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हवस ( रिश्तों में गंदगी ) complete

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उधर सबके सब चोर नज़रों से इन दोनों को देख रहे थे और समझने की कोशिश कर रहे थे कि क्या बातें हो रही हैं।

फैजान- उफ़ यार, साली बैठी कैसे है.. उसकी गांड देख अह.. साली एक बार मिल जाए तो बस लंड को चैन मिल जाए।

शाहिद- चुप कर साले.. रज़िया उसको पटा रही है, उसकी आँखें देख.. साफ पता लग रहा है कि वहाँ सेक्स की ही बातें हो रही हैं और वो बार-बार पैर इधर-उधर कर रही है.. इसका मतलब उसकी फुददी गीली होने लगी है।

आज़म- मान गए यार इस मामले में तेरा कोई जवाब नहीं.. अब उनको खाने के लिए बुला लें?

शाहिद- नहीं अभी नहीं.. रज़िया इशारा देगी तब।

इधर रज़िया ने अपना पासा फेंका कि रूबी उसमें फँस जाए।

रज़िया- एक बात कहूँ.. शाहिद जैसा लड़का पूरे कॉलेज में नहीं है और फैजान को छोड़कर बाकी सब भी स्ट्रॉंग हैं।

रूबी- अच्छा रियली वो कैसे?

रज़िया- एक तो सबके साइज़ बहुत मस्त हैं.. ऊपर से टाइमिंग भी कमाल की है।

रूबी- ओह गुड.. वैसे कितना साइज़ है और कितनी देर तक कर सकते हैं?

रज़िया- शाहिद का तो 8″ का है.. बाकी 7″ के औसत के हैं और टाइमिंग की पूछो मत.. सभी लगभग 25 से 30 मिनट आराम से निकाल लेते हैं।

रज़िया की बात सुन कर रूबी की आँखों में चमक आ गई.. उसके होंठ सूख गए.. वो उन पर जीभ फेरते हुई बोली- वाउ यार.. तुम तो बहुत लकी हो जो तुझे ऐसे मस्त ब्वॉयफ्रेंड मिले.. काश मेरा ब्वॉयफ्रेंड भी ऐसा ही मस्त होता।

रज़िया- अरे तो इसमें क्या है.. तू अब मेरी दोस्त है, अगर तू चाहे तो ये मज़े तू भी ले सकती है.. बोल क्या कहती है?

रूबी- नहीं यार मुझे डर लगता है.. मैं तेरी जैसी बहादुर नहीं हूँ.. एक साथ 5 के हथियार.. ना बाबा ना.. सोच कर ही डर लगता है।

रज़िया- अरे कुछ नहीं होगा.. सब प्यार से करेंगे.. यार मैं भी तो यहीं हूँ।

रूबी- नहीं यार मैं नहीं कर सकती।

रज़िया- अच्छा जाने दे.. अगर एक के साथ करने का मौका मिले तो क्या बोलती है?

रूबी- एक के साथ तो कर सकती हूँ.. मगर जाने दे यार फिर कभी देखूँगी आज तो वैसे भी सब साथ हैं।

रज़िया- मेरी जान हाथ आया मौका वेस्ट नहीं करना चाहिए.. सबकी फिकर तू मत कर.. बाकी को में संभाल लूँगी.. सालों को ब्लोजॉब देके ठंडा कर दूँगी.. तू शाहिद के साथ मज़ा ले लेना।

रूबी- रियली ऐसा हो सकता है.. तुम सबके चूसोगी.. वाउ सो नाइस तुमको पता है मेरी सबसे बड़ी कमजोरी यही है।

रज़िया- गुड यार तब तो शाहिद का चूसने में तुझे बड़ा मज़ा आएगा। वैसे तूने बताया नहीं वो तेरे पहले का और ब्वॉयफ्रेंड का साइज़ क्या था?

रूबी- पहले वाला तो 6.5 के करीब था और पॉवरफुल भी था.. मगर ब्वॉयफ्रेंड का 5″ था.. साले का पतला सा था.. उसको चूसने में भी मज़ा नहीं आता था.. मगर क्या करती जो था वही था।

रज़िया- तब तो तू आज बहुत ज़्यादा एंजाय करेगी यार.. शाहिद का मोटा भी है और लंबा भी है।

रूबी- लेकिन यार ये होगा कैसे तुम ऐसे डाइरेक्ट्ली शाहिद को कहोगी तो सब मेरे बारे में क्या सोचेंगे?

रज़िया- टेंशन मत ले.. खाने के बाद डांस का प्रोग्राम है ना.. उस टाइम मैं शाहिद को बता दूँगी। तू जब उसके साथ डांस करेगी ना बस चिपक के करना.. बाकी वो खुद संभाल लेगा।

रज़िया ने रूबी को सब अच्छे से समझा दिया कि बाकी सबको वो पहले ही दूसरे कमरे में ले जाएगी और उसके बाद वो शाहिद के साथ खुलकर मज़ा ले सकती है।

शाहिद के बड़े लंड का सोच कर ही रूबी की फुददी पानी-पानी हो गई थी। वो रज़िया से कुछ कहना चाहती थी।

मगर रज़िया ने शाहिद को आवाज़ दे दी- अब खाने के लिए कितना वेट करवाओगे? भूख लगने लगी है!

शाहिद- सब रेडी है जान.. आ जाओ।

रूबी- मुझे वॉशरूम जाना है यार।

रज़िया- क्या बात है कुछ ज़्यादा ही गर्म हो गई तुम.. जल्दी आ जाना कहीं अन्दर ही शांत मत हो जाना हा हा हा हा..

रूबी- हा हा हा.. तुम भी ना यार अब बियर अपना काम तो करेगी ना.. अभी आई बस।

रज़िया ने उसको वॉशरूम बता दिया, फिर वो जल्दी से सबके पास गई और शॉर्ट में पूरी बात बता दी।

सलमान- ये क्या यार, तू अकेला मज़ा करेगा.. हम क्या करेंगे? साली कुतिया कहीं की!

रज़िया- अबे सालों सब्र करो.. सबको चान्स मिलेगा मगर उसको थोड़ा खुलने दो।

शाहिद- हाँ सही है यार.. वो मान तो गई ना.. अब आज नहीं तो कल सभी उसका मज़ा ले सकते हैं। ऐसा समझो इस साल हमें फुददी की कमी नहीं होगी और वैसे भी रज़िया सबके चूस तो रही है ना.. आज इससे ठंडे हो जाना।

रज़िया- ओये मैंने बस उसको ऐसे ही कहा है.. साला मेरे तो पीरियड चल रहे हैं और मैं सबको ठंडा करूँ.. मुझसे नहीं होगा!

अमन- अरे ये क्या बात हुई तो हमारे लिए तूने कुछ तो सोचा होगा!

रज़िया- सोचा है ना.. शाहिद उसकी चुदाई करेगा, तुम सब लाइव देख के अपना-अपना हिला लेना.. हो जाओगे ठंडे और सोचो रूबी नंगी तुम्हारे सामने होगी तो मुठ मारने का मज़ा डबल हो जाएगा।

फैजान- उफ़ बस कर रज़िया.. मुझे तो उसके बड़े-बड़े बूब्स दिखने लगे।

शाहिद ने सबको कुछ समझाया कि आगे क्या करना है।

अमन- ओह वो आ रही है.. चलो अब जल्दी बैठ जाओ.. खाना ठंडा हो रहा है।

रज़िया ने रूबी को शाहिद के पास बिठाया और सब खाने का मज़ा लेने लगे। वहीं रूबी बार-बार शाहिद को देख कर मुस्कुरा देती। ये सब देख कर शाहिद का लंड तनाव खाने लगा।

सब हँसी-मज़ाक करते हुए खाना खा रहे थे। बीच-बीच में रज़िया थोड़ी सेक्सी बातें भी कर रही थी.. जिससे वहाँ का माहौल गर्म हो जाता और रूबी भी इन सबका खुलकर मज़ा ले रही थी।

खाने के बाद शाहिद ने म्यूज़िक लगा दिया और सब उस पर थिरकने लगे। रूबी पहले तो शाहिद के साथ नाच रही थी.. मगर बारी-बारी से सबने उसके साथ डांस किया। सलमान ने कई बार उसकी गांड को सहलाया मगर रूबी इन सब की हरकतों को एंजाय कर रही थी।

फिर शाहिद को लगा अब रूबी गर्म हो गई है तो उसने फैजान को इशारा किया कि शुरू हो जा।

फैजान वहाँ से निकला और चेयर पे जाकर बैठ गया- बस भाई मैं तो थक गया.. रज़िया यार, प्लीज़ तेरे से एक काम है यहाँ आ ना!

रज़िया- हाँ आती हूँ.. रुक मुझे पता है तेरा काम क्या है.. साला ठरकी कहीं का!

आज़म- यार अब बहुत हो गया नाच-गाना मैं थोड़ी कमर सीधी कर लूँ।

शाहिद- वो राईट वाला कमरा देख रहा है ना.. वहाँ जाकर आराम कर ले।

रज़िया- चलो मैं भी साथ चलती हूँ.. उस साले ठरकी का काम भी निपटा दूँ।

सलमान- मैं भी आ जाऊं क्या.. यार थोड़ी सी थकान मेरी भी मिटा देना।

रज़िया- जिसे आना है आ जाओ मैं चली।

एक-एक करके सब चले गए।

अब रूबी थोड़ी घबरा गई कि अब वो क्या करे?

रूबी- ये सब तो गए शाहिद यार मैं भी चलती हूँ.. मुझे लेट हो जाएगा।

शाहिद- अरे कहाँ यार.. अभी कौन सा टाइम हुआ है.. और ये सब तो मस्ती करने गए हैं.. थकान उतारने.. तुम भी थकी हुई लग रही हो वो सामने दूसरा कमरा है.. वहाँ तुम भी रेस्ट कर लो।

रूबी- हाँ, मेरी पीठ में दर्द हो रहा है।

शाहिद- अरे ऐसी बात है तो चलो इसका इलाज मेरे पास है.. मैं 5 मिनट में ठीक कर दूँगा।

रूबी- इतनी जल्दी.. वो रज़िया तो कह रही थी..

इतना बोलकर रूबी चुप हो गई.. उसके होंठों पे एक मुस्कान आ गई, जिसे शाहिद अच्छी तरह समझ गया था।

शाहिद- अरे दर्द तो बस 5 मिनट का ही है बाकी आधा घंटा तो मालिश का मज़ा लेना।

रूबी- अच्छा ये बात है.. तो चलो।

दोनों अन्दर चले गए तो शाहिद ने डोर लॉक कर दिया, जिसे देख कर रूबी ने नाटक किया कि ये डोर क्यों लॉक किया?

शाहिद- अरे यार रूबी अब प्लीज़ टाइम वेस्ट मत करो.. मुझे रज़िया ने सब बता दिया है.. तुम भी प्यासी.. मैं भी प्यासा आ जाओ एक बार मेरे गले लग जाओ।

रूबी शर्मा गई और भाग कर शाहिद के गले लग गई। अब शाहिद भी कहाँ पीछे रहता उसने झट उसके होंठों पर अपने होंठ टिका दिए और उसको चूसने लगा। रूबी तो पहले ही रज़िया की बातों से गर्म हो गई थी। अब शाहिद का लंड वो फुददी पर महसूस करके और गर्म हो गई। उसने हाथ नीचे करके उसका जायजा लिया.. तो ख़ुशी से फूली ना समाई। वो वाकयी में एक तगड़ा लंड था।

 
शाहिद- मेरी जान ऐसे पकड़ के ही खुश होगी.. या इसको प्यार भी करेगी?

रूबी- करूँगी ना.. जी भर के करूँगी लंड की चुसाई तो मैं बड़े प्यार से करती हूँ।

शाहिद- अच्छा तो कल झूठ क्यों बोली थी कि तू चुदी हुई नहीं है?

रूबी- अरे यार पहली मुलाकात में कैसे हाँ कहती.. वैसे तुम लोगों को देख कर ही मैं समझ गई थी सब कितने बड़े चोदू हो।

शाहिद- अच्छा फिर भी यहाँ पार्टी में आ गई.. तुम्हें डर नहीं लगा?

रूबी- तुम चोदू हो ये जानकर ही तो यहाँ चुदने के लिए आई हूँ.. वरना मेरा क्या काम हा हा हा हा..

शाहिद- साली तू भी पक्की चुदक्कड़ है.. चल अब बातें ही करेगी या मुझे अपने ये बड़े-बड़े खरबूजे भी खिलाएगी।

शाहिद ने उसके चुचों को पकड़ कर मसल दिया।

रूबी- सब तुम्हारा ही है.. खा लो बलमा।

शाहिद ने जल्दी से उसका टॉप निकाला.. अन्दर ब्लेक ब्रा में कैद उसके मम्मे कहर ढहा रहे थे। फिर जल्दी से उसकी कैप्री भी निकाल दी। अन्दर का नजारा देख कर शाहिद का लंड बेकाबू हो गया.. इतना सख़्त हो गया कि पेंट को फाड़कर बाहर आने को बेताब था।

अन्दर रूबी ने जालीदार ब्लेक पेंटी पहनी थी.. जिसमें से उस लड़की की लंबी फुददी साफ नज़र आ रही थी और सबसे खास बात उसकी जाँघ पर राईट साइड एक तिल था.. जो उसकी सुन्दरता को अलग ही दर्शा रहा था।

रूबी इठला कर बोली- डार्लिंग देख के ही हल्के होने का मंसूबा है क्या?

शाहिद- यार अम्मी कसम क्या फिगर है तेरा.. देख कर ही मज़ा आ गया। अब तेरी ऐसी मालिश करूँगा कि तू मेरी दीवानी हो जाएगी।

रूबी- अच्छा ये बात है तो चलो अपने लंड को भी आज़ाद कर दो.. ताकि मैं भी देख कर थोड़ा मज़ा ले लूँ।

शाहिद- नहीं.. पहले तुझे पूरी नंगी तो कर दूँ.. तेरे ये मचलते मम्मे और फड़कती नंगी चिकनी फुददी को देख लूँ.. फिर तुझे लंड महाराज के दर्शन भी करवा दूँगा।

इतना कहकर शाहिद ने उसकी ब्रा निकाल दी.. फिर उसकी पेंटी भी निकाल दी। फ्रेंड्स, क्या नजारा था रूबी के 36″ के गोल मम्मे.. जैसे किसी ने आराम से उनको तराशा हो.. और फुददी ऐसी लंबी नोकदार.. जैसे इसे लड़कों को रिझाने के लिए खास ऐसा रूप दिया गया हो। शाहिद तो पागल हो गया.. उसने फुददी पे एक किस कर दी।

रूबी- आह.. शाहिद अब ऐसे ही तड़पाओगे क्या.. मेरे होंठ सूख रहे हैं.. अपने लंड से मेरी भी प्यास बुझा दो।

शाहिद- अभी लो मेरी जान.. तुझे लंड के दर्शन देता हूँ।

शाहिद ने जल्दी से अपने कपड़े निकाल दिए। उसका 8″ का लंड बंदूक की तरह तना हुआ था, जिसे देख कर रूबी से रहा नहीं गया.. वो फ़ौरन घुटनों के बल बैठ कर लंड को चूसने लगी।

रूबी के लंड चूसने का अंदाज अलग ही था जो शाहिद को दूसरी दुनिया में ले गया।

शाहिद- आह.. डार्लिंग उफ़ क्या चूसती है आह.. ऐसा लगता है आह.. बहुत लंड चूस चुकी तू.. आह.. उफ़ मज़ा आ गया।

रूबी लंड को पूरा मुँह में लेती.. फिर होंठ को दबा कर धीमे-धीमे लंड बाहर निकालती और फिर गोटियां मुँह में लेकर एक चुसकी लेती। ये अंदाज इतना मस्त था कि बड़े-बड़े लंड को बेहाल कर दे।

दस मिनट तक रूबी लंड चूसती रही। फिर शाहिद ने उसको पकड़ कर ऊपर उठाया और बिस्तर पर लेटा दिया।

अब शाहिद उसके चुचों को चूसने लगा उसके निप्पल को दांतों में दबा कर हल्का सा काट लेता, जिससे रूबी की आग और तेज हो जाती।

दोस्तों जैसा कि इन सबने प्लान बनाया था। कमरे की खिड़की से सबके सब लड़की की चुदाई का लाइव शो देख रहे थे। फैजान ने तो अपना लंड बाहर निकाल कर रूबी की नंगी जवानी देख कर सहलाना शुरू कर दिया था।

फैजान- हय साली.. क्या मस्त माल है उफ़ आह.. रज़िया प्लीज़ यार थोड़ा चूस दे ना।

रज़िया- चुप साले हरामी.. ये देख कर मेरी खुद की हालत खराब है। मैं तो नहीं देख सकती.. अब तुम सब देखो और मौका देख कर चौका मार देना.. जैसा कि शाहिद ने बताया था।

शाहिद पागलों की तरह रूबी के मम्मे चूस रहा था और अपने हाथों से दबा रहा था।

रूबी- आह.. आ शाहिद उफ़ आराम से आह.. प्लीज़ आह.. मेरी फुददी आह.. उसको भी चूसो आह..

शाहिद- मेरी जान मेरे पास एक ही मुँह है.. उससे दूध चूसूं या फुददी.. तेरी जैसी आइटम के लिए तो एक मुँह फुददी पे और एक गांड में तीसरा एक चुचों पे चौथा दूसरे आम पर और एक तेरे मुँह में लंड डाल कर तुझे मज़ा दे।

रूबी- आहा काश इतना मज़ा मिल जाए आह.. मगर उफ़ ये आह.. सही नहीं उफ़ सब मिलकर आह.. मेरी हालत आह.. खराब कर देंगे आह.. चूसो अफ..

शाहिद- डार्लिंग डरो मत.. खुल कर एंजाय करो.. वो जवानी का क्या फायदा जिसमें कोई मजा ना हो.. आज मौका है सोचो 5 लंड एक साथ तुम चूस रही हो सोचो कितना मज़ा आएगा।

रूबी की वासना इतनी बढ़ गई थी कि उसे होश भी नहीं रहा और सबसे बड़ी बात लंड चूसने की.. तो दोस्तों ये रूबी की सबसे बड़ी कमजोरी है। जब ये अपनी कहानी बताएगी तब आप समझ जाओगे।

रूबी- आह.. उफ़फ्फ़ शाहिद आह.. सच में उफ़ बुलाओ आह.. अब चाहे कुछ भी हो आह.. आज तो सबके आह.. चूस लूँगी आह.. बुलाओ आह.. जल्दी करो अब मेरी आँखों में बस लंड घूम रहे हैं.. आह…

शाहिद ने खड़े होकर दरवाजा खोल दिया.. सब अन्दर आ गए, साथ में रज़िया भी आ गई। वो इस यादगार चुदाई को देखना चाहती थी।

अन्दर आने के साथ ही सब एक झटके में नंगे हो गए और गोल घेरा बना कर खड़े हो गए।

रूबी- वाउ यार तुम सबके लंड तो ज़बरदस्त हैं.. आज तो मेरी सारी प्यास मिट जाएगी। ओह फैजान, तुम्हारा तो मेरे ब्वॉयफ्रेंड जैसा है.. मैं पहले तुमसे ही शुरू करूँगी।

रूबी किसी रांड़ की तरह एक-एक करके सबके लंड चूसने लगी। वो सब तो पहले ही बहुत गर्म थे और रूबी की चुसाई से अब उनका कंट्रोल जाता रहा।

 
वैसे तो सलमान आज़म और अमन के लंड 7″ के थे मगर अमन के लंड की मोटाई सबसे ज़्यादा थी और वो रूबी के मुँह में ठीक से जा नहीं पा रहा था।

रूबी- उफ़ आह.. लंड आह.. लंड कितने मस्त हैं आह.. अमन क्या खाते हो तुम आह.. कितना मोटा है ये.. आह.. पता नहीं जिस लड़की की फुददी में ये जाएगा तो उसकी क्या हालत होगी.. आह..

अमन- जानेजिगर डरो मत.. बड़े प्यार से डालूँगा इसे, अब तो पूरा साल तुझे मज़ा देना है आह.. क्या चूसती है ओफ..

शाहिद- बहुत हो गया चूसना.. चलो मेरी जान अब चुदाई के लिए तैयार हो जाओ।

शाहिद ने रूबी को गोदी में उठा लिया और बिस्तर पर लेटा दिया और बाक़ी सब गली के कुत्तों की तरह लार टपकाते हुए बिस्तर पर आ गए।

रूबी- शाहिद प्लीज़ आराम से करना.. पूरा एक साल हो गया, उंगली के अलावा मेरी फुददी में कुछ नहीं गया।

आज़म- अच्छा साली सुबह तो बड़ी शरीफ़ बन रही थी। हमें तो पता था तू चुदी हुई है।

शाहिद- चुप साले अब कोई बकवास नहीं.. ये कोई रांड़ नहीं जो तू ऐसे बात करेगा। आज से ये हमारी दोस्त है ओके।

रूबी- थैंक्स शाहिद.. मगर चुदाई के टाइम मैं रांड़ बनना चाहती हूँ.. सब मुझे गालियाँ देना, तब ज़्यादा मज़ा आएगा।

शाहिद- अच्छा ये बात है साली छिनाल.. मैं तेरी तरफ़दारी कर रहा हूँ और तू खुद रांड़ बनना चाहती है, तो ले अब संभाल मेरा लंड.. पहले इससे चुदेगी तो बाद में सबके लंड आराम से ले पाएगी।

रूबी- आह.. अभी नहीं.. पहले सब एक साथ मेरी फुददी को चाटो और चूसो आह.. मेरे चुचों को खा जाओ।

रूबी के कहने की देर थी कि सलमान और आज़म उसके चुचों पे चिपक गए और अमन उसकी फुददी को चूसने लगा। इधर फैजान ने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया।

अभी रूबी के जिस्म के मजे लिए ही जा रहे थे कि शाहिद ने फैजान को एक टपली मारी।

शाहिद- अबे सालो, मुझे अकेला छोड़ दिया.. चल साली रांड तू मेरा हाथ से हिला के मुझे मज़ा दे दे।

फ्रेंड्स, 20 मिनट तक ये खेल चलता रहा रूबी तो असीम आनन्द की दुनिया में खो गई। वो कुछ बोल भी नहीं पा रही थी। फैजान उसके मुँह को चोदने में लगा हुआ था और इधर चुचों और फुददी की चुसाई से वो बेहाल हो गई थी। उसका झरना बहना शुरू हो गया था, जिसे अमन ने चाटना शुरू कर दिया।

अमन- वाह साली.. क्या रस है तेरा.. मज़ा आ गया उफ़ कितना अलग टेस्ट है।

अमन की बात सुनकर आज़म और सलमान ने उसको धक्का दिया- साले अकेला ही पिएगा क्या.. ला हमको भी टेस्ट करवा।

अमन अब चुचों को चूसने लगा और वो दोनों बारी-बारी फुददी को चाटने लगे। इधर फैजान भी चरम पर आ गया.. उसने स्पीड से मुख चोदन शुरू किया और अगले ही पल उसके लंड का सारा रस रूबी के हलक में उतर गया।

रूबी- आह.. उम्म्म उम्म्म उम्म्ह… अहह… हय… याह… मज़ा आ गया.. आज तो सबका रस पी जाऊंगी ओफ..

शाहिद- बस करो सालो.. ऐसे तो ये रांड़ सबका चूस कर ही निकाल देगी। अब इसकी फुददी चोदने का टाइम आ गया है।

अमन- शाहिद तू आगे से डाल.. मैं साली के पीछे से ठोकता हूँ

रूबी- नहीं.. पहले सिर्फ़ शाहिद को करने दो.. एक साल बाद चुद रही हूँ.. बहुत दर्द होगा, प्लीज़ यार मान जाओ बस आज के लिए.. फिर तो मैं रोज सबका एक-एक करके ले ही लूँगी।

रूबी की बात शाहिद ने मान ली। बाकी सब उसके चुचों और होंठों पे टूट पड़े। इधर शाहिद ने लंड फुददी पे सैट किया और जोरदार झटका मार दिया, जिससे आधा लंड फुददी को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया।

रूबी- आईईइ आईईइ मार डाला रे.. उफ़ आराम से डालो बहुत बड़ा है आह..

रूबी आगे कुछ बोलती तब तक दूसरा झटका लगा और पूरा लंड फुददी की गहराई में खो गया। अबकी बार रूबी की चीख भी तेज थी मगर आज़म ने अपना लंड उसके मुँह में घुसेड़ दिया, जिससे उसकी चीख बाहर ही ना निकल पाई।

अब शाहिद ‘दे दनादन..’ उसकी चुदाई करने लगा। दस मिनट चोदने के बाद शाहिद ने उसको घोड़ी बनाया और अबकी बार उसकी गांड पर लंड सैट करके झटका दे मारा।

रूबी कुछ समझ पाती.. तब तक शाहिद ने लंड गांड में डाल दिया था। एक दर्द की लहर रूबी के पूरे जिस्म में दौड़ गई।

शाहिद अब ‘दे घपाघप..’ लंड अन्दर-बाहर कर रहा था। इधर आज़म भी उसके मुँह को चोदकर मज़ा ले रहा था। सलमान और अमन दांए-बांए से उसके चुचों का मज़ा ले रहे थे।

कुछ ही मिनट में रूबी 2 बार झड़ गई.. तब कहीं जाकर शाहिद ने उसकी गांड में पानी की धार मारी और इधर आज़म के लंड ने उसके मुँह को रस से भर दिया था।

 
उधर रज़िया ये सब अपने फ़ोन में रिकॉर्ड कर रही थी। हालांकि उसकी फुददी भी जलने लगी थी.. मगर वो चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती थी।

रूबी- आह.. शाहिद उफ़ तुम बड़े आह.. बेदर्द हो उफ़ मेरी गांड फाड़ दी आह..

शाहिद- चुप साली रांड़.. तेरी गांड को देख कर ही मैं समझ गया था कि ये भी बहुत ठोकी हुई है.. फिर कैसा दर्द हाँ..?

रूबी- आह.. कुत्ते.. बताया तो था एक साल से नहीं चुदी हूँ.. आह.. मर गई रे.. अब तेरे इस मूसल जैसे लंड से दर्द तो होगा ना.. उफ़ गांड में जलन हो रही है।

अमन- टेंशन मत ले मेरी जान.. अब मैं इसकी जलन मिटा दूँगा।

रूबी- नो प्लीज़ अमन.. अभी नहीं उफ़ तुम्हारा बहुत मोटा है।

सलमान- चुप साली छिनाल.. अपने यारों से तो चुदवा लिया.. अब हमारी बारी आई तो ‘नहीं नहीं..’ करती है।

रूबी बेचारी ना कहती रही.. मगर अब उनके खड़े लंड को देखकर वो समझ गई इनसे बहस करना बेकार है और वो उनके हवाले हो गई- ठीक है कुत्तों.. जो करना है कर लो मगर प्यार से करना।

अमन- सलमान साली को एक साथ चोदेंगे.. चल इसको ऊपर लेटा कर तू फुददी मार.. मैं इसकी गांड को ठोकता हूँ।

डबल चुदाई के नाम से ही रूबी की फुददी पानी-पानी हो गई, उसको दर्द तो हो रहा था मगर ऐसी चुदाई उसने सिर्फ़ ट्रिपल एक्स वीडियोज में ही देखी थी.. आज वो खुद इस डबल पेनेट्रेशन और ग्रुप सेक्स को एंजाय कर रही थी।

सलमान ने रूबी को लंड पर बिठा लिया और एक ही बार में पूरा घुसा दिया। उधर पीछे से अमन ने भी उसकी गांड पे लंड टिकाया और एक ही बार में पूरा लंड पेल दिया।

रूबी- आह.. कुत्ते उफ़फ्फ़ मार दिया रे आह.. उ आह.. चोदो आह फक मी बास्टर्ड.. उफ़ फक मी हार्ड आह.. आह..

दोनों अंधाधुंध रूबी के दोनों छेदों को चोदने लगे। इधर इनको देख कर फैजान का लंड फिर खड़ा हो गया मगर उसने कंट्रोल रखा क्योंकि वो जानता था दोबारा चुसवाएगा तो चुदाई नहीं कर पाएगा।

इधर शाहिद और आज़म बाहर चले गए थे उनको बियर पीनी थी।

करीब 20 मिनट की चुदाई के बाद दोनों झड़ गए और साथ में रूबी भी झड़ गई। अब उसके जिस्म में बिल्कुल ताक़त नहीं थी.. मगर फैजान इनके अलग होते ही बिस्तर पर चढ़ गया और लंड गांड में पेल दिया।

रूबी इस अचानक हमले के लिए तैयार नहीं थी मगर फैजान ने उसकी कमर को कसके पकड़ा हुआ था, जिससे वो आगे ना गिर सके।

रूबी- उफ़ जान लेने का मंसूबा है क्या सालों.. आह.. उफ़ एक उतरा नहीं कि तू चढ़ गया..

फैजान- साली रांड़ बड़े लंड लेकर मज़ा आ रहा था क्या.. जो मेरे से तुझे तकलीफ़ हो रही है आह.. उहह उहह साली क्या गांड है उफ़ आह.. ले मादरचोद आह.. आ..

फैजान स्पीड से धक्के दे रहा था। अब रूबी भी उसका साथ देने लगी गांड को हिला-हिला कर चुदने लगी।

फैजान- आह.. साली क्या मस्त है रे तू उहहा ले आज तेरी गांड और फुददी दोनों मारूँगा।

इतना कहकर फैजान ने लंड गांड से निकाल कर फुददी में डाल दिया और चोदने लगा। कोई दस मिनट बाद वो झड़ गया।

अब रूबी की फुददी ने भी थोड़ा सा पानी फेंका.. जैसे उसकी टंकी खाली हो गई हो। वो निढाल सी होकर बिस्तर पे लेट गई। शाहिद के हाथ में बियर की बोतल थी वो अन्दर आकर रूबी के पास खड़ा हो गया। उसका लंड तना हुआ था जिसे देख कर रूबी घबरा गई।

रूबी- नहीं शाहिद प्लीज़ अब और नहीं.. मेरी हालत बहुत खराब हो गई है.. अब किया तो मैं मर जाऊंगी।

शाहिद- डर मत जानेजिगर मैं इतना बेरहम नहीं हूँ.. ये साला तो जब तक 3-4 बार पानी ना फेंके.. ठंडा नहीं होता मगर आज तो इसे तड़पने दे.. तेरी चुदाई कल करूँगा।

यह बात सुनकर रूबी ने ठंडी आह.. भरी उसको बड़ा सुकून मिला।

आज़म- ये क्या बात हुई यार.. एक ही बार तो किया हमने.. ये साली रांड़ नाटक कर रही है। अभी इसकी फुददी चाट कर गर्म कर दूँगा।

रज़िया- नहीं आज़म.. ये कोई नाटक नहीं है कमीनों.. बेचारी ने एक साल बाद आज चुदाई की है। एक साल में फुददी चिपक कर सील बंद हो जाती है। फिर तुम सब के लंड है भी भारी-भरकम.. देखो गौर से कैसे फुददी पर सूजन आ गई है और इसकी गांड भी लाल हो गई। अब कोई इसके पास नहीं जाएगा.. इसको आराम करने दो।

रूबी- थैंक्स रज़िया.. सच में मेरी फुददी का सबने भुर्ता बना दिया। हाँ अगर तुम भी साथ होतीं तो इन पांडवों को हम संभाल लेते.. मगर मैं अकेली इनसे हार गई।

रज़िया- सही कहा तुमने.. अगर आज मैं होती तो और मज़ा आता.. मगर अबकी बार हम सब मिलकर ही मज़ा करेंगे।

रज़िया की बात सुनकर सब खुश हो गए। अबकी बार तो दो फुददी साथ होंगी.. यही सोचकर सबने रूबी की फुददी बख्श दी। उसके बाद सबने एक राउंड बियर का लगाया और अपने-अपने घर चले गए। इधर शाहिद ने रज़िया और रूबी को घर छोड़ा और फिर अपने घर वापस आ गया।

 
फ्रेंड्स, वैसे तो शाहिद अक्सर बियर पीकर जाता था मगर तब तक सब सो चुके होते थे.. मगर आज वो घर पहुँचा तो उसकी मॉम और अब्बू जाग रहे थे जिन्हें देख कर शाहिद की हवा टाइट हो गई।

वो सीधा अपने कमरे में चला गया। उसकी इतनी हिम्मत भी नहीं हुई कि वो कुछ पूछ सके क्योंकि वो कितना भी बिगड़ा हुआ क्यों ना हो.. मगर अपने अब्बू के सामने वो इस हालत में नहीं जा सकता था।

थोड़ी देर बाद उसकी अम्मी ऊपर आईं.. पहले तो उसे गुस्सा किया- इतनी रात को आया और ऊपर से पीकर आया है। तेरे अब्बू को पता लग गया तो पता है ना क्या होगा।

शाहिद ने अपनी मॉम को मीठी-मीठी बातों से फुसला लिया, झूठ कह दिया कि दोस्त की बर्थडे पार्टी थी.. इसी लिए ऐसा कुछ हो गया।

उसकी अम्मी ने बताया कि किसी काम के सिलसिले में उसके अब्बू को अर्जेंट दिल्ली जाना पड़ रहा है, अभी निकलना है तू जल्दी से फ्रेश होकर नीचे आ, उन्हें स्टेशन छोड़ के आना है।

शाहिद ने ज़्यादा कुछ पूछा नहीं क्योंकि अक्सर उसके अब्बू बाहर जाते हैं। वो अच्छे से रेडी हुआ.. अपने आपको ठीक किया.. मुँह में पर्फ्यूम छिड़का ताकि बदबू ना आए और अब्बू को छोड़ने चला गया। तब पता लगा कि साथ में शबनम के अब्बू भी जा रहे हैं मगर तब भी उसने कोई सवाल ना किया और उनको छोड़ कर जब वो वापस आ गया तो उसकी नज़र आपा और शबनम पर पड़ी, जो साइड में आराम से सोफे पर बैठी हुई थीं।

शाहिद- अरे आपा, आप इस टाइम यहाँ? सब ठीक तो है ना और शबनम तुम अभी तक जागी हो क्या बात है?

ज़ुबैदा- अरे मैं लेकर आई हूँ यहाँ.. तेरे जीजा तो तेरे अब्बू के साथ गए हैं। अब ये अकेली वहाँ क्या करेगी, बस इसी लिए अपने साथ ले आई। वैसे भी उनको 2 दिन लगेंगे, तब तक ये यहीं रहेगी।

शाहिद बहुत खुश हुआ कि अब उसको और शबनम को मस्ती के लिए ज़्यादा टाइम मिल जाएगा मगर शाहिद ने ये बिल्कुल नहीं सोचा था कि आज रात ही उसको मज़ा मिलने वाला है।

शाहिद- ये तो अच्छी बात है अम्मी.. मगर सुजान कहाँ है, दिखाई नहीं दे रहा?

ज़ुबैदा- वो कब का सो गया.. चलो फिरोजा आ जाओ तुम्हारे चाचा तो है नहीं.. तुम मेरे साथ ही सो जाओ।

शबनम- मॉम मैं तो मामू के पास सोऊंगी.. आप बहुत खर्राटे मारती हो।

शबनम- मॉम, मैं तो मामू के पास सोऊंगी.. आप बहुत खर्राटे मारती हो।

शबनम की बात सुनकर सभी हंसने लगे। फिर शाहिद की अम्मी ने कहा- अच्छा जा सो जा!

मगर फिरोजा ने कहा- ये रात को शाहिद को परेशान करेगी, इसको हाथ-पैर चलाने की आदत है।

मगर शबनम कहाँ मानने वाली थी, आख़िर उसकी मर्ज़ी ही चली और वो शाहिद के साथ उसके रूम में चली गई।

शबनम ने एक ट्रॅक सूट पहना हुआ था.. जिसमें वो बड़ी प्यारी लग रही थी।

शाहिद- बड़ी शैतान हो गई है तू.. अपनी मॉम के साथ क्यों नहीं सोई?

शबनम- मॉम के साथ मज़ा नहीं आता मामू.. आपके साथ सोऊंगी तो अच्छी नींद आएगी। फिर आपके साथ मस्ती करने का आज मेरा मन भी बहुत कर रहा है। एक बार आपकी फुन्नी दिखाओ ना मुझे!

शाहिद- अरे बदमाश कहीं की.. अभी नहीं, पहले सबको सोने दो और मैंने कहा था ना.. फुन्नी नहीं..

शाहिद आगे बोलता इससे पहले ही शबनम ने कहा- हाँ पता है.. लंड.. अब दिखाओ ना प्लीज़!

शाहिद- अरे पूरी रात पड़ी है.. दिखा भी दूँगा और आज नए तरीके से मज़ा भी दूँगा.. मगर थोड़ा सब्र कर, मैं बाथरूम जाकर फ्रेश होकर आता हूँ.. तब तक नीचे सब सो भी जाएंगे ओके!

शबनम को वहीं बैठाकर शाहिद बाथरूम चला गया। उसका लंड तो पहले ही अधूरा था, अब शबनम की बात सुनकर उसको लगा कि रूबी की कमी अब शबनम पूरा कर देगी।

अरे अरे अभी ग्रुप सेक्स का मज़ा लेकर आए हो.. इतनी जल्दी दोबारा सेक्स.. ना ना.. थोड़ा वेट करो, शाहिद को फ्रेश होने दो। तब तक चलो आज शाजिया को भी तो कुछ नया करना है.. याद है या भूल गए? लो खुद देख लो।

शाम को खाने के बाद शाजिया ने अपनी अम्मी से मोबाइल ले लिया कि उसको कुछ काम की बात नेट से देखनी है और उसको लेकर वो अपने कमरे में चली गई।

शाजिया कहानी रीड करने के लिए बहुत ज़्यादा उत्सुक थी। उसने जल्दी से राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम साइट ओपन की और कहानी पढ़ने लगी।

जैसे-जैसे शाजिया सेक्स कहानी पढ़ रही थी.. उसका बदन जलने लगा था, उसके निप्पल हार्ड हो गए थे और फुददी तो मानो ऐसे जल रही थी, जैसे कोई आग की भट्टी हो।

शाजिया अब वासना की आग में जल रही थी, उसने अपने चुचों को सहलाना शुरू कर दिया था.. कभी फुददी को रगड़ती। ऐसे ही एक घंटा वो कहानी पढ़ती रही और गरम होती रही। अब उसकी बर्दाश्त की ताक़त खत्म हो गई, वो फुददी को जोर-जोर से रगड़ने लगी।

शाजिया- आह.. आ आह.. आपा आह.. ये कैसी कहानियों की साइट बताई आपने आह.. मेरी फुददी में आग लगा दी इसने.. उफ़ आह..

शाजिया फुददी को जोर-जोर से रगड़ने लगी। अब उसकी उत्तेजना चरम पर थी मगर उसको लगा कि ऐसे तो उसका नाइट ड्रेस खराब हो जाएगा तो उसने फ़ौरन अपना हाथ रोक लिया और जल्दी से कपड़े निकाल दिए। कुछ पल बाद उसने ब्रा-पेंटी भी निकाल दी, वो एकदम नंगी हो गई। तभी उसे रज़िया की बात याद आई कि कैसे नंगी होकर ज़्यादा मज़ा आता है।

शाजिया को कहानी का सीन भी याद आया कि कैसे वो लड़की नंगी अपने आपको देखती है। बस फिर क्या था शाजिया ने लाइट ऑन की और अपने आपको मिरर में देखने लगी।

चमकता उसका गोरा जिस्म उस पर कश्मीरी सेब जैसे उसके 30″ के मम्मे और उन पर हल्के पिंक कलर के निप्पल.. जो सेक्स की आग में जलकर बाहर को निकल आए थे.. एकदम नुकीले हो गए थे। नीचे पतली बल खाती उसकी कमर और उसके नीचे बड़ा पाव जैसी फूली हुई कुंवारी फुददी, जिसकी लकीर पिंक थी। मगर दोनों फांकें ऐसी चिपकी हुई थीं कि कागज की नोक भी अन्दर ना जाए और उसकी गांड भी 30″ की एकदम साँचे में ढली हुई।

शाजिया का ये हुस्न देख कर किसी का भी लंड सलामी देने लगे।

कुछ देर तक शाजिया अपने जिस्म को निहारती रही, फिर बिस्तर पे जाकर कहानी पढ़ने लगी और अपनी उंगली फुददी पर घुमाने लगी।

शाजिया- आह.. आह.. आपा सच में उफ़ बिना कपड़ों के आह.. ज़्यादा मज़ा आ रहा है.. उई आह.. ये इतनी खुजली क्यों हो रही है.. एयेए आह.. आ आपा उफ़ आह.. आह..

शाजिया पहले ही गर्म थी। अब उंगली ने अपना कमाल दिखाया और शाजिया की फुददी झड़ने लगी। उसका पूरा हाथ फुददी रस से भर गया।

काफ़ी देर तक शाजिया वैसे ही पड़ी रही फिर वॉशरूम जाकर उसने अपनी फुददी को साफ किया और बिस्तर पर आकर नंगी लेट गई। अब उसके दिमाग़ में लंड की पिक चल रही थी कि कैसे वो उसकी फुददी में जाएगा.. फिर उसको दर्द का ख्याल आया तो वो डर गई।

शाजिया- नहीं बस उंगली से ही मज़ा लूँगी.. लंड से बहुत दर्द होगा आह.. मगर एक ना एक दिन तो लेना होगा.. नहीं, जब होगा तब की बात अलग है।

शाजिया काफ़ी देर तक अपने आपसे बातें करती रही। वो कशमकश में थी कि चुदाई का मज़ा ले या नहीं। फिर उसने सारे विचार झटके और फिर कहानी रीड करने लगी।

दोस्तों ये चुदाई की कहानी का चस्का ऐसा ही होता है.. शाजिया बस पढ़ती जा रही थी और फिर उसकी वासना बढ़ती जा रही थी। साथ ही वो अपनी फुददी को सहला कर मज़ा ले रही थी।

 
कुछ ही पलों में शाजिया फिर से उत्तेजित हो गई और जोर से फुददी रगड़ने लगी। उसको ऐसा लगा कि अन्दर बहुत खुजली हो रही है, उसने थोड़ी सी उंगली अन्दर की तो उसको दर्द हुआ। फिर उसने फुददी को ऊपर से ही रगड़ कर अपने आपको शांत किया और खुद को साफ करके कपड़े पहन लिए।

शाजिया- अब्बू रे ये मुझे क्या हो गया.. कितना टाइम हो गया, मैं ऐसे करती रहूंगी तो सुबह हो जाएगी और ये पानी क्या निकला.. मेरी तो टांगें जवाब दे गईं और ये फुददी की खुजली भी वैसी की वैसी है। उंगली से कितना दर्द हुआ तो इतना बड़ा लंड कैसे जाता होगा.. ना बाबा मैं लंड कभी नहीं लूँगी.. बस ये फाइनल है।

काफ़ी देर तक शाजिया अपने आपसे बात करती रही, फिर कब उसकी आँख लगी पता भी नहीं चला। उसको इतनी ज़बरदस्त नींद आई.. जैसे बरसों बाद आज सोई हो।

उधर शाहिद भी बाथरूम से बाहर आ गया था। शबनम तो बस पेट के बल लेटी आने वाले पलों को याद करके मुस्कुरा रही थी।

शाहिद ने सोचा एक बार नीचे देख लिया जाए.. फिर इस कच्ची कली को मसलेगा। यही सोच कर वो नीचे गया और उसकी उम्मीद के मुताबिक खर्राटे जोरों पर चल रहे थे यानि सब सो गए। वो धीमे से वापस ऊपर आ गया।

शाहिद ने जब दरवाजा लॉक किया तो शबनम पलट गई और एक क़ातिल मुस्कान देने लगी।

शाहिद- क्या बात है.. बहुत मुस्कुरा रही हो.. क्या सोच रही हो?

शबनम- कुछ नहीं मामू.. आपने कहा था ना कि आज अलग मज़ा दोगे.. वही सोच रही हूँ।

शाहिद- अच्छा ये बात है.. तो चल एक काम कर.. पहले सारे कपड़े निकाल दे फिर देख तुझे कैसे मज़ा देता हूँ।

शबनम- सारे कपड़े क्यों मामू.. नहीं मुझे आपसे शर्म आएगी।

शाहिद- ओये होये.. क्या बात है फुददी चुसवाई तब शर्म नहीं आई.. अब कैसी शर्म! चल निकाल देर मत कर आज तुझे मैं जन्नत की सैर कराता हूँ।

शबनम- ठीक है मामू.. आपकी बात कैसे टाल सकती हूँ.. अभी निकाल देती हूँ।

शबनम ने झट अपने कपड़े निकाल दिए और इधर शाहिद तो पहले ही भरा हुआ था, उसने भी नंगे होने में देर ना की।

जब शाहिद की नज़र शबनम पर पड़ी.. तो वो बस देखता रह गया।

जैसा मैंने पहले बताया था, शबनम बहुत खूबसूरत लड़की है.. उसके छोटे-छोटे गहरे काले बाल, एकदम बड़ी-बड़ी आँखें और आँखों का कलर नीला, जैसे कोई लेंस लगाया हुआ हो, चाँदी जैसा चमकता रंग.. सीना तो ज़्यादा नहीं.. मगर संतरे जैसे इसके गोल मम्मे हैं.. एकदम ठोस गेंदें जैसे.. पूरे सुडौल मम्मे जैसे साँचे में ढाल कर बनाए गए हों। उसके चुचों पर मुकुट से तने एकदम छोटे से निप्पल.. जैसे कोई हल्के भूरे रंग के बटन टंके हों.. और फुददी तो आपको पता ही है.. एकदम क्लीन.. बस फुददी के आस-पास हल्के से मखमली रोंए उगे हुए थे। शबनम की छोटी सी फुददी एकदम फूली हुई थी और हाँ इसकी जांघें मोटी-मोटी और गांड बाहर को निकली हुई बहुत मस्त लग रही थी



ये देख कर शाहिद का लंड फुंफकारने लगा, उसमें आज अलग ही कड़कपन आ गया था।

शबनम- क्या हुआ आ जाओ ना.. कल आपने मेरी फुन्नी चाटी थी, तो मज़ा आ गया था.. मामू आप आज भी चाटोगे ना?

शाहिद- फिर फुन्नी.. फुददी बोल मेरी जान और आज तुझे उससे भी ज़्यादा मज़ा दूँगा।

शाहिद की बात सुनकर शबनम खुश हो गई और भाग कर उससे लिपट गई।

शाहिद का लंड उसके पेट में चुभने लगा तो शबनम ने अलग होकर उसको पकड़ लिया।

शबनम- बहुत गंदा है.. हमेशा चुभता रहता है, अभी इसको चूस कर इसका मस्ती रस निकाल देती हूँ.. फिर कैसे चुभेगा।

शाहिद- मेरी शबनम.. ये लंड ऐसे नहीं मानेगा इसे तेरी कच्ची फुददी चाहिए.. अब तो उसके अन्दर जाकर ही ये शांत होगा।

शबनम- मामू ये आप क्या बोल रहे हो.. ये बहुत बड़ा है और मेरी फु.. नहीं फुददी छोटी सी है.. इसमें ये कैसे जाएगा?

शाहिद- मेरी जान ये जो फुददी है ना.. इस लंड के लिए ही बनी है, ये बाहर से ज़रूर छोटी दिखती है.. मगर ये इससे भी बड़ा लंड निगल सकती है, बस थोड़ी मेहनत करनी होगी.. फिर असली मज़ा आएगा।

शबनम- ओह मामू रियली..! फिर तो आज आप इसे डाल ही दो, मुझे बहुत ज़्यादा मज़ा लेना है आज.. अब जल्दी डालो ना।

शाहिद- हा हा हा पागल है तू.. लंड ऐसे नहीं जाएगा.. पहले कुछ तैयारी करनी होगी। चल अब बिस्तर पे आ, वहीं तुझे सब समझा दूँगा।

शबनम बिस्तर पर लेट गई और शाहिद उसके पास लेट गया। अब वो शबनम को किस करने लगा, उसके मुलायम होंठों का रस पीने लगा। वैसे तो शबनम अनाड़ी थी मगर वो शाहिद का साथ देने की पूरी कोशिश कर रही थी।

शाहिद पर अब हवस हावी हो गई थी। वो शबनम के छोटे मम्मे दबाए जा रहा था.. उन्हें पूरा मुँह में लेकर चूस रहा था।

शबनम- आह.. ससस्स मामू आह.. धीमे आह.. दर्द होता है आह.. ऑच प्लीज़ आह.. काटो मत आह.. उई ऐसे ही चूसो आह.. अब मज़ा आ रहा है।

शाहिद धीमे-धीमे शबनम के पूरे जिस्म को चाटने लगा। उसकी टांगें ऊपर करके वो अब अपनी भानजी की नंगी चिकनी फुददी पे टूट पड़ा।

अब भानजी की चुदाई तय थी.

 
तो मित्रो, शबनम तो इस चुसाई से इतनी गर्म हो गई थी कि उसका पूरा जिस्म हरकत करने लगा था। वो कमर को हिला-हिला कर मज़ा ले रही थी और आँखें बंद किए हुए गरम आहें भर रही थी।

शबनम- आह.. आह.. मामू आह मज़ा आ रहा है.. आह.. चूसो आह.. उई आह.. मामू जोर से करो आह.. मेरी फुददी के आह.. अन्दर खुजली हो रही आह.. आ हय जीभ अन्दर तक करो मामू.. आह..

शाहिद जीभ की नोक से फुददी को कुरेदने लगा। अब शबनम की फुददी रिसने लगी थी, उसमें से पानी बाहर आने लगा था।

शाहिद ने मौका देख कर अपनी उंगली पर थूक लगाया और फुददी की फाँकों को फैला कर उंगली अन्दर करने लगा।

शबनम- आआह.. नहीं मामू.. ओफ आह.. बहुत दर्द हो रहा है आह.. नहीं प्लीज़ निकालो आह.. बस जीभ से करो आह..

शाहिद समझ गया कि ये अभी बहुत छोटी फुददी है.. इसको अभी चोदना ख़तरे से खाली नहीं है, वो फिर से फुददी को चाटने लगा।

पांच मिनट बाद ही शबनम ने जोर की आह.. भरी और उसकी फुददी बहने लगी, जिसे शाहिद ने चाट कर साफ कर दिया।

शबनम- आह.. आह मामू मैं गई आह.. मेरा उफ़फ्फ़ श्स्स्स रस निकल रहा है आह आह..

शाहिद ने पूरा रस गटक लिया और सीधा बैठ गया, उसका लंड अब आग उगलने लगा था।

शाहिद- तू तो झड़ गई मेरी जान.. चल अब मेरे लंड को भी ठंडा कर दे.. कब से तड़प रहा है।

शबनम ने बिना कुछ बोले लंड को मुँह में ले लिया और बड़े मज़े से चूसने लगी।

शाहिद- आह.. चूस मेरी जान.. ओफ तेरा मुँह भी फुददी का मज़ा दे रहा है आह.. काश तेरी फुददी में लंड घुसा सकता आह.. कितना मज़ा आता आह.. चूस आ.

शबनम ने लंड मुँह से निकाला और मासूमियत से पूछा- मामू फुददी में डालने से ज़्यादा मज़ा आता है.. तो आप डाल दो ना!

शाहिद- नहीं मेरी जान.. अभी उंगली डाली तो तुझे दर्द हुआ था, लंड जाएगा तो बहुत दर्द होगा और तेरे चिल्लाने से सबको पता लग जाएगा।

शबनम- हाँ दर्द तो बहुत हुआ.. मगर आपके लिए मैं सह लूँगी.. आप लंड को घुसा दो।

शाहिद- ओह.. शबनम तुम कितनी अच्छी हो मेरी जान.. अभी तो चूस के मज़ा दे दे.. इसको घुसने का भी सही मौका आने दे, फिर तुझे कली से खिलता गुलाब बना दूँगा।

शबनम कुछ कहती, इससे पहले शाहिद ने उसके मुँह को पकड़ा और लंड अन्दर घुसा दिया। अब शबनम मज़े से लंड अन्दर-बाहर करके चूसने लगी थी।

शाहिद- आह.. चूस ओफ मज़ा आ रहा है मेरी जान आह.. चूसती रह.. आह.. ओफ नीचे आह.. गोटियाँ भी चूस.. ओफ हाँ ऐसे ही बस आह.. जोर से चूस आह.. गुड आह.. ऐसे ही.. आह.. मेरी जान।

करीब 15 मिनट तक शबनम जी-जान से लंड चूसती रही मगर शाहिद तो रूबी की चुदाई करके आया था.. इतनी जल्दी कहाँ उसका पानी निकलना था।

शबनम- ओह.. मामू कब से चूस रही हूँ आज आपका रस क्यों नहीं निकल रहा है, मेरा मुँह दुखने लगा है।

शाहिद- मेरी जान ये ऐसे नहीं निकलेगा.. चल लेट जा, तेरी कच्ची फुददी पर रगड़ खा कर शायद ये लंड पिघल जाए।

शाहिद ने शबनम को लेटा दिया और खुद उस पर सवार हो गया। अब वो लंड को फुददी पर घुमाने लगा, साथ ही शबनम के मम्मे चूसने लगा।

शबनम को भी मज़ा आने लगा और वो भी गर्म हो गई। अब हालत ऐसे थे कि शाहिद का लंड शबनम की जाँघ में फँसा हुआ था और शाहिद जोर-जोर से उसको ऊपर से ही चोद रहा था। कभी-कभी लंड ऊपर आ जाता और सीधा फुददी से टकराता.. जिससे शबनम की सिसकी निकल जाती।

लगभग दस मिनट ये खेल चला। अब शाहिद चरम पर आ गया था। इधर शबनम भी बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो गई थी।

शबनम- आह आह.. मामू जोर से करो ओफ आह.. मैं गई मामू.. आह.. उफ़फ्फ़.. ससस्स..

शाहिद- ले आह.. मेरी जान ओफ मेरा लंड भी आह.. आग उगलने वाला है.. एयाया आह..

दोनों एक साथ झड़ गए। अब कमरे में बस दोनों की साँसें सुनाई दे रही थीं। काफ़ी देर शाहिद ऐसे ही शबनम पर पड़ा रहा। फिर उसको लगा कि शबनम पे वजन ज़्यादा है.. और वो परेशान हो रही है तो वो साइड में हो गया।

शबनम- ओफ मामू, कितना मज़ा आया आज.. मगर अपने सारा रस वेस्ट कर दिया.. आपका भी माल गया और मेरा भी.. हम दोनों एक-दूसरे का मजा रस चाट लेते तो अच्छा होता।

शाहिद- कोई बात नहीं जान.. अब तो ये खेल चलता ही रहेगा.. फिर चाट लेना। बस एक बार तेरी फुददी में लंड डालने का मौका मिल जाए.. फिर तो हर दिन, हर रात तेरी चुदाई करूँगा।

शबनम- ये चुदाई क्या होती है मामू?

शाहिद- जब तेरी फुददी में लंड जाएगा ना और अन्दर रस छोड़ेगा.. उसे चुदाई कहते हैं समझी।

शबनम- हाँ मामू समझ गई मगर आप ये लंड मेरी फुददी में कब डालोगे?

शाहिद- सही टाइम आने पर.. अब तू ज़्यादा बोल मत.. नहीं तो ये लंड फिर जाग जाएगा। चल कपड़े पहन और सो जा.. नहीं फिर से तुझे इसे चूस के ठंडा करना होगा और अबकी बार ये जल्दी नहीं पानी छोड़ेगा समझी.. चल अब जल्दी से सो जा.. तब तक मैं भी कपड़े पहन लूँ।

इतना कहकर शाहिद कपड़े पहनने लगा और शबनम का मुँह पहले ही दुख रहा था और 2 बार झड़ने के बाद उसको नींद भी बहुत आ रही थी.. इसलिए उसने आगे बात करना ठीक नहीं समझा और चुपचाप कपड़े पहन कर बिस्तर पर लेट गई।

शाहिद- क्या हुआ मेरी जान क्या मुझसे नाराज़ हो गई?

शबनम- नहीं मामू आपसे कैसे नाराज़ हो सकती हूँ.. आपने तो मुझे इतना मज़ा दिया है।

शाहिद ने शबनम को किस किया और सोने के लिए बोला क्योंकि रात काफ़ी हो गई थी इसलिए दोनों सुकून की नींद सो गए।

फ्रेंड्स अब यही अटके रहोगे क्या.. हमारी राबिया का हाल भी जान लो। रात की ज़बरदस्त चुदाई के बाद उसकी सुबह कैसी हुई.. चलिए देखते हैं।

 
चाचा सुबह-सुबह घर से निकल गए.. उधर सोफ़िया और सुरैया भी वापस आ गई थीं। जब उन्होंने देखा कि राबिया अब तक सो रही है तो सुरैया ने सोफ़िया से कहा कि बहू अब तक सोई है उसे उठाओ।

सोफ़िया - ये शहर की लड़कियां हैं.. वहां देर तक सोने की आदत है.. रहने दे ऐसा भी कौन सा काम पड़ा है.. उठ जाएगी।

सुरैया ने भी ज़्यादा ध्यान नहीं दिया, वो अपने काम में लग गई। कोई 8 बजे राबिया उठी तो उसका पूरा बदन दर्द कर रहा था.. मगर वो जानती थी कि यहाँ ज़्यादा सोना ठीक नहीं तो वो उठी और नहा-धो कर रेडी हो गई। फिर अपनी सास के पास चली गई।

सोफ़िया - उठ गई बहू.. बहुत देर तक सोई.. तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना?

राबिया- हाँ अम्मी जी वो रात को देर से नींद आई.. आप तो थी नहीं इसलिए अकेले मुझे डर लग रहा था, बस इसीलिए देर से आँख खुली।

सोफ़िया - हा हा हा तुम शहर की लड़कियां भी ना कमजोर होती हो, जाओ ये बर्तन बाहर रख दो.. वापस अन्दर रखने हैं। अब सारे मेहमान तो गए इनका यहाँ क्या काम?

सुबह से दोपहर हो गई मगर ऐसा कुछ खास नहीं हुआ.. बस मौका देख कर चाचा ज़रूर उसको देख कर मुस्कुरा देता।

दोपहर के खाने के बाद एक पल ऐसा आया.. जब ऊपर राबिया अकेली थी और मौका देख कर चाचा भी पीछे आ गया और राबिया को पीछे से बांहों में जकड़ लिया।

राबिया- ओह.. ये आप क्या कर रहे हो कोई देख लेगा तो आफ़त आ जाएगी।

चाचा- मेरी रानी तूने रात को मुझे अपना दीवाना बना लिया है। देख अभी भी लंड कैसे अकड़ा हुआ है, अब तो रात को तेरी गांड में जाकर ही इसको चैन मिलेगा।

राबिया- आप बड़े बेसब्र हो.. हटो कोई देख लेगा तो आप गांड क्या कुछ भी मारने के काबिल नहीं रहोगे।

चाचा- अरे कोई नहीं देखेगा.. एक बार लंड चूस दे ना.. फिर चला जाऊंगा।

राबिया- आप सच में आज मरवाओगे.. लाओ लंड इधर.. चूस देती हूँ, नहीं रात को पता नहीं आप इसका बदला कैसे लोगे.. मेरी तो अभी से हालत खराब है.. पता नहीं रात को मेरी गांड का क्या हाल होने वाला है।

राबिया नीचे बैठ गई और चाचा के लंड को चूसने लगी। अब इसे इन दोनों की किस्मत कहो या कहानी की ज़रूरत.. पास की छत पर खड़े जावेद ने ये सीन देख लिया। जब राबिया खड़ी हुई तो उसकी नज़र उससे मिली और उसकी आँखें फट गईं।

चाचा- अरे क्या हुआ.. इतनी डरी हुई क्यों है?

जब चाचा ने राबिया की नज़र का पीछा किया तो जावेद को देख कर वो भी घबरा गए।

जावेद जल्दी से वहां से भाग गया और राबिया बस चाचा को देखने लगी, शायद आँखों ही आँखों में वो पूछ रही हो कि अब क्या होगा?

चाचा- अरे तू चिंता ना कर.. इस हराम के जने को मैं संभाल लूँगा.. चल तू नीचे जा.. मैं बाद में आता हूँ।

राबिया नीचे चली गई.. मगर उसकी धड़कन तेज थी, पता नहीं अब उसकी जिंदगी में क्या मोड़ आएगा। उधर चाचा भी कुछ सोचकर नीचे आए और सीधे बाहर चले गए।

मौका देखकर चाचा ने जावेद को अपने पास बुलाया और थोड़ा गुस्से में उससे बोले कि तूने क्या देखा है और किसको बताया है?

जावेद- जो आपने किया.. वही देखा है मैंने आपके बारे में कई लोगों से सुना था आप गाँव की लड़कियों और औरतों के साथ गलत करते हो.. मगर अपनी बहू की चुदाई… छी छी.. आपको ज़रा भी शर्म नहीं आई?

चाचा- ओ हराम की पैदाइश, ज़्यादा मत बोल.. हरामी जो हुआ तेरी वजह से हुआ.. तू कुत्ता साला नामर्द कहीं का.. अगर तूने उसको बहकाया ना होता, वो ऊपर ना जाती और उसके बाद अपना पानी निकलवा कर हरामी भाग गया तू.. ज़रा सोच उस पर क्या गुज़री होगी? मैंने तो बस उसकी आग बुझाई है।

चाचा की बात सुनकर एक बार तो जावेद डर गया.. मगर फिर उसे लगा कि चाचा खुद राबिया को लंड चुसवा रहा था वो क्यों डरे?

जावेद- मेरी बात जाने दो.. मैं तो कुँवारा हूँ.. कुछ भी करूँ। लेकिन वो तो आपकी बहू है.. ये तो सोचा होता आपने.. ऐसे कैसे उसके साथ सब किया?

चाचा- ओए हरामी.. अब मेरा मुँह ना खुलवा तू.. वो तो बहू है, तेरी बहन क्या है मेरी बेटी जैसी है ना साले.. उसको औलाद का सुख किसने दिया हाँ.. मैंने दिया… समझा तू?

चाचा- चुप, साला हरामी वो साला तेरा जीजा उसको बांझ कहता था.. उसको तलाक देना चाहता था। पता है तेरी बहन मरने जा रही थी। मैंने उसे बचाया और उससे कारण पूछा, तब उसने अपनी कहानी मुझे सुनाई और मैंने उसको यकीन दिलाया कि उसको जल्दी बच्चा हो जाएगा.. उसकी जिंदगी पहले जैसी हो जाएगी, तब जाकर वो मानी। साला मुझे हैवान कहता है।

जावेद को अपनी ग़लती का अहसास हो गया क्योंकि एक साल पहले उसकी बहन बहुत दुखी थी, उसका जीजा उसे बहुत मारता था मगर उसके पेट में बच्चा है, ये बात सुनकर उसका जीजा एकदम बदल गया। ये सब चाचा की करनी थी.. ये उसे आज ही पता लगा।

जावेद- मुझे माफ़ कर दो चाचा, मैंने आपको गलत समझा। अल्लाह के लिए ये बात किसी को मत बताना मेरी आपा का घर बिखर जाएगा।

चाचा- अगर बताना होता तो अब तक बता चुका होता। तू भी आज की बात भूल जाना.. और मेरी बहू की बदनामी से पहले अपनी बहन को याद कर लेना.. समझा!

जावेद- नहीं.. मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगा, आप बेफ़िक्र रहो। मगर चाचा, भाभी बहुत सुन्दर है, कल मुझे बहुत मज़ा दिया.. बस एक बार मैं भी उनको मज़ा देना चाहता हूँ।

चाचा- तू अपनी औकात भूल रहा है और तेरे जैसे नामर्द से वो खुश नहीं हो सकती.. भूल जा उसको तू, समझा!

जावेद- चाचा बस एक बार.. फिर कभी नहीं कहूँगा और उसके बदले मैं आपको एक ऐसा राज बताऊंगा कि आप खुश हो जाओगे।

चाचा- कैसा राज कमीने.. चल पहले बता मेरे काम का हुआ तो आज राबिया से तेरी चुदाई करवा दूँगा।

जावेद ने बोलना शुरू किया तो चाचा के होंठों पर एक मुस्कान आ गई। उनकी आँखों में अलग ही चमक नज़र आने लगी।

चाचा- वाह मेरे बेटे.. ये हुई ना बात, मेरी बहू तो कुछ दिन बाद चली जाएगी मगर तूने तो मुझे यही खजाना बता दिया। अब तो हर रात मेरे मज़े हो गए।

जावेद- तो आज मेरी चुदाई पक्की ना चाचा!

चाचा ने उसको हाँ कहते हुए समझा दिया कि कब और कैसे उसको क्या करना है। फिर चाचा वापस घर चला गया और राबिया को ढूँढने लगा।

राबिया कमरे में बैठी दाल चुन रही थी और उसके पास कोई नहीं था। चाचा ने मौका देखा और अन्दर चला गया।

राबिया- आप यहाँ क्यों आ गए.. अम्मी जी आ जाएंगी.. आप यहाँ से जाओ।

चाचा- अरे भाई.. मेरा घर है मुझे कौन रोकेगा। तुम शायद भूल रही हो तुम मेरी बहू हो.. समझी कोई आएगा भी तो क्या?

राबिया- वो तो ठीक है.. मगर आप कोई हरकत ना करना, और उसका क्या हुआ वो किसी को कुछ बता ना दे?

चाचा- मैंने उसका बंदोबस्त कर दिया.. बस रात को एक बार तू उसे खुश कर देना।

राबिया- ये आप कैसी बात कर रहे हो.. उस कमीने की मैं शक्ल भी ना देखना चाहूँ और आप ऐसा कैसे बोल सकते हो? मैं आपके घर की इज़्ज़त हूँ.. कोई रांड़ नहीं.. जो उसको खुश करूँ?

चाचा- ज़्यादा नखरे मत कर.. उस कमीने की वजह से ही तुझे रात को चुदाई का सच्चा सुख मिला है और रही बात रांड़ की.. तो मेरी राबिया रानी जो औरत अपने शौहर के अलावा किसी पराए मर्द के साथ सोती है ना.. वो रांड़ ही होती है। जैसे रात को तू मेरी रांड़ बनी थी समझी! अब ये सती सावित्री बनने का नाटक बंद कर और जिंदगी के खुल के मज़े ले। वैसे भी वो साला नामर्द 5 मिनट में ढेर हो जाएगा।

राबिया- ठीक है चाचा.. जैसा आप कहो.. मगर कोई और पंगा ना खड़ा हो जाए इसका आप ख्याल रखना बस।

चाचा- उसकी चिंता मत कर.. मैं किस लिए हूँ।

चाचा के जाने के बाद राबिया को अहसास हुआ कि औरत चाहे कितनी भी शरीफ क्यों ना हो, भले मजबूरी में सही मगर अपने शौहर के अलावा वो किसी के साथ सोती है.. तो रांड़ ही बन जाती है। मगर राबिया ने अपनी सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए रांड़ बनना मंजूर कर लिया। अब वो रात के बारे में सोचने लगी।

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फ्रेंड्स, रात की बात रात को देखेंगे.. अभी यहाँ मज़ा नहीं है चलो थोड़ा घूम कर आते हैं। शाजिया का हो गया शाहिद और शबनम का भी हो गया.. अब रूबी और रज़िया भी तो घर गई थीं.. उनका भी देख आते हैं.. क्यों सही है ना?

रात की ज़बरदस्त चुदाई के बाद जब रूबी घर गई तो उसकी मॉम ने डोर खोला।

रोज़ी… ये हैं रूबी की मॉम.. नॉर्मल हाउसवाइफ हैं, उम्र करीब 43 साल.. बाकी कुछ खास नहीं है।

रोज़ी- अरे कहाँ गई थीं तुम? और ये क्या हाल बना रखा है.. किसी से लड़ाई करके आई है क्या.. बाल बिखरे हुए हैं और ये चेहरे पे निशान कैसे.. बता बेटी क्या हुआ?

रूबी- अरे कुछ नहीं मॉम.. बताया तो था फ्रेंड की बर्थडे पार्टी है, वहीं गई थी। वहां सब फ्रेंड्स ने मस्ती की तो ये सब हो गया.. आप भी ना बहुत फ़िक्र करती हो।

रूबी तो थकी हुई थी मगर उसकी अम्मी कहाँ मानने वाली थी।

रोज़ी- फ़िक्र कैसे ना करूँ.. मेरी बेटी ये शहर के बारे में बहुत सुना है अकेली लड़की को ये शहर खा जाता है।

रूबी- मॉम प्लीज़.. अभी तो आप भाषण मत दो, मुझे बहुत नींद आ रही है मुझे सुकून से सोने दो.. बाइ गुड नाईट।

रूबी जाने लगी तो उसकी मॉम को उसके मुँह से बियर की बदबू आई।

रोज़ी- ओह गॉड.. तुमने पी हुई है.. कितनी बार समझाया ये पीना-वीना लड़कियों के लिए अच्छी बात नहीं है।

फर्नाडिस- अरे क्या हुआ रोज़ी.. क्यों आधी रात को घर का दरवाजा खोलकर खड़ी हो?

ये है फर्नाडिस .. रूबी के अब्बू, नॉर्मल मैन.. इनकी उम्र करीब 45 की होगी।

रोज़ी- अपनी लाड़ली को देखो, पीकर आई है, ये सब आपकी वजह से हुआ है। मैंने कितनी बार कहा कि ये बुरी आदत इसे मत सिख़ाओ।

रूबी- अब्बू प्लीज़.. आप ही समझाओ, मैं चली सोने.. अब मुझसे ये भाषण नहीं सुना जाता।

रूबी गुस्से में वहां से चली गई और फर्नाडिस रोज़ी के पास आ गया।

फर्नाडिस- क्यों लड़ती हो तुम उससे.. एक ही तो बेटी है हमारी।

रोज़ी- एक है इसी लिए डरती हूँ, कहीं कुछ हो गया तो? और आपने इसे वाइन की गंदी आदत भी डाल दी है।

फर्नाडिस- अरे वाइन तो अच्छी चीज है और वैसे भी ये किसी खास मौके पर ही पीती है.. अब चलो सो जाओ, मुझे सुबह जल्दी जाना है।

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फ्रेंड्स बोर हो गए क्या.. मगर क्या करूँ ये रूबी के मॉम-अब्बू का इंट्रो जरूरी था। ये भी कहानी का हिस्सा है तो चलो रज़िया के घर भी झाँक लेते हैं।

रज़िया जब गई तो डोर बंद था। उसने बेल बजाई तो एक नवजवान लड़का सामने था, जो दिखने में स्मार्ट था उसने डोर खोला ये याक़ूब है.. रज़िया का छोटा भाई।

याक़ूब- क्या आपा आप भी ना.. बस पार्टी करती रहती हो शाम से मॉम की तबीयत खराब है।

रज़िया- अरे पागल तो मुझे कॉल नहीं कर सकता था तू.. क्या हुआ मॉम को?

याक़ूब- आपको कॉल करने से क्या होता। मैंने डॉक्टर चाचा को बुला लिया था.. मॉम को चक्कर आ रहे थे, अब ठीक हैं। आप आवाज़ मत करना.. वो अभी सोई हैं।

रज़िया- ठीक है मेरे सोना.. चल हम भी सो जाते हैं वरना सुबह दोनों लेट हो जाएँगे।

याक़ूब- आपा आज आपने फिर बियर पी ना.. कितनी गंदी स्मेल आ रही है।

रज़िया- अरे भाई पार्टी में कभी-कभी हो जाता है.. चल अब सो जा, मॉम उठ जाएंगी, तो फिर तू मुझे ही कहेगा।

दोनों चुपचाप अपने कमरे में चले गए और अपने अपने बिस्तर पे सो गए।

आप सोच रहे होंगे कि ये याक़ूब कहाँ से आ गया, तो भाई मैंने पहले ही बता दिया था कि रज़िया का एक भाई है और शाजिया आई, तब ये स्कूल जा चुका था। ज़्यादा सोचा मत करो यार.. आप याद तो कुछ रहता नहीं आपको और मुझे मेल में अजीबोगरीब सवाल करते रहते हो। चलो अब रज़िया की अम्मी से सुबह मिल लेना अभी राबिया की हालत देख लो।

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रात होते होते चाचा ने सारा बंदोबस्त कर लिया था, वो आज राबिया की गांड का भुरता बनाने के मूड में थे। रोज की तरह भाई साहब खेतों पर चले गए और उनकी पत्नी जी सो गईं.. बची चाचा की पत्नी, तो उसको भी बहुत जोरो की नींद आ रही थी.. वो भी 9 बजे लुढ़क गईं। अब ये कैसे सोईं ये भी जान लो आप चाचा आज खुलकर मज़ा लेना चाहता था इसलिए दोनों को खाने में धतूरा के बीज खिला दिए थे। अब ये दोनों तो सुबह तक उठने से रहीं।

चाचा जब राबिया के पास गए वो नाइटी पहन रही थी, जिसे देख कर चाचा को हँसी आ गई।

चाचा- हा हा हा अरे मेरी राबिया रानी.. ये कपड़े क्यों पहन रही है.. आज तो मैं पूरी रात तेरी गांड और फुददी को मारूँगा।

राबिया- आप भी बड़े चोदू हो, इस उमर में ये हाल है तो पता नहीं जवानी में कैसे रहे होगे, बेचारी काकी का क्या हाल करते होगे, आप उनकी तो जान निकल देते होगे।

चाचा- अरे मेरी रानी, वो दिन और थे तेरी काकी तो मुझसे डर कर अपने मायके भाग गई थी मगर मैं भी कहाँ कम था, उसके घर पहुँच गया और वहीं तेरी चाची की जमकर चुदाईकी थी।

राबिया- हाय बेचारी काकी, आप बहुत बड़े चोदूमल हो.. अच्छा ये बताओ अपने वो काला सा पाउडर मुझे दिया था खाने में उनको देने के लिए वो क्या था?

चाचा- मेरी जान उसे धतूरा कहते हैं उससे दिमाग़ सुन्न हो जाता है, ये देसी नशा है। अब वो दोनों अब सुबह तक नहीं उठेंगी और मैं तेरी जमकर चुदाई करूँगा।

राबिया- तो जब तक मैं यहाँ रहूंगी आप रोज उनको ये दोगे क्या?

चाचा- अरे नहीं रानी धतूरा बड़ा घातक होता है.. इसका ज़्यादा सेवन जानलेवा होता है। आज तो तेरी गांड का अच्छे से चोदन कर सकूं इसलिए उनको दिया है, चल अब देर ना कर.. ऊपर छत पर चल.. वही तेरी गांड मारूँगा।

राबिया- अब छत पर जाने की क्या जरूरत है.. वो तो सोई हैं, यहीं कर लेते है ना?

चाचा- चल अब देर ना कर.. ऊपर छत पर चल.. वही तेरी गांड मारूँगा।

राबिया- अब छत पर जाने की क्या जरूरत है.. वो तो सोई हैं, यहीं कर लेते है ना?

चाचा के चेहरे पे खतरनाक मुस्कान आ गई, वो होंठों पे जीभ घुमाते हुए राबिया को बांहों में लेकर बोले- नहीं राबिया रानी.. आज तो खुले आसमान के नीचे ही तेरी चुदाई करूँगा। वैसे तो मैंने बहुत बार खुले आसमान के नीचे ठुकाई की है, मगर आज की बात ही अलग है, आज तो दुगुना मज़ा मिलेगा। चल अब देर ना कर मेरा लंड ये सोच कर ही अकड़ रहा है कि आज तो बहुत मज़ा आने वाला है।

राबिया- आपका तो लंड अकड़ रहा है मगर मेरी गांड फट रही है, पता नहीं आज मेरी गांड के साथ आप क्या करोगे?

वो दोनों ऊपर चले गए, जहाँ जावेद पहले से ही बैठा हुआ था, जिसे देख कर राबिया को गुस्सा आ गया।

राबिया- तुझे थोड़ी बहुत भी शर्म है कि नहीं.. साला नामर्द कहीं का.. अब तू यहाँ क्या लेने आया है?

चाचा- अरे रहने दे राबिया रानी.. बच्चा है.. कुछ मिनट उसको मज़ा भी दे दे, तेरा क्या बिगड़ जाएगा। फिर तुझे असली मज़ा तो मैं दे ही दूँगा।

जावेद- मान जाओ ना भाभी जी.. अब आप हो ही इतनी सुन्दर कि मेरा लंड तो आपको छूने के साथ ही पानी फेंक दे। फिर आपने तो कल इसको ऐसी लाजवाब चुसाई दी कि बेचारा पानी ही फेंकेगा ना!

राबिया- ठीक है.. अब ज़्यादा मस्का मत लगा.. आज भी तेरा लंड चूस कर ही पानी निकाल देती हूँ.. मेरी फुददी तो तेरे से मारी नहीं जाएगी।

जावेद- नहीं भाभी जी.. आज चाहे 2 मिनट ही सही.. मगर भाभी आपकी फुददी ही मारूँगा.. वो भी आपको घोड़ी बना कर चोदूंगा।

राबिया- हा हा हा देखो चाचा.. ये भोसड़ी का मुझे घोड़ी बनाएगा, साला मेरी फुददी में तेरा लंड जल जाएगा.. इसकी आग तुझे नहीं पता है।

चाचा- अब जाने भी दो, क्यों बेचारे को शरमिंदा कर रही है तू.. चल निकाल दे अपने कपड़े.. और इसको जल्दी से ठंडा कर, फिर मुझे भी तेरी गांड भी मारनी है।

राबिया ने नाइटी उतार दी.. अन्दर उसने कुछ नहीं पहना हुआ था, जिसे देख कर जावेद पागल हो गया। आनन-फानन में वो भी नंगा हो गया और राबिया के पास जाकर उससे लिपट गया, वो राबिया को किस करने लगा। राबिया भी उसका साथ देने लगी। कुछ देर बाद दोनों अलग हुए तो राबिया झट से नीचे बैठ गई और जावेद के लंड को चूसने लगी।

जावेद- आह.. सस्स नहीं आह.. बहुत मज़ा आ रहा है उफ़फ्फ़.. अब बस आह.. मुझे आह.. तेरी फुददी मारनी है भाभी आह.. रूको आह.. नहीं।

राबिया मन ही मन हंस रही थी.. उसे पता था कि ज़्यादा देर चुसाई की तो ये झड़ जाएगा। फिर उसने लंड मुँह से निकाल दिया और गांड हिलाते हुए घोड़ी बन गई।

राबिया- आजा मेरे बलमा.. तेरी घोड़ी तैयार है.. कर ले अपना अरमान पूरा।

चाचा अलग बैठा हुआ अपना लंड सहला रहा था और धीमे-धीमे बड़बड़ा रहा था कि हाय रानी आज तो तेरी गांड मारूँगा.. साथ मैं उस कुँवारी फुददी को भी फाड़ दूँगा आह.. आज दोनों को पूरी रात चोदूंगा आह.. साली कब से मेरी नियत उस पर थी आह.. आज तो हाथ आया मौका नहीं जाने दूँगा मैं।

ना ना ज़्यादा सोचो मत.. ये नया ट्विस्ट है, जल्दी पता लग जाएगा आप बस मज़ा लो।

जावेद ने लंड फुददी पर रखा और जोर से झटका मारा तो उसका लंड बिना किसी रुकावट के फिसलता हुआ फुददी में खो गया।

राबिया- हाय मेरे ढीले बलमा.. ओफ अब चोद भी दे आह.. फुददी की आग भड़का दी तूने तो.. ओफ जोर से चोद आह.. निकाल ले अपनी भड़ास आह..

राबिया भी गांड हिला-हिला कर चुदाई करवाने लगी, जिससे जावेद को और मज़ा आने लगा और वो भी स्पीड से धक्के देने लगा।

राबिया की फुददी की गर्मी जावेद को बेहाल कर गई और वो 5 मिनट भी नहीं टिक सका, उसका लंड राबिया की फुददी को रस से भिगोने लगा।

जावेद- आह.. आ मैं गया आह.. मेरी जान आह.. तू बहुत अच्छी है आह.. तेरी फुददी आह.. बहुत गरम है आह.. आह..

राबिया- आह.. साले थोड़ा और करता मज़ा आ रहा था.. ओफ चाचा अब आप ही मेरी प्यास मिटाओ ओफ इस साले ने फुददी की आग को भड़का दिया है आह.. आ जाओ आह.. चाचा आओ ना।

जावेद एक तरफ़ हो गया तो चाचा राबिया के पास आए और उसकी गांड के छेद पर उंगली घुमाने लगे, जिससे राबिया के जिस्म में करंट सा दौड़ गया।

राबिया- आह.. नहीं चाचा अभी नहीं.. ओफ पहले मेरी फुददी को ठंडा करो ओफ बहुत जल रही है आह.. उसके बाद गांड मार लेना।

चाचा- डर मत राबिया रानी.. पहले तेरी फुददी ही मारूँगा, उसके बाद तेरी गांड को ठोकूँगा.. अबे साले तू अब यहाँ क्या कर रहा है, जा और जाकर उसको तैयार कर.. तब तक मैं मेरी प्यारी बहू की फुददी ठंडी करता हूँ।

 
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