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Adultery एक अधूरी प्यास- 2

आज नहा लेने के बाद सरला कुछ और भी ज्यादा खूबसूरत लगने लगी थी अपने बालों को टावल से पोछकर अपने वतन से लपेटने की जगह वह टावर को अपने गले पर स्कार्फ की तरह डाल दी और पूरी तरह से अपने नंगे बदन को उजागर कर दी। .. क्योंकि वह इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि ड्राइंग रूम में शुभम बैठा हुआ है जो कि कुछ देर पहले ही वह उसके नंगे पन के रस को अपनी आंखों से पी कर एकदम मस्त हो चुका था....वह एकदम नग्न अवस्था में ही बाथरूम से बाहर निकल गई और एक अच्छा सा गीत गुनगुना रही थी जो कि उसके ही जमाने का था... सजना है मुझे सजना के लिए यह गीत गुनगुनाते हुए अपनी मस्ती में मस्त हो कर वह बाथरूम से बाहर निकल गई... जो कि ईस समय यह गीत गुनगुनाते हुए उसके जेहन में शुभम ही बसा हुआ था और अपनी शारीरिक जरूरतों के अधीन होकर वह अपनी और शुभम के बीच की उम्र की मर्यादा को एकदम भूल चुकी थी आज उसे अपने बेटे की उम्र का शुभम उसे खुद का साजन लगने लगा था जिसके साथ वह शारीरिक संबंध बनाने के लिए मन ही मन अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी लेकिन यह मौका भी वाह शुभम को भी देना चाहती थी क्योंकि वह चाहती थी कि अगर शुभम आगे से चलकर उसके साथ सारी संबंध बनाने के लिए तत्पर होगा तो वह जरूर उसके साथ समर्पण कर देगी और यह बात हुआ खुद नहीं कहेगी कि वह शारीरिक संबंध बनाना चाहती हैं जिससे वह अपनी ही नजर में संस्कारी बने रहना चाहती थी जो कि एक अपने आप को ही धोखा देने वाली बातें थी जो कुछ भी हो सरलख एक औरत थी और उसकी भी कुछ जरूरते और ख्वाहिश थी जिसके अंदर उसकी शारीरिक जरूरत भी आ जाती थी जिसे पूरी करने के लिए वह कुछ भी कर सकने में सक्षम थे इसलिए तो वह बाथरूम से एकदम नंगी ही बाहर आ गई थी जो कि यह बात वह जानती थी घर में कोई भी नहीं है इसलिए पूरी तरह से निश्चिंत थी और एक नए अनुभव के लिए वह एकदम नंगी बाथरूम से बाहर आ गई थी जो कि आज तक ऐसा कभी भी नहीं हुआ था जिंदगी के इतने साल गुजार देने के बाद सरला को कुछ नया करने की सुझ रही थी.... वह वही गीत गुनगुनाते हुए अपने कमरे की तरफ जाने लगी और इस बात से अनजान की ड्राइंग रूम में शुभम बैठा हुआ है वह जैसे ही एकदम नग्न अवस्था में उसकी आंखों के सामने से आगे बढ़ने लगी कि तभी उसे आभास हुआ कि ड्राइंग रूम में कोई बैठा है वो एकदम से हक्की बक्की रह गई... अपनी तसल्ली कर लेने के लिए जैसे ही वह सोफे की तरफ नजर घुमाई तो सामने सुबह बैठा हुआ था जो कि उसे ही घूर रहा था यह देखकर तो उसकी सांस ही अटक गई उसे कुछ समझ में नहीं आया कि वह क्या करें कुछ सेकंड तक वह उसकी आंखों के सामने ही एकदम नंगी होकर खड़ी रही मानो जैसे अपने नंगे पन का प्रदर्शन उसकी आंखों के सामने कर रही है शुभम भी उसे देखता ही रह गया क्योंकि उसे इस बात की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि बाथरूम में से सरला एकदम नंगी बाहर आएगी.... आश्चर्य और उत्तेजना से उसका मुंह खुला का खुला रह गया...

ऐसा प्रतीत हो रहा था कि कुछ समय तक वक्त एकदम से ठहर गया हो दोनों एक दूसरे की आंखों में आंखें डाल कर देख रहे थे शुभम तो मानो पागल सा हो गया था वह टकटकी बांधे सरला के खूबसूरत नंगे जिस्म को ऊपर से नीचे तक अपनी आंखों से देख रहा था उसकी आंखो में खुमारी छाने लगी थी... उसके बदन में नशा का एहसास होने लगा था मानो चार बोतल शराब पी कर आया हो... वैसे भी सरला के आगे इस समय शराब का नशा भी फीका पड़ जाता वह दोनों एक दूसरे को देख रहे थे सरला को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है वह एकदम जड़वंत मूर्ति की तरह हो गई थी... सरला की सांस थम सी गई थी। अजीब सी कपकपी उसके तन बदन को झकझोर कर रख दे रही थी.... शुभम तो जैसे टीवी पर फैशन शो देख रहा हूं और कोई खूबसूरत औरत अपने नंगे बदन का प्रदर्शन रैंप पर चलकर उसकी आंखों के सामने कर रही हो.... पल भर में ही उत्तेजना के मारे शुभम का गला सूखने लगा.... सरला महज सात आठ सेकेंड ही वहां खड़ी होकर अपनी स्थिति से अनजान शुभम को देखती रही.... उसे इस बात का भी भान नहीं था कि वह इस समय तक नंगी है वह आश्चर्य से शुभम को देखे जा रही थी क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि इस समय वह उसके घर पर होगा और इस तरह से उसकी आंखों के सामने सोफे पर बैठ कर उसके नंगे बदन को घुर रहा होगा.... ना तो सरलाही कुछ बोल रही थी ना ही शुभम ही कुछ बोल पा रहा था दोनों की सीटी पीटी गुम हो गए थे दोनों एक दूसरे के आकर्षण में इस कदर खो गए कि उन्हें समझ में नहीं आया कि क्या करना है शुभम से ज्यादा हालत खराब तो सरला की थी ऐसे हालात में औरत सबसे पहले अपने नंगे बदन को जो कुछ भी हो उसे छुपाने की भरपूर कोशिश करती है अगर कुछ भी ना मिले तो वह अपनी हथेलियों से ही अपने नाजुक अंगों को ढकने की पूरी कोशिश करती है लेकिन इस बात का भी भान उसे बिल्कुल भी नहीं था कि वह अपने नंगे पन को अपनी हथेली से ढक लें जबकि वह गले में टावल लपेटे हुए थी... और सरला के इसी बात का फायदा उठाते हुए शुभम एक बार फिर से उसके नंगे पन के रस को अपनी आंखों से पी कर मस्त हो चुका था वह भी बेशर्म होकर सरला के नंगे बदन को देखे ही जा रहा था जबकि ऐसे में एक संस्कारी लड़का अपनी नजर फेर लेता है या खुद औरत पर वस्त्र डालकर उसके नंगे पन को ढकने की कोशिश करता है। लेकिन यहां पर ऐसा कुछ भी नहीं था शुभम तो खुद कल्पना में ही सरला को एकदम नंगा देख चुका था और उसे अपने हाथों से नंगा भी कर चुका था ऐसे हालात में जब खुद वह औरत उसकी आंखों के सामने इस तरह से नंगी आए तो ऐसा अद्भुत और अतुल्य पल उस लड़के के लिए भला क्या हो सकता है। शुभम के लिए यह पल उसकी जिंदगी का बेहद हसीन और खूबसूरत पल था।

जब सरला को इस बात का आभास हुआ कि वह शुभम के सामने एकदम नंगी खड़ी है तब वह शर्म से एकदम पानी पानी हो गई उसका चेहरा पलभर में ही एकदम लाल टमाटर की तरह हो गया उसके चेहरे पर सुर्ख लालिमा छाने लगी.... आनन-फानन में उसे इस बात का भी बिल्कुल भी ध्यान नहीं हुआ कि गले में डाला हुआ टावल वह अपने बदन पर डालकर अपने नंगे पन को ढक ले... वह जिस स्थिति में थी उसी स्थिति में लगभग भागते हुए सीढ़ियां चढ़कर ऊपर गई और अपने कमरे में घुस गई लेकिन इस बीच जो नजारा शुभम की आंखों के सामने पेश आया उसे देखकर शुभम का लंड पानी छोड़ते छोड़ते रह गया हालांकि उसका लंड एकदम कड़क हो चुका था लंड की नसों में रक्त का प्रवाह इतना अत्यधिक हो चुका था कि मानो अभी उसका लंड फट जाएगा.... लंड का दर्द असहनीय हो चुका था वह अच्छी तरह से जानता था कि जब ऐसे हालात होते हैं तो लंड को बुर की बेहद आवश्यकता होती है लेकिन अभी मंजिल दूर थी लेकिन यह भी जानता था कि मंजिल ज्यादा दूर नहीं थी बस थोड़ी सी कोशिश करना बाकी रह गया था...।

सरला जिस तरह से अपनी नंगी गांड दिखाती हुई सीढ़ियों पर नकल भागते हुए गई थी उस नजारे को देखकर शुभम का जीवन धन्य हो गया था कई बार ऐसे ना जा रे उसके सामने पेश हो चुके थे जब वह औरतों के नंगे पन को एक अलग ढंग से देख कर उनका लुफ्त उठा चुका था लेकिन आज का यह दृश्य एकदम अतुल्य था और एकदम बेहद रोमांचकारी और उत्तेजना से भरा हुआ क्योंकि सरला जब अपनी नंगी बड़ी बड़ी गांड दिखाते हुए सीढ़ियां चल रही थी तो ऐसे में उसके खरबूजे जैसे बड़े-बड़े मदमस्त कर देने वाले गांड के दोनों फांके आपस में रगड़ते हुए थिरकन रहे थे... बड़ी बड़ी गांड के दोनों बाजू आपस में इस कदर रगड़ खा रहे थे कि मानो कोई अपने दोनों हाथों से पकड़कर उसे आपस में रगड़ रहा हो.... कुछ इस तरह से एकदम मस्त होकर वह भागते हुए अपने कमरे में गई थी इस उम्र की औरत तो बिल्कुल भी नहीं कर पाती अपनी इस हरकत की वजह से वह कई जवान लड़कियों को अपने आगे पानी भरने के लिए मजबूर कर दी थी। क्योंकि यह नजारा देखकर खुद उसका पानी निकलने वाला था। शुभम के मुंह से आह निकल गई थी। इस तरह से दोपहर में सरला के घर आना एकदमम सफल हो चुका था.... क्योंकि जो कुछ भी हो रहा था वह सब कुछ उम्मीद से दुगुना था यह सब के बारे में शुभम सोचा ही नहीं था। वह कभी नहीं सोचा था कि सरला जैसी उम्रदराज औरत इस तरह से बाथरूम से बाहर एकदम नंगी होकर आएगी जबकि इस उमर में अधिकतर औरतें वस्त्र पहनकर ही नहाती थी... इस बात से शुभम भली-भांति अवगत था क्योंकि वह गांव में अपनी मामी यों को वस्त्र पहनकर नहाते हुए देख चुका था... लेकिन यहां तो शुभम की मामी से भी बड़ी उम्र की औरत वस्त्र पहनकर तो छोड़ो बाथरूम में एकदम नंगी होकर नहा रही थी और नहले पर दहला फेंकने वाली बात यह थी कि बाथरूम के बाहर भी वह एकदम नंगी होकर ही आई थी मानो कि अकेले में वह पूरे घर में नंगी होकर ही घूमती रहती है। सुबह मन में सोच रहा था कि काश अगर ऐसा होता होगा तो कितना अच्छा लगता होगा जब एक खूबसूरत औरत पूरे घर में नंगी होकर अपने सारे काम करती होगी देखने वालों के तो होश उड़ जाते होंगे लेकिन यहां कौन देखने वाला था वह तो नसीब से वह घर में आ गया था ... और अपनी आंखों से यह नजारा देखकर एकदम धन्य हो गया था।

सोफे पर बैठकर एक अद्भुत नजारे को अपनी आंखों से देखने के बाद वह सुन्यमनस्क हो गया था.. ऐसा लग रहा था मानो जैसे उसके सोचने समझने की शक्ति जाती रही है... वह अधीर होकर पूरे ड्राइंग रूम में इधर से उधर देख रहा था.... शुभम की व्याकुलता बढ़ती जा रही थी उसका मन किसी चंचल पंछी की तरह कभी इधर तो कभी उधर फुदक रहा था... वह बेसब्र हुआ जा रहा था सरला के कमरे में जाने के लिए। क्योंकि जिस तरह का नजारा वह देख चुका था उसके बाद किसी भी मरने के लिए अपने ऊपर काबू पाना नामुमकिन होता है लेकिन इन सब के बावजूद भी वह अपने आप को संभाले हुआ था लेकिन आखिरकार यह भी तो एक मर्द था और अपनी आंखों के सामने एक बेहद खूबसूरत औरत के नंगे बदन को देखकर पूरी तरह से मस्ती के सागर में खोने लगा था उसकी आंखो में खुमार छाने लगी थी मदहोशी का आलम उसे अपनी आगोश में ले रहा था वह सरला के कमरे के अंदर जाना चाहता था... उसके करीब बैठ कर उसके नंगे पन को अपनी आंखों से घूंट भर भर कर पीना चाहता था..उसके मखमली बदन को अपने हाथों से सहलाना चाहता था उसके अंगों की गर्मी को अपने अंदर महसूस करना चाहता था।इसलिए वह सरला के कमरे में जाने के लिए बेसब्र हुआ जा रहा था उसकी सांसों की गति उसका साथ नहीं दे रही थी ..वह उत्तेजना के मारे बार-बार अपनी उखड़ती हुई सांसो को दुरुस्त करने में लगा हुआ था.।
 
दूसरी तरफ सरला के तो जैसे होश उड़े हुए थे ड्राइंग रूम में शुभम को बैठा हुआ देखकर वह इस कदर चौक गई थी मानो जैसे अपनी आंखों के सामने किसी भूत को देख ली हो... उसे अपने ऊपर काफी शर्मिंदगी महसूस हो रही थी इस उम्र में वह इस कदर नंगी होकर बाथरूम से बाहर निकल कर अपने कमरे की तरफ जा रही थी यह सोचकर ही उसे अजीब सा महसूस हो रहा था लेकिन इस सब के बावजूद भी एक रोमांच सा अनुभव हो रहा था...

सरला की दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चल रही थी वह इस समय बिस्तर पर बैठी हुई थी और इस समय भी वह एकदम नंगी थी जबकि अभी भी उसके गले पर टावेल लपेटे हुए थी... उसे खुद के ऊपर यकीन नहीं हो रहा था कि वह इतनी बेशर्मी वाली हरकत कर कैसे गई.... लेकिन फिर वह मन में सोचने लगी कि वह घर में तो बिल्कुल अकेली थी इसलिए तो वह बिना कपड़ों के बाथरूम से बाहर आई लेकिन उसे कहां मालूम था कि बाथरूम के बाहर ड्राइंग रूम में शुभम बैठा हुआ है..यह बात उसे पता होती तो वहां पता इतनी बड़ी गलती क्यों करती.... वह बिस्तर पर एकदम नंगी बैठकर यही सोच रही थी कि तभी बाल्को एक तरफ करते हुए उसके हाथ में गले में लपेटा हुआ टावल आ गया और उसकी हंसी छूट गई साथ में उसे अपने ऊपर गुस्सा भी आया कि गले में टावर लपेट कर घूम सकती है तो कमर पर लपेट लेती तो क्या हो जाता लेकिन तभी दूसरे पल उसका मन कुछ और सोचने लगा वह मैंने यह सोचने लगी कि चलो जो भी हुआ अच्छा ही हुआ.... क्योंकि यह सब जानबूझकर तो हुआ नहीं था जो कुछ भी हुआ था अनजाने में ही हुआ था अनजाने में ही सही शुभम उसके नंगे बदन को देख तो लिया हो सकता है उसके नंगे बदन को देख कर शुभम खुद ही अपना कदम आगे बढ़ाए और जो बाथरूम में सोच रही थी वही हो जाए यह सोचकर उसका पूरा बदन उत्तेजना के मारे गन गना गया...लेकिन फिर मन में यह सोचने लगी कि कहीं सुभम बाहर किसी को बता दिया तो कि वह घर में नंगी घूमती है तो लोग क्या सोचेंगे उसकी तो बदनामी हो जाएगी लेकिन अपनी ही सवाल का जवाब अपने मन में ढूंढते हुए वह बोली नहीं ऐसा शुभम बिल्कुल भी नहीं करेगा क्योंकि इसके नजरिए से साफ जाहिर होता है कि वह उसके बदन का दीवाना हो चुका है तभी तो वह पागलों की तरह उसके नंगे बदन को घूर रहा था...

वह अपने आपको अपने मन में डांटते हुए बोली की कितनी पागल है उसकी आंखों के सामने एकदम नंगी भागते हुए सीढ़ियां चढ़कर अपने कमरे में आई शुभम उसके नंगे बदन के हर एक अंग को देख लिया होगा जब उस एरिया चढ़कर भाग रहे थे तो जरूर शुभम उसकी बड़ी बड़ी गांड को देख लिया होगा जिसे वह हमेशा साड़ी के ऊपर से घूरता रहता था। वह उसकी नंगी बड़ी बड़ी गांड के साथ-साथ उसकी बड़े बड़े दूध को भी देखा होगा जिसे वह हमेशा प्यासी नजरों से देखता रहता था जरूर उसका मन उसे पकड़ने को कहा होगा उसे अपने मुंह में भर कर पीने के लिए कहा होगा क्योंकि कुछ देर तक तो वह वहां खड़ी थी तो जरूर उसकी नजर उसकी टांगों के बीच उसकी बुर पर गई होगी जिसे देखने के बाद वह अपने होश खो दिया होगा तभी तो वह मुंह फाड़े घूर रहा था। वह मन में सोचने लगी कि उसे नंगीदेखकर वह क्या सोच रहा होगा उसके मन में कैसी भावनाएं उमड़ रही होगी और जरूर पागल हो गया होगा क्योंकि जिस तरह से वह उसे कपड़े के ऊपर से ही घूरता रहता था आज तो उसकी आंखों के सामने एकदम नंगी हो गई थी तो जरूर वह मदहोश हो गया होगा उसके अंगों को पाने के लिए मचल रहा होगा....यह सब ख्याल उसके मम्मी आता ही सरला के तन बदन में अजीब सी कसक उठने लगी उसका मन मचलने लगा उसे गुदगुदी होने लगी उसके होठों पर मादक मुस्कान तैरने लगी और अपने आप को तसल्ली देने के लिए मन ही मन बोली कि जो कुछ भी हुआ अच्छा ही हुआ इसका अच्छाई परिणाम उसे मिलेगा इतना उसे विश्वास था... उसे अपने बिस्तर पर टावल फेंक कर खड़ी हो गई अभी भी वही दिन नंगी थी... यह सोच कर कि जो भी होगा देखा जाएगा वह शुभम द्वारा लाए गए ब्रा पेंटी को उठा कर देखने लगी और उसे पहनने का निश्चय कर ली और उसमें से आसमानी रंग का जालीदार ब्रा और पेंटी निकालकर उसे पहनने की पूरी तैयारी कर ली।

दूसरी तरफ शुभम अपनी भावनाओं पर काबू कर सकने में असमर्थ साबित हो रहा था। बाथरूम में जिस तरह से सरला को नंगी होकर नहाते हुए और अपने ही अंगों से खेलते हुए देखकर मदहोश हुआ था और जिस तरह से सरला एकदम बेशर्म होकर बाथरूम से बाहर एकदम नंगी होकर आई थी उसे देखकर अब शुभम एकदम पागल हो गया था। .. इसलिए वह भी मन में ठान लिया कि जो भी होगा देखा जाएगा यही सोचकर वह भी सरला के कमरे की तरफ उठ कर जाने लगा.....

बाथरूम के अंदर का नजारा देखकर शुभम को लंड किसी लोहे के रोड की तरह एकदम कड़क हो गया था शुभम की नजर सरला के नंगे बदन पर ऊपर से नीचे की तरफ जहां तक हो सकती थी वहां तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी मोटी मोटी जांघों के बीच की उसकी पतली दरार बेहद सुहावनी लग रही थी जो कि बेहद हल्की-हल्की ही दिख रही थी उस पर घुंघराले बालों का झुरमुट लगा हुआ था। शुभम यह नजारा देखकर एकदम उत्तेजना से भर गया और पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को पकड़ कर मसलने लगा.... सरला इस बात से अनजान की इस उम्र में भी वह किसी जवान लड़के के लंड को खड़ा कर सकती है वह नहाने में पूरी तरह से मशगुल थी।

शुभम की निगाह बार बार सरला की मोटी मोटी केले के समान चिकनी जांघों के बीच की उस पतली दरार पर चली जा रही थी जहां पर दुनिया का सारा सुख छिपा हुआ था। उस जगह को देखकर शुभम के मुंह में पानी आ रहा था और साथ ही उसके लंड में से भी पानी की दो बूंदे टपक गई.... सरला नहाने में मस्त होते जा रही थी लेकिन तभी सरला की हरकत को देखकर शुभम एकदम से चौक गया क्योंकि वह अपने दोनों हाथों से अपने बड़े बड़े पपैया जैसे चुचियों को दबाना शुरू कर दी थी। यह नजारे को देखकर ही शुभम को अपनी मंजिल करीब लगने लगी वह समझ गया कि सरला बेहद प्यासी औरत है... और इसे इस समय मोटे तगड़े लंड की जरूरत है ।बाथरूम के अंदर के नजारे को देखकर शुभम को लगने लगा कि आज उसकी मनोकामना जरूर पूरी हो जाएगी। सरला शावर के नीचे मस्त होते हुए अपनी बड़ी-बड़ी दोनों चुचियों को दबाते हुए स्तन मर्दन का मजा ले रही थी।.... उत्तेजना के मारे शुभम की सांसो की गति एकदम तेज हो गई थी उसकी इच्छा तो हो रही थी कि अभी बाथरूम का दरवाजा खोलकर अंदर चला जाए और अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर में डालकर उसकी सारी गर्मी निकाल दे लेकिन वह ऐसा नहीं करना चाहता था क्योंकि वह धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहता था और वैसे भी सरला की हरकत को देखकर उसे इतना तो समझ में आ गया था कि सरला को मोटे तगड़े लंड की जरूरत है और जिस तरह से वह उसके साथ बर्ताव कर रही थी उससे साफ जाहिर था कि अब उसका काम बनने वाला है।

ऐसा लग रहा था मानो बाथरूम के अंदर कोई पोर्न मूवी चल रही हो समय जैसे थम सा गया था शुभम की आंख एकदम स्थिर होकर बाथरूम के अंदर के नजारे पर जम सी गई थी शिवम की हालत अब और ज्यादा खराब हो गई जब सरला एक हाथ से अपनी चूची था मैं दूसरे हाथ से अपनी मखमली बुर को मसलना शुरू कर दी... यह नजारा देखकर तो शुभम एकदम से गनगना गया। शुभम उत्तेजना के मारे पसीने से तरबतर हो चुका था वह पूरी तरह से मदहोश हो गया था और उससे भी ज्यादा मदहोशी के आलम में सरला खोने लगी थी.... वाकई में इस समय बाथरूम में अगर उसके साथ कोई मर्द होता तो वह अब तक उसके लंड को अपनी बुर में ले ली होती। उम्र के इस पड़ाव पर एक औरत इतनी ज्यादा चुदवासी हो जाएगी शुभम यह पहली बार अपनी आंखों से देख रहा था... और सरला के बर्ताव में आए इस तरह के जबरदस्त बदलाव का कारण भी शुभम ही था। तभी सरला बाथरूम की दीवार की तरफ अपना मुंह करके घूम गई जिसकी वजह से शुभम की आंखों के सामने सरला की बड़ी-बड़ी गांड मटकने लगी... यह नजारा देखकर तो शुभम की सांस अटकने जैसी हो गई क्योंकि औरतों की बड़ी बड़ी गांड शुभम की सबसे बड़ी कमजोरी थी।

अब माहौल इस तरह का बन गया था कि मानो ऐसा लग रहा था की सलाह नहा रही नहीं है बल्कि शुभम को अपनी मदहोश जवानी के रंग में डूबो रहि है....शुभम कैलेंडर में रक्त का प्रवाह बड़ी तेजी से हो रहा था उसे अपने लंड में दर्द महसूस होने लगा था सरला की मदहोश कर देने वाली जवानी शुभम के दिल पर हथौड़े से वार कर रही थी उससे सब्र नहीं हो रहा था उसकी इच्छा यही हो रही थी कि इसी समय बाथरूम में घुस जाए और सरला की मदहोश जवानी में डूब जाए लेकिन ऐसा कर सकने में अभी वह असमर्थ था। सरला नहा चुके थे इसलिए सुबह का वहां रुकना ठीक नहीं था और वह चुपचाप आकर ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठ गया और वहां पर सरला के बाहर आने का इंतजार करने लगा।

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सरला के तन बदन में अजीब सी हलचल मची हुई थी उसका दिल जोरों से धड़क रहा था आज उम्र के इस पड़ाव पर वह एकदम जवानी के दिनों वाला एहसास लिए बिस्तर पर पड़ी हुई आसमानी रंग की जालीदार ब्रा और पेंटी को अपनी आशा भरी निगाहों से देख रही थी। अपने कमरे में वह एकदम नंगी खड़ी थी बिस्तर के पास मानो ऐसा लग रहा था कि बिस्तर पर उसका साजन लेटा हुआ है और वह उसके लिए अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई है। दरवाजा खुला हुआ था शायद सरला ने दरवाजे को जानबूझकर खुला छोड़ रखी थी भले ही हो शर्मिंदगी का अहसास लिए शुभम के सामने से एकदम नंगी ही भागी थी...लेकिन मन ही मन में वह चाहती थी कि शुभम फिर से उसे नंगी देखें और शायद इसीलिए वह दरवाजे को थोड़ा सा खुला छोड़ कर कमरे के अंदर अभी भी एकदम नंगी खड़ी थी ना जाने क्यों उसे इतना विश्वास जरूर था कि उसी संपूर्ण रूप से नंगी देखने के बाद शुभम अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाएगा और एक बार फिर उसके कमरे की तरफ आएगा.... और इसी उम्मीद के साथ में दरवाजा खुला छोड़ कर इस समय टौवल से अपने भीगे बदन को पोंछ रही थी... बरसों के बाद उसके मन में आज कुछ नया करने की हसरत जगी थी.. इस बार वह अपनी हसरत का अपनी चाहत का गला नहीं घोटना चाहती थी... इतने सालों के बाद आज उसके मन में कुछ करने की ललक जगी थी... वह अपने तन बदन में अजीब सी हलचल महसूस कर रही थी यह हलचल यह एहसास जवानी की उन दिनों की थी जब वह पहली बार किसी पुरुष के बारे में सोच कर अपनी खिलती जवानी की अंगड़ाई ली थी आज वही हलचल महसूस करके वह अपने आप को एकदम तरोताजा महसूस कर रही थी... बार-बार उसकी निगाह पपिया जैसे बड़ी बड़ी चूची हो पर चली जा रही थी तो कभी दोनों टांगों के बीच की फूली हुई हल्की दरार पर जिस पर हल्के हल्के रेशमी बालों का झुरमुट सा लगा हुआ था जो कि देखने में बेहद मनमोहक लग रहा था जब सरला का यह हाल था तो शुभम का क्या हाल हुआ होगा जब वह अपनी प्यासी नजरों से सरला के दोनों टांगों के बीच के उस हसीन दृश्य को देखा होगा जो कि औरत को देखते ही मर्दों की कल्पना में मिश्रित हो जाते हैं... मर्दों की याद से नहीं हमेशा से यही आदत रही है कि जब भी वह किसी खूबसूरत औरत को देखते हैं भले ही वस्त्र में होती है लेकिन कल्पना में वह उस औरत को निर्वस्त्र करके उसके अंगों को अपनी कल्पना की नजरों से जी भर कर देखते हैं और अपनी कल्पना का घोड़ा इतना तेज दौड़ आते हैं कि कल्पना में ही उस औरत के साथ ना जाने क्या-क्या हरकत कर बैठते हैं जिससे उनका पानी निकल जाता है शुभम के साथ भी यही हुआ था सरला को वस्त्र में देखने के बाद हुआ कल्पना में सरला को नग्न अवस्था में देखने की कोशिश करता था और उसकी यह कोशिश हकीकत में बदल गई थी उसका सपना साकार हो गया था।
 
सरला अपने भीगे बदन को अच्छे से साफ करके बिस्तर पर पड़ी आसमानी रंग की पेंटी को उठा ली जो कि एकदम जालीदार थी आगे की तरफ से जो भाग बुर को ढकता है वही भाग जालीदार था जहां से ढके होने के बावजूद भी ढंका हुआ कुछ नजर नहीं आता बल्कि सब कुछ एकदम सलीके से नजर आता इस बारे में सोचते ही उसके तन बदन में अजीब सी गुदगुदी होने लगी.... क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि इस पेंटिं को पहनने के बावजूद भी कुछ भी पर्दे में नहीं रहेगा सब कुछ बेपर्दा ही रहेगा.... यही सोचती हुई वह शुभम के द्वारा लाई गई पेंटिं अपनी नाजुक नाजुक उंगलियों में लेकर इधर-उधर घुमा कर कुछ देर तक उसे देखती रही। शुभम के द्वारा लाई गई पेंटी देखते ही उसे इसका अंदाजा हो गया था कि ब्रा और पेंटी अच्छी क्वालिटी की और महंगी है। शुभम की पसंद पर वह मुस्कुरा दी...क्योंकि ब्रा पेंटी को देखकर उसे इतना आभास हो गया था कि वाकई में शुभम को औरतों के बारे में कुछ ज्यादा ही ज्ञान है.... उसके दिल में अजीब सी हलचल हो रही थी मानो पूरे बदन में उम्र के इस पड़ाव पर आई फिर से मदहोश कर देने वाली जवानी चिकोटि काट रही है वह अपने दोनों हाथों में पेंटी को लेकर उसमें अपनी एक मदमस्त खूबसूरत चिकनी टांगों डाल दिए और यही हरकत दूसरे टांग से भी की दोनों टांगे और पेंटी के दोनों गोलाई में थी धीरे-धीरे करके सरला पेंटी को अपनी जांघों तक लेकर आई उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी।

अपनी मदमस्त रसीली बुर को ढकने से पहले एक बार हुआ उस दिशा में अपनी नजर घुमाकर कचोरी जैसी फूली हुई बुर को देखा करो आत्म संतुष्टि का अहसास लिए पेंटि और ऊपर चढ़ा ली.... उसकी बड़ी-बड़ी तरबूज ऐसी कांड शुभम के लाए हुए पेंटिं में पूरी तरह से समा गई थी.... पेंटी को पहनते ही सरला के बदन में अद्भुत अहसास होने लगा उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी इस नहीं पेंटी में वह कुछ ज्यादा ही आरामदायक महसूस कर रही थी।

वह खुद गोल गोल घूम कर अपने चारों तरफ देखने की कोशिश करने लगी। उसे अच्छा लग रहा था सबसे ज्यादा अच्छी बात यह लग रही थी कि जो चीज रखने के लिए पेंटी पहनी जाती है वह अंग ढंका ही नहीं था... उनके हल्के बालों का झुरमुट उस जालीदार पेंटी में से बाहर झांक रहा था माना अपने साथी को निमंत्रण दे रहा हो.... एक तरफ सरला शुभम के द्वारा लाई गई पेंटिंग को पहनकर उत्तेजना के मारे हवा में विचरण कर रही थी और दूसरी तरफ शुभम अपनी भावना होकर दौड़ते घोड़े पर काबू कर पाने में एकदम असमर्थ हो रहा था जिसके चलते वह सरला के कमरे में जाने के लिए अपने कदम आगे बढ़ा दिया था वह धड़कते दिल के साथ सीढ़ियां चल रहा था मन में नई उम्मीद जगी हुई थी टांगों के बीच हलचल मचा हुआ था या यूं कह लो कि पेंट में गदर मचा हुआ था शुभम का लैंड किसी लोहे के रोड की तरह एकदम कड़क होकर पैंट में तंबू बनाए हुए था। जिसे देख कर कर यह आभास सा हो रहा था कि अगर आज यह सरला की बुर में गया तो बरसों की प्यास बुझा कर ही वापस लौटेगा। जो कि इस समय सरला को देखकर ही पूरी औकात में आ गया था जिसे शुभम पैंट के ऊपर से ही अपने हाथों से मसल कर उसे दिलासा देने की कोशिश कर रहा था लेकिन शायद आज ही अभी मानने वाला नहीं है उसका बस चलता तो पेंट फाड़ कर बाहर आ जाता क्योंकि जिस नजारे को देखकर वह सर उठाए खड़ा था उस नजारे को देखने के बाद दूसरे किसी के बस में बिल्कुल भी नहीं था अपनी भावनाओं पर काबू पा लेना क्योंकि जिस अंग के लिए शुभम का लैंड खड़ा हुआ था वह अंग उससे कुछ ही दूरी पर खड़े होकर उसे जैसे अपनी और आने के लिए आकर्षित करते हुए आमंत्रण दे रही थी...

क्योंकि सोफे पर बैठकर शुभम एकदम साफ साफ देख पा रहा था कि बाथरूम से निकलने के बाद जिस अंदाज में वह उसकी आंखों के सामने खड़ी थी उसकी टांगों के बीच के रेशमी बालों के झुरमुट में से पानी की बूंदे किसी मोती की दाने की तरह चमक रही थी और वह धीरे-धीरे बुंद की शक्ल में नीचे गिरकर जमीन को तृप्त कर रही थी... इस नजारे को देखकर तो शुभम इतना लालायित हो गया था कि एक बार उसके मन ने कहा कि भले कुछ भी हो आगे बढ़कर वह अपने घुटनों के बल बैठकर उसकी गुरु को अपनी आगोश में छुपाए हुए रेशमी बालों के झुरमुट में से टपक रहे मोतियों के दानों के समान पानी की बूंदों को अपनी जीभ को आगे बढ़ाकर उस पर गिरा कर उस बुंद को अपने गले के नीचे उतारकर तृप्त हो जाए... लेकिन उस समय उसके नंगे बदन को देखने की कशमकश में वह अपनी भावनाओं को दबा ले गया लेकिन उसकी मटकती हुई बड़ी बड़ी गांड देखकर वह अपने आप हमें बिल्कुल भी नहीं था इसलिए तो निश्चय करके वह सरला के कमरे की तरफ आगे बढ़ रहा था...

शुभम के मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि जिस तरह का उसके साथ होते आ रहा है सरला को लेकर...कहीं ऐसा कुछ के मन का धोखा ना हो कहीं ऐसा ना हो कि यह सब अनजाने में हुआ हो अगर वह कुछ आगे करने की सोचें तो सरला के द्वारा उसे फिट कार मिले....लेकिन फिर शुभम अपने ही सवालों में से जवाब ढूंढते हुए अपने मन को तसल्ली करने के लिए अपने आप से ही बोला कि अगर ऐसा होता तो वह मुस्कुराती नहीं ना तो उसके द्वारा लाए गए गिफ्ट को स्वीकार करती है अगर उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि शुभम ने गिफ्ट में उसके लिए प्राप्त दिलाया है तो इसी समय वह उसे दुत्कार कर बाहर निकाल देती लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जिस तरह से वह बाथरूम में से एकदम नंगी ही बाहर आ गई थी और उसे देखकर एकदम रुक गई थी अगर उसके मन में कुछ और चल रहा होता तो वहां उसे खरी-खोटी जरूर सुनाती उसे तमीज सिखाती... लेकिन किस्मत से अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था जोकि शुभम के सोचने के मुताबिक उसके लिए मंजिल तक जाने की राह आसान होती नजर आ रही थी फिर भी उसके मन में शंका जरूर था कि कहीं कुछ गलत ना हो जाए इसलिए वह बड़ी सावधानी से आगे बढ़ना चाहता था इसलिए वह धीरे-धीरे सीढ़ियों पर चढ़ते हुए सरला के कमरे की तरफ आगे बढ़ रहा था जहां पर दूसरी तरफ सरला जानबूझकर हल्का सा दरवाजा खुला छोड़ कर अब जालीदार ब्रा उठाकर उसके कब को अपनी हथेली से नाप रही थी और यह अंदाजा लगा रही थी कि उसकी बड़ी-बड़ी पपैया जैसी चुकी उसके अंदर समा पाएगी कि नहीं... चारों तरफ से तसल्ली कर लेने के बाद वह उसे अपनी बाहों में डालकर ब्रा के कप में अपने हाथों से अपनी एक चूची पकड़ कर उसमें डालकर वही क्रिया दूसरी चूची के साथ कि अभी समय उसकी दोनों चूचियां ब्रा के दोनों कप में समा चुकी थी लेकिन शुभम बहुत चला था वह जानबूझकर ऐसी ब्रा पसंद किया था कि ब्रा पहनने के बावजूद भी सरला की आधे से ज्यादा चूचियां बाहर की तरफ नजर आए ऐसा लगे कि उसकी चूचियां कभी भी ब्रा की कटोरी से बाहर कूद जाएंगी.... इस बात का आभास अल्लाह को भी हो गया था इस बारे में सोच कर उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी अभी वह बराबर ही नहीं रही थी कि धीरे-धीरे करके शुभम दरवाजे पर पहुंच गया और खुला हुआ दरवाजा देखकर उसे पक्का यकीन हो गया कि सरला की तरफ से उसे खुला निमंत्रण है... क्योंकि कोई भी औरत अगर मर्द के सामने अनजाने में ही नग्न अवस्था में आ जाए तो शर्मिंदगी का अहसास मे वह कभी भी दरवाजा खुला नहीं छोड़ेगी लेकिन यहां पर मामला कुछ उल्टा ही था। . सरला ने जानबूझकर दरवाजा खुला छोड़ दी थी या देखकर शुभम कि तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी ऐसा लग रहा था मानो सरला की सोच पर शुभम के लंड ने सलामी दी हो इस तरह से पेंट के अंदर ही ऊपर नीचे होकर उसे सलाम कर रहा था... अब सब कुछ साथ था थोड़ा सा दरवाजा खुला होने के बावजूद भी उसकी ओर से अंदर का पूरा नजारा नजर आ रहा था शुभम खुले हुए दरवाजे की ओट में से अंदर झांकने लगा और अंदर का नजारा देखा कर एक बार फिर से उसके तन बदन में चिंगारी फूटने लगे वह साफ तौर पर देख पा रहा था कि उसकी लाई गई ब्रा पेंटी को सरला स्वीकार कर ली है तभी तो उसके तरबूज ऐसी बड़ी बड़ी गांड को उसकी आसमानी रंग की पेंटी जो कि इस समय ढकने में असमर्थ थी फिर भी दोनों फांकों को अपनी बाजुओं में लेकर छुपाने की भरपूर कोशिश कर रही थी... सरला की बड़ी-बड़ी गाना सुनाने रंग की पेंटी में देखकर शुभम और ज्यादा उत्तेजित हो गया उसकी सांसों की गति तेज होने लगी उसकी हालत खराब होने लगी उसके ऊपर मदहोशी का आलम और ज्यादा छाने लगा जब देखा कि सरला उसके द्वारा लाई गई ब्रा पहन ली है और दोनों हाथ पीछे लाकर उसके हुक को बंद करने की नाकाम कोशिश कर रही है जो कि बंद नहीं कर पा रही थी... यह देखकर शुभम की आंखों में चमक आ गई सरला का गदराया जिस्म उसकी आंखों के सामने था. जोकि ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में और ज्यादा चमक रहा था........ जानबूझकर दरवाजा खुला छोड़ने के बावजूद भी सरला को इस बात का एहसास तक नहीं हुआ कि दरवाजे पर शुभम चोरी छुपे उसे देख रहा है वह अपनी ही धुन में ब्रा का हुक लगाने में मस्त थी जो कि वह ब्रा का हुक नहीं लगा पा रही थी यह देखकर शुभम को अत्यधिक आनंद की अनुभूति हो रही थी क्योंकि एक उम्रदराज औरत ठीक से ब्रा नहीं पहन पा रही थी। शुभम उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुका था जो कुछ भी सरला के घर में आकर उसकी आंखों ने देखा वह काफी मादक और कामोत्तेजना से भरपूर था। ऐसा लग रहा था मानो वह कोई पोर्न मूवी देख रहा हो...

सरला ब्रा का हुक बंद करने में काफी मशक्कत कर रही थी लेकिन उससे यह काम हो नहीं रहा था। सलाह काफी परेशान हो रही थी जो कि उसकी झुंझलाहट से साफ जाहिर हो रहा था शुभम समझ गया था कि अब सरला के बस में नहीं था कि वह ब्रा का हुक लगा पाती इसलिए वह दरवाजे पर खड़े खड़े ही बोला।

चाची में कुछ मदद करूं क्या...?

इतना सुनते ही सरला एकदम से चौक गई और तुरंत पीछे मुड़कर देखें तो दरवाजे पर शुभम खड़ा था जिसे देखते ही वह फिर से जड़वंत हो गई मानो सांप सूंघ गया हो.... अब सरला के पास बोलने लायक कुछ भी नहीं बचा था क्योंकि वह कुछ बोल पाती इससे पहले ही हुआ कमरे में प्रवेश कर चुका था और अपने आप ही दरवाजा बंद कर दिया था।

Mmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm
 
शुभम सरला को ब्रा का हुक लगाता देख कर और उसे ना लगा सकने की वजह से शुभम काफी उत्तेजित हो गया था और वह खुद उसकी मदद करने के लिए कमरे में घुसकर कमरे का दरवाजा बंद कर दिया था.... शुभम को इस तरह से दरवाजा बंद करता हुआ देखकर सरला के मन में अजीब अजीब ख्याल आने लगे वह मारे शर्म के गड़ी जा रही थी... जो कुछ भी उसके साथ हो रहा था इस बारे में वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी अभी भी उसकी पीठ शुभम की तरफ थी वह शर्म के मारे नीचे जमीन को देखे जा रही थी शुभम के द्वारा लाई गई ब्रा पेंटी उसके बदन की शोभा बढ़ा रही थी लेकिन ब्रा का हुक ना बंद होने की वजह से उसके बाजुओं में से दोनों पट्टियां लटक रही थी मानव शुभम के लिए वह अपने वस्त्र का त्याग कर रही हो अगर इस समय कोई और यह नजारा देख ले तो उसको यही लगेगा कि सरला शुभम के लिए अपने वस्त्र त्याग कर रही है। शुभम की आंखो में वासना की चमक साफ नजर आ रही थी उसकी आंखों में खुमारी छाई हुई थी उसके पूरे तन बदन में सरला के मदहोश मादक बदन का नशा छाया हुआ था। उसके पैंट में गदर मचा हुआ था उसका लंड किसी भी वक्त विद्रोह करने की तैयारी में था जोकि किसी बंदूक की नाल की तरह पेंट में तना हुआ था। कुछ पल के लिए सरला के कमरे में एकदम सन्नाटा छा गया केवल दोनों की गहरी गहरी सांसो की आवाज ही सुनाई दे रही थी दोनों जहां थे वहीं मानो ठहर से गए थे... सरला अपने बदन को कपड़ों की ओट में छुपाना चाहती थी लेकिन ना जाने क्यों वह यह सब करने में असमर्थ साबित हो रही थी... सरला यह बात भलीभांति जानती थी कि वह जिस तरह से जिस पोजीशन में खड़ी थी शुभम उसके बदन को लार टपका ता हुआ देख रहा होगा और अपने द्वारा लाई गई ब्रा पेंटी को भी देख कर मन ही मन खुश हो रहा होगा...और सरला का यह सोचना बिल्कुल ठीक था क्योंकि यही बात शुभम के मन में भी चल रही थी...

उसे काफी प्रसन्नता हो रही थी सरला के खूबसूरत बदन पर अपने द्वारा लाई गई ब्रा पेंटी को देखकर भेज देना करो और भी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव कर रहा था.... शुभम सरला से करीब तीन चार कदम की दूरी पर खड़ा था लेकिन सरला को इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह अपनी नजर घुमाकर शुभम को देख ले... तभी शुभम अपना एक कदम आगे बढ़ाकर सरला की और बड़ा ही था कि उसके कदमों की आहट को सुनकर सरला शर्म के मारे अपने बदन को संकुचाते हुए बोली....

सससससस...... शुभम तो यहां क्या करने आया है.?

ऐसे ही आ गया था चाची आप ही तो कल कह रही थी कि तेरा जब मन करे तब चले आया कर.... (इतना कहते हुए शुभम ज्यों का त्यों वही खड़ा रह गया...)

लेकिन तुझे घंटी तो बजानी चाहिए थी....(सरला उसी तरह से अपनी नजरें नीचे करे हुए बोली..)

अब मैं घंटी बजा तभी तो कैसे बचा था चाचा मैं दरवाजे पर पहुंचा तो दरवाजा खुला हुआ था...(शिवम की यह बात सुनकर सरला सोच में पड़ गई तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ कि जल्दबाजी में शायद उसने दरवाजा लॉक करना भूल गई थी. ) मुझे लगा कि शायद आप यहीं ड्राइंग रूम में होगी इसलिए मैं डोरबेल नहीं बजाया और घर में आ गया यहां वहां ढूंढने पर आप मुझे कहीं भी दिखाई नहीं दी.... तो मैं जब सीढ़ियों पर चढ़ने लगा तो मुझे बाथरूम में से पानी के गिरने की आवाज आने लगी तो मैं समझ गया कि शायद आप नहा रही होंगी और इसलिए मैं आपका इंतजार करने के लिए यही सोफे पर बैठ गया....

शुभम अपनी तरफ से सफाई पेश करते समय लगातार सरला के खूबसूरत नंगे जिस्म को देख रहा था... जोकि ट्यूबलाइट की रोशनी में संगेमरमर की तरह चमक रही थी। सरला को इस बात का आभास हो गया था कि शुभम इस समय उसकी बड़ी बड़ी गांड कोई देख रहा है... क्योंकि इस बात से वाशी तरह से आओगे तो ठीक है साड़ी के ऊपर से हमेशा शुभम उसके बदन को नहीं आ रहा करता था और इस समय तो उसके पास पूरा मौका था उसे जी भर कर देखने के लिए बोला ऐसा मौका क्यों जाने देता....

लेकिन फिर भी.. (इतना कहकर सरला एकदम खामोश हो गई और जैसे शुभम सरला क्या कहना चाहती है यह बात अच्छी तरह से जानता था इसलिए जवाब देते हुए वह बोला...)

मैं अच्छी तरह से जानता हूं चाची कि मुझे बिना बताए नहीं आना चाहिए था लेकिन मैं क्या करता दोपहर का समय था मेरा भी समय पास नहीं हो रहा था और आप भी यह बात कह चुकी थी कि जब चाहे तब चले आना... और मैं तो चाची से अपना ही घर समझने लगा था इसलिए चला आया था वरना मैं क्यों आता और मैं यही सोफे पर बैठ गया....(सरला शुभम की बातें बहुत ध्यान से सुन रही थी क्योंकि वह भी मन में सोच रही थी कि हो सकता है वह जो भी बोल रहा है सच हो।) लेकिन चाची इसमें गलती पूरी आपकी है।

ममम.. मेरी इसमें मेरी गलती कहां खो गई ....(इतना कहने के साथ ही चोकने वाले अंदाज में सरला शुभम की तरफ घूमी तो उसे इस बात का आभास हुआ कि इस समय वह अर्धनग्न अवस्था में है लेकिन शुभम की तरफ घूमने के साथ ही उसकी ब्रा की कटोरी चूचियों पर से नीचे की तरफ गिर गई जिसे जल्दी से संभाल कर सरला फिर से दूसरी तरफ घूम गई सरला की इतनी सी हरकत पर शुभम पर मानो उत्तेजना का सैलाब टूट पड़ा... वह एकदम कामोत्तेजना से भर गया... क्योंकि ब्रा की कटोरी गिरने की वजह से शुभम की आंखों के सामने एक बार फिर से सरला के पके हुए पपैया अपनी औकात दिखाते हुए नजर आने लगे जिसे देख कर शुभम की आंखों में उसे पाने की चमक नजर आने लगी। शुभम अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला।

तो क्या चाची गलती सब आपकी ही है मैं तो यूं ही आ गया था घर में रूम में सोफे पर बैठ गया लेकिन मुझे क्या मालूम था कि आप बाथरूम से एकदम नंगी होकर बाहर निकलेंगी.... (शुभम जानबूझकर नंगी शब्द पर कुछ ज्यादा ही जोर देते हुए बोला था. और इस नंगी शब्द का असर सरला पर बेहद गहरा हो रहा था क्योंकि शुभम के मुंह से अपने बारे में इस तरह से नंगी शब्द सुनकर उसका चेहरा शर्म के मारे लाल टमाटर की तरह हो गया था वह नजर उठाने में असमर्थ हो रही थी और शुभम अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला.) जाहिर तौर पर सभी औरतें बाथरूम से नहाने के बाद कपड़े पहन कर या टॉवेल लपेटकर ही बाहर आती है इसलिए मैं यहां पर बैठा हुआ था लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि आप बिना कपड़ों के एकदम नंगी होकर बाथरुम से बाहर आएंगे या हो सकता है यह आपकी आदत ही हो लेकिन मैं इसके लिए माफी मांगता हूं...

नहीं ऐसी भी कोई आदत मुझमें नहीं है आज मैं कपड़े बाथरूम में ले जाना भूल गई थी। (सरला शर्मा से नजरें गड़ाए हुए ही अपनी तरफ से सफाई पेश करते हुए बोली...)

लेकिन कुछ भी हो मेरे साथ साथ इसमें गलती आपकी भी है.... आपको इस तरह से नंगी होकर बाहर नहीं आना चाहिए था..

मुझे क्या मालूम था कि दरवाजा खुला होगा और तू चला आएगा मैं तो यह समझी थी कि घर में कोई भी नहीं है इसलिए.....(इतना कहकर सरला चुप हो गई...)

जाने दो चाची जो भी हुआ यह तो मुझे नहीं मालूम अच्छा हुआ या खराब हुआ... लेकिन सब कुछ अनजाने में ही हुआ....

जो हुआ सो हुआ लेकिन सब कुछ जानने के बाद तो मेरे कमरे में क्यों चला आया तुझे यहा नहीं आना चाहिए था ना....

कैसे चाची ....कैसे आप ही बताओ कैसे...... भला मैं अपने आप पर काबू कैसे रख पाता....

(शुभम की यह बात सुनने के बाद सरला आश्चर्य से उसकी तरफ नजर घुमा कर देखी तो शुभम अपनी बात आगे बढ़ाते हुए बोला....)

मेरा मतलब है कि चाची जरा आप खुद सोचो जब एक खूबसूरत औरत खूबसूरत जिस्म लिए हुए... और वह भी ऐसी औरत जिसे देखकर जवान लड़के तो क्या बुढो का भी दिल जोर से धड़कता हो .. अगर ऐसी औरत आंखों के सामने से एकदम नंगी होकर गुजर जाए तो भला वह मर्द क्या शांत बैठेगा उसके तन बदन में हलचल मच जाएगी...(शुभम जानबूझकर इस तरह से बेहद चालाकी से चलना की खूबसूरती की तारीफ कर रहा था और सरला पर इस तारीफ का असर भी हो रहा था वह अंदर ही अंदर खुश हो रही थी... उसे इस बात का आभास हो रहा था कि अभी भी उसके अंदर जवानी कायम है...)

लेकिन तू.....?

तू..... क्या .... क्या मैं मर्द नहीं हूं...? क्या एक औरत को देखकर मुझ में भावना पैदा नहीं होती और जब मेरी आंखों के सामने इतनी खूबसूरत औरत हो तो भला में कैसे अपने आप को रोक पाऊंगा.... चाची में अपने आप को रोक भी लेता लेकिन....(इतना कहकर सब हम खामोश हो गया।)

लेकिन क्या .....(सरला उसी तरह से शर्मिंदा होकर नीचे नजरें झुकाए हुए बोली)

लेकिन चाची अगर मैं आपको नंगी नहीं देखा होता तो अपने आप को रोक लेता आपको अपनी आंखों के सामने एकदम नंगी देखकर ना जाने मुझे क्या हो गया मुझे तो उम्मीद भी नहीं थी कि कपड़ों के अंदर आप इतनी खूबसूरत होगी मैं तो आपकी खूबसूरती को अभी तक कपड़ों के ऊपर से ही देखता आ रहा था लेकिन आज पहली बार कपड़ों के अंदर की खूबसूरती को देखकर मैं अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाया और ना चाहते हुए भी आपके कमरे में आ गया.....(सुभम जानबूझकर अपनी बातों के जादू में सरला को पूरी तरह से उलझा रहा था और सरला पूरी तरह से उसकी बातों में उलझ गई थी... शुभम की चिकनी चुपड़ी बातें सुनकर अंदर ही अंदर वह बहुत प्रसन्न हो रही थी.... श्रम की बातें सुनकर सरला के पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं थे शुभम अपनी बातों से सरला को एकदम निशब्द कर दिया था.)

लेकिन चाची चाहे जो भी हो आप आसमानी रंग की ब्रा और पेंटी में बहुत खूबसूरत लग रही हो....(शुभम जानबूझकर अश्लील शब्दों का प्रयोग सरला के सामने कर रहा था और सरला अपने ही बेटे की उम्र के लड़के के सामने अर्धनग्न अवस्था में खड़ी होकर उसकी इस तरह की बातें सुनकर शर्म से गड़ी जा रही थी।)

शुभम ये क्या कह रहा है तू...मैं तेरी मां की उम्र की हूं और मुझे इस हालात में देखकर तू मेरे खूबसूरती की तारीफ कर रहा है ... क्या यह तेरे संस्कार को शोभा देते हैं...?

चाची में कोई गलत बात नहीं कह रहा हूं मेरी आंखों ने जो देखा है वह मेरी आंखों के सामने जो चीज है मैं उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा हूं आखिरकार खूबसूरती की तारीफ करना कोई गुनाह तो नहीं है।

लेकिन मैं एक औरत हूं और तेरी मां की उम्र की हो तो मेरे बेटे के उम्र का है....?
 
खूबसूरती की कोई सीमा नहीं होती और आकर्षण उम्र के दायरे में बड़ी नहीं होती आकर्षण का दायरा उम्र और वक्त सबसे आगे होता है मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि आप मेरी मां की उम्र की है लेकिन सबसे पहले आप एक औरत है और वह भी खूबसूरत औरत....

(शुभम के मुंह से अपनी तारीफ में निकले एक एक शब्द सरला को अपने बदन पर मखमली एहसास करा जा रहे थे... शुभम कि कहीं एक एक बात उसके सीने में उतर जा रहे थे आज तक इस तरह की बातें उसके पति ने भी नहीं की थी शुभम अपनी मदमस्त कर देने वाली बातों से उसके कानों में शहद घोल रहा था जो कि सुनने में तो अच्छी लगी रही थी लेकिन उसका एहसास गजब का था एक अद्भुत एहसास जिसके पहलू में वह अपने आप को पिघलता हुआ महसुस कर रही थी और वास्तव में उसे अपनी टांगों के बीच की पतली दरार मै से मदन रस रिश्ता हुआ महसूस हो रहा था... जो कि उसके बदन में उत्तेजना के असर की पूर्ति कर रहा था... शुभम की बातें सुनने के बाद सरला उसी तरह से शर्म के मारे नजरे नीचे गड़ाए हुए बोली)

क्या शुभम तुझे जरा भी शर्म नहीं आ रही है मुझे इस हालात में यूं घूर घूर कर देखते हुए।

चाची आप यह बात अच्छी तरह से जानती हो कि ताजमहल बहुत खूबसूरत है चारों तरफ से रोजाना हजारों आंखें उसे घूरती रहती हैं तो क्या उसे कोई दिक्कत होती है या किसी को वह रोक देता है कि मुझे इस तरह से मत घुरा कर...उसी तरह से चाची आप इतनी ज्यादा खूबसूरत है कि मैं अगर अपने आप को रोकने की कोशिश करृ तो भी मैं शायद रुक नहीं पाऊंगा.... आपका अंग-अंग संगेमरमर की तरह चमक रहा है। आप इतनी ज्यादा गोरी है कि सही कहूं तो मेरी आंखें चमक जा रही है। इस उम्र में भी आप अपनी खूबसूरत बदन को बना कर रखी है यह बात एकदम हैरानी कर देने वाली है कहीं से भी थोड़ी सी भी लचक नहीं है... बदन का हर एक हिस्सा बेहद कसा हुआ है....(शुभम अपने शब्दों में सरला की तारीफ के पुल के पुल बांधे जा रहा था और यह सुनकर सरला खुशी के मारे गदगद हुए जा रही थी साथ ही उसकी बुर लगातार पिघलती जा रही थी... सरला के लिए यह सब एक स्वप्न सा लग रहा था उसे ऐसा लग रहा था मानो वह कोई सपना देख रही है क्योंकि जो कुछ भी अब उसके साथ हो रहा था एहसास तक नहीं हुआ था शुभम एक जवान लड़का था और इस उम्र में वह एक उम्रदराज औरत की तारीफ के तारीफ किया जा रहा था उसकी खूबसूरती को लेकर उसके कसे हुए अंग के बारे में जो कुछ भी वह आज तक नहीं सुनी थी उसके कानों ने आज वह सुनकर एकदम सुन्न हुए जा रहे थे

सरला मारे उत्तेजना और प्रसन्नता के कारण हवा में उड़ रही थी।)

औहहह सुभम ये क्या कह रहा है तू.... इस तरह की बातें मत कर तेरी बातें सुनकर मुझे मुझे .... तो कमरे से बाहर चला जा....

चला जाऊंगा चाची लेकिन जो काम करने के लिए आया हूं पहले वह तो कर लुं....

(शुभम की यह बात सुनकर सरला एकदम सन्न रह गई उसे समझ में नहीं आ रहा है ताकि शुभम क्या करने के लिए अंदर आया है लेकिन इतनी बात तो वो जानती ही थी कि ऐसे हालात में एक औरत के कमरे में एक मर्द का आना किस लिए होता है और जिस तरह से शुभम बातें कर रहा था उससे साफ जाहिर था कि वह कमरे में उसी काम के लिए आया है जो कि एक मर्द ऐसे हालात में एक औरत के साथ करता है यह बात मन में सोचते ही सपना के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारियां फूटने लगी लेकिन उसके अंदर अजीब सा डर फैलने लगा लेकिन इस डर के साथ-साथ उत्सुकता भी बढ़ती जा रही थी वह भले ही समझ रही थी लेकिन अंदर ही अंदर यही चाहती थी कि शुभम उसके साथ सब कुछ करें जो कि एक मर्द को ऐसे हालात में औरत के साथ करना रहता है...और जिस तरह की अश्लील खुले शब्दों में सुबह मुझसे बातें कर रहा था बेशर्मो की तरफ से साफ जाहिर था कि शुभम भी उसके साथ वही करना चाहता है जो एक औरत के साथ मर्द करता है.... यह बात सुनते ही सपना के मन में ढेर सारे सवाल पैदा हो रहे थे लेकिन उन सवालों के साथ-साथ उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर भी दौड़ रही थी उसकी टांगों के बीच कुछ ज्यादा ही हलचल मची हुई थी उसे सा महसूस हो रहा था कि उसकी बुर में से लगातार नमकीन रह रहा था जो कि उसकी नई नई पेंटी को पूरी तरह से गीली कर रही थी.... फिर भी शुभम की बातें सुनकर सरला कांपते स्वर में बोली..)

कककककक.... क्या करने आया है तू...

इतना सुनते ही शुभम आगे बढ़कर सरला के बेहद करीब पहुंच गया और सरला को इस बात का एहसास हो गया कि शुभम उसके बेहद करीब खड़ा है और उसके पीछे ही इस बात का एहसास उसे अंदर तक रोमांच से भर दिया वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसके सामने इस तरह का दृश्य रचा जाएगा वह अपने ही कमरे में अर्धनग्न अवस्था में ब्रा पेंटी पहने हुए जोकि ब्रा अभी भी खुली हुई थी और ऐसे हालात में एक जवान लड़का ठीक उसके पीछे खड़ा होगा जहां से वह उसके अर्द्ध नग्न बदन को अपनी प्यासी आंखों से देखकर अपनी आंखों को सेंक रहा होगा.. इस बारे में सोचकर वह काफी उत्तेजना का अनुभव कर रही थी वहां की कुछ सोच पाती इससे पहले ही उसे महसूस हुआ कि शुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर उसकी खुली हुई ब्रा की पट्टी को पकड़ लिया....

कमरे का दृश्य बेहद मादक और उत्तेजना से भरा हुआ था उम्रदराज सरला अर्धनग्न अवस्था में... अपने कमरे में बिस्तर के करीब खड़ी थी और ठीक उसके पीछे शुभम उत्तेजित अवस्था में खड़ा था... इस समय सरला के बदन पर केवल ब्रा और पेंटी थी और ब्रा की पट्टी शुभम के हाथों में जिसकी वजह से सरला शर्म के मारे अपने बदन को सिकुड़ते जा रही थी लेकिन भला इससे क्या लाभ होने वाला था...

पल-पल सरला की हालत खराब होती जा रही थी वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसकी जिंदगी में उम्र के इस पड़ाव पर ऐसा मोड आएगा कि जब वह अपने बेटे से भी कम उम्र के लड़के के सामने अर्धनग्न अवस्था में खड़ी होगी और उसकी ब्रा की पट्टी उस लड़की के हाथों में होगी और वह भी एकदम बेशर्म की तरह उससे बर्ताव करेगा लेकिन ना जाने क्यों शर्मिंदगी का अहसास होने के बावजूद भी एक अजीब और अद्भुत किस्म की तृप्ति का अहसास सरला को अपनी आगोश मे लेकर पिघलाए जा रहा था... शुभम की हरकत की वजह से सरला एकदम निशब्द हो चुकी थी उसके होठों से एक भी शब्द फूट नहीं रहे थे वह बस शर्म से नजरें नीचे किए शुभम की हरकतों का आनंद ले रही थी क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो वह उसे कब से डांट कर अपने घर से बाहर निकाल दी होती लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं की थी। सरला के दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चल रही थी और सांसो की गति के साथ साथ उसके भारी-भरकम दोनों कबूतर ब्रा की कैद में खुली सांस लेने के लिए पंख फड़फड़ा रहे थे....

जिस तरह से शुभम सरला के बेहद करीब खड़ा था उसके पैंट में बना तंबू महज 5 6 अंगुल की दूरी पर ही था जहां पर वह अपनी कमर को हल्का सा आगे की तरफ बढ़ाकर सरला की मदमस्त तरबूज जैसी गांड का स्पर्श कर सकता था। लेकिन शुभम अपने आप को बहुत ही रोक कर रखा था वरना ऐसे हालात में किसी भी मर्द को अपने ऊपर सब्र कर पाना नामुमकिन सा होता है और सब रहोगी तो कैसे हो बला की खूबसूरत तो नहीं लेकिन फिर भी कामुक बदन वाली मदमस्त खूबसूरत बदन के कटा वाली औरत अगर अर्धनग्न अवस्था में किसी मर्द के आंखों के सामने और उसके बेहद करीब फ्री हो तो उससे भला कैसे संभव होगा वह तो कब से अपनी बाहों में लेकर उसके खूबसूरत बदन की खुशबू को अपने अंदर महसूस करने लगेगा लेकिन शुभम अपने आप पर काबू करके सरला की ब्रा की पट्टी को दोनों हाथों से पकड़कर उसे हल्का सा खींचकर उसके हुक को लगाने की कोशिश कर रहा था।

सरला को अपने आप पर बहुत ही ज्यादा शर्म आ रही थी क्योंकि उसके बेटे से भी कम उम्र का लड़का उसके कमरे में खड़ा था और वह अर्धनग्न अवस्था में ब्रा और पेंटी की आड़ में अपने मदमस्त बदन को छुपाने की भरपूर कोशिश कर रही थी लेकिन उसके बेटे से कम उम्र का वह लड़का ठीक है उसके पीछे खड़े होकर उसकी ही ब्रा की पट्टी को पकड़कर हुक लगाने की कोशिश कर रहा था ।

यह एक संस्कारी औरत के लिए शर्म से डूब जाने वाली बात होती है लेकिन सरला इस समय ना जाने क्यों शर्मिंदा होने के बावजूद भी शुभम की हरकतों का आनंद ले रही थी जबकि वह पूरी तरह से खुली नहीं थी लेकिन फिर भी अंदर ही अंदर उसका मन मचल रहा था और एक तरफ उसे शर्मिंदगी भी महसूस हो रही थी उसके तराजू के दोनों पलड़े अपनी-अपनी जगह पर भारी थे लेकिन अपनी खुशी तन की सुख और वासना के आगे संस्कार का पलड़ा बेहद हल्का होता जा रहा था मर्यादाओं की डोर टूटती जा रही थी उम्र की सीमा मिट्ती जा रही थी... कमरे के अंदर के हालात बदलते जा रहे थे...

शुभम के तन बदन में उत्तेजना किनार इतनी तीव्र गति से हो रही थी कि मानो उसके तन बदन में बवंडर से उठ रहा हो पेंट में लंड अलग से गदर मचाए हुए था। जो कि रणसंग्राम में उतरने के लिए उतारू था। उसका बस चलता तो आप तक ना जाने कबसे पेंट फाड़ कर बाहर आ गया होता क्योंकि उसकी आंखों के सामने ही उसे अपनी मंजिल महसूस हो रही थी उसकी खुशबू महसूस हो रही थी तभी तो शुभम का लंड सरला की बुर के अधीन होकर लार पर लार टपका रहा था जिससे शुभम अंडरवियर गिला होते जा रहा था... हाथों में ब्रा की पट्टी लिए वह हुक लगाने के लिए कशमकश जद्दोजहद में लगा हुआ था शुभम का भी शायद यह पहली बार ही था कि जब हम किसी औरत की ब्रा की पट्टी का हुक लगा रहा हो इसलिए उसे भी इसमें सफलता जल्दी प्राप्त नहीं हो पा रही थी लेकिन वह जानता था कि अगर नहीं हुक लगा पाया तो सरला के सामने उसे शर्मिंदा होना पड़ेगा इसलिए वह एक बार फिर से थोड़ा जोर लगाकर पीछे की तरफ खींच कर हुक से हुक भीड़ा कर बड़ी आसानी से लगा दिया.... शुभम के चेहरे पर विजई मुस्कान खिल उठी क्योंकि उसे सफलता प्राप्त हो चुकी थी... दोपहर के समय में सरला के रूम में और इस हालात में पहुंचकर शुभम को अपनी मंजिल बेहद करीब नजर आने लगी थी सरला को ठीक तरह से देखना चाहता था इसलिए.... वह घूम कर सरला के ठीक सामने जाकर खड़ा हो गया उसे देख कर मुस्कुराने लगा पल भर के लिए सरला अपनी नजर को ऊपर उठाकर शुभम की तरफ देखी और उसे मुस्कुराता हुआ देखकर शर्म से पानी पानी हो गई.. वह एक बार फिर से अपने बदन को सिकुड़ने लगी क्योंकि मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे कोई पति अपनी पत्नी को धीरे-धीरे वस्त्र विहीन करते हुए नग्न अवस्था के करीब ले जा रहा हो और उसे चारों तरफ से घूर घूर कर देख रहा हो।। सरला कि यह सोच उसे शर्मिंदा कर रही थी वह शर्म के मारे अपनी नजरें फिर से नीचे करके अपने आपको शुभम की प्यासी नजरों से बचाने की भरपूर कोशिश करने लगी लेकिन यह कोशिश बिल्कुल नाकाम थी क्योंकि शुभम के सामने इस समय व एकदम खुली किताब की तरह थी जिसके एक एक शब्द को वह अपनी निगाहों से पढ़ रहा था।शायद ही हो स्कूल में स्कूली किताबों को इतना पढ़ा होगा जितना कि वह औरतों की जिंदगी उनके भूगोल के बारे में पढ़ चुका था....

सरला को साफ नजर आ रहा था कि शुभम के पेंट का तंबू एकदम तना हुआ है और उस पर नजर पड़ते हैं सरला की टांगों के बीच का वह गुलाबी छेद फुदकने लगा... मानो कि उसे एहसास हो गया हो की बुर्का गुलाबी छेदा शुभम के मोटे तगड़े लंड से चौड़ा होने वाला है यह एहसास बुर के छेद से मदन रस की बुंद निकालने के लिए काफी था और उसी समय ही उसकी गुलाब की पत्तियों से घिरी हुई बुर के अंदर से मदन रस की दो बूंद चु गई जो की पेंटी को गीला कर गई....

उत्तेजना के मारे शुभम का गला सुखता जा रहा था... वह अच्छी तरह से जानता था कि पेंट में बने तंबू को सरला चोर नजरों से देख रही है लेकिन फिर भी वह अपने पेंट में बने तंबू को छिपाने के लिए जरा भी दरकार नहीं लिया....क्योंकि वह यही चाहता था कि सरला उसके पेंट में बने तंबू को देखकर उसकी मर्दाना ताकत के अधीन हो जाए। और ऐसा हो भी रहा था सरला शुभम के पेंट में बने तंबू को देखते ही उत्तेजित हो गई थी वह कल्पना में शुभम के मोटे तगड़े लंड को पेंट के बाहर निकाल कर हीलाना शुरू कर दी थी... एक तरफ वो शर्म से पानी पानी हो जा रही थी अब दूसरी तरफ शुभम की हरकत की वजह से कामोत्तेजना का अनुभव कर रही थी..... शुभम उसके ठीक आगे खड़े होकर ऊपर से नीचे आंखे भर भर कर उसे देख रहा था। एक पराए मर्द और वह भी उसके लड़के की उम्र का लड़के को इस तरह से अपना नंगा बदन घुर घुर कर देखता हुआ पाकर ऊसे शर्मिंदगी महसूस हो रही थी और वह धीरे से बोली.....

शुभम तुझे मेरे कमरे में नहीं आना चाहिए था... कोई देखेगा तो क्या सोचेगा....(यह बात कह कर सरला जो यकीन दिला दी थी कि शुभम के लिए रास्ता एकदम साफ है क्योंकि वह अंदर से यही चाहती थी कि सब कुछ अच्छे से हो जाए और किसी को पता भी ना चले शुभम सरला की यह बात को पकड़ते हुए बोला..)

चाची इस कड़ी धूप में सब लोग अपने घर में एसी और कूलर की ठंडी हवा का मजा ले रहे हैं और यहां आते हुए मुझे किसी ने नहीं देखा है....

लेकिन फिर भी....( इतना कहकर सरला खामोश हो गई और शुभम अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

कुछ भी हो चाची मैंने आज तक तुम्हारी जैसी उम्र की औरत को इतनी खूबसूरत कभी नहीं देखा...(सरला को ऊपर से नीचे की तरफ देखते हुए) इस उम्र में भी कसा हुआ बदन कहीं भी अधिक चर्बी तक नहीं है....(सरला के गोल गोल चक्कर काटते हुए)सच कहूं तो चाची एकदम कयामत लगती हो हुस्न की मलिका खूबसूरती की मिसाल.....

यह क्या कह रहा है शुभम थोड़ा सा तो लाज कर मैं तेरी मां की उम्र की हुं...( सरला फिर से शर्म से दबे हुए स्वर में बोली.)

मैं अच्छी तरह से जानता हूं चाची की आप मेरी मां की उम्र की है लेकिन तुम्हारी खूबसूरती और बदन की बनावट कसा हुआ बदन देखकर नहीं लगता कि आप मेरी मां की उम्र की है....(शुभम अपनी बातों के जाल में सरला को फंसाते हुए बोला सरला शुभम की चुभती हुई निगाहों की वजह से शर्म से गड़ी जा रही थी। लेकिन फिर भी शुभम की यह बातें उसे बहुत अच्छी लग रही थी.... सरला निशब्द होकर शुभम की बातें सुन रही थी और सरला के चेहरे के बदलते हुए भाव को देखकर शुभम अच्छी तरह से समझ रहा था कि सरला के मन में क्या चल रहा है इसी बीच ऊसे युक्ति सूझी.. )
 
अपनी इस युक्ति को आजमाने के लिए भी शुभम का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि अब वह वह हरकत करने जा रहा था शायद सरला को भी इसका अंदाजा नहीं था.... सरला तो कशमकश मैं पड़ी हुई थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है क्या नहीं करना है वह केवल मूर्ति बनी वहां खड़ी थी और ऐसी वैसी मूर्ति नहीं काम देवी की मूर्ति जिसके अंग अंग से मदन रस टपक रहा था जिसका हर एक अंग तराशा हुआ था गुलाबी होंठ गुलाब की पंखुड़ियों की तरह एकदम ताजा लग रहे थे नैन नश्क अद्भुत बनावट की कारीगरी थी छाती की शोभा बढ़ा रहे दशहरी आम पपाया के साइज के थे जिसे देखते ही शुभम के उम्र के लड़के ऊसे पकड़कर झुलने की इच्छा रखते थे... मोटी मोटी चिकनी जांगे मानो केले के मोटे तने की तरह मांसल और चमक रही थी... और नितंबों का घेराव किसी गांव के बीच के तालाब की तरह पूरे अंग की शोभा बढ़ा रही थी.... और सबसे बेहतरीन कारीगरी का नमूना तो सरला की दोनों टांगों के बीच के उस रेशमी बालों के झुरमुट में छुपी हुई उसकी रसीली बुर थी मानव हरे हरे जंगल के बीच कोई नहर गुजर रही हो... कुल मिलाकर इस समय वह काम की देवी लग रही थी। जिसको देखकर ही शुभम के तन बदन में काम भावना प्रकट हो रही थी। सरला की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह उसी स्थिति में खड़ी थी...लेकिन बार-बार उसकी नजर शुभम के पेंट में बने तंबू की तरफ चली जा रही थी और उस तंबू को देख कर उसके तन बदन में भी हलचल मच रही थी।

मत मस्त जवानी से भरी हुई सरला

सरला के बड़े बड़े दूध को देखकर शुभम के सूखे गले में नमी पैदा होने लगी उसके मुंह में पानी आ रहा था और उसे छूने के लालच में अपने अंदर दबा नहीं पाया और इसीलिए अपनी युक्ति को आजमाने के लिए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर थोड़ा सा दबी हुई ब्रा के कप को ऊपर से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ खींच कर सही करने लगा.... और सरला शुभम की उंगलियों का स्पर्श अपनी मदमस्त चुचियों पर महसूस करते ही एकदम से सिहर उठी और ना चाहते हुए भी उसके मुख से हल्की सी सिसकारी की आवाज निकल गई.... शुभम अपनी इस हरकत की वजह से पूरी तरह से गर्मा गया था हल्की सी चूची का नरम स्पर्श पाकर उसके तन बदन में आग लग गई थी...

चाची यह ब्रा का कब ठीक से पहना हुआ नहीं है मेरा मतलब है कि इसमें तुम्हारे दूध समा नहीं पा रहे हैं....(दूध शब्द का प्रयोग करके शुभम सीधे-सीधे अपनी बातों का काम बाण सरला के ऊपर दाग दिया था... और सरला भी शुभम के इस काम बाण का प्रहार अपने ऊपर से नहीं पाई और वक्त चारों खाने चित हो गई उसे उम्मीद नहीं थी कि शुभम इतने खुले शब्दों में उसके अंग के बारे में कह देगा दूध शब्द सुनते ही उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी चेहरे पर शर्म की लाली मचाने लगे मानो सरला शर्मिंदगी से पानी पानी हुए जा रही है उसके चेहरे के बदलते भाव उसकी कहानी कह रहे थे.. फिर भी वह कुछ भी कहने के काबिल नहीं दिखाई दे रही थी वह केवल शुभम की हरकत और उसकी बातों को सुन रही थी जवाब देने में हुआ एकदम असमर्थ नजर आ रही थी....सरला के द्वारा इतनी अश्लील शब्द सुनने के बावजूद भी किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया ना होते देखकर शुभम की हिम्मत बढ़ने लगी और वह एक कदम आगे बढ़कर सरला के बेहद करीब खड़ा हो गया और अपने दोनों हाथ सल्ला के पीछे की तरफ ले जाकर ब्रा के हुक को खोलते हुए बोला. ।).

सरला के बड़े-बड़े दशहरी आम

चाची यह ब्रा एकदम नई टाइप की है इसलिए शायद आपको पहनने में तकलीफ हो रही है लाईए मैं इसे ठीक से पहना देता हूं....(सरला कुछ बोल पाते इससे पहले ही सलाह का जवाब सुने बिना ही वह ब्रा के हुक को खोल दिया था जिससे एक बार फिर से सलाह के दोनों कबूतर को अपनी आगोश में लिए हुए उसकी ब्रा एक बार फिर ढीली हो गई...लेकिन इस दौरान शुभम सरला के इतने करीब आ गया था की सरला के नथुनो से निकल रही गर्म हवा शुभम अपने चेहरे पर एकदम साफ महसूस कर रहा था जिसके बदौलत वह इतना ज्यादा चुदवासा हो गया था कि उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। कई औरतों की संगत में आकर शुभम बेहद चालाक हो गया था इसलिए मैं एक बार फिर से सरला के अंग पर से ब्रा को अलग कर दिया जिसकी वजह से सरला पुनः कमर के ऊपरी हिस्से से एकदम नग्न हो गई सरला की बड़ी-बड़ी चूचियां एक बार फिर से सीना ताने शुभम को चुनौती देने लगी चूची की गोल-गोल ब्राउन कलर की निप्पल चॉकलेट की तरह शुभम को ललचाने लगी... उसे देख कर शुभम की पेंट में हलचल होने लगी बार-बार वह एक हाथ से सरला की आंखों के सामने अपने तने हुए लंड को पेंट में एडजस्ट करने की कोशिश कर रहा था जो कि इसकी हरकत जानबूझकर ही हो रही थी वह सरला को यह अपनी हरकत दिखाना चाहता था और सरला शुभम की यह हरकत को चोर नजरों से देख ले रही थी।

सरला के दोनों दशहरी आम जिसे शुभम अपने हाथ से जोर जोर से दबा रहा था और उसे मुंह में भरकर पीने की इच्छा रखता था

शुभम जानबूझकर सरला की चूचियों को वस्त्र विहीन करके उसकी ब्रा को इधर-उधर करके उसे ठीक करने के बहाने सरला की चुचियों का दीदार कर रहा था ऐसा लग रहा था मानो वह सरला की मदमस्त चूचियों के दर्शन करके एकदम धन्य हो गया हो उसकी गर्म गर्म सांसे सरला के चेहरे पर भी अपनी आभा छोड़ रही थी... जिससे सरला के गोरे गाल सुर्ख लाल होते जा रहे थे.... शुभम के जी में आ रहा था कि वह सरला के दोनों चूचियों को अपने हाथ में भरकर उसे बारी-बारी से मुंह में लेकर किसी कोल्डड्रिंक की तरह पी जाए.... जिसमें सेहत से भरपूर सारे तत्व मौजूद थे और एक मर्द को उसके मर्दाना ताकत में बढ़ोतरी करने के सारे गुण थे जो कि इस समय देखकर ही शुभम की मर्दाना ताकत में इजाफा हो रहा था वह निरंतर अपने अंदर काम शक्ति महसूस कर रहा था....

अब ठीक हो गया है चाची .... लाओ में ईसे अपने हाथों से आप को पहना देता हूं ... (और इतना कहने के साथ ही शुभम इतना ज्यादा बेशर्म हो गया कि सरला को इसकी उम्मीद ही नहीं थी वह अपने हाथ से सरला की एक चूची को पकड़कर ब्रा के कप में भर दिया और यही हरकत वह दूसरी चूची के साथ भी किया......

सससहहहहहहह ..... सुभम यह तू क्या कर रहा है....(शुभम की हरकत की वजह से सरला एकदम मस्त होते हुए गरम सिसकारी के साथ बोली...) तू चला जा मैं अपने हाथ से पहन लूंगी और इतना कहने के साथ एक बार फिर से वहां शुभम को कमरे से बाहर चले जाने के लिए बोल रही थी और लगभग शुभम के हाथों से अपनी ब्रा लेने की कोशिश कर ही रही थी कि शुभम फिर से उसकी ब्रा पर अपना कब्जा जमाते हुए बोला....)

मैं हूं ना चाची और मेरे होते हुए आपको यह सब के लिए तकलीफ उठाने की जरूरत नहीं है मैं जानता हूं कि यह नए जमाने की नई तकनीक से बनी हुई ब्रा है इसे अच्छी तरह से पहनना चाहिए वरना तकलीफ दे देती है...(इतना कहने के साथ ही शुभम एक बार फिर से सरला के दिलो-दिमाग से खेलने लगा उसके हाथों में एक बार फिर से उसकी ब्रा आ गई थी जिसे वह एक बार फिर सेउसी तरह से सरला की बड़ी-बड़ी चुचियों को बारी-बारी से पकड़कर ब्रा के कप में डालने लगा जो की उसकी संपूर्ण चूचियों को अपने आगोश में ले सकने में असमर्थ थी...शुभम जिस तरह से सरला की चूची को अपनी हथेली में पकड़ रहा था वह हल्के हल्के उसे दबा भी रहा था जिसका हवा सरला को अच्छी तरह से हो रहा था और शुभम की यह हरकत की वजह से सरला एकदम कामोत्तेजना के सागर में डूबने लगी थी उसकी आंखें बंद होने लगी थी वह निशब्द होकर उसी अवस्था में खड़ी थी... शुभम एक तरह से सरला के अंग के साथ मनमानी कर रहा था उसे ब्रा पहनने के बहाने वह सरला की चुचियों को दबाने का आनंद लूट रहा था लेकिन यह आनंद केवल शुभम को ही प्राप्त नहीं हो रहा था इसमें सरला भी शामिल थी उसकी मर्जी शामिल थी वरना अगर ऐसा ना होता तो उसके लड़के के उम्र का शुभम इतनी ज्यादा छुट नहीं ले सकता था ..लेकिन इसमें उसकी मर्जी थी तभी तो वह निशब्द होकर समझता में खड़ी थी और शुभम की हरकतों का आनंद ले रही थी क्योंकि अंदर ही अंदर वह भी यही चाहती थी कि वह शुभम को इजाजत नहीं देगी लेकिन शुभम अगर आगे बढ़ेगा तो वह उसे रोकेगी नहीं और अभी यही हो भी रहा था ब्रा पहनने के बहाने से वह मनमानी कर रहा था उसके दशहरी आम को अपने दोनों हाथों से दबा दबा कर शुभम चूची मर्दन का आनंद लूट रहा था सरला की भी सिसकारी की आवाज बदलते जा रही थी.... शुभम सरला के दोनों कबूतरों को बारी-बारी से पकड़ कर पिंजरे में डाल दिया और एक बार फिर से वहां सरला के पीछे खड़े होकर सरला की ब्रा के हुक को लगाने लगा लेकिन इस बार वह सरला के बदन से कुछ ज्यादा ही करीब सट गया था लेकिन अभी भी उसके पेंट में बने तंबू और सरला की मदमस्त गांड के घेराव के बीच दो अंगुल की दूरी रह गई थी जिसे शुभम सांस लेने के दरमियान ही पूरी कर सकता था। लेकिन वह चाहता था कि सरला अपनी गांड को खुद ही उसके पेंट में बने तंबू से स्पर्श कराएं। और सरेला को इस बात का आभास हो गया था कि शुभम उसके बदन से बेहद करीब सटा हुआ है क्योंकि उसकी सांसो की गर्माहट उसे अपनी गर्दन पर महसूस हो रही थी और शुभम की गर्म सांसों को महसूस करके सरला का खूबसूरत मादक बदन कसमस आने लगा था और इसी कसमस आहट में सरला के बदन में हल्की सी हलचल हुई और वह अपनी मदमस्त गांडड को अनजाने में ही पीछे की तरफ सरका दी.....

Shubham sarla ko is tarah se god me utha liya

ससससससहहहहहह ..... आहहहहहहहहह.....(अगले ही पल सरला के मुख से ना चाहते हुए भी गर्म सिसकारी फूट पड़ी उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी सरला को यह समझते देर नहीं लगी कि उसके भारी-भरकम गांड से जो कठोर चीज टकराई है वह शुभम का मोटा तगड़ा लंड है और इस बात का आभास और ऐसा सोते ही सरला का पूरा बदन अनजान रोमांच से एकदम से सिहर उठा..... वह झट से अपनी गांड को आगे की तरफ खींच ली लेकिन शुभम अपना काम जादू चला चुका था और सरला शुभम के इस काम बाण से एकदम विवश हो गई थी वह गरम गरम सांसे लेते हुए अपनी उत्तेजना को शांत करने की कोशिश कर रही थी लेकिन जिसमें वह संपूर्ण रूप से नाकामयाब होती जा रही थी... मोटे तगड़े लंड की चुभन अपनी मदमस्त गांड पर करके वह एकदम से मस्त हो चुकी थी उसे पल भर में इस बात का आभास हो गया कि जब शुभम का लंड पेट में होने के बावजूद भी उसका स्पर्श इतना जबरदस्त है तब जब वह अपना पूरा का पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में उतारेगा तब उसे कितना मजा आएगा... शुभम जानबूझकर में ब्रा के हुक को ठीक से लगा नहीं रहा था क्योंकि वह जानता था अगर ब्रा का हुक ठीक से लग जाएगा तब यह पल उसकी पकड़ से दूर हो जाएगा और वह इस पल को अपनी पकड़ से दूर जाने नहीं देना चाहता था इस पल को वह पूरी तरह से जी लेना चाहता था और शायद यही कशमकश सरला के दिलो-दिमाग पर भी छाया हुआ था क्योंकि शुभम की मर्दाना ताकत को अपने नितंबों पर महसूस कर चुकी सरला एक बार फिर से शुभम के मर्दाना अंग को अपनी मदमस्त गांड पर स्पर्श कराना चाहती थी... जबकि वह पहले ही इस बात का निश्चय कर चुकी थी कि आगे से वह कुछ भी ऐसा काम नहीं करेगी जिससे शुभम को उसकी तरफ से खुली छूट मिल जाए लेकिन जिस तरह का स्पर्श जिस तरह की गर्माहट उसने अपने नितंबों पर महसूस की थी और उस गर्माहट का असर उसे उसकी झनझनाहट का असर उसे अपनी बुर तक महसूस हुआ था एक बार फिर से वह उसी स्पर्श को महसूस करना चाहती थी.... इसलिए एक बार फिर से अंजाना बनाने का नाटक करते हैं फिर से अपनी भारी-भरकम मदमस्त गांड को पीछे की तरफ हल्का सा ले आई और शुभम तो इसी ताक में ही था व नीचे की तरफ ब्रा का हुक लगाते हुए देख रहा था और उसकी आंखों के सामने ही सरला अनजान बनने का नाटक करते हुए एक बार फिर से अपनी मदमस्त गांड पर शुभम के मोटे तगड़े लंड की चुभन को महसूस कर गई। इस बार मोटे तगड़े लंड का स्पर्श उसे पूरी तरह से उत्तेजित कर गया और उसकी बुर से मदन रस की बुंद टपकने लगी..

इस उत्तेजक स्पर्श से वह पूरी तरह से कम उत्तेजित हो गई और शुभम की भी यही हालत थी पहली बार वह अपने पेंट में बने तंबू पर सरला की मदमस्त बड़ी-बड़ी गांड का स्पर्श महसूस कर रहा था। वह पूरी तरह से मदहोश होने लगा था उसके बदन में कपकपी सी उठ रही थी और वह चाहकर भी ब्रा का हुक बंद करने में असफल होता जा रहा था क्योंकि इतनी मादक स्पर्श से उसकी ऊंगलियां कांप रही थी.... शुभम की सांसे गहरी हो चली थी और उसकी गहरी सांसो की गर्मी सरला को उसके गर्दन पर उसमें प्रदान कर रही थी जिससे उसका पूरा बदन जल रहा था कामाग्नि में तप रहा था इस उम्र में भी उत्तेजना की कोई सीमा नहीं होती इस बात को पूरी तरह से सरला के बदन की हलचल साबित कर रही थी.... टांगों के बीच की कचोरी में से लगातार चटनी नुमा मदन रस गिर रहा था .. और अगर किसी को मौका मिल जाए तो वह सरला की फूली हुई कचोरी जैसी बुर में से गिर रहे मदन रस की एक भी बूंद को जाया ना होने दें उसे वह जीभ से चाट कर अपने आप को तृप्त कर ले लेकिन यह मौका दूसरों को तो नहीं लेकिन शुभम को जरूर प्राप्त होने वाला था...

सरला की सोच बदलते जा रही थी... पूरे कमरे का वातावरण जिस तरह से कामोत्तेजना के असर में रंगने लगा था... उसे देखते हुए किसी भी वक्त दोनों के बीच शारीरिक संपर्क स्थापित होने की उम्मीद नजर आने लगी थी शुभम के हाथ अभी भी कांप रहे थे जोकि इसमें सरला का ही हाथ था क्योंकि एक से एक खूबसूरत औरतों को भोग चुका शुभम सरला की इस हरकत की वजह से पूरी तरह से कामोत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच गया था...सरला जिस तरह से जानबूझकर अपनी मदमस्त गोल-गोल गांड को पीछे की तरफ करके उसके लंड का स्पर्श कर रही थी... उसे देखकर शुभम का धैर्य खोने लगा था लेकिन अभी भी वह अपने आप को संभाले हुए था....
 
शुभम ब्रा की पट्टी पकड़े एक बार फिर से उसके हुक लगाने की तैयारी कर रहा था और दूसरी तरफ सरला गर्माहट भरे मर्दाना अंग का स्पर्श पाकर पूरी तरह से गर्मा गई थी और एक बार फिर से उसके मन में उस मर्दाना अंग के स्पर्श के लिए लालच उभरने लगी थी और इस बार फिर से वह अपनी वही हरकत दोहराते हुए अपनी गोल-गोल गांड को हल्के से पीछे की तरफ ले गई... और इस बार शुभम से रहा नहीं गया जैसे ही शुभम के पेंट में बना तंबू किसी भाले की नोक की तरह सरला की मदमस्त गांड पर स्पर्श हुआ शुभम का सब्र का बांध एकदम से टूट गया और वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपने दोनों हथेलियों को सरला के दोनों कबूतर पर रखकर अपनी कमर को आगे की तरफ सरका दिया.... शुभम का जबरदस्त तना हुआ मोटा तगड़ा लंड तंबू की शक्ल में इस बार सरला की पेंटी के बीचो-बीच गांड की दरार में घुस गया .. शुभम की तरफ से इस तरह की हरकत होगी सरला को इसका बिल्कुल भी ख्याल नहीं था और अनजाने में इस तरह से हुए शुभम की तरफ से इस प्रतिक्रिया की वजह से वह एकदम से सिहर उठी क्योंकि पेंट में होने के बावजूद भी शुभम के लंड में कुछ ज्यादा ही ताकत थी... जिसकी वजह से शुभम के पेंट में बना हुआ तंबू सरला की पेंटिंग सहित गांड की दरार में घुसने लगा था.... और इतने से सरला की गरम सिसकारी फूट पड़ी....

ससससससहहहहहह ...... आहहहहहहह.... शुभम यह क्या कर रहा है छोड़ मुझे.....(इतना कहने के बावजूद भी जिस तरह से शुभम ने अपनी हरकत दिखाया था सलाह पूरी तरह से मस्त हो गई थी एक तो पीछे उसके पेंट में बना था वह उसकी मदमस्त गांड से खिलवाड़ कर रहा था और उसके दोनों हाथ उसके दोनों कबूतरों से खेलें रहे थे जिसकी वजह से सरला एकदम मस्त होने लगी थी लेकिन फिर भी ऊपरी मन से शुभम की इस हरकत का विरोध करते हुए उसे दूर हटने के लिए कह रही थी।) छोड़ मुझे हरामी ऐसा कोई करता है क्या मैं तेरी मां की उम्र की हूं....

मैं जानता हूं चाचा लेकिन क्या करूं तुम्हारी हरकत की वजह से मैं एकदम गरम हो गया हूं....(शुभम लगातार अपनी मर्दाना ताकत की रगड़ से उसकी गोल-गोल गांड पर कहर ढा रहा था और अपने दोनों हाथों की कलाबाजी दिखाते हुए उसके दशहरी आम को जोर जोर से दबा रहा था जो कि अभी भी बुरा की कैद में थे लेकिन फिर भी सरला शुभम की इस हरकत की वजह से मस्त हुए जा रही थी...)

शुभम छोड़ मुझे मैंने कौन सी हरकत कर दी कि तु इतना पागल हुए जा रहा है...( सरला लगातार शुभम की पकड़ से आजाद होने की कोशिश करते हुए बोली)

चाची ......यह तुम्हारी मदमस्त...... गांड..... जो तुमने इसे गोल गोल घुमा कर मेरे लंड से सटाई मेरी तो हालत खराब हो गई सच में तुम बहुत खूबसूरत हो चाची.....(शुभम एकदम मादक स्वर में सिसकारी लेते हुए बोला... और अपनी हरकतों को लगातार जारी रखा जिसकी वजह से सरला पर खुमारी छाने लगी थी...)

शुभम तू पागल हो गया है क्या यह कैसी बातें कर रहा है इतनी गंदी बातें क्या तुझे शर्म नहीं आती मेरे सामने इस तरह की गंदी बातें करते हुए....(सरला फिर से ऊपरी मन से अपने आपको शुभम की पकड़ से छुड़ाने की कोशिश करने लगी और उसके द्वारा कही गई अश्लील बातों के लिए उस पर गुस्सा करने लगी जो कि वह भी ऊपरी मन से कह रही थी अंदर ही अंदर शुभम की यह बातें सुनकर उसके बदन में जवानी की चिंगारी फूटने लगी थी।)

कैसी गंदी बातें चाची मुझे तो इसमें किसी भी प्रकार की गंदगी नहीं लग रही है मैं जो कुछ भी कह रहा हूं सच कह रहा हूं...(शुभम इस दौरान सरला के दोनों कबूतरों को अपनी हथेली में लेकर जोर जोर से दबाते हुए अपने होंठों का स्पर्श उसके नाजुक कोमल गर्दन पर कर रहा था जिससे सरला के तन बदन में मदहोशी चाह रही थी क्योंकि सुबह भी बात अच्छी तरह से जानता था कि औरतों को गर्दन पर चुंबन करने से औरतें एक दम मस्त हो जाती है और वही सरला के साथ भी हो रहा था..) मेरे तन बदन में जो काम भावना जागी है यह सिर्फ आपकी बदौलत है....

क्या बकवास कर रहा है सुभम....?

मैं बकवास नहीं कर रहा हूं चाची....(सरला के दोनों दशहरी आम से खेलते हुए...)मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि आप बहुत खूबसूरत हो लेकिन कपड़ों के बिना इतनी ज्यादा खूबसूरत होगी यह मुझे देखने पर ही पता चला....(इतना कहते हुए शुभम अपनी कमर का जोर सरला की मदमस्त गांड पर बढ़ाया तो सरला के मुंह से हल्की सी चीख निकल गई क्योंकि शुभम का मोटा तगड़ा लंड तंबू के साथ पेंट सहित और ज्यादा गांड की गहराई में घुस गया....)

आहहहहहहह..... सुभम....

क्या हुआ चाची....?(शुभम अनजान बनते हुए बोला)

तेरा वो चुभ रहा है.....

यह तो अपनी गांड मेरी तरफ परोसने से पहले सोचना चाहिए था चाची....

(शुभम सब कुछ खुले शब्दों में बोल रहा था वह एकदम बेशर्मी पर उतर आया था क्योंकि उसने सरला की नाल परख लिया था वह समझ गया था कि यह प्यासी औरत है.. इसलिए वह सरना से गंदे शब्दों में बातें कर रहा था जो कि सरला को अच्छा ही लग रहा था गांड परोसने वाली बात पर तो सरला शर्म से पानी पानी हो गई उसका चेहरा सुर्ख लाल हो गया शुभम की बात सुनकर उसके चेहरे की रंगत उड़ने लगी और वह अपनी तरफ से सफाई पेश करते हुए बोली)

यह बकवास है शुभम यह सब अनजाने में हुआ था मैं जानबूझकर तुम से सटी नहीं थी।

मैं इतना पागल नहीं हूं चाची मैं औरतों की नस नस से वाकिफ हूं मैं पहले भी कह चुका हूं और तुम्हें मेरी बात मान लेना चाहिए था वरना तुम्हारी साइज का पता ना होने के बावजूद भी मैंने तुम्हारे लिए जो ब्रा पहनती लाया हूं वह तुम्हारे बदन पर एकदम फिट आ रही है और तुम्हारी रंगत से कितना मैच खा रही है सच कह रहा हूं चाची तुम्हारी उम्र की औरत नंगी होकर इतनी खूबसूरत लगती होगी आज मैं पहली बार अपनी आंखों से देख रहा हूं तभी मुझे विश्वास हो रहा है....

ससससहहहह.... शुभम यह क्या कर रहा है ऐसा मत कर प्लीज....

(सरला के मुख से एकदम गर्म सिसकारी फूट पड़ी थी क्योंकि शुभम अपना एक हाथ उसके मखमली चिकनी पेट पर घुमाने लगा था)

तू कितना बेशर्म है एक औरत को इस हालत में देखकर नजर हटाने की जगह उस पर कपड़े डालने की जगह आंखें भर भर कर देख रहा था।

पागल है वह लोग जो औरत की खूबसूरती को अपनी आंखों से उसके नग्न अवस्था में देखकर नजर फेर लेते हैं सच कहूं तो चाची मेरा इस तरह से तुम्हारे घर में आना सफल हो गया या यूं कह लो कि मेरा जीवन धन्य हो गया तुम्हारे नंगे बदन को देख कर मेरी जो हालत हो रही है वह शायद आप नहीं समझ पा रही हो....(शुभम की हथेलियों का जादू सरला के तन बदन पर छाने लगा था... मदहोश होने लगी थी आगे पीछे दोनों तरफ से वह शुभम की हरकतों का आनंद ले रही थी अपनी गांड में शुभम के मोटे तगड़े लंड को तंबू की शक्ल में महसूस करके इतना तो समझ ही गई थी कि वास्तव में शुभम का मोटा तगड़ा लंड काफी दमदार है।)

मैं सब समझ पा रही हूं शुभम तुम्हारे जैसे लड़के इस उम्र में नादानी कर बैठते हैं मैं तुम्हारी मां की उम्र की हूं और तुम्हारे ऊपर इस समय आकर्षण का जादू सवार हो गया है इस आकर्षण से बाहर आओ तब तुम समझ पाओगे कि मेरी उम्र और तुम्हारी उम्र में कितना फर्क है मुझे छोड़ो और अपने घर चले जाओ....(सरला जानबूझकर इस तरह की बातें कर रही थी क्योंकि वह चित्र से जानती थी कि जिस हालात में शुभम उसे अपनी बांहों में भरा हुआ है लाख समझाने पर भी वह मानने वाला नहीं है और यही तो वह भी चाहती थी लेकिन फिर भी अपनी तरफ से वह पूरी कोशिश कर रही थी कि इसमें उसका जरा भी हामी शुभम को महसूस ना हो लेकिन शुभम इतना पागल नहीं था सरला के बदलते हाव भाव उसके बदलते स्वर से साफ पता चल रहा था की शुभम की हरकतों का वह भी मजा ले रही है...?)

चाची सच कहूं तो आकर्षण ना होता तो औरत और मर्द के बीच किसी भी प्रकार का संबंध नहीं होता इस समय में आपके घर में आपके रूम में नहीं होता यै आकर्षण ही तो है जो एक दूसरे को मिलाती है एक दूसरे से संबंध बनाती है भाईचारा रिश्ते बनाती है अगर आकर्षण ना हो तो सब बेकार है.... और क्या चाहिए उम्र उम्र लगा रखी हो कभी अपने आप को आईने के सामने एकदम नंगी होकर अपने आप को शीशे में देखना मेरा दावा है कि अपने आपको आईने में देखकर आप खुद शर्म से पानी पानी हो जाओगे इस उम्र में भी जिस तरह की खूबसूरती और अपने बदन की कसावट बनाए हुए हो उसे खुद देख कर आप मचल उठोगी....

शुभम तू पागल हो गया है बातें मत बना मुझे छोड़ और मेरे कमरे से बाहर चला जा मैं नहीं चाहती कि तेरे जैसा अच्छा लड़का कोई गलती कर बैठे....

गलती तो मैं चाची उसी दिन कर बैठा था जब आपसे पहली बार मुलाकात हुई थी पहली नजर में ही आप मुझे अच्छी लगने लगी थी...

शुभम पागल हो गया है तू छोड़ मुझे छोड़....( सरला शुभम की कलाई पकड़ कर उसे अपने आप से छुड़ाने की कोशिश कर रही थी लेकिन शुभम हट्टा कट्टा नौजवान लड़का था उसमें सरला से ज्यादा ताकत थी वह अपने आपको उसकी पकड़ से छुड़ा नहीं पाई लेकिन इस हाथापाई में सरला की ब्रा जोकि दोनों चुचियों पर टिकी हुई थी वह नीचे गिर गई और सरला कीमत मस्त चूचियां एकदम नंगी हो गई शुभम मौके की नजाकत को समझते हुए जैसे ही बुरा नीचे गिरी वैसे ही तुरंत फिर से अपने दोनों हथेली को सरला की मदमस्त नंगी चूची पर रख कर उसे दबाने लगा इस बार उसके मुख से सिसकारी की आवाज फूट पड़ी क्योंकि सरला की नंगी चूचियों को दबाने में वह पूरी तरह से मदहोश हो गया.... सरला भी अपनी नंगी चूचियों पर एक नौजवान लड़के की हथेली की मजबूत पकड़ पागल मस्त होने लगी उसकी आंखें भी मदहोशी के आलम में बंद होने लगी.....)

औहहहहहह...सुभम... यह क्या कर रहा है तू मुझे छोड़ दे मुझे जाने दे तू चला जा मेरे कमरे से बाहर चला जा कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा ...(सरला का विरोध कमजोर होता जा रहा था उसके स्वर में नरमी नजर आ रही थी जिससे साफ पता चल रहा था कि वह भले ही शब्दों मैं उसे जाने के लिए कह रही थी लेकिन वह उसे वही रोकना चाहती थी जोकि शुभम अच्छी तरह से समझता था... इसलिए इस बार शुभम सरला के दोनों कंधों को पकड़कर उसे घुमा कर उसे अपनी तरफ कर दिया सरला शुभम की इस हरकत के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी। इसलिए लड़खड़ा गई लेकिन शुभम ने उसे अपनी बाजुओं का सहारा देकर पकड़ लिया... शुभम की इस हरकत पर शर्मा फिर से शर्मा गई अपनी नजरे नीचे झुका ली एक तो उसकी मदमस्त दशहरी आम बिल्कुल नंगे होकर शुभम को जैसे आमंत्रण दे रहे हो और अपनी खुली चुचियों की वजह से सरला और ज्यादा शर्मिंदगी महसूस कर रही थी शुभम भी उसके दोनों दशहरी आम को देखते हुए उसकी दोनों बांहों को अपनी हथेली में थामा हुआ था.... सरला की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी उसका दिल जोरो से धक धक कर रहा था... उत्तेजना और शर्मिंदगी का अहसास लिए उसका पूरा वजूद कसमसा रहा था.... और शुभम अपनी बेशर्मी का एक और उदाहरण पेश करते हुए अपने हाथ से सरला की ठोड़ी पकड़कर उसे हल्के से उठाते हुए मानो जैसे एक दूल्हा अपनी दुल्हन का सुहागरात के दिन चेहरा देख रहा हो शुभम की इस हरकत की वजह से सरला एकदम शर्म से पानी पानी हो गई...क्योंकि शुभम की इस हरकत की वजह से उसे अपनी जवानी के वह दिन याद आ गए जब वह शादी करके पहली बार इस घर में आई थी और उसका पति इसी तरह से सुहागरात की सेज पर अपनी उंगली से ठोड़ी उठाकर उसके चेहरे को देख रहा था। शुभम भी उसी तरह से सरला की खूबसूरत चेहरे को देख रहा था सरला शर्म से अपनी आंखें बंद कर दी थी और शुभम उसका शर्माता हुआ चेहरा देखकर बोला।

चाची सच-सच बताना क्या आपको यह सब अच्छा नहीं लग रहा है?( शुभम बेशर्मी की सारी हद पार करते हुए नई नवेली दुल्हन की तरह उसके खूबसूरत चेहरे को देखते हुए बोला शुभम के इस सवाल का जवाब सरला के पास बिल्कुल भी नहीं था उसके होठों पर उत्तेजना की कपकपी साफ नजर आ रही थी और जवाब दे भी तो कैसे दें.... वह हां कहे या ना कहे यह उसके समझ के परे था.... क्योंकि उसे भी बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी लेकिन अपनी उम्र की मर्यादा को देखकर यह सब उसे अपने बेटे के उम्र के लड़के के साथ करना अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन कर भी क्या सकती थी आनंद की सीमा मर्यादा की सीमा से कहीं ज्यादा होती है अगर किसी भी इंसान को किसी चीज में मजा आने लगता है तो उसमें उम्र की कोई मर्यादा नहीं होती और यही सरला के साथ भी हो रहा था सरला कुछ बोल नहीं पाई उसके पास कोई जवाब नहीं था अपने बेटे की उम्र के लड़के के सामने अपनी मदमस्त दशहरी आम की तरह तनी हुई चूचियां लेकर वह शर्म सार हुए जा रही थी। ... जिंदगी में शादी के बाद पहली बार वह किसी पराए मर्द के सामने अर्धनग्न अवस्था में खड़ी थी अर्धनग्न क्या संपूर्ण नंगी ही थी केवल उसके बदन पर पेंटिं ही थी जो उसकी खूबसूरत खजाने को छिपाए हुए थी। सरला के तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया ना होते देखकर शुभम का हौसला बढ़ने लगा था क्योंकि भले ही होठों से वह कुछ ना कह पा रही हो उसके थिरकते होठ उसके चेहरे के बदलते होगा बदन की भंगिमा सब कुछ बयान कर रही थी और उसके सारे हाव भाव शुभम के पक्ष में थे शुभम की प्यासी नजरें सरला के दशहरी आम पर टीकी हुई थी... जो कि काफी बड़े बड़े थे उनको देखकर ही शुभम के मुंह में पानी आ रहा था ब्रा नीचे गिरी हुई थी शुभम समझ गया था कि अब कमरे में उन दोनों के बीच ब्रा का कोई भी वजूद नहीं था सरला की नंगी छातियां मानो शुभम को आमंत्रित कर रही हो.... सरला शर्म के मारे अपनी आंखों को मुंद चुकी थी और मन की आंखों से अपने अंदर उमड़ते हाव भाव को देखकर प्रसन्न हुए जा रही थी.... कमरे में अब दोनों के बीच एकदम खामोशी छाई हुई थी सरला की आंखें बंद थी लेकिन शुभम अपनी खुली आंखों से सब कुछ देख रहा था उसकी सांसों की गति एकदम गहरी चल रही थी शुभम अच्छी तरह से जानता था कि आप वापस आ गया है जब उसे उसकी मंजिल मिलने वाली है मंजिल के मिलने की खुशी में वह सफल को और ज्यादा रोमांचकारी बनाते हुए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर एक बार फिर से चला कि दोनों चुचियों को दशहरी आम की तरह पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया शुभम की मजबूत हथेलियों को अपनी चूची पर महसूस करके सरला फिर से गनगना गई.... और शुभम एक बार फिर से सरला से बोला...

कहो ना चाची क्या आपको हिसाब अच्छा नहीं लग रहा है अगर आपको अच्छा नहीं लग रहा हो तो मैं यहां से चला जाऊंगा बस एक बार अपने मुंह से कह दो कि आपको यह सब अच्छा नहीं लग रहा है....(इतना कहकर शुभम फिर से सरला की दशहरी आम को दबाते हुए उसके चेहरे के हाव भाव को देख रहा था सरला अभी भी कुछ कह सकने के काबिल बिल्कुल भी नहीं थी वह एकदम निशब्द हो चुकी थी वह जानती थी कि अब कुछ भी कहने सुनने लायक नहीं है वह अपने मन में ठान ली थी कि शुभम को आगे बढ़ने की उसकी तरफ से पूरी आजादी है वह आंखों को बंद किए हुए हैं चेहरे पर शर्मिंदगी का अहसास लिए शुभम की हरकतों का आनंद ले रही थी शुभम भी उसके बदलते हैं भाव को देखकर उसकी चूचियों को मसलते हुए धीरे-धीरे अपने चेहरे को उसके करीब ले जाने लगा और देखते ही देखते शुभम के होठ सरला के दहकते हुए होठ पर भीड़ गए . अपने होठों पर शुभम के होंठ का स्पर्श पाते ही सरला एकदम गरम हो गई वह गरम सिसकारी ले पाती इससे पहले ही शुभम सरला की चूचियों पर से हाथ उठाकर अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होठों को मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया... ।

सरला को शुभम के द्वारा इस हरकत की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी लेकिन धीरे-धीरे उसकी सारी उम्मीदें ना उम्मीद होते जा रही थी शुभम अपनी बेशर्मी की हद पार करते हुए सरला के साथ धीरे-धीरे हरेक वह हरकत कर रहा था जो एक मर्द औरत के साथ करता है शुभम वासना मैं एकदम अंधा हो गया था सरला के गुलाबी होठों को अपने मुंह में भर कर उसे पागलों की तरह चूस रहा था और सरला भी ना चाहते हुए भी शुभम की इस हरकत का पूरा मजा लेने लगी उसे शुभम के द्वारा इस तरह से होठों से जाने पर बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी साथ ही हो जिस तरह से सरला को अपनी बाहों में लेकर उसके बदन से सट गया था उसका मोटा तगड़ा लंड जो कि अभी भी तंबू की शक्ल में था वह अब सही है सरला के पेट के नीचे पैंटी के ऊपर से ही उसकी बुर की मदमस्त दीवारों के ऊपरी सतह पर दस्तक दे रहा था।

सरला के लिए यह सब एकदम आसानी होता जा रहा था एक तो ऊपर से होठो की चुसाई और नीचे से गुलाबी छेद पर जबरदस्त दस्तक सरला के सब्र का बांध तोड़ रहा था शुभम जानबूझकर अपने तंबू को इतनी जोर जोर से टांगों के बीच पैंटी के ऊपर रगड़ रहा था मानो गुलाबी छेद पर अपने हथौड़े से वार कर रहा हूं यह दस्तक इतना जबरदस्त था कि मानो दरवाजा ही तोड़ देगा सरला बदमस्त अंगड़ाई भरने लगी थी देखते ही देखते ना चाहते हुए भी कब उसके दोनों हाथ शुभम की पीठ पर आ गए या सरला को खुद भी पता नहीं चला अपनी पीठ पर सरला के नाजुक हथेलियों का स्पर्श पाते ही शुभम पागलों की तरह सरला के होठों को चूसना शुरू कर दिया क्योंकि यह सरला की तरफ से हरी बत्ती थी जो कि सारे सिग्नल तोड़ चुकी थी शुभम सारी हद पार करते हुए सरला को अपनी बाहों में भर कर अपनी हथेली को उसकी नंगी पीठ पर इधर-उधर फिरा रहा था...उसे समझ में आ गया था कि अब वह कुछ भी सरला के साथ करेगा सरला उसका बिल्कुल भी विरोध नहीं करेगी.... शुभम पागल हुए जा रहा था ... उसकी जवानी उफान मार रही थी... अत्यधिक जोश की वजह से उसका पूरा बदन चरमरा रहा था वह अपनी जवानी का जोश और ताकत का जोर पूरी तरह से सरला पर दिखाते हुए अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर सरला की मटके जैसी गांड को अपनी हथेलियों से कस कर उसे उठा लिया.... देखते-देखते सरला के दोनों पांव हवा में हो गए सरला को तो उम्मीद भी नहीं थी कि सुभम में इतनी ज्यादा ताकत होगी... वह एकदम से घबरा गयी उसे डर था कि कहीं सुभम ऊसे नीचे ना गिरा दे.... इसलिए वह अपनी आंखें खोल कर घबराते हुए बोली....

Sarla ki boor se khelta Shubham

यह क्या कर रहा है सुभम मुझे नीचे उतार में गिर जाऊंगी मुझे नीचे उतार मुझे डर लग रहा है....(लेकिन शुभम पर उसकी बातों का किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ रहा था वह तो अपनी भुजाओं में सरला की बड़ी-बड़ी नितंब का दबाव महसूस करके मस्त हुए जा रहा था ऐसा लग रहा था कि मानव सरला की मदमस्त जवानी का जोश उसके बदन पर पूरी तरह से सवार हो चुका है और उसमें एक अलग से ताकत आ गई हो क्योंकि सरला बेहद भारी भरकम शरीर वाली औरत थी और सरला को उठा पाना सबके बस में बिल्कुल भी नहीं था लेकिन जवानी के जोश में और अपने हट्टी कट्टी शरीर के बदौलत शुभम उसे अपनी भुजाओं के दम पर उठाकर पूरे कमरे में इधर-उधर घूमने लगा था.... सरला लगातार उसे उतारने के लिए गिड़गिड़ा रही थी लेकिन शुभम उसकी एक नहीं सुन रहा था अर्धनग्न अवस्था में शुभम की गोद में सरला बेहद खूबसूरत और मादक लग रही थी लेकिन उसके चेहरे पर कहीं गिर ना जाए इसकी चिंता की लकीर साफ नजर आ रही थी... शुभम उसे उठाएं पूरे कमरे में घूम रहा था जिसकी वजह से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी वह उसे लगातार उतारने के लिए बोल रही थी।...) शुभम उतार दे मुझे लग जाएगी पागल हो गया है तू मेरा वजन ज्यादा है मैं गिर गई तो...

नहीं गिरोगी चाची मुझ पर भरोसा रखो .... आप को संभालने की ताकत मुझ में है.....(शुभम अपनी कलाई का दबाव सरला के नितंबों पर बराबर गड़ाए हुए था बाहर से जितनी कठोर मटके जैसी सरला की गांड नजर आ रही थी इतनी कठोर थी नहीं एकदम रुई की तरह नरम नरम थी जिसकी वजह से शुभम और ज्यादा उत्तेजित हुए जा रहा था... जिस तरह से शुभम उसे उठाकर इधर उधर भाग रहा था उसकी यह ताकत को देखकर सरला एकदम मंत्रमुग्ध हो गई थी उसे इस बात का अंदाजा लग गया था कि वाकई में शुभम में दम है.... यह एहसांस उसे अंदर तक उत्तेजित करे जा रहा था...उसकी बुर काफी मात्रा में मदन रस छोड़ रही थी जिससे उसकी पूरी पेंटी गीली होती नजर आ रही थी और यह शुभम अच्छी तरह से देख रहा था कि उसकी पेंटी खाकर वाला भाग पूरी तरह से गिला हो गया था शुभम को समझते देर नहीं लगी थी कि सरला की बुर पनिया रही है इसका मतलब साफ था कि उसे भी बहुत मजा आ रहा है.....

सरला को भी इस बात का आभास हो रहा था कि उसकी पेंटी पूरी तरह से गीली हो रही थी और उसकी बुर से निकला मदन रस पिघल कर पेंटी के बाहर बहने लगा था... इस बात का आभास होते ही सरला शर्म से पानी पानी होने लगी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि शुभम की नजर उसके गीले पन पर जाए लेकिन भला ऐसा कैसे हो सकता है कि बिल्ली की नजर दूध के कटोरे पर ना जाए शुभम उसे उठाए हुए लगातार उसकी टांगों के बीच कै उस गीलेपन को ही देख रहा था.... और सरला भी यही देख कर शर्मिंदा हुए जा रही थी कि तभी उत्तेजना मैं उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर में से चटनी रृपी रस टपक कर पेंटी से बाहर आई और वह सीधे शुभम के होठों पर जा गिरी यह दृश्य सरला बराबर देख रही थी कि तभी शुभम को भी यह साफ नजर आया था कि सरला की पेंटी में से नमकीन पानी की बूंद उसके होठों पर गिरी है और वह सरला की नजर में नजर मिला कर देखते हुए अपने होंठ पर जीभ फेरने लगा यह देखकर सरला की तो मानो जैसे सांस ही अटक गई हो उसे यकीन नहीं हो रहा है कि जो वह अपनी आंखों से देख रही है वह सच है लेकिन आंखों से देखी चीज को झुठलाई नहीं जा सकती थी...सरला की बहू से निकले पानी को शुभम में अपने होठों से चाट कर उसे अपने अंदर ले लिया था.. । सरला के सब्र का बांध टूटते जा रहा था शुभम भी अपने अंदर काफी उत्तेजना का सैलाब उठता हुआ महसूस कर रहा था। तभी शुभम अपनी कलाइयों का कसाव सरला की मदमस्त गांड पर ढीली कर दिया जिससे सरला भलभला कर नीचे की तरफ आने लगी कि तभी फिर से उसे अपनी कलाइयों को जोर से पकड़ लिया था कि सरला नीचे ना गिर जाए.... और तभी सरला एकाएक शुभम के बराबर में आकर स्थिर हो गई यो एकाएक नीचे आने की वजह से उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी है जिसकी वजह से उसकी दोनों दशहरी आम एक बार फिर से अपना जलवा बिखेरने लगे शुभम काफी उत्तेजित और प्रसन्न नजर आ रहा था उसकी आंखों में खुमारी छा रही थी एक बार फिर से शुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर सरला के दोनों दशहरी आम को अपनी हथेलीयों में थाम लिया और अपने प्यासे होठ को फिर से सरला के गुलाबी होंठ पर रख दिया... स्तन मर्दन और दहकते होठ पर होठ चुम्बन पाते ही सरला के मुख से गर्म सिसकारी फुट पड़ी....

ससससससहहहहहह ..... आहहहहहहहहह .....सुभम.......
 
उसे सुभम ने जिस तरह से नीचे उतार कर उसके होंठों पर होंठ रख कर उसके दोनों दशहरी आम को थाम लिया था इस हरकत की वजह से सरला के मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी थी लेकिन उसकी कर्म सिसकारी शुभम के तन बदन में अत्यधिक कामोत्तेजना का प्रसार कर रही थी... वह पूरी तरह से मदहोश हो गया था वह लगातार सरला के गुलाबी होठों को अपने मुंह में भर कर उसे चूसना शुरू कर दिया था मानव के जैसे उसके होठों पर शहद लगा हो... पहले तो सरला उसे फिर से छुड़ाने की कोशिश कर रही थी लेकिन जिस अंदाज में और शिद्दत से वह सरला के होंठों को चूस रहा था ऐसा लग रहा था मानो वह सरला के: होठों का सारा रस किसी भंवरे की तरह चूस जाएगा.... और सरला भी शुभम के इस चुंबन से पिघलने लगी उसकी जवानी का पारा धीरे-धीरे ऊपर चढ़ने लगा और उसका विरोध कम होने लगा शुभम लगातार सरला के होठों को चुसे जा रहा था और दशहरी आम का रस दबा दबा कर निकाले जा रहा था और नीचे से अपने दमदार तंबू की ठोकर सरला की जालीदार पेंटिं पर लगाए जा रहा था जिससे सरला की गुलाबी बुर की बाहरी दीवारें ढहने लगी थी उनमें से रिसाव होना शुरु हो गया था... सरला की पेंटी इतनी अत्यधिक गीली हो चुकी थी कि शुभम को अपने पेंट पर उसके गीले पन का एहसास साफ हो रहा था।... तभी शुभम को एक अलग सा महसूस हुआ जिससे मेवा सरला के गुलाबी होठों को अपने मुंह में लेकर चूस रहा था तभी उसे ऐसा एहसास हुआ कि सरला ने भी उसके मुंह में जीभ डाल कर कुछ सेकंड के लिए चाटना शुरू की थी एहसास शुभम के तन बदन में आग लगा गया.. वह सरला के होंठों को चूसता हुआ ही सरला के चेहरे की तरफ देखा तो सरला आनंद विभोर होकर अपनी आंखों को मूंद ली थी और शुभम के द्वारा होठ चुसाई का भरपूर आनंद लूट रही थी.... शुभम पागल होने लगा वह लगातार सपना के होंठों को चूसता रहा और अपने दोनों हाथ को दशहरी आम पर से हटाकर सरला के पीछे की तरफ ले गया और उसके भारी-भरकम नितंबों को अपनी हथेली में जितना हो सकता था लेकर उसे दबाना शुरू कर दिया इस तरह से नितंब मर्दन की वजह से सरला के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसके मुख से फिर से सिसकारी की आवाज छूटने लगी और इसी पल का फायदा उठाते हुए शुभम उसे अपनी बाहों में दबोचे हुए ही सरला को लेकर बिस्तर पर गिर गया... सरला बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी और शुभम उसके ऊपर चढ़ा हुआ था जो कि बिस्तर पर गिरने की वजह से सरला नेअपनी दोनों टांगों को हल्का सा खोल दी थी जिससे शुभम का पूरा बदन उसके बीचोंबीच आ गया था और इस पोजीशन में शुभम अभी भी सरला के होंठों को चूस रहा था और सरला की टांगों के बीच शुभम अपनी मर्दाना ताकत को रगड़ कर उसे एहसास दिला रहा था कि आज उसे वह सुख देने वाला है जिसके लिए वह बनी है. सरला भी एकाएक इस पोजीशन में आ जाने की वजह से पूरी तरह से उत्तेजना की सागर में डूबती चली जा रही थी यह वह स्थिति थी जब वाकई में एक औरत पीठ के बल लेटी हुई होती है और मर्द उसके ऊपर चढ़कर उसकी टांगे फैला कर उसकी बुर में अपना मर्दाना अंग डालकर उसकी जी भर कर चुदाई करता है अपने आपको उसी स्थिति में पाकर सरला के तन बदन में आग लगने लगी उसकी भी इच्छा हो रही थी कि अपने हाथों से वह अपनी पेंटी उतार कर शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी गुलाबी छेद में लेकर मस्त हो जाए.....लेकिन वह आगे से ऐसी कोई भी हरकत नहीं करना चाहती थी इसलिए अपने आप को शांत रखी....... लेकिन मदहोश पन सरला को पल-पल अपनी आंखों उसमें लिए जा रहा था उसकी आंखों में नशा छाने लगा था और यह नशा किसी शराब का नहीं था यह नशा शराब से भी कहीं ज्यादा असर करने वाला मादकता का नशा था वासना का नशा था ।जिसके आधी नौकर वह पल पल अपने वजूद को मिटा दी जा रही थी अपने आप को बोलती जा रही थी सही गलत के फैसले को समझ सकने की क्षमता होती जा रही थी तभी तो तपती दोपहरी में सरला अपने ही कमरे में अपने ही बिस्तर पर अपने ऊपर अपने बेटे के उम्र के लड़के को लेकर मस्त हुए जा रही थी।

शुभम के प्रगाढ़ चुंबन की वजह से सरला की सांस फूलने लगी थी वह उसे हटाने की कोशिश कर रही थी लेकिन शुभम पर भी मदहोशी का आलम छा चुका था वह पूरी तरह से सरला की मदहोश जवानी की गिरफ्त में आ चुका था .... बार-बार सरला उसे हटाने की कोशिश करती लेकिन शुभम और अत्याधिक कामोत्तेजीत होकर उसके होठों को चूसने लगता.... लेकिन उसे इस बात का आभास हो गया कि चलना की सांस फूल रही थी इसलिए वह अपने होठों की चुंगल से सरला के गुलाबी होठों को आजाद कर दिया लेकिन वह खुद भी बहुत जोर से हो रहा था और जिस तरह से उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी कमर के नीचे वाला भाग अपने आप ऊपर नीचे हो रहा था और वह भी एकदम होले होले मानो ऐसा लग रहा था कि जैसे वह सरला की चुदाई कर रहा और सरला को भी इसका एहसास अच्छी तरह से हो रहा था क्योंकि उसका तंबू उसकी पैंटी के ऊपर लगातार घषृण कर रहा था। सरला भी इस घर्षण का भरपूर आनंद उठा रही थी.... वह हांफते हुए अपनी सांसो को दुरुस्त करते हुए बोली....

औहहह... शुभम तू चला जा यहां से .....यह अच्छी बात नहीं है .....जो तू मेरे साथ ऐसा कर रहा है यह तुझे नहीं करना चाहिए ..... तू मेरे बेटे की उम्र का है और मैं तेरी मां की उम्र की हु....(सरला शर्म के मारे दूसरी तरफ नजर फेरते हुए बोली)

मैं सब कुछ अच्छी तरह से जानता हूं चाची...( शुभम भी अपनी उखड़ती हुई सांसो को दुरुस्त करते हुए बोला।) मैं यह भी जानता हूं कि आप मेरी मम्मी के उम्र की है और मैं आपके बेटे की उम्र का हो लेकिन हम दोनों के बीच जो कुछ भी हो रहा है उसमें आकर्षण और जरूरत भी शामिल है.... एक मर्द का मन एक औरत पर तभी लुभाता है जब उसकी खूबसूरती उसकी आकर्षण बन जाती है और मैं तो पहले भी कह चुका हूं कि इस उमर में तुम्हारे जैसी खूबसूरत औरत मैंने आज तक नहीं देखा तो हम दोनों के बीच उम्र कोई मायने नहीं रखती....

तू समझने की कोशिश नहीं कर रहा है शुभम यह सब गलत है....

अगर चाची सब गलत होता तो मेरी हरकतों की वजह से तुम्हें मजा नहीं आता और अब यह मत कहना कि मुझे मजा नहीं आ रहा था.....

(शुभम की बातें सुनकर सरला उसे सवालिया नजरों से देखने लगी और बोली...)

तुझे किसने कह दिया कि मुझे मजा आ रहा है...?

चाची यह बात आप अपने मुंह से भले ना कहो लेकिन तुम्हारी गीली पैंटी (थोड़ा सा उठकर सरला की पेंटी की तरफ उंगली दिखाते हुए) सब कुछ बयां कर रही है....

(अपनी गीली पैंटी पर नजर जाते ही सरला भी शर्मिंदा हो गई....)

देख सुभम यह सब तो कुदरती है जब औरत को कुछ कुछ होता है तो यह सब बदलाव आते ही हैं....

अब जाकर पकड़ी है चाची... मैं भी तो कब से यही समझा रहा हूं यह सब कुदरती है।.... आपके प्रति मेरा आकर्षण कुदरती है मेरी हरकतों की वजह से तुम्हारे तन बदन में उत्तेजना का उठना अंग अंग में बदलाव आना यह सभी कुदरती है तो क्यों ना हम दोनों कुदरत के आधीन होकर वह सब कर ले जो एक औरत और मर्द करते हैं.....

(शुभम अपनी बातों के जादू में सरला को पूरी तरह से उलझाने की कोशिश कर रहा था और सरला भी शुभम की बयानबाजी से अंदर ही अंदर संतुष्ट नजर आ रही थी लेकिन अब कैसे कह दे कि जो कुछ भी तो कह रहा है सच है वह बार-बार उसे समझाने की कोशिश करते हुए बोली...)

शुभम तो पागल हो गया है तो अगर किसी लड़की को यह कहता तो शायद यह सब सही होता लेकिन तुम मुझे कह रहा है मेरी उम्र देख और तेरी उम्र देख... जमीन आसमान का फर्क है....

लेकिन चाची उम्र में भले ही जमीन आसमान का फर्क है लेकिन हम दोनों के अंगों में किसी भी प्रकार का फर्क नहीं है कुदरत ने जो एक औरत को देना चाहिए था वही आपको भी दिया है और जो मर्द को देना चाहिए था वही अंग मुझे भी दिया है। आपके पास बुर है...(प्यासी नजरों से सरला की पेंटी की तरफ देखते हुए..) और मेरे पास एक दमदार लंड है (अपने मोटे तगड़े लंड को तंबू की शक्ल में उंगली से सरला को दिखाते हुए....सरला तो शुभम के मुंह से इस तरह के खुले शब्द सुनकर एकदम से उत्तेजना के मारे गनगना गई.....शुभम के मुंह से लंड बुर खुले शब्दों में सुनकर उसकी बुर कचोरी की तरह फुल गई.... और उसकी निगाह शुभम के तंबू पर कुछ सेकंड के लिए जम गई तने हुए तंबू को देखकर सरला के तन बदन में हलचल पैदा होने लगी ... सरला की दोनों दशहरी आम हिलोरे मारने लगे....

यह कैसी बातें कर रहा है तो तुझे शर्म नहीं आ रही है इस तरह से खुले शब्दों में मेरे सामने बोल रहा है (सरला शर्मा के मारे फिर से दूसरी तरफ नजर खेलते हुए बोली )

शर्म कैसी चाची... अभी अभी आप ही तो कह रही थी यह सब कुदरती है कुदरत का ही दिया हुआ है तो कुदरती रूप से जो इसमें बदलाव आ रहे हैं उसे हम रोक तो नहीं सकते...(. पेंट के ऊपर से जानबूझकर अपने लंड को मसलते हुए) यह आपकी अच्छी तरह से जानती है कि कुदरती रूप से ही आपकी खूबसूरत जवानी मदमस्त बदन देखकर ही मेरा लंड खड़ा हुआ है ....(शुभम की यह बात सुनकर सरला ना चाहते हुए भी एक बार फिर से नजर घुमाकर शुभम के तंबू को देखने लगी जो कि शुभम इस तरह उसके सामने बेशर्म की तरह मसल रहा था...यह देखकर उत्तेजना के मारे सरला का गला सूखने लगा और वह फिर से अपनी नजर फेर ली उसे शर्मिंदगी का अहसास हो रहा था लेकिन अंदर ही अंदर जी भर कर शुभम के पेंट में तना हुआ उसका मुसल देखने की इच्छा हो रही थी....)

शुभम यह सब कहना ठीक नहीं है तू एक अच्छा लड़का है पढ़ा लिखा है तेरा भविष्य अच्छा है अभी से यह सब के चक्कर में पड़कर अपना वापस खराब कर लेगा....

चाची में एक बात कहूं मुझे भविष्य की बिल्कुल भी फिकर नहीं है मैं तो वर्तमान में मानता हूं और इस समय मेरी आंखों के सामने आप जैसी खूबसूरत औरत बिस्तर पर अधनंगी लेटी हुई है... अगर मैं अपने संस्कार की वजह से अपनी मर्यादा को देखते हुए नजर फेर कर इस कमरे से चला जाता हूं तो आपके द्वारा मिलने वाला अद्भुत सुख खो देता हूं और आपको इस तरह से प्यासा छोड़ कर जाने से भी मुझे पाप लगेगा.....

तुझे यह किसने कहा कि मैं प्यासी हूं....( शुभम की बात सुनकर चाटते हुए सरला बोली)

चाची शब्द झूठे हो सकते हैं लेकिन जो इस समय मेरी आंखें देख रही है वह झूठी नहीं हो सकती....(शुभम उसी तरह से अपने लंड को पेंट के ऊपर से मसलते हुए सरला की टांगों के बीच की गीली पैंटी को देखते हुए बोला..(

क्या क्या.... क्या क.....देख रहे तेरी आंखें....?

मेरी आंखें साफ देख रही है कि तुम्हारी बुर पानी छोड़ रही है ....(शुभम एकदम खुले शब्दों में एकदम बेशर्म बनता हुआ बोला)

हे भगवान कितना हरामी लड़का है रे तू मैं तुझे कितना अच्छा समझती थी लेकिन तु बहुत ही ज्यादा हरामी है कोई इस तरह से मेरी उम्र की औरत को बोलता है और चल गईली है तो क्या हुआ इससे क्या मैं प्यासी हो गई...(सरला को भी अब इस तरह की अश्लील बातें करने में मजा आ रही थी वह जानबूझकर गुस्से का नाटक करते हुए शुभम से बोल रही थी...)

चाची सही बताऊ तो मे हरामी नहीं हूं ना तो मैं हारामी टाइप का लड़का हूं मैं बस खूबसूरती का दीवाना और इस समय मैं आपकी खूबसूरती का दीवाना हो गया हूं और रही बात प्यास की तो मैं सही कह रहा हूं कि आप इस समय प्यासी है।मैं आपसे पहले भी कह चुका हूं कि औरतों के बारे में मुझे बहुत ज्यादा ज्ञान है और मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि इस तरह से आपकी बुर् का पानी छोड़ना सामान्य नहीं है यह कुदरती है और आप अच्छी तरह से जानती है कि बुर पानी कब छोड़ती है...?

कब छोड़ती है....?(सरला भी शुभम के रंग में रंगने लगी थी इसलिए उसकी आंखों में आंखें डाल कर थोड़ा सा शर्मिंदगी का अहसास लिए बोली)

औरतों की बुर पानी तब छोड़ती है जब वह एकदम चुदवासी हो जाती है जब उन्हें अपनी बुर के अंदर मोटे तगड़े लंड की चाहत होने लगती है....

छी.... छी.... कितनी गंदी बातें करता है तू.... अब मैं तेरी एक नहीं सुनने वाली तू चला जा यहां से.... (इतना कहते हुए वह बिस्तर से खड़ी होने लगी) अगर किसी को इस बात की भनक भी लग गई कि इतनी दोपहर में तू मेरे साथ और वह भी इस अवस्था में है तो गजब हो जाएगा मैं तो बदनाम हो जाऊंगी तू चला जा यहां से.. (इतना कहने के साथ ही वह फिर से खड़ी हो गई.... लेकिन उसके ठीक है आगे शुभम खड़ा था और उसके खड़े होने के साथ ही शुभम एक कदम आगे बढ़कर उसे अपनी बाहों में कस लिया और उसकी आंखों में आंखें डाल कर देखते हुए बोला...)

चाची किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा मैं आपके कमरे में हूं इसकी भनक किसी को कानों कान तक नहीं होगी हां लेकिन अगर आपको मजा नहीं आ रहा है अच्छा नहीं लग रहा है तो मैं अभी इसी वक्त चला जाऊंगा....(इतना कहने के साथ ही शुभम अपने दोनों हाथ को एक बार फिर से नीचे की तरफ ले जाकर सरला के बड़े-बड़े नेताओं को अपने दोनों हथेलियों में दबाकर अपनी तरफ खींचा जिससे उसके पेंट में बना तंबू सीधे उसकी पेंटी से टकराने लगा और उसके बुर के ऊपरी सतह पर घर्षण करने लगा ....वह कुछ देर तक ऐसे ही अपने लंड की रगड़ उसकी बुर को देता रहा जिससे उसकी बुर पुरी तरह से गर्मा गई.... एक बार फिर से उसके चेहरे के हाव-भाव बदलने लगा उसकी सांसे भारी होने लगी और शुभम को इसी पल का इंतजार था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि लोहा गरम होने पर ही हथोड़ा मारना उचित होता है और तब भी वह बोला.....)

Sarla or Shubham

क्या कहती हो चाची कहो तो मैं चला जाऊं...(सरला की बड़ी बड़ी गांड को अपनी हथेली में भर कर मसलते हुए) और कहो तो मे रुक जाऊ आप की प्यास बुझाने के लिए.....मेरा लंड पूरी तरह से तैयार है आपके बुर में घुसने के लिए और सच कहूं तो चाची तुम्हारी बुर भी मचल रही है मेरे लंड को अपने अंदर लेने के लिए (शुभम जानबूझकर इस तरह की भाषा का प्रयोग करके उसे मादकता की गर्मी प्रदान कर रहा था और इसका असर उसके दिलो-दिमाग पर बुरी तरह हो रहा था वह भी अब जल्द से जल्द शुभम के लंड को अपनी बुर के अंदर ले लेना चाहती थी लेकिन कुछ बोल नहीं पा रही थी एक बार फिर से पूछे जाने पर सरला को कोई जवाब नहीं सूझा तो वह बोली...)

मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है शुभम....( उत्तेजना के मारे थुक को अपने गले में निगलते हुए बोली।)

तो चाची ऐसा करिए कि आप कुछ मत कहिए जो होता है हो जाने दो मुझे अपने अंदर समा जाने दो मैं भी देखना चाहता हूं कि आपके उम्र की औरत के बदन की गर्मी मेरे जैसे जवान लड़के को कितनी देर में पिघला देती है...

(शुभम की यह बात सुनकर सरला अंदर ही अंदर प्रसन्न होने लगी क्योंकि उसकी यह बात से पता चल रहा था कि शुभम इस उम्र में भी उसका पूरी तरह से दीवाना हो चुका था और वह भी मचल रही थी शुभम की मर्दाना ताकत को महसूस करने के लिए और वह भी बरसों के बाद इसलिए उसकी चाहत को ज्यादा ही बढ़ती जा रही थी वह कुछ बोल नहीं पाई बस मूर्ति की तरह खड़ी रही अब सारा काम शुभम को यह करना था उसे खुद अपनी मंजिल पर पहुंचना था इसलिए वह मौके की नजाकत को समझते हुए और ज्यादा वक्त ना गंवाते हुए इस बार अपने होंठ को सरला के गुलाबी होठ पर ले जाने के बजाय सरला की मदमस्त दशहरी आम की चॉकलेटी निप्पल पर लेकर आओ और उसे मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया... सरला के लिए कोई विकल्प नहीं बचा था क्योंकि उसकी चूची को मुंह में लेते हैं सरला का अंग अंग फुदकने लगा....अच्छी तरह से जानती थी कि इतनी तपती दोपहरी में किसी को क्या पड़ी है एक दूसरे के घर में झांकने के लिए और वैसे भी इस वक्त उसकी बहू घर पर नहीं थे इसलिए उसके लिए भी यह सुनहरा मौका था इसलिए वह भी यही सोचे कि जो होता है हो जाने दो और जो होगा देखा जाएगा जिंदगी का मजा लूटा जाए इसलिए वह शुभम को कुछ बोली नहीं लेकिन उसकी हरकत की वजह से उसके मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ी.. शुभम एक हाथ से सरला की मदमस्त सूची को मसलते हुए दूसरी चूची को मुंह में लेकर अमूल दूध की तरह पीना शुरू कर दिया था... बरसों के बाद कोई हटीला मर्द था जो सरला की चूची को मुंह में लेकर पी रहा था और उसे उसकी जवानी याद दिला रहा था इसलिए इस पल को जी लेने के लिए वह शुभम की आगोश में समाती जा रही थी....

शुभम की मदहोश हरकतों की वजह से सरला चारों खाने चित हो गई थी शुभम उसकी मदमस्त चुचियों का आनंद लूटते हुए उसे एक बार फिर से बिस्तर पर पीठ के बल लेटा दिया और दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर बारी-बारी से दशहरी आम की तरह उसके मधुर रस को पीना शुरु कर दिया। पल भर में ही उत्तेजना के असर में सरला की दशहरी आम हापुस आम की तरह कड़क हो गई जिसका आनंद शुभम दबा दबा कर और उसे मुंह में भर कर पीकर ले रहा था और सरला शुभम को पीला कर ले रही थी।

पल भर में कमरे का दृश्य एकदम मादक हो गया ऐसा लग रहा था मानो कोई पॉर्न मूवी चल रही हो... शुभम के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारियां फूट रही थी और यही हाल सरला का भी था उम्र के इस पड़ाव पर उसका खूबसूरत बदन उसे इतना ज्यादा आनंद देगा इस बारे में उसने कभी कल्पना नहीं की थी इस समय वह पीठ के बल चित लेटी हुई थी अपने नर्म नर्म बिस्तर पर अपने ऊपर शुभम को लेकर वह जवानी का मजा लूट रही थी बरसों के बाद किसी मर्द ने उसकी मद मस्त चूचियों को मुंह में लेकर पीना शुरू किया था...शुभम समझ गया था कि अब सरला के पास किसी भी प्रकार का कोई भी विकल्प नहीं बचा है वह उसकी मदहोश जवानी को अपने काबू में कर पाने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए शुभम की मर्दाना ताकत के अधीन होकर जवानी का मजा लूट रही थी.....शुभम उसकी टांगों के बीचो बीच लेटकर अपनी मर्दाना ताकत का एहसास उसकी टांगों के बीच के उस नरम नरम अंग पर महसूस करा कर.... सरला को पूरी तरह से अपनी आगोश में ले चुका था शुभम स्वर्ग का सुख भोगते हुए सरला की खूबसूरत बदन से खेल रहा था सरला के दोनों दशहरी आम बारी-बारी से शुभम के मुंह में जाकर अपना स्वाद चखा रहे थे शुभम को इस कार्य में बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी हालांकि उसने अब तक बहुत ही खूबसूरत कबूतरों को अपनी हथेली में भरकर उसे मुंह में लेकर मस्ती भरे पल का मजा ले चुका था लेकिन आज कपल और आज के दोनों फुदकते हुए कबूतर शुभम को अपनी दूसरी ही कहानी कह रहे थे जिसमें शुभम को मजा आ रहा था.... सरला के मुख से लगातार गर्म सिसकारी की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी और शुभम था कि सरला के खूबसूरत आम को जोर-जोर से दबाकर लाल टमाटर कर दिया था..... सरला भी इस तरह के स्तन मर्दन का अनुभव पहली बार ले रही थी शुभम जिस तरह से सरगोशी से ताकत लगाकर सरला की चुचियों को दबा रहा था सरला को इस तरह से स्तन मर्दन करवाने का यह पहला अनुभव था जिसमें वह पूरी तरह से डूबती चली जा रही थी....

सससहहहहहहह... औ सुभम ये क्या कर रहा है तू मुझे कुछ-कुछ हो रहा है....

मैं जानता हूं चाची कि आपको मजा आ रहा है तभी तो आपको कुछ कुछ हो रहा है इससे भी ज्यादा मजा आएगा बस आप इसी तरह से मजा लेते रहो....(इतना कहने के साथ ही शुभम फिर से चला कि दोनों दशहरी आम पर टूट पड़ा...)

आहहहहहहह .... दर्द होता है....(सरला मुंह बनाते हुए बोली)

चाची यह दर्द का एहसास ही आप को जन्नत का मजा देगा....

धत्..... तू बातें बहुत बनाता है बस अब बहुत हो गया अब तु चला जा यहां से.....(सरला यह बात ही ऊपरी मन से बोल रही थी इस बात का एहसास शुभम को अच्छी तरह से था.... क्योंकि अब वह वह अपने ऊपर लेटे शुभम को हटाने की कोशिश भी नहीं कर रही थी बस मुंह से ही बोल रही थी...)

चला जाऊंगा चाची बस एक बार अपनी मदहोश कर देने वाली मदमस्त जवानी की आगोश में मेरी मचलती जवानी को खेलने दो....

नहीं नहीं सुभम तू यहां से चला जा नहीं तो मैं तेरी मम्मी से बता दूंगी....

क्या बताओगी चाची क्या कहोगी. ... जरा सोचो आप जैसी संस्कारी औरत कभी अपने मुंह से कह पाए कि कि तुम्हारा बेटा मुझे झूठ नहीं आया था क्या आप इतने गंदे शब्द अपने होंठ पर ला सकते हैं क्या अपनी जबान से यह कह सकती हो कि शुभम मेरी मदमस्त चुचियों को मुंह में लेकर पी रहा था (यह कहते हुए शुभम फिर से सरला के लाजवाब निप्पल को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया... एक बार फिर से सरला के तन बदन में आग लग गई उसका अंग-अंग पिघलने लगा...)

सससहहहहहहह.... शुभम मैं शायद तेरी मम्मी से ऐसा बोल नहीं पाऊं लेकिन जो कुछ भी तू कर रहा है मुझे शर्म आ रही है.....

शर्म कैसी चाची है तो औरतों का हक है जैसे धूप लगती है जैसे बदन को भी भूख लगती है... तुम्हारी इस ....(एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर पैंटी के ऊपर से ही बुर को टटोलते हुए) बुर को भी भूख लगती है और वह कैसी लंड़ की जो कि मैं आपकी भूख मिटा सकता हूं.. क्योंकि मेरे पास मोटा तगड़ा लेंगे जो कि आपकी बुर में बराबर समा जाएगा और आप को जन्नत का मजा देगा....

(शुभम की यह अश्लील बहुत ही ज्यादा गंदी बात सुनकर सरला शर्म से पानी पानी हो गई..)

शुभम तो कितना गंदा है रे कैसी कैसी बातें कर रहा है....

मैं जो कुछ भी कह रहा हूं चाची बिल्कुल सही कह रहा हूं आप देखना मैं आपको ऐसा सुख दूंगा कि आप तृप्त हो जाओगी...(इतना कहने के साथ है यह शुभम सरला के दोनों कबूतर को अपनी हथेली की गिरफ्त से आजाद कर दिया. . शुभम की गिरफ्त से आजाद होते हैं सरला की दशहरी आम दोनों पानी भरे गुब्बारे की तरह लहराने लगे वाकई में सरला कीमत मस्त चूचियों को देख कर किसी का भी लंड पानी फेंक दे....)

Sarla ki lete huye

नहीं सुभम पास यहीं पर रुक जा अभी से आकर पढ़ने की ना तो मेरे में हिम्मत है और ना ही मैं चाहती हूं कि तू आगे बढे...

(सरला ऊपरी मन से केवल दिखावा कर रही थी... शुभम अच्छी तरह से जानता था औरतों के अंगों में उनके चेहरे पर आए भाव को अब वह अच्छी तरह से पहचान चुका था सरला के बदलते हाव भाव को देखकर शुभम अच्छी तरह से समझता था कि जितना उसे बुर की तरह है उससे कहीं ज्यादा सरला को उसके मोटी तक में लंड की आग सुलगा रही है। शुभम अब सरला की बात पर बिल्कुल भी ध्यान देना नहीं चाहता था वह आगे बढ़ना चाहता था इसलिए बिस्तर पर बैठ गया था और अपनी उंगलियों के पोरों से सरला के खूबसूरत करो चिकनी पेट पर फिर आकर उसे मस्ती के आलम में लिए जा रहा था.... सरला की कीले पेंटी शुभम की आंखों के सामने थी जिसे देख कर उसके पैंट में गदर मच रहा था। ऐसे हाल और ऐसे माहौल में शुभम क्या कोई भी मर्द अपने आप पर काबू कर सकने में असमर्थ ही होता है यह पल पीछे जाने के लिए नहीं बल्कि आगे बढ़ने के लिए होता है.... और शुभम शर्मा के मदन रस से भीगी हुई पेंटी को देखकर अपने आप पर काबू नहीं कर पाया और अपना हाथ आगे बढ़ाकर उंगलियों के पोरों से बुर की ऊपरी सतह को स्पर्श करने लगा..... शुभम की मर्दाना उंगलियों को अपनी बुर परमहसूस करते ही सरला के मुख से फिर से गर्म सिसकारी फूट पड़ी और वह शर्म के मारे दूसरी तरफ अपना मुंह घुमा ली सरला की हरकत देखकर शुभम समझ गया कि उसके लिए रास्ता एकदम साफ हो चुका है और वह बिना रुके आगे बढ़ने की ठान लिया और वैसे भी जवानी के टेढ़े मेढे पथ पर रुका नहीं जाता बल्कि आगे बढ़ता ही चले जाना एक असली मर्द की मर्दानगी की निशानी होती है.... उसे बंद देखते ही देखते अपने देखते हुए होंठ को सरला की गहरी नाभि मे घुसा कर चाटना शुरू कर दिया और एक हाथ को धीरे से पेट के नीचे की तरफ ले जाकर उसे धीरे-धीरे पेंटी के अंदर सरकाना शुरु कर दिया....

सरला अपने ऊपर दोहरा आक्रमण सहन नहीं कर पा रही थी... एक तो जिंदगी में पहली बार कोई मर्द उसकी गहरी नाभि पर इस तरह से लालायित हुआ था उसे मुंह में भरकर चाट रहा था इससे वह पूरी तरह से कसमसाने लगी.... और दूसरी तरफ शुभम की सरकती हुई उंगलियां पेंटी के अंदर हलचल मचाई हुई थी।। देखते ही देखते शुभम अपनी उंगलियों की गिरफ्त में सलाह के मदमस्त जवानी से भरपूर गुलाबी पंखुड़ियों से सुशोभित बुर को लेकर सहलाना और मसलना शुरू कर दिया.... अब सरला के बस में कुछ भी नहीं था... वह उत्तेजना के मारे बिस्तर पर छटपटा रही थी .... देखते ही देखते शुभम की उंगलियां सरला के मदन रस में भीगने लगी... वह जोर-जोर से पेंटी के अंदर हाथ डालकर सरला की बुर को मसलना शुरू कर दिया था जिससे सरला की हालत खराब होते जा रही थी... वह पूरी तरह से बिस्तर पर छटपटा रही थी मानो किसी मछली को जल्द से बाहर जमीन पर रख दिया गया हो।

Shubham ki sawari karti huyi sarla

औहहहहहह.... शुभम .. ।।औ सुभम मुझे कुछ हो रहा है मैं मर जाऊंगी ....मुझे बचा ले.... मुझे संभाल यह मुझे क्या हो रहा है।

सरला की यह बातें सुनकर मानो शुभम को इसी पल का बेसब्री से इंतजार था.... वह अच्छी तरह से समझ गया था कि सरला पूरी तरह से गर्म हो चुकी है.... और वह तुरंत अपनी दिशा बदल कर बिस्तर के नीचे उतर गया और सरला के पैंटी को दोनों हाथों से पकड़कर उसे एक झटके में नीचे खींचने की कोशिश किया लेकिन....सरला की भारी-भरकम गांड के भजन की वजह से पेंटी नीचे की तरफ नहीं सरक पाई लेकिन घड़ी के छठवे भाग में ही जैसे सरला को इस बात का अंदाजा हो गया कि शुभम उसकी पेंटी उतारना चाहता है इसलिए सरला ना चाहते हुए भी अपने आप ही उसकी मदमस्त खूबसूरत भारी-भरकम गांड खुद-ब-खुद हल्के से ऊपर की तरफ उठ गई....और मौके की नजाकत को समझते हुए शुभम तुरंत सरला की पेंटी को नीचे की तरफ खींच लिया और उसके खूबसूरत पैरों में से बाहर निकाल कर उसे फर्स पर फेंक दिया....पल भर में ही साला बिस्तर पर एकदम नंगी हो गई शुभम की आंखों के सामने एक खूबसूरत औरत उम्र के इस पड़ाव पर अपनी खूबसूरती बिखेरते हुए एकदम नंगी पड़ी हुई थी ....सरला को इस बात का आभास हो गया कि वह शुभम की आंखों के सामने एकदम नंगी पड़ी है सरला को भी अपनी इस हरकत पर बेहद आश्चर्य हुआ कि वह कैसे अपनी गांड को ऊपर उठाकर उसका सहकार करने लगी.... वह अपने बेटे के उम्र के लड़के के सामने बेहद शर्मिंदगी महसूस कर रही थी और अपनी नजरों को छुपाने की कोशिश कर रही थी और दूसरी तरफ शुभम सरला जो कि उसकी मां की उम्र की औरत थी उसके अंदर सुख ढूंढने की कोशिश करते हुए उसकी दोनों टांगों अपने हाथों से पकड़कर फैला दिया अब इसकी आंखों के सामने हल्के हल्के रेशमी मुलायम बालों से गिरी हुई गुलाबी पत्ती से सुशोभित सरला की बुर उसे आमंत्रण दे रही थी... और शुभम इस आमंत्रण से इनकार नहीं कर पाया और देखते ही देखते उसके होंठ सरला की दोनों टांगों के बीच आ गया जैसे ही सरला ने अपनी दहकती हुई बुर पर शुभम के होंठ का स्पर्श का अनुभव कि उसका पूरा बदन एक अजीब से सुख की झनझनाहट में पूरी तरह से मचलने लगा एक पल के लिए तो उसे इस बात पर विश्वास ही नहीं हुआ कि जिस पल का वह अनुभव कर रही है वह पल हकीकत में वह जी रही हैं उसे सब कुछ अपना सा लग रहा था .. लेकिन हल्की सी गर्दन को ऊपर उठाकर जैसे ही अपनी टांगों के बीच नजर घुमाई तो उधर का नजारा देखकर वह पूरी तरह से मस्त हो गई उसकी आंखों के सामने ही शुभम उसकी मदमस्त रसीली मदन रस से भरी हुई बुर को अपने जीभ से चाट रहा था....

आहहहहहहह ..... शुभम यह क्या कर रहा है इतना गंदा काम है....( सरला यह बात अपने ऊपर मन से कह दो रही थी लेकिन शुभम को हटने के लिए बिल्कुल भी हिदायत नहीं दे रही थी।) भगवान के लिए ऐसा मत कर कितना गंदा काम कर रहा है तु क्या कोई ऐसा भी करता है.....

क्यों नहीं चाची ( शुभम अपनी ऊखड़ती हुई सांसो को दुरुस्त करते हुए) क्या आपने कभी ऐसा अनुभव नहीं लि ......
 
मेरी सुहागरात की रात को तेरे चाचा ने बिल्कुल तेरे जैसे ही हरकत की थी लेकिन मैं बिल्कुल भी तैयार नहीं थी मुझे यह बिल्कुल गंदा लग रहा था और मैं तेरे चाचा को इनकार कर दी और उन्हें अपनी कसम दे दी कि आइंदा इस तरह की हरकत ना करें और तब से तेरे चाचा ने दोबारा यह हरकत कभी मेरे साथ नहीं किया....

चाची आप बिल्कुल पागल हो आप नहीं जानती कि इसमें मर्दों के साथ-साथ औरतों को कितना सुख मिलता है। जब एक मर्द अपनी जीभ से औरत की बुर को चाटता है तो औरत एकदम मस्त हो जाती है...सच कहूं तो चाची किसी किसी औरत को तो चुदवाने से ज्यादा चटवाने में मजा आता है....

धत कभी क्या ऐसा होता है मुझे तो बहुत गंदा लगता है....(सरला भी इस अनुभव का बेहद आनंद लेना चाहती थी लेकिन फिर भी अपनी तरफ से नाराजगी दर्शा रही थी..)

मेरी बात मानो चाची मैं पहले ही कह चुका हूं कि उर्दू के बारे में मैं बहुत कुछ जानता हूं इसलिए बस आप आंखें बंद करके मजा लीजिए ...(और इतना कहने के साथ ही शुभम एक बार फिर से सरला की बुर्के गुलाबी पत्तियों को अपने मुंह में लेकर उसे चूसना शुरू कर दिया... शुभम के कहे अनुसार पल भर में ही सरला को तारे नजर आने लगे उसने ऐसा सुख कभी भी महसूस नहीं की थी उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि इस तरह से बुर चटवाने में मजा आता है ..... उसके मुख से लगातार गर्म सिसकारी फूट रही थी जो कि पूरे कमरे के माहौल को मादक बना रही थी। पल भर में ही वह बिस्तर पर जल बिन मछली की तरह छटपटा रही थी रह रहे कर उसकी पूरी से पानी का फव्वारा फूट रहा था... ना चाहते हुए भी उसके मुख से कर्म सिसकारी की आवाज के साथ साथ गंदी गंदी बातें निकलने लगी।

औहहहह सुभम यह क्या कर रहा है हरामजादे मैं तुझे कितना अच्छा लड़का समझ रही थी... । लेकिन तू तो... आज्हहहहहह.... तूने मुझे मस्त कर दिया मैं .... ऊममममममम.....कभी सोच भी नहीं सकती थी कि बुर चटवाने में इतना मजा आता है ऐसे ही चाट ....चाटता रह मुझे बहुत मजा आ रहा है अपनी जीभ डाल डाल कर चाट आहहहहहहहह ...सुभम ....

सरला की बातें सुनकर शुभम पूरी तरह से गर्म हो गया वह जानता था कि हथोड़ा का वार लोहे पर तभी करना चाहिए जब लोहा पूरी तरह से गर्म हो जाए और इस समय लोहा पूरी तरह से गर्म हो चुका था वह जानता था कि आप हथौड़े का प्रहार करना बहुत जरूरी है....इसलिए देखते ही देखते सरला की आंखों के सामने शुभम अपने सारे कपड़े निकाल कर एकदम नंगा हो गया और सरला की आंखों के सामने शुभम का झूलता हुआ मोटा तगड़ा लंड कहर ढा रहा था....सरला ने जिंदगी में इस तरह का मोटा तगड़ा और मर्दाना ताकत से भरपूर लंड का दर्शन कभी नहीं कि थी...इसलिए शुभम की टांगों के बीच खड़े लंड को देखकर वह पूरी तरह से भौंचक्की रह गई उसका मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया.....

बाप रे बाप इतना बड़ा......

तो क्या चाची मुझे ऐरा गेरा समझी थी क्या..... एक बार जिसकी बुर में जाता है...(अपने लंड को जोर-जोर से ऊपर नीचे करके हीलाते हुए) उसे पूरी तरह से अपना दीवाना बना लेता है अब देखना मैं कैसे तुम्हें अपना दीवाना बनाता हूं.....(इतना कहने के साथ ही शुभम अपने लंड को हिलाते हुए आगे बढ़ा...और सरला की सांसे तिरुपति से चलने लगी थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि आप सुबह में का मोटा लंड उसकी बुर में जाने वाला है लेकिन उसकी मोटाई देखकर उसके माथे पर पसीना आ रहा था लेकिन उत्सुकता भी बरकरार थे वह भी जिंदगी में पहली बार मोटी तगड़ी लंड से चुदने का अनुभव लेना चाहती थी....और देखते ही देखते शुभम उसकी दोनों टांगों के बीच आ गया सुकून भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बुर वर्षों से छोटे से लंड को भी अपने अंदर नहीं लिए इसलिए उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी कसी हुई बुर के लिए कुछ ज्यादा ही मोटा नजर आ रहा था... इसलिए ढेर सारा थूक लगाकर वह अपने लंड को पूरी तरह से चिकना कर लिया और एक तकिया सरला की गांड के नीचे लगाकर उसे थोड़ा हल्के से ऊपर कर लिया और अपनी मोटे तगड़े लंड की सुपाड़े को गुलाबी पत्तियों के बीच टीकाकर हल्के से धक्का लगाया और अगले ही पल लंड का मोटा सुपाड़ा बुर में उतर गया.... सरला की सांसे तेज चलने लगी उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी बरसों के बाद उसकी बुर्का एक बार फिर से उद्घाटन हुआ था शुभम के मोटे तगड़े लंड के सुपाड़े को अपनी बुर में महसूस करके वह मस्त हुए जा रही थी.... उत्तेजना के मारे उसका गला सूखने लगा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि शुभम अपना मोटा तगड़ा लंड उसकी कसी हुई बुर में डाल देगा... इसलिए सरला एक बार अपनी शंका का समाधान ढूंढने के लिए शुभम से बोली....

आहहहहहहह .... शुभम बहुत मोटा है....

आप चिंता मत करो चाची मैं संभाल लूंगा।...

(और इतना कहने के साथ ही शुभम सरला की सभी चिंताओं को दूर करते हुए धीरे-धीरे अपने मोटे तगड़े लंड को हल्के हल्के धक्के लगा कर इंच दर इंच बुर में सरकाने लगा...जैसे-जैसे शुभम का मोटा तगड़ा लंड बुर की गहराई में जा रहा था वैसे वैसे सरला के चेहरे का भाव दर्द के कारण बदलता जा रहा था उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच कर भी एक नौजवान लड़के के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में लेकर उसे दर्द महसूस हो रहा था इस बात के एहसास से ही शुभम को गर्व अनुभव हो रहा था। ... शुभम की भी सांसें उखड़ रही थी वह भी एक नई दुनिया का अनुभव कर रहा था वह जैसे जैसे अपने लंड को सरला की बुर की गहराई में उतार रहा था वैसे वैसे उसे एक अद्भुत आनंद की अनुभूति हो रही थी...

जितना लंड सरला की बुर में घुसा हुआ था सरला को यह भी अधिक लग रहा था इस बार शुभम कचकचा कर धक्का लगाया और शुभम का मोटा तगड़ा लंड बुर के अंदर की सारी अड़चनों को दूर करता हुआ ... बुर की गहराई में उतर गया...

इस तरह से एकाएक हुए प्रहार से वह पूरी तरह से आहत हो गई... वह दर्द से बिलबिला उठी उसे उम्मीद नहीं था कि शुभम इस तरह से जोर लगा देगा... उसका मुंह दर्द से खुला का खुला रह गया वह अपनी बुर की गहराई में शुभम के मोटे तगड़े लंड को अच्छी तरह से महसूस कर रही थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी.... सरला मछली की तरह तड़प रही थी उससे रहा नहीं जा रहा था उससे शुभम के मोटे लंड की घर्षण अपनी बुर की गहराई अपने बुर की दीवारों पर सहन नहीं हो रही थी...

शुभम तु निकाल.... निकालो अपने लंड को मुझे बहुत दर्द हो रहा है मुझसे रहा नहीं जा रहा है..... मुझे कुछ हो जाएगा....(सरला दर्द से बिलबिला रही थी उसे बार-बार अपना लंड बाहर निकालने के लिए बोल रही थी लेकिन शुरू अच्छी तरह से जानता था कि एक बार लैंड दूर से बाहर आ गया तो सुभम उसे दोबारा सरला की बुर में नहीं डाल पाएगा... इसलिए वह शर्मा का ध्यान भटकाते हुए बोला...)

कुछ नहीं होगा क्या चीज मुझ पर भरोसा रखो जब मैं आपको मंजिल के इतने करीब ला सकता हूं तो आप को मंजिल तक पहुंचा भी सकता हूं बस मेरे पर भरोसा रखिए (और इतना कहने के साथ ही शुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर एक बार फिर से चला के दोनों दशहरी आम को अपने हाथों में थाम लिया। और उसे फिर से दबाना शुरू कर दिया एक बार सरला फिर से मस्त होने लगी उसके बदन में फिर से जवानी फूटने लगे थोड़ी ही देर में सरला को महसूस होने लगा कि शुभम अपनी कमर हिलाते हुए उसे चोदना शुरू कर दिया है लेकिन उसे दर्द नहीं बल्कि मजा आ रहा है और देखते ही देखते वह पूरी तरह से आनंदित होने लगी..शुभम हल्के हल्के अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए सरला को चोद रहा था एक अद्भुत नजारा पूरे कमरे को मादक बना रहा था सरला पूरी तरह से नंगी अपने बिस्तर पर लेटी अपने बेटे की उम्र के लड़के से चुदवाने का मजा लूट रही थी... और शुभम अपने ही पड़ोस में विजयी झंडा लहरा रहा था।

सरला को मजा आ रहा था और सुबह में एक बार फिर से अपनी कामयाबी पर मंद मंद मुस्कुराते हुए धक्के पर धक्के लगा रहा था उसकी कमर की हलचल कुछ ज्यादा ही गतिमान हो गई वह इतनी जोर जोर से कमर हिलाना शुरू कर दिया कि पलंग चरमराने लगी.... शुभम पूरी तरह से सरला के ऊपर छा जाना चाहता था यह अपने पहले संभोग के असर में पूरी तरह से उसे नहला देना चाहता था ताकि वह उसकी दीवानी हो जाए और वह उसके ऊपर झुककर बारी-बारी से दोनों चूचियों को मुंह में भर भर कर पीना शुरू कर दिया जिससे सरला को और ज्यादा मजा आने लगा सरला को आनंद की अनुभूति इतनी ज्यादा हो रही थी कि वह शुभम को अपनी बाहों में लेकर उसे सहला रही थी और अपने दोनों हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर शुभम के नितंब को दबा दबा कर उसका जोश बढ़ा रही थी।

औरतों के साथ रासलीला मैं काबिल और माहिर होने के बावजूद भी सरला की मदमस्त जवानी और उसकी हरकतों की वजह से इस बार शुभम ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया लेकिन जब तक जितना भी टीका उतने में ही सरला का काम तमाम हो चुका था

एक बार शुभम चढ़ा था लेकिन दो बार सरला को झाड़ चुका था... सरला की सांसें उखड़ रही थी जिंदगी में पहली बार वह चुदाई की तृप्ति का अहसास और सुख भोग रही थी।

और शुभम गहरी गहरी सांस लेता हुआ सरला पर पसर गया था।

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सरला की आंखें बंद थी गुलाबी होंठ खुले के खुले रह गए थे और मुंह में से गर्म आहें रह रह कर बाहर आ रही थी.... और शुभम सरला की मदमस्त गुब्बारे जैसी गोल जवानी पर सर रखकर गहरी सांस ले रहा था और उसका लंड अभी भी सरला की बुर के अंदर अपनी जवानी का सैलाब उगल रहा था .... रह-रहकर शुभम की कमर लहरा उठती थी...

शुभम को उम्मीद तो बिल्कुल भी नहीं थी कि सरला जैसी उम्र दराज औरत उससे चुद पाएगी उसके नीचे होगी लेकिन उसे अपनी मर्दानगी पर पूरा विश्वास था कि एक बार उसका मोटा तगड़ा लंड का दीदार करने के बाद सरला अपने आपको रोक भी नहीं पाएगी और वही हुआ ..सरला अपने बेटे की उम्र के जवान लड़के के साथ संभोग सुख का आनंद लेकर एक दम मस्त हो चुकी थी तृप्ति का अहसास क्या होता है जिंदगी में आज पहली बार उसे इसका अनुभव हुआ था और इस अनुभव के साथ वह बेहद खुश नजर आ रही थी उसके चेहरे की लालिमा साफ बयां कर रही थी कि आज अपने ही कमरे में अपने ही बेटे के उम्र के लड़के के साथ चुदाई करवाई उसे जरा भी झिझक एहसास नहीं हुआ बल्कि उसे मजा ही मजा आया था.. गहरी सांसे लेते हुए सरला शुभम की नंगी पीठ सहला रही थी और शुभम रूई जैसी मुलायम को तो आज चुचियों पर सिर रखकर गरम आहें भर रहा था।

दोनों के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव साफ नजर आ रहे थे सरला की चुदाई करके एक तरह से शुभम ने एक तीर से दो निशाना साधा था एक तो जिस तरह से वह शुभम पर और उसकी मां पर दोनों के बीच अवैध संबंध को लेकर शंका करती थी वही अब शुभम सरला की चुदाई करने के बाद पूरी तरह से निश्चिंत हो गया था कि अगर भविष्य में कभी उसे यह बात पता भी चलती है कि शुभम और निर्मला दोनों के बीच अवैध संबंध है तो इस बात को लेकर चिंता करने वाली कोई बात नहीं थी क्योंकि शुभम उसकी चुदाई करके खुद उसका मुंह बंद कर चुका था और दूसरी बात की आज उम्रदराज औरत से संभोग सुख की प्राप्ति करके वह बेहद खुश नजर आ रहा था।

सरला की रसीली बुर पर शुभम अपना लंड टीका हुआ।

कैसा लगा चाची...(शुभम उसी तरह से सरला के बदन पर लेटे-लेटे ही बोला)

पागल हो गया है क्या तु.... यह भी कोई पूछने वाली बात है। ( सरला शर्मा कर दूसरी तरफ नजर फिरते हुए बोली।)

पूछने वाली बात तो है चाची आखिरकार आपको खुश करने में इतनी मेहनत जो लगी है देख नहीं रही हो मेरा पूरा बदन पसीने में भीग चुका है.....

वाह रे मेहनत मुझे पागल समझता है क्या .... ऊठ मेरे ऊपर से कि ऐसे ही लेटा रहेगा... ...

उठने का मन नहीं कर रहा है चाची....

क्यों अभी तेरा मन नहीं भरा क्या....?

पूछ तो ऐसे रही हो चाची की लगता है कि एक बार फिर से लेने का मन है......

(शुभम की यह बात सुनकर सरला आंखें बड़ी कर कर उसे देखने लगी और फिर मंद मंद मुस्कुराने लगी जो कि इस बात का इशारा था कि जो वह कह रहा है वह भी वह मन ही मन चाह रही थी....)

नहीं मेरा ऐसा कोई भी मन नहीं है अब तू जा यहां मत रुक....(शुभम को अपने ऊपर से हटाते हुए बोली)

रुको रुको रुको रुको चाची। ......(अपनी कमर को हल्के से ऊपर की तरफ उठाते हुए) पहले ईसे तो निकाल लेने दो....(शुभम के इतना कहते ही सरला की नजर खुद ब खुद अपनी टांगों के बीच चली गई जहां पर उसे साफ नजर आ रहा था कि शुभम अपने लंड को उसकी बुर से बाहर निकाल रहा है. जोकि उसके बुर के मदन रस में पूरी तरह से भीग चुका था.... सरला यह नजारा देखकर अंदर ही अंदर शर्मसार हुए जा रही थी की एक नौजवान लड़का उसकी बुर में लंड डालकर और अपना गरम लावा उगल कर अपना लंड बाहर निकाल रहा है सरला यह देखकर एकदम हैरान थी कि इस समय भी उसका लंड लगभग खड़ा ही था जो कि जिस तरह से वह बाहर की तरफ खींच रहा था उसकी रगड़ बुर् के अंदरूनी दीवारों पर महसूस करके उसे फिर से मस्ती छाने लगी थी... तभी पुक्क की आवाज के साथ शुभम का पूरा लंड बुर से बाहर आ गया.... लंड के बाहर आते ही शुभम सरला के बगल में पसर गया। .. जो कि अभी भी उसका लंड छत की तरफ मुंह करके खड़ा था.... शुभम अच्छी तरह से जानता था कि साला चोर नजरों से अभी भी उसके लंड पर नजर गड़ाए हुए हैं इसलिए वह अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने लंड को जड़ से पकड़कर हवा में लहराने लगा जो कि बेहद लुभावना और मादक लग रहा था उस नजारे को देखकर सरला के तन बदन में फिर से सुरसुरी मचने लगी. और वैसे भी शुभम का एक बार में मन नहीं भरता... और यह बात शुभम अच्छी तरह से जानता था कि सरला जैसी प्यासी औरत एक बार में तृप्त होने वाली नहीं थी भले ही तृप्ति का अहसास उसे मादकता में सराबोर कर दिया हो लेकिन लगातार दो तीन बार की चुदाई के बाद ही वह पूरी तरह से उसके अधीन हो जाएगी।

औरतों के साथ पोजीशन बदल बदल कर चुदाई करने की आदत थी .... और अभी तो सरला को केवल एक ही आसन में लगातार धक्के पर धक्के देकर चुदाई किया था अभी तो आसन बदलना जरूरी था ताकि सरला को इस बात का एहसास होगी औरत की चुदाई हर आसन में अत्यधिक आनंद देती है। हो सकता था कि सरला शर्म के मारे या एक बार अपनी गलती का एहसास होने के नाते दोबारा संभोग करने के लिए राजी ना हो और उसे घर से बाहर भेज दी लेकिन शुभम अच्छी तरह से जानता था कि यह पल ऐसा होता है अगर वह कमजोर पड़ गया तो सरला दुबारा संभोग के लिए राजी नहीं होगी इसलिए तो वह सरला के मन से खेलने के उद्देश्य से उसकी आंखों के सामने ही अपने लंड को जड़ से पकड़ कर हिला रहा था और यह देखकर सरला का मन फिर से बहकने लगा था...
 
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