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मैंने फिर अनु को उसके घर के पास छोड़ दिया और मैं आफिस चला गया।
आफिस में गया तो ऋतु मरे केबिन में बैठी थी। मुझे देखकर बोली- "आपका कब से इंतजार कर रही हैं."
मैंने कहा- "सारी... मैं किसी काम में फंस गया था.."
ऋतु बोली- "मुझे क्या आपका ही काम था? मैं तो आपके लिए ही इंतेजार कर रही थी, आप इतनी देर से आए हो मैं तो अब जा रही हैं.."
मैंने उसको ज्यादा कुछ नहीं कहा, मैंने कहा- "ओके कल देखते हैं. मेरा भी मन तो था नहीं, क्योंकी अनु ने पानी निकाल दिया था। इसलिए अब उसको रोक कर क्या करना था।
अगले दिन मैंने शोभा को फोन किया और कहा- "मुझे तुमसे कुछ काम हैं कहां मिलोगी?"
शोभा ने कहा- जहाँ आप कहो।
मैंने उसको कहा- "मेरे घर आ जाओ.."
शोभा बोली- "कोई खास काम तो नहीं?" क्योंकी वो चुदाई की बात समझ रही थी।
मैंने कहा- "नहीं वो कुछ अलग काम है.."
शोभा शाम को मेरे घर आ गई। मैंने उसको समझते हुए कहा- "शोभा ये लो 250000.."
शोभा पैसे देखकर चौंक गई, और बोली- "ये किसलिए दे रहे हो?"
मैंने कहा- "ये तुम रख लो। जब सुमित अनु को लेने आए तब सुमित को में पैसे दे देना और इस तरह से समझा देना की अनु को अभी तीन-चार महीने जाब के लिए मजबूर नहीं करे..."
शोभा मेरे मैंह को ताकने लगी। उसकी समझ में नहीं आ रहा था की मैं अनु के पति को अनु के लिए क्यों पैसे दे रहा हैं? ये तो शोभा को समझ में आ चुका था की मैंने अनु को भोग लिया है पर बात यहां तक आ जाएगी, बो नहीं सोच सकती थी।
मैंने उसको कहा- "ये बात उसको अचछे से समझाकर पैसे देना.."
शोभा बोली- "हाँ जी, मैं उससे पहले सब बात करेंगी..."
मैंने कहा- "अनु कहीं भी जाब करेंगी तो भी इतनी सलरी नहीं मिलेंगा उसको। जितना मैं दे रहा है..."
शोभा ने ही में सर हिला दिया।
मैंने कहा- "और एक बात, तुम कल अनु को लेकर मेरे घर आ जाना। मुझे उससे कुछ काम है.."
शोभा बोली- "किस टाइम तक आ जाऊँ उसे लेकर?"
मैंने कहा- "दो बजे के बाद आ जाना..." और शोभा को विदा कर दिया।
अगले दिन में आफिस गया तो लंच से पहले मैंने अपने सब काम निपटा लिए और घर चला गया। मैं अब अनु का इंतजार कर रहा था। मैंने अनु को फोन किया और पूछा- "कहां हो?"
अनु ने कहा- "मम्मी के साथ आ रही हूँ.."
मैंने कहा- "आ जाओ..."
थोड़ी देर बाद अनु और शोभा आ गई। मैंने पहले उन लोगों को ड्राइंग रूम में ही बिठा दिया।
चाय पीने के बाद मैंने शोभा से कहा- "तुम यही बैठो मैं अनु से अकेले में कुछ बात करेंगा."
शोभा में कोई ना-नकर नहीं किया। पर अनु शर्मा गई। मैं उसको अपने रूम में ले गया।
अनु बोली- "आपने मम्मी के सामने मुझे यहां आने को कहा। वो क्या सोच रही होंगी?"
मैंने उसको कहा- "तुम अपनी माँ को इतना सीधा मत समझो। उसको सब पता चल गया है."
अनु का चेहरा लाल हो गया, बोली- "हे राम..."
फिर मैंने उसको कहा- "अनु मैंने तुम्हारा काम कर दिया है। अब कोई तुम्हें जाब के लिए तंग नहीं करेंगा."
अनु मुझे हैरान नजर से देखने लगी।
मैंने कहा- "सच में... मैंने वो काम कर दिया है.... फिर मैंने अनु को बता दिया की मैंने क्या किया है।
अनु मेरे से चिपट गई, बोली- "बाब, आप मेरे लिए ये सब क्यों कर रहें हो?"
मैंने कहा- "कुछ भी समझा लो। ऐसे समझ लो की कोई दोस्त तुम्हारी हेल्प कर रहा है..."
अनु ने मुझे देख कर अपनी आँखों में प्यार भरते हुए कहा- "आप मेरे लिए क्या हो, मैं बता नहीं सकती..."
मैंने कहा- क्या हूँ?
अनु शर्मा गईं।
मैंने कहा- मैं क्या हूँ बताओं ना?
अनु बोली- नहीं शर्म आती है।
मैंने उसको बाहों में भरा और कहा- "मेरे कान में बता दी। हम आपके है कौन?"
अनु ने मेरे कान में हल्के से कहा- "मेरे पिया, मेरा बाबू, मेरी जान, मेरा देवता..."
मैंने अनु को कहा- "मैं इतना अच्छा भी नहींम जितना तुम समझती हो.."
अनु ने कहा- मेरे लिए हो।
मैंने उसको कहा- "काश तुम मेरी लाइफ में पहले से होती?" फिर मैंने कहा- "अनु तुम ये बताओं तुमनें कब जाना है"
अनु ने कहा- समित को कल मम्मी ने फोन किया था तब उसने कहा था वो मंगलवार को आएगा।
मैंने कहा- इसका मतलब आज शनिवार है, कल सनडे। सिर्फ दो दिन हो तुम मेरे पास यहां।
अनु ने कहा- "हम्म्म्म
... पर मैं वहां जाकर भी आपका भूल नहीं पाऊँगी.."
मैंने कहा- "मैं भी तुम याद करता रहूंगा.. और मैंने अनु को उस दिन बिना चाई ही जाने दिया। क्योंकी में अनु के साथ पूरी रात बिताना चाहता था। मैं अनु के साथ ड्राइंग रूम में आ गया।
मैंने शोभा को अलग लेजाकर कहा- "तुम्हें मेरा एक काम करना है."
शोभा ने कहा- कौन सा काम?
मैंने कहा- "अनु को मेरे साथ एक रात के लिए तुम्हें छोड़ना होगा.."
शोभा ने कहा- "ये कैसे हो सकता है? मैं ऐसा कैसे कर सकती हर"
मैंने कहा- "ये मैं नहीं जानता। तुमको जो करना है करो। ये कल शाम को मेरे पास यहां होनी चाहिए."
शोभा को पता है की मैं जब अपनी पर आ जाता है तब कोई मुझे नहीं समझा सकता।
मैंने कहा "तुम कल शाम को मुझे फोन कर देना में लेने आ जाऊँगा..."
अनु ने कहा- "कहां चलना है?"
मीना कहा- "तुमको यहां आना है मेरे पास। मैंने तुम्हारी मम्मी से कह दिया है.."
-
अनु ने कहा- "में आ जाऊँगी...
शोभा बोली- "अगर अनु के साथ मैं भी आ जाऊँ तो कोई दिक्कत तो नहीं?"
मैंने कहा- आ जाना।
आफिस में गया तो ऋतु मरे केबिन में बैठी थी। मुझे देखकर बोली- "आपका कब से इंतजार कर रही हैं."
मैंने कहा- "सारी... मैं किसी काम में फंस गया था.."
ऋतु बोली- "मुझे क्या आपका ही काम था? मैं तो आपके लिए ही इंतेजार कर रही थी, आप इतनी देर से आए हो मैं तो अब जा रही हैं.."
मैंने उसको ज्यादा कुछ नहीं कहा, मैंने कहा- "ओके कल देखते हैं. मेरा भी मन तो था नहीं, क्योंकी अनु ने पानी निकाल दिया था। इसलिए अब उसको रोक कर क्या करना था।
अगले दिन मैंने शोभा को फोन किया और कहा- "मुझे तुमसे कुछ काम हैं कहां मिलोगी?"
शोभा ने कहा- जहाँ आप कहो।
मैंने उसको कहा- "मेरे घर आ जाओ.."
शोभा बोली- "कोई खास काम तो नहीं?" क्योंकी वो चुदाई की बात समझ रही थी।
मैंने कहा- "नहीं वो कुछ अलग काम है.."
शोभा शाम को मेरे घर आ गई। मैंने उसको समझते हुए कहा- "शोभा ये लो 250000.."
शोभा पैसे देखकर चौंक गई, और बोली- "ये किसलिए दे रहे हो?"
मैंने कहा- "ये तुम रख लो। जब सुमित अनु को लेने आए तब सुमित को में पैसे दे देना और इस तरह से समझा देना की अनु को अभी तीन-चार महीने जाब के लिए मजबूर नहीं करे..."
शोभा मेरे मैंह को ताकने लगी। उसकी समझ में नहीं आ रहा था की मैं अनु के पति को अनु के लिए क्यों पैसे दे रहा हैं? ये तो शोभा को समझ में आ चुका था की मैंने अनु को भोग लिया है पर बात यहां तक आ जाएगी, बो नहीं सोच सकती थी।
मैंने उसको कहा- "ये बात उसको अचछे से समझाकर पैसे देना.."
शोभा बोली- "हाँ जी, मैं उससे पहले सब बात करेंगी..."
मैंने कहा- "अनु कहीं भी जाब करेंगी तो भी इतनी सलरी नहीं मिलेंगा उसको। जितना मैं दे रहा है..."
शोभा ने ही में सर हिला दिया।
मैंने कहा- "और एक बात, तुम कल अनु को लेकर मेरे घर आ जाना। मुझे उससे कुछ काम है.."
शोभा बोली- "किस टाइम तक आ जाऊँ उसे लेकर?"
मैंने कहा- "दो बजे के बाद आ जाना..." और शोभा को विदा कर दिया।
अगले दिन में आफिस गया तो लंच से पहले मैंने अपने सब काम निपटा लिए और घर चला गया। मैं अब अनु का इंतजार कर रहा था। मैंने अनु को फोन किया और पूछा- "कहां हो?"
अनु ने कहा- "मम्मी के साथ आ रही हूँ.."
मैंने कहा- "आ जाओ..."
थोड़ी देर बाद अनु और शोभा आ गई। मैंने पहले उन लोगों को ड्राइंग रूम में ही बिठा दिया।
चाय पीने के बाद मैंने शोभा से कहा- "तुम यही बैठो मैं अनु से अकेले में कुछ बात करेंगा."
शोभा में कोई ना-नकर नहीं किया। पर अनु शर्मा गई। मैं उसको अपने रूम में ले गया।
अनु बोली- "आपने मम्मी के सामने मुझे यहां आने को कहा। वो क्या सोच रही होंगी?"
मैंने उसको कहा- "तुम अपनी माँ को इतना सीधा मत समझो। उसको सब पता चल गया है."
अनु का चेहरा लाल हो गया, बोली- "हे राम..."
फिर मैंने उसको कहा- "अनु मैंने तुम्हारा काम कर दिया है। अब कोई तुम्हें जाब के लिए तंग नहीं करेंगा."
अनु मुझे हैरान नजर से देखने लगी।
मैंने कहा- "सच में... मैंने वो काम कर दिया है.... फिर मैंने अनु को बता दिया की मैंने क्या किया है।
अनु मेरे से चिपट गई, बोली- "बाब, आप मेरे लिए ये सब क्यों कर रहें हो?"
मैंने कहा- "कुछ भी समझा लो। ऐसे समझ लो की कोई दोस्त तुम्हारी हेल्प कर रहा है..."
अनु ने मुझे देख कर अपनी आँखों में प्यार भरते हुए कहा- "आप मेरे लिए क्या हो, मैं बता नहीं सकती..."
मैंने कहा- क्या हूँ?
अनु शर्मा गईं।
मैंने कहा- मैं क्या हूँ बताओं ना?
अनु बोली- नहीं शर्म आती है।
मैंने उसको बाहों में भरा और कहा- "मेरे कान में बता दी। हम आपके है कौन?"
अनु ने मेरे कान में हल्के से कहा- "मेरे पिया, मेरा बाबू, मेरी जान, मेरा देवता..."
मैंने अनु को कहा- "मैं इतना अच्छा भी नहींम जितना तुम समझती हो.."
अनु ने कहा- मेरे लिए हो।
मैंने उसको कहा- "काश तुम मेरी लाइफ में पहले से होती?" फिर मैंने कहा- "अनु तुम ये बताओं तुमनें कब जाना है"
अनु ने कहा- समित को कल मम्मी ने फोन किया था तब उसने कहा था वो मंगलवार को आएगा।
मैंने कहा- इसका मतलब आज शनिवार है, कल सनडे। सिर्फ दो दिन हो तुम मेरे पास यहां।
अनु ने कहा- "हम्म्म्म
... पर मैं वहां जाकर भी आपका भूल नहीं पाऊँगी.."
मैंने कहा- "मैं भी तुम याद करता रहूंगा.. और मैंने अनु को उस दिन बिना चाई ही जाने दिया। क्योंकी में अनु के साथ पूरी रात बिताना चाहता था। मैं अनु के साथ ड्राइंग रूम में आ गया।
मैंने शोभा को अलग लेजाकर कहा- "तुम्हें मेरा एक काम करना है."
शोभा ने कहा- कौन सा काम?
मैंने कहा- "अनु को मेरे साथ एक रात के लिए तुम्हें छोड़ना होगा.."
शोभा ने कहा- "ये कैसे हो सकता है? मैं ऐसा कैसे कर सकती हर"
मैंने कहा- "ये मैं नहीं जानता। तुमको जो करना है करो। ये कल शाम को मेरे पास यहां होनी चाहिए."
शोभा को पता है की मैं जब अपनी पर आ जाता है तब कोई मुझे नहीं समझा सकता।
मैंने कहा "तुम कल शाम को मुझे फोन कर देना में लेने आ जाऊँगा..."
अनु ने कहा- "कहां चलना है?"
मीना कहा- "तुमको यहां आना है मेरे पास। मैंने तुम्हारी मम्मी से कह दिया है.."
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अनु ने कहा- "में आ जाऊँगी...
शोभा बोली- "अगर अनु के साथ मैं भी आ जाऊँ तो कोई दिक्कत तो नहीं?"
मैंने कहा- आ जाना।