बेटा चाऊ डार्लिग?" विकास रिवॉल्वर हिलाता हुआ बोला…“क्या हो रहा था? "

बेचारा चाऊ डालिंग…! काटो तो खून नहीं !
 
Back
Top