फरज़ाना- उह अच्छा.. ये बात है तो ड्रेस और चप्पल से क्या होगा, उसको और कुछ भी चाहिए होगा ना!
फरज़ाना ने ये बात सामने अंडरगार्मेंट्स के डिपार्टमेंट को देख कर कही थी, जिसे अब्बू और बेटी दोनों समझ गए।
अब्दुल- शाजिया एक काम करो ये बहुत सामान हो गया है, ये सब बैग मुझे दो और मेरे लिए एक पानी की बोतल ले आओ.. बड़ी प्यास लगी है।
शाजिया- अब्बू पानी तो शायद नीचे मिलेगा, यहाँ तो सिर्फ़ गारमेंट्स और शूज ही हैं।
फरज़ाना- अरे तो नीचे से ले आओ, जाओ मुझे भी बहुत प्यास लगी है।
शाजिया अब आगे क्या बोलती, वो पानी लाने नीचे चली गई।
अब्दुल- ये क्या है फरज़ाना.. ज़रा भी शर्म नहीं करती हो, उधर देख कर क्या बोल रही थी तुम?
फरज़ाना- रिलॅक्स.. ऐसा क्या बोला मैंने? अब उसको इन सबकी भी तो जरूरत होगी ना.. खाली कपड़ों और जूतों से क्या होगा?
अब्दुल- ऐसा कुछ नहीं है, कोई लड़की नहीं है.. ये सब शाजिया के लिए ही है, बस मैं उसको सरप्राइज दे रहा हूँ।
फरज़ाना- वाउ… आपकी आदत गई नहीं सरप्राइज देने की.. गुड मगर ये सब लिया तो अंडरगार्मेंट्स भी दिला दो ना। उसकी भी इच्छा होगी ना, मगर आप को किसी की इच्छा से क्या लेना-देना है।
अब्दुल- फरज़ाना, तुम ज़्यादा बोल रही हो, मैंने कब तुम्हारी इच्छा को दबाया बोलो? आज जो तुम ये मॉर्डन कपड़े पहन कर घूम रही हो, ऐश कर रही हो.. सब मेरी वजह से, समझी! नहीं तो पता नहीं इस टाइम कहाँ होती।
फरज़ाना- बस बस मेरा मुँह मत खुलवाओ.. आप कोई सुनेगा तो हँसेगा।
अब्दुल- ओके बंद करो ये बकवास.. शाजिया आ रही है वो सुन लेगी।
फरज़ाना- हाँ मेरी बातें तो आपको बकवास ही लगेंगी ना, अच्छा मैं चलती हूँ, मुझे तो नई ब्रा लेनी है, आप जाओ अपनी प्यारी बेटी के साथ।
अब्दुल- रूको तुम सही कह रही हो, शाजिया को भी नई ब्रा-पेंटी ले लेनी चाहिए। मैं पानी लेकर वहाँ खड़ा हो जाऊंगा, तुम उसको साथ ले जाना और जो चाहिए उसको दिला देना।
फरज़ाना- ये हुई ना बात.. अब बने आप उसके असली अब्बू।
अब्दुल- फिर बकवास की तुमने.. असली का क्या मतलब है तुम्हारा? हाँ?
फरज़ाना- अरे कुछ नहीं.. अब सौतेली बेटी और असली बेटी में इतना फ़र्क तो होता ही है।
अब्दुल- फरज़ाना, तुम हद पर कर रही हो, अब वो आ गई, उसके साथ अगर कोई भी ऐसी-वैसी बात की ना.. तो सोच लेना तेरी अम्मी की तरह तू भी उसी जगह पहुँच जाएगी।
फरज़ाना कुछ जवाब देती, तब तक शाजिया उनके बिल्कुल पास आ गई थी।
अब्दुल जी ने शाजिया से पानी की बोतल ली और कहा- तुम फरज़ाना के साथ जाकर कुछ और शॉपिंग कर आओ, मैं तब तक वहाँ आराम करता हूँ।
शाजिया- लेकिन अब क्या बाकी रह गया? मैंने तो सब ले लिया।
फरज़ाना- अरे तुम आओ तो मेरे साथ.. आप जाइए, उधर जाकर थोड़ा रुकिए, हम दोनों अभी आते हैं।
शाजिया को तो कुछ समझ ही नहीं आया और फरज़ाना भी उसके लिए अनजान थी। बस वो उसके पीछे चली गई, जब वो उस जगह पहुँची, तब उसको समझ आया कि माजरा क्या है, मगर फरज़ाना के सामने उसको बहुत शर्म आई।
फरज़ाना- शाजिया शरमाओ मत, अपना साइज़ बताओ, उसी हिसाब से मैं तुम्हें कुछ अच्छे सैट दिलवा दूँगी।
शाजिया ने शर्माते हुए अपना साइज़ बता दिया, फिर क्या था फरज़ाना ने एक से बढ़कर एक सैट उसको दिलवाए, जिसे देख कर शाजिया भी खुश हो गई। फिर उसको ख्याल आया कि ये तो किसी और के लिए हैं.. बस फिर क्या था उसका मूड खराब हो गया।
शाजिया- बस बहुत ले लिया, अब चलो यहाँ से चलते हैं.. मुझे घर जाकर पढ़ाई भी करनी है।
फरज़ाना- अरे रूको, एक-दो नाइटी भी ले लो ना।
शाजिया का मन नहीं था मगर फरज़ाना ने ज़बरदस्ती उसको 2 सेक्सी नाइटी दिलवा दीं।
सारा सामान लेकर वो दोनों अब्दुल जी के पास आ गए, फिर फरज़ाना ने बहाना बना कर उनसे विदा ली और चली गई।
अब्दुल- क्यों बेटा हो गई शॉपिंग.. अब घर चले या कुछ और लेना है?
शाजिया- अब जो लेना था ले लिया, बाकी उसको कुछ चाहिए होगा तो वो खुद ले लेगी।
शाजिया को बहुत गुस्सा आ रहा था कि उसके अब्बू ने एक बार भी उसको ये नहीं कहा कि तुम भी अपने लिए कुछ ले लो।
अब्दुल- ठीक कहा तुमने, कुछ रह गया होगा तो वो खुद ही लेने आ जाएगी, चलो नीचे बिल करवा लेते हैं.. फिर मुझे भी वापस शॉप जाना है।
शाजिया और अब्दुल जी बिल की लाइन में लग गए, जब उनका नंबर आया और बैगों से सामान निकाल कर प्राइस कोड मारा गया, तब अब्दुल जी तो देखते रह गए। शाजिया ने एक से बढ़कर एक ड्रेस ली थीं। फिर ब्रा-पेंटी के सेट्स आए और वो सेक्सी नाइटी.. तो बस अब्दुल जी आपे से बाहर हो गए। ना जाने क्या सोच कर उनका लंड पेंट में तन गया। उनके दिमाग़ में शाजिया को लेकर कुछ नहीं था मगर वो कपड़े देख कर वो उत्तेजित हो गए। इधर बेचारी शाजिया का शर्म से बुरा हाल था.. वो नजरें झुकाए खड़ी रही।
सब सामान लेकर अब्दुल जी ने कार में रखा और घर की तरफ़ चल पड़े। पूरे रास्ते शाजिया सोच रही थी कि अब्बू ने मुझे कुछ भी लेने को नहीं कहा, क्या वो मुझसे प्यार नहीं करते। अरे मॉर्डन नहीं तो कोई सिंपल ड्रेस ही दिलवा देते।
अब्दुल- क्या सोच रही है मेरी लाड़ली? घर आ गया है, चलो उतरो.. ये सब बैग उठाओ.. अन्दर लेकर जाना है।
शाजिया- अन्दर क्यों अब्बू.. ये उनको देना है ना.. तो आप अपने साथ ले जाओ?
अब्दुल- अरे नहीं अभी नहीं.. वो खुद आ जाएँगे लेने.. चलो अब।
अंजुम- आ गए आप लोग, बहुत टाइम लगा दिया आपने.. कहाँ गए थे?
अब्दुल- अपनी बेटी से पूछो, इतना टाइम कैसे लग गया। मैं तो थक गया हूँ अब तो मैं चेंज करके थोड़ा आराम ही करूँगा। अब शॉप जाने की हिम्मत नहीं है, मैं गोपी को फ़ोन कर देता हूँ.. वो देख लेगा।
इतना कहकर अब्दुल जी अपने कमरे में चले गए और कपड़े बदलने लगे। इधर शाजिया का मूड ऑफ था, उसने सामान वहीं हॉल में रखा और जाने लगी।
अंजुम- अरे शाजिया.. ये सब यहाँ क्यों रख दिया तूने? ये सब अन्दर ले जा।
शाजिया- अन्दर क्यों.. कौन सा मेरा सामान है, अब्बू के दोस्त की बेटी का है आप रख दो कहीं भी.. वो आकर ले जाएँगे।
अंजुम समझ गई कि अब्दुल जी ने उसे उल्लू बनाया है, वो अनजान बनकर बोली- कौन दोस्त? मुझे नहीं पता तू ही बता मुझे?
शाजिया ने सारी बात अपनी अम्मी को बताई तो अंजुम मुस्कुराने लगी।
शाजिया- आप क्यों खुश हो रही हो? अब्बू ने मुझे कुछ भी नहीं दिलवाया इसलिए ना?
अंजुम- पागल है तू एकदम.. हा हा हा… छोटे बच्चे की तरह बिहेव कर रही है। अरे मेरी बेटी कोई दोस्त नहीं है, ये सब तेरे ही लिए है.. तेरे अब्बू कल की बात से शरमिंदा थे.. तुझ पर गुस्सा जो किया था। ये सब तेरे लिए किया सरप्राइज है बेटा हा हा हा हा तू उल्लू बन गई।
अंजुम की बात सुनकर शाजिया के तो पैरों तले ज़मीन ही निकल गई, उसको यकीन ही नहीं हुआ कि इतने मॉर्डन ड्रेस वो पहनेगी और भी इतने सारे।
शाजिया- सीसी क्या सच अम्मी.. प्लीज़ आप सही बताओ.. ये सब मेरे लिए है?
अंजुम- हाँ शाजिया सब तेरा है, यकीन नहीं तो अपने अब्बू से पूछ लो।
शाजिया भागती हुई अपने अब्बू के पास गई। उससे पूछा भी नहीं गया वो बस बोलने की कोशिश कर रही थी, मगर अल्फ़ाज़ है कि निकलने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
शाजिया- अब्बू ये सब एम्म मेरे व्व..वो अम्मी क्क्क..कह रही हैं.. सस्स सब एमेम..!
अब्दुल- हा हा हा.. अरे कंट्रोल कर.. हाँ सब तेरे लिए ही लिया है, मेरी लाड़ली को पसंद आए वही सब मैंने दिलवाया.. अब तो खुश ना!
शाजिया की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वो भाग कर अपने अब्बू से चिपक गई और गाल पर एक जोरदार किस कर दिया।
शाजिया- ओह अब्बू.. आप कितने अच्छे हो.. आप दुनिया के सबसे अच्छे अब्बू हो।
शाजिया ने अब्दुल जी को इतना कस कर पकड़ा हुआ था कि उसके मम्मे वो अपने सीने में धंसते हुए साफ महसूस कर रहे थे। फिर इस वक्त उन्होंने सिर्फ़ बनियान और लुंगी ही पहनी हुई थी, जिससे जवान जिस्म की गर्मी उनको पागल बना रही थी। उनका लंड तन गया था और शाजिया की नाभि को फुददी समझ कर उसमें घुसने की कोशिश कर रहा था।
शाजिया को इस बात का अहसास हुआ या नहीं.. ये तो पता नहीं, मगर अब्दुल जी को ज़रूर पता लग गया कि उनकी बेटी जवान हो गई है और अगर ज़्यादा देर वो उससे चिपके रहे तो गड़बड़ हो जाएगी। बस यही सोचकर उन्होंने शाजिया को अपने से अलग किया।