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रुचि की मटकती हुई गांड के आकर्षण में शुभम पूरी तरह से सम्मोहित हो चुका था। क्योंकि साड़ी के ऊपर से ही देखने पर शुभम ने अंदाजा लगा लिया था कि साड़ी के अंदर उसकी नंगी गांड कितना गदर मचा रही होगी जब वह उसे अपने हाथों से उसके एक-एक वस्त्र उतारकर जब उसकी मत मस्त गांड को देखेगा तो उसकी खूबसूरत गोल गोल गांड उसके दिल पर छुरिया चलाएंगी...वह मन ही मन उस पल का इंतजार करने लगा जब वह अपने हाथों से रूचि के कपड़े उतार कर उसे नंगी करेगा वह मन में ठान लिया था कि जब कातिल इतना हुस्नो दार हो तो उसके हाथों से क़त्ल होने में कोई हर्ज नहीं है....
रुचि रसोई घर में चली गई थी और रूचि के बचाए अनुसार वह सीढ़ियों से ऊपर की तरफ जाने लगा हुआ सरना चाची से मिलना चाहता था कुछ दिनों में सरला चाची से उसका लगाव कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था आए दिन उससे मुलाकात हो ही जाती थी ..और सरला चाची जिस तरह से एकदम खुले मन से उससे बात करती थी शुभम को लगने लगा था कि उसका साथ उसे भी अच्छा लगने लगा है जो कि यह बात एकदम हकीकत थी क्योंकि शुभम को उसकी नजरें अब हमेशा ढूंढती रहती थी...
सीढ़ियों से चढ़कर शुभम ऊपर आ चुका था और वह सरला चाची के कमरे को ढूंढ रहा था ऊपर तीन कमरे बने हुए थे... वह धीरे-धीरे हर एक कमरे की तरफ आगे बढ़ रहा था... कमरे के पास पहुंच कर उसे इतना तो पता चली जा रहा था कि कमरे के अंदर कोई नहीं है क्योंकि दरवाजे के नीचे बिल्कुल भी रोशनी नहीं थी।.... लेकिन तीसरे कमरे के दरवाजे के नीचे से हल्की हल्की रोशनी आ रही थी शुभम को समझते देर नहीं लगी कि सरला चाची तीसरे कमरे में ही है... शुभम जैसे ही तीसरे कमरे के करीब पहुंचा तो देखा कि दरवाजा हल्का खुला हुआ था। दरवाजा खुला देखते ही शुभम के तन बदन में उत्सुकता बढ़ने लगी उसे ना जाने क्यों ऐसा एहसास होने लगा कि कमरे के अंदर जरूर कुछ ऐसा देखने को मिलेगा जिससे उसके तन बदन को गर्मी और आंखों को राहत मिलेगी.... क्योंकि ऐसे ही हल्का खुले दरवाजे की ओर से वह कमरे में जाकर अपनी खूबसूरत मां की खूबसूरत नंगे बदन के दर्शन कर चुका था वही सोच करवा धीरे से दरवाजे को थोड़ा और खोलने के लिए हाथ बढ़ाया और जैसे ही थोड़ा सा और दरवाजा खोला तो अंदर का नजारा देखकर उसकी आंखें चौंधिया गई.... उसका मुंह खुला का खुला रह गया उसकी उत्सुकता उत्तेजना में बढ़ गई उसे मन में हिसाब तो हो रहा था कि अंदर जरूर उसे कुछ देखने को मिलेगा लेकिन उम्मीद से दोगुना देखने को मिलेगा इस बात की उम्मीद उसे बिल्कुल भी नहीं थी.... उसके दिल की धड़कन जोरों से धड़क रही थी सांसो की गति एकदम तेज हो गई वह कर भी क्या सकता था उसकी आंखों के सामने नजारा ही कुछ ऐसा था। सरला चाची की नंगी चिकनी मलाई जैसी गोरी पीठ दरवाजे की तरफ थी जिस पर नजर पड़ते ही शुभम की उत्तेजना बढ़ने लगी थी उनके बदन पर केवल पेटिकोट भर् थी.... सरला की नंगी चिकनी पीठ देखकर ही शुभम के लंड में तनाव आना शुरू हो गया था। बाल खुले हुए थे जो कि इस समय एकदम गीले थे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अभी अभी नहा कर आई हो।
सरला चाची की अर्ध नग्न बदन को देखकर शुभम को ऐसा ही लग रहा था कि उसकी आंखों के सामने कोई कामदेवी खड़ी हो और सरला चाची के बदन का पीछे का भाग बहुत ही खूबसूरत लग रहा था इस उम्र के पड़ाव पर भी सरला चाची के बदन का कसाव लगभग लगभग बरकरार था। कमर से पेटीकोट कस के बाद ही होने की वजह से पेटीकोट की दूरी कमर में जैसे हल्का सा अंदर की तरफ धंस गई हो और उसकी वजह से पेटीकोट की डोरी के इर्द-गिर्द हल्का सा बदन का उठाव बदन को और ज्यादा मोहक बना रहा था.... शुभम का दिल जोरों से धड़क रहा था वह अलमारी में कुछ ढूंढ रही थी। उसका वहां ज्यादा देर तक खड़ा रहना उचित नहीं था लेकिन उसे सरला चाची के बदन का और ज्यादा हिस्सा देखने का मन कर रहा था... बदन पर केवल पेटिकोट पहने होने की वजह से शुभम अच्छी तरह से जानता था कि कमर के ऊपर का पूरा बदन निर्वस्त्र था जिससे उसकी चूची भी एकदम नंगी थी और वह उसे देखने के लिए आह भर रहा था...
सरला इस बात से बेखबर कि उसे अर्धनग्न अवस्था में दरवाजे पर खड़े होकर शुभम उसकी खूबसूरती के जाम को अपनी आंखों से पी रहा है वह अपने आप में ही खोए हुए अलमारी में से ब्रॉ ढुंढ रही थी।
वैसे तो काफी अरसा गुजर गया था सरला को ब्रा और पेंटी पहने लेकिन जिस दिन से शुभम ने उसकी खूबसूरती की तारीफ किया था तब से उसकी इच्छा ब्रा पेंटी पहनने के लिए करने लगी थी और वह उसे पहनना शुरू भी कर दी थी क्योंकि वह आईने के सामने नंगी होकर अपने बदन को निहारती रहती थी और अपनी चुचियों के कसाव को बरकरार रखने के लिए वह समझ गई थी कि उसे ब्रा पहनना बहुत जरूरी है वरना उसकी चूची दूसरी औरतों की तरह लटक जाएगी क्योंकि शीसे मैं से जिस तरह की खूबसूरती से भरे बदन को उसने अपनी आंखों से देखी थी तब से उसके मन की भी इच्छा अपने बदन की रखरखाव करने के लिए बढ़ने लगी थी।
इसलिए तोबा अलमारी में से ब्रा ढूंढ रही थी अब शुभम के लिए वहां ज्यादा देर तक खड़ा रहना ठीक नहीं था लेकिन उसके मन में सरला की बड़ी-बड़ी चुचियों को देखने की प्यास बढ़ती जा रही थी लेकिन कैसे देखना है यह उसे पता नहीं था क्योंकि इस तरह से कमरे के अंदर जाने में भलाई नहीं थी... और वहां खड़े रहकर सरला के घूमने का इंतजार करना बेवकूफी भरा था क्योंकि इससे सरला को शक हो सकता था कि वह काफी देर से दरवाजे पर खड़े होकर उसके नंगे बदन को देख रहा था जिससे हो सकता है सरला को यह बात खराब लगी ऐसा सोचकर शुभम कुछ तरकीब सोचने लगा और वापस अपने कदम को कमरे से बाहर कर लिया... कमरे से बाहर कदम खींचे अभी उसे 4 - 5 सेकंड का ही वक्त गुजरा था कि .. वह बिना वक्त गांव आए झटके से दरवाजे को खोलता हुआ अंदर आते हुए आवाज लगाया....
सरला चाची कहां हो.... मैं तुम्हारा कब से.....(इतना कहने के साथ ही सामने का नजारा देखकर शुभम के शब्द उसके गले में ही अटके रह गए... क्योंकि इस तरह से दरवाजा खुलने की वजह से सरला को इस बात का एहसास बिल्कुल भी नहीं हुआ कि दरवाजे पर शुभम है वह सोचा कि उसकी बहू रुचि ने दरवाजा खोला है इसलिए वह बिना सोचे समझे शुभम की तरफ घूम गई लेकिन सामने शुभम को कमरे में आता देखकर वह एकदम से चौंक गई...शुभम तो जानबूझकर चौक ने का नाटक कर रहा था क्योंकि यह उसकी युक्ति ही थी इस तरह से कमरे में प्रवेश करने की वजह जताना चाहता था कि वह कमरे में अनजाने में ही आया है जानबूझकर कुछ भी नहीं किया है इसलिए वह चौक ने का नाटक करने लगा लेकिन सरला तो वास्तव में चौक गई थी वजह से ही शुभम की तरफ घूमी थी उसकी नंगी चूचियां अपनी मदहोश जवानी का प्रदर्शन करते हुए शुभम की आंखों के सामने पानी भरे गुब्बारे की तरह लहराने लगी और उन्हें एकटक देखकर शुभम की आंखों में चमक आ गई उसकी आंखों में खुमारी जाने लगी उसे उम्मीद नहीं थी कि सरला चाची की चूचियां इतनी खूबसूरत होंगी... वह एकटक सरला चाची की गोल-गोल खरबूजे जैसी चूचियों को देखता ही रह गया जैसा उसने सोचा था कि सरला चाची की चुचियों में कसाव नहीं होगा ऐसा बिल्कुल भी नहीं था वह तो सरला चाची की चूचियों को देखा तो देखता ही रह गया लगभग लगभग सरला चाची की चूचियां उसकी मां की चुचियों जैसी जी हुबहू नजर आ रही थी बस थोड़ा सा फर्क था कि उसकी मां की चुचियों का कसाव कुछ ज्यादा ही था। लेकिन फिर भी सरला चाची की चूचियां किसी से कम नहीं थी एक बहू वाली होने के बावजूद भी सरला चाची कहीं से भी नहीं लगती थी कि वह सांस बन चुकी है... शुभम तो बस प्यासी नजरों से एक अटक सरला की भरपूर छातियों को देखे जा रहा था और सरला भी उसकी तरफ घूम कर अनजाने में ही अपनी मदमस्त चूचियों के दर्शन उसे करा रही थी ...दरअसल यह सब इतनी जल्दी हुआ कि सरला यह बात भूल गई की कमर के ऊपर उसने किसी भी प्रकार के वस्त्र नहीं पहने हुए हैं और उसकी चुचियां एकदम नंगी है। सरला भी कुछ सेकंड तक अपनी चुचियों को ढकने की जगह शुभम को ही देखती रह गई क्योंकि उसे भी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि कमरे में इस तरह से शुभम आ जाएगा.... लेकिन जब इस बात का एहसास सरला को हुआ कि उसकी आंखों के सामने एक गैर मर्द शुभम अब एक भरपूर जवानी से भरा हुआ मर्द ही था।जो कि उसकी चूचियों की तरफ देख रहा था इस बात का अहसास होते ही सरला के मुख से हल्की सी चीख निकल गई....
आअअअअअअअअ....... (इस तरह की चीख निकलने के साथ ही वह बिस्तर पर पड़ी टावेल को पकड़कर अपनी चुचियों को ढकने की कोशिश करने लगी लेकिन हड़बड़ाहट में उसके हाथ से टावल छुट कर नीचे गिर गई..टावल नीचे गिरने की वजह से वह अपने अंगों को ना छुपा पाने के कारण पूरी तरह से घबरा गई थी... और शुभम इतना डिठ हो चुका था किवह अपने मन में निश्चय कर लिया था कि जब तक सरला अपनी चुचियों को उसकी आंखों से नहीं दूर करेगी तब तक वह उसे जी भर कर देखता रहेगा...
और हड़बड़ाहट में कुछ हाथ ना आता देखकर सरला अपने दोनों हथेलियों में अपनी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चुचियों को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी अब शुभम की बारी थी वह एकदम से चौंक ने का नाटक करते हुए बोला...
सससससस..... सॉरी सॉरी सॉरी सॉरी चाची सॉरी (इतना कहते हुए वह दरवाजे की तरफ घूम गया...लेकिन तब तक उसने सरला चाची की मदहोश जवानी के दोनों उड़ते हुए कबूतरों को देख लिया था शुभम अपने मन की कर लिया था।)
मुझे माफ करना चाची मुझे नहीं मालूम था कि आप ..... आप इस तरह से कमरे में होंगी मैं तो आपको ढूंढता ढूंढता यहां तक आ गया था मुझे मालूम नहीं था चाची मुझे माफ करना....(इतना कहते हुए वह जानबूझकर फिर से सरला की तरफ घुमा तो सरला की मासूमियत और जिस तरह से उसने अपनी दोनों हथेलियों में अपने दोनों खरबूजे को छुपाने की नाकाम कोशिश करते हुए खड़ी थी उसे देखकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया और एक बार फिर से छूटने का नाटक करता हुआ फिर से दरवाजे की तरफ घूम गया और बोला...)
मुझे माफ करना चाहिए मुझे नहीं मालूम था।
(माफी मांगते हुए शुभम अपनी सभ्यता का परिचय दे रहा था जो कि वह लगभग सरला के दिलों दिमाग पर अपनी चालबाजी का मस्का लगा रहा था और उस मस्के का असर सरला पर बखूबी हो भी रहा था लेकिन जब दुबारा शुभम उसकी तरफ घुमा था तब सरला की नजर उसकी टांगों के बीच पेंट में बने तंबू की तरफ चली गई थी और उसे इस बात का अंदाजा लग गया था कि शुभम का लंड खड़ा हो रहा था...
शुभम के पेंट में बने तंबू को देखकर उसे इस बात का एहसास हो गया कि शुभम का लंड खड़ा हो गया था और इस बात को जानते हैं ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके दिल की धड़कने बढ़ने लगी हो उसके होश उड़ने लगे थे। वह शुभम से कुछ ज्यादा नहीं कह पाई बस उसे इतना कहीं....
कोई बात नहीं सुभम तुम जाओ मैं तैयार होकर आती हूं..
(इतना सुनकर वह सरला की तरफ देखे बिना ही जानबूझकर एक बार फिर सॉरी कहते हुए कमरे से बाहर चला गया उसका काम बन चुका था वह मन ही मन मुस्कुरा रहा था उसकी आंखों के सामने जिस तरह का नजारा पैसा आया था उसे देखकर उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था उसकी आंखों ने उम्मीद से दुगुना नजारे का दर्शन जो कर लिया था सरला चाची की मदहोश जवानी के सबूत उसके दोनों फड़फड़ाते हुए कबूतर थे .... जोकि चिल्ला चिल्ला के कह रहे थे कि अभी भी वह जवान है...
शुभम अपनी उत्सुकता को उत्तेजना में बदल कर वापस सीढ़ियों से नीचे उतर गया...
सरला इस पल को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रही थी वह मंद मंद मुस्कुराने लगी अभी भी वह अपने दोनों हथेलियों से अपनी दोनों चुचियों को छुपाए हुए थे उसे इस बात का एहसास तक नहीं हुआ कि शुभम वापस चला गया है वह काफी खुश नजर आ रही थी इसका एक कारण था कि उसकी आंखों ने शुभम के पेंट में बने तंबू को देख ली थी जो कि इस बात का प्रतीक था कि उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था और वह सिर्फ उसकी मदहोश कर देने वाली सूचियों की वजह से था जिसे सुबह एक टक तक खा जाने वाली प्यासी नजरों से देख रहा था इस बात से वह काफी खुश नजर आ रही थी क्योंकि उसे लगने लगा था कि अभी भी उसकी मदहोश जवानी और उसका खूबसूरत बदन किसी के भी सोए हुए लंड को जगाने में सक्षम है।
उसे इस बात की पूरी तरह से तसल्ली हो गई थी कि उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां देकर शुभम का लंड खड़ा हो गया था वह एक बार फिर से आईने में अपने आप को देखने लगी और उसे अपनी चुचियों पर गर्व होने लगा ....खामखा वह एक नीरस जिंदगी जी रही थी जो कि शुभम की वजह से बदलने लगी थी और आज वह शुभम को खाने पर निमंत्रण देकर अच्छे से तैयार होना चाहती थी ताकि वह उसकी खूबसूरती की तारीफ और अच्छे से कर सके।
उसका शुभम को घर पर खाने पर बुलाना लगभग लगभग सफल होता नजर आ रहा था कुछ इस तरह की खूबसूरती के दर्शन उसे कराना चाहती थी अनजाने में उससे कई ज्यादा वह अपने बदन की खूबसूरती का प्रदर्शन कर चुकी थी।
और उसके बदन की खूबसूरती का प्रदर्शन का जादू शुभम के ऊपर पूरी तरह से हो गया इस बात की तसल्ली उसे इस बात से मिल चुकी थी कि कमरे में आकर शुभम का लंड खड़ा हो गया था एक जवान होता लड़का जब उसकी बड़ी-बड़ी चुचियों को देखा कर उत्तेजित हो सकता है तो वह उसके साथ क्या क्या कर सकता है। इस बात का ख्याल उसे अनजाने में ही आ गया था और अपने इस बात पर गौर करके उसे अपने आप पर शर्म भी आ रहे थे कि वह यह कैसी बातें सोचने लगी शुभम उसके बेटे की उम्र का है भले ही छोटा क्यों ना हो वह उसको लेकर इतना ज्यादा उत्तेजित क्यों है उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन उसे संपूर्ण संतुष्टि का अहसास हुआ था और वह खुश होकर फिर से अलमारी खंगालने लगी थी वह अपनी पसंदीदा ब्रा पहनना चाहती थी।
और दूसरी तरफ सरला चाची के कमरे से निकलकर सीढ़ियों से नीचे जाकर सीधा वह रुचि से मिलने के लिए रसोई घर में चला गया...
रुचि रसोई घर में चली गई थी और रूचि के बचाए अनुसार वह सीढ़ियों से ऊपर की तरफ जाने लगा हुआ सरना चाची से मिलना चाहता था कुछ दिनों में सरला चाची से उसका लगाव कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था आए दिन उससे मुलाकात हो ही जाती थी ..और सरला चाची जिस तरह से एकदम खुले मन से उससे बात करती थी शुभम को लगने लगा था कि उसका साथ उसे भी अच्छा लगने लगा है जो कि यह बात एकदम हकीकत थी क्योंकि शुभम को उसकी नजरें अब हमेशा ढूंढती रहती थी...
सीढ़ियों से चढ़कर शुभम ऊपर आ चुका था और वह सरला चाची के कमरे को ढूंढ रहा था ऊपर तीन कमरे बने हुए थे... वह धीरे-धीरे हर एक कमरे की तरफ आगे बढ़ रहा था... कमरे के पास पहुंच कर उसे इतना तो पता चली जा रहा था कि कमरे के अंदर कोई नहीं है क्योंकि दरवाजे के नीचे बिल्कुल भी रोशनी नहीं थी।.... लेकिन तीसरे कमरे के दरवाजे के नीचे से हल्की हल्की रोशनी आ रही थी शुभम को समझते देर नहीं लगी कि सरला चाची तीसरे कमरे में ही है... शुभम जैसे ही तीसरे कमरे के करीब पहुंचा तो देखा कि दरवाजा हल्का खुला हुआ था। दरवाजा खुला देखते ही शुभम के तन बदन में उत्सुकता बढ़ने लगी उसे ना जाने क्यों ऐसा एहसास होने लगा कि कमरे के अंदर जरूर कुछ ऐसा देखने को मिलेगा जिससे उसके तन बदन को गर्मी और आंखों को राहत मिलेगी.... क्योंकि ऐसे ही हल्का खुले दरवाजे की ओर से वह कमरे में जाकर अपनी खूबसूरत मां की खूबसूरत नंगे बदन के दर्शन कर चुका था वही सोच करवा धीरे से दरवाजे को थोड़ा और खोलने के लिए हाथ बढ़ाया और जैसे ही थोड़ा सा और दरवाजा खोला तो अंदर का नजारा देखकर उसकी आंखें चौंधिया गई.... उसका मुंह खुला का खुला रह गया उसकी उत्सुकता उत्तेजना में बढ़ गई उसे मन में हिसाब तो हो रहा था कि अंदर जरूर उसे कुछ देखने को मिलेगा लेकिन उम्मीद से दोगुना देखने को मिलेगा इस बात की उम्मीद उसे बिल्कुल भी नहीं थी.... उसके दिल की धड़कन जोरों से धड़क रही थी सांसो की गति एकदम तेज हो गई वह कर भी क्या सकता था उसकी आंखों के सामने नजारा ही कुछ ऐसा था। सरला चाची की नंगी चिकनी मलाई जैसी गोरी पीठ दरवाजे की तरफ थी जिस पर नजर पड़ते ही शुभम की उत्तेजना बढ़ने लगी थी उनके बदन पर केवल पेटिकोट भर् थी.... सरला की नंगी चिकनी पीठ देखकर ही शुभम के लंड में तनाव आना शुरू हो गया था। बाल खुले हुए थे जो कि इस समय एकदम गीले थे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अभी अभी नहा कर आई हो।
सरला चाची की अर्ध नग्न बदन को देखकर शुभम को ऐसा ही लग रहा था कि उसकी आंखों के सामने कोई कामदेवी खड़ी हो और सरला चाची के बदन का पीछे का भाग बहुत ही खूबसूरत लग रहा था इस उम्र के पड़ाव पर भी सरला चाची के बदन का कसाव लगभग लगभग बरकरार था। कमर से पेटीकोट कस के बाद ही होने की वजह से पेटीकोट की दूरी कमर में जैसे हल्का सा अंदर की तरफ धंस गई हो और उसकी वजह से पेटीकोट की डोरी के इर्द-गिर्द हल्का सा बदन का उठाव बदन को और ज्यादा मोहक बना रहा था.... शुभम का दिल जोरों से धड़क रहा था वह अलमारी में कुछ ढूंढ रही थी। उसका वहां ज्यादा देर तक खड़ा रहना उचित नहीं था लेकिन उसे सरला चाची के बदन का और ज्यादा हिस्सा देखने का मन कर रहा था... बदन पर केवल पेटिकोट पहने होने की वजह से शुभम अच्छी तरह से जानता था कि कमर के ऊपर का पूरा बदन निर्वस्त्र था जिससे उसकी चूची भी एकदम नंगी थी और वह उसे देखने के लिए आह भर रहा था...
सरला इस बात से बेखबर कि उसे अर्धनग्न अवस्था में दरवाजे पर खड़े होकर शुभम उसकी खूबसूरती के जाम को अपनी आंखों से पी रहा है वह अपने आप में ही खोए हुए अलमारी में से ब्रॉ ढुंढ रही थी।
वैसे तो काफी अरसा गुजर गया था सरला को ब्रा और पेंटी पहने लेकिन जिस दिन से शुभम ने उसकी खूबसूरती की तारीफ किया था तब से उसकी इच्छा ब्रा पेंटी पहनने के लिए करने लगी थी और वह उसे पहनना शुरू भी कर दी थी क्योंकि वह आईने के सामने नंगी होकर अपने बदन को निहारती रहती थी और अपनी चुचियों के कसाव को बरकरार रखने के लिए वह समझ गई थी कि उसे ब्रा पहनना बहुत जरूरी है वरना उसकी चूची दूसरी औरतों की तरह लटक जाएगी क्योंकि शीसे मैं से जिस तरह की खूबसूरती से भरे बदन को उसने अपनी आंखों से देखी थी तब से उसके मन की भी इच्छा अपने बदन की रखरखाव करने के लिए बढ़ने लगी थी।
इसलिए तोबा अलमारी में से ब्रा ढूंढ रही थी अब शुभम के लिए वहां ज्यादा देर तक खड़ा रहना ठीक नहीं था लेकिन उसके मन में सरला की बड़ी-बड़ी चुचियों को देखने की प्यास बढ़ती जा रही थी लेकिन कैसे देखना है यह उसे पता नहीं था क्योंकि इस तरह से कमरे के अंदर जाने में भलाई नहीं थी... और वहां खड़े रहकर सरला के घूमने का इंतजार करना बेवकूफी भरा था क्योंकि इससे सरला को शक हो सकता था कि वह काफी देर से दरवाजे पर खड़े होकर उसके नंगे बदन को देख रहा था जिससे हो सकता है सरला को यह बात खराब लगी ऐसा सोचकर शुभम कुछ तरकीब सोचने लगा और वापस अपने कदम को कमरे से बाहर कर लिया... कमरे से बाहर कदम खींचे अभी उसे 4 - 5 सेकंड का ही वक्त गुजरा था कि .. वह बिना वक्त गांव आए झटके से दरवाजे को खोलता हुआ अंदर आते हुए आवाज लगाया....
सरला चाची कहां हो.... मैं तुम्हारा कब से.....(इतना कहने के साथ ही सामने का नजारा देखकर शुभम के शब्द उसके गले में ही अटके रह गए... क्योंकि इस तरह से दरवाजा खुलने की वजह से सरला को इस बात का एहसास बिल्कुल भी नहीं हुआ कि दरवाजे पर शुभम है वह सोचा कि उसकी बहू रुचि ने दरवाजा खोला है इसलिए वह बिना सोचे समझे शुभम की तरफ घूम गई लेकिन सामने शुभम को कमरे में आता देखकर वह एकदम से चौंक गई...शुभम तो जानबूझकर चौक ने का नाटक कर रहा था क्योंकि यह उसकी युक्ति ही थी इस तरह से कमरे में प्रवेश करने की वजह जताना चाहता था कि वह कमरे में अनजाने में ही आया है जानबूझकर कुछ भी नहीं किया है इसलिए वह चौक ने का नाटक करने लगा लेकिन सरला तो वास्तव में चौक गई थी वजह से ही शुभम की तरफ घूमी थी उसकी नंगी चूचियां अपनी मदहोश जवानी का प्रदर्शन करते हुए शुभम की आंखों के सामने पानी भरे गुब्बारे की तरह लहराने लगी और उन्हें एकटक देखकर शुभम की आंखों में चमक आ गई उसकी आंखों में खुमारी जाने लगी उसे उम्मीद नहीं थी कि सरला चाची की चूचियां इतनी खूबसूरत होंगी... वह एकटक सरला चाची की गोल-गोल खरबूजे जैसी चूचियों को देखता ही रह गया जैसा उसने सोचा था कि सरला चाची की चुचियों में कसाव नहीं होगा ऐसा बिल्कुल भी नहीं था वह तो सरला चाची की चूचियों को देखा तो देखता ही रह गया लगभग लगभग सरला चाची की चूचियां उसकी मां की चुचियों जैसी जी हुबहू नजर आ रही थी बस थोड़ा सा फर्क था कि उसकी मां की चुचियों का कसाव कुछ ज्यादा ही था। लेकिन फिर भी सरला चाची की चूचियां किसी से कम नहीं थी एक बहू वाली होने के बावजूद भी सरला चाची कहीं से भी नहीं लगती थी कि वह सांस बन चुकी है... शुभम तो बस प्यासी नजरों से एक अटक सरला की भरपूर छातियों को देखे जा रहा था और सरला भी उसकी तरफ घूम कर अनजाने में ही अपनी मदमस्त चूचियों के दर्शन उसे करा रही थी ...दरअसल यह सब इतनी जल्दी हुआ कि सरला यह बात भूल गई की कमर के ऊपर उसने किसी भी प्रकार के वस्त्र नहीं पहने हुए हैं और उसकी चुचियां एकदम नंगी है। सरला भी कुछ सेकंड तक अपनी चुचियों को ढकने की जगह शुभम को ही देखती रह गई क्योंकि उसे भी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि कमरे में इस तरह से शुभम आ जाएगा.... लेकिन जब इस बात का एहसास सरला को हुआ कि उसकी आंखों के सामने एक गैर मर्द शुभम अब एक भरपूर जवानी से भरा हुआ मर्द ही था।जो कि उसकी चूचियों की तरफ देख रहा था इस बात का अहसास होते ही सरला के मुख से हल्की सी चीख निकल गई....
आअअअअअअअअ....... (इस तरह की चीख निकलने के साथ ही वह बिस्तर पर पड़ी टावेल को पकड़कर अपनी चुचियों को ढकने की कोशिश करने लगी लेकिन हड़बड़ाहट में उसके हाथ से टावल छुट कर नीचे गिर गई..टावल नीचे गिरने की वजह से वह अपने अंगों को ना छुपा पाने के कारण पूरी तरह से घबरा गई थी... और शुभम इतना डिठ हो चुका था किवह अपने मन में निश्चय कर लिया था कि जब तक सरला अपनी चुचियों को उसकी आंखों से नहीं दूर करेगी तब तक वह उसे जी भर कर देखता रहेगा...
और हड़बड़ाहट में कुछ हाथ ना आता देखकर सरला अपने दोनों हथेलियों में अपनी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चुचियों को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी अब शुभम की बारी थी वह एकदम से चौंक ने का नाटक करते हुए बोला...
सससससस..... सॉरी सॉरी सॉरी सॉरी चाची सॉरी (इतना कहते हुए वह दरवाजे की तरफ घूम गया...लेकिन तब तक उसने सरला चाची की मदहोश जवानी के दोनों उड़ते हुए कबूतरों को देख लिया था शुभम अपने मन की कर लिया था।)
मुझे माफ करना चाची मुझे नहीं मालूम था कि आप ..... आप इस तरह से कमरे में होंगी मैं तो आपको ढूंढता ढूंढता यहां तक आ गया था मुझे मालूम नहीं था चाची मुझे माफ करना....(इतना कहते हुए वह जानबूझकर फिर से सरला की तरफ घुमा तो सरला की मासूमियत और जिस तरह से उसने अपनी दोनों हथेलियों में अपने दोनों खरबूजे को छुपाने की नाकाम कोशिश करते हुए खड़ी थी उसे देखकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया और एक बार फिर से छूटने का नाटक करता हुआ फिर से दरवाजे की तरफ घूम गया और बोला...)
मुझे माफ करना चाहिए मुझे नहीं मालूम था।
(माफी मांगते हुए शुभम अपनी सभ्यता का परिचय दे रहा था जो कि वह लगभग सरला के दिलों दिमाग पर अपनी चालबाजी का मस्का लगा रहा था और उस मस्के का असर सरला पर बखूबी हो भी रहा था लेकिन जब दुबारा शुभम उसकी तरफ घुमा था तब सरला की नजर उसकी टांगों के बीच पेंट में बने तंबू की तरफ चली गई थी और उसे इस बात का अंदाजा लग गया था कि शुभम का लंड खड़ा हो रहा था...
शुभम के पेंट में बने तंबू को देखकर उसे इस बात का एहसास हो गया कि शुभम का लंड खड़ा हो गया था और इस बात को जानते हैं ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके दिल की धड़कने बढ़ने लगी हो उसके होश उड़ने लगे थे। वह शुभम से कुछ ज्यादा नहीं कह पाई बस उसे इतना कहीं....
कोई बात नहीं सुभम तुम जाओ मैं तैयार होकर आती हूं..
(इतना सुनकर वह सरला की तरफ देखे बिना ही जानबूझकर एक बार फिर सॉरी कहते हुए कमरे से बाहर चला गया उसका काम बन चुका था वह मन ही मन मुस्कुरा रहा था उसकी आंखों के सामने जिस तरह का नजारा पैसा आया था उसे देखकर उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था उसकी आंखों ने उम्मीद से दुगुना नजारे का दर्शन जो कर लिया था सरला चाची की मदहोश जवानी के सबूत उसके दोनों फड़फड़ाते हुए कबूतर थे .... जोकि चिल्ला चिल्ला के कह रहे थे कि अभी भी वह जवान है...
शुभम अपनी उत्सुकता को उत्तेजना में बदल कर वापस सीढ़ियों से नीचे उतर गया...
सरला इस पल को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रही थी वह मंद मंद मुस्कुराने लगी अभी भी वह अपने दोनों हथेलियों से अपनी दोनों चुचियों को छुपाए हुए थे उसे इस बात का एहसास तक नहीं हुआ कि शुभम वापस चला गया है वह काफी खुश नजर आ रही थी इसका एक कारण था कि उसकी आंखों ने शुभम के पेंट में बने तंबू को देख ली थी जो कि इस बात का प्रतीक था कि उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था और वह सिर्फ उसकी मदहोश कर देने वाली सूचियों की वजह से था जिसे सुबह एक टक तक खा जाने वाली प्यासी नजरों से देख रहा था इस बात से वह काफी खुश नजर आ रही थी क्योंकि उसे लगने लगा था कि अभी भी उसकी मदहोश जवानी और उसका खूबसूरत बदन किसी के भी सोए हुए लंड को जगाने में सक्षम है।
उसे इस बात की पूरी तरह से तसल्ली हो गई थी कि उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां देकर शुभम का लंड खड़ा हो गया था वह एक बार फिर से आईने में अपने आप को देखने लगी और उसे अपनी चुचियों पर गर्व होने लगा ....खामखा वह एक नीरस जिंदगी जी रही थी जो कि शुभम की वजह से बदलने लगी थी और आज वह शुभम को खाने पर निमंत्रण देकर अच्छे से तैयार होना चाहती थी ताकि वह उसकी खूबसूरती की तारीफ और अच्छे से कर सके।
उसका शुभम को घर पर खाने पर बुलाना लगभग लगभग सफल होता नजर आ रहा था कुछ इस तरह की खूबसूरती के दर्शन उसे कराना चाहती थी अनजाने में उससे कई ज्यादा वह अपने बदन की खूबसूरती का प्रदर्शन कर चुकी थी।
और उसके बदन की खूबसूरती का प्रदर्शन का जादू शुभम के ऊपर पूरी तरह से हो गया इस बात की तसल्ली उसे इस बात से मिल चुकी थी कि कमरे में आकर शुभम का लंड खड़ा हो गया था एक जवान होता लड़का जब उसकी बड़ी-बड़ी चुचियों को देखा कर उत्तेजित हो सकता है तो वह उसके साथ क्या क्या कर सकता है। इस बात का ख्याल उसे अनजाने में ही आ गया था और अपने इस बात पर गौर करके उसे अपने आप पर शर्म भी आ रहे थे कि वह यह कैसी बातें सोचने लगी शुभम उसके बेटे की उम्र का है भले ही छोटा क्यों ना हो वह उसको लेकर इतना ज्यादा उत्तेजित क्यों है उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन उसे संपूर्ण संतुष्टि का अहसास हुआ था और वह खुश होकर फिर से अलमारी खंगालने लगी थी वह अपनी पसंदीदा ब्रा पहनना चाहती थी।
और दूसरी तरफ सरला चाची के कमरे से निकलकर सीढ़ियों से नीचे जाकर सीधा वह रुचि से मिलने के लिए रसोई घर में चला गया...