• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Adultery कीमत वसूल

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
मैंने फिर अनु को उसके घर के पास छोड़ दिया और मैं आफिस चला गया।

आफिस में गया तो ऋतु मरे केबिन में बैठी थी। मुझे देखकर बोली- "आपका कब से इंतजार कर रही हैं."

मैंने कहा- "सारी... मैं किसी काम में फंस गया था.."

ऋतु बोली- "मुझे क्या आपका ही काम था? मैं तो आपके लिए ही इंतेजार कर रही थी, आप इतनी देर से आए हो मैं तो अब जा रही हैं.."

मैंने उसको ज्यादा कुछ नहीं कहा, मैंने कहा- "ओके कल देखते हैं. मेरा भी मन तो था नहीं, क्योंकी अनु ने पानी निकाल दिया था। इसलिए अब उसको रोक कर क्या करना था।

अगले दिन मैंने शोभा को फोन किया और कहा- "मुझे तुमसे कुछ काम हैं कहां मिलोगी?"

शोभा ने कहा- जहाँ आप कहो।

मैंने उसको कहा- "मेरे घर आ जाओ.."

शोभा बोली- "कोई खास काम तो नहीं?" क्योंकी वो चुदाई की बात समझ रही थी।

मैंने कहा- "नहीं वो कुछ अलग काम है.."

शोभा शाम को मेरे घर आ गई। मैंने उसको समझते हुए कहा- "शोभा ये लो 250000.."

शोभा पैसे देखकर चौंक गई, और बोली- "ये किसलिए दे रहे हो?"

मैंने कहा- "ये तुम रख लो। जब सुमित अनु को लेने आए तब सुमित को में पैसे दे देना और इस तरह से समझा देना की अनु को अभी तीन-चार महीने जाब के लिए मजबूर नहीं करे..."

शोभा मेरे मैंह को ताकने लगी। उसकी समझ में नहीं आ रहा था की मैं अनु के पति को अनु के लिए क्यों पैसे दे रहा हैं? ये तो शोभा को समझ में आ चुका था की मैंने अनु को भोग लिया है पर बात यहां तक आ जाएगी, बो नहीं सोच सकती थी।

मैंने उसको कहा- "ये बात उसको अचछे से समझाकर पैसे देना.."

शोभा बोली- "हाँ जी, मैं उससे पहले सब बात करेंगी..."

मैंने कहा- "अनु कहीं भी जाब करेंगी तो भी इतनी सलरी नहीं मिलेंगा उसको। जितना मैं दे रहा है..."

शोभा ने ही में सर हिला दिया।

मैंने कहा- "और एक बात, तुम कल अनु को लेकर मेरे घर आ जाना। मुझे उससे कुछ काम है.."

शोभा बोली- "किस टाइम तक आ जाऊँ उसे लेकर?"

मैंने कहा- "दो बजे के बाद आ जाना..." और शोभा को विदा कर दिया।

अगले दिन में आफिस गया तो लंच से पहले मैंने अपने सब काम निपटा लिए और घर चला गया। मैं अब अनु का इंतजार कर रहा था। मैंने अनु को फोन किया और पूछा- "कहां हो?"

अनु ने कहा- "मम्मी के साथ आ रही हूँ.."

मैंने कहा- "आ जाओ..."

थोड़ी देर बाद अनु और शोभा आ गई। मैंने पहले उन लोगों को ड्राइंग रूम में ही बिठा दिया।

चाय पीने के बाद मैंने शोभा से कहा- "तुम यही बैठो मैं अनु से अकेले में कुछ बात करेंगा."

शोभा में कोई ना-नकर नहीं किया। पर अनु शर्मा गई। मैं उसको अपने रूम में ले गया।

अनु बोली- "आपने मम्मी के सामने मुझे यहां आने को कहा। वो क्या सोच रही होंगी?"

मैंने उसको कहा- "तुम अपनी माँ को इतना सीधा मत समझो। उसको सब पता चल गया है."

अनु का चेहरा लाल हो गया, बोली- "हे राम..."

फिर मैंने उसको कहा- "अनु मैंने तुम्हारा काम कर दिया है। अब कोई तुम्हें जाब के लिए तंग नहीं करेंगा."

अनु मुझे हैरान नजर से देखने लगी।

मैंने कहा- "सच में... मैंने वो काम कर दिया है.... फिर मैंने अनु को बता दिया की मैंने क्या किया है।

अनु मेरे से चिपट गई, बोली- "बाब, आप मेरे लिए ये सब क्यों कर रहें हो?"

मैंने कहा- "कुछ भी समझा लो। ऐसे समझ लो की कोई दोस्त तुम्हारी हेल्प कर रहा है..."

अनु ने मुझे देख कर अपनी आँखों में प्यार भरते हुए कहा- "आप मेरे लिए क्या हो, मैं बता नहीं सकती..."

मैंने कहा- क्या हूँ?

अनु शर्मा गईं।

मैंने कहा- मैं क्या हूँ बताओं ना?

अनु बोली- नहीं शर्म आती है।

मैंने उसको बाहों में भरा और कहा- "मेरे कान में बता दी। हम आपके है कौन?"

अनु ने मेरे कान में हल्के से कहा- "मेरे पिया, मेरा बाबू, मेरी जान, मेरा देवता..."

मैंने अनु को कहा- "मैं इतना अच्छा भी नहींम जितना तुम समझती हो.."

अनु ने कहा- मेरे लिए हो।

मैंने उसको कहा- "काश तुम मेरी लाइफ में पहले से होती?" फिर मैंने कहा- "अनु तुम ये बताओं तुमनें कब जाना है"

अनु ने कहा- समित को कल मम्मी ने फोन किया था तब उसने कहा था वो मंगलवार को आएगा।

मैंने कहा- इसका मतलब आज शनिवार है, कल सनडे। सिर्फ दो दिन हो तुम मेरे पास यहां।

अनु ने कहा- "हम्म्म्म

... पर मैं वहां जाकर भी आपका भूल नहीं पाऊँगी.."

मैंने कहा- "मैं भी तुम याद करता रहूंगा.. और मैंने अनु को उस दिन बिना चाई ही जाने दिया। क्योंकी में अनु के साथ पूरी रात बिताना चाहता था। मैं अनु के साथ ड्राइंग रूम में आ गया।

मैंने शोभा को अलग लेजाकर कहा- "तुम्हें मेरा एक काम करना है."

शोभा ने कहा- कौन सा काम?

मैंने कहा- "अनु को मेरे साथ एक रात के लिए तुम्हें छोड़ना होगा.."

शोभा ने कहा- "ये कैसे हो सकता है? मैं ऐसा कैसे कर सकती हर"

मैंने कहा- "ये मैं नहीं जानता। तुमको जो करना है करो। ये कल शाम को मेरे पास यहां होनी चाहिए."

शोभा को पता है की मैं जब अपनी पर आ जाता है तब कोई मुझे नहीं समझा सकता।

मैंने कहा "तुम कल शाम को मुझे फोन कर देना में लेने आ जाऊँगा..."

अनु ने कहा- "कहां चलना है?"

मीना कहा- "तुमको यहां आना है मेरे पास। मैंने तुम्हारी मम्मी से कह दिया है.."

-

अनु ने कहा- "में आ जाऊँगी...

शोभा बोली- "अगर अनु के साथ मैं भी आ जाऊँ तो कोई दिक्कत तो नहीं?"

मैंने कहा- आ जाना।
 
अगले दिन मैंने आफिस ना जाने का फैसला कर लिया। क्योंकी में रोज-रोज जल्दी नहीं आ सकता था। मैंने आफिस फोन किया की आज मेरी तबीयत ठीक नहीं है। कोई अजेंट काम हो तभी फोन करना।

पर ऋतु की आग उसे कैसे रुकने देती उसको? उसका फोन आ गया- "सर आपको क्या हुआ है?"

मैंने कहा- "ऐसे ही बुखार हो गया है."

मत बोली- "मैं आपके पास आ जाऊँ अगर आप कहो तो?"

मैं समझ गया इसकी चूत में खुजली हो रही है। पर मैंने कहा- "नहीं-नहीं, तुम कहां परेशान होगी आकर। वैसे भी मैं आराम ही कर रहा है.." और मैंने ऋतु को दो-तीन ऐसे काम समझा दिए, जिन कामों को वो दो दिन में भी नहीं कर सकती थी। मैं जानता था ऋतु को टाइम ही नहीं मिलेगा अब।

शाम को 5:00 बजे मैंने अनु को फोन किया। मैंने कहा- "कब तक आओगी?"

अनु बोली- "ऋतु के आने के बाद ही आएंगे.."

मैंने कहा- "ऋतु तो आने वाली होगी.."

अनु ने कहा- हम लोग 6:00 बजे के बाद ही निकलेंगे।

मैंने कहा- "ओके... जब निकलो मुझे फोन कर देना." कहकर मैंने अनु को फोन पर किस किया।

अनु ने भी हल्के से जवाब दिया। मैं समझ गया कोई उसके पास में होगा।

शाम को करीब 6:30 बजे अनु को एस.एम.एस. आया की हम निकाल रहे है।

मैंने 10 मिनट बाद शोभा को फोन किया और कहा- "मैं लेने आऊँ या खुद आ जाओगी?"

.

शोभा ने कहा- "हम दोनों आटो से आ रहे हैं..." फिर शोभा और अनु आ गये। अनु आज अपने बेबी को भी लेकर आई थी। मैं समझ गया की शोभा में घर पर कुछ ऐसा कहां होगा जिसकी वजह से बेंबी को भी लाना पड़ा।

मैंने शोभा से कहा- "मेरे गम के साथ वाले रूम में तुम आराम कर लो.."

शोभा ने बेबी को अपने पास ही रख लिया, और बोली- "अगर परेशान करेंगा तो बुला लगी.."

में शोभा की समझदारी की मन ही मन दाद देने लगा की उसको पता है की बेबी का अनु कहां संभालेंगी। मैं अनु को लेकर अपने रूम में आ गया। मैंने अनु को अपनी बाहों में भर लिया। अनु भी मेरे साथ प्यार से चिपक गई।

मैंने अनु को कहा- "अनु आज की रात हम दोनों के लिए बड़ी कीमती है। इस गत को यादगार बना दो."

अनु ने मेरे होंठों को चसकर कर कहा- "हाँ मेरे बाबू। आज की रात मुझे इतना प्यार दो की मैं कभी भूल ना सकू इस रात को.."

मैंने कहा- "फिर तुम पहले जाकर तैयार हो जाओ.."

अनु ने मुझे देखते हुए कहा- "मैं तैयार तो हूँ.."

मैंने कहा- "ऐसे नहीं। जाओं बाथरुम के साथ ही ड्रेसिंग रूम है। वहां से कोई मस्त सी ड्रेस पहनकर तैयार हो जाओ..."

अनु चली गई। तब मैंने एक पेंग बना लिया और उसका इंतजार करने लगा। अनु जैसे ही बाहर आई मैं उसको देखता ही रह गया. "ओहह... माई गोड." अनु तो जैसे कोई परी लग रही हो। स्लीवले श बनेक नाइटी में उसकी गोरी गोरी बाहें, उसके गोरे-गोरे गाल, उसकी काली-काली आँखें और उसके गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठ, उसपर उसकी खुली हुई जुल्फे जैसे काई काली घटाएं छा गई हो। कयामत ढा रही थी अनु। मुझे होश में रहना भारी पड़ रहा था। मैंने तो सिर्फ एक पेंग पिया था, पर ऐसा लग रहा था जैसे पूरी बोतल का नशा हो गया हो। उसको आज इस रूप में मैंने पहली बार देखा था मुझे कुछ-कुछ होने लगा। अनु मेरे पास आई तो मैं बैंड पर उठकर बैठ गया।

अनु ने कहा- "कैसी लग रही हूँ?"

मेरे मह से सिर्फ यही निकला- "गार्जियस.."

अनु ने अपनी कातिल मश्कल बिखेरी, और घूम गई। उसने घूमकर अपने कूल्हों को मटकाया। उसकी गोल मटोल गाण्ड नाइटी में गजब का लक दे रही थी। मेरे से रुका नहीं गया। मैं बैंड के कार्नर पर आ गया। मैंने अपनी बाहों को फैला दिया। अनु मेरे पास बड़े स्टाइल से चलती हुई आई, और उसने मुझे बेड पर धक्का देकर गिरा दिया। फिर अनु मेरे ऊपर आकर बैठ गई। उसने मेरे होंठों पर अपने गुलाबी रस भरे होंठों रख दिए, तो मेरा चेहरा उसकी जुल्फों में टक गया।

अनु के होंठों में मेरे होंठ चिपके हए थे। अचानक अनु ने मेरे मुह में अपनी जीभ डाल दी। मैं अनु की जीभ को चूसने लगा। अनु की महकी-महकी सांसे मेरे पूरे जिम में बिजलियां भर रही थी। मैं अनु की जीभ को चूसता रहा। फिर अनु ने मेरे मुँह से अपना मुँह हटा लिया। मैं तो आज सच में कोई ख्वाब देख रहा था, अनु मेरे ऊपर से हट गईं। उसने मेरे पास लेटते हए अपनी नाइटी को अपनी जांघों तक उठा लिया। मैं तो अनु की गोरी गोरी मासल जांघों को देखता ही रह गया
 
अनु ने मुझे अपनी उंगली से इशारा किया। मैं उसकी जांघों पर अपनी जीभ फिराने लगा। मैं अब कंट्रोल से बाहर होने लगा था। मैंने अनु को बेड पर लिटा दिया। मैं उसके ऊपर आ गया, और अनु की गोरी गोरी बाहों को चूमना शुरू कर दिया।

अनु तो आज जैसे मुझे पागल बना देंगी ऐसा सोचकर आई थी। उसने अपनी दोनों बाहों को ऊपर कर दिया। अनु की गोरी गोरी चिकनी काँख मुझे दीवाना बना रही थी। मैंने अपनी जीभ को उसकी काँख पर रख दिया।

अनु ने सेक्सी आवाज में कहा- “सम्स्सी या

में अनु की काँखों को चूसने लगा। अनु उइंड बाबू उईईई करती रही पर मैं रुका नहीं। मुझे आज कोई अपनी कैटेगरी का खिलाड़ी मिला था। मैं ये मोका हाथ से नहीं जाने देने वाला था। फिर मैंने अनु की नाइटी को उतार दिया। अनु ने नाइटी के नीचे ब्लैक कलर की ब्रा पहनी हुई थी। उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां बा में बड़ी मुश्किल में बंद थीं। मैंने अनु की कमर में हाथ डालकर हुक खोल दिया। ब्रा उसकी तनी हुई चूचियों पर गिरी हुई थी। मैंने अपने मुंह से उसकी बा को उठा लिया।

अनु की गोरी छातियां अब मेरे सामने थी। उसके ब्राउन कलर के मोटे-मोटें निपल बड़े सेक्सी लग रहे थे। मैंने उसके निपल को मुँह में ले लिया, और उसकी चूची को हाथ से दबा दिया।

"आहह... उहह... अहह." अनु की सिसकियां मेरे कानों में पड़ने लगी। मैं उसकी चूची को थोड़ा और जोर से दबाते हए उसके निपल को चूसने लगा। अनु का दूध मेरे मुँह में आ गया। अनु के जिएम पर अब सिर्फ बलेक पेंटी थी। मैंने अनु की दूसरी चूची को भी चूसना शुरू कर दिया।

अनु सिर्फ सिसकियां ले रही थी- "आहाह... उहह... उम्म्म्म ..."

मैंने अनु की दोनों चूचियों को साथ में मिला दिला, और उसके दोनों निपल एक साथ अपने मुँह में डालकर चसने लगा। अनु इस चसाई में पागल हो गई। उसने मेरे सिर पर अपने दोनों हाथ रख दिए और मेरे को अपनी चचियों पर दबाने लगी।

मैने अब अनु की चूची से मुँह हटाकर उसकी चूचियों को हाथ में ऊपर उठा दिया और में उसकी चूचियों को अपनी जीभ से नीचे से चाटने लगा। मैं आज अनु के जिस्म के हर हिस्से को प्यार करने वाला था। मैंने अनु के पेंट पर अपनी जीभ रख दी, और अपनी जीभ उसके पेट से उसकी नाभि तक ले आया। मैंने उसकी नाभि के चारों तरफ जीभ घुमा दी। फिर मैंने अपनी जीभ को उसकी नाभि पर रख दिया।

.

अनु की सिसकियां आने लगी. "उम्म्म्म

... बाबू उईई.."

में अनु की नाभि में अपनी जीभ डालकर अनु को तड़पा रहा था। फिर मैंने अनु की नाभि से लेकर उसकी चत के ऊपर तक अपनी जीभ फेरी। अनु की सैम सिसकियां गम में गंजने लगी। मैं अनु को परे दिल से प्यार कर रहा था। मैंने अनु की पेंटी के ऊपर से उसकी चत को मैंह में भर लिया। अनु ने अपने हाथ से मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा दिया। मेरे सासों में अनु की चूत के पानी की खुशबू बस गईं। में अनु की चूत को उसकी पैंटी के ऊपर से ही चूसने लगा, उसकी चूत का रस मुझे अच्छा लग रहा था।

अनु भी स्वर्ग में थी- "बाबू आ ऊऊऊ.. आह्ह.." की उसकी सिसकियां में सुन रहा था।

मैंने फिर उसकी पैंटी को पकड़कर खींच दिया। अनु की चिकनी चूत अब मेरे सामने थी। अनु की चुत की कशिश मुझे अपनी ओर खींच रही थी। मैं रुक नहीं सका। मैंने अपना मुँह अनु की चूत पर रख दिया। मैं अनु की चूत को चूसता ही रहा, जैसे की वो कोई रस भरा आम हो।

जब अनु को बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने मेरे को कहा- "बाबू अब लण्ड डालो ना.."

मैंने कहा- जान। अभी रुका थोड़ा।

अनु बोली- "ना बाबू.. और नहीं रुका जा रहा आहह... आईईई.."

मैंने अनु को कहा- "पेट के बल लेटा पहले..."

अनु लेट गई। मैने अनु की चूतड़ों पर तीन-चार बाइट लिए, तो अनु- "उईईई... आईईई बाबू आह्ह... करने लगी। मैंने अनु की कमर पर अपनी जीभ रख दी। मैं उसकी कमर को अपनी जीभ से चाटने लगा। अनु को अब शायद और रूकने की हिम्मत नहीं हुई।

अनु बोली. "बाबू, मैं मर जाऊँगी..."

मैंने अनु के होंठों को अपने होंठों में लेते हुए कहा- "जाजू। ऐसा फिर कभी मत कहना..' औं मैंने अनु की चूत में अपना लौड़ा डाल दिया।

अनु मेरे, लौड़े को लेकर इतना खुश हो गई जैसे उसको कोई खजाना मिल गया हो।

मैंने अनु की चत में अपने लण्ड को जड़ तक घसा दिया और कहा- "अब तो मजा आ रहा है ना?"

अनु ने अपनी आँखों को बंद कर रखा था, बोली- "बाब, मेरे बाब, मेरे शोना... फिर अनु ने अपनी दोनों टांगों को मेरी कमर पर रख दिया। उसने अपनी टांगों से मुझे कसकर दबा लिया।
 
मैं अनु को फुल स्पीड में चोद रहा था। अनु मेरी कमर पर अपने नाखून को गड़ा रही थी, पर मुझे इस टाइम कोई दर्द महसूस नहीं हो रहा था। हम दोनों इस समय सिर्फ चुदाई में मस्त थे। मैने अनु की चूची को मुँह में लेकर चूसा।

अनु की सिसकी भरी आवाज आई- "आईई बाबू दर्द होता है.."

मैंने कहा- कहां दर्द होता है?

अनु ने कहा- चूचियों पर।

मैंने कहा- "चूची... वो क्या होता है?" कहते हुए मैंने फिर से उसके निपल को कस के चूमा।

अनु बोली- "आह्ह... उईईई...

मैंने कहा- "कहा दर्द हो रहा है?"

अनु ने कहा- "बाबू चूची में। आप निपल को काट लेटे हो। आईई.."

मैंने कहा- "अच्छा चूची... अब कसकर नहीं घुसूगा। अनु मेरी जान तुमने मुझे उस टाइम जो कहा था वो फिर से कहो। मुझे अच्छा लगा था सुनकर.."

अनु ने कहा- "मेरे बाब, मेरे पिया आहह... उईईई इस्स्स्स

."

मैं अपना लण्ड निकालकर एक ही धक्के में घुसा रहा था। मेरे ऐसा करने से अनु को दर्द के दौर से गुज़रना पड़ा

-

में अनु की चूत में अपना लण्ड साथ मजा भी आ रहा था।

फिर अनु ने कहा- "बाबू, आपको मेरा नाम पता है?"

मैंने कहा- "अनु.."

अनु ने मुश्कुराकर कहा- "नहीं बाबू, मेरा नाम है अनुपमा। पर सब मुझे अनु ही कहते हैं.."

मैंने कहा- "अनुपमा मुझं तुमने भी पहले कभी नहीं बताया..."

-

अनु ने कहा- "अब बता रही हैं मेरे साजन। एक बार कहो ना..."

मैंने कहा- अनुपमा। अनुपमा मेरी जान।

फिर अनु बोली "काश में आपकी हो सकती?"

---

मैंने कहा- "अनु मेरी जान... मैं तुम्हें अपने से कभी दूर नहीं होने दूंगा..."

अनु ने कहा- "बाबू मुझे अपने साथ ही रखना, कभी टूर मत करना। नहीं तो मैं आपके बिना मार जाऊँगी..."

मैंने अनु के मुँह पर हाथ रख दिया, और कहा- "अनु मेरी जान, ऐसा फिर ना कहना.." अनु पर पता नहीं आज मुझे कितना प्यार आ रहा था।

उधर अनु भी अपने पूरे प्यार को मुझ पर न्योछावा कर रही थी।

मैंने अनु से कहा- "अनु तुम घोड़ी बन जाओ."

अनु ने घोड़ी बनकर कहा- "बाबू जल्दी से डालो ना..."

मैंने अनु की चूतड़ों पर एक थपकी दी। अनु के मुँह से आईईई निकला। फिर मैंने अनु की दोनों टांगों को अपने हाथ से थोड़ा सा फैला दिया। अब अनु की चूत पीछे की तरफ उभर आई थी। मैंने अनु से कहा- "तुम अपना मुँह बैंड पर रख लो आराम से। फिर मैंने अनु की चूत में अपना लौड़ा घुसा दिया।

अनु ने मेरे लण्ड की पहली चोट पर आईईई की सिसकी मारी। मेरे लण्ड को अपनी चत में पूरा भरने के लिए अनु अपनी गाण्ड को पीछे कर रही थी। मेरे लण्ड की हर चोट पर अनु और मस्ता रही थी। मैं अनु के चूतड़ों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैंने अनु की गाण्ड में उंगली डाल दी। उईईई की सिसकी मारी अनु ने। मैं उसकी गाण्ड में उंगली को ऐसे ही डाले रहा। मैंने कस कस के तीन-चार धक्के मारे।

अनु को भी मजा आने लगा। फिर मैंने अनु की गाण्ड में अपना अंगूठा डाल दिया, और उसको अंदर-बाहर करते हए धक्के मारने लगा। अनु की चूत पानी-पानी हो रही थी। पता नहीं अनु की चूत अब तक कितनी बार झड़ चुकी थी। फिर मैंने अनु को सीधा करके लिटा दिया और। उसकी दोनों टांगों को फैलाकर ऊपर उठा दिया, और उसकी चूत में लण्ड। डाल दिया। मैं अब झड़ने ही वाला था।

मैंने अनु से कहा- "अनु मेरी जान मैं झड़ने वाला है."

अनु ने कहा- "बाबू। बुझा दो मेरी प्यास आअहह... अपने प्यार की बारिश कर दो सस्स्सी ... आहह.."

मैं अनु की चूत में अपने लण्ड की स्पीड बढ़ाकर झड़ गया, मेरे मुँह से झड़ने के बाद निकला- "हाँ अनु मेरी जान ऊऊऊ... उह.. मैं फिर अनु की चूत में लण्ड डाले ऐसे ही पड़ा रहा।
 
अनु ने भी मेरी कमर पर अपनी टाँग रखकर मुझे खुद से अलग नहीं होने दिया। वो मेरे लौड़े को अपनी चूत से बाहर निकालने से रोक रही थी।

फिर जब मैंने अनु की चूत में लण्ड बाहर निकाल लिया और अनु को देखा तो अनु मुझे ही देख रही थी। उसकी निगाहें मुझे ऐसे देख रही थीं, जैसे मैंने उसको नियां का सबसे अनुमोल तोहफा दे दिया हो।

मैंने अनु को प्यार से कहा- "जानेमन क्या हआ? ऐसे क्यों देख रही हो?"

अनु ने कहा- "आप पर प्यार आ रहा है..."

मैंने कहा- कितना?

अनु ने कहा- बता नहीं सकती।

फिर मैंने अनु को कहा- "जान लण्ड को साफ कर दो..."

अनु ने मेरे लण्ड को तौलिया से बड़े प्यार से साफ किया। फिर उसी से अपनी चूत को पोंछने लगी। उसकी चूत से पानी अभी तक टपक रहा था। अपनी चूत को अच्छी तरह से साफ करके अनु मेरे पास लेट गई। मैंने उसको अपने करीब खींच लिया। अनु फिर मेरे सीने के बालों में अपनी उंगलियां फेरने लगी।

मैंने उसको अपने से चिपका लिया, फिर कहा- "मजा आया ना?"

अनु ने कहा- "जितना सुख आप देते हो, उतना तो मैंने कभी सोचा भी नहीं था."

मैंने कहा- अच्छा ये तो बताओ सबसे ज्यादा मजा कब आया था?

अनु ने कहा- "आपको बता दिया तो आप हँसोगे.."

मैंने उसको चूमते हुए कहा "बताओ ना। शर्माया मत करो..."

अनु बोली- "नहीं। आपको कहते हुए शर्म आती है."

मैंने अनु की जांघों को सहलाते हुए कहा. "जाजू अब भी मुझसं शर्म करती हो?"

मेरे सीने पर अपने मुँह दबाते हुए अनु बोली "जब आपने घोड़ी बनाकर करते वक़्त उंगली डाली हुई थी तब.."

मैंने कहा- कहां उंगली डाली हुई थी?

अनु बोली- वहां पीछे।

मैंने कहा- उसको क्या कहते हैं?

अनु बोली- "आपको सब पता है, मैं नहीं बताती...'

मैंने कहा- "मैं एक बार तुम्हारे मुँह से सुनना चाहता हूँ। साफ-साफ कहो.."

अनु बोली- आप नहीं मानोगे?"

मैंने कहा- उन्नह।

अनु बोली- "आपने जब मेरी गाण्ड में उंगली डाली थी मुझे चोदते हुए, तब..." और कहकर मेरे सीने में फिर से मुँह छुपा लिया।

मैंने कहा- "उहह... मुझे तो पता ही नहीं था इस बात का.."

अनु बोली- अब तो पता चल गया?

मैंने कहा- हौं।

हम दोनों ऐसे ही बातें करते रहे फिर मैंने अनु से कहा- "नींद तो नहीं आ रही?"

अनु ने कहा- नहीं।

मैंने कहा- यार मेरा काफी पीने का मन कर रहा है साथ में कुछ खाने का भी।

अनु बोली- "फिर, सोच क्या रहे हैं..."

.

मैंने कहा- "प्राब्लम में है की अब तक नौकर अपने रूम में जाकर सो गया होगा। उसको उठना पड़ेगा..."

अनु ने कहा- "आप मुझे बस इतना बता दीजिए किचेन कहां है? मैं बनाकर ले आती ."

मैंने कहा- रहने दो, तुम कहां परेशान होगी?

अनु ने कहा- "बाबू एक बार मेरे हाथ का बना खाकर देख तो ला लीज़... मुझे कुछ आता भी है या नहीं?" कहकर अनु ने आँख मारी।

मैंने कहा- तुम्हें सब आता है, मुझे पता है। पर मैं तुमको इस टाइम परेशान नहीं करूंगा।

अनु बोली- "क्या आप, मेरे ऊपर इतना भी हक नहीं समझते."

मैंने मुश्कुराकर कहा- "समझता हूँ। अच्छा जाओं बना लाओ.."

अनु ने कहा- "पहले मैं नहाकर आती हूँ। फिर जाऊँगी."

मैंने कहा- ऐसे ही बना लाओ।

अनु ने कहा- नहीं बाबा किचेन में ऐसे नहीं जाते।

मैंने कहा- ओके... तुम्हें जैसा करना है कर लो।

अनु ने कहा- आप भी चलकर हाथ धो लो।

में अनु के साथ बाथरूम में चला गया।
 
में अनु के साथ बाथरूम में चला गया।

वहां जाकर अनु ने मेरे लौड़े को धोकर साफ किया फिर मुझसे कहा- "अब आप जाओ, मैं नहाकर आती हैं..."

में अनु को प्यार से देखता हुआ बाहर आ गया। थोड़ी देर बाद अनु भी बाहर आ गई।

उसने मुझसे कहा- बाबू किचेन कहां है?

मैंने कहा- "आओं में चलकर दिखाता है. फिर मैं अनु को किचन में ले गया।

जाते ही अनु ने कहा- "बाउ। आपकी किचेन कितनी बड़ी है?"

मैंने कहा- हौं।

अनु ने कहा- ऐसे किचन में कितना मजा आएगा खाना बनाने में?

मैंने कहा- अभी तुम सिर्फ काफी बनाओ।

अनु मुझं देखकर शरारत से बोली- "मुझे पता है, आपको किस बात की जल्दी है."

मैंने कहा- "और कुछ पूछना है या मैं जाऊँ?"

अनु ने कहा- "आप जाओ, मैं बनाकर लाती हैं. और थोड़ी देर में अनु काफी बनाकर ले आई और साथ में बटर टोस्ट। उम्म्म्म । अनु ने मुझे काफी का मग देते हए कहा- "अगर अच्छी ना लगे तो बता दीजिए में फिर से बनाकर ले आऊँगी."

मैने कूफी का घुट भरा तो सच में ऐसी काफी थी जैसी में पसंद करता है। मैंने अनु को कहा- "तुम्हें कैसे पता की मैं ऐसी काफी पीता हैं?"

अनु ने पलके झका कर कहा- "आपसे प्यार करती ह ना इसलिए."

में अनु को देखता ही रह गया। हम दोनों ने काफी पी ली तब अनु ने शरारत भारी आवाज में कहा- "मेरे प्यारे - प्यारे देवता जी आपकी भख शांत हो गई या और कुछ खाजा है?"

मैंने कहा- हौं खाना है।

अनु ने अपनी आँखों को बड़ा-बड़ा करके कहा- "क्या खाना है?"

मैंने कहा- "तुमको.." और मैंने अनु को अपनी बाहों में भरकर उसके गाल पर काट लिया।

अनु ने कहा- "आईईई.." फिर बोली- "मेरे देवता जी तो नानवेज लग रहे हैं."

मैंने कहा- मैं वैसे तो वेज हैं पर अगर इतना टेस्टी नानवेज मिल जाए तो कैसे छोड़ द?"

अनु खिलखिलाकर हँसने लगी। सच में उसकी हँसी ने मेरे कब से उदास रूम में किसी के हाने का एहसास करा दिया। मैं अनु से कुछ नहीं बोला।

पर मेरी उदासी को देखकर अनु मेरे से बोली- "आप क्या सोच रहे हो?"

मैंने कहा- "कुछ नहीं। बस यही सोच रहा हूँ की तुम हँसती हो तो कितनी प्यारी लगती हो?"

अनु ने मझे प्यार से देखा फिर भपर्न

र से देखा फिर अपनी आँखों को बंद कर लिया। मैं उसके होंठों को चूमने लगा।

अनु ने कहा- "मेरे होंठों पर मुश्कुन देने वाले तो आप ही हो। पर जब मैं आपसे दूर जाने की सोचती भी हूँ तब्ब मुझे कुछ होने लगता है.."

मैंने कहा- "तुम मेरे से दूर कहां जा रही हो?" फिर मैंने अनु को अपनी गोद में उठाकर कहा- "जान चला तुमको कहीं ले चलता हैं.."

अनु ने मेरे गले में अपनी बांह डालकर कहा- "चलिए जहां ले जाना है ले चलिए..."

मैं उसको उठाकर बेड पर ले आया। मैंने उसको बैंड पर लिटा दिया।

अनु हँसते हुए बोली- "मुझे यहां छोड़कर आप कहां जा रहे हो?" और उसने मेरे हाथ को पकड़कर मुझे अपने पास खींच लिया।

में भी उसके पास लेट गया और मैंने उसको कहा- "अब यहां तो कपड़े उतार दो.."

अनु ने कहा- नहीं। अभी नहीं।

मैंने कहा- क्यों?

अनु ने कहा- पहले आप अपने कपड़े उत्तरो।

मैंने अपने कपड़े उतार दिए। फिर मैंने अनु को देखा, और कहा- "अब उतार दो...'

अनु ने बैंड पर बड़ी मस्त सी अंगड़ाई लेते हुए कहा- "उम्म्म्म

... मन नहीं है."

मैंने कहा- "अच्छा मेरे उत्तरवा दिए और खुद नहीं उतार रही..."

अनु बैड पर अपना मुँह छुपाकर लेट गईं। मैंने अनु की नाइटी को उसकी टांगों से ऊपर उठाकर उसके चूतड़ों तक कर दिया। अनु ने पैंटी नहीं पहनी थी। अब मैंने उसके गोल-गोल चूतड़ों पर काट लिया।

"आईईई... किया अनु ने।

मैंने कहा- जल्दी से उतरो नहीं तो?

अनु ने ऐसे ही लेटे-लेटे कहा- नहीं तो?

मैंने कहा- "और काढूंगा..."

अनु बोली- नहीं।

मैंने कहा- हाँ।

अनु बोली- फिर का रोने लगेगी।

मैंने कहा- फिर मैं प्यार से चुप करवा दूंगा।

अनु बोली- "आप बड़े जिद्दी हो। आपकी बात मान ही लेती हूँ." कहकर उसने अपनी नाइटी को उतार दिया।

मैंने अनु की चूची को अपने मुँह में लेकर कहा- "काफी में दूध कौन सा डाला था?"

अनु समझ गई। उसने भी बड़ी शरारत से कहा, "आपकी काफी में ये वाला और अपनी काफी में दूसरा वाला...

मैंने कहा- तभी तो काफी का टेस्ट इतना बदिया था।

अनु हँसने लगी- "आप भी ना... मेरे से गंदी-गंदी बातें करते हो..."

मैंने कहा- ये बातें गंदी नहीं होती इनसे ही तो मजा आता है।

अनु ने बड़े भोलेपन से पूछा- कैसा मजा आता है?

मैंने कहा- लण्ड खड़ा हो जाता है।

अनु ने अपने मुंह पर हाथ रखते हुए कहा- "हाँऽ ..."

मैंने कहा- सच में।

अनु शर्मा गईं।
 
मैंने कहा- तुम भी तो ऐसी बातों से मूड में आ जाती हो।

अनु बड़ी हैरानी से बोली- "आपको किसने कहा?

मैंने कहा- किसी ने नहीं।

अनु बोली- फिर आपने कैसे कहा?

मैंने कहा- मुझे पता है।

अनु बोली- "बताइए ना किसने कहा? आपको मेरी कसम..."

मैंने कहा- कसम वापिस लो।

अनु ने कहा- "अच्छा वापिस ले ली। अब बताइए.."

मैने अपने सेल से अनु को वो वाली रेकार्डिंग सुनवा दी, जो ऋतु में मुझे रेकाई करके दी थी। सुनते-सुनते अनु शर्मा गई। मैंने उसके गाल पर चूमते हुए कहा- "अब बोल..."

अनु ने कुछ नहीं कहा। बस शर्माती रही।

मैंने कहा- तुमने मुझसे झूठ बोला। अब तुम्हें इसका पनिशमेंट मिलेगा।

अनु ने मुझे बड़ा मासूम होकर देखा और कहा- "क्या है पनिशमेट?"

मैंने कहा- अब तुमको सब कुछ साफ-साफ बोलना होगा। बोला ही या ना?"

:

अनु ने सिर झुका कर कहा- "ओके..."

मैंने उसको कहा- "चलो अब मेरे लण्ड को पकड़ो और बालो इसका क्या कहते हैं?"

अनु ने कहा- जी।

मैंने कहा- पकड़ो तो।

अनु ने अपने हाथ में मेरा लौड़ा पकड़ लिया, और मुझे देखने लगी।

मैंने कहा- अब ये बताओ तुम्हारे हाथ में क्या है?

अनु ने कहा- मुझे नहीं पता।

मैंने कहा- इसका नाम नहीं पता और इसको प्यार करती हो। करती हो या नहीं?

अनु ने कहा- हाँ करती हूँ।

मैंने कहा- फिर भी इसका नाम नहीं पता?

अनु ने कहा- "इसको लण्ड कहते है..." कहकर उसने मेरे लण्ड को छोड़ दिया और अपनी हीलिया से मैंह छपा लिया। मैंने उसकी हथेलियों को हटा दिया। अनु ने अभी तक आँखें बंद करी हुई थी।

मैंने कहा- आँखें खोला नहीं तो मैं सो रहा हैं।

अनु ने झट से आँखों को खोल दिया, और मेरी तरफ ऐसे देखा जैसे कह रही हो- "प्लीज मत सोना..."

मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया और चूम लिया। मैंने अब उसकी चूचियों को अपने हाथ में पकड़कर कहा "मेरे हाथ में क्या है?"

अनु ने मुझे देखा और कहा- "चूची."

मैं बोला- "गुड मेरे जान..." फिर मैंने अनु की चूत पर हाथ फेरा और कहा- "इसका क्या कहते हैं?"

अनु बोली- "बाबू। मैं नहीं बस.."

मैंने कहा- अछा लास्ट है बता दो।

अनु मेरे से चिपटकर बोली "चूत..."

मुझे हँसी आ गई। मैंने उसको अपनी बाहों में भरकर अपने साथ बेड पर लिटा लिया और उसके ऊपर अपनी टांग रख दी और उसको खुद से कसकर चिपका लिया। और उसकी जाँघ पर अपने लण्ड को दबाकर कहा- "देखो इसका मजा आ गया..."

अनु ने कहा- "हम्म्म्म

..."

मैंने अनु के होठों को चूसा तो उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी। मैं उसकी जीभ को चूसने लगा। अनु फिर से गरम होने लगी थी। मैंने उसको अपने ऊपर ले लिया और उसकी चूचियों को चसने लगा। अनु ने सस्स्स्सी करा। में अनु की चूचियों को चूसते हुए उसकी गाण्ड पर हाथ फेरता रहा। उसकी गाण्ड को अपने हाथ में जोर जार से मसल रहा था। फिर मैंने अनु का ऊपर से उतारा और उसकी दोनों जांघों को फैलाकर उसकी चत में अपना लण्ड घुसा दिया।

अनु की चूत पहले से ही मेरे लौड़े के स्वागत के लिए गीली थी। मेरा लण्ड अनु की चूत की गहराईयों में जाने लगा। अनु की चूत में जोर-जोर से धक्के मारते हुए मैंने अनु की चूचियों को चूसा। अनु भी अपनी गाण्ड को उठा-उठाकर मजा लेने लगी।

फिर मैंने अनु को कहा- "गाण्ड मरवायेंगी?"

अनु पूरी मस्ती में थी, बोली- "हो..."

मैंने कहा- "ऐसे नहीं। सही से बताओ..."

अनु बोली- "गाण्ड मरवानी है..."

मैंने उसको चूमते हुए कहा "अनु मेरी जान, मजा आ गया.."
 
मैने अनु की चूत पा अपनी उंगली लगाकर उसकी चूत के पानी से गीली कर ली। अब मैं अनु की चूत मारतं हए उसकी गाण्ड में उंगली डालने लगा। फिर मैंने अनु की दोनों टांगों को ऊपर कर दिया और उसकी गाण्ड पर लण्ड रखकर दबाया। लण्ड उसकी गाण्ड के छेद पर टकराया तो मुझे थोड़ा सूखा-सूखा लगा। मैंने फिर से अनु की चूत में लण्ड डाल दिया और उसकी गाण्ड को फिर से अपनी उंगली से चिकनी करने लगा। अबकी बार मैने अनु की टाँगें ऊपर करके जब उसकी गाण्ड में लण्ड दबाया तो मेरा सपाड़ा अनु की गाण्ड में चला गया।

अनु ने आँखें बंद करके सिसकी ली- "ओहह... माँ आह्ह...

अनु की ऐसी सिसकिया सुनकर मुझे अब महसूस हो गया था की अब अनु की गाण्ड मेरे लण्ड को झेलने लायक हो गई है। मुझे अब यकीन हो गया था की अनु की गाण्ड को अब मेरे लौड़े की आदत हो गई है। मैंने अपने लण्ड को जार से धक्का मारा, तो मेरा आधे से ज्यादा लण्ड अनु की गाण्ड में चला गया।

अनु ने सिर्फ- "इसम्स्स... आअहह.." किया।

मैंने अपने लण्ड को थोड़ा सा बाहर निकालकर अनु की गाण्ड में फिर से धक्का मारा, तो अबकी बार मेरा परा लौड़ा अनु की गाण्ड में जड़ तक चला गया। अनु की दोनों टांगों को मैंने कसकर पकड़ा हआ था। मैंने 8-10 धक्के मारने के बाद अनु की टांगों को छोड़ दिया।

अब अनु की गाण्ड में मेरा लण्ड मजे से आ जा रहा था। अनु भी सिर्फ मस्ती बाली सिसकियां ले रही थी उसकी सिसकियों में पहले जैसा इर नहीं था। लेकिन इस पोजीशन में गाण्ड मारने का मजा नहीं आ रहा था।

मैंने अनु को कहा- "जान घोड़ी बन जाओ.."

अनु घोड़ी बन गईं। मैंने उसके दोनों चूतड़ों को फैलाते हुए लण्ड को उसकी गाण्ड पर दबाया। एक ही धक्के में लण्ड उसकी गाण्ड में चला गया। अनु भी अब अपनी गाण्ड को आगे-पीछे करने लगी थी। मैंने उसकी गाण्ड से अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और उसके दोनों चूतड़ों को फैलाकर उसकी गाण्ड को देखा। अनु की गाण्ड खल गई थी। उसकी गाण्ड में मैंने फिर से अपना लौड़ा डाला तो बिना किसी रुकावट के जाने लगा। आखीरकार वो तो होना ही था।

मैंने अनु की गाण्ड में अपने लण्ड को तेज-तेज धक्के मारते हुए झाड़ दिया। अनु की गाण्ड मारने में आज सच में मजा आया था। क्योंकी एक तो अनु को दर्द नहीं हो रहा था, दूसरा उसको भी गाण्ड मरवाने में मजा आ रहा था। लेकिन एक बात पक्की थी की अनु की गाण्ड जैसी गाण्ड मैंने पहले कभी नहीं मारी थी। उसका कारण में था की अनु ने मुझसे पहले किसी का लौड़ा अपनी गाण्ड में नहीं लिया था, इसलिए उसकी गाण्ड बिल्कुल कैंचारी थी। दूसरे उसके गोल मटोल गोरे-गोरे चूतड़ इतने मस्त थे की उसकी गाण्ड मारने में अलग ही मजा आता था। लण्ड की ठाप से उसके चूतड़ जब थिरकते थे तब अलग ही सीन होता था। मैं झड़ कर अनु के पास लेट गया। अनु भी संधी लेटी हुई थी।

मैंने अनु को कहा- "मजा आ गया। आज तुमनें खुश कर दिया.."

अनु ने प्यार से कहा- “मेरा बाबू खुश हो गया."

फिर मैंने कहा- "अब मेरा उठने का मन नहीं कर रहा। मेरे लण्ड को साफ कर दो ना प्लीज..."

अनु ने कहा- नहीं बाथरूम चलिए।

मैंने कहा- मन नहीं कर रहा।

अनु ने कहा- "उठिए ना... मैं आपका लण्ड धोउंगी, आप बस खड़े रहना.."

-

उसकी बात सुनकर मैं मुश्कुरा उठा, और कहा- "चलो.." हम दोनों बाथरूम में गये। वहां अनु ने मेरे लण्ड को साबुन लगाकर बड़े प्यार से धोया फिर तौलिया से पॉछ दिया।

मैंने कहा- "तुमने मेरे लण्ड को बड़े अच्छी तरह से धोया है कोई खास वजह है?"

अनु ने शर्माते हुए कहा- " हाँ जी है.."

मैंने कहा- क्या?

अनु ने कहा- "रूम में जाकर पता चल जाएगा। अब आप जाइए में आती हैं..."
 
अनु ने कहा- "रूम में जाकर पता चल जाएगा। अब आप जाइए में आती हैं..."

मैं उसको वही छोड़कर बाहर आ गया। मैं बेड पर लेट गया, मैंने टाइम देखा तो दो बज चुके थे। इतने में अनु आ गई उसने मेरे पास लेटकर मेरी तरफ अपना मुँह कर लिया और मेरे से चिपक गई।

मैंने कहा- दो बज गये हैं।

अनु बोली- आपको नींद आ रही है?

मैंने कहा- नहीं तो। ऐसी कोई बात नहीं।

अनु बोली- आप मेरे से छुपाते क्यों हो? मैं आपकी हर बात समझती हूँ।

मैंने कहा- "अच्छा जान..." फिर मैंने कहा- "मेरे को ऐसे नींद नहीं आएगी मैं एक पेग पी लेता है फिर सो जाऊँगा..

अनु ने मेरी तरफ देखते हुए ना में अपना सर हिलाया।

मैंने कहा- क्या हुआ एक पेग पीने दो।

अनु ने कहा- बाबू नहीं

मैंने कहा- ऐसे नींद नहीं आएगी सिर में हल्का दर्द है।

अनु ने उठकर मेरे सर को अपने हाथ से दबाते हुए कहा- "आप सो जाओ, मैं आपका सिर दबा देती हैं..."

पता नहीं अनु की बात में क्या जादू था की में आँखें बंद करके मुश्कुराता हुआ लेट गया। अनु की उंगलियां मेरे दिमाग को इतना रिलैक्स दे रही थी की मुझे नींद आने लगी। मैं कब नींद की आगोश में चला गया पता ही

नहीं चला। मेरी नींद जब खुली तब अनु मेरे पास ही सोई हई थी। उसका हाथ अब भी मेरे सिर पर था। ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरा सिर दबाते दबातें सो गई हो।

मुझे उसको देखकर प्यार आने लगा, मैंने उसको सही से सुला दिया। कुछ देर मेंमें उसको ऐसे ही देखता रहा। तभी राम के दरवाजे पर ठक-ठक की आवाज आई। मैं समझ गया इस टाइम शोभा ही हो सकती है। मैंने अनु के ऊपर रजाई डाल दी, और मैं कपड़े पहनकर दरवाजा खोलने चला गया। मैंने दरवाजा खोला तो शोभा ही थी।

मैंने कहा- क्या हुआ?

शोभा बाली. "अनु सो रही है या जाग रही है?"

मैंने उसको कहा- "वो सोई हुई है। काम क्या है?"

शोभा ने कहा- "वो बेबी के लिए दूध चाहिए.."

मैंने कहा- "तुम जाओ मैं अनु को अभी भेजता हूँ.." और मैंने जाकर अनु को उठाया।

अनु ने बड़े प्यार से उठकर मेरे गले में अपनी बाहें डाल दी और कहा- "क्या हआ ?"

मैंने कहा- तुम अपने कपड़े पहनकर दूसरे रूम में जाओ, तुम्हारे बेबी को भूख लगी है।

अनु मुझे चौक कर देखने लगी।

-

मैंने कहा- तुम्हारी मम्मी आई थी कहने।

अनु जल्दी से अपने कपड़े पहनकर चली गई। मैं फिर से बेड पर लेट गया। करीब 30 मिनट बाद अनु वापिस आई। मुझे मुश्कुराकर देखते हुए बोली- "देर तो नहीं लगी.."

मैंने कहा- अगर हो भी जाती तो क्या बात थी। वो काम पहले है। जितना जरूरी तुम्हारे लिए अपने बेबी को टाइम देना है उतना मेरे लिए नहीं।

अनु में अपनी आँखों से जैसे मुझं निहारा। फिर मेरे पास आकर बोली- "आप सच में बड़े अच्छे हो..."

मैंने कहा- नहीं। तुम सच में इतनी अच्छी हो। तुम्हारा प्यार तो किसी नसीब वाले को ही मिल सकता है।

अनु मुझे चिपट गई।

मैंने कहा- "जानू 5:00 बज गये हैं। तुम थोड़ा आराम कर लो फिर तुम्हें छोड़ आऊँगा."

अनु बोली- नहीं मुझे नींद नहीं आई।

मैंने कहा- फिर बातें करनी है?

अनु मुझे चूमने लगी, और बोली. "नहीं बाबू। आपसे प्यार करना है."

में अनु को अपनी बाहों में भरकर उसके होठों को चूसने लगा। मैंने अनु से कहा- "तुम कल चली जाओगी ना?"

अनु ने कहा- "आप तो मर्द हो, रह लोगे मेरे बिना भी। मैं नहीं रह पाऊँगी आपसे दूर.." कहते हुए वो रोने लगी।

मैंने उसको प्यार से सहलाते हुए कहा- "जान इसमें राने की क्या बात है? तुम मुझसे थोड़ा दूर ही जा रही हो। मुझे छोड़कर तो नहीं जा रही..."

अनु बोली- "नहीं, आप नहीं समझते मेरे दिल का हाल। मैं वहां जाकर आपसे कैसे मिल पाऊँगी? और वो मुझे फिर से दुख ही देगा...'

मैंने कहा- "उसकी तुम चिंता मत करो। अब वो तुम्हें दो-तीन महीने तक कुछ नहीं कहेंगा, और इससे पहले मैं तुमसे मिलने आऊँगा.."

अनु बोली. "सच... पर कैसे आओगे?"

मैंने कहा- "ये मुझ पर छोड़ दो.."

फिर अनु मरे से चिपक गईं। हम दोनों फिर से प्यार करने लगे। मैंने अनु की चुदाई तो करी, पर मेरे दिमाग में अनु की चुदाई से ज्यादा, उसकी जुदाई का सदमा था। अनु को चोदने के बाद, हम दोनों ऐसे ही लेटे हुए बातें करते रहे।
 
7:00 बजे अनु ने कहा- "मैं अब नहाकर तैयार हो जाऊँ?"

मैंने कहा- हाँ हो जाओ।

फिर अनु और शोभा को मैं अपनी कार से उसके घर के पास छोड़ आया। मैं जब अनु को छोड़कर वापिस आ रहा था तब मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं अपनी सब खुशियां किसी को दे रहा हैं। लेकिन यही नियति थी, मैं इसको कैसे बदल सकता था। फिर अगले दिन जब अनु चली गई, तो में बड़ा अपसेट बहा। मुझे अनु की यादों के सिवा कुछ और सूझा ही नहीं। मुझे खुद को ऐसा लगने लगा था जैसे की लाइफ में कुछ बाकी ही ना रहा हो।

फिर दो दिन बाद मैंने ऋतु को कहा- "अनु का काई फोन तो नहीं आया?"

ऋतु ने कहा- हमारे पास तो नहीं आया आपके पास आया हो तो पता नहीं।

उसकी बातों में छुपा जहर मुझे समझ में आ रहा था। शाम को जब ऋतु जाने लगी तो मेरे केबिन में आई। मैं उसको देख कर बोला- "तुम्हें जाना है तो चली जाओ.."

ऋतु ने कहा. "आपसे यही उम्मीद थी.. और वो चली गई।

अगले दिन लंच टाइम में ऋतु मेरे केबिन में आई। तब मैंने उसको कहा- "ऋतु आज बड़ी हाट लग रही हो."

ऋतु ने मुँह बनाकर कहा- "हम हाट कहां? हाट लोग तो चले गये.."

मैंने उसको कहा कुछ नहीं। उसको अपनी बाहों में भरकर चूम लिया। उसने फीका-फीका जवाब दिया।

मैंने कहा- क्या हुआ? मूड ठीक नहीं लग रहा।

ऋतु बोली- अब आपको मेरे मुह से क्या फर्क पड़ेगा?

मैंने कहा- ऐसा क्यों बोल रही हो?

ऋतु ने कहा- "आपकी खास चहेती तो अब यहां है नहीं, इसलिए अब आपको अपना काम निकालना है तो मेरी तारीफ तो करनी ही पड़ेंगी..."

मझें उसकी ये बात अच्छी नहीं लगी। मैं समझ गया की वो अनु की बात कर रही है। मैंने ऋतु को ऐसे ही छोड़ दिया और कहा- "तुम मुझे शायद कुछ और ही समझ बैठी हो?"

मेरी इस बात से ऋतु को झटका लगा। उसने कहा- "नहीं-नहीं मेरा मतलब वो नहीं था। मैंने तो आपको ऐसे ही कह दिया था..'

मैंने कहा- "तुमने जो कहा वो सच कहा। मैं अनु की यादों से अभी तक बाहर नहीं आ पाया। पर इसमें मैं क्या करू? उसका प्यार मुझे उसको भूलने ही नहीं दे रहा। तुम उस प्यार को कभी नहीं समझ सकती.."

मेरी ये बात सुनकर ऋतु को लगा की उसने मुझे हर्ट कर दिया है। उसने मुझसे कहा- "प्लीज़... मुझे माफ कर दीजिए आई आम वेरी सारी.."

मैंने कहा- सारी नहीं कहो। मैं तुमसे नाराज नहीं हूँ।

ऋतु में अबकी बार अपने कान पकड़ लिए, और बोली "अच्छा अब कभी ऐसी बात नहीं कहँगी प्लीज ... एक बार माफ कर दो...

.

मैंने कहा- "यार मैंने कहा ना की मैं नाराज नहीं हैं..."

ऋतु भी जिद्द पर आ गई। उसने मेरे पास आकर मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों से पकड़ लिया और मुझे उठने के लिए रिक्वेस्ट करने लगी।

मैं उठकर खड़ा हो गया, मैंने कहा- "हम्म्म्म

... बताओ क्या कहना है?"

ऋतु मुझे पकड़कर सोफे तक ले गई और मुझे सोफे पर बैठा दिया। फिर मेरे टांगों के पास बैठ गई, और मेरी टांगों को पकड़कर बोली "प्लीज सर, अब तो ठंडे हो जाइए..."

मैंने कहा- "किसने कहा की में गुस्सा हूँ?

ऋतु बोली- मुझे लग रहा है।

मैंने कहा- नहीं हूँ।

ऋतु ने मुझे प्यार से देखा और मेरी आँखों में आँखें डालकर कहा- "सच में?"

मैंने कहा- "हम्म्म्म ..."

ऋतु ने अब मेरी जीन्स की जिप खोल दी। उसने मेरे लण्ड को बाहर निकाल लिया और अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। मेरा भी मह थोड़ा सा बन गया। मैं उसके सिर पर अपने हाथ फेरने लगा। फिर ऋतु ने मेरे लौड़े

को बड़े प्यार से चूसना शुरू कर दिया। ऋतु में मेरे लण्ड को चूस-चूसकर मेरे लण्ड को इतना मजबूर कर दिया की अब सिर्फ चूत ही उसकी प्यास बुझा सकती थी। मैंने उठकर अपनी जीन्म उत्तार दी और में सोफे पर फिर से बैठ गया।

मैंने ऋतु से कहा- "दरवाजा तो बंद कर दिया है ना?"

ऋतु ने कहा- आफिस में कोई नहीं है। सिर्फ अंजू है। वो भी अब तक चली गई होगी।

मैंने कहा- फिर भी दरवाजा तो बंद है ना?

ऋतु ने कहा- हाँ करा है।

में निश्चित हो गया। ऋतु ने अब तक मेरे लण्ड को बिल्कुल तैयार कर दिया था। वो उठकर खड़ी हो गई अपनी सलवार कमीज उतारकर वो मुझे देखने लगी। ‘

मैंने कहा- "बाकी भी उतार दो.."
 
Back
Top