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साड़ी डॉली के पैरों में गिर गई। पेटीकोट का नाड़ा राज ने अपने दांतों से खींच लिया।
डॉली अब सिर्फ उस लाल, तंग ब्लाउज में थी। नीचे वह पूरी तरह नंगी थी।
उसका शरीर... वह किसी प्राचीन देवी की मूर्ति जैसा था। भरी हुई जांघें, चौड़ी कमर, और वो विशाल, गोलाकार नितंब जो 32 साल की जवानी का भार संभाले हुए थे।
राज ने उसे देखा। उसकी आंखें फटी रह गईं।
"माई गॉड..." राज घुटनों के बल बैठ गया। उसका चेहरा डॉली के उस घने, काले त्रिकोण के सामने था।
उसने अपने दोनों हाथों से डॉली के नितंबों को पकड़ा। वे मक्खन जैसे मुलायम थे। उसने अपना चेहरा डॉली के पेट और जांघों के बीच गड़ा दिया।
"आह्ह्ह्ह! राज!" डॉली ने राज के बालों को नोच लिया। "चाटो मुझे! पी जाओ मुझे!"
राज ने उसे चूमना शुरू किया। उसकी जीभ डॉली के अंदरूनी हिस्से को खोज रही थी। डॉली का शरीर आईने से टकरा रहा था।
"यह ब्लाउज..." डॉली हांफ रही थी, "यह मेरा दम घोट रहा है... लेकिन इसे उतारना मत... मुझे यह कसाव चाहिए..."
राज खड़ा हो गया। उसकी आंखों में खून उतर आया था। उसने डॉली को घुमा दिया।
"उधर देख," राज ने डॉली का चेहरा आईने की तरफ किया। "देख खुद को। देख अपनी इस भरी जवानी को।"
डॉली ने आईने में देखा। वह अर्धनग्न अवस्था में, लाल ब्लाउज पहने, एक सांवले मर्द की गिरफ्त में थी।
राज ने एक ज़ोरदार थप्पड़ उसके दाहिने नितंब पर मारा।
चटाक!
आवाज़ उस छोटे से कमरे में बम की तरह फटी। डॉली का पूरा पिछवाड़ा हिल गया। लहरें उठीं।
"आह! माँ!" डॉली चिल्लाई, लेकिन दर्द से नहीं, मजे से। "और मारो! लाल कर दो इसे! यह तुम्हारी जागीर है!"
राज ने दूसरा थप्पड़ मारा। फिर तीसरा। डॉली का गोरा मांस लाल पड़ गया।
"आज मैं इस मटके को भर दूंगा," राज ने कहा।
उसने अपनी पैंट की जिप खोली। उसने अपना अंडरवियर नीचे किया।
उसका लिंग... वह किसी हथियार की तरह बाहर आया। 8 इंच लंबा, काला, मोटा और नसों से भरा हुआ। वह हवा में झूल नहीं रहा था, वह तनकर डॉली की कमर की तरफ इशारा कर रहा था।
डॉली ने आईने में उस दानव को देखा।
"हे भगवान..." उसकी सांस अटक गई। "इतना मोटा? राज... यह तो... यह तो मुझे फाड़ देगा। यह गाँव के मर्दों जैसा नहीं है।"
"शहर का माल है डॉली," राज ने उसे कमर से पकड़ा। "फिटिंग एकदम टाइट आएगी।"
उसने डॉली को थोड़ा आगे झुकने को कहा। डॉली ने अपने हाथ आईने पर टिका दिए और अपनी कमर को पीछे की तरफ बाहर निकाल दिया। उसका विशाल पिछवाड़ा राज के लिए तैयार था।
राज ने अपने लिंग के टोपे को डॉली की योनि के मुहाने पर रखा। वहां पहले से ही बाढ़ आई हुई थी। रस उसकी जांघों पर बह रहा था।
"तैयार हो?" राज ने पूछा, अपना पसीना डॉली की पीठ पर टपकाते हुए।
"सोचो मत... बस डाल दो... एक बार में... मेरी जान ले लो..."’
राज ने डॉली की कमर को अपनी लोहे जैसी पकड़ में लिया और एक ही झटके में, पूरी ताकत से अपनी कमर आगे कर दी।
धप्प!
राज का मोटा लिंग डॉली की तंग गुफा को चीरता हुआ, दीवारों को फैलाता हुआ अंदर घुस गया।
"आह्ह्ह्ह्ह्ह!" डॉली की चीख निकल गई। उसकी गर्दन पीछे लटक गई। "मर गई! उफ्फ! कितना भरा हुआ है!"
राज रुका नहीं। उसने उसे एडजस्ट होने का मौका नहीं दिया। वह उसे पेलने लगा।
खड़े-खड़े।
यह कोई कोमल प्रेम नहीं था। यह हवस का तांडव था।
थप-थप-थप-थप!
राज की जांघें डॉली के भारी नितंबों से टकरा रही थीं। हर टक्कर पर एक गीली और भारी आवाज़ आ रही थी। आईने हिल रहे थे।
"जोर से!" डॉली चिल्ला रही थी, आईने पर अपनी हथेलियां पटकते हुए। "और जोर से! मुझे महसूस कराओ कि मैं एक मर्द के नीचे हूँ! मेरे पति ने कभी ऐसे नहीं किया!"
राज एक मशीन बन गया था। वह डॉली के बालों को खींच रहा था, उसकी पीठ को चूम रहा था, काट रहा था। उसका एक हाथ आगे गया और उसने डॉली के ब्लाउज को पकड़ लिया। ब्लाउज के कप उसके स्तनों को थामे हुए थे। राज ने अपना हाथ ब्लाउज के अंदर डाला और उसके निप्पल को पकड़कर मरोड़ दिया।
"आह! राज! निप्पल... निप्पल को काट ले!"
राज ने उसके कान में फुसफुसाया, "तेरी ये भारी गांड़... इसे तो मैं आज लाल करके छोड़ूँगा।"
डॉली का शरीर अकड़ने लगा। "हाँ! ऐसे ही! मुझे चोदो राज! मुझे अपनी रंडी बना लो! इस ट्रायल रूम की रंडी!"
ट्रायल रूम पसीने और कामुक गंध से भर गया था। राज के धक्के अब और गहरे और तेज़ हो गए थे। वह डॉली को दीवार से सटा रहा था। डॉली का चेहरा आईने से दब गया था। उसकी सांसों से आईना धुंधला हो रहा था।
राज ने देखा कि डॉली के पैर कांप रहे हैं। वह खड़ी नहीं रह पा रही थी।
"मैं आ रही हूँ राज! मैं नहीं रुक सकती!" डॉली चिल्लाई। उसकी योनि राज के लिंग को चूसने लगी। "भर दे मुझे! अपनी निशानी छोड़ दे!"
राज भी अब बर्दाश्त की सीमा पार कर चुका था। उस जकड़न ने उसे तोड़ दिया।
"डॉली... मेरी जान... आह्ह्ह!"
राज ने एक जानवर जैसी दहाड़ मारी। उसने डॉली को दीवार से पूरी ताकत से दबाया, खुद को जड़ तक अंदर धंसाया और अपना सारा, ढेर सारा गर्म, गाढ़ा वीर्य डॉली के अंदर, बहुत गहराई में छोड़ दिया।
एक धार... दो धार... तीन धार...
वह खाली होता गया। डॉली ने उस गर्म लावा को अपने अंदर महसूस किया। वह गर्मी उसके पेट में फैल गई, उसकी रूह तक पहुँच गई।
"ओह्ह्ह्ह..." डॉली निढाल होकर राज के ऊपर गिर पड़ी।
राज ने उसे संभाल लिया। वे दोनों वहीं, एक-दूसरे के पसीने में लथपथ, ट्रायल रूम के फर्श पर बैठ गए। डॉली की टांगें अभी भी फैली हुई थीं, और राज अभी भी उसके अंदर था, भले ही अब वह शांत हो रहा था।
काफी देर तक सन्नाटा रहा। सिर्फ एसी की हमिंग और उनकी भारी सांसें थीं।
राज ने डॉली के माथे को चूमा। डॉली ने अपनी आंखें खोलीं। उनमें एक नशा था, एक तृप्ति थी।
"फिटिंग कैसी थी?" राज ने मुस्कुराते हुए पूछा।
डॉली ने उसके गाल पर एक हल्का थप्पड़ मारा और फिर उसे चूम लिया।
"एकदम परफेक्ट," उसने कहा। "इंच-इंच भर दिया तुमने। अब मैं यह ब्लाउज जब भी पहनूँगी... मुझे यह दर्द और यह मज़ा याद आएगा।"
उसने राज के सीने पर अपना सिर रख दिया।
"कल..." डॉली ने कहा, "कल मैं फिर आऊँगी। एक नया कपड़ा लेकर। पारदर्शी। उसके लिए नाप... और भी गहराई से लेना होगा।"
राज हंसा। "दुकान खुली है। दर्जी तैयार है।"
◆◆◆
डॉली अब सिर्फ उस लाल, तंग ब्लाउज में थी। नीचे वह पूरी तरह नंगी थी।
उसका शरीर... वह किसी प्राचीन देवी की मूर्ति जैसा था। भरी हुई जांघें, चौड़ी कमर, और वो विशाल, गोलाकार नितंब जो 32 साल की जवानी का भार संभाले हुए थे।
राज ने उसे देखा। उसकी आंखें फटी रह गईं।
"माई गॉड..." राज घुटनों के बल बैठ गया। उसका चेहरा डॉली के उस घने, काले त्रिकोण के सामने था।
उसने अपने दोनों हाथों से डॉली के नितंबों को पकड़ा। वे मक्खन जैसे मुलायम थे। उसने अपना चेहरा डॉली के पेट और जांघों के बीच गड़ा दिया।
"आह्ह्ह्ह! राज!" डॉली ने राज के बालों को नोच लिया। "चाटो मुझे! पी जाओ मुझे!"
राज ने उसे चूमना शुरू किया। उसकी जीभ डॉली के अंदरूनी हिस्से को खोज रही थी। डॉली का शरीर आईने से टकरा रहा था।
"यह ब्लाउज..." डॉली हांफ रही थी, "यह मेरा दम घोट रहा है... लेकिन इसे उतारना मत... मुझे यह कसाव चाहिए..."
राज खड़ा हो गया। उसकी आंखों में खून उतर आया था। उसने डॉली को घुमा दिया।
"उधर देख," राज ने डॉली का चेहरा आईने की तरफ किया। "देख खुद को। देख अपनी इस भरी जवानी को।"
डॉली ने आईने में देखा। वह अर्धनग्न अवस्था में, लाल ब्लाउज पहने, एक सांवले मर्द की गिरफ्त में थी।
राज ने एक ज़ोरदार थप्पड़ उसके दाहिने नितंब पर मारा।
चटाक!
आवाज़ उस छोटे से कमरे में बम की तरह फटी। डॉली का पूरा पिछवाड़ा हिल गया। लहरें उठीं।
"आह! माँ!" डॉली चिल्लाई, लेकिन दर्द से नहीं, मजे से। "और मारो! लाल कर दो इसे! यह तुम्हारी जागीर है!"
राज ने दूसरा थप्पड़ मारा। फिर तीसरा। डॉली का गोरा मांस लाल पड़ गया।
"आज मैं इस मटके को भर दूंगा," राज ने कहा।
उसने अपनी पैंट की जिप खोली। उसने अपना अंडरवियर नीचे किया।
उसका लिंग... वह किसी हथियार की तरह बाहर आया। 8 इंच लंबा, काला, मोटा और नसों से भरा हुआ। वह हवा में झूल नहीं रहा था, वह तनकर डॉली की कमर की तरफ इशारा कर रहा था।
डॉली ने आईने में उस दानव को देखा।
"हे भगवान..." उसकी सांस अटक गई। "इतना मोटा? राज... यह तो... यह तो मुझे फाड़ देगा। यह गाँव के मर्दों जैसा नहीं है।"
"शहर का माल है डॉली," राज ने उसे कमर से पकड़ा। "फिटिंग एकदम टाइट आएगी।"
उसने डॉली को थोड़ा आगे झुकने को कहा। डॉली ने अपने हाथ आईने पर टिका दिए और अपनी कमर को पीछे की तरफ बाहर निकाल दिया। उसका विशाल पिछवाड़ा राज के लिए तैयार था।
राज ने अपने लिंग के टोपे को डॉली की योनि के मुहाने पर रखा। वहां पहले से ही बाढ़ आई हुई थी। रस उसकी जांघों पर बह रहा था।
"तैयार हो?" राज ने पूछा, अपना पसीना डॉली की पीठ पर टपकाते हुए।
"सोचो मत... बस डाल दो... एक बार में... मेरी जान ले लो..."’
राज ने डॉली की कमर को अपनी लोहे जैसी पकड़ में लिया और एक ही झटके में, पूरी ताकत से अपनी कमर आगे कर दी।
धप्प!
राज का मोटा लिंग डॉली की तंग गुफा को चीरता हुआ, दीवारों को फैलाता हुआ अंदर घुस गया।
"आह्ह्ह्ह्ह्ह!" डॉली की चीख निकल गई। उसकी गर्दन पीछे लटक गई। "मर गई! उफ्फ! कितना भरा हुआ है!"
राज रुका नहीं। उसने उसे एडजस्ट होने का मौका नहीं दिया। वह उसे पेलने लगा।
खड़े-खड़े।
यह कोई कोमल प्रेम नहीं था। यह हवस का तांडव था।
थप-थप-थप-थप!
राज की जांघें डॉली के भारी नितंबों से टकरा रही थीं। हर टक्कर पर एक गीली और भारी आवाज़ आ रही थी। आईने हिल रहे थे।
"जोर से!" डॉली चिल्ला रही थी, आईने पर अपनी हथेलियां पटकते हुए। "और जोर से! मुझे महसूस कराओ कि मैं एक मर्द के नीचे हूँ! मेरे पति ने कभी ऐसे नहीं किया!"
राज एक मशीन बन गया था। वह डॉली के बालों को खींच रहा था, उसकी पीठ को चूम रहा था, काट रहा था। उसका एक हाथ आगे गया और उसने डॉली के ब्लाउज को पकड़ लिया। ब्लाउज के कप उसके स्तनों को थामे हुए थे। राज ने अपना हाथ ब्लाउज के अंदर डाला और उसके निप्पल को पकड़कर मरोड़ दिया।
"आह! राज! निप्पल... निप्पल को काट ले!"
राज ने उसके कान में फुसफुसाया, "तेरी ये भारी गांड़... इसे तो मैं आज लाल करके छोड़ूँगा।"
डॉली का शरीर अकड़ने लगा। "हाँ! ऐसे ही! मुझे चोदो राज! मुझे अपनी रंडी बना लो! इस ट्रायल रूम की रंडी!"
ट्रायल रूम पसीने और कामुक गंध से भर गया था। राज के धक्के अब और गहरे और तेज़ हो गए थे। वह डॉली को दीवार से सटा रहा था। डॉली का चेहरा आईने से दब गया था। उसकी सांसों से आईना धुंधला हो रहा था।
राज ने देखा कि डॉली के पैर कांप रहे हैं। वह खड़ी नहीं रह पा रही थी।
"मैं आ रही हूँ राज! मैं नहीं रुक सकती!" डॉली चिल्लाई। उसकी योनि राज के लिंग को चूसने लगी। "भर दे मुझे! अपनी निशानी छोड़ दे!"
राज भी अब बर्दाश्त की सीमा पार कर चुका था। उस जकड़न ने उसे तोड़ दिया।
"डॉली... मेरी जान... आह्ह्ह!"
राज ने एक जानवर जैसी दहाड़ मारी। उसने डॉली को दीवार से पूरी ताकत से दबाया, खुद को जड़ तक अंदर धंसाया और अपना सारा, ढेर सारा गर्म, गाढ़ा वीर्य डॉली के अंदर, बहुत गहराई में छोड़ दिया।
एक धार... दो धार... तीन धार...
वह खाली होता गया। डॉली ने उस गर्म लावा को अपने अंदर महसूस किया। वह गर्मी उसके पेट में फैल गई, उसकी रूह तक पहुँच गई।
"ओह्ह्ह्ह..." डॉली निढाल होकर राज के ऊपर गिर पड़ी।
राज ने उसे संभाल लिया। वे दोनों वहीं, एक-दूसरे के पसीने में लथपथ, ट्रायल रूम के फर्श पर बैठ गए। डॉली की टांगें अभी भी फैली हुई थीं, और राज अभी भी उसके अंदर था, भले ही अब वह शांत हो रहा था।
काफी देर तक सन्नाटा रहा। सिर्फ एसी की हमिंग और उनकी भारी सांसें थीं।
राज ने डॉली के माथे को चूमा। डॉली ने अपनी आंखें खोलीं। उनमें एक नशा था, एक तृप्ति थी।
"फिटिंग कैसी थी?" राज ने मुस्कुराते हुए पूछा।
डॉली ने उसके गाल पर एक हल्का थप्पड़ मारा और फिर उसे चूम लिया।
"एकदम परफेक्ट," उसने कहा। "इंच-इंच भर दिया तुमने। अब मैं यह ब्लाउज जब भी पहनूँगी... मुझे यह दर्द और यह मज़ा याद आएगा।"
उसने राज के सीने पर अपना सिर रख दिया।
"कल..." डॉली ने कहा, "कल मैं फिर आऊँगी। एक नया कपड़ा लेकर। पारदर्शी। उसके लिए नाप... और भी गहराई से लेना होगा।"
राज हंसा। "दुकान खुली है। दर्जी तैयार है।"
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