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राशिद ने परली साईड की खिड़की बंद की, दरवाजा वापस बंद किया और बत्ती जला दी। मैं उन दोनों को ही घूरे जा रही थी.. उसने मुझे कंधे से पकड़ कर तख्त पर बिठा दिया और देखने लगा।
“अब पूछो.. क्या पूछना चाहती हो?” उसने मेरी आँखों में झांकते हुए कहा।
“आखिर तुम लोग यहां नंगे हो कर यह कर क्या रहे थे?”
“तुम्हें नहीं पता? तुम सच में जानना चाहती हो या घर में दूसरों को बता कर हमारी पिटाई कराना चाहती हो.. पहले यह फैसला कर लो।”
मैं सोच में पड़ गयी.. पिटाई का अंदेशा था तो जो वह कर रहे थे, जरूर वह गलत ही था, क्योंकि पहले शाहिद शाजिया के केस में भी इसीलिये तमाशा हुआ था।
लेकिन उस तमाशे से भी उसे उसके सवाल का जवाब कभी मिल नहीं पाया था और इस बार भी उम्मीद नहीं कि मिल जाये.. तब फिर?
“बताओ.. क्या कर रहे थे?” अंततः मैंने जानने में दिलचस्पी दिखाई।
“प्रॉमिस करती हो कि कभी किसी को कहोगी नहीं। न कहने और चुप रहने के और भी फायदे हैं जो बाद में सामने आयेंगे।”
“ओके.. नहीं कहूंगी। अब बताओ।”
“देखो.. तुम्हें पता है, जो तुम्हारी टांगों के बीच में जो सुसू करने के लिये मुनिया होती है, उसे पुसी कहते हैं।”
“तो?”
“जब लड़की जवान हो जाती है.. तो किसी-किसी टाईम उसकी मुनिया में अंदर की तरफ बड़े जोर की खुजली मचती है, इतनी तेज कि लड़की परेशान हो जाती है।”
“भक्क.. उल्लू न बनाओ, मुझे तो न हुई कभी ऐसी खुजली?”
“नहीं हुई तो होयेगी।” इतनी देर में पहली बार अहाना बोली, जिसके चेहरे पर अब राहत के भाव दिखने लगे थे- पर यह सबको ही होती है।
“लड़कों को भी?” मैंने सख्त हैरानी से कहा।
“और क्या.. लड़कों को भी। लड़कों की मुनिया बाहर निकली होती है तो वह उसे रगड़ कर खुजला सकते हैं लेकिन लड़की की मुनिया तो अंदर की तरफ होती है तो वह लड़कों की तरह नहीं खुजा सकती न।” राशिद ने आगे कहा।
“तत… तो क्या.. उस दिन सुहैल को भी वह खुजली हो रही थी जब..”
“और क्या.. वह खामखाह में अपनी मुनिया थोड़े रगड़ रहा था।” इस बार अहाना ने कहा।
“लल… लेकिन तब पूछा था तो क्यों नहीं बताया था।”
“क्योंकि तब ठीक से समझा नहीं सकती थी.. अब राशिद हैं तो डेमो दे के समझा सकते हैं।”
“हां क्यों नहीं.. देखो।”
और राशिद ने अपनी इलास्टिक वाली लोअर नीचे खिसका कर अपना लिंग बाहर निकाल लिया.. ठीक मेरे सामने और मैं बड़े गौर से उसे देखने लगी।
वह भी उस पागल की तरह अर्धउत्तेजित अवस्था में था.. लेकिन राशिद ने उसे हाथ से सहलाया तो वह एकदम टाईट हो गया। डेढ़ इंच की मोटाई रही होगी और छः से सात इंच के करीब लंबाई थी।
“अब पूछो.. क्या पूछना चाहती हो?” उसने मेरी आँखों में झांकते हुए कहा।
“आखिर तुम लोग यहां नंगे हो कर यह कर क्या रहे थे?”
“तुम्हें नहीं पता? तुम सच में जानना चाहती हो या घर में दूसरों को बता कर हमारी पिटाई कराना चाहती हो.. पहले यह फैसला कर लो।”
मैं सोच में पड़ गयी.. पिटाई का अंदेशा था तो जो वह कर रहे थे, जरूर वह गलत ही था, क्योंकि पहले शाहिद शाजिया के केस में भी इसीलिये तमाशा हुआ था।
लेकिन उस तमाशे से भी उसे उसके सवाल का जवाब कभी मिल नहीं पाया था और इस बार भी उम्मीद नहीं कि मिल जाये.. तब फिर?
“बताओ.. क्या कर रहे थे?” अंततः मैंने जानने में दिलचस्पी दिखाई।
“प्रॉमिस करती हो कि कभी किसी को कहोगी नहीं। न कहने और चुप रहने के और भी फायदे हैं जो बाद में सामने आयेंगे।”
“ओके.. नहीं कहूंगी। अब बताओ।”
“देखो.. तुम्हें पता है, जो तुम्हारी टांगों के बीच में जो सुसू करने के लिये मुनिया होती है, उसे पुसी कहते हैं।”
“तो?”
“जब लड़की जवान हो जाती है.. तो किसी-किसी टाईम उसकी मुनिया में अंदर की तरफ बड़े जोर की खुजली मचती है, इतनी तेज कि लड़की परेशान हो जाती है।”
“भक्क.. उल्लू न बनाओ, मुझे तो न हुई कभी ऐसी खुजली?”
“नहीं हुई तो होयेगी।” इतनी देर में पहली बार अहाना बोली, जिसके चेहरे पर अब राहत के भाव दिखने लगे थे- पर यह सबको ही होती है।
“लड़कों को भी?” मैंने सख्त हैरानी से कहा।
“और क्या.. लड़कों को भी। लड़कों की मुनिया बाहर निकली होती है तो वह उसे रगड़ कर खुजला सकते हैं लेकिन लड़की की मुनिया तो अंदर की तरफ होती है तो वह लड़कों की तरह नहीं खुजा सकती न।” राशिद ने आगे कहा।
“तत… तो क्या.. उस दिन सुहैल को भी वह खुजली हो रही थी जब..”
“और क्या.. वह खामखाह में अपनी मुनिया थोड़े रगड़ रहा था।” इस बार अहाना ने कहा।
“लल… लेकिन तब पूछा था तो क्यों नहीं बताया था।”
“क्योंकि तब ठीक से समझा नहीं सकती थी.. अब राशिद हैं तो डेमो दे के समझा सकते हैं।”
“हां क्यों नहीं.. देखो।”
और राशिद ने अपनी इलास्टिक वाली लोअर नीचे खिसका कर अपना लिंग बाहर निकाल लिया.. ठीक मेरे सामने और मैं बड़े गौर से उसे देखने लगी।
वह भी उस पागल की तरह अर्धउत्तेजित अवस्था में था.. लेकिन राशिद ने उसे हाथ से सहलाया तो वह एकदम टाईट हो गया। डेढ़ इंच की मोटाई रही होगी और छः से सात इंच के करीब लंबाई थी।