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शटर के नीचे से झुकते वक्त उसकी टाइट जींस उसके नितंबों पर तन गई थी, और उसका क्रॉप-टॉप थोड़ा ऊपर हो गया था। राज ने उस नज़ारे को जी भर के देखा।
अंदर आते ही विद्या ने सबसे पहले पीछे मुड़कर दुकान की कुंडी लगा दी। खट!
"अब कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा," उसने पलटकर राज से कहा, अपने बालों को ठीक करते हुए। "सिर्फ तुम, मैं और तुम्हारा वो... इंची-टेप।"
राज काउंटर से बाहर आया। उसने विद्या को देखा। एसी की ठंडक में विद्या के निप्पल उसके पतले, सफेद क्रॉप-टॉप के अंदर अकड़ गए थे और कपड़े पर दो छोटे, सख्त बिंदुओं की तरह उभर आए थे। राज की नज़रें वहीं अटक गईं। विद्या ने यह नोटिस किया। उसने खुद को ढका नहीं, बल्कि अपने कंधों को पीछे खींचकर अपना सीना और तान दिया।
"घूरना बंद करो और काम शुरू करो," विद्या ने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में गुस्सा नहीं, आमंत्रण था। "कहाँ चलना है? ट्रायल रूम?"
"हाँ," राज ने इशारा किया। "वही सही जगह है।"
वे ट्रायल रूम में गए। राज ने वहां की पीली रोशनी जला दी। चारों तरफ आईने थे। विद्या आईने के सामने खड़ी हो गई। उसने अपने होंठों पर फिर से लिप-ग्लॉस लगाया। वह आईने में राज को देख रही थी जो उसके पीछे खड़ा था।
"सुना है तुम भाभी को बहुत अच्छी फिटिंग देते हो," विद्या ने अचानक कहा, राज की आंखों में आईने के जरिए देखते हुए। "कल रात मैं उनके कमरे में गई थी। वो लाल ब्लाउज पहनकर आईने के सामने खड़ी थीं। वो... वो बहुत खुश लग रही थीं। कुछ ज्यादा ही खुश। और उनकी गर्दन पर..." विद्या हंसी, एक बहुत ही मतलबी हंसी, "...एक लाल निशान था। मच्छर का तो नहीं लग रहा था।"
राज के दिल की धड़कन बढ़ गई। यह लड़की बहुत तेज़ थी।
"मच्छर आजकल बहुत हैं," राज ने सधे हुए स्वर में कहा, लेकिन उसकी आंखों में एक चमक आ गई। "लेकिन मेरा काम सिर्फ फिटिंग देना है।"
"वही तो," विद्या ने घूमकर राज का सामना किया। "मुझे भी वही 'फिटिंग' चाहिए। वो निशान वाली फिटिंग।"
उसने अपने दोनों हाथ अपनी कमर पर रखे।
"तो? कैसे लोगे नाप?"
राज ने अपना इंची-टेप उठाया। "नाप लेने के लिए..." राज ने कहा, उसका गला थोड़ा भारी हो रहा था, "आपको थोड़ा सहयोग करना होगा। यह टॉप... यह नाप में बाधा बनेगा।"
विद्या ने राज की आंखों में देखा। "क्या उतारना है? यह टॉप?"
इससे पहले कि राज कुछ कहता, विद्या ने अपने दोनों हाथ क्रॉस करके अपने टॉप का निचला हिस्सा पकड़ा और उसे एक झटके में ऊपर खींच दिया।
राज की सांसें थम गईं।
विद्या ने टॉप उतारा नहीं, बस उसे अपनी गर्दन तक उठा लिया, जहाँ वह एक हार की तरह अटक गया।
उसके नीचे उसने एक नियॉन पिंक रंग की स्पोर्ट्स ब्रा पहनी थी।
नज़ारा बेहद कामुक और आधुनिक था। डॉली के भारी, ढके हुए बदन के विपरीत, यह नज़ारा एकदम अलग था। विद्या का पेट एकदम सपाट और गोरा था, जिस पर हल्की-हल्की एब्स की लकीरें थीं। उसकी पसलियों की हल्की झलक दिख रही थी।
और उस टाइट स्पोर्ट्स ब्रा में कैद उसके तने हुए, गोल और सख्त स्तन एक-दूसरे से सटे हुए थे। ब्रा इतनी टाइट थी कि उसके स्तनों को दबाकर बीच में एक गहरी दरार बना रही थी। उसकी त्वचा पर पसीने की एक हल्की परत चमक रही थी।
"लो," विद्या ने अपने हाथ ऊपर उठाए रखे, जिससे उसका सीना और तन गया और उसकी बगलें राज के सामने आ गईं जो एकदम साफ और चिकनी थीं। "अब ले लो नाप। या कुछ और भी देखना है?"
राज ने एक कदम आगे बढ़ाया। अब वह विद्या के बिल्कुल करीब था। विद्या के शरीर से एक महंगी परफ्यूम और फ्रेश, युवा पसीने की गंध आ रही थी। यह गंध कच्ची जवानी की गंध थी, जो नशीली थी।
राज ने टेप को उसकी बांहों के नीचे से निकाला। जब वह टेप लेकर आगे आया, तो उसके हाथ और कलाई विद्या की नंगी कमर और पसलियों से रगड़ खा गए। विद्या की त्वचा बहुत चिकनी, रेशमी और गर्म थी।
"सांस रोको," राज ने उसके कान के पास कहा।
विद्या ने राज की आंखों में देखते हुए गहरी सांस ली। उसका सीना फूल गया और राज के हाथों से बस इंच भर दूर रह गया। राज ने टेप को उसके स्तनों के सबसे उभरे हुए हिस्से पर कसा। स्पोर्ट्स ब्रा के कपड़े के नीचे उसके निप्पल की कठोरता राज को टेप के जरिए महसूस हो रही थी।
"बत्तीस..." राज बड़बड़ाया। "परफेक्ट। एकदम ठोस।"
उसने टेप को ढीला नहीं किया। वह विद्या के स्तनों के कसाव को महसूस कर रहा था।
"टाइट चाहिए ना?" राज ने पूछा।
"इतना टाइट..." विद्या ने अपनी कमर को थोड़ा आगे धकेला, जिससे उसका नंगा पेट राज के कपड़ों से टच हो गया। राज को उस स्पर्श से करंट लग गया। "...इतना टाइट कि मुझे पता चले कि किसी मर्द ने इसे बनाया है। मुझे ढीले कपड़े पसंद नहीं। मुझे जकड़न पसंद है।"
यह इशारा काफी था। राज ने अपना संयम खो दिया।
उसने टेप छोड़ दिया। टेप विद्या के कंधों पर लटक गया।
राज ने अपने दोनों हाथ विद्या की नंगी, पतली कमर पर रख दिए। उसने अपने अंगूठे उसकी जींस के बेल्ट लूप में फंसा दिए और अपनी उंगलियां उसकी पीठ की त्वचा में गड़ा दीं।
"तुम्हारी कमर..." राज ने भारी आवाज़ में कहा, "बहुत पतली है। इसे तो मैं अपनी एक बांह में लपेट सकता हूँ। और तोड़ भी सकता हूँ।"
विद्या ने हंसी के साथ अपनी गर्दन पीछे झुका दी, जैसे वह उस स्पर्श का आनंद ले रही हो। "तो लपेट कर दिखाओ ना। सिर्फ बातें करोगे शर्मा जी? या कुछ करोगे भी?"
राज ने उसे अपनी तरफ खींचा। विद्या का टाइट, गठीला शरीर राज से टकराया।
राज का एक हाथ उसकी नंगी पीठ पर ऊपर की तरफ रेंगा। उसकी उंगलियां स्पोर्ट्स ब्रा के स्ट्रैप के नीचे घुस गईं। उसने स्ट्रैप को खींचा और छोड़ दिया।
चटाक!
इलास्टिक ने विद्या की गोरी त्वचा पर हल्की चोट की।
"आह!" विद्या ने मजे से सिसकी ली। "बदमाश... दर्जी हो या जल्लाद?"
"तुम्हें बदमाशी ही पसंद है," राज ने कहा। उसने अपना चेहरा विद्या की गर्दन और कंधे के बीच के हिस्से में गड़ा दिया। वह वहां चूमने लगा, सूंघने लगा।
विद्या ने राज के बालों को पकड़ लिया और मुट्ठी में भींच लिया। "हाँ... मुझे जंगलीपन पसंद है। भाभी की तरह मुझे धीमा, उबाऊ प्यार नहीं चाहिए। मुझे करंट चाहिए। मुझे वो चाहिए जो मुझे हिला दे।"
राज ने उसे अचानक घुमा दिया। अब विद्या का चेहरा आईने की तरफ था और राज उसके पीछे।
विद्या ने आईने में देखा। वह लगभग अर्धनग्न थी, और राज उसके पीछे खड़ा उसे काबू कर रहा था।
राज ने विद्या की जींस का बटन देखा। जींस बहुत टाइट थी, जो उसकी जांघों और कूल्हों पर दूसरी चमड़ी की तरह कसी हुई थी।
"यह जींस..." राज ने उसके कान को अपने दांतों से काटते हुए कहा, "नाप में अड़चन डाल रही है। लहंगे के लिए कमर का नाप नीचे से लेना होगा। बहुत नीचे से।"
"तो खोल दो," विद्या ने आईने में राज की आंखों में चुनौती दी। "मेरे हाथ ऊपर हैं। मैं नहीं खोलूँगी। तुम्हें ही खोलना होगा। इंतज़ार किसका है?"
राज ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और विद्या की जींस के बटन पर रखा।
खट... बटन खुला।
फिर उसने जिप के हैंडल को पकड़ा और धीरे-धीरे नीचे सरकाया।
ज़िप्प...
धातु की आवाज़ सन्नाटे में गूंज गई। जिप खुलने से जींस का वी-शेप खुल गया और विद्या का सफेद, चिकना पेट और नीचे का हिस्सा दिखने लगा।
अंदर आते ही विद्या ने सबसे पहले पीछे मुड़कर दुकान की कुंडी लगा दी। खट!
"अब कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा," उसने पलटकर राज से कहा, अपने बालों को ठीक करते हुए। "सिर्फ तुम, मैं और तुम्हारा वो... इंची-टेप।"
राज काउंटर से बाहर आया। उसने विद्या को देखा। एसी की ठंडक में विद्या के निप्पल उसके पतले, सफेद क्रॉप-टॉप के अंदर अकड़ गए थे और कपड़े पर दो छोटे, सख्त बिंदुओं की तरह उभर आए थे। राज की नज़रें वहीं अटक गईं। विद्या ने यह नोटिस किया। उसने खुद को ढका नहीं, बल्कि अपने कंधों को पीछे खींचकर अपना सीना और तान दिया।
"घूरना बंद करो और काम शुरू करो," विद्या ने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में गुस्सा नहीं, आमंत्रण था। "कहाँ चलना है? ट्रायल रूम?"
"हाँ," राज ने इशारा किया। "वही सही जगह है।"
वे ट्रायल रूम में गए। राज ने वहां की पीली रोशनी जला दी। चारों तरफ आईने थे। विद्या आईने के सामने खड़ी हो गई। उसने अपने होंठों पर फिर से लिप-ग्लॉस लगाया। वह आईने में राज को देख रही थी जो उसके पीछे खड़ा था।
"सुना है तुम भाभी को बहुत अच्छी फिटिंग देते हो," विद्या ने अचानक कहा, राज की आंखों में आईने के जरिए देखते हुए। "कल रात मैं उनके कमरे में गई थी। वो लाल ब्लाउज पहनकर आईने के सामने खड़ी थीं। वो... वो बहुत खुश लग रही थीं। कुछ ज्यादा ही खुश। और उनकी गर्दन पर..." विद्या हंसी, एक बहुत ही मतलबी हंसी, "...एक लाल निशान था। मच्छर का तो नहीं लग रहा था।"
राज के दिल की धड़कन बढ़ गई। यह लड़की बहुत तेज़ थी।
"मच्छर आजकल बहुत हैं," राज ने सधे हुए स्वर में कहा, लेकिन उसकी आंखों में एक चमक आ गई। "लेकिन मेरा काम सिर्फ फिटिंग देना है।"
"वही तो," विद्या ने घूमकर राज का सामना किया। "मुझे भी वही 'फिटिंग' चाहिए। वो निशान वाली फिटिंग।"
उसने अपने दोनों हाथ अपनी कमर पर रखे।
"तो? कैसे लोगे नाप?"
राज ने अपना इंची-टेप उठाया। "नाप लेने के लिए..." राज ने कहा, उसका गला थोड़ा भारी हो रहा था, "आपको थोड़ा सहयोग करना होगा। यह टॉप... यह नाप में बाधा बनेगा।"
विद्या ने राज की आंखों में देखा। "क्या उतारना है? यह टॉप?"
इससे पहले कि राज कुछ कहता, विद्या ने अपने दोनों हाथ क्रॉस करके अपने टॉप का निचला हिस्सा पकड़ा और उसे एक झटके में ऊपर खींच दिया।
राज की सांसें थम गईं।
विद्या ने टॉप उतारा नहीं, बस उसे अपनी गर्दन तक उठा लिया, जहाँ वह एक हार की तरह अटक गया।
उसके नीचे उसने एक नियॉन पिंक रंग की स्पोर्ट्स ब्रा पहनी थी।
नज़ारा बेहद कामुक और आधुनिक था। डॉली के भारी, ढके हुए बदन के विपरीत, यह नज़ारा एकदम अलग था। विद्या का पेट एकदम सपाट और गोरा था, जिस पर हल्की-हल्की एब्स की लकीरें थीं। उसकी पसलियों की हल्की झलक दिख रही थी।
और उस टाइट स्पोर्ट्स ब्रा में कैद उसके तने हुए, गोल और सख्त स्तन एक-दूसरे से सटे हुए थे। ब्रा इतनी टाइट थी कि उसके स्तनों को दबाकर बीच में एक गहरी दरार बना रही थी। उसकी त्वचा पर पसीने की एक हल्की परत चमक रही थी।
"लो," विद्या ने अपने हाथ ऊपर उठाए रखे, जिससे उसका सीना और तन गया और उसकी बगलें राज के सामने आ गईं जो एकदम साफ और चिकनी थीं। "अब ले लो नाप। या कुछ और भी देखना है?"
राज ने एक कदम आगे बढ़ाया। अब वह विद्या के बिल्कुल करीब था। विद्या के शरीर से एक महंगी परफ्यूम और फ्रेश, युवा पसीने की गंध आ रही थी। यह गंध कच्ची जवानी की गंध थी, जो नशीली थी।
राज ने टेप को उसकी बांहों के नीचे से निकाला। जब वह टेप लेकर आगे आया, तो उसके हाथ और कलाई विद्या की नंगी कमर और पसलियों से रगड़ खा गए। विद्या की त्वचा बहुत चिकनी, रेशमी और गर्म थी।
"सांस रोको," राज ने उसके कान के पास कहा।
विद्या ने राज की आंखों में देखते हुए गहरी सांस ली। उसका सीना फूल गया और राज के हाथों से बस इंच भर दूर रह गया। राज ने टेप को उसके स्तनों के सबसे उभरे हुए हिस्से पर कसा। स्पोर्ट्स ब्रा के कपड़े के नीचे उसके निप्पल की कठोरता राज को टेप के जरिए महसूस हो रही थी।
"बत्तीस..." राज बड़बड़ाया। "परफेक्ट। एकदम ठोस।"
उसने टेप को ढीला नहीं किया। वह विद्या के स्तनों के कसाव को महसूस कर रहा था।
"टाइट चाहिए ना?" राज ने पूछा।
"इतना टाइट..." विद्या ने अपनी कमर को थोड़ा आगे धकेला, जिससे उसका नंगा पेट राज के कपड़ों से टच हो गया। राज को उस स्पर्श से करंट लग गया। "...इतना टाइट कि मुझे पता चले कि किसी मर्द ने इसे बनाया है। मुझे ढीले कपड़े पसंद नहीं। मुझे जकड़न पसंद है।"
यह इशारा काफी था। राज ने अपना संयम खो दिया।
उसने टेप छोड़ दिया। टेप विद्या के कंधों पर लटक गया।
राज ने अपने दोनों हाथ विद्या की नंगी, पतली कमर पर रख दिए। उसने अपने अंगूठे उसकी जींस के बेल्ट लूप में फंसा दिए और अपनी उंगलियां उसकी पीठ की त्वचा में गड़ा दीं।
"तुम्हारी कमर..." राज ने भारी आवाज़ में कहा, "बहुत पतली है। इसे तो मैं अपनी एक बांह में लपेट सकता हूँ। और तोड़ भी सकता हूँ।"
विद्या ने हंसी के साथ अपनी गर्दन पीछे झुका दी, जैसे वह उस स्पर्श का आनंद ले रही हो। "तो लपेट कर दिखाओ ना। सिर्फ बातें करोगे शर्मा जी? या कुछ करोगे भी?"
राज ने उसे अपनी तरफ खींचा। विद्या का टाइट, गठीला शरीर राज से टकराया।
राज का एक हाथ उसकी नंगी पीठ पर ऊपर की तरफ रेंगा। उसकी उंगलियां स्पोर्ट्स ब्रा के स्ट्रैप के नीचे घुस गईं। उसने स्ट्रैप को खींचा और छोड़ दिया।
चटाक!
इलास्टिक ने विद्या की गोरी त्वचा पर हल्की चोट की।
"आह!" विद्या ने मजे से सिसकी ली। "बदमाश... दर्जी हो या जल्लाद?"
"तुम्हें बदमाशी ही पसंद है," राज ने कहा। उसने अपना चेहरा विद्या की गर्दन और कंधे के बीच के हिस्से में गड़ा दिया। वह वहां चूमने लगा, सूंघने लगा।
विद्या ने राज के बालों को पकड़ लिया और मुट्ठी में भींच लिया। "हाँ... मुझे जंगलीपन पसंद है। भाभी की तरह मुझे धीमा, उबाऊ प्यार नहीं चाहिए। मुझे करंट चाहिए। मुझे वो चाहिए जो मुझे हिला दे।"
राज ने उसे अचानक घुमा दिया। अब विद्या का चेहरा आईने की तरफ था और राज उसके पीछे।
विद्या ने आईने में देखा। वह लगभग अर्धनग्न थी, और राज उसके पीछे खड़ा उसे काबू कर रहा था।
राज ने विद्या की जींस का बटन देखा। जींस बहुत टाइट थी, जो उसकी जांघों और कूल्हों पर दूसरी चमड़ी की तरह कसी हुई थी।
"यह जींस..." राज ने उसके कान को अपने दांतों से काटते हुए कहा, "नाप में अड़चन डाल रही है। लहंगे के लिए कमर का नाप नीचे से लेना होगा। बहुत नीचे से।"
"तो खोल दो," विद्या ने आईने में राज की आंखों में चुनौती दी। "मेरे हाथ ऊपर हैं। मैं नहीं खोलूँगी। तुम्हें ही खोलना होगा। इंतज़ार किसका है?"
राज ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और विद्या की जींस के बटन पर रखा।
खट... बटन खुला।
फिर उसने जिप के हैंडल को पकड़ा और धीरे-धीरे नीचे सरकाया।
ज़िप्प...
धातु की आवाज़ सन्नाटे में गूंज गई। जिप खुलने से जींस का वी-शेप खुल गया और विद्या का सफेद, चिकना पेट और नीचे का हिस्सा दिखने लगा।