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सुना है-----उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध कोई कैद नहीं-रख सकता । पिछली बार जोकर तक की कैद को धता बता गया था । उसे हमने कैद कर लिया है । कोई बडी बात ही नहीं हुई ये?”
" 'रावण का नाम सुना है?”
"सुना है ।"
"बता कौन था वो !"
"विलेन था ।"
"विलेन?”
" रामायण का ।"
"विलेन नहीं, किरदार बोल । रामायण का एक पावरफुल किरदार । कुछ लोग उसे हीरो मानते हैं । वह इतना पावरफुल था कि नो के नो ग्रहों को कैद कर रखा था । अपनी खाट के पाए बांध कर रखा था उन्हें उसने । शुक्र, शनिश्चर और राहु-केतु तक उन्हीं में थे ।"
"तो ?"
"तो क्या, बावजूद इसके-अकेले हनुमान उसकी लंका में आग लगा गए । राम 'ने तो बैकुंठ ही पहुचा दिया उसे ।"
"बात भेजे में नहीं घुसी । यहां तू कथा क्यों बांचने लगा?"
- “कोशिश कर रहा हूं तुझें समझाने की । यह बताने की कि इन लोगों को कैद करके इतना इतराने की जरूरत नहीं है । अव भी कोई हनुमान तेरी लंका में आग लगा सकता है राम बैकुंठ पहुचा सकताहै ।"
"हमारा जो होगा देखा जाएगा मगर ये तय है, उससे पहले हमारा मारकेश इनके प्रधानमंत्री को बैकुंठ पहुचा देगा ।"
"खामोश ।" विकास दहाड़ उठा-"'मुह से एक भी लफ्ज और निकाला तो जुबान खींच लुंगा ।"
"लो । कर तो बात । ये है छटंकी की अक्ल !” नुसरत ने तुगलक से कहा---"सामने नहीं हैं । पर्दे पर हैं और जनाब हमारी जुबान खीचने का दावा करते है । कोई पूछै इनसे, वर्तमान हालात में ऐसा ये - कैसे कर सकते हैं ।"
"अक्ल से पैदल तू है । सच्ची-मुच्ची थोडी कह रहे हैं छटकी मियां । तुगलक ने कहा----“मजाक कर रहे हैं मगर तू ठहरा बंदर । बंदर क्या जाने मजाक का स्वाद ।"
विकास मन मारकर रह गया । नुसरत की बात एक तरह से ठीक ही थी । वर्तमान हालातं में चाहकर भी उनका कुछ नहीं बिगाड सकता था !!!!!!
पहली बात-वह कैद मे था । दूसरी बात नुसरत-तुगलक उसके सामने नहीं थे । पर्दे पर केवल उनकी तस्वीरें थीं ।
काफी देर से खामोश विजय ने कहा…"प्यारे नुसरत भैया और तुगलक बहन ।"
“क्या चाहते हो कहन?” नुसरत ने फौरन तुक मिलाई ।
विजय ने भी उसी तुक से जवाब दिया-----" क्यु रहे हो तुम हमें सहन ? "
"मतलब क्या हुआ बहन ?"
"मतलब ये हुआ कि पिछली बार तुमने कसम खाई थी कि जेसे ही मैं या दिलजला तुम्हारे सामने पड़ेगे तुम फोरन से पहले हमें गोली मार दोगे त्ताकि किसी किस्म की बाजी पलटने का मौका ही न मिले । फिर कैद क्यों किया है हमे? पूरी क्यों नहीं करते अपनी कसम? इस ववत तुम्हें हमें गोली मारने से कोई नहीं रोक सकता ।"
"माकूल । एकदम माकूल बात कही है बडे़ मियां ने । तुगलंक ने नुसरत से कहा----" मैनें तुमसे कहा ही था ---- कैद वैद करने की जरूरत नहीं है इन्हें । सीघी- सीधी गोली मार खत्म करो किस्सा । न वांस रहेगा न बांसुरी बजेगी । वेसे भी वे बेचारे खुद गोली खाने के लिए फड़फड़ा रहे हैं । पता नहीं तुझे ही क्या बीमारी लग गई है?"
'यै बात तो तू मानता है न कि शोहरत का असर जरूर जरूर पड़ता है ।"
" बिल्कुल मानता हूं ।
"वही हुआ मेरे साथ । तू जानता ही है…पिछले दिनों हम उस पीले चेहरे वाले मरियल से मुर्दे सिंगही के साथ रहे थे । बचपन से उसे एक ही मीनिया है---- दुनिया जीतनी है और विजय के जीते जी ही जीतनी है । उसके उसी मीनिया ने मुझे भी जकड लिया है । इनके प्रधानमंत्री को मारना है तो इनकी आखों के सामने मारना है । उसके बाद इन्हें भी. .ये मेरे सामने हैं क्या, केवल भुनगे । एक-एक गोली खाएंगे और चित्त हो जाएंगे" । …
"एक बात पता है न तुझे ?"
" पता है या नहीं, यह तो बाद' ही में बताऊंगा ! पहले बात तो पूछ !"
"बो मुर्दा साला आज तक केवल अपने मीनिया के कारण ही विश्वासपात्र नहीं बन सका । हर बार बडे मियां ने अड़गी मार दी ।
"बो मुर्दा साला आज तक केवल अपने मीनिया के कारण ही विश्वासपात्र नहीं बन सका । हर बार बडे मियां ने अड़गी मार दी । मीनिया न होता तो अब तक कई बार विश्व सम्रााट बन-बिगड़ चुका होता ।"
"कहना क्या चाहता है?”
“कहीं वहीं हश्र न हो तेरा । न राम मिला न रहीम ।"
“तेरे मन में यह डर इसलिए है तू मेरी तरह मर्द नहीं है । बहन ठहरा मेरी । मुझमें और इस मुर्दे में यही फर्क है । मर्द होता तो समझता-इनके जीवित रहते, इनकी आंखों के सामने इनके प्रधानमंत्री को मारूंगा तो कितना नाम होगा मेरा ।"
"चल एक वार को 'इनके रहते' बाली बात तो मेरी समझ में आती है मगर "इनकी आंखों के सामने' वाली बात बिल्कुल पल्ले नहीं पड़ रही । प्रधानमंत्री महोदय को मारना स्टेडियम में है और ये बेचारे यहां पड़े सड़ रहे है । फिर भला तू उनकी हत्या इनकी 'आंखों के सामने कैसे करेगा?"
"देखना चाहता है?"
"दिखा ।"
"ये देख! हैं, कहने के साथ नुसरत तुगलक पर्दे से गायब हो गए । अव पर्दे पर सोडियम नजर जाने लगा था । वहाँ जोर-शोर से सभा की तैयारियां चल रही थी । पर्दे पर स्टेडियम का हर हिस्सा दिखाया …जाने लगा । साथ ही कांमेटेटर की तरह नुसरत की आवाज गूंज रहीं थी ---" यह है वह स्टेडियम जहाँ हिन्दुस्तान के प्रधानमंत्री और हमारे ' मुल्क के राष्ट्रपति संयुक्त रूप से जनता को सम्बोधित कंरेगें । यह स्टेडियम उस वक्त भी इन्हें इसी तरह पर्दे पर दिखाया जाएगा जिस वक्त यह भीड से खचाखच भरा होगा । उस वक्त इस तरह, ठीक इस तरह कैमरा मंच पर फिट होगा। जिस वक्त प्रधानमंत्री महोदय के प्राण'-पखेरू उड़ेगे । बोला उस वक्त ये सब कुछ अपनी आंखो से देख रहे होंगे या नहीं?"
"रहेगा तू धीवट का धीवट ही ।" अब पर्दे तुगलक बोलता हुआ नजर आया-----"छोटी-सी बात इसको लम्बी करके समझाने की क्या जरूरत थी । एक सैटेस में बता देता कि तूने इनके लिए "लाइव टेलीकास्ट' का इंतजाम कर रखा है ।"
"मैंने सोचा तू कूठ मगज है । केवल इतना कह देने से बात शायद तेरे भेजे में न घुसे ।"
" अब ये भी बता दे , तेरा मारकेश उसे मारेगा कैसे ???"
"ये जो अभी--अभी तूने मारकेश को 'मेरा मारकेश' कहा इस पर मुझें सखत ऐतराज है । दुनिया को कभी किसी कीमत पर यह फ्ता नहीं लगेगा कि मारकेश से हमारा कोई मतलब है या हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री की हत्या के पीछे पाकिस्तान है । पाकिस्तान वेचारा तो अपनी पूरी ताकत से अपने राष्ट्रपति और मेहमान प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था में जुटा नजर जाएगा । जो होगा ऐसी ट्रिक से होगा कि हमारे पास मुल्क की तरफ़ से कोई उंगली नहीं उठा सकेगा ।"