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हवस ( रिश्तों में गंदगी ) complete

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अब फ्रेंड्स, आप सोच रहे होंगे इतना सब कुछ होने के बाद आँख ना खुले तो ऐसा हो सकता है क्या.. मगर यहाँ तो हो रहा है.. अब ऐसे लोग भी होते हैं यार, ज़्यादा सोचो मत.. बस कहानी एंजाय करो.

खड़े लंड की रगड़ शाजिया को पागल कर रही थी. अब उसका पानी किसी भी पल निकल सकता था. वो वापस नीचे उतरी और लंड को चूसने लगी. साथ ही अपनी फुददी को हाथ से मसलने लगी. इसमें उसको बहुत मज़ा आ रहा था. वो लंबी साँसें लेने लगी थी.

याक़ूब के लंड से पानी की बूँदें आने लगी थीं.. जिसे शाजिया जीभ से चाटकर मज़ा ले रही थी. अब शायद याक़ूब का रस उसको अच्छा लगने लगा था या वो वासना के चलते ऐसा कर रही थी, ये तो वही जाने.

करीब 5 मिनट बाद उसकी फुददी एकदम आग का गोला बन गई जो किसी भी पल फटने वाली थी और उसी जोश में वो लंड को पूरा मुँह में लेके ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी, साथ में अपनी फुददी को रगड़ने लगी.

दोनों का फव्वारा साथ में छूटा.. मगर इस बार शाजिया जोश में थी तो याक़ूब का सारा रस वो गटक गई और अपनी फुददी का रस अपने हाथ पर लेकर वहीं ज़मीन पे निढाल होकर बैठ गई.

रज़िया जल्दी से उसके पास आई और उसके हाथ को चाटकर उसका रस पीने लगी. वो भी कब से तड़प रही थी. अब उसके बर्दाश्त के बाहर हुआ तो उसने शाजिया का रस चाट लिया.

शाजिया- ओइह आपा.. सच कहा था आपने.. लंड का रस बड़ा टेस्टी होता है. अबकी बार मैंने पूरा पी लिया मगर अपने मेरा रस क्यों पिया.. बोलो?

रज़िया- अरे तेरा रस वेस्ट ना हो इसलिए पी लिया मेरी जान.. अब चल याक़ूब के कपड़े ठीक कर और वहाँ बेड पे चल वही बातें करेंगे.

शाजिया- रूको मैं वॉशरूम होकर आती हूँ आपा फिर हम बातें करेंगे.

शाजिया थोड़ी देर में फ्रेश होकर वापस आ गई, उसने कपड़े भी पहन लिए. रज़िया ने सोचा अगर पीरियड्स नहीं होते तो इसके साथ मज़ा लेती.. मगर उसने कुछ और ही सोचा हुआ था. वो शाजिया के पास आराम से बैठ गई और उसके चेहरे के बाल उसने ठीक किए.

शाजिया- आपा एक बात कहूँ.. क्या आप भी याक़ूब के साथ ऐसा करती हो?

रज़िया- नहीं कभी नहीं.. यार वो मेरा भाई है और मुझे ऐसी ज़रूरत है ही नहीं.. मेरे पास पहले ही अच्छा ख़ासा लौड़ा है.. तो मैं क्यों इस छोटे से लंड से खेलूँगी?

शाजिया- आपा वो तगड़ा लौड़ा शाहिद सर का है ना.. प्लीज़ सच बताना आप?

रज़िया- क्या बात है मेरी जान.. बड़े दिमाग़ लगा रही है, एक बार लंड का रस पिया तो ये हाल है.. बार-बार पिएगी तो सुपर फास्ट हो जाएगी तू हा हा हा हा.

शाजिया- आपा प्लीज़ बताओ ना आप पहली बार शाहिद सर से कैसे चुदी थीं?

रज़िया- ये क्या सर सर लगा रखा है, अब शाहिद बोला कर.. बस जल्दी तुझे उसके लंड का रस पीना है.

शाजिया- नो आपा.. प्लीज़ नहीं आप उनको ऐसा कुछ नहीं बताओगी मेरे बारे में.. प्लीज़ आपा ये बस हमारे बीच की बात है.

रज़िया- अच्छा अच्छा ठीक है.. मैं समझी तुझे एक असली मर्द के लंड के दीदार फ्री में करवा देती.. मगर तेरा मान नहीं तो जाने दे. वैसे भी शाहिद ऐसा लड़का नहीं है, जो किसी के साथ भी चुदाई कर ले.. ही इज एक नाइस गाई यार.. चल जाने दे.

शाजिया- आपा बताओ ना पहली बार शाहिद ने कैसे आपको प्रपोज किया था?

रज़िया- अबे, ये कोई लव वाला मामला नहीं है जो वो मुझे प्रपोज करेगा समझी?

शाजिया- अच्छा जो भी मामला है आपकी पहली चुदाई कैसे की थी शाहिद ने, वो तो मुझे आप बता सकती हो ना?

रज़िया- बता सकती हूँ मेरी जान, मगर आज नहीं जब मेरे पीरियड ख़त्म होंगे तब बताऊंगी.

रज़िया की बात शाजिया के पल्ले नहीं पड़ी कि इस बात का पीरियड से क्या लेना-देना. उसने पूछ ही लिया तो रज़िया ने कहा कि ऐसी बातें बताते टाइम फुददी में आग लग जाती है, जिसे बुझाना ज़रूरी होता है, इसलिए मेरी जान पीरियड खत्म होने दे, सब बता दूँगी. अब सो जा.. देर हो गई है, सुबह जल्दी उठना भी है कि नहीं, तेरी मॉम तुझे दोबारा मेरे साथ नहीं भेजेगी.

शाजिया भी अपनी फुददी का पानी निकाल कर सुकून में थी तो उसको जल्दी नींद आ गई.

उधर गाँव में ग़ज़ल तो बुखार के कारण रात को ऊपर नहीं आई मगर चाचा ने राबिया की जमकर चुदाई की.. उसकी गांड और फुददी को पूरी रात ठोका क्योंकि सुबह वो चली जाने वाली थी. राबिया ने भी अपनी सारी कसर निकाल ली, उसने हर पोज़ में दम से चुदवाया.

रात तो जैसे-तैसे गुजर गई, सुबह सबसे पहले याक़ूब उठा और रज़िया के साथ शाजिया को सोता देख कर वो सोचने लगा कि ये कौन है, फिर उसने रज़िया को उठाया.

याक़ूब- आपा उठो.. आज आप सोई हो और देखो मैं जल्दी उठ गया.

याक़ूब की आवाज़ से दोनों उठ गईं और रज़िया उसे हैरानी से देखने लगी कि आज ये कैसा चमत्कार हो गया था याक़ूब अपने आप कैसे उठ गया?

रज़िया- ये मैं क्या देख रही हूँ याक़ूब तू अपने आप उठ गया.. ये कैसे हुआ?

याक़ूब- पता नहीं आपा.. आज मेरी पूरी बॉडी एकदम रिलेक्स है.. ऐसा लगता है आज नींद पूरी हो गई, तभी आँख खुल गई और ये आपा कौन है?

रज़िया- हा हा हा देखा शाजिया.. तेरे रात के काम ने क्या कमाल किया.

शाजिया- सस्स चुप करो.. आप कुछ भी बोल देती हो. याक़ूब मैं शाजिया हूँ.. तुम्हारी आपा की कॉलेज फ्रेंड हूँ.

याक़ूब और शाजिया ने हाथ मिलाया. फिर शाजिया जल्दी से अपने घर चली गई. इधर रज़िया ने याक़ूब को बताया कि वो उसकी फ्रेंड है.. रात को पढ़ाई के लिए यहाँ आ गई थी.

याक़ूब- वो सब ठीक है आपा मगर उन्होंने रात को क्या किया था मेरे साथ.. जो मुझे आज रिलेक्स फील हुआ और मैं बिना किसी के जगाए जल्दी भी उठ गया?

रज़िया- अरे कुछ नहीं किया.. मैंने तो ऐसे ही मज़ाक से कहा था बस.

याक़ूब- नहीं आपा.. कुछ तो हुआ होगा प्लीज़ बताओ ना मुझे, ऐसा क्या हुआ था?

रज़िया- अब ज़्यादा सवाल मत कर, कुछ नहीं हुआ.. जा जल्दी से नहा ले.. मैं देखती हूँ कि अम्मी उठीं या नहीं.. ओके!

फ्रेंड्स अब यहाँ कुछ नहीं रहा सब रोज की तरह नॉर्मल रहा. स्कूल वाले स्कूल चले गए और कॉलेज वाले कॉलेज.

उधर राबिया को भी चाचा ने बस में बिठा दिया था तो वो भी वापस अपने घर आ रही है.

आपको याद है या भूल गए.. आज शबनम की फुददी की खुजली मिटाने के लिए शाहिद ने कॉलेज जाना कैंसिल किया है. तो चलो आप भी बोर हो गए होंगे.. दिखा देते हैं आपको कि वहां क्या चल रहा है.

शाहिद रेडी होकर सीधा पार्क पहुँच गया. वहां उसे देख कर शबनम गुस्सा हो गई.

शबनम- क्या मामू, कब से यहाँ बैठी हूँ. स्कूल ड्रेस में देखकर कितने जाने मुझे बोले कि स्कूल से छिपकर यहाँ बैठी है, क्या मेरा मज़ाक भी बनाया.

शाहिद- अरे जाने दो.. लोग तो ऐसे ही बोलते हैं. चल तुझे आज कली से फूल बना देता हूँ.

शबनम तो ऐसे खुश हो रही थी कि ना जाने आज उसे कौन सा खजाना मिलने वाला है. वो बड़े उत्साह से शाहिद के साथ चली गई. वहां जाकर शाहिद ने उसको कुछ समझाया कि पहले वो अन्दर जाएगा फिर पीछे से तुम आ जाना. शबनम ने वैसा ही किया और वैसे भी उस एरिया में ज़्यादा लोग नहीं थे. कोई एक-दो पुराने घर ही थे.. तभी तो शाहिद ने अपने इस घर में पार्टी की थी और रूबी की जमकर चुदाई की थी.

शबनम- मामू ये किसका घर है? यहाँ कोई आएगा तो नहीं ना?

शाहिद- तू ज़्यादा सवाल मत कर.. जल्दी से कमरे में चल.. आज तुझे चोद कर मज़ा भी लेना है और फिर घर जाने लायक भी बनाना है.

 
शाहिद की बातें शबनम के सर के ऊपर से जा रही थीं. उसने ध्यान नहीं दिया और कमरे में जाकर अपना बैग रख दिया.

शाहिद- मेरी जान ऐसे क्या बैठी है, हो ज़ा नंगी.. आज तुझे मैं लंड का असली मज़ा देता हूँ.

इतना कहकर शाहिद ने अपने कपड़े निकालने शुरू कर दिए, जिसे देख शबनम भी नंगी हो गई. अब शबनम के जिस्म को तो आपने देखा ही है.. मगर आज इसकी चुदाई होने वाली है तो एक बार और गौर से देख लो.

शबनम बहुत खूबसूरत लड़की है. छोटे-छोटे गहरे काले बाल.. एकदम बड़ी-बड़ी आँखें और आँखों का कलर नीला है, जैसे कोई लेंस लगाया हुआ हो. उसका चांदी जैसा चमकता रंग.. सीना तो ज़्यादा उठा हुआ नहीं था, मगर संतरे जितने ही इसके मम्मे होंगे, मगर एकदम गोल थे, तने हुए.. एक इंच का भी फ़र्क नहीं.. जैसे साँचे में ढाल कर बनाए गए हों और उसके चुचों पर एकदम छोटे हल्के भूरे रंग के निप्पल जैसे कोई बटन टंके हों. नीचे फुददी तो आपको पता ही है.. एकदम क्लीन बस हल्के से मखमली रोंए उसके आस-पास होंगे.. छोटी सी मगर फूली हुई फुददी थी और हाँ शबनम की जांघें भरी और मोटी थीं, गांड बाहर को निकली हुई थी.

शाहिद तो पहले ही इसके इस रूप का दीवाना हो चुका था मगर आज उसे पता था कि ये कच्ची कली उसके लंड को सुकून देगी. तो वो बस उसको देखता जा रहा था और उसका लौड़ा अपने आप तन कर शबनम की फुददी को सलामी दे रहा था. शायद उसे भी पता था जिस फुददी की महक वो कई बार ले चुका है, आज उसमें जाने का टाइम आ गया.

शबनम- क्या हुआ मामू आप मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो?

शाहिद- क्या मस्त है रे तू शबनम.. आज तो तेरी फुददी मारने में मज़ा आ जाएगा.

शबनम- मामू आराम से करना.. रात को मुझे बहुत दर्द हुआ था.

शाहिद ने अपनी जींस की पॉकेट से एक डब्बी निकाली और शबनम को दिखाई.

शाहिद- ये देख उसका इलाज लाया हूँ.. ये क्रीम बहुत चिकनी है.. इसे लगा कर लंड अन्दर डालूँगा तो तेरी फुददी में जरा भी दर्द नहीं होगा.

शबनम भाग कर शाहिद से लिपट गई.

शबनम- ओ मामू, आप मेरा कितना ख्याल रखते हो आई लव यू मामू.

शाहिद ने उसे गोद में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया, उसके संतरे चूसने लगा. अपने जिस्म से उसके नाज़ुक बदन को रौंदने लग गया. अब शबनम भी शाहिद को किस किए जा रही थी.. कभी मुँह पर कभी सीने पर चूम रही थी.

थोड़ी देर बाद दोनों 69 के पोज़ में आ गए और शाहिद ने शबनम की फुददी को इतने ज़बरदस्त तरीके से चूसना शुरू कर दिया.. वो हवा में उड़ने लगी.

जब शाहिद को लगा कि अब ये एकदम गर्म हो चुकी है. उसकी फुददी अपने आप खुलने बंद होने लगी और उसमें से कामरस भी बहने लगा तो वो फ़ौरन चोदने के लिए उठ गया. तभी उसे याद आया कि आज इसकी सील टूटेगी तो खून भी आएगा, तो वो बिना कुछ कहे उठ गया और शबनम के बैग से उसकी पुरानी टी-शर्ट निकालने लगा.

शबनम- उह मामू मज़ा आ रहा था.. कहाँ चले गए.. क्या ढूँढ रहे हो?

शाहिद- कुछ नहीं ये टी-शर्ट निकालनी थी. अब तेरी फुददी में लौड़ा डालने का टाइम आ गया है समझी मेरी जान!

शाहिद वापस बिस्तर पे आया तो टी-शर्ट के साथ पानी की बोतल भी उठा लाया और बोतल को साइड में रख कर टी-शर्ट को शबनम की गांड के नीचे लगा कर शबनम के पैरों को मोड़ दिया, अब शाहिद के सामने शबनम की फुददी थी और बस एक तगड़े झटके लगने भर की देर थी.

शाहिद ने अपनी उंगली से फुददी को कुरेदना शुरू किया, वो शबनम को एकदम मस्ती में लाकर चोदना चाहता था, साथ में वो उसकी जाँघों को भी चूस रहा था.

शबनम- आह.. आह सस्स मामू मज़ा आ रहा है उफ़ आह.. और अन्दर करो ना उंगली आह.. बहुत तेज खुजली हो रही है आह.. आह..

शाहिद- मेरी जान, ये खुजली उंगली से नहीं जाएगी इसे तो लौड़ा ही मिटा सकता है.

शबनम- आह.. सस्स मामू तो देर क्यों करते हो आह.. डाल दो ना आह.. बहुत तेज खुजली आह.. हो रही है सस्स आह.. जल्दी डालो.

शाहिद- ठीक है मेरी जान, अब मुझसे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा.. रोज इसे देख कर ही मन बहलाता हूँ. आज तुझे चोद ही दूँ.. बस अब आज के बाद मैं तुझे रोज चोदूंगा.

शाहिद ने अपने लंड पे ढेर सारी क्रीम लगा ली और शबनम की फुददी में भी उंगली से क्रीम लगा दी ताकि चिकनाई से लौड़ा अन्दर चला जाए. अब उसने सुपारे को फुददी पर सैट किया थोड़ा सा फुददी में फँसा कर वो शबनम पर चढ़ गया और उसके होंठों को कस के अपने होंठों में दबा दिया. वो जानता था कि लंड घुसते ही ये चिल्लाएगी.. इसलिए उसने कमर पर दबाव बनाया और धीमे-धीमे लौड़ा आगे खिसकाना शुरू किया. मगर शबनम की फुददी इतनी टाइट थी कि शाहिद को बहुत ताक़त लगानी पड़ रही थी. वो तो क्रीम और फुददी के रस की चिकनाई थी वरना ऐसे लौड़ा कभी नहीं घुसता. बड़ी मुश्किल से उसने 2″ लौड़ा अन्दर किया होगा इधर शबनम की आँखें फटने को हो गईं. उसने चीखा मगर आवाज़ शाहिद के होंठों में ही दबा कर रह गई.

शबनम की आँखों से आँसू निकलना शुरू हो गए थे.. मगर शाहिद को पता था आज इसकी फुददी को नहीं चोद पाया तो ये कभी हाथ नहीं आएगी. उसने धीमे से लंड को पीछे किया और जोरदार झटका दे मारा. उसी के साथ लौड़ा शबनम की सील को तोड़ता हुआ आधा अन्दर घुस गया.

शबनम की तो जैसे जान ही निकल गई हो, अगर उसके होंठ बंद नहीं होते काफी दूर तक उसकी चीखने की आवाज़ सुनी जा सकती थी.

शाहिद ने वहीं बस नहीं किया.. स्पीड से लौड़ा पीछे किया और फिर तेज़ी से आगे धक्का दे मारा. शबनम की कमसिन फुददी को चीरता हुआ शाहिद का 8″ का तगड़ा मोटा लंड फुददी में काफी अन्दर तक समा गया.

इस अटैक से अबकी बार तो दर्द नहीं.. दर्द की इंतेहा हो गई, जिसे शबनम सह नहीं पाई और बेहोश हो गई. उसकी फुददी से खून का रिसाव शाहिद ने साफ महसूस किया, जो उसके लंड से टकराता हुआ बाहर आ रहा था. जब उसने महसूस किया कि शबनम एकदम बेजान पड़ी है, तो एक बार तो शाहिद भी डर गया कि कहीं फुददी फट तो नहीं गई. मगर फिर उसने दिमाग़ से ये बात निकाली और लंड को आगे-पीछे करने लगा.

लगभग 5 मिनट तक वो चुदाई करता रहा.. अपने मोटे लंड को स्पीड से आगे-पीछे करता रहा.

जब शबनम वैसे ही बेजान पड़ी रही तो उसको अहसास हुआ कि शबनम अब भी बेहोश है, तो उसने पास पड़ी पानी की बोतल से थोड़ा पानी शबनम के चेहरे पे गिराया, जिससे वो होश में आई.

शाहिद ने अब तक पूरा लौड़ा फिट कर दिया था और वो शबनम के होंठ चूसने लगा था. शबनम पानी के कारण अब जाग गई थी.. और उसको अभी भी बहुत दर्द हो रहा था, मगर वो चिल्ला नहीं रही थी. उसने इशारे से शाहिद को हटने के लिए कहा.. तो वो हट गया.

शबनम- उउउ उउउ आह.. एमेम मामू आह.. एमेम मेरी आह.. ज्ज़ान निकाल जाएगी उउउ प्लीज़ आह.. निकाल लो ना आह.. उउउ उउउ..

शाहिद- अरे मेरी प्यारी शबनम, तू तो बहुत बहादुर है ऐसे नहीं रोते, अब कुछ नहीं होगा.. जो दर्द होना था हो गया. देख मेरा पूरा लंड अन्दर घुसा हुआ है.. अब बस मज़े ही आएँगे समझी.

शाहिद की बात सुनकर शबनम ने गौर किया तो उसको अहसास हुआ कि सच में पूरा लंड फुददी की गहराई में है.

शबनम- आह.. ये तो पूरा घुस गया.. तभी आह.. मेरी जान निकली मामू उफ़ आह..

शाहिद- देख ये पूरा अन्दर है.. अब तू कहे तो आगे-पीछे करूँ.. बस थोड़ा सा दर्द होगा तुझे.. उसके बाद नहीं होगा.

शबनम- ठीक है आह.. मामू आह.. लेकिन ससस्स आह.. ज़्यादा दर्द होगा तो आह.. आप रुक जाना.

शाहिद- ठीक है मेरी जान.. तू बोलेगी तब रुक जाऊंगा मगर ज़्यादा दर्द हो तभी रोकना.. थोड़ा तो होगा तू सह लेना ओके.

शबनम ने ‘हाँ’ का इशारा किया तो शाहिद फिर शुरू हो गया. वो धीमे-धीमे चुदाई करने लगा.. शबनम को दर्द तो हो रहा था मगर उन 5 मिनटों में शाहिद ने स्पीड से लौड़ा अन्दर-बाहर किया था, जिससे अब फुददी में लौड़ा बराबर फिट हो गया था और आराम से तो नहीं मगर टाइटली अन्दर-बाहर हो रहा था. इस टाइम तो शबनम को कुछ मज़ा नहीं आ रहा था.. बस हल्का मीठा-मीठा सा दर्द हो रहा था.

ऐसे ही 10 मिनट गुजर गए. अब शाहिद ने थोड़ी स्पीड भी बढ़ा दी थी और शबनम भी मस्ती में आने लगी थी.

शबनम- आह.. आ सस्स मामू आह.. ऐसे ही करो.. उफ़ आह.. दर्द के साथ आह.. थोड़ा आह.. मज़ा भी आने आह.. सस्स उ लगा है आह.. करो.

शाहिद- मैंने कहा था ना.. उहह उहह मज़ा आएगा आह.. ले शबनम आह.. सच में आह.. तेरी आह.. फुददी बहुत टाइट है उफ़ आह.. साला लौड़ा आह.. फँसा हुआ है.. आह ले आह.. ले..

 
शबनम अब कमर को हिलाने लगी, उसकी फुददी अब पानी छोड़ने लगी थी. वो उत्तेज़ित हो गई और फुददी के पानी छोड़ने से लंड को भी फिसलने में मदद मिल गई.

शबनम- आह.. अब ज़ोर से करो आह.. मामू उई नहीं आह.. सस्स ज़ोर से ककककरो आह.. पानी आह.. आआ आआ आने वाला आह.. ज़ोर से आह.. करो मामू एयेए एयेए.

शबनम के मस्ती में आते ही शाहिद ने उसकी कमर को पकड़ा और दे.. दनादन शॉट मारने लगा. अब लौड़ा 200 पम्प प्रति मिनट की स्पीड से अन्दर-बाहर होने लगा. शबनम तो सच में हवा में उड़ने लगी थी.. उसकी फुददी से रस का झरना बहने लगा. उसको ऐसा मज़ा शायद पहले फुददी चटवाकर भी नहीं आया होगा.. वो बस आँखें मींचे झड़ रही थी.

शाहिद तो झटके मारने में बिज़ी था उसको ऐसी कच्ची फुददी जो मिल गई थी. इधर शबनम झड़ गई और निढाल पड़ गई.

शाहिद समझ गया कि ये ठंडी हो गई है, तो उसने अपनी रफ़्तार कम कर दी और शबनम के होंठ चूसने लगा. उसके छोटे-छोटे निप्पलों को उंगली से सहलाने लगा, कभी उसके बूब्स को पूरा मुँह में लेता, तो कभी जीभ से निप्पल को घुमाता.. बस एक लड़की को गर्म करने के लिए और क्या चाहिए.

शबनम- आह.. सस्स मामू उफ़ आह.. करो आह.. ऐसे ही चूसो आह.. आपने आह.. सही कहा था मामू उफ़फ्फ़ बहुत मज़ा आ रहा है आह.. और करो मामू उफ़ मेरी चुदाई करो आह..

शाहिद- क्यों मेरी जान.. अब तुझे दर्द नहीं हो रहा क्या.. बोल ज़ोर से करूँ अब?

शबनम- आह.. दर्द तो हो रहा है मामू सस्स मगर आह.. दर्द के साथ जो उफ़फ्फ़ मज़ा मिल रहा है आह.. वो ज़्यादा अच्छा है उह धीमे करो.. काटो मत आह.. ज़ोर से करो ना आह..

शबनम फिर से उत्तेज़ित हो गई थी. इधर शबनम की टाइट फुददी की गर्मी से शाहिद का लौड़ा भी बेहाल हो गया था. वो अपने चरम पे पहुँच गया था.

शाहिद- ले मेरी जान उहह उहह आज तेरी फुददी की आह.. आ सारी क्सावट आह.. खत्म आह.. कर दूँगा आह.. उहह फिर आह.. तुझे रोज चोदूंगा आह.. मज़े से आह.. तेरी जवानी को आह.. भोगूंगा.

शबनम- आह.. मामू मैं आपकी ही हूँ आह.. उई रोज चोदना उफ़फ्फ़ ससस्स आह.. फास्ट मामू फास्ट आह.. मेरी फुददी में जोरों से खुजली होने लगी.. फास्ट मामू चोदो हाँ ऐसे ही आआह आईईइ दर्द होता है आह.. ऐसे नहीं उफ़फ्फ़ ससस्स..

शाहिद ने स्पीड तेज कर दी और शबनम के पैर कंधे पर रख कर वो घोड़े की तरह उसको चोदने लगा. जल्दी ही उसके लंड ने जवाब दे दिया और इतना रस फेंका, जिससे शबनम की फुददी का कोना-कोना भर गया. गर्म वीर्य जब फुददी की दीवारों से टकराया.. साथ में शबनम भी झड़ गई.

दोनों के पानी का मिलन हो गया. शाहिद जैसे ही उठा.. फच्च की आवाज़ के साथ लौड़ा बाहर निकाला, जिस पर खून और वीर्य लगा हुआ था. ये इन दोनों की चुदाई की कहानी ब्यान कर रहा था.

शबनम- आ.. आह.. धीमे मामू दर्द होता है उफ़ निकाला तो जान निकल गई.

शाहिद वैसे ही बैठा रहा और शबनम की फुददी को देखने लगा.. जो खून और वीर्य से सनी हुई थी. शाहिद ने नीचे टी-शर्ट को भी देखा, उस पर भी बहुत खून पड़ा था. यानि सील टूटने से कुछ ज़्यादा ही खून बह गया. शाहिद ने सोचा कि अब अगर शबनम इसे देखेगी तो डर जाएगी, यह सोच कर उसने शबनम को बताना ठीक समझा.

शबनम- उफ़ मामू ज़ोर से सूसू आह.. रही है आह.. टॉयलेट कहाँ है?

शाहिद- मेरी जान हिल मत.. पहले तू मेरी बात गौर से सुन ओके.. फिर मैं तुझे बाथरूम लेके जाता हूँ.

शबनम- क्या बात है मामू.. मुझे सूसू करना है.. आकर सुना देना.

शाहिद- प्लीज़ एक मिनट सूसू रोक ले और सुन, पहली बार लंड जब फुददी में जाता है तो अन्दर से लाल रस निकलता है.

शबनम- लाल रस क्यों मामू लाल तो खून होता है.. तो क्या मेरे भी खून निकला है?

शबनम उठकर देखना चाहती थी मगर शाहिद ने उसको रोक दिया और उसको अच्छी तरह समझाया कि ये सबके साथ होता है, तेरे में से भी निकला.. तू इसे देख कर घबराना मत.. आज के बाद दोबारा नहीं आएगा.

शबनम ने हामी भरी तब शाहिद ने उसका हाथ पकड़ कर उसको बैठाया. शबनम ने टी-शर्ट का हाल देखा.. साथ अपनी फुददी को भी देखा.

शबनम- ऊह मम्मी ये क्या इतना खून मामू.. मेरी फुददी फट गई है अब समझी मैं.. आप क्यों बोल रहे थे फुददी फट जाएगी?

शाहिद- अरे पागल अभी इतना समझाया कुछ नहीं फटी.. तू पानी से साफ करके देख लेना.. जैसे पहले थी वैसी ही है.

शबनम- मामू सच्ची मुझे डर लग रहा है.. ये नहीं फटी ना?

शाहिद- अरे कुछ नहीं हुआ चल तुझे साफ करके दिखाता हूँ.. तब मानेगी तू!

शाहिद ने उसको गोदी में लिया और प्यार से उसको वॉशरूम ले गया, वहां पहले उसको साइड में बैठा कर अपना लंड साफ किया, फिर उसकी फुददी पे पानी डाल कर हल्का सा रगड़ा क्योंकि खून जम गया था.

शबनम- आह.. मामू धीमे दुखता है.. मैंने कहा था ना फुददी फट गई अब क्या होगा?

शाहिद- कुछ भी मत बोल देख सही है.. ये रस जम गया तो दर्द हुआ अब साफ हो गई ना.. देख कहाँ फटी है.

लंड की चोट से फुददी सूज कर लाल हो गई थी मगर खुलने के बाद वो ऐसी लग रही थी, जैसे अभी-अभी ताज़ा गुलाब खिला हो, उसे देख कर शाहिद को उस पर बड़ा प्यार आया उसने एक प्यारा सा किस फुददी पे कर दिया.

शबनम- सससा आह मामू आपके किस से कितना सुकून मिला मुझे.. और करो ना!

शाहिद- तुझे सूसू आया था ना.. वो कहाँ गया.. मेरे मुँह में मूतने का मंसूबा है क्या तेरा हा हा हा..

शबनम- छी: मामू आप भी ना.. मैं ऐसा क्यों करूँगी, सूसू तो आ रहा है आप उठाओ तो करूँ ना.. मुझसे उठा भी नहीं जा रहा है. मेरे पैरों में और फुददी में बहुत ज़ोर का दर्द है.

शाहिद ने उसको उठा कर खड़ा किया और उसकी फुददी से लौड़ा टच करके कहा- अब इस पर सूसू कर.. तेरी गर्म सूसू से लंड को आराम मिलेगा.. बेचारा तेरी टाइट फुददी को खोलने के चक्कर में घुट गया था.

शबनम ने हल्की सी मुस्कान दी और लंड पर सूसू करने लगी, जो शाहिद को बहुत अच्छा लग रहा था. उसके बाद शाहिद ने उसको और खुद को अच्छे से साफ किया और वापस शबनम को उठा कर बेड पर ले आया. फिर वहां से वो खून वाली टी-शर्ट हटा दी और शबनम के पास लेट कर उसके चुचों को सहलाने लगा.

शबनम- मामू आपको मेरे दूधू अच्छे लगते हैं क्या.. जो बार बार इनसे चिपक जाते हो.

शाहिद- अब बच्चों जैसी बातें मत किया कर.. ये दूधू नहीं मम्मे हैं या चूचियां बोल दे. अब तू फुददी और लंड के खेल को खेल चुकी है.. बहुत जल्द तेरे ये चुचों को दबा-दबा कर इतने बड़े कर दूँगा कि तू दिखने में रीमा भारती जैसी लगेगी.

शबनम रोज की तरह शाहिद के सीने पे पेट के बल लेट गई और लंड को चूसने लगी, इधर शाहिद भी उसकी फुददी पर अपनी जीभ से मरहम लगाने में लग गया।

थोड़ी ही देर में शाहिद का लौड़ा फिर से हार्ड हो गया और उसको बस फुददी की जरूरत होने लगी तो शाहिद ने शबनम को हटाया और कहा- धीमे से लंड पे बैठ जा, अब चुदाई का टाइम हो गया है।

शबनम- मामू मज़ा आ रहा था.. थोड़ी देर मेरी फुददी को और चाट लेते।

शाहिद- फुददी चाटने से इसका दर्द नहीं जाएगा.. ये लंड की मार से ही ठीक होगी, अब चल जल्दी कर लंड पे बैठ जा।

शबनम ने वैसे ही किया, जैसे शाहिद ने समझाया था। उसने लंड को फुददी पर अड्जस्ट किया और धीमे से बैठने लगी मगर इतना मोटा लंड आसानी से थोड़ी जाएगा, अभी सिर्फ सील टूटी है फुददी थोड़े ढीली हुई, उसको दर्द तो होगा ही, सो बस बेचारी कराह उठी- आह.. मामू दुख़्ता है और नहीं जाएगा ये.. उफ़ सस्स बहुत जलन हो रही है।

शाहिद- अरे अभी तो तेरी फुददी में मेरा पूरा लंड गया था.. अब कैसे नहीं जाएगा कोशिश कर, बैठ जा आराम से।

 
शबनम ने बहुत धीमे-धीमे बैठना शुरू किया। उसको दर्द हुआ मगर वो सहन कर गई और पूरा लौड़ा फुददी में घुस गया।

शबनम- आह आह.. क्या है मामू उफ़फ्फ़ कितना मोटा है ससस्स.. पूरी फुददी फैला दी.. आह.. कितना दर्द हो रहा है।

शाहिद- अरे आज ठीक से चुदवा ले, सारा दर्द हवा हो जाएगा। फिर तू रोज मज़ा लेना.. चल अब ऊपर-नीचे होकर चुदवा ले, मज़ा आएगा।

शबनम अब गांड को हिलाने लगी, उसको थोड़ा दर्द था मगर लंड की गर्माहट उसको सुकून दे रही थी। उसकी फुददी भी गीली हो गई थी तो अब लौड़ा फिसलने लगा था। अब उसको हल्के दर्द के साथ मज़ा आने लगा।

शबनम- आह.. आइ मामू उफ़ अब मज़ा आह.. रहा है आह.. आपने सच कहा था आह.. असली मज़ा तो चुदाई में ही आता है।

शबनम गांड को हिलाकर मज़ा ले रही थी और नीचे से शाहिद भी झटके मार रहा था। दस मिनट तक ये सीन चलता रहा, फिर शाहिद ने शबनम को नीचे लेटा दिया और स्पीड से उसको चोदने लगा। शबनम भी कामुक सिसकारियों संग चुदाई का साथ मज़ा ले रही थी।

कई मिनट तक शाहिद ने शबनम को चोदा और उसकी फुददी को लाल कर दिया। इस दौरान वो दो बार झड़ गई थी मगर शाहिद अभी भी फुददी में लंड की ठोकर देने में लगा हुआ था। फिर उसने शबनम को घोड़ी बना दिया और उसकी कमर को कस कर पकड़ कर तेज़ी से चुदाई करने लगा।

शबनम- आह.. आह आह मामू बस करो आह.. आज आह.. जान लेके आह.. रहोगे क्या उफ़ आह…

शाहिद- तेरी जैसी कच्ची कली की फुददी नसीब वालों को मिलती है.. उहह उहह साली तुझे तो अपनी रखैल बना के रखूँगा.. आह.. जब तक तेरी शादी नहीं हो जाती, तुझे चोदता रहूँगा आह.. मेरे भाग खुल गए जो घर में ही ऐसी मस्त फुददी मिल गई.. ले आह.. ले आह..

शाहिद की बातें शबनम की समझ के बाहर थीं.. वो तो बस मज़े ले रही थी। अब उसकी उत्तेजना फिर से चरम पर पहुँच गई थी। वो ज़ोर-ज़ोर सीत्कार करने लगी- अह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… ज़ोर से करो मामू.. मजा आ रहा है।

कुछ देर और चुदाई के बाद शाहिद का ज्वालामुखी भी फटने वाला था। थोड़ी देर में दोनों साथ में झड़ गए और बिस्तर पर ही ढेर हो गए। अब कमरे में सिर्फ़ उनकी तेज चलती साँसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।

फ्रेंड्स, शाहिद तो कॉलेज नहीं गया, मगर बाकी सब तो गए ही थे, तो वहां शाहिद के ना आने के सब अलग-अलग कारण बता रहे थे। उसका फ़ोन भी बंद था खैर जाने दो, वहां कुछ खास बातें नहीं हुईं।

बस रज़िया ने रूबी और शाजिया को मिला दिया और शाजिया को किसी टीचर ने बुला लिया तो वो चली गई.. बाकी सब वहीं रह गए।

आज़म- क्या बात है रूबी आज तो बड़ी अलग लग रही हो.. क्या आज कुछ खास किया है?

रूबी- बस रहने दो.. मैं तुम्हें समझ गई हूँ.. तारीफ करके मुझे बनाओ मत।

सलमान- कल क्यों नहीं आई मेरी जान.. बीमार हो गई थीं क्या?

रूबी- पांच भूखे शेर एक बकरी पे टूट पड़ेंगे.. तो बकरी बीमार नहीं होगी क्या? पता है.. मेरा पूरा जिस्म दर्द कर रहा था?

अमन- वैसे कुछ भी कहो ग्रुप सेक्स में मज़ा बहुत आया.. अब दोबारा कब आओगी?

रूबी- ना बाबा.. अब ग्रुप सेक्स कभी नहीं तुम सब बहुत भारी पड़ते हो.. हाँ अगर रज़िया साथ होगी तो शायद कर सकते हैं।

रज़िया- तू मुझे क्यों घसीट रही है, ये साले कुत्ते हैं। तेरी हालत मैंने देखी है.. ना बाबा.. मैं तो कभी ना करूँ।

फैजान- क्या यार क्यों भाव खा रही है रूबी तो अकेली 5 को झेल गई। अब तो तुम दोनों होगी तो आधे-आधे कर लेना।

सलमान- आधे कैसे होंगे? हम 5 हैं अब कैसे होगा?

‘तू साला चूतिया ही रहेगा.. सुन तुम और शाहिद रूबी को चोद लेना और ये और ये रज़िया को.. बचा मैं तो एक बार रज़िया को चोद लूँगा, दूसरी बार रूबी को चोद दूँगा, हो गया ना!’

रज़िया- साले तू दो बार मज़ा लेगा ज़्यादा होशियार बनता है.. ऐसा कुछ नहीं होगा ओके अब चलो।

ये तो गए, उधर शाहिद और शबनम को भी रेस्ट मिल गया था तो आओ वहाँ देख लो अब वो क्या करता है।

शबनम- मामू ये चुदाई तो बहुत अच्छा खेल है.. कितना भी खेलो मन नहीं भरता। आपने पहले क्यों नहीं की मेरी चुदाई.. ये तो हम घर पे भी कर सकते थे?

शाहिद- अच्छा तो मतलब ये है कि मेरी जान की फुददी में फिर खुजली हो रही है। सब्र कर मेरी जान आज तेरी सारी खुजली मिटा दूँगा और ये खेल अगर घर पे खेलते ना.. तो सब को पता लग जाता समझी!

शबनम- कैसे लगता मामू मेरे चिल्लाने से ना.. तो अभी जैसे मुँह बंद किया वहां भी आप मेरे मुँह को बंद कर देते।

शाहिद- ऐसे तुझे समझ नहीं आएगा.. एक काम कर, वो सामने से तेरा स्कूल बैग उठा कर तो ला ज़रा!

शबनम- उससे क्या होगा मामू बताओ?

शाहिद- अरे तू उठकर जा और बैग उठा कर ला.. फिर तुझे बताता हूँ।

शबनम जैसे ही बेड से उतरी उसको फुददी में बहुत दर्द हुआ.. उसके पैर काँपने लगे। वो दो कदम भी नहीं चल पाई और वापस बेड पे बैठ गई, उसको बहुत दर्द हुआ- ओह मामू ये क्या हो गया.. मैं चल भी नहीं पा रही हूँ, मुझे फुददी में बहुत दर्द हो रहा है और पैर भी दुख रहे हैं.

शाहिद- यही तुझे समझाना था, अब कुछ समझ में आया। अगर घर पे करता तो तेरी ये हालत देख कर सब समझ जाते कि मैंने तेरी चुदाई की है। अब तू तो स्कूल से घर जाएगी तो किसी को शक नहीं होगा।

शबनम- मगर मामू मैं जाऊंगी कैसे? अभी चला ही नहीं गया, घर पे सब पूछेंगे ऐसे क्यों चल रही हो तब उनको शक नहीं होगा कि मैंने चुदाई की है?

शाहिद- बहुत नादान है तू.. अब सुन मैं तुझे अभी चलने लायक बना दूँगा, फिर थोड़ा दर्द होगा तो तू घर पे कह देना स्कूल में गिर गई थी, तो पैर और कमर में मोच आई है। किसी को पता भी नहीं चलेगा और तुझे फ्री में मालिश भी मिल जाएगी।

शबनम- वाउ मामू आप सच में बहुत अच्छे हो। अब मुझे चलने लायक कैसे बनाओगे आप वो भी बता दो?

शाहिद- मेरी जान अभी तेरा स्कूल छूटने में बहुत टाइम है। पहले एक बार और तेरी जम कर चुदाई कर दूँ, फिर बताऊंगा कैसे चलेगी तू.. और घर कैसे जाएगी?

शबनम- मामू अब रहने दो ना.. फिर दर्द करोगे आप बाकी का घर पे कर लेना।

शाहिद- अरे अभी तो बोल रही थी कि ये खेल अच्छा है.. मन नहीं भरता, अब क्या हो गया?

शबनम- मन तो है मामू लेकिन मेरे पैर और कमर भी दुखने लगे हैं।

शाहिद- सब ठीक हो जाएँगे, रात को मैं खुद तेरी मालिश करूँगा। चल इधर आ मेरे पास.. देख लौड़ा कैसे उदास हो रहा है.. इसे थोड़ा प्यार कर खुश हो जाएगा।

शबनम ने मुस्कुरा कर देखा और शाहिद के पास जाकर उसके लंड को किस करने लगी।

 
शाहिद भी कहाँ कम था, वो भी उसके चुचों को मसलने लगा और धीमे-धीमे दोनों एक-दूसरे में खो गए। इस बार शाहिद ने शबनम को गोद में उठा कर उसकी चुदाई की, शबनम भी अपनी बाँहें शाहिद के गले में डालकर इस नई स्टाइल की चुदाई को एंजाय कर रही थी।

फिर काफी देर तक शाहिद ने अलग-अलग तरीके से शबनम की खूब चुदाई की, तब कही जाकर वो ठंडा हुआ और शबनम की तो हालत ख़स्ता हो गई थी। उसकी फुददी का तो जैसे झड़-झड़ कर पानी ही सुख गया था। वो एकदम बेजान सी हो गई और बेड पे लेट गई।

एक घंटा दोनों ने आराम किया.. फिर शाहिद ने शबनम को कमरे में चलने को कहा, उसको शुरू में थोड़ी तकलीफ़ हुई मगर लगातर चलने से उसको दर्द कम हो गया। अब वो आराम से चल पा रही थी मगर उसकी चाल देख कर कोई भी बता सकता था कि इसको कुछ प्राब्लम तो है.. शायद पैर में मोच है या कुछ और है।

अब चुदाई करवा कर आई है ऐसा तो कोई सोचेगा नहीं.. बस फिर क्या था शाहिद ने मौका देख कर उसको वहां से निकाल लिया और घर से थोड़ा दूर छोड़ कर खुद चला गया ताकि किसी को शक ना हो कि सुबह से ये उसके साथ थी।

शबनम घर चली गई और उसकी अम्मी ने उसको देखा तो उसने झूठ कह दिया कि गिर गई थी। बस फिर क्या अम्मी ने पूछताछ की कि ज़्यादा तो नहीं लगी.. ये वो.. फिर उसको चेंज करने को कहा। उसको थोड़ी मलहम वगैरह दे दी। बात खत्म हो गई और चुदाई का राज छुप गया।

दोपहर को शाहिद आया तो शबनम के लिए मेडिकल से कुछ जरूरी दवा और ट्यूब ले आया ताकि चुदाई की तकलीफ़ कम हो और कोई बच्चा ना ठहर जाए। अब ये तो जरूरी चीजें है जो शाहिद जैसे लड़के को ध्यान में रहती ही हैं।

ज़ुबैदा- अरे आ गया तू.. खाना लगा दूँ बेटा?

शाहिद- हाँ जोरों की भूख लगी है और बाकी सब कहाँ गए.. दिख नहीं रहे?

ज़ुबैदा- क्या बताऊं आज शबनम स्कूल में गिर गई तो फिरोजा उसके पास है।

शाहिद- क्या कैसे गिर गई ज़्यादा चोट तो नहीं लगी ना उसको?

शाहिद ने झूठा नाटक किया, तब उसकी मॉम ने बता दिया कि सब ठीक है उसकी अम्मी ने उसके पैर पर दर्द की ट्यूब लगा दी है.

उसके बाद इधर-उधर की बातें करने के बाद शाहिद खाना ख़त्म करके ऊपर चला गया और रोज की तरह शबनम भी पढ़ाई के बहाने ऊपर चली गई. जब सब सो गए तो शाहिद ने शबनम को दवा दे दी और अपने हाथ से उसकी सूजी हुई फुददी पे मलहम लगा दी.

यहाँ भी ऐसा कोई खास सीन नहीं हुआ. ये दोनों भी थके हुए थे तो सो गए.

उधर राबिया दोपहर तक घर पहुँच गई थी फवाद ने बाहर से खाना मंगवा रखा था दोनों ने साथ लंच किया, फिर रूम में जाकर बैठ गए.

फवाद- क्यों मेरी जान मेरे बिना वहाँ तू बड़ी बेचैन रही होगी ना?

राबिया- हाँ फवाद, आपकी बहुत याद आती थी.. पूछो मत मेरा क्या हाल था!

फवाद- अच्छा ये बात है.. चल आज तुझे बेचैनी से मुक्त कर देता हूँ.. तेरी फुददी प्यासी होगी ना!

राबिया- नहीं फवाद मैं बहुत थकी हुई हूँ मुझे सोना है.

फवाद- क्या बात कर रही हो.. तुम मना कर रही हो, मुझे यकीन नहीं होता!

राबिया- उस दिन की बात तुम भूल गए.. मैं नहीं भूली फवाद!

फवाद- अरे यार उस दिन में गुस्से में था सॉरी यार ग़लती हो गई.

राबिया- नहीं फवाद तुमने मुझे रांड़ कहा था.. कैसे भूल जाऊं मैं?

फवाद ने राबिया को अपने से लिपटा लिया और प्यार से माफी माँगी तो वो पिघल गई.

राबिया- अच्छा माफ़ किया मगर दोबारा ऐसी बात मत कहना समझे.

फवाद- ओके मेरी डार्लिंग नहीं कहूँगा अब तो मान जाओ, बहुत दिन हो गए मुझे भी तुम्हारी फुददी की बहुत याद आई.

राबिया- ओह अच्छा ये बात है तो मेरे प्यारे शौहर देव आज सच में थकान बहुत है, फिर फुददी भी क्लीन नहीं है कल सुबह जब आप वापिस आओगे, तब करेंगे.

फवाद- तुम ही तो कहती हो चुदाई से थकान दूर हो जाती है फिर मना क्यों कर रही हो.. मान जाओ ना!

राबिया- अरे आप इतने बेसब्र क्यों हो? यदि चाहो तो आपका लंड चूस कर पानी निकाल देती हूँ मगर चुदाई कल ही करेंगे.

फवाद- तुम बहुत जिद्दी हो.. मानोगी नहीं, रहने दो अब कल ही लंड को चूसना, चलो सो जाओ. मैं भी सुबह ठीक से नहीं सोया था, अभी सो जाता हूँ. आज शाम को जल्दी जाना है एक अर्जेंट काम है, उसके बाद जॉब पे भी जाना है.. तो सोने में ही भलाई है.

दोनों आराम से चिपक कर सो गए. फवाद तो थोड़ी देर में सो गया मगर राबिया को टेंशन में नींद नहीं आ रही थी. चाचा ने उसकी फुददी का फुद्दा बना दिया था अगर अभी वो फवाद से चुदवाती तो उसको पता लग जाता और दूसरी टेंशन फकीर वाली बात की थी. बस ये सब सोचते हुए वो भी सो गई.

करीब 5 बजे फवाद रेडी होकर निकल गया तब राबिया ने अपनी फ्रेंड रुबीना को कॉल किया और उसे घर आने को कहा.

 
फ्रेंड्स, आपसे माफी चाहता हूँ.. मैंने रुबीना के बारे में आपको नहीं बताया. आपको याद होगा जब गाँव जाने के पहले फवाद और राबिया का झगड़ा हुआ था, ये उसी दिन राबिया से मिलने आई थी. यदि एक बार थोड़ा सा पीछे चलकर देख लो ताकि अच्छे से कहानी समझ आ जाएगी.

फवाद ने गुस्से में जो कहा उसे सुनकर राबिया का पारा सर पे चढ़ गया. एक तो वैसे ही सेक्स उसके दिमाग़ में चढ़ा हुआ था, ऊपर से ये बातें उसको बहुत बुरी लगीं. वो फवाद से बुरी तरह झगड़ने लग गई और फवाद भी गुस्से में था तो उसने भी ना जाने क्या से क्या बोल दिया. उसके बाद फवाद ने कपड़े पहने और घर से बाहर निकल गया.

राबिया वहीं बैठी देर तक रोती रही.

थोड़ी देर बाद घर की घंटी बजी तो राबिया को होश आया. वो उठी अपने कपड़े पहने, बाल वगैरह ठीक किए और मेन गेट खोलने चली गई.

जैसे ही राबिया ने गेट खोला, उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई क्योंकि उसके सामने उसकी खास सहेली रुबीना थी.

रुबीना की उम्र 22 साल थी.. दिखने में ठीक-ठाक सी है. उसकी शादी को 2 साल हो गए हैं. ये अक्सर राबिया से मिलती है मगर कुछ महीने ये शौहर के साथ घूमने गई थी.. और आज ही वापस आई थी.

राबिया- अरे रुबीना तू.. क्या बात है आज ऐसे अचानक कैसे? वो भी इतने महीनों के बाद?

रुबीना- अब सारी बात यहीं बताऊं या अन्दर भी बुलाएगी?

राबिया और रुबीना अन्दर आ गए और रुबीना ने राबिया को देखते ही पहचान लिया कि वो अभी रोई हुई है, उसकी आँखें सूजी हुई थीं.

रुबीना- ये क्या हाल बना रखा है तूने.. और तेरी आँखें सूजी हुई क्यों हैं? जीजू से झगड़ा हुआ क्या?

राबिया- अरे नहीं ऐसा कुछ नहीं है.. मैं सोई हुई थी ना तो बस!

रुबीना ने बहुत ज़िद की, तब कहीं जाकर राबिया ने अपनी सारी कहानी उसको सुनाई और फूट-फूट कर रोने लगी.

रुबीना- अरे यार प्लीज़ रो मत.. ये मर्द साले ऐसे ही होते हैं, अपना मतलब निकल जाए बस उसके बाद औरत क्या चाहती है, ये ज़रा भी नहीं सोचते और फवाद को ज़रा भी शर्म नहीं आई तुमको रांड़ कहा उसने..! छी: घिन आती है ऐसे आदमी से..

रुबीना की बात सुनकर राबिया को तसल्ली मिल रही थी.

राबिया- यार तू मुझे जानती है ना.. मैंने कभी कुछ ग़लत काम नहीं किया और फवाद ने मुझे क्या बना दिया?

रुबीना- हाँ यार तू तो शुरू से ही बहुत सीधी है, कॉलेज में भी तूने कभी ब्वॉयफ्रेंड तक नहीं बनाया.

राबिया- उसी बात का पछतावा है रुबीना.. अगर उस टाइम लाइफ के मज़े ले लेती तो आज रोना नहीं पड़ता.

रुबीना- यार एक बात समझ नहीं आ रही, तू तो बड़ी सीधी है फिर तुझमें इतना सेक्स कहाँ से आया, जो तेरी प्यास मिटती ही नहीं?

राबिया- ये सब भी फवाद ने किया है.. शादी की रात उसने पॉवर वाली गोली ली थी. मेरी सील तोड़ने के बाद पता है 5 बार उसने सेक्स किया था..! मैं रोती रही, चिल्लाती रही, मगर पूरी रात उसने मेरी फुददी को चोद-चोद के सुजा दिया था. इस पर भी उसका मन नहीं भरा.. वो एक महीने तक हर रात गोली लेता रहा और मेरी जमकर चुदाई करता रहा. अब तू ही बता मेरी शुरुआत ही ऐसे हुई थी. अब मुझे तो वैसी ही आदत पड़ गई और अब वो एक बार भी ठीक से नहीं करता तो मुझे आग लगी रहती है. मैं क्या करूँ कहाँ जाऊं.. उउउन उउऊँ.

रुबीना- अरे यार रो मत.. मेरी बात सुन, वो फवाद बड़ा हरामी है, शुरू में तो उसने तेरे खूब मज़े लिए, अब अपना मतलब भर निकालता है.

राबिया- कभी-कभी मन करता है कि मर ही जाऊं.

रुबीना- तू पागल हो गई क्या.. इतनी सी बात के लिए मरना चाहती है?

राबिया- तुझे ये इतनी सी बात लगती है? मेरी लाइफ बर्बाद हो रही है.

रुबीना- अरे पागल जब तेरा शौहर तेरी प्यास ना बुझा पाए तो कोई दूसरा जुगाड़ कर ले ना!

राबिया थोड़ी चौंकती हुई सवालिया नज़रों से रुबीना की तरफ़ देखने लगी.

रुबीना- चौंक मत मेरी जान.. तेरे यहाँ दूध वाला या पेपर वाला कोई तो हट्टा-कट्टा मर्द आता होगा.. उसको पटा ले ना.. तेरी प्यास भी मिट जाएगी और तेरा घर भी नहीं टूटेगा.

राबिया- तू पागल है क्या.. ये कैसी गंदी बातें कर रही है.. किसी गैर मर्द के साथ? ना बाबा ना ये सोच कर ही मेरा तो मन घबरा गया.

रुबीना को पता था कि राबिया शुरू से ही सीधी रही है, ये जल्दी मानेगी नहीं. उसने राबिया को बड़े प्यार से विश्वास दिलाया कि ये सब आजकल फैशन बन गया है, कुछ औरतें तो बस शौकिया ये सब करती हैं, तेरी तो मजबूरी है.

ऐसे ही बहुत सारी बातें राबिया को उसने बताई तब जाकर वो मान गई.

राबिया- यार तेरी बातों से जिस्म में गर्मी बढ़ गई है.. मगर ये दूध वाला सही नहीं होगा.. कोई और आइडिया बता मुझे जिससे किसी को पता ना लगे.. और दूसरी बात मैं किसी को कैसे कहूँ कि मेरे साथ चुदाई करो?

रुबीना- मेरी जान.. लड़की को कुछ करने की जरूरत नहीं होती, ये मर्द जात होती ही ऐसी है. अपने आप फुददी की महक लेते हुए तेरे पास आ जाएँगे समझी!

राबिया- नहीं यार.. मुझे कुछ भी समझ नहीं आया.

रुबीना ने उसको कुछ टिप्स दिए जिसे सुनकर राबिया के चेहरे पर ख़ुशी के भाव नज़र आने लगे.

राबिया- मगर आज तो फवाद के दादा जी की मौत हो गई है, अब कुछ दिनों के लिए गाँव जाना पड़ेगा. वहाँ से आकर ही तेरे ये आइडिया आजमाऊंगी.

रुबीना- अरे नहीं इससे अच्छा मौका तुझे कहाँ मिलेगा, ये गाँव के लोग जो होते हैं, ये शहर वालों से ज़्यादा मज़ा देते हैं. तुझसे अब क्या छुपाना जब में गाँव गई थी, मेरे शौहर के चाचा के बेटे यानि भाई ने ही मुझे दबोच लिया था.

राबिया- क्या बात करती है.. फिर तूने क्या किया.. शोर मचाया क्या?

रुबीना- पागल है क्या.. ऐसा मौका कोई जाने देता है क्या.. बस थोड़ा सा नाटक किया मैंने.. उसके बाद मान गई. यार सच में क्या मोटा लौड़ा था उसका.. सारी जिंदगी ढूंढती तब भी ना मिलता. मैंने तो एक हफ्ते तक उसके लंड से पूरा मज़ा लिया.

राबिया तो ये सुनकर सोच में पड़ गई कि इतने करीब के रिश्ते में भी ये सब होता है क्या?

रुबीना- अब देख तू गाँव जाए ना.. तो हो सकता है वहाँ तुझे भी ऐसा मौका मिल जाए, बस हाँ कह देना और लाइफ के मज़े लेना.

वो दोनों काफ़ी देर तक इसी टॉपिक पे बातें करती रहीं. रुबीना ने अपनी तरफ़ से जितना हो सका राबिया को चुदने के लिए मना लिया, उसके बाद वो चली गई.

तो फ्रेंड्स ये हुआ था उस दिन. उसके बाद फवाद आया था और वो गाँव चले गए थे.

 
राबिया भी नहा कर फ्रेश हो गई थी. उसके कॉल करने के आधे घंटे बाद रुबीना वहाँ आ गई थी.

राबिया के खिले हुए चेहरे को देख कर रुबीना समझ गई कि ज़रूर गाँव में राबिया ने चुदाई करवा ली है.

रुबीना- क्या बात है यार.. तेरे चेहरे की रौनक बता रही है कि तूने गाँव में खूब एंजाय किया.. हाँ! कोई तगड़ा हाथ मारा क्या?

राबिया- तुझे बस यही सूझता है क्या.. बहुत बदमाश हो गई है तू.

रुबीना- अब ज़्यादा नाटक मत कर.. जल्दी बता ना मेरे आइडिया ने काम किया कि नहीं?

राबिया ने कुछ कहा नहीं.. सीधे रुबीना को अपनी बांहों में ले लिया और उसको गालों पर किस करके धीमे से उसके कान में थैंक्स कहा.. फिर अलग हो गई.

रुबीना- वाउ यार इसका मतलब आइडिया काम कर गया.. तूने वहाँ चुदाई की!

राबिया- हाँ मेरी जान की.. और ऐसी की कि जो लाइफ टाइम याद रहेगी.

रुबीना- बता ना यार कौन था और कैसे ये सब हुआ? मुझे तो लग रहा था तुझसे नहीं हो पाएगा मगर तूने कर लिया. अब तू मुझे पूरी कहानी डिटेल में बता.

राबिया ने जावेद से लेकर चाचा तक की पूरी कहानी रुबीना को बता दी, जिसे सुनकर रुबीना की फुददी गीली हो गई.

रुबीना- वाउ यार सो लकी.. इतना तगड़ा लौड़ा उफ़.. सुनकर ही मेरी फुददी गीली हो गई. तूने तू खूब मज़ा लिया होगा यार.. काश मुझे भी ऐसा मर्द मिल जाता!

राबिया- तू चाहे तो मिल सकता है, वो जब यहाँ आएँगे, तू भी आ जाना और उनसे चुदाई करवा लेना.. बल्कि हम दोनों उनके मूसल लंड का साथ में मज़ा लेंगे.

रुबीना- हाँ यार, दिल तो कर रहा है मगर उस टाइम में आ पाऊंगी या नहीं पता नहीं.. तेरे जीजा फिर से घूमने का प्रोग्राम बना रहे हैं. अब क्या पता कब और कहाँ ले जाएं?

राबिया- चल तब की तब देखेंगे. आज मैं आई तो फवाद भी चोदना चाहता था…

राबिया आगे कुछ बोलती कि रुबीना बोल पड़ी- यार ये चोदने वाली बात बंद कर दे. अब पहले ही तेरी कहानी सुनकर फुददी गीली हो गई.

राबिया- तुझे कहानी सुना कर मैं खुद गीली हो गई. मेरी आँखों के सामने चाचा का लंड घूमने लगा है. मगर ये बात अलग है.. पहले तू सुन तो ले!

रुबीना- अच्छा सुना.. अब इसमें क्या है?

राबिया- यार, चाचा ने मेरी फुददी का भोसड़ा बना दिया है. दोपहर में चुदती तो फवाद को शक हो जाता. अब इसका कोई उपाय बता?

रुबीना- बस इतनी सी बात यार तू शादी शुदा है.. फवाद ने कितना चोदा तुझे अब उसको क्या शक होना था. फिर भी तुझे डर है तो एक ऐसा इलाज बताती हूँ कि तेरी फुददी कुँवारी लड़की के जैसी हो जाएगी.

राबिया- सच ऐसा क्या इलाज है.. जल्दी से बता यार?

रुबीना- फिटकरी (एलम) पता है ना तुझे, थोड़ी सी फिटकरी पानी में घोल कर उस पानी से अपनी फुददी को अच्छे से साफ कर ले. कल सुबह तक दो-तीन बार ऐसे करना.. फिर कल जब फवाद तेरी फुददी मारेगा, तो देखना वो खुद हैरान हो जाएगा कि ये इतनी टाइट क्यों हो गई और तुझे भी मज़ा आएगा.

राबिया- क्या बात कर रही है.. यार फिटकरी से ऐसा होता है? ये तुझे किसने बताया?

रुबीना- तू आम खा ना यार.. पेड़ मत गिन.. ये पक्का इलाज है, मैंने खुद ट्राई किया है.

राबिया- अच्छा तो तू रुक.. फिटकरी है घर में या नहीं मैं देख लूं…

रुबीना ने ‘हाँ’ की तो राबिया चली गई. तब तक आप भी थोड़ा सा ये भी देख लो.

शाहिद ने रज़िया को बाहर मिलने बुलाया था. वैसे तो रज़िया भी उससे मिलना चाहती थी क्योंकि आज उसके नहीं आने का कारण उसको पता था कि हो ना हो.. शबनम को लेकर ही कुछ बात होगी. तभी शाहिद नहीं आया.

शाहिद- हाय जान कैसी है तू.. तुम सबने इतने कॉल क्यों किए?

रज़िया- तुम आए नहीं तो कॉल कर लिए. वैसे मुझे पता है तू शबनम के चक्कर में नहीं आया ना कॉलेज?

शाहिद- साली, तुझे इस बात का कैसे पता लगा कि मैं शबनम के साथ था?

रज़िया- मेरे प्यारे शाहिद.. जब ऐसी कच्ची कली आस-पास होती है तो किसका मन करता है पढ़ाई करने का.. उसको तो बस चुदाई ही दिमाग़ में रहती है.

शाहिद- सही कहा तूने.. आज साली की फुददी का मुहूर्त कर ही दिया मैंने!

रज़िया- वाउ यार सो लकी.. कैसे और कहाँ चुदाई की.. बता ना यार मुझे भी.. कोई ख़तरे वाली बात तो नहीं ना?

शाहिद- अरे कुछ नहीं.. सब आराम से हो गया, किसी को पता भी नहीं लगा.

शाहिद ने रज़िया को रात से दोपहर तक की सारी कहानी सुनाई, जिसे सुनकर रज़िया गर्म हो गई और उसके निप्पल कड़क हो गए.

रज़िया- यार कैसी आग लगा दी तूने.. देख निप्पल टी-शर्ट फाड़ कर निकालने को बेताब हैं.

शाहिद- साली तेरे ये पीरियड भी ग़लत टाइम आ गए.. नहीं तो तुझे अभी ठंडी कर देता.

रज़िया- बस आज की बात है.. कल तो खत्म हो ही जाएँगे और तू जानता ही है कि पीरियड ख़त्म होने के बाद फुददी में कैसी आग लगती है, उसे लंड ही बुझा सकता है.

शाहिद- कोई बात नहीं मेरी जान.. तेरी फुददी को मैं ठंडी कर दूँगा.

ये दोनों काफ़ी देर बात करते रहे, उधर राबिया भी अपना कम निपटा कर वापस आ गई और रुबीना के पास बैठ गई.

राबिया- यार मैंने तुझे एक बात नहीं बताई.. समझ नहीं आ रहा कैसे कहूँ?

रुबीना- अरे बोल ना यार.. अब क्या बाकी रह गया बताने को?

राबिया- यार बात ही ऐसी है.. कैसे बताऊं समझ में नहीं आ रहा?

रुबीना- अब तू बोर मत कर.. जल्दी बता क्या बात है.. नहीं तो मैं जाती हूँ.

राबिया- अच्छा सुन मगर इसका समाधान भी तू ही मुझे बताएगी.

रुबीना- ठीक है मेरी अम्मी.. बता दूँगी.

राबिया ने फकीर वाली पूरी बात रुबीना को बताई. पहले तो उसको यकीन नहीं हुआ मगर राबिया ने उसे वो बातें बताईं, जो फकीर ने उसके बारे में बिना जाने बताई थीं.. तब जाकर रुबीना को मानना पड़ा.

रुबीना- यार ये तो बहुत टेंशन वाली बात है. तेरे सुहाग पे ख़तरा है मगर किसी और लड़की के साथ वो करेंगे क्या.. और सबसे बड़ी बात तुझे उस फकीर के साथ करने देंगे क्या? ये समस्या बड़ी है.

राबिया- हाँ यार.. यही तो किसी कच्ची कली के साथ तो कोई भी आदमी करने को तैयार हो जाए मगर अपनी पत्नी को किसी और के साथ वो कभी नहीं मानेगा.

रुबीना- एक आइडिया है.. तू फवाद को एक कली लाकर दे दे… उसको तरसा ऊपर के मज़े दिला, जब वो उसको चोदने के सपने देखने लगे, तब तू ये बात बता देना वो ज़रूर मान जाएगा.

राबिया- हाँ यार ऐसा ही कुछ करना होगा मगर ऐसी लड़की लाऊं कहाँ से?

रुबीना- उसकी चिंता तू मत कर.. पैसे से सब कुछ मिल जाता है.

राबिया- यार पैसे की चिंता नहीं है प्लीज़ तू मेरे लिए ऐसी लड़की ढूँढ दे.

रुबीना- ठीक है ढूँढ दूँगी.. मगर ये समीर से मिलकर क्या होगा तुझे नहीं लगता उससे मिलने की कोई जरूरत नहीं है?

राबिया- नहीं रुबीना उससे मिलना ही होगा.. इसी बहाने मैं फवाद के राज जान लूँगी.

रुबीना- वो तुझे क्यों बताएगा भला?

राबिया- फुददी के बदले में तो बता ही देगा ना.. हा हा हा हा..

दोनों खिलखिलाकर हंसने लगीं.

फिर इधर-उधर की बातें करके रुबीना चली गई और राबिया भी समीर की तलाश में निकल गई.

फ्रेंड्स अब तो आपको समझ आ ही गया होगा कि फकीर ने क्या उपाय बताया था.. नहीं आया तो आगे समझ जाओगे.

 


राबिया समीर की तलाश में बांद्रा पहुँच गई मगर वहाँ उसे पता लगा कि समीर 2 दिन के लिए कहीं बाहर गया हुआ है. बस वो उदास होकर वापस आ गई.

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शाजिया तो अब शराफत के रास्ते से हट ही रही थी मगर इन दो दिनों में उसके साथ कोई खास बात नहीं हुई. रज़िया ने उसको कोई टास्क भी नहीं दिया क्योंकि उसकी अम्मी की तबीयत ज़्यादा खराब हो गई थी, तो वो कॉलेज भी नहीं गई.

इधर ये 5 मादरचोद रूबी से हल्की फुल्की छेड़छाड़ ही कर पाए थे.. ज़्यादा कुछ नहीं किया. हाँ शाहिद ने ज़रूर इन दो दिनों में शबनम की फुददी के खूब मज़े लिए. अब शबनम भी चुदाई का पूरा मज़ा लेने लगी थी. इधर राबिया ने फिटकरी का फ़ॉर्मूला यूज किया था तो दूसरे दिन फवाद जब ऑफिस से आया तो चुदाई के टाइम उसको फुददी टाइट लगी. उसने राबिया से पूछा भी कि ये कैसे हो गई तो राबिया ने बता दिया कि इतने दिन आपसे दूर रही.. तो ये टाइट हो गई.

हाँ तो फ्रेंड्स, 2 दिन गुजर गए. अब आप वापस बड़े आराम से कहानी का मज़ा लो.

शाम को फवाद के जाने के बाद राबिया समीर से मिलने चली गई. आज राबिया ने पारदर्शी लाल और सुनहले कॉंबिनेशन की साड़ी पहनी थी.. जिसमें वो बला की खूबसूरत लग रही थी.

वो सीधे कैफे पहुँच गई और किसी से पूछने के बाद वो समीर के सामने खड़ी थी.

समीर एक 25 साल का गबरू नौजवान था.. उसकी 6 फिट की हाईट थी और वो दिखने में भी स्मार्ट था.

राबिया- सलाम समीर जी.. मेरा नाम राबिया है, मैं आपसे कुछ बात करना चाहती हूँ.

समीर तो बस राबिया को देखता ही रह गया. ऐसी बला की खूबसूरती सामने हो तो अच्छे-अच्छों की बोलती बंद हो जाती है.

राबिया- समीर जी मुझे आपसे बहुत जरूरी बात करनी है.

समीर- ओह हाँ सॉरी.. कहिए क्या काम है मुझसे.. आप 2 दिन पहले भी यहाँ आई थीं.

राबिया- जी हाँ समीर जी, मैं आपसे मिलने आई थी.. मगर आप नहीं थे.

समीर- आप कौन हो और मुझे कैसे जानती हो? मैं कुछ कनफ्यूज सा हो रहा हूँ.

राबिया- मैं आपको सब बता दूँगी प्लीज़ आप पहले मेरे कुछ सवालों के जवाब देंगे?

समीर- ओके.. ऐसा करते हैं, यहाँ भीड़ ज़्यादा है.. कहीं और चलते हैं.

राबिया मान गई तो समीर उसको लेके पास के ही एक पार्क में चला गया, जहाँ ज़्यादा लोग नहीं थे बस कुछ कपल और कुछ कॉलेज के स्टूडेंट ही थे.

समीर- हाँ तो राबिया जी कहिए, मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ?

समीर के पूछने पर राबिया थोड़ी हिचकिचाई मगर जब समीर ने दोबारा पूछा तब राबिया ने कहा- वो बात ऐसी है आपको मेरे सवाल शायद कुछ पर्सनल लगें मगर ये मेरी मजबूरी है.. प्लीज़ आप जवाब देना.

समीर- अरे आप बताओगी तब पता लगेगा ना कि क्या सवाल हैं?

राबिया- ओके, तो आप ये बताओ फवाद आपका बचपन से दोस्त है ना?

समीर- हाँ मगर ये आपको कैसे पता और आप हो कौन.. क्या आपको फवाद ने यहाँ भेजा है या आप फवाद की कुछ लगती हो?

राबिया ने दूध खुजाने के बहाने साड़ी का पल्लू हटा दिया जिससे समीर को उसके दूध साफ दिखने लगे.

राबिया- मेरे एक सवाल पर आपने इतने सवाल कर दिए? मैंने कहा न कि मैं सब बता दूँगी, मगर पहले आप बिना सवाल के मेरे सवालों का जवाब दो ओके!

समीर की नज़र बार-बार राबिया के चुचों को घूर रही थी और राबिया भी ये अच्छी तरह समझ रही थी मगर वो तो चाहती यही थी कि समीर उसका दीवाना हो जाए और वो उसके लंड को अपना बना ले.

समीर- ज्जजी… पूछिए क्या पूछना है?

राबिया- फवाद के बारे में कुछ बताओ आप?

समीर- हाँ, वो मेरा पक्का दोस्त था मगर अब हमारे बीच दोस्ती नहीं रही.. काफ़ी टाइम से मैं उससे मिला भी नहीं हूँ.

राबिया- इतनी गहरी दोस्ती टूटने की वजह क्या थी आप मुझे बताओगे?

समीर- देखिए राबिया जी आप मेरे लिए अनजान हो और ये बात मैं आपको नहीं बता सकता.. सॉरी!

राबिया- अगर आपको पता लगे आपके पुराने दोस्त की जान को ख़तरा है तब भी आप मुझे नहीं बताओगे?

समीर- ये आप क्या बोल रही हो.. फवाद को कुछ हुआ तो नहीं ना.. वो कैसा है प्लीज़ बताओ उसकी जान को ख़तरा कैसे है?

राबिया- आपकी दोस्ती टूटे अरसा हो गया मगर अब भी आपको उसकी इतनी फ़िक्र है यानि आप अब तक उसको भुला नहीं पाए.

समीर- हाँ मानता हूँ.. हमारी लड़ाई हुई थी मगर सालों की दोस्ती भुलाई नहीं जाती.. प्लीज़ आप बताओ ना फवाद को क्या हुआ?

राबिया- अभी कुछ नहीं हुआ.. वो ठीक है मगर जल्दी उसको कुछ होने वाला है इसी लिए मैं आपके पास आई हूँ. आपको मेरी हेल्प करनी होगी अगर फवाद को बचाना हो तो!

समीर- अब सब्र का बाँध टूट रहा है.. आप पहेलियां ना बुझाओ प्लीज़, जो बात है मुझे साफ-साफ बताओ?

राबिया- अच्छा अच्छा सुनो फवाद की कुंडली में दोष है और वो उसके अतीत से जुड़ा है, अगर उसका अतीत पता लग जाए तो वो दोष दूर हो सकता है.. नहीं तो बहुत जल्द उसकी अकाल मृत्यु हो जाएगी.

समीर- ओह माय गॉड.. ये कैसे हो गया भले ही वो मुझसे दूर है.. मगर मैं उसको मरने नहीं दूँगा. प्लीज़ राबिया आप बताओ आप कौन हो और इसका कोई उपाय तो होगा?

फ्रेंड्स, समीर एक बाबाजी का पक्का भगत है और ये कुंडली वगैरह में बहुत ज़्यादा यकीन रखता है, तभी तो उसने राबिया की बात एक झटके में मान ली.

राबिया- मैं आपके दोस्त की वाइफ हूँ.. आप तो शादी में आए नहीं थे तो मुझे कैसे पहचानोगे.. प्लीज़ आप मेरी मदद करो.

समीर- अरे आप तो मेरी भाभी हुई.. आपकी मदद मैं कैसे नहीं करूँगा.

राबिया- तो प्लीज़ आप वो बात बताओ जिसकी वजह से आप दोनों के बीच झगड़ा हुआ था?

समीर- उस बात का फवाद की कुंडली दोष से क्या सम्बन्ध है?

राबिया- मैंने कहा ना, उन्होंने अपने अतीत में कोई ऐसा काम किया है जिसकी वजह से ये विपदा आई है. आप बताओ प्लीज़ कोई ऐसी बात या काम जो ग़लत हो और फवाद ने किया हो?

राबिया की बात सुनकर समीर टेंशन में आ गया और इधर-उधर देखने लगा.

 
राबिया- आप ज़्यादा सोचो मत.. जो भी बात है खुल कर बताओ, चाहे कैसी भी बात हो?

समीर- अब क्या बताऊं उसने तो सारे ही काम ग़लत किए हैं.. हो ना हो किसी की हाय लग गई होगी उसको.. तभी ये सब हुआ.

राबिया- कौन से काम समीर जी? और कैसी हाय? आप प्लीज़ मुझे खुल कर बताओ ना.

समीर- अब कैसे बताऊं मैं आपको? मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा, वो बातें ऐसी हैं जो बताने लायक नहीं हैं.

राबिया समझ गई कि हो ना हो.. दाल में जरूर कुछ काला है, तभी समीर नहीं बता रहा. मगर उसने भी ठान लिया था आज वो समीर से पूछ कर ही जाएगी तो उसने एक चाल चली और समीर उसमें फँस गया.

राबिया- अच्छा अगर ऐसी बात है जो आप नहीं बता सकते तो जाने दो मत बताओ उनका राज आप छुपा कर रखो, थोड़े दिनों बाद जब वो मर जाए, तब उसकी चिता की राख के साथ ये राज भी गंगा में बहा देना.

इतना बोलकर राबिया सुबकने लगी, उसकी आँखों से आँसू टपकने लगे और यही तो होता है त्रिया चरित्र, जिसके वार से कोई मर्द नहीं बच सकता.

बस समीर ने ये मंज़र देखा और उसके अन्दर के इंसान ने उसको आवाज़ दी कि खामखां बेचारी को रुला दिया, जो बात है बता दे इसको.. नहीं तो फवाद भी नहीं बचेगा.

समीर ने राबिया के कंधे पर हाथ रखा और उसको चुप कराने लगा.

थोड़ी देर बाद राबिया चुप हो गई.

समीर- ऐसे रोने से कुछ नहीं होगा, आप यकीन करो फवाद को कुछ नहीं होगा. मैं आपको सब कुछ बता दूँगा मगर उसके बाद आप फवाद से नफ़रत नहीं करोगी.. आप ये मुझसे वादा करो.

राबिया- मैं क्यों उनसे नफ़रत करूँगी.. शादी के पहले हर आदमी कुछ ना कुछ ग़लत करता है.. कोई गर्लफ्रेंड के साथ तो कोई कहीं और..

समीर- आपको कैसे पता ये लड़की का चक्कर है?

राबिया ने तो अंधेरे में तीर मारा था मगर वो निशाने पे जाकर लग गया था.

राबिया- मुझे सब पता है.. फकीर ने उनकी कुंडली देख कर बताया था मगर उन्होंने बस इशारा दिया था, अब बाकी की बात आप मुझे बताओ ताकि मैं उसका इलाज ढूँढ सकूं और उनकी जान बचा सकूं.

समीर कुछ बोलता तभी उसका फ़ोन बजने लगा और उसने 2 मिनट किसी से बात की. फिर उसने राबिया से कहा कि अभी बहुत अर्जेंट काम आ गया, मैं आपको कल बता दूँगा.

मगर राबिया कहाँ मानने वाली थी. एक-दो झूठ और बोलकर उसे आज ही बताने को कहा.

समीर- आप बात को समझो.. अभी मेरा जाना बहुत जरूरी है और वहाँ मुझे टाइम लगेगा. फिर आपको कब बताऊंगा? रात को आप मुझसे कैसे मिलोगी?

राबिया- आप चिंता मत करो फवाद की नाइट शिफ्ट है.. वो सुबह ही घर आता है आप प्लीज़ अपना काम निपटा कर मेरे घर आ जाना.. आज ये राज खुलना बहुत जरूरी है.

समीर- आपके घर तो आ जाऊंगा मगर आपको दिक्कत होगी और शायद फवाद को भी ये बात अच्छी ना लगे.

राबिया- मैंने कहा ना.. अभी उनको इस बारे में कुछ नहीं पता और मैं बताऊंगी भी नहीं. आप प्लीज़ आ जाना उनकी जान बच जाए.. बस यही मेरे लिए बहुत है. उसके बाद मैं उसे सब कुछ बता दूँगी.

राबिया ने अपना पता समीर को दे दिया और वो घर चली गई. उसके चेहरे पे ख़ुशी थी कि फवाद के राज भी पता लग जाएँगे और साथ में आज रात लंड का भी इंतजाम हो गया.

उधर रात का खाना खाने के बाद शाजिया अपनी अम्मी के पास गई और उनसे कहा कि रज़िया की अम्मी बहुत बीमार है. दो दिन से रज़िया कॉलेज भी नहीं आई है, तो वो उससे मिलने जा रही है ताकि उसको कुछ तसल्ली दे सके.

अंजुम- वो तो ठीक है.. मगर तेरे अब्बू आने वाले हैं. वो पूछेंगे तो मैं क्या कहूँगी? तू तो जानती है उनका गुस्सा कैसा है.. और फिर रात का टाइम है तेरा अकेली जाना.. मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा.

शाजिया- अम्मी आप अब्बू को समझा देना और रज़िया का घर कौन सा दूर है?

अंजुम- बेटा बात वो नहीं है.. तेरे अब्बू को ऐसे रात को तेरा जाना पसंद नहीं आएगा.. तू बात को समझती क्यों नहीं?

अब्दुल- अरे क्या बातें हो रही हैं अम्मी-बेटी में.. क्या समझा रही है इसे?

अंजुम- आप आ गए जी.. कुछ नहीं हम तो ऐसे ही बात कर रहे थे. वो शाजिया की सहेली है ना रज़िया.. उसकी अम्मी बहुत बीमार है, तो ये कह रही थी उससे मिलने जाऊं, मगर मैंने कहा ऐसे रात को जाना ठीक नहीं.. तू सुबह मिल आना.

अब्दुल- हाँ, सही तो है बेटा सुबह कॉलेज जाएगी तब मिल लेना.. अभी जाने का क्या मतलब हुआ?

शाजिया- ठीक है अब्बू.. मैं सुबह मिल आऊंगी.. अभी आपके लिए खाना ले आऊं?

अब्दुल- अरे खाना तेरी अम्मी लगा देगी.. तू अपनी पढ़ाई पे ध्यान दे.

शाजिया- अब्बू व्ववो आपसे कुछ बात करनी थी मुझे.. तो आप पहले खाना खा लो.. मैं यहीं आपके पास बैठती हूँ.

अब्दुल- अरे बोल ना.. क्या बात है खाना तो बाद में खा लूँगा, तू बात बता?

शाजिया- अब्बू वो कॉलेज में सब कहते हैं कि मैं ओल्ड फॅशन के कपड़े पहनती हूँ.. तो मुझे कुछ न्यू ड्रेस लेने थे.

अब्दुल- पता नहीं आजकल के बच्चों को क्या हो गया है. अच्छे भले कपड़े तो हैं अब ओल्ड क्या और न्यू क्या?

शाजिया- अब्बू व्ववो मुझे ज्ज.. जींस लेनी है.

अब्दुल- दिमाग़ तो ठीक है तुम्हारा? लड़कों के कपड़े पहनने से न्यू फॅशन हो जाएगा क्या? नहीं ऐसे भद्दे कपड़े बिगड़े हुए बच्चे पहनते हैं. तुम ऐसा कुछ नहीं पहनोगी समझी!

शाजिया- मगर अब्बू व्ववो..!

अब्दुल- नहीं मतलब नहीं.. ओके जाओ अपने कमरे में.. सुबह कॉलेज भी जाना है.

शाजिया उदास होकर चली गई दरअसल वो अपने अब्बू से डरती है मगर रज़िया की संगत में आकर उसमें कुछ बदलाव आ गए थे.. जिसे उसके अब्बू ने नोटिस किया था. पहले तो अब्दुल जी कुछ बोले नहीं.. मगर आज ये जींस वाली बात उनको पसंद नहीं आई.

अंजुम- आप भी ना.. ये बात आराम से बोल देते, ऐसे गुस्से में बोलना ठीक नहीं है.. एक ही तो बेटी है हमारी?

अब्दुल- नहीं अंजुम.. ये आजकल कुछ ज़्यादा ही मॉर्डन हो रही है. बाल खुले रखना, संजना संवरना कुछ ज़्यादा हो रहा है.

अंजुम ने कुछ बोलना चाहा मगर अब्दुल जी ने चुप करवा दिया और वो भी खाना लाने चली गई.

राबिया बार-बार घड़ी की तरफ़ देख रही थी उसको बेसब्री से समीर का इन्तजार था। उसने ब्लैक कलर की नाइटी पहन रखी थी और अन्दर वाइट ब्रा पैंटी का सैट बाहर से ही झलक रहा था। चूँकि नाइटी जालीदार थी तो उसमें से आसानी से पता लग रहा था कि उसने अन्दर सफेद ब्रा-पेंटी पहनी है। इस वक्त राबिया ने अपने बाल भी खुले रखे थे.. होंठों पर हल्की लाली लगा रखी थी। मतलब ये कि आज राबिया ने समीर को फँसाने का पूरा इंतजाम कर रखा था।

अब ऐसे लाजवाब हुस्न को देख कर समीर कैसे रिएक्ट करता है, वो तो उसके आने के बाद ही पता लगेगा।

ठीक दस बजे समीर ने राबिया के घर की बेल बजाई तो राबिया ने झट से दरवाजा खोल दिया। राबिया के हुस्न को देख कर समीर की आँखें चुंधिया गईं, वो बस राबिया की मचलती जवानी को देखता ही रह गया। अगर राबिया बीच में नहीं बोलती तो वो शायद ऐसे ही बुत बना खड़ा रहता।

राबिया- अरे आप आ गए समीर जी.. आओ अन्दर आ जाओ.. मैं आपका ही इन्तजार कर रही थी।

समीर तो किसी कठपुतली की तरह राबिया के पीछे-पीछे खिंचा चला गया। उधर राबिया भी बहुत तेज थी.. वो समीर को सीधे अपने बेडरूम में ले गई।

राबिया- आप यहाँ बैठो, मैं कुछ खाने को ले आती हूँ।

समीर- अरे नहीं नहीं.. आप तकलीफ़ मत करो.. मैं कुछ नहीं लूँगा, बस आप यहाँ बैठ जाओ।

राबिया- ऐसे कैसे.. आप पहली बार हमारे घर आए हैं.. आपको कुछ तो लेना ही पड़ेगा।

समीर के मन में तो था कि राबिया के रसीले होंठों को पी जाए.. मगर ऐसे डायरेक्ट हमला करना ठीक नहीं होता।

समीर- अरे आप बैठो तो.. जब चाहिए होगा मैं आपको बता दूँगा।

राबिया ठीक समीर के सामने बैठ गई और हल्की मुस्कान देने लगी। समीर तो उसके रूप को ऊपर से नीचे तक आराम से निहार रहा था और अपनी आँखें सेंक रहा था।

राबिया- आप मुझे ऐसे क्या देख रहे हो?

समीर- आप बहुत सुंदर हो भाभी.. सच में फवाद का भाग्य खुल गया।

राबिया- हा हा हा आप भी ना.. इतनी भी सुंदर नहीं हूँ.. बस ठीक-ठाक ही हूँ.. आप बताओ क्या आपने शादी कर ली?

समीर- नहीं.. आप सच में बहुत सुंदर हो और मेरे नसीब में अभी शादी कहाँ?

राबिया- क्यों आप तो अच्छे-ख़ासे सैट हो गए हो.. तो अभी तक शादी क्यों नहीं की?

समीर- रिश्ते तो बहुत आए, मगर मुझे जैसी वाइफ चाहिए वैसी मिली नहीं।

राबिया- ओह अच्छा तो कैसी वाइफ चाहिए आपको.. मुझे बताओ मैं ढूँढ दूँगी।

समीर- आपके जैसी वाइफ मिल जाए तो क्या कहने.. ऐसी खूबसूरती मैंने पहले कभी नहीं देखी.. भाभी आप तो लाजवाब हो।

राबिया- बड़ी तारीफ कर रहे हो मेरी.. चलो मैं मेरे से भी अच्छी ढूँढ दूँगी.. तब तक मेरे से ही काम चला लो.. मेम.. मेरा मतलब मुझे देख कर हा हा हा हा..

राबिया ने डबल मीनिंग बात कह दी और हंसने लगी, साथ में समीर भी हंसने लगा। फिर थोड़ी देर और दोनों इधर-उधर की बातें करने लगे। जब राबिया को लगा कि समीर उसके रूप के जाल में फँस गया है, तब उसने पासा फेंका।

राबिया- समीर जी अब आप मुझे बताओ कौन लड़की थी जिसके कारण आप दोनों अलग हुए?

समीर- भाभी मैंने बताया ना.. बात थोड़ी गंदी है.. शायद मेरे बोलने से आपको अच्छा ना लगे, मैं शॉर्ट में बताता हूँ।

राबिया- सबसे पहले तो आप मुझसे ये भाभी बोलना बंद करो.. अभी मेरी इतनी उम्र नहीं हुई है। आप बस राबिया कहो.. मुझे अच्छा लगेगा और दूसरी बात हम अच्छे दोस्त बन सकते हैं तो शॉर्ट में नहीं खुल कर सब बात डिटेल में बताओ।

समीर- ओके भाभी.. सॉरी राबिया मगर बात क्या है आप समझ रही हो ना!

राबिया ने एकदम से खुलते हुए कहा- हाँ पता है लड़की की बात है। अब लड़की होगी तो चुदाई भी हुई होगी.. इससे गंदा क्या होगा.. यही ना चलो अब बोलो।

राबिया के मुँह से चुदाई शब्द सुनकर समीर का लंड पेंट में अकड़ने लगा।

समीर- ओके राबिया तुम्हें प्राब्लम नहीं है तो सुनो, हम दोनों जब बड़े हुए.. तब एक गंदी लत फवाद को लग गई थी। वो पॉर्न साइट पे वीडियोज देखता.. सेक्स कहानी पढ़ता और धीमे-धीमे उसने मुझे भी साथ में मिला लिया। अब हम दोनों को लड़की चोदने का भूत सवार हो गया, मगर लड़की लाते कहाँ से, ये एक दिक्कत थी।

 
राबिया आराम से सुन रही थी मगर समीर इतना बोलकर चुप हो गया।

राबिया- अरे क्या हुआ आगे तो बोलो?

समीर- सॉरी मैंने इतने गंदे शब्दों का यूज किया.. आपको बुरा तो नहीं लगा ना?

राबिया ने झुक कर अपने दूध हिलाते हुए कहा- अरे मैंने अभी तो कहा.. आज से हम दोस्त हैं। अब बेफ़िक्र होकर बताओ जो शब्द अच्छे लगें बोलो.. फुददी, लड़की, चुदाई.. सब कुछ खुल कर बताओ ओके!

इतना कहकर राबिया ने हल्की स्माइल भी पास की, जिसे देख कर समीर भी मुस्कुरा दिया। वो सोच रहा था कि ये राबिया की तरफ से ग्रीन सिग्नल है या सिर्फ़ उसका वहम है।

राबिया- अब बोलो भी यार.. आगे क्या हुआ.. क्या किया तुम दोनों ने कोई लड़की मिली या नहीं तुम दोनों को.. या ऐसे ही दोनों प्यासे और हिलाते घूमते रहे?

समीर को सोचता देख राबिया ने फिर पूछा- क्या हुआ सब ठीक तो है ना?

राबिया की बात सुनकर समीर अपना लंड एड्जस्ट्स करने लगा, जिसे राबिया ने भी देख लिया और मुस्कुराने लगी।

समीर- नहीं नहीं सब ठीक है.. वो जींस में बैठने में थोड़ी प्राब्लम हो रही है।

राबिया- आपको फवाद का पजामा दे दूँ.. उससे आपको आराम मिलेगा।

समीर- अरे नहीं नहीं.. मैं ठीक हूँ। आप तकलीफ़ मत करो वैसे भी टाइम काफ़ी हो गया.. मुझे जाना भी होगा।

राबिया- अरे बात तो बताई ही नहीं और जाने की बात करने लगे और वैसे भी कौन सा आपकी वाइफ आपका वेट कर रही है। चले जाना आराम से.. मैं भी अकेली हूँ। आपसे बात करके अच्छा लग रहा है। अब आगे की बात बताओ।

समीर को अब पक्का यकीन हो गया था कि आज उसके मज़े हो गए, राबिया की फुददी उसको मिलने वाली है।

वो फिर बताने में शुरू हो गया- ओके सुनो.. अब लड़की कहाँ से मिलती हमको.. तो एक बार हम रांड़ के पास गए, पहली बार था तो उसे चोदने में बहुत मज़ा आया। मगर रोज जाने लगे तो धीमे-धीमे मज़ा कम होने लगा और फवाद ने भी कहा कि इन रांड़ की चुदाई में मज़ा नहीं आता.. कोई कच्ची कली मिले.. तो बात बने।

‘फिर?’

‘फिर हमारे नसीब खुल गए.. एक रात एक भीख माँगने वाली लड़की हमको मिली.. वो खाने के लिए पैसे माँग रही थी। वो एकदम 18 साल की खिलती जवान लड़की थी। फवाद ने उसे ज़्यादा पैसों का लालच दिया और हम उसको अपने साथ हमारे रूम में ले आए।’

‘फिर?’

‘फिर फवाद ने उसको वॉशरूम भेज दिया और कहा कि अच्छे से नहा कर आओ फिर कुछ खा लेना।’

‘फिर..?’

‘फिर वो लड़की भी समझ गई थी कि आज उसकी जवानी इन दोनों के हाथ लुटने वाली है। बस वो नहा कर आ गई और हमने उसको खाना खिलाया। फिर फवाद ने उसको नंगी किया.. हम दोनों ने उसके जिस्म के खूब मज़े लिए। फिर फवाद ने उसकी सील तोड़ी.. वो बहुत रोती हुई मजा लेती रही मगर फवाद तो उसको चोदने में लगा रहा। उसके बाद मैंने भी पूरा मज़ा लिया।’

राबिया- ओह गॉड बेचारी लड़की की जान निकाल दी होगी.. ज़रा भी दया नहीं आई तुम्हें?

समीर- सॉरी राबिया.. उस टाइम ये ध्यान नहीं रहा.. मगर अब तो मैं बड़े आराम से करता हूँ.. तुम चाहो तो..

समीर बोलता हुआ रुक गया क्योंकि उसे बाद में अहसास हुआ वो कुछ ज़्यादा ही बोल गया।

राबिया- हा हा हा तुम भी ना बड़े मजाकिया हो.. ज़ोर से करो या आराम से.. मगर मुझे नहीं देखना.. हा हा हा हा..

समीर- सॉरी मैं ज़ज्बात में बह गया था।

राबिया- कोई बात नहीं हम अब दोस्त हैं.. इतना तो तुम बोल ही सकते हो, अच्छा आगे बताओ?

समीर- आगे क्या बताऊं, उस दिन जो कच्ची कली के साथ फवाद ने क्या किया, उसके बाद तो किसी चुदी हुई फुददी में उसे मज़ा ही नहीं आता। वो बस किसी ना किसी तरह छोटी उम्र की लड़की ढूँढ ही लाता और उसी के साथ चुदाई करता। वो पागल हो गया था.. छोटी लड़कियों के लिए उसका जुनून बढ़ता ही जा रहा था। कितनी भिखारिन लड़कियों को तो बहला कर लाता.. वो मानती तो ठीक नहीं ज़बरदस्ती करके ले आता। बस वो पागल सा हो गया था, इसी कारण मेरी उससे कम पटने लगी थी।

राबिया- अच्छा ये बात है.. तभी उनकी कुंडली में वो दोष आया होगा। एक बात बताओ तुम्हारी उससे लड़ाई क्यों हुई थी?

समीर- अब क्या बताऊं उसका जुनून इतना बढ़ गया था कि एक दिन मेरी छोटी बहन के बारे में वो गंदी बात कहने लगा। बस मैंने भी उसको जमा दिया एक और जब से हम अलग हो गए। उस दिन के बाद मैंने उसे देखा ही नहीं है।

राबिया- छी: फवाद इतना गंदा है.. पता ही नहीं था मगर मैंने उनको कभी ऐसे नहीं देखा। वो तो मेरे साथ भी बराबर चुदाई भी नहीं करता और करता भी है तो जल्दी आउट हो जाता है, फिर ये लड़कियों की बात समझ नहीं आई?

राबिया अब खुलकर बात करने लगी थी और समीर भी इसका फायदा उठा रहा था।

समीर- अरे शुरू में तो उसने खूब मस्त किया होगा.. अब उसका मन तुमसे भर गया है.. और देखना वो किसी कच्ची फुददी के चक्कर में होगा.. तुम उसकी इंक्वायरी करो।

राबिया- हाँ शुरू में तो बहुत ज़बरदस्त चुदाई करता था मगर अब सच में उसका मन भर गया है मगर मैं क्या करूँ आख़िर वो मेरा शौहर है.. उसको छोड़ कर भी नहीं जा सकती ना!

समीर- तुम टेंशन मत लो.. मैं हूँ ना आपको कभी भी किसी भी तरह की मुझसे मदद चाहिए तो बता देना, मैं हाजिर हो जाऊंगा।

समीर ने ये बात अपने लंड को सहलाते हुए कही थी, जो राबिया ने भी देखा और वो बस मुस्कुरा कर उठी और जाने लगी।

समीर- क्या हुआ.. मैंने कुछ ग़लत कह दिया क्या.. आपको बुरा लगा तो सॉरी।

राबिया- आप नहीं तुम.. और मुझे क्यों बुरा लगेगा, आपने मदद का ही कहा है।

समीर- मुझे भी तुम ही कहो, इससे नज़दीकियां बढ़ती हैं।

राबिया- अच्छा ये बात है तो चलो आज नज़दीकियां बढ़ा ही लेते हैं, मुझे भी तुम अपना टेलेंट दिखाओ।

समीर- ओह.. क्या मैं कुछ समझा नहीं..?

राबिया कुछ बोली नहीं और अलमारी से फवाद का पजामा और टीशर्ट लाकर बेड पर रख दिया, जिसे देख कर समीर ने आँखों के इशारे से पूछा कि इसका क्या करूँ?

राबिया- अब फवाद तो सुबह ही आएगा, तुम रात को यहीं रुक जाओ, सुबह जल्दी चले जाना और तुम्हारा टेलेंट भी दिखा देना।

समीर- राबिया मैं अभी भी नहीं समझ पा रहा हूँ.. तुम जो कह रही हो क्या वो!

राबिया- हाँ वही.. जो तुम सोच रहे हो। अब तुमसे क्या छुपाना, फवाद आजकल कुछ खास मज़ा नहीं देता अगर तुम्हें ऐतराज ना हो तो तुम आज की रात मेरे साथ.. तुम समझ गए ना!

समीर जल्दी से खड़ा हुआ और राबिया को बांहों में भर लिया, वो राबिया को किस करने ही वाला था कि राबिया ने उसको धक्का देकर अलग कर दिया।

राबिया- ये तुम क्या कर रहे हो.. मैं तुम्हारे दोस्त की बीवी हूँ.. ये ग़लत है!

 
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