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फूचिंग बिजली की गति से घूमा । देखा तो अवाक् रह गया…अलफांसे अब भी भयानक ढंग से हंस रहा था । उसका समूचा चेहरा लाल हो गया था । संध्या अवाक्-सी उन दोनों को देख रहीं थी । न जाने क्यों अलफांसे के इस सर्द अट्टहास पर फूचिंग कांप उठा ।
हालांकि इस समय स्वयं उसका चेहरा भी किसी भट्ठी की भांति तप रहा था ।
उसके हाथ में रिवॉल्वर था ।
एक पल के लिए फूचिंग जैसे व्यक्ति का हाथ भी कांप उठा परंतु अगले ही पल जैसे वह पागल हो गया ।
उसने तेजी से तीन फायर अलफांसे पर किए ।
लेकिन संगआर्ट का माहिर अलफांसे अब भी उसके सामने खड़ा किसी जिन की भाति कहकहे लगा रहा था ।
फूचिंग अवाक-सा उसे देख रहा था ।
संध्या भी हैरान थी ।
कुछ पलों तक यही स्थिति रही ।
फिर अलफांसे गुर्राया----"अपने जाल में खुद ही फंस गए, फूचिंग बेटे!" यह वाक्य अलफासे ने वहीँ आवाज़ बनाकर कहा था जो वह अज्ञात मददगार के रूप में फूचिंग को फोन करते समय करता था ।
“तुम.. .!" फूचिंग चौंककर दो कदम पीछे हट गया ।
"यस, फूचिंग बेटे, ये मैं हूं ।” अलफांसे गुर्राया ।
"तुम. .?" फूचिंग की समझ में नहीं आ रहा था कि वह साजिश क्या है? उसे कैसे फंसा लिया गया?
वह चकराकर रह गया ।
"मेरा तो बहुत बडा मतलब है, बेटे!" अलफांसे गुर्राया------"जिस विकास के खून के तुम इतने प्यासे हो कि सामने देखकर अपने आपको संभाल नहीं सके और तुरंत गोली से उड़ा दिया, मैं उसी विकास का गुरु हू बेटे, वही विकास मुझे जान से प्यारा है, तब भी पूछते हो कि मेरा क्या मतलब है?”
चाहते हुए भी फूचिंग कुछ नहीं बोल सका । उसकी जुबान जैसे अकड़कर रह गई ।
लेकिन अलफांसे अब भी गुर्रा रहा था-----------"विकास वह रसगुल्ला नहीं चीनी कुत्ते, जिसे तुम यूं ही हजम कर जाओं ।" अलफांसे का स्वर भयानक होता जा रहा था--------------“बिकास यह शेतान है जो तुम जैसे सैकडों जासूसों को पेड़ पर लटका देता है । उस लड़के को हमने ऐसे सोना नहीं सिखाया कि मौत उसके करीब आ जाए और वह सोता ही रहे ।" अलफांसे का लहजा भयानकता की चरम भीमा तक पहुच गया था-----“वैसे तो वह इतना प्रभावशाली है कि तुम जैसे कुते उससे कांपते है लेकिन अगर उस पर कोई हावी भी हुआ तो अलफांसे उसे फाड़कर रख देगा। उसकी बैक में हमेशा अलफांसे रहता है, फूचिंग बेटे! भूलकर भी उस लड़के से ना टकराना वरना या तो वह ही तुम्हें नहीं छोड़ेगा और अगर तुम उसे किसी प्रकार की हानि पहुंचने में सफल हो भी गए तो समझ लेना कि मैं दुनिया के तख्ते से चीनी जाति को समाप्त कर दूंगा ।" अलफांसे किसी सिंह की भांति गरज रहा था ।
अंतर्राष्टीय शातिर का यह अनोखा और भयानक रूप देखकर फूचिंग कांप उठा ।
अलफांसे फिर बोला----" तुम अपने आपको बहुत जालसाज समझते थे, फूचिंग बेटे! लेकिन खुद ही अपनी चालों में फंस गए ।" बोलते हुए अलफांसे का क्रोध जैसे कुछ कम होता जा रहा था---------"तुम्हें अज्ञात बदमाश के रूप में फोन मैंने ही किया था । वास्तविकता यह थी कि यह योजना विजय ने बनाई थी महज इसलिए कि आप विकास का कार्य कुछ हल्का कर सके । जब तक उस पर अलफांसे और विजय जैसे गुरुओं का हाथ है तब तक तुम जैसा कोई भी कुत्ता उसकी तरफ आँख भरके नहीँ देख सकता, विजय ने उसे बचाने के लिए अपने आपको फंसा लिया । अगर वक्तं पडा तो विकास को बचाने के लिए मैं अपना सिर कटा सकता हू ।"
“लेकिन इस सबसे लाभ?” फूचिंग स्वयं पर संयम पा चुका था ।
"लाभ भी पता लग जाएगा बेटे, पहले त्याग देखो ।” वह बोला------“बिजय ने खुद ही स्कीम बनाई थी कि वह सनकी बूढे के मेकअप में डीलारा के मेज नंबर तेरह पर बैठेगा और मैं तुम्हे विजय का एक अज्ञात दुश्मन बनकर यह जानकारी दे दूं। जैसा कि स्वाभाविक था तुमने तुरंत जाकर विजय को पकड़ लिया । योजनानुसार मैंने तुम्हें फिर इस प्रकार फोन किया तथा सही पता बताया और यह भी बता दिया कि तुम्हें यहां अकेले जाना चाहिए । हम जानते थे कि तुममें इतनी बुद्धि है कि तुम विजय के मेकअप में यहां पहुचोगे । वैसा ही हुआ । जिस विकास को देखकर तुम इतने भडक गए कि स्वयं को संभाल नहीं पाए, यह विकास नहीं बल्कि तुम्हारा ही तैयार किया गया एजेंट डबलक्रास है ।”
अवाक् फूचिंग अलफांसे को देखता रह गया ।
उसे अपनी बुद्धि पर क्रोध आ रहा था । किस सरलता से वह इन खतरनाक लोगों के जाल में फंस गया था ।
मन-ही-मन वह उनकी इस योजना की प्रशंसा कर उठा । वह किस प्रकार खुशी-खुशी ही उन लोगों के बीच फंस गया था ।
“लेकिन विजय इस समय चीन की कैद में है ।" फूचिंग के लहजे में धमकी का पुट था ।
"इसकी तुम चिंता मत करो, फूचिंग बेटे!'" अलफांसे बोला…“अभी तो कैद ही में जाना पड़ा है, विजय के जिस्म का एकाएक कतरा बिकास का है । विकास के लिए विजय अपनी जान भी दे सकता है, लेकिन वह इतना बेवकूफ भी नहीं है कि बैसे ही तुम्हारी कैद में जा फंसे । निश्चय ही उसने कोई प्रबंध किया होगा और अगर वास्तव में यह फंस गया होगा तो अभी तुम भी हमारी कैद में हो । अगर विजय के लिए चीन सरकार तुम्हारी भी बली देने लगे तो अभी अलफांसे मरा नहीं है । विजय को आजाद कराने के लिए मैं खून की नदियां बहा दूंगा ।"
"लेकिन इस प्रकार आप लोग विकास की क्या सहायता कर सकेंगे?" फूचिंग बोला------------एक मेरे न होने से क्या होना वहां पर अन्य सेनिक-पहरे तो मजबूत होंगे !"
"तुम तो वहां वहुत कुछ कर सकते हो ।"
कै' समझा नहीं ।"
"अब समझ जाओगे ।" कहते हुए अलफांसे ने अपनी जेब से फूचिंग के चेहरे का आटोमेटिक फेशमास्क निकलकर दिखाया तो फूचिंग की खोपडी घूम गई कि अब अलफांसे से फूचिंग बनकर बहा जा मिलेगा सारा मामला गडबड कर देगा। फूचिंग को कुछ नहीं सुझा तो... ।
एकाएक उसके जिस्म में बिजली दौड़ गई ।
भयानक ढंग से उसने अलफांसे पर जम्प लगाई किंतु अलफांसे धीमे से अपने
स्थान से हट गया, लेकिन उसी पल फूचिंग ने भी सिद्द कर दिया कि उसे भी चिनी विजय की उपाधि यूँ ही नहीं मिली है । इधर अलफांसे धीरे से हटा , उधर गिरता-गिरता भी फूर्चिग एक घूसा अलफांसे के ज़बड़े पर जमा गया।
अलफांसे का जबड़ा कांप उठा ।
हालांकि इस समय स्वयं उसका चेहरा भी किसी भट्ठी की भांति तप रहा था ।
उसके हाथ में रिवॉल्वर था ।
एक पल के लिए फूचिंग जैसे व्यक्ति का हाथ भी कांप उठा परंतु अगले ही पल जैसे वह पागल हो गया ।
उसने तेजी से तीन फायर अलफांसे पर किए ।
लेकिन संगआर्ट का माहिर अलफांसे अब भी उसके सामने खड़ा किसी जिन की भाति कहकहे लगा रहा था ।
फूचिंग अवाक-सा उसे देख रहा था ।
संध्या भी हैरान थी ।
कुछ पलों तक यही स्थिति रही ।
फिर अलफांसे गुर्राया----"अपने जाल में खुद ही फंस गए, फूचिंग बेटे!" यह वाक्य अलफासे ने वहीँ आवाज़ बनाकर कहा था जो वह अज्ञात मददगार के रूप में फूचिंग को फोन करते समय करता था ।
“तुम.. .!" फूचिंग चौंककर दो कदम पीछे हट गया ।
"यस, फूचिंग बेटे, ये मैं हूं ।” अलफांसे गुर्राया ।
"तुम. .?" फूचिंग की समझ में नहीं आ रहा था कि वह साजिश क्या है? उसे कैसे फंसा लिया गया?
वह चकराकर रह गया ।
"मेरा तो बहुत बडा मतलब है, बेटे!" अलफांसे गुर्राया------"जिस विकास के खून के तुम इतने प्यासे हो कि सामने देखकर अपने आपको संभाल नहीं सके और तुरंत गोली से उड़ा दिया, मैं उसी विकास का गुरु हू बेटे, वही विकास मुझे जान से प्यारा है, तब भी पूछते हो कि मेरा क्या मतलब है?”
चाहते हुए भी फूचिंग कुछ नहीं बोल सका । उसकी जुबान जैसे अकड़कर रह गई ।
लेकिन अलफांसे अब भी गुर्रा रहा था-----------"विकास वह रसगुल्ला नहीं चीनी कुत्ते, जिसे तुम यूं ही हजम कर जाओं ।" अलफांसे का स्वर भयानक होता जा रहा था--------------“बिकास यह शेतान है जो तुम जैसे सैकडों जासूसों को पेड़ पर लटका देता है । उस लड़के को हमने ऐसे सोना नहीं सिखाया कि मौत उसके करीब आ जाए और वह सोता ही रहे ।" अलफांसे का लहजा भयानकता की चरम भीमा तक पहुच गया था-----“वैसे तो वह इतना प्रभावशाली है कि तुम जैसे कुते उससे कांपते है लेकिन अगर उस पर कोई हावी भी हुआ तो अलफांसे उसे फाड़कर रख देगा। उसकी बैक में हमेशा अलफांसे रहता है, फूचिंग बेटे! भूलकर भी उस लड़के से ना टकराना वरना या तो वह ही तुम्हें नहीं छोड़ेगा और अगर तुम उसे किसी प्रकार की हानि पहुंचने में सफल हो भी गए तो समझ लेना कि मैं दुनिया के तख्ते से चीनी जाति को समाप्त कर दूंगा ।" अलफांसे किसी सिंह की भांति गरज रहा था ।
अंतर्राष्टीय शातिर का यह अनोखा और भयानक रूप देखकर फूचिंग कांप उठा ।
अलफांसे फिर बोला----" तुम अपने आपको बहुत जालसाज समझते थे, फूचिंग बेटे! लेकिन खुद ही अपनी चालों में फंस गए ।" बोलते हुए अलफांसे का क्रोध जैसे कुछ कम होता जा रहा था---------"तुम्हें अज्ञात बदमाश के रूप में फोन मैंने ही किया था । वास्तविकता यह थी कि यह योजना विजय ने बनाई थी महज इसलिए कि आप विकास का कार्य कुछ हल्का कर सके । जब तक उस पर अलफांसे और विजय जैसे गुरुओं का हाथ है तब तक तुम जैसा कोई भी कुत्ता उसकी तरफ आँख भरके नहीँ देख सकता, विजय ने उसे बचाने के लिए अपने आपको फंसा लिया । अगर वक्तं पडा तो विकास को बचाने के लिए मैं अपना सिर कटा सकता हू ।"
“लेकिन इस सबसे लाभ?” फूचिंग स्वयं पर संयम पा चुका था ।
"लाभ भी पता लग जाएगा बेटे, पहले त्याग देखो ।” वह बोला------“बिजय ने खुद ही स्कीम बनाई थी कि वह सनकी बूढे के मेकअप में डीलारा के मेज नंबर तेरह पर बैठेगा और मैं तुम्हे विजय का एक अज्ञात दुश्मन बनकर यह जानकारी दे दूं। जैसा कि स्वाभाविक था तुमने तुरंत जाकर विजय को पकड़ लिया । योजनानुसार मैंने तुम्हें फिर इस प्रकार फोन किया तथा सही पता बताया और यह भी बता दिया कि तुम्हें यहां अकेले जाना चाहिए । हम जानते थे कि तुममें इतनी बुद्धि है कि तुम विजय के मेकअप में यहां पहुचोगे । वैसा ही हुआ । जिस विकास को देखकर तुम इतने भडक गए कि स्वयं को संभाल नहीं पाए, यह विकास नहीं बल्कि तुम्हारा ही तैयार किया गया एजेंट डबलक्रास है ।”
अवाक् फूचिंग अलफांसे को देखता रह गया ।
उसे अपनी बुद्धि पर क्रोध आ रहा था । किस सरलता से वह इन खतरनाक लोगों के जाल में फंस गया था ।
मन-ही-मन वह उनकी इस योजना की प्रशंसा कर उठा । वह किस प्रकार खुशी-खुशी ही उन लोगों के बीच फंस गया था ।
“लेकिन विजय इस समय चीन की कैद में है ।" फूचिंग के लहजे में धमकी का पुट था ।
"इसकी तुम चिंता मत करो, फूचिंग बेटे!'" अलफांसे बोला…“अभी तो कैद ही में जाना पड़ा है, विजय के जिस्म का एकाएक कतरा बिकास का है । विकास के लिए विजय अपनी जान भी दे सकता है, लेकिन वह इतना बेवकूफ भी नहीं है कि बैसे ही तुम्हारी कैद में जा फंसे । निश्चय ही उसने कोई प्रबंध किया होगा और अगर वास्तव में यह फंस गया होगा तो अभी तुम भी हमारी कैद में हो । अगर विजय के लिए चीन सरकार तुम्हारी भी बली देने लगे तो अभी अलफांसे मरा नहीं है । विजय को आजाद कराने के लिए मैं खून की नदियां बहा दूंगा ।"
"लेकिन इस प्रकार आप लोग विकास की क्या सहायता कर सकेंगे?" फूचिंग बोला------------एक मेरे न होने से क्या होना वहां पर अन्य सेनिक-पहरे तो मजबूत होंगे !"
"तुम तो वहां वहुत कुछ कर सकते हो ।"
कै' समझा नहीं ।"
"अब समझ जाओगे ।" कहते हुए अलफांसे ने अपनी जेब से फूचिंग के चेहरे का आटोमेटिक फेशमास्क निकलकर दिखाया तो फूचिंग की खोपडी घूम गई कि अब अलफांसे से फूचिंग बनकर बहा जा मिलेगा सारा मामला गडबड कर देगा। फूचिंग को कुछ नहीं सुझा तो... ।
एकाएक उसके जिस्म में बिजली दौड़ गई ।
भयानक ढंग से उसने अलफांसे पर जम्प लगाई किंतु अलफांसे धीमे से अपने
स्थान से हट गया, लेकिन उसी पल फूचिंग ने भी सिद्द कर दिया कि उसे भी चिनी विजय की उपाधि यूँ ही नहीं मिली है । इधर अलफांसे धीरे से हटा , उधर गिरता-गिरता भी फूर्चिग एक घूसा अलफांसे के ज़बड़े पर जमा गया।
अलफांसे का जबड़ा कांप उठा ।