• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Adultery एक अधूरी प्यास- 2

शुभम का आज का दिन बेहद ही अद्भुत और आनंद में गुजरा था उसे अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा था कि आज वह अपने लंड का पानी है शीतल मैडम के मुंह में निकाल कर आया था।वह मन में यही सोच कर परेशान हो रहा था कि अच्छा ही हुआ कि आज उसकी मां उसके साथ स्कूल नहीं गई वरना ऐसा मौका उसे ना जाने कब हाथ लगने वाला था।

धीरे-धीरे करके शुभम इस खेल में एक मजा हुआ खिलाड़ी बनता जा रहा था। वह शीतल के साथ इस खेल में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था उसे अपनी किस्मत पर पूरा यकीन था कि आज उसके मुंह में लंड डालकर जो सुख मिला है एक न एक दिन जरूर अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर में डालकर उसकी चुदाई से अपने आप को तृप्त कर पाएगा और वह उस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहा था।

स्कूल से छूटने के बाद जब वह अपने घर पहुंचा तो घर के बाहर उसकी एकदम नई बाइक इंतजार कर रही थी जिसे देखकर वह फूला नहीं समा रहा था...

वह बहुत खुश हुआ और अपनी बाइक को उसके चारों तरफ घूम कर उसे नजर भर कर देखने लगा उसे बाइक चलाने का बहुत शौक था लेकिन अपने इस शौक के बारे में वह कभी अपने मम्मी पापा को बोल नहीं पाया था लेकिन आज उसके पापा ने उसे बाइक दिलाने का वादा पूरा करके मानो उसे सारे जहां की खुशियां उसकी झोली में डाल दी हो वह बहुत खुश था और जल्दी से डोरबेल बजाकर...घर में प्रवेश करना चाहता था वह अपने पापा को नई बाइक के लिए धन्यवाद देना चाहता था डोर बेन की आवाज सुनते ही निर्मला समझ गई कि शुभम आ गया है इसलिए वह भी जल्दी से दरवाजा खोल दे दरवाजा खुलते ही वह तुरंत अपनी मां के गले लग गया... और वह उसे एकदम खुशी के जोश में निर्मला को उसकी कमर के नीचे से पकड़ कर उसे अपनी गोद में उठा लिया ...

अरे क्या कर रहा है पागल हो गया क्या दरवाजा खुला है अगर कोई देख लिया तो....

देख लेने दो मम्मी मुझे किसी का डर नहीं है आज पापा ने मुझे बाइक गिफ्ट देकर मुझे एकदम खुश कर दिए हैं....(शुभम यह कहते हुए अपनी मां को अपनी मजबूत भुजाओं में उठाए हुए इधर से उधर घूम रहा था...शुभम को शायद खुशी के इस पल में इस बात का अहसास नहीं था कि वह अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को अपनी भुजाओं में दबाकर उसे उठाए हुए था लेकिन इस बात का एहसास निर्मला को अंदर तक उत्तेजित कर गया अपने बेटे की मजबूत भुजाओं में अपने आपको पाकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गई थी.. और खास करके अपने बेटे की भुजाओं की शक्ति पन का एहसास अपनी गोल गोल नितंबों पर पाकर बाल एकदम मदहोश होने लगी थी... शुभम का उत्साह देखकर ऐसा लग रहा था कि वह उसे नीचे जमीन पर उतारने वाला नहीं है वह उसी तरह से अपनी मां को अपने हाथों में उठाए हुए इधर से उधर भाग रहा था और अपने पापा के बारे में पूछ रहा था....)

तेरे पापा घर में नहीं है वह ऑफिस गए हैं....(निर्मला उत्तेजित स्वर में बोली ऐसा लग रहा था कि मानो वह जानबूझकर उसे इस बात का एहसास दिला रही थी कि घर पर उन दोनों के सिवा कोई तीसरा नहीं है...)

क्या पापा घर पर नहीं है. ! (ऐसा कहकर मानो वह कुछ सोचने लगा...जैसे उसे अब इस बात का एहसास होने लगा था कि घर में उन दोनों के सिवा तीसरा कोई नहीं है.... वह जब यह बात सोच रहा था तो निर्मला उसे बड़े गौर से देख कर मुस्कुरा रही थी... अपनी मां के लाल लाल होठों पर चमक रही लिपस्टिक को देखकर उसकी आंखों में खुमारी छाने लगी...वह भी बड़े उत्साहित नजरों से अपनी मां के खूबसूरत चेहरे को देखकर मंद मंद मुस्कुरा रहा था मानो इशारों ही इशारों में कह रहा हो कि ऐसी खुशी के मौके पर जश्न तो बनता है ।. ... इसलिए वह एकदम चहकते हुए बोला।)

मतलब मम्मी घर में केवल मैं और तुम हो...

हां तो इतनी देर से मैं तुझे क्या कह रही हो। ...(निर्मला अपने बेटे की हरकत की वजह से काफी उत्तेजित हो रही थी उसकी टांगों के बीच की पत्नी दरार में से नमकीन रस का झरना बहने लगा था जो कि उसकी पेंटी को गीला कर रहा था... और जिस तरह से शुभम उसे उठाए हुए था निर्मला की दोनों बड़ी-बड़ी चूचियां शुभम के चेहरे को अपने दोनों घाटियों के बीच छुपाए हुए थे इस बात का एहसास शुभम को बहुत जल्द ही हो गया क्योंकि निर्मला जानबूझकर बहुत गहरी गहरी सांस ले रही थी जिससे दोनों चुचियों के बीच का दबाव शुभम के चेहरे पर बराबर बन रहा था...)

अब उतारेगा मुझे या ऐसे ही लटकाए रहेगा....

नहीं मैं तुम्हें ऐसे ही उठाए रहूंगा...(इतना कहते हुए सदन दरवाजे की तरफ जाने लगा..)

यह क्या पागलपन है सुभम मुझे नीचे उतार....(हालांकि यह बात निर्मला ऊपरी मन से कह रही थी और अंदर ही अंदर वह यही चाह रहे थे कि उसका बेटा उसे ऐसे ही अपनी मजबूत भुजाओं उठाए रहे...देखते ही देखते शुभम दरवाजे तक पहुंच गया और बिना अपनी मां को नीचे जमीन पर उतारे एक हाथ से दरवाजा बंद करके उसे लॉक कर दिया....)

यह क्या कर रहा है शुभम...?

वही जो एक मर्द को एक खूबसूरत औरत के साथ करना चाहिए...(इतना कहते हुए शुभम अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए अपनी मां को नीचे उतारे बिना ही उसे दीवार से सटा दिया... और अपने मुंह से ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी मां की दोनों चुचियों को बारी-बारी से दांतो से दबाना शुरू कर दिया अपने बेटे की इस हरकत की वजह से निर्मला एकदम उत्तेजित होने लगी उसकी बुर कुलबुलाने लगी... और देखते ही देखते उत्तेजित अवस्था में उसकी दोनों चूचियों की दोनों निप्पल एकदम कड़क हो गई मानो कि जैसे कैडबरी की छोटी चॉकलेट हो और शुभम उसे अपने दांतो में भरकर हल्के-हल्के काट रहा था जिससे निर्मला के बदन में सुरूर चढ़ रहा था।

निर्मला के सांसो की गति तेज होती जा रही थी वह अपने आप पर नियंत्रण नहीं कर पा रही थी जिस तरह से शुभम उसे अपनी दोनों हाथों से उठाकर दीवार से सटाए हुए था .. वह निर्मला की नजर में काबिले तारीफ था अपने बेटे की ताकत को देखकर उसे बहुत गर्व महसूस हो रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि वह वजन में काफी भारी थी लेकिन जिस शिद्दत से वह दोनों हाथों में उसे उठाकर कई मिनटों तक बिना थके उसके बदन से खेल रहा था यह देखकर निर्मला और भी ज्यादा उत्तेजित होने लगी...अपनी बेटी को ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी निप्पल काटता हुआ देखकर निर्मला से रहा नहीं गया और वह अपने हाथों से अपने ब्लाउज के बटन खोल कर अपनी चूची को बारी-बारी से सुकून के मुंह में डालकर उससे चूस वाना शुरू कर दी..

शुभम विजय से छोटे बच्चे की तरह दूध की बोतल समझ कर अपनी मां की दोनों चुचियों को बारी-बारी से मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया यह सब काफी उत्तेजनात्मक था। इसका असर शुभम की दोनों टांगों के बीच बहुत ही बुरी तरह से हो रहा था उसके लंड की नसे रक्त के प्रवाह को नियंत्रण कर सकने में असमर्थ साबित हो रही थी जिससे शुभम को उसके खड़े लंड में हल्का हल्का दर्द महसूस हो रहा था। निर्मला लगातार गर्म शिकारियों के साथ अपने बेटे को उसकी चूची पिला रही थी।

दोनों काफी गर्म हो चुके थे शुभम अच्छी तरह से समझ गया था कि ज्यादा देर तक वह अपनी मां को इस तरह से उठाकर दीवार से सटाए नहीं रख सकता है इसलिए उसे जो करना था बहुत ही जल्द करना था... वह तुरंत एक हाथ से अपने पेंट की बटन खोल कर तुरंत उसे नीचे घुटनों तक गिरा दिया...और वैसा ही अपनी अंडरवियर के साथ भी किया देखते ही देखते उसका मोटा खड़ा लंड हवा में लहराने लगा....

निर्मला को वैसे तो कुछ नजर नहीं आ रहा था कि शुभम के नीचे क्या हो रहा है लेकिन जिस तरह से वह उसे एक हाथ से संभाल कर उठाए हुए था और दूसरे हाथ से अपने नीचे कुछ हरकत कर रहा था वह समझ गई कि अब वह उसे चोदने की तैयारी कर रहा है जिससे काफी उत्साहित हो गई। वह जल्द से जल्द अपनी रसीली बुर के ऊपर अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड के मोटे सुपाड़े का स्पर्श महसूस करना चाहती थी।वह काफी उत्साहित होकर अपनी चूचियों को अपने बेटे के मुंह में ठूंस कर उसे जबरदस्ती पिला रही थी....

ले पी मेरे बेटे जी भर कर पी आहहहहहहहह ..बहुत मस्त छोकरा है रे तू मैंने आज तक तेरे जैसा छोकरा नहीं देखी... अच्छा हुआ कि तू मेरा बेटा है वरना अगर तू किसी और का छोकरा होता और मुझे इस बात का एहसास होता कि तेरे पास बेहद मोटा तगड़ा दर्द है तो कसम से मैं अपनी सारी मर्यादा लांघ कर तेरे मोटे तगड़े लंड पर खुद चढ़ जाती है और तुझसे चुदवाने का मजा लूटती...

तो अभी क्या कर रही है अभी भी तो वही कर रही है मेरी रानी सच कहूं तो जब तक मेरा लंड तेरे बुर मे नहीं जाता तब तक मुझे इस बात का अहसास ही नहीं होता कि चुदाई किसे कहते हैं...(शुभम अपने हाथ में अपना मोटा तगड़ा लंड पकड़ कर उसे हिलाते हुए बोला. ।)

तू साला बहुत हारामी है तब मादरचोद हो गया है मौका मिलता नहीं की चोदना शुरू कर देता है

तू चीज ही ऐसी है मेरी जान कि तुझे देखते ही लंड खड़ा हो जाता है।

अपने लंड को जरा काबू में रखा कर यह मुझे भी बेकाबू कर देता है....

सच कहूं तो मेरी जान तू बेलगाम घोड़ी है और तुझे लगाम मैं कसने के लिए इसी हथियार का उपयोग करना पड़ता है।

साला तू भी तो खुला सांड है जब देखो तब अपना लहराता हुआ लंड लेकर घूमता रहता है इसी ताक में कि कब बुर में डाल दु....

अब सांड कह रही है तो मादरचोद देख ये सांड क्या करता है...(इतना कहते हुए शुभम थोड़ा सा अपनी मां के बदन को नीचे की तरफ लाकर उसे अपने लंड के सामने उसकी बुर की स्थिति मे लाने लगा... अब निर्मला की बुर और उसके बेटे के लंड के एकदम करीब आ चुकी थी। जिसकी गर्मी का एहसास सुभमको अपना लंड पर बराबर हो रहा था...)

दिखाना मादरचोद में भी देखना चाहती हूं कि तू क्या करता है देखो तो सही तेरे लंड में कितना दम है...

अच्छा साली मेरा दम देखेगी मिलेंड में इतना दम है कि तेरी बुर में डालकर तुझे अपने लंड के सहारे दीवार पर खड़ा कर सकता हूं।

तो करना खड़ा कि सिर्फ बातें बनाता रहेगा।

(दोनों मां-बेटे की मर्यादा को भूलकर एक मर्द और औरत बन चुके थे और दोनों अश्लील भाषा में बात करते हुए आनंद से भाव विभोर होते जा रहे थे दोनों की उत्तेजना की पराकाष्ठा परम शिखर पर थे अपनी मां की बात सुनकर शुभम एकदम जोश में आ गया था और तुरंत एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर अपनी मां की रसीली बुर से लगाता हुआ एक जोरदार धक्का मारा जो कि इस धक्के के साथ है शुभम का मोटा तगड़ा लंड अपनी मां की बुर की चिकनाई पाकर सरसराता हुआ अंदर घुस गया....

आहहहहहहह मादरचोद भोसड़ी के इतना जोर से धक्का क्यों मार रहा है।

क्यों मेरी जान मुझे सांड बोल रही थी ना तो देख ले 1 सांड से चुदवाने मे कितना मजा आता है।

(इतना कहते हो शुभम बिना रुके अपनी कमर को आगे पीछे करके लाना शुरू कर दिया शुभम का मोटा तगड़ा लंड अपनी मां की रसीली बुर की चिकनाई पाकर एकदम जोश से भर चुका था... और धक्के पर धक्का लगाना शुरू कर दिया निर्मला को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि शुभम उसे इस तरह से उठाए हुए चोदेगा।

निर्मला अपने बेटे की इस ताकत से एकदम उसके ऊपर वारी वारी जा रही थी।उसे यह सब महसूस होता था कि जब भी वह उसके साथ रहती थी तो ऐसा लगता था कि उसके बेटे की ताकत चार गुनी और ज्यादा बढ़ गई है। वह लगातार अपनी बुर की गहराई में अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड की ठोकर को साफ महसूस कर रही थी और उसकी रफ्तार एक बराबर थी फच फच की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था।शुभम अभी भी अपनी मां को अपने दोनों हाथों से उठाए हुए अपनी कमर आगे पीछे करते हुए जोरदार चुदाई कर रहा था।

एक तो बाइक मिलने की खुशी और दूसरी निर्मला की मदमस्त जवानी दोनों पाकर शुभम निहाल हुए जा रहा था। उसका लंड किसी पिस्टन की तरह चल रहा था। लगातार निर्मला की बुर से नमकीन पानी का झरना बह रहा था।

शुभम लगभग ऐसे ही 20:25 मिनट तक अपनी मां को अपनी भुजाओं के दम पर उठाए हुए उसकी बुर में अपना लंड चलता रहा और वह भला भला कर झड़ गया। दोनों एकदम तृप्त हो चुके थे।

शाम को शुभम नई बाइक लेकर बाजार टहलने निकल गया और उसे बाजार में सरला चाची मिल गई।

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 
शुभम की नजर जैसे ही सरला चाची पर पड़ी वह खुश हो गया... उसके मन में सरला चाची को बाइक पर अपने पीछे बैठाने की इच्छा जागरूक हो गई.. क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि बाइक पर औरतों का पीछे बैठने का मतलब था कि उनके बदन का स्पर्श और वह भी खास करके उनके मन कोमल अंगों का स्पर्श जिसे वह हमेशा वस्त्रों में ढक कर रखती हैं.. वैसे भी शुभम का मन सरला की बड़ी-बड़ी चुचियों को छुने का करता रहता है।

क्योंकि ब्लाउज के ऊपर से और उस दिन जब वह भोजन का आमंत्रण स्वीकार करके सरला के घर गया था तब अनजाने में ही उसके कमरे में पहुंचकर जिस तरह का नजारा उसने अपनी आंखों से देखा था खास करके उसकी नग्न बड़ी-बड़ी चुचियों को देखकर जिस तरह की प्यास उसके मन में उन्हें छूने को बढ़ने लगी थी आज उसी प्यास को थोड़ा बहुत वह उसकी रगड़ को अपनी पीठ पर महसूस करके थोड़ा बहुत तृप्त होना चाहता था इसलिए वह सरला को अपनी बाइक पर पीछे बैठाने के लिए एकदम लालायित हो गया था . ।

सरला सब्जी ले चुकी थी और वह तुरंत उसके पास जाकर अपनी बाइक खड़ी कर दिया...

क्या करता है तू मैं तो डर गई. (इस तरह से एकाएक अपने करीब बाइक खड़ी होती देख वह घबराते हुए बोली.)

डरने की कोई जरूरत नहीं है चाची मैं आपकी मदद करने के लिए आया हूं ...

अरे वाह शुभम एकदम नई गाड़ी कब खरीदा। (बाइक पर नजर पड़ते ही सरला बोली)

मेरे पापा ने मुझे गिफ्ट दिए हैं इसलिए तो आज मैं पहली बारी से चला रहा हूं और पहली बार ही किसी को अपनी बाइक पर बिठा रहा हूं ...

कहां तेरी बाइक पर तो कोई भी बैठा हुआ नहीं है...

आप होना चाची मैं आपकी बात कर रहा हूं . मैं चाहता हूं कि आप अपने पैर रखकर मेरी बाइक को पवित्र कर दीजिए .. (शुभम सरला के सामने बोल तो यह रहा था लेकिन उसका मन यह कह रहा था कि आप मेरी गाड़ी पर अपनी बड़ी बड़ी गांड रखकर इसका शुभारंभ कर दीजिए और शुभम की बात और अभी इस तरह की शालीनता भरी बात सुनकर सरला खुशी से गदगद हुए जा रही थी मन ही मन में उसे भी शुभम की बाइक पर उसके पीछे बैठने की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी )

नहीं नहीं मैं नहीं बैठूंगी मैं आज तक कभी भी किसी की बाइक के पीछे नहीं बैठी हूं मुझे डर लगता है।

अरे इसमें डरने की क्या बात है मैं हूं ना.... बस आप एक बार बैठ जाइए बाकी मैं सब संभाल लूंगा लाइए यह सब्जियों वाला थैला मुझे दीजिए ..(इतना कहते हुए शुभम खुद ही सरला के हाथों से सब्जी वाला थैला लेकर उसे बाइक पर टंगा दिया और उसे बैठने के लिए बोला... यह बात सच है कि सरला आज तक कभी भी बाइक के पीछे नहीं बैठी थी ... उसे थोड़ी घबराहट हो रही थी लेकिन जैसे तैसे करके वह बाइक पर बैठ गई आज शुभम के पीछे इस तरह से बाइक पर बैठने पर उसे काफी उत्सुकता के साथ साथ प्रसन्नता हो रही थी लेकिन इससे भी ज्यादा ना जाने कि उसके बदन में उत्तेजना की सुइयां चुभ रही थी क्योंकि शुभम ही था जिसकी वजह से वह जिंदगी में पहली बार अपने आप को आईने के सामने अपने कपड़े उतार कर संपूर्ण नग्ना अवस्था में अपने नाजुक अंगों से खेल रही थी.

और पति के देहांत के बाद पहली बार वह चरम सुख का अनुभव महसूस की थी तब से शुभम जब भी उसकी आंखों के सामने आता था या तो उसके करीब होता था उसके तन बदन में ना जाने क्यों उत्तेजना का अनुभव अपने आप होने लगता था उसका तन- बदन खास करके उसकी टांगों के बीच की उस पतली सी दरार में उत्तेजना का अनुभव को ज्यादा ही होता था। और इस समय भी उसकी टांगों के बीच के उस गुलाबी छेद में हलचल मची हुई थी...

सरला बाईक पर बैठ गई थी और शुभम गियर बदलकर एक्सीलेटर देते हुए बाइक को आगे बढ़ा रहा था। हालांकि पहली बार बैठने की वजह से सर अल्लाह अपने आप को बाइक पर नियंत्रित नहीं कर पा रही थी।इसलिए वह कभी आगे तो कभी पीछे झटके खा रही थी लेकिन इस झटको के साथ ही उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां शुभम की पीठ पर रगड़ खाने लगी जिसका अनुभव उसका एहसास शुभम के तन बदन को गर्म करने लगा... वह अब जानबूझकर बीच-बीच में ब्रेक लगाने लगा क्योंकि ऐसा करने से सरला आगे को सरक आती थी और जिसकी वजह से उसकी बड़ी बड़ी चुचीयां शुभम की पीठ पर रगड़ खा जाती थी और दब जाती थी जिसका एहसास शुभम को अंदर तक रोमांचित कर जाता था इस बात का एहसास सरला को भी था ना चाहते हुए भी ना जाने क्यों जिस तरह से उसकी चूची शुभम की पीठ पर स्पर्श हो रही थी उसका एहसास उसे भी अंदर तक उत्तेजित कर जा रहा था।

वह भी इस पल के एहसास से अंदर ही अंदर सिहर उठती थी।

कुछ देर के बाद उसे इस बात का एहसास होने लगा कि उत्तेजना की वजह से उसकी पेंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी जो कि बड़ी ही ताज्जुब वाली बात थी।क्योंकि सलाह अच्छी तरह से जानती थी जब तक कि वह शुभम से मिली नहीं थी तब तक उसके बदन में इस तरह के बदलाव और रिसाव बिल्कुल भी नहीं होता था लेकिन शुभम के मिलने के बाद अब रोज-रोज यह सिलसिला होने लगा था ऐसा नहीं था कि सरला को इसमें मजा नहीं आता था बल्कि उसे तो ऐसा लगता था कि उसे एक नई जिंदगी मिल गई है। वरना दोनों टांगों के बीच की पट्टी हमेशा सूखी पड़ी रहती थी शुभम नाम के सावन के वजह से वह भट्टी अब हरी भरी हो रही है इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से हो गया था। शुभम के साथ मोटरसाइकिल की सवारी करने में उसे बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी और शुभम को भी बहुत मजा आ रहा था सरला लगभग लगभग उसकी मां की उम्र से ५ 7 साल बड़ी ही थी लेकिन फिर भी जवानी और वासना के जोश में वह सरला के खूबसूरत अंगों का उसके रगड़ का मजा ले रहा था। बातों ही बातों में सरला इस बात का जिक्र करने लगी कि उसकी बहु रुचि अपने घर जाने वाली है। इसलिए वह शुभम से बोली. ..

शुभम तेरे पास अब मोटरसाइकिल आ गई है तू मेरा एक काम कर दे...

बोलिए चाची कैसा काम मैं तो आपको पहले ही कहा हूं कि कोई भी काम हो आप मुझसे कहिए...(बार-बार सरला की चूचियों की रगड़ से शुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और उसका लंड पैंट के अंदर अपनी पूरी तैयारी में था.. जिसे वह बार-बार हाथ लगाकर व्यवस्थित कर दे रहा था..)

कल मेरी रुचि बहू अपने मायके जाने वाली है उसके पिताजी की तबीयत थोड़ी खराब है मैं तो अभी जा नहीं सकती इसलिए तू अगर उसे अपनी मोटरसाइकिल से छोड़ आता तो अच्छा ही होता...

(रुचि को छोड़ने वाली बात सुनकर शुभम बनी मन प्रसन्न होने लगा भला ऐसा मौका रूचि जैसी खूबसूरत और वह भी अंदर ही अंदर प्याज से भरी हुई औरत के करीब रहने का कहां मिलने वाला था वह अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुका था रोजी के साथ जाने के लिए लेकिन फिर भी आपत्ति जताते हुए बोला।)

मैं कैसे छोड़ सकता हूं चाची क्या मेरे साथ रुचि भाभी जाएंगी। .

अरे हां जाएंगी क्यों नहीं जरूर जाएगी बस तुम मुझसे ले जाने के लिए तैयार हो जाओ बस...

ठीक है मुझ में इसमें कोई आपत्ति नहीं है मैं जरूर छोड़ आऊंगा.. (इतना कह रहा था कि गाड़ी के आगे एक का एक छोटा सा खड्डा आने की वजह से वह गाड़ी को नियंत्रण करने में गाड़ी का हैंडल इधर-उधर घुमाने लगा जिससे गाड़ी का पिछला पहिया खड्डे से होता हुआ बाहर की ओर निकला जिससे गाड़ी लड़खड़ा गई और सरला अपने आप पर नियंत्रण ना कर पाए और अपने आप को संभालने में उसका हाथ शुभम की छातियों से होता हुआ नीचे की तरफ आने लगा और वह फिर भी ना संभाल पाई जिससे उसके हाथ में जो कुछ भी आया उससे अपने आप को संभालने की कोशिश करने लगी और इसी आपाधापी में उसका हाथ सीधे शुभम के पेंट में बने तंबू पर आ गया और वह उसे कस के पकड़ ली... जब तक यह सब हुआ तब तक शुभम अपनी बाइक पर फिर से नियंत्रण पा चुका था लेकिन अपने लंड पर सरला के हथेली की मजबूत पकड़ को महसूस करते हैं उसके तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी भड़क उठी एक अद्भुत अहसास एक अजब सुख की लहर उसके तनबदन को झकझोर ने लगी...

जब तक सरला को इस बात का एहसास होता कि उसकी हथेली में शुभम का कपड़ा नहीं बल्कि कपड़े के अंदर छुपा हुआ उसका मजबूत खड़ा हुआ लंड हाथ में आ गया था। अपने आप को संभालने के उद्देश्य से सरला ने अपने हथेली की पकड़ शुभम कैलेंडर पर कुछ ज्यादा ही जोर से कर दी थी जिससे हल्की दर्द की कराह शुभम के मुंह से निकल गई थी।

लेकिन जब इस बात का एहसास सरला को हुआ तो वह शर्म से पानी पानी हो गई और तुरंत शुभम कै लंड पर से अपना हाथ हटा ली... लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी इस क्षण भर मात्र में ही शुभम को अद्भुत सुख का एहसास मिल गया था और सरला को एक मर्द का लंड क्या होता है उसकी मजबूती क्या होती है उसका कड़क पन उसकी लंबाई क्या होती है इस बात का एहसास उसे भी अच्छी तरह से हो गया था। उसका तन बदन एकदम से सिहर उठा था। इस पल का सबसे ज्यादा असर उसे अपनी दोनों टांगों के बीच छोटी सी बुर में हो रहा था जिसमें इस समय आग लगी हुई थी।

अब दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी क्योंकि दोनों ने इस क्षण को अपने अपने तरीके से महसूस किया था इस पल को जी लिया था।

थोड़ी ही देर में सरला का घर आ गया और सरला नीचे उतर कर सब्जियों का थैला हाथ में थाम कर बस उसे इतना ही बोली कि।

याद रखना कल जरूर आना... मेरी बहू को उसके घर पहुंचाना है...(इतना क्या करवा मुस्कुराने लगी है उसकी मुस्कुराहट में एक रात छिपा हुआ था उसकी मुस्कुराहट इस बात का सबूत था कि जो गलती उसी अनजाने में हुई थी उस गलती का उसमें बिलकुल भी पछतावा नहीं बल्कि उसे अच्छा ही लग रहा था. सरला चाची की मुस्कुराहट देखकर शुभम को भी यकीन हो गया था कि जो कुछ भी हो रहा सरला को अच्छा नहीं लग रहा था जिसमें शुभम का ही फायदा था वह सरला की बात का जवाब देते हुए बोला।)

ठीक है चाची मैं कल आ जाऊंगा ... (और इतना कहने के साथ ही शुभम अपने घर की तरफ चला गया... सरला के बदन में अभी भी रोमांच जागरूक था उसकी पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वह घर में प्रवेश करके सब्जी का ठेला किचन में रखने के बाद तुरंत बाथरूम में चली गई और एक-एक करके फिर से अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई। उसकी पूरी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और एक बार फिर से उसने खुद ही अपनी बुर के अंदर अपनी दो उंगली डालकर अपनी प्यास बुझाने के उद्देश्य से उंगली को अंदर बाहर करते हुए गरम सिसकारी भरने लगी... थोड़ी ही देर में सरला चरम सुख को प्राप्त कर ली ।

mmmmmmmmmmmmmmmmmmmm

सरला कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसकी जिंदगी इस तरह से बदलाव लेगी उससे अपनी इस तरह की हरकत पर विश्वास ही नहीं हो रहा था लेकिन जो कुछ भी वह अपने साथ कर रही थी या उसके साथ हो रहा था वह एकदम हकीकत था अपने संयम और अपनी शारीरिक जरूरत के अधीन होकर वह भी वासना की हवा में खुद को घोलती जा रही थी... जिस तरह से मोटर बाइक पर बैठकर वह शुभम के बेहद करीब थी और उसकी मर्दाना खुशबू में खोकर अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं कर पाई और जिस तरह से अनजाने में ही उसका हाथ उसके मर्दाना ताकत के जड़ पर पहुंचकर उसे अपनी हथेली में लेकर दबोची थी. वह एहसास उसे यह सब करने के लिए विवश कर रहा था क्योंकि उम्र के इस पड़ाव पर आकर वासना में चिंगारी में अपने आप को झूठ देने में ना जाने कि उसे भी बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी। वह बाथरूम में जाकर अपने कपड़े उतार कर संपूर्ण इतना अवस्था में जिस तरह से अपनी उंगली को अपनी बुर में डालकर अपनी जवानी की आग को बुझाने की कोशिश कर रही थी उस समय उसके जेहन में केवल अनजाने में उसके हाथ में आए शुभम के मोटे तगड़े लंड के बारे में ही सोच रही थी पेंट के ऊपर से ही उसे पकड़कर उसकी मोटाई और लंबाई का अंदाजा वह मन ही मन लगा चुकी थी क्योंकि इस उम्र के पड़ाव में आते आते हैं अब तक उसकी जिंदगी में भी कई मर्द आ चुके थे. और सर लाने उन सभी के लिए अपनी दोनों टांगों को खोल चुकी थी और उन सभी के लंड की मोटाई चौड़ाई और लंबाई के बारे में पूरी तरह से अवगत थी.... लेकिन शुभम के लंड के आकार को लेकर वह पूरी तरह से उत्सुक और निश्चय ही थी कि शुभम के लंड में बहुत जान है उसका लंड मर्दाना ताकत से भरा हुआ है इसलिए वह अपने मन पर काबू नहीं कर पाई थी और अपनी गीली पैंटी को उतार कर अपनी गुलाबी पंखुड़ियों से युक्त बुर में अपनी उंगली डालकर अपनी जवानी की आग ठंडी करने में लगी हुई थी... अपनी जवानी की आग को बुझाने मैं लगी होने के बावजूद अब उसके मन में शुभम के लंड को देखने की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी..वह मन ही मन सोच रही थी कि ना जाने क्या बात है उस लड़के ने की अपने बेटे से भी कम उम्र का होने के बावजूद भी उसके प्रति शारीरिक आकर्षण में बंधी जा रही है.... लेकिन यह सब से उसकी अंतरात्मा बेहद खुश नजर आ रही थी...

कभी-कभार उसके मन की अंतरात्मा उसे धिक्कार दी थी उसे भला-बुरा कहती थी और उसे भी यह सब अच्छा नहीं लगता था वह भी आत्मग्लानि से भर जाती थी अपने आप पर शर्म महसूस होती थी लेकिन यह शर्मसार पल गुजरने के बाद जब भी वह शुभम के बारे में सोचती थी तो उससे जुड़ी हर चीज उसे अच्छी लगने लगती थी सही गलत का फैसला कर सकना उसके लिए दूभर होता जा रहा था।शुभम के ख्यालों के साथ ही जब उसकी रसीली बुर मेरी सा होना शुरू होता था तब उसकी आंखों के सामने बस एक ही लक्ष्य रहता था कि किसी भी तरह से अपनी बुर की आग को शांत करें और ऐसा करने के बाद ही वह शांत होती थी। कुछ भी हो अब उसे इस खेल में मजा आने लगा था. और सही मायने में उसे भी अपनी बहू का उसके मायके जाने का इंतजार बड़ी बेसब्री से था इसके बारे में वह किसी भी प्लान के तहत तो नहीं चल रही थी लेकिन फिर भी वह घर में अकेली रहने के लिए उत्सुक थी।

और समय बीतने के साथ ही उसकी उत्सुकता की घड़ी खत्म होने लगी। सही समय पर शुभम अपनी मोटर बाइक के साथ सरला के घर के द्वार पर खड़ा हो गया जहां पर सरला रुचि के साथ खड़ी थी रुचि सादगी में भी बेहद क़यामत लग रही थी। रुचि पर नजर पड़ते ही उसकी मदहोश कर देने वाली जवानी को शुभम के पेंट में अंगड़ाई लेते लंड ने उसे अपने ही तरीके से सलामी दिया।

तैयार हो गई भाभी चलने के लिए ...

हां मैं तैयार हूं...( रुचि मुस्कुराते हुए जवाब दी... यह सब के बीच सरला की नजर अनजाने में ही शुभम के पेंट के बीचो बीच चली गई जो कि इस समय वहां पर पूरी तरह से शांति फैली हुई थी किसी भी प्रकार का तूफान पेंट के अंदर नजर नहीं आ रहा था... तब अचानक ही उसे इस बात का ज्ञात हुआ कि उसके पीछे बैठे होने की वजह से ही शुभम का लंड खड़ा था इसका मतलब साफ था कि इस उम्र में थी वह ऐसे जवान लड़कों का लंड खड़ा कर सकती है...इस बात का एहसास सरला को होते ही वह प्रसन्नता से भर गई और इसी बीच फिर से उसकी टांगों के बीच की उस कोमल पत्तियों से युक्त नाजुक अंग कांपने लगा उसमें से रीसाव होने लगी और उसमें से मधुर रस की बूंदे चुने लगी जो की पेंटी को गीला कर रही थी।)

शुभम अपनी भाभी को संभाल कर ले जाना. (ऐसा कहते हुए वह शुभम को देख कर मुस्कुरा दी और जवाब में शुभम भी मुस्कुरा दिया..)

आप बिल्कुल भी चिंता मत करिए चाची में एकदम आराम से ले जाऊंगा ...



रुचि अपनी सास के पैरों को छूकर उनसे इजाजत लेकर बाइक पर शुभम के पीछे उसके कंधे का सहारा लेकर बैठ गई... जैसे ही रुचि के खूबसूरत बदन का स्पर्श शुभम को अपनी पीठ पर महसूस हुआ उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी एक अद्भुत सुख से उसका संपूर्ण वजूद प्रसन्नता से भर गया... उसे एक जवानी से भरपूर प्यासी औरत का सुखद स्पर्श उसके अंदर तक खलबली मचा गया। वह अपनी बाइक को एक्सीलेटर देकर आगे बढ़ा गया....

क्यों भाभी क्या ख्याल है इस सफर के बारे में...

मेरा क्या ख्याल है मुझे तो अपने घर पहुंचना है बस ..

मैं जानता हूं कि तुम्हें अपने घर पहुंचना है लेकिन मेरे लिए तो यह पल जिंदगी में बेहद हसीन उन लम्हों में से है जिसे में कभी कल्पना में भी सोच नहीं सकता था। ..

ऐसा क्यों भला?

ऐसा ही है भाभी एक खूबसूरत औरत को अपनी बाइक पर इस तरह से पीछे बिठाकर घुमाने का जो मजा मिलता है वह केवल में ही समझ सकता हूं क्योंकि जिंदगी में पहली बार किसी खूबसूरत औरत को इस तरह से अपनी पीछे बिठाकर कहीं घुमाने ले जा रहा हूं.

ओ हेलो घुमाने नहीं ले जा रहे मुझे मेरे मायके छोड़ने जा रहे हो।

तुम्हें ऐसा लगता है ना भाभी लेकिन मैं तो तुम्हें घुमाने ही ले जा रहा हूं। तुम ही सोचो आने जाने वाले लोग अगर देखेंगे कि एक मेरे जैसा खूबसूरत हैंडसम लड़का है खूबसूरत औरत को बाइक पर बिठा कर ले जा रहा है तो घुमाने ले जाता होगा ना यही तो सब सोचेंगे।

लोग क्या सोचते हैं यह मैं नहीं जानती उन लोगों को जो सोचना ही सोचने दो तुम सिर्फ गाड़ी चलाओ।

गाड़ी ही तो चला रहा हूं भाभी .. (शुभम ऐसा कहता हुआ तुरंत जानबूझकर हल्के से ब्रेक लगाया जिससे रोजी का खूबसूरत बदन शुभम की पीठ से टकरा गया और उसके दोनों कबूतर शुभम की पीठ पर रगड़ खाने लगे जिसका एहसास शुभम को उत्तेजित कर गया। रुचि को भी इस बात का एहसास हो गया कि उसकी दोनों चूचियां उसकी पीठ से दब गई हैं इसलिए वह बोली।)

क्या करते हो आराम से चलाओ।

मैं तो आराम से ही चला रहा हूं भाभी लेकिन छोटे छोटे खड्डे परेशान कर देते हैं. ...

आगे से खडों का ध्यान रखकर चलाओ.....(रुचि अपने आप पर नियंत्रण करते हुए शुभम के कंधे पर हाथ का सहारा लेते हुए बोली जो कि शुभम को रुचिका इस तरह से उसके कंधे पर हाथ रखना बेहद सुखद लग रहा था ... एक खूबसूरत औरत का इस तरह से स्पर्श करना शुभम को काफी उत्तेजना का अनुभव करा रहा था उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था.... उसे कल का दिन याद आ गया जब सरला अनजाने में ही पेंट के ऊपर से ही उसकी खबर को जोर से पकड़ ली थी पहले तो शुभम डर गया था लेकिन उस पल का एहसास उसे अंदर तक आनंद की अनुभूति कर आ गया था और जिस तरह सेवा उसके दरवाजे पर सरला को छोड़ा था और सरला मुस्कुराकर उसका अभिवादन की थी उसे देखते हुए शुभम अच्छी तरह से समझ गया था कि सरला को उसका पकड़ना बहुत अच्छा लगा था और यही उम्मीद हुआ रुचि से भी लगा कर रखा था कि काश रूचि भी अनजाने में ही सही उसके खड़े लंड को पकड़ कर उसके मर्दाना ताकत को भाप ले क्योंकि अच्छी तरह से जानता था कि रुचि बेहद प्यासी औरत है भले ही वह ऊपर से संस्कारी होने का ढोंग रचाती हो अंदर से वह बेहद प्यासी है... क्योंकि इसका भी एक कारण था इस उम्र में जवानी के नए दौर पर उसे अपने पति के साथ होना चाहिए था ऐसे में उसका पति साल में लगभग आठ 10 महीना बाहर ही रहता था और इस वजह से वह अपनी जवानी के शुरुआती दिनों को पति के संसर्ग में भोग नहीं पा रही थी जिसके कारण अंदर ही अंदर उसकी प्यास बढ़ती जा रही थी बस उस प्यास को कुआं दिखाने की जरूरत थी उसके बाद शुभम का काम खुद-ब-खुद हो जाने वाला था यह उसे पूरा विश्वास था क्योंकि ऐसा ही उसके साथ अब तक होता चला आ रहा था। वह बात का दौर आगे बढ़ाते हुए बोला।

वैसे भाभी आपके घर में किस की तबीयत खराब है?

किसी की भी तो नहीं...( रुचि एकदम ठंडे स्वर में बोली।)

लेकिन मुझे तो चाची बता रही थी कि तुम्हारे पापा की तबीयत खराब है।

अगर मैं कहूं कि मैं झूठ कह रही थी तो .

(शुभम को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि रुचि क्या कह रही है इसलिए वह आश्चर्य जताते हुए बोला।)

तुम क्या कहना चाह रही हो मैं कुछ समझा नहीं ...

समझ जाओगे मैं बस इतना कहना चाह रही हूं कि अकेले घर में रहते रहते मैं एकदम बोर हो गई थी इसलिए वहां से छुट्टी पाने के लिए मुझे पिताजी की तबीयत खराब होने का बहाना बनाना पड़ा।
 
क्या कह रही हो भाभी ..(शुभम लगभग चौक ते हुए बोला..)

मैं एकदम सच कह रही हूं शुभम अकेले रहते रहते मैं बोर हो चुकी थी.. एक तो तुम्हारे भैया घर पर रहते नहीं है ऐसे में मुझे अकेले घर पर रहना पड़ता है ऐसा नहीं है कि काम करने के बहाने से मैं अपने मायके जा रहे हो बल्कि सच कहूं तो ऐसी उम्र में जब पति के साथ रहना चाहिए तो हमें उनके बिना घर में अकेले रहती हूं... इसलिए मेरा मन हमेशा उदास रहता है और इसीलिए मैं तरोताजा होने के लिए अपने मायके जा रही है वहां कुछ दिन रहुंगी तो मन हल्का हो जाएगा...

वैसे सच कहूं भाभी तो जैसी तुम दिखती हो वैसी हो नहीं....

क्या मतलब है तुम्हारा...(हवा के झोंके से बालों की लट को अपने गाल पर से अपनी उंगलियों का सहारा देकर हटाते हुए बोली..)

मतलब कि तुम एकदम सीधी-सादी एकदम सरल स्वभाव की लगती हो लेकिन तुम्हारी हरकतें कर मुझे लगता है कि तुम बहुत ही शरारती और नटखट हो।

(शुभम की यह बात सुनकर रुचि खिलखिला कर हंसने लगे वह रुचि का खेल खिलाता हुआ चेहरा बाइक के शीशे में अच्छी तरह से देख रहा था और रूचि का यह रूप से बेहद मनमोहक लग रहा था इस समय रुचि शुभम के लिए दुनिया की सबसे बेहतरीन और खूबसूरत औरत लग रही थी। रुचि को हंसता हुआ देखकर वह बोला।)

हंस क्यों रही हो भाभी।

बस ऐसे ही तुम्हारी बात सुनकर हंसी आ गई....

चलो कोई बात नहीं मेरी बात सुनकर तुम्हारी खूबसूरत चेहरे पर हंसी तो आई....

तुम बातें ही ऐसी करते हो कि हंसी आ जाती है।

(शुभम को ईस सफर में मजा आने लगा था .. खूबसूरत औरत का साथ पाकर शुभम का मन हवा में उड़ रहा था उसका पूरा वजूद अपने नियंत्रण में बिल्कुल भी नहीं था बार-बार वह रह रहे कर ब्रेक लगा दे रहा था जिससे ना चाहते हुए भी रुचि की दोनों चूचियां शुभम की पीठ पर रगड़ जा रही थी जिसका एहसास रुचि को अच्छी तरह से हो रहा था लेकिन वह अपने आप को रोक पाने में असमर्थ थी क्योंकि काफी हद तक उसे भी यह सब अच्छा लगने लगा था कई महीने बीत चुके थे दोनों कबूतर को किसी मर्द का स्पर्श हुए... वैसे भी इस समय उन दोनों कबूतरों को छूने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ उसके पति का भी था जो कि रुचि के दोनों कबूतरों को दाना तक नहीं डालता था इसलिए आज शुभम की पीठ पर अपनी चूचियों की रगड़ को महसूस करके वह भी उत्तेजित होने लगी थी और जब भी वह पर एक मारता था तो अपने आप को नियंत्रित करने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं करती थी। शुभम एक्सीलेटर देकर अपनी भाई को भगाए ले जा रहा था.... अपनी बाइक पर पीछे एक खूबसूरत औरत को बैठा कर उसे काफी हद तक गर्व का अनुभव हो रहा था कभी-कभी तो यह साल लगने लगता था कि जैसे वह अपने पीछे अपनी पत्नी को बिठाया हुआ है और वैसे भी रुचि जिस कदर खूबसूरत थी... शुभम यही सोचता था कि रुचि उसकी पत्नी बनने लायक है। शुभम बातों का दौर आगे बढ़ाते हुए बोला।

वैसे भाभी मैं कहना तो नहीं चाहता हूं लेकिन फिर भी आपकी इजाजत हो तो कुछ कहुं लेकिन बुरा बिल्कुल भी मत लगाना....

नहीं मैं बुरा नहीं लगाऊंगी तुम कहो क्या कहना चाहते हो।

मैं यह कहना चाहता हूं कि आप भले हंसती हो मुस्कुराती हो. लेकिन ना जाने मुझे ऐसा लगता है कि तुम्हारी हंसी के पीछे दर्द छुपा हुआ है....

(शुभम की यह बात सुनकर रुचि उदास हो गई क्योंकि वह जानती थी कि शुभम जो कह रहा है वह बिल्कुल सच है वह कुछ देर तक ऐसे ही खामोश रही तो शुभम फिर से जोर देते हुए बोला...)

क्या हुआ भाभी तुम खामोश की हो गई मैं पहले ही कहा था कि अगर मेरी बात तुम्हें अच्छी ना लगे तो बुरा मत मानना मैं तो बस अपने मन की बात कह रहा था मैं तुम्हारा दिल दुखाना नहीं चाहता था।

नहीं ऐसी कोई भी बात नहीं है लेकिन जो तुम कह रहे हो वह बिल्कुल सच है....(कुछ देर खामोश रहने के बाद) मैं आगे पढ़ना चाहती थी मैं कुछ बनना चाहती थी मैं हमेशा अपने दोस्तों में सबसे आगे रहती थी चंचल हंसमुख हमेशा हंसती रहती थी मुस्कुराती रहती थी और अपनी सभी दोस्तों को रिश्तेदारों को यही कहती रहती थी कि मुस्कुराते रहो हंसते रहो जिंदगी कब करवट ले लेगी पता भी नहीं चलेगा और शायद ऐसा ही मेरे साथ हो गया...।

ऐसा क्या हो गया भाभी.....

(शुभम की यह बात सुनकर फिर से रुचि खामोश हो गई और उसकी खामोशी को तोड़ते हुए सुभम बोला)

बोलो ना भाभी ऐसा क्या हो गया कि एक हमेशा हस्ती रहने वाली लड़की एकदम शांत हो गई...

(शुभम की बात सुनकर रुचि को लगने लगा कि शुभम उसका हमदर्द बन सकता है जिससे अपने मन की सारी बातें कह सकती है... इसलिए वह अपने मन की बात बताने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गई और वह बोली. )

मैं सच कहूं तो सुभम में यह शादी करना ही नहीं चाहती थी।

(यह सुनते ही शुभम के मन के कोने में खुशी की लहर दौड़ने लगी क्योंकि रुचि कि कहीं यह बात उसका रास्ता तय करने के लिए काफी था शुभम को रुचि में अपनी मंजिल नजर आने लगी थी लेकिन उसकी बात सुनकर वहां आश्चर्य जताते हुए बोला।)

क्या कह रही हो भाभी लेकिन ऐसा क्यों...?

मुझे वह बिल्कुल भी पसंद नहीं थे...

(रुचि की बातें सुनकर शुभम मन ही मन प्रसन्न हुआ जा रहा था ।)

मुझे तो भाभी बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा है की जो तुम कह रही है वह सच है...

मैं जो भी कह रही हूं वह बिल्कुल सच है मुझे मेरे पति बिल्कुल भी पसंद नहीं है और मैं यह बात अपनी मम्मी पापा को बता चुकी थी लेकिन....

लेकिन क्या....?

लेकिन मेरे पापा मुझ पर बहुत ज्यादा दबाव देकर मुझसे यह शादी करने के लिए हामी भरवाए हैं...

अगर ऐसा है तो सच में अंकल जी ने बहुत गलत कीए है. उन्हें अपनी बेटी की पसंद का तो ख्याल रखना था आखिरकार ए गुड्डा गुड्डी का खेल तो है नहीं जिंदगी भर का साथ है।

लेकिन मेरे मम्मी पापा नहीं माने मम्मी तो मान भी गई थी लेकिन मेरे पापा पुरानी दोस्ती की वजह से बिल्कुल भी मानने को तैयार नहीं थे वह कहते थे कि वहां रहोगी तो एकदम खुश रहोगी सुख सुविधा पैसे से एकदम संपन्न... लेकिन ऐसी सुख सुविधा पैसे से संपन्न होकर क्या फायदा जब पति का प्यार ना मिले. ।(रुचि के मुंह से आखरी शब्द अचानक ही अनायास निकल गए थे वह यह बात कहना नहीं चाहती थी। रुचि के मुंह से निकले आखिरी शब्द सुनकर शुभम तुरंत बोला...)

पति का प्यार..... मैं कुछ समझा नहीं भाभी क्या तुम्हारे पति तुमसे प्यार नहीं करते...

कुछ नहीं तुम गाड़ी चला ओ....

(इतना सुनकर शुभम आगे कुछ भी नहीं कहा...लेकिन रुचि कि कहीं आखरी बात ने उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर को धोखा दिया था वह से पक्के तौर पर विश्वास हो गया था कि रोज ही बेहद प्यासी औरत है तभी हो पति के प्यार के बारे में जिक्र छेड़ दी थी। उसे लगने लगा था कि उसका काम अब बन जाएगा बस थोड़ी बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। दोनों करीब करीब पहुंचने ही वाले थे.... तभी सुरुचि आगे की सड़क बताते हुए उसे दूसरी तरफ मोड़ने के लिए बोली और शुभम ने वैसा ही किया मुख्य सड़क से उतरने के बाद तकरीबन 5 मिनट की ही दूरी पर रुचि का मायका आ गया.... शुभम बाई क खड़ी करके रुचि के बैग को हाथ में ले लिया जिसे रुचि खुद अपने हाथ में लेकर प्रसन्नता के साथ घर के दरवाजे पर दस्तक देने लगी... थोड़ी ही देर में दरवाजा खुला और रुचि की मां रुचि को दरवाजे पर खड़ी देखकर एकदम खुश हो गई और उसे गले लगा ली ... फिर उसी घर में प्रवेश की और रुचि की मां शुभम को भी घर में आने के लिए बोली.. शुभम भी अपने संस्कार का प्रसारण करते हुए रुचि की मम्मी के पैर छूकर उन्हें प्रणाम किया रुचि की मम्मी ने उसे आशीर्वाद देकर अंदर आने के लिए अभिवादन कि... रुचि भी शुभम को अंदर आने के लिए बोल कर अपने पापा के रूम में उनसे मिलने चली गई शुभम वहीं बैठ कर इधर-उधर देखने लगा घर काफी अच्छी तरह से सजा हुआ था ...

सोफे पर बैठकर वह अपनी थकान दूर कर रहा था... रुचि के साथ का यह सफर उसे बेहद हसीन लग रहा था साथ ही बेहद उत्तेजना आत्मक क्योंकि अभी भी उस सफर की उत्तेजना उसकी पैंट के अंदर बरकरार थी जिसकी वजह से उसे जोड़ों की पेशाब लगी हुई थी अब वह बाथरूम के लिए इधर उधर नजर दौड़ाने लगा... कि तभी उसे घर के बाहर बाथरूम नजर आया जोकि घर से सटा ही हुआ था।

वह इधर-उधर देखकर तुरंत बाथरूम में घुस गया उसे चोरों की पेशाब लगी हुई थी और इस अफरातफरी में वह दरवाजे की कड़ी लगाना भूल गया और पेंट का बटन खोल कर वह अपने मोटे खड़े लंड को हाथ में लेकर उसे झुलाते हुए पेशाब करने लगा... वहीं दूसरी तरफ सफर के दरमियान उत्तेजित अवस्था में रुचि को भी बहुत जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए वह अपने पापा से मिलने के तुरंत बाद वह भी बाथरूम की तरफ आने लगी... वह इस बात से बिल्कुल अनजान की बाथरूम में से कौन है वह बिना सोचे समझे दरवाजे को खोल दी और उसकी आंखों के सामने जो नजारा आया उसे देखकर रूचि की आंखें फटी की फटी रह गई. ... क्योंकि जैसे ही उसने दरवाजा खोली थी उसकी आंखों के सामने शुभम अपनी मोटी तगड़ी खड़े लंड को हाथ में हिलाते हुए मुत रहा था... रुचि को तो अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हुआ कि जो देख रही है वह सही है क्योंकि जिंदगी में उसने इतना मोटा तगड़ा लंबा लंड नहीं देखी थी जो कि पूरे शबाब में था पूरा खड़ा अपनी औकात दिखाता हुआ... जब तक कि दोनों समझ पाते तब तक बहुत देर हो चुकी थी अनजाने में ही शुभम अपने मोटे तगड़े लंड की नुमाइश रुचि के सामने कर चुका था और अनजाने में ही रुचि भी इस मनोरम में अद्भुत कामोत्तेजना से भरपूर मादक दृश्य को देख रही थी वह शर्मा की अपनी नजरें घुमा दी तब तक उसकी आंखों में शुभम के मोटे तगड़े लंड की छवि बस चुकी थी... रुचि पल भर में एकदम उत्तेजित हो गई थी एक तो पैसा आपका पैसा रुक पर से इस तरह का अद्भुत दृश्य दोनों का मिला जुला असर उसके चेहरे पर नजर आ रहा था जो कि शर्म के मारे उसके गाल लाल टमाटर की तरह हो गए थे और टांगों के बीच की पतली दरार सावन के बौछार से भर चुकी थी...

इस नजारे पर से रूचि का मन तो नहीं हो रहा था कि अपनी नजर को हटा ले लेकिन वह काफी अपने आप को शर्मिंदा महसूस कर रही थी क्योंकि वह दरवाजे पर दस्तक नहीं की थी और एक झटके से दरवाजा खोल दी थी जिसमें गलती उसी की ही थी उसे ऐसा लग रहा था इसलिए वह शर्म से अपनी नजरे दूसरी तरफ घुमा ली थी लेकिन बाथरूम से बाहर नहीं आई थी। लेकिन दूसरी तरफ अनजाने में ही ऐसा मौका हाथ आया देखकर शुभम बेशर्म की तरह ना तो दूसरी तरफ घूमने की चेस्ट आई किया ना तो अपने लंड को पेंट में वापस डालने की जरूरत को समझा वह जानबूझकर अभी भी अपने लैंड को हिलाते हुए मुत रहा था. ।मौत क्या रहा था अब वह जानबूझकर रुचि को अपनी मर्दाना ताकत से भरे हुए लंड की नुमाइश कर रहा था उसे दिखा रहा था। और जब उसे लगने लगा कि जो उसे दिखाना चाहिए था उस नजारे को रुचि ने भरपूर देख ली है तो खुद ही वह अपने लंड को पेंट में भरकर बाथरूम से मुस्कुराता हुआ बाहर निकल गया. थोड़ी देर बाद पेशाब करने के बाद रुचि भी बाथरूम से बाहर आ गई तब तक शुभम जाने के लिए तैयार हो गया था वह ज्यादा देर तक अब उसके घर रुकना नहीं चाहता था क्योंकि उसका काम हो गया था। ..शुभम को जाता देखकर रुचि की मम्मी और उसके पापा उसे रोकने की कोशिश करने लगे लेकिन काम का बहाना करके वह जाने को तैयार हो गया.. रुचि भी मुस्कुराते हुए उसे रोकने की कोशिश की लेकिन शुभम मुस्कुरा कर उसकी बात को टाल दिया और वह एक्सीलेटर देकर अपनी बाइक को आगे बढ़ा दिया जाते-जाते वह रुचि के कोमल और प्यासे मन पर अपने लंड की मुहर लगा गया था।

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 
शुभम बहुत खुश था जाने अनजाने में उसने सास बहू दोनों को अपनी मर्दाना ताकत का परिचय करा दिया था.... और दोनों सास बहू की मुस्कुराहट से साफ जाहिर हो रहा था कि उसके मजबूत तगड़े लंड का एहसास उन दोनों को अंदर तक महसूस हो गया था। वह अपनी मस्ती में अपनी नई बाइक को चलाने का आनंद लेते हुए अपने घर पहुंच गया था और रुचि बाथरूम में दिखे अद्भुत नजारे की आगोश में अपने आप को खोता हुआ महसूस कर रही थी। उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि जो कुछ भी उसकी आंखों ने बाथरूम में देखा है वह सत्य है वह मन में यही सोचते हुए करवट बदल रही थी कि क्या किसी का लंड कितना मोटा तगड़ा और लंबा हो सकता है... अगर यह सच है कि उसकी आंखों में जो देखा हुआ बिल्कुल वास्तविक है शुभम का लैंड वाटर मोटा तगड़ा और मजबूत है तो उसके लंड के आगे तो उसके पति का लंड ना के बराबर है.. रुचि शुभम कै लंड के बारे में सोचते हुए रात को अपने बिस्तर पर करवट बदल रही थी। ना जाने क्यों आज उसके मन पर उसके खुद का नियंत्रण नहीं था वह बहकने लगी थी...बिस्तर पर करवट लेते हुए उसकी साड़ी अस्त-व्यस्त हो गई थी जिसकी वजह से घुटने को मोड़ने पर उसकी साड़ी सरक कर नीचे जांघो तक आ गई थी और उसकी मोटी तगड़ी चिकनी केले के सामान चमकती हुई जांघें नजर आने लगी थी.... ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में उसका खूबसूरत गोरा बदन और भी ज्यादा चमक रहा था... शुभम को याद करते हुए उसके तन बदन में शोला सा भड़क रहा था... अपनी भावनाओं पर उसे अब बिल्कुल भी भरोसा नहीं था शुभम को याद करते हुए हो वासना की रंगीन दुनिया में खोती चली जा रही थी... साड़ी कमर तक आने की वजह से उसकी नंगी टांगें उजागर हो गई थी शुभम को याद करते हुए उसके हाथ खुद-ब-खुद टांगों के बीच पहुंच गए जहां पर वह अपनी ब्लू रंग की पैंटी के ऊपर से ही अपनी रसीली बुर को दबाना शुरू कर दी थी.... वैसे तो अक्सर रात की तन्हाई में पति संसर्ग की कामना मैं जब हरलीन हो पर इस तरह की हरकत करती थी तो उसके जेहन में केवल उसका पति ही रहता था लेकिन आज उसके जेहन में पति की कल्पना तो कोसों दूर थी आज उसकी कल्पना में उसकी जिंदगी का नया हीरो आ गया था और वह था शुभम जिसकी टांगों के बीच झूलता हुआ उसका फौलादी औजार देखकर वह उसकी कल्पना के आधीन हो गई थी उसके बारे में ही सोचने लगी थी इस समय भी वह बिस्तर पर शुभम के बारे में खास करके उसके मोटे तगड़े लंड के बारे में सोच कर अपनी पैंटी के ऊपर से ही अपनी लगभग लगभग कोरी बुर को दबा रही थी वैसे भी रूचि की बुर को कोरी कहना ही उचित रहेगा क्योंकि उसके पति का कोई खास लंबाई और मोटाई लिए हुए नहीं था क्योंकि रुचि को अपनी बुर में अपने पति के लंड का एहसास अपनी तो उंगली डालने पर भी हो जाता था जबकि उसे एक मोटे तगड़े दमदार लंड की जरूरत थी जो कि उसकी बुर का पूरा सांचा ही बदल दे और वैसा लंड केवल शुभम के पास था इसलिए रुचि की बुर को कोरी बुर कहना उचित था....

बंद कमरे के अंदर रुचि अपने बिस्तर पर ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में अपने अर्धनग्न बदन से खेलते हुए शुभम की कल्पना कर रही थी वह अपनी ब्लू रंग की पैंटी के ऊपर से ही अपनी रसीली बुर को दबा दबा कर उसे छेड़ रही थी... या यूं कह लो कि वह चिंगारी पर पेट्रोल छिड़कने का काम कर रही थी और उसकी यह हरकत वाकई में चिंगारी से शोला का रूप ले ली...धीरे-धीरे करके रोजी अपनी ब्लू रंग की पेंटी में अपनी नाजुक उंगलियों को सरकार ने लगी और तब तक सरकार ने लगी जब तक कि उसकी रसीली डेढ़ इंच की फूली हुई बुर उसकी हथेली के बीचोबीच ना आ गई .. और जैसे ही रुचि की बुर उसकी हथेलियों के बीच आई वह किसी शिकारी पक्षी की तरह नाजुक फुदकती हुई तितली पर अपने पंजे की पकड़ मजबूत कर ली और ऐसा करने के साथ ही उसके मुख से गर्म सिसकारी भरी आह छूट गई.... वह शुभम को याद करते हुए जोर जोर से अपनी गुलाबी पत्तियों को उंगलियों के बीच फंसा कर रगड़ना शुरू कर दी ऐसा करने से उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी पल भर में ही उसका गोरा मुखड़ा लाल टमाटर की तरह हो गया...उसके पूरे बन जाने में रक्त का प्रवाह बड़ी तेजी से हो रहा था और खास करके उसकी जांघों के इर्द-गिर्द रक्त का प्रभाव कुछ ज्यादा ही था उसकी रसीली बुर कचोरी की तरह फूल गई पूर्वा जोर-जोर से अपनी बुर को मसलना शुरू कर दी मानो की वह उसकी मालिश कर रही हो... रुचि की बचर से ढेर सारा रिसाव हो रहा था जिससे उसकी पूरी हथेली नमकीन रस में डूबने लगी.... रुचि आंखों को बंद किया इस अद्भुत पल का मजा ले रही थी लेकिन बिस्तर पर उसे एक कमी महसूस हो रही थी और वह थी किसी मर्द की जो कि उसकी कल्पना में केवल इस समय सुभम ही घूम रहा था... वह मन ही मन में इस कल्पना कर रही थी कि जो क्रिया को अपने हाथ से कर रहे हैं काश अगर शुभम उसके बिस्तर पर होता तो वह अपनी मजबूत हथेलियों में उसकी कोमल काया को लेकर रगड़ा डालता उसका सारा रस निचोड़ डालता।

उससे रहा नहीं जा रहा था उसकी आंखों के सामने बार-बार वही दृश्य नजर आ रहा था जब शुभम अपने हाथों में अपने लंड को लेकर उसे हिलाते हुए पेशाब कर रहा था जबकि यह जानते हुए भी कि दरवाजे पर रुचि खड़ी है वह रुका नहीं और जानबूझकर रुचि को अपने लंड के दर्शन कराते हुए पेशाब करता रहा...इस बात का एहसास होते हैं कि सुबह में यह सबकुछ जानबूझकर कर रहा था तो रुचि की उत्तेजना और अत्यधिक बढ़ने लगी और वह अपनी हथेली को अपनी पेंटिं में से निकाल कर दोनों हाथों की नरम नरम उंगलियों का सहारा देकर अपनी मदमस्त गोरी गोरी खरबूजे जैसी गोल गांव को हल्के से ऊपर उठाकर अपनी पेंटी को उतारने लगी... और अगले ही पल उसकी पैंटी बिस्तर के नीचे फर्श पर गिरी पड़ी थी... व कमर के नीचे से संपूर्ण रूप से नंगी हो चुकी थी... क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि पेंटी पहने पहने वह अपनी कल्पना को तादृशय नहीं कर सकती थी....

कमर के नीचे से नंगी होते ही जैसे उसकी वासना और ज्यादा भड़कने लगी वह अपने सिर पर डबल तकिया लगाकर अपनी बुर की तरफ देखते हुए उसके साथ अपनी नाजुक नाजुक उंगलियों से खेलने लगी.... आज उसे यह सब करने में कोई चाहता ही आनंद की अनुमति हो रही थी लेकिन ऐसा करने से उसकी प्यास पल-पल बढ़ती जा रही थी ...शादी के बादआज पहली बार वह किसी गैर मर्द की कल्पना करते हुए अपने नाजुक अंगों से खेल रही थी... हालांकि शुभम से मुलाकात के बाद सेवा रातों को थोड़ी थोड़ी बैठने लगी थी लेकिन आज वो खुलकर अपने मायके में अपनी रसीली बुर से खेलते हुए मजे लूट रही थी...

उससे रहा नहीं जा रहा था उसके मुख से लगातार शुभम को याद करते हुए गरम सिसकारी निकल रही थी बार-बार उसकी आंखों के सामने शुभम का मोटा खड़ा लंड झूलता हुआ नजर आ रहा था... वह अपने कचोरी जैसी फूली हुई पुर के साथ खेलते हुए ऐसी कल्पना कर रही थी कि जैसे वह नहीं शुभम उसकी अंगो से खेल रहा हो... उसकी उंगलियां मदन रस में पूरी तरह से गीली हो चुकी थी... गोरे गोरे गाल लाल टमाटर की तरह हो गए थे.... रुचि की कल्पना इतनी मजबूत थी कि उसे अब अपनी उंगली शुभम का लंड लगने लगी थी वह अपनी उंगलियों के पार से अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को छेड़ रही थी और ऐसा महसूस कर रही थी कि जैसे शुभम अपने हाथ में अपना मोटा तगड़ा लंड ले कर उसकी गुलाबी पत्तियों पर उसके सुपाड़े को रगड़ रहा हो... वह इस तरह की कल्पना करते हुए एकदम मदहोश लगी..धीरे-धीरे वह अपनी एक उंगली को अपनी बुर की गुलाब की पत्तियों के बीचो बीच रखकर उसे दबाना शुरू कर दी और साथ ही मदहोशी भरी आवाजें निकालने लगी जो कि पूरे कमरे को मादकता से भर दे रहा था।.... बहुत ही अद्भुत और काम उत्तेजना से भरपूर नजारा कमरे का बना हुआ था रुचि अर्धनग्न अवस्था में अस्तव्यस्त कपड़ों के साथ बिस्तर पर लेटी हुई थी ब्लाउज के ऊपर के दो बटन खुले हुए थे जिससे उसके दोनों पहाड़ियों के बीच की खाईनुमा नहर नजर आ रही थी। और वह खुद काम देवी का रूप लेकर अपनी उंगली को धीरे-धीरे अपनी बुर के अंदर डाल रही थी और ऐसा महसूस करते हुए कल्पना कर रही थी कि जैसे शुभम उसकी कमर पकड़कर अपने मोटे तगड़े लगने को उसकी बुर की गहराई में उतारने की कोशिश कर रहा हो... वह लगातार गर्म सिसकारियां ले रही थी.. आखिरकार धीरे-धीरे करते हुए अपनी एक उंगली को पूरी तरह से अपनी बुर की गहराई में उतार दी... और अपनी एक उंगली से अपनी बुर की चुदाई करना शुरू कर दि... वह अपने नितंबों को बार-बार ऊपर की तरफ उछाल दे रही थी मानो कि जैसे कल्पना में ही शुभम का साथ देते हुए अपनी तरफ से भी एक दो धक्के लगा दे रही हो....शुभम की लंड की कल्पना करते हुए ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी बुर में अभी भी कोई कमी महसूस हो रही है इसलिए वह उस कमी को पूरा करने के लिए अपनी दूसरी उंगली पर अपनी बुर में डाल दी और ऐसा महसूस करने लगी कि जैसे शुभम उसकी दोनों टांगों को फैलाकर अपनी पोजीशन लेकर और शिद्दत से अपने लंड को उसकी बुर की गहराई में उतार रहा हो... कुछ ही सेकंड में रुचि की दोनों उंगलियां उसकी नाजुक कोमल गुलाबी बुर के अंदर घुसी हुई थी और वह मदहोशी के आलम में आंखों को बंद किए कल्पना की दुनिया में खोए हुए शुभम का नाम पुकारते हुए ... अपनी बुर के अंदर अपनी उंगली को जोर जोर से अंदर बाहर कर रही थी....

औहहहहहह शुभम आहहहहहहहह और जोर से शुभम और जोर से पूरी ताकत लगाकर मुझे छोड़ दो मेरी बुर को पानी पानी कर दो (ऐसा कहते हुए रुचि बेशर्म की तरह अपनी बुर के अंदर अपनी उंगली को पेल रही थी.... वह पूरी तरह से पसीने से तरबतर हो चुकी थी.... उसकी कल्पना में हकीकत का अंश नजर आ रहा था वह अपनी बुर में अपनी उंगली से ही क्रिया कर रही थी लेकिन उसकी कल्पना इतनी जबरदस्त थी कि उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे उसकी दोनों टांगों के बीच शुभम खुद आ गया हो और उसकी जगह से चुदाई कर रहा है ऐसी कल्पना करते हुए कुछ ही देर में उसकी बुर पानी पानी हो गई और वो झड़ गई... आज अपनी गलती पर उसे बिल्कुल भी पछतावा नहीं हो रहा था क्योंकि शुभम की कल्पना करने में जो सुकून उसे प्राप्त हुआ था ऐसा एहसास ऊसे कभी भी नहीं मिला था भले ही वह अपने पति से संभोग भी क्यों ना कर रही हो।

दूसरी तरफ घर में अकेले होते हुए भी ना जाने क्यों सरला को अच्छा लगने लगा ... खास करके तब से जब उसने अनजाने में ही बाइक के पीछे बैठे बैठे अपने आप को संभालने की कोशिश करते हुए पेंट में खड़े उसके लंड को पकड़ ली थी उस पल को महसूस करते ही ना जाने कि उसे घर में अकेले रहने की इच्छा होने लगी क्योंकि ऐसे में वह शुभम के साथ अच्छी तरह से बातें कर सकती थी इस उम्र के पड़ाव में भी उसके मन में अजीब अजीब से ख्याल आ रहे थे खास करके शुभम को लेकर वह अपनी आंखों से शुभम के मोटे तगड़े लंड का दीदार करना चाहती थी अपने एहसास को वास्तविकता में बदलना चाहती थी। इसलिए हर पल अब उसकी आंखें शुभम का ही इंतजार कर रही थी।

शुभम लगभग दोपहर के समय अपने घर पर पहुंच गया... निर्मला को यह सब अच्छा नहीं लग रहा था किसी गैर औरत को इस तरह से अपनी बाइक पर बैठाकर उसके घर छोड़ना उसे ना जाने क्यों नागवार लग रहा था... उसे इस बात का डर भी था कि कहीं शुभम किसी दूसरी औरतों के चक्कर में ना पड़ जाए... इसलिए सुभम जैसे ही घर में आया वह बोली....

शुभम यह सब कुछ मुझे अच्छा नहीं लग रहा है जो तुम कर रहे हो (निर्मला बड़े ही शांत स्वर में कुर्सी पर बैठे-बैठे बोली।)

मैं क्या कर रहा हूं मम्मी... (की चैन लगी हुई बाइक की चाबी को वह उंगली से घुमाते हुए बोला)

यही औरतों को इधर ले जाना उधर ले जाना यहां छोड़ ना वहां छोड़ना....

मम्मी तुम यह सब जानती हो कि मैं यह किस लिए कर रहा हूं मैं इसलिए कर रहा हूं ताकि सरला चाची के दिमाग से हम दोनों के बीच के अनैतिक संबंध को लेकर उनका सब दूर हो सके इसलिए उनके सामने संस्कारी लड़का बना हुआ हुं।.....

(शुभम की बात सुनकर निर्मला कुछ सोचने लगी अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम इसीलिए यह सब कर रहा है लेकिन उसके मन के कोने में पराई औरतों को लेकर एक डर सा बना हुआ था...वह बिल्कुल भी नहीं चाहती थी कि शुभम किसी भी दूसरी औरतों के चक्कर में पड़े...)

मैं अच्छी तरह से जानती हूं शुभम कि तू यही सब के लिए यह सब कर रहा है लेकिन मुझे डर लगता है कि कहीं तो दूसरी औरतों के चक्कर में ना पड़ जाए..

(शुभम अपनी मां की बात सुनकर अच्छी तरह से समझता था कि उसकी मां का यूं परेशान होना जायज था क्योंकि कोई भी औरत एक मर्द को दूसरी औरत से बात नहीं सकती... इसलिए वह अपनी मां को समझाते हुए बोला. ।)

किसी बात कर रही हो मम्मी भला तुमसे सुंदर इस दुनिया में कोई है जो मैं दूसरी औरत के पीछे पड़ जाऊं... नहीं कभी भी किसी औरत के बारे में सोचता भी नहीं हूं यह तो बस उन लोग का ध्यान हम लोगों से हटाने के लिए ही है सब कुछ कर रहा हूं बस तुम निश्चिंत होकर रहो मेरी तरफ से किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है....

(शुभम की बात सुनकर कुछ हद तक निर्मला निश्चिंत हो गई लेकिन बेफिक्र बिल्कुल भी नहीं हुई क्योंकि वह मर्दों की जात को अच्छी तरह से जानती है इसलिए उसके मन के कोने में दूसरी औरतों को लेकर डर बना हुआ था।)

mmmmmmmmmmmmmmmmmmmm
 
शुभम रुचि को उसके मायके छोड़ कर अपने घर आ चुका था। साथ में एक अद्भुत और अमिट एहसास लेकर लौटा था.... उसे भरोसा तो नहीं था कि उसका यह सफर बेहद रोमांच से भरा होगा बड़की इतना भी रोमांच नहीं हुआ लेकिन जो कुछ भी बाथरूम में उसके साथ हुआ था यह सब किसी रोमांच से कम नहीं था और शुभम जैसे लड़के के लिए तो सही मायने में इसी तरह के वाक्ये को ही रोमांच कहते हैं.... वह कभी सोचा भी नहीं था कि रुचि को इस तरह से अपने लंड के दर्शन करा पाएगा हालांकि उसके मन में हमेशा यही बात चलती रहती थी कि वह अपनी मर्दाना ताकत का प्रदर्शन रुचि के आंखों के सामने करें ताकि रुचि पूरी तरह से उसके अधीन हो जाए उसकी दीवानी हो जाए.... और ऐसा हुआ भी था वैसे तो रुचि की शादी को 3 साल गुजर गए थे लेकिन अभी भी उसकी गोद हरि नहीं हो पाई थी इसलिए ऐसा कहना भी ठीक था कि हाथों की मेहंदी का रंग छुटा भी नहीं था कि उसके जेहन में उसके दिलो-दिमाग पर किसी पराए मर्द की छाया पड़ने लगी थी । और वह पराया मर्द कोई और नहीं बल्कि उसका ही पड़ोसी शुभम था। शुभम के साथ वैसे भी वह एकदम साहजिक अनुभव करती थी....

बाथरूम वाले हादसे के बाद से रूचि पूरी तरह से शुभम के आकर्षण में बस गई थी खास करके उसके मजबूत तगड़े लंबे खड़े लंड के आकर्षण में वह अपने मन को पूरी तरह से जोड़ चुकी थी।

शुभम रुचि के मायके से आने के बाद जानबूझकर दो दिन तक सरला से मिलने नहीं गया था क्योंकि वह देखना चाहता था कि वाकई में सरला उसके आकर्षण में बंध चुकी है या नहीं और जैसा कि वह मन में सोच रहा था वैसा ही हुआ था सरला शुभम को 2 दिन से ना देखने की वजह से काफी व्याकुल नजर आ रही थी।और शुभम उसकी क्या कविता को दूर करने का उपाय मन में सोच रखा था और उसी प्लान के मुताबिक वह शाम को सूरज ढलने के समय छत पर पहुंच गया और अपनी टीशर्ट निकाल कर अपनी कमर के ऊपर के अंग को पूरी तरह से निर्वस्त्र कर दिया साथ ही वह एकदम स्किन टाइट लोअर पहन लिया जिसमें उसके आगे का भाग उत्थान स्थिति में ना होने के बावजूद भी काफी गोल नजर आ रहा था । यह शुभम की सोची समझी साजिश थी वह जानबूझकर अपनी स्थिति को इस तरह से कर रहा था कि सरला उसे इस अवस्था में देखकर मंत्रमुग्ध हो जाए क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि औरतों की कमजोर कड़ी मर्दों की मर्दाना ताकत उन की जोड़ी मजबूत छाती और कसरती बदन होता है.... और शुभम को अपनी मजबूत बजाओ पर विश्वास था कि वह अपने अंग प्रदर्शन के जरिए सरला की टांगों के बीच हलचल पैदा करने में कामयाब हो जाएगा... वह अपनी तरफ से पूरी तैयारी कर चुका था ।।।

शाम चलने वाली थी और वह छत पर अपनी पूरी तैयारी के साथ दोनों हाथों में वजनदार डंबल लेकर उससे कसरत करना शुरू कर दिया वह जानता था कि शाम को सरला जरूर छत पर सूखे हुए कपड़े लेने आएगी और तब वह अपने अंग का प्रदर्शन करके उसके तन बदन को झकझोर के रख देगा... वह कसरत करना शुरू कर दिया था और कुछ ही मिनट में उसकी छाती पर पसीने की बूंदें उपसने लगी जो कि मोती के दाने की तरह चमक रही थी... कसरत करते हुए भी उसका दिल जोरों से धड़क रहा था संध्या बेला की शीतल पवन में भी उसके बदन से पसीना टपक रहा था... वह जानता था कि सरला जैसी उम्रदराज औरत को अपने जाल में फंसना इतना आसान नहीं था इसलिए वह कोई भी कसर बाकी रखना नहीं चाहता था और वह यह भी जानता था कि वह घर में बिल्कुल अकेले हैं और यही सही मौका है उसके घर के दरवाजे खोल कर उसकी टांगों के बीच जगह बनाने के लिए ... और इस कार्य में वह माहिर भी था.... लेकिन फिर भी किसी भी प्रकार की ढील बर्तना नहीं चाहता था....

बार-बार कसरत करते हुए उसकी नजर छत पर चली जा रही थी जहां से सरला आने वाली थी वह मन ही मन में गुदगुदा भी रहा था कि ना जाने कब आएगी.... लेकिन थोड़ी ही देर में उसकी प्रतीक्षा की घड़ी खत्म होने लगी उसकी प्यासी आंखों को सावन भादो की फुहार का आभास होने लगा उसे सीढ़ियों पर सरला के कदमों की आहट महसूस होने लगी और वह पूरी शिद्दत से कसरत करने में जुट गया थोड़ी ही देर में उसकी आंखों के सामने सरला नजर आई... कामवासना भी बेहद अजीब चीज होती है जोकि सरला जैसी उम्रदराज औरत होने के बावजूद भी शुभम के तन बदन में इस समय सरला आग लगा रही थी जवानी के शोले भड़का रही थी... वह चोर नजरों से सरला की तरफ देख रहा था जो की छत पर नजर आने के साथ ही उसकी नजर शुभम पर पड़ी थी लेकिन वह उससे नजरें चुरा कर वापस अपने कसरत कार्य में लग गया वह जानबूझकर सरला को नजरअंदाज कर रहा था और यह बात सरला भी नोटिस कर रही थी वह दूर से ही शुभम को इस तरह से कसरत करता हुआ देखकर और खास करके उसकी नंगी चोड़ी छातियों को देखकर मदहोश होने लगी... उसके अर्ध नग्न बदन को देखा कर वह ठंडि आहहहह भरने लगी..... उसने अभी तक शुभम को इस अवस्था में नहीं देखी थी उसे इस बात का आभास बहुत जल्द हो गया कि कपड़ों के अंदर शुभम और भी ज्यादा गठीला और सेक्सी लगता है। उसकी नंगी छातियों पर उभर रहे पसीने की बूंदों को देखकर उसकी टांगों के बीच की पतली दरार नम होने लगी।

ससससससहहहहहह .... आहहहहहहह ..... यह मुझे क्या हो रहा है यह मैं क्या सोच रही हूं और उसे देख कर मेरे बदन में इस तरह के बदलाव क्यों आने लगते हैं ।(सरला ठंडि आहहहह भरते हुए अपने आप से ही बातें करते हुए बोली.... सरला को अपनी सोच और कल्पना पर पछतावा भी होता था वह अपने आप को मन ही मन भला बुरा भी कहती थी लेकिन शुभम जैसे नौजवान लड़के को अपनी आंखों के सामने देखते ही उसे ना जाने क्या हो जाता था वह एकदम मंत्रमुग्ध हो जाती थी।ना जाने उसे ऐसा क्यों लगने लग रहा था कि वह दौड़ कर जाए और उसे अपने सीने से लगा ले अपनी बड़ी-बड़ी चुचियों को उसकी नंगी छाती पर रगड़ कर अपने प्यासे पन का अहसास उसे कराएं... लेकिन ऐसा करने की हिम्मत उसने बिल्कुल भी नहीं थी उसे भी जमाने का डर था अपनी इज्जत का डर था घर के मान मर्यादा का डर था लेकिन मन के किसी कोने में यह सब को छोड़कर मर्यादा के सारे बंधन तोड़ कर रिश्तेदारी रिश्ते नाते के वास्ते से दूर होकर उसका दिल यही कहता था कि एक बार फिर से शुभम की बाहों में जाकर जिंदगी का मजा ले ले... और यही सोचकर वह अपने कदम धीरे-धीरे आगे बढ़ा रही थी....

वह रस्सी कोई खास से पकड़कर शुभम की तरफ भी देख रही थी वह मन ही मन सोच रही थी कि ना जाने कैसी कशिश कैसी प्यास है जो ना चाहते हुए भी उसकी तरफ बढ़ती चली जा रही है.... एक तरह से वह शुभम के ख्यालों में खोई रहती थी.... बड़े प्यार से देख रही थी कि शुभम कैसे अपनी कट के लिए बदन को इस तरह से मेहनत करके और ज्यादा गठीला और आकर्षक बना रहा है..... शुभम के चेहरे पर आई मासूमियत को देखकर वह अपने आपको पिघलता हुआ महसूस करने लगी उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि उसकी टांगों के बीच कोई गर्म लावा धीरे-धीरे पिघल कर बाहर आ रहा है। वह शुभम की कल्पना में खोने लगी पल भर में ही उसे ऐसा एहसास होने लगा कि वह अपने घर के अपने कमरे में और अपने ही बिस्तर पर घुटनों के बल बैठकर अपनी बड़ी बड़ी गांड को हवा में किसी दौर की तरह उठाई हुई है और उसके पीछे एक बहादुर सैनिक की तरह शुभम एकदम नग्न अवस्था में खड़ा है और अपने मजबूत लंबे तगड़े लंड को किसी मशाल की तरह हाथ में लेकर लहराते हुए उस तोप के गुलाबी छेद के माफिक मुहाने पर लगा कर तोप को दाग रहा है। सरला की कल्पनाओं का घोड़ा इतनी तेज गति से दौड़ रहा था कि वह चाहकर भी अपने घोड़ों पर काबू कर नहीं पा रही थी। वह शुभम के व्यक्तित्व से इतना ज्यादा प्रभावित हो चुकी थी कि वह कल्पना करते हुए मदहोश होने लगी दूसरी तरफ से बमों से तिरछी नजरों से देख ले रहा था लेकिन जानबूझकर उसे नजरअंदाज कर रहा था और सरला मस्त होती जा रही थी वह कल्पना में अपनी दोनों टांगों को पिलाई अपनी मदमस्त घाटकोपर उठाएं शुभम के द्वारा उसके मोटे तगड़े लंड से चुदने का आनंद लूट रही थी.... उसे ऐसा साफ सा महसूस हो रहा था कि जैसे शुभम वास्तव में उसकी कमर को थाम कर अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर की गुलाबी पत्तियों के बीचो-बीच अंदर की तरफ धकेल रहा है और उसका लंड धीरे-धीरे करके उसकी बुर की गहराई नापना शुरू कर दिया.... और जैसे ही शुभम उसे चोदने की शुरुआत करते हुए पहला करारा झटका मारा वैसे ही सरला लड़खड़ा कर गिरते-गिरते बची तब जाकर वह अपनी कल्पना से बाहर आए और अपने इस कल्पना के बारे में सोच कर ही उसके होठों पर हंसी आ गई लेकिन उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसकी पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी....

लेकिन अपनी इस कल्पना को लेकर उसे किसी भी तरह का अपराध बोध और अफसोस नहीं हो रहा था...बल्कि पल भर के लिए इस कल्पना की वजह से उसके तन बदन में एक अद्भुत एक अजीब सा अहसास का रोमांच फैला हुआ था... शुभम के साथ केवल संभोग मात्र की कल्पना करके ही वह एकदम मस्त हो गई थी और वह यह सोच कर तो वह साथ में आसमान में उड़ने लगी थी कि अगर उसकी कल्पना वास्तविकता का रूप लेने तब क्या होगा यही सोचकर वह रोमांचित हुए जा रही थी....

वह धीरे-धीरे रस्सी पर से सूखे कपड़े को उतारने लगी.... वह शुभम की तरफ ही देख रही थी जो कि अभी भी आपने कसरत करने में मस्त था उससे रहा नहीं गया तो वह खुद ही बोली ।

शुभम और शुभम क्या बात है मैं कब से आई हूं तू मेरी तरफ ध्यान ही नहीं दे रहा। (रस्सी पर से सूखे हुए कपड़ों को उतारते हुए बोली।)

माफी चाहूंगा चाची मैं आपसे मुलाकात नहीं कर पाया.... और अभी तो मुझे पता ही नहीं चला कि आप कब छत पर आ गई...(शुभम डंबल को नीचे रखते हुए बोला... वह पूरी तैयारी में था वह डंबल को नीचे रख कर एक बारअपनी स्थिति का जायजा लेते हुए अपनी नजर को पर से नीचे की तरफ घुमाया तो टांगों के बीच की स्थिति कुछ मादक जान पड़ रही थी क्योंकि वहां हल्के हल्के तंबू बनना शुरू हो गया था। और वह अपनी मर्दानगी का जलवा बिखेरने के लिए धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए सरला की तरफ जाने लगा और शुभम को इस तरह से अपनी तरफ आता देखकर उसके दिल में कुछ कुछ होने लगा।)

तू रुचि बहू को उसके मायके छोड़ कर आने के बाद भी मुझसे मुलाकात नहीं किया मुझे यह भी नहीं बताया कि वहां सब कुछ कैसा है....

वही तो बता रहा हूं चाची की वहां में आराम से रुचि भाभी को छोड़ कर आ गया हूं और उनके पिताजी की तबीयत सही है मतलब बीमार है लेकिन ज्यादा बीमार नहीं है इसलिए घबराने वाली कोई बात नहीं है...... (इतना कहते हुए शुभम रस्सी के दूसरे छोर पर दीवार का सहारा लेकर खड़ा हो गया। उसे इस बात का अच्छी तरह से एहसास था कि सरला चोर नजरों से उसकी नंगी जातियों को देख ले रही थी और कभी-कभी उसकी नजर टांगों के बीच भी चली जा रही थी जहां पर अभी कुछ खास तंबू बना हुआ नहीं था लेकिन शायद अच्छे खासे तंबू की उम्मीद सरला को थी ।)

चल अच्छा हुआ शुभम कि तू उसको उसके मायके छोड़ आया वरना मुझे लेकर जाना पड़ता सच कहूं तो तेरी वजह से मुझे बहुत आराम मिल जाता है।

चाची जी इसमें तकल्लुफ वाली कोई बात नहीं है। आखिर में पहले भी कहा हूं कि मैं आपकी सेवा में हमेशा हाजिर हुं।(शुभम अपनी बातों के जादू में सरला को पूरी तरह से उलझाने लगा।)

तेरे जैसा लड़का मिलता कहां है आज के जमाने में। जो बिना किसी रिश्ते के इतनी मदद कर सके।

चाची कैसी बात कर रही हो अरे मैं आपको चाची कहता हूं रुचि भाभी को भाभी कहता हूं यह सब रिश्ता तो है.... हां अगर आप यह सब रिश्तेदारी नहीं समझती तो बात कुछ और है।

नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है मुझे मालूम नहीं था कि तू इतना अच्छा लड़का है तेरी संस्कार इतने अच्छे है...

वैसे चाची आपको तकलीफ होती होगी ना अकेले घर का सारा काम करने में। (शुभम इस बहाने से सरला के मन में क्या चल रहा है इस बात की टोह लेने के लिए बोला।)

हां सही कह रहा है तू तकलीफ तो होती है लेकिन क्या करें करना तो पड़ता है ना। (सरला सूखे हुए कपड़ों को पकड़े हुए ही बोली..)

लेकिन जा चीज में एक फायदा है आप घर का सारा काम खुद करती है जो कि आपके शरीर के लिए बहुत ही अच्छा है। (अब शुभम अपना अगला पासा फेंकते हुए बोला जो कि जानता था कि अब सरला को उसका यह फेंका हुआ पासा चारों खाने चित कर देगा...)

क्या बेवजह की बातें कर रहा है मैं काम कर रही हूं और अच्छा है। (सरला शंका जताते हुए बोली)

चाचा जी मैं सच कह रहा हूं यह आपके शरीर के लिए बेहद जरूरी है और बहुत ही अच्छा है।

कैसे?

अच्छा आप सही सही बताओ कि आपकी उम्र कितनी है....

यह कैसा सवाल है....

आप बताइए तो सही आपकी उम्र कितनी है तब मैं बताता हूं.....

हम्मम.... वैसे तो सच कहूं तो तुम्हारी मम्मी से 3 चार साल बड़ी हुं....(वैसे औरतों की हमेशा से यही आदत रही है कि वह हम लोग कभी भी अपनी सही उम्र नहीं बताती और उसी तरह से सरला ने भी यही की थी.)

लेकिन मैं सच कहूं तो चाची आप अभी 35 की लगती हो।

( इतना सुनते ही सरला के मुखारविंद ऊपर शर्म की लाली मचाने लगी और वह मंद मंद मुस्कुराने लगी क्योंकि शुभम की यह बात उसे बहुत अच्छी लगी थी।)

चल तू अब बातें मत बना मैं जानती हूं तू झूठ कह रहा है।

चाची शायद आप एक बात बोल रही हैं कि मैं एक लड़का हूं मतलब एक मर्द एक मर्द के नजरिए से बता रहा हूं कि हम लोगों को क्या अच्छा लगता है।

तू तो ऐसे बोल रहा है जैसे औरतों के बारे में तुझे सब कुछ पता है।

मैं कुछ ज्यादा तो नहीं कहूंगा चाची लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि हम लोगों को क्या अच्छा लगता है यह सिर्फ हम लोग ही जानते हैं। (इतना कहने के साथ शुभम रस्सी पर से सूखे हुए कपड़े उतार कर धीरे धीरे सरला को थमाने लगा)

तो तू क्या जानता है औरतों के बारे में....(सरला शर्म के मारे शुभम से नजरें चुराते हुए बोली)

ज्यादा कुछ तो नहीं जानता लेकिन चाची में इतना जरूर जानता हूं कि हम लोगों को आप जैसी औरत ही सबसे ज्यादा खूबसूरत लगती हैं।....(शुभम रस्सी पर से सूखे कपड़े उतार कर सरला को थमाते हुए बोला।)

क्या तुम सच कह रहा है क्या तुझे और तेरी उम्र के सारे छोकरो को मेरी जैसी औरत अच्छी लगती है...(शुभम के हाथों से कपड़े थाम ते हुए बोली..)

हां चाची में एकदम सही कह रहा हूं तुम्हारी जैसी ही औरत हम जैसे लड़कों की पहली पसंद होती है।

लेकिन ऐसा क्यों ... लड़कियां भी तो है एक से एक खूबसूरत..(सरला शंका जताते हुए बोली...)

यह सब तो मैं नहीं जानता चाचा लेकिन इतना जरुर जानता हूं कि जो कुछ भी मैं कहा वह सत प्रतिशत सही है।

चल तू कहता है तो सही होगा मुझे तुझ पर विश्वास है। लेकिन क्या मैं तुझे अच्छी लगती हुं? (सरला शुभम के ऊपर सीधा सवाल दाग दी शुभम को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि सरला इस तरह के सवाल करेगी लेकिन जैसे वह भी पूरी तरह से हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार था इसलिए सरला की बात सुनते ही बोला ।)

बहुत अच्छी लगती हो चाची....आप मुझे बहुत खूबसूरत लगती हो बहुत सुंदर लगती हो सच कहूं तुम मैंने आज तक आपके जैसी इस उम्र में इतनी खूबसूरत औरत नहीं देखा हूं.....(शुभम के मुंह से अपनी इस तरह की तारीफ सुनकर वह खुशी से गदगद हुए जा रहे थे उसके चेहरे के बदलते भाव देखकर शुभम को उम्मीद होने लगी कि पंछी जाल में फंसने लगा है उसका दाना सही जगह पर गिर रहा है सरला एक जवान लड़के के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर फूली नहीं समा रही थी उसके शरीर में उत्तेजना का असर बड़ी तेजी से हो रहा था उसे अपनी टांगों के बीच की पतली दरार से नमकीन रस बहता हुआ साफ महसूस हो रहा था यह सब उसे सातवें आसमान पर उड़ाए लिए चले जा रहा था.....)

मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि तू मेरी तारीफ कर रहा है।

यह तो आपका बड़प्पन है चाची वरना मैं सही कहूं तो आते-जाते मेरी उम्र के सारे लड़के बस आप ही को देखते रहते हैं....

लेकिन मैंने तो कभी भी इस तरह की कोई भी हरकत महसूस नहीं की।

कैसे करोगी चाची आपने कभी इस बारे में ध्यान ही नहीं दी...मेरी बात का यकीन ना हो तो रास्ते पर चलते समय अपने चारों बाजू नजर घुमा कर देखना कि किसकी नजर आपके ऊपर टिकी रहती हैं....

(शुभम ने अपनी है बात पक्के तौर पर डंके की चोट पर कहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि सरला चाची की गांड बहुत बड़ी-बड़ी और गोल गोल है और जब वो चलती है तो एक मदमस्त हिल्टन उनके बड़े-बड़े नितंबों में होती है और यही वजह है कि जवान हो या बुरे सब की नजर इस तरह की औरतों पे पड़ती रहती है। उसकी खुद की नजर सरला के पिछवाड़े पर हमेशा टिकी रहती है।सरला तो एक जवान लड़के के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर पूरी तरह से उत्तेजना में सरोवर होने लगी उसके चेहरे पर छाई नानी मां साफ बयां कर रही थी कि इस समय उसकी टांगों के बीच हलचल मची हुई है। सरला मारे शर्म के पानी पानी हुई जा रही थी। और पति उत्तेजक बदला शुभम के बदन में भी हो रहा था क्योंकि उसके लोअर में अच्छा-खासा तंबू बन चुका था जिस पर सरला की चोर नजर बार-बार चली जा रही थी और उस जगह को देखकर उसका दिल जोरों से धड़क रहा था। शुभम की बातें सुनकर सरला शर्म के मारे एकदम चुप्पी साध ली थी .... उसके मुंह से एक भी शब्द फूट नहीं रहे थे.... शुभम जोकि कई औरतों की संगत में आ चुका था इसलिए सरला के चेहरे पर बदलते भाव को वाशी तरह से समझ रहा था शुभम की प्रसन्नता का कोई ठिकाना ना था उसका मन हर्षोल्लास में उत्तेजित हुआ जा रहा था वह चाहता तो इसी समय सरला को अपनी बाहों में लेकर उसके गुलाबी होठों का चुंबन कर सकता था और इससे ज्यादा भी आगे बढ़कर वह शायद सरला से संभोग सुख भी हो सकता था लेकिन शायद यह उचित समय नहीं था इसलिए वह अपने आप पर सब्र करके रुक गया सरला की हालत खराब हो जा रहे थे वहां अपनी नजरें शुभम से बचा रही थी...वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उम्र के इस पड़ाव पर आकर एक जवान लड़का उसकी इस तरह की तारीफ करेगा जबकि वह लड़का उसके ही लड़के की उम्र का था.... लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसी से सरला को किसी भी प्रकार का एतराज नहीं था बल्कि उसे तो यह सब बातों का एहसास ही किसी और दुनिया में लिए जा रहा था उसे सब कुछ अच्छा लग रहा था।

सरला के साथ-साथ शुभम की सांसो की गति तेज होती जा रही थी....

शुभम सरला की तरफ देखते हुए रस्सी पर से सूखे हुए कपड़े उतारकर सरला को थमाते जा रहा था ।

और कपड़ों को उतारते समय उसके मन में उम्मीद बनी हुई थी कि जिस तरह से वार रूचि किस तरह से मदद करते हुए उसकी ब्रा और पेंटी तक पहुंच गया था अगर किस्मत अच्छी हुई तो आज उसके हाथों सरला की भी ब्रा और पेंटी हाथ लग जाएगी इसी उम्मीद में वह कपड़े उतारता जा रहा था। ...
 
सरला एकदम शर्मसार हुए जा रही थी क्योंकि बार-बार उसकी नजरें शुभम के तने हुए तंबू पर चली जा रही थी ... और उस तंबू की ऊंचाई को देखकर उसकी टांगों के बीच की हलचल बढ़ती जा रही थी उसकी जांघों में थरथराहट पैदा हो रही थी। क्योंकि अनजाने में ही उसके हाथ में आए शुभम के लंड की वजह से इतना तो समझ ही गई थी कि शुभम के टांगों के बीच का हथियार एकदम दमदार है। उसके लोहार में तने हुए लंड की कल्पना ही उसकी बुर को पूरी तरह से पनिया रही थी।

कुछ पल के लिए दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी दूर आसमान में सूरज अपनी लालिमा लिए जमीन में समाने के लिए तैयार था छत पर अंधेरा होने लगा था लेकिन इतना भी अंधेरा नहीं था कि सरला कुछ देख ना पाए एक तो कमर के ऊपर का शुभम का नौजवान नंगा बदन और ऊपर से लोअर में तना हुआ उसका तंबू अजीब सा हलचल मचाए हुए था....

शुभम इसी उम्मीद में रस्सी पर से कपड़े उतारे जा रहा था कि सरला की ब्रा पेंटी उसके हाथ लग जाएगी और जैसा कि उसे उम्मीद थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी मनोकामना पूरी होने लगी और जैसे ही वह साड़ी को रस्सी पर से उतारा उसके नीचे सूखने के लिए रखी हुई ब्रा और पेंटी नीचे गिर गई और शुभम तुरंत नीचे की तरफ लपक कर सरला की ब्रा और पेंटी उठा लिया।

उसके हाथों में सरला की ब्रा और पेंटी आ गई थी जिसे वह अपने हाथों में लेकर एक पल के लिए उसे चारों तरफ घुमा कर देखने लगा सरला यह देखकर एकदम शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी क्योंकि उसकी ब्रा और पेंटी एक नौजवान लड़की के हाथ लग गई थी जिसे वह चारों तरफ से देख रहा था एक अजीब सी उत्सुकता और उत्तेजना का अनुभव सरला को हो रहा था उसके दिल की धड़कने बढ़ने लगी थी साथ ही उसके छातियों का घेराव सांसो की गति के साथ ऊपर नीचे हो रहा था ।उत्तेजना के मारे सरला का गला सूखता जा रहा था और यही हाल शुभम का भी हो रहा था उसका सपना उसकी उम्मीद सच हो गई थी उसकी हाथों में सरला की ब्रा और पेंटी आ गई थी जिसे हाथों में लेकर वह काफी उत्साहित और उत्तेजित नजर आ रहा था जिसका हलचल उसे अपनी टांगों के बीच बराबर हो रहा था। ऐसा लग रहा था कि जवानी से भरी सरला की ब्रा और पेंटी को देखकर उसके नौजवान मर्दाना लंड ने सरला की जवानी रूपी ब्रा और पेंटी को सलामी भरी हो इस तरह से ऊपर नीचे होने लगा.... शुभम को तो समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे और कैसे उसकी ब्रा और पेंटी को उसके हाथों में थमाए उसके मुंह से शब्द नहीं फूट रहे थे... फिर भी हिम्मत दिखाते हुए वह सरला से बोला।

चचचचच.... चाची यह आपके हैं....? (शुभम हकलाते हुए बोला।)

सरला छठ से शुभम के यहां तो से अपनी ब्रा और पेंटी ले ली और शर्मा कर मुस्कुराते हुए बोली।

नहीं तो और किसके होंगे मेरे ही हैं....(इतना कहते-कहते उसका गला सूखने लगा....)

लेकिन चाची आप बुरा ना माने तो एक बात कहूं।

बोल ......( सरला शर्म के मारे दूसरी तरफ मुंह करके बोली)

चाची आप की पेंटी में छेद हो गया है। (शुभम सोचे समझे बिना हिम्मत दिखाते हुए एकदम बेशर्म बनकर धड़ाक से बोल दिया....सरला तो यह सुनकर एकदम शर्म से पानी पानी हो गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहें लेकिन जिंदगी में पहली बार उसे इस तरह से किसी ने उसकी पेंटिंग में पड़े छेद के बारे में खुले शब्दों में बोला था और ऐसे भी कोई बोल कहां पाता जब कोई देखेगा तभी ना कहेगा .... और देखने वाला कौन था उसका पति जो कि इस समय दुनिया में नहीं था उसे उम्मीद नहीं थी कि कल का छोकरा उसकी पेंटी के बारे में इतनी बड़ी बात और वह भी एकदम बेझिझक बोल जाएगा.... लेकिन उसकी बात सुनकर पल भर में ही सरला की उत्तेजना बढ़ गई... उसकी जांघों के बीच हरदम आउट होने लगी उत्तेजना का इतना जबरदस्त अनुभव उसने आज तक नहीं की थी उसे अपनी पेंटी पूरी तरह से गीली होती हुई महसूस होने लगी... अपने आप को संभालते हुए वह शुभम के सवाल का जवाब देते हुए बोली...

हां मेरी पेंटिं में छेद है लेकिन क्या करूं मैं कभी बाजार खरीदने गई अगर ऐसा है तो तो क्यों खरीद कर नहीं ले कर दे देता....(सरला शुभम से यह बात नजरें चुराकर लेकिन मंद मंद मुस्कुराते हुए बोली...)

मै खरीद कर ला तो दू लेकिन मुझे साइज नहीं मालुम....(शुभम बड़ी मासूमियत के साथ बोला..)

तुझे तो औरतों के बारे में सब कुछ पता है तो मेरी साइज के बारे में भी तुझे पता ही होगा लाकर दे दे (इतना कहकर वो वहां से मुस्कुराते हुए नीचे चली गई। शुभम तो सरला की यह बात सुनकर एकदम से गनगना गया... वहअपने खड़े लंड को लोगों के ऊपर से ही मचलता हुआ सरला को गांड मटका कर जाते हुए देखता रह गया उसकी मुस्कुराहट देखकर इतना तो समझ गया था कि जो कुछ भी वह बोला था इसे सरला को जरा भी बुरा नहीं लगा था बल्कि जिस तरह से वह बातें कर रही थी वह साफ समझ गया था कि उसकी बातें सरला को अच्छी लगी थी।।

शुभम का काम बन चुका था और वह वापस अपनी छत पर आ गया।

nnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnn

शुभम को खुद पर भरोसा नहीं हो रहा था कि उसने इतनी बेशर्मी भरी बातें सीधे-सीधे सरला से कह दी थी उसे अपनी हिम्मत पर भरोसा नहीं हो रहा था लेकिन जो कुछ भी उसने कर दिया था उससे उसे बहुत हिम्मत मिल रही थी उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे अब उसकी मंजिल दूर नहीं है या यूं कह लो कि अब उसे अपनी मंजिल साफ साफ नजर आ रही थी जो कि सरला की मदमस्त मोटी मोटी टांगों से होकर गुजरती थी और टांगों के बीच जाकर खत्म हो जाती थी ढेर सारी औरतों को भोग चुका शुभम सरला के बारे में सोच कर मस्त हो जा रहा था उसे यकीन हो गया था कि जिस तरह से वह इतनी गंदी और भद्दी बात पर सरला मुस्कुरा कर गई थी और उसे खुद नई पैंटी और ब्रा खरीद कर लाने के लिए बोल कर गई थी इससे साफ जाहिर था कि आप शुभम का काम बन चुका था उसके हाथों एक नई चिड़िया हाथ लग चुकी थी भले ही वह उम्र दराज थी लेकिन शुभम की आंखों मैं तो हमेशा औरतों की बड़ी-बड़ी गांड और बड़े बड़े दूध ही बसे होते हैं जोकि सरला के पास अखुट भंडार था। सरला जिस तरह से अपनी गांड मटका कर गई थी.. शुभम को लगने लगा था कि सरला खुद अपनी मदमस्त गांड उसकी गोद में पसार देगी... शुभम के दिल पर छुरिया चल रही थी अपने आप को संभाल नहीं पा रहा था उसके लोअर में गदर मचा हुआ था जिसे शांत करना बेहद जरूरी थोड़ी सी बात तुरंत टी-शर्ट पहन कर अपने कमरे में गया और सरला के बारे में कल्पना करते हुए अपनी मोटी तगड़े लंड को हिलाना शुरू कर दिया और तब तक हीलाता रहा जब तक कि सरला के नाम का पानी निकल नहीं गया..... ।

और यही हाल सरला का भी था उम्र के इस पड़ाव पर आकर जिस तरह से वह अपने बदन में उत्तेजना का अनुभव कर रही थी वह उसके लिए काबिले तारीफ थे क्योंकि वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसके बदन में इस तरह का बदलाव होगा शुभम की बेधड़क बात और वह भी उसकी पैंटी में छेद के बारे में उस बात को याद करके ही सरला पूरी तरह से कामोत्तेजना के सागर में डूबती चली जा रही थी बार-बार उसकी आंखों के सामने उसके लोअर में तना हुआ तंबू नजर आ रहा था। उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी बार-बार उसकी उत्सुकता लोअर के अंदर के हथियार को देखने के लिए बढ़ती जा रही थी लेकिन उस के नसीब में ना जाने वह दिन कब आएगा जब वह अपने हाथों से शुभम के मोटे तगड़े लंड को हाथ में लेकर हीलाएगी और उसे अपने हाथ में लेकर ही अपनी बुर का रास्ता दिखाएंगी यह सब सोचकर ही उसके बदन में अंगड़ाइयां उठ रही थी.... उत्तेजना और कल्पना के सागर में डूबते हुए उसका बदन पसीने से तरबतर हो चुका था वह बिस्तर पर अपनी साड़ी को कमर तक करके एक बार फिर से अपनी बुर में अपनी दोनों उंगली डालकर अपनी गर्मी को शांत करने की कोशिश कर रही थी। और कुछ देर में वह अपनी पुर का पानी निकाल कर एकदम शांत हो गई....

सरला ने बात ही बात में शुभम को एक अद्भुत काम में डाल दी थी जो कि आज तक शुभम ने उस काम को अंजाम नहीं दिया था लेकिन कभी ना कभी तो यह काम करना ही था ... इसलिए सरला के द्वारा दिया हुआ यह चैलेंज मानकर वह दुसरे दिन ही नहा धोकर तैयार हो गया और बाजार निकल गया वह इस काम में देरी नहीं करना चाहता था। क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था किस काम में ढील देने का मतलब है कि अपनी मंजिल से दूर होना इसलिए वह जल्द से जल्द अपनी मंजिल को पा लेना चाहता था इसलिए मौके की नजाकत को समझते हुए वह बाजार पहुंच गया और अच्छी सी दुकान देख कर उस में प्रवेश कर गया... काउंटर पर बहुत ही खूबसूरत लेडी बेठी हुई थी... पहले तो शुभम बहुत ही अच्छा रहा था क्योंकि उसका यह पहला अनुभव था किसी लेडीस के लिए ब्रा पेंटी खरीदने का। इसलिए उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और वैसे भी काउंटर पर लेडी बैठी होने की वजह से उसे अंदर ही अंदर घबराहट हो रही थी लेकिन उसके लिए एक अच्छी बात थी कि उस काउंटर पर कोई और नहीं था और वह काउंटर औरतों के अंतर्वस्त्र का ही था इसलिए वह थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए कि जो भी होगा देखा जाएगा इतना सोच कर वह उस काउंटर की ओर आगे बढ़ गया.... काउंटर पर पहुंचकर भाई इधर उधर देखने लगा जबकि वह औरतों के अंतर्वस्त्र का काउंटर था इसलिए काउंटर से बनने वाली वह लेडी उसे शंका की नजर से घूरने लगी क्योंकि वह काफी बार इस तरह का अनुभव कर चुकी है कि बेवजह इस तरह के लड़के आते थे और औरतों की ब्रा पेंटी के नाम के बारे में भाव के बारे में पूछ कर वहां से रफूचक्कर हो जाते थे इसलिए वह सोचे कि शायद यह भी इसी तरह का ही लड़का है इसलिए वो खुद बोली।

आपको क्या चाहिए....? (एक सेल्समैन होने के नाते वह काफी इज्जत से शुभम से बोली)

जी ... जी......

यह जीजी क्या लगा रखे हो क्या चाहिए यह बताओ... (इस बार हुआ लेडी थोड़े सख्त स्वर में बोली)

जी मुझे मेरे भाभी के लिए ब्रा और पेंटी चाहिए.. (शुभम की बात सुनते ही वह काउंटर वाली लेडी शुभम को ऊपर से नीचे तक संकास्पद नजरों से देखी...) वह क्या है ना गांव से नई नई आई है ना इसलिए वह बाजार नहीं आती इसलिए मुझे लेकर जाना पड़ रहा है। अगर आप मेरी मदद कर देती तो....(इतना कहकर वह उस लेडी की तरफ आशा भरी नजरों से देखने लगा वह काउंटर वाली लेडी भी बात को समझते हुए मुस्कुरा कर बोली...)

जी कोई बात नहीं मैं आपकी हर तरह से मदद करने के लिए तैयार हूं आप साइज बताइए।

जी साइज तो मुझे नहीं मालूम....

देखिए जब आपको शाईज नहीं मालूम तो आप कैसे खरीदेंगे....

जी अगर आप मदद कर देती तो....

लेकिन इसमें मैं कैसे मदद कर सकुगी... साइज के बारे में पता होता तो जरूर मदद कर सकती..... अच्छा एक काम करिए सामने कुछ औरतें खड़ी है उन्होंने तो को देखकर आप मुझे बताइए कि आपकी भाभी का साइज किसकी तरह है तो मैं आपकी जरूर मदद कर सकती हुं।

उसकी बात सुनते ही शुभम दुकान में चारों तरफ नजर घुमाकर सरला के कद काठी वाली औरत को ढूंढने लगा और जल्द ही उसकी तलाश खत्म हो गए सामने की साड़ी के काउंटर पर एक औरत खड़ी थी जो कि एकदम सरला के कद काठी की थी उसके नितंबों का घेराव भी सरला की तरह ही था इसलिए उसकी ओर उंगली दिखाते हुए शुभम बोला।

वह देखिए वह पीली साड़ी वाली आंटी खड़ी है ना बिलकुल वैसी है मेरी भाभी की कद काठी है ।

(उस औरत को देखते ही काउंटर वाले लेडी समझ गई कि कौन सा साइज चाहिए इसलिए वह तुरंत अच्छी कंपनी का और एकदम आरामदायक ब्रा और पेंटी की सीरीज निकाल कर रख दी।)

यह लीजिए पसंद कर लीजिए आपको जो अच्छी लगती है यह सबसे अच्छी किस्म की ब्रा और पेंटी है ।

(शुभम काउंटर पर रखी हुई प्रॉपर्टी की कुछ सीरीज में से अच्छे कलर की सीरीज देखकर उसे पसंद करने लगा और उनमें से लाल रंग की ब्रा और पेंटी निकालकर दूसरी तरफ रखते हुए बोला।)

यह अच्छी लग रही है अच्छा आप बुरा ना मानो तो एक आप अपनी तरफ से पसंद कर सकती हैं जो वाकई में खूब अच्छी हो...

क्यों नहीं.... ( और इतना कहने के साथ है यह वह लेडी उसमें से एक आसमानी रंग की जालीदार ब्रा और पेंटी निकालकर साइड में रख दी और बोली।)

यह बहुत ही अच्छी लगेगी आपकी भाभी पर...(वह मुस्कुराते हुए बोली उसकी बातों में आत्मविश्वास झलक रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अच्छी तरह से जानती हो कि अगर उसकी भाभी यह पहनेगी तो वह जरुर देखेगा और वह अच्छी तरह से जानती थी कि अधिकतर लड़के केवल औरतों कि टांगों के बीच पहुंचने के लिए ही उन्हें इस तरह के कपड़े खरीद कर देते रहते हैं।)

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद बस आप इतना कीजिए कि इसे गिफ्ट की तरह पैक कर दीजिए....

(शुभम की यह बात सुनते ही क्वालिटी समझ गई कि मामला कुछ और है वह केवल मुस्कुरा कर उसे गिफ्ट की तरफ एक करने लगी और उसे पैक करने के बाद बिल के साथ उसे शुभम को थमा दी जिसका भुगतान करके वह खुशी-खुशी दुकान से बाहर निकल गया...शुभम काफी खुश नजर आ रहा था क्योंकि जिंदगी में आज पहली बार उसने ऐसा काम किया था जिसके बारे में उसने अभी तक कल्पना तक नहीं किया था औरतों के अंतर्वस्त्र खरीदने का यह उसका पहला अनुभव था और यह अनुभव बेहद रोमांच से भरा हुआ था... आखिरकार वह सरला के लिए ब्रा और पेंटी खरीद चुका था और वह भी 2 जोड़ी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह कैसे सरला को यह गिफ्ट का पैकेट थमाए क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि इसे घर पर लेकर जा नहीं सकता था इसलिए दुकान से निकल कर सीधे सरला की घर पर पहुंच गया और होर्न बजाकर

सरला को बाहर आने का इशारा किया सरला को यह नहीं मालूम था कि बाहर घर के कौन होरन बजा रहा है वह सिर्फ देखने के लिए आई थी ईतना होर्न कौन बजा रहा है जब वह अपने दरवाजे पर शुभम खड़ा है तो वह एकदम खुश हो गई वह कुछ कह पाती इससे पहले ही शुभम उसके हाथ में गिफ्ट वाला पैकेट हम आकर अपने घर की तरफ गाड़ी घुमा दिया वह कुछ समझ पाती इससे पहले ही शुभम अपने घर में जा चुका था साला समझ नहीं पा रही थी आखिरकार यह गिफ्ट क्यों...? और इस गिफ्ट में क्या हो सकता है उसके मन में उथल-पुथल चल रही थी एक पल के लिए तो उसका मन आशंका से भर गया कि कहीं कल वाली बात मान कर शुभम ने उसके लिए ब्रा पेंटी तो नहीं खरीद कर लाया...यह ख्याल उसके मन में आते ही उसके बदन में पल भर में उत्तेजना की लहर दौड़ गई और वह उस गिफ्ट वाले पैकेट को लेकर अपने कमरे में चली गई.....

दूसरी तरफ शुभम ब्रा पेंटी वाला गिफ्ट का पैकेट सरला को पकड़ा कर पूरी तरह से रोमांच से भरा हुआ था उसके तन बदन में उत्तेजना चिकोटी काट रही थी... शुभम बेशर्मी की सारी हदें एक के बाद एक बार करता हुआ आगे बढ़ रहा था अपनी मां से भी बड़ी उम्र की औरत को वह उसके अंतर्वस्त्र खरीद कर उसे गिफ्ट किया था इसका क्या असर होने वाला था शायद इसका आभास शुभम को पहले से ही हो गया था जिसको सरला की मुस्कुराहट बयां करती थी।

mmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm
 
शुभम अपनी उंगली में अपनी बाइक का छल्ला ना चाहते हुए और सीटी बजाते हैं घर में प्रवेश किया..

शुभम काफी उत्साहित नजर आ रहा था अंदर ही अंदर वह बहुत प्रसन्नता क्योंकि उसने आज बहुत बड़ा काम कर दिया था और इस बात की किसी को कानो कान खबर तक नहीं पडी थी.... तभी सामने से सीढ़ियों पर से उतरती हुई निर्मला उसे खुश देखकर बोली।

क्या बात है शुभम आज बहुत खुश नजर आ रहा है... और यह सुबह-सुबह आज कहां चला गया था.... कहीं किसी लड़की का तो चक्कर नहीं है ना....?(निर्मला सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए बोली... शुभम अपनी मां को भी देख रहा था जो इस समय नहा कर बाहर आई थी और अभी भी उसके बाल एकदम गीले थे । आसमानी रंग की जालीदार साड़ी में कयामत लग रही थी वह अपनी मां को देखकर इतना तो निश्चित तौर पर कह सकता था कि दुनिया में उसके जैसी कोई भी दूसरी खूबसूरत औरत नहीं है...

क्या बात कर रही हो मम्मी मैं भला किसी लड़की के चक्कर में क्यों पड़ लूंगा जब घर में ही इतनी खूबसूरत और हसीन औरत है....

लेकिन मुझे मर्दों का कोई भरोसा नहीं लगता...

लेकिन मेरा भरोसा तुम्हें करना होगा मम्मी क्योंकि मेरी जिंदगी में तुम ही एक औरत हो बाकी कोई नहीं और वैसे भी मुझे किसी दूसरी औरत या लड़की में इंटरेस्ट नहीं है क्योंकि मैं अच्छी तरह से जानता हूं बाकी सभी औरतें तुम्हारी तरह खूबसूरत नहीं है....

(अपने बेटे की चिकनी चुपड़ी बातें सुनकर वह मुस्कुराते हुए किचन के अंदर प्रवेश कर गई और पीछे पीछे अपनी मां की मदमस्त मटकती हुई गांड देखकर वह भी रसोई घर में घुस गया। रसोई घर में पहुंचते ही निर्मला अपनी मादक अदाओं का जलवा बिखेरते हुए तुरंत किचन का फ्लोर पकड़ कर तुरंत शुभम की तरफ घूम गई और अपनी भारी भरकम चुचियों को लगभग शुभम की तरफ परोसते हुए बोली....)

अब तु किचन में क्या करने आ रहा है..?

मुझे भूख लगी है मम्मी इसलिए तो किचन में आया हूं.....( शुभम अपनी मां की बड़ी-बड़ी गदराई चुचियों को घूरता हुआ बोला)

अभी नाश्ता तैयार नहीं है बाहर जाकर इंतजार कर अभी समय लगेगा ....(निर्मला जानबूझकर अपनी दोनों फुटबॉल जैसी चुचियों को शुभम की आंखों के सामने नचाते हुए बोली एक तरह से शुभम को उकसाने वाला कार्य था वह जानबूझकर ऐसा कर रही थी ताकि शुभम उससे मस्ती करें और शुभम भी अपनी मां की यह मादक अदा देकर एकदम से मस्ती के सागर में डूबने के लिए तैयार हो गया और वैसे भी सरला की वजह से वह काफी अंदर ही अंदर उत्तेजित था।

अगर नाश्ता तैयार नहीं है तो मुझे दूध ही पिला दो (शुभम तुरंत अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की मदमस्त दशहरी आम को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया)

आहहहहहहह .... क्या कर रहा है बड़ा बदमाश हो गया है तू.....(शुभम के दोनों हाथ को अपनी चुचियों पर से हटाते हुए बोली. )

जब ऐसी मदमस्त जवान औरत अपने हुस्न के जलवे दिखाए तो मेरे जैसा कोई भी जवान लड़का बदमाशी करने पर उतारू हो जाएगा....(शुभम वापस अपने दोनों हाथ को अपनी मां की दशहरी आम पर रखते हुए बोला.. ।)

तू पक्का मादरचोद हो गया है.... मुझे अपने सामने देखा नहीं की नोचने खसोटने के लिए तैयार हो जाता है....

मेरी जान मुझे मादरचोद बनाई भी तो तू ही है....

अच्छा यह बात है तो क्या मैंने तुझे कही थी कि आप मेरे ऊपर चढ़ जा.... (निर्मला जानबूझकर अपने बेटे की तरफ पीठ करके खड़ी हो गई क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसके बेटे की सबसे बड़ी कमजोरी उसके भारी-भरकम मदमस्त गांड थी... और उसे पूरा विश्वास था कि उसकी मदमस्त मांग को देखकर शुभम पूरी तरह से औकात में आ जाएगा ....और उसका यह सोचना उसका आत्मविश्वास सच साबित हुआ शुभम अपनी मां की मदमस्त बड़ी बड़ी गांड देखा कर पूरी तरह से अपनी वासना क्या दिन हो गया और आगे बढ़कर अपने दोनों हथेली को साड़ी के ऊपर से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर रखकर ऊसे दबाते हुए बोला.....

ससससससहहहहहह ....आहहहहहहह ..... मादरचोद जब जानबूझकर ऐसी अपनी बड़ी बड़ी गांड मुझे दिखाएगी तो मैं क्या कोई भी होगा वह चढ़ ही जाएगा ना....(शुभम उत्तेजना में आकर जोर जोर से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड दबाते हुए बोला शुभम को इस तरह से अपनी मत मस्त गांड से खेलता हुआ देखकर निर्मला एकदम उत्तेजित होने लगी उसके गोरे गोरे गाल उत्तेजना के मारे लाल टमाटर की तरह हो गए....)

तो क्या तू मेरी बड़ी बड़ी गांड की वजह से मादरचोद बन गया।

हाय मेरी जान तेरी बड़ी बड़ी गांड की वजह से ही मैं मादरचोद कर गया तेरी गांड देखकर ना जाने मुझे क्या हो जाता था और ना चाहते हुए भी मुझे तेरी गांड में लंड डालना पड़ा।.....

चल हट मुझे अपना काम करने दे....(निर्मला शुभम को पीछे की तरफ झटकते हुए बोली... हालांकि वह ऐसा नहीं चाहती थी लेकिन उसे अपने बेटे की इस तरह की जोर-जबर्दस्ती अच्छी लग रही थी.... अपनी मां की गदराई गांड से खेलकर शुभम पूरी तरह से उत्तेजित होने लगा था ... वह इस बार फिर से अपनी मां को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया और अपने दोनों हाथ आगे करके अपनी मां के दोनों कबूतरों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबोच कर उन्हें पुचकारने लगा....(अपने बेटे की इस हरकत की वजह से ही निर्मल आपने हाथ को पीछे की तरफ लाकर उसे हटाने की कोशिश करते हुए बोली)

हटना क्या कर रहा है मुझे अपना काम करने दे नाश्ता तैयार करने दे....

नहीं मुझे तो आज तेरा दूध पीना है...(इतना कहते हुए शुभम अपनी मां के बदन से एकदम से सट गया और निर्मला के पिछवाड़े पर अपना तना हुआ तंबू रगड़ना शुरू कर दिया... अब क्या था निर्मला तो मस्ती के सागर में गोते लगाने लगी आगे से चूची से खेल रहा था और पीछे से ने लंड को गांड पर रगड़ कर गर्माहट दे रहा था....)

मैंने तो सुबह में ताजा तैयार कर देती हूं मुझे दूध नहीं पिलाना....

लेकिन मुझे तो बस तेरा दूध ही पीना है यह बड़ी बड़ी चूची किस दिन काम आएगी ( इतना कहते हुए शुभम अपनी मां के ब्लाउज के बटन खोलने लगा.... वह पूरी तरह से उत्तेजना में सराबोर हो चुका था... सरला के साथ जिस तरह का व्यवहार उसका होता जा रहा था उसे देखते हुए वह पहले से ही काफी कामोत्तेजना का अनुभव कर रहा था और घर पर आकर अपनी मा कामादक स्वरूप देखकर पूरी तरह से पागल हो गया और देखते ही देखते वह अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया यूं तो निर्मला उसे रोकने की बहुत कोशिश कर रही थी लेकिन अंदर ही अंदर वह उसे उत्साहित भी कर रही थी उसे अच्छा लग रहा था उसके साथ इस तरह से उसका बेटा जबरदस्ती कर रहा था वह एक अजीब सी उत्तेजना का अनुभव कर रही थी...निर्मला अपने बेटे की हर हरकत का भरपूर आनंद लेते हुए सिसकारी ले रही थी शुभम अपनी मां के दोनों दशहरी आम को अपने दोनों हाथ से दबाकर उनका रौशनी छोड़ने में लगा हुआ था और पीछे से अपने तंबू को बार-बार अपनी मां की गांड पर साड़ी के ऊपर से ही रगड़ रहा था जिससे दोनों को ही दुगना आनंद की प्राप्ति हो रही थी। रसोई घर में अद्भुत और कामोत्तेजना से भरपूर दृश्य रचा जा रहा था।

नहीं रहने दे आज तो छोड़ दे मादरचोद रोज तो तू पीता है मेरा दुध....

साली रंडी पहले अपने दूध दिखाती है और जब उस से खेलने लगो तो बातें बनाती है....

भोसड़ी वाले तुझे किसने कहा था कि तू मेरे दूध से खेल।

तो मादर चोद अपने दूध हिला हिला के क्यों मुझे दिखा रही थी....(शुभम लगातार अपनी मां की चुचियों को आपस में मसलते हुए बोला ।।)

मुझे क्या मालूम था मादरचोद की औलाद कि तू मेरी चूची देख कर पागल हो जाएगा....

साली तू यह कह रही है तुझे तो पता होना चाहिए था कि मैं कितना सीधा साधा लड़का था बस तेरी बड़ी-बड़ी चूचियां और मटकती गांड देखकर ही मैं मादरचोद हो गया.....

अच्छा हुआ भोसड़ी वाले तुम मादरचोद हो गया वरना तेरे बाप ने तो मुझे कहीं का नहीं छोड़ा था तो उसके पास इतना छोटा सा लंड था कि मेरी बुर के अंदर पूरा घुसता भी नहीं था।

तभी तो साले तुझे मेरे गधे जैसे लगा से मजा आ रहा है जो कि तेरी बुर की पूरी गहराई नाप कर बाहर आता है.....

लेकिन मादरचोद मुझे अभी छोड़ दे मुझे नाश्ता बनाने दे मुझे देर हो रही है....

अब मै तेरी एक बात नहीं सुनने वाला तूने अपनी हरकतों की वजह से मेरे लंड को खड़ा कर दि है अब ईसे शांत अभी तू ही करेगी....

अभी रहने दे शुभम बाद में कर लेना मुझे बहुत देर हो रही है...(यह बात निर्मला ऊपरी मन से बोली थी अंदर से तो यही चाहती थी कि जो कार्य करने की शुरुआत उसका बेटा कर चुका है उसे अंजाम तक पहुंचाकर ही दम ले क्योंकि उसकी हरकतों की वजह से निर्मला के तन बदन में वासना की और चिंगारी भड़क रही थी जो दो-चार दिन से एकदम अंदर ही अंदर दबी हुई थी वह पूरी तरह से चुदवाती हो चुकी थी क्योंकि दो-तीन दिन से शुभम ने उसकी चुदाई नहीं किया था और निर्मला की आदत बन चुकी थी कि जब तक हुआ अपने बेटे का लंड अपने दिल की गहराई के अंदर में सूचना कर ले तब तक उसे चैन नहीं मिलता था..... अपनी मां की बात सुनकर वह पूरी तरह से जोश में आ गया था शुभम भी यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां को इस तरह से गंदी बातें करना बहुत अच्छा लगता था खासकर के गालियों के साथ... और यह सब शुभम को भी काफी उत्साहित और कामोत्तेजना से भर देता था दोनों पूरी तरह से मस्त हो चुके थे वह अच्छी तरह से जानता था कि वह जानबूझकर उसे रोकने की कोशिश कर रही है क्योंकि इतने साल में शुभम अपनी मां की हरकत को पहचान गया था उसकी रग रग से वाकिफ हो गया था वह चित्र से जानता था कि उसकी मां को इस समय मोटे तगड़े लंड की जरूरत है इसलिए तो वह किचन में आकर उसे उकसा रही थी... इसलिए शुभम एक झटके से अपनी मां के कंधे को पकड़ कर उसे अपनी तरफ घुमा लिया और अपनी मां की नंगी चूचियों पर मूह रखकर उस पर टूट पड़ा कभी दाएं चूची को मुंह में लेकर पीता तो कभी बांए चुची को.... वह अपनी मां के दशहरी आम का भरपूर मजा लूट रहा था निर्मला पूरी तरह से चुदवासी हो गई थी... रसोई घर में निर्मला की गरम सिसकारी गूंजने लगी वह पूरी तरह से मतवाली हुए जा रही थी.. वह उत्तेजना बस नीचे की तरफ हाथ ले जाकर एक हाथ की मदद से शुभम के पेंट के बटन खोलने लगी और अगले ही पल शुभम के लंड को हाथ में लेकर उसे हिलाते हुए बोली....

जल्दी कर सुभम मुझे देर हो रही है नाश्ता तैयार करना है...

मादरचोद मुझे मालूम है तुझे किस चीज की भूख लगी है मैं जानता हूं कि तू मेरे लंड को अपनी बुर में लेना चाहती है.... तू चिंता मत कर मुझे भी इसी चीज की भूख है तो मेरे लंड की भूखी है मैं तेरी बुर का भूखा हूं...जब तक तेरी रसीली बुर मैं अपना लंड नहीं डाल देता तब तक मुझे चैन नहीं मिलता...

(इतना कहते हुए शुभम लगातार अपनी मां की चुचियों से खेलता रहा कुछ देर तक यूं ही मदमस्त दशहरी आम का रस पीने के बाद वह एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपनी मां की साड़ी को ऊपर तक उठाने लगा और तब तक उठाते रहा जब तक कि उसकी साड़ी कमर तक नहीं आ गई.... साड़ी कमर तक आते ही शुभम ने जब अपनी हथेली से

अपनी मां के टांगों के बीच की उस मखमली जगह को टटोला तो उसे इस बात का अहसास हुआ कि उसकी मां ने पेंटी तो पहनी ही नहीं थी .... इस बात का आभास होते ही शुभम की आंखों में चमक आ गई... और वह अपनी मां की बुर को अपनी हथेली में दबोचते हुए बोला......

आहहहहहहह .... मेरी रानी लगता है कि पूरी तैयारी के साथ आई थी तभी तो आज चड्डी नहीं पहनी है....

क्या करूं मेरा तो मन कर रहा था कि आज बिना कपड़े के नंगी होकर घूमु.....

सससहहहहहहह.... तेरी यही अदा का तो मैं दीवाना हूं मेरी जान.....(इतना कहते हुए शुभम अपनी मां की मखमली बुर को जोर जोर से रगड़ रहा था उसमें से मदन रस का रिसाव लगातार हो रहा था जिसे उसकी हथेली पूरी तरह से गीली होने लगी थी और निर्मला को अपने बेटे की इस तरह की गंदी बातें सुनकर बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था उसकी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी वह एक पल भी सब्र करने लायक नहीं थी उसकी बुर मोटे तगड़े लंड के लिए तड़प रही थी... और शुभम अपनी मां की तड़प दूर करने के लिए एक हाथ से उसकी टांग पकड़ कर उसे किसी वृक्ष के तने की तरह अपनी कमर पर लपेट लिया.... अब शुभम का मोटा तगड़ा लंड निर्मला की रसीली बुर पर ठोकर मारने लगी....

दोनों मां बेटी के सब्र का बांध टूट रहा था दोनों उतावले हो चुके थे एक दूसरे में समाने के लिए शुभम तुरंत एक हाथ से अपने मोटी तगड़ी लंड को पकड़ कर उसे अपनी मां की रसीली बुर पर ऊपर नीचे करके रगड़ना शुरु कर दिया... शुभम की इस हरकत की वजह से निर्मला और ज्यादा गरमाने लगी... उसके मुख से लगातार सिसकारी की आवाज निकलने लगी...

ससससससहहहहहह..... सुभम मेरे राजा मुझे इतना क्यों तड़पा रहा है.... डाल दे जल्दी मेरी बुर में (इतना कहने के साथ ही निर्मला खुद अपने बेटे के लंड को पकड़ कर उसे अपनी गुलाबी बुर् के गुलाबी पत्तियों के मुहाने पर रखकर उसे छेद में डालने के लिए उकसाने लगी।... अपनी मां को खुद इस तरह से अपनी पुर का रास्ता दिखाते हुए पाकर शुभम पूरी तरह से उत्तेजना में सरोवर हो गया और दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड थामकर एक करारा झटका मारा ... और उसका मोटा तगड़ा लंड बुर के बीच की सारी अड़चनों को दूर करता हुआ सीधे जाकर बच्चेदानी से टकरा गया... इस करारे झटके की वजह से निर्मला के मुंह से हल्की आह निकल गई.

आहहहहहहहह ...... सुभम .....

लेकिन शुभम कहां रुकने वाला था घर में आने से पहले उसे इस बात की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी कि उसे इस तरह का जबरदस्त चुदाई करने का मौका मिल जाएगा और वह भी रसोई घर में वैसे भी उसकी और उसकी मां की सबसे अत्यधिक रुचिकर जगह रसोई घर ही था ना जाने क्यों रसोई घर में आकर दोनों अपने काबू में नहीं रहते थे और मौका मिलते ही इस तरह से चुदाई का आनंद उठाते थे उसी तरह से आज भी दोनों को मौका मिल गया था और इस मौके का दोनों ने भरपूर लाभ उठाते हुए चुदाई का आनंद लूट रहे थे शुभम तो अपनी मां की मदमस्त गांड पकड़कर धक्के पर धक्के पी रहा था।
 
निर्मला अपने बेटे की हर धक्के के साथ गर्म सिसकारी की आवाज निकाल रही थी जिससे शुभम का जोश बढ़ता जा रहा था उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी अपनी मां को चोदते समय उसके जेहन में ख्याल अवश्य रहा था कि वह चाहे जहां भी किसी भी औरत के साथ मुंह मार ले लेकिन जो शब्द जो आनंद की अनुभूति जो तृप्ति का अहसास उसे अपनी मां के साथ चुदाई करने में आता है वैसा अहसास उसे किसी के साथ भी नहीं आता। इसी बात का एहसास लिए वह धक्के पर धक्के मार रहा था.... दोनों मजे लूट रहे थे रसोईघर में चप चप की आवाज के साथ साथ निर्मला की मादक सिसकारियां गुंज रही थी.... शुभम का मोटा तगड़ा लंड किसी मुसल की तरह ओखलीनुमा बुर में बार-बार बज रहा था। निर्मला की मखमली बुर मोटे तगड़े लंड को अंदर लेने की वजह से काफी फैल चुकी थी जिसका आकार एकदम जीरो की शेप में हो गया था।शुभम का मोटा तगड़ा लैंड इतना ज्यादा लंबा था कि हर धक्के के साथ निर्मला को अपने बच्चेदानी पर उसकी ठोकर का एहसास बराबर होता था यह एहसास वही था जो एक औरत को संभोग सुख की तृप्ति का अहसास दिलाता था जो कि इस समय निर्मला बराबर महसूस कर रही थी।

शुभम अपनी कमर की रफ्तार बिल्कुल भी कम नहीं कर रहा था एक ही रफ्तार में अपनी मां की चुदाई कर रहा था और यही बात निर्मला को बहुत ही अच्छी लग रही थी कि एक ही रफ्तार में शुभम का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई नाश्ता हुआ बाहर आता है और उसी स्पीड से फिर अंदर की तरफ चला जाता है इस तरह की रगड़ से वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी।....

वैसे भी निर्मला रसोई घर में चुदाई का भरपूर मजा लेती थी। सुभम लगातार अपनी मां की मदमस्त गांड था मैं जोरदार धक्के पर धक्के लगा रहा था...

दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे निर्मला की सिसकारी की आवाज बढ़ती जा रही थी सांसो की गति लगातार किसी रेल के इंजन की तरह चल रही थी शुभम भी हांफ रहा था... दोनों चरमोत्कर्ष की तरफ अग्रसर हुए जा रहे थे ऐसा लग रहा था कि दोनों अपनी मंजिल के बेहद करीब थे क्योंकि दोनों इस चरमोत्कर्ष के अंतिम क्षण में चुदाई का भरपूर आनंद लूट रहे थे और थोड़ी ही देर में निर्मला अपने बेटे को अपनी बाहों में भर कर अपना मदन र छोड़ने लगे और कुछ धक्कों के बाद शुभम भी झड़ गया...

एक बार फिर से दोनों बासना माई खेल खेलकर तृप्त हो चुके थे दोनों अपने अपने कपड़े दुरुस्त करके वापस अपने काम में लग गए थे दूसरी तरफ सरला को समझ में नहीं आ रहा था कि शुभम ने उसे यह गिफ्ट का पैकेट क्यों देकर गया और इस गिफ्ट के पैकेट में है क्या लेकिन उसका मन आशंका से भर जाता था कि कहीं शुभम ने ब्रा पेंटी खरीद कर उसे गिफ्ट तो नहीं कर दिया.... इस बात का ख्याल मन में आते ही उसकी दिल की धड़कन तेज रफ्तार से चलने लगती थी उसकी टांगों के बीच हलचल होना शुरू हो गई थी। वह धड़कते दिल के साथ शुभम के द्वारा दिए गए गिफ्ट के पैकेट को खोलने लगी।

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

सरला का दिल जोरों से धड़क रहा था वह अपने कमरे में अपने बिस्तर पर शुभम के दिए हुए गिफ्ट के पैकेट को हाथों में लेकर इधर-उधर घुमाते हुए उसे देख रही थी। वैसे भी सरला अब 2 दिन से लेट में ही उठती थी क्योंकि वैसे भी घर पर कुछ ज्यादा काम नहीं रहता था इसलिए वह आराम ही करती थी... उसके दिल की धड़कन बहुत तेजी से चल रही थी मन में अजीब अजीब से ख्याल आ रहे थे ... उसका मन उत्सुकता से घिरा हुआ था... उसे पक्का यकीन तो नहीं था कि शुभम ने उसे गिफ्ट के पैकेट में क्या दे कर के आए लेकिन उसकी अंतरात्मा बार-बार उसे कह रही थी कि उसके अंदर ब्रा और पेंटी है क्योंकि जिस हिम्मत के साथ वह अपने हाथों में उसकी ब्रा पेंटी लेकर उसे पेंटी के छेद के बारे में बोला था उसकी हिम्मत को देखते हुए उसे अंदर ही अंदर ना जाने क्यों विश्वास हो रहा था कि हो ना हो सुभम उसके लिए ब्रा और पैंटी ही लाया है.... लेकिन फिर उसके मन में यह ख्याल आता था कि ऐसा तो शुभमबिल्कुल भी नहीं है .. जहां तक कुछ दिनों में वह शुभम के बारे में जानती थी उसे ऐसा लगता था कि जिस तरह का वह सोच रही है ऐसा बिल्कुल भी नहीं है वह गिफ्ट में एक औरत के अंतर्वस्त्र को नहीं दे सकता.... लेकिन फिर भी ऐसा मन में ख्याल आते हैं ना जाने क्यों अपने इस ख्याल को वह खुद ही झूठ लाने की कोशिश कर दी थी क्योंकि अंदर ही अंदर वह यही चाहती थी कि शुभम उसे ब्रा और पेंटी ही गिफ्ट में पैक करके दिया हो।

अपनी ख्याल और भावनाओं पर उसे बिल्कुल भी सब्र और विश्वास नहीं हो रहा था अपने दिल की धड़कनों को दुरुस्त करते हुए वह गिफ्ट वाले पैकेट को खोलना शुरू कर दी.... दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चल रही थी मानो बेलगाम घोड़ा दौड़ रहा हूं और उसके टापो की आवाज पूरे बदन में गूंज रही हो.... उत्तेजना के मारे सरला का गला सूखते जा रहा था टांगों के बीच मुलायम अंग पर उत्तेजना अपना असर दिखा रहा था.... उम्र के इस पड़ाव पर आकर सरला इतनी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव पहली बार कर रही थी उसे तो बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा था कि उसके बदन में इस तरह के बदलाव आएंगे और वह भी इस उम्र में लेकिन अपनी इस बदलाव की वजह से वह काफी खुश और उत्तेजित नजर आ रही थी। धीरे-धीरे सर गाने पैकेट के ऊपर वाला रेपर खोलकर उसे फेंक दी... चेहरा सुर्ख लाल होने लगा था शर्म की लालीमा पूरे चेहरे पर छाने लगी थी बानो दूर आसमान में सूरज अपनी रंग बिरंगी लालिमा लिए नीचे जमीन में धंसता चला जा रहा हो... आखिरकार सब्र की घड़ी खत्म हो गई उसका मन जो कह रहा था वही हुआ गिफ्ट वाला पैकेट खुल चुका था और सरला पैकेट के अंदर अपने लिए लाए गए अंतर्वस्त्र को देखकर पूरी तरह से उत्तेजना में भर गई उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसकी बुर कचोरी की तरह फूल चुकी है और जिस तरह से कचोरी में बीच में से तोड़कर उसमें चटनी डाली जाती है उसी तरह से सरला की बुर में से जो की कचोरी जैसी फूली हुई थी उसमें से मदन रस की चटनी बाहर निकल रही थी वह पूरी तरह से काम होते जना में सरोवर हो चुकी थी वह पैकेट में से अपने लिए लाए गए अंतर्वस्त्र को हाथ में उठा कर इधर-उधर करके देखने लगी उसके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी और खुशी से ज्यादा उसके चेहरे पर उत्तेजना के असर नजर आ रहे थे...

शुभम की हिम्मत देखकर ना जाने क्यों शुभम पर उसे गर्व होने लगा...वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसके बेटे की उम्र का लड़का उसके लिए बेझिझक ब्रा और पेंटी लेकर आएगा... वह घर में पूरी तरह से अकेली थी इसलिए अपने लिए लाई गई ब्रा पेंटी को पैकेट में से निकालकर वह अपने दोनों हाथों में लेकर उसे घुमाते हुए देखने लगी वह काफी खुश नजर आ रही थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि इस तरह का गिफ्ट बरसों के बाद उसे मिला था।ब्रा और पेंटी की दोनों जोड़ियां उसे बेहद जच रही थी वह काफी उत्साहित नजर आ रही थी।

लेकिन उससे भी ज्यादा वह काफी कामोत्तेजना में डूबती हुई नजर आ रही थी उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसकी फटी हुई पैंटी उसकी बुर से निकले मदन रस में पूरी तरह से गीली हो रही थी....

अपनी बुर का रिसाव उसे खुद बेचैन बना रहा था वह अपना हाथ कपड़े के ऊपर से अपनी बुर पर रखकर अपने गीले पन का जायजा ले रही थी....

वह शुभम को मन ही मन धन्यवाद देकर घर के काम में जुट गई वह काफी उत्साहित ही नहाने के लिए क्योंकि आज बरसों के बाद वह अपने बदन पर नई ब्रा और पेंटी पहनने वाली थी और वह भी उस ब्रा पेंटी को जिसे शुभम ने उसके लिए गिफ्ट के तरीके से ले आया था। एक उम्रदराज औरत के लिए इसे ज्यादा सुख की बात क्या हो सकती है कि उसके बेटे की उम्र का लड़का उसका दीवाना हो गया है...और जिसकी दीवानगी मे वह खुद को पिघलता हुआ महसूस कर रही है.... वह जल्दी जल्दी घर के काम निपटाने मैं लग गई लेकिन फिर भी आज उसे घर की सफाई करनी थी इसलिए थोड़ा समय हो गया.... लेकिन फिर भी घर की सफाई नहीं हो पा रही थी आखिरकार अकेले वह कितना साफ सफाई कर पाती एक तो उसे शुभम के द्वारा लाई गई ब्रा पेंटी पहन कर महसूस करना था कि वह कैसी है लग रही है और ऊपर से यह घर का काम.....
 
दूसरी तरफ शुभम ना चाहते हुए भी अपनी मां का काम रूप देखकर पूरी तरह से वासना में लिप्त होकर रसोई घर में अपनी मां की जबरदस्त चुदाई करके एकदम तृप्त हो चुका था .... और खाना खाकर अपने कमरे में आराम कर रहा था लेकिन आज उसे भी चैन नहीं पड़ रहा था बार-बार उस सरला उसकी आंखों के सामने नजर आ जा रही थी बार-बार उसकी मटकती हुई गांड उसे परेशान कर रही थी.... वैसे भी उसे अपना रास्ता साफ नजर आ रहा था क्योंकि जिस तरह से वह शाम के वक्त छत पर उससे बात किया था और उसकी अश्लील बात पर भी जिस तरह से सरला मुस्कुराई थी। शुभम को उसकी मुस्कुराहट से हिम्मत बंधी थी तभी तो वह उसके लिए ब्रा और पेंटी लाकर उसे गिफ्ट किया था अब उसे यह देखना था कि उसके द्वारा लाई गई ब्रा पेंटी सरला पहनती है या नहीं... यही बात सोच कर उसके मन में अजीब सी कशमकश चल रहे थे और साथ ही उत्सुकता बढ़ती जा रही थी वह अपने कमरे में बिस्तर पर करवटें बदल रहा था... वह मन में सोच रहा था कि समय सरला के घर में कोई नहीं है अगर किस्मत मेहरबान रही तो उसका काम बन जाएगा और अगर एक बार काम बन गया तो पड़ोस में ही चोदने के लिए एक औरत और मिल जाएगी... वैसे भी शुभम को अपनी मर्दाना ताकत पर और अपने लंड पर गले तक विश्वास था वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर उसका लंड किसी भी औरत की बुर में एक बार चला गया तो वह औरत उसकी दीवानी हो जाती है... और वही ताकत वह सरला पर आजमाना चाहता था... एक तो बरसों से प्यासी और पूरे घर में एकदम अकेली हो ना हो उसका काम जरूर बन जाएगा.....

शुभम दीवार पर टंगी घड़ी की तरफ देखा तो 2:00 बजने वाले थे दोपहर का समय हो रहा था और ऊपर से गर्मी उसे मालूम था कि इस समय छुट्टी और गर्मी के असर में सब लोग अपने अपने घर में ठंडी ऐसी की हवा ले रहे होंगे वैसे तो वह भी अपने कमरे में ठंडी हवा का आनंद लूट रहा था लेकिन जहां जवानी जोश मार रही हो वहां इस तरह का आराम हराम होता है इसलिए वह अपनी जवानी का जोश ठंडा करने के लिए अपने कमरे में से बाहर आ गया और अपनी मां के कमरे की तरफ़ देखा तो दरवाजा बंद था वह समझ गया कि उसकी मां सो रही है और वैसे भी रसोई घर में जिस तरह की जबरदस्त चुदाई उसने अपनी मां की किया था उससे साफ लगता था कि वह पूरी तरह से तृप्त होकर नींद की आगोश में चली गई है। शुभम निश्चिंत होकर अपने घर से बाहर आ गया और वह सरला के घर की तरफ कदम बढ़ा दिया जो कि उसके घर से महज दो कदम ही दूरी पर थे... वह दरवाजे पर खड़ा होकर घर की बेल बजाता इससे पहले ही उसे आभास हो गया कि दरवाजा खुला हुआ है जोकि सरला जल्दबाजी में लॉक करना भूल गई थी.... यह बात शुभम अच्छी तरह से जानता था कि सरला इस समय घर पर बिल्कुल अकेली है और जरूर उसने उसका दिया हुआ पैकेट खोलकर देखी होगी और अंदर अपने लिए ब्रा पेंटी देखकर उसके मन में अजीब अजीब से ख्याल आए होंगे यह सब बातें सोचकर शुभम की हालत पतली हो जा रही थी उसके मन में उत्सुकता बढ़ती जा रही थी कि उसके लाए पैकेट के बारे में सरला क्या प्रतिक्रिया देती है... वह धड़कते दिल के साथ घर में प्रवेश किया और दरवाजे को वापस बंद कर दिया वह आवाज देकर सरला को अपने आने की खबर देना चाहता था लेकिन उसका शैतानी दिमाग कुछ और करने के मूड में था वह देखना चाहता था कि इस तरह से दरवाजा खुला छोड़ कर सरला आखिरकार घर में कर क्या रही है... और वह दबे पांव सरला के कमरे की तरफ जाने लगा जो कि वह पहले भी इस घर में आकर इतना तो जान ही गया था कि किस का कमरा कहां पर है।

दूसरी तरफ सरला नई ब्रा और पेंटी पाने की खुशी में जल्दी-जल्दी बाथरूम में घुस गई और यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि घर में उसके सिवा कोई भी नहीं है इसलिए निश्चिंत होकर वो दरवाजा खुला छोड़ दी... और आनन-फानन में अपने सारे वस्त्र उतारकर संपूर्ण रूप से एकदम नंगी हो गई... हालांकि ऐसा पहले कभी होता नहीं था कि सरला अपने सारे वस्त्र उतारकर पूरी नंगी होकर नहाए..

लेकिन शुभम के मिलने के बाद से उसके हालात और मिजाज दोनों बदल चुके थे वह बाथरूम में जाते ही अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो चुकी थी...

Sarlaa ko bathrum me nangi dekhkar shubham ki haalat kharab hone lagi

एक बार अपने नंगे पन देख कर उसकी खुद की आंखों में शर्म तैरने लगी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह एकदम नंगी हो चुकी है .. उसके बड़े बड़े दूध एकदम पपैया के फल की तरह लग रहे थे। पेट हल्का सा बाहर निकला हुआ था जिससे उसका बदन भद्दा नहीं बल्कि और भी ज्यादा कामुक लगता था। एक तरफ सरला निश्चिंत होकर संपूर्ण व्यवस्था में बाथरूम में घुसी हुई थी और वह भी बाथरूम का दरवाजा खुला छोड़ कर... और दूसरी तरफ शुभम अपने मचलते मन पर काबू ना पा सकने की वजह से सरला के घर में प्रवेश कर चुका था और चोरी छुपे उसे देखने की फिराक में था... उसका दिल भी जोरों से धड़क रहा था वह चोर कदमों से सरला के कमरे की तरफ आगे बढ़ रहा था वह यह सोच रहा था कि उस दिन जैसा आज भी देखने का मौका मिल जाए तो उसका यू चोरी-छिपे आना सफल हो जाएगा...

उसकी उम्मीद के मुताबिक कमरे का दरवाजा खुला हुआ था। शुभम का दिल जोरों से धड़क रहा था किस बात का ज्ञान उसे अच्छी तरह से था कि एक अकेली औरत और वह भी उसके मन में जब शारीरिक संसर्ग की कामना जागरूक हो रही हो ऐसे हालात में औरत अकेले कमरे में अस्त-व्यस्त हालत में होती ही है और यही सोचकर वह सरला के कमरे में चोरी से नजर घुमाया तो कमरे में कोई भी नहीं था कमरे में सरला को ना पाकर वह थोड़ा बेचैन हो गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार सरला कहां है? वह फिर से धीरे-धीरे सीढ़ियां उतरने लगा कि तभी उसे शावर की आवाज सुनाई दी... सांवर की आवाज कानों में पढ़ते ही शुभम समझ गया कि जरूर वह बाथरूम में नहा रही होगी.... यह ख्याल मन में आते ही सरला को चोरी चोरी देखने की उत्सुकता मन में बढ़ने लगी... क्योंकि अभी तक वह सरला को कपड़ों में ही देखते हैं आया था एक बार नसीब का तेज होने की वजह से कमरे में यूं ही जाते समय कमर के ऊपर का नग्न बदन उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां देखने का शुभ अवसर उसे प्राप्त हो चुका था... लेकिन अब उसके मन में सरला को पूरी नंगी देखने की इच्छा जागने लगी थी और अपनी यही इच्छा के तहत वह दबे पांव बाथरूम की तरफ आगे बढ़ने लगा ... लेकिन उसके मन में शंका जाग रही थी कि अगर बाथरूम का दरवाजा बंद हुआ तो उसके सारे किए कराए पर पानी फिर जाएगा लेकिन फिर भी मन में आखिरी उम्मीद लिए वह बाथरूम की तरफ आगे बढ़ने लगा जहां से सावर की आवाज तेज होती जा रही थी. वह पूरी तरह से निश्चित था क्योंकि घर में उस पर किसी की नजर पड़ जाए ऐसे हालात बिल्कुल भी नहीं थे क्योंकि इस समय घर में उसके और सरला के सिवा तीसरा कोई भी नहीं था.... इसलिए वह थोड़ा बहुत निश्चिंत था। उसको दिल जोरों से धड़क रहा था ।

धीरे-धीरे चोर कदमों से चलते हुए वह बाथरूम के एकदम करीब पहुंच गया वह किसी भी प्रकार का आहट नहीं करना चाहता था जिससे सरला को इस बात का आभास हो कि बाथरूम के बाहर कोई है क्योंकि वह चोरी-छिपे सब कुछ देखना चाहता था।

शुभम की नसीब बहुत तेज थी क्योंकि जैसे ही हो बाथरूम के दरवाजे पर पहुंचा दो दरवाजा हल्का सा खुला नजर आया जिससे शुभम का मन प्रसन्नता से भर गया..... उसकी आंखों में चमक नजर आने लगी वह हल्के से दरवाजा को थोड़ा सा और खोलकर अंदर की तरफ नजर घुमाया तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई... उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था लेकिन जिस तरह से उसके मन में यह इच्छा प्रबल होती जा रही थी सरला को नंगी देखने की शायद यह उसकी महत्वाकांक्षा का ही नतीजा था कि उसकी कल्पना उसका सपना सच होता नजर आ रहा था .... बाथरूम के अंदर का दृश्य बेहद उत्तेजना आत्मक था.... 8 बाय 10 के लंबे चौड़े बाथरूम में जोकि सारी सुख-सुविधाओं की वस्तुओं से संपन्न था जिसकी चिकनी टाइल्स पूरे बाथरूम को सुशोभित कर रही थी ऐसे में उस बाथरूम की शोभा बढ़ाते हुए अंदर का नजारा ही कुछ बेहद कामोत्तेजना वाला था। और ऐसे शोभायमान बाथरूम क्यों शोभा तब और ज्यादा बढ़ जाती है जब उसमें नहाने वाला शख्सियत बेहद खूबसूरत और मादक बदन वाला हो और कुछ ऐसा ही नजारा शुभम को अपनी आंखों से नजर आ रहा था बाथरूम में सरला संपूर्ण रूप से निर्वस्त्र एकदम नंगी होकर बाथरूम की शोभा बढ़ा रही थी या यूं कह लो कि सरला की वजह से ही बाथरूम की शोभा बढ़ रही थी....

Shubham is tarah se chorichipe sarlaa ko bathrum me nangi nahate huye dekh raha tha

शुभम की तो सांस ही अटक गई उसके दिलो-दिमाग पर कुछ ऐसा ही नजारा छाया हुआ था लेकिन उसे इतनी भी उम्मीद नहीं थी कि उसे इस तरह का नजारा देखने को मिल जाएगा लेकिन उसे उम्मीद से दुगना मिला था वह अपनी आंखों से सरला को एकदम नंगी देख रहा था अर्धनग्न अवस्था में तो बहुत पहले ही देख चुका था लेकिन आज बिना वस्त्र के सरला को देखकर एकदम कामोत्तेजना से भर गया....सुबह में अब तक अपनी जिंदगी में बहुत सी औरतों को एकदम नंगी देख चुका था लेकिन सरला की बात कुछ और थी क्योंकि उन औरतों में से सरला की उम्र लगभग 5 या 7 साल कुछ ज्यादा ही थी इसलिए सरला के खूबसूरत नंगे बदन का आकर्षण उसके तन बदन को झकझोर के रख दे रहा था... कपड़ों के ऊपर से ही सरला के बदन की तो हो लेकर वहअपने बदन की गर्मी को अपने हाथों से कई बार शांत कर चुका था लेकिन आज उसकी आंखों के सामने इस समय उसके सपनों की रानी खड़ी थी और वह भी संपूर्ण निर्वस्त्र अवस्था में सागर का पानी उसके सर से लेकर पांव तक उसके चिकने बदन पर फिसलता हुआ गिर रहा था.... इस समय सरला सर से लेकर पांव तक ठंडे पानी की फुहार में एकदम भीगी हुई थी एकदम गोरी होने के कारण वह बेहद खूबसूरत लग रही थी उसके बदन का कटाव अभी भी बरकरार था हालांकि वजन थोडा ज्यादा था और हल्का सा पेट भी निकला हुआ था लेकिन इन सबके बावजूद भी उसकी मादकता में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आई थी...

शुभम उसे देखा तो देखता ही रह गया शावर के ठंडे ठंडे फुहारों में वह नहाने का पूरी तरह से आनंद ले रही थी उसके पापा या जैसे बड़े-बड़े चूचीयो पर पानी मोतियों के दाने की तरह फिसल रहा था। सरला की बड़ी-बड़ी चुचियों को देखकर शुभम के मुंह में पानी आ गया ऐसा लग रहा था कि जैसे एक विशाल वृक्ष में आम का बड़ा बड़ा फल लगा हो।शुभम उत्तेजना में सरोवर हुआ जा रहा था उसका गला सूखता जा रहा था और वह अपने थूक से अपने गले को गिला करने की कोशिश करता हुआ बाथरूम के अंदर के नजारे का चोरी-छिपे बेहद आनंद लूट रहा था...
 
शुभम ड्राइंग रूम में आकर सोफे पर बैठकर अपनी उखड़ती हुई सांसो को दुरुस्त करने में लगा हुआ था.... क्योंकि बाथरूम के अंदर का नजारा उसे एकदम से बेसब्र बना रहा था उसे खुद पर यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी आंखों ने जो कुछ भी देखा वह सच है. सरला को नंगी देखने तक तो सब कुछ ठीक था लेकिन वह कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि सरला जैसी औरत है एकदम कामातुर होकर अपने हाथों से अपनी कामवासना बुझाने की कोशिश कर रही होगी ...लेकिन अपनी मां के हालात को देखते हुए उसे सब कुछ समझ में आ गया था कि एक औरत को भूख के साथ-साथ शरीर की भी भूख लगती है और जब यह भूख हद से ज्यादा बढ़ जाती है तो उसे मिटाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है जैसे कि उसकी मां खुद उसके साथ शारीरिक संबंध बनाकर सारी मर्यादाओं को सारे रिश्ते नातों की डोर को तोड़ कर अपनी काम पिपासा बुझाती आ रही थी....

शुभम के होश उड़े हुए थे उत्तेजना के मारे उसकी कनपटी पूरी लाल हो चुकी थी...शुभम के जिंदगी में ऐसे हालात बहुत बार आए थे जब वह हद से ज्यादा बेसब्र होकर उत्तेजना का अनुभव कर चुका था क्योंकि एक से एक औरतों के साथ वह संभोग सुख भोग चुका था लेकिन सरला की बात कुछ और थी क्योंकि जिन औरतों के साथ हुआ शारीरिक संबंध बना लिया था उनसे सरला की उम्र कुछ ज्यादा ही थी.... सरला की तरफ तो शुभम अनायास ही शारीरिक आकर्षण में फस गया था वह कभी भी सरला से शारीरिक संबंध बनाना नहीं चाहता था लेकिन सरला जिस तरह से उस पर और उसकी मां पर निगरानी रख रही थी उसके चलते शुभम को सरला का मुंह बंद कराने के लिए इस तरह के कदम उठाने पड़े और आज वह दो कदम आगे बढ़ चुका था वह अच्छी तरह से जानता था कि सरला के साथ शारीरिक संबंध बनाने के बाद सरला कभी भी अगर उसे उसके और उसकी मां के बीच के नाजायज संबंध के बारे में पता चलता है तो वह किसी को बताने के काबिल नहीं रह जाएगी क्योंकि वह खुद उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने की और ऐसे में शुभम को मौका मिल जाएगा कि वह किसी से भी उसका राज ना करें वरना वह खुद बदनाम हो सकती थी इसलिए शुभम पूरी तरह से निश्चिंत हो गया था अब उसे यह खेल में मजा आ रहा था और वह ईस खेल में आगे बढ़ना चाहता था....

सोफे पर बैठ के धड़कते दिल के साथ शुभम सरला के बाहर आने का इंतजार कर रहा था...जो कि इस समय बाथरूम के अंदर एकदम नंगी होकर नहाने के साथ-साथ अपनी शारीरिक अंगों के साथ छेड़छाड़ करके पूरा लुफ्त उठा रही थी.....सरला बाथरूम में एकदम मस्त होकर नहा रही थी साथ ही अपने अंगों से खेल रहे थे उसकी जिंदगी में यह वाकया पहली बार हो रहा था जब हवा अपने ही अंगों के साथ खेल रही थी... और वास्तव में उसे अपने अंकों के साथ खेलने नहीं बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी वह बाथरूम में एकदम नंगी होकर चिकनी टाइल्स में अपने प्रतिबिंब को देख रही थी जो कि हर धुंधला दिख रहा था लेकिन फिर भी साफ नजर आ रहा था कि वह बाथरूम में एकदम नंगी है.... बड़े-बड़े पपैया जैसे दूध को हाथों में लेकर व झूला रही थी और उसे जलाते समय उसके जीवन में शुभम की छवि बसी हुई थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम चोर नजरों से उसकी बड़ी बड़ी छातियों को घूरता रहता है..... और वह अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर अपने बड़े-बड़े तरबूज की माफिक गोल-गोल कांड को दोनों हाथों से उस पर चपत लगाते हुए और उसे फैलाते हुए मन में सोच रहे थे कि शुभम इसे भी बड़ी प्यासी नजरों से देखता है.... वह अपने मन में अपने आप से ही बात कर रही थी तो क्या वह इस उम्र में भी जवान लड़की को अपनी तरफ आकर्षित करने में सक्षम है। अपने सवालों का जवाब अपने आप से ही देते हुए वह मन में बोल रही थी हां अगर ऐसा नहीं होता तो शुभम जैसा जवान लड़का उसके पीछे आकर्षित होकर ना पड़ा होता... यह उसके मादक बदन का ही कमाल है कि शुभम किसी ना किसी बहाने उसकी मदद करने के लिए तत्पर रहता है और तभी तो वह उसके लिए ब्रा और पेंट भी खरीद कर ला कर उसे गिफ्ट किया है यह सब सोचते ही सरला की सांसो की गति तेज होने लगी.... वह समझ गई कि सुबह उसकी तरफ पूरी तरह से आकर्षित होकर इस तरह से उसे ब्रा और पेंटी गिफ्ट कर रहा है जरूर उसके मन में कुछ ना कुछ चल रहा होगा।

Sarlaa bathrum me ekdam nangi

और वैसे भी अगर यह बात सच है तो यह उसके लिए ही बेहद गर्व करने वाली बात है वरना शुभम जैसे नौजवान लड़का किसी को सच लड़की के पीछे पड़ा होता सरला जैसी उम्रदराज औरत के पीछे नहीं... कुछ भी हो अब इसे इस खेल में मजा आ रहा था. यह सब सोचकर सरला बेहद खुश नजर आ रही थी और जोर जोर से खांसी अपने दूध को दबाते हुए दूसरे हाथ से अपनी टांगों के बीच के बीच मखमली जगह को मसाला रही थी जिस पर सावर से ठंडा ठंडा पानी गिर रहा था। उसके लिए मौका भी अच्छा था क्योंकि उसकी बहू घर पर नहीं थी और वह घर पर एकदम अकेली थी। वह अपने मन में सोच रही थी क्यों ना एक कदम आगे बढ़ा कर वहां सब कुछ कर ले जो एक प्यासी औरत करती है लेकिन तभी उसका मन उसे कोसने लगता उसे भला बुरा कहता लेकिन फिर दूसरा मन कहता कि आखिरकार एक बार फिर से जवानी वाला सुख भोग लेने में क्या दिक्कत है और ऐसे भी अगर व शुभम के साथ है शारीरिक संबंध बनाती है तो इस बात की किसी को भनक भी नहीं लग पाएगी और एक बार फिर जिंदगी जीने का मकसद मिल जाएगा.... आखिरकार सुभम की वजह से ही तो उसकी टांगों के बीच की सूखी पड़ी जमीन फिर से हरी होने लगी थी... वरना पति के गुजरे तो बरसों बीत गई थी तब से वह एक सती की तरह जिंदगी गुजार रही हैं... आखिर इस तरह की जिंदगी जी कर उसे क्या मिला बहुत सी औरतें हैं जो अपनी सुख-सुविधा के लिए बहुत कुछ करने को तैयार हो जाती है और करती भी हैं... पति होता तो शायद यह सब बातें बहुत नहीं सोचती लेकिन सरला अपने आप से ही बातें करते हो कभी उदास हो जाती तो कभी उसकी आंखों में चमक आ जाती आखिरकार बहुत कुछ सोच विचार करने के बाद वह इस नतीजे पर पहुंची की यह सब वह अपनी किस्मत पर छोड़ देगी अपने आप से वापस नहीं करेंगे अगर शुभम उसके साथ आगे बढ़ना चाहता है तो वह उसे रोकेगी नहीं... अपने आप को पूरी तरह से तसल्ली देने के बाद वह इस नतीजे पर पहुंच चुकी थी जहां पर बने ही उसकी हामी नहीं थी लेकिन अंदर ही अंदर वह यही चाहती थी कि शुभम जैसा जवान लड़का उसके साथ सब कुछ करने के लिए आगे बढ़े और वहां अपना सब कुछ समर्पण करने के लिए अंदर ही अंदर तैयार हो चुकी थी....

अब वो नहा ली थी.... ठंडे पानी से नहाने के बाद उसका मन हल्का हो गया था किसी भी प्रकार का बोझ उसके मन पर नहीं था आखिरकार वह भी एक औरत थी उसे भी अपनी जिंदगी जीने का पूरा हक था अपनी पहली संतान होने के 1 साल बाद ही अपने पति को वह खो चुकी थी तब से लेकर आज तक वह अपने बेटे के लिए ही जी रहे थे इस बीच में कभी भी अपने कदम को लड़खड़ा ने नहीं दी लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर आकर वह आज पूरी तरह से लड़खड़ा चुकी थी अपना सुख ढूंढने के लिए वह अपने सारे संस्कारों मर्यादाओं का त्याग करने के लिए तैयार हो चुकी थी वह काफी खुश नजर आ रही थी और मन ही मन में गीत गुनगुनाते हुए टावल से अपने भीगे बदन को पोंछ रही थी.... वैसे वास्तव में सरला इस उम्र में भी बेहद सेक्सी लगती थी उसके मादक बदन भले ही थोड़ा भारी थे लेकिन एक पुरुष को आकर्षित करने के लिए काफी था वैसे भी इस बात से अनजान रहती थी कि सड़क पर आते जाते मनचले लड़के और प्यासी नजर वाले मर्द हमेशा उसे झांकते रहते थे लेकिन इस बात का एहसास उसे आज तक नहीं हुआ था। वह कभी इन सब बातों पर ध्यान ही नहीं दी थी। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि सरला एकदम चरित्रवान होना थी शादी से पहले बार अपने दोस्तों के साथ जोकि बॉयफ्रेंड कम बस उसके साथ मजे लेने के लिए थे उनके साथ वहां शारीरिक संबंध बना चुकी थी और शादी से पहले ही वह चुदाई का पूरा आनंद उठा चुकी थी। यह सब उसकी जिंदगी का पहला पहला था जोकि खत्म हो चुका था और शादी के बाद के पन्ने पलटने से कोई फायदा नहीं था अब उसकी जिंदगी का नया पहलु शुरू हो रहा था....
 
Back
Top