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Guest
बालों में गजरा... आंखों में कजरा.. होठों पर बेहद गाड़ी लाल लिपस्टिक... चेहरे पर भरपूर मेकअप.. फिर उस औरत ने मेरी प्रियंका दीदी को नाक में एक नथनी पहनाई.... मांग टीका... फिर गले में सोने का बना हुआ हार... कमर में कमर बंद.. हाथों में चूड़ियां और कंगन... मैंने जब गौर से देखा तो मुझे पता चला कि उनके हाथों में मेहंदी भी रची गई है... पैरों में पायल सोने की... स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा लग रही थी मेरी प्रियंका दीदी... मेरी रूपाली दीदी भी कुछ इसी प्रकार से सजी हुई थी.... मेरे लिए आश्चर्य की बात बस इतनी थी कि मेरी रूपाली दीदी की मांग में जो सिंदूर हमेशा दिखता है वह गायब था और उनका मंगलसूत्र जो हमेशा उनकी चूचियों पर लटका हुआ रहता है वह भी नदारद था....
पैंट के ऊपर से ही अपने हथियार को अपने हाथ में पकड़े हुए मैं अपनी दोनों दीदियों को देख रहा था मंत्रमुग्ध होकर....
अंदर जो मजदूर उस औरत की मदद कर रहा था , बार-बार अपने लोड़े पर अपना हाथ फिरा रहा था, और शायद मन ही मन अपनी किस्मत को कोस रहा होगा...
मेरी दोनों दीदी अब बिल्कुल नई नवेली दुल्हन की तरह सज धज के तैयार थी अपने नए दूल्हे के लिए..
बन्नो आज तो बहुत घमासान होगा... पूरी रात तुम्हारी घिसाई होगी.. उस औरत ने कहा...
मेरी प्रियंका दीदी शर्म के मारे लाल हो गई और अपना सर नीचे झुका ली.. उस औरत ने मेरी प्रियंका दीदी के चेहरे को पकड़ के ऊपर किया और उनकी आंखों में आंखें डाल कर बोली..
छमिया बड़ी शर्मीली है रे तू... हमारे असलम भाई को तेरी जैसी छोकरी बहुत पसंद आती है.... बहुत कस कस कर लेंगे तुम्हारी...
तुमको तो पता है ना उनका हथियार इतना बड़ा है.. उस औरत ने अपने हाथ को मोड़ हाथ की लंबाई को दिखाते हुए कहा..
अरे हां तुम्हारी दीदी को तो पता है असलम भाई के हथियार के बारे में.... इसने तो खूब लिया है, आगे से भी और पीछे से भी... तुझे तो ऐसा ठेल देंगे कि तू बिस्तर से उठ भी नहीं पाएगी... उस औरत ने मेरी प्रियंका दीदी की दोनों चुचियों का जायजा लिया... चोली के ऊपर से उसने दो तीन बार दबाया... मेरी रूपाली दीदी चुपचाप उसकी हरकतें देख रही थी और मैं भी खिड़की के बाहर खड़ा ..
मजदूर भी अब सोफे पर जाकर बैठ गया था और बड़ी बेशर्मी से अपने लोड़े को मसल रहा था..
एक बार तो मुझे ऐसा लगा कि मेरे दोनों नए होने वाले जीजू से पहले ही यह मजदूर मेरा जीजा बन जाएगा... लेकिन उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया और अपना लौड़ा पकड़कर मेरी दीदियों को देखता रहा.. मन ही मन सुहागरात मनाने के सपने देख रहा था वह मेरी दीदी के साथ...
तेरा नाम क्या है छमिया.. उस औरत ने प्रियंका दीदी से पूछा..
जी प्रियंका... थरथरआते हुए मेरी दीदी ने जवाब दिया..
सुन रे छोकरी.. हमारे असलम भाई बहुत दूसरे टाइप के आदमी है.. उनका मन बस एक छेद से नहीं भरता... आज रात भर तुम्हारी दोनों छेद में भूकंप आएगा... तू समझ तो रही है ना मैं क्या कह रही हूं...
मेरी प्रियंका दीदी रूपाली दीदी की तरफ देखने लगी... पर रूपाली दीदी ने कुछ भी जवाब नहीं दिया...
साली अपनी दीदी की तरफ क्या देख रही है कुत्तिया... यह रंडी तो खेली खाई है... जो मैं बोल रही हूं उसे ध्यान से सुन.... उस औरत ने मेरी प्रियंका दीदी कि चोली के ऊपर से उनके निप्पल को मरोड़ दिया...
सुन छोकरी.. आज तेरी सुहागरात है... और असलम भाई आज तेरी कुंवारी सील तो तोड़ेंगे उसके बाद तेरी गांड भी मारेंगे... जैसे तेरी दीदी की मारते हैं... और हां मर्दों से रहम की उम्मीद मत करना..."जब बिन्नो तेरे गांड के छल्ले को रगड़ता,दरेरता ,फाड़ता घुसेगा न , एकदम आग लग जायेगी गांड में। लेकिन मर्द दबोच के रखता है उस समय , वो पूरा ठेल के ही दम लेगा। जब एक बार सुपाड़ा गांड का छल्ला पार कर गया तो तुम लाख गांड पटको , .... निकलेगा नहीं... पूरी बेशर्मी के साथ वह मेरी प्रियंका दीदी को समझा रही थी..
पैंट के ऊपर से ही अपने हथियार को अपने हाथ में पकड़े हुए मैं अपनी दोनों दीदियों को देख रहा था मंत्रमुग्ध होकर....
अंदर जो मजदूर उस औरत की मदद कर रहा था , बार-बार अपने लोड़े पर अपना हाथ फिरा रहा था, और शायद मन ही मन अपनी किस्मत को कोस रहा होगा...
मेरी दोनों दीदी अब बिल्कुल नई नवेली दुल्हन की तरह सज धज के तैयार थी अपने नए दूल्हे के लिए..
बन्नो आज तो बहुत घमासान होगा... पूरी रात तुम्हारी घिसाई होगी.. उस औरत ने कहा...
मेरी प्रियंका दीदी शर्म के मारे लाल हो गई और अपना सर नीचे झुका ली.. उस औरत ने मेरी प्रियंका दीदी के चेहरे को पकड़ के ऊपर किया और उनकी आंखों में आंखें डाल कर बोली..
छमिया बड़ी शर्मीली है रे तू... हमारे असलम भाई को तेरी जैसी छोकरी बहुत पसंद आती है.... बहुत कस कस कर लेंगे तुम्हारी...
तुमको तो पता है ना उनका हथियार इतना बड़ा है.. उस औरत ने अपने हाथ को मोड़ हाथ की लंबाई को दिखाते हुए कहा..
अरे हां तुम्हारी दीदी को तो पता है असलम भाई के हथियार के बारे में.... इसने तो खूब लिया है, आगे से भी और पीछे से भी... तुझे तो ऐसा ठेल देंगे कि तू बिस्तर से उठ भी नहीं पाएगी... उस औरत ने मेरी प्रियंका दीदी की दोनों चुचियों का जायजा लिया... चोली के ऊपर से उसने दो तीन बार दबाया... मेरी रूपाली दीदी चुपचाप उसकी हरकतें देख रही थी और मैं भी खिड़की के बाहर खड़ा ..
मजदूर भी अब सोफे पर जाकर बैठ गया था और बड़ी बेशर्मी से अपने लोड़े को मसल रहा था..
एक बार तो मुझे ऐसा लगा कि मेरे दोनों नए होने वाले जीजू से पहले ही यह मजदूर मेरा जीजा बन जाएगा... लेकिन उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया और अपना लौड़ा पकड़कर मेरी दीदियों को देखता रहा.. मन ही मन सुहागरात मनाने के सपने देख रहा था वह मेरी दीदी के साथ...
तेरा नाम क्या है छमिया.. उस औरत ने प्रियंका दीदी से पूछा..
जी प्रियंका... थरथरआते हुए मेरी दीदी ने जवाब दिया..
सुन रे छोकरी.. हमारे असलम भाई बहुत दूसरे टाइप के आदमी है.. उनका मन बस एक छेद से नहीं भरता... आज रात भर तुम्हारी दोनों छेद में भूकंप आएगा... तू समझ तो रही है ना मैं क्या कह रही हूं...
मेरी प्रियंका दीदी रूपाली दीदी की तरफ देखने लगी... पर रूपाली दीदी ने कुछ भी जवाब नहीं दिया...
साली अपनी दीदी की तरफ क्या देख रही है कुत्तिया... यह रंडी तो खेली खाई है... जो मैं बोल रही हूं उसे ध्यान से सुन.... उस औरत ने मेरी प्रियंका दीदी कि चोली के ऊपर से उनके निप्पल को मरोड़ दिया...
सुन छोकरी.. आज तेरी सुहागरात है... और असलम भाई आज तेरी कुंवारी सील तो तोड़ेंगे उसके बाद तेरी गांड भी मारेंगे... जैसे तेरी दीदी की मारते हैं... और हां मर्दों से रहम की उम्मीद मत करना..."जब बिन्नो तेरे गांड के छल्ले को रगड़ता,दरेरता ,फाड़ता घुसेगा न , एकदम आग लग जायेगी गांड में। लेकिन मर्द दबोच के रखता है उस समय , वो पूरा ठेल के ही दम लेगा। जब एक बार सुपाड़ा गांड का छल्ला पार कर गया तो तुम लाख गांड पटको , .... निकलेगा नहीं... पूरी बेशर्मी के साथ वह मेरी प्रियंका दीदी को समझा रही थी..