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हवस ( रिश्तों में गंदगी ) complete

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समीर की तो गांड फट गई.. उसके होश उड़ गए। उसने सोचा था कि आज की रात फुददी मिलेगी मगर राबिया तो पलटी मार गई।

समीर- सॉरी सॉरी व्व..वो तुमने ही तो कहा था कि फवाद मज़ा नहीं देता, में समझा..

राबिया- क्या समझे.. मैं चुदाई की बात कर रही हूँ? तुमने ये सोचा भी कैसे.. मैं तो बात करने के लिए तुम्हें रोक रही थी। वो आजकल मुझसे बात नहीं करता।

समीर- सॉरी राबिया मुझसे ग़लती हो गई। मैं समझा.. सॉरी मुझे अब जाना चाहिए।

राबिया- नहीं.. अब ये कपड़े चेंज करो नहीं तो मैं नाराज़ हो जाऊंगी तुमसे और जो हुआ भूल जाओ ओके.. दोस्त हो तुमने मुझे हग ही तो किया है मेरी तुमने चुदाई तो नहीं की ना!

राबिया की बातें समीर के समझ के बाहर थीं.. आख़िर ये चाहती क्या है।

खैर.. उसने वहां रुकना ही ठीक समझा। उसको लगा शायद अभी नहीं तो बाद में बात बन जाए, यही सोचकर वो बाथरूम में गया, कपड़े चेंज किए और वापस बाहर आ गया।

राबिया बिस्तर पर टेक लगा कर बैठी हुई थी। समीर को देख कर वो मुस्कुराते हुए बोली- इन कपड़ों में अच्छे लग रहे हो।

समीर- थैंक्स अब बोलो.. कैसी बातें करूँ, जिससे तुम्हें मज़ा आए।

राबिया- बातें तो होती रहेंगी, पहले ये बताओ तुम्हें चूसना पसंद है क्या?

समीर- ओह क्या.. मैं समझा नहीं तुम ठीक से बताओ वरना मैं फिर कोई ग़लती कर दूँगा।

राबिया- हा हा हा तुम बहुत स्वीट हो यार.. अरे आम चूसने की पूछ रही हूँ। फ़्रीज़ में रखे हैं कहो तो ले आऊं?

समीर- तुम भी यार अजीब हो.. डबल मीनिंग में बोलती हो.. रात को कौन आम चूसता है यार?

राबिया- अरे इसमें डबल मीनिंग क्या है? और तुम क्या मेरी फुददी चूसना चाहते हो? हा हा हा हा..

समीर- हा हा हा तुम बहुत अच्छी हो राबिया.. लड़की को ऐसे ही खुले दिमाग़ की होना चाहिए ताकि बात करने का मज़ा आए।

राबिया- अच्छा जी ये बात है.. चलो चूसना कैंसल, ये बताओ आगे से करना पसंद है या पीछे से या सिर्फ़ करने से मतलब है.. चाहे जो मिल जाए।

राबिया की सेक्सी बातें समीर को पागल बना रही थीं। उसका लंड पैन्ट में तन रहा था जिसे राबिया भी महसूस कर रही थी।

समीर- यार राबिया, ये मुझे समझ नहीं आता तुम साफ-साफ बोलो.. ये तुम क्या आगे-पीछे बोल रही हो?

राबिया- अरे ये साफ ही तो है, अबकी बार में चुदाई की ही पूछ रही हूँ बुद्धू हा हा हा..

समीर- तुम आख़िर चाहती क्या हो? ऐसी बातें करके मुझे पागल बना रही हो और कुछ करूँगा तो गुस्सा हो जाओगी।

राबिया- लड़की का असली गुस्सा शायद तुमने देखा ही नहीं हा हा हा.. ये जो पजामे को तंबू बना रहे हो ना, मैं सब समझ रही हूँ। अब अगर तुम चाहो तो मैं कुछ मदद करूँ तुम्हारी हा हा हा हा..

समीर- यार राबिया तुम्हारी बातें मुझे पागल बना रही हैं.. मैं सच में कुछ कर दूँगा।

राबिया- अच्छा करने वाले कहते नहीं हैं.. कर देते हैं और तुम सिर्फ़ बातें किए जा रहे हो। अब बातों में टाइम क्या खराब करना, जो दिल में है.. वो काम करो ना।

समीर समझ गया कि राबिया की फुददी भी लंड के लिए फड़क रही है। अब उसने मौके का पूरा फायदा उठाने की सोची और राबिया के ऊपर झपट पड़ा। उसके होंठों को चूसने लगा.. साथ में उसके चुचों को भी दबाने लगा।

राबिया- ये तुम क्या कर रहे हो समीर.. नहीं उफ ये गलत है.. मैं तुम्हारे दोस्त की वाइफ हूँ नहीं.. छोड़ो मुझे..

समीर- चुप कर साली छिनाल, कब से सेक्सी बातें करके मेरे लंड को उकसा रही है और चुदने का टाइम आया तो तूने फिर से नाटक शुरू कर दिया।

राबिया- आह यही सुनना चाहती थी मैं.. साले कितना टाइम वेस्ट कर दिया उफ आराम से कर.. कहीं भाग नहीं रही मैं.. आह.. धीमे दबा कमीने आह उफ..

समीर तो पागलों की तरह राबिया को दबोच रहा था और राबिया भी उसका बराबर साथ दे रही थी। थोड़ी देर ये चूमाचाटी चलती रही, फिर समीर ने राबिया की नाइटी निकाल दी। अब राबिया उसके सामने सिर्फ़ सफेद ब्रा-पेंटी में थी।

समीर तो बस राबिया के हुस्न को देखता ही रह गया। जब राबिया को लगा वो खो गया है, तो राबिया ने उसको धक्का देकर बेड पर गिरा दिया और उसकी टीशर्ट पजामा निकाल दिया। अब वो भी सिर्फ़ अंडरवियर में था और उसका उभार साफ बता रहा था कि अन्दर लंड पूरा खड़ा हुआ है और आज़ाद होने के लिए फुंफकार मार रहा है।

समीर- उफ़ राबिया, अब जब सारे कपड़े निकाल दिए तो इसे भी आज़ाद कर दो, आह कब से तना हुआ है.. अब तो इसमें दर्द भी होने लगा है।

राबिया ने झट से अंडरवियर निकाल दी और अन्दर से 7″ का मोटा लंड बाहर निकाला, जिसे देख कर राबिया खुश हो गई और उसने लंड पे एक प्यारी सी किस दे दी।

समीर- उफ़फ्फ़ साली क्या गर्मी है तेरे होंठों में.. आह साला फवाद तो पागल है जो ऐसी बीवी को खुश ना रख सका.. आह लंड चूस साली.. मत तड़पा आह चूस ले आह..

राबिया भी रांड़ की तरह लंड पे टूट पड़ी वो सुपारे को चाटती, कभी पूरा मुँह में लेकर चूसती और समीर बस ठंडी आहें लेता रहा।

थोड़ी देर लंड चूसने के बाद राबिया अलग हुई और अब उसने अपनी ब्रा-पैंटी निकाल फेंकी। उसके खरबूजे एकदम से आज़ाद हो गए थे। वो समीर के पेट पर बैठ गई और अपने निप्पलों को उसके मुँह के आगे कर दिए।

समीर- वाउ क्या मस्त मम्मे हैं तेरे.. आह ला चुसा मुझे.. उफ़ आह क्या रस है इनमें.. ला दूसरा भी दे।

थोड़ी देर बाद दोनों 69 के पोज़ में हो गए और समीर जीभ से राबिया की फुददी को चाटने लगा। इधर राबिया भी उसके लंड को मज़े से चूस रही थी। दस मिनट तक ये चुसाई चलती रही और फिर राबिया की फुददी बहने लगी.. उसका सारा रस समीर चाट गया।

अब राबिया भी लंड को स्पीड से चूसने लगी और जल्दी ही समीर भी ढेर हो गया। इसके बाद दोनों बिस्तर पे लेटे एक-दूसरे को देख रहे थे।

राबिया- क्यों देवर जी.. मज़ा आया या नहीं?

समीर- सच में ऐसा मज़ा पहले कभी नहीं आया.. तेरी फुददी क्या कमाल की है। अब इसमें लंड घुसेगा तब और मज़ा आएगा।

राबिया- रोका किसने है.. घुसा दो, आज की रात मैं तुम्हारे लिए ही हूँ, चाहे जैसे चोद लो मुझे.. निकाल लो अपने मन की चुदास।

समीर- आज ही क्यों जानेजिगर.. अब तो रोज रात को तेरी चुदाई करने आ जाऊंगा। वो साला तो सुबह आता है.. तुम रात को अकेली क्यों तड़पो.. तुम्हारा ये देवर कब काम आएगा।

राबिया- अच्छा ये बात है.. तो मेरे प्यारे देवर जी, तुम रोज ही आ जाना और अपनी भाभी को चोद लेना।

दोनों काफ़ी देर तक सेक्सी बातें करते रहे। फिर समीर राबिया के ऊपर आ गया और एक बार फिर चुसाई का खेल शुरू हो गया।

राबिया- आह अब मत तड़पाओ.. बस जल्दी से पेल दो अपना लंड.. मेरी फुददी में.. उफ़ बहुत आग लगी है इसमें.. आह बुझा दो इसकी प्यास।

समीर ने राबिया की टाँगें कंधे पे लीं और एक झटके में अपना लंड राबिया की फुददी में पेल दिया.. और घपाघप चोदने लगा।

राबिया- आह आइ.. मज़ा आ गया आह चोदो आह फास्ट उफ़.. और फास्ट करो.. तुम बहुत अच्छे हो.. चोदो अपने दोस्त की बीवी को आह..

समीर- ले साली उहह उहह रांड़ आह तेरे शौहर से तेरी चुदाई नहीं होगी.. ले उहह उहह आज चुद मेरे से… ले साली छिनाल ले आह..

राबिया भी कमर हिला कर मज़ा लेने लगी। थोड़ी देर बाद समीर ने राबिया को घोड़ी बनाया और उसकी चुदाई करने लगा।

करीब 15 मिनट की पलंग तोड़ चुदाई के बाद राबिया चरम पर पहुँच गई और समीर भी झड़ने के करीब ही था।

राबिया- आह आह फास्ट.. आह यू डॉग.. आह फास्ट.. मैं बस गई.. उफ़फ्फ़ आह आह..

समीर ने स्पीड बढ़ा दी, अब वो भी किसी भी पल अपना लावा छोड़ सकता था।

समीर- आह.. ले साली मेरा भी निकलने वाला है.. आह कहाँ निकालूँ.. आह जल्दी बोल साली रांड़ आह..

राबिया- आह फास्ट फास्ट आह अन्दर निकाल दे भड़वे.. आह पूछ क्या रहा है उफ़ भर दे उफ़फ्फ़ मेरी फुददी अपने रस से आह..

दोनों एक साथ झड़ गए और उनके पानी का मिलन हो गया.. अब दोनों ही शांत पड़ गए थे।

फ्रेंड्स, रात भर समीर ने राबिया की फुददी और गांड जम कर मारी और सुबह फवाद के आने से पहले वो वहां से निकल गया।

 
उधर हमारी कॉलेज गर्ल सुबह शाजिया रोज की तरह तैयार होकर घर से निकल गई.. आज उसने अपने अब्बू से बात भी नहीं की, शायद रात की बात से वो नाराज़ थी।

अब्दुल- देखा अंजुम.. आज शाजिया मुझसे बिना बोले चली गई, पहले तो ये ऐसी नहीं थी। लगता है इसे भी बाहर की हवा लग गई है.. इसका कॉलेज क्या शुरू हुआ आजकल ये पूरी बदल ही गई है।

अंजुम- आप भी कुछ समझते नहीं हो.. बच्ची नहीं है.. अब वो बड़ी हो गई है। रात आपने उस पर गुस्सा किया.. वो शायद उसको अच्छा नहीं लगा। आप जानते हो ना ये उम्र ऐसी ही होती है जैसे कोई रबड़ हो कि उसे ज़्यादा खींचोगे तो टूट जाएगी। शाजिया का हाल भी वैसा ही है, आपको शाजिया से थोड़ा प्यार से पेश आना चाहिए।

अंजुम की बात अब्दुल जी को समझ आ रही थी।

अब्दुल- शायद तुम ठीक कह रही हो.. अब वो बड़ी हो गई है और कॉलेज में जैसा देखेगी वैसे ही वो भी करना चाहेगी। अभी तो वो सब बातें हम बता देती है.. मगर हम उसके साथ सख्ती करेंगे तो शायद वो हमसे झूठ भी बोलने लगे।

अंजुम- हाँ यही तो.. अब वो जैसे करे, हम उसका साथ देंगे ताकि उसको लगे हम उसको कितना प्यार करते हैं। अगर हमारी सख्ती से वो तंग आ गई तो किसी के बहकावे में आकर अपनी बुआ की तरह भाग जाएगी.. फिर हम क्या करेंगे? एक ही बेटी है हमारी!

अब्दुल- नहीं नहीं.. मेरी बेटी ऐसा कुछ नहीं करेगी, ये लो ये पैसे रखो.. जब शाजिया कॉलेज से घर आए तो तुम उसे नए कपड़े दिला लाना.. जो उसे पसंद आए।

अंजुम- आप ये पैसे अपने पास ही रखो.. शाम को आप खुद उसे साथ ले जाना ताकि उसका गुस्सा उतर जाए और आप पर उसको भरोसा हो जाए कि उसके अब्बू उसका भला चाहते हैं और डर की वजह से रात को उसे मना किया था.. समझे!

अब्दुल जी को बात समझ आ गई, वो अपनी शॉप चले गए और उधर शाजिया भी रज़िया के घर पहुँच गई।

रज़िया- अरे आओ आओ शाजिया.. क्या हाल है तुम्हारे.. क्या लोगी.. कॉफी या कॉफी?

शाजिया- नहीं आपा कुछ नहीं लूँगी.. खाला की तबीयत अब कैसी है?

रज़िया- हाँ अब ठीक है.. दो दिन उन्हीं के पास रही यार.. आज दोबारा चेकअप के लिए जाना है तो आज भी मैं कॉलेज नहीं आ पाऊँगी.. रात को शाहिद और बाकी सब भी मिलने आए थे।

शाजिया- मैं भी आना चाहती थी मगर अब्बू ने कहा कि सुबह चली जाना।

रज़िया- और बता कैसा चल रहा है.. उस दिन के बाद कुछ किया या नहीं?

शाजिया- नहीं आपा मौका ही नहीं मिला। अब अकेले करने का मन नहीं करता।

रज़िया- ओये होये.. तो मुझे बोल देती मैं तेरी मदद करने याक़ूब को भेज देती।

शाजिया- क्या आपा आप भी ना सुबह सुबह ये सब लेकर बैठ गईं। मैं तो वैसे ही अब्बू की वजह से परेशान हूँ।

रज़िया- क्यों क्या हुआ? तेरे अब्बू ने कुछ कहा क्या तुझे?

शाजिया ने रात की बात बताई और अपने अब्बू के विचार भी बताए जिसे सुनकर रज़िया सोचने लग गई, फिर उसे एक ख्याल आया।

रज़िया- यार तू बुरा मत मानना.. मगर तेरे अब्बू के चिड़चिड़े होने का एक कारण हो सकता है।

शाजिया- क्या कारण हो सकता है आपा और उसमें बुरा क्या मानना?

रज़िया- मुझे लगता है तेरे अब्बू की सेक्स लाइफ डिस्टर्ब है.. इसी लिए वो तेरे साथ ऐसे बिहेव करते होंगे।

शाजिया- छी: आपा आप भी कैसी बात करती हो..? अब्बू के बारे में ऐसी बातें सुनना मुझे पसंद नहीं हैं।

रज़िया- ओये कौन सी दुनिया में जी रही है.. वो तेरे अब्बू बाद में बने पहले एक मर्द हैं ओके.. और अपनी वाइफ के साथ कौन आदमी सेक्स नहीं करता.. बता मुझे!

शाजिया- मुझे पता है आपा.. सब करते हैं मगर अब्बू के बारे में ये बात ना करो तो अच्छा है प्लीज़..

रज़िया- अरे यार मैं तेरी प्राब्लम सॉल्व करने की कोशिश कर रही हूँ और तू है कि मेरे को ही सुना रही है।

रज़िया ने ये बात गुस्से में कही, फिर अपने काम में लग गई।

शाजिया- सॉरी आपा आपको बुरा लगा तो.. प्लीज़ सुनो ना आपा.. सुन तो लो..!

रज़िया- नहीं सुनना कुछ.. तू कॉलेज जा तुझे देर हो रही होगी।

शाजिया- अरे आपको नाराज़ छोड़कर कैसे चली जाऊं.. प्लीज़ सॉरी ना अच्छा आप बताओ मैं आपकी सब बात सुन लूँगी।

रज़िया- क्यों सुन कर मुझ पर अहसान करेगी क्या? तू जा यहाँ से अब!

शाजिया ने रज़िया को पीछे से पकड़ लिया और उसके गालों पे किस करते हुए उससे रिक्वेस्ट करने लगी तो रज़िया को हँसी आ गई।

रज़िया- हा हा हा छोड़ मुझे.. पागल है तू एकदम ऐसे पकड़ी हो जैसे तू मेरी फ्रेंड नहीं बीएफ है और मुझे सेक्स के लिए मना रही है।

शाजिया- हा हा हा मेरे पास लंड होता तो आपके नीचे से घुसा देती अभी हा हा हा..

रज़िया- अच्छा बच्चू.. हमारी बिल्ली हमसे मियाऊं.. मेरी ही फुददी मारने के चक्कर में है।

शाजिया- अरे मैंने तो ऐसे ही कह दिया.. आप बताओ क्या बात बता रही थीं?

रज़िया- अरे मैं ये बता रही थी कि एक उम्र के बाद औरत में सेक्स कम हो जाता है.. कुछ के बच्चे बड़े हो जाते हैं तो वो सेक्स करना पसंद नहीं करती हैं। मगर आदमी का सेक्स कभी खत्म नहीं होता.. उसको रोज नहीं तो हफ्ते में एक बार फुददी चाहिए ही चाहिए। अब अगर उसको ना मिले तो वो चिड़चिड़ा हो जाता है और अपने ही नियम कायदे चलाने लगता है। तेरे अब्बू के साथ भी शायद यही हो रहा होगा.. इसी लिए वो इतने गुस्से वाले हैं।

शाजिया- ओह गॉड ऐसा भी होता है सॉरी आपा, मुझे पता नहीं था। मैंने ऐसे ही आपको बोलने को मना किया, मगर अब्बू के साथ ये हो रहा है.. ये कैसे पता लगेगा?

रज़िया- बहुत आसान है, पहले तू मेरे कुछ सवालों के जवाब दे.. मैं इसका हल निकाल दूँगी।

शाजिया- ठीक है आपा आप पूछो.. जो पूछना है।

रज़िया- अच्छा तो ये बता.. तू कब से अलग कमरे में सोती है, मतलब कितने साल से?

शाजिया- यही कोई 4 साल हो गए होंगे।

रज़िया- गुड यानि तेरी उम्र 16 साल थी तब तक तू अपने मॉम-अब्बू के साथ ही सोती थी।

शाजिया- हाँ आपा उनके साथ ही सोती थी।

रज़िया- अच्छा ये बताओ सब एक बेड पर सोते थे.. या तुम्हें अलग सुलाते थे?

शाजिया- जब मैं बहुत छोटी थी.. तब एक साथ सोते थे.. फिर मेरे लिए एक चारपाई ले आए, जो बेड के पास ही थी, मैं उस पर सोती थी।

रज़िया- अच्छा ये बता.. कभी ऐसा हुआ है कि रात को तेरी आँख खुली हो और तूने उन्हें सेक्स करते देखा हो?

शाजिया- नहीं आपा ऐसा कभी नहीं हुआ। मैंने उन्हें कभी नहीं देखा और वैसे भी अब्बू कमरे में बिल्कुल अंधेरा करके सोते हैं तो देखने का सवाल ही नहीं होता।

रज़िया- ओके समझ गई.. मगर तू याद कर इतने सालों में कभी तो तेरी आँख खुली होगी.. तूने देखा तो नहीं मगर कुछ सुना तो होगा, कोई बात या अजीब सी आवाज़?

शाजिया- हाँ आपा याद आया.. ऐसे तो कई बार हुआ। मुझे अम्मी की आवाज़ सुनाई देती थी.. जैसे उनको कोई तकलीफ़ हो रही ही और वो दर्द से कराह रही हों। ओह गॉड यानि वो सेक्स की आवाजें थीं शिट अब समझ आया मुझे।

रज़िया- क्या समझ आया.. तू क्या समझी थी?

शाजिया- मैं समझी थी कि अम्मी को कोई तकलीफ़ होगी या उनका पेट दुख रहा होगा। एक-दो बार मैंने पूछा भी था मगर अम्मी ने ‘कुछ नहीं.. तू सो जा..’ कह कर मुझे सुला दिया।

रज़िया- यही बात है तेरी वजह से वो लोग खुलकर सेक्स नहीं कर पाते थे और धीमे-धीमे तेरी मॉम के अन्दर सेक्स की फीलींग्स कम होने लगी और अब शायद वो करती ही नहीं होंगी.. इसी लिए तेरे अब्बू चिड़चिड़े हो गए हैं।

शाजिया- उफ़ आपा.. मेरी वजह से मेरे मम्मी-अब्बू की लाइफ बर्बाद हो गई। अब मैं क्या करूँ.. कैसे मेरी अम्मी को समझाऊं? आप ही कोई आइडिया बताओ.. ऐसे तो दिन पे दिन अब्बू और गुस्सा होते रहेंगे।

रज़िया- इसका इलाज सिर्फ़ तेरे ही हाथ में है।

शाजिया- वो कैसे आपा.. मैं समझी नहीं?

रज़िया- देख शाजिया अब तू बड़ी हो गई है और अच्छा बुरा सब समझती है। आज तेरे अब्बू आएं तो उनको एक अच्छी सी हग करना और उनसे मीठी-मीठी बातें करना और दूसरी बात आज से तुझे उनकी जासूसी भी करनी होगी।

शाजिया- अब्बू से प्यार से पेश तो आ जाऊंगी मगर जासूसी कैसी करनी होगी?

रज़िया- तुझे सुनकर बुरा लगेगा.. मगर ये जानना बहुत ज़रूरी है। उन दोनों के बीच सम्बन्ध कैसे हैं आज से तू रोज रात उनके कमरे में कान लगा कर सुनेगी। वो क्या बातें करते हैं, उनके बीच सेक्स होता है या नहीं, एक दिन नहीं.. दो दिन नहीं.. कभी तो करते होंगे। बस ये पता लगा, फिर इसका हल भी मिल ही जाएगा।

शाजिया- आपा, अपने अम्मी-अब्बू के सेक्स को देखना क्या सही होगा?

रज़िया- पागल तुझे देखना नहीं है बस पता लगाना है कि वो करते हैं या नहीं, उनकी बातें सुननी है, देखना नहीं है। जब वो शुरू हो जाएं तो अपने कमरे में जाकर सो जाना।

शाजिया- ओके आपा.. आज से यही ट्राइ करूँगी बस आई होप सब अच्छा हो।

रज़िया- टेंशन मत ले.. सब अच्छा ही होगा। चल अब तू निकल तुझे देर हो जाएगी और शाहिद से कह देना कि मुझे शाम को मिले.. मेरे फ़ोन में प्राब्लम है तो कॉल नहीं कर पाऊंगी।

शाजिया ‘ओके..’ बोलकर वहां से कॉलेज के लिए निकल गई।

 
उधर रूबी को पता नहीं रात को क्या हुआ था.. वो छोटी सी एक नाइटी पहन कर सोई थी, ना अन्दर ब्रा थी.. ना पेंटी और वो बेसुध सोई पड़ी थी।

फर्नाडिस- गुड मॉर्निंग डार्लिंग.. क्या बात है आज तो बड़ी खिली-खिली लग रही हो।

रोज़ी- बस बस ज़्यादा तारीफ मत करो.. रात को पेट नहीं भरा क्या जो सुबह-सुबह मस्के लगा रहे हो।

फर्नाडिस- अरे डार्लिंग इतने दिनों बाद तो तुमने ‘हाँ’ की थी। अब बेचारा पप्पू इतने से कहाँ खुश होने वाला था.. कहो तो आज बाहर ना जाऊं.. एक राउंड और लगा लें!

रोज़ी- थोड़ी शर्म करो.. जवान बेटी के अब्बू हो गए हो, अब तो ये आशिकी छोड़ दो।

फर्नाडिस- अरे यार.. ये क्या बात हुई बेटी जवान हो गई है मगर मैं तो बूढ़ा नहीं हुआ ना.. अब हफ्ते में एक बार भी ना करूँ क्या?

रोज़ी- चुप भी करो.. रूबी सुन लेगी जाओ बाहर, मैं नाश्ता लगा देती हूँ।

फर्नाडिस- अरे ये रूबी आज उठी नहीं क्या.. कहाँ है मेरी जान आज उसका कॉलेज नहीं है क्या?

रोज़ी- पता नहीं क्यों नहीं उठी.. मैं तो किचन में बिज़ी थी, ध्यान ही नहीं दिया। जाओ अब आप ही उठाओ अपनी लाड़ली को!

फर्नाडिस ने कमरे को नॉक करना चाहा तो वो खुल गया। फर्नाडिस ने सोचा रात को बंद करना भूल गई होगी।

फर्नाडिस- ये लड़की भी ना एकदम पागल है.. इसने रात को डोर भी खुला ही रखा। बिल्कुल मेरे ऊपर गई है.. एकदम लापरवाह है, अब अन्दर जाकर ही उठाता हूँ।

फर्नाडिस बड़बड़ाता हुआ सीधा कमरे में चला गया और वहाँ का नजारा देख कर उसके होश उड़ गए। रूबी बेसुध पीठ के बल सोई हुई थी.. उसकी नाइटी पेट तक उठी हुई थी और उसकी फूली हुई फुददी साफ-साफ नज़र आ रही थी। फर्नाडिस ने जल्दी से नज़र हटाई और पास पड़ी चादर रूबी पर डाल दी। फिर उसके पास बैठ कर उसके बालों को सहलाने लगा।

फर्नाडिस- रूबी उठो माय स्वीट बेबी क्या तुम्हें आज कॉलेज नहीं जाना?

रूबी- उउउह क्या अब्बू.. कितना अच्छा सपना आ रहा था.. आपने जगा दिया।

फर्नाडिस- उठ जाओ बेटी.. नहीं तो तुम्हारी मॉम आ गई तो सुबह सुबह शुरू हो जाएगी।

रूबी- ओके अब्बू उठती हूँ मगर आप अन्दर कैसे आए डोर तो बंद था?

फर्नाडिस- तेरा सर बंद था.. तुझे होश भी है डोर खुला हुआ था और तू भी ऐसे अधनंगी सोई हुई थी। बेटा मैंने कितनी बार कहा है अगर ऐसे सोना है तो डोर लॉक करके सोया कर। ये तो आज मैं आ गया.. तेरी मॉम आ जाती तो घर में भूकंप आ जाता।

रूबी- सॉरी अब्बू.. शायद मैं रात को बंद करना भूल गई होऊंगी और आपको पता है ना सोते टाइम मुझे ज़्यादा कपड़े पसंद नहीं।

फर्नाडिस- अरे तो मत पहना कर.. थोड़े क्यों पूरे निकाल कर सोया कर.. मगर डोर बंद करके सोया कर, समझी.. वरना तेरे साथ साथ मुझे भी सुनना पड़ेगा।

फ्रेंड्स, आप टेंशन में आ गए ना.. ये क्या चल रहा है। एक अब्बू अपनी बेटी से कैसे खुल कर नंगी सोने को बोल रहा है। ना ना ज़्यादा सोचो मत.. ये पहली बार नहीं हुआ फर्नाडिस ने रूबी को बहुत बार ऐसी हालत में देखा है। कई बार तो पूरी नंगी भी देखा है। अब कैसे और क्यों ये आपको बाद में पता लगेगा। अभी पीछे जाने का टाइम नहीं है.. आगे बढ़ो और कहानी को एंजाय करो।

रूबी- ओके अब्बू कान पकड़ कर सॉरी.. अब आप जाओ मैं अभी फ्रेश होकर आती हूँ।

फर्नाडिस वापस बाहर चला गया और रूबी वॉशरूम चली गई और 15 मिनट में रेडी होकर नाश्ते के लिए आ गई।

अब यहाँ कुछ नहीं बचा तो सीधे कॉलेज चलते हैं वहाँ शायद कुछ मिल जाए।

 
अमन और आज़म बैठे बात कर रहे थे तभी वहाँ शाहिद भी आ गया।

अमन- अरे यार, कहाँ तू आजकल गायब रहता है.. शाम को भी नहीं मिलता और कॉलेज भी देरी से आता है।

शाहिद- अरे कुछ खास नहीं, अब्बू ने काम में उलझा रखा है यार!

शाजिया- गुड मॉर्निंग फ्रेंड्स.. क्या हो रहा है.. सब ठीक है।

शाहिद- अरे आओ शाजिया.. सब ठीक है तुम सुनाओ और रज़िया आज भी नहीं आई क्या?

शाजिया- नहीं वो कल आएगी.. आज खाला का चेकअप है और हाँ रज़िया का फ़ोन भी खराब है तो शाम को आपको मिलने बुलाया है।

शाहिद- ओके तुमने बताया.. ठीक किया वरना मैं तो फ़ोन ही ट्राइ करता रहता। और सब मज़े में है ना.. रूबी कहाँ है दिखी नहीं?

रूबी- हैलो एवेरी बॉडी आई एम हियर.. क्या बातें हो रही हैं सब मिलकर मेरी कोई बुराई तो नहीं कर रहे ना!

आज़म- अरे, तुम्हारे अन्दर बुराई वाली बात ही कहाँ है, जो करेंगे.. आओ आओ..

सब मिलकर हँसी-मज़ाक करने लगे। रूबी ने रज़िया का पूछा.. तो शाहिद ने बता दिया.. तब वो भी शाम को उससे मिलने के लिए बोली।

शाहिद- ठीक है हम साथ में चलेगे.. तुम मेरे घर आ जाना.. फिर वहाँ से हम दोनों साथ जाएँगे।

आज़म- रज़िया के घर ही लेकर जाना इसको.. कहीं और मत ले जाना हा हा हा हा..

शाहिद- चुप कर साले कुत्ते.. तू हर बार उल्टी बात करता है।

शाजिया- अरे आप अब झगड़ो मत, और चलो टाइम हो गया है।

यहाँ भी ऐसा कुछ नहीं हुआ जो बताऊं तो जाने दो। फवाद घर आ गया होगा उसी के पास देख आते हैं शायद कोई काम की बात मिले।

राबिया तो पूरी रात की चुदाई से थकी हुई थी तो मस्त सो रही थी। जब फवाद आया तो उसे जगाया और पूछा कि क्या हुआ।

राबिया- कुछ नहीं.. आज तबीयत ठीक नहीं है थोड़ी थकान सी है।

फवाद- अच्छा ये बात है.. कहो तो चुदाई करके तुम्हारी सारी थकान उतार दूँ!

राबिया- नहीं फवाद.. नहाकर फ्रेश हो जाऊंगी.. आप चेंज करो, मैं अभी फ्रेश हो जाती हूँ।

फवाद- जान ये कमरे का हाल ऐसे क्यों है? चादर नीचे पड़ी है सब अस्त-व्यस्त सा है.. ऐसा लगता है जैसे रात यहाँ कुछ हुआ हो?

राबिया ने इस बात पर गौर ही नहीं किया उसे सब ठीक करना चाहिए था मगर वो भूल गई.. अब उसकी बत्ती जली।

राबिया- ये तो रोज ही ऐसे होता है फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि रोज मैं तुम्हारे आने के पहले ठीक करती हूँ और आज मैं उठी नहीं।

फवाद- अच्छा वो तो ठीक है.. मगर रात को तुम ऐसे कैसे सोती हो जो कमरे का ये हाल हो जाता है?

राबिया- तुम कहना क्या चाहते हो रात को कोई और यहाँ आता है क्या.. जो ये सब करके जाता है हाँ बोलो?

राबिया ने थोड़ा गुस्सा होकर ये बात कही तो फवाद चुप हो गया।

राबिया को पता था उसने रात ग़लती की है मगर अब वो गुस्सा नहीं करेगी तो फवाद उस पर चढ़ाई कर लेगा तो बस उसने बड़बड़ा करना शुरू कर दिया।

फवाद- अरे जान सॉरी ना.. मेरा ये मतलब नहीं था.. तुम ग़लत समझी हो।

राबिया- अच्छा तो क्या मतलब था वो भी बता दो.. पहले ही मुझे रांड़ बोल चुके हो आज साबित भी कर दो।

फवाद- अरे सॉरी यार.. अब प्लीज़ चुप हो जाओ, पुरानी बातें मत दोहराओ कान पकडूँ क्या.. अब रात का थका-हारा आया हूँ यार.. अपने शौहर पे कुछ तो रहम करो।

राबिया- ऐसे तुम समझने वाले भी नहीं थे। एक तो मैं बीमार हूँ और तुम उल्टा बोलोगे तो गुस्सा तो आएगा ही ना.. चलो अब बैठो, मैं कॉफी बना कर लाती हूँ।

फवाद- अरे मेरी जान तुम नहा लो. आज तुम्हारे लिए कॉफी मैं बनाता हूँ।

राबिया की समझ के बाहर बात थी कि फवाद उस पर इतना मेहरबान कैसे हो गया और उसने इतना गुस्सा किया मगर फवाद कुछ नहीं बोला। इसकी कुछ तो वजह है.. बस वो इसी सोच में बाथरूम चली गई।

जब राबिया फ्रेश हो गई तो दोनों बैठे आराम से कॉफी की चुस्की ले रहे थे।

फवाद- जान तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है तो आज खाना बाहर से मंगवा लेंगे।

राबिया- अरे नहीं ऐसा भी नहीं है.. मैं बना लूँगी। बस ये घर की साफ-सफ़ाई में दिक्कत होती है।

फवाद- एक बात कहूँ.. हम कोई कामवाली रख लेते हैं, इससे तुम्हें भी थोड़ा आराम मिल जाएगा और रात को तुम अकेली होती हो तो मुझे तुम्हारे लिए बहुत टेंशन होती है। वो साथ होगी तो ठीक रहेगा।

राबिया- अच्छा आइडिया है.. मगर आज आपको मेरे अकेले सोने से टेंशन हुई.. इतने दिन कहाँ थे?

फवाद- अरे काफ़ी दिनों से सोच रहा था.. बस बोल नहीं पाया।

राबिया- अच्छा मगर यहाँ कामवाली मिलना आसान है क्या?

फवाद- आसान तो नहीं है मगर ढूँढ लेंगे.. कोई बड़ी बात भी नहीं है।

राबिया- आप देखोगे या ये भी मुझे करना होगा?

फवाद- अरे नहीं नहीं.. मैं ढूँढ लूँगा, तुम टेंशन मत लो। मेरे सेंटर में एक दोस्त है.. उसने अभी कुछ दिन पहले ही कामवाली रखी है.. उसी से पूछ लूँगा।

राबिया- वो तो ठीक है.. मगर कोई बूढ़ी मत लाना चिड़चिड़ करेगी और हाँ कोई खूबसूरत जवान लड़की भी नहीं होनी चाहिए.. क्या पता उसकी नियत तुम पे बिगड़ जाए।

फवाद- हा हा हा… मुझसे मेरी बीवी तो चोदी नहीं जाती.. उसको क्या खाक चोदूँगा। तुम शक कर रही हो ना अब बूढ़ी नहीं, जवान नहीं.. तो क्या बच्ची लाऊं हा हा हा..

राबिया- हाँ बच्ची ढूँढो, मगर दूध पीती नहीं.. यही कोई 18 की ले आओ.. उसको ये सबका पता भी नहीं होगा तो तुम सेफ रहोगे।

राबिया की बात सुनकर फवाद के शरीर में एक करंट सा लगा.. कच्ची कली का नाम सुनते ही उसका लंड पेंट में तन गया, जिसे राबिया ने भी महसूस किया। यानि समीर की बात एकदम सही थी कि फवाद की ये कमज़ोरी है।

फवाद- लेकिन ऐसी लड़की कहाँ मिलेगी और वो काम कर पाएगी क्या?

राबिया- लो कर लो बात.. क्यों नहीं मिलेगी और मैं कौन सा उससे सारा काम करवाऊंगी.. बस साफ सफ़ाई ही करवानी है।

थोड़ी देर दोनों बातें करते रहे, फिर राबिया ने कहा- तुम सो जाओ.. थके हुए हो.. बाक़ी बातें लंच के टाइम कर लेंगे।

फवाद सो गया और राबिया अपने काम में लग गई दोपहर को भी यहाँ कुछ खास नहीं हुआ बस वही कामवाली को लेकर बातें हुईं।

मगर दूसरी तरफ शाजिया की जिंदगी में आज नया मोड़ ज़रूर आएगा.. तो चलो वहीं का नजारा देख लेते हैं।

 
शाजिया जब घर वापस आई तो रोज की तरह नॉर्मल रही। उसने चेंज किया फिर उसकी अम्मी ने लंच लगा दिया.. और अभी खाना वो शुरू करती कि तभी अब्दुल जी आ गए, जिसे देख दोनों अम्मी बेटी चौंक गई क्योंकि दोपहर में उनका आना होता ही नहीं था। वो सुबह निकलते तो सीधे रात को ही आते.. मगर आज कैसे आ गए।

अंजुम- अरे आप.. इस टाइम, सब ठीक तो है ना?

अब्दुल- अरे सब ठीक है, आज मेरी बेटी ने मुझसे बात नहीं की तो मेरा दिन अच्छा नहीं गुजरा.. इसलिए सोचा पहले उससे मिल आऊं तो बाकी का दिन अच्छा गुजर जाए।

शाजिया भी सुबह की बात को लेकर शरमिंदा थी और रज़िया की सिखाई बात भी उसको याद थी। वो एकदम से उठी और भाग कर अब्दुल जी से लिपटते हुए एकदम ज़ोर से उनसे चिपक गई। उसके कड़क मम्मे अब्दुल जी साफ महसूस कर रहे थे। उन्होंने मौके की नजाकत को समझते हुए शाजिया को अपने से अलग किया तो देखा उसकी आँखों में आँसू थे।

अब्दुल- अरे अरे क्या हुआ.. तुम तो बच्चों की तरह रोने लगीं.. नहीं नहीं चुप हो जाओ बस।

शाजिया- सॉरी अब्बू, मैंने आपको दुखी किया प्लीज़ आप मुझे माफ़ कर दो।

अब्दुल- अरे नहीं, तुमने कुछ नहीं किया मैंने ही तुम्हें गुस्से ज़्यादा कह दिया था।

थोड़ी देर दोनों अब्बू और बेटी का ये प्यार चलता रहा.. फिर दोनों ने साथ में लंच किया और जब अब्दुल जी ने शाजिया को अपने साथ चलने को कहा.. तो वो कुछ कन्फ्यूज हो गई।

अंजुम तो जानती थी कि वो उसे कहाँ लेकर जा रहे हैं मगर शाजिया इस बात से अनजान थी तो उसने पूछ ही लिया- अब्बू इस टाइम आप मुझे कहाँ लेकर जा रहे हो?

अब्दुल- तू सवाल बहुत करती है, बस तू जल्दी से तैयार हो जा, देर मत कर!

शाजिया बेचारी क्या बोलती, वो अपने कमरे में गई और जल्दी से तैयार होकर बाहर आ गई। अब अब्दुल जी उसे लेकर सीधे एक बड़े से शॉपिंग मॉल में ले गए। शाजिया के मन में बहुत से सवाल उठ रहे थे मगर उसने सोचा वो अपने अब्बू से पूछेगी तो वो फिर नाराज़ हो जाएँगे बस यही सोच कर वो चुप रही।

मॉल में हर चीज के लिए अलग-अलग एरिया बने हुए थे तो अब्दुल जी शाजिया को एक मॉर्डन ड्रेस वाले एरिया में ले गए।

अब्दुल- बेटा तुझे मेरी हेल्प करनी है इसी लिए मैं तुझे यहाँ लाया हूँ।

शाजिया- मैं कुछ समझी नहीं अब्बू.. कैसी हेल्प चाहिए आपको?

अब्दुल- अरे वो मेरे कपड़ा व्यापार के एक बहुत बड़े सेठ हैं, उनकी बेटी लन्दन से आई हुई है.. अब यही आगे की पढ़ाई करेगी, तो उसके अब्बू उसको सरप्राइज देना चाहते हैं। बस उन्होंने मुझे ये काम सौंप दिया और मैं तुझे यहाँ ले आया हूँ।

शाजिया- अब्बू मेरी तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा, आपके दोस्त की बेटी लन्दन से यहाँ आई तो मेरा उसमें क्या काम?

अब्दुल- अरे मेरी नादान शाजिया.. उस लड़की की उम्र, हाईट, बॉडी सब तेरे से मिलती है, उसके लिए कुछ मॉर्डन कपड़े लेने हैं। अब भाई तुम लड़कियों को क्या पसंद आता है.. ये मुझे कैसे मालूम होगा? तो तू ही उसके लिए अच्छे कपड़े पसंद कर दे।

अब्दुल जी की बात सुनकर एक बार तो शाजिया को गुस्सा आया कि उसको तो पहनने नहीं देते और दूसरों के लिए उसी से शॉपिंग करवा रहे हैं। फिर उसने सोचा चलो इसी बहाने वो भी मॉर्डन कपड़े पहन कर देख तो लेगी कि उस पर जमते हैं या नहीं।

शाजिया- ठीक है अब्बू.. मगर उम्र और हाईट से कुछ नहीं होता, पसंद सबकी अलग होती है और वो इतनी दूर से आई है तो क्या अपने कपड़े नहीं लाई होगी?

अब्दुल- अरे तू तेरी पसंद के ले.. देखना उसको भी पसंद आ जाएँगे और दूसरी बात उसका बैग एयरपोर्ट पर खो गया इसी लिए ये सब करना पड़ रहा है। समझी.. अब कोई सवाल नहीं, चल कपड़े देख जल्दी.. मुझे वापस शॉप पर भी जाना है।

शाजिया ने एक ब्लैक जींस और लाइट पिंक टी-शर्ट ली, फिर उसको ट्रायल रूम में चैक किया। वो उस पर बिल्कुल फिट बैठी और उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। इन कपड़ों में वो एक सेक्स बम लग रही थी। वो बाहर आई और अब्दुल जी ने उसे देखा तो उनकी तो आँखें ही चुंधिया गईं। शाजिया को उस ड्रेस में देखकर वो बस देखते जा रहे थे।

शाजिया- क्या हुआ अब्बू.. सही नहीं है क्या?

अब्दुल- अरे नहीं.. बहुत अच्छा है तू इसमें बहुत सुन्दर लग रही है।

शाजिया- थैंक्स अब्बू.. अब कुछ और ट्राइ करूँ?

अब्दुल- देख तू ट्राई कर ले, मुझे मत दिखा.. तुझे पसंद आए बस वो ले ले।

बस फिर क्या था, उसने और भी कपड़े ट्राई किए, कुछ स्कर्ट्स भी लिए। शाजिया के दिमाग़ में लन्दन की लड़की की इमेज थी तो उसने कुछ सेक्सी शॉर्ट स्कर्ट्स और टॉप भी ले लिए।

अब्दुल जी बस इधर-उधर घूम रहे थे, उनको नहीं पता था कि शाजिया क्या-क्या ले रही है। जब काफ़ी देर हो गई तो वो शाजिया के पास गए और उससे पूछा- कितना टाइम लगेगा?

शाजिया- बस हो गया अब्बू.. दस ड्रेस मैंने पसंद किए हैं, एक बार आप देख लो उसमें से कितने लेने हैं?

अब्दुल- अरे कितने क्या.. सारे लेने हैं। चल कुछ अच्छे जूते और सेंडिल भी ले लेते हैं।

शाजिया को क्या ऐतराज होना था, वो दूसरे साइड में चली गई और वहाँ से कुछ अच्छे जूते भी ले लिए। फिर उसको सामने ब्रा-पेंटी का बहुत बड़ा डिपार्टमेंट दिखा। शाजिया को जब उसके बाहर शो केस में एक बहुत ही फैन्सी ब्रा टंगी दिखी तो वो सोचने लगी कि उस लड़की के पास ब्रा-पेंटी भी तो नहीं होगी, मगर ये बात अब्बू को कैसे बताए। दूसरी बात ये कि उसने खुद आज तक ये चीजें नहीं खरीदी थीं.. बस इसी सोच में वो उधर देखती हुई उस एरिया से बाहर निकली। मगर उसको ये नहीं पता था कि उसके अब्बू उसको देख रहे हैं और उसकी नज़र का पीछा करके वो समझ गए हैं कि उसके दिमाग़ में क्या चल रहा है। मगर हिम्मत उनकी भी नहीं थी कि वो शाजिया को बोल पाते।

तभी वहाँ एक 22 साल की लड़की आ गई, उसकी हाईट काफ़ी अच्छी थी, वो दिखने में एकदम गोरी और बिल्कुल साना जावेद जैसी थी। उसका 34-30-34 का फिगर भी मस्त था।

वो अब्दुल जी के पास से गुज़री और जैसे ही अब्दुल जी की नज़र उस पर पड़ी।

अब्दुल- फरज़ाना, तुम यहाँ क्या कर रही हो?

फरज़ाना- वो मैं कुछ कपड़े लेने आई थी।

शाजिया- हो गई अब्बू पूरी शॉपिंग.. अब घर चलें या कुछ और भी लेना है?

शाजिया की आवाज़ सुनकर दोनों ही झेंप गए।

फरज़ाना- उह तो ये है आपकी बेटी शाजिया..! ये तो बहुत खूबसूरत है।

अब्दुल जी कुछ बोल पाते, तब तक फरज़ाना ने शाजिया से ही हैलो कर लिया।

शाजिया- सॉरी, मैंने आपको पहचाना नहीं!

फरज़ाना- आप बताओगे शाजिया को.. या मैं बताऊं कि मैं कौन हूँ।

अब्दुल- ये व्व..वो मेरे एक दोस्त की बेटी है फरज़ाना.. अच्छा शाजिया सब हो गया या कुछ और भी लेना है?

शाजिया- मुझे क्या पता अब्बू.. आप मुझे यहाँ लाए हो, अब जिसके लिए ये सब लिया है ये तो उसी को पता होगा ना।

फरज़ाना- किसके लिए शॉपिंग हो रही है.. मैं कुछ समझी नहीं?

अब्दुल जी कुछ बोलते इससे पहले शाजिया ने सारी कहानी बता दी।

 
फरज़ाना- उह अच्छा.. ये बात है तो ड्रेस और चप्पल से क्या होगा, उसको और कुछ भी चाहिए होगा ना!

फरज़ाना ने ये बात सामने अंडरगार्मेंट्स के डिपार्टमेंट को देख कर कही थी, जिसे अब्बू और बेटी दोनों समझ गए।

अब्दुल- शाजिया एक काम करो ये बहुत सामान हो गया है, ये सब बैग मुझे दो और मेरे लिए एक पानी की बोतल ले आओ.. बड़ी प्यास लगी है।

शाजिया- अब्बू पानी तो शायद नीचे मिलेगा, यहाँ तो सिर्फ़ गारमेंट्स और शूज ही हैं।

फरज़ाना- अरे तो नीचे से ले आओ, जाओ मुझे भी बहुत प्यास लगी है।

शाजिया अब आगे क्या बोलती, वो पानी लाने नीचे चली गई।

अब्दुल- ये क्या है फरज़ाना.. ज़रा भी शर्म नहीं करती हो, उधर देख कर क्या बोल रही थी तुम?

फरज़ाना- रिलॅक्स.. ऐसा क्या बोला मैंने? अब उसको इन सबकी भी तो जरूरत होगी ना.. खाली कपड़ों और जूतों से क्या होगा?

अब्दुल- ऐसा कुछ नहीं है, कोई लड़की नहीं है.. ये सब शाजिया के लिए ही है, बस मैं उसको सरप्राइज दे रहा हूँ।

फरज़ाना- वाउ… आपकी आदत गई नहीं सरप्राइज देने की.. गुड मगर ये सब लिया तो अंडरगार्मेंट्स भी दिला दो ना। उसकी भी इच्छा होगी ना, मगर आप को किसी की इच्छा से क्या लेना-देना है।

अब्दुल- फरज़ाना, तुम ज़्यादा बोल रही हो, मैंने कब तुम्हारी इच्छा को दबाया बोलो? आज जो तुम ये मॉर्डन कपड़े पहन कर घूम रही हो, ऐश कर रही हो.. सब मेरी वजह से, समझी! नहीं तो पता नहीं इस टाइम कहाँ होती।

फरज़ाना- बस बस मेरा मुँह मत खुलवाओ.. आप कोई सुनेगा तो हँसेगा।

अब्दुल- ओके बंद करो ये बकवास.. शाजिया आ रही है वो सुन लेगी।

फरज़ाना- हाँ मेरी बातें तो आपको बकवास ही लगेंगी ना, अच्छा मैं चलती हूँ, मुझे तो नई ब्रा लेनी है, आप जाओ अपनी प्यारी बेटी के साथ।

अब्दुल- रूको तुम सही कह रही हो, शाजिया को भी नई ब्रा-पेंटी ले लेनी चाहिए। मैं पानी लेकर वहाँ खड़ा हो जाऊंगा, तुम उसको साथ ले जाना और जो चाहिए उसको दिला देना।

फरज़ाना- ये हुई ना बात.. अब बने आप उसके असली अब्बू।

अब्दुल- फिर बकवास की तुमने.. असली का क्या मतलब है तुम्हारा? हाँ?

फरज़ाना- अरे कुछ नहीं.. अब सौतेली बेटी और असली बेटी में इतना फ़र्क तो होता ही है।

अब्दुल- फरज़ाना, तुम हद पर कर रही हो, अब वो आ गई, उसके साथ अगर कोई भी ऐसी-वैसी बात की ना.. तो सोच लेना तेरी अम्मी की तरह तू भी उसी जगह पहुँच जाएगी।

फरज़ाना कुछ जवाब देती, तब तक शाजिया उनके बिल्कुल पास आ गई थी।

अब्दुल जी ने शाजिया से पानी की बोतल ली और कहा- तुम फरज़ाना के साथ जाकर कुछ और शॉपिंग कर आओ, मैं तब तक वहाँ आराम करता हूँ।

शाजिया- लेकिन अब क्या बाकी रह गया? मैंने तो सब ले लिया।

फरज़ाना- अरे तुम आओ तो मेरे साथ.. आप जाइए, उधर जाकर थोड़ा रुकिए, हम दोनों अभी आते हैं।

शाजिया को तो कुछ समझ ही नहीं आया और फरज़ाना भी उसके लिए अनजान थी। बस वो उसके पीछे चली गई, जब वो उस जगह पहुँची, तब उसको समझ आया कि माजरा क्या है, मगर फरज़ाना के सामने उसको बहुत शर्म आई।

फरज़ाना- शाजिया शरमाओ मत, अपना साइज़ बताओ, उसी हिसाब से मैं तुम्हें कुछ अच्छे सैट दिलवा दूँगी।

शाजिया ने शर्माते हुए अपना साइज़ बता दिया, फिर क्या था फरज़ाना ने एक से बढ़कर एक सैट उसको दिलवाए, जिसे देख कर शाजिया भी खुश हो गई। फिर उसको ख्याल आया कि ये तो किसी और के लिए हैं.. बस फिर क्या था उसका मूड खराब हो गया।

शाजिया- बस बहुत ले लिया, अब चलो यहाँ से चलते हैं.. मुझे घर जाकर पढ़ाई भी करनी है।

फरज़ाना- अरे रूको, एक-दो नाइटी भी ले लो ना।

शाजिया का मन नहीं था मगर फरज़ाना ने ज़बरदस्ती उसको 2 सेक्सी नाइटी दिलवा दीं।

सारा सामान लेकर वो दोनों अब्दुल जी के पास आ गए, फिर फरज़ाना ने बहाना बना कर उनसे विदा ली और चली गई।

अब्दुल- क्यों बेटा हो गई शॉपिंग.. अब घर चले या कुछ और लेना है?

शाजिया- अब जो लेना था ले लिया, बाकी उसको कुछ चाहिए होगा तो वो खुद ले लेगी।

शाजिया को बहुत गुस्सा आ रहा था कि उसके अब्बू ने एक बार भी उसको ये नहीं कहा कि तुम भी अपने लिए कुछ ले लो।

अब्दुल- ठीक कहा तुमने, कुछ रह गया होगा तो वो खुद ही लेने आ जाएगी, चलो नीचे बिल करवा लेते हैं.. फिर मुझे भी वापस शॉप जाना है।

शाजिया और अब्दुल जी बिल की लाइन में लग गए, जब उनका नंबर आया और बैगों से सामान निकाल कर प्राइस कोड मारा गया, तब अब्दुल जी तो देखते रह गए। शाजिया ने एक से बढ़कर एक ड्रेस ली थीं। फिर ब्रा-पेंटी के सेट्स आए और वो सेक्सी नाइटी.. तो बस अब्दुल जी आपे से बाहर हो गए। ना जाने क्या सोच कर उनका लंड पेंट में तन गया। उनके दिमाग़ में शाजिया को लेकर कुछ नहीं था मगर वो कपड़े देख कर वो उत्तेजित हो गए। इधर बेचारी शाजिया का शर्म से बुरा हाल था.. वो नजरें झुकाए खड़ी रही।

सब सामान लेकर अब्दुल जी ने कार में रखा और घर की तरफ़ चल पड़े। पूरे रास्ते शाजिया सोच रही थी कि अब्बू ने मुझे कुछ भी लेने को नहीं कहा, क्या वो मुझसे प्यार नहीं करते। अरे मॉर्डन नहीं तो कोई सिंपल ड्रेस ही दिलवा देते।

अब्दुल- क्या सोच रही है मेरी लाड़ली? घर आ गया है, चलो उतरो.. ये सब बैग उठाओ.. अन्दर लेकर जाना है।

शाजिया- अन्दर क्यों अब्बू.. ये उनको देना है ना.. तो आप अपने साथ ले जाओ?

अब्दुल- अरे नहीं अभी नहीं.. वो खुद आ जाएँगे लेने.. चलो अब।

अंजुम- आ गए आप लोग, बहुत टाइम लगा दिया आपने.. कहाँ गए थे?

अब्दुल- अपनी बेटी से पूछो, इतना टाइम कैसे लग गया। मैं तो थक गया हूँ अब तो मैं चेंज करके थोड़ा आराम ही करूँगा। अब शॉप जाने की हिम्मत नहीं है, मैं गोपी को फ़ोन कर देता हूँ.. वो देख लेगा।

इतना कहकर अब्दुल जी अपने कमरे में चले गए और कपड़े बदलने लगे। इधर शाजिया का मूड ऑफ था, उसने सामान वहीं हॉल में रखा और जाने लगी।

अंजुम- अरे शाजिया.. ये सब यहाँ क्यों रख दिया तूने? ये सब अन्दर ले जा।

शाजिया- अन्दर क्यों.. कौन सा मेरा सामान है, अब्बू के दोस्त की बेटी का है आप रख दो कहीं भी.. वो आकर ले जाएँगे।

अंजुम समझ गई कि अब्दुल जी ने उसे उल्लू बनाया है, वो अनजान बनकर बोली- कौन दोस्त? मुझे नहीं पता तू ही बता मुझे?

शाजिया ने सारी बात अपनी अम्मी को बताई तो अंजुम मुस्कुराने लगी।

शाजिया- आप क्यों खुश हो रही हो? अब्बू ने मुझे कुछ भी नहीं दिलवाया इसलिए ना?

अंजुम- पागल है तू एकदम.. हा हा हा… छोटे बच्चे की तरह बिहेव कर रही है। अरे मेरी बेटी कोई दोस्त नहीं है, ये सब तेरे ही लिए है.. तेरे अब्बू कल की बात से शरमिंदा थे.. तुझ पर गुस्सा जो किया था। ये सब तेरे लिए किया सरप्राइज है बेटा हा हा हा हा तू उल्लू बन गई।

अंजुम की बात सुनकर शाजिया के तो पैरों तले ज़मीन ही निकल गई, उसको यकीन ही नहीं हुआ कि इतने मॉर्डन ड्रेस वो पहनेगी और भी इतने सारे।

शाजिया- सीसी क्या सच अम्मी.. प्लीज़ आप सही बताओ.. ये सब मेरे लिए है?

अंजुम- हाँ शाजिया सब तेरा है, यकीन नहीं तो अपने अब्बू से पूछ लो।

शाजिया भागती हुई अपने अब्बू के पास गई। उससे पूछा भी नहीं गया वो बस बोलने की कोशिश कर रही थी, मगर अल्फ़ाज़ है कि निकलने का नाम ही नहीं ले रहे थे।

शाजिया- अब्बू ये सब एम्म मेरे व्व..वो अम्मी क्क्क..कह रही हैं.. सस्स सब एमेम..!

अब्दुल- हा हा हा.. अरे कंट्रोल कर.. हाँ सब तेरे लिए ही लिया है, मेरी लाड़ली को पसंद आए वही सब मैंने दिलवाया.. अब तो खुश ना!

शाजिया की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वो भाग कर अपने अब्बू से चिपक गई और गाल पर एक जोरदार किस कर दिया।

शाजिया- ओह अब्बू.. आप कितने अच्छे हो.. आप दुनिया के सबसे अच्छे अब्बू हो।

शाजिया ने अब्दुल जी को इतना कस कर पकड़ा हुआ था कि उसके मम्मे वो अपने सीने में धंसते हुए साफ महसूस कर रहे थे। फिर इस वक्त उन्होंने सिर्फ़ बनियान और लुंगी ही पहनी हुई थी, जिससे जवान जिस्म की गर्मी उनको पागल बना रही थी। उनका लंड तन गया था और शाजिया की नाभि को फुददी समझ कर उसमें घुसने की कोशिश कर रहा था।

शाजिया को इस बात का अहसास हुआ या नहीं.. ये तो पता नहीं, मगर अब्दुल जी को ज़रूर पता लग गया कि उनकी बेटी जवान हो गई है और अगर ज़्यादा देर वो उससे चिपके रहे तो गड़बड़ हो जाएगी। बस यही सोचकर उन्होंने शाजिया को अपने से अलग किया।

 
शाजिया जब अलग हुई, तो अचानक उसकी नज़र लुंगी में बने टेंट पर गई और उसको समझने में देर नहीं लगी कि वो क्या चीज है। इधर अब्दुल जी भी अपनी हालत समझ रहे थे। वो जल्दी से बेड पे बैठ गए और लुंगी को इस तरह समेट लिया, जिससे उनका खड़ा लंड शाजिया को ना दिखे। मगर उनको क्या पता था कि शाजिया तो कबकी उस फुंफकारते लंड को देख चुकी है।

अब्दुल- क्यों कैसा लगा अब्बू का सरप्राइज?

शाजिया- बहुत अच्छा अब्बू.. मैं बता नहीं सकती, मुझे कितनी खुशी हुई है।

अब्दुल- बस मेरी बेटी ऐसे ही खुश रहा कर.. और दोबारा ऐसा कभी ना करना कि तुम मुझसे बिना बात किए चली जाओ।

शाजिया- सॉरी अब्बू.. मुझसे ग़लती हो गई, अब मैं कभी ऐसा नहीं करूँगी।

शाजिया के चेहरे की खुशी देख कर अब्दुल जी भी बहुत खुश थे।

अब्दुल- अच्छा ठीक है अब तुम भी आराम कर लो बेटा.. थक गई होगी।

शाजिया- अब्बू एक बात कहनी थी आपसे।

अब्दुल- हाँ कहो बेटी क्या बात है?

शाजिया- अब्बू वो सब ड्रेस तो मैंने आपके दोस्त की बेटी के हिसाब से लिए है, वो लन्दन से आई है ये सोच कर मैंने इसमें कुछ ज़्यादा ही मॉर्डन ड्रेस ले लिए हैं।

अब्दुल- अरे तो क्या हुआ.. तू किसी अँग्रेज़ी मेम से कम है क्या.. तेरे सामने वो भी फीकी लगें.. मेरी प्यारी बेटी सब तुझे पसंद है ना.. तो बस पहन के एंजाय कर। तेरे अब्बू के पास पैसों की कमी है क्या.. सब तेरे ही लिए है। समझी.. अब जा किसी बात को दिल पे मत लेना।

शाजिया ने एक बार फिर अब्बू को हग किया और खुशी-खुशी वहाँ से चली गई और अब्दुल जी अपने लंड को एड्जस्ट करने लगे.. वो फिर खड़ा हो गया था।

अब्दुल- ये आज इसे क्या हो रहा है.. क्यों बार-बार खड़ा हो रहा है। कहीं मेरे दिल में शाजिया के लिए तो कुछ.. छी: छी: मैं भी क्या सोचने लगा, वो मेरी बेटी है।

काफ़ी देर तक अब्दुल जी कसमकस में रहे, उनका दिमाग़ कुछ कहता और दिल कुछ कहता। आख़िर एक अब्बू की जीत हुई.. सारे बुरे ख्याल दिल से निकल गए और वे सो गए।

फ्रेंड्स दोपहर को इनकी शॉपिंग तो देख ली.. मगर शाहिद ने भी कुछ किया तो उसको भी देख लेते हैं।

 
कॉलेज के बाद शाहिद घर चला गया और हमेशा की तरह लंच के बाद शबनम उसके कमरे में आ गई।

शबनम ने ग्रे कलर की जींस की हाफ पेंट और ब्लैक टी-शर्ट पहनी हुई थी। उसके बाल खुले हुए थे.. आज तो वो बहुत ही सुन्दर लग रही थी।

शाहिद- क्या बात है मेरी शबनम रानी.. आज तो बड़ी चमक रही है.. क्या मंसूबा है?

शबनम- आपको तो पता ही है मेरे मामू जान.. आपके लंड के बिना मुझे सुकून कहाँ मिलता है, अब तो मैं उसकी आदी हो गई हूँ।

शाहिद- अच्छा ये बात है.. तो आजा मेरी जान तेरे लिए तो लंड हमेशा तैयार है।

शबनम- मामू आज हम कुछ नया करेंगे।

शाहिद- अच्छा ये बात है.. तो बता तेरा आज क्या करने का मंसूबा है?

शबनम- पहले अपने कपड़े तो निकाल दो मामू.. फिर बताती हूँ कि क्या करना है।

शाहिद ने अपने कपड़े निकाल दिए, तब तक शबनम भी एकदम नंगी हो गई थी।

शाहिद- ले मेरी जान हो गया नंगा.. अब बता तूने आज करने को क्या सोच रखा है?

शबनम- मामू बिस्तर पर तो रोज ही करते हैं.. आज हम कुत्ता और कुतिया बनेंगे.. उसमें मज़ा आएगा, आप सब वैसे ही करना।

शाहिद- हा हा हा ये तुझे क्या हो गया.. आज कुछ भी हा हा हा इसमें क्या नया है.. जैसे तुझे घोड़ी बनाता हूँ वैसे ही तू कुतिया बन जाएगी.. तो इसमें नया क्या हुआ?

शबनम- नहीं ऐसे डायरेक्ट नहीं.. जैसे कुत्ता अपनी कुतिया को पटाता है.. वैसे पहले मुझे आप पटाओ।

शाहिद- ठीक है डार्लिंग.. जैसी तेरी इच्छा.. चल बन जा कुतिया अभी तुझे पटा कर चोद देता हूँ।

शबनम घुटनों पर होकर कमरे में चलने लगी और शाहिद उसके पीछे-पीछे घुटनों पे चलने लगा। साथ ही वो शबनम की फुददी को सूंघने लगा और थोड़ा जीभ से चाट भी लेता।

शबनम- उहूँ हू हूँ.. जाओ यहाँ से कुत्ते कहीं के.. क्यों मुझे परेशान कर रहे हो.. हूँ हू हूँ।

शाहिद- गुर्र गुर्र गुर उहूँ हू.. साली ऐसे फुददी खुली लेकर घूमेगी तो मेरे जैसे कुत्ते का लंड खड़ा होगा ही ना उहूँ हू हूँ।

शबनम- अच्छा दिखा तो तेरा लंड कितना बड़ा है और कितना मोटा है?

शबनम चलकर शाहिद के पास आई और उसी पोज़िशन में झुक कर लंड को चूसने लगी।

शाहिद- हा हा हा कुतिया.. कब से कुत्ते का लंड चूसने लगी हा हा हा..

शबनम- चुप रहो आप.. मज़ा आ रहा है..

शाहिद ने सोचा चलो इसकी इच्छा पूरी कर ही देता हूँ। बस वो दोनों काफ़ी देर तक ये कुत्ते वाला गेम खेलते रहे। फिर शाहिद ने शबनम को बेड पे घोड़ी बनाया और लंड उसकी फुददी में पेल दिया।

शबनम- आह आ मामू.. रोज चोदते हो आह फिर भी ये दर्द क्यों होता है.. आह आह..

शाहिद- तेरी उम्र के हिसाब से ये लंड थोड़ा बड़ा है.. इसलिए दर्द होता है, ले अब संभाल स्पीड बढ़ा रहा हूँ।

शाहिद ने शबनम की कमर को कस कर पकड़ लिया और स्पीड से लंड अन्दर-बाहर करने लगा। शबनम भी गांड हिला-हिला कर चुदने लगी थी और साथ में जोर-जोर से शाहिद को बोल कर उकसा रही थी।

शबनम- आह आ मामू आह.. लगता है आपका जोश ठंडा हो गया है आह.. जोर से करो ना.. नहीं आह और जोर से आह आह..

शबनम की बात से शाहिद भी जोश में आ गया और उसने शबनम की फुददी रेल बना दी। अब चुदाई का तूफान जोरों पर था। पूरे कमरे में बस दोनों की मिली-जुली आवाजें और ठप-ठप की मिक्स आवाज़ गूँजने लगी थीं।

शबनम- आह गुड मामू.. आह ऐसे ही चोदो आह आपकी भांजी आह आपकी दीवानी है आह चोद दो.. आह फाड़ दो मेरी फुददी को.. अह..

शबनम की बातें आग में घी का काम कर रही थीं.. जिससे शाहिद का पॉवर बढ़ रहा था. लगभग 15 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद शबनम ठंडी हो गई मगर शाहिद तो दूर-दूर तक झड़ने के करीब नहीं था. उसने शबनम को सीधा लिटाया और उसके पेट पर बैठ कर उसके मुँह को लंड से चोदने लगा.

थोड़ी देर मुँह की चुदाई करने के बाद वो वापस नीचे उतरा और शबनम के पैरों को मोड़ कर लंड को शबनम की फुददी में पेल दिया.

शबनम- आह आ मामू आप आह बहुत ताक़तवर हो.. उई आह चोदो मामू आह..

शाहिद अब दे झटके दे झटके शबनम को बुरी तरह चोदने लगा और करीब 20 मिनट बाद दोनों एक साथ ही झड़ गए. चुदाई के बाद दोनों बेड पर लेते हुए हाँफ रहे थे. शबनम ने देखा शाहिद के लंड पर वीर्य की एक बूँद लगी है, वो झट से उठी और उसको जीभ से चाट कर साफ किया.

शाहिद- उह शबनम नाइस जॉब.. तुम सच में बहुत स्वीट हो और ये देखो तुम्हारे मम्मे भी अब बढ़ने लगे हैं.

शबनम- हाँ मामू मैंने भी गौर किया ये… और मेरे स्कूल के लड़के भी मुझे अब घूरने लगे हैं, पता है एक क्या बोला?

शाहिद- क्या बोला बता तो मुझे भी?

शबनम- वो बोला देख तो यार दिन पे दिन ये तो खिलती ही जा रही है. कोई नसीब वाला ही होगा जो अपना पोपट इसके पिंजरे में डालेगा और इसे अपनी रानी बनाएगा.

शाहिद- हा हा हा उनको क्या पता वो नसीब वाला तेरा मामू ही है हा हा हा..

शबनम- हाँ मामू पहले तो मुझे ये सब समझ नहीं आता था मगर अब तो आपने मुझे सब सिखा दिया है. अब उनके सब इशारे और डबल मीनिंग नोनवेज बातें मुझे समझ आने लगी हैं.

शाहिद- अच्छा ये बात है और सुना कोई लड़का तुझे तंग तो नहीं करता ना?

शबनम- नहीं ऐसे तो कोई नहीं करता मगर बस मैं कभी-कभी कोई मुझे पीछे से टच करता है.

शाहिद- अच्छा ये बात है.. तुझे एक आइडिया बताता हूँ, जिससे उन बदमाश लड़कों की सब हँसी उड़ाएंगे.. बोल बताऊं?

शबनम- सच मामू ऐसी बात है तो बताओ?

शाहिद ने कुछ टिप्स शबनम को बताए, जिसे सुनकर वो बहुत खुश हो गई और उसके चेहरे पे मुस्कान आ गई.

शाहिद- क्यों समझ में आ गया ना.. उन सालों की खिंचाई कैसे करनी है?

शबनम- हाँ मेरे प्यारे मामू आ गया. अब कल देखो कैसे उनको सबक सिखाती हूँ.

शाहिद- उनको सबक बाद में सिखाना.. पहले अपना सबक याद कर ले, ये चुदाई के चक्कर में अगर फेल हो गई ना तो तेरे साथ मेरी भी शामत आ जाएगी.

शबनम- ऐसा कुछ नहीं होगा, चुदाई के साथ आप मेरी पढ़ाई का भी पूरा ध्यान रखते हो.. चलो आज क्या पढ़ाओगे?

शाहिद- पहले कपड़े तो पहन ले, ऐसे नंगी ही पढ़ाई करेगी क्या?

शबनम- हाँ आज ऐसे ही करूँगी और आपकी गोदी में बैठ के करूँगी.

शाहिद- फिर हो गई पढ़ाई.. चल पहन कपड़े अब बाकी की चुदाई रात को करेंगे.

शबनम का मन नहीं था मगर शाहिद ने उसको कपड़े पहना दिए, फिर वो उसको पढ़ाने लग गया.

 
फ्रेंड्स दोपहर को कॉलेज के बाद रूबी भी तो घर ही जाती है, चलो आज हम उसके घर का हाल भी देख लेते हैं.

रूबी जब घर गई तो रोज़ी ने उसे लंच दिया, फिर वो किसी काम से बाहर चली गई. थोड़ी देर बाद फर्नाडिस भी आ गया. फ्रेंड्स मैंने आपको शायद बताया नहीं था कि फर्नाडिस सरकारी नौकरी में है, तो कभी-कभी दोपहर को घर आ जाता है. अपने देश के सरकारी कर्मचारियों का हाल तो आपको पता ही है, काम के टाइम ज़्यादा गायब ही रहते हैं.

रूबी- अरे अब्बू.. आप जल्दी आ गए? क्या बात है आजकल काम नहीं है या आप ऐसे ही छुट्टी मार लेते हो?

फर्नाडिस- अरे सारा दिन फाइलों के बीच बोरियत होती है, तो चला आया. तू सुना क्या हाल है तेरे और कॉलेज में सब ठीक है ना?

रूबी- हाँ अब्बू सब ठीक है. अब मैं तो थकी हुई हूँ.. थोड़ा आराम करूँगी. आपका क्या मंसूबा है? सोने का.. या टीवी से टाइम पास करोगे?

फर्नाडिस- नहीं मुझे वापस जाना होगा, एक छोटा सा काम है. तू सो जा, मैं तब तक टीवी देख कर टाइम पास करता हूँ.

रूबी अपने कमरे में चली गई. वो कपड़े बदल रही थी.. तभी फर्नाडिस ने उसको आवाज़ दी.

फर्नाडिस- अरे ये तेरी मॉम रिमोट कहाँ रख के गई है.. मिल ही नहीं रहा.

रूबी- वहीं होगा.. वो टीवी के साइड में देखो.

फर्नाडिस- नहीं है यहाँ भी.. तुम दोनों का कुछ पता नहीं.. कहाँ रख देती हो. अब आ जाओ.. मुझे तुम ही ढूँढ कर दे दो.

रूबी- आप भी ना अब्बू.. सामने रखी चीज भी आपको नहीं मिलती. अब देखो 2 मिनट में आपको रिमोट देती हूँ.

फ्रेंड्स रूबी चेंज कर रही थी मगर फर्नाडिस के रिमोट के चक्कर में वो सिर्फ़ ब्रा-पेंटी में बाहर आ गई थी. उसने रेड कलर का सैट पहना हुआ था.. उस हालत में उसे देख कर बूढ़े का लंड भी खड़ा हो जाए तो फर्नाडिस का क्या हाल होगा आप खुद समझ सकते हो

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फर्नाडिस तो बस उसको देखता ही रह गया और रूबी ने रिमोट ढूँढ कर फर्नाडिस के सामने कर दिया.

रूबी- ये लो वहीं था.. अब क्या हुआ ऐसे मुझे क्यों घूर रहे हो आप? हाँ?

फर्नाडिस- तुम पागल हो क्या.. कितनी बार समझाया मैंने तुझे.. मेरे सामने ऐसे नंगी मत आया कर.. मैं तेरा अब्बू हूँ तू समझती क्यों नहीं मेरी बात को?

रूबी- अब्बू मेरी शर्म अपने ही खोली है. याद है ना उस टाइम मैंने कितना मना किया था आपको.. मगर आप मानते ही नहीं थे. अब तो मैंने ब्रा-पेंटी पहनी है.. उस टाइम तो मैं एकदम नंगी रहती थी, तब अपने मना क्यों नहीं किया मुझे? बोलो?

फर्नाडिस- मेरी जान वो हमारी मजबूरी थी मगर अब तो वेसा कुछ नहीं है, तो प्लीज़ अब अपनी ये आदत सुधार ले. तेरी मॉम को अगर ये पता लग गया तो तू जानती है क्या होगा..?

रूबी- आपकी मंशा सही है और मेरी भी सही है, फिर कुछ नहीं होगा. आप टेंशन मत लो.. मॉम को कभी पता नहीं लगेगा.

फर्नाडिस- तुझसे बहस करना बेकार है.. मंशा सही है इसका मतलब ये नहीं कि कोई फ़र्क ना पड़े. समझी.. चल जा अब यहाँ से..

रूबी- हा हा हा आप कंट्रोल खो रहे हो ना.. हा हा हा क्यों जब आप और मॉम रात को इतनी आवाजें कर रहे थे, तो मुझे भी प्राब्लम हुई थी हा हा हा हा..

फर्नाडिस- छी: शर्म नहीं आती तुम्हें ऐसी बात करते हुए.. वो भी अपने मॉम-अब्बू के लिए..?

रूबी- सॉरी अब्बू.. मगर क्या करूँ आवाज़ थी इतनी तेज कि सुनाई दे गई. आप थोड़ा आराम से किया करो न हा हा हा हा..

फर्नाडिस- अब तू जाती है या दो लगाऊं तुझे?

रूबी- अच्छा अच्छा सॉरी मैं जाती हूँ.

रूबी वहां से हंसते हुए चली गई और फर्नाडिस ने अपने खड़े लंड को पकड़ के थोड़ा सा सहला दिया.

फर्नाडिस- ओह गॉड ये लड़की भी ना मुझे पागल बना देगी, कहीं कोई अनहोनी ना हो जाए.

फ्रेंड्स, एक बेटी कैसे अपने अब्बू के सामने ऐसे कर सकती है. ऐसा तो शायद ही आपने कहीं देखा या सुना होगा मगर यहाँ ये सब कुछ नोनवेज हो रहा है तो ज़रूर इसके पीछे कोई वजह होगी. चलो आपको वो बता ही देती हूँ. अरे नहीं बात थोड़ी लंबी है, फिर कभी अभी राबिया के पास भी जाना है ना.. तो पहले वहीं चलते हैं.. यहाँ के हाल फिर कभी सुन लेना.

उधर फवाद रोज की तरह घर से चला गया था और उसके जाने के कुछ देर बाद रुबीना वहाँ आ गई थी.

राबिया- अरे आओ रुबीना.. तुझे कुछ बताना था. मैं बस सोच ही रही थी तुझे कॉल करूँ.

रुबीना- अच्छा ऐसी क्या बात है बता तो? मैं समझी मुझे ही जल्दी है तुझसे मिलने की, मगर तू तो मुझसे भी ज़्यादा उतावली हो रही है.. चल बता क्या बात है?

राबिया- यार मैंने समीर को ढूँढ लिया है और फवाद का राज भी पता लग गया.

रुबीना- क्या बात कर रही है यार.. दो दिन पहले तो कुछ नहीं था और आज सब कुछ हो गया. ये सब कैसे हुआ खुल कर बता ना?

राबिया ने सारी कहानी रुबीना को सुना दी, जिसे सुनकर उसकी फुददी गीली हो गई.

रुबीना- वाउ यार तू तो बहुत बड़ी रांड़ निकली, पहले जितनी शरीफ़ थी, अब उतनी ही बदमाश हो गई. अपनी प्यास बुझाने के लिए बड़ी जल्दी तूने दूसरा लंड ढूँढ लिया.

राबिया- रांड़ होगी तुम.. मैं क्यों रांड़?

रुबीना- अरे बुरा लगा क्या.. सॉरी यार, मेरा वो मतलब नहीं था.

राबिया- हा हा हा डर गई ना.. अरे तू रांड़ बोल या कुछ और मगर अब मेरी लाइफ अच्छी हो गई है.. अब किसी का डर नहीं.

रुबीना- कमीनी, तूने तो मुझे डरा ही दिया.

राबिया- अच्छा वो सब जाने दे.. आज फवाद को जब मैंने काम वाली का बताया तो उनका लंड खड़ा हो गया था यानि समीर वाली बात एकदम सही है. अब बस जल्दी से कोई ऐसी लड़की मिल जाए जो कमसिन हो.

रुबीना- मेरी जान इसी लिए तेरे पास आई हूँ, तेरा काम मैंने कर दिया. मेरी जो काम वाली है, उसके भाई की कुछ दिन पहले शराब ज़्यादा पीने से मौत हो गई है. अब उसकी भाभी और भतीजी को पेट पालने के लिए काम की जरूरत है.. समझी कुछ?

राबिया- वाउ यार तो तूने उससे बात की?

रुबीना- उसकी भाभी को तो मैंने पहले ही पड़ोसी के यहाँ लगा दिया था मगर वो अपनी भतीजी को काम पर नहीं लगाना चाहती थी. बस मैंने थोड़ा पैसों का लालच दिया तो मान गई.

राबिया- अच्छा कितने साल की है और दिखने में कैसी है? फवाद को पसंद तो आ जाएगी ना वो लड़की.. तू जल्दी बोल ना!

रुबीना- उसकी उम्र मत पूछ.. एकदम कच्ची कली है.. जैसी तुझे चाहिए और नादान भी है. तू थोड़ी सी मेहनत करेगी ना.. तो तेरी हर बात मानेगी. उसे देख कर फवाद क्या तू भी पागल हो जाएगी, ऐसा समझ कि बस अल्लाह ने कीचड़ में कमल खिलाया है.

राबिया- अच्छा ऐसी बात है तो उसका बहुत ध्यान रखना पड़ेगा, कहीं फवाद उसकी फुददी ही न फाड़ दे और मेरी मेहनत बेकार चली जाए.

रुबीना- अब ये तेरी टेंशन है कि तू कैसे उसका इस्तेमाल करती है समझी मेरी जान!

रुबीना की बात सुनकर राबिया के चेहरे पे अलग ही खुशी साफ नज़र आ रही थी, जिसे देख रुबीना भी मुस्कुरा दी.

रुबीना- वैसे तुझे ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी, वो ऐसी है कि फवाद खुद उसको चोदने का प्लान बना लेगा. मगर एक बात याद रखना उसको ये सब के बारे में कोई ज्ञान नहीं है.. तुझे उसको तैयार करना होगा, तभी बात बनेगी. नहीं तो सारा प्रोग्राम चौपट हो जाएगा समझी तू!

राबिया- उसकी टेंशन तू मत ले.. बस एक बार उसको लेकर आ, फिर देख मैं कैसे उसे सब सिखा देती हूँ. तू देखना मैं उस कली को एक हफ्ते में फवाद के नीचे लिटा दूँगी.

रुबीना- ठीक है मैं उसे कल सुबह ले आती हूँ.

राबिया- नहीं सुबह नहीं.. कल इसी टाइम लेकर आना. मैं नहीं चाहती कि जब वो आए तो फवाद उसको देखे. पहले मैं उसको अच्छी तरह रेडी करूँगी, फिर फवाद के सामने लाऊंगी.

रुबीना- तुझे जो करना है कर.. मुझे थोड़ा काम है तो मैं तो जाती हूँ और समीर को बुला ले.. वो अभी तेरी चुदाई कर देगा.

राबिया- क्यों तेरा भी मन ललचा गया क्या.. बोले तो तेरी भी चुदाई करवा दूँ उससे?

रुबीना- अरे नहीं.. मेरे लिए मेरे वही बहुत हैं. अच्छा यार चलती हूँ.. कल शाम को उस लड़की को लेकर आती हूँ.

रुबीना के जाने के बाद राबिया भी टीवी देखने लगी.

अब हम भी यहाँ से चलते हैं.

 
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