S
StoryPublisher
Guest
तुम्हारे दिमाग में इस कमरे से बाहर निकलने का कोई रास्ता है मेरे कानों से एक धीमा-सा स्वर टकराया । मैं चौंकी । मैंने पट से आंखें खोल दीं । फिर मुझे कुछ सुनाई नहीं दिया था ।
मैंने सोचा मेरा वहम है । लेकिन वो मेरा वहम कैसे हो सकता था? वो आवाज मैंने साफ-साफ सुनी थी ।
मेरे कान खड़े हो गये।
"जवाब दो ।" इस बार दूसरा स्वर मुझे सुनाई दिया था ।
वह आवाज ऐसी थी जैसे कोई मच्छर भिनभिनाता हो ।
आवाज बगल वाले कमरे से आई थी, जिसके मजबूत दरवाजे पर लोहे का ताला लटका हुआ था ।
पलक झपकते ही मेरे जेहन में एक सवाल कौंध गया था ।
कमरे में कौन लोग हैँ?
"मेरे दिमाग में कमरे से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है ।" जवाब में कहा गया ।
मेरी उत्सुकता आसमान छूने लगी ।
मै स्प्रिग लगे खिलौने की तरह उछलकर खडी हो गई और दबे कदमों कोने में रखी मेज की तरफ बढी ।
"ओपफो ।" इस बार तीसरे व्यक्ति का बैचेनी भरा स्वर मुझे सुनाई दिया…"कुछ तो सोचो । इस तरह हथियार डाल देने से काम नहीं चलेगा, अगर हमलोग यहां से नहीं निकले तो हमें ऐसी भयानक मौत मिलेगी, जिसकी हमने सपने में भी कल्पना नहीं की होगी ।"
"तुम ही कुछ क्यों नहीं सोचते?"
"क्या सोचूं?. मेरे दिमाग ने तो काम करना ही की कर दिया है ।"
"फिर तो मौत का इंतजार करो । कुछ देर बाद हमें गोलियों से भून दिया जायेगा, और हमारी लाशें चीलें-कौओ के खाने के लिये छत पर डाल दी जायेंगी । मुझे एक ही बात का अफसोस है कि मैं सर एडलॉफ के लिये कुछ नहीं कर सका ।"
अब मैं समझ गई कि वे लोग सर एडलॉफ के समर्थक हैं ।
मैं मेज के करीब पहुंची ।
मैंने मेज उठाकर उसका वजन परखा, वो ज्यादा भारी नहीं थी । मैंने मेज को खिड़की के नीचे दीवार के साथ सटाकर रख दिया, फिर उस पर चढ गई । "
अब मेरा चेहरा खिड़की के सामने था ।
मैंने चेहरा सलाखों से सटाकर दूसरी तरफ झाका, उस कमरे के फर्श पर छ: व्यक्ति बैठे हुए थे । सभी के चेहरों पर पत्थर जैसी कठोरता नजर जा रहीँ थी ।
कमरे में बल्ब का पीला एवं बीमार प्रकाश फैला हुआ था ।
"अच्छा ये बताओ क्या किसी तरह इस कमरे की दीवार नहीं तोडी जा सकती?" एक ने कहा ।
"पागल हो तुम?" दुसेर ने कहा-"इस कमरे की दीवारें कागज की हैं क्या, जो तोडी जा सकी तुम्हारा सवाल बहा ही बचकाना है ।"
पहले वाला अपना-सा मुँह लेकर रह गया
क्षण भर कुछ सोचकर सलाखों पर दस्तक दी ।
सभी ने चेहरे उठाकर खिड़की की तरफ देखा । मुझे खिड़की के पीछे देख उनके चेहरों पर असमंजस के भाव उभरे।
मैंने उनमें से एक को हाथ से अपनी तरफ़ आने का इशारा किया । उसने प्रश्न भरी निगाहों से अपने साथियों की तरफ देखा ।
"सोच क्या रहे हो?" मैंने धीमे स्वर में कहा----" जल्दी से मेरे पास आओं ।"
वह एक झटके से उठा और लपकता हुआ खिड़की के नीचे आकर खड़ा हो गया, फिर उसने अपना ऊपर उठाकर पूछा-"कौंन हो ?"
" हमदर्द समझो ।"
" मेरी हमदर्द यहाँ कहां से आ गई?" वह चकराया-सा बोला---"यहाँ तो हर कोई हमारा दुश्मन है । हमारे खून का प्यासा !"
"मैंने जो कहा है । वह सच है ।"
"तुमने मुझे क्यों बुलाया?" उसने सवाल किया ।
"तुम दीवार को तोड़ने की बात कर रहे थे न ।"
"हां ।"
"कमरे की दीवार तोड्री जा सकती है ।"
" क. .क्या ?" उसका मुंह हैरत से भाड़ की तरह खुल गया ।
" मैँ ठीक का रही हू । इस काम में मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूं !"
"लेकिन तुम हमारी मदद क्यों करना चाहती हो, इसमें तुम्हारी क्या दिलचस्पी हैं ?"
"तुम लोग सर एंडलॉफ़ के समर्थक हो और एक अच्छे काम के लिये जालिमो के खिलाफ जंग लड़ रहे हो । यही वजह है कि मैं तुम लोगों की मदद करना चाहती हूं।" मैं फुसफुसाई ।
उसका चेहरा चमक उठा ।
"ल .लेकिन दीवार कैसे तोडी जा सकती है ?" उसने सवाल किया ।
"वो भी बताऊगी । लेकिन पबले ये बताओ कि दीवार के दूसरी तरफ़ क्या है?"
"खाली जगह है ।"
"पक्की बात ।"
" एकदम पक्की बात ।"
" यानि दीवार टूटने के बाद तुम आसानी से यहां से भागने मे कामयाब हो जाओगे !"
"अबश्य ।"
"यहां से निकलने के बाद तुम लोगों को एक काम करना होगा ।"
"क्या ?" उसकी सवालिया निगाहें मेरे चेहरे पर फिक्स होकर रह गई ।
"तुम सर एडलॉंफ के समर्थक हो । तुम्हें इस बारे में जानकारी होगी कि इस शहर में तुम लोगों के ठिकाने कहां-कहां हैँ? तुम्हारे साथी किस जगह छिपकर अपनी कार्यवाही करते हैं ।"
"हमें पूरी जानकारी है ।"
"यहां से निकलने के बाद तुम उन ठिकानों पर मोजूद अपने साथियों को सावधान कर दोगे कि अब वो जगह उनके लिये सुरक्षित नहीँ रही है । कभी भी सैनिक यहां पहुंचकर उन्हें गिरफ्तार कर सकते ।"
मैंने ये बात उसे-इसलिए कहीं थी कि अगर सैनिक क्लाइव का मुंह खुलवाने में कामयाब हो भी जायं तो वहां उन्हें चिडिया का बच्चा भी न मिले ।
" अपने साथियों को खबर करना मेरी जिम्मेदारी है । अब मुझें जल्दी से बताओं कि दीवार केसे तोडी जा सकती हे? अगर सैनिक यहां आ गये तो हम लोगों की मौत निश्चित है ।"
"अपनी शर्ट फैलाओ ।"
उसने अपनी शर्ट के दोनों कोने पकड़कर आगे की तरफ फैला दिए।
मैंने अपने सैडिल की एडी ढक्कन की तरह खोली और उस खोखली एडी में रखा बड़े आकार का एक कैप्सूल निकालकर सलाखों के बीच में हाथ डालकर नीचे छोड़ दिया ।
कैप्पूल उसकी फैली शर्ट पर'गिरा ।
"य. . .ये क्या है ?“ उसने र्केप्सूल पर निगाह मारी, फिर चेहरा उठाकर मेरी तरफ देखता हुआ बोला ।
"दरअसल ये कैप्सूल एक शक्तिशाली बम है । ये इन्सानी जान भी ले सकता है । कमरे की दीवार को ध्वस्त करने के लिये । एक कैंप्यूल बम काफी होगा ।"
"अ. . . अच्छा ।" उसके होठों से आश्चर्य भरा स्वर निकला ।
"हां !"
उसने कैप्पूल उठाकर अपनी मुट्ठी में दबा लिया । पलक झपकते ही उसका चेहरा पत्थर की तरह कठोर होता चला गया । जबड़े कस गये । इस बीच उसके पांचो साथी भी वहीं पहुच गये थे ।
"लेकिन एक बात है ।" मैंने कहा ।
"क्या?" इस बार उसका एक साथी बोल उठा ।
दीवार उडाने के चक्कर में तुम लोगों की जाने भी जा सकती हैं । तुम लोग मलवे की चपेट में आ सकते हो ।"
"हम लोग सैनिकों के हाथों दर्दनाक मोत मरने से ऐसी मौत मरना बैहतर समझते हैं ।" तीसरे ने कहा ।
"एक बात और ।"
"वो क्या?" उन सभी की निगाहें मेरे चेहरे पर आ टिकी ।
"बम फटने से जबरदस्त धमाका होगा । धमाके की आवाज इस समूची इमारत में सुनी जायेगी । तुम लोग पकडे भी जा सकते हो । फिर सैनिक तुम्हे ऐसी मौत देगे, जिसका अंदाजा तुम स्वयं भी लगा सकते हो ।" मैंने कहा ।
" वो बाद की बात है । अगर हम यहां से भाग निकले तो फिर हम सैनिकों के फरिश्तों के हाथ भी नहीं आयेंगे । बस हमें भागने . के लिए रास्ता मिल जाये ।"
"रास्ता तो तुम्हें मिल ही जायेगा । गोड का नाम लेकर इस कैपूसूल को पूरी ताकत से सामने वाली दीवार पर दे मारो । कमरे की दीबार मलबे के देर में तब्दील हो जायेगी ।"
उस शख्स ने कैप्सूल पूरी ताकत से सामने वाली दीवार पर दे मारा ।
अगले क्षण ।
धड़ाम् ।
मैंने सोचा मेरा वहम है । लेकिन वो मेरा वहम कैसे हो सकता था? वो आवाज मैंने साफ-साफ सुनी थी ।
मेरे कान खड़े हो गये।
"जवाब दो ।" इस बार दूसरा स्वर मुझे सुनाई दिया था ।
वह आवाज ऐसी थी जैसे कोई मच्छर भिनभिनाता हो ।
आवाज बगल वाले कमरे से आई थी, जिसके मजबूत दरवाजे पर लोहे का ताला लटका हुआ था ।
पलक झपकते ही मेरे जेहन में एक सवाल कौंध गया था ।
कमरे में कौन लोग हैँ?
"मेरे दिमाग में कमरे से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है ।" जवाब में कहा गया ।
मेरी उत्सुकता आसमान छूने लगी ।
मै स्प्रिग लगे खिलौने की तरह उछलकर खडी हो गई और दबे कदमों कोने में रखी मेज की तरफ बढी ।
"ओपफो ।" इस बार तीसरे व्यक्ति का बैचेनी भरा स्वर मुझे सुनाई दिया…"कुछ तो सोचो । इस तरह हथियार डाल देने से काम नहीं चलेगा, अगर हमलोग यहां से नहीं निकले तो हमें ऐसी भयानक मौत मिलेगी, जिसकी हमने सपने में भी कल्पना नहीं की होगी ।"
"तुम ही कुछ क्यों नहीं सोचते?"
"क्या सोचूं?. मेरे दिमाग ने तो काम करना ही की कर दिया है ।"
"फिर तो मौत का इंतजार करो । कुछ देर बाद हमें गोलियों से भून दिया जायेगा, और हमारी लाशें चीलें-कौओ के खाने के लिये छत पर डाल दी जायेंगी । मुझे एक ही बात का अफसोस है कि मैं सर एडलॉफ के लिये कुछ नहीं कर सका ।"
अब मैं समझ गई कि वे लोग सर एडलॉफ के समर्थक हैं ।
मैं मेज के करीब पहुंची ।
मैंने मेज उठाकर उसका वजन परखा, वो ज्यादा भारी नहीं थी । मैंने मेज को खिड़की के नीचे दीवार के साथ सटाकर रख दिया, फिर उस पर चढ गई । "
अब मेरा चेहरा खिड़की के सामने था ।
मैंने चेहरा सलाखों से सटाकर दूसरी तरफ झाका, उस कमरे के फर्श पर छ: व्यक्ति बैठे हुए थे । सभी के चेहरों पर पत्थर जैसी कठोरता नजर जा रहीँ थी ।
कमरे में बल्ब का पीला एवं बीमार प्रकाश फैला हुआ था ।
"अच्छा ये बताओ क्या किसी तरह इस कमरे की दीवार नहीं तोडी जा सकती?" एक ने कहा ।
"पागल हो तुम?" दुसेर ने कहा-"इस कमरे की दीवारें कागज की हैं क्या, जो तोडी जा सकी तुम्हारा सवाल बहा ही बचकाना है ।"
पहले वाला अपना-सा मुँह लेकर रह गया
क्षण भर कुछ सोचकर सलाखों पर दस्तक दी ।
सभी ने चेहरे उठाकर खिड़की की तरफ देखा । मुझे खिड़की के पीछे देख उनके चेहरों पर असमंजस के भाव उभरे।
मैंने उनमें से एक को हाथ से अपनी तरफ़ आने का इशारा किया । उसने प्रश्न भरी निगाहों से अपने साथियों की तरफ देखा ।
"सोच क्या रहे हो?" मैंने धीमे स्वर में कहा----" जल्दी से मेरे पास आओं ।"
वह एक झटके से उठा और लपकता हुआ खिड़की के नीचे आकर खड़ा हो गया, फिर उसने अपना ऊपर उठाकर पूछा-"कौंन हो ?"
" हमदर्द समझो ।"
" मेरी हमदर्द यहाँ कहां से आ गई?" वह चकराया-सा बोला---"यहाँ तो हर कोई हमारा दुश्मन है । हमारे खून का प्यासा !"
"मैंने जो कहा है । वह सच है ।"
"तुमने मुझे क्यों बुलाया?" उसने सवाल किया ।
"तुम दीवार को तोड़ने की बात कर रहे थे न ।"
"हां ।"
"कमरे की दीवार तोड्री जा सकती है ।"
" क. .क्या ?" उसका मुंह हैरत से भाड़ की तरह खुल गया ।
" मैँ ठीक का रही हू । इस काम में मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूं !"
"लेकिन तुम हमारी मदद क्यों करना चाहती हो, इसमें तुम्हारी क्या दिलचस्पी हैं ?"
"तुम लोग सर एंडलॉफ़ के समर्थक हो और एक अच्छे काम के लिये जालिमो के खिलाफ जंग लड़ रहे हो । यही वजह है कि मैं तुम लोगों की मदद करना चाहती हूं।" मैं फुसफुसाई ।
उसका चेहरा चमक उठा ।
"ल .लेकिन दीवार कैसे तोडी जा सकती है ?" उसने सवाल किया ।
"वो भी बताऊगी । लेकिन पबले ये बताओ कि दीवार के दूसरी तरफ़ क्या है?"
"खाली जगह है ।"
"पक्की बात ।"
" एकदम पक्की बात ।"
" यानि दीवार टूटने के बाद तुम आसानी से यहां से भागने मे कामयाब हो जाओगे !"
"अबश्य ।"
"यहां से निकलने के बाद तुम लोगों को एक काम करना होगा ।"
"क्या ?" उसकी सवालिया निगाहें मेरे चेहरे पर फिक्स होकर रह गई ।
"तुम सर एडलॉंफ के समर्थक हो । तुम्हें इस बारे में जानकारी होगी कि इस शहर में तुम लोगों के ठिकाने कहां-कहां हैँ? तुम्हारे साथी किस जगह छिपकर अपनी कार्यवाही करते हैं ।"
"हमें पूरी जानकारी है ।"
"यहां से निकलने के बाद तुम उन ठिकानों पर मोजूद अपने साथियों को सावधान कर दोगे कि अब वो जगह उनके लिये सुरक्षित नहीँ रही है । कभी भी सैनिक यहां पहुंचकर उन्हें गिरफ्तार कर सकते ।"
मैंने ये बात उसे-इसलिए कहीं थी कि अगर सैनिक क्लाइव का मुंह खुलवाने में कामयाब हो भी जायं तो वहां उन्हें चिडिया का बच्चा भी न मिले ।
" अपने साथियों को खबर करना मेरी जिम्मेदारी है । अब मुझें जल्दी से बताओं कि दीवार केसे तोडी जा सकती हे? अगर सैनिक यहां आ गये तो हम लोगों की मौत निश्चित है ।"
"अपनी शर्ट फैलाओ ।"
उसने अपनी शर्ट के दोनों कोने पकड़कर आगे की तरफ फैला दिए।
मैंने अपने सैडिल की एडी ढक्कन की तरह खोली और उस खोखली एडी में रखा बड़े आकार का एक कैप्सूल निकालकर सलाखों के बीच में हाथ डालकर नीचे छोड़ दिया ।
कैप्पूल उसकी फैली शर्ट पर'गिरा ।
"य. . .ये क्या है ?“ उसने र्केप्सूल पर निगाह मारी, फिर चेहरा उठाकर मेरी तरफ देखता हुआ बोला ।
"दरअसल ये कैप्सूल एक शक्तिशाली बम है । ये इन्सानी जान भी ले सकता है । कमरे की दीवार को ध्वस्त करने के लिये । एक कैंप्यूल बम काफी होगा ।"
"अ. . . अच्छा ।" उसके होठों से आश्चर्य भरा स्वर निकला ।
"हां !"
उसने कैप्पूल उठाकर अपनी मुट्ठी में दबा लिया । पलक झपकते ही उसका चेहरा पत्थर की तरह कठोर होता चला गया । जबड़े कस गये । इस बीच उसके पांचो साथी भी वहीं पहुच गये थे ।
"लेकिन एक बात है ।" मैंने कहा ।
"क्या?" इस बार उसका एक साथी बोल उठा ।
दीवार उडाने के चक्कर में तुम लोगों की जाने भी जा सकती हैं । तुम लोग मलवे की चपेट में आ सकते हो ।"
"हम लोग सैनिकों के हाथों दर्दनाक मोत मरने से ऐसी मौत मरना बैहतर समझते हैं ।" तीसरे ने कहा ।
"एक बात और ।"
"वो क्या?" उन सभी की निगाहें मेरे चेहरे पर आ टिकी ।
"बम फटने से जबरदस्त धमाका होगा । धमाके की आवाज इस समूची इमारत में सुनी जायेगी । तुम लोग पकडे भी जा सकते हो । फिर सैनिक तुम्हे ऐसी मौत देगे, जिसका अंदाजा तुम स्वयं भी लगा सकते हो ।" मैंने कहा ।
" वो बाद की बात है । अगर हम यहां से भाग निकले तो फिर हम सैनिकों के फरिश्तों के हाथ भी नहीं आयेंगे । बस हमें भागने . के लिए रास्ता मिल जाये ।"
"रास्ता तो तुम्हें मिल ही जायेगा । गोड का नाम लेकर इस कैपूसूल को पूरी ताकत से सामने वाली दीवार पर दे मारो । कमरे की दीबार मलबे के देर में तब्दील हो जायेगी ।"
उस शख्स ने कैप्सूल पूरी ताकत से सामने वाली दीवार पर दे मारा ।
अगले क्षण ।
धड़ाम् ।