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झपटकर चीनी ने हंटरका दूसरा सिरा भी पकड़ लिया और जोर से खींचने लगा । विजय छटपटाया लेकिन फंस गया था ।
"मैं तुम्हें जिंदा नहीं छोडूंगा, कुत्ते !" दांत भीचकर चीनी गुर्राया । साथ ही पैर से उसने समीप ही रखी एक बडी-मशीन का बटन दबा दिया ।
खटाक्-पटाक् की कई आवाजे एक साथ हुई और एक बहुत वड़ा लोहे का आरा नीचे आने लगा ।
मशीन ठीक ऐसी थी जैसे आरा मशीन होती है, जो मोटे-मोटे वृक्ष काटने के काम आती है ।
चीनी ने विजय का सिर झट उस स्थान पर रख दिया जहाँ आरा गिरता ।
यानी जहां रखकर मोटे-मोटे लट्ठे काटे जाते हैं ।
विजय की हालत खस्ता हो गई ।
लाख करना चाहकर भी वह कुछ नहीं कर पा रहा था । उसका सांस रुक गया था । आरा निरंतर उसकी गर्दन की तरफ बढ रहा था ।
चीनी की आंखें शोले की भाति दहक रही थीं ।
विजय को अपने सामने मौत नजर आ गई, लेकिन उसने जिन्दगी के अंतिम पलो तक मौत से लडना सीखा था ।
उसे और कुछ न सूझा तो अपने दाएं हाथ की दो उंगलियां चीनी चीफ़ की दहकती आंखों में दे मारीं ।
चीनी बुरी तरह चीख पड़ा । एक पल के लिए उसकी पकड शिथिल पड्री, उसी पल विजय ने अपनी पूरी शक्ति समेटकर एक झटके के साथ स्वयं को आरे के नीचे से हटाया । आरा बहुत करीब आ चुका था । अगले ही पल विजय ने ऐसी पुती दिखाई जिसका कोई उदाहरण नहीं, जिस तेजी से हटा था उसी तेजी से उसने चीफ को पकडकर अपने स्थान पर मारा।
सारा कमरा एक डरावनी और अंतिम चीख से कांप उठा । खून के छींटे बड़े वीभत्स ढंग से इधर-उधर लहराए ।
विजय भी खून से नहा उठा । आरा लहू से सन गया ।
चीनी चीफ़ की गर्दन और धड़ अलग-अलग पड़े थे । एक क्षण के लिए दोनों अलग-अलग पड़े तड़फते रहे । फिर शांत हो गए ।
"मैं तुम्हें जिंदा नहीं छोडूंगा, कुत्ते !" दांत भीचकर चीनी गुर्राया । साथ ही पैर से उसने समीप ही रखी एक बडी-मशीन का बटन दबा दिया ।
खटाक्-पटाक् की कई आवाजे एक साथ हुई और एक बहुत वड़ा लोहे का आरा नीचे आने लगा ।
मशीन ठीक ऐसी थी जैसे आरा मशीन होती है, जो मोटे-मोटे वृक्ष काटने के काम आती है ।
चीनी ने विजय का सिर झट उस स्थान पर रख दिया जहाँ आरा गिरता ।
यानी जहां रखकर मोटे-मोटे लट्ठे काटे जाते हैं ।
विजय की हालत खस्ता हो गई ।
लाख करना चाहकर भी वह कुछ नहीं कर पा रहा था । उसका सांस रुक गया था । आरा निरंतर उसकी गर्दन की तरफ बढ रहा था ।
चीनी की आंखें शोले की भाति दहक रही थीं ।
विजय को अपने सामने मौत नजर आ गई, लेकिन उसने जिन्दगी के अंतिम पलो तक मौत से लडना सीखा था ।
उसे और कुछ न सूझा तो अपने दाएं हाथ की दो उंगलियां चीनी चीफ़ की दहकती आंखों में दे मारीं ।
चीनी बुरी तरह चीख पड़ा । एक पल के लिए उसकी पकड शिथिल पड्री, उसी पल विजय ने अपनी पूरी शक्ति समेटकर एक झटके के साथ स्वयं को आरे के नीचे से हटाया । आरा बहुत करीब आ चुका था । अगले ही पल विजय ने ऐसी पुती दिखाई जिसका कोई उदाहरण नहीं, जिस तेजी से हटा था उसी तेजी से उसने चीफ को पकडकर अपने स्थान पर मारा।
सारा कमरा एक डरावनी और अंतिम चीख से कांप उठा । खून के छींटे बड़े वीभत्स ढंग से इधर-उधर लहराए ।
विजय भी खून से नहा उठा । आरा लहू से सन गया ।
चीनी चीफ़ की गर्दन और धड़ अलग-अलग पड़े थे । एक क्षण के लिए दोनों अलग-अलग पड़े तड़फते रहे । फिर शांत हो गए ।