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Guest
अब फ्रेंड्स, आप सोच रहे होंगे इतना सब कुछ होने के बाद आँख ना खुले तो ऐसा हो सकता है क्या.. मगर यहाँ तो हो रहा है.. अब ऐसे लोग भी होते हैं यार, ज़्यादा सोचो मत.. बस कहानी एंजाय करो.
खड़े लंड की रगड़ शाजिया को पागल कर रही थी. अब उसका पानी किसी भी पल निकल सकता था. वो वापस नीचे उतरी और लंड को चूसने लगी. साथ ही अपनी फुददी को हाथ से मसलने लगी. इसमें उसको बहुत मज़ा आ रहा था. वो लंबी साँसें लेने लगी थी.
याक़ूब के लंड से पानी की बूँदें आने लगी थीं.. जिसे शाजिया जीभ से चाटकर मज़ा ले रही थी. अब शायद याक़ूब का रस उसको अच्छा लगने लगा था या वो वासना के चलते ऐसा कर रही थी, ये तो वही जाने.
करीब 5 मिनट बाद उसकी फुददी एकदम आग का गोला बन गई जो किसी भी पल फटने वाली थी और उसी जोश में वो लंड को पूरा मुँह में लेके ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी, साथ में अपनी फुददी को रगड़ने लगी.
दोनों का फव्वारा साथ में छूटा.. मगर इस बार शाजिया जोश में थी तो याक़ूब का सारा रस वो गटक गई और अपनी फुददी का रस अपने हाथ पर लेकर वहीं ज़मीन पे निढाल होकर बैठ गई.
रज़िया जल्दी से उसके पास आई और उसके हाथ को चाटकर उसका रस पीने लगी. वो भी कब से तड़प रही थी. अब उसके बर्दाश्त के बाहर हुआ तो उसने शाजिया का रस चाट लिया.
शाजिया- ओइह आपा.. सच कहा था आपने.. लंड का रस बड़ा टेस्टी होता है. अबकी बार मैंने पूरा पी लिया मगर अपने मेरा रस क्यों पिया.. बोलो?
रज़िया- अरे तेरा रस वेस्ट ना हो इसलिए पी लिया मेरी जान.. अब चल याक़ूब के कपड़े ठीक कर और वहाँ बेड पे चल वही बातें करेंगे.
शाजिया- रूको मैं वॉशरूम होकर आती हूँ आपा फिर हम बातें करेंगे.
शाजिया थोड़ी देर में फ्रेश होकर वापस आ गई, उसने कपड़े भी पहन लिए. रज़िया ने सोचा अगर पीरियड्स नहीं होते तो इसके साथ मज़ा लेती.. मगर उसने कुछ और ही सोचा हुआ था. वो शाजिया के पास आराम से बैठ गई और उसके चेहरे के बाल उसने ठीक किए.
शाजिया- आपा एक बात कहूँ.. क्या आप भी याक़ूब के साथ ऐसा करती हो?
रज़िया- नहीं कभी नहीं.. यार वो मेरा भाई है और मुझे ऐसी ज़रूरत है ही नहीं.. मेरे पास पहले ही अच्छा ख़ासा लौड़ा है.. तो मैं क्यों इस छोटे से लंड से खेलूँगी?
शाजिया- आपा वो तगड़ा लौड़ा शाहिद सर का है ना.. प्लीज़ सच बताना आप?
रज़िया- क्या बात है मेरी जान.. बड़े दिमाग़ लगा रही है, एक बार लंड का रस पिया तो ये हाल है.. बार-बार पिएगी तो सुपर फास्ट हो जाएगी तू हा हा हा हा.
शाजिया- आपा प्लीज़ बताओ ना आप पहली बार शाहिद सर से कैसे चुदी थीं?
रज़िया- ये क्या सर सर लगा रखा है, अब शाहिद बोला कर.. बस जल्दी तुझे उसके लंड का रस पीना है.
शाजिया- नो आपा.. प्लीज़ नहीं आप उनको ऐसा कुछ नहीं बताओगी मेरे बारे में.. प्लीज़ आपा ये बस हमारे बीच की बात है.
रज़िया- अच्छा अच्छा ठीक है.. मैं समझी तुझे एक असली मर्द के लंड के दीदार फ्री में करवा देती.. मगर तेरा मान नहीं तो जाने दे. वैसे भी शाहिद ऐसा लड़का नहीं है, जो किसी के साथ भी चुदाई कर ले.. ही इज एक नाइस गाई यार.. चल जाने दे.
शाजिया- आपा बताओ ना पहली बार शाहिद ने कैसे आपको प्रपोज किया था?
रज़िया- अबे, ये कोई लव वाला मामला नहीं है जो वो मुझे प्रपोज करेगा समझी?
शाजिया- अच्छा जो भी मामला है आपकी पहली चुदाई कैसे की थी शाहिद ने, वो तो मुझे आप बता सकती हो ना?
रज़िया- बता सकती हूँ मेरी जान, मगर आज नहीं जब मेरे पीरियड ख़त्म होंगे तब बताऊंगी.
रज़िया की बात शाजिया के पल्ले नहीं पड़ी कि इस बात का पीरियड से क्या लेना-देना. उसने पूछ ही लिया तो रज़िया ने कहा कि ऐसी बातें बताते टाइम फुददी में आग लग जाती है, जिसे बुझाना ज़रूरी होता है, इसलिए मेरी जान पीरियड खत्म होने दे, सब बता दूँगी. अब सो जा.. देर हो गई है, सुबह जल्दी उठना भी है कि नहीं, तेरी मॉम तुझे दोबारा मेरे साथ नहीं भेजेगी.
शाजिया भी अपनी फुददी का पानी निकाल कर सुकून में थी तो उसको जल्दी नींद आ गई.
उधर गाँव में ग़ज़ल तो बुखार के कारण रात को ऊपर नहीं आई मगर चाचा ने राबिया की जमकर चुदाई की.. उसकी गांड और फुददी को पूरी रात ठोका क्योंकि सुबह वो चली जाने वाली थी. राबिया ने भी अपनी सारी कसर निकाल ली, उसने हर पोज़ में दम से चुदवाया.
रात तो जैसे-तैसे गुजर गई, सुबह सबसे पहले याक़ूब उठा और रज़िया के साथ शाजिया को सोता देख कर वो सोचने लगा कि ये कौन है, फिर उसने रज़िया को उठाया.
याक़ूब- आपा उठो.. आज आप सोई हो और देखो मैं जल्दी उठ गया.
याक़ूब की आवाज़ से दोनों उठ गईं और रज़िया उसे हैरानी से देखने लगी कि आज ये कैसा चमत्कार हो गया था याक़ूब अपने आप कैसे उठ गया?
रज़िया- ये मैं क्या देख रही हूँ याक़ूब तू अपने आप उठ गया.. ये कैसे हुआ?
याक़ूब- पता नहीं आपा.. आज मेरी पूरी बॉडी एकदम रिलेक्स है.. ऐसा लगता है आज नींद पूरी हो गई, तभी आँख खुल गई और ये आपा कौन है?
रज़िया- हा हा हा देखा शाजिया.. तेरे रात के काम ने क्या कमाल किया.
शाजिया- सस्स चुप करो.. आप कुछ भी बोल देती हो. याक़ूब मैं शाजिया हूँ.. तुम्हारी आपा की कॉलेज फ्रेंड हूँ.
याक़ूब और शाजिया ने हाथ मिलाया. फिर शाजिया जल्दी से अपने घर चली गई. इधर रज़िया ने याक़ूब को बताया कि वो उसकी फ्रेंड है.. रात को पढ़ाई के लिए यहाँ आ गई थी.
याक़ूब- वो सब ठीक है आपा मगर उन्होंने रात को क्या किया था मेरे साथ.. जो मुझे आज रिलेक्स फील हुआ और मैं बिना किसी के जगाए जल्दी भी उठ गया?
रज़िया- अरे कुछ नहीं किया.. मैंने तो ऐसे ही मज़ाक से कहा था बस.
याक़ूब- नहीं आपा.. कुछ तो हुआ होगा प्लीज़ बताओ ना मुझे, ऐसा क्या हुआ था?
रज़िया- अब ज़्यादा सवाल मत कर, कुछ नहीं हुआ.. जा जल्दी से नहा ले.. मैं देखती हूँ कि अम्मी उठीं या नहीं.. ओके!
फ्रेंड्स अब यहाँ कुछ नहीं रहा सब रोज की तरह नॉर्मल रहा. स्कूल वाले स्कूल चले गए और कॉलेज वाले कॉलेज.
उधर राबिया को भी चाचा ने बस में बिठा दिया था तो वो भी वापस अपने घर आ रही है.
आपको याद है या भूल गए.. आज शबनम की फुददी की खुजली मिटाने के लिए शाहिद ने कॉलेज जाना कैंसिल किया है. तो चलो आप भी बोर हो गए होंगे.. दिखा देते हैं आपको कि वहां क्या चल रहा है.
शाहिद रेडी होकर सीधा पार्क पहुँच गया. वहां उसे देख कर शबनम गुस्सा हो गई.
शबनम- क्या मामू, कब से यहाँ बैठी हूँ. स्कूल ड्रेस में देखकर कितने जाने मुझे बोले कि स्कूल से छिपकर यहाँ बैठी है, क्या मेरा मज़ाक भी बनाया.
शाहिद- अरे जाने दो.. लोग तो ऐसे ही बोलते हैं. चल तुझे आज कली से फूल बना देता हूँ.
शबनम तो ऐसे खुश हो रही थी कि ना जाने आज उसे कौन सा खजाना मिलने वाला है. वो बड़े उत्साह से शाहिद के साथ चली गई. वहां जाकर शाहिद ने उसको कुछ समझाया कि पहले वो अन्दर जाएगा फिर पीछे से तुम आ जाना. शबनम ने वैसा ही किया और वैसे भी उस एरिया में ज़्यादा लोग नहीं थे. कोई एक-दो पुराने घर ही थे.. तभी तो शाहिद ने अपने इस घर में पार्टी की थी और रूबी की जमकर चुदाई की थी.
शबनम- मामू ये किसका घर है? यहाँ कोई आएगा तो नहीं ना?
शाहिद- तू ज़्यादा सवाल मत कर.. जल्दी से कमरे में चल.. आज तुझे चोद कर मज़ा भी लेना है और फिर घर जाने लायक भी बनाना है.
खड़े लंड की रगड़ शाजिया को पागल कर रही थी. अब उसका पानी किसी भी पल निकल सकता था. वो वापस नीचे उतरी और लंड को चूसने लगी. साथ ही अपनी फुददी को हाथ से मसलने लगी. इसमें उसको बहुत मज़ा आ रहा था. वो लंबी साँसें लेने लगी थी.
याक़ूब के लंड से पानी की बूँदें आने लगी थीं.. जिसे शाजिया जीभ से चाटकर मज़ा ले रही थी. अब शायद याक़ूब का रस उसको अच्छा लगने लगा था या वो वासना के चलते ऐसा कर रही थी, ये तो वही जाने.
करीब 5 मिनट बाद उसकी फुददी एकदम आग का गोला बन गई जो किसी भी पल फटने वाली थी और उसी जोश में वो लंड को पूरा मुँह में लेके ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी, साथ में अपनी फुददी को रगड़ने लगी.
दोनों का फव्वारा साथ में छूटा.. मगर इस बार शाजिया जोश में थी तो याक़ूब का सारा रस वो गटक गई और अपनी फुददी का रस अपने हाथ पर लेकर वहीं ज़मीन पे निढाल होकर बैठ गई.
रज़िया जल्दी से उसके पास आई और उसके हाथ को चाटकर उसका रस पीने लगी. वो भी कब से तड़प रही थी. अब उसके बर्दाश्त के बाहर हुआ तो उसने शाजिया का रस चाट लिया.
शाजिया- ओइह आपा.. सच कहा था आपने.. लंड का रस बड़ा टेस्टी होता है. अबकी बार मैंने पूरा पी लिया मगर अपने मेरा रस क्यों पिया.. बोलो?
रज़िया- अरे तेरा रस वेस्ट ना हो इसलिए पी लिया मेरी जान.. अब चल याक़ूब के कपड़े ठीक कर और वहाँ बेड पे चल वही बातें करेंगे.
शाजिया- रूको मैं वॉशरूम होकर आती हूँ आपा फिर हम बातें करेंगे.
शाजिया थोड़ी देर में फ्रेश होकर वापस आ गई, उसने कपड़े भी पहन लिए. रज़िया ने सोचा अगर पीरियड्स नहीं होते तो इसके साथ मज़ा लेती.. मगर उसने कुछ और ही सोचा हुआ था. वो शाजिया के पास आराम से बैठ गई और उसके चेहरे के बाल उसने ठीक किए.
शाजिया- आपा एक बात कहूँ.. क्या आप भी याक़ूब के साथ ऐसा करती हो?
रज़िया- नहीं कभी नहीं.. यार वो मेरा भाई है और मुझे ऐसी ज़रूरत है ही नहीं.. मेरे पास पहले ही अच्छा ख़ासा लौड़ा है.. तो मैं क्यों इस छोटे से लंड से खेलूँगी?
शाजिया- आपा वो तगड़ा लौड़ा शाहिद सर का है ना.. प्लीज़ सच बताना आप?
रज़िया- क्या बात है मेरी जान.. बड़े दिमाग़ लगा रही है, एक बार लंड का रस पिया तो ये हाल है.. बार-बार पिएगी तो सुपर फास्ट हो जाएगी तू हा हा हा हा.
शाजिया- आपा प्लीज़ बताओ ना आप पहली बार शाहिद सर से कैसे चुदी थीं?
रज़िया- ये क्या सर सर लगा रखा है, अब शाहिद बोला कर.. बस जल्दी तुझे उसके लंड का रस पीना है.
शाजिया- नो आपा.. प्लीज़ नहीं आप उनको ऐसा कुछ नहीं बताओगी मेरे बारे में.. प्लीज़ आपा ये बस हमारे बीच की बात है.
रज़िया- अच्छा अच्छा ठीक है.. मैं समझी तुझे एक असली मर्द के लंड के दीदार फ्री में करवा देती.. मगर तेरा मान नहीं तो जाने दे. वैसे भी शाहिद ऐसा लड़का नहीं है, जो किसी के साथ भी चुदाई कर ले.. ही इज एक नाइस गाई यार.. चल जाने दे.
शाजिया- आपा बताओ ना पहली बार शाहिद ने कैसे आपको प्रपोज किया था?
रज़िया- अबे, ये कोई लव वाला मामला नहीं है जो वो मुझे प्रपोज करेगा समझी?
शाजिया- अच्छा जो भी मामला है आपकी पहली चुदाई कैसे की थी शाहिद ने, वो तो मुझे आप बता सकती हो ना?
रज़िया- बता सकती हूँ मेरी जान, मगर आज नहीं जब मेरे पीरियड ख़त्म होंगे तब बताऊंगी.
रज़िया की बात शाजिया के पल्ले नहीं पड़ी कि इस बात का पीरियड से क्या लेना-देना. उसने पूछ ही लिया तो रज़िया ने कहा कि ऐसी बातें बताते टाइम फुददी में आग लग जाती है, जिसे बुझाना ज़रूरी होता है, इसलिए मेरी जान पीरियड खत्म होने दे, सब बता दूँगी. अब सो जा.. देर हो गई है, सुबह जल्दी उठना भी है कि नहीं, तेरी मॉम तुझे दोबारा मेरे साथ नहीं भेजेगी.
शाजिया भी अपनी फुददी का पानी निकाल कर सुकून में थी तो उसको जल्दी नींद आ गई.
उधर गाँव में ग़ज़ल तो बुखार के कारण रात को ऊपर नहीं आई मगर चाचा ने राबिया की जमकर चुदाई की.. उसकी गांड और फुददी को पूरी रात ठोका क्योंकि सुबह वो चली जाने वाली थी. राबिया ने भी अपनी सारी कसर निकाल ली, उसने हर पोज़ में दम से चुदवाया.
रात तो जैसे-तैसे गुजर गई, सुबह सबसे पहले याक़ूब उठा और रज़िया के साथ शाजिया को सोता देख कर वो सोचने लगा कि ये कौन है, फिर उसने रज़िया को उठाया.
याक़ूब- आपा उठो.. आज आप सोई हो और देखो मैं जल्दी उठ गया.
याक़ूब की आवाज़ से दोनों उठ गईं और रज़िया उसे हैरानी से देखने लगी कि आज ये कैसा चमत्कार हो गया था याक़ूब अपने आप कैसे उठ गया?
रज़िया- ये मैं क्या देख रही हूँ याक़ूब तू अपने आप उठ गया.. ये कैसे हुआ?
याक़ूब- पता नहीं आपा.. आज मेरी पूरी बॉडी एकदम रिलेक्स है.. ऐसा लगता है आज नींद पूरी हो गई, तभी आँख खुल गई और ये आपा कौन है?
रज़िया- हा हा हा देखा शाजिया.. तेरे रात के काम ने क्या कमाल किया.
शाजिया- सस्स चुप करो.. आप कुछ भी बोल देती हो. याक़ूब मैं शाजिया हूँ.. तुम्हारी आपा की कॉलेज फ्रेंड हूँ.
याक़ूब और शाजिया ने हाथ मिलाया. फिर शाजिया जल्दी से अपने घर चली गई. इधर रज़िया ने याक़ूब को बताया कि वो उसकी फ्रेंड है.. रात को पढ़ाई के लिए यहाँ आ गई थी.
याक़ूब- वो सब ठीक है आपा मगर उन्होंने रात को क्या किया था मेरे साथ.. जो मुझे आज रिलेक्स फील हुआ और मैं बिना किसी के जगाए जल्दी भी उठ गया?
रज़िया- अरे कुछ नहीं किया.. मैंने तो ऐसे ही मज़ाक से कहा था बस.
याक़ूब- नहीं आपा.. कुछ तो हुआ होगा प्लीज़ बताओ ना मुझे, ऐसा क्या हुआ था?
रज़िया- अब ज़्यादा सवाल मत कर, कुछ नहीं हुआ.. जा जल्दी से नहा ले.. मैं देखती हूँ कि अम्मी उठीं या नहीं.. ओके!
फ्रेंड्स अब यहाँ कुछ नहीं रहा सब रोज की तरह नॉर्मल रहा. स्कूल वाले स्कूल चले गए और कॉलेज वाले कॉलेज.
उधर राबिया को भी चाचा ने बस में बिठा दिया था तो वो भी वापस अपने घर आ रही है.
आपको याद है या भूल गए.. आज शबनम की फुददी की खुजली मिटाने के लिए शाहिद ने कॉलेज जाना कैंसिल किया है. तो चलो आप भी बोर हो गए होंगे.. दिखा देते हैं आपको कि वहां क्या चल रहा है.
शाहिद रेडी होकर सीधा पार्क पहुँच गया. वहां उसे देख कर शबनम गुस्सा हो गई.
शबनम- क्या मामू, कब से यहाँ बैठी हूँ. स्कूल ड्रेस में देखकर कितने जाने मुझे बोले कि स्कूल से छिपकर यहाँ बैठी है, क्या मेरा मज़ाक भी बनाया.
शाहिद- अरे जाने दो.. लोग तो ऐसे ही बोलते हैं. चल तुझे आज कली से फूल बना देता हूँ.
शबनम तो ऐसे खुश हो रही थी कि ना जाने आज उसे कौन सा खजाना मिलने वाला है. वो बड़े उत्साह से शाहिद के साथ चली गई. वहां जाकर शाहिद ने उसको कुछ समझाया कि पहले वो अन्दर जाएगा फिर पीछे से तुम आ जाना. शबनम ने वैसा ही किया और वैसे भी उस एरिया में ज़्यादा लोग नहीं थे. कोई एक-दो पुराने घर ही थे.. तभी तो शाहिद ने अपने इस घर में पार्टी की थी और रूबी की जमकर चुदाई की थी.
शबनम- मामू ये किसका घर है? यहाँ कोई आएगा तो नहीं ना?
शाहिद- तू ज़्यादा सवाल मत कर.. जल्दी से कमरे में चल.. आज तुझे चोद कर मज़ा भी लेना है और फिर घर जाने लायक भी बनाना है.