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Adultery अधूरी हसरतों की बेलगाम ख्वाहिशें

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे राशिद ने हम दोनों को अपने कमरे में बुलाया और कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म दिखाने लगा।

अब आगे पढ़ें..

तब नहीं पता था, आज मैं जानती हूँ कि वो टिपिकल ब्लू फिल्म थी.. जिसमें तीन अलग जोड़ों की फिल्म थीं। एक सिंगल जोड़े की थी.. फिर एक मर्द दो औरतों के साथ करता है और तीसरी में एक औरत के साथ दो मर्द करते हैं। यह सब कुछ सिरे से मेरे लिये नया था और काफी हद तक हैरान करने वाला था, लेकिन उसने सवाल करने से मना किया था तो कुछ पूछने या हैरानी जाहिर करने के बजाय होंठ भींचे बैठी रही।मेरे लिये यह देखना बड़ा अजीब था कि जिस लिंग से पेशाब किया जाता था,

मेरे लिये यह देखना भी बड़ा आश्चर्यजनक था कि जिस योनि से सिर्फ पेशाब ही नहीं जारी होती थी, बल्कि माहवारी में गंदा खून भी निकलता था, उसे यूँ चाकलेट की तरह चाटा जा रहा था। और सबसे अजीबोगरीब चीज तो यह थी कि चूतड़ों के बीच जिस छेद से हगा जाता था, उस छेद में भी लिंग घुसा कर अंदर बाहर किया जा रहा था।

साथ ही यह देख कर भी कि कैसे अपना सफेदा निकालते वक्त लड़के अपना लिंग लड़की की योनि से निकाल कर उसके चेहरे पर ले आते और लड़की उनके वीर्य को ऐसे मुंह में ले लेती जैसे कोई बहुत जायके की चीज हो।

छी छी…

मेरी मनःस्थिति दोनों अच्छी तरह समझ रहे थे और इसीलिये दोनों ही मुस्करा रहे थे।

फिर फिल्म खत्म होने पर दोनों मेरे सामने हो गये- किन-किन चीजों पर तुम्हें हैरानी हुई, बताओ.. हम तुम्हें कनविंस करते हैं।

“दोनों अंग कैसे गंदे होते हैं.. उन्हें कैसे चूसा चाटा जा सकता है।”

“गंदगी दिमाग में होती है, वर्ना पीने वाले तो गौमूत्र भी श्रद्धा से पीते हैं और कभी इंसान फंस जाये तो उसे भी पीना पड़ता है। ऊपर स्पेस में जो एस्ट्रोनाट रहते हैं, वे भी अपना पेशाब ही शुद्ध करके पीते हैं। जरूरत साफ सफाई की है। अगर दोनों के अंग साफ हैं तो चूसने चाटने में क्या बुराई?”

“पर लड़की की मुनिया से तो वह वाला खून भी…”

“तो क्या हुआ.. जिस दौरान खून बहता है, उस दौरान न सेक्स करते हैं न ओरल। फारिग होने के बाद लड़की साफ सुथरी हो जाती है.. कोई उसमें खून लगा तो नहीं रह जाता न?”

“और पीछे से.. छी

“अच्छा तुम्हें समलैंगिकों के बारे में पता है, जो एक दूसरे से ही सेक्स करते हैं। बताओ लड़का लड़के से कैसे सेक्स करेगा, दोनों के पास तो एक जैसे मुनिया है।”

“उनकी मजबूरी हो सकती है पर लड़की के साथ..”

“लड़की को भी मजा ही आता है, मजबूरी वाली क्या बात है। आखिर इसमें मजा ही आता है तभी एक लड़का, लड़का हो कर भी दूसरे लड़के के साथ इसी सेक्सुअल रिलेशन के लिये पूरी दुनिया का धिक्कार भी झेल लेता है।”

“पर फिर भी.. वहां से निकली मुनिया को लड़की कैसे चाट.. आक्क!”

“अरे तुम अपने जैसा मत सोचो यार.. यह एक फिल्म के लिये एक्ट कर रहे हैं और एक्ट से पहले छेद की अच्छे से सफाई की जाती है, यह मत सोचो कि वहां गू लगा होगा। उन्हें पहले ही क्लीन कर लिया जाता है।”

“और वह जो मुंह में ले रही थीं सफेदा.. वह ठीक था?”

“ठीक गलत लेने वाले जानें.. लेने वाले लेते ही हैं और वह कोई पेशाब नहीं होता, पेशाब से अलग एक सब्सटेंस होता है। तुम्हें हो सकता है कि खराब लगे, लेकिन जो बार-बार इसे मुंह में ले रही हैं, उन्हें यह भी टेस्टी लगने लगता है।”

“खैर.. अब? अब क्या करोगे?”

“बिस्तर पे आओ।”

हम तीनों बिस्तर पे आ गये.. राशिद ने कमरे की मेन बत्ती पहले ही बुझा रखी थी, बस कंप्यूटर की स्क्रीन की रोशनी हो रही थी।

“अब सब लोग कपड़े उतारो।” राशिद ने कपड़े उतारने की पहल करते हुए कहा।

“मम-मैं क्यों?”

“क्योंकि तुम्हें भी मजा लेना है। मुझसे शर्माओ मत.. अहाना बता चुकी है मुझे सब, जो तुम लोग करती हो। डरो मत.. तुम्हारा दिल नहीं करेगा तो मुनिया नहीं घुसाऊंगा.. बस ऐसे ही मजे ले लेना।”

“तो कपड़े क्यों उतारूं?” मैंने फिर भी जिद की।

“तो ठीक है मत उतारो.. ऐसे ही मजे लो।”

मैं एक ब्लू फिल्म देखने के बाद दिमागी रूप से इस हालत में बिलकुल भी नहीं थी कि उसकी मर्जी के खिलाफ जाऊं.. लेकिन फिर भी मेरी शर्म, मेरी अना, मेरा गुरूर मुझे बेपर्दा होने से रोक रहा था।

पर मेरी मुश्किल अहाना ने आसान कर दी.. वे दोनों नंगे हो गये तो अहाना ने जबरन मेरा कुर्ता उतार दिया और उसके कहने पे राशिद ने मेरी सलवार उतार दी।
 
दिखावे के तौर पर मैंने थोड़ी नाराजगी जरूर दिखाई, लेकिन उन पर कोई फर्क न पड़ा।

“अब तुम देखो और सूंघो.. इसमें क्या गंदा है?” राशिद ने अपना लिंग मेरे चेहरे के सामने कर दिया।

एकदम साफ सुथरा कुकुरमुत्ते जैसा लिंग, आगे चिकनी चमकीली छतरी सी और उससे उठती अजीब सी महक, जो गंदी तो बिलकुल भी नहीं थी.. उल्टे उत्तेजित कर रही थी।

मैं बहुत ज्यादा गौर से उसे देख या सूंघ पाती कि अहाना ने उसे लपक कर अपने मुंह में ले लिया और मेरे चेहरे के सामने ही चपड़-चपड़ चूसने लगी। वह लप-लप राशिद के लिंग को चूसती चाटती रही और वह लगभग लकड़ी की तरह सख्त हो गया।

“लो.. अब तुम देखो।” फिर उसने अपने मुंह से निकाल कर मेरे होंठों की तरफ बढ़ाया।

“नन-नहीं.. मम-मैं नहीं!” मैंने चेहरा पीछे खींचा।

उसने वहीं पड़ा अपना दुपट्टा उठाया, और उससे रगड़ कर राशिद के अपने थूक से गीले लिंग को साफ कर दिया।

“ले अब चूस.. देख तो चूस के, मजा आयेगा।” अहाना एक हाथ मेरे सर के पीछे लगा कर दूसरे हाथ से उसका लिंग मेरे होंठों से लगाती हुई बोली।

उसे मेरी मनःस्थिति अच्छी तरह पता थी कि मैं सिर्फ ऊपर से इन्कार कर रही थी… असल में कहीं न कहीं अंदर से मैं वह सब करना चाहती थी, जो किया जा सकता था।

दिखावे के लिये थोड़ी देर मैं होंठ बंद किये रही लेकिन जल्दी ही उसकी महक ने मुझे इतना बेचैन कर दिया कि मैंने होंठ खोल दिये और गोश्त की लकड़ी जैसे लिंग को अंदर आ जाने दिया।

गर्म और सख्त गोश्त.. जिसका शिश्नमुंड लिजलिजा सा था जिसे मैं तालू और जीभ से दबा सकती थी। कोई जायका तो नहीं था, लेकिन फिर भी अच्छा लगा।

पहले उन्हें देखती, झिझकती, धीरे-धीरे मुंह चलाती रही उसके लिंग पर, लेकिन फिर आखिर शर्म खत्म हो ही गयी और दोनों को भाड़ में झोंक कर उसे तन्मयता से चूसने लगी।

तब अहाना ने उसे मेरे मुंह से निकाल लिया और खुद चूसने लगी।

“अब बस करो.. ऐसा न हो कि मेरा मुंह में ही निकालने का मन होने लगे।” राशिद ने उसके मुंह से लिंग निकालते हुए कहा।

“फिर?” मैंने मासूमियत से उन्हें देखा।

उसने अहाना को चित लिटा कर उसकी टांगें फैला लीं और उल्टे हाथ से अहाना की योनि फैला कर सीधे हाथ की बीच वाली उंगली योनि के अंदर धंसा दी।

इतना तो हम दोनों बहनों ने भी पहले किया था लेकिन राशिद ने जो इससे आगे किया, वह यह था कि वह चेहरा अहाना की योनि के एकदम पास ले गया और जीभ से उसकी योनि के ऊपरी सिरे को छेड़ने लगा।

मेरे रौंगटे खड़े हो गये.. मैं गौर से उसे देखने लगी।

तो वह फिल्म मुझे इसलिये दिखाई गयी थी ताकि मैं यह सब देख कर असहज न महसूस करूँ.. और वह निर्विघ्न अपने मन की कर सकें।

“क्या देख रही है.. मेरे दूध पी न!” अहाना ने कुछ झुंझलाते हुए मुझे अपने ऊपर खींच लिया।

उस तरफ से ध्यान हटा कर मैं उसकी घुंडियों को चुसकने चुभलाने लगी।

वह बआवाजे बुलंद सिसकारती रही।

करीब दस मिनट बाद वह हट गया और अहाना की सिसकारियां थम गयीं। इससे पहले हम कुछ समझ पाते या मैं संभल पाती.. उसने मेरी जांघों पर पकड़ बना ली।

और उन्हें फैलाते हुए अपना मुंह उनके बीच डाल दिया, फिर उसकी जीभ का गीला स्पर्श मैंने अपने उसी उभरे हुए मांस पर महसूस किया जो योनि के ऊपरी सिरे पर था और दीवारों से ढका रहता था।

मुझे करेंट सा लगा, मैं तड़क कर हट जाना चाहती थी लेकिन अहाना ने स्थिति भांपते हुए मुझे पकड़ लिया और मेरे ऊपरी हिस्से पर लदते हुए अपने दूध से मेरे दूध रगड़ने लगी।

“महसूस तो कर के देख.. कितना मजा आता है।” उसने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा।

और वाकयी महसूस करते मेरे दिमाग में चिंगारियां छूटने लगीं.. नीचे “लप-लप” मेरी योनि में राशिद मुंह चला रहा था और मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि मैं कहीं उड़ी जा रही होऊं, जहां बस मस्ती है, मजा है, नशा है।

वह कभी मेरी योनि की साइड वाल को पकड़ कर चूसता खींचता, कभी नीचे छेद में अपनी जुबान घुसा देता, कभी ऊपर मांस के हुड को चुभलाने लगता।

और मैं महसूस कर सकती थी कि पूरी योनि पानी से भरी जा रही थी और मैं बही जा रही थी।

फिर मैं देख ही न पाई कि कब वह उठ बैठा और अपना लिंग मेरी योनि से सटा कर अंदर ठूंस दिया। मेरी हल्की सी चीख निकल गयी, लेकिन अहाना ने दबा रखा था कि छिटकने का मौका ही नहीं सुलभ था।

इतनी ज्यादा गीली होकर बहती हुई, चिकना चुकी योनि कैसे भी उसके बड़े बैंगन जैसे लिंग को रोक पाने में सक्षम नहीं थी.. फिर उसने लिंग को लार से भी चिकना किया ही होगा।

वह योनि की कसी दीवारों पर दबाव डालता अंदर तक धंस गया और दीवारें चरमरा कर रह गयीं। दर्द हो रहा था, यह अपनी जगह सच था लेकिन दिमाग पर चढ़ा नशा इतना गहरा था कि दर्द पर हावी हुआ जा रहा था।

फिर वह खुद भी लद गया मुझपे और उसने अहाना को हटा दिया.. दोनों हाथों से पहले सख्ती से मेरे दोनों दूधों का मर्दन किया और फिर उसके होंठ मेरे होंठों के पास आ गये।

मुझे उसके मुंह से सिगरेट की महक आई लेकिन वह भी भली लगी।

फिर उसने मेरे होंठों से अपने होंठ जोड़ दिये। मैंने चेहरा हटाने की कोशिश की लेकिन उसने दोनों हाथ ऊपर करके चेहरा पकड़ लिया और मेरे होंठों पर अपनी पकड़ बना ली।

यह मेरे जीवन का पहला मर्दाना चुंबन था।

कुछ देर मैं बेहिस सी असम्बंधित बनी रही लेकिन नीचे योनि में घुसे उसके लिंग की मादक गुदगुदाहट ने ज्यादा देर बेहिस न रहने दिया और फिर मैंने होंठ खोल दिये। अब वह मेरे होंठों को चूस रहा था तो मैं उसके होंठों को चूस रही थी.. उसने मेरे मुंह में जुबान घुसाई तो मैंने उसके मुंह में जुबान घुसा दी जिसे वह चूसने लगा।

जब मैं वापस अच्छे से गर्म हो गयी तब वह उठ कर उस पोजीशन में आ गया जिसमें सामने बैठ कर योनिभेदन करते हैं.. इसमें उसका लिंग “पक” करके मेरी योनि से निकल गया था।

अब फिर अहाना अधलेटी सी हो कर मेरे एक दूध की घुंडी को होंठों से खींचती सीधे हाथ से मेरी गीली बही हुई योनि को सहलाने लगी।

जबकि राशिद ने फिर अपनी मुनिया की टोपी अंदर धंसा कर मेरी जांघों को ऊपर की तरफ दबाते हुए अंदर ठेलने लगा.. जिसे मैं साफ महसूस कर सकती थी।

कसाव बहुत ज्यादा था तो मैं अभी उतनी सहज नहीं थी, लेकिन यह भी सच था कि अब मुझे बेहद मामूली दर्द हो रहा था।

अंदर तक धंसा कर उसने वापस फिर पूरा ही बाहर निकाल लिया जो मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगा।

लेकिन वह शायद इस तरह मेरी योनि को अपने लिंग के लिये सहज कर रहा था। धीरे-धीरे एकदम जड़ तक घुसाते और फिर वापस धीरे-धीरे करते एकदम बाहर निकाल लेता।

इस तरह दस बारह बार करने पर मैंने महसूस किया कि मेरी कसी हुई योनि में इतनी जगह बन गयी थी कि वह आराम से अपना लिंग अंदर बाहर कर सकता।

फिर उसने अहाना को हटा दिया और जैसे वन ऑन वन फाइट के मूड में आ गया। अब मैं उसे देख रही थी और वह धीरे-धीरे धक्के लगा रहा था और उसकी बैंगन जैसी मुनिया मेरी मुनिया में गहरे तक अंदर बाहर हो रही थी और इस अंदर बाहर होने में मुझे वह मज़ा आ रहा था जिसे बताने के लिये मेरे पास शब्द नहीं!

बस यही दिल कर रहा था कि यह सिलसिला यूँ ही चलता रहे और मैं क़यामत तक यूँ ही धक्के खाती रहूँ।
 
“अब बोल.. मज़ा आ रहा है या नहीं?” अहाना ने मेरी घुंडी मसलते हुआ पूछा।

“हूँ..” मैंने बस हुंकार ही भरी।

“खुजली मिट रही है या नहीं तुम्हारी मुनिया की?” आगे रशीद ने पूछा।

मैंने मुस्करा कर चेहरा साइड में कर लिया और वह दोनों धीरे से हंस पड़े। कमरे में भले पंखा चलने की आवाज़ हो रही हो लेकिन मेरी योनि से उभरती वो ‘फच-फच’ की मधुर ध्वनि मेरे कानों में रस घोल रही थी।

फिर शायद उन दोनों में कुछ इशारा हुआ और राशिद ने मेरी योनि से अपना फुन्तडू बाहर निकल लिया और उसी पल में अहाना किसी चौपाये की पोजीशन में हो गयी।

उसने अपने अगले हिस्से को दूध समेत बिस्तर से सटा लिया और चूतड़ों को इस हद तक हवा में ऊपर उठा दिया कि वो घुटनों के बल बैठे राशिद के लिंग के ठीक सामने एडजस्ट हो सकें।

और फिर जैसे अभी थोड़ी देर पहले फिल्म में देखा था, ठीक उसी अंदाज़ में वो अपनी मुट्ठी में अहाना के दोनों चूतड़ दबोच कर और अपना लिंग पीछे की तरफ से उसकी योनि में घुसा कर योनिभेदन करने लगा।

अब मैं उस अवस्था में पहुँच चुकी थी कि मुझे कुछ भी ख़राब, बुरा, अतिवाद या अजीब नहीं लग रहा था बल्कि सबकुछ ही अच्छा लग रहा था और मैं चाहती थी कि वो सब मेरे साथ हो।

राशिद के जोर-जोर से धक्के लगते रहे, अहाना की आहें निकलती रहीं और मैं उत्तेजित सी अपने हाथ से अपनी योनि सहलाते उन्हें देखती रही।

थोड़ी देर बाद राशिद ने मुझे इशारा किया कि मैं भी उसी पोजीशन में हो जाऊं.. अँधा क्या चाहे, दो आँखें ही न। उस वक़्त मेरी हालत वैसी ही हो रही थी।

मैंने बिल्ली बनने में देर नहीं लगायी।

और जब पीछे से उसका लिंग जगह बनाता योनि में घुसा तो ऐसे लगा जैसे खीरा-ककड़ी चटकी हो और ऐसा मज़ा आया जैसे जन्नत मिल गयी हो।

फिर उसने मेरे चूतड़ों को भी उसी तरह मसलते हुए धक्के लगाने शुरू किये। मेरे दिमाग में चिंगारियां छूटने लगीं जबकि अहाना साइड में लेटी हमे देखती अब आहिस्ता-आहिस्ता अपने दूध सहला रही थी.. उसके होंठों पर मुस्कराहट थी लेकिन मैं इस वक़्त सिर्फ अपने मज़े पर एकाग्र होना चाह रही थी।

थप-थप का एक कर्णप्रिय संगीत कमरे में पंखे की आवाज़ के साथ मिक्स हो कर गूंजता रहा और मैं जन्नत की सैर करती रही। नशे से मेरी आँखें तक मुंद गयीं थीं।

थोड़ी देर बाद यह सिलसिला फिर थमा और राशिद मुझसे अलग हो गया। वह बेड से नीचे उतर गया और अहाना को चित लिटा कर उसे एकदम किनारे खींच लिया, उस दिन की तरह.. और खुद नीचे फर्श पर बैठ उसकी जांघों में पकड़ बनाये मुंह से उसकी योनि पहले की तरह चाटने लगा।

“रज्जो.. मेरे दूध मसल और पी।” अहाना ने ऐंठते हुए कहा।

मैं पास आ गयी और एक हाथ से उसका एक दूध सहलाने मसलने लगी जबकि दूसरे की घुंडी मुंह में लेके चुभलाने लगी और वह कमान की तरह तन कर सिसकारने लगी।

“डालो अब।” फिर वह बोल पड़ी।

और राशिद उठ कर खड़ा हो गया। अपना समूचा बैंगन उसने गचाक से अहाना की मुनिया में पेल दिया और धडाधड़ धक्के लगाने लगा।

“ऐसे ही.. और जोर से.. और.. आह.. ऐसे ही.. आह.. आह.. मैं गयी… आह.. आह.”

ऐसे ही अनियंत्रित अंदाज़ में बड़बड़ाती अहाना एकदम तन गयी। बिस्तर की चादर उसने नोच डाली और गुर्राती हुई शिथिल पड़ गयी.. उसकी हालत से मैं समझ सकती थी कि वह आर्गेज्म तक पहुँच गयी थी।

“अब तुम आओ रज्जो, ध्यान रखना यह इस राउंड का लास्ट है.. मैं बह जाऊं उससे पहले ही तुम्हे मंजिल तक पहुँच जाना है।” राशिद ने बेड के दूसरे सिरे की तरफ मुझे उसी अंदाज़ में खींचते हुए कहा।

मैंने सहमति में सर हिलाया।

वह नीचे बैठ कर अब अहाना की तरह मेरी योनि भी चाटने लगा और मैं समझ न सकी कि जो मुझे थोड़ी देर पहले “छी” कहने लायक गन्दा लग रहा था, आखिर उसमे इतना मज़ा क्यों आता है।

साथ ही उसने एक उंगली मेरे छेद में उतार दी और अंदर बाहर करने लगा।

“उफ़!”

मैं बता नहीं सकती कि कैसा अनुभव था.. दिमाग की नसें खिंचने लगीं और सारे शरीर में एक अजीब आनंददायक लहर दौड़ने लगी।

और जब मेरी बर्दाश्त से बाहर हो गया तो मुझे भी अहाना की तरह आखिर बोलना ही पड़ा- करो अब.. बर्दाश्त नहीं हो रहा।

वह उठ खड़ा हुआ और फिर एक तेज़ मस्ती भरी करह को मैं अपने होंठों से आज़ाद होने से न रोक सकी जब एक गर्म गोश्त की मीनार मेरी योनि में जगह बनाती अंदर तक धंस गयी।

योनि पहले से पानी-पानी हो रही थी, वो भचाभच अपनी मुनिया भोंकने लगा और मैं जोर-जोर से सिसकारने लगी।

वैसे ही तेज़ धक्के लगते रहे और मैं कराहती सिसकारती रही.. शायद उन पलों में मैं भी अहाना की तरह कुछ न कुछ बोल ही रही थी लेकिन वह खुद मेरे ही समझ में नहीं आ रहा था और न ही मैं उस तरफ ध्यान दे पाने की हालत में थी।

और फिर वो मरहला भी आया जब दिमाग में एकदम से सनसनाहट भर गयी.. शरीर एकदम अकड़ गया और योनि जैसे बह चली। लेकिन यहाँ वह अहाना की तरह थमा नहीं बल्कि उसे अपना भी निकालना था तो चलता रहा और थोड़ी देर के बाद मैंने महसूस किया कि उसकी मुनिया फूल रही थी और कुछ गर्म-गर्म मेरी योनि में भरने लगा।

वह मेरे ही ऊपर गिर कर भैंसे की तरह हांफने लगा।

यह हमारे पहले राउंड का अंत था जहाँ हम तीनों ही अपनी मंजिल तक पहुंचे थे..

इसके बाद अगले दो घंटे में दो और राउंड चले थे जहाँ हमने उस देखी हुई फिल्म की तरह और भी सारे आसन आजमाये थे और कैसा भी मज़ा बाकी न रखा था.. बस एनल सेक्स को छोड़ कर।
 
पिछले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे एक मौका मिलने पर हम राशिद के कमरे तक गये और वहां ब्लू फिल्म दिखा कर राशिद हम दोनों के साथ उसी अंदाज में सेक्स किया।

अब आगे पढ़ें:

उस रात तीन बजे जब वापसी की तो एक चीज अजीब हुई कि अपनी साइड के जीने के दरवाजे में हमने जो अद्धा फंसाया था, वह अपनी जगह से हटा मिला, हालाँकि दरवाजा उसी तरह बंद था।

इसका कोई मतलब तब हम नहीं समझ पाये थे, लेकिन करीब चार दिन बाद शाम को जब मैं छत पर टहल रही थी तब समर आ गया और उसकी बातों से पता चला कि उस रात क्या हुआ था।

उम्र में वह मुझसे एक साल बड़ा था, घर में सबसे ज्यादा लंबा चौड़ा था और शक्ल में भी ठीक ही था। सना उससे बड़ी थी और यह इस बार इंटर में गया था।

छत पे उस घड़ी कोई और नहीं था.. यह कोई खास बात नहीं थी। घर के बाकी लोग ऊपर कम ही आते थे, बस कभी मैं या सना ही ऊपर टहलते थे।

“एक फिल्म दिखाऊं तुझे?” उसने गौर से मेरी आँखों में झांकते हुए कहा।

“कैसी फिल्म?” मैं उलझन से उसे देखने लगी।

उसने हाथ में पकड़े मोबाइल जो कि एन सेवेंटी था, पर कोई फिल्म लगा कर मुझे पकड़ा दी।

अंधेरे में कोई फिल्म थी शायद.. लेकिन जब कंप्यूटर की मद्धम रोशनी में चमकते चेहरों में अपना चेहरा पहचाना तो आंखें फैल गयीं, मेरे दिल की धड़कनें रुकते-रुकते बचीं। xkkZMq.gif

वह अजीब अंदाज में हंसने लगा- जब इंसान मजे लेने के लिये पगलाया हो तो जनरल बातों पर भी ध्यान नहीं देता। उस रात तुम लोगों ने यह इंतजाम तो कर दिया कि कोई नीचे से न आ सके लेकिन यह ध्यान न दिया कि कोई पहले से ऊपर हो सकता था।

“मतलब?” मैं भौंचक्की सी उसे देखने लगी।

“मैं ऊपर कमरे में ही था और तुम्हारे आगे ही आया था, लेकिन इससे पहले कि पंखा बत्ती जलाता, तुम दोनों खुसुर फुसुर करती पहुँच गयी तो दिलचस्पी से बस यह देखने में लग गया कि तुम लोग कर क्या रही थी। तुम लोगों ने दरवाजे में अद्धा फंसाया और ठंडे पड़े कमरे देख कर अंदाजा लगाया कि यहाँ कोई नहीं था और उधर उतर गयी, तब पीछे से मैं उतरा।

मुझे पता था कि चूँकि उधर राशिद के सिवा कोई था नहीं तो तुम लोग उधर ही हो सकती थी और वही सच साबित हुआ।

पहले मेरा जी चाहा कि मैं भी भंडा फोड़ देने की धमकी दे कर शामिल हो जाऊँ लेकिन राशिद बहुत सुअर है, वह बाद में कैसे भी बदला निकालता ही निकालता, इसलिये बस किसी तरह बाहर की सांकों-दरारों से यह फिल्म बनाई और मुट्ठी मार कर रह गया.. लेकिन सोच लिया था कि जब राशिद पेल सकता है तो मेरे में कौन से कांटे हैं।”

“दिमाग खराब है तुम्हारा?” एकदम से मेरी जान सुलग गयी।

समर- अच्छा.. राशिद चोदे तो ठीक और हम कहें तो दिमाग खराब है। वह रंडियों वाले आसन हैं सब इसमें.. पूरे परिवार को दिखाऊँगा।

मैं- वह चूँकि हम हैं इसलिये हम समझ सकते हैं लेकिन इतनी कम रोशनी में यह कौन हैं क्या है, कोई नहीं समझ पायेगा।

समर- ढक्कन.. जो बातें कर रहे थे ब्लू फिल्म देखने के बाद और चुदने के टाईम, वह सब भी फिल्म में है।

मैं बेबसी से होंठ कुचलती उसे देखने लगी।

समर- वैसे मेरी आदत है लोगों के वीडियो शूट करने की.. एक बार जमीर चच्चा और तेरी अम्मी की भी शूट की थी।

समर- छी काहे की बे.. करने वालों को शर्म नहीं, हम शूट करने वालों को क्यों शर्म हो, पर वह इतनी ओपन नहीं थी, हां फिर भी कभी जरूरत पड़ी तो चच्ची का मुंह बंद रखने के काम जरूर आ सकती है।

“कितने गंदे जहन के हो।” मुझे उससे एकदम नफरत सी होने लगी।

समर- बहुत ज्यादा। पूरा खानदान यह समझता है कि पकड़े जाने के बाद से शाहिद भाई और शाजिया अप्पी का रिश्ता खत्म हो गया था लेकिन आज भी कहीं मौका मिल जाये तो शाहिद भाई चोदने से बाज नहीं आते। ऐसे ही एक मौके की उनकी भी पोर्न क्लिप बना रखी है। th

मेरा जी चाहा कि उसका फोन ही तोड़ दूं.. मैंने हाथ उठाया लेकिन उसने झपट कर फोन छीन लिया।

“इससे कुछ नहीं होगा.. सारी क्लिप्स मेमोरी कार्ड में हैं।”

“तुम आखिर चाहते क्या हो?” मैंने बेबसी से उसे देखते हुए कहा।
 
“तुम दोनों को चोदना और वह भी फुल इत्मीनान से। कुछ इंतजाम बनाता हूँ कि सुहैल को दिन भर के लिये बालागंज, लखनऊ या बाराबंकी भेज दूं.. फिर शाजिया अप्पी को ब्लैकमेल करूँगा कि वह चच्ची को ले के कहीं बाहर टहल आयें रिश्तेदारी में। या सुहैल समेत तुम्हारे ननिहाल ही हो आयें.. तब बताता हूँ।” इतना कह कर वह चला गया।

उसके जाने के बाद मेरे लिये भी वहां रुकना मुश्किल था तो मैं सनसनाता दिमाग लिये वहां से चली आई।

नीचे मैं अपनी उलझन में पड़ी घर के किसी भी काम से दूर रही और रात में जब अहाना ने इसका कारण पूछा तो मैंने बता दिया और सुन कर वह भी सन्न रह गयी।

लेकिन रात तक सोचते-सोचते हमारा दिमाग बदल गया- वैसे एक तरह से सोच तो इसमें बुराई क्या है। तन हम दोनों के पास है, भूख हमें रोज लगती है और राशिद महीने दो महीने में कहीं हमारे हाथ लग पाता है।

“तो इसे चढ़ा लें खुद पे?” मैंने फिर भी प्रतिरोध किया।

“बुराई क्या इसमें.. हमारे लिये जैसे राशिद है वैसे ही यह है। राशिद को समझ हमने चुना था, इसने हमें चुन लिया। फिर राशिद इक्कीस-बाईस साल का है, यह अट्ठरह साल का.. उससे ज्यादा ही कड़क साबित होगा।”

मैं अपने तौर पर विरोध करती तो रही लेकिन खुद से जानती थी कि विरोध का कोई मतलब ही नहीं था। दोनों से हमारा समान रिश्ता था और उससे ज्यादा कोई बात ही नहीं थी.. न ही राशिद से इश्क था।

बहरहाल, मन ही मन मैं भी आखिर इस नये और एक और तजुर्बे के लिये तैयार हो ही गयी और सुबह उठी तो कल रात वाला कोई बोझ बाकी नहीं था।

अब इस बात का इंतजार था कि वह मौका कब आयेगा। इस बीच चूँकि एक ही घर में रहते थे तो समर से मेरा और अहाना का सामना कई बार हुआ लेकिन उसने किसी भी तरह रियेक्ट ही नहीं किया।

हफ्ता गुजर गया.. इस बीच रात में हम दोनों बहनों का खेल भी जारी रहा।

फिर एक दिन अम्मी ने कहा कि वह आज दुबग्गे जा रही हैं तो मुझे अहसास हुआ कि शायद समर का अप्पी पर दबाव काम कर गया है।

दुबग्गे में ननिहाल था हमारा और जब भी अम्मी जातीं तो सुबह की गयी शाम को ही वापस लौटती थीं।

उस दिन भी यही हुआ.. वह सुबह तैयार हो कर शाजिया अप्पी और सुहैल को ले कर चली गयीं और पीछे रह गयीं तो हम दोनों योनियां।

और अगले घंटे में ही शैतान की तरह समर मुसल्लत हो गया था। हालाँकि उसने पूछने पर बताया कि उसे शाजिया अप्पी से बात करने की हिम्मत ही नहीं पड़ी थी और न ही मौका मिल पाया था.. जो हुआ था वह सहज रूप से हुआ था।

चलो जैसे भी हुआ पर कमीने की तो बन आई।

“तो उतार दें कपड़े?” अहाना ने उसे देखते आंख मारते कहा।

“पहले घर ठीक से लॉक कर दो कि कहीं कोई आ न सके और देख लो कि उस दिन की तरह पहले से ही कोई हो न..”

पहले से वहां खैर कौन होता, यह हमारा हिस्सा था, छत की तरह कोई साझी संपत्ति तो थी नहीं। बहरहाल, हमने घर अच्छी तरह लॉक कर दिया।

“तुम लोगों को याद है कि बचपन में हम कैसे गलियारे में पानी में रपट लगाते फिसलते थे।”

हमारे हिस्से में ही एक लंबा गलियारा था जिसके इधर उधर कमरे और किचन थे। सालों पहले जब हम छोटे बच्चे थे तो गैलरी के फर्श को पानी से गीला कर लेते थे और स्लिप हो कर एक सिरे से दूसरे सिरे तक रेस लगाते थे।

लेकिन आज उसे यह क्या सूझी।

“चलो एक बार फिर बच्चे बन जायें.. तब हम निक्कर पहने होते थे, आज बिना निक्कर के ही।”

और इस बेशर्मी की शुरुआत उसी ने की.. एकदम से कपड़े उतार के नंगा हो गया। बाकी उसका जिस्म तो देखा भाला था लेकिन मुनिया ही देखी भाली नहीं थी। वह सुहैल के ही साइज की थी.. मतलब राशिद से थोड़ी कम ही थी और इस बात से जहां मुझे थोड़ी मायूसी हुई, वहीं अहाना को शायद ज्यादा खराब लगा था।

लेकिन उसने हमारी मायूसी पर कोई ध्यान दिये बगैर दो बाल्टी पानी गैलरी में उड़ेल दिया और उसमें फिसल गया।

फिर अहाना ने पहल की.. उसने सारे कपड़े उतारे और वह भी फिसल गयी। मुझे नहीं लगा कि अहाना के नंगे बदन ने समर पर कोई बहुत बड़ा असर डाला हो। हां बच्चे की तरह खुश जरूर हो गया था।

फिर मुझे भी खिलवाड़ करने का दिल करने लगा और मैंने भी सारे कपड़े उतार दिये और एकदम नंगी हो कर फर्श पर फिसल गयी।

“चलो रेस लगाते हैं।” समर ने अहाना के चूतड़ पर चपत लगाते हुए कहा।

अब उसकी मर्जी थी तो लगानी ही थी। हम एक सिरे पर, जिधर गैलरी की कगर थी, एक लाईन से रुकते फिर जोर लगा कर आगे की तरफ मछली की तरह फिसल जाते।

पानी कम पड़ता तो और डाल लेते.. और यूँ ही कभी दो-दो तो कभी तीनों रेस करते।

लेकिन कभी बच्चे होंगे.. अब बच्चे नहीं थे। अब हमारे अंग यूँ फर्श से रगड़ने पर उत्तेजना पैदा कर रहे थे। खुद उसका लिंग भी खड़ा हो गया था।

“अब दो-दो हो के स्लिप होते हैं।” अंततः उसने अहाना को दबोचते हुए कहा।

“वह कैसे महाराज?”

“बताता हूँ।”

हम औंधे पड़े नंगे-नंगे फिसल रहे थे तो उस कंडीशन में मैंने हम लोगों के शरीर में जो वाज़ेह फर्क नोट किये वह यह थे कि हम दोनों बहनों के दूध और घुंडियां अब समान हो चुके थे, जबकि मेरे चूतड़ अहाना के मुकाबले ज्यादा बाहर निकले हुए थे और समर के चूतड़ हम दोनों के मुकाबले एकदम फ्लैट थे।

उसने अहाना के ऊपर हो कर अपनी लार से अपने लिंग को गीला किया और पीछे से ही उसकी योनि में ठूंस दिया।
 
अब दो औंधे बदन एकदूसरे पे लदे पेट के बल फिसल रहे थे। मुझे सिंगल बदन उनके साथ रेस लगानी पड़ रही थी तो मैं ही जीत जाती थी।

फिर इसी अंदाज में वह पीठ के बल हो गये। पहले अहाना नीचे थी और उसकी योनि में लिंग ठूंसे समर ऊपर था। फिर समर पीठ के बल नीचे हो गया और अहाना उसके लिंग को योनि में लिये-लिये ऊपर हो गयी।

इस फार्मेट में मुझे भी पीठ के बल फिसलना पड़ा, लेकिन सिंगल बदन होने की वजह से जीत तब भी मेरे ही हाथ लगी।

“अब तू आ मेरे नीचे।” उसने अहाना को अलग करते हुए कहा।

फिर अहाना की जगह मैं हो गयी। हम फिर पेट के बल हो गये। उसने पीछे की तरफ से मेरी योनि में अपना लिंग ठूंस दिया। मेरी योनि इन सब तमाशों से पहले ही बुरी तरह गीली हो रही थी और दूसरे उसका राशिद जितना था भी नहीं जो मैं पहले ले चुकी थी.. तो कोई खास परेशानी हुई भी नहीं।

हम फिर फिसलने लगे लेकिन अब अहाना जीत जाती थी सिंगल शरीर के कारण।

फिर पीठ के बल हो कर उल्टी फिसलन हुई।

इसके बाद उसने एक अजीब खेल किया कि गैलरी के अंतिम सिरे पर मुझे और अहाना को बारी-बारी इस तरह टिका दे कि हमारी दोनों टांगे आखिरी हद तक फैल जायें और उसे हमारी एकदम खुली पुसी दिखती रहे..

और वह पीछे से इस तरह फिसलता आये कि उसका जिस्म हमारे चूतड़ से टकरा कर ऊपर चढ़ता चला जाये और उसका लिंग अंत में हमारी योनि में आ धंसे।

शुरुआत में यही चीज खतरनाक भी हो सकती थी लेकिन तब तक हम तीनों ही काफी गरम हो चुके थे और लसलसा पानी छोड़ रहे थे जिससे उसके पूरे लिंग पर और हमारी योनि के आसपास इतनी चिकनाहट हो गयी थी कि निशाना गलत भी लगता तो भी वह फिसल कर गड्ढा ढूंढ ही लेता।

जब टेम्प्रेचर काफी बढ़ गया तो खेल रुक गया.. उसने वहीं बारी-बारी हमारा योनिभेदन करना शुरू कर दिया। पोजीशन वहां क्या बनती.. हमें औंधा लिटाये वह पीछे से जैसे लिंग डाल के फिसल रहा था, वैसे ही फिर लिंग डाल के धक्के लगाने लगता।

लेकिन फिर भी हमें मजा तो आ ही रहा था और हम दोनों ही सिसकार-सिसकार कर मजे ले रहे थे। और इसी तरह धक्के लगाते-लगाते उसका लिंग फूल कर मेरे चूतड़ों की दरार में बह गया और वह साइड में लुढ़क कर हांफने लगा।

हालाँकि हम मंजिल तक नहीं पंहुचे थे.. आर्गेज्म तो क्या उसके आसपास भी नहीं पंहुचे थे लेकिन कर भी क्या सकते थे जब पहलवान ही धराशायी हो गया था।

वैसे भी औरत को यह सिफत हासिल है कि जैसा मजा मर्द को स्खलन पर आता है उसके आसपास का मजा औरत हर धक्के पर ले सकती है, इसलिये ही मर्द का औरत को आर्गेज्म तक पंहुचाये बिना स्खलित हो जाना उतना मैटर नहीं करता।

मैंने चूतड़ों से उसका वीर्य धो दिया और तीनों करीब दस मिनट तो उसी हाल में पड़े रहे।
 
भाई बहन की चुदाई की कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे मौका मिलते ही मेरा भाई समर हम दो बहनों सर मुसल्लत हो जाता है और पहले पानी से भीगे गलियारे और फिर बाथरूम में खेल करता है और हम बुरी तरह गर्म हो जाते हैं।

अब आगे पढ़िये..

“अब थोड़ा कड़वा तेल ले आओ और बाथरूम में चलो।” आखिरकार वह उठता हुआ बोला।

अब यह कड़वा तेल पता नहीं क्या करेगा.. यह सोचती मैं ही उठी और किचन में घुस गयी। वहां सरसों के तेल की शीशी मौजूद थी और मैं उसे ही ले आई, जब तक वे दोनों भी उठ चुके थे।

हम बाथरूम में आ गये।

बाथरूम में एक सिटकनी वाली थोड़ी दिक्कत छोड़ दो वह काफी बड़ा था और आज तो वैसे भी सिटकनी की जरूरत नहीं थी।

उसने शॉवर चालू किया तो हम तीनों फिर नहा गये।

फिर उसके कहने पर हमने अपने शरीरों पर तेल चुपड़ लिया और इसके बाद जो खेल हुआ वह तीनों की चिंगारियाँ छुड़ाने के लिये काफी था।

तेल पानी के साथ बुरी तरह चिकनाये शरीर लिये हम बुरी तरह एक दूसरे को रगड़ने कभी मैं उसका लिंग चूसने लगती, कभी वह और अहाना मेरे दूध मसलने और चूसने लगते कभी वह नीचे मुंह डाल कर कभी मेरी कभी अहाना की योनि चाटने लगता।

जल्दी ही हम तीनों सुलगने लगे।

फिर दीवार से टेक लगा कर वह नीचे बैठ गया और अपने लिंग को तेल से नहला लिया।

“पता नहीं राशिद ने तुम लोगों की गांड मारी या नहीं, लेकिन आज मैं पहले वही मारूंगा.. ताकि आगे की आग बरकरार रहे और दर्द के बावजूद तुम लोग मरवा लो।” उसने पहले अहाना को खींचते हुए कहा।

“भक.. आगे से कर न। क्यों गंदे छेद के चक्कर में पड़ा है।” अहाना ने कमजोर सा प्रतिरोध किया।

“गंदा छेद? हे हे हे हे.. दो लौंडों की मार चुका हूँ। उसका मजा अलग ही होता है बे… गंदा क्या.. मारने के बाद धो लेंगे न।”

प्रतिरोध मैं भी करना चाहती थी लेकिन यह अहसास था कि चलनी उसकी ही थी तो खामखाह पें-पें करने का कोई मतलब भी नहीं था।

“रज्जो.. तू बैठ के यहीं देख, तेरी देख-देख के गीली हो जायेगी और मुनिया मांगने लगेगी।” उसने बेशर्मी से हंसते हुए मुझे भी पास बिठा लिया।

मैं उसके पास उससे सट कर बैठ गयी। हम दोनों ने पैर सीधे फैला रखे थे और उसने अहाना को औंधा, मतलब पेट के बल हमारी जांघों पे ऐसे लिटाया कि अहाना का कमर के ऊपर का हिस्सा मेरी जांघों पर आया और नीचे का, या यूँ कहो कि उसके चूतड़ समर की गोद में आये।

“देख छेद इसका!” समर ने मुझे कोहनी मारते हुए कहा।

उसने तेल से चिकनाये चूतड़ फैला कर मुझे अहाना का चुन्नटों भरा गहरे रंग का छेद दिखाया, जो अंदर लाल हो रहा था।

पहले उसे यूँ ही एक उंगली से सहलाया फिर उसमें शीशी के ढक्कन में तेल लेकर उड़ेल दिया। थोड़ा तेल कटोरी की तरह ऊपर रुका तो थोड़ा अंदर उतर गया।

फिर उसने मुझसे कहा कि मैं उसके चूतड़ों की दरार फैलाये रखूं कि छेद सामने उभरा रहे और वह खुद एक उंगली से छेद को खोदने लगा।

ऊपर दिखता तेल भी अंदर उतर गया।

फिर धीरे से उसने अपनी बीच वाली उंगली एक पोर अंदर उतार दी। अहाना जोर से ‘सी…’ कर उठी, जबकि वह बेशर्मी से हंसने लगा- अभी देखना कैसा मजा आने लगेगा। उसने एक ही पोर अंदर बाहर करना शुरू किया धीरे-धीरे.. मैं यह देख सकती थी कि हर बार वह उंगली एक सूत ज्यादा धंसा देता था और देखते-देखते अब उसकी पूरी उंगली अंदर बाहर होने लगी थी। और अहाना इस तरह ‘सी… सी…’ कर रही थी जैसे उसे अब मजा आने लगा हो।

“क्यों अन्नू.. अब मजा आ रहा है न?” उसने दूसरे हाथ को नीचे ले जा कर मेरी गोद में मौजूद दूध मसलते हुए पूछा। “हं-हां।”

“बस ऐसे ही लंड से भी आयेगा, थोड़ा छेद ढीला हो जाये बस।”

“करो कैसे भी.. अब अच्छा लग रहा है।” यह सुन कर मेरे छेद की सलवटों में मसमसाहट होने लगी।

उसने ढक्कन से भर कर और तेल छेद में उड़ेला और एक पूरी के साथ दूसरी उंगली भी थोड़ी-थोड़ी घुसाने लगा। अहाना ने भी इसे महसूस कर लिया था इसलिये अब उसकी सीत्कारें ठंडी पड़ गयी थीं।

शायद वह दर्द के साथ एडजस्ट करने की कोशिश कर रही थी.. और उसकी एडजस्टमेंट देख समर ने बाकायदा दोनों उंगलियां पूरी उतार दीं।

फिर पहले कुछ देर तो मुझे भी लगा कि छेद सख्त है और उंगलिया पूरे कसाव में अंदर जा रही हैं लेकिन धीरे-धीरे वह भी आसानी से अंदर बाहर होने लगीं।

अहाना फिर “सी… सी…” करने लगी थी।

जब उसकी दोनों उंगलियां तेजी और सुगमता से चलने लगीं तो उसने अहाना को हटा दिया।

“अब तू आ.. तेरा छेद ढीला करता हूँ।”

मैंने महसूस किया जैसे मैं यह शब्द सुनना चाहती थी… जैसे मैं अपनी बारी आने के लिये मानसिक रूप से खुद ही तैयार थी कि कब वह कहे और कब मैं उसकी गोद में औंधी लेट जाऊं।

मेरी जगह अहाना ने ले ली थी और मैंने अपना चूतड़ वाला हिस्सा समर की गोद में टिका कर दूध वाला हिस्सा अहाना की गोद में रख लिया था।

फिर मेरे साथ भी वही हुआ और जिस घड़ी उसने एक उंगली मेरे छेद में उतारी तो एकदम बेहद हल्के से दर्द का अहसास तो जरूर हुआ लेकिन फौरन ही मजा भी आने लगा। जल्दी ही मैंने उसकी दोनों उंगलियों को आत्मसात कर लिया और मजा लेने लगी।

अहाना की मनःस्थिति क्या थी, पता नहीं लेकिन मैंने दिमाग में यह बिठा लिया था कि मलत्याग में भी जब कभी पैखाना टाईट होता है तो उतनी मोटाई में तो मल निकलता ही है जितनी उसके लिंग की थी.. तो मतलब उतना फैल ही सकता था।

यानि अगर दर्द होता भी तो बर्दाश्त के लायक ही होगा और जब अभी उंगलियों के अंदर बाहर होने पे मजा आ रहा था तो लिंग के अंदर बाहर होने पे क्या न आयेगा। images छेद उसके हिसाब से ढीला हो चुका तो उसने मुझे उठा दिया।

“अब बताओ.. पहले कौन डलवायेगा?”

“मेरी मारो.. मैं अभी एकदम गर्म हूँ। अहाना को फिर से गर्म कर के तब डालना।” मैंने खुद आगे बढ़ कर मौका ले लिया।

“ठीक है.. देख मैं ऐसे ही बैठा हूँ। तू मेरी तरफ पीठ कर के मेरे लंड पर ठीक वैसे ही बैठ, जैसे हगते में बैठती है और अन्नू.. तू सामने से लगी रह और अपने हाथ से इसकी चूत का दाना सहलाती रह ताकि इसकी गर्मी बरकरार रहे।”

उसके बताये मुताबिक मैं अपनी पीठ उसके पेट से सटाते उस पर लगभग शौच की पोजीशन में बैठ गयी। मेरी गुदा का छेद उसके लिंग की टोपी पर टिक अहाना मेरे एकदम सामने मुझसे लगभग चिपकी हुई बैठ गयी एक हाथ से मेरे इस कंधे से उस कंधे तक दबाव बनाती, दूसरे हाथ से मेरी योनि के ऊपरी सिरे को सहलाने लगी, योनि के छेद में उंगली करने लगी।मेरे दिमाग में फुलझड़ियां छूटने लगीं।

समर ने पीछे से मेरी कमर पर दबाव बना लिया था और मुझे नीचे बिठाने लगा था.. मैं खुद भी नीचे बैठने पर जोर लगा रही थी, लेकिन लगता था उसके लिंग की कैप जैसे फंस गयी हो।

फिर लगातार दबाव की वजह से चुन्नटें एकदम फैल गयीं और “गच” से टोपी अंदर धंस गयी। मेरी एकदम चीख निकल गयी और दर्द की एक तेज लहर उठी। मैंने वापस उठना चाहा लेकिन अहाना ने ऊपर से दबा दिया और समर ने नीचे से दबा लिया।

मेरे एकदम से आंसू छलक आये- छछ-छोड़ दो… बहुत दर्द हो रहा है।

मैंने कसमसाते हुए कहा।

“पहली बार में दर्द तो होता ही है.. क्या आगे में दर्द नहीं हुई थी, लेकिन फिर मजा आया था न? उसी तरह इसमें भी आयेगा.. थोड़ा सब्र तो करो।

बचने की कोई सूरत न देख मैंने खुद को शिथिल छोड़ दिया और पहले जो बस टोपी ही अंदर धंसी थी, वहीं खुद को ढीला छोड़ने से पूरा ही अंदर चला गया।

जब समर ने जान लिया कि मैं निकलने की कोशिश नहीं करूँगी तो उसने अहाना को कहा कि वह मेरा एक दूध मसलते हुए दूसरे हाथ से मेरी योनि में उंगली से चोदन करे, जबकि खुद उल्टे हाथ से मेरा दूसरा दूध मसलते सीधे हाथ से योनि के ऊपरी सिरे को सहलाने लगा।

थोड़ी ही देर में उत्तेजना का पारा वापस चढ़ने लगा और यह ख्याल भी निकल गया कि उसका लिंग मेरी गुदा में ठुंसा हुआ था।

“हम्म.. अब करो।” मैंने समर की जांघ थपथपाते हुए इशारा किया।

“मैं बाद में करूँगा.. अभी तुम करो। ऊपर नीचे हो।”

मैंने ऊपर नीचे होना शुरू किया। पहले थोड़ी जलन महसूस हुई और कुछ-कुछ अहसास इस बात का भी हो रहा था कि जैसे पोट्टी का दबाव हो लेकिन धीरे-धीरे इन पर लज्जत का अहसास भारी पड़ गया और नीचे होने पे जब मेरे चूतड़ उसके बाल भरे पेट के निचले हिस्से से टकराते तो अलग ही मजा आता।

हालाँकि यह पोजीशन मेरे लिये सुविधाजनक नहीं थी और मैं जल्दी ही थक गयी।

थक गयी तो उसने मुझे हटा दिया और अहाना को बिठा लिया। अहाना के साथ भी सेम प्रक्रिया दोहराई और उसे भी सब ठीक वैसा ही महसूस हुआ जैसा मुझे हुआ था।फिर वह भी थक गयी तो हम उठ खड़े हुए।

अब चूँकि बाथरूम के सख्त फर्श पर कोई ऐसा आसन तो आजमाया नहीं जा सकता था, जिसमें घुटने इस्तेमाल होते हों.. इसलिये बेहतर बस यही था कि हम नलके को पकड़ कर झुक गये और उसने खड़े-खड़े पीछे से भोगना चालू कर दिया।
 
करीब आधे घंटे तक वह हम दोनों से उसी अंदाज में बारी-बारी गुदामैथुन करता रहा।

इसमें फिलहाल कोई आर्गेज्म की गुंजाइश तो नहीं थी लेकिन यह भी सच था कि मजा भरपूर आया था, हालाँकि बाद में हम दोनों के छेद सूज गये थे और यहां तक कि पोट्टी करने में भी तकलीफ हुई थी और कई दिन तक दर्द रही थी।

बहरहाल, आधे घंटे के बाद उसने अहाना की गुदा में अपना सफेदा उगल दिया और ढीला हो कर वहीं पड़ गया।

जबकि अहाना के छेद से धीरे-धीरे बह कर उसका वीर्य पड़े रहने तक बाहर आता रहा।

फिर हम कायदे से नहाये और बाथरूम साफ करके बाहर आ गये।

वह कहीं चला गया और हम खा पी कर आराम करने लग गये। पता तो था ही कि शैतान अभी फिर धमकेगा।

दो बजे वह वापस आया और इस बार रणक्षेत्र हमारा बेडरूम ही बना।

वह कई तरह के कंडोम ले आया था.. एक्स्ट्रा थिन, एक्स्ट्रा डॉट्स, एक्स्ट्रा रिब्स जैसे पता नहीं क्या क्या।

फिर उसने चार बार और हमें आगे से फक किया। इस दौरान शायद ही कोई आसन बचा हो जो उसने आजमाया न हो और सारे कंडोम भी इस्तेमाल कर डाले।

इस बीच उसने चार बार अपना वीर्य निकाला और दो बार हम भी आर्गेज्म तक पंहुचे। जब जाने की नौबत आई तो बच्चू की खुद भी टांगें लड़खड़ाने लगी थीं। फिर आगे चल कर यह सिलसिला आम हो गया।

जब यह सब हुआ, उस दौरान में ग्यारहवीं में थी और जब इंटर के बाद प्राइवेट से बीए कर रही थी तब आरिफ के साथ मेरी शादी हो गयी।

इस बीच जितनी बार हो सकता था राशिद और समर ने हम दोनों बहनों की मुनिया की खुजली मिटाई.. और इस बीच शायद हमने सेक्स से सम्बंधित सभी कांड किये।

पहली बार ब्लू फिल्म देखने के बाद जिन चीजों पर हमने चर्चा की थी, उनमें से अंततः लगभग सभी कांड करते हुए फिर हमने वीर्य मुंह में लेना भी शुरू कर दिया था, भले बाद में थूक देते थे।

बस एक ही चीज थी जो हम कभी नहीं कर पाये.. कभी अपनी गुदा से निकले उनके लिंग को चूसने की हिम्मत हम न जुटा पाये।

समर के बार-बार करने से जब हमें गुदामैथुन की भी लत हो गयी थी तब हमने खुद से फोर्स करके राशिद को भी इसके लिये तैयार कर लिया था, हालाँकि खुद उसका इसमें कोई खास रुझान नहीं था।

लेकिन समर के मुकाबले हमें राशिद के साथ ज्यादा मजा आता था इसलिये हमने खुद ही एनल सेक्स के लिये उसे परोस दिया था।

शादी के बाद मेरी ढीली योनि ने आरिफ में शक के बीज जरूर बोये थे और वह मेरे हस्तमैथुन वाले बयान से एकदम संतुष्ट भी नहीं हुआ था, उसने बाकायदा मेरी जासूसी कराई थी लेकिन हाथ कुछ न लगा था।

वैसे भी हमारे साथ जो भी हुआ था, वह घर में ही हुआ था.. इस बात पे भला कौन शक करता और बाहर के लोगों के लिये तो हम शरीफजात लड़कियाँ ही थे, जो कभी भी किसी को देखना तक गवारा नहीं करते थे।

फिर खुद आरिफ कौन सा शरीफ था.. शादी से पहले एक भाभी से सम्बंध थे और शादी के बाद सऊदी में भी जहां तहां मुंह मारता रहता है।

यहां सास ससुर, देवर के बीच कोई जुगाड़ बन पाना मुश्किल है, देवर पर ट्राई किया कि वही मेरी विपदा समझ ले, लेकिन वह कहीं और किसी लड़की के चक्कर में पड़ा है।

ऐसे में बस यही है कि साल में तीन चार बार बस जो मायके जाना हो पाता है तो समर काम आ जाता है। घर में चूँकि कोई अब होता भी नहीं अम्मी के सिवा, तो उतनी दिक्कत नहीं। राशिद की शादी हो चुकी और उसे अब मेरे मायके जाने पे इतना भी मौका नहीं मिल पाता कि मेरे साथ अकेले हो सके.. सेक्स तो दूर की बात है।

हालाँकि अब्बू सऊदी छोड़ अब यहीं रहते हैं लेकिन घर पर उनके पांव कम ही टिकते हैं, सो जब तक समर की शादी नहीं हो जाती, पूरी सुविधा है मुनिया की खुजली मिटाने की.. समस्या बस यही है कि वहां ज्यादा जा नहीं सकती।

कभी जमीर अंकल और अम्मी के सम्बंधों के बारे में बहुत खराब लगता था और किसी-किसी वक्त में नफरत भी होती थी लेकिन आज अपनी सोचती हूँ तो उनकी तकलीफ समझ में आती है।

आज सबकुछ वैसा ही तो है, अब्बू की जगह आरिफ हैं और अम्मी की जगह मैं हूँ.. लेकिन अम्मी के पास जमीर अंकल जैसी परमानेंट सुविधा थी जो मेरे पास नहीं है।

काश मेरे पास भी वैसी कोई सुविधा होती, काश मैं भी ऐसे ही किसी के जरिये अपने हिस्से का सुख हासिल कर सकती।
 
इन्हीं सब “काश” को मेरे मुंह पर मारते हुए रजिया ने अपनी बात खत्म की थी। उसने यह सारी बातें तीन रातों में बताई थी। बातें तो और भी थीं लेकिन लिखीं मैंने बस उतनी ही, जितनी मुझे लिखने लायक लगीं।

अब मेरा अगला सवाल यही था कि क्या मैं उसके “काश” का जवाब बन सकता था?
 
पिछले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे सारी कहानी सुना चुकने के बाद रज़िया ने अपनी माँ से अपनी तुलना करते हुए अपनी बदनसीबी ज़ाहिर की थी कि उसे ज़मीर अंकल जैसी कोई सुविधा नहीं और मैंने सवाल पूछा था कि क्या मैं उसके “काश” का जवाब बन सकता था। अब आगे पढ़िये-

वो काफी देर चुप रही थी और फिर आहिस्ता से बोली थी- कैसे? मतलब कैसे पॉसिबल है यह.. क्योंकि घर से निकलना मेरे लिये आसान नहीं और घर पे किसी के आने की कोई सम्भावना ही नहीं तो फिर?

“उसके साथ सवाल यह जुड़ा है कि आप किस हद तक जा सकती हैं इसके लिये।”

“मतलब?”

“मतलब यही कि क्या आप यह चाहती हैं कि खुदा आपका चाहा सुख खुद से आपकी झोली में डाल दे या फिर उसे हासिल करने के लिये आप खुद भी कोई मेहनत करने के लिये तैयार हैं या रिस्क उठाने के लिये तैयार हैं?” mlLApD0.jpg “अपने आप से सुख मेरी झोली में आ जाये, इतनी अच्छी किस्मत होती तो छः साल से तड़प और तरस न रही होती। बहुत तवील अरसा है यह खुदा को अजमाने के लिये। अब तक भी यह सुख मुझे तब ही हासिल हुआ है जब मैंने खुद इसके लिये मेहनत की है।”

“मतलब मेहनत कर सकती हैं और रिस्क उठा सकती हैं।”

“एक हद तक।”

“फ़िक्र मत कीजिये.. सिर्फ उतना कहूँगा जितना कर पाना आपके लिये मुमकिन हो। पर एक बात और बताइये.. उस ब्लू फिल्म की लगभग सब चीज़ें आपने कर ली थीं, एक चीज़ को छोड़ कर.. लेकिन मेरे हिसाब से आपने एक चीज़ और नहीं की थी।”

“क्या?” “दो मर्दों के साथ एक लड़की का सेक्स करना।”

“वह कभी पॉसिबल भी नहीं था क्योंकि जिन दो मर्दों ने मुझे छुआ वे कभी एक दूसरे के साथ नहीं हो सकते थे। उनका आपस में रिश्ता न होता या पहले से इस तरह की कंटीन्युटी होती तो बात अलग थी।”

“पर अगर मौका बनता तो क्या आप जातीं इसके लिये?”

इस सवाल पर वह कुछ देर के लिये चुप रह गयी.. शायद खुद को टटोल रही थी कि अगर कभी राशिद और समर एक साथ उसे आगे और पीछे से भोगते तो वह स्वीकार करती या नहीं?

“शायद चली जाती.. इस चीज़ में पहली बाधा एनल सेक्स था जो मैं पार कर ही चुकी थी और दूसरी बाधा दोनों से उस तरह का रिलेशन होना था जो कि आलरेडी था।”

“अब अगर मान लीजिये आपको इसके लिये जाना पड़े जहाँ एक हाफ अजनबी हो, यानि मैं और एक फुल अजनबी यानि मेरा कोई दोस्त.. तो जाने की रिस्क उठा पाएंगी। आपकी पहचान छुपी रहने की गारंटी मेरी और इस बात की भी कि यह चीज़ कभी भी आपके लिये भविष्य में परेशानी का सबब नहीं बनने वाली।” “शायद नहीं।”

“जवाब देने में जल्दबाजी मत कीजिये। यह दोस्त वही है जिसका ज़िक्र आपने **************************. नितिन। उसके शामिल होने पे आप सवाल उठा सकती हैं लेकिन एक मज़बूरी है। मेरे पास कोई सुरक्षित जगह नहीं.. होटल ले जाना आपको प्रफर करूँगा नहीं।

सिर्फ एक ही सुरक्षित जगह है.. नितिन का घर, वह अलीगंज में एक सरकारी क्वार्टर टाइप घर में रहता है एक लड़के के साथ, जो सरकारी नौकरी में है लेकिन वह आजकल किसी ट्रेनिंग पर बाहर गया है तो नितिन अकेला है।

वह इतना शरीफ तो है कि कभी इस तरह की बातों को न आगे बढ़ाता है और न ही उनका फायदा उठाने की कोशिश करता है लेकिन इतना भी शरीफ नहीं कि मैं उसके घर आपको ले जाकर वक़्त गुजारूं और वह चुप रह कर कहीं टहलने चला जाये।

अब वह हमारे साथ शामिल होगा तो नौबत वही आएगी जिसका कि मैंने ज़िक्र किया और आपको जिससे परहेज़ भी नहीं। समस्या बस अनजान लोगों की है लेकिन कभी-कभी अनजान लोग ही अपनी पहचान छुपाये रखने में आसानी बन जाते हैं।

सोचिये न आपको वह कभी जानने वाला और न ही कभी शायद कभी वैसे उससे आपकी मुलाकात हो पाये.. और आगे भी वो मेरे साथ या अकेले ही आपके काम आ सकता है, अगर आप चाहेंगी तो।

जल्दबाजी नहीं.. इत्मीनान से रात भर सोच लीजिये। बात नितिन की नहीं मेरी है.. अगर मुझ पर भरोसा करती हैं तो एक बार आजमा कर देख लीजिये।”

“मैं सोचूंगी।” इस बार उसने सकारात्मक सन्देश दिया।

“जी बिल्कुल… कल सुबह बता दीजियेगा.. कल छुट्टी है, वह कहीं निकल जाये, उससे पहले ही उसे बताना पड़ेगा।”

उसने फोन काट दिया।

बात अश्लील थी और किसी भी सभ्य महिला के लिये एकदम अस्वीकार्य थी लेकिन वह जिस हालत में थी और जिस तरह मर्द के संसर्ग को तरस रही थी, उसमे मुझे पूरा यकीन था कि देर सवेर वह मान जायेगी।

और मेरा यकीन गलत न साबित हुआ। सुबह ही उसने फोन करके पूछा कि उसे क्या करना होगा। मैंने कह दिया कि घर कह दो कि बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र के साथ ही उसका आधार भी बनना ज़रूरी था और उसके लिये जा रही हो। एक मेरा दोस्त इस काम में जुड़ा है और मैं उससे टाइम ले लेता हूँ..

वैसा ही हुआ और एक घंटे बाद मैं उसे सिटी स्टेशन के पास से पिक कर रहा था। इस बीच मैंने आधार वाले दोस्त से बात कर ली थी और नितिन को भी राज़ी कर लिया था कि कुछ ज़रूरी सामान के साथ तैयार रहे।

हम यूनियन बैंक पहुंचे और वहां यूँ तो आधार बनवाने या संशोधन करवाने वालों की लम्बी लाइन थी लेकिन अपना कम एक घंटे में हो गया और वहां से निकल कर हम अलीगंज आ गये।

रज़िया का बच्चा भी उसी की तरह गोरा चिट्टा और खूबसूरत था, जिसके लिये हम उम्मीद कर रहे थे कि वह सो जायेगा और इसके लिये थोड़ा सा इंतजाम भी कर लिया था।
 
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